राजनीति
सीएम मोहन यादव का बड़ा ऐलान, प्रभावित किसानों को मिलेगी आर्थिक मदद
6 Sep, 2025 11:31 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल । मध्यप्रदेश के किसानों के लिए बड़ी खबर है। प्राकृतिक आपदा से फसल बर्बाद होने की मार झेल रहे किसानों के खातों में आज सीधा पैसा पहुंचने वाला है। CM डॉ. मोहन यादव सुबह 11 बजे सीएम हाउस से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सिंगल क्लिक से प्रभावित किसानों को राहत राशि बांटेंगे।
कर्नाटक में ईवीएम नहीं बैलेट पेपर से होगा चुनाव, कांग्रेस की चाल से सकते में आयोग!
5 Sep, 2025 08:27 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पूरे देश में ईवीएम मशीन से चुनाव और ‘वोट चोरी‘ को लेकर विपक्ष का विरोध जारी है। सरकार से वैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग की जा रही है। विपक्ष का कहना है कि ईवीएम से चुनाव में गड़बड़ी हो रही है। हालांकि, चुनाव आयोग ने विपक्ष के दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। आयोग कहा कहना है कि ईवीएम को हैक करना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है, लेकिन इन सबके बीच कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने वैलेट पेपर से चुनाव कराने का फैसला लिया है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कर्नाटक कैबिनेट ने गुरुवार को राज्य चुनाव आयोग को राज्य में आगामी पंचायत और शहरी स्थानीय निकाय चुनाव ईवीएम के बजाय वैलेट पेपर से कराने की सिफारिश करने के अपने फैसले की घोषणा की। कर्नाटक के कानून और संसदीय कार्य मंत्री एचके पाटिल ने कैबिनेट बैठक के बाद इसकी घोषणा की। उन्होंने कहा कि ऐसा इसलिए है क्योंकि लोगों में ईवीएम को लेकर विश्वास और विश्वसनीयता कम हो रही है।
पाटिल ने वोटर लिस्ट में सुधार को लेकर भी सरकार के फैसले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कैबिनेट ने राज्य चुनाव आयोग द्वारा वोटर लिस्ट में संशोधन को आसान बनाने के लिए जरुरी कानूनी उपाय करने और मौजूदा नियमों में संशोधन करने का फैसला किया है। कानून और संसदीय कार्यमंत्री पाटिल ने बताया कि वैलेट पेपर से चुनाव का फैसला सरकार ने सोच समझ कर लिया है। उन्होंने बताया कि वैलेट पेपर को समर्थन देने का कैबिनेट का यह फैसला बेंगलुरु में पंचायतों और पांच नवगठित नगर निगमों के चुनावों से पहले मतदाता सूची के एसआईआर की सिफारिश के साथ आया है।
पाटिल ने बताया कि स्थानीय निकाय चुनाव अब तक विधानसभा चुनावों के लिए तैयार मतदाता सूचियों पर निर्भर रहे थे। अब एक ऐसी पद्धति डेवलप की जाएगी, जिससे लोगों की निर्भरता नहीं रहेगी। इसके लिए राज्य चुनाव आयोग को सिफारिश भेजा जाएगा।
पाटिल ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में कर्नाटक और पूरे देश में मतदाता सूची में बेमेल, नाम जोड़ने और हटाने के कारण वोट चोरी की व्यापक चिंताएं रही हैं। उन्होंने कहा कि अब हमने राज्य निर्वाचन आयोग को मतदाता सूची में संशोधन करने की सिफारिश करने का फैसला लिया है, ताकि यह तय किया जा सके कि कर्नाटक में मतदाताओं को मतदान करने के अवसर से वंचित न किया जाए।
भाजपा में बढ़ता असंतोष, गडकरी और अंबानी कर सकते बड़ा खेल
5 Sep, 2025 06:12 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । भाजपा के भीतर असंतोष की आंच अब खुलकर सामने आने लगी है और पार्टी में सत्ता संघर्ष की सुगबुगाहट तेज हो गई है। सूत्रों का कहना है कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी असंतुष्ट खेमे के संभावित सरदार के रूप में उभर रहे हैं और करीब 100 से 125 सांसद उनके पक्ष में खड़े हो सकते हैं। पार्टी के गलियारों में इस संघर्ष में अंबानी फैक्टर की भूमिका को लेकर भी चर्चा है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा दो ध्रुवों में बंटी हुई दिखाई दे रही है। एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की गुजरात लॉबी है, जबकि दूसरी ओर गडकरी का गुट है, जिन्हें संघ का करीबी माना जाता है और जिनके पीछे महाराष्ट्र और नागपुर की मजबूत पकड़ है। यही वजह है कि गडकरी की लोकप्रियता और संगठन में उनकी पकड़ पार्टी के अंदर नई हलचल पैदा कर रही है। गडकरी को कमजोर करने के लिए लगातार मीडिया में उनके खिलाफ नकारात्मक खबरें लीक कराई जा रही हैं। कभी सड़कों की महंगाई को लेकर सवाल उठते हैं, तो कभी एथेनॉल बिजनेस पर आरोप लगाए जाते हैं।
भाजपा में इस बात की चर्चा भी जोरों पर है। मुकेश अंबानी के पुत्र अन्नत अंबानी के वन्य तारा की जांच शुरू कराने से मुकेश अंबानी नाराज हैं। माना जाता है अंबानी समर्थक सांसदो की संख्या 80 से ऊपर है। उपराष्ट्रपति के चुनाव में अंबानी और गड़करी मिलकर कोई बड़ा खेल कर सकते हैं। मोदी-शाह और गौतम अडानी रिलायंस समूह के ऊपर दबाव बना रहे थे। विश्लेषकों का कहना है कि यह सब उनकी छवि को कमजोर करने की रणनीति का हिस्सा है।
2014 और 2019 की जीत के बाद भाजपा अब नए दबाव का सामना कर रही है। 2024 के चुनावों के बाद से पार्टी की नीतियों पर सवाल उठने लगे हैं, जिनमें नोटबंदी, जीएसटी और विदेश नीति प्रमुख मुद्दे हैं। पार्टी के भीतर यह आवाज बुलंद हो रही है कि अब बदलाव का वक्त आ गया है और मोदी-शाह को पीछे हटकर नए नेतृत्व को सामने लाना चाहिए। इस बीच, संघ की भूमिका भी अहम हो गई है। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने स्पष्ट किया है कि वे इस्तीफा नहीं देंगे बल्कि भीतर रहकर ही रणनीति बनाएंगे। लगातार हो रही गुप्त बैठकों और मुलाकातों से संकेत मिलता है कि पार्टी में बड़ा बदलाव संभव है।
भाजपा सूत्रों का मानना है कि आने वाले राष्ट्रपति-उपराष्ट्रपति चुनाव और बिहार विधानसभा चुनाव पार्टी की आंतरिक राजनीति में निर्णायक साबित होंगे। यदि असंतोष को समय रहते संतुलित नहीं किया गया तो गुजरात बनाम नागपुर की खींचतान खुलकर सामने आ सकती है। एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि अब पार्टी में शक्ति संतुलन की लड़ाई निर्णायक मोड़ पर है। उनके शब्दों में “इस बार एक शहीद होगा, या अंबानी या मोदी। आने वाले महीनों में तस्वीर साफ हो जाएगी।
बिहार बंद पर बोले तेजस्वी- भाजपा का बिहार बंद सुपर फ्लॉप
5 Sep, 2025 11:16 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मां के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के विरोध में भाजपा और एनडीए गठबंधन ने गुरुवार को बिहार बंद का आह्वान किया। सुबह 7 बजे से दोपहर 12 बजे तक पांच घंटे के इस बंद को एनडीए नेताओं ने सफल और शांतिपूर्ण करार दिया। उनका दावा है कि आवश्यक सेवाओं पर कोई असर नहीं पड़ा।
लेकिन राजद नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने इस बंद को पूरी तरह असफल बताया।
बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने कहा कि भाजपा का बिहार बंद सुपर फ्लॉप रहा, आम जनता ने इसमें कोई सहयोग नहीं किया। इसी के साथ ही तेजस्वी यादव ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बंद के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर गुंडागर्दी की, महिलाओं और शिक्षकों के साथ बदतमीजी की और एम्बुलेंस तक का रास्ता रोका गया।
पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने कहा कि इस तरह की हरकतों से भाजपा का असली चेहरा सामने आ गया है। तेजस्वी ने मीडिया से बातचीत में दावा किया कि बिहार की जनता ने इस बंद को पूरी तरह नकार दिया और भाजपा-एनडीए को कहीं से भी समर्थन नहीं मिला। वहीं भाजपा और एनडीए नेताओं ने तेजस्वी के आरोपों को राजनीतिक बयान बताते हुए कहा कि बंद पूरी तरह शांति और अनुशासन के साथ संपन्न हुआ।
“लोकतंत्र और संविधान की रक्षा हेतु- इंडिया गठबंधन ने जस्टिस बी. सुदर्शन रेड्डी को उपराष्ट्रपति पद का साझा उम्मीदवार घोषित किया”
5 Sep, 2025 10:14 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। बिहार की राजधानी पटना के होटल मौर्या में इंडिया गठबंधन की ओर से एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक प्रेस संवाद आयोजित किया गया। इस संवाद का मुख्य उद्देश्य आगामी उपराष्ट्रपति पद के चुनाव को लेकर गठबंधन की रणनीति और साझा उम्मीदवार के लिए समर्थन था। इस अवसर पर गठबंधन के साझा उम्मीदवार, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस बी. सुदर्शन रेड्डी स्वयं उपस्थित रहे। जस्टिस रेड्डी ने अपने विचार रखते हुए कहा कि ‘वे किसी राजनीतिक दल का प्रतिनिधि बनकर नहीं आए हैं। उनका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है। वे केवल और केवल संविधान के उम्मीदवार हैं।अपने जीवन को उन्होंने न्यायपालिका की सेवा में समर्पित किया है और अब वही धर्म निभाने के लिए खड़े हुए हैं।’ उन्होंने कहा कि उपराष्ट्रपति का पद केवल राज्यसभा का सभापति होने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोकतांत्रिक मर्यादा और संवैधानिक संतुलन का प्रतीक है। जब संसद में विपक्ष की आवाज़ को दबाया जा रहा हो, विधेयक बिना चर्चा के पारित हो रहे हों और सांसदों के वक्तव्य रिकॉर्ड से हटाए जा रहे हों, तब यह आवश्यक है कि उपराष्ट्रपति निष्पक्ष रहकर सदन की गरिमा को बनाए रखे।
उन्होंने आगे कहा कि यह चुनाव उनके लिए किसी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा का साधन नहीं है, बल्कि यह संविधान और लोकतंत्र की सेवा का अवसर है। इंडिया गठबंधन ने उन्हें इस जिम्मेदारी के योग्य समझा, इसके लिए वे आभारी हैं, किंतु उनका पहला और आख़िरी कर्तव्य संविधान और लोकतंत्र की रक्षा करना होगा। संसद संख्याबल का खेल नहीं हो सकती, संसद का अर्थ है बहस, विमर्श और हर आवाज़ को सुना जाना। अपने संबोधन के समापन में उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल सत्ता का नाम नहीं है, बल्कि जनता की आवाज़ है और उस आवाज़ को दबाया नहीं जा सकता। यही कारण है कि वे इस चुनाव में केवल संविधान की रक्षा के संकल्प के साथ खड़े हुए हैं।
इसके बाद नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने अपने संबोधन में कहा कि आज भाजपा लोकतंत्र को खत्म करने पर आमादा है। उपराष्ट्रपति का चुनाव अचानक क्यों कराया जा रहा है, यह सवाल हर भारतीय पूछ रहा है। मौजूदा उपराष्ट्रपति दिन में सदन चला रहे थे और रातों-रात उन्हें बीमार घोषित कर दिया गया। अब वे बीमार हुए हैं या बीमार कराए गए हैं- यह देश जानना चाहता है। मेडिकल बुलेटिन तक जारी नहीं किया गया। यह संविधान और पारदर्शिता दोनों पर सीधा हमला है। उन्होंने कहा कि बिहार की जनता लोकतंत्र की जननी रही है। इस धरती से हर बार परिवर्तन का संदेश पूरे देश में गया है। भाजपा और एनडीए लाख कोशिश कर लें, लेकिन वे जनता की आवाज़ को दबा नहीं सकते।
तेजस्वी यादव ने आगे कहा कि इंडिया गठबंधन ने जस्टिस रेड्डी को उम्मीदवार बनाकर यह साबित कर दिया है कि यह लड़ाई सत्ता की नहीं, बल्कि लोकतंत्र की है। जस्टिस रेड्डी किसी पार्टी से नहीं आते, वे संविधान की आत्मा से आते हैं। उनकी ईमानदारी, निष्पक्षता और न्यायप्रियता किसी परिचय की मोहताज नहीं है। यही वजह है कि यह चुनाव लोकतंत्र बनाम तानाशाही की लड़ाई है। उन्होंने भाजपा सरकार पर संवैधानिक संस्थाओं को बर्बाद करने का आरोप लगाते हुए कहा कि आज ईडी, सीबीआई, इनकम टैक्स और चुनाव आयोग सभी को सरकार ने अपने कब्ज़े में ले लिया है। लेकिन जनता यह सब देख रही है और जब-जब लोकतंत्र पर हमला हुआ है, जनता ने तानाशाही को हराया है। इस बार भी जनता संविधान की मर्यादा को बचाएगी।
प्रेस संवाद का संचालन कर रहे बिहार प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष राजेश राम ने पत्रकारों का स्वागत करते हुए कहा कि हम सब बिहार की ऐतिहासिक धरती पर खड़े हैं। यही धरती है जिसने लोकतंत्र को जन्म दिया और हर दौर में तानाशाही को चुनौती दी। भाजपा और एनडीए की सरकार जिस तरह संवैधानिक संस्थाओं पर कब्ज़ा कर रही है, वह किसी से छुपा नहीं है। संसद में विपक्ष को बोलने से रोका जा रहा है, मीडिया पर नियंत्रण कर लिया गया है और न्यायपालिका तक पर दबाव बनाया जा रहा है। ऐसे समय में जस्टिस रेड्डी का नाम सामने आना जनता के विश्वास और उम्मीद का प्रतीक है। राजेश राम ने आगे कहा कि हमें गर्व है कि बिहार कांग्रेस इस ऐतिहासिक क्षण की गवाह है। जस्टिस रेड्डी किसी पार्टी या विचारधारा से नहीं, बल्कि संविधान की आत्मा से जुड़े हैं। यही वजह है कि इंडिया गठबंधन ने सर्वसम्मति से उनका नाम आगे बढ़ाया। यह लड़ाई केवल किसी व्यक्ति की नहीं, बल्कि लोकतंत्र बनाम तानाशाही की लड़ाई है। आने वाली पीढ़ियों को यह देखना होगा कि जब लोकतंत्र पर हमला हुआ तो हमने किस तरह उसका मुकाबला किया।
इसके बाद वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी ने भी अपने विचार रखते हुए कहा कि बिहार की जनता ने हमेशा लोकतंत्र को बचाने और तानाशाही को हराने में अग्रणी भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि जस्टिस रेड्डी का चयन यह दिखाता है कि इंडिया गठबंधन व्यक्तिगत सत्ता की लड़ाई नहीं लड़ रहा, बल्कि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा का संकल्प लेकर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि देश की जनता इस लड़ाई में गठबंधन का साथ देगी और लोकतंत्र को और मजबूत बनाएगी।
प्रेस वार्ता के समापन पर इंडिया गठबंधन के नेताओं ने संयुक्त रूप से कहा कि यह चुनाव केवल एक संवैधानिक पद के लिए नहीं है, बल्कि यह लोकतंत्र और संविधान की रक्षा का चुनाव है। जस्टिस रेड्डी का समर्थन करना केवल एक व्यक्ति का समर्थन नहीं है, बल्कि न्याय, जनता की आवाज़ और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करना है। उन्होंने यह भी कहा कि यह चुनाव सत्ता और विपक्ष की लड़ाई नहीं, बल्कि लोकतंत्र और तानाशाही की जंग है।
इस अवसर पर मंच पर राजद के प्रदेश अध्यक्ष मंगलीलाल मंडल, कांग्रेस नेता अखिलेश प्रसाद सिंह, सांसद अब्दुल बारी सिद्दीकी, सीपीआईएमएल सांसद राजाराम, सीपीआई नेता रामललन सिंह, सीपीआईएम नेता ललन चौधरी और एआईसीसी प्रभारी कृष्णा अल्लावरु, सांसद सैयद नासिर हुसैन, शकील अहमद खान सहित इंडिया गठबंधन के कई वरिष्ठ नेता उपस्थित थे।
जीएसटी की दरों में कटौती का लाभ कंपनियों को नहीं, बल्कि जनता को मिलना चाहिए: कांग्रेस
5 Sep, 2025 09:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अहमदाबाद| गुजरात प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. जय नारायण व्यास ने राजीव गांधी भवन में पत्रकार मित्रों के जीएसटी से संबंधित प्रश्नों का उत्तर देते हुए कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी बार-बार जीएसटी सुधार की बात करते थे और जीएसटी को गब्बर सिंह टैक्स कहकर लोगों की भावनाओं को भड़काते थे। यह स्वागत योग्य है कि सरकार ने मजबूरी के बावजूद विपक्ष की मांग और जनता की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए जीएसटी कम करने की पहल की है। उपरोक्त जीएसटी कटौती का श्रेय किसी एक व्यक्ति को नहीं दिया जाना चाहिए, क्योंकि जीएसटी परिषद में बहुमत विपक्षी राज्यों का है और उनकी सहमति के कारण ही लोगों को उपरोक्त लाभ मिला है। सूत्रों के मुताबिक, जीएसटी काउंसिल की बैठक में विपक्षी राज्यों ने केंद्र से राजस्व संरक्षण और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा की मांग की है। विपक्षी राज्यों का कहना है कि कंपनियों को कम टैक्स का फायदा उठाकर मुनाफाखोरी की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए। कर कटौती का पूरा लाभ सीधे उपभोक्ताओं की जेब तक पहुँचना चाहिए। वे यह भी चाहते हैं कि नए कर स्लैब से राज्यों को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए एक स्पष्ट क्षतिपूर्ति योजना बनाई जाए। कई भाजपा शासित राज्यों ने भी इस बदलाव से राजस्व हानि को लेकर चिंता व्यक्त की है। 2017 में जब जीएसटी लागू किया गया था, तब केंद्र ने राज्यों को पाँच साल तक राजस्व हानि की भरपाई करने का वादा किया था। इसके लिए लग्जरी वस्तुओं पर सेस लगाया गया था, लेकिन यह व्यवस्था जून 2022 में समाप्त हो गई। अब विपक्षी राज्य चाहते हैं कि लग्जरी टैक्स से प्राप्त धन का 40% राज्य के खजाने में जाए, ताकि उनकी वित्तीय स्थिति खराब न हो। जीएसटी कटौती का फायदा कंपनियों को नहीं, बल्कि जनता को मिलना चाहिए। उदाहरण के लिए, 5 रुपये वाले पाँच बिस्कुट पर 18 प्रतिशत जीएसटी के हिसाब से 90 पैसे जीएसटी लग रहा था। जीएसटी कटौती के बाद, उन पर 5 प्रतिशत यानी 25 पैसे जीएसटी लगेगा। इस प्रकार, 65 पैसे का सीधा लाभ उपभोक्ता या उद्योगपतियों को नहीं मिलना चाहिए। उपरोक्त बात हर आवश्यक वस्तु पर लागू होती है और उसकी कीमत तभी कम होगी जब जीएसटी में कटौती को सार्थक माना जाएगा। सरकार को एक तंत्र स्थापित करके इसे लागू करना चाहिए।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया एक राष्ट्र एक चुनाव का समर्थन, बोले- अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती
5 Sep, 2025 08:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इंदौर । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में एक राष्ट्र एक चुनाव पर आयोजित एक राष्ट्रव्यापी सम्मेलन में इस पहल को देश की प्रगति और अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश जिस तीव्र गति से विकास कर रहा है, उसमें यह कदम अनावश्यक खर्चों और समय की बर्बादी को रोककर देश को नई ऊँचाइयों पर ले जाएगा। मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि 1967 से पहले भारत में लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ ही होते थे और अब उसी पुरानी, कारगर व्यवस्था को पुनर्जीवित करने का समय आ गया है।
अपने संबोधन के दौरान डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री मोदी के मजबूत नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि जब भी देश के सामने कोई बड़ी चुनौती आई है, उन्होंने निडरता से उसका सामना किया है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने के बाद वहाँ आए सुशासन का विशेष रूप से उल्लेख किया और कहा कि प्रधानमंत्री ने अपने कुशल नेतृत्व से देश की दिशा को बदल दिया है। उन्होंने यह भी बताया कि देश की एकता और अखंडता को मजबूत करने में प्रधानमंत्री का बड़ा योगदान रहा है।
मुख्यमंत्री ने भाषा के महत्व पर भी बात की। उन्होंने हिंदी को राष्ट्रभाषा बताते हुए सभी से इसका सम्मान करने का आग्रह किया, साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि भारत की अन्य सभी भाषाएँ भी समान रूप से सम्मानीय हैं और उनका आदर करना हम सब का कर्तव्य है।
इस महत्वपूर्ण सम्मेलन की अध्यक्षता हिमाचल प्रदेश के पूर्व राज्यपाल वी.एस. कोकजे ने की। कार्यक्रम में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, सांसद शंकर लालवानी, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, विधायक मधु वर्मा, रमेश मेंदोला और गोलू शुक्ला सहित कई गणमान्य व्यक्ति और नागरिक मौजूद थे। इस सम्मेलन ने एक राष्ट्र एक चुनाव के विचार को लेकर जनमानस में एक नई बहस और जागरूकता पैदा की है, जिसे मुख्यमंत्री ने देश के भविष्य के लिए एक सकारात्मक कदम बताया।
बिहार चुनाव बनाम ट्रंप टैरिफ, पूर्व वित्त मंत्री ने जीएसटी बदलाव पर साधा निशाना
4 Sep, 2025 10:26 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। राज्यसभा सांसद एवं पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने अपने पोस्ट में लिखा है, जीएसटी को तर्कसंगत बनाना और कई वस्तुओं व सेवाओं पर दरों में कमी स्वागत योग्य कदम है, लेकिन इसमें 8 साल की देरी हो चुकी है। जीएसटी का वर्तमान स्वरूप और दरें क्या शुरू में ही लागू नहीं हो होनी चाहिए थीं। हम पिछले 8 सालों से जीएसटी के स्वरूप और दरों के खिलाफ लगातार आवाज़ उठा रहे हैं, लेकिन हमारी अपील अनसुनी हो गई। कांग्रेस के वरिष्ठ चिदंबरम ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) दरों में कटौती का स्वागत किया है लेकिन इसके साथ ही उसकी टाइमिंग पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आश्चर्य जताते हुए सवाल उठाया कि जीएसटी दरों को युक्तिसंगत बनाने में सरकार को 8 साल क्यों लग गए? सोशल मीडिया एक्स पर लिखे एक पोस्ट में उन्होंने पूछा है कि क्या जीएसटी की जो नई दें अब लागू की गई हैं। वे शुरू से ही नहीं लागू किया जाना चाहिए था?
सरकार के अचानक इस कदम के पीछे क्या कारण रहे होंगे। इस का अनुमान लगाते हुए चिदंबरम ने आगे लिखा है, ऐसे में यह जानना दिलचस्प होगा कि सरकार ने ये बदलाव अब क्यों किए...धीमी विकास दर? बढ़ता घरेलू कर्ज? घटती घरेलू बचत? बिहार में चुनाव? या ट्रम्प और उनके टैरिफ? या ये सब? उन्होंने कहा कि विपक्ष 2017 में जीएसटी की शुरुआत से ही इनके खिलाफ चेतावनी दे रहा था। बता दें कि एक दिन पहले ही केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में 56वीं जीएसटी परिषद ने चार स्लैब वाली टैक्स प्रणाली को बदलते हुए अब 5 और 18 फीसदी जीएसटी की दो दरें तय की हैं। नई दरें 22 सितंबर, यानी नवरात्रि के पहले दिन से लागू होंगी। इन बदलावों से छोटी कारें, बाइक और कई अन्य उपभोक्ता वस्तुएँ सस्ती हो जाएँगी। साबुन, शैम्पू, टूथपेस्ट, टैल्कम पाउडर और हेयर ऑयल जैसी रोज़मर्रा की वस्तुओं पर भी अब 18 फीसदी की बजाय 5 फीसदी जीएसटी लगेगा। इससे ये सामान भी सस्ते हो जाएंगे। इनके अलावा साइकिल, बर्तन, दूध की बोतलें और बाँस के फ़र्नीचर जैसी वस्तुओं को भी अब 5 फीसदी के टैक्स स्लैब में ला दिया गया है। इसके अलावा कुछ वस्तुओं पर शून्य कर और कुछ पर 40 प्रतिशत कर भी होंगे। नयी व्यवस्था में अल्ट्रा हाई टेंपरेचर दूध, छेना, पनीर, चपाती रोटी पराठा आदि पर कोई कर नहीं लगेगा। सभी देशी रोटियों (चपाती, पराठा, रोटी आदि) पर जीएसटी दर शून्य होगी। तैंतीस जीवनरक्षक दवाओं और औषधियों पर भी जीएसटी 12 प्रतिशत से घटाकर शून्य कर दिया गया है। कैंसर, दुर्लभ बीमारियों और अन्य गंभीर दीर्घकालिक रोगों के उपचार में प्रयुक्त तीन जीवनरक्षक दवाओं और औषधियों पर जीएसटी पांच प्रतिशत से घटाकर शून्य कर दिया गया है। अन्य दवाओं पर पांच प्रतिशत कर लगेगा। व्यक्तिगत जीवन बीमा और व्यक्तिगत स्वास्थ्य बीमा पर भी कोई कर नहीं होगा।
बीजेपी अध्यक्ष पद की होड़ में अब सीएम बनाम केंद्रीय मंत्री
4 Sep, 2025 09:21 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस को सीएम पद से हटा सकती है पार्टी
नई दिल्ली। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के बाद बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष की कमान कौन संभालेगा, इसे लेकर फैसला अभी तक नहीं हुआ है। पार्टी में अभी भी उम्मीदवारों के नाम पर मंथन जारी है। अब कहा जा रहा है कि संभावित उम्मीदवारों की दौड़ में एक सीएम और एक और केंद्रीय मंत्री की भी एंट्री हो गई है। हालांकि, बीजेपी ने इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा। लंबे समय से कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान समेत कई नेताओं के नामों की चर्चा में चल रही है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक बीजेपी महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस और मोदी सरकार में मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री पुरुषोत्तम रूपाला के नाम पर विचार कर सकती है। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि फडणवीस को संकेत दे दिए गए हैं कि उन्हें बिहार विधानसभा चुनाव के बाद सीएम पद छोड़ने के लिए कहा जा सकता है।
रिपोर्ट में सूत्रों ने बताया कि संदेश दे दिया गया है, लेकिन अब तक उनकी भविष्य की भूमिका पर चर्चा नहीं हुई है। संभावनाएं हैं कि बीजेपी अध्यक्ष पद के लिए उनके नाम पर विचार किया जा सकता है। वह युवा हैं और उनको संघ का समर्थन मिला हुआ है। साथ ही उन्हें पार्टी नेतृत्व का विश्वास भी हासिल है। इसे लेकर फडणवीस ने कोई टिप्पणी नहीं की है। इधर बताया जा रहा है कि रूपाला को भी संघ का समर्थन हासिल है। साथ ही उन्हें पीएम मोदी का भी करीबी माना जाता है। इनके अलावा राजनीतिक गलियारों में धर्मेंद्र प्रधान के नाम पर भी अटकलें तेज हैं।
बीजेपी अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर पार्टी ने स्थिति स्पष्ट नहीं की है, लेकिन कयास लगाए जा रहे थे कि बिहार विधानसभा चुनाव के बाद बीजेपी इसपर फैसला ले सकती है। इसके अलावा बीजेपी ने संभावित उम्मीदवारों की सूची भी तैयार कर ली है, जिसपर उपराष्ट्रपति पद के लिए होने वाले चुनाव के बाद विचार किया जाएगा। 9 सितंबर को उपराष्ट्रपति चुनाव होना है।
भागवत संग वसुंधरा की बैठक पर अटकलों का बाज़ार गर्म
4 Sep, 2025 08:19 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जोधपुर। राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत से मुलाकात क्या की सियासी गलियारे में अटकलों का बाजार ही गर्म हो गया। वजह सिर्फ इतनी रही कि भेंट के दौरान बातचीत का एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया गया, इससे तरह-तरह की बातें सोशल मीडिया से मेन मीडिया तक की सुर्खियां बन गई हैं।
दरअसल जोधपुर प्रवास पर आए आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से राजस्थान की पूर्व सीएम वसुंधरा राजे ने मुलाकात की। यह भेंट बुधवार को करीब 20 मिनट तक चली। हालांकि इस दौरान हुई बातचीत का एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया गया। यहां बताते चलें कि मोहन भागवत सोमवार से नौ दिवसीय दौरे पर जोधपुर में हैं। वहीं, राजे मंगलवार को जैसलमेर के मोहनगढ़ भी गई थीं, जहां उन्होंने पूर्व भाजपा सांसद कर्नल सोनाराम को श्रद्धांजलि दी।
वसुंधरा राजे की इस मुलाकात ने राजस्थान की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। हाल ही में उन्होंने दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से भी भेंट की थी। इन लगातार बैठकों को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं कि आने वाले समय में वसुंधरा राजे को पार्टी में बड़ी जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।
जयराम बोले- कांग्रेस की प्राथमिकता है जीएसटी 2.0
4 Sep, 2025 07:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने जीएसटी 2.0 को लेकर केंद्र सरकार की हालिया घोषणाओं पर कहा कि कांग्रेस लंबे समय से जीएसटी 2.0 की वकालत करती रही है।
उन्होंने एक्स पर लिखा- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस लंबे समय से जीएसटी 2.0 की वकालत करती रही है, जो दरों की संख्या घटाए, बड़े पैमाने पर उपभोग होने वाली वस्तुओं पर टैक्स की दरें कम करे, टैक्स चोरी, गलत वर्गीकरण और विवादों को न्यूनतम करे, इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर समाप्त करे, एमएसएमई पर प्रक्रियागत नियमों का बोझ कम करे और जीएसटी के दायरे का विस्तार करे। क्या जीएसटी परिषद अब केवल एक औपचारिकता बनकर रह गई है।
बता दें केंद्रीय वित्त मंत्री सीतारमण ने बुधवार शाम संवैधानिक निकाय जीएसटी परिषद की बैठक के बाद बड़े ऐलान किए थे। जीएसटी परिषद की बैठक से पहले ही पीएम मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से भाषण में इसके निर्णयों की सारगर्भित घोषणा की थी।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक रमेश ने जीएसटी 1.0 पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि निजी खपत में कमी, निजी निवेश की सुस्त दरें और अंतहीन वर्गीकरण विवादों के बीच केंद्र सरकार को अब मानना पड़ा है कि जीएसटी 1.0 अपनी अंतिम सीमा तक पहुंच चुका है। जीएसटी 1.0 की डिजाइन ही त्रुटिपूर्ण थी और कांग्रेस ने जुलाई 2017 में ही इस पर ध्यान दिला दिया था, जब पीएम मोदी ने अपना यू-टर्न लेकर इसे लागू करने का फैसला लिया था। इसे गुड एंड सिंपल टैक्स कहा गया था, लेकिन यह ग्रोथ सप्रेसिंग टैक्स साबित हुआ।
उन्होंने कहा कि बुधवार को की गई घोषणाओं ने सुर्खियां बटोरीं, क्योंकि पीएम मोदी पहले ही प्री-दीवाली डेडलाइन तय कर चुके थे। माना जा रहा है कि दर कटौती के लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचेंगे। हालांकि असली जीएसटी 2.0 का इंतजार अभी भी जारी है। क्या यह नया जीएसटी 1.5 निजी निवेश, विशेषकर विनिर्माण क्षेत्र को प्रोत्साहित करेगा, यह देखना बाकी है। क्या इससे एमएसएमई पर बोझ कम होगा, यह तो समय ही बताएगा।
रमेश ने राज्यों की मांग का जिक्र करते हुए कहा कि इस बीच राज्यों की एक अहम मांग, जो कि सहकारी संघवाद की सच्ची भावना से की गई थी, यानी राजस्व की पूर्ण सुरक्षा के लिए पांच और सालों तक मुआवजा अवधि का विस्तार, अभी भी अनसुलझी है। वास्तव में दर कटौती के बाद इस मांग का महत्व और भी बढ़ गया है।
मुंबई में प्रदर्शन रोकने की मांग पर गरमाई सियासत, संजय राउत ने डिप्टी सीएम शिंदे को घेरा
4 Sep, 2025 06:13 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। एकनाथ शिंदे के अगुवाई वाली शिवसेना के सांसद मिलिंद देवड़ा ने राज्य के सीएम देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर दक्षिण मुंबई में विरोध-प्रदर्शनों पर बैन लगाने का अनुरोध किया है और कहा है कि इस इलाके में जहां वित्तीय और व्यावसायिक केंद्र और सरकारी कार्यालय हैं, वहां विरोध-प्रदर्शनों से कामकाज बाधित होता है। देवड़ा की यह मांग और चिट्ठी ऐसे वक्त में आई है, जब कुछ दिनों पहले ही ओबीसी आरक्षण की मांग पर मनोज जरांगे की अगुवाई में मराठा आंदलनकारियों के प्रदर्शन की वजह से मुंबई में ट्रैफिक व्यवस्था चरमरा गई थी।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक एक्स पर अपनी चिट्ठी साझा करते हुए देवड़ा ने लिखा- हाल ही में हुए विरोध प्रदर्शनों के मद्देनजर, जिसने मुंबई को ठप कर दिया, मैंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है। उन्होंने लिखा - हालांकि प्रत्येक भारतीय को विरोध करने का अधिकार है, लेकिन मानक संचालन प्रक्रिया यह तय करे कि महाराष्ट्र का राजनीतिक और आर्थिक केंद्र ठप न हो।
वहीं दूसरी ओर पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना (यूबीटी) के नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने आरोप लगाया है कि उन्हें जानकारी है कि उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे मुंबई में मराठा आंदोलन और उनके विरोध-प्रदर्शनों की व्यवस्था करने में शामिल थे। राउत ने मिलिंद देवड़ा की चिट्ठी साझा करते हुए एक्स पर मराठी में लिखा, -अमित शाह द्वारा प्रायोजित शिंदे गुट का असली चेहरा यही है, न्याय की मांग के लिए एकजुट हो रहे मराठी लोगों को देख इनके पेट में दर्द होने लगता है। शिंदे गुट के सांसद मिलिंद देवड़ा ने सीएम को पत्र लिखकर मुंबई में मराठी लोगों के आंदोलन की अनुमति न देने की मांग की है। बालासाहेब की तस्वीर का इस्तेमाल बंद करो!”
बता दें मराठा नेता मनोज जरांगे-पाटिल के नेतृत्व में मराठा समुदाय के लिए शिक्षा एवं नौकरियों में 10 फीसदी आरक्षण की मांग को लेकर हुए विरोध प्रदर्शन से शहर के कई हिस्सों में जनजीवन बाधित हो गया था। बेस्ट उपक्रम ने विरोध प्रदर्शन के मद्देनजर अपना परिचालन कुछ दिनों तक रोक दिया था। हालांकि अब शहर में स्थिति सामान्य हो गई है। छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस से भी बस सेवाएं शुरू कर दी गई हैं।
बीजेपी सक्रिय मोड में, उपराष्ट्रपति चुनाव से पहले सांसदों को बुलाया दिल्ली
4 Sep, 2025 05:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति चुनाव में अब कुछ दिन ही बचे हैं और बीजेपी ने अपने सभी सांसदों को पत्र जारी कर 6 सितंबर तक दिल्ली आने के निर्देश दिए हैं। उपराष्ट्रपति पद के लिए मतदान 9 सितंबर को होगा। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने सभी पार्टी सांसदों को 6 सितंबर को अपने आवास पर रात्रिभोज के लिए आमंत्रित किया है। 7 सितंबर को सांसदों को सुबह 9 बजे से देर शाम तक आयोजित पार्टी कार्यशाला में शामिल होने का निर्देश दिया है।
यह कार्यशाला 8 सितंबर को संसद परिसर स्थित जीएमसी बालयोगी सभागार में दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक चलेगी। उसी शाम पीएम मोदी अपने आवास पर एनडीए के सभी सांसदों के लिए रात्रिभोज का आयोजन करेंगे। 9 सितंबर को लोकसभा और राज्यसभा दोनों के सदस्य भारत के अगले उपराष्ट्रपति के चुनाव के लिए मतदान करेंगे। उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए मंच तैयार है, जिसमें सत्तारूढ़ बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के सीपी राधाकृष्णन का मुकाबला इंडिया ब्लॉक के बी सुदर्शन रेड्डी से होना है।
विपक्ष को सर्वसम्मति से उपराष्ट्रपति पद के लिए मनाने की सरकार की कोशिशें नाकाम रहीं हैं, क्योंकि इंडिया ब्लॉक ने सुदर्शन रेड्डी को उम्मीदवार बनाया है, जिन्हें भारत के सबसे प्रतिष्ठित और प्रगतिशील न्यायविदों में से एक माना गया है। वर्तमान में संसद के दोनों सदनों को मिलाकर सदस्यों की संख्या 787 है। भारत के अगले उपराष्ट्रपति के रूप में निर्वाचित होने के लिए किसी उम्मीदवार को कम से कम 394 मतों की जरुरत होगी।
मौजूदा स्थिति राधाकृष्णन के पक्ष में है, क्योंकि बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के पास 422 सांसद हैं, जिनमें मनोनीत सदस्य भी शामिल हैं, जो एनडीए उम्मीदवार का समर्थन कर सकते हैं। एनडीए के सांसदों की संख्या 542 सदस्यीय लोकसभा में 293 और राज्यसभा में 129 है, जहां सदन की प्रभावी संख्या वर्तमान में 245 है। विपक्ष के लिए ये चुनाव 2017 और 2022 के उपराष्ट्रपति चुनावों की तरह एक प्रतीकात्मक मुकाबला बने हुए हैं, क्योंकि उनके पास पर्याप्त संख्याबल नहीं है।
महाराष्ट्र में आरक्षण राजनीति गरमाई, जरांगे-हाके टकराव पर भुजबल सख्त
4 Sep, 2025 11:33 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) कार्यकर्ता लक्ष्मण हाके ने दावा किया कि महाराष्ट्र सरकार को मराठों को ‘कुनबी’ जाति प्रमाण पत्र प्रदान करने की मांग स्वीकार करने का कोई अधिकार नहीं है। हाके ने चेतावनी दी है कि ओबीसी समुदाय फैसले के खिलाफ सड़कों पर उतरेगा। इधर, राज्य सरकार के फैसले पर कैबिनेट मंत्री छगन भुजबल पहले ही नाराजगी दर्ज करा चुके हैं।
हाके ओबीसी समूह के तहत मराठों को आरक्षण देने का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि नेताओं को यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या वे अन्य पिछड़ा वर्ग आरक्षण को कम करना चाहते हैं। उन्होंने पहले मराठों को ओबीसी श्रेणी के तहत आरक्षण देने की मनोज जरांगे की मांग के खिलाफ आंदोलन किया था।
देवेंद्र फडणवीस सरकार द्वारा पात्र मराठों को ‘कुनबी’ जाति प्रमाण पत्र प्रदान करने सहित अधिकतर मांगों को स्वीकार करने के बाद आरक्षण कार्यकर्ता जरांगे ने पांच दिन से जारी अनशन समाप्त किया।
महाराष्ट्र सरकार ने मराठा समुदाय के सदस्यों को उनकी कुनबी विरासत के ऐतिहासिक साक्ष्यों के साथ कुनबी जाति प्रमाण पत्र जारी करने के लिए समिति के गठन की घोषणा की। कुनबी राज्य में एक पारंपरिक कृषक समुदाय है और उन्हें नौकरियों एवं शिक्षा में सरकारी आरक्षण का पात्र बनाने के लिए महाराष्ट्र में ओबीसी श्रेणी की सूची में शामिल किया गया है।
सामाजिक न्याय और विशेष सहायता विभाग द्वारा जारी सरकारी आदेश (जीआर) में हैदराबाद राजपत्र को लागू करने का भी उल्लेख है।
हाके ने जीआर और वंशावली दस्तावेज वाले पात्र मराठों को ‘कुनबी’ जाति प्रमाण पत्र प्रदान करने के निर्णय पर प्रतिक्रिया देकर दावा किया कि सरकार को आरक्षण के संबंध में इस तरह का जीआर जारी करने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने दावा किया कि राजपत्र में यह नहीं लिखा है कि मराठा सामाजिक रूप से पिछड़े हैं और उन्हें आरक्षण दिया जाना चाहिए।
कार्यकर्ता ने पूछा, कौन कहता है कि राजपत्र में दर्ज राजस्व रिकॉर्ड उन्हें आरक्षण के योग्य बनाते हैं? उन्होंने कहा, हैदराबाद राजपत्र में बंजारा को अनुसूचित जनजाति बताया गया है। क्या सरकार बंजारों को अनुसूचित जनजाति का आरक्षण देगी? सरकार को एक मुद्दे को सुलझाने के लिए 10 और मुद्दे नहीं पैदा करने चाहिए।
भारत-जर्मनी वार्ता: जयशंकर ने व्यापार समझौते के लिए बढ़ाया हाथ
4 Sep, 2025 10:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपने जर्मन समकक्ष योहान वेडफुल के साथ नई दिल्ली में एक प्रतिनिधिमंडल स्तर की बैठक की। बैठक भारत और जर्मनी के बीच रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। बता दें कि यह जर्मन विदेश मंत्री की इस साल चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद भारत की पहली आधिकारिक यात्रा है।
बातचीत के दौरान विदेश मंत्री जयशंकर ने जर्मनी से यूरोपीय संघ (ईयू) के साथ मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) वार्ता को तेज करने के लिए समर्थन मांगा। उन्होंने कहा, हम जर्मनी के समर्थन पर भरोसा करते हैं ताकि यूरोपीय संघ के साथ हमारा रिश्ता और गहरा हो सके। भारत और जर्मनी का बहुपक्षीय सहयोग का एक मजबूत इतिहास रहा है, और मुझे विश्वास है कि आज की हमारी बातचीत इस रिश्ते को और मजबूती देगी। विदेश मंत्री जयशंकर ने भारत-जर्मनी संबंधों के महत्व पर वेडफुल की बेंगलुरु यात्रा की सराहना की। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग की अपार संभावनाएं हैं। विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, हम इस बात से सहमत हैं कि यह आपकी यूरोप के बाहर शुरुआती यात्राओं में से एक है और हम आपके भारत आने की बहुत सराहना करते हैं। हम 25 साल की रणनीतिक साझेदारी, 50 साल के वैज्ञानिक सहयोग, और करीब 60 साल के सांस्कृतिक समझौतों का जश्न मना रहे हैं। जैसा कि आपने बेंगलुरु में देखा, एक सदी से अधिक समय से व्यापारिक संबंध भी हैं। मुझे खुशी है कि आपको बेंगलुरु जाने का मौका मिला, जहां आपने तकनीकी सहयोग की अपार संभावनाओं को देखा।
वहीं जर्मन विदेश मंत्री ने भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को जल्द से जल्द अंतिम रूप देने के लिए अपने देश के पूर्ण समर्थन की बात कही है। उन्होंने कहा कि जर्मनी समझौते के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है और इस समझौते को आगे बढ़ाने के लिए यूरोपीय आयोग के साथ अपने प्रभाव का उपयोग करेगा। मंत्री ने कहा, जर्मनी समझौते को जल्द से जल्द लागू करने के लिए पूर्ण समर्थन में है। हम एक मुक्त व्यापार राष्ट्र हैं और भारत के साथ यह समझौता हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण है। जर्मनी के विदेश मंत्री ने कहा, एक उभरती हुई आर्थिक महाशक्ति, दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देश और सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में, भारत का सामरिक महत्व बहुत ज्यादा है। अगर हमें अपने सहयोग को और आगे बढ़ाना है, तो हमारी अर्थव्यवस्थाओं को विशेष रूप से बहुत कुछ हासिल करना होगा। मैं कल बेंगलुरु में था, मैंने खुद देखा कि भारत कितना इनोवेशन महाशक्ति और टेक्नोलॉजी का केंद्र बन गया है।
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