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पवन खेड़ा के आवास पर असम पुलिस की छानबीन, तीन पासपोर्ट मामले ने बढ़ाई हलचल
7 Apr, 2026 01:52 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। असम सीएम हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी पर तीन-तीन पासपोर्ट रखने के आरोप लगाने के बाद अब वरिष्ठ कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा मुश्किल में फंसते नजर आ रहे हैं। मंगलवार 7 अप्रैल को निजामुद्दीन स्थित पवन खेड़ा के घर पास असम क्राइम ब्रांच की टीम पहुंची है। उनकी पत्नी ने असम पुलिस में प्रताड़ित करने की शिकायत की थी। जिस संबंध में जांच के लिए असम पुलिस उनके घर पर आई हुई है। इस दौरान उनके आवास पर दिल्ली पुलिस की टीम भी मौजूद है।
क्या बोले थे खेड़ा?
पवन खेड़ा ने सीएम हिमंत की पत्नी रिंकी भुइयां पर आरोप लगाते हुए कहा था, 'हमारे पास ऐसे दस्तावेज हैं जिसने पता चलता है कि असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां सरमा के पास तीन पासपोर्ट हैं। पहला UAE का गोल्डन कार्ड है, दूसरा एंटीगुआ और बारबुडा का पासपोर्ट है और तीसरा मिस्र का पासपोर्ट है। इनमें से दो पासपोर्ट इस्लामिक देशों के हैं, फिर भी वे सार्वजनिक रूप से अपने धार्मिक जुड़ाव का दावा करते रहते हैं।'
सीएम हिमंत ने क्या दी थी प्रतिक्रिया
उल्लेखनीय है कि हाल ही में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने अपनी पत्नी के खिलाफ आरोपों को खारिज करते हुए धमकी दी थी। उन्होंने कहा था, 'पवन खेड़ा, पवन पेड़ा बन जाएगा। वो कांग्रेस नेता के नाम पर एक नाटक है, जिसमें कोई मिठास नहीं है।'उन्होंने कहा कि वह कांग्रेस नेता के खिलाफ मानहानि का केस करेंगे। बता दें कि बिस्वा सरमा ने 2015 में कांग्रेस छोड़ दी थी और बीजेपी में शामिल हो गए थे।
जनहित याचिका: एनएच से मवेशी हटाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया
7 Apr, 2026 01:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को देशभर के राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर लावारिस मवेशियों की आवाजाही रोकने के लिए दायर याचिका पर केंद्र सरकार और अन्य पक्षों से जवाब तलब किया है। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने केंद्र सरकार के साथ-साथ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब देने को कहा। याचिका में प्राधिकरणों को निर्देश देने की मांग की गई है कि वे हाईवे पर मवेशियों के प्रवेश को रोकने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक दिशानिर्देश तैयार करें और उन्हें सख्ती से लागू करें।
लॉयर्स फॉर ह्यूमन राइट्स इंटरनेशनल नामक संगठन द्वारा दायर इस याचिका में विशेष रूप से दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेस-वे की अनिवार्य घेराबंदी (फेंसिंग) की मांग की गई है। इसके अलावा, वैज्ञानिक तरीके से संचालित गौशालाओं/पशु आश्रयों की स्थापना के लिए निर्धारित फंडिंग सुनिश्चित करने और मवेशियों को अवैध रूप से छोडऩे पर कड़ी दंडात्मक जिम्मेदारी तय करने की भी मांग की गई है। याचिका में आवारा मवेशियों के कारण होने वाली सडक़ दुर्घटनाओं के पीडि़तों के लिए नो-फॉल्ट मुआवजा व्यवस्था बनाने की भी अपील की गई है।
यह है मांग
समस्या पर राष्ट्रीय स्तर पर दिशानिर्देश तैयार कर सख्ती से लागू करें
दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में एनएच और एक्सप्रेसवे की फेंसिंग की जाए
गौशालाओं की स्थापना के लिए निर्धारित फंडिंग सुनिश्चित की जाए
मवेशियों को अवैध रूप से छोडऩे पर कड़ी दंडात्मक जिम्मेदारी तय हो
ऊंचे पुल पर चढ़ा युवक, हरिद्वार में प्रशासन की समय पर कार्रवाई से बड़ा हादसा टला
7 Apr, 2026 11:29 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हरिद्वार: नगर कोतवाली क्षेत्र में एक युवक लोहे के पुल पर अचानक चढ़ गया. पुल पर युवक को इस तरह चढ़ा देख आसपास के लोगों में हड़कंप मच गया और मौके पर भीड़ जुट गई. सूचना मिलते ही पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची और स्थिति को संभाला. जल पुलिस के जवान भी मौके पर पहुंचे. पुल के नीचे जाल तक लगाया गया. घंटों की मशक्कत के बाद पुलिसकर्मियों युवक को सुरक्षित नीचे उतार लिया. बताया जा रहा है कि युवक की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है, फिलहाल उससे पूछताछ की जा रही है.
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार एक युवक नगर कोतवाली क्षेत्र स्थित ललतारव पुल के पास पहुंचा. वहां गंगा पर लोहे का ऊंचा पुल स्थित है, जिस पर अचानक युवक चढ़ने लगा. पहले तो लोगों को लगा कि युवक नीचे उतर जाएगा. लेकिन युवक ऊपर चढ़ने के बाद पुल पर ही लेट गया. युवक काफी देर तक पुल के ऊपरी हिस्से पर बैठा रहा, जिससे युवक के नीचे गिरकर अनहोनी की आशंका बनी रही. देखते ही देखते मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई. काफी देर तक युवक पुल पर इधर उधर घूमता रहा. कभी वो पुल पर लेट जाता तो इधर उधर टहलने लगता.
नीचे लोगों की भीड़ युवक को नीचे उतरने की गुहार लगाती रही. जो कोई भी पुल से होकर गुजरता वो युवक को नीचे उतरने की आवाज लगाता. लेकिन युवक तो अलग ही धुन में था. मानो उसे किसी की आवाज सुनाई ही नहीं दे रही हो और न ही कुछ दिखाई दे रहा. युवक नीचे गिरकर किसी अनहोनी का शिकार न हो, इसके लिए जल पुलिस के जवानों की गंगा में तैनाती की गई. पुल के नीचे जाल तक बिछाया गया. इधर पुलिस को सूचना दी गई, जिस पर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर कड़ी मशक्कत के बाद उसे नीचे उतारा. मौके पर पुलिस के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे. युवक को नीचे उतारने के लिए पुलिसकर्मी खुद ऊंचे पुल पर चढ़े और काफी समझाकर युवक को नीचे उतरने के लिए मनाया.
करीब ढाई घंटे की मशक्कत के बाद युवक को नीचे उतारा गया. बताया जा रहा है कि युवक की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है. पुलिस उसे अपने साथ ले गई है. गनीमत रही कि इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन समय रहते कार्रवाई न होती तो बड़ा हादसा हो सकता था. नगर कोतवाली प्रभारी कुंदन सिंह राणा ने बताया कि युवक को नीचे उतारकर एम्बुलेंस से जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसकी काउंसिलिंग की जा रही है. युवक कहां का रहने वाला है और ऊपर क्यों चढ़ा था, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है. ये घटना सोमवार शाम की है.
महिला प्रवेश और खतना पर सुप्रीम कोर्ट में आज ऐतिहासिक सुनवाई
7 Apr, 2026 11:22 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सर्वोच्च अदालत की 9 जजों की बेंच 22 अप्रैल तक 50 से अधिक याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई करेगी। दरअसल सुनवाई सुबह 10:30 बजे सबरीमाला रिव्यू केस से शुरू होगी। रिव्यू पिटीशनर और उनके समर्थक 7 अप्रैल से 9 अप्रैल तक अपनी दलीलें रखेंगे, जबकि फैसले का विरोध करने वाले पक्ष 14 अप्रैल से 16 अप्रैल तक अपना पक्ष रखेंगे।दरअसल सुप्रीम कोर्ट जिन पांच बड़े मुद्दों पर सुनवाई करेगा, उनमें पहला मुद्दा सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश का है। अदालत यह तय करेगी कि क्या सभी आयु वर्ग की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश का अधिकार है। साल 2018 में इंडियन यंग लॉयर्स एसोसिएशन बनाम स्टेट ऑफ केरल मामले में सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने 10 से 50 साल की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की अनुमति दी थी। इस फैसले के खिलाफ मंदिर के पुजारी समेत कई संगठनों ने पुनर्विचार याचिका दाखिल की है।
जानिए प्रमुख मामले क्या है?
दूसरा मुद्दा दाऊदी बोहरा समुदाय में महिलाओं के खतना की प्रथा से जुड़ा है। 2017 में एडवोकेट सुनीता तिवारी ने इस प्रथा को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी और इसे मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया था। तीसरा मुद्दा मस्जिदों में महिलाओं के प्रवेश का है। 2016 में यास्मीन जुबैर अहमद पीरजादा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मुस्लिम महिलाओं को मस्जिदों में नमाज पढ़ने का अधिकार देने की मांग की थी।
चौथा मुद्दा पारसी महिलाओं के अग्निमंदिर में प्रवेश से जुड़ा है। 2012 में पारसी महिला गुलरुख एम गुप्ता ने एक हिंदू व्यक्ति से शादी करने के बाद पारसी धार्मिक स्थलों में प्रवेश से रोके जाने के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। बाद में यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
पांचवां मुद्दा मुस्लिम पर्सनल लॉ से जुड़े लैंगिक भेदभाव के सवालों का है। अदालत यह तय करेगी कि क्या व्यक्तिगत कानूनों को मौलिक अधिकारों की कसौटी पर परखा जा सकता है।
पिछली सुनवाई में क्या हुआ था?
वहीं इस मामले की पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने सात अहम सवाल तय किए थे। 13 जनवरी 2020 को अदालत ने स्पष्ट किया था कि वह केवल पुनर्विचार याचिकाओं पर ही नहीं, बल्कि संविधान के अनुच्छेद 25 (धार्मिक स्वतंत्रता) और अनुच्छेद 14 (समानता) के बीच संतुलन जैसे बड़े संवैधानिक मुद्दों पर भी विचार करेगी। जनवरी 2020 में हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने महिलाओं के बहिष्कार को असंवैधानिक बताया था, जबकि धार्मिक पक्षों ने आस्था और अनुच्छेद 26 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता का हवाला देते हुए न्यायिक हस्तक्षेप सीमित रखने की मांग की थी। बाद में कोविड-19 महामारी के कारण सुनवाई रोक दी गई थी।अगर सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की बेंच पहले के फैसलों को बरकरार रखती है, तो भविष्य में धार्मिक मामलों में अदालत के हस्तक्षेप की सीमा भी तय हो सकती है।
क्या है पूरा विवाद?
सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 साल की महिलाओं के प्रवेश पर लंबे समय से विवाद रहा है। इसके पीछे मुख्य वजह मासिक धर्म को लेकर धार्मिक मान्यताएं बताई जाती हैं। मान्यता है कि भगवान अयप्पा ब्रह्मचारी हैं और इसी कारण एक निश्चित आयु वर्ग की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाती थी।
यह विवाद 1990 में मंदिर में महिला प्रवेश के मुद्दे से शुरू हुआ था। समय के साथ यह मामला स्थानीय अदालतों से होता हुआ सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। 2018 में सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने 4-1 के बहुमत से फैसला सुनाया था कि सबरीमाला मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश दिया जाना चाहिए, क्योंकि यह प्रतिबंध असंवैधानिक है। इस फैसले के बाद भारी विरोध के बीच दो महिलाएं बिंदु कनकदुर्गा और बिंदु अम्मिनी मंदिर में प्रवेश करने में सफल हुई थीं।
इसके बाद 2019 में सुप्रीम कोर्ट की 7 जजों की बेंच ने इस मामले को 9 जजों की बेंच को भेज दिया था और इसी केस के साथ अन्य धर्मों में महिलाओं से जुड़े मामलों को भी जोड़ दिया गया था।
इस मामले पर अलग-अलग पक्षों की राय भी सामने आई है। केंद्र सरकार ने शुरुआत में महिलाओं के प्रवेश का समर्थन किया था और कहा था कि लैंगिक समानता के खिलाफ कोई भी प्रथा नहीं होनी चाहिए। हालांकि बाद में केंद्र ने कहा कि यह व्यापक संवैधानिक प्रश्न है और इसका फैसला संविधान पीठ को करना चाहिए।
अखिल भारतीय संत समिति का कहना है कि अदालतों को धार्मिक मामलों में तभी हस्तक्षेप करना चाहिए जब वे सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता या स्वास्थ्य के खिलाफ हों। वहीं ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का मानना है कि अदालतों को यह तय करने से बचना चाहिए कि कौन-सी धार्मिक प्रथा जरूरी है।
गौरतलब है कि 2018 के फैसले के बाद बिंदु कनकदुर्गा और बिंदु अम्मिनी के मंदिर में प्रवेश करने के बाद पुजारियों ने पूरे मंदिर का शुद्धीकरण किया था। इसके साथ ही केरल के कई इलाकों में इस फैसले के विरोध में बड़े प्रदर्शन भी हुए थे।
मतदाता सूची में बड़ा बदलाव: मुर्शिदाबाद जिला शीर्ष, लाखों नाम हटाए गए
7 Apr, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
West Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल के बीच वोटर लिस्ट को लेकर नया अपडेट आ गया है। चुनाव से ठीक पहले चुनाव आयोग (ECI) ने पश्चिम बंगाल में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर बड़ा और अहम डेटा जारी किया है। इस बार खास बात यह रही कि आयोग ने पहली बार जिलावार तरीके से नाम जोड़ने और हटाने की पूरी जानकारी सार्वजनिक की है। अगर आंकड़ों पर नजर डालें, तो तस्वीर काफी बड़ी और जटिल दिखती है। आयोग के मुताबिक, अब तक कुल 90.66 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। यह बड़ा डेटा माना जा रहा है।
West Bengal SIR: दो चरणों में हुआ बड़ा बदलाव
दिसंबर 2025 में जब ड्राफ्ट लिस्ट जारी हुई, तब ही करीब 58.2 लाख नाम हटाए गए थे। इसके बाद फरवरी 2026 में अंतिम सूची तक 5.46 लाख और नाम हटाए गए। यानी शुरुआती स्तर पर ही बड़ी संख्या में बदलाव कर दिए गए थे, लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। आयोग ने बताया कि करीब 60 लाख से अधिक मामलों को ‘लॉजिकल विसंगति’ के आधार पर जांच के लिए रखा गया था। आसान भाषा में कहें तो ये वो नाम थे, जिनमें डेटा गड़बड़ी, डुप्लीकेशन या अन्य तकनीकी दिक्कतें सामने आई थीं। इन मामलों को ‘अंडर एडजुडिकेशन’ यानी न्यायिक जांच की श्रेणी में रखा गया। फिर अधिकारियों ने एक-एक केस की समीक्षा की।
West Bengal SIR Process: जांच के बाद क्या निकला?
अब तक लगभग 59.84 लाख मामलों का निपटारा हो चुका है। इस जांच से जो नतीजे सामने आए उसमें करीब 32.68 लाख लोगों के नाम दोबारा जोड़े गए (यानि वे पात्र पाए गए), जबकि 27.16 लाख नाम स्थायी रूप से हटा दिए गए (अयोग्य पाए गए), इससे साफ है कि बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी थे जिनके नाम गलती से हट गए थे, लेकिन जांच के बाद उन्हें वापस शामिल कर लिया गया।
एमपी, यूपी, बिहार से आएंगे 3000 पुलिसकर्मी, चुनाव में चप्पे-चप्पे पर होगी निगरानी
7 Apr, 2026 10:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
West Bengal Assembly Elections: पश्चिम बंगाल में दो चरणों में चुनाव होगा। पहले चरण का चुनाव 23 अप्रैल और दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को होगा। 4 मई को नतीजे आएंगे। चुनावी हिंसा को रोकने के लिए चुनाव आयोग ने बड़ा कदम उठाया है। चुनाव आयोग ने 3000 अतिरिक्त फोर्स तैनात करने का फैसला लिया है। ये पुलिसकर्मी मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश से बुलाए जाएंगे।
13 अप्रैल से चुनाव
बंगाल में चुनाव के दौरान हिंसा का लंबा इतिहास रहा है। ऐसे में चुनाव की संवेदनशीलता को देखते हुए करीब 3,000 अतिरिक्त सशस्त्र पुलिसकर्मियों तैनात करने का निर्णय लिया गया है। ये पुलिसकर्मी 13 अप्रैल को चरणबद्ध तरीके से पहुंचा शुरू हो जाएंगे। जानकारी ये भी सामने आई है कि आयोग पहले ही राज्यभर में केंद्रीय बलों की 2,400 कंपनियों की तैनाती की योजना बना चुका है।
अतिक्रमण हटाने के दौरान रामनगर में विवाद, कांग्रेस नेता और ईओ में हुई तीखी तकरार
7 Apr, 2026 10:27 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रामनगर: नैनीताल जिले के रामनगर में नगर पालिका प्रशासन ने एक बार फिर अवैध अतिक्रमण के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा अभियान चलाया. बीते दिन पालिका टीम ने जेसीबी मशीन की मदद से शहर के विभिन्न इलाकों में कई पक्के अवैध निर्माणों को ध्वस्त कर दिया. इस दौरान रामनगर के मोहल्ला खताड़ी क्षेत्र में कार्रवाई के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व दर्जा राज्य मंत्री पुष्कर दुर्गापाल और नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी (ईओ) आलोक उनियाल के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली. इस दौरान शहर में इसको लेकर राजनीतिक माहौल भी गर्म हो गया है. नगर पालिका अधिकारियों का कहना है कि उनकी कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी.
पालिका टीम ने खताड़ी क्षेत्र में नालियों और सड़कों पर किए गए अवैध कब्जों को चिन्हित कर कार्रवाई शुरू की. इस दौरान नाले के ऊपर बनाए गए पक्के निर्माणों को जेसीबी से तोड़ा गया. वहीं एक चौराहे पर सड़क पर कब्जा कर लोहे का शटर और टीन शेड डालकर किए गए अतिक्रमण को भी हटाया गया.कार्रवाई के दौरान जब पालिका की टीम कुछ खोखों को हटाने पहुंची तो वहां विरोध शुरू हो गया. इसी दौरान कांग्रेस नेता पुष्कर दुर्गापाल और ईओ आलोक उनियाल के बीच बहस हो गई.
विवाद बढ़ने पर टीम को फिलहाल उन खोखों को बिना हटाए ही वापस लौटना पड़ा. ईओ आलोक उनियाल ने बताया कि इस क्षेत्र में अतिक्रमण की शिकायत मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर प्राप्त हुई थी, जिसके बाद यह अभियान चलाया गया. उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी और एसडीएम रामनगर के निर्देश पर कार्रवाई की जा रही है और शहर में अवैध कब्जों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उन्होंने यह भी बताया कि अभियान के दौरान कई स्थानों से सामान जब्त किया गया है और आगे भी यह कार्रवाई जारी रहेगी.
जिन खोखों को आज नहीं हटाया जा सका, उनके मालिकों द्वारा जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र दिया गया है. फिलहाल उनकी चाबियां ले ली गई हैं और उन्हें तीन दिन का समय दिया गया है. निर्धारित समय सीमा के बाद इन पर भी कार्रवाई की जाएगी.नगर पालिका की इस कार्रवाई से जहां एक ओर अतिक्रमणकारियों में हड़कंप मचा हुआ है, वहीं शहर में इसे लेकर राजनीतिक माहौल भी गर्म हो गया है.
IITian बाबा अभय सिंह बने दूल्हा: महाकुंभ से वायरल साधु ने इंजीनियर लड़की से की शादी
7 Apr, 2026 09:27 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
IITian Baba Marriage: प्रयागराज महाकुंभ के वायरल IITian बाबा अभय सिंह ने की इंजीनियर युवती के साथ शादी कर ली है. बाबा ने हिमाचल के प्रसिद्ध मंदिर में शादी की है. शादी करने के बाद बाबा अपनी पत्नी के साथ हिमाचल प्रदेश के ही एक धर्मशाला में रुके रहे और सोमवार को अपने पिता से आशीर्वाद लेने हरियाणा पहुंचे हैं. इस दौरान उन्होंने खुलासा किया कि दोनों ने 15 फरवरी को शिवरात्रि के मौके पर हिमाचल के अघंजर मंदिर में शादी की. उसके बाद 19 फरवरी को कोर्ट मैरिज भी की.
जानकारी के अनुसार आईआईटीयन बाबा अभय सिंह ने जिस लड़की से शादी की है. वह कर्नाटक की है और वह इंजीनियर है. बाबा की पत्नी का नाम प्रतीका है. अभय सिंह के पिता पेशे से वकील हैं. पिता के पास पहुंचे अभय सिंह से जब मीडिया ने सवाल किया, तो उन्होंने कहा कि शादी छिपाने का सवाल ही नहीं है. महाशिवरात्रि के दिन शादी की है.
सनातन के लिए काम करने को बोली पत्नी
अभय सिंह की दुल्हन प्रतीका ने मीडिया से बातचीत करते हुए बताया कि अभय का नेचर काफी पसंद आया. वे बहुत ईमानदार और सच्चे इंसान हैं. प्रतीका ने बताया कि वे इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुकी हैं और वे अभय से करीब 1 साल पहले मुलाकात की थी. अभय सिंह की तरह वह भी सनातन के लिए ही काम करेंगी.
महाकुंभ में हुए थे वायरल
अभय सिंह हरियाणा के झज्जर के रहने वाले हैं. उनके पिता पेशे से वकील हैं. अभय सिंह ने बॉम्बे आईआईटी से एयरो स्पेस इंजीनियरिंग की है. प्रयागराज महाकुंभ के दौरान अभय सिंह आईआईटी बाबा के नाम से मशहूर हुए थे. फिलहाल, अभय सिंह ने शादी कर लिया है और वे अपनी जिंदगी खुशी के साथ बिताना चाहते हैं.
हरिद्वार में रेलवे स्टेशन के शौचालय में मासूम से दुष्कर्म का प्रयास, दरवाजा तोड़कर बचाई जान, आरोपी गिरफ्तार
7 Apr, 2026 09:25 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हरिद्वार: रेलवे स्टेशन के टिकट घर स्थित महिला शौचालय में साढ़े चार साल की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म का प्रयास किया गया. बच्ची की चीख पुकार से मौके पर हड़कंप मच गया. आसपास मौजूद लोगों ने दरवाजा तोड़कर बच्ची को सुरक्षित बाहर निकाला. इस बीच आरोपी चकमा देकर भाग निकला, लेकिन जीआरपी पुलिस ने घेराबंदी कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तार आरोपी उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले का रहने वाला है. आरोपी के खिलाफ पॉक्सो समेत कई संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज किया.
एसपी जीआरपी अरुणा भारती के मुताबिक मध्य प्रदेश निवासी एक परिवार तीर्थ यात्रा के बाद हरिद्वार रेलवे स्टेशन पर ट्रेन का इंतजार कर रहा था. परिवार के साथ उनकी साढ़े चार साल की बेटी भी थी. इसी बीच बच्ची शौचालय जाने की बात कहने लगी तो पिता ने उसे शौचालय भेज दिया. शौचालय के पास पहले से ही एक युवक मौजूद था. जैसी ही बच्ची शौचालय के अंदर गई तभी वहां मौजूद युवक ने उसे अंदर बंद कर लिया. आरोपी युवक ने बच्ची के साथ गलत हरकत करने की कोशिश की. बच्ची ने युवक की हरकतों का विरोध किया और चीखने चिल्लाने लगी.
बच्ची के चीखने की आवाज सुनकर आसपास मौजूद लोग मौके पर पहुंचे. लोगों ने दरवाजा खोला तो, शौचालय का दरवाजा अंदर से बंद मिला. देर न करते हुए हुए लोगों ने लोगों ने दरवाजे को तोड़ दिया. दरवाजा खुला तो शौचालय के अंदर युवक बच्ची को पकड़े हुए मिला. लोगों ने बच्ची को उसके चंगुल से छुड़ाया, लेकिन आरोपी मौके से फरार हो गया. सूचना मिलते ही जीआरपी पुलिस भी मौके पर पहुंची. हरिद्वार जीआरपी थाना प्रभारी बिपिन चंद्र पाठक के नेतृत्व में टीम ने स्टेशन परिसर और आसपास के इलाकों में घेराबंदी कर दी. कुछ ही घंटों में स्थानीय लोगों की मदद से पुलिस ने आरोपी को रेलवे स्टेशन परिसर से ही दबोच लिया. आरोपी की पहचान निवासी सिंगेरा रसमल्ला, थाना मरदाहा, जिला गाजीपुर, उत्तर प्रदेश के रूप में हुई.
जीआरपी थाना प्रभारी बिपिन चंद्र पाठक ने बताया कि गिरफ्तार किए गए आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट समेत अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया और उसे कोर्ट में पेश कर दिया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया है. पूछताछ में सामने आया कि आरोपी घुमंतू प्रवृत्ति का है और भीड़भाड़ वाले इलाकों में वो वारदात करने के इरादे से हरिद्वार आया था, इसलिए उसके आपराधिक इतिहास की जांच भी की जा रही है.
राजधानी में मौसम का कहर: दिनभर हो सकती है तेज बारिश और हवा, IMD ने दी चेतावनी
7 Apr, 2026 08:19 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: नई दिल्ली में मंगलवार सुबह मौसम में बदलाव देखा गया. हल्की बारिश से राष्ट्रीय राजधानी में बढ़ते तापमान से कुछ समय के लिए राहत मिली.
शहर के कुछ हिस्सों में आसमान में बादल छाए रहे, सड़कें गीली रही और तापमान में काफी गिरावट देखी गई, क्योंकि आने-जाने वाले लोग हल्की बारिश के बीच से गुजर रहे थे. मौसम विभाग के मुताबिक शहर में पूरे दिन कम से कम टेम्परेचर 20 डिग्री सेल्सियस और अधिक से अधिक 31 डिग्री सेल्सियस रहने की उम्मीद है.
मौसम विभाग ने दिन में गरज के साथ हल्की बारिश, बिजली कड़कने और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से तेज हवा चलने का अनुमान लगाया है. ये हालात सुबह, दोपहर, शाम और रात तक बने रहने की संभावना है, जिससे पता चलता है कि शहर भर में मौसम लंबे समय तक खराब रहेगा.
बारिश की गतिविधि का हवा का गुणवत्ता पर भी थोड़ा असर पड़ा है. सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) के डेटा के मुताबिक, दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 117 रहा, जिसे मॉडरेट कैटेगरी में रखा गया है. हालांकि यह खराब लेवल से बेहतर है, लेकिन अधिकारी सेंसिटिव ग्रुप्स को सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं.
मौसम विभाग ने उत्तर-पश्चिम भारत के लिए मौसम का बड़ा अनुमान भी जारी किया है. 6 अप्रैल को हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में कहीं-कहीं हल्की से मीडियम बारिश, गरज के साथ बारिश, बिजली कड़कने और तेज हवा (30 और 50 kmph, जो 60 kmph तक जा सकती हैं) चलने की संभावना है. पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और ईस्ट राजस्थान में भी ऐसे ही हालात रहने की उम्मीद है.
7 अप्रैल से 10 अप्रैल के बीच फिर से बारिश होने की उम्मीद है साथ ही जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भारी बारिश और बर्फबारी का अनुमान है. दिल्ली के साथ-साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के कुछ हिस्सों में 7 और 8 अप्रैल को गरज के साथ बारिश और तेज हवा चलने की संभावना है. इसके अलावा, राजस्थान के कुछ हिस्सों में 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक की हवा की रफ़्तार से गरज के साथ बारिश हो सकती है.
आईएमडी ने 7 और 8 अप्रैल के बीच दिल्ली समेत उत्तरी राज्यों में कहीं-कहीं ओले गिरने और आने वाले दिनों में कश्मीर घाटी और हिमाचल प्रदेश जैसे कुछ इलाकों में भारी बारिश की भी चेतावनी दी है.
CM योगी बोले—पत्रकारिता जनविश्वास का प्रतीक, जिम्मेदारी निभाएं पत्रकार
6 Apr, 2026 08:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गोरखपुर: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हिंदी पत्रकारिता के 200 साल पूरे होने पर इसे राष्ट्र सेवा का आधार बताया। उन्होंने कहा कि 30 मई 1826 को कोलकाता से पंडित जुगुल किशोर शुक्ल ने हिंदी के पहले समाचार पत्र ‘उदंत मार्तण्ड’ का शुभारंभ किया था। उस समय देश की आजादी की लड़ाई में पत्रकारिता ने एक नई आवाज भरी थी और वह शानदार यात्रा आज भी बिना रुके आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री ने पत्रकारों से अपील की कि वे मूल्यों और आदर्शों के साथ आगे बढ़ें, क्योंकि पत्रकारिता कभी बेलगाम नहीं होनी चाहिए, यह राष्ट्रहित में आवश्यक है।
योगी आदित्यनाथ गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब की नई कार्यकारिणी के शपथ ग्रहण समारोह में बोल रहे थे। उन्होंने पत्रकारिता के विभिन्न माध्यमों में समन्वय की जरूरत पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने साफ किया कि अगर एक ही तथ्य को टेलीविजन, प्रिंट या डिजिटल माध्यम से अलग-अलग ढंग से दिखाया जाए, तो जनता में बेवजह का भ्रम फैलता है। यह स्थिति मीडिया के प्रति जनविश्वास को सीधा प्रभावित करती है। इसलिए उन्होंने सभी मीडिया अंगों को समान मानक, मूल्यों और आदर्शों के अनुरूप आगे बढ़ने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि यह मीडिया की विश्वसनीयता के लिए बहुत जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने गुमराह करने वाली पत्रकारिता से बचने की दी सलाह
मुख्यमंत्री ने भारत में पत्रकारिता के मूलभाव को राष्ट्र सेवा, समाज सेवा और ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ बताया। उन्होंने साफ शब्दों में समाज को गुमराह करने वाली पत्रकारिता से बचने की सलाह दी। योगी ने कहा कि आज जब सामाजिक (सोशल) और मुद्रित (प्रिंट) माध्यम में खबर की प्रस्तुति में भिन्नता आती है, तो जनमानस विचलित होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार हमेशा मूल्यों पर आधारित पत्रकारिता के साथ मजबूती से खड़ी है और उसे हर संभव सहयोग देने को तैयार है।
मुख्यमंत्री ने लोकतंत्र में संवाद के महत्व पर भी बात की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र संवाद से चलता है, और इसमें होने वाली आलोचना को कभी व्यक्तिगत रंजिश के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। पत्रकारिता को समाज का आईना और जनविश्वास का प्रतीक बताते हुए उन्होंने कहा कि पत्रकारों को सही-गलत के प्रति हमेशा एक तटस्थ और निष्पक्ष भाव में रहना आवश्यक है। यही पत्रकारिता की आत्मा है।
उन्होंने इतिहास के कई उदाहरण भी दिए। महात्मा गांधी और बाल गंगाधर तिलक जैसे महान नेताओं ने भी पत्रकारिता को देश सेवा का माध्यम बनाया। तिलक ने 1916 में लखनऊ से ही ‘स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है’ का नारा दिया था, जिसे उन्होंने अपने अखबारों और लेखों के जरिए पूरे देश में प्रसारित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पत्रकारिता ने कठिन मार्गों का अनुसरण करते हुए सदैव अपने लक्ष्यों को प्राप्त किया है, चाहे वह आजादी की लड़ाई हो या सामाजिक सुधारों की बात।
मुख्यमंत्री ने बताया हिंदी पत्रकारिता का गौरवशाली इतिहास
हिंदी पत्रकारिता का गौरवशाली इतिहास रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि विपरीत परिस्थितियों में भी हिंदी पत्रकारिता ने भारतीय लोकतंत्र को मजबूती दी है। 200 वर्ष पहले शुरू हुई यह शानदार यात्रा चुनौतियों के बावजूद बिना रुके आगे बढ़ रही है। भारतीय पत्रकारिता का आधार उपनिषदों की महान सूक्ति ‘सत्यमेव जयते’ से प्रेरित है, जो हमें हमेशा सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। उन्होंने यह भी कहा कि विघटनकारी शक्तियों की चुनौती हमेशा रही है, पर हमें इन बाधाओं से विचलित नहीं होना है और अपने मूल आदर्शों पर टिके रहना है।
योगी आदित्यनाथ ने सरकार की कल्याणकारी नीतियों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सरकार ने अपराध और भ्रष्टाचार के प्रति अपनी शून्य सहिष्णुता की नीति जारी रखी है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। समाज के प्रत्येक वर्ग को जन कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पूरी पारदर्शिता के साथ प्राप्त हो रहा है। उन्होंने विशेष रूप से बताया कि सरकार ने पत्रकारों के लिए भी विभिन्न आवासीय योजनाएं चलाई हैं ताकि उन्हें रहने की सुविधा मिल सके। साथ ही, मान्यता प्राप्त पत्रकारों को नकद रहित (कैशलेस) चिकित्सा सुविधा का लाभ भी दिया जा रहा है, जो उनके स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए एक बड़ा कदम है।
पत्रकारिता का फोकस राष्ट्रभक्ति पर होना चाहिए-मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री ने जोर दिया कि गोरखपुर में पत्रकारिता की दिशा राष्ट्रभक्ति के भाव को बढ़ाने वाली होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर और विकसित भारत की संकल्पना को साकार करने में पत्रकारिता की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने एक बार फिर दोहराया कि सरकार मूल्यों और आदर्शों पर आधारित पत्रकारिता के साथ सदैव खड़ी है और उसे हर संभव सहयोग प्रदान करेगी।
इस अवसर पर गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब की पृष्ठभूमि भी सामने आई। इसकी स्थापना 1998 में हुई थी और तब के मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का सानिध्य इसके सदस्यों को प्राप्त था। पुलिस अधीक्षक त्रिपाठी और अरविंद शुक्ला ने इसकी स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। सरकार ने अब इस क्लब को एक भव्य भवन दिया है, जिससे पत्रकारों को बेहतर कार्यस्थल मिल सके। महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव ने नई कार्यकारिणी के पदाधिकारियों को शपथ दिलाई।
केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर प्रियंका गांधी ने उठाए सवाल
6 Apr, 2026 07:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली|कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने सोमवार को केरलम के कन्नूर में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए सीपीआई(एम) के नेतृत्व वाले एलडीएफ पर आगामी विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा के साथ अंदरूनी समझौता करने का सीधा आरोप लगाया। प्रियंका गांधी ने कहा कि एलडीएफ अपनी विचारधारा और जनता के प्रति अपनी जिम्मेदारी को दरकिनार कर केवल सत्ता में 10 साल और बने रहने की कोशिश कर रही है। उनका यह बयान 9 अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले आया है, जिससे केरल के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
वायनाड से सांसद प्रियंका गांधी ने पेरावूर में अपने संबोधन में इस आरोप को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि एलडीएफ ने उस भाजपा से हाथ मिलाया है, जिस पर अल्पसंख्यकों को परेशान करने का आरोप लगता रहा है। प्रियंका ने विशेष रूप से ईसाई समुदाय और उनकी नन को निशाना बनाए जाने का जिक्र किया और यह सवाल उठाया कि ऐसी पार्टी से एलडीएफ कैसे समझौता कर सकती है। यह आरोप केरलम के सामाजिक और धार्मिक ताने-बाने को देखते हुए काफी संवेदनशील माना जा रहा है, जहां अल्पसंख्यक आबादी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
प्रियंका गांधी ने सबरीमाला घटना उठाया मुद्दा
अपने आरोपों को मजबूत करने के लिए, प्रियंका गांधी ने सबरीमाला मंदिर में हुई चोरी की घटना का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा कि इस मामले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक शब्द भी नहीं बोला। प्रियंका के अनुसार, प्रधानमंत्री की यह चुप्पी ही एलडीएफ और भाजपा के बीच पर्दे के पीछे चल रहे समझौते का सबसे बड़ा सबूत है। उन्होंने इशारा किया कि अगर कोई वास्तविक विरोध होता, तो प्रधानमंत्री इस पर अवश्य अपनी प्रतिक्रिया देते।
प्रियंका गांधी ने केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
प्रियंका गांधी ने केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी तीखे सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब भी कोई व्यक्ति प्रधानमंत्री या केंद्र सरकार के खिलाफ आवाज उठाता है, तो उसे तत्काल सीबीआई, ईडी या इनकम टैक्स के मुकदमों का सामना करना पड़ता है। लेकिन केरलम के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के मामले में ऐसा कोई भी मामला सामने नहीं आया है। उन्होंने इस पर आश्चर्य व्यक्त किया और सवाल किया कि आखिर क्यों मुख्यमंत्री विजयन केंद्रीय एजेंसियों की जांच के दायरे से बाहर हैं, जबकि उनके खिलाफ कई आरोप लगे हैं। यह आरोप सीधे तौर पर केंद्र सरकार पर राजनीतिक बदले की भावना से कार्रवाई करने और कुछ नेताओं को बचाने का आरोप लगाता है।
प्रियंका गांधी का एलडीएफ सरकार पर आरोप
कांग्रेस नेता ने एलडीएफ सरकार, उसके मंत्रियों और नेताओं में बढ़ते अहंकार को भी मुद्दा बनाया। उन्होंने आरोप लगाया कि एलडीएफ नेताओं में अब जनता के प्रति जवाबदेही और जिम्मेदारी की भावना पूरी तरह से खत्म हो चुकी है। प्रियंका ने कहा कि सत्ता में लंबे समय तक रहने से यह सरकार जनता की समस्याओं को सुनने और उनका समाधान करने के बजाय अपने अहम को प्राथमिकता दे रही है। यह सीधे तौर पर सुशासन और लोकतंत्र के सिद्धांतों पर हमला है, जहां सरकार को जनता के प्रति उत्तरदायी होना चाहिए।
केरलम में आगामी विधानसभा चुनाव बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं, और प्रियंका गांधी के ये आरोप कांग्रेस के लिए एलडीएफ और भाजपा दोनों को एक ही पाले में खड़ा करने की कोशिश हैं। कांग्रेस, जो राज्य में यूडीएफ गठबंधन का नेतृत्व कर रही है, एलडीएफ और भाजपा के बीच किसी भी तरह के तालमेल को उजागर कर अपने पक्ष में माहौल बनाना चाहती है। यह रणनीति मतदाताओं को यह सोचने पर मजबूर कर सकती है कि क्या उनकी पसंदीदा पार्टी वास्तव में उन मूल्यों पर खड़ी है, जिनका वह हमेशा दावा करती रही है।
इन आरोपों का असर आगामी चुनावों पर पड़ना तय है। खासकर अल्पसंख्यक समुदाय और उन मतदाताओं के लिए, जो विचारधारा को लेकर गंभीर रहते हैं। प्रियंका गांधी ने सीधे तौर पर एलडीएफ की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया है और यह संकेत दिया है कि सत्ता के लिए राजनीतिक दल किसी भी हद तक जा सकते हैं। अब देखना यह होगा कि एलडीएफ और भाजपा इन आरोपों पर किस तरह प्रतिक्रिया देते हैं और यह केरल की राजनीतिक दिशा को कैसे प्रभावित करता है।
व्यवस्था पर सवाल: सूखी लकड़ी न मिलने पर बेटी का दाह संस्कार डीजल और टायर से
6 Apr, 2026 05:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
श्रीनगर गढ़वाल: पौड़ी गढ़वाल जिले के श्रीनगर गढ़वाल के अलकेश्वर घाट पर मानवता को शर्मसार और असंवेदनशील मामले ने स्थानीय प्रशासन को सवालों के कठघरे में खड़ा कर दिया है. यहां एक परिवार को अपनी 19 साल की जवान बेटी की चिता को आग देने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी. संवेदनाएं उस दौरान और मर गई जब परिवार को बेटी के पार्थिव शरीर को मोक्ष देने के लिए डीजल, टायर और कपड़ों के जरिए अंतिम संस्कार करने की जरूरत पड़ी.
जानकारी के मुताबिक, श्रीनगर का एक परिवार अपनी 19 साल की जवान बेटी के प्राण त्यागने पर उसके अंतिम संस्कार के लिए भारी मन से अलकेश्वर घाट पर पहुंचे. रोते बिलखते परिजनों ने अंतिम संस्कार की तैयारी शुरू की. लेकिन इसके लिए उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ा.
बताया गया कि घाट पर सरकारी स्तर पर लकड़ी की कोई व्यवस्था उपलब्ध नहीं थी. जिस कारण परिजनों को मजबूरी में एक निजी टाल से लकड़ी खरीदनी पड़ी. परिवार ने आरोप लगाया कि उन्हें जो लकड़ियां दी गईं, वे गीली और कच्ची थीं. जब अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू की गई, तो चिता ठीक से नहीं जल सकी, जिससे परिजनों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा.
करीब चार घंटे तक परिवार को घाट पर ही रुकना पड़ा और इस दौरान उन्हें काफी मानसिक पीड़ा झेलनी पड़ी. गमगीन माहौल में परिस्थितियों के विपरित जाकर परिजनों को अंत में 15 लीटर डीजल, पुराने कपड़े, गद्दे और टायर जलाकर किसी तरह चिता को आग देने की कोशिश की गई. दुखों का पहाड़ तब और भी टूट गया जब परिवार को मृतका के सामान, पकड़े, स्कूल बैग, जुटे तक को आग बढ़ाने के लिए चिता पर डालने पड़े.
इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी देखी जा रही है. लोगों का कहना है कि घाट पर बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण इस तरह की समस्याएं सामने आ रही हैं. वार्ड पार्षद शुभम प्रभाकर ने भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए नगर निगम से जांच कर आवश्यक कार्रवाई की मांग की है.
इस मामले पर श्रीनगर मेयर आरती भंडारी ने कहा कि,
मामला संज्ञान में आते ही टाल संचालक को नोटिस भेज दिया गया है. जल्द ही इस पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी. टाल निगम का नहीं है, किसी प्राइवेट व्यक्ति द्वारा इसका संचालन किया जाता है. जल्द ही वन विभाग से बात कर टाल संचालक पर कार्रवाई की जाएगी.
-आरती भंडारी, मेयर, श्रीनगर गढ़वाल नगर निगम-
यह घटना न केवल व्यवस्थाओं में सुधार की जरूरत को दर्शाती है, बल्कि यह भी संकेत देती है कि ऐसे संवेदनशील स्थानों पर जरूरी संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि किसी भी परिवार को इस तरह की कठिनाइयों का सामना न करना पड़े.
सुरक्षा में बड़ी चूक! विधानसभा परिसर में हंगामा, स्पीकर की गाड़ी पर स्याही फेंकी
6 Apr, 2026 03:35 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Delhi Assembly security:दिल्ली विधानसभा की सुरक्षा व्यवस्था पर उस वक्त सवाल खड़े हो गए, जब सोमवार (6 अप्रैल) को गेट नंबर 2 से दाखिल हुए कुछ लोगों ने स्पीकर की कार पर स्याही फेंक दी। घटना को अंजाम देने के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए और उनकी गाड़ी भी विधानसभा परिसर से बाहर निकलने में सफल रही। इस वारदात के बाद सुरक्षा इंतजामों को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आ रही हैं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक,घटनास्थल पर मौजूद लोगों ने देखा कि संदिग्ध कार विधानसभा परिसर में प्रवेश करने के बाद कुछ समय तक भीतर ही रुकी रही और फिर अचानक वहां से रफूचक्कर हो गई। इस बीच, दिल्ली पुलिस के सूत्रों ने पुष्टि की है कि एक तेज रफ्तार कार ने सुरक्षा घेरे (बैरियर) को पूरी तरह नजरअंदाज करते हुए दिल्ली विधानसभा की सीमा में जबरन घुसने का दुस्साहस किया।
हेमकुंड साहिब: बर्फ से ढका मार्ग, संयुक्त टीम ने पैदल पहुंचकर लिया जायजा
6 Apr, 2026 01:21 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चमोली: विश्व प्रसिद्ध सिख धार्मिक स्थल हेमकुंड साहिब की यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए भारतीय सेना और गुरुद्वारा ट्रस्ट ने कमर कस ली है. भारतीय सेना के जवानों और गुरुद्वारा हेमकुंड साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट के सेवादारों की एक संयुक्त टीम ने गोविंदघाट से धाम तक के पैदल मार्ग का निरीक्षण किया. निरीक्षण के दौरान पाया गया कि धाम परिसर में अभी भी 5 से 6 फीट तक बर्फ जमी हुई है, जबकि मुख्य पड़ाव अटलाकोटी ग्लेशियर पॉइंट पर भी भारी मात्रा में हिमखंड मौजूद हैं. राहत की बात ये है कि पिछले दस दिनों में हुई ताजा बर्फबारी नरम है, जिसके जल्द पिघलने की उम्मीद जताई जा रही है.
पूरे आस्था पथ को श्रद्धालुओं के लिए खोलने के लिए भारतीय सेना की टुकड़ी 15 अप्रैल के बाद गोविंदघाट से रवाना होगी, जो दुर्गम रास्तों और ग्लेशियरों को काटकर रास्ता तैयार करेगी. ट्रस्ट के अधिकारियों के अनुसार, यदि आगामी दिनों में मौसम साफ रहता है और धूप खिलती है, तो बर्फ हटाने का कार्य तेजी से संपन्न हो सकेगा. हिमालय की गोद में स्थित हेमकुंड साहिब अपनी अलौकिक सुंदरता और आध्यात्मिक शांति के लिए जाना जाता है. बर्फ से ढकी चोटियों और पवित्र सरोवर के बीच स्थित इस धाम की यात्रा इस वर्ष 23 मई 2026 से शुरू होने जा रही है. यात्रा का पहला जत्था 20 मई को ऋषिकेश से पूरे उत्साह के साथ रवाना किया जाएगा.
वहीं,आगामी चारधाम यात्रा को सुगम व सुरक्षित बनाने के लिए चमोली पुलिस व्यापक स्तर पर तैयारियों में जुट गई है. पुलिस अधीक्षक चमोली सुरजीत सिंह पंवार के निर्देशन में यात्रा मार्गों पर व्यवस्थाओं को सुदृढ़ किया जा रहा है. यात्री सुविधाओं को प्राथमिकता देते हुए यातायात पुलिस द्वारा ज्योतिर्मठ व कर्णप्रयाग क्षेत्र में यातायात से संबंधित आवश्यक साइन बोर्ड स्थापित किए गए हैं, जिससे यात्रियों को मार्गदर्शन, दिशा-निर्देश एवं यातायात नियमों की स्पष्ट जानकारी मिल सके.
इन साइन बोर्डों के माध्यम से वाहन चालकों को सुरक्षित ड्राइविंग, पार्किंग व्यवस्था, गति नियंत्रण एवं संवेदनशील स्थलों की जानकारी प्रदान की जा रही है, जिससे यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था एवं दुर्घटना की संभावना को कम किया जा सके. चमोली पुलिस द्वारा यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुगम एवं व्यवस्थित यातायात व्यवस्था उपलब्ध हो. इस वर्ष बदरीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को सुबह 6:15 बजे श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे.
चुनावी तैयारी तेज: TVK आज जारी करेगी घोषणापत्र, कर्ज राहत और LPG पर फोकस
10वीं-12वीं में फेल या असंतुष्ट छात्र दे सकेंगे दोबारा परीक्षा
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कांग्रेस का स्टैंड तय: सोनिया गांधी का साफ संदेश, अब राहुल गांधी क्या कहेंगे?
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संशोधन बिल पर सियासी संग्राम: शाह और मेघवाल आगे, विपक्ष आमने-सामने
प्रोटीन, आयरन और विटामिन से भरपूर फूड्स से पाएं हेल्दी हेयर
सियासत गरमाई: अखिलेश बोले- धोखे से लागू हो रहा आरक्षण, शाह का तीखा जवाब
