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राज्यसभा में कर्नाटक मुस्लिम आरक्षण पर विवाद, BJP ने उठाया धर्म आधारित आरक्षण का विरोध!
24 Mar, 2025 12:20 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
राज्यसभा में सोमवार को भारी हंगामा देखने को मिला, जब केंद्रीय संसदीय कार्य और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरण रिजिजू ने कर्नाटका के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के मुस्लिम आरक्षण को लेकर दिए गए बयान का मुद्दा उठाया। हंगामे के बाद राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर 2:00 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। रिजिजू ने कहा कि डीके शिवकुमार ने संविधान में बदलाव की बात की है, जो कि संवैधानिक प्रावधानों के खिलाफ है।
धर्म के आधार पर आरक्षण नहीं: नड्डा
राज्यसभा में नेता सदन जेपी नड्डा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी जो संविधान की रक्षक बनती है। बाबा साहब ने स्पष्ट कहा है कि धर्म के आधार पर आरक्षण नहीं दिया जा सकता, लेकिन कांग्रेस की सरकार ने साउथ में मुस्लिम धर्म के लिए कॉन्ट्रैक्ट में चार फीसदी आरक्षण का प्रावधान किया है। जेपी नड्डा ने इसे ऑथेंटिकेट किया और कहा कि कर्नाटक के डिप्टी सीएम ने वहां के सदन में कहा है कि जरूरत पड़ी तो हम संविधान को बदलेंगे और ये लोग संविधान के बड़े रक्षक बनते हैं। वहां संविधान की धज्जियां उड़ाने का काम किया गया है। विपक्ष के नेता को इसका जवाब देना चाहिए।
संविधान बदलने जा रहे: खरगे
इस पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने जवाब देते हुए कहा कि बाबा साहब ने देश का संविधान बनाया। उसे कोई बदल नहीं सकता। इसकी रक्षा के लिए हमने कन्याकुमारी से कश्मीर तक भारत जोड़ो यात्रा निकाली है। किसने कह दिया कि हम संविधान बदलने जा रहे हैं।
रिजिजू ने डीके शिवकुमार का वक्तव्य भी सुनाया
इस पर किरण रिजिजू ने कहा कि मुस्लिम लीग की पॉलिसी को जिसे बाबा साहब ने रिजेक्ट कर दिया था, उसे लागू कर कांग्रेस पार्टी ने बाबा साहब की इज्जत को मिट्टी में मिलाने का काम किया है। किरण रिजिजू ने कर्नाटक के डिप्टी सीएम का सदन में दिया वक्तव्य भी सुनाया और कांग्रेस अध्यक्ष को कार्रवाई करने की चुनौती दी।
कुणाल कामरा का एकनाथ शिंदे पर तंज, शिवसैनिकों का विरोध
24 Mar, 2025 12:04 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा के एक शो को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. रविवार को खार इलाके में शिवसेना कार्यकर्ताओं ने एक होटल में जमकर हंगामा किया. यह वही जगह थी जहां कामरा का शो शूट किया गया था. विवाद की जड़ बना कामरा का वीडियो, जिसमें उन्होंने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर तंज कसा था. वीडियो में “गद्दार” शब्द का इस्तेमाल किया गया, जिससे शिवसैनिक भड़क गए.
होटल में शिवसैनिकों का कोहराम
कामरा का यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसके बाद शिवसेना कार्यकर्ता होटल यूनिकॉन्टिनेंटल में पहुंचे और तोड़फोड़ मचाई. उन्होंने मांग की कि कामरा के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो. एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक, जैसे ही यह वीडियो सामने आया, पार्टी कार्यकर्ताओं ने होटल के ऑडिटोरियम में जाकर हंगामा किया.
“भारत से भागना पड़ेगा!”
शिवसेना सांसद नरेश म्हस्के ने सीधे तौर पर कुणाल कामरा को धमकी दी. उन्होंने कहा, “शिवसेना कार्यकर्ता पूरे देश में तुम्हारा पीछा करेंगे. तुम्हें भारत से भागना पड़ेगा.” म्हस्के ने यह भी आरोप लगाया कि कामरा, उद्धव ठाकरे से पैसे लेकर एकनाथ शिंदे को निशाना बना रहे हैं. उनका कहना था कि शिंदे की आलोचना करने के गंभीर नतीजे होंगे.
राउत ने कहा – “कुणाल का कमाल”
शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के नेता संजय राउत ने इस मामले में कामरा का समर्थन किया. उन्होंने ‘एक्स’ (Twitter) पर वीडियो शेयर करते हुए लिखा – “कुणाल का कमाल.” राउत ने कहा, “कामरा एक प्रसिद्ध स्टैंड-अप कॉमेडियन हैं. उन्होंने महाराष्ट्र की राजनीति पर एक पैरोडी बनाई, जिससे शिंदे गुट नाराज हो गया और स्टूडियो में तोड़फोड़ कर दी.”
अब एफआईआर की तैयारी
शिवसेना विधायक मुरजी पटेल ने कहा कि वह एमआईडीसी थाने में कुणाल कामरा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराएंगे. दूसरी तरफ, शिवसेना नेता संजय राउत पर भी यह वीडियो शेयर करने के कारण निशाना साधा गया.
कर्नाटक में मुस्लिमों को 4% आरक्षण पर विवाद, विरोध तेज
24 Mar, 2025 11:43 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कर्नाटक सरकार की तरफ से मुस्लिमों को दिए गए 4 प्रतिशत आरक्षण को लेकर विरोध किया जा रहा है. तमाम संगठन इसे तुष्टिकरण की राजनीति बता रहे हैं. इन बयानों के बाद डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने कहा था कि जरूरत पड़ी तो आने वाले समय में हम संविधान में भी संशोधन कर देंगे. यही कारण है कि अब इस बयान का जमकर विरोध हो रहा है.
जेपी नड्डा ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि बहुत दुख के साथ कहना पड़ता है कि जिस तरीके से कांग्रेस पार्टी संविधान की रक्षक बनती है. संविधान के बारे में जिस तरीके से उन्होंने धज्जियां उड़ाने का प्रयास किया है. संविधान में बाबा साहेब ने साफ लिखा है कि आरक्षण धर्म के आधार पर नहीं होगा.
उन्होंने कहा कि यह संविधान का स्थापित संविधान है. लेकिन दक्षिण में कांग्रेस की सरकार ने कॉन्ट्रैक्ट में 4 पर्सेंट के आरक्षण को पारित किया जाता है. कर्नाटक सरकार ने इसको लेकर बिल पास किया है. वहां के डेप्युटी चीफ मिनिस्टर में विधानसभा में बयान दिया है कि जरूरत पड़ी तो हम संविधान को भी बदलेंगे. कर्नाटक में मुस्लिमों को आरक्षण देने पर केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और किरेन रिजिजू ने खरगे से कांग्रेस का रुख साफ करने को कहा है.
जवाब में क्या बोली कांग्रेस?
नड्डा के सवाल पर जवाब देते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि किसने कहा कि हम संविधान बदलने वाले हैं. कोई भी डॉ आंबेडकर का संविधान बदल नहीं सकता है. संविधान की रक्षा के लिए हमने कर्नाटका से कश्मीर तक भारत जोड़ो किया, लेकिन इन्होंने भारत तोड़ने का काम किया है. उन्होंने कहा कि संविधान को बचाने वाले हम हैं ना कि ये बीजेपी वाले हैं.
पीएम मोदी ने कृष्णा भारती के निधन पर जताया शोक, याद की उनके संघर्षों और योगदान को
24 Mar, 2025 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
प्रसिद्ध गांधीवादी और सामाजिक कार्यकर्ता पासला कृष्णा भारती का रविवार को 92 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने नई दिल्ली स्थित अपने आवास पर अपनी अंतिम सांस ली। कृष्णा भारती के निधन से शोक की लहर दौड़ गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनकी मृत्यु पर शोक जताया और सोशल मीडिया पर खास नोट लिख भावभीनी श्रद्धांजलि दी। उन्हे वंचितों, विशेषकर दलितों के बीच शिक्षा को बढ़ावा देने के अपने प्रयासों और शैक्षणिक संस्थानों में अपने उदार योगदान के लिए जाना जाता है।
कौन थीं कृष्ण भारती
कृष्णा भारती जन्म से ही सुर्खियों में रही हैं। आंध्र प्रदेश के पश्चिमी गोदावरी जिले की रहने वाली उस महिला का जन्म जेल में हुआ था। उनकी माता का नाम अंजा लक्ष्मी था और पिता का नाम पासला कृष्ण मूर्ति जो स्वतंत्रता सेनानी थे। जानकारी के लिए बता दें कि कृष्णा भारती के माता-पिता भी स्वतंत्रता सेनानी थे जो स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान जेल में थे। वहीं कृष्णा भारती का जन्म हुआ। उन्होंने आजीवन अविवाहित रहने का प्रण किया और मरते दम तक सिर्फ देश के लिए सोचा। कृष्णा भारती के चार भाई और तीन बहनें थीं।
पीएम मोदी ने जताया दुख
कृष्णा भारती के निधन पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी दुख जताया। उन्होंने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर एक फोटो पोस्ट करते हुए खास नोट लिखा और कृष्णा भारती को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने लिखा- पासला कृष्णा भारती जी के निधन से बहुत दुःख हुआ। वह गांधीवादी मूल्यों के प्रति समर्पित थीं और उन्होंने अपना जीवन बापू के आदर्शों के माध्यम से राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने अपने माता-पिता की विरासत को शानदार ढंग से आगे बढ़ाया, जो हमारे स्वतंत्रता संग्राम के दौरान सक्रिय थे। मुझे याद है।
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री ने भी जताया दुख
पासला कृष्णा भारती के निधन पर आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने भी दुख जताया। उन्होंने लिखा- पश्चिम गोदावरी जिले के प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी पासला कृष्णमूर्ति और अंजलक्ष्मी की बेटी कृष्णा भारती जीवन भर गांधीवादी रहीं। उन्होंने गांधीजी द्वारा सिखाए गए मूल्यों का पालन किया। उन्होंने निम्न वर्गों में शिक्षा फैलाने के लिए काम किया। उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों और गौशालाओं को दान दिया। हमारे बीच ऐसे व्यक्ति का न होना बहुत बड़ी क्षति है।
भारत को 2025 तक टीबी मुक्त बनाने के लिए राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने किया संयुक्त आह्वान
24 Mar, 2025 09:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने लोगों से भारत को क्षयरोग मुक्त बनाने के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया। इस लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में गुजरात सबसे आगे चल रहा है। जबकि मेघालय सरकार ने राज्य के 4500 क्षय रोग के मरीजों को गोद ले लिया है, ताकि सौ दिन के सघन अभियान में भारत को टीबी-मुक्त बनाया जाए।
विश्व क्षय रोग (टीबी) दिवस के लिए दिए अपने संदेश में राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि इस दिन का उद्देश्य जनता को क्षयरोग के वैश्विक प्रभाव के बारे में जागरूक करना, बीमारी को नियंत्रित करने संबंधी चुनौतियों के बारे में जागरूकता बढ़ाना और इसे रोकने के प्रयासों का समर्थन करना है।
राष्ट्रपति ने की अपील
राष्ट्रपति ने कहा, 'यह दिन हमें क्षय रोग की शीघ्र पहचान, उपचार और रोकथाम के महत्व की भी याद दिलाता है। मैं सभी से भारत को क्षयरोग मुक्त बनाने के लिए मिलकर काम करने और इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सभी प्रयास करने का आह्वान करती हूं।'
विश्व क्षय रोग दिवस हर साल 24 मार्च को क्षयरोग पर जन जागरूकता बढ़ाने के लिए मनाया जाता है। डॉ. राबर्ट कोच ने 1882 में इसी दिन क्षयरोग का कारण बनने वाले जीवाणु की खोज की थी। इसी तरह, गुजरात ने नीति आयोग के टीबी के खात्मे के लक्ष्य को 95 प्रतिशत तक हासिल कर लिया है। वह इस लक्ष्य को साधने में अव्वल प्रदेश रहा है।
2025 तक खत्म करने का लक्ष्य
पीएम मोदी ने भारत में ट्यूबरकुलोसिस को वर्ष 2025 तक खत्म करने का लक्ष्य रखा है। वहीं, भारत सरकार ने सितंबर, 2022 में 'निक्षय मित्र' कार्यक्रम के तहत निजी स्तर पर, निजी संगठनों और सिविल सोसाइटी की मदद से ऐसे मरीजों को अंगीकार करना शुरू किया ताकि मरीजों को अतिरिक्त पोषण और इलाज के दौरान उचित देखभाल मिल सके।
लिहाजा, मेघालय ने टीबी के मरीजों का 'यूनिवर्सल निक्षय मित्र' बनकर राज्य के सभी टीबी मरीजों को अंगीकार कर लिया है। इसीतरह मेघालय के ईस्ट खासी हिल्स में 33 वर्षीय रिडालिन शुलाई टीबी (एमडीआर-टीबी) से अपनी लड़ाई जीत चुकी हैं और स्वस्थ हैं। बीमारी की गंभीरता के कारण उनका बाईं तरफ का फेफड़ा बेकार हो चुका था। लेकिन अब वह केवल दाईं ओर के फेफड़े के दम पर जीवित हैं।
आंधी और गर्मी से पस्त होगा दक्षिण भारत, असम में चक्रवात की संभावना
24 Mar, 2025 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार समेत देश के कई हिस्सों में बीते दिनों चली आंधी और बारिश से मौसम भले सुहाना हो गया हो, लेकिन अब आने वाले दिनों में आसमान से आग बरसने वाली है।
मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की है कि अगले 2-3 दिनों में देश के कई हिस्सों में तापमान तेजी से बढ़ेगा। हालांकि कुछ राज्यों में बारिश और ओलावृष्टि की भी संभावना जताई गई है। बीते 24 घंटे में आंध्र प्रदेश के अनंतपुर में सबसे अधिक अधिकतम तापमान 40.4 डिग्री दर्ज किया गया।
तीन चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय
अगर बीते 24 घंटे की बात करें, तो ओडिशा और केरल में कुछ स्थानों पर भारी वर्षा देखने को मिली। इसके अलावा उत्तराखंड, झारखंड, ओडिशा, रायलसीमा, तेलंगाना और कर्नाटक के कुठ हिस्सों में ओलावृष्टि देखने को मिली।
वहीं उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, ओडिशा, असम और मेघालय में तेज हवा और आंधी से मौसम ने नरमी आई। मौसम विभाग के मुताबिक, केंद्रीय उत्तर प्रदेश और पूर्वोत्तर असम और बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है।
तापमान में होगी बढ़ोतरी
मौसम विभाग के मुताबिक, इराक के आसपास एक नया पश्चिमी विक्षोभ भी सक्रिय हो रहा है। हालांकि इसका असर फिलहाल देखने को नहीं मिलेगा। दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत के अधिकांश स्थानों पर 24 मार्च को भीषण आंधी की संभावना जताई गई है।
देश के अधिकांश स्थानों पर अगले 3-4 दिनों के दौरान अधिकतम तापमान में 2 से 4 डिग्री की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। उत्तर पश्चिमी भारत के कई स्थानों पर अधिकतम तापमान में 3-5 डिग्री की बढ़ोतरी होगी।
इन स्थानों पर वज्रपात की चेतावनी
मध्य भारत और आंतरिक महाराष्ट्र में अगले 4-5 दिनों में तापमान में 2 से 4 डिग्री की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। इसके अलावा गुजरात में भी अगले 3 दिेनों के दौरान 2 से 3 डिग्री तापमान बढ़ सकता है।
24 मार्च को तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, असम, मेघायल, नगालैंड, ओडिशा, मणिपुर, त्रिपुरा में मेघगर्जन और वज्रपात की चेतावनी जारी की गई है। 25 मार्च को तमिलनाडु और कर्नाटक में मेघगर्जन और वज्रपात की चेतावनी है। वहीं 26 मार्च को जम्मू-कश्मीर में बारिश का अलर्ट है।
निर्मला सीतारमण का दावा: तमिलनाडु की अर्थव्यवस्था को मिल रहा है PLI योजना से बड़ा फायदा
24 Mar, 2025 08:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि तमिलनाडु को पीएलआई (उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन) योजना से सबसे अधिक लाभ मिला है। राज्य इस योजना के सबसे बड़े लाभार्थियों में से एक है। इसको इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल क्षेत्रों में परियोजनाओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मिला है।
उधर, द्रमुक की उप महासचिव और थूथुकुडी की सांसद कनिमोरी करुणानिधि ने तमिलनाडु के लिए फंड मांगने पर सीतारमण की टिप्पणियों की निंदा की है। बहरहाल, चेन्नई सिटिजेंस फोरम द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में सीतारमण ने उन दावों को खारिज कर दिया कि केंद्र सरकार ने वित्त पोषण के मामले में तमिलनाडु की अनदेखी की है।
तमिलनाडु को बताया लाभार्थी
उन्होंने कहा कि कई बड़ी परियोजनाओं की घोषणा की गई है और राज्य भर में विभिन्न चरणों में प्रगति हो रही है। वित्त मंत्री ने कहा, 'इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स और ऑटोमोबाइल में पीएलआई योजना के तहत तमिलनाडु सबसे बड़ा लाभार्थी रहा है।'
उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि तमिलनाडु ने इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स और ऑटोमोबाइल में इस योजना के तहत सबसे अधिक स्वीकृतियां हासिल की हैं। उन्होंने कहा, 'केंद्र से मंजूरी पाने वाली 27 कंपनियों में से सात तमिलनाडु से बाहर स्थित हैं।'
सीतारमण के अनुसार, पीएलआई योजना से लाभान्वित होने वाली लगभग 25 प्रतिशत कंपनियां राज्य में स्थित हैं। दूसरी ओर, कनिमोरी करुणानिधि ने रविवार को तमिलनाडु की केंद्रीय फंड में उचित हिस्सेदारी की मांग पर सीतारमण की हालिया टिप्पणियों की कड़ी आलोचना की और उन्हें व्यंग्यात्मक और खारिज करने वाला बताया।
द्रमुक सांसद ने दी चेतावनी
कनिमोरी ने कहा कि सीतारमण की टिप्पणियों ने राज्य द्वारा उठाई गई वैध ¨चताओं को कमतर करके आंका है। उन्होंने एक्स पर पोस्ट किया, ''हम कई सालों से तमिलनाडु और यहां के लोगों का मजाक उड़ाए जाने के खिलाफ लड़ रहे हैं। आपको एक पल के लिए रुककर सोचना चाहिए कि तमिलों का मजाक उड़ाने वालों का क्या हश्र हुआ है। क्या आप वाकई मानते हैं कि तमिलों और अपने अधिकारों के लिए हमारी लड़ाई मजाक का विषय है?''
द्रमुक सांसद ने यह भी चेतावनी दी कि तमिलनाडु के लोग निर्णायक जवाब देंगे। उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनावों के परिणाम की ओर इशारा करते हुए कहा कि भविष्य में विधानसभा के चुनावों में भी यही दोहराया जाएगा। लोकसभा चुनावों में भाजपा के नेतृत्व वाला राजग राज्य में एक भी सीट जीतने में विफल रहा था।
पीएम मोदी के जी-7 में हिस्सा लेने पर संशय बरकरार, क्या कहता है कनाडा?
23 Mar, 2025 03:03 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। कनाडा में जी-7 शिखर सम्मेलन में बमुश्किल तीन महीने बचे हैं, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस कार्यक्रम में भाग लेने पर सस्पेंस बरकरार है। मोदी 2019 से जी-7 में नियमित रूप से शामिल होते रहे हैं, लेकिन जब उनसे पूछा गया कि क्या इस साल के शिखर सम्मेलन में भारत को आमंत्रित किया जाएगा, इस पर मेजबान कनाडा ने मीडिया से कहा कि गेस्ट देशों की भागीदारी के बारे में अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है।
कनाडा की मौजूदा जी-7 अध्यक्षता के तहत 15-17 जून को कनानसकीस (अलबर्टा) में शिखर सम्मेलन की मेजबानी की जाएगी। दूसरी तरफ भारत के साथ उसके द्विपक्षीय संबंध ठंडे बने हुए हैं। साथ ही कनाडा अमेरिका के साथ एक अभूतपूर्व संकट के बीच में है, जिसने भयानक टैरिफ युद्ध को जन्म दिया है। आर्थिक रूप से सबसे उन्नत देशों के समूह के विदेश मंत्रियों ने इस महीने की शुरुआत में चार्लेवोइक्स में एकता का प्रदर्शन किया।
इसके साथ ही उन्होंने यूक्रेन के लिए अपने अटूट समर्थन की पुष्टि की, लेकिन जी-7 ट्रम्प के सहयोगियों के साथ व्यवहार और रूस को उसकी आक्रामकता के लिए बुलाने की अनिच्छा के बारे में चिंताओं से भरा हुआ है। जी-7 मीडिया रिलेशन टीम के एक कनाडाई अधिकारी ने कहा कि इस समय शिखर सम्मेलन के निमंत्रण पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है। अधिक जानकारी नियत समय में उपलब्ध कराई जाएगी।
कनाडा के लिए ट्रंप के दुस्साहस से निपटना प्रमुख काम
पता चला है कि खालिस्तान हत्याकांड की साजिश के प्रति अपने लापरवाह रवैये के कारण भारत के साथ संबंधों को खराब करने के लिए व्यापक रूप से दोषी ठहराए जाने वाले पूर्व कनाडाई पीएम जस्टिन ट्रूडो ने मेहमानों का चयन अपने उत्तराधिकारी पर छोड़ दिया है। नए कनाडाई पीएम मार्क कार्नी ने कहा है कि वह भारत के साथ संबंधों को फिर से बनाना चाहते हैं, लेकिन वर्तमान में उनके सामने ट्रंप के दुस्साहस से निपटने का कठिन काम है। कार्नी ने यह भी कहा है कि वह नए भागीदारों के साथ व्यापारिक संबंध बनाना चाहते हैं। साथ ही जी-7 में सबसे मजबूत अर्थव्यवस्था का निर्माण करना चाहते हैं। जाहिर है, शिखर सम्मेलन स्थल पर सीमित स्थान भी बहुत कम या यहां तक कि कोई भी अतिथि नेता न होने का एक कारण हो सकता है।
निज्जर मामले से संबंधों में आई गिरावट
कार्नी अब तक खालिस्तान समर्थक हरदीप सिंह निज्जर की हत्या पर चुप रहे हैं। इसके कारण राजनयिक संबंधों में नाटकीय गिरावट आई है। भारत ने कहा है कि वह आपसी विश्वास और संवेदनशीलता के आधार पर संबंधों को फिर से बनाने की उम्मीद करता है, लेकिन संभवतः अगले चुनावों के परिणाम देखने के लिए इंतजार करेगा। आरसीएमपी, जिसने मामले की जांच की है, का कहना है कि ट्रूडो की स्थिति एजेंसी की तरफ से दी गई जानकारी के आधार पर थी।
पीएम मोदी और उनके पूर्ववर्ती मनमोहन सिंह दोनों को पहले भी जी-7 शिखर सम्मेलन के लिए आमंत्रित किया जा चुका है। दरअसल, मोदी 2019 से नियमित रूप से वहां जाते रहे हैं, जब फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रोन ने उन्हें बियारिट्ज में बैठक के लिए आमंत्रित किया था। फिर ट्रंप प्रशासन ने भी उन्हें 2020 में कैंप डेविड शिखर सम्मेलन के लिए आमंत्रित किया था। हालांकि बाद में कोविड-19 के कारण इसे रद्द कर दिया गया था।
चीन फिर करने लगा खुरापात, भारत ने सुनाई खरी-खरी
23 Mar, 2025 11:21 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लद्दाख। चीन ने एक बार फिर खुरापात शुरु कर दी है। उसने लद्दाख से सटे सीमावर्ती इलाके में दो नए जिलों की स्थापना का ऐलान किया है। चीन के इस ऐलान पर भारत ने कड़ी आपत्ति जताई है। केंद्र सरकार ने संसद में जानकारी दी कि इस मुद्दे पर कूटनीतिक माध्यमों से चीन के खिलाफ औपचारिक विरोध दर्ज कराया गया है। विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने लोकसभा में एक लिखित जवाब में कहा, भारत सरकार ने कभी भी इस क्षेत्र में भारतीय भूभाग पर चीन के अवैध कब्जे को स्वीकार नहीं किया है।
इन नए जिलों का निर्माण भारत की संप्रभुता पर हमारे लंबे और स्पष्ट रुख को प्रभावित नहीं करेगा, न ही चीन के अवैध और जबरन कब्जे को कोई वैधता देगा।संसद में सरकार से यह सवाल पूछा गया था कि क्या उसे चीन द्वारा होटान प्रीफेक्चर में दो नए जिले बनाने की जानकारी है, जिसमें लद्दाख के भारतीय क्षेत्र का हिस्सा शामिल किया गया है। इसके अलावा, इस स्थिति से निपटने के लिए उठाए गए रणनीतिक और कूटनीतिक कदमों के बारे में भी जानकारी मांगी गई थी।
मंत्री ने जवाब देते हुए कहा कि सरकार इस घोषणा से पूरी तरह अवगत है और वह चीन की ओर से सीमावर्ती क्षेत्रों में किए जा रहे बुनियादी ढांचे के विकास पर नजर रखे हुए है। उन्होंने कहा,भारत सरकार सीमा क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास पर विशेष ध्यान देती है ताकि न केवल इन क्षेत्रों का आर्थिक विकास हो, बल्कि भारत की रणनीतिक और सुरक्षा आवश्यकताओं को भी पूरा किया जा सके।
गाय का दूध पीते ही महिला की हुई मौत, पता चला दूध में थे रैबीज के वायरस!
23 Mar, 2025 10:14 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ग्रेटर नोएडा। कई बार रैबीज इन्फेक्टेड जानवर के लार के इंसानी घाव या खुले अंग के सम्पर्क में आने से भी हो जाता है। इसके अलावा रैबीज इंफेक्टेड जानवर के दूध के सेवन से भी ये इंफेक्शन हो सकता है। ऐसा ही एक मामला ग्रेटर नोएडा से सामने आया है जहां रैबीज इंफेक्टेड गाय का दूध पीने से एक महिला की मौत हो गई।
महिला ग्रेटर नोएडा में रहती थी। उसके घर पर मौजूद एक गाय को गली के जंगली कुत्ते ने काट लिया था। लेकिन घरवालों को इसकी जानकारी नहीं थी। गाय को रैबीज हो गया था। लेकिन इस बात से अनजान घरवाले उसका दूध पीते रहे। हालांकि, जब घरवालों ने गाय में रैबीज के लक्षण देखे तो तुरंत ही इंजेक्शन लगवा लिया। लेकिन महिला ने इंजेक्शन नहीं लगवाया। इसके बाद उसकी मौत हो गई।गाय ने दो महीने पहले ही बछड़े को जन्म दिया था। महिला ने बच्चा होने के बाद गाय द्वारा दिए गए दूध का सेवन किया था। इस गाय का दूध गांव के अन्य लोगों ने भी पिया था। गांव के दस लोगों ने गाय को रैबीज होने की जानकारी होने के बाद इंजेक्शन लिया था। लेकिन महिला ने ऐसा नहीं किया। इसका अंजाम ये हुआ कि महिला को इंफेक्शन हो गया और आखिरकार उसकी मौत हो गई।रैबीज होने के बाद महिला को अचानक ही रौशनी और पानी से डर लगने लगा। वो घबराने लगी। पानी देखते ही चीखने लगती। इसकी वजह से घरवाले तुरंत उसे डॉक्टर के पास लेकर गए। लेकिन कहीं भी उसका इलाज नहीं हो पाया। कई अस्पताल से उसे वापस लौटा दिया गया। जिला अस्पताल के डॉक्टर्स ने महिला को घर ले जाने की सलाह दी जहां उसने अपनी अंतिम सांसें ली।
गोधरा के बाद हुए दंगों के मामले के छह आरोपियों को सुप्रीम कोर्ट ने बरी किया
23 Mar, 2025 09:13 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात के गोधरा कांड के बाद हुए दंगों के मामले के छह आरोपियों को बरी किया। सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाकर कहा कि किसी मामले में सिर्फ मौके पर मौजूद होना या वहां से गिरफ्तारी होना यह साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है कि वे गैरकानूनी भीड़ के हिस्सा थे।
जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने गुजरात हाईकोर्ट के 2016 के फैसले को खारिज कर दिया, जिसमें गोधरा कांड के बाद 2002 में हुए दंगों के मामले में छह लोगों को बरी करने के फैसले को पलट दिया था।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि सिर्फ मौके पर मौजूद होना या वहां से गिरफ्तारी होना यह साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है कि वे गैरकानूनी भीड़ का हिस्सा थे।
धीरूभाई भाईलालभाई चौहान और पांच अन्य को तब घटना में एक साल की जेल की सजा सुनाई गई थी, जिसमें कथित तौर पर भीड़ ने वडोद गांव में एक कब्रिस्तान और एक मस्जिद को घेर लिया था। सभी अपीलकर्ता आरोपियों को मौके से गिरफ्तार किया था।
निचली अदालत ने सभी 19 आरोपियों को बरी किया था, लेकिन हाईकोर्ट ने उसमें 6 को दोषी ठहराया। एक आरोपी की मामला लंबित रहने के दौरान मौत हो गई थी। अपीलकर्ताओं सहित 7 लोगों को एफआईआर में नामजद किया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने एक निचली अदालत के 2003 के फैसले को बहाल कर उन्हें बरी किया। कोर्ट ने कहा कि किसी भी तरह की दोषी भूमिका के अभाव में मौके पर उनकी गिरफ्तारी 28 फरवरी 2002 को वडोद में हुई घटना में उनकी संलिप्तता के बारे में बताती
बेंच ने कहा कि पुलिस ने गोलीबारी की, जिससे लोग इधर-उधर भागने लगे। इस तरह की झड़प में एक निर्दोष व्यक्ति को भी अपराधी समझा जाता है। इसलिए, अपीलकर्ताओं की मौके से गिरफ्तारी उनकी दोषी होने की गारंटी नहीं है।
बेंच ने कहा कि सामूहिक झड़पों में अदालतों पर यह सुनिश्चित करने का भारी दायित्व होता है कि किसी भी निर्दोष व्यक्ति को दोषी न ठहराया जाए और उसकी स्वतंत्रता छीनी न जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में अदालतों को सावधान रहना चाहिए और उन गवाहों की गवाही पर भरोसा करने से बचना चाहिए, जो आरोपी या उसकी भूमिका का विशेष संदर्भ दिए बिना सामान्य बयान देते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले में अपीलकर्ता उसी गांव के निवासी थे, जहां दंगे भड़के थे, इसलिए घटनास्थल पर उनकी उपस्थिति स्वाभाविक है। कोर्ट ने कहा कि इतना ही नहीं अभियोजन पक्ष का यह मामला नहीं है कि वे हथियार या विध्वंस के उपकरण लेकर आए थे। बेंच ने कहा, हाईकोर्ट द्वारा लिया गया विपरीत दृष्टिकोण पूरी तरह से अनुचित है।
सीमा हैदर ने दिया बच्ची को जन्म, पाकिस्तानी पति गुलाम में लगी मिर्ची
23 Mar, 2025 08:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पाकिस्तान से भारत आई सीमा हैदर और उसके पति सचिन मीणा के घर खुशखबरी आई है। गत 18 मार्च की सुबह हॉस्पिटल में सीमा ने एक बेटी को जन्म दिया। इस खुशी में जहां सीमा-सचिन का परिवार झूम रहा है, वहीं पाकिस्तान में सीमा के पूर्व पति गुलाम हैदर ने नाराजगी जाहिर की है। गुलाम हैदर ने वीडियो जारी किया, जिसमें उन्होंने सीमा के नवजात बच्चे को ‘नाजायज बताया है। साथ ही, सीमा के वकील ए.पी. सिंह पर भी निशाना साधकर कहा कि वह ‘नाजायज औलाद’ के जन्म पर बधाई देकर भारत को बदनाम कर रहे हैं।
गुलाम ने भारत सरकार से फिर सीमा के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। गुलाम ने कहा कि वह पिछले दो साल से अपने चार बच्चों से मिलने के लिए बेताब है। गुलाम ने आरोप लगाया कि सीमा बिना तलाक के सचिन से शादी कैसे कर सकती है? ‘अब उसने नाजायज बच्चे को जन्म दिया है, यह गुनाह है। वह चाहे जहां रहे, लेकिन मेरे चार बच्चे मुझे सौंप दें। गुलाम ने भारतीय प्रशासन पर भी सवाल उठाकर कहा कि पुलिस और अधिकारी मामले में मूकदर्शक बने हुए है। उन्होंने दावा किया कि सीमा की बहन रीमा भी इस फैसले से खुश नहीं है।
गुलाम हैदर ने भारत सरकार से भी गुहार लगाई हैं कि मैं दो साल से अपने बच्चों को देख भी नहीं पाया हूं। उनकी आवाज तक नहीं सुनी। सीमा खुलेआम जो चाहे कर रही है। क्या वहां उसे कोई रोकने वाला नहीं है?’
हरियाणा के मंत्री अनिल विज ने कर्नाटक में मुस्लिमों को 4% आरक्षण पर उठाए सवाल, कहा- "यह ठीक नहीं "
22 Mar, 2025 03:53 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कर्नाटक में सरकारी कामों में मुस्लिम कोटा को लेकर सियासत गर्मा गई है. BJP इसको लेकर कांग्रेस सरकार पर हमलावर है. हरियाणा में अनिल विजन ने देश को बांटने वाला फैसला करार देते हुए कहा कि मुस्लिमों ने 400 सालों तक हिंदुस्तान पर राज किया है, ऐसे में उनको छूट देने की जरूरत क्या है. वहीं बिहार में BJP के OBC मोर्चा के राष्ट्रीय महासचिव निखिल आनंद ने कांग्रेस पर 'धर्मनिरपेक्षता के नाम पर मुस्लिम तुष्टिकरण' की नीति अपनाने का आरोप लगाया.
'मुस्लिमों ने 400 साल राज किया, आरक्षण क्यों?'
हरियाणा सरकार में कैबिनेट मंत्री अनिल विज ने कहा कि 'कर्नाटक में सरकारी कामों में मुस्लिमों को 4% आरक्षण दिया है. इसको किसी भी प्रकार से ठीक नहीं ठहराया जा सकता है. मुस्लिमों ने 400 साल हमारे ऊपर राज किया है. उनको किसी छूट की क्या जरूरत है.' विज ने कांग्रेस पर भड़कते हुए कहा यह समाज को बांटने का काम है. दूध में दही डाल दी गई है. यह फट जाए. यह कांग्रेस के चरित्र में है. कांग्रेस ने 1947 में अपनी इसी सोच के कारण देश का बंटवारा करवाया है. जमीन का बंटवारा तो करवा दिया गया, लेकिन एक साजिश के तहत फिर देश को बांटने की साजिश चल रही है.
OBC आरक्षण में मुसलमानों को बाहर करने पर जोर
बिहार में BJP के OBC मोर्चा के राष्ट्रीय महासचिव निखिल आनंद ने कहा, "कांग्रेस मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति द्वारा प्रचारित विभाजनकारी एजेंडे को आगे बढ़ाकर इस देश को तोड़ना चाहती है. कर्नाटक सरकार ने जिस तरह से मुसलमानों को अलग धार्मिक कोटा देने का विधेयक पारित किया है, वह पूरी तरह से अनुचित है और हर OBC को इस कदम का विरोध करने की जरूरत है." आनंद ने कहा, "कांग्रेस एंड कंपनी द्वारा SC-ST और OBC के हितों को नुकसान पहुंचाने के लिए अलग मुस्लिम आरक्षण का खेल खेला जा रहा है."
उन्होंने कहा, "अगर ऐसा है, तो समय आ गया है कि OBC आरक्षण की परिधि में सुविधा प्राप्त करने वाले सभी मुसलमानों को बाहर किया जाना चाहिए. यह समझने का समय आ गया है कि धर्मनिरपेक्षता के नाम पर सामाजिक न्याय और मुस्लिम तुष्टिकरण एक साथ नहीं चल सकते. यह OBC के हितों को कमजोर करने की एक गंभीर साजिश है." आनंद ने कहा, "OBC को अपने अधिकारों के लिए जागना चाहिए और मुसलमानों को OBC आरक्षण से बाहर करने की लड़ाई के साथ-साथ धार्मिक आरक्षण को रोकने के लिए भी मुहिम छेड़नी होगी."
इलाहाबाद हाईकोर्ट की दुष्कर्म पर टिप्पणी विवादित, कपिल सिब्बल ने जताई नाराजगी
22 Mar, 2025 02:53 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
यौन अपराध से जुड़े एक मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणी की कानून विशेषज्ञों ने शुक्रवार 22 मार्च को निंदा की है. हाईकोर्ट ने मामले में फैसला सुनाते हुए कहा था कि किसी लड़की के निजी अंग को पकड़ना और उसके पायजामे का नाड़ा तोड़ना दुष्कर्म या दुष्कर्म के प्रयास का मामला नहीं माना जा सकता. सीनियर एडवोकेट और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कपिल सिब्बल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक पोस्ट में कहा, 'भगवान ही इस देश को बचाए, क्योंकि पीठ में इस तरह के न्यायाधीश विराजमान हैं! सुप्रीम कोर्ट गलती करने वाले जजों से निपटने के मामले में बहुत नरम रहा है.'
कपिल सिब्बल: जजों को ऐसी टिप्पणियों से बचना चाहिए
कपिल सिब्बल ने कहा कि जजों, खासकर हाईकोर्ट के जजों को ऐसी टिप्पणियां करने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे समाज में गलत संदेश जाएगा और लोगों का न्यायपालिका पर से भरोसा उठ जाएगा. उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि इस तरह की विवादास्पद टिप्पणी करना अनुचित है, क्योंकि मौजूदा समय में न्यायाधीश जो कुछ भी कहते हैं, उससे समाज में एक संदेश जाता है. अगर न्यायाधीश, खासतौर पर हाईकोर्ट के जज, इस तरह की टिप्पणियां करते हैं, तो इससे समाज में गलत संदेश जाएगा और लोगों का न्यायपालिका पर से भरोसा उठ जाएगा.'
कानून विशेषज्ञों ने जजों से संयम बरतने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि इस तरह की टिप्पणियों से ज्यूडिशियरी में लोगों का भरोसा कम होता है. सीनियर एडवोकेट और पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता पिंकी आनंद ने कहा कि मौजूदा दौर में खासतौर पर सतीश बनाम महाराष्ट्र राज्य जैसे मामलों के बाद, इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले ने बलात्कार के प्रयास जैसे जघन्य अपराध को कमतर करके आंका है, जो न्याय का उपहास है.
पिंकी आनंद: महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधियों को सजा मिलनी चाहिए
पिंकी आनंद ने कहा, 'लड़की के निजी अंगों को पकड़ने, उसके पायजामे का नाड़ा तोड़ने, उसे घसीटकर पुलिया के नीचे ले जाने की कोशिश करने और सिर्फ हस्तक्षेप के बाद ही भागने जैसे तथ्यों के मद्देनजर यह मामला पूरी तरह से बलात्कार के प्रयास की श्रेणी में आता है. जिसमें 11 साल की लड़की के साथ बलात्कार की मंशा से हर संभव हरकत की गई.'
उन्होंने कहा कि अब पुन: जागृत होने का समय आ गया है. पिंकी आनंद ने कहा, 'कानून का उल्लंघन करने वालों और महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध करने वालों को बख्शा नहीं जा सकता और यह फैसला स्पष्ट रूप से गलत है, क्योंकि यह इस बात को नजरअंदाज करता है. मुझे पूरा भरोसा है कि इस तरह के फैसले को उचित तरीके से पलटा जाएगा और न्याय होगा.'
विकास पाहवा: यौन हिंसा के पीड़ितों का विश्वास कम होगा
सीनियर एडवोकेट विकास पाहवा ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट की व्याख्या, बलात्कार के प्रयास की संकीर्ण परिभाषा देकर एक चिंताजनक मिसाल कायम करती प्रतीत होती है. विकास पाहवा ने कहा, 'इस तरह के फैसलों से यौन हिंसा के पीड़ितों की सुरक्षा के प्रति न्यायिक प्रणाली की प्रतिबद्धता में जनता का विश्वास कम होने का खतरा है. ऐसे फैसले पीड़ितों को आगे आने से भी हतोत्साहित कर सकते हैं, क्योंकि उन्हें डर होगा कि उनके साथ हुई हरकतों को कमतर आंका जाएगा या खारिज कर दिया जाएगा.'
उन्होंने कहा, 'यह जरूरी है कि न्यायपालिका अधिक पीड़ित-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाए और यह सुनिश्चित करे कि दुष्कर्म की मंशा दर्शाने वाली हरकतों को उचित रूप से पहचाना जाए और उनके खिलाफ मुकदमा चलाया जाए, ताकि न्याय प्रणाली में लोगों का विश्वास बना रहे और संभावित अपराधियों पर लगाम लगाई जा सके.' समन जारी करने के चरण में अदालतें आमतौर पर सबूतों के विश्लेषण पर गहराई से विचार किए बिना यह आकलन करती हैं कि आरोपों के आधार पर प्रथम दृष्टया मामला बनता है या नहीं. उन्होंने कहा, 'इस प्रारंभिक चरण में अपराध की प्रकृति का पुनर्मूल्यांकन करके हाईकोर्ट ने अपने अधिकार क्षेत्र का अतिक्रमण किया है, क्योंकि इस तरह का मूल्यांकन आमतौर पर सुनवाई के चरण में होता है.'
पीके दुबे: न्यायाधीशों को कानून और न्यायशास्त्र का पालन करना चाहिए
वरिष्ठ अधिवक्ता पीके दुबे ने विकास पाहवा की राय से सहमति जताते हुए कहा कि इस तरह की व्याख्या उचित नहीं थी. उन्होंने कहा, 'न्यायाधीश के निजी विचारों के लिए कोई जगह नहीं है और उन्हें स्थापित कानून और न्यायशास्त्र का पालन करना चाहिए.' पीके दुबे ने कहा कि यौन अपराधों से जुड़े मामलों में इस बात पर विचार किया जाता है कि क्या किसी भी रूप में यौन मंशा जाहिर हुई, साथ ही यह तथ्य भी देखा जाता है कि उक्त कृत्य से क्या पीड़ित को चोट पहुंची. उन्होंने कहा, 'यौन प्रवेशन जरूरी नहीं है और इस तरह की हरकतें भी यौन कृत्य के बराबर हैं, जिनके लिए व्यक्ति को सजा दी जा सकती है. पीड़िता के निजी अंग को छूना ही काफी है और यह बलात्कार के बराबर है.'
मामला उत्तर प्रदेश के कासगंज में 11 साल की एक लड़की से जुड़ा है, जिस पर 2021 में दो लोगों ने हमला किया था. इलाहाबाद हाईकोर्ट की जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा की बेंच ने फैसला सुनाया कि केवल निजी अंगों को पकड़ना और पायजामा का नाड़ा तोड़ना बलात्कार के अपराध की श्रेणी में नहीं आता है, बल्कि ऐसा अपराध किसी महिला को निर्वस्त्र करने के इरादे से उस पर हमला करने या आपराधिक बल प्रयोग के दायरे में आता है.
चंद्रबाबू नायडू का तिरुमला मंदिर पर बड़ा फैसला, मंदिर क्षेत्र में सिर्फ हिंदू ही करेंगे काम
22 Mar, 2025 02:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
आंध्रप्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू ने शुक्रवार को कहा कि तिरुमला मंदिर में केवल हिंदू धर्म के लोगों को ही नौकरी दी जाएगी। अगर अन्य धर्मों के लोग यहां काम कर रहे हैं तो उनकी धार्मिक भावनाएं आहत किए बिना उन्हें दूसरी जगहों पर ट्रांसफर किया जाएगा। सीएम नायडू ने घोषणा की भारत के अन्य राज्यों में भी तिरुमला के मंदिर बनाए जाएंगे। हम इसके लिए सभी राज्यों के सीएम को पत्र भेजेंगे।
मुमताज होटल की मंजूरी रद्द
सीएम नायडू ने कहा कि भगवान वेंकटेश्वर की संपत्तियों की सुरक्षा के लिए एक पवित्र धागा बांधा गया है। उन्होंने आगे कहा कि विदेशों में बसे हिंदू भी चाहते हैं कि वहां भगवान वेंकटेश्वर के मंदिर बनाए जाएं। इसलिए दुनिया भर में जहां भी हिंदू समुदाय की बहुलता है वहां वेंकटेश्वर मंदिर बनाए जाएंगे। सीएम ने सेवन हिल्स के पास काॅमर्शियल एक्टीविटीज पर भी प्रतिबंध लगाने की बात कही है। उन्होंने बताया कि सरकार ने मुमताज होटल की मंजूरी भी रद्द कर दी है।
अन्य धर्म के लोगों का सम्मान करेगी सरकार
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि अगर ईसाई और मुस्लिम संस्थान नहीं चाहते कि उनके धार्मिक संस्थाओं में हिंदू काम नहीं करें तो सरकार उनकी भावनाओं का सम्मान करेगी। इसके साथ ही सीएम ने मुमताज होटल के लिए आवंटित 35 एकड़ जमीन को भी रद्द करने का फैसला किया है। यह फैसला जगह की पवित्रता को ध्यान में रखकर किया गया है। बता दें कि यह जमीन पिछली वाईएसआर सरकार में आवंटित की गई थी।
नायडू ने अपने परिवार के साथ मंदिर में पूजा-अर्चना की। सीएम ने अपने पोते के जन्मदिन पर मंदिर में एक दिन के अन्न प्रसादम का आयोजन किया। नायडू और उनके परिवार के लोगों ने व्यक्तिगत तौर पर स्वयं भक्तों को भोजन परोसा। सीएम ने टीडीपी बोर्ड के अधिकारियों और कर्मचारियों से मंदिर की पवित्रता बनाए रखने के लिए और अधिक प्रयास करने की बात कही।
वनाधिकार पट्टा और पीएम आवास से मुरिया परिवार को मिला नया जीवन
वर्मी कंपोस्ट उत्पादन बनी आत्मनिर्भरता की मिसाल
राज्यपाल पटेल से भारतीय विदेश सेवा के प्रशिक्षु अधिकारी मिले
मध्यप्रदेश को सामाजिक न्याय के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने के लिये करें समन्वित प्रयास : मंत्री कुशवाह
लेमनग्रास -किसानों के लिए कम पानी में ज्यादा कमाई का साधन
चेकडैम बना ग्रामीण आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार, जल संरक्षण से बदली खेती की तस्वीर
कौशल और सामाजिक उद्यमिता से होगा भारत विकसित : राज्यपाल पटेल
द्वारका नगरी योजना से शहरी विकास को मिलेगी नई गति : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से बदली तस्वीर
