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दिल्ली मेट्रो: 70 लाख यात्रियों सहित रोजाना एक करोड़ लोगों की सुरक्षा बढ़ेगी
5 Mar, 2026 05:37 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने गत वर्ष केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) की अधिकृत अधिकतम संख्या को 02 लाख से बढ़ाकर 2.2 लाख कर्मियों तक करने की मंजूरी दी है। अगस्त 2025 में स्वीकृत यह 10 प्रतिशत की वृद्धि हवाई अड्डों, बंदरगाहों और औद्योगिक केंद्रों जैसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से की गई है। अगले पांच वर्षों तक प्रतिवर्ष लगभग 14000 कर्मियों की भर्ती की जाएगी। सीआईएसएफ द्वारा दिल्ली मेट्रो के 70 लाख यात्रियों सहित रोजाना एक करोड़ लोगों की सुरक्षा की जा रही है। इस संख्या में हवाई अड्डे पर 15 लाख यात्री और तैनाती की अन्य इकाइयों में 15 लाख लोग भी शामिल हैं।
सीआईएसएफ का 57वें रेजिंग डे, जो बल के क्षेत्रीय प्रशिक्षण केंद्र, मुंडली कटक में छह मार्च को आयोजित किया जा रहा है, से पहले गुरुवार को डीजी सीआईएसएफ प्रवीर रंजन ने यह जानकारी दी है। सीआईएसएफ रेजिंग डे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, परेड की सलामी लेंगे। अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 की अवधि के दौरान, सीआईएसएफ को 10 इकाइयों में शामिल किया गया है।
• कर्तव्य भवन (सीसीएस-1, 2 और 3), नई दिल्ली
• सेवा तीर्थ (कैबिनेट सचिवालय और एनएसए बिल्डिंग), नई दिल्ली
• क्षेत्रीय रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस), नई दिल्ली
• नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, नोएडा (यूपी)
• नवी मुंबई हवाई अड्डा, (महाराष्ट्र)
• लेंगपुई हवाई अड्डा, (मिजोरम)
• जवाहरपुर थर्मल पावर प्रोजेक्ट, एटा (यूपी)
• भाखड़ा बांध परियोजना, नंगल (पंजाब)
• एनटीपीसी तलाईपल्ली कोयला खनन परियोजना, (छत्तीसगढ़)
• एचपीसीएल-राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड, पचपदरा (राजस्थान)
361 महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा ...
पिछले 57 वर्षों में, सीआईएसएफ की क्षमता और सामर्थ्य में कई गुना वृद्धि हुई है। मौजूदा समय में दो लाख कर्मियों की संख्या के साथ, सीआईएसएफ 25 राज्यों और 5 केंद्र शासित प्रदेशों में फैले 361 महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों को सुरक्षा प्रदान करती है। इनमें 71 हवाई अड्डे, दिल्ली मेट्रो रेल, 10 रसायन एवं उर्वरक संयंत्र, 105 विद्युत संयंत्र, 18 परमाणु प्रतिष्ठान, अंतरिक्ष विभाग के 16 प्रतिष्ठान, भारत सरकार के प्रमुख मंत्रालयों वाले 47 सरकारी भवन, 15 बंदरगाह, 6 रक्षा इकाइयाँ, 36 तेल एवं प्राकृतिक गैस इकाइयाँ, 17 इस्पात संयंत्र और 10 कोयला खदानें, 9 निजी क्षेत्र आदि शामिल हैं। सीआईएसएफ का विशेष सुरक्षा समूह (एसएसजी) 156 से अधिक संरक्षित व्यक्तियों को सुरक्षा प्रदान करता है। सीआईएसएफ का विशेष अग्निशमन दल, जिसमें लगभग 9700 कर्मी हैं, देश के 23 राज्यों में फैली 114 इकाइयों को अग्निशमन सेवाएं प्रदान करता है।
सभी रैंकों की भर्ती में महिलाओं का प्रतिशत 12.75 ...
2025 में सभी रैंकों में भर्ती किए गए कर्मियों में से 12.75 प्रतिशत महिलाएं थीं। 2026 में महिलाओं की संख्या कुल भर्ती का लगभग 8-9 फीसदी रहने का प्रस्ताव है। मुख्य रूप से बल की तैनाती की प्रकृति के कारण पदोन्नति में ठहराव से संबंधित शिकायतों को दूर करने के लिए, सीआईएसएफ ने कांस्टेबल और सहायक सब-इंस्पेक्टर के पदों के लिए क्रमशः वरिष्ठ कांस्टेबल और स्थानीय रैंक की प्रणाली शुरू की है। इसके चलते 32545 कांस्टेबलों को वरिष्ठ कांस्टेबल के रूप में नामित किया गया है। 1050 सहायक सब-इंस्पेक्टरों को सब-इंस्पेक्टर का स्थानीय रैंक प्रदान किया गया है। इस पहल से बल के मनोबल में उल्लेखनीय वृद्धि और कर्मियों के बीच प्रेरणा में वृद्धि होने की उम्मीद है। सभी केंद्रीय बलों में सीआईएसएफ में महिलाओं की संख्या सबसे अधिक है। वर्तमान में बल में महिलाओं की संख्या इसकी कुल संख्या का 8 प्रतिशत से अधिक है।
रिमोट पायलट प्रशिक्षण संगठन की स्थापना को मंजूरी ...
हवाई सुरक्षा, जिसे उच्च प्राथमिकता की श्रेणी में रखा गया है, के मद्देनजर सीआईएसएफ ने एमपीआरटीसी बहरोर में ड्रोन प्रशिक्षण और ड्रोन-रोधी क्षमता प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने ड्रोन संचालन और ड्रोन-रोधी प्रणालियों के प्रशिक्षण के लिए रिमोट पायलट प्रशिक्षण संगठन (आरपीटीओ) की स्थापना को मंजूरी दे दी है। सीआईएसएफ को महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों पर हवाई खतरे के लिए नोडल एजेंसी नामित किया गया है। विमानन सुरक्षा के तहत उन्नत फुल बॉडी स्कैनर, वीडियो विश्लेषण, साइबर सुरक्षा के लिए साइबर कमांडो, आदि मुहैया कराए जा रहे हैं। सीसीटीवी वीडियो विश्लेषण और एआई/एमएल का उपयोग करके डेटा विश्लेषण के साथ एकीकृत उन्नत कमांड सेंटर विकसित किया गया है। एआई/एमएल का उपयोग करके उन्नत बायोमेट्रिक्स एक्सेस कंट्रोल सिस्टम तैयार किया जा रहा है।
युवाओं को भारत आने का न्योता, जस्टिस Surya Kant ने भूटान को सुझाव दिया
5 Mar, 2026 05:29 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भूटानी। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने गुरुवार को भूटान की न्यायिक प्रणाली में प्रौद्योगिकी-आधारित सुधारों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि न्याय तक पहुंच तकनीकी प्रगति के अधिक उपयोग पर से निर्भर करती है। उन्होंने थिम्पू में भूटान के रॉयल विश्वविद्यालय में '21वीं सदी में न्याय तक पहुंच: प्रौद्योगिकी, कानूनी सहायता और जनकेंद्रित न्यायालय' विषय पर भाषण दिया। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे से कहा कि भारत का सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालयों के साथ मिलकर, भूटानी छात्रों को इंटर्नशिप करने का मौके देंगे, तो अधिक खुशी होगी।
प्रौद्योगिकी इस युग में केवल एक आधुनिक माध्यम- न्यायाधीश सूर्यकांत
उन्होंने कहा कि हमें याद रखना चाहिए कि प्रौद्योगिकी इस युग में केवल एक आधुनिक माध्यम है। हमारा कर्तव्य यह सुनिश्चित करना है कि जहां 21वीं सदी के कुछ चीजें जटिल हो गई हैं। वहीं, कुछ चीजें आम लोगों की भाषा की तरह ही सरल और सुलभ बने रहें। मुख्य न्यायाधीश ने कहा, हमें यह बात पूरी दृढ़ता से समझनी चाहिए कि न्याय कोई एकांत सद्गुण नहीं है, जो अदालत के भारी लकड़ी के दरवाजों के पीछे बंद हो, बल्कि, यह एक जीवंत उपस्थिति है जिसे दुनिया में, ऊंची घाटियों और हलचल भरे बाजारों में, और लोगों के घरों तक पहुंचने की अनुमति दी जानी चाहिए।" उन्होंने कहा, "अदालत की कार्यप्रणाली का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त करना गुणवत्तापूर्ण कानूनी शिक्षा का एक अनिवार्य हिस्सा है।" मुख्य न्यायाधीश कांत ने जोर देते हुए कहा, "यदि हम अपनी विरासत के प्रति सच्चे रहना चाहते हैं, तो हमारे तकनीकी सुधारों को न केवल यथास्थिति का डिजिटलीकरण करना चाहिए, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया के मूल सार का लोकतंत्रीकरण भी करना चाहिए।"
उन्होंने कहा कि भारतीय न्यायिक प्रणाली में मूल रूप से हस्तलिखित दलीलों, मौखिक गवाहों के बयानों, मौखिक प्रस्तुतियों, शायद ही कभी दस्तावेजी साक्ष्यों और केवल एक लिखित निर्णय वाली पारंपरिक फाइलें शामिल थीं। "ये फाइलें भारी-भरकम थीं, जिसके कारण रिकॉर्ड रखने के लिए जगह की कमी हो जाती थी, अक्सर अपर्याप्त अदालत कक्षों में जहां न्यायिक अधिकारी, पीठासीन न्यायाधीश, अक्सर फाइलों के पीछे छिपे हुए पाए जाते थे।"
21वीं सदी में कानूनी क्षेत्र में एक खास बदलाव
मुख्य न्यायाधीश ने कहा, "न्यायिक बुनियादी ढांचे में सुधार के साथ बदलाव शुरू हुए, जैसे कि अधिक अदालतों की स्थापना, अतिरिक्त कर्मचारी और रिकॉर्ड कक्षों की स्थापना।" उन्होंने आगे कहा कि महत्वपूर्ण बदलाव केवल 21वीं सदी में आया, जब विश्व स्तर पर कानूनी क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन हुआ। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी कानूनी कार्यों को करने के तरीके, कानूनी पेशेवरों और
न्यायाधीशों द्वारा सूचनाओं के साथ जुड़ने के तरीके और सबसे महत्वपूर्ण बात, नागरिकों द्वारा न्याय तक पहुंचने के तरीके को फिर से परिभाषित कर रही है।
प्रौद्योगिकी को सोच-समझकर अपनाया है
उन्होंने कहा, "हमने प्रौद्योगिकी को सोच-समझकर अपनाया है, इसके फायदों का लाभ उठाते हुए हमने निष्पक्षता, उचित प्रक्रिया, पारदर्शिता, मानवीय गरिमा और जवाबदेही जैसे अपने मूल मूल्यों की रक्षा की है।" मुख्य न्यायाधीश कांत ने कहा, “शुरुआत में कागजी कार्रवाई के मामूली डिजिटलीकरण से शुरू हुआ। यह प्रयास कानूनी कार्य को तैयार करने, निष्पादित करने और प्रस्तुत करने के तरीके की पुनर्कल्पना में तब्दील हो गया है। उन्होंने आगे कहा कि भारतीय न्यायपालिका और न्यायालय प्रशासन के लिए, प्रौद्योगिकी एक शक्ति गुणक बन गई है क्योंकि न्यायालयों ने आभासी सुनवाई, ई-फाइलिंग और ऑनलाइन विवाद समाधान की शुरुआत की है, जिसने न्याय की पहुंच को पारंपरिक सीमाओं से कहीं आगे तक विस्तारित किया है, यह सुनिश्चित करते हुए कि न्यायालयों तक पहुंच अब भूगोल या परिस्थितियों तक सीमित नहीं है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि "न्यायिक अधिकारी अब एक नजर में केस हिस्ट्री, मिसालें और सुनवाई की प्रतिलेख देख सकते हैं, जिससे वे तेजी से और अधिक जानकारीपूर्ण निर्णय ले सकेंगे।" उन्होंने कहा, "न्यायालय को समुदाय तक लाकर, हम यह सुनिश्चित करते हैं कि न्याय चाहने वाले के लिए भौगोलिक दूरी अब कोई बाधा न रहे।" उन्होंने आगे कहा कि दूसरा कदम 'प्रक्रियात्मक सरलता' होना चाहिए, जिसके द्वारा एक साधारण भूमि विवाद या छोटे-मोटे दावों से संबंधित मामले को एक ऐसे मोबाइल इंटरफेस के माध्यम से शुरू किया जा सके जो बैंकिंग ऐप की तरह ही उपयोगकर्ता के अनुकूल हो। तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण कदम टेलीसेवाओं के माध्यम से कानूनी सहायता को मजबूत करना है, जिसके तहत समर्पित पैरालीगल को सरल डिजिटल माध्यमों से गरीब वादियों से जोड़ा जा सकता है, और किसी शिकायत के लंबे समय तक चलने वाले विवाद में बदलने से पहले प्रारंभिक चरण की कानूनी सलाह दी जा सकती है।
प. एशिया में संघर्ष से ऊर्जा स्टॉक और आपूर्ति पर चिंताजनक स्थिति
5 Mar, 2026 05:05 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में गहराते संकट के बीच उर्जा सुरक्षा के मामले में भारत की स्थिति फिलहाल काफी मजबूत है। देश के पास उर्जा का मौजूदा भंडार पर्याप्त है और इसे हर दिन लगातार भरा भी जा रहा है। सरकार से जुड़े सूत्रों ने गुरुवार को यह जानकारी दी।
'वैकल्पिक स्रोतों की तलाश भी कर रहा भारत'
सूत्रों ने कहा कि देश में एलपीजी या एलएनजी की कोई कमी नहीं है। दुनिया में कच्चे तेल की भी कमी नहीं है और भारत अन्य आपूर्तिकर्ता देशों के साथ भी लगातार संपर्क में है। उन्होंने बताया कि ऑस्ट्रेलिया और कनाडा ने भी भारत को गैस बेचने की पेशकश की है। भारत वैकल्पिक स्रोतों की तलाश भी कर रहा है। हाल ही में भारत ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और अमेरिका के साथ नए उर्जा समझौते भी किए हैं। उन्होंने बताया कि भारत करीब 195 एमएमएससीएमडी (प्रति दिन दस लाख मानक घन मीटर) गैस आयात करता है। इसमें से लगभग 60 एमएमएससीएमडी गैस कतर से आती है। भारत अब गैस खरीदने के लिए अन्य बाजारों की भी तलाश कर रहा है।
तेल उत्पादक देशों के साथ भी बातचीत कर रही सरकार
सरकार प्रमुख तेल उत्पादक देशों और व्यापारियों के साथ भी बातचीत कर रही है, ताकि कच्चा तेल और एलपीजी की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। सूत्रों ने बताया कि भारत ऊर्जा से जुड़े मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय उर्जा एजेंसी और ओपेक के साथ भी बातचीत कर रहा है। इसके अलावा, भारत जहाजों के बीमा को लेकर अमेरिका के साथ भी चर्चा कर रहा है। सरकार ऊर्जा स्थिति की दिन में दो बार समीक्षा कर रही है, ताकि आपूर्ति और सुरक्षा को लेकर कोई समस्या न आए।
ईरान विवाद पर कांग्रेस-भाजपा आमने-सामने, राहुल गांधी के बयान से बढ़ी तकरार
5 Mar, 2026 03:56 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली।भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने गुरुवार को कांग्रेस पर निशाना साधा। पार्टी ने आरोप लगाया कि कांग्रस चाहती है कि भारत सोच-समझे बिना ईरान के पक्ष में खड़ा हो जाए, जबकि चीन तेहरान से दूरी बना रहा है। सत्तारूढ़ पार्टी ने कहा कि भारत की नीति राष्ट्रीय हित और देश के नागरिकों की सुरक्षा के आधार पर तय होनी चाहिए, न कि विपक्ष की पुरानी विरारधारा पर।
अमित मालवीय ने क्या कहा?
भाजपा के अमित मालवीय और प्रदीप भंडारी समेत कई नेताओं ने कांग्रेस पर वोट बैंक की राजनीतिक करने का आरोप लगाया। मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, चीन ने वर्षों तक ईरान का कूटनीतिक समर्थन किया और उसका तेल खरीदा, लेकिन अब उससे दूरी बना रहा है। इसके बावजूद कांग्रेस ईरान के लिए भारत का आंख बंद करके समर्थन चाहती है, जबकि खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ रहा है और वहां लाखों भारतीय रहते हैं और काम करते हैं।
राहुल गांधी ने क्या कहा था?
दरअसल, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था कि पश्चिम एशिया का संघर्ष भारत के करीब पहुंच गया है। लेकिन सरकार की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत को मजबूत नेतृत्व की जरूरत, लेकिन देश के पास समझौता कर चुके प्रधानमंत्री हैं, जिन्होंने भारत की रणनीतिक स्वायत्तता से समझौता किया है।
पलटवार करते हुए प्रदीप भंडारी क्या बोले?
इस पर जवाब देते हुए भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा, कांग्रेस ऐसे संघर्ष पर भारत से टिप्पणी करवाना चाहती है, जिसमें देश सीधे तौर पर शामिल नहीं है। उन्होंने आरोप लगाा कि कांग्रेस का इतिहास राष्ट्रीय के हित के मामलों में चुप्पी का रहा है।वहीं, भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने भी कांग्रेस पर हमला किया। उन्होंने कहा कि जब मनमोहन सिंह सरकार सत्ता में थी, तब मंत्रियों को माओवाद के मुद्दे पर सार्वजनिक बयान देने से रोका गया था। उन्होंने दावा किया, कांग्रेस पहले भी कमजोर थी और आज भी राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर वैसी ही नजर आती है।
राज्यसभा टिकट पर सियासी गणित: संजय राउत ने बताया क्यों पीछे रह गईं प्रियंका चतुर्वेदी
5 Mar, 2026 03:53 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
महाराष्ट्र। में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज है। राज्य की सात सीटों पर चुनाव होने हैं, जिसके लिए उम्मीदवार तय किए जा रहे हैं। इस बीच शिवसेना (यूबीटी) गुट ने प्रियंका चतुर्वेदी को दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया है। पार्टी नेता संजय राउत ने गुरुवार को इसकी वजह बताई। उन्होंने कहा कि राजनीतिक समीकरणों का साथ न देना और शरद पवार की उम्मीदवारी के कारण पार्टी प्रियंका चतुर्वेदी को दोबारा मैदान में नहीं उतार सकी। शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने कहा कि पार्टी में यह इच्छा थी कि प्रियंका चतुर्वेदी फिर से राज्यसभा जाएं। लेकिन हमारे पास जरूरी संख्या नहीं थी। इसके अलावा, शरद पवार जैसे वरिष्ठ नेता के मैदान में आने से यह सीट लड़ना मुश्किल हो गया था। इन्हीं वजहों से हमें यह फैसला लेना पड़ा।
पवार नहीं लड़ते तो चतुर्वेदी को मिलता मौका
संजय राउत ने आगे कहा कि अगर राजनीतिक गणित हमारे पक्ष में होता और पवार साहब चुनाव नहीं लड़ते, तो शिवसेना (यूबीटी) 100 प्रतिशत यह सीट लड़ती। तब प्रियंका चतुर्वेदी को दूसरा मौका जरूर दिया जाता। बता दें कि महाराष्ट्र से राज्यसभा की सात सीटें अगले महीने खाली हो रही हैं।
MVA ने पवार को दिया समर्थन
बुधवार को कांग्रेस ने महाराष्ट्र से राज्यसभा की एक सीट के लिए विपक्षी गठबंधन के उम्मीदवार के तौर पर एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार को समर्थन देने की घोषणा की। इस फैसले ने महा विकास अघाड़ी (एमवीए) के उम्मीदवार को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लगा दिया। इस सीट पर कांग्रेस, एनसीपी (एसपी) और शिवसेना (यूबीटी) तीनों ही दल दावा कर रहे थे।
भाजपा के उम्मीदवारों को लेकर क्या बोले राउत?
सत्तारूढ़ भाजपा ने राज्यसभा चुनाव के लिए चार उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं। इनमें पार्टी के महासचिव विनोद तावडे और केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले शामिल हैं। भाजपा की सूची पर टिप्पणी करते हुए राउत ने कहा कि आठवले को फिर से उम्मीदवार बनाना अपेक्षित था, जबकि तावडे की उम्मीदवारी गौर करने लायक है। राउत ने कहा कि तावडे को उम्मीदवार बनाना उनके संगठनात्मक कार्यों का सम्मान हो सकता है। 2019 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में टिकट से वंचित होने के बाद उन्होंने पिछले छह-सात वर्षों में पार्टी के लिए काफी काम किया है। राज्यसभा के लिए उनका नामांकन उन्हीं प्रयासों का इनाम लगता है।
ऐसा है विधानसभा का गणित
288 सदस्यीय विधानसभा में 230 से अधिक विधायकों के साथ, भाजपा के नेतृत्व वाला महायुति गठबंधन अपने सभी उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने की स्थिति में है। इस गठबंधन में एनसीपी और शिवसेना भी शामिल हैं। वहीं, विपक्षी एमवीए के पास केवल एक उम्मीदवार को जिताने लायक संख्या है। इस गणित से महायुति सात में से छह सीटें जीत सकती है।
महाराष्ट्र से जिन राज्यसभा सदस्यों का छह साल का कार्यकाल अप्रैल में समाप्त हो रहा है, उनमें शरद पवार, रामदास आठवले, फौजिया खान (एनसीपी-एसपी), रजनी पाटिल (कांग्रेस), प्रियंका चतुर्वेदी (शिवसेना-यूबीटी) और धनंजय पाटिल व भागवत कराड (दोनों भाजपा से) शामिल हैं। इन सीटों के लिए 16 मार्च को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे के बीच मतदान होगा और उसी दिन शाम 5 बजे से मतगणना शुरू होगी।
अजित पवार प्लेन क्रैश केस में VSR कंपनी के अफसरों से पूछताछ
5 Mar, 2026 03:38 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पुणे|महाराष्ट्र अपराध जांच विभाग (सीआईडी) ने गुरुवार को वीएसआर वेंचर्स के बड़े अधिकारियों से पूछताछ की। इसी कंपनी का विमान बारामती में हादसे का शिकार हुआ था, जिसमें उपमुख्यमंत्री अजित पवार की जान चली गई थी। सीआईडी के एक अधिकारी ने इस कार्रवाई की जानकारी दी है। हालांकि, जांच अभी चल रही है, इसलिए उन्होंने ज्यादा विवरण नहीं दिया।
क्या है मामला?
28 जनवरी को पुणे जिले के बारामती एयर स्ट्रिप के पास वीएसआर वेंचर्स का 'लियरजेट 45' विमान क्रैश हो गया था। इस दुखद घटना में अजित पवार और चार अन्य लोगों की मौत हो गई थी। हादसे के बाद बारामती तालुका पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज हुआ था। बाद में इस केस की जांच पुणे सीआईडी को सौंप दी गई। जांच एजेंसी यह पता लगा रही है कि क्या इस हादसे के पीछे कोई साजिश थी या यह आपराधिक लापरवाही का मामला है। सूत्रों के मुताबिक, सीआईडी ने इस संबंध में कंपनी को कुछ सवालों की सूची भी भेजी थी।अब इस मामले में राजनीतिक बयानबाजी भी तेज है। एनसीपी (एसपी) विधायक रोहित पवार ने बुधवार को आरोप लगाया कि कोई वीएसआर वेंचर्स को बचाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) की शुरुआती रिपोर्ट ने उनके शक को सही साबित किया है।
एएआईबी की रिपोर्ट में क्या?
एएआईबी की 22 पन्नों की रिपोर्ट में बताया गया है कि हादसे के समय दृश्यता (विजिबिलिटी) बहुत कम थी। रिपोर्ट में रनवे पर धुंधले निशान और वहां ढीली बजरी होने की बात भी कही गई है। वहीं, अजित पवार के बेटे जय पवार ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया है। इसमें आरोप लगाया गया है कि कंपनी के मालिक रोहित सिंह उड़ान के दौरान पायलट की सीट पर सो रहे थे। जय पवार ने रोहित सिंह की तुरंत गिरफ्तारी की मांग की है। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक वीएसआर वेंचर्स के सभी विमानों की उड़ानों पर रोक लगा देनी चाहिए।
उपग्रह तकनीक से होगा मकानों का सर्वे, डिजिटल जनगणना के लिए चार टूल जारी
5 Mar, 2026 03:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली|केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को नई दिल्ली में जनगणना-2027 के लिए चार डिजिटल टूल्स का सॉफ्ट लॉन्च और शुभंकर- 'प्रगति' (महिला) और 'विकास' (पुरुष) का औपचारिक अनावरण किया है। देशभर में गणना कार्यों को सुगम बनाने के लिए सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (सी-डैक) ने एडवांस डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किए हैं। इन टूल्स में डिजिटल जनगणना के दौरान, उपग्रह चित्रों की सहायता से मकान सूचीकरण ब्लॉक बनेगा। देशभर में 30 लाख से अधिक प्रगणक, पर्यवेक्षक और अन्य अधिकारी जनगणना-2027 में शामिल होंगे।दो चरणों में होने वाली जनगणना-2027 दुनिया का सबसे बड़ा जनगणना कार्य है। पहली बार जनगणना डिजिटल माध्यम से की जाएगी। पहली बार स्व-गणना का विकल्प भी दिया जा रहा है। जनगणना-2027 के शुभंकर 'प्रगति' (महिला प्रगणक) और 'विकास' (पुरुष प्रगणक) को मैत्रीपूर्ण एवं सहज प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया है। साथ ही 'प्रगति' और 'विकास' 2047 में भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को पूरा करने में महिलाओं और पुरुषों की बराबर की भागीदारी के भी प्रतीक हैं। इन शुभंकरों के माध्यम से जनगणना 2027 से संबंधित जानकारी, उद्देश्य एवं प्रमुख संदेश समाज के विभिन्न वर्गों तक प्रभावी और जन-सुलभ रूप में पहुंचाए जाएंगे।
जनगणना-2027 के डिजिटल टूल्स ...
जनगणना-2027 भारत की पहली तकनीकी उपकरणों द्वारा संचालित जनगणना होगी। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह द्वारा चार प्लेटफॉर्म, सॉफ्ट लॉन्च किए गए हैं। हाउस लिस्टिंग ब्लॉक क्रिएटर वेब एप्लिकेशन: यह वेब-मैप एप्लिकेशन चार्ज अधिकारियों को उपग्रह चित्रों की सहायता से तकनीकी रूप से मकान सूचीकरण ब्लॉक बनाने में सक्षम बनाता है, जिससे देशभर में भौगोलिक कवरेज का मानकीकरण सुनिश्चित होता है। एचएलओ मोबाइल एप्लिकेशन: यह एक सुरक्षित ऑफलाइन मोबाइल एप्लिकेशन है, जिसके माध्यम से प्रगणक मकान-सूचीकरण डेटा एकत्र एवं अपलोड कर सकते हैं। केवल सीएमएमएस पोर्टल पर पंजीकृत प्रगणक ही इसका उपयोग कर सकते हैं। यह एप्लिकेशन सीधे क्षेत्र से सर्वर तक डेटा प्रेषण की सुविधा प्रदान करता है, जिससे पारंपरिक कागजी कार्य समाप्त हो जाता है। यह एंड्रॉयड एवं आईओएस प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है। इसे 16 भाषाओं में संचालित किया जा सकता है।स्व: गणना पोर्टल: पहली बार स्व-गणना का विकल्प प्रदान किया जा रहा है। यह एक सुरक्षित वेब-आधारित सुविधा है, जिसके माध्यम से पात्र उत्तरदाता घर-घर सर्वेक्षण से पूर्व अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकते हैं। सफल पंजीकरण के बाद एक विशिष्ट स्व-गणना आईडी जारी होगी। इस स्व-गणना आईडी को प्रगणक के साथ साझा किया जाएगा। इसके आधार पर दर्ज की गई सूचना की प्रगणक द्वारा पुष्टि की जा सकेगी।जनगणना प्रबंधन एवं निगरानी प्रणाली पोर्टल: यह एक केंद्रीकृत वेब-आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसके माध्यम से जनगणना से संबंधित गतिविधियों की योजना, प्रबंधन, क्रियान्वयन और निगरानी की जाएगी। राज्य, जिला एवं तहसील स्तर के अधिकारी एकीकृत डैशबोर्ड के माध्यम से वास्तविक समय में प्रगति और कार्य-स्थिति का अवलोकन कर सकेंगे।
सुरक्षित मोबाइल एप्लिकेशन का इस्तेमाल ...
जनगणना-2027 में घर घर जाकर सुरक्षित मोबाइल एप्लिकेशन का इस्तेमाल कर डेटा एकत्रित किया जाएगा। इसके जरिए पूरी कवरेज सुनिश्चित होगी। तकनीक को ध्यान में रखकर अपनाते हुए इनोवेशन और सबको साथ लेकर चलने से यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि जनगणना-2027 सही, सुरक्षित और कम्प्रेहेन्सिव हो। जनगणना-2027 दो चरणों में संपन्न होगी। प्रथम चरण में गृह-सूचीकरण एवं आवास जनगणना होगी। इस दौरान आवास की स्थिति एवं घरेलू सुविधाओं से संबंधित जानकारी एकत्र की जाएगी। द्वितीय चरण में देश के प्रत्येक व्यक्ति से संबंधित जनसांख्यिकीय, सामाजिक एवं आर्थिक विवरण दर्ज किए जाएंगे। प्रथम चरण के लिए अधिसूचना सात जनवरी 2026 को जारी की गई है। मकान-सूचीकरण एवं मकान गणना एक अप्रैल 2026 से 30 सितंबर 2026 के बीच, प्रत्येक राज्य/संघ राज्यक्षेत्र द्वारा अधिसूचित 30 दिनों की सतत अवधि में संचालित की जाएगी। घर-घर सर्वेक्षण से पूर्व 15 दिनों की वैकल्पिक स्व-गणना अवधि भी होगी।
द्वितीय चरण: जनसंख्या गणना ...
जनसंख्या गणना फरवरी 2027 में पूरे भारत में की जाएगी। लद्दाख संघ राज्यक्षेत्र तथा जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के हिमाच्छादित गैर-समकालिक क्षेत्रों में गणना सितंबर 2026 में संपन्न होगी। जनगणना के द्वितीय चरण में जाति संबंधित प्रश्न भी शामिल किया जाएगा। जनगणना 2027 की संदर्भ तिथि सभी राज्यों एवं संघ राज्यक्षेत्रों के लिए एक मार्च 2027 की मध्यरात्रि (00:00 बजे) होगी। लद्दाख तथा हिमाच्छादित गैर-समकालिक क्षेत्रों (जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड) के लिए संदर्भ तिथि एक अक्टूबर 2026 की मध्यरात्रि (00:00 बजे) होगी।
महाराष्ट्र में अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा, उद्योग जगत में चिंता
5 Mar, 2026 01:40 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई|महाराष्ट्र में परिवहन क्षेत्र से जुड़े हजारों ट्रांसपोर्टरों ने राज्यव्यापी चक्का जाम का एलान किया है। यह विरोध प्रदर्शन गुरुवार से शुरू होकर अनिश्चितकालीन तक चलेगा। ट्रांसपोर्टरों का विरोध ई-चालान प्रणाली और क्षेत्र द्वारा सामना किए जा रहे अन्य मुद्दों के खिलाफ है।
क्यों हो रहा विरोध?
महाराष्ट्र ट्रांसपोर्ट एक्शन कमेटी (एम-टीएसी) के प्रतिनिधियों के अनुसार, बुधवार शाम को महाराष्ट्र परिवहन आयुक्त कार्यालय में हुई बातचीत के अंतिम दौर के बावजूद कोई समाधान नहीं निकल पाया। इसके बाद हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया गया। एम-टीएसी का कहना है कि यह आंदोलन मनमाने और अत्यधिक इलेक्ट्रॉनिक यातायात प्रवर्तन और परिवहन क्षेत्र पर बढ़ते वित्तीय बोझ के खिलाफ है।
ट्रांसपोर्टरों की क्या मांगें?
ट्रांसपोर्टरों की मांगों में ई-चालान प्रणाली में प्रमुख सुधार, लंबित जुर्माना माफ करना और वाणिज्यिक वाहनों पर लगाए गए करों और टोल शुल्कों में कमी शामिल है। एम-टीएसी नेताओं का दावा है कि ई-चालान प्रणाली ने न केवल परिवहन संचालकों बल्कि आम वाहन मालिकों को भी कठिनाई में डाला है।
कैसे होगा हड़ताल?
एम-टीएसी के प्रतिनिधियों के अनुसार, ट्रांसपोर्टर मुंबई के आजाद मैदान और राज्य के अन्य हिस्सों में क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों (आरटीओ) के बाहर विरोध प्रदर्शन करेंगे, जिसके बाद आधी रात से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू हो जाएगी। इस हड़ताल के कारण स्कूल बसें, अनुबंध वाहक बसें, निजी बसें और ट्रक, टेम्पो, टैक्सी और टैंकर जैसे वाणिज्यिक वाहन सड़कों से नदारद रहेंगे। ट्रांसपोर्टरों ने अपने वाहनों को विरोध स्थलों पर लाने की भी धमकी दी है।स्कूल बस मालिकों के संघ के एक लीडर अनिल गर्ग बताया कि अगर अनिश्चितकालीन हड़ताल होती है, तो शुक्रवार से राज्य भर की स्कूल बसें संचालित नहीं होंगी, हालांकि गुरुवार को उनकी सेवाएं सामान्य रहेंगी।सरकार और ट्रांसपोर्टरों के बीच हुई थी बैठक महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने इस सप्ताह की शुरुआत में ट्रांसपोर्टरों के साथ एक बैठक की थी, लेकिन एम-टीएसी ने सरकार से खोखले आश्वासनों के कारण बातचीत को निष्फल बताया। सरनाइक ने ट्रांसपोर्टरों से आंदोलन वापस लेने की अपील करते हुए कहा था कि सरकार अनुचित ई-चालान रद्द करने पर सकारात्मक है और इस मामले में अनुकूल निर्णय लेगी।
एम-टीएमसी की प्रमुख मांग क्या है?
एम-टीएसी ने सरकार से नियमों में प्रस्तावित संशोधन को वापस लेने या उसमें ढील देने की मांग की है।इसके तहत ट्रांसपोर्टरों को 45 दिनों के भीतर ई-चालान का जुर्माना चुकाना होगा।ऐसा न करने पर उन्हें परमिट नवीनीकरण, फिटनेस प्रमाणन और अन्य नियामक मंजूरियों से संबंधित विभिन्न प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा।मांगों के अनुसार, आपराधिक प्रक्रिया संहिता के नियम 468 और संशोधित नियम 514 के तहत, अगर अदालत में मामले दायर नहीं किए जाते हैं, तो सभी समय-सीमा पार कर चुके ई-चालान रद्द कर दिए जाने चाहिए।चेक पोस्ट बंद करने और ड्राइवरों के लिए विश्राम गृह स्थापित करने की मांग इसके अलावा, एम-टीएसी ने राजमार्ग चेक पोस्ट बंद करने और ड्राइवरों के लिए विश्राम गृह या केंद्र स्थापित करने की मांग की है। उन्होंने राजमार्गों पर फायर टेंडर और आपातकालीन सेवा सुविधाओं, पार्किंग स्थलों, बस स्टॉप और माल लोड-अनलोडिंग सुविधाओं की भी मांग की है।
सुरक्षा उपकरणों को लेकर ट्रांसपोर्टरों की क्या मांग?
ट्रांसपोर्टरों ने सुरक्षा के बहाने अनिवार्य किए गए उपकरणों जैसे पैनिक बटन, वाहन लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस, हाई-सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट, फायर डिटेक्शन और सप्रेशन सिस्टम और सीसीटीवी कैमरों की बार-बार रेट्रोफिटिंग की समीक्षा की भी मांग की है। उन्होंने परिचालन में कठिनाई पैदा करने वाले अव्यवहारिक और अचानक नो एंट्री प्रतिबंधों को निलंबित करने की मांग की है और सरकार से अधिक परामर्शपूर्ण दृष्टिकोण अपनाने का आग्रह किया है।
वीपी और अटल सरकार में मंत्री रहे Nitish Kumar, क्या अब मोदी कैबिनेट में एंट्री संभव?
5 Mar, 2026 12:47 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दिल्ली। जब राष्ट्रपति चुनाव के पहले नाम आया तो चुप्पी साधे रहे। जब उप राष्ट्रपति बनाने की बात आई तो तैयार नहीं हुए। अब राज्यसभा सांसद बनने को तैयार हो गए 20 साल बिहार के मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार! यह चौंकाने वाला फैसला है, जिसकी जानकारी खुद उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए दी। भारतीय जनता पार्टी के भारी दबाव के बाद वह 37 साल पुराने रास्ते पर लौटने को तैयार हुए हैं। तो क्या देश की नरेंद्र मोदी सरकार में उन्हें कोई बड़ा ओहदा मिलने जा रहा है या सिर्फ सांसद बनकर वह राजनीति की अंतिम पारी खेलने के लिए उतरे हैं?
उप प्रधानमंत्री जितनी ताकत तो रख रहे नीतीश
केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार चंद्र बाबू नायडू और नीतीश कुमार के लोकसभा सांसदों की बदौलत टिकी है। इसमें नीतीश कुमार को जिस तरह से मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ राज्यसभा जाना पड़ रहा है, उससे उनके लिए कुछ बड़ा प्लान रखना नरेंद्र मोदी सरकार के लिए शायद जरूरी हो। उप राष्ट्रपति पद की पेशकश नीतीश कुमार तक पहुंची थी, तब वह तैयार नहीं हुए थे। अब राज्यसभा सांसद बनकर रिटायर होना तो उनकी इच्छा में नहीं ही हो शायद। नीतीश ने अप्रत्याशित फैसला लिया है तो क्या आगे कुछ उन्हें आश्चर्यजनक तौर पर मिल सकता है? इस सवाल के जवाब में चाणक्य स्कूल ऑफ पॉलिटिकल राइट्स एंड रिसर्च के अध्यक्ष सुनील कुमार सिन्हा कहते हैं- "वह सीएम की कुर्सी छोड़ने के लिए मान गए, यह बहुत चौंकाने वाला है। लेकिन, अगर अब उन्हें उप प्रधानमंत्री जैसा कुछ बनाया जाए तो बहुत आश्चर्यजनक नहीं होगा। वह अटल बिहार वाजपेयी की सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं और केंद्र की मौजूदा सरकार के लगभग सभी मंत्रियों से सीनियर हैं। इसलिए, कुछ अच्छा तो होना ही चाहिए।"
पहली बार कब सांसद बने थे नीतीश, कब चुनाव हारे?
नीतीश कुमार पहली बार 28 नवंबर 1989 को पटना जिले के बाढ़ संसदीय क्षेत्र से निर्वाचित हुए थे। तब, सांसद के रूप में उनका कार्यकाल 2 दिसंबर 1989 से 13 मार्च 1991 तक रहा था। इस बीच, अप्रैल 1990 में वीपी सिंह सरकार में उन्हें केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री बनाया गया था। वह लोकसभा में उलटपुलट का दौर था। वीपी सिंह सरकार सदन में बहुमत साबित नहीं कर सकी और केंद्रीय राज्यमंत्री के रूप में नीतीश कुमार का कार्यकाल भी 10 नवंबर 1990 को खत्म हो गया। इसके बाद कांग्रेस की मदद से चंद्रशेखर पीएम बने, लेकिन 1991 में कांग्रेस ने समर्थन वापस ले लिया तो फिर चंद्रशेखर पदमुक्त हो गए और 13 मार्च 1991 को लोकसभा भंग हो गया।
फिर 1991 में नीतीश कुमार बाढ़ से ही सांसद बने। तत्कालीन जनता दल महासचिव और लोकसभा में पार्टी के डिप्टी लीडर रहे नीतीश कुमार को तब पीवी नरसिम्हा राव के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने 8 अप्रैल 1993 को कृषि समिति का चेयरमैन बनाया था। लोकसभा का यह कार्यकाल पूरा हुआ तो 1996 में फिर बाढ़ से ही नीतीश कुमार सांसद बने। इस बार 16 मई 1996 को अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री बने, हालांकि यह सरकार सात दिन ही चली। दूसरी बार, जब 15 मार्च 1998 को अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री बने तो सबसे बड़े गठबंधन के 41 दलों में समता पार्टी भी थी।
नीतीश कुमार को केंद्रीय रेल एवं भूतल परिवहन मंत्री बनाया गया। अगस्त 1999 में गैसाल में हुई रेल दुर्घटना के बाद उन्होंने मंत्रीपद से अपना इस्तीफा दे दिया। फिर करगिल युद्ध के बाद 1999 के लोकसभा चुनाव कराना पड़ा तो भाजपा बड़े दल के उभरी। पहली बार पांच साल भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार रही। इसमें भी नीतीश केंद्रीय मंत्री रहे। उसके बाद 2004 के लोकसभा चुनाव में नीतीश कुमार बाढ़ से हार गए और इसके बाद 2005 से बिहार की राजनीति बतौर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आसपास ही रही। आज तक वही स्थिति है। दस बार मुख्यमंत्री बन चुके नीतीश कुमार अब 37 साल पुराने रास्ते पर दिल्ली कूच के लिए राज्यसभा जा रहे हैं।
Karnataka Lokayukta का बड़ा एक्शन, सरकारी अफसरों के ठिकानों पर छापे में काली कमाई उजागर
5 Mar, 2026 12:03 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कर्नाटक। में लोकायुक्त ने आय से अधिक संपत्ति के आरोपों के संबंध में विभिन्न जिलों के कई सरकारी अधिकारियों के ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई विभिन्न सरकारी विभागों में कार्यरत अधिकारियों को निशाना बनाते हुए बंगलूरू, मांड्या, धारवाड़, हासन, मैसूरु, विजयपुरा और यादगीर जैसे जिलों में कई स्थानों पर की गई।
किन पदों के अधिकारियों को बनाया गया निशाना?
लोकायुक्त अधिकारियों के अनुसार, ये छापे सहायक कार्यकारी अभियंता, जूनियर इंजीनियर, उप विद्युत निरीक्षक और तालुक पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी जैसे पदों पर तैनात अधिकारियों पर केंद्रित थे। इन छापों का उद्देश्य उन सरकारी कर्मचारियों की जांच करना था, जिनकी संपत्ति उनकी घोषित आय से काफी अधिक पाई गई है।
हासन में क्या दृश्य देखने को मिला?
छापेमारी के दौरान हासन नगर निगम के सहायक कार्यकारी अभियंता एम.सी सत्यानारायण के आवास पर काफी नाटकीय घटनाक्रम देखने को मिला। लोकायुक्त अधिकारियों को उनके घर का दरवाजा न खुलने के कारण एक घंटे से अधिक समय तक बाहर इंतजार करना पड़ा। जब सत्यानारायण ने गेट खोलने के अनुरोधों का जवाब नहीं दिया, तो अधिकारियों ने घर में प्रवेश करने के लिए पहली मंजिल पर चढ़ने का प्रयास किया। यह घटनाक्रम इस बात का संकेत देता है कि कुछ अधिकारी जांच से बचने का प्रयास कर सकते हैं।
हुबली में भी हुई कार्रवाई
एक अन्य मामले में, अधिकारियों ने कर्नाटक ग्रामीण अवसंरचना विकास निगम के मुख्य अभियंता वसंतप्पा नायक के हुबली स्थित आवास पर भी तलाशी ली। फिलहाल बंगलूरू में कार्यरत नायक को पिछले साल अप्रैल में हुबली से बंगलूरू स्थानांतरित किया गया था। अधिकारियों ने उनके हुबली स्थित आवास पर भी तलाशी अभियान चलाया।
आय से अधिक संपत्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई
यह व्यापक तलाशी अभियान आज सुबह जल्दी शुरू हुआ और इसमें लोकायुक्त अधिकारियों की कई टीमों ने भाग लिया। यह कार्रवाई संदिग्धों के आवासों और कार्यालयों पर की गई, जो आय से अधिक संपत्ति रखने की शिकायतों के बाद की गई थी।
Supreme Court of India ने 51 निजी अस्पतालों को अवमानना नोटिस जारी किया
5 Mar, 2026 11:35 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली के 51 प्राइवेट चिकित्सालयो को आर्थिक रूप से कमजोर मरीज का इलाज न करने के प्रकरण में अवमानना का नोटिस जारी किया।Supreme Court of India ने दिल्ली के 51 निजी अस्पतालों को आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के मरीजों को मुफ्त इलाज न देने के मामले में अवमानना (Contempt of Court) का नोटिस जारी किया है। अदालत ने अस्पतालों से पूछा है कि क्यों न उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाए और उन्हें दी गई सरकारी रियायतें वापस ले ली जाएँ।
मामला क्या है?
दिल्ली में कई निजी अस्पतालों को सरकारी जमीन बहुत कम कीमत (concessional rate) पर दी गई थी।
इसके बदले अस्पतालों पर यह शर्त लगाई गई थी कि वे गरीब मरीजों को मुफ्त इलाज और बेड उपलब्ध कराएँगे।
अदालत के आदेश के अनुसार अस्पतालों को:
25% OPD (आउटडोर मरीज)
10% IPD (भर्ती मरीज)
आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए मुफ्त रखना अनिवार्य है।
लेकिन जांच में पाया गया कि कई अस्पतालों ने इन नियमों का पालन नहीं किया।
कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस पी.के. मिश्रा और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने कहा कि:
अदालत के आदेश के बावजूद अस्पताल EWS मरीजों को पर्याप्त मुफ्त इलाज नहीं दे रहे हैं।
कई मामलों में 25% की जगह सिर्फ 1% से 10% तक ही OPD सेवाएँ दी जा रही थीं।
अधिकांश अस्पताल 10% मुफ्त भर्ती (IPD) का नियम भी पूरा नहीं कर पाए।
सरकार और एजेंसियों को भी फटकार
कोर्ट ने कहा कि:
Delhi Development Authority (DDA),
Municipal Corporation of Delhi (MCD),
Land and Development Office (L&DO)
इन एजेंसियों ने भी नियम लागू कराने में लापरवाही बरती और पूरे मामले को “बहुत हल्के में लिया।”
अदालत के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि:
दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य सचिव को नोडल अधिकारी बनाया जाए।
वे इन अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई करें और अदालत को रिपोर्ट दें।
संबंधित सरकारी एजेंसियाँ नोडल अधिकारी के साथ सहयोग करें।
किन बड़े अस्पतालों को नोटिस मिला
इन 51 अस्पतालों में कई प्रसिद्ध अस्पताल भी शामिल हैं, जैसे:
Sir Ganga Ram Hospital
BLK‑Max Super Speciality Hospital
Fortis Escorts Heart Institute
Moolchand Khairati Ram Hospital
Rajiv Gandhi Cancer Institute and Research Centre
Centre for Sight
अगली सुनवाई
इस मामले की अगली सुनवाई 24 मार्च 2026 को तय की गई है। अदालत यह देखेगी कि अस्पतालों ने अपने जवाब में क्या कहा और क्या उन्होंने नियमों का पालन शुरू किया या नहीं।
सरल शब्दों में:
सरकारी जमीन की रियायत लेने वाले निजी अस्पतालों को गरीब मरीजों का मुफ्त इलाज करना था, लेकिन कई अस्पताल ऐसा नहीं कर रहे थे। इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने 51 अस्पतालों को अवमानना का नोटिस जारी किया है।
मतुआ समुदाय के मुद्दे पर Mamata Banerjee ने केंद्र पर लगाया बड़ा आरोप
5 Mar, 2026 11:26 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
परगना। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को केंद्र सरकार पर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार नागरिकता प्रदान करने के नाम पर मतुआ समुदाय के सदस्यों को अनिश्चितता और भ्रम में धकेल रही है। मतुआ समुदाय की मुखिया बिनापानी देवी, जिन्हें लोकप्रिय रूप से बरोमा के नाम से जाना जाता है। उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें याद करते हुए बनर्जी ने दावा किया कि केंद्र सरकार उन लोगों की पहचान पर सवाल उठा रही है, जो लंबे समय से देश के नागरिक हैं।
पीढ़ियों से यह इस देश के नागरिक हैं-बनर्जी
उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में आरोप लगाया "यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि केंद्र में भाजपा सरकार की साजिश के कारण हमारे मतुआ भाई-बहनों को अस्थिर और भ्रामक स्थिति में धकेला जा रहा है। नागरिकता प्रदान करने के नाम पर राजनीति खेली जा रही है।" उन्होंने आगे कहा, “उनकी पहचान पर ही सवाल उठाया जा रहा है। एसआईआर के माध्यम से उन्हें जानबूझकर मतदाता सूची से बाहर किया जा रहा है। पीढ़ियों से इस देश के नागरिक रहे लोग, जिनके वोटों से सरकारें चुनी जाती हैं, उन्हें अब दोबारा नागरिकता'देने के नाम पर अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है।
यह अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा-बनर्जी
बनर्जी ने कहा कि उनकी सरकार समुदाय के अधिकारों को कमजोर करने वाले किसी भी कदम का विरोध करना जारी रखेगी। यह अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मेरे मतुआ भाइयों और बहनों और बंगाल की जनता के अधिकारों को छीनने के प्रयासों के खिलाफ हमारा संघर्ष जारी रहेगा। हम बंगाल की जनता को किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं होने देंगे। बनर्जी ने कहा कि उनका बिनापानी देवी के साथ व्यक्तिगत और आध्यात्मिक संबंध था। उन्हें उनका मातृवत स्नेह प्राप्त हुआ था।
उनकी सरकार ने समुदाय के कल्याण के लिए कई पहल की
उन्होंने कहा, “बरोमा बिनपानी देवी की पुण्यतिथि पर मैं उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि और प्रणाम अर्पित करती हूं। हरिचंद ठाकुर और गुरुचंद ठाकुर द्वारा दिखाए गए मार्ग का अनुसरण करते हुए, मतुआ महासंघ बंगाल के सामाजिक सुधार और पुनर्जागरण का अभिन्न अंग रहा है।” उन्होंने कहा, "बरोमा ने जीवन भर इन आदर्शों का पोषण किया। उनके नेतृत्व में, मतुआ महासंघ सामाजिक समानता और बंधुत्व के स्तंभ के रूप में स्थापित हुआ।"बनर्जी ने कहा कि उनकी सरकार ने समुदाय के कल्याण के लिए कई पहल की हैं, जिनमें मतुआ विकास बोर्ड की स्थापना और उत्तर 24 परगना जिले के ठाकुरनगर में हरिचंद-गुरुचंद विश्वविद्यालय की स्थापना शामिल है।
असम में सियासी उलटफेर, Bharatiya Janata Party में शामिल हुए Indian National Congress के निलंबित विधायक
5 Mar, 2026 10:38 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
असम। में विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा का परिवार बढ़ता जा रहा है। हाल ही में जहां कांग्रेस की राज्य इकाई के पूर्व अध्यक्ष भूपेन बोरा रविवार को औपचारिक रूप से भाजपा में शामिल हुए। अब इस कड़ी में तीन निलंबित कांग्रेस विधायक कमलाख्या डे पुरकायस्थ, बसंत दास, शशिकांत दास ने भी सत्तारूढ़ दल का दामन थाम लिया।गुवाहाटी में प्रदेश भाजपा कार्यालय में प्रदेश अध्यक्ष दिलीप सैकिया की मौजूदगी में तीन निलंबित विधायक अन्य कांग्रेस नेताओं के साथ भाजपा में शामिल हुए।
कांग्रेस खाली हो जाएगी: पुरकायस्थ
वहीं भाजपा में शामिल होने के बाद पूर्व कांग्रेस विधायक कमलाख्या डे पुरकायस्थ ने कहा, 'हम तीन लोग जो भाजपा में शामिल हुए हैं और इसका एक ही उद्देश्य है कि हमारे असम व राष्ट्र की सुरक्षा। असम का नागरिक होने के नाते हमें भाजपा के साथ आना है और देश व असम को आगे ले जाने के लिए भाजपा की जो नीति है उसके साथ काम करना है। आने वाले दिन में हम इस नीति को आगे ले जाएंगे। उन्होंने कांग्रेस छोड़ने के एक ही कारण तुष्टीकरण बताया। वहीं पूर्व पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि आने वाले समय में यदि कांग्रेस ने अपनी विचारधारा नहीं बदली तो कांग्रेस खाली हो जाएगी।'
असम सीएम ने बताया बड़ा दिन
इधर, तीन निलंबित कांग्रेस विधायकों के भाजपा में शामिल होने पर मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की प्रतिक्रिया आई। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि आज तीन कांग्रेस विधायक हमारी पार्टी में शामिल हुए हैं। यह भाजपा के लिए एक बड़ा दिन है। मुझे यकीन है कि ये भाजपा की बढ़ती लोकप्रियता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति लोगों के सम्मान को दिखाता है।
सीट शेयरिंग पर सीएम का बयान
वहीं चुनाव से पहले सीट शेयरिंग पर सरमा ने कहा, 'कल रात हमने असम गण परिषद, बोडोलैंड पीपुल्स फोरम और राभा हासोंग जौथा संग्राम समिति के साथ अपनी बातचीत पूरी कर ली है। तो जहां तक NDA की बात है, सीट शेयरिंग पर हमारी बातचीत अब पूरी हो गई है। लेकिन हमें केंद्रीय संसदीय समिति से मंजूरी लेनी होगी। इसलिए आधिकारिक घोषणा में दो से चार दिन लगेंगे।
केंद्रीय मंत्री पवित्रा मार्गेरिटा का बयान
इससे पहले केंद्रीय मंत्री पवित्रा मार्गेरिटा ने कहा, 'अन्य अलग-अलग पार्टियों के लोग, खासकर कांग्रेस के लोग आज भाजपा में शामिल हुए हैं और हमारे नेतृत्व को अपना समर्थन दिखा रहे हैं। वे हमारी विचारधारा के लिए समर्थन दिखा रहे हैं और वे हमारे साथ शामिल हो रहे हैं। हम यह भी बता दें कि सिर्फ असम में हमारी राजधानी गुवाहाटी में ही नहीं, बल्कि हमारे राज्य के अलग-अलग हिस्सों, कोनों में भी, अलग-अलग स्तर से, अलग-अलग पदाधिकारी और दूसरी राजनीतिक पार्टियों के सदस्य, खासकर कांग्रेस से सदस्य भाजपा में शामिल हो रहे हैं।'
फिनलैंड राष्ट्रपति का भारत दौरा, पीएम मोदी ने मजबूत साझेदारी पर दिया जोर
5 Mar, 2026 08:14 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब बुधवार सुबह भारत पहुंचे। इस दौरान राष्ट्रपति स्टब का औपचारिक स्वागत हुआ और उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। एयरपोर्ट पर विदेश राज्य मंत्री के.वी. सिंह ने उनका स्वागत किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, ‘भारत में आपका स्वागत है, राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब। मैं आपकी बात से पूरी तरह सहमत हूं। आपकी यह यात्रा भारत और फिनलैंड के रिश्तों को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी। मैं कल हमारी मुलाकात और रायसीना डायलॉग 2026 में आपके मुख्य भाषण का बेसब्री से इंतजार कर रहा हूं।”
प्रधानमंत्री ने यह बात राष्ट्रपति स्टब के उस पोस्ट के जवाब में कही, जिसमें उन्होंने अपनी भारत यात्रा की जानकारी दी थी। फिनलैंड के राष्ट्रपति ने ‘एक्स’ पर लिखा था, “मैं भारत की राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के साथ-साथ दूसरे नेताओं से भी मिलूंगा। इस यात्रा से फिनलैंड और भारत के बीच रिश्ते और मजबूत होंगे। इसमें व्यापार का क्षेत्र भी शामिल है।”
राष्ट्रपति स्टब रायसीना डायलॉग 2026 में मुख्य अतिथि और मुख्य वक्ता होंगे। इसके अलावा, वे प्रधानमंत्री मोदी के साथ विशेष बातचीत करेंगे। इस दौरान दोनों देशों के रिश्तों को मजबूत करने पर चर्चा होगी। साथ ही, वे आपसी हित के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी बात करेंगे। इस यात्रा का मकसद दोनों देशों के बीच सहयोग को और बढ़ाना है।
Nepal में आम चुनाव की सरगर्मी, टी20 विश्वकप में भारत-इंग्लैंड आमने-सामने
5 Mar, 2026 06:54 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नेपाल। आज 5 मार्च 2026 को कृष्ण पक्ष की द्वितीया है। आज नेपाल में आम चुनाव के लिए मतदान होगा। वहीं, टी20 विश्वकप के दूसरे सेमीफाइनल में भारत और इंग्लैंड के बीच मुकाबला होगा।
नामांकन की अंतिम दिन
राज्यसभा की 37 सीटों पर चुनाव हो रहे हैं। इस चुनाव के नामांकन का अंतिम दिन गुरुवार को है। वहीं, 6 मार्च को नामांकन पत्रों की जांच होगी। 9 मार्च तक नामांकन पत्र वापस लिए जा सकेंगे। 16 मार्च को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान होगा, 16 मार्च को ही वोटों की गिनती होगी। महाराष्ट्र में सात, तमिलनाडु में छह, बिहार और पश्चिम बंगाल में पांच-पांच, ओडिशा में चार, असम में तीन, तेलंगाना, छत्तीसगढ़ और हरियाणा में दो-दो और हिमाचल प्रदेश में एक सीट के लिए मतदान होना है।
नेपाल में आम चुनाव
नेपाल में गुरुवार को आम चुनाव होने वाले हैं। इन संसदीय चुनावों के लिए भारत से लगी सीमा 72 घंटे के लिए सील कर दी गई है। यह चुनाव सुबह सात बजे से शाम पांच बजे तक मतदान निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार होगा।
भारत और इंग्लैंड के बीच दूसरा सेमीफाइनल
टी-20 विश्वकप में गुरुवार को दूसरा सेमीफाइनल है। इसमें भारत और इंग्लैड आमने-सामने होंगे। यह मुकाबला मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेला जाएगा। इससे पहले रविवार को खेले गए मुकाबले में भारत ने वेस्टइंडीज को पांच विकेट से हराकर सेमीफाइनल में जगह पक्की की थी। भारतीय टीम छठी बार टी20 विश्व कप के सेमीफाइनल में पहुंची है। वहीं, लगातार तीसरी बार टीम इंडिया ने अंतिम चार में जगह है।
ब्रिक्स देशों के वित्त मंत्रियों की बैठक स्थगित
जयपुर में गुरुवार को ब्रिक्स देशों के वित्त मंत्रियों की बैठक होने वाली थी। यह बैठक पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अतर्राष्ट्रीय यात्रा मार्गों पर पड़ रहे असर की वजह से स्थगित की गई है।
अमित शाह का ओडिशा दौरा
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह गुरुवार से दो दिन के ओडिशा दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वह सीआईएसएफ के एक कार्यक्रम सहित कई सरकारी आयोजनों में भाग लेंगे। अधिकारियों ने बताया कि शाह पांच मार्च की शाम को भुवनेश्वर पहुंचेंगे और अगले दिन कटक के मुंडाली में सीआईएसएफ के स्थापना दिवस कार्यक्रम में शामिल होंगे।
ग्रेनो वेस्ट आएंगे मुख्यमंत्री योगी
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुरुवार को ग्रेटर नोएडा वेस्ट में आ रहे हैं। यहां सेक्टर-3 में एक निजी अस्पताल के उद्घाटन का कार्यक्रम है। इस मौके पर पूर्व क्रिकेटर कपिल देव भी शहर में मौजूद रहेंगे। इससे पहले 21 फरवरी को भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जेवर में एक सेमी कंडक्टर यूनिट के शिलान्यास कार्यक्रम में जनपद आए थे।
हिमाचल में कांग्रेस विधायक दल की बैठक
हिमाचल प्रदेश में होने जा रहे राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस गुरुवार को विधायक दल के साथ बैठक कर सकती है। बैठक में मुख्यमंत्री सुक्खू की अध्यक्षता में चुनाव रणनीति पर चर्चा की जाएगी। विधायक दल की बैठक का उद्देश्य सभी विधायकों को एक मंच पर लाकर चुनाव प्रक्रिया और मतदान को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश देना है।
शिमला मेयर का कार्यकाल बढ़ाने के मामले पर सुनवाई
हिमाचल प्रदेश में शिमला नगर निगम के महापौर का कार्यकाल बढ़ाने वाले मामले में आज हाईकोर्ट में सुनवाई होगी।
भागीरथपुरा कांड पर सुनवाई
इंदौर के भागीरथपुरा के दूषित पेयजल से हुई मौतों के मामले में गुरुवार को हाईकोर्ट में सुनवाई होंगी। इसमें हाईकोर्ट द्वारा गठित जांच आयोग भी प्रारंभिक रिपोर्ट रख सकता है। कोर्ट ने सेवानिवृत न्यायमूर्ति सुशील कुमार गुप्ता को जांच सौंपी है। आयोग से 2 मार्च तक भागीरथपुरा कांड को लेकर साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए कहा था।
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