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IAF का विमान सुखोई-30 रडार से गायब, क्रैश में पायलटों की मौत
6 Mar, 2026 11:21 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना का एक सुखोई एसयू-30एमकेआई लड़ाकू विमान गुरुवार रात असम के कार्बी आंगलोंग जिले में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस दुखद हादसे में वायुसेना के दो जांबाज अधिकारियों, स्क्वाड्रन लीडर अनुज और फ्लाइट लेफ्टिनेंट पुरवेश दुरगकर का निधन हो गया है। वायुसेना ने आधिकारिक तौर पर इस क्षति की पुष्टि करते हुए बताया कि विमान एक नियमित प्रशिक्षण मिशन पर था, जब यह हादसा हुआ। इससे पहले विमान रडार से गायब हो गया था।
घटनाक्रम के अनुसार, इस दो सीटों वाले लड़ाकू विमान ने असम के जोरहाट से अपनी उड़ान भरी थी।
गुरुवार, 5 मार्च की शाम करीब 7 बजकर 42 मिनट पर विमान का रडार और नियंत्रण कक्ष से अंतिम बार संपर्क हुआ था। इसके बाद विमान अचानक लापता हो गया, जिससे वायुसेना में हड़कंप मच गया। रात लगभग 9 बजकर 34 मिनट पर विमान के लापता होने की आधिकारिक सूचना साझा की गई, जिसके तुरंत बाद व्यापक खोज और बचाव अभियान (सर्च ऑपरेशन) शुरू किया गया। कठिन प्रयासों के बाद वायुसेना को विमान का मलबा जोरहाट से लगभग 60 किलोमीटर दूर कार्बी आंगलोंग के दुर्गम इलाके में मिला। जांच में सामने आया कि विमान क्रैश हो चुका था और उसमें सवार दोनों पायलटों को जानलेवा चोटें आई थीं, जिसके कारण उन्हें बचाया नहीं जा सका। रूसी कंपनी सुखोई द्वारा निर्मित यह विमान भारतीय वायुसेना के बेड़े का एक अत्यंत शक्तिशाली और आधुनिक विमान माना जाता है। भारतीय वायुसेना ने अपने सोशल मीडिया हैंडल के जरिए शहीद पायलटों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है। वायुसेना ने कहा कि पूरा सैन्य परिवार इस कठिन समय में शोक संतप्त परिवारों के साथ मजबूती से खड़ा है। फिलहाल हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। यह दुर्घटना देश के लिए एक बड़ी रक्षा क्षति है, जिसने पूरे सैन्य समुदाय को शोक में डुबो दिया है।
PM मोदी का बयान: देश की प्रगति के लिए कृषि क्षेत्र को नई ऊर्जा देना आवश्यक
6 Mar, 2026 09:18 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को ‘कृषि और ग्रामीण परिवर्तन’ विषय पर बजट के बाद आयोजित वेबिनार को संबोधित करते हुए कहा कि भारत के कृषि क्षेत्र को नई ऊर्जा से भरना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष के बजट में कृषि और ग्रामीण विकास को गति देने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं और वेबिनार में सामने आए सुझाव इन प्रावधानों को तेजी से जमीन पर उतारने में मदद करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वैश्विक बाजार तेजी से बदल रहे हैं और दुनिया में कृषि उत्पादों की मांग भी नए रूप में सामने आ रही है। ऐसे में भारतीय किसानों को ध्यान में रखते हुए खेती को अधिक से अधिक निर्यात उन्मुख बनाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारत की विविध जलवायु परिस्थितियां और अनेक एग्रो-क्लाइमेटिक जोन देश को कृषि उत्पादन में विशेष बढ़त देते हैं, जिनका बेहतर उपयोग किया जाना चाहिए।उन्होंने बताया कि केंद्रीय बजट में हाई-वैल्यू एग्रीकल्चर पर विशेष जोर दिया गया है। इसके तहत ऐसे कृषि उत्पादों को बढ़ावा दिया जा रहा है जिनकी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अधिक मांग है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, कि केरला और तमिलनाडु के किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए इस बार नारियल उत्पादन को विशेष प्रोत्साहन दिया गया है। इसके अलावा पूर्वोत्तर क्षेत्र की फसलों को भी बढ़ावा देने का प्रस्ताव बजट में शामिल किया गया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बजट के प्रावधानों का पूरा लाभ देश को मिले, इसके लिए विशेषज्ञों के अनुभव और सुझाव बेहद महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि बजट में आवंटित हर रुपये का लाभ वास्तविक पात्र लाभार्थियों तक जल्द से जल्द पहुंचे, इसके लिए ठोस रणनीति बनानी होगी। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि कृषि, ग्रामीण कारीगर और श्रम आधारित गतिविधियां भारत की अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव हैं। उन्होंने कहा कि कृषि भारत की दीर्घकालिक विकास यात्रा का एक रणनीतिक स्तंभ भी है और इसी सोच के साथ सरकार लगातार इस क्षेत्र को मजबूत करने के प्रयास कर रही है।
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत लगभग 10 करोड़ किसानों को अब तक 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक की सहायता दी जा चुकी है। वहीं न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में किए गए सुधारों से किसानों को लागत से डेढ़ गुना तक लाभ मिल रहा है। इसके अलावा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत करीब 2 लाख करोड़ रुपये के दावों का निपटान किया गया है, जिससे किसानों का जोखिम कम हुआ है और उन्हें आर्थिक सुरक्षा मिली है। वेबिनार में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित संबंधित मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ भी शामिल हुए।
कोर्ट के आदेशों की अनदेखी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा– यह नया फैशन बनता जा रहा
6 Mar, 2026 07:16 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने अदालत के आदेशों का पालन न करने और अवमानना याचिका दायर होने पर देरी से अपील दाखिल करने की प्रवृत्ति पर कड़ी नाराजगी जता दी है। शीर्ष अदालत ने कहा है कि यदि इसतरह के मामलों में सख्ती नहीं दिखाई गई, तब न्यायपालिका में लोगों का भरोसा कमजोर पड़ सकता है। जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्ला और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने कहा कि हाल के वर्षों में देखने में आया हैं कि अदालत के आदेशों का लंबे समय तक पालन नहीं होता और जब अवमानना याचिका दायर होती है, तब उसके बाद काफी देरी के साथ अपील या पुनर्विचार याचिका दाखिल होती है। शीर्ष अदालत ने कहा कि अपील में देरी अपवाद होनी चाहिए, लेकिन अब यह करीब-करीब नियम बनती जा रही है। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि इस तरह की प्रवृत्ति को स्वीकार नहीं कर सकते है। शीर्ष अदालत के अनुसार, जब कोई पक्ष जानबूझकर अदालत के आदेशों का पालन नहीं करता, इस आचरण से न्यायपालिका की गरिमा और कानून के शासन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इस तरह के मामलों में यह आचरण कई बार आपराधिक अवमानना की सीमा तक पहुंच सकता है। अदालत ने कहा कि यदि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट इन मामलों में दृढ़ता नहीं दिखाते, तब देश के आम नागरिकों का न्यायपालिका में अटूट विश्वास कमजोर पड़ सकता है।
अदालत के अनुसार, आदेश की जानकारी होने के बावजूद यदि कोई पक्ष जानबूझकर उस आदेश का पालन नहीं करता, तब वहां अवमानना के दायरे में आएगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अवमानना की कार्यवाही केवल अदालत में पक्षकार रहे व्यक्तियों तक सीमित नहीं होगी। दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी छत्तीसगढ़ सरकार के अधिकारियों के खिलाफ दायर अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान की। मामला कर्मचारियों की सेवाओं के नियमितीकरण से जुड़े आदेश के पालन न करने से जुड़ा था। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार के अधिकारियों को आदेश लागू करने के लिए अंतिम मौका देकर 15 दिन का समय दिया है।
केंद्रीय एजेंसियों में बढ़ी तैनाती की अवधि, NSG और NIA में 7 साल तक रह सकेंगे अधिकारी
6 Mar, 2026 06:04 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली|केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (एनएसजी) और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) सहित चार एजेंसियों में प्रतिनियुक्ति की अवधि बढ़ा दी है। अब इन एजेंसियों में प्रतिनियुक्ति पर आने वाले कार्मिक पांच वर्ष की बजाए, सात साल तक तैनात रहेंगे। बाकी दो एजेंसियों में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) शामिल हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय में पुलिस 2 प्रभाग (कार्मिक-नीति अनुभाग) की तरफ से पांच मार्च को उक्त निर्देश जारी किए गए हैं। बता दें कि एनएसजी द्वारा गृह मंत्रालय से अनुरोध किया गया था कि केंद्रीय एजेंसियों में प्रतिनियुक्ति पर आने वाले कार्मिकों के कार्यकाल की अवधि पांच वर्ष से बढ़ाकर सात साल कर दी जाए। इस मामले को लेकर केंद्रीय अर्धसैनिक बलों 'सीएपीएफ' और असम राइफल 'एआर' के साथ परामर्श किया गया। उसमें यह बात सामने आई कि प्रतिनियुक्ति अवधि बढ़ाए जाने से एनएसजी में कार्मिकों के संस्थागत ज्ञान को बनाए रखने में मदद मिलेगी। इसी तरह से दूसरी एजेंसियों को लेकर फीडबैक मिला है। इसके मद्देनजर यह निर्णय लिया गया कि 'सीएपीएफ' और 'एआर' कर्मियों को प्रारंभिक नियुक्ति के समय ही सात वर्ष की अवधि के लिए एनएसजी सहित चारों केंद्रीय एजेंसियों में प्रतिनियुक्त किया जाएगा। इसके लिए मंत्रालय द्वारा 22 नवंबर 2016 के नीतिगत दिशानिर्देशों में संशोधन किए गए हैं। पैराग्राफ 3 (बी) (2) में 'प्रतिनियुक्ति की अवधि' शीर्षक के तहत कुछ प्रावधानों में बदलाव किया गया है। विशेष कार्यक्षेत्र वाली जॉब, जैसे नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी), राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए), राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) और एनएसजी में अब प्रतिनियुक्ति की अवधि सात वर्ष कर दी गई है। यह अवधि उक्त एजेंसियों में प्रवेश करने के समय से लागू होगी। इन संगठनों को उपयुक्त प्रतिस्थापन नियुक्त करने के लिए काफी पहले से ही अग्रिम कदम उठाने की आवश्यकता होती है। ये आदेश केंद्रीय गृह मंत्री की स्वीकृति से जारी किए गए हैं।
चारधाम यात्रा 2026 का रजिस्ट्रेशन शुरू, घर बैठे इन तीन तरीकों से करें ऑनलाइन पंजीकरण
6 Mar, 2026 05:12 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
देहरादून । उत्तराखंड में चारधाम यात्रा 2026 के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालु अब घर बैठे मोबाइल, कंप्यूटर, मोबाइल एप या वॉट्सएप के माध्यम से पंजीकरण कर सकते हैं। इस बार रजिस्ट्रेशन सभी यात्रियों के लिए अनिवार्य किया गया है, ताकि प्रशासन यात्रियों की संख्या, सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को सुचारू रूप से संभाल सके। इस साल यात्रा की शुरुआत 19 अप्रैल 2026 से हो रही है। यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के कपाट इसी दिन श्रद्धालुओं के लिए खुलने है। जबकि केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल और बद्रीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को खुलने है।
ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन तीन तरीकों से होगा है। पहला, उत्तराखंड सरकार की वेबसाइट पर जाकर अकाउंट बनाना और यात्रा की जानकारी देकर रजिस्ट्रेशन स्लिप डाउनलोड करना। दूसरा, टूरिस्ट केयर उत्तराखंड मोबाइल एप के जरिए अकाउंट बनाने के बाद यात्रा विवरण भरकर यात्रा पास डाउनलोड करना। तीसरा, वॉट्सएप के माध्यम से रजिस्ट्रेशन: 8394833833 पर “यात्रा” मैसेज भेजने के बाद चैटबॉट आवश्यक जानकारी लेकर रजिस्ट्रेशन पूरा करता है। उन यात्रियों के लिए जिन्होंने इंटरनेट की सुविधा नहीं है, हरिद्वार और ऋषिकेश सहित कई प्रमुख स्थानों पर बायोमैट्रिक रजिस्ट्रेशन काउंटर लगाए जाएंगे। ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन की शुरुआत 17 अप्रैल से होगी।
उत्तराखंड सरकार ने यात्रियों की मदद के लिए हेल्पलाइन नंबर 0135-1364 भी जारी किया है। इस नंबर पर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन, यात्रा मार्ग, व्यवस्थाओं और अन्य जरूरी जानकारी की सहायता प्राप्त की जा सकती है।
इस साल बद्रीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल 2026 को सुबह 6:15 बजे श्रद्धालुओं के लिए खुलने वाले है। यह तिथि नरेंद्रनगर राजदरबार में पंचांग गणना के बाद तय की गई। चमौली के बद्रीनाथ धाम के कपाट पिछले वर्ष की तुलना में 11 दिन पहले खुल रहे हैं। यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के कपाट 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया के अवसर पर विधि-विधान के साथ भक्तों के लिए खोले जाएंगे। इस तरह, श्रद्धालु अब आसानी से ऑनलाइन पंजीकरण कर सुरक्षित और सुव्यवस्थित चारधाम यात्रा का आनंद ले सकते हैं। यात्रा में शामिल होने से पहले रजिस्ट्रेशन और हेल्पलाइन की जानकारी अवश्य प्राप्त करना चाहिए, ताकि किसी प्रकार की असुविधा से बचा जा सके।
जयशंकर का बड़ा बयान- कोई देश खुद को दुनिया की सबसे बड़ी ताकत नहीं कह सकता
6 Mar, 2026 04:50 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली|वैश्विक तनाव के बीच विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि आज कोई भी देश पूरी तरह से हावी नहीं है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि 20वीं सदी के मध्य से एक निश्चित विश्व व्यवस्था बनाए रखने की वैश्विक अपेक्षा 'अवास्तविक' थी, और अब शक्ति विभिन्न आयामों में काफी हद तक फैल गई है।
वैश्विक शासन का बदलता स्वरूप
रायसीना डायलॉग 2026 में बोलते हुए विदेश मंत्री ने पिछले सात दशकों में वैश्विक शासन के विकसित होते स्वरूप पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा, 'जब हम इन 70 वर्षों को पीछे मुड़कर देखते हैं, तो मुझे लगता है कि 1945 या 1989 को हमेशा के लिए स्थिर करने की उम्मीद एक बहुत ही अवास्तविक उम्मीद थी। दिल्ली में आयोजित रायसीना डायलॉग 2026 में जयशंकर ने कहा कि 1945 या 1989 के बाद बने विश्व व्यवस्था को हमेशा के लिए बनाए रखने की उम्मीद करना अवास्तविक था। उन्होंने कहा कि पिछले 70 साल को अगर इतिहास के नजरिए से देखें तो यह भारत के हजारों साल के इतिहास का सिर्फ एक छोटा हिस्सा है, इसलिए दुनिया का बदलना स्वाभाविक है।
वैश्विक व्यवस्था में बदलाव के पीछे दो बड़ी ताकतें
जयशंकर ने कहा कि वैश्विक व्यवस्था में बदलाव के पीछे दो बड़ी ताकतें काम कर रही हैं तकनीक (टेक्नोलॉजी) और जनसंख्या का स्वरूप (डेमोग्राफी)। आने वाले दशक में यही दोनों कारक दुनिया की दिशा तय करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि आज वैश्विक राजनीति का विश्लेषण अक्सर अमेरिका के इर्द-गिर्द किया जाता है, लेकिन वास्तविकता यह है कि दुनिया धीरे-धीरे कई ताकतों में बंट रही है। अब कोई भी देश ऐसा नहीं है, जो हर क्षेत्र-जैसे अर्थव्यवस्था, सैन्य शक्ति, तकनीक या कूटनीति में पूरी तरह से हावी हो।विदेश मंत्री के मुताबिक आज ताकत का मतलब सिर्फ जीडीपी या सैन्य शक्ति नहीं रह गया है। दुनिया के अलग-अलग हिस्से अलग-अलग क्षेत्रों में मजबूत हो रहे हैं, इसलिए वैश्विक शक्ति अब कई देशों और क्षेत्रों में फैली हुई है।
कर्नाटक का 4.48 लाख करोड़ का बजट पेश, सिद्धारमैया का केंद्र पर हमला
6 Mar, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने शुक्रवार को अपना 17वां बजट पेश किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार संघीय शासन व्यवस्था का पालन नहीं कर रही है। इस वजह से कर्नाटक के साथ अन्याय हो रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार विकास की ऐसी रणनीति अपना रही है, जिसमें जन कल्याण योजनाओं और बुनियादी ढांचे में निवेश के बीच संतुलन बनाया गया है। इसमें लंबे समय के आर्थिक बदलावों पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि वह राज्य की मांगों के प्रति अधिक संवेदनशील बने। साल 2026-27 का बजट पेश करते हुए सिद्धारमैया ने कहा कि कर्नाटक देश के विकास में सबसे आगे है। यह देश को सबसे ज्यादा टैक्स देने वाले प्रमुख राज्यों में से एक है। उन्होंने जानकारी दी कि साल 2026-27 के लिए कुल खर्च 4,48,004 करोड़ रुपये होने का अनुमान है। सिद्धारमैया के राजनीतिक करियर का यह 17वां बजट है।
केंद्र सरकार पर साधा निशाना
बजट भाषण के दौरान मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार कर्नाटक के साथ वित्तीय न्याय नहीं कर रही और राज्य को मिलने वाले संसाधनों में कमी की जा रही है। उन्होंने कहा कि राज्य देश की अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान देता है, लेकिन बदले में पर्याप्त सहयोग नहीं मिलता।
सियासी मायने
इस बजट को आगामी राजनीतिक रणनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है। कांग्रेस सरकार ने सामाजिक योजनाओं और विकास परियोजनाओं पर जोर देकर राज्य में अपने शासन का संदेश देने की कोशिश की है।
Enforcement Directorate का एक्शन: Anil Ambani से जुड़ी कंपनियों के ठिकानों पर छापेमारी
6 Mar, 2026 10:22 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उद्योगपति अनिल अंबानी और उनकी कंपनी रिलायंस पावर लिमिटेड से जुड़े कारोबारियों और सहयोगियों के ठिकानों पर बड़े पैमाने पर छापेमारी की। यह कार्रवाई कथित वित्तीय अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जांच के तहत की जा रही है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ईडी की करीब 15 विशेष टीमों ने मुंबई में अलग-अलग स्थानों पर एक साथ कार्रवाई शुरू की। बताया जा रहा है कि शहर में लगभग 10 से 12 ठिकानों पर तलाशी ली जा रही है। इनमें रिलायंस पावर से जुड़े कुछ व्यवसायियों के पंजीकृत कार्यालय, कॉरपोरेट दफ्तर और आवासीय परिसरों को भी शामिल किया गया है। सूत्रों के मुताबिक जांच एजेंसी रिलायंस पावर से जुड़े संदिग्ध फंड ट्रांसफर, वित्तीय लेनदेन और निवेश से संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है। ईडी को शक है कि कंपनी से जुड़े कुछ लेनदेन में नियमों का उल्लंघन किया गया है और धन को अलग-अलग माध्यमों से ट्रांसफर किया गया।
बताया जा रहा है कि छापेमारी के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन से जुड़े सबूतों की जांच की जा रही है। अधिकारियों की टीमें कंप्यूटर, सर्वर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की भी पड़ताल कर रही हैं, ताकि संदिग्ध ट्रांजेक्शनों की पूरी जानकारी सामने आ सके। हालांकि इस कार्रवाई को लेकर ईडी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। लेकिन सूत्रों का कहना है कि यह कार्रवाई लंबे समय से चल रही वित्तीय जांच का हिस्सा है और आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे हो सकते हैं।
गौरतलब है कि उद्योगपति अनिल अंबानी के समूह की कई कंपनियां पहले भी वित्तीय मामलों और कर्ज से जुड़े विवादों को लेकर चर्चा में रही हैं। ऐसे में ईडी की इस कार्रवाई को कारोबारी जगत में बड़े घटनाक्रम के तौर पर देखा जा रहा है।
Kaithun का अनोखा मंदिर: यहां Ravana के भाई Vibhishana की होती है आराधना
6 Mar, 2026 09:13 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोटा। राजस्थान के कोटा जिले के कैथून कस्बे में कैथून स्थित यह मंदिर दुनिया का एकमात्र ऐसा स्थान माना जाता है जहाँ रावण के भाई विभीषण की पूजा होती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यह प्रतिमा लगभग पांच हजार वर्ष पुरानी है। कहा जाता है कि रामराज्याभिषेक के बाद जब विभीषण भगवान शिव और हनुमान जी को कांवड़ में बैठाकर भ्रमण पर निकले थे, तब कैथून (प्राचीन कौथुनपुर) में विश्राम के दौरान शर्त के अनुसार वे यहीं स्थापित हो गए। मंदिर के वर्तमान ढांचे का निर्माण 18वीं शताब्दी में महाराव उम्मेदसिंह प्रथम द्वारा कराया गया था। देश में यह इकलौता स्थान है जहाँ धुलेंडी के दिन हिरण्यकश्यप के पुतले के दहन की परंपरा निभाई जाती है।
राजस्थान के कोटा जिले के कैथून कस्बे में धुलेंडी के अवसर पर आयोजित होने वाले पारंपरिक सात दिवसीय विभीषण मेले का भव्य शुभारंभ हुआ। इस वर्ष मेले के मुख्य अतिथि प्रदेश के शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर रहे। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, पिछले 45 वर्षों से आयोजित हो रहे इस अनूठे मेले की शुरुआत मंत्री दिलावर द्वारा विभीषण मंदिर में विधि-विधान से पूजन और दर्शन के साथ हुई। इसके पश्चात विभिन्न मंदिरों से निकली देव विमान शोभायात्रा के मेला स्थल पहुँचने पर आतिशबाजी के बीच हिरण्यकश्यप के पुतले का दहन किया गया। इस अवसर पर मदन दिलावर ने मेलों को समाज में आपसी मेल-जोल और संस्कृति का अभिन्न अंग बताया। उन्होंने विभीषण जी को महान धर्मात्मा और प्रभु राम का परम भक्त बताते हुए कहा कि उन्होंने अधर्म के मार्ग को त्यागकर सत्य का साथ दिया था। मंत्री दिलावर ने वक्फ संशोधन कानून का जिक्र करते हुए कहा कि केंद्र सरकार के नए प्रावधानों के कारण ही विभीषण मंदिर की विवादित जमीन वापस हिंदू समाज को मिल सकी है। उन्होंने घोषणा की कि राज्य सरकार अब आबादी क्षेत्र के सभी मंदिरों की जमीन के पट्टे जारी करेगी। ये पट्टे किसी व्यक्ति के नाम न होकर मंदिर की मूर्ति के नाम होंगे, ताकि भविष्य में कोई भी इन संपत्तियों पर अवैध अतिक्रमण न कर सके। उन्होंने बताया कि राज्य के सभी मंदिरों की जमीनों का सर्वेक्षण पूरा कर लिया गया है और जल्द ही मालिकाना हक के पट्टे सौंप दिए जाएंगे।
Varanasi में करेंगे Hanuman Chalisa का पाठ, फिर Lucknow के लिए निकलेंगे शंकराचार्य
6 Mar, 2026 08:34 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाराणसी। वाराणसी में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि सीएम योगी के पास अभी 6 दिन का समय बचा है। वह गौ माता को राष्ट्रमाता घोषित कर दें। अभी तक उनकी तरफ से कोई बयान नहीं आया है। उनके ही पार्टी के अन्य लोग समर्थन कर रहे हैं, लेकिन कोई खुलकर सामने नहीं आ रहा है। 7 मार्च को हनुमान चालीसा का पाठ कर वाराणसी से लखनऊ के लिए निकलेंगे। वहां पर सभी साधु संतों के सामने हम अपने फैसले सुनाएंगे। उन लोगों का चेहरा भी सामने लाएंगे, जो लोग हमारे इस अभियान में साथ हैं। शंकराचार्य ने गुरुवार को कहा कि रास्ते में हमें जहां रोका जाएगा, हम कानून का पूरा साथ देंगे। उम्मीद है कि ये धर्म की यात्रा है, इसमें कोई बाधा नहीं आएगी। अपने निर्धारित मार्ग और कार्यक्रम के अनुसार ही लखनऊ के लिए बढ़ेंगे। हम अपने मार्ग पर निकलेंगे और जो भी निर्णय लेना होगा, वह अपने धर्म और परंपरा के अनुसार लेंगे। प्रशासन को जो करना है वह करे, लेकिन अपने तय कार्यक्रम से पीछे नहीं हटेंगे।
गौ माता की रक्षा के लिए लखनऊ आने का आह्वान किया
शंकराचार्य ने बताया कि वह गाय और सनातन की रक्षा के लिए 11 मार्च को लखनऊ में सभा करेंगे। 6 मार्च को बड़े भगवान चिंता गणेश का पूजन पाठ होगा। इसी दिन वीर शिरोमणि छत्रपति शिवाजी महाराज जयंती पर संकल्प लेंगे। फिर 7 मार्च की शाम संकट मोचन मंदिर में हनुमान चालीसा पाठ करेंगे। इसके बाद लखनऊ यात्रा के लिए निकलेंगे। कई जिलों से होते हुए और रात्रि विश्राम करते हुए 10 मार्च को लखनऊ पहुंचेंगे। यहां 11 मार्च को शीतला अष्टमी पर काशीराम मैदान में गौ ध्वज प्रतिष्ठा किया जाएगा। इसके बाद धर्म युद्ध शुरू होगा, जो लोग भी गौ माता की रक्षा के लिए आना चाहते हैं, वह आएं।
दबाव से ऊपर उठकर न्याय करें न्यायाधीश: बड़ा संदेश
5 Mar, 2026 11:04 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट जज बीवी नागरत्ना ने न्यायाधीशों को अपने फैसले पर अड़े रहने की सलाह दी है। उन्होंने कहा है कि किसी भी दबाव में सही फैसला लेने से संकोच नहीं करना चाहिए। वह केरल हाईकोर्ट में आयोजित दूसरे टीएस कृष्णमूर्ति अय्यर मेमोरियल लेक्चर में बोल रहीं थीं। इससे पहले उन्होंने मीडिया को लेकर भी ऐसी ही बात कही थी। उन्होंने कहा था कि किसी भी तरह की बाधा, भय या प्रभाव में मीडिया अपनी भूमिका नहीं निभा सकता है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मंगलवार को जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि जजों को सही फैसला लेने से संकोच नहीं करना चाहिए। फिर चाहे इसकी वजह से उनकी उन्नति ही क्यों न रुक जाए या सत्ता में बैठे लोग नाराज हो जाएं। उन्होंने कहा कि एक जज को राजनीतिक दबाव, संस्थागत धमकी या पॉपुलर डिमांड से मुक्त ही रहना चाहिए। उन्होंने कहा था कि प्रेस पर कब्जा करने के हालिया प्रयासों के पीछे न केवल आर्थिक आधार हैं बल्कि राजनीतिक पहलू भी शामिल हैं।
खास बात है कि जस्टिस नागरत्ना सितंबर 2027 में भारत की पहली महिला चीफ जस्टिस बनेंगी। जस्टिस नागरत्ना ने साफ तौर पर कहा कि मीडिया अपना काम ठीक से तभी कर सकता है जब वह किसी भी तरह के डर या दबाव से मुक्त हो। उन्होंने कहा कि आज के दौर में प्रेस की आजादी को सबसे बड़ा खतरा सीधे तौर पर लगने वाली पाबंदियों से नहीं है। बल्कि, असली खतरा आर्थिक नीतियों, लाइसेंस देने के कड़े नियमों और मीडिया कंपनियों के मालिकाना हक से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि एक मीडिया प्रतिष्ठान कानूनी रूप से सरकार की आलोचना करने के लिए स्वतंत्र हो सकता है, फिर भी आर्थिक रूप से इस तरह से मजबूर हो सकता है कि ऐसी आलोचना महंगी पड़ जाए।
उन्होंने कहा कि यह अधिकार भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता किसी भी पेशे से जुड़ने या किसी भी व्यवसाय, व्यापार या कारोबार को चलाने की स्वतंत्रता के बीच परस्पर क्रिया से उभरता है। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति नागरत्ना ने बताया कि भारत में प्रेस की आज़ादी को संविधान दो अलग-अलग तरीकों से सुरक्षा देता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि लोकतंत्र के लिए स्वतंत्र मीडिया कितना जरूरी है।
‘25 साल में एक भी छुट्टी नहीं’—कनाडाई पीएम Justin Trudeau ने की Narendra Modi की तारीफ
5 Mar, 2026 09:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। कभी कनाडा और भारत के बीच तनातनी चल रही थी। अब दोनों देश एक दूसरे की तारीफ करते नहीं थक रहे हैं। हाल ही में भारत की यात्रा पर आए कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने पीएम नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि ये प्रधानमंत्रीजी बहुत अलग हैं उन्होंने बीते 25 सालों में कभी एक भी दिन की छुट्टी नहीं ली है। वे सिर्फ और सिर्फ राष्ट्रसेवा को महत्व देते हैं।
कार्नी ने एक कार्यक्रम में अपने हालिया भारत दौरे और पीएम मोदी से मुलाकात को याद करते हुए कहा कि मोदी की कार्यशैली और काम के प्रति उनका समर्पण बेहद अलग है। उन्होंने कहा- ‘यह व्यक्ति अलग तरह का है।
गुजरात के मुख्यमंत्री और भारत के प्रधानमंत्री के रूप में पिछले 25 वर्षों में उन्होंने एक भी दिन छुट्टी नहीं ली है।कनाडाई प्रधानमंत्री ने कहा कि मोदी हर हफ्ते के अंत में चुनाव प्रचार में निकल जाते हैं और उनकी रैलियों में लाखों लोग पहुंचते हैं। कार्नी ने कहा कि कई बार एक रैली में करीब ढाई लाख लोग तक मौजूद रहते हैं, जो उनकी लोकप्रियता को दिखाता है। कार्नी ने पीएम मोदी की कार्यशैली की तारीफ करते हुए कहा कि वह खास तौर पर ग्रामीण आबादी के लिए काम करने पर ध्यान देते हैं। दरअसल कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी हाल ही में भारत दौरे पर आए थे। यह दौरा ऐसे समय हुआ जब पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के रिश्ते तनावपूर्ण रहे थे। कार्नी की यह यात्रा भारत-कनाडा संबंधों को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है। दोनों नेताओं के बीच बातचीत के बाद कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। दोनों देशों ने तकनीक, ऊर्जा, रक्षा और सांस्कृतिक सहयोग से जुड़े कई समझौतों पर दस्तखत किए। अपने संबोधन में कार्नी ने कहा कि भारत और कनाडा के रिश्ते अब नई साझेदारी के दौर में प्रवेश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कनाडा भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभा सकता है। इसी दिशा में कनाडा की कंपनी कैमेको ने भारत को लंबे समय तक यूरेनियम सप्लाई करने का समझौता भी किया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कार्नी के दौरे को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह भारत और कनाडा के रिश्तों के लिए एक नया मील का पत्थर है। उन्होंने याद दिलाया कि पिछले साल जी 7 बैठक के दौरान कार्नी ने कनाडा में उनका गर्मजोशी से स्वागत किया था और अब भारत में उन्हें उसी गर्मजोशी से स्वागत करने का मौका मिला है। कार्नी ने यह भी कहा कि कनाडा में करीब 20 लाख लोग भारतीय मूल के हैं, जिससे दोनों देशों के रिश्ते और मजबूत होते हैं।
Ahmedabad की सेव फैक्ट्री में भीषण आग, दमकल ने पाया काबू; सभी कर्मचारी सुरक्षित 🚒
5 Mar, 2026 07:01 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अहमदाबाद। अहमदाबाद के कालूपुर ब्रिज के पास बुधवार-गुरुवार रात नमकीन बनाने के कारखाने में भीषण आग लगी। सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची फायर ब्रिगेड के जवानों ने भारी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। इस आग में कारखाना जलकर राख हो गया, गनीमत रही की कोई जानहानि नहीं हुई। शहर के शहरकोटड़ा पुलिस थाने के सामने स्थित नककीन सेव बनाने के कारखाने में अचानक भीषण आग लगी। आसपास के इलाके में धुएं के गुब्बार से अफरातफरी मच गई। रात 2:30 बजे के आसपास फायर ब्रिगेड को इसकी जानकारी मिली, जिसके बाद आग पर काबू पाने के लिए दमकल की गाड़ियां पहुंची। कुछ घंटों की मशक्क्त के बाद फायर के जवानों ने आग पर काबू पाया, लेकिन आग लगने का कारणों का पता नहीं चल सका है।
मीडिया रिपोर्ट में फायर अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि रात के समय लगी आग को ध्यान में रखकर एतियातन आसपास के इलाके से फायर ब्रिगेड गाड़ियां और अधिकारी मौके पर पहुंचे थे1 कारखाने में लगी आग में कोई जानहानि नहीं हुई है, लेकिन फैक्ट्री में किस वजह से आग लगी, इसकी जांच जारी है। आग से सबकुछ जलकर खाक हो चुका है। फैक्ट्री में फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट से लेकर जरूरी परमिशन को लेकर भी जांच कर रहे हैं।
वैश्विक हालात पर चर्चा, नरेंद्र मोदी ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से की बात
5 Mar, 2026 06:25 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली|पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच अहम बातचीत हुई। दोनों नेताओं ने क्षेत्र में बिगड़ते हालात पर चिंता जताई और कहा कि हालात को संभालने के लिए बातचीत और कूटनीति का रास्ता अपनाना जरूरी है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि क्षेत्र में शांति और स्थिरता जल्द बहाल होना बेहद जरूरी है। इस बातचीत को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए कहा कि उन्होंने अपने मित्र फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से बात की। इस दौरान दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया में तेजी से बदलते हालात पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि मौजूदा संकट का समाधान केवल संवाद और कूटनीति से ही संभव है। दोनों नेताओं ने यह भी कहा कि वे क्षेत्र में शांति बहाल करने के लिए एक-दूसरे के साथ संपर्क बनाए रखेंगे और जरूरी समन्वय करेंगे ताकि हालात को जल्द सामान्य किया जा सके।
फ्रांस ने बदली सैन्य रणनीति
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच फ्रांस ने अपनी सैन्य रणनीति में बदलाव किया है। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने फ्रांस के परमाणु ऊर्जा से चलने वाले विमानवाहक पोत चार्ल्स डी गॉल को बाल्टिक सागर से भूमध्यसागर की ओर भेजने का आदेश दिया है। इस युद्धपोत के साथ कई फ्रिगेट जहाज भी तैनात किए जा रहे हैं। इसके अलावा इस जहाज के एयर विंग के साथ लड़ाकू विमान भी तैनात किए गए हैं ताकि सहयोगी देशों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
राफेल और एयर डिफेंस सिस्टम तैनात
फ्रांस ने क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी और मजबूत कर दी है। राष्ट्रपति मैक्रों ने बताया कि राफेल लड़ाकू विमान, एयर डिफेंस सिस्टम और हवाई निगरानी के लिए विशेष रडार प्लेटफॉर्म पहले ही तैनात किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर फ्रांस अपने सहयोगी देशों की रक्षा के लिए और कदम भी उठा सकता है। हालांकि फ्रांस ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह अमेरिका और इस्राइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों में सीधे शामिल नहीं है।
ड्रोन हमलों को मार गिराने का दावा
मैक्रों ने कहा कि संघर्ष की शुरुआत के समय फ्रांसीसी सेना ने आत्मरक्षा में कई ड्रोन को मार गिराया था। उन्होंने बताया कि यह कार्रवाई सहयोगी देशों के हवाई क्षेत्र की रक्षा के लिए की गई थी। हालांकि उन्होंने इस सैन्य कार्रवाई के बारे में ज्यादा तकनीकी जानकारी साझा नहीं की। फ्रांस ने यह भी कहा कि उसके सहयोगी देश जानते हैं कि जरूरत पड़ने पर फ्रांस उनके साथ खड़ा रहेगा।
अमेरिका के विमानों को सीमित अनुमति
फ्रांस ने अपने कुछ सैन्य ठिकानों पर अमेरिकी विमानों को अस्थायी रूप से तैनात रहने की अनुमति दी है। फ्रांसीसी रक्षा अधिकारियों ने कहा कि यह अनुमति केवल क्षेत्र में सहयोगी देशों की सुरक्षा के समर्थन के लिए दी गई है। उन्होंने साफ किया कि फ्रांस ने यह शर्त रखी है कि इन ठिकानों का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ किसी हमले के लिए नहीं किया जाएगा। फ्रांस का कहना है कि उसका उद्देश्य केवल क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना और अपने सहयोगियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
वैश्विक कूटनीति का बड़ा मंच, उद्घाटन करेंगे Narendra Modi; मुख्य अतिथि होंगे Alexander Stubb
5 Mar, 2026 06:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वैश्विक स्तर पर होगा सीधा प्रसारण, लाखों लोग इसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर देख सकेंगे
नई दिल्ली। पीएम नरेंद्र मोदी गुरुवार को नई दिल्ली में रायसीना संवाद 2026 के 11वें संस्करण का उद्घाटन करेंगे, जो भू-राजनीति और भू-अर्थशास्त्र पर भारत के प्रमुख सम्मेलन की शुरुआत का प्रतीक है। तीन दिवसीय इस कार्यक्रम में वैश्विक नेताओं, नीति निर्माताओं और विशेषज्ञों को प्रमुख अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों पर विचार-विमर्श करने के लिए एक साथ लाएगा। फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि होंगे और भाषण देंगे। विश्व भर की सरकारों, विचारकों और रणनीतिक समुदायों की भागीदारी से आयोजित इस संवाद में 110 देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे, जिनमें मंत्री, पूर्व राष्ट्राध्यक्ष और सरकार प्रमुख, संसद सदस्य, सैन्य कमांडर, व्यापारिक नेता, प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ, शिक्षाविद, पत्रकार और विद्वान शामिल हैं। इस साल के आयोजन का विषय है संस्कार-अभिकथन, सामंजस्य, उन्नति।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक तीन दिनों तक चलने वाले इस सम्मेलन में छह मुख्य विषयों पर चर्चा होगी। विवादित सीमाएँ: शक्ति, ध्रुवीकरण और परिधि; साझा संसाधनों का पुनर्निर्माण: नए समूह, नए संरक्षक, नए रास्ते; श्वेत व्हेल: एजेंडा 2030 की प्राप्ति; अंतिम क्षण: जलवायु, संघर्ष और विलंब की कीमत; भविष्य की दुनिया: एक तकनीकी-लोक की ओर; और टैरिफ के दौर में व्यापार: पुनर्प्राप्ति, लचीलापन और पुनर्निर्माण। करीब 2,700 प्रतिभागियों संवाद में शामिल होने हो सकते हैं, जबकि कार्यवाही का वैश्विक स्तर पर सीधा प्रसारण किया जाएगा और लाखों लोग इसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर देखेंगे।
ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ओआरएफ) द्वारा भारत के विदेश मंत्रालय के सहयोग से आयोजित यह सम्मेलन 5 से 7 मार्च तक चलेगा और इसमें इस बात का विश्लेषण किया जाएगा कि तकनीकी व्यवधान, रणनीतिक प्रतिस्पर्धा और आर्थिक सुरक्षा किस प्रकार वैश्विक राजनीति को नया आकार दे रहे हैं। इस संवाद में शामिल होने वाले कई गणमान्य व्यक्तियों में माल्टा के डिप्टी पीएम और विदेश मामलों एवं पर्यटन मंत्री इयान बोर्ग, भूटान के विदेश मामलों एवं बाहरी व्यापार मंत्री ल्योंपो डी एन धुंग्येल, मॉरीशस के विदेश मामलों, क्षेत्रीय एकीकरण एवं अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मंत्री धनंजय रामफुल और सेशेल्स के विदेश मामलों एवं प्रवासी मामलों के मंत्री बैरी फॉरे शामिल हैं।
विदेश मंत्रालय के मुताबिक इस सम्मेलन में शामिल होने वाले एक अन्य गणमान्य व्यक्ति श्रीलंका के विदेश मामलों, विदेशी रोजगार और पर्यटन मंत्री विजिथा हेरथ हैं। इस साल की चर्चा पारंपरिक गठबंधनों और विश्लेषकों द्वारा वर्णित तकनीकी-ध्रुवीय दुनिया के बीच तनाव पर केंद्रित है, जहां प्रभाव तेजी से कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखलाओं और डिजिटल अवसंरचना पर नियंत्रण द्वारा तय किया जा रहा है। संवाद का समापन भारत के दीर्घकालिक विकास रोडमैप पर चर्चा के साथ होगा, जिसमें विकसित भारत 2047 की परिकल्पना भी शामिल है, जिसका उद्देश्य स्वतंत्रता शताब्दी तक देश को एक विकसित अर्थव्यवस्था में बदलना है।
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