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परीक्षा पे चर्चा में पीएम से मिलने 3.25 करोड़ लोगों ने कराया पंजीयन
15 Jan, 2025 08:23 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली,। पीएम नरेंद्र मोदी के साथ परीक्षा पे चर्चा का हिस्सा बनने के लिए इस साल रिकॉर्ड संख्या में छात्रों, अभिभावकों व शिक्षकों ने अपना पंजीकरण कराया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक अभी तक इसमें शामिल होने के लिए 3.25 करोड़ से ज्यादा लोगों ने पंजीकरण कराए हैं जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है।
परीक्षा पे चर्चा में रजिस्ट्रेशन कराने वालों में बड़ी संख्या में विदेशी छात्र भी शामिल हैं। रजिस्ट्रेशन की यह प्रक्रिया चालू है लेकिन 14 जनवरी, मंगलवार को पंजीकरण का आखिरी दिन था। पीएम मोदी की उल्लेखनीय पहल, परीक्षा पे चर्चा (पीपीसी), परीक्षा से जुड़े तनाव को कम करने का तरीका सिखाती है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय का कहना है कि यह पहल परीक्षा को जश्न के पर्व में परिवर्तित करने के लिए एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन के रूप में निरंतर प्रगति कर रही है।
गौरतलब है कि इस चर्चा में पीएम मोदी परीक्षा से जुड़े छात्रों के कई प्रश्नों का उत्तर देते हैं। इसके साथ ही पीएम छात्रों को यह मार्ग भी दिखाते हैं कि कैसे बिना तनाव और दबाव के परीक्षाओं में शामिल होना है। पीपीसी 2025 के 8वें संस्करण ने भारत और विदेशों के छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों से 3.25 करोड़ से अधिक पंजीकरण के साथ एक अभूतपूर्व उपलब्धि अर्जित की है।
पीपीसी 2025 के लिए ऑनलाइन पंजीकरण माईगोवडॉटइन पर 14 दिसंबर 2024 से शुरु हुआ और 14 जनवरी 2025 तक जारी रहेगा। शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग द्वारा प्रतिवर्ष आयोजित किया जाने वाला यह इंटरैक्टिव कार्यक्रम शिक्षा का एक बहुप्रतीक्षित उत्सव बन गया। पीपीसी के अनुरूप, 12 जनवरी 2025 से 23 जनवरी 2025 तक स्कूल स्तर पर कई आकर्षक गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। इन गतिविधियों का उद्देश्य छात्रों के समग्र विकास को प्रोत्साहन देना और परीक्षाओं को उत्सव के रूप में मनाने के लिए प्रेरित करना है। इन गतिविधियों के जरिए से शिक्षा को दबावपूर्ण गतिविधि के बजाय एक यात्रा के रूप में मनाना सिखाया जाता है।
CISF की दो नई बटालियनों को मिली मंजूरी, इतने हजार युवाओं को मिलेगी नौकरी- गृह मंत्रालय
14 Jan, 2025 09:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: गृह मंत्रालय ने हवाई अड्डों और परमाणु ऊर्जा संयंत्रों जैसे महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा करने वाले केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के लिए 2,000 से अधिक कर्मियों वाली दो नई बटालियनों को मंजूरी दे दी है। नई बटालियन के गठन से बल के कर्मियों की संख्या करीब 2 लाख हो जाएगी। इस फैसले से न सिर्फ सीआईएसएफ की क्षमता बढ़ेगी, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा भी मजबूत होगी।
2,000 से अधिक युवाओं को मिलेगा रोजगार
सीआईएसएफ के प्रवक्ता ने मंगलवार को कहा, "गृह मंत्रालय (एमएचए) ने दो नई बटालियनों के गठन को मंजूरी देकर सीआईएसएफ के महत्वपूर्ण विस्तार को मंजूरी दी है।" उन्होंने कहा, "हाल ही में मंजूर महिला बटालियन के साथ इस फैसले से बल की क्षमता बढ़ेगी, राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होगी और 2,000 से अधिक लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।" प्रवक्ता ने कहा कि मंजूरी सोमवार को मिल गई है।
पिछले साल महिला बटालियन को मंजूरी मिली थी
पिछले साल के अंत में बल के लिए महिला बटालियन को मंजूरी दी गई थी। बल में वर्तमान में 12 रिजर्व बटालियन हैं, जिनमें से प्रत्येक में 1,025 कर्मी हैं। आंतरिक सुरक्षा से संबंधित तत्काल आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए प्रशिक्षित कर्मियों का एक पूल बनाकर CISF की “बढ़ती” मांगों को पूरा करने में भी नई बटालियन महत्वपूर्ण होंगी। देश के 68 नागरिक हवाई अड्डों की सुरक्षा के अलावा, 1969 में गठित CISF परमाणु और एयरोस्पेस क्षेत्र में कई प्रतिष्ठानों और ताजमहल और लाल किले जैसे ऐतिहासिक स्मारकों को आतंकवाद विरोधी सुरक्षा प्रदान करता है।
पैसेंजर ट्रेन के पांच डिब्बे पटरी से उतरे, यात्रियों की सांसें अटकीं, अफरातफरी मची
14 Jan, 2025 06:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चेन्नई: विल्लुपुरम रेलवे स्टेशन के पास मंगलवार सुबह एक बड़ा हादसा टल गया। यहां यात्रियों को ले जा रही एक पैसेंजर ट्रेन अचानक पटरी से उतर गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार पैसेंजर ट्रेन के पांच डिब्बे पटरी से उतर गए। हालांकि आवाज सुनते ही ट्रेन को तुरंत रोक दिया गया, जिससे बड़ा हादसा टल गया। इस हादसे के बाद अन्य ट्रेनों के लिए रास्ता साफ कर दिया गया। वहीं ट्रेन में बैठे अन्य यात्रियों को सुरक्षित निकाल लिया गया है।
टला हादसा
रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी ने बताया कि विल्लुपुरम से पुडुचेरी जा रही एक पैसेंजर ट्रेन के पांच डिब्बे विल्लुपुरम रेलवे स्टेशन के पास पटरी से उतर गए। तेज आवाज सुनते ही ट्रेन को तुरंत रोक दिया गया। ट्रेन रुकने से बड़ा हादसा टल गया। ट्रेन रुकने के बाद सभी यात्रियों को ट्रेन से सुरक्षित निकाल लिया गया। रेलवे के कर्मचारी और इंजीनियर मौके पर पहुंचकर पटरी से उतरी ट्रेन की मरम्मत करने में सक्रियता से जुटे वहीं, विल्लुपुरम रेलवे पुलिस ने भी मामले की गहन जांच शुरू कर दी है।
सुबह 5.30 बजे हुआ हादसा
बताया जा रहा है कि पैसेंजर ट्रेन करीब 500 यात्रियों को लेकर विल्लुपुरम से पुडुचेरी जा रही थी। ट्रेन सुबह 5.25 बजे विल्लुपुरम से रवाना हुई थी। ट्रेन एक मोड़ पार कर रही थी, तभी उसका एक डिब्बा पटरी से उतर गया। ट्रेन के डिब्बे के पटरी से उतरने से इतनी तेज आवाज हुई कि लोको पायलट ने उसे सुन लिया और तुरंत ट्रेन रोक दी। इस हादसे की वजह से विल्लुपुरम रूट पर सुबह 8.30 बजे तक ट्रेन सेवाएं बाधित रहीं। आपको बता दें कि विल्लुपुरम-पुडुचेरी मेमू एक छोटी दूरी की ट्रेन है, जो करीब 38 किलोमीटर की दूरी तय करती है।
मकर संक्रांति पर महानिर्वाणी अखाड़े के संतों ने किया अमृत स्नान- महाकुंभ मेला
14 Jan, 2025 04:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
प्रयागराज: महाकुंभ के दूसरे स्नान पर्व मकर संक्रांति पर मंगलवार सुबह से ही अखाड़ों के संतों का स्नान जारी है. सुबह 10 बजे तक एक करोड़ से ज्यादा श्रद्धालुओं ने गंगा और संगम में डुबकी लगाई. मेला प्रशासन ने जानकारी देते हुए बताया कि सबसे पहले श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी और श्री शंभू पंचायती अटल अखाड़े के संतों ने संगम में अमृत स्नान किया. अमृत स्नान के बाद महानिर्वाणी अखाड़े के महामंडलेश्वर चेतन गिरि जी महाराज ने कहा कि प्रयागराज में हर 12 साल में पूर्ण कुंभ लगता है और यह महाकुंभ 144 साल बाद आ रहा है जब 12 पूर्ण कुंभ हो रहे हैं. महाकुंभ में स्नान का मौका भाग्यशाली लोगों को ही मिलता है. उन्होंने बताया कि महानिर्वाणी अखाड़े के 68 महामंडलेश्वर और हजारों संतों ने अमृत स्नान किया।
महानिर्वाणी और अटल अखाड़े के बाद तपोनिधि पंचायती श्री निरंजनी अखाड़ा और आनंद अखाड़े के संतों ने अमृत स्नान किया. इसमें सबसे आगे अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी चल रहे थे और उनके पीछे अखाड़े के ध्वज और फिर पूज्य देवता कार्तिकेय स्वामी और सूर्य नारायण पालकी पर सवार थे।
इनके पीछे नागा संन्यासियों का समूह था। इन सबके बीच निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरि रथ पर सवार थे। अमृत स्नान के बाद निरंजनी अखाड़े के महंत रविंद्र पुरी ने बताया कि हम 7:15 बजे स्नान घाट पर पहुंचे और 7:45 बजे हमने स्नान किया और घाट खाली कर दिया। आधे घंटे में निरंजनी अखाड़े और आनंद अखाड़े के हजारों साधु-संतों ने स्नान किया। निरंजनी अखाड़े के 35 महामंडलेश्वर और हजारों नागा संन्यासियों ने अमृत स्नान किया।
निरंजनी अखाड़े की साध्वी और पूर्व मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति ने कहा कि घाट पर युवाओं की भीड़ यह बताती है कि युवाओं में सनातन धर्म के प्रति कितनी आस्था है। जब भी किसी ने सनातन धर्म को चुनौती दी, तो युवा और संत समाज ने आगे आकर धर्म की रक्षा की। निरंजनी अखाड़े और आनंद अखाड़े के बाद सबसे बड़ी संख्या में जूना अखाड़ा और आह्वान अखाड़े के हजारों संतों ने अमृत स्नान किया। इनमें जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि रथ पर सवार होकर स्नान घाट पर आए और उनके साथ हजारों नागा संन्यासी भी थे। एक के बाद एक तेरह अखाड़ों का अमृत स्नान शाम चार बजे तक पूरा हो जाएगा।
फलों को खाने का सबसे अच्छा समय होता है सुबह का
14 Jan, 2025 02:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । हेल्थ एक्सपर्ट अक्सर लोगों को अपनी डाइट में फलों को शामिल करने की सलाह देते हैं। हालांकि, कई लोग यह नहीं जानते कि फल कब और कैसे खाना चाहिए ताकि उनका अधिकतम लाभ मिल सके। डायटीशियन्स के अनुसार, फलों को खाने का सबसे अच्छा समय सुबह का है। सुबह का समय इसलिए उपयुक्त माना जाता है क्योंकि इस वक्त हमारा पाचन तंत्र सक्रिय होता है। रातभर कोई भोजन न करने के कारण पाचन तंत्र ने पर्याप्त आराम किया होता है और अब उसे ताजगी और ऊर्जा की आवश्यकता होती है। इस समय फल खाने से शरीर को जरूरी विटामिन्स और मिनरल्स मिलते हैं, जो न केवल ताजगी लाते हैं बल्कि पाचन को भी दुरुस्त रखते हैं। फलों में पानी की अच्छी मात्रा होती है, जो शरीर को हाइड्रेटेड रखता है। सुबह के समय फल खाने से न केवल शरीर को ऊर्जा मिलती है, बल्कि पूरे दिन के लिए ताजगी भी बनी रहती है। वहीं, एक्सपर्ट का यह भी कहना है कि रात के समय फल खाना अच्छा नहीं होता।
रात में हमारी पाचन प्रक्रिया धीमी हो जाती है, और फल जल्दी पच नहीं पाते हैं। इस वजह से पेट में ऐंठन, गैस और अपच जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा, फलों में प्राकृतिक शुगर भी होती है, जिसे रात में पचने में अधिक समय लगता है, और इससे वजन बढ़ने का खतरा बढ़ सकता है। यही नहीं, रात में फल खाने से ब्लड शुगर लेवल भी बढ़ सकता है, जो डायबिटीज के मरीजों के लिए हानिकारक हो सकता है। डायटीशियन्स के मुताबिक, जिन लोगों को पाचन समस्याएं, जैसे गैस, अपच, या एसिडिटी होती हैं, उन्हें रात के समय फल नहीं खाना चाहिए। इसके अलावा, डायबिटीज के रोगियों को भी रात में फल का सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे उनका ब्लड शुगर लेवल अनियंत्रित हो सकता है। जो लोग रात में भारी भोजन करने की आदत रखते हैं, उनके लिए भी फल खाने से पाचन तंत्र पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है, जिससे नींद में खलल और पाचन समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
इसलिए, एक्सपर्ट की सलाह है कि फल का सेवन सुबह से लेकर दोपहर तक किया जाए, ताकि शरीर उन्हें बेहतर तरीके से पचा सके और उनका पूरा पोषण मिल सके। बता दें कि फलों को सेहत के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है क्योंकि इनमें प्राकृतिक पोषक तत्वों का भंडार होता है। फलों में विटामिन्स, मिनरल्स, फाइबर और एंटीऑक्सिडेंट्स भरपूर मात्रा में होते हैं, जो शरीर को जरूरी एनर्जी देने के साथ-साथ बीमारियों से लड़ने की ताकत भी प्रदान करते हैं।
गले की खराश, सर्दी-जुकाम और खांसी के लिए रामबाण है शहद और काली मिर्च
14 Jan, 2025 02:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । शहद और काली मिर्च दोनों ही प्रकृति के अद्भुत उपहार हैं, जो अपनी औषधीय गुणों के लिए सदियों से प्रसिद्ध रहे हैं। जहां शहद में एंटीऑक्सिडेंट्स, एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुण होते हैं, वहीं काली मिर्च में पिपेरिन होता है, जो मेटाबॉलिज्म को तेज करने में मदद करता है।
इन दोनों का संयोजन किसी जादू से कम नहीं है, और यह आपकी सेहत के लिए कई तरीके से लाभकारी साबित हो सकता है। अगर आप अपनी वेट लॉस जर्नी को और अधिक प्रभावी बनाना चाहते हैं, तो शहद और काली मिर्च का कॉम्बिनेशन आपके लिए एक बेहतरीन उपाय हो सकता है। सुबह-सुबह एक गिलास गुनगुने पानी में एक चमच शहद और एक चुटकी काली मिर्च पाउडर मिलाकर पीने से शरीर का मेटाबॉलिज्म बढ़ता है, जिससे फैट बर्न करने में मदद मिलती है। यह मिश्रण न केवल वजन घटाने में सहायक है, बल्कि आपके शरीर को ऊर्जा प्रदान करने के साथ-साथ डिटॉक्सिफिकेशन में भी मदद करता है। शहद और काली मिर्च के मिश्रण का सेवन इम्यून सिस्टम को भी बूस्ट करता है। शहद में मौजूद फ्लावोनॉयड्स और काली मिर्च में पिपेरिन आपके शरीर की प्राकृतिक प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने का काम करते हैं। इसके साथ ही, यह दोनों तत्व गले की खराश, सर्दी-जुकाम और खांसी जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में भी कारगर साबित होते हैं।
इसके अलावा, शहद और काली मिर्च का यह मिश्रण गट हेल्थ को भी सुधारता है। यह आपकी पाचन प्रक्रिया को तेज करता है और आपके पेट को साफ रखने में मदद करता है। काली मिर्च के एंटी-बैक्टीरियल गुण आंतों में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया को मारने का काम करते हैं, जिससे आपका गट हेल्थ बेहतर होता है। शहद और काली मिर्च का संयोजन हार्ट हेल्थ के लिए भी फायदेमंद हो सकता है। यह रक्त संचार को बेहतर करता है, जिससे दिल की बीमारियों का खतरा कम होता है। इसके अतिरिक्त, यह आपके शरीर से अतिरिक्त चर्बी को बाहर निकालने में मदद करता है, जिससे आपका दिल स्वस्थ रहता है।
इसरो का स्पेडेक्स मिशन सफल रहा तो भारत भी बन जाएगा ताकतवर
14 Jan, 2025 01:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) अंतरिक्ष में एक ऐसे मिशन की नींव रख रहा है, जो भविष्य की उड़ानों के लिए काफी महत्वपूर्ण साबित होंगे। यह है स्पेडेक्स मिशन। इस मिशन में इसरो सफल रहा तो हम भी अमेरिका, चीन, रुस की तरह ताकतवर बन जाएंगे। इस मिशन में दो छोटे अंतरिक्ष यान शामिल हैं, जिनमें हर एक का वजन करीब 220 किलो है। इन्हें रॉकेट पीएसएलवी-सी60 के जरिए लॉन्च किया गया है। इसरों ने 30 दिसंबर को श्रीहरिकोटा से स्पेडेक्स यानी स्पेस डॉकिंग एक्सपेरिमेंट मिशन लॉन्च किया था। इसके तहत पीएसएलवी-सी60 रॉकेट से दो स्पेसक्राफ्ट को पृथ्वी से 470 किमी ऊपर तैनात किए गए थे।
इसरो के पूर्व वैज्ञानिक के मुताबिक ये यान पृथ्वी से 470 किलोमीटर ऊपर चक्कर लगाएंगे। इनमें एक चेजर (एसडी गुणा 01) और दूसरा टारगेट (एसडी गुना02) नाम का उपग्रह है। इस मिशन का मकसद सफल डॉकिंग, डॉक किए गए अंतरिक्ष यानों में एनर्जी ट्रांसफर करना और अनडॉकिंग के बाद पेलोड का संचालन करना है। इसरो ने बीते रविवार को स्पेस डॉकिंग एक्सपेरिमेंट स्पेडेक्स का सफल ट्रायल किया। इसरो ने 2 स्पेस सैटेलाइट के बीच दूरी पहले 15 मीटर, फिर 3 मीटर तक रखी। इसके बाद दोनों सैटेलाइट को वापस सुरक्षित दूरी पर ले जाया गया। इसरो ने बताया कि डॉकिंग ट्रायल का डेटा एनालिसिस किया जा रहा है। इसके बाद आगे की प्रक्रिया की जाएगी। स्पेडेक्स मिशन की डॉकिग दो बार टल चुकी है। पहले 7 जनवरी फिर 9 जनवरी को डॉकिंग किया जाना था।
एआई नए आविष्कारों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा: रिपोर्ट
14 Jan, 2025 01:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारत सहित दुनिया भर के 69 प्रतिशत अधिकारी मानते हैं कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) नए आविष्कारों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह दावा किया है ‘एक्सेंचर टेक्नोलॉजी विजन 2025’ रिपोर्ट में।
ताजा रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि एआई अब एक टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट पार्टनर, पर्सनल ब्रांड एम्बेसडर, और पावर रोबोटिक बॉडी के रूप में भी तेजी से कार्य करेगा, जो बेहतर प्रदर्शन के लिए लोगों की मदद करेगा। एआई का प्रसार अब उद्यमों और समाज में इतनी तेजी से हो रहा है, जिसे किसी पिछली टेक्नोलॉजी से तुलना नहीं की जा सकती। एक्सेंचर की अध्यक्ष और सीईओ जूली स्वीट ने इस संदर्भ में कहा कि एआई के फायदों का सही उपयोग तभी संभव होगा जब नेता इसे एक व्यवस्थित तरीके से अपनाएं और इसके परिणामों पर विश्वास बनाए रखें।
केवल इसी तरह से व्यवसाय और लोग एआई की अद्भुत संभावनाओं का लाभ उठा सकेंगे। रिपोर्ट के अनुसार, एआई के वास्तविक लाभ तभी संभव होंगे, जब इसे भरोसे की नींव पर स्थापित किया जाएगा। 77 प्रतिशत अधिकारी इस बात से सहमत हैं कि एआई के सफल कार्यान्वयन के लिए भरोसा आवश्यक है। इसके अलावा, 81 प्रतिशत अधिकारियों का मानना है कि भरोसे की रणनीति को किसी भी टेक्नोलॉजी रणनीति के समानांतर विकसित किया जाना चाहिए। इस शोध में 21 उद्योगों और 28 देशों के 4,000 से अधिक अधिकारियों ने भाग लिया, जिसमें भारत भी शामिल था। एक्सेंचर के समूह मुख्य कार्यकारी-प्रौद्योगिकी और सीटीओ कार्तिक नारायण ने कहा कि नए एआई मॉडल, एजेंटिक एआई सिस्टम और आर्किटेक्चर के साथ, उद्यमों को अपना डिजिटल ब्रेन बनाने में मदद मिलेगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि डिजिटल सिस्टम किस प्रकार डिज़ाइन किए जाते हैं, लोग कैसे काम करते हैं, और वे अपने ग्राहकों से किस प्रकार संवाद करते हैं।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि 80 प्रतिशत कार्यकारी इस बात से चिंतित हैं कि बड़े भाषा मॉडल (एलएलएम) और चैटबॉट्स हर ब्रांड को एक जैसी आवाज़ दे सकते हैं। हालांकि, 77 प्रतिशत अधिकारी इस बात से सहमत हैं कि ब्रांड अपनी पर्सनल एआई एक्सपीरियंस के माध्यम से संस्कृति, मूल्यों और आवाज़ जैसे विशिष्ट ब्रांड तत्वों को इस समस्या का समाधान बनाने में सक्षम हो सकते हैं। इसके अलावा, रिपोर्ट में कहा गया है कि अगले दशक में सामान्य रोबोट उभरेंगे, जो फिजिकल वर्ल्ड में एआई स्वायत्तता को बढ़ाएंगे।
चीनी 'कंपनियां' दे रही हैं साइबर फ्रॉड की ट्रेनिंग, चलाती हैं साइबर कैंप, सामने आया चौंकाने वाला मामला
14 Jan, 2025 01:35 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली के एक मैकेनिकल इंजीनियर, विग्नेश्वर मुरुगनंधम, हमेशा से एक आरामदायक जीवन जीने की इच्छा रखता था। उसके पिता सरकारी सेवा से रिटायर हो चुके थे, और 30 वर्षीय मुरुगनंधम एक उच्च वेतन वाली नौकरी की तलाश में था। लेकिन दुर्भाग्यवश, वह कानून के दायरे से बाहर निकल गए और कथित तौर पर कंबोडिया में एक चीनी साइबर अपराध सिंडिकेट का हिस्सा बन गए।
पिछले सप्ताह, विग्नेश्वर को हौज खास के एक प्रतिष्ठित संस्थान में एक जापानी प्रोफेसर को छह घंटे तक 'डिजिटल रूप से गिरफ्तार' करके धोखा देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। पूछताछ के दौरान, उसने बताया कि अपराध की दुनिया में उसका प्रवेश आसान पैसे कमाने के वादे से हुआ था। एक ऑनलाइन चाइनीज संपर्क ने उसे कंबोडिया में अपनी 'कंपनी' के साथ काम करने का एक आकर्षक प्रस्ताव दिया था।
कंपनी ने उसे कंबोडिया के लिए टिकट भेजा
चाइनीज संपर्क की ओर से उसे टिकट प्राप्त हुआ और वह अप्रैल 2024 में कंबोडिया पहुंचा। उसके पास कई भारतीय बैंक खाते थे, जिन्हें खोलने के लिए उससे कहा गया था। शुरुआत में सब कुछ सामान्य प्रतीत हो रहा था। मुरुगनंधम को एक होटल में ठहराया गया और उसके नए मालिक उन बैंक खातों का उपयोग कर रहे थे। लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, उसे यह महसूस होने लगा कि कुछ ठीक नहीं है। उसके मालिक उसे यह नहीं बताते थे कि खातों के माध्यम से कितना पैसा लेन-देन हो रहा है, और उसे ऐसा लगने लगा कि वह एक बड़ी योजना का एक छोटा हिस्सा है। जब वह अपनी नई दिनचर्या में ढलने लगा, तो उसे पता चला कि वह अकेला नहीं है। उसने पुलिस अधिकारियों को सूचित किया कि उसके साथ 20 से अधिक चीनी नागरिक भी काम कर रहे थे, जो भारत और उसके पड़ोसी देशों को लक्षित करने वाले एक बड़े साइबर अपराध नेटवर्क का हिस्सा थे।
खुद को कहते थे कंपनी
वे अपने आपको 'कंपनी' के रूप में प्रस्तुत करते थे और सभी को विशेष प्रशिक्षण दिया गया था। उन्हें निर्देशित किया गया था कि यदि इस विषय पर कोई सवाल करे, तो वे अपने आपको 'कर्मचारी' के रूप में पेश करें। यह प्रक्रिया अत्यंत सुव्यवस्थित थी, जिसमें भारत और अन्य देशों के व्यक्तियों को कंप्यूटर और टेलीकम्युनिकेशन से संबंधित कार्यों के लिए आमंत्रित किया गया था। कैंप की गतिविधियों पर बारीकी से निगरानी रखी जाती थी, और प्रतिभागियों को उनकी विशेषज्ञता के अनुसार वर्गीकृत किया जाता था।
एक महीने के बाद आया वापस
एक महीने के बाद लौटने पर मुरुगनंधम की जिम्मेदारी भारतीय बैंक खातों का प्रबंधन करना था। उसने इस कार्य को एक महीने से अधिक समय तक समर्पण के साथ किया। लेकिन समय के साथ, उसे असहजता का अनुभव होने लगा। उसे यह समझ में आया कि अन्य समूह भी इसी प्रकार का कार्य कर रहे हैं और वे टेलीग्राम चैनलों पर आसानी से उपलब्ध हैं। इसीलिए, एक महीने के कैंप के बाद, उसने 'कंपनी' को छोड़कर अपना खुद का व्यवसाय शुरू करने का निर्णय लिया।
अकाउंट डिटेल की एवज में कमीशन
मुरुगनंधम ने भारत लौटने के बाद कंबोडिया में सक्रिय साइबर अपराधियों को बैंक खाता मुहैया कराना शुरू किया। इस गतिविधि के माध्यम से उसे पर्याप्त कमीशन प्राप्त हुआ, जिससे यह एक लाभदायक व्यवसाय बन गया। उसने कानून के शिकंजे में आने से पहले ही काफी धन अर्जित कर लिया था। जनवरी की शुरुआत में, मुरुगनंधम को दक्षिण-पश्चिम दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए पांच संदिग्धों में से एक के रूप में पहचाना गया। डीसीपी सुरेंद्र चौधरी के अनुसार, मुरुगनंधम चीनी नागरिकों के साथ मिलकर कंबोडिया में साइबर अपराधों को अंजाम दे रहा था।
महाकुंभ के बाद दिखाई नहीं देते नागा संत, विलुप्त होते हैं या छिप जाते हैं?
14 Jan, 2025 12:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
प्रयागराज। नागा साधुओं की अपनी जिंदगी है। उनके बारे में आम आदमी कुछ नहीं मालूम। जब भी कुंभ होता है हजारों की संख्या में नागा संत दिखाई देने लगते हैं। जैसे ही मेले का समापान होता है फिर इनके दीदार नहीं होते हैं। ये कहां जाते हैं क्या करते ऐसे ही कई सवालों के जवाब मीडिया तलाश रही है। इस पर नागा संत अर्जुन पुरी ने बताया कि वह पांच वर्ष की अवस्था से नागा संन्यासी हैं। जब बोध हुआ तो संतों की शरण में थे। उन्होंने बताया कि ज्ञान, भक्ति, वैराग्य के द्वारा मेरा पालन-पोषण हुआ। अब तक का पूरा जीवन संत जीवन ही रहा है। नागा संत ने बताया कि उन्हें जूना अखाड़े की तरफ से धर्म प्रचार के लिए पूरी दुनिया में भेजा जाता है। भारत समेत अन्य देशों में सनातनी लोगों का प्रचार-प्रसार करना मुख्य उद्धेश्य है।
कहां चले जाते हैं नागा संन्यासी
नागा संत ने बताया कि कुंभ-महाकुंभ के बाद हम ठंडे स्थानों पर रहने चले जाते हैं। इसकी वजह यह है कि हमारे शरीर में ऊर्जा का स्तर काफी ज्यादा होता है। हम गर्मी को बर्दाश्त नहीं कर पाते हैं। इसलिए हम ठंडे स्थानों पर ही रहते हैं। उन्होंने कहा कि हम या तो हिमालय की तरफ या फिर हिमाचल प्रदेश में ऊंचाई वाली जगह चले जाते हैं, जहां भरपूर ठंड रहती है। फिर कभी बड़ा मेला लगता है तो हम वहां पहुंच जाते हैं। नहीं तो पहाड़ों पर गुफाओं में रहकर साधनारत रहते हैं। क्या करते हैं नागा संन्यासी, इस सवाल के जवाब में नागा संत अर्जुन पुरी ने बताया कि हम सनातन के सिपाही हैं। यह सनातन की फौज है। सनातन को विस्तारित करने, इसे सशक्त बनाने और इसका ध्वज पूरे विश्व में लहराने के लिए, नागा संतों की फौज बनाई जाती है। फिर उनको गुप्तचरों की तरह पूरे देश और विदेश में भेज दिया जाता है। वहां जाने के बाद हम लोग सनातनी धर्म-संस्कृति का प्रचार-प्रसार करते हैं।
नागा संन्यासी बनाने की प्रक्रिया
संत अर्जुन पुरी ने बताया कि नागा संन्यासी बनने की प्रक्रिया बहुत कठिन है। सभी को नागा संन्यास नहीं दिया जाता। सिर्फ उन्हीं को दिया जाता है जो बचपन से नागा संन्यासियों की शरण में आ जाते हैं। उन्होंने बताया कि इसके बाद उन्हें कई तरह की कठोर साधनाओं, तपस्याओं, ध्यान-योग और पूजा-पाठ से गुजरना पड़ता है। बचपन से ही उनका लिंग मर्दन किया जाता है। नागा संन्यास में दिगंबर और श्री दिगंबर बनने के लिए बचपन से ही इसकी दीक्षा ली जाती है। नागा संत अर्जुन पुरी के मुताबिक नागा संन्यासी के दिन की शुरुआत तीन-साढ़े तीन बजे से हो जाती है। स्नान आदि के बाद हम जप में लग जाते हैं। इसके बाद हवन करते हैं। इन सबके बाद पठन-पाठन का दौर शुरू होता है। जो लोग पढ़ नहीं सकते हैं वह जाप करते हैं। उन्होंने बताया कि इसके अलावा वह लोग सेवा आदि भी करते हैं। आश्रम में साफ-सफाई समेत अन्य काम भी वह सब करते हैं। जो लोग पढ़ने-लिखने में सक्षम हैं, वह धर्म ग्रंथों के पठन-पाठन में लगे रहते हैं।
नागाओं को ठंड क्यों नहीं लगती?
ठंड नहीं लगने के पीछे भी नागा संन्यासी ने वजह बताई। उन्होंने कहाकि हम मंत्र से अभिमंत्रित करके भभूति को लगाते हैं। यह हमारे लिए विशेष कपड़े के रूप में काम करता है। इसके अलावा हम अपना जीवन नियम-संयम से जीते हैं। हम कई तरह के भोगों से दूर रहते हैं। इसलिए शरीर में ऊर्जा और अग्नि लगातार बनी रहती है। हमारा शरीर अंदर से गर्म और मजबूत बना रहता है। इससे हम मौसम की मार से बचे रहते हैं। इस सवाल के जवाब में नागा संन्यासी ने बताया कि लोगों को डरना नहीं चाहिए। असल में हम भभूत लगाकर बैठते हैं। चित्त से लेकर शरीर तक हम नग्न रहते हैं। हमें लगता है कि इसी वजह से लोगों को भय सा लगा रहता है। इसके अलावा लोगों के मन में भ्रांति बन गई है कि नागा साधु बड़े कठोर होते हैं। लेकिन असलियत यह है हमारा हृदय मक्खन की तरह से कोमल होता है। उन्होंने कहाकि हम लोगों से कहना चाहते हैं कि सारा समाज संतों की शरण में आए। किसी तरह का डर-भय न रखें। डरने की कोई जरूरत नहीं। हम नागा संन्यासी बहुत दयावान होते हैं।
बर्फीली हवा और कोहरे की चपेट में उत्तर भारत, 6 दिनों तक न्यूनतम तापमान 6-7 डिग्री रहेगा
13 Jan, 2025 06:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: दिल्ली एनसीआर सहित पूरा उत्तर भारत ठंडी हवा और कोहरे के आगोश में हैं। यूपी,बिहार,राजस्थान और मध्य प्रदेश सहित अन्य राज्यों में ठंडी हवाएं चल रही हैं, घना कोहरा है और विजिविलिटी भी काफी कम है। बीते दिनों हल्की बारिश के बाद ठंड और कोहरे ने जनजीवन को प्रभावित किया है। दिल्ली में शनिवार रात हुई बारिश से तापमान में गिरावट दर्ज की गई, लेकिन रविवार सुबह से मौसम साफ हो गया। हालांकि, सोमवार को शहर में मध्यम से घना कोहरा छाने की संभावना है।
मौसम विभाग के अनुसार, राजधानी में अगले छह दिनों तक न्यूनतम तापमान 6-7 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है। दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण भी चिंता का विषय बना हुआ है। बारिश के बाद प्रदूषण में अस्थायी कमी आई थी, लेकिन रविवार सुबह एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) फिर से 300 के पार पहुंच गया। यह स्तर स्वास्थ्य के लिए खतरनाक माना जाता है। मौसम विभाग ने सोमवार को अधिकतम तापमान 19 डिग्री और न्यूनतम तापमान 7 डिग्री रहने की संभावना जताई है।
पंजाब और हरियाणा में कोहरा, बारिश की संभावना
पंजाब और हरियाणा में कोहरा और ठंड गंभीर रूप ले रहे हैं। पंजाब में आज और अगले दो दिनों तक घने कोहरे के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। वहीं, हरियाणा में भी स्थिति समान बनी हुई है। चंडीगढ़ में घने कोहरे का असर देखा जा सकता है। दोनों राज्यों में 15 जनवरी को गरज और चमक के साथ बारिश होने की संभावना भी है। उत्तर प्रदेश के कई जिलों में घने कोहरे और कड़ाके की ठंड ने आम जनजीवन को प्रभावित किया है। मौसम विभाग ने गोरखपुर, बस्ती, कुशीनगर, मेरठ, और मुरादाबाद समेत कई जिलों में घने कोहरे की चेतावनी दी है। बिहार और राजस्थान में भी कोहरे और ठंड का प्रकोप जारी है। बिहार के गया और जमुई जैसे इलाकों में घने कोहरे का अलर्ट है, जबकि राजस्थान के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों में येलो अलर्ट जारी किया गया है।
पहाड़ी राज्यों में भीषण ठंड
हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में ठंड चरम पर है। हिमाचल और उत्तराखंड में घने कोहरे के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर और कुपवाड़ा में न्यूनतम तापमान माइनस में रहने की संभावना है। इन इलाकों में ठंड के कारण सामान्य जीवन प्रभावित हो रहा है। मौसम विभाग ने लोगों को ठंड और कोहरे से बचने के लिए एहतियात बरतने की सलाह दी है। सर्दी के इस मौसम में गर्म कपड़े पहनें और खासतौर पर सुबह और रात में यात्रा करने से बचें।
12 लाख साल पुरानी बर्फ से पृथ्वी की जलवायु और पर्यावरण का परीक्षण
13 Jan, 2025 04:53 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । दुनिया के कई देशों के वैज्ञानिकों द्वारा 2.8 किलोमीटर की गहराई से ड्रिल करके बर्फ निकल गई है। इसे 12 लाख वर्ष पुरानी बर्फ माना जा रहा है। इस बर्फ का परीक्षण दुनिया के कई देश के वैज्ञानिक एक साथ मिलकर करेंगे। ताकि जलवायु और पर्यावरण में किस तरह के बदलाव आ रहे हैं। इसका अध्ययन किया जा सके। हिम युग में जो तापमान और ग्रीन हाउस मे गैसों के बीच के क्या संबंध था। पृथ्वी के बढ़ते तापमान पर इसका क्या असर भविष्य में हो सकता है। इसका परीक्षण वैज्ञानिक कर रहे हैं।
इसके पहले यही टीम 8 लाख साल पुरानी बर्फ का नमूना निकाल चुकी है। अब 12 लाख साल पुरानी बर्फ का परीक्षण किया जाएगा।
वैज्ञानिकों की इस टीम में 16 वैज्ञानिक हैं। जो पिछले 4 साल से अंटार्कटिका की कड़ी ठंड के बीच यह परीक्षण कर रहे हैं। इस परीक्षण के लिए बेल्जियम, डेनमार्क, फ्रांस, जर्मनी,इटली,नॉर्वे, स्वीडन, स्वीटजरलैंड, नीदरलैंड तथा ब्रिटेन की सरकारों द्वारा आर्थिक सहयोग दिया जा रहा है। इस परीक्षण से वैज्ञानिक यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं। हिम युग से लेकर अभी तक किस तरह के बदलाव पृथ्वी में आए हैं। उसको जानने के लिए इस परीक्षण से बहुत बड़ी मदद मिलेगी।
कश्मीर में बर्फबारी से लोगों की हालत खराब
13 Jan, 2025 03:49 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जम्मू | जम्मू-कश्मीर में 12 जनवरी की रात बादल छाए रहने के कारण न्यूनतम तापमान में मामूली वृद्धि हुई, लेकिन यह हिमांक बिंदु से नीचे बरकरार रहा। दिल्ली, पंजाब और हरियाणा के कई स्थानों पर रविवार सुबह बारिश हुई। मौसम विभाग के मुताबिक, पंजाब और हरियाणा की संयुक्त राजधानी चंडीगढ़ में 18.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई।
मौसम विभाग ने बताया कि शनिवार रात श्रीनगर में न्यूनतम तापमान शून्य से तीन डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया, जबकि इससे पिछली रात यह शून्य से 3.6 डिग्री सेल्सियस नीचे था। स्कीइंग के लिए प्रसिद्ध उत्तर कश्मीर के पर्यटक स्थल गुलमर्ग में न्यूनतम तापमान शून्य से 5.6 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया, जो इससे पिछली रात के शून्य से 6.5 डिग्री सेल्सियस नीचे से अधिक है।दक्षिण कश्मीर में वार्षिक अमरनाथ यात्रा के आधार शिविरों में से एक पहलगाम में न्यूनतम तापमान शून्य से 6.2 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया, जबकि इससे पिछली रात यह शून्य से 7.6 डिग्री सेल्सियस नीचे था। पहलगाम घाटी का सबसे ठंडा स्थान रहा।काजीगुंड में न्यूनतम तापमान शून्य से चार डिग्री सेल्सियस नीचे, पंपोर शहर के कोनीबल में शून्य से 3.6 डिग्री सेल्सियस नीचे, कुपवाड़ा में शून्य से चार डिग्री सेल्सियस नीचे और कोकेरनाग में शून्य से 3.9 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया। मौसम विभाग ने कहा कि घाटी में 18 जनवरी तक बादल छाए रहेंगे, लेकिन मौसम शुष्क रहेगा। 15 और 16 जनवरी को ऊंचाई वाले स्थानों पर हल्का हिमपात होने की संभावना है।
अंतरिक्ष में जाने वाले पहले भारतीय राकेश शर्मा 76 साल के हुए, 1971 की जंग में थे शामिल
13 Jan, 2025 02:44 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। अंतरिक्ष में कदम रखने पहले भारतीय विंग कमांडर राकेश शर्मा आज यानी 13 जनवरी को 76 साल के हो गए। राकेश शर्मा अंतरिक्ष में जाने वाले 128वें इंसान और पहले भारतीय इंसान थे। उन्होंने 1970 में एयरफोर्स बतौर पायलट के ज्वाइन की थी। पाकिस्तान के साथ 1971 की जंग में उन्होंने 21 बार मिग-21 से उड़ान भरी थी। राकेश शर्मा जब 25 साल के थे तो एयरफोर्स के सबसे बेहतरीन पायलट बन गए थे। 1982 में राकेश शर्मा को दो दर्जन से ज्यादा फाइटर पायलटों के टेस्ट के बाद अंतरिक्ष यात्रा में भेजने के लिए चुना गया था। जिसके बाद उन्हें रूस में ट्रेनिंग के लिए भेजा गया था।
राकेश शर्मा का जन्म 13 जनवरी 1949 को पंजाब के पटियाला में हुआ था। शर्मा की पढ़ाई हैदराबाद स्थित सेंट जॉर्ज ग्रामर स्कूल और निजाम कॉलेज से हुई थी। इसके बाद वह जुलाई 1966 में एयरफोर्स कैडेट के तौर पर नेशनल डिफेंस एकेडमी में शामिल हुए। उनॉको 1970 में भारतीय वायुसेना में एयरफोर्स पायलट के तौर पर कमीशन मिला। इसरो और सोवियत संघ (जो अब रूस है) के ज्वॉइंट मिशन के तहत राकेश शर्मा ने 3 अप्रैल 1984 को सोयूज टी-11 से अंतरिक्ष यात्रा शुरू की थी। अंतरिक्ष में उन्होंने 7 दिन 21 घंटे और 40 मिनट बिताए थे।
अंतरिक्ष से सोयूज टी-11 की क्रू के साथ ज्वॉइंट कॉन्फ्रेंस के जरिए देश ने पहली बार अंतरिक्ष में मौजूद अपने नागरिक के साथ बात की थी। उस समय की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने राकेश शर्मा ने पूछा था कि अंतरिक्ष से भारत कैसा दिखता है? तो राकेश शर्मा ने हिंदी में जवाब दिया था- सारे जहां से अच्छा।
अंतरिक्ष से लौटने के बाद राकेश शर्मा ने फिर से जेट पायलट के तौर पर अपनी जिंदगी शुरू की। उन्होंने जगुआर जैसे लड़ाकू विमान उड़ाए। राकेश शर्मा को हीरो ऑफ द सोवियत यूनियन अवॉर्ड से भी नवाजा गया। वह इकलौते भारतीय हैं, जिन्हें ये सम्मान मिला है। इसके साथ ही उन्हें अशोक चक्र से भी सम्मानित किया गया है।
नवी मुंबई में बनकर तैयार हुआ इस्कॉन मंदिर, 15 को पीएम मोदी के हाथों लोकार्पण
13 Jan, 2025 01:51 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नवी मुंबई । नवी मुंबई के खारघर में स्थित इस्कॉन मंदिर का निर्माण पूरा हो चुका है। यह मंदिर करीब 9 एकड़ में फैला हुआ है, जिसमें से 2.5 एकड़ क्षेत्र में भव्य मंदिर बना है। 15 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों इस भव्य मंदिर का लोकार्पण होगा। इससे पहले, 9 जनवरी से यहां सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रमों का आगाज हो चुका है। भजन सम्राट अनूप जलोटा भी अपनी प्रस्तुति दे चुके हैं। इसके अलावा, अभिनेत्री और सांसद हेमा मालिनी भी कार्यक्रम में शामिल होने वाली हैं। मंदिर के पुजारी ने बताया कि पहले जब वे गीता का प्रचार करने के लिए दूर-दूर से आते थे, तब लोगों ने उन्हें यहां एक मंदिर बनाने की सलाह दी थी। इसके बाद, उन्होंने सिडको से जमीन लेकर मंदिर बनाने का काम शुरू किया। मंदिर के निर्माण में करीब 200 से 250 करोड़ रुपए की लागत आई है और अब यह भव्य मंदिर तैयार हो चुका है।
इस्कॉन मंदिर के महाराज सुर दास महाराज ने बताया, जब मैं प्रचार करता था, तब लोग मुझसे कहते थे कि आप प्रचार करने के लिए आते हैं, तब यहां एक मंदिर भी बनवा दीजिए। मैंने सोचा कि यह सब कैसे होगा? जमीन बहुत महंगी है। लोग बोले, सेठ के पास जाइए, तब मैंने आवेदन किया। यह प्रक्रिया सात साल तक चली और उसके बाद हमें जमीन मिली। तब 3,500-4,000 करोड़ रुपए जमीन में लगे थे। अब तक पूरे प्रोजेक्ट पर करीब 200 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं। इस मंदिर को बनाने में भक्तों का बहुत योगदान है, जिनकी मदद से हम ये मंदिर बना पाए। मैं उन सभी का धन्यवाद करता हूं जिन्होंने इस मंदिर के निर्माण में सहयोग किया।
महाराज ने कहा, हमारे अंतर्राष्ट्रीय कृष्ण भावना संघ का क्षेत्र लगभग नौ एकड़ में फैला हुआ है, इसमें पांच एकड़ में सुंदर बाग़ीचा तैयार किया है। आजकल मुंबई में हरियाली की कमी है, लेकिन हम लोगों ने मंदिर के अंदर हरियाली बढ़ाई है। यहां आकर लोग शांति और शुद्ध वातावरण का अनुभव करते हैं। इस स्थान पर ठाकुर जी राधा-मदनमोहन, ललिता-विशाखा, सीता-राम और हनुमान जी का विग्रह स्थापित होगा और यह स्थान सभी भक्तों को आशीर्वाद देगा।
उन्होंने कहा कि, हमारे यहां बहुत सारे सांस्कृतिक और शैक्षिक कार्यक्रम होते हैं, जिसमें आप भी भाग ले सकते हैं। हमारे आयुर्वेदिक कॉलेज में भागवत गीता, भागवतम और आत्मज्ञान से संबंधित अन्य ग्रंथों की शिक्षा दी जाती है। यहां एक सुंदर भोजनालय भी है, जो प्रभुपाद जी ने गोविंदाज नाम से स्थापित किया था। हर रविवार को यहां मुफ्त प्रसाद मिलता है। लेकिन, इसका उद्देश्य केवल भोजन देना नहीं है, बल्कि साथ में भागवत गीता और आत्मज्ञान भी देना है। हम प्रसाद के साथ भगवान का नाम और ज्ञान प्रदान करते हैं और यह तरीका लोगों को बहुत पसंद आता है।
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