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इनकमिंग कॉल बंद करने पर उठे सवाल, संसद में Raghav Chadha ने मांगा जवाब
11 Mar, 2026 04:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने एक बार फिर आम आदमी से जुड़ा मुद्दा उठाया है. उन्होंने आज बुधवार को राज्यसभा में मोबाइल फोन उपभोक्ताओं से जुड़ा मुद्दा उठाया है. सांसद ने कहा कि प्रीपेड रिचार्ज खत्म होने से इनकमिंग सर्विस का रुकना पूरी तरह गलत है. यह टेलीकॉम कंपनियों की मनमानी है. उन्होंने इससे होने वाली परेशानियों को गिनाया और इसे बंद करने को कहा. जानिए राघव चड्ढा ने क्या रखी मांगें? AAP सांसद राघव चड्ढा ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “आज मैंने सदन में प्रीपेड रिचार्ज कराकर अपना फोन चलाने वाले उपभोक्ताओं का मुद्दा उठाया. जब रिचार्ज की वैद्यता समाप्त हो जाती है तब आउटगोइंग कॉल का बंद होना समझ आता है, लेकिन इनकमिंग कॉल भी उसके साथ बंद कर देना उचित नहीं है. ये टेलीकॉम कंपनियों की मनमानी है, जिस पर रोक लगनी चाहिए. मैंने मांग रखी कि कम से कम 1 साल तक इनकमिंग कॉल चालू रहनी चाहिए, ताकि देश का आम आदमी राइट टू कम्युनिकेशन सरेंडर ना करें। ”
28 दिन नहीं, 30 या 31 दिन का हो रिचार्ज
सांसद ने कहा कि वर्तमान में टेलीकॉम कंपनियों का रिचार्ज सिस्टम आम लोगों के साथ छुपी हुई लूट जैसा है. टेलीकॉम कंपनियां 30 दिन की बजाय 28 दिन का रिचार्ज कराती हैं. जिसकी वजह से यूजर्स को एक साल में ही 12 की जगह 13 बार रिचार्ज कराना पड़ता है. उन्होंने कहा कि अगर टेलीकॉम कंपनियों का प्लान सच में मंथली है, तो उनको वैलिडिटी 30 या 31 दिन रखनी चाहिए, 28 दिन नहीं. इससे एक महीने एक्सट्रा रिचार्ज कराना पड़ता है।
क्या-क्या होते हैं नुकसान?
राघव चड्ढा ने कहा कि रिचार्ज नहीं होने से कंपनियां इनकमिंग कॉल बंद कर देती हैं. जिसकी वजह से लोगों के सामने बड़ी समस्या उत्पन्न हो जाती है. जिन लोगों के सिम में रिचार्ज नहीं होता. ऐसे लोगों को बैंकिंग, ओटीपी, सरकारी सेवाओं और अन्य कार्यों के जुड़े कामों में समस्या उत्पन्न होती है. उन्होंने कहा कि आज के दौरान में मोबाइल एक फैशन नहीं, बल्कि जरूरत बन गई है. इसलिए इस सुझाव पर सरकार को ध्यान देना चाहिए।
एस्मा आखिर है क्या, किन परिस्थितियों में लगाया जाता है यह सख्त कानून
11 Mar, 2026 11:02 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी भीषण युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिलाकर रख दिया है। भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आयात करता है। आपूर्ति में संभावित बाधाओं को देखकर भारत सरकार ने अत्यावश्यक सेवा अनुरक्षण कानून (एस्मा) के तहत आपातकालीन शक्तियां लागू कर दी हैं। अब लोगों के मन में ये सवाल उठा रहा हैं कि आखिरकार ये एस्मा क्या है।
एस्मा क्या है और क्यों लगाया गया?
एस्मा का मतलब है, जब सरकारों को लगता है कि किसी अनिवार्य सेवा (जैसे बिजली, पानी, या गैस) की कमी से आम जीवन अस्त-व्यस्त हो सकता है, तब वहां एस्मा लगाती है। इसके लागू होने के बाद तेल और गैस सेक्टर के कर्मचारी हड़ताल पर नहीं जा सकते। यदि कोई कर्मचारी या अधिकारी काम करने से मना करता है, तब पुलिस उस अधकारी और कर्मचारी को बिना वारंट के गिरफ्तार कर सकती है और जेल या जुर्माना भुगतना पड़ सकता है। यदि आपूर्ति बनाए रखने के लिए कर्मचारियों को अतिरिक्त समय काम करने को कहा जाता है, तब वे मना नहीं कर सकते।एस्मा का पूरा नाम अत्यावश्यक सेवा अनुरक्षण कानून है। यह भारत सरकार और राज्य सरकारों द्वारा बनाया गया एक ऐसा कानून है, जिसका उपयोग तब किया जाता है जब सरकार को लगता है कि किसी जरूरी सेवा के रुकने से आम जनता का जीवन संकट में पड़ सकता है।
एस्मा की मुख्य बातें:
दरअसल एस्मा लागू होने के बाद, उस विभाग के कर्मचारी हड़ताल पर नहीं जा सकते। उन्हें काम करना ही होगा। यदि कर्मचारी पहले से हड़ताल पर हैं, तब एस्मा लगते ही उन्हें काम पर लौटना पड़ता है। ऐसा न करने पर उनकी हड़ताल को अवैध माना जाता है। इस कानून का उल्लंघन करने वाले या हड़ताल के लिए उकसाने वाले लोगों को बिना वारंट के गिरफ्तार किया जा सकता है। इसमें एक साल तक की जेल या जुर्माना (या दोनों) का प्रावधान है। सरकार कर्मचारियों को अतिरिक्त समय (ओवरटाइम) काम करने के लिए मजबूर कर सकती है और कर्मचारी इसके लिए मना नहीं कर सकते।
एस्मा किन सेवाओं पर लगाया जा सकता है?
दरअसल सरकार आमतौर पर उन सेवाओं पर एस्मा लगाती है जो जनता के लिए लाइफलाइन होती हैं, जैसे: स्वास्थ्य सेवाएं (अस्पताल और डॉक्टर) परिवहन सेवाएं (रेलवे, बस, हवाई सेवा) बिजली और पानी की आपूर्ति, बैंकिंग और डाक सेवाएं, गैस और तेल की आपूर्ति (जैसा कि अभी युद्ध के हालातों में किया गया है)भारत सरकार या राज्य सरकारें एस्मा को तब लागू करती हैं जब देश या किसी राज्य में ऐसी स्थितियाँ पैदा हो जाएं कि जनजीवन के लिए अनिवार्य सेवाओं (जैसे बिजली, पानी, स्वास्थ्य, या परिवहन) के ठप होने का खतरा हो। मुख्य रूप से तब लगाया जाता है जब इन सेवाओं के कर्मचारी हड़ताल पर चले जाते हैं या काम करने से मना कर देते हैं, जिससे जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा, युद्ध, प्राकृतिक आपदा या वैश्विक संकट (जैसे वर्तमान में जारी अमेरिका-ईरान युद्ध और उससे उपजा गैस संकट) के समय भी सरकार इस लागू करती है ताकि जरूरी चीजों की सप्लाई चेन न टूटे और जमाखोरी या कृत्रिम कमी को रोका जा सके।एस्मा लागू करने का सबसे बड़ा क्यों यह है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सामूहिक सुरक्षा और जनहित को व्यक्तिगत या कर्मचारी हितों से ऊपर रखा जाता है। सरकार इस कानून के जरिए यह सुनिश्चित करती है कि अस्पताल में इलाज, घरों में रसोई गैस की सप्लाई और सड़कों पर परिवहन जैसी मूलभूत जरूरतें किसी भी विरोध या विवाद के कारण रुकने न पाएं। चूँकि एस्मा लागू होने के बाद हड़ताल करना गैर-कानूनी हो जाता है और पुलिस को बिना वारंट गिरफ्तारी के अधिकार मिल जाते हैं, इसलिए यह कानून एक सख्त निवारक के रूप में कार्य करता है, जो संकट के समय राष्ट्र की कार्यक्षमता को बनाए रखने के लिए अनिवार्य हो जाता है।
राज्य का दर्जा और संवैधानिक सुरक्षा की मांग, लद्दाख में 12 मार्च को विरोध मार्च
11 Mar, 2026 10:39 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
श्रीनगर: लद्दाख के संगठनों ने राज्य का दर्जा और अन्य मांगों को लेकर 12 मार्च को शांतिपूर्ण विरोध मार्च का आह्वान किया है. राजनीतिक और धार्मिक निकायों के समूह, लेह एपेक्स बॉडी (LAB) ने लद्दाख के लोगों से शांतिपूर्ण मार्च में भाग लेने का आग्रह किया है. इसका उद्देश्य अपनी मांगों पर केंद्रीय गृह मंत्रालय की उच्च स्तरीय समिति के साथ बातचीत के एक और दौर के लिए दबाव बनाना है.एलएबी और करगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) भारतीय संविधान में राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची का दर्जा पाने के लिए अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं.
गृह मंत्रालय द्वारा गठित उच्चाधिकार प्राप्त समिति (एचपीसी) के सदस्य और लेह एपेक्स बॉडी के चेयरमैन चेरिंग दोरजे लकरुक ने कहा कि विरोध मार्च का मकसद केंद्र सरकार पर अपनी मांगों पर बातचीत करने और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वानचुक की रिहाई के लिए दबाव डालना है. दो अन्य एक्टिविस्ट भी हिरासत में हैं.
दोरजे ने ईटीवी भारत से कहा, "बातचीत में देरी हो रही है. सरकार गंभीर नहीं लग रही है. पिछले साल के विरोध प्रदर्शनों के बाद बनाया गया न्यायिक आयोग धीमा रहा है, जिससे युवा अदालतों के चक्कर लगा रहे हैं. हम उनके केस वापस लेने की मांग कर रहे हैं."
जलवायु कार्यकर्ता वांगचुक के नेतृत्व में 14 दिन की भूख हड़ताल के बाद 24 सितंबर 2025 को लद्दाख में विरोध प्रदर्शन हुए, जो पुलिस के साथ हिंसक झड़पों में बदल गया. इसमें चार लोग मारे गए और लगभग 90 घायल हो गए. तब से वांगचुक को नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) के तहत हिरासत में रखा गया है. वह राजस्थान के जोधपुर जेल में कैद हैं. हिरासत को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आना बाकी है.
दोरजे ने कहा कि केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय के नेतृत्व वाली लद्दाख पर हाई-पावर्ड कमेटी (HPC) ने फरवरी की मीटिंग में इन मांगों को 'उपयुक्त' नहीं पाया. उन्होंने कहा, "बातचीत बेनतीजा रही, क्योंकि वे हमारी मांगों को लेकर गंभीर नहीं थे. उनके अनुरोध पर हमने अपनी मांगों को सही ठहराते हुए 26 पन्नों का मसौदा प्रस्ताव दाखिल किया. लेकिन उन्होंने बैठक में हमसे कहा कि मांगें संभव नहीं हैं. हमसे प्रस्ताव मांगने का क्या उद्देश्य था?"
पिछले साल अक्टूबर में लद्दाख के प्रतिनिधियों ने केंद्र सरकार के साथ तब तक बातचीत करने से मना कर दिया था, जब तक कि हत्याओं की न्यायिक जांच समेत उनकी मांगें पूरी नहीं की जाती हैं. तब HPC के साथ बातचीत रुक गई थी.
विरोध मार्च के शुरुआती प्लान के मुताबिक, लेह चौक से एक जुलूस शुरू होगा और पोलोग्राउंड पर इकट्ठा होगा. दोरजे ने कहा कि इजाजत मिलने के बाद लेह एपेक्स बॉडी के नेता दिन में मार्च को संबोधित करेंगे.
लेकिन इस बात की पुष्टि नहीं हो सकी कि अधिकारियों ने विरोध मार्च के लिए इजाजत दी है या नहीं, क्योंकि लेह के उपायुक्त (DC) से संपर्क करने की बार-बार कोशिश करने पर भी बात नहीं हो पाई.
दूसरी ओर, न्यायिक जांच आयोग के संयुक्त सचिव रिगजिन स्पैलगन (Rigzin Spalgon) ने तीन सदस्यों वाले आयोग की प्रगति रिपोर्ट दी. उन्होंने जोर देकर कहा कि जांच सही, पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से की जा रही है और जिन लोगों ने हलफनामा जमा किया है, उन पर आयोग की निर्धारित प्रक्रिया के हिसाब से ध्यान दिया जाएगा. उनके अनुसार, आयोग को आम जनता के साथ-साथ प्रशासन के अलग-अलग विभागों के अधिकारियों से बड़ी संख्या में हलफनामे मिले हैं और उनकी जांच की गई है.
स्पैलगन ने आगे कहा, "दिसंबर 2025 तक प्रशासन की तरफ से कुल 22 गवाहों से पूछताछ की गई थी. मार्च 2026 में जांच फिर से शुरू हुई और अब तक 18 प्रशासनिक गवाहों से पूछताछ की जा चुकी है. इसके अलावा 45 पब्लिक एफिडेविट जमा किए गए हैं."
उन्होंने कहा कि आयोग अभी प्रशासन के जमा किए गए एफिडेविट की जांच कर रहा है और सरकारी और नागरिक गवाहों से पूछताछ करेगा. स्पैलगन ने कहा, "उनके बयान चल रही न्यायिक कार्यवाही के हिस्से के रूप में दर्ज किए जाएंगे."
बीकेटीसी का निर्णय: बदरीनाथ-केदारनाथ सहित 47 मंदिरों में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध
11 Mar, 2026 09:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
देहरादून: उत्तराखंड चारधाम यात्रा 2026 की 19 अप्रैल से शुरुआत होने जा रही है. इस दिन गंगोत्री और यमुनोत्री धामों के कपाट खुलेंगे. चारधाम यात्रा के दृष्टिगत श्रद्धालुओं के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया भी 6 मार्च से शुरू हो गई है. शासन प्रशासन की ओर से व्यवस्थाओं को पूरा कराया जा रहा है, ताकि चारधाम की यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें. चारधाम में मोबाइल बैन का निर्णय सरकार पहले ही ले चुकी है. वहीं बदरी-केदार मंदिर समिति ने धामों में गैर हिंदुओं के प्रवेश वर्जित किए जाने को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिया है. इसमें आगामी चारधाम यात्रा के दौरान केदारनाथ और बदरीनाथ धाम परिसर में गैर हिंदू प्रवेश नहीं कर पाएंगे. इसके साथ ही बीकेटीसी ने उनके अधीन आने वाले 45 अन्य मंदिरों में भी गैर हिंदुओं की एंट्री पर बैन लगा दिया है.
बदरी-केदार मंदिर समिति का बड़ा फैसला:
दरअसल, उत्तराखंड में इसी साल जनवरी महीने में गंगा सभा ने हरकी पैड़ी पर गैर हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने की मांग उठाई थी. इसके लिए, गंगा सभा ने हर की पैड़ी में जगह-जगह पर अहिंदु प्रवेश निषेध क्षेत्र के बोर्ड भी लगा दिए थे. इसके बाद यह मामला काफी अधिक चर्चाओं में रहा. हर साल करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु हरिद्वार हर की पौड़ी स्नान के लिए पहुंचते हैं. गंगा सभा की ओर से गैर हिंदुओं के प्रवेश वर्जित की मांग के बाद चारधाम में भी गैर हिंदुओं के प्रवेश वर्जित की मांग उठने लगी. उस दौरान बदरी केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा था कि वो आगामी बोर्ड बैठक के दौरान बीकेटीसी के अधीन आने वाले मंदिरों में गैर हिंदुओं के प्रवेश वर्जित के प्रस्ताव को पारित करेंगे.
दरीनाथ-केदारनाथ समेत उत्तराखंड के 47 मंदिरों में गैर हिंदुओं का प्रवेश वर्जित:
ऐसे में जहां एक ओर उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण स्थित भराड़ीसैंण विधानसभा भवन में बजट सत्र चल रहा है, तो वहीं दूसरी ओर मंगलवार यानी 10 मार्च को देहरादून स्थित बीकेटीसी के शिविर कार्यालय में बजट बैठक आहूत की गयी. बीकेटीसी के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी की अध्यक्षता में हुई बजट बैठक के दौरान आगामी वित्तीय वर्ष 2026- 27 के लिए 121.7 करोड़ रुपए का बजट पारित किया गया. साथ ही सबसे महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर भी मुहर लगी, जिस पर देशभर की निगाहें टिकी हुई थी. दरअसल, बजट बैठक के दौरान बदरीनाथ और केदारनाथ धाम समेत बीकेटीसी के अंडर आने वाले उत्तराखंड के 47 मंदिरों में गैर सनातनियों के प्रवेश वर्जित का प्रस्ताव रखा गया. इस पर सहमति बनने के साथ ही इस प्रस्ताव को पारित कर दिया गया.
मुस्लिम नेता और संगठन पहले ही दे चुके हैं मिलीजुली प्रतिक्रिया:
दरअसल, जब उत्तराखंड में धार्मिक स्थलों में गैर हिंदुओं के प्रवेश वर्जित की मांग उठ रही थी, तो उस दौरान विपक्षी दल कांग्रेस समेत तमाम संगठनों की ओर से इस पर सवाल खड़े किए गए थे. ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने दिल्ली में प्रेस वार्ता कर कहा था कि हरिद्वार में गैर हिंदुओं के प्रवेश वर्जित के पोस्टर लगाना संविधान का मखौल उड़ाने जैसा है. यह छुआछूत है और समानता के अधिकार का सीधा-सीधा उल्लंघन है. अगर आप इस तरह की विचारधारा रखते हैं, तो इसका मतलब आप कानून को नहीं मानते हैं. इसके साथ ही जमीयत उलेमा ए हिंद के अध्यक्ष अरशद मदनी ने भी कहा था ऐसे प्रतिबंध समाज में विभाजन की भावना को बढ़ा सकते हैं. यह भारत की साझा संस्कृति और आपसी सम्मान की भावना के विपरीत है. इसके बाद ही राष्ट्रीय स्तर पर बयान बाजियों का दौर शुरू हो गया था.
डॉ इलियासी ने किया था समर्थन: ऑल इंडिया इमाम ऑर्गनाइजेशन के चीफ इमाम डॉ. इमाम उमर अहमद इलियासी मंदिरों में गैर हिंदुओं के प्रवेश को प्रतिबंधित करने का समर्थन कर चुके हैं. उन्होंने कहा था कि यह धर्म का मामला है और धर्म का अपना महत्व है. अगर मंदिर कमेटी यह तय करती है कि गैर-हिंदू धाम में नहीं जा सकते, तो किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए. हर जगह के अपने नियम होते हैं. मुसलमानों को शायद गंगोत्री नहीं जाना चाहिए और अगर वे जाते हैं, तो इससे विवाद हो सकता है. दूसरे धर्मों की पवित्र जगहों पर जाने से बचना बेहतर है. मक्का और मदीना में गैर-मुसलमानों को इजाज़त नहीं है, लेकिन कोई इस पर आपत्ति नहीं करता. ऐसे मामलों में कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए.
सीएम धामी ने फैसला मंदिर समितियों पर छोड़ा था:
उत्तराखंड के धार्मिक स्थलों में गैर हिंदुओं के प्रवेश वर्जित किए जाने की मांग को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी इस बात पर जोर दिया था कि धार्मिक स्थलों का संचालन करने वाले लोगों से बातचीत कर निर्णय लिया जाएगा. उस दौरान सीएम ने कहा था कि प्रदेश के जितने भी धार्मिक स्थल, पौराणिक स्थल और देवस्थान हैं, इन स्थानों को देखने वाले और उनका संचालन करने वाले, सभी धार्मिक संगठनों के लोग, तीर्थ सभा के लोग, गंगा सभा के लोग, केदार सभा के लोग, बदरी- केदार मंदिर समिति के लोग और पूज्य संत समाज हैं, ये सभी लोग ही धार्मिक स्थलों का संचालन करते हैं. ऐसे में इन सभी की जो राय और मत होगा उसी के अनुसार सरकार आगे बढ़ेगी, क्योंकि ये स्थान बहुत पौराणिक महत्व के स्थान हैं.
अब अन्य पौराणिक मंदिर में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर रोक की मांग उठ सकती है:
हालांकि, राज्य सरकार प्रदेश में मौजूद धार्मिक स्थलों में गैर हिंदुओं के प्रवेश वर्जित किए जाने संबंधित अभी कोई निर्णय नहीं ले पाई है, जबकि आगामी चारधाम यात्रा 19 अप्रैल से शुरू होने जा रही है. इसी बीच बदरी केदार मंदिर समिति ने महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए बदरीनाथ धाम और केदारनाथ धाम समेत 47 मंदिरों में गैर सनातनियों का प्रवेश वर्जित करने का निर्णय ले लिया है. साथ ही अपने बजट बैठक में भी प्रस्ताव पारित कर दिया है. ऐसे में आगामी चारधाम यात्रा के दौरान बीकेटीसी के अधीन आने वाले बदरीनाथ और केदारनाथ समेत 47 मंदिरों में अब गैर हिंदू प्रवेश नहीं कर पाएंगे. बीकेटीसी के इस निर्णय के बाद संभावना जताई जा रही है कि प्रदेश में मौजूद अन्य पौराणिक एवं धार्मिक मंदिरों में भी गैर हिंदुओं के प्रवेश वर्जित की मांग तेज हो सकती है.
बीकेटीसी अध्यक्ष ने कहा लंबे समय से मांग उठ रही थी:
ज्यादा जानकारी देते हुए बीकेटीसी के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि-
जो हिंदुत्व एवं सनातन धर्म को मानने वाले हैं और जिनकी बाबा केदारनाथ और बदरी विशाल में आस्था है, वही हिंदू हैं और वही सनातनी हैं. ऐसे में सनातन धर्म को मानने वाले लोगों का हम स्वागत करते हैं. लेकिन जो सनातन धर्म को मानने वाले लोग नहीं हैं, उनको पूरी तरह से मंदिर क्षेत्र में आने से प्रतिबंधित किया गया है. बदरी केदार मंदिर समिति के अधीन मंदिर और मंदिर परिसर का संचालन है. ऐसे में केदारनाथ धाम और बदरीनाथ धाम समेत 47 मंदिरों के गर्भगृह और मंदिर परिसर में गैर हिंदुओं का प्रवेश वर्जित किया गया है. प्रदेश में लंबे समय से इसकी मांग भी उठ रही थी.
-हेमंत द्विवेदी, अध्यक्ष, बीकेटीसी-
धामों की पवित्रता के लिए लिया फैसला- हेमंत द्विवेदी:
साथ ही बदरी-केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि उत्तराखंड के अंदर अवैध मजारों का निर्माण हुआ है, धर्म विशेष के लोगों ने धार्मिक आस्था के नाम पर लैंड जिहाद किया और यहां का माहौल खराब करने की कोशिश की है. उत्तराखंड में मौजूद धार्मिक स्थलों में हर साल लाखों की संख्या में श्रद्धालु देश दुनिया से आ रहे हैं. ऐसे में तीर्थ स्थलों की धार्मिक और पौराणिक आस्था एवं पवित्रता को किस तरह से कायम रखा जाए, इस पर जोर दिया जा रहा है, ताकि श्रद्धालु सिर्फ तीर्थाटन के लिए ही वहां पहुंचें. इस वजह से इस तरह के निर्णय लेने पड़े हैं.
हेमंत द्विवेदी बोले संविधान के तहत लिया फैसला:
बदरीनाथ- केदारनाथ समेत 47 मंदिरों में गैर हिंदुओं के प्रवेश वर्जित के बाद प्रदेश में मौजूद अन्य धार्मिक स्थलों में भी गैर हिंदुओं के प्रवेश वर्जित किए जाने के सवाल पर हेमंत द्विवेदी ने कहा कि सबकी अपने-अपने धर्म के प्रति आस्था है. सबको अपने धर्म को किस तरह से चलाना है, उसकी व्यवस्था संविधान में भी है. ऐसे में जितने भी धर्म हैं, उनकी अपनी परंपराएं हैं और उस तरह से उनकी व्यवस्थाओं को देखा जाता है. ऐसे में जितने भी सनातन धर्म और हिंदुओं के धार्मिक स्थल हैं वो भारत की आत्मा हैं. जहां पर देश दुनिया से लाखों तीर्थ यात्री आस्था और भाव के लिए हर साल पहुंचते हैं. ऐसे में उसकी पवित्रता, पौराणिकता और पहचान को बनाए रखने के लिए उसकी रक्षा करना हम सभी का कर्तव्य है.
कितने क्षेत्र में गैर सनातनियों का प्रवेश प्रतिबंधित:
उत्तराखंड एक पहाड़ी प्रदेश है. यहां ज्यादातर मंदिर पहाड़ियों पर स्थित हैं. ऐसे में मंदिर तक पहुंचने के लिए डोली, कंडी और घोड़े खच्चर इस्तेमाल किए जाते हैं. इनका संचालन गैर हिंदुओं द्वारा भी किया जाता है. बदरी-केदार मंदिर समिति ने 47 मंदिरों में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर जो प्रतिबंध लगाया है, उसका इन लोगों के रोजगार पर असर नहीं पड़ेगा. दरअसल प्रवेश पर रोक मंदिर परिसर और मंदिर के गर्भगृह पर लागू होगी. बाकी डोली, कंडी और घोड़े खच्चर के संचालक मंदिर परिसर के बाहर तक जा सकते हैं.
ये हैं वो 47 मंदिर जहां गैर हिंदुओं का प्रवेश हुआ बैन:
बीकेटीसी ने जिन 47 मंदिरों में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया है, उनके नाम इस प्रकार हैं. बदरीनाथ और केदारनाथ धाम के साथ ही त्रियुगीनारायण मंदिर, नरसिंह मंदिर, विश्वनाथ मंदिर, ओंकारेश्वर मंदिर, कालीमठ मंदिर, ब्रह्मकपाल शिला एवं परिक्रमा- बदरीनाथ, तप्त कुंड, शंकराचार्य समाधि, मद्महेश्वर, तुंगनाथ, रुद्रनाथ, कल्पेश्वर, योगध्यान बदरी, भविष्य बदरी, आदि बदरी, वृद्ध बदरी, माता मूर्ति मंदिर, वासुदेव मंदिर, गौरी कुंड मंदिर, आदिकेदारेश्वेर मंदिर, पांच शिला बदरीनाथ (नारद शिला, नृसिंह शिला, बाराही शिला, गरुड़ शिला और मार्कण्डेय शिला), पांच धाराएं (प्रह्लाद धारा, कूर्मा धारा, भृगु धारा, उर्वशी धारा और इंदिरा धारा), ऊखीमठ में उषा का मंदिर, कालिशिला और वसुधारा शामिल हैं.
गैर हिंदू या गैर सनातनी से आशय:
बीकेटीसी और गंगोत्री यमुनोत्री मंदिर समितियां पहले ही साफ कर चुकी हैं कि गैर हिंदू मतलब जो सनातन धर्म को नहीं मानते उनका प्रवेश मंदिर में वर्जित किया गया है. हिंदू सनातन धर्म से निकले सिख, जैन और बौद्धों पर ये प्रतिबंध लागू नहीं होते हैं. ऐसे में इन तीनों धर्मों के लोग मंदिरों में जा सकेंगे.
बीकेटीसी क्या है?
बीकेटीसी (BKTC) बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति है. इसके अधीन इन दोनों बड़े मंदिरों समेत 47 अन्य मंदिर आते हैं. बीकेटीसी इन मंदिरों की व्यवस्था देखती है. इसमें मंदिरों का प्रबंधन, सुरक्षा और रखरखाव शामिल हैं. बीकेटीसी 1939 के अधिनियम के तहत काम करती है. बदरी-केदार मंदिर समिति बदरीनाथ और केदारनाथ समेत अन्य मंदिरों के कपाट खुलने और बंद होने की व्यवस्था करती है. इसके साथ ही इन मंदिरों के विकास और तीर्थयात्रियों की सुख सुविधा के लिए बजट पास करना भी इनका जिम्मा है. मंगलवार को हुई बीकेटीसी की बजट बैठक में चारधाम यात्रा 2026 के लिए ₹121 करोड़ का बजट पास किया गया है. बीजेपी नेता हेमंत द्विवेदी अभी बीकेटीसी के अध्यक्ष हैं.
कोयंबटूर में मिड-डे मील खाने के बाद बच्चों की हालत खराब, 44 छात्र अस्पताल पहुंचे
11 Mar, 2026 09:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोयंबटूर (तमिलनाडु): कोयंबटूर नगर निगम द्वारा संचालित स्कूल में मंगलवार को दोपहर का भोजन खाने का बाद 44 बच्चे बीमार पड़ गए. इसके बाद, सभी बच्चों को इलाज के लिए सरकारी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया. कोयंबटूर सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल के प्रिंसिपल ने उनकी जांच की है और उनका उपचार किया.
बताया जा रहा है कि खाने में छिपकली गिर गई थी, जिसके कारण वह जहरीला हो गया था. वहीं, छात्रों के बीमार पड़ने की जानकारी मिलने के बाद अभिभावकों ने स्कूल को घेर लिया. इससे स्कूल परिसर के सामने तनाव वाली स्थिति पैदा हो गई और सुरक्षा के लिए पुलिस तैनात कर दी गई.
कोयंबटूर के कौंडमपलायम इलाके में चल रहे नगर निगम सरकारी मिडिल स्कूल में 200 से अधिक स्टूडेंट्स पढ़ते हैं. मंगलवार को जब बच्चों को स्कूल में लंच दिया गया तो कुछ स्टूडेंट्स बीमार पड़ गए. कहा जा रहा है कि उन्हें परोसे गए लंच में छिपकली थी.
कोयंबटूर नगर निगम के कमिश्नर शिवगुरु प्रभाकरन और कोयंबटूर की मेयर आर. रंगनायकी ने भी सरकारी अस्पताल का दौरा किया और बच्चों के स्वास्थ्य और मेडिकल ट्रीटमेंट के बारे में जानकारी ली.
बाद में, पत्रकारों से बात करते हुए कोयंबटूर नगर निगम के कमिश्नर शिवगुरु प्रभाकरन ने कहा, "जैसे ही पता चला कि लंच में छिपकली गिर गई है, खाना तुरंत रोक दिया गया. जानकारी मिलते ही 5 डॉक्टरों को भेजा गया और स्टूडेंट्स का इलाज किया गया."
उन्होंने कहा कि अभी कोयंबटूर सरकारी अस्पताल में 30 लड़के और 13 लड़कियों का इलाज चल रहा है. सभी ठीक हैं. हम लगातार उन पर नजर रख रहे हैं. अगर माता-पिता और छात्र चाहें तो वे पूरी तरह ठीक होने के बाद घर लौट सकते हैं.
कमिश्नर ने कहा कि खाने में छिपकली मिलने की घटना की जांच के आदेश दे दिए गए हैं. जांच के बाद ही पूरी जानकारी मिलेगी. स्कूल ने सरकार की तरफ से खाना दिया है. सभी स्कूलों को एक सर्कुलर भेजा जाएगा और मामले पर नजर रखने के निर्देश दिए जाएंगे.
ईरान संकट का असर: एयर इंडिया ने बढ़ाया किराया, घरेलू उड़ानों में फ्यूल सरचार्ज लागू
11 Mar, 2026 08:34 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण विमान ईंधन एटीएफ की कीमतों में तेजी आने पर एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस 12 मार्च से प्रत्येक घरेलू उड़ान के टिकट पर 399 रुपये का ईंधन अधिभार (फ्यूल सरचार्ज) लागू करेंगी.
इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए भी ईंधन अधिभार बढ़ाया जाएगा. मंगलवार को जारी बयान में कहा गया कि नई अधिभार प्रणाली चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएगी. पहले चरण में, 12 मार्च से घरेलू और दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (दक्षेस) के लिए उड़ानों पर 399 रुपये प्रति टिकट का ईंधन अधिभार लागू होगा.
बयान में कहा गया कि पश्चिम एशिया की उड़ानों के लिए अधिभार 10 डॉलर, अफ्रीका के लिए 90 डॉलर और दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए 60 अमेरिकी डॉलर होगा. यह सभी बदलाव 12 मार्च से प्रभावी होंगे, जिसमें सिंगापुर की उड़ानें भी शामिल हैं. वर्तमान में सिंगापुर सेवाओं पर कोई ईंधन अधिभार नहीं है.
बयान में कहा गया, "एयर इंडिया समूह ने आज अपने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर ईंधन अधिभार को चरणबद्ध तरीके से बढ़ाने की घोषणा की, जो खाड़ी क्षेत्र में भू-राजनीतिक स्थिति के कारण जेट ईंधन की कीमतों में तेज वृद्धि के कारण आवश्यक हो गया है."
मार्च 2026 की शुरुआत से, यह बयान आया है कि एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF), जो किसी एयरलाइन की ऑपरेटिंग कॉस्ट का लगभग 40 परसेंट होता है, सप्लाई में रुकावट के कारण कीमतों में काफी बढ़ोतरी देखी गई है.
इसमें कहा गया है, "भारत में, दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े मेट्रो शहरों में ATF पर ज्यादा एक्साइज ड्यूटी और VAT होने से यह दबाव और बढ़ जाता है, जिससे कॉस्ट पर असर बढ़ता है और एयरलाइन ऑपरेटिंग इकोनॉमिक्स पर काफी दबाव पड़ता है."
किसी भी शक से बचने के लिए, बयान में कहा गया है कि ऊपर बताए गए समय से पहले जारी किए गए टिकटों पर नया सरचार्ज नहीं लगेगा, जब तक कि कस्टमर तारीख या यात्रा कार्यक्रम में बदलाव न चाहें जिसके लिए किराए का रीकैलकुलेशन (पुनर्गणना) करना पड़े. इंडिगो, स्पाइसजेट और अकासा एयर की ओर से फ्यूल सरचार्ज के बारे में कोई घोषणा नहीं की गई.
रूस के बाद फ्रांस से सबसे अधिक हथियार खरीद रहा भारत
10 Mar, 2026 11:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (स्रिपी) ने ग्लोबल आर्म्स सेल्स को लेकर ताजा रिपोर्ट दी है। इसमें कहा गया है कि भारत अभी भी अपनी 48 प्रतिशत रक्षा साम्रगी की सप्लाई रूस से कर रहा है लेकिन रूस पर भारत की निर्भरता कम हो रही है। वहीं भारत अब अपने 24 प्रतिशत हथियार फ्रांस से खरीद रहा है। भारत अब दुनिया भर में दूसरा सबसे बड़ा हथियार खरीददार है और यूक्रेन पहले नंबर पर पहुंच गया है। स्रिपी रिपोर्ट में कहा गया है कि रूस से भारत का मोहभंग हो चुका है और नई दिल्ली तेजी से पश्चिमी देशों की तरफ मुड़ गया है।
फ्रांस जो 2021-2025 में बड़े हथियारों का दूसरा सबसे बड़ा सप्लायर है उसका सबसे बड़ा खरीददार अब भारत बन चुका है। इसी टाइम फ्रेम में रूस का सबसे बड़ा खरीददार अभी भी भारत (48प्रतिशत) बना हुआ है। भारत के बाद चीन (13प्रतिशत) सबसे ज्यादा रूसी हथियार खरीद रहा है जबकि बेलारूस (13प्रतिशत) रूसी हथियार खरीदने के मामले में तीसरे नंबर पर है।
स्रिपी रिपोर्ट से पता चलता है कि भारत के कुल आयात का 48 प्रतिशत हिस्सा अब भी रूस से आता है, लेकिन यह पहले की तुलना में कम हुआ है। भारत अब फ्रांस (24प्रतिशत) और अन्य पश्चिमी देशों की ओर देख रहा है। इसके अलावा पाकिस्तान अपने हथियारों के लिए पूरी तरह चीन पर निर्भर हो चुका है। पाकिस्तान 80 प्रतिशत से ज्यादा हथियार सप्लाई के लिए चीन पर निर्भर हो चुका है। जो भारत के खिलाफ एक टू फ्रंट वॉर की स्थिति बनाता है। वहीं, यूक्रेन अब दुनिया का सबसे बड़ा हथियार आयातक बन गया है (9.7प्रतिशत), जबकि अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा निर्यातक (42 प्रतिशत शेयर) बना हुआ है।
स्रिपी रिपोर्ट से पता चला है कि 2016-20 के बीच यूक्रेन दुनिया के कुल हथियार आयात का सिर्फ 0.1 प्रतिशत हिस्सा था। लेकिन अब (2021-25) वह 9.7 प्रतिशत के साथ दुनिया का नंबर 1 हथियार खरीदने वाला देश बन गया है। यह दिखाता है कि युद्ध ने कैसे एक देश को हथियारों की सबसे बड़ी मंडी बना दिया। अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा हथियार निर्यातक देश बना हुआ है। दुनिया के कुल हथियारों का 42 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ अमेरिका बेचता है। पिछले 5 सालों में अमेरिका का हथियारों का निर्यात 27 प्रतिशत बढ़ गया है। बीतें 5 सालों में यूरोप में हथियारों का आयात 210 प्रतिशत बढ़ा है। यह द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद की सबसे बड़ी सैन्य हलचल है। रूस-यूक्रेन युद्ध से यूरोपीय देशों का डर बढ़ गया है। पोलैंड, जर्मनी और नॉर्वे जैसे देश अब अपनी जीडीपी का बड़ा हिस्सा रक्षा पर खर्च कर रहे हैं। अमेरिका, जर्मनी और ब्रिटेन यूक्रेन के मुख्य सप्लायर अभी भी बने हुए हैं जिन्होंने उसे एयर डिफेंस सिस्टम, टैंक और मिसाइलें बेची हैं।
सोशल मीडिया अकाउंट बंद, अफवाह फैलाने वालों पर प्रशासन की सख्ती
10 Mar, 2026 07:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जम्मू। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई की हत्या के बाद कश्मीर घाटी में पैदा हुए तनावपूर्ण हालात के बीच झूठी, मनगढ़ंत और गुमराह करने वाली जानकारियां फैलाने वालों के खिलाफ श्रीनगर पुलिस की कार्रवाई जारी है। पुलिस ने इस मामले में अब तक करीब 150 लोगों से पूछताछ करने के साथ ही ऐसे कई सोशल मीडिया अकाउंट, पेज और अन्य प्लेटफार्म को ब्लॉक किया है।
आला अफसर ने बताया कि साइबर पुलिस स्टेशन में इस संबंध में एफआईआर दर्ज की गई है। जिनके खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है उनमें नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद आगा सैयद रुहुल्ला मेहदी और श्रीनगर के पूर्व मेयर जुनैद मट्टू भी शामिल हैं। करीब 150 लोगों से पूछताछ करने के साथ ही अन्य कई प्रोफाइल की पहचान कर उनको साइबर सेल में बुलाया जा रहा है। जल्द ही इनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। कुल मिलाकर ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई की हत्या के बाद कश्मीर घाटी में पैदा हुए तनावपूर्ण हालात के बीच झूठी, मनगढ़ंत और गुमराह करने वाली जानकारियां फैलाने वालों के खिलाफ श्रीनगर पुलिस की कार्रवाई जारी है। पुलिस के एक आला अधिकारी ने बताया कि जानबूझकर झूठी, मनगढ़ंत और गुमराह करने वाली जानकारी फैलाने के मामले को गंभीरता से लिया गया है। इस कोशिश के पीछे मकसद अशांति फैलाना है। करीब एक सप्ताह से श्रीनगर पुलिस की विशेष साइबर टीम न्यूज चैनलों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों का सर्विलांस कर रही है। गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर पुलिस ने पहले ही एडवाइजरी जारी कर ऐसे तत्वों के खिलाफ चेतावनी जारी की थी। इसमें कहा गया था कि झूठी खबर, भड़काऊ पोस्ट या बिना सत्यापन वाली जानकारियां फैलाने पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
महाराष्ट्र सरकार के विरोध के बावजूद नाबालिग के पिता को मिली जमानत
10 Mar, 2026 06:47 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली|सुप्रीम कोर्ट ने पुणे के चर्चित पोर्श कार दुर्घटना मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने मंगलवार को उस नाबालिग के पिता को जमानत दे दी, जिस पर 2024 में पुणे में शराब के नशे में पोर्श कार चलाकर दो लोगों की मौत का आरोप है। यह घटना 19 मई, 2024 की है, जब कथित तौर पर 17 वर्षीय लड़के द्वारा शराब के नशे में चलाई जा रही पोर्श कार ने पुणे के कल्याणी नगर इलाके में दो आईटी पेशेवरों को कुचल दिया था।
आरोपी को मिली राहत
जस्टिस बी वी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुयान की बेंच ने विशाल अग्रवाल को राहत दी है। विशाल पर आरोप है कि उन्होंने अपने बेटे को बचाने के लिए ब्लड सैंपल बदलवाने की साजिश रची थी। वे चाहते थे कि मेडिकल रिपोर्ट में शराब की पुष्टि न हो सके। टॉप कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि इस मामले के दूसरे सह-आरोपियों को पहले ही राहत मिल चुकी है। कोर्ट ने यह भी देखा कि आरोपी पिछले 22 महीनों से जेल में बंद है। बेंच ने आदेश दिया कि ट्रायल कोर्ट जो नियम और शर्तें तय करेगा, उनके आधार पर विशाल अग्रवाल को बेल दी जाए।
सरकार ने किया विरोध
महाराष्ट्र सरकार ने इस जमानत का विरोध किया। सरकार का तर्क है कि विशाल अग्रवाल का मामला दूसरे आरोपियों जैसा नहीं है, इसलिए उन्हें बराबरी के आधार पर राहत नहीं मिलनी चाहिए। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने विशाल अग्रवाल पर कुछ पाबंदियां भी लगाई हैं। कोर्ट ने उन्हें आदेश दिया है कि वे इस मामले के किसी भी गवाह से संपर्क करने की कोशिश नहीं करेंगे। अगर वे किसी भी शर्त का उल्लंघन करते हैं, तो राज्य सरकार उनकी जमानत रद्द करने की मांग कर सकती है। इसके साथ ही कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि इस मामले की सुनवाई जल्द से जल्द पूरी की जाए।
इससे पहले 27 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने ससून जनरल हॉस्पिटल के पूर्व मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. अजय टावरे को भी जमानत दी थी। उन पर ब्लड सैंपल के साथ छेड़छाड़ करने का आरोप था। कोर्ट ने 2 फरवरी को तीन अन्य आरोपियों-अमर सतीश गायकवाड़, आदित्य अविनाश सूद और आशीष सतीश मित्तल को भी जमानत दी थी। ये लोग करीब 18 महीनों से हिरासत में थे। आदित्य सूद और आशीष मित्तल पर अपने ब्लड सैंपल देने का आरोप था ताकि उनके बच्चों को बचाया जा सके, जो दुर्घटना के समय कार में मौजूद थे।
दस को भेजा गया था जेल
इस मामले की शुरुआत में जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने नाबालिग आरोपी को बहुत आसान शर्तों पर जमानत दी थी। उसे सड़क सुरक्षा पर सिर्फ 300 शब्दों का निबंध लिखने को कहा गया था। इस फैसले के बाद पूरे देश में भारी गुस्सा देखा गया। इसके बाद पुणे पुलिस ने बोर्ड से अपने फैसले पर दोबारा विचार करने को कहा। फिर नाबालिग को ऑब्जर्वेशन होम भेज दिया गया। बाद में बॉम्बे हाई कोर्ट ने उसे रिहा करने का आदेश दिया। हालांकि, ब्लड सैंपल बदलने के मामले में विशाल अग्रवाल, उनकी पत्नी शिवानी अग्रवाल और डॉक्टरों समेत 10 लोगों को जेल भेजा गया था।
होटल व्यवसायी संकट में, मुंबई और चेन्नई में संचालन मुश्किल
10 Mar, 2026 05:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। मिडिल-ईस्ट में जारी युद्ध की लपटें अब भारत की अर्थव्यवस्था और आम जनजीवन को प्रभावित करने लगी हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने के कारण देश के प्रमुख महानगरों में कमर्शियल एलपीजी गैस की भारी किल्लत पैदा हो गई है। इसका सबसे बड़ा झटका होटल और रेस्तरां उद्योग को लगा है।
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में स्थिति गंभीर होती जा रही है। होटलों की प्रमुख संस्था आहार के अनुसार, गैस की कमी के चलते मुंबई के लगभग 20प्रतिशत होटल पहले ही बंद हो चुके हैं। एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि अगले 48 घंटों में आपूर्ति सामान्य नहीं हुई, तो शहर के 50प्रतिशत से अधिक होटलों पर ताला लग सकता है। हालांकि, एसोसिएशन ने अभी तक सामूहिक रूप से होटल बंद करने का कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया है, लेकिन ईंधन के अभाव में व्यक्तिगत स्तर पर होटल मालिक परिचालन बंद करने को मजबूर हैं।
वहीं, दक्षिण भारत के प्रमुख शहर चेन्नई में भी हाहाकार मचा हुआ है। चेन्नई होटल एसोसिएशन ने शहर में व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडरों की भारी कमी पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है। एसोसिएशन का कहना है कि केंद्र सरकार द्वारा कमर्शियल गैस की आपूर्ति को अस्थायी रूप से रोकने की सूचना ने खाद्य उद्योग के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा कर दिया है। चेन्नई होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष एम. रवि ने बताया कि अधिकांश होटलों के पास अब केवल दो दिनों का स्टॉक बचा है। उन्होंने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में स्पष्ट किया कि होटल उद्योग केवल व्यवसाय नहीं है, बल्कि यह अस्पतालों, आईटी पार्कों, कॉलेज हॉस्टलों और ट्रेन यात्रियों के लिए भोजन का मुख्य स्रोत है। यदि सप्लाई बहाल नहीं हुई, तो आम जनता को खाने-पीने की भारी किल्लत का सामना करना पड़ेगा। भू-राजनीतिक तनाव के कारण उपजे इस ऊर्जा संकट ने पूरे देश के सेवा क्षेत्र को चिंता में डाल दिया है।
अब नहीं आएगा ज्यादा बिजली बिल, वैज्ञानिकों ने निकाली स्मार्ट तकनीक
10 Mar, 2026 05:27 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
आज के AI युग में भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (IISER) ने बिजली बचाने के लिए एक शानदार तकनीक विकसित की है. इस तकनीक के जरिए अब यह आसानी से पता चल जाएगा कि कमरे में कितने लोग मौजूद हैं. उसी संख्या के आधार पर लाइट और पंखे जैसी बिजली की जरूरतों को खुद-ब-खुद कंट्रोल किया जा सकेगा. IISER के एसोसिएट प्रोफेसर हारून आर. लोन द्वारा तैयार की गई इस तकनीक से न सिर्फ बिजली की भारी बचत होगी, बल्कि बिल्डिंग मैनेजमेंट भी काफी स्मार्ट हो जाएगा. आसान शब्दों में कहें तो अब कमरे में लोगों की मौजूदगी के हिसाब से ही बिजली खर्च होगी, जिससे फिजूलखर्ची रुकेगी.
IISER की नई स्मार्ट तकनीक कैसे काम करता है?
हारून आर. लोन द्वारा विकसित इस तकनीक में कम कीमत वाले कैमरों का इस्तेमाल किया गया है. ये स्मार्ट कैमरे हॉल या कमरे में मौजूद लोगों की संख्या को काउन्ट करते हैं. इसके बाद एक विशेष कंप्यूटर एल्गोरिद्म उस जानकारी के आधार पर यह पता लगाता है कि बिल्डिंग में कितनी बिजली की जरूरत है और उसी के अनुसार बिजली की खपत को नियंत्रित किया जाता है.
IISER की नई तकनीक की खास बात क्या है?
इस तकनीक की एक खास विशेषता यह है कि यह सीमित डेटा के आधार पर भी ऊर्जा की खपत का सटीक अनुमान लगा सकती है. इस पहल के तहत बड़ी इमारतों, कार्यालयों, मॉल और संस्थानों में बिजली की व्यर्थ खपत को कम किया जा सकेगा, जिससे न केवल मकान मालिक को बिजली का अधिक बिल नहीं चुकाना होगा, बल्कि बिजली विभाग पर भी अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा.
स्मार्ट तकनीक के बारे में विशेषज्ञों ने क्या कहा?
वहीं इस स्मार्ट तकनीक के संबंध में विशेषज्ञों का कहना है कि इससे न केवल बिजली की बचत होगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी. विशेषज्ञों ने आगे बताया कि भविष्य में स्मार्ट सिटी और ग्रीन बिल्डिंग्स में इस तकनीक का अधिक से अधिक उपयोग किया जाएगा.
IISER की नई तकनीक से क्या फायदा होगा?
इस तकनीक (Electricity Bill Tension Over) का सबसे बड़ा फायदा यह है कि बिल्डिंग मैनेजर को बार-बार बिजली की खपत जांचने की ज़रूरत नहीं होगी. क्योंकि सारा काम ऑटोमैटिक होगा.
यह सिस्टम अपने आप तय कर लेगा कि कब लाइट जलानी है और कब एसी (AC) की कूलिंग को कम या ज्यादा करना है.
हालात बिगड़ने पर प्रशासन सख्त, इंटरनेट सेवाएं निलंबित
10 Mar, 2026 12:43 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गारो हिल्स| स्वायत्त जिला परिषद (जीएचएडीसी) चुनाव नामांकन प्रक्रिया से जुड़ी हिंसा के बाद मेघालय के पश्चिम गारो हिल्स जिले में कर्फ्यू लगा दिया गया। इसके बाद मोबाइल इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी गईं। यह जानकारी मंगलवार को अधिकारियों ने दी। उन्होंने बताया कि कर्फ्यू 10 मार्च को लगाया गया था और यह 24 घंटे तक लागू रहेगा, जबकि मोबाइल इंटरनेट सेवाएं 48 घंटे तक निलंबित रहेंगी।
उपद्रवियों ने कई दुकानों में तोड़फोड़ किया
सोमवार शाम को जिले के चिबिनांग इलाके में उपद्रवियों ने कई दुकानों में तोड़फोड़ किया। इसके बाद इलाके में कर्फ्यू लगा दिया गया। जिला मजिस्ट्रेट विभोर अग्रवाल ने कहा कि यह निर्णय सार्वजनिक शांति और व्यवस्था में व्यवधान की संभावना से संबंधित सूचनाओं के बाद लिया गया, जिससे जिले में मानव जीवन और संपत्ति को खतरा हो सकता है। इस आदेश के तहत कर्फ्यू की अवधि के दौरान पश्चिम गारो हिल्स जिले की सीमा के भीतर किसी भी व्यक्ति का अपने निवास स्थान से बाहर निकलना प्रतिबंधित है।
इंटरनेट सेवाओं को 48 घंटे के लिए निलंबित
अधिकारियों ने कहा कि मौजूदा कानून व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए ये प्रतिबंध आवश्यक और उचित थे। इनका उद्देश्य सार्वजनिक शांति में किसी भी प्रकार की बाधा को रोकना था। एक अधिकारी ने बताया कि राज्य सरकार ने अफवाहों के प्रसार को रोकने और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियाती उपाय के तौर पर 10 मार्च से पश्चिम गारो हिल्स जिले में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को 48 घंटे के लिए निलंबित करने का आदेश दिया है।
मजिस्ट्रेटों सहित वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी प्रभावित क्षेत्रों में डेरा डाले हुए हैं। स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। इलाके में सुरक्षा बलों की तैनाती कर दी गई है। पुलिस और सीआरपीएफ कड़ी निगरानी रख रहे हैं। जीएचएडीसी द्वारा जारी एक हालिया अधिसूचना को लेकर विवाद के बीच दुकानों में तोड़फोड़ की घटना घटी, जिसमें उम्मीदवारों को 10 अप्रैल को होने वाले परिषद चुनावों के लिए नामांकन पत्र दाखिल करते समय वैध अनुसूचित जनजाति (एसटी) प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने की आवश्यकता थी। गृह एवं जिला परिषद मामलों के प्रभारी आयुक्त एवं सचिव, सिरिल डिएंगडोह ने कहा कि सरकार ने पश्चिम गारो हिल्स सहित सभी उप आयुक्तों को सामुदायिक नेताओं के साथ शांति समिति की बैठकें आयोजित करने और शांति बनाए रखने की अपील करने का निर्देश दिया है।
शांति की अपील की
डिएंगडोह ने पीटीआई को बताया, "हमने डीसी को सभी समुदायों को बुलाने और शांति समिति की बैठकें आयोजित करने और शांति की अपील करने के लिए कहा है।" उन्होंने कहा कि पुलिस अधीक्षक द्वारा अधिक सुरक्षा कर्मियों की मांग के बाद जिले में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए जाएंगे। उन्होंने कहा, "और अधिक बल भेजे जाएंगे।" उन्होंने कहा कि पश्चिम गारो हिल्स के उप आयुक्त को एक ऐसे उम्मीदवार के बारे में तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है जिसे अपना नामांकन पत्र दाखिल करने से रोका गया था।
नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया 16 मार्च
जीएचएडीसी चुनावों के लिए नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया सोमवार से शुरू हो गई है और यह 16 मार्च तक जारी रहेगी, जबकि नामांकन पत्रों की जांच 17 मार्च को निर्धारित है।पहले दिन किसी भी उम्मीदवार ने नामांकन पत्र दाखिल नहीं किया, क्योंकि राजनीतिक दलों ने उपायुक्त कार्यालय में ब्रीफिंग के बाद ही नामांकन पत्र एकत्र किए। डिएंगडोह ने आगे कहा, "नामांकन अवधि बढ़ाने की फिलहाल कोई योजना नहीं है। हम स्थिति का आकलन कर रहे हैं और रिपोर्टों का इंतजार कर रहे हैं। जैसे-जैसे स्थिति आगे बढ़ेगी, हम देखेंगे।"
उत्तर-पश्चिम भारत में बढ़ेगी गर्मी: राजस्थान, गुजरात और हिमाचल में लू का खतरा
10 Mar, 2026 09:54 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। मार्च के दूसरे हफ्ते में ही तेज गर्मी होने लगी है। मौसम विभाग ने मंगलवार को राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र और हिमाचल में हीटवेव का अलर्ट जारी किया है। महाराष्ट्र के अकोला और राजस्थान के पिलानी-बाड़मेर में पारा 40 डिग्री का आंकड़ा पार कर गया है। विभाग ने जम्मू-कश्मीर, झारखंड, ओडिशा, बंगाल, बिहार, सिक्किम, केरल और आंध्र प्रदेश में बारिश की संभावना जताई है। मौसम विभाग का कहना है कि एक नया वेस्टर्न डिस्टर्बेंस हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में बारिश करवाएगा।मध्य प्रदेश के रतलाम का तापमान 38.6 डिग्री रहा। नई दिल्ली में भी दिन का टेंपरेचर 35.6 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। कश्मीर में टेम्परेचर 9.4 से 10.7 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा। 10-12 मार्च तक कुपवाड़ा, बांदीपोरा, गंदेरबल और अनंतनाग के कुछ ऊंचाई वाले इलाकों में हल्की बर्फबारी हो सकती है।
मार्च में गर्मी और हीटवेव
मौसम विभाग के अनुसार इन दिनों राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों से गर्म हवाएं आ रही हैं। जिसका असर मैदानी राज्यों में देखने को मिल रहा है। हवा की दिशा उत्तर-पूर्व से अब पश्चिम और उत्तर-पश्चिम हो गई है। वहीं, हवा में नमी बहुत कम है। इससे आने वाले दिनों में तापमान और बढ़ेगा। इससे धूप का तीखापन भी बढ़ सकता है।
कब मानी जाती है हीटवेव
मौसम विभाग के मुताबिक, हीटवेव तब मानी जाती है, जब मैदानों में तापमान 40 डिग्री या उससे ज्यादा पहुंच जाए। अगर सामान्य तापमान से 4 से 6 डिग्री ज्यादा दर्ज किया जाए। ऐसी स्थिति में लोगों की सेहत पर भी असर पड़ सकता है और लू लगने का खतरा बढ़ जाता है।
अहम मामले में सुप्रीम कोर्ट का निर्देश: केंद्र-राज्यों को पॉलिसी तैयार करने को कहा
10 Mar, 2026 08:46 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने एसिड अटैक पीडि़तों के पुनर्वास को लेकर केंद्र और राज्यों को अहम निर्देश दिए हैं। अदालत ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा है कि वे तेजाब हमले के पीडि़तों को सरकारी नौकरी देने के लिए स्पष्ट नीति तैयार करें। अगर किसी कारणवश उन्हें सरकारी रोजगार देना संभव नहीं है, तो उनके लिए जीवन निर्वाह भत्ता या गुजारा भत्ता देने की योजना बनाई जाए। यह निर्देश मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने सुनवाई के दौरान दिए। पीठ ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से यह भी पूछा कि सरकारी विभागों और एजेंसियों में नौकरियों के माध्यम से एसिड अटैक पीडि़तों के पुनर्वास के लिए अब तक कोई ठोस योजना क्यों नहीं बनाई गई। अदालत ने सरकारों से इस संबंध में जवाब दाखिल करने को कहा है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि यदि किसी राज्य को एसिड अटैक पीडि़तों को सरकारी नौकरी देने में लॉजिस्टिक समस्याएं आती हैं, तो कम से कम उनके लिए निर्वाह भत्ता देने की नीति तो बनाई ही जा सकती है, ताकि पीडि़तों को आर्थिक सहारा मिल सके। मामले की सुनवाई के दौरान पीडि़ता शाहीन मलिक ने अदालत से अनुरोध किया कि वह अपनी पैरवी वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा के माध्यम से कराना चाहती हैं।
अदालत ने सिद्धार्थ लूथरा से इस मामले को नि:शुल्क आधार पर लेने का आग्रह किया, जिसे उन्होंने स्वीकार किया। पीडि़ता ने इस संवेदनशील मामले में समयबद्ध सुनवाई की भी मांग की। अदालत को बताया गया कि एसिड अटैक पीडि़ताओं को बैंक खाता खोलने, आधार कार्ड बनवाने, संपत्ति की रजिस्ट्री कराने या मोबाइल सिम कार्ड लेने जैसी प्रक्रियाओं में गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। डिजिटल केवाईसी प्रक्रिया में पलकें झपकाने या उंगलियों के निशान देने जैसी बायोमेट्रिक प्रक्रियाएं कई बार उनके लिए संभव नहीं होतीं। इस पर पीडि़ताओं ने अदालत से अनुरोध किया कि केंद्र सरकार को निर्देश दिए जाएं कि डिजिटल केवाईसी के लिए समावेशी और वैकल्पिक व्यवस्था बनाई जाए। अदालत ने कहा कि सरकार का जवाब आने के बाद मामले की आगे सुनवाई की जाएगी।
गुरुग्राम में निर्माण स्थल पर बड़ा हादसा: दीवार गिरने से 7 मजदूरों की मौत, घायलों का भिवाड़ी में इलाज
10 Mar, 2026 08:08 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गुरुग्राम/भिवाड़ी: हरियाणा के गुरुग्राम में सोमवार रात बड़ा हादसा हो गया. ग्लोबल सिग्नेचर सोसाइटी में निर्माणाधीन प्रोजेक्ट की दीवार अचानक से गिर गई. हादसे में 7 मजदूरों की मौत हो गई जबकि 3 अन्य गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं. हरियाणा राजस्थान के बॉर्डर इलाके में ये हादसा हुआ है. पास में अस्पताल होने के चलते मृतकों और घायलों को राजस्थान के भिवाड़ी के सरकारी अस्पताल पहुंचाया गया. घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और SDRF की टीम मौके पर पहुंची और मजदूरों को मिट्टी से निकालने के लिए घंटों तक ऑपरेशन चलाया.
गुरुग्राम में दीवार गिरने से 7 मजदूरों की मौत: जानकारी के मुताबिक, गुरुग्राम की ग्लोबल सिग्नेचर सोसाइटी में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का काम चल रहा था. रात 8 बजे के करीब अचानक से बेसमेंट में मिट्टी की दीवार गिर गई. हादसे में 10 मजदूर दब गए. मौके पर मौजूद दूसरे मजदूरों ने राहत बचाव का काम शुरू किया और हादसे की सूचना पुलिस को दी. एम्बुलेंस की मदद से मृतकों और मरीजों को राजस्थान के भिवाड़ी के सरकारी अस्पताल लाया गया.
'मृतकों की संख्या में हो सकता है इजाफा': भिवाड़ी सरकारी अस्पताल के डॉक्टर सागर अरोड़ा ने बताया कि "भिवाड़ी के नजदीक हरियाणा क्षेत्र में कापड़ियावास स्थित सिगनेचर ग्लोबल बिल्डर सोसाइटी में मिट्टी खुदाई के दौरान मिट्टी में दबने से 7 श्रमिकों की मौत हुई है. 7 श्रमिकों के शव भिवाड़ी के सरकारी अस्पताल में पहुंचे हैं. जिनको मृत घोषित कर दिया गया है. मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है. मामले की सूचना राजस्थान पुलिस के अलावा हरियाणा पुलिस को भी दी गई है. मृतकों के परिजन भी अस्पताल पहुंच रहे हैं."
मजदूरों के परिजनों में रोष: मजदूरों के परिजनों का कहना है कि घटनास्थल पर बड़ी संख्या में श्रमिकों के परिजन पहुंच रहे हैं, लेकिन अभी तक प्रशासन की तरफ से पूरे मामले पर लापरवाही बरती जा रही है. श्रमिकों के परिजनों को साइट पर अंदर जाने नहीं दिया जा रहा है. मृतक श्रमिकों के परिजन गुस्से में हैं और अपना विरोध भी दर्ज करवा रहे हैं.
पुलिस मामले की जांच में जुटी: भिवाड़ी के एडिशनल एसपी अतुल साहू ने बताया कि मरने वालों में परमेश्वर उम्र 52 साल, भरतपुर के सतीश उम्र 35 साल, भागीरथ उम्र 50 साल, मंगल उम्र 32 साल, शामिल हैं. जबकि तीन लोगों की अभी तक पहचान नहीं हो पाई है. पुलिस ने मामले की सूचना हरियाणा पुलिस को दी है. साथ ही मृतकों के परिजनों को भी घटना की जानकारी दी गई है.
विश्व धरोहर दिवस पर रायपुर में सजी विरासत की अनोखी झलक, संरक्षण पर विशेषज्ञों का मंथन
बंदूक से विकास की ओर: सुकमा के तुंगल इको-पर्यटन केंद्र की प्रेरक कहानी
उमरिया जिले की पूजा सिंह ने रची आत्मनिर्भरता की प्रेरक कहानी
हमने सीवर सफाई के काम को चुनौती के रुप में स्वीकार किया है और हम बदलाव लाकर दिखाएंगे : ऊर्जा मंत्री तोमर
दिशा दर्शन भ्रमण आत्मनिर्भरता का सशक्त माध्यम: मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े
आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना में उत्कृष्ट प्रदर्शन पर छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर मिले दो प्रतिष्ठित पुरस्कार
राज्यमंत्री गौर का सख्त रुख: लापरवाही पर एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करने के निर्देश
महतारी वंदन योजना से संवर रही पहाड़ी कोरवा परिवारों की तकदीर
