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काला धुआं और आग के बीच भी तेहरान में साफ हवा, दिल्ली में बढ़ा प्रदूषण
13 Mar, 2026 11:55 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। ईरान में बीते दो हफ्तों से ताबड़तोड़ धमाके और बमों-मिसाइलों के धुओं से आमसान काला हो चुका है। तेल ठिकानों पर हमले के बाद कई मीडिया रिपोर्ट में तो यहां तक दावा किया गया कि ईरान के आसमान से जहरीली बारिश की बूंदे भी गिरने लगी हैं। इसके बावजूद भी आप यह जानकर हैरान हो जाएंगे कि चारों तरफ काले धुएं के बाद भी तेहरान की हवा भारत की राजधानी नई दिल्ली की हवा से ज्यादा साफ है। ताजा रिपोर्ट के अनुसार तेहरान का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 50-70 के अच्छा से मध्यम स्तर पर बना हुआ है। इसके ठीक उलट दिल्ली का एक्यूआई 150 से ऊपर, यानी खराब से अस्वस्थ स्तर पर बना हुआ है। चारों तरफ काला धुआं, काला आसमान, ताबड़तोड़ हमले, जहरीले हालात और आग के बावजूद तेहरान की साफ हवा ने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। इसके बाद यह कहना गलत नहीं होगा कि भौगोलिक स्थिति, औद्योगिक गतिविधियां और कृषि प्रदूषण नागरिकों की सांसों को कितना गंभीर रूप से प्रभावित कर सकते हैं। दूसरी ओर युद्ध के बावजूद प्राकृतिक और मानवजनित प्रदूषण का वास्तविक असर कैसा होता है।
अब समझिए क्यों दिल्ली की हवा खराब है या रहती है?
इस बात को ऐसे समझा जा सकता है कि दिल्ली का खराब प्रदूषण युद्ध से नहीं बल्कि भौगोलिक और औद्योगिक कारणों से है। यह शहर इंडो-गैंगेटिक मैदान में स्थित है, जो दुनिया के सबसे प्रदूषित इलाकों में से एक माना जाता है। यहां भारी ट्रैफिक और उद्योग हैं, निर्माण कार्य और धूल भी खूब फैलती है। इसके साथ ही इस बात को भी नजरंदाज नहीं किया जा सकता है कि दिल्ली के पड़ोसी राज्यों जैसे पंजाब और हरियाणा में कृषि अपशिष्ट (पराली) जलाना आम है। इन कारणों से पीएम2.5 जैसे सूक्ष्म कण वायु में फैलते हैं, जो सबसे जहरीली स्मॉग का कारण बनते हैं। ठंडी हवाओं और तापमान की उलटफेर (इनवर्जन) के कारण यह धुआं जमीन के पास फंसा रहता है। नतीजा यह होता है कि दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण अक्सर राष्ट्रीय मानकों से ऊपर रहता है।
अब बात तेहरान की हवा की
इस बात में कोई सच्चाई नहीं है कि तेहरान पूरी तरह से प्रदूषण मुक्त है। तेहरान में भी प्रदूषण है, लेकिन यहां सबसे बड़ा स्रोत वाहनों से निकलने वाला धुआं है। यहां कृषि अपशिष्ट जलाने जैसी गतिविधियां नहीं हैं। आसपास के इलाके में भारी उद्योगों का घना नेटवर्क कम है। हां यह बात जरूर है कि भूगोल के कारण सर्दियों में धुआं फंस सकता है, लेकिन औसत स्तर दिल्ली से कम है। हालांकि, अमेरिका-इस्राइल-ईरान संघर्ष के दौरान तेल डिपो पर हुए हमलों से तेहरान की हवा में जहरीले तत्व आए हैं, लेकिन फिर भी इसकी हवा दिल्ली से ज्यादा खराब नहीं हुई।
युद्ध प्रदूषण का मुख्य कारण नहीं
हालांकि कुछ विशेषज्ञों ने पहले सोचा था कि तेल ठिकानों की आग से पूरे क्षेत्र में प्रदूषण बढ़ सकता है। लेकिन वायु गुणवत्ता विशेषज्ञ कहते हैं कि दिल्ली में हालिया धुंध का कारण बलूचिस्तान और थार मरुस्थल से उड़ता धूल है, ईरान के धुएं से नहीं। गौरतलब है कि ऐसे समय में दिल्ली और तेहरान की हवा का यह तुलना दिखाता है कि शहरी प्रदूषण, जो ट्रैफिक, उद्योग और कृषि गतिविधियों से पैदा होता है, छोटे समय के युद्ध प्रभावों से भी ज्यादा लगातार हवा को खराब करता है। दिल्ली में 2 करोड़ से ज्यादा लोगों के लिए साफ हवा की लड़ाई लंबी है, जिसे केवल नीति, तकनीक और क्षेत्रीय सहयोग से ही हल किया जा सकता है।
कहा– मोदी दुनिया के सबसे ताकतवर नेताओं में से एक
13 Mar, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दिल्ली। में आयोजित होने वाले वैश्विक मंच रायसीना डायलॉग को लेकर ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी एबॉट ने भारत और प्रधानमंत्री मोदी की जमकर तारीफ की है। एबॉट ने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह कार्यक्रम साल 2016 से हर साल मार्च में आयोजित किया जा रहा है और अब यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय संवाद मंचों में शामिल हो चुका है। उनके मुताबिक, इस तरह का मंच तैयार करना भारत की एक शानदार सोच का परिणाम है, जहां दुनिया भर के नेता, विशेषज्ञ और नीति निर्माता वैश्विक मुद्दों पर खुलकर चर्चा करते हैं। एबॉट ने रायसीना डायलॉग की तुलना दुनिया के अन्य बड़े मंचों से भी की। उन्होंने कहा कि यह मंच स्विट्जरलैंड में होने वाले World Economic Forum और चीन के बोआओ फोरम जैसे आयोजनों से भी बेहतर है। उनका कहना था कि दावोस जैसे मंचों पर अक्सर अमीर और प्रभावशाली लोगों का ज्यादा दबदबा रहता है, जबकि रायसीना डायलॉग में विभिन्न विचारों और देशों को बराबरी से अपनी बात रखने का अवसर मिलता है। यहां चर्चा सिर्फ किसी सरकार की तारीफ करने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति, सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और कूटनीति जैसे अहम मुद्दों पर खुली बहस होती है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए एबॉट ने कहा कि मोदी दुनिया के सबसे ताकतवर नेताओं में गिने जाते हैं, लेकिन इसके बावजूद उनमें दूसरों को सुनने की खास क्षमता है। उन्होंने बताया कि रायसीना डायलॉग के दौरान प्रधानमंत्री मोदी हर साल मुख्य अतिथि के भाषण को ध्यान से सुनने के लिए कार्यक्रम में मौजूद रहते हैं, लेकिन खुद भाषण देने की बजाय दूसरे नेताओं को बोलने का मौका देते हैं। पिछले साल उन्होंने न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री Christopher Luxon को धैर्यपूर्वक सुना था, जबकि इस साल उन्होंने फिनलैंड के राष्ट्रपति Alexander Stubb के विचारों को ध्यान से सुना। एबॉट ने यह भी कहा कि शायद प्रधानमंत्री मोदी के जीवन में आध्यात्मिक अनुभवों का असर है। एक समय मोदी ने एक हिंदू संन्यासी की तरह जीवन बिताया था और शायद इसी कारण सत्ता में इतने लंबे समय तक रहने के बावजूद उनमें अहंकार नहीं आया। एक दशक से ज्यादा समय से देश का नेतृत्व करने के बाद भी मोदी का व्यवहार विनम्र और संतुलित दिखाई देता है, जो उन्हें अन्य नेताओं से अलग बनाता है। भारत में तानाशाही के आरोपों को लेकर भी एबॉट ने स्पष्ट प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इन आरोपों को पूरी तरह गलत और बेबुनियाद बताया। एबॉट ने कहा कि जिस देश में निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव होते हों, जहां मीडिया और न्यायपालिका अपनी भूमिका स्वतंत्र रूप से निभाते हों, वहां तानाशाही की बात करना सही नहीं है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि रायसीना डायलॉग में कई ऐसे देशों के प्रतिनिधि भी खुलकर अपनी बात रखते हैं जिनके आपसी संबंध अच्छे नहीं हैं। इस मंच पर इजरायल और ईरान जैसे देशों के प्रतिनिधियों को भी अपनी राय रखने का पूरा अवसर मिला। पूर्व ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री ने बताया कि वह खुद साल 2022 से लगातार इस कार्यक्रम में व्यक्तिगत रूप से शामिल हो रहे हैं और उन्होंने देखा है कि यहां अलग-अलग विचारधाराओं और देशों के लोग बिना किसी दबाव के अपनी बात रखते हैं। उनके अनुसार, इतना खुला और स्वतंत्र मंच किसी भी तानाशाही व्यवस्था वाले देश में संभव नहीं हो सकता। यही वजह है कि रायसीना डायलॉग आज वैश्विक स्तर पर भारत की कूटनीतिक ताकत और लोकतांत्रिक मूल्यों का महत्वपूर्ण प्रतीक बन चुका है।
Mumbai में बम धमकी से हड़कंप: अहम संस्थानों की सुरक्षा बढ़ाई गई
13 Mar, 2026 08:58 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। महराष्ट्र की राजधानी मुंबई में गुरुवार को कई महत्वपूर्ण संस्थानों को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर आ गईं। धमकी भरे ईमेल महाराष्ट्र विधानभवन, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज, बॉम्बे हाईकोर्ट और मुंबई मेट्रो सहित कई प्रमुख स्थानों को भेजे गए। इन ईमेल के सामने आते ही प्रशासन और पुलिस ने तुरंत सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी।
मुंबई पुलिस के अनुसार गुरुवार सुबह सबसे पहले बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज, विधानभवन और बॉम्बे हाईकोर्ट को धमकी भरे ईमेल मिले। ईमेल में दावा किया गया कि विधानभवन परिसर में बम रखा गया है। इसके बाद एहतियातन पूरे विधानसभा परिसर को खाली करा लिया गया। वहां मौजूद कर्मचारियों, अधिकारियों और पत्रकारों को तुरंत बाहर निकाल दिया गया। घटना की सूचना मिलते ही बम निरोधक दस्ते और डॉग स्क्वॉड को मौके पर बुलाया गया। सुरक्षा टीमों ने पूरे परिसर में सघन तलाशी अभियान शुरू कर दिया। अधिकारियों ने बताया कि अब तक किसी भी स्थान से बम या संदिग्ध विस्फोटक सामग्री बरामद नहीं हुई है, लेकिन पूरी तरह संतुष्टि होने तक तलाशी अभियान जारी रहेगा। इस बीच बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के एक प्रवक्ता ने भी धमकी भरे ईमेल मिलने की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं और संबंधित सुरक्षा एजेंसियों के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा है। बताया गया है कि बाद में मुंबई मेट्रो और कुछ बैंकों को भी इसी तरह के धमकी भरे ईमेल मिले। फिलहाल कहीं से भी किसी संदिग्ध वस्तु के मिलने की पुष्टि नहीं हुई है।
एलपीजी संकट की आशंका से घबराकर लोगों ने बढ़ाई सिलेंडर बुकिंग: सरकार
12 Mar, 2026 11:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारत सरकार के विदेश, शिपिंग, पेट्रोलियम, सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने गुरुवार को देश में कच्चे तेल और गैस की किल्लत को लेकर जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस की। सरकार ने माना कि देश में हालात चुनौतीपूर्ण हैं और घबराहट के कारण देशभर में सिलेंडर बुकिंग में कई गुना बढ़ोतरी देखी गई है।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि भारत अपनी जरूरत का करीब 60% LPG आयात करता है, जिसमें से लगभग 90% सप्लाई स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से आती है। देश में रोजाना करीब 50 लाख LPG सिलेंडर की डिलीवरी की जाती है।
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि देश में कच्चे तेल की सप्लाई की स्थिति पूरी तरह संतोषजनक है और देश के करीब एक लाख पेट्रोल पंपों में से किसी पर भी ईंधन खत्म होने (ड्राई-आउट) की स्थिति नहीं है।
अमेरिका-इजराइल की ईरान से जंग के बीच भारत में LPG की डिमांड बढ़ गई है। देशभर में गैस सिलेंडर एजेंसियों के बार लम्बी लाइनें लग रही हैं। सिलेंडरों की कालाबाजारी भी होने लगी है। राज्यों में ₹900 के घरेलू गैस सिलेंडर के लिए ₹1800 तक वसूले जा रहे हैं।
एस जयशंकर के एक कॉल से खुला रास्ता, सुरक्षित गुजरेंगे भारतीय जहाज
12 Mar, 2026 03:52 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारत। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच भारत के लिए बड़ी खुशखबरी है. मीडिया रिपोर्ट के सूत्रों के मुताबिक ईरान ने भारतीय टैंकरों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दे दी है. भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से फोन पर बात की थी. माना जा रहा है कि इसी बातचीत के बाद ईरान ने भारतीय टैंकरों को गुजरने की इजाजत दे दी है. भारत के लिए राहत भरी खबर है. भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री अराघची से जंग शुरू होने के बाद 3 बार फोन पर बात की है. गुरुवार को भी जयशंकर ने अराघची से बातचीत की, जिसके बाद ईरान ने भारतीय तेल के टैंकरों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की अनुमति दे दी. दोनों विदेश मंत्री बातचीत कर बीच का रास्ता निकालने का प्रयास कर रहे थे, ताकि कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस की सप्लाई पर कोई असर न पड़े।
एस. जयशंकर ने कई देशों से की थी बातचीत
सूत्रों के मुताबिक, भारतीय विदेश मंत्री ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खुलवाने के लिए सिर्फ ईरान ही नहीं, बल्कि कई देशों से बातचीत की थी. ताकि किसी प्रकार स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खुलवाया जा सके. इसके साथ ही जयशंकर ने इस मुद्दे को सुलझाकर साबित कर दिया है, कि तनाव के समय अपने हितों की रक्षा के लिए सक्षम हैं।
भारत के लिए कूटनीतिक सफलता
भारत के लिए यह रास्ता खुलवाना किसी चुनौती से कम नहीं था, क्योंकि यह रास्ता अमेरिका, यूरोप और इजरायल के लिए भी बंद कर दिया गया था. ऐसे में भारत के लिए रियायत देना कूटनीतिक सफलता मानी जा रही है. ईरान ने भारत को अनुमति देने के साथ ही यह भी साफ किया है कि अमेरिका, यूरोप और इजरायल से जुड़े जहाजों पर फिलहाल प्रतिबंध जारी रहेंगे।
हजारों लोगों के जश्न के बीच खुला IAS दावे का सच
12 Mar, 2026 01:01 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गाजीपुर। यूपीएससी परिणाम 2026 के बाद इस साल कई ऐसे अभ्यर्थियों ने जश्न मनाया, जिनका चयन नहीं हुआ था. लेकिन जब बाद में सच्चाई पता चली, तो भावुक हो गए. पहले गाजीपुर और बिहार के आरा जिले की आकांक्षा सिंह का मामला काफी सुर्खियों में रहा, क्योंकि इन दोनों 301वीं रैंक को अपना होने का दावा किया था. हालांकि, बाद में आरा की आकांक्षा सिंह का दावा गलत निकला और गाजीपुर के आकांक्षा का सही. एक ऐसा ही मामला बुलंदशहर से आया है, जहां 113वीं रैंक पर दो शिखा ने दावे किए. हालांकि, बाद में बुलंदशहर की शिखा ने माना कि यह हमारा परिणाम नहीं है. 113वीं रैंक हरियाणा की रहने वाली शिखा का है. सोशल मीडिया पर अब यह काफी वायरल हो रहा है. दरअसल, यूपीएससी रिजल्ट आने के बाद बुलंदशहर की शिखा ने पीडीएफ में अपना नाम देखा और खुशी के मारे उसने रोल नंबर नहीं देखा. परिणाम के बाद शिखा का पूरा परिवार जश्न में डूब गया. रिश्तेदारों का भी तांता लगा रहा, लेकिन कुछ ही दिनों बाद कहानी अचानक बदल गई. जब बुलंदशहर की शिखा ने अपना रोल नंबर मैच किया, तो अलग निकला. पता चला कि वह हरियाणा की शिखा है, जिसकी 113वीं रैंक लगी है।
रोल नंबर नहीं देखने पर हुई गलती
जब बुलंदशहर की शिखा को पता चला कि 113वीं रैंक उसकी नहीं बल्कि हरियाणा की रहने वाली शिखा का है, तो वह भावुक हो गई. हालांकि उन्होंने अपनी चूक मानते हुए कहा कि हमारा नाम एक जैसा था. मैनें सिर्फ नाम देखा और रोल नंबर नहीं देखा, यही मेरी गलती थी. शिखा के पिता ने कहा कि बेटी की सफलता सुनते ही पूरे परिवार और रिश्तेदार काफी खुश हो गए कि हमारी बिटिया का चयन हुआ है. लेकिन अब पता चला कि यह परिणाम हमारी बिटिया का नहीं, बल्कि हरियाणा की रहने वाली शिखा का है।
हरियाणा की शिखा को मिली 113वीं रैंक
बुलंदशहर की रहने वाली शिखा काफी साधारण बैकग्राउंड से आती हैं. उनके दादा इंटर कॉलेज में चपरासी थे. शुरुआत में जब शिखा के यूपीएससी में चयन की खबरें आईं, तो चारो ओर संघर्ष और सफलता की कहानियां सुनाई जाने लगीं. कि कैसे सीमित आय होने के बावजूद कोई इतनी बड़ी सफलता कैसे पाई. लेकिन जब सच्चाई पता चली, तो लगा मानों पैरों तले जमीन खिसक गई हो. फिलहाल, बुलंदशहर की रहने वाली शिखा ने अपनी गलती स्वीकार की है और बताया कि 113वीं रैंक हरियाणा की रहने वाली शिखा का है।
फैक्ट्री में आग से मचा हड़कंप, कई मजदूर घायल
12 Mar, 2026 12:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नोएडा। उत्तर प्रदेश के नोएडा में गुरुवार सुबह एक फैक्ट्री में भीषण आग लगने से हड़कंप मच गया। यह घटना सेक्टर-4 में स्थित बिजली मीटर बनाने वाली एक फैक्ट्री में हुई। आग लगते ही पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सूचना मिलते ही दमकल विभाग की तीन गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने का काम शुरू कर दिया गया।
आग की लपटें काफी तेज होने के कारण सुरक्षा के लिहाज से आसपास के इलाके को खाली कराया गया। मौके पर थाना फेस-1 की पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीमें लगातार राहत और बचाव कार्य में जुटी हुई हैं। फिलहाल आग लगने की सही वजह का पता नहीं चल पाया है और इसकी जांच की जा रही है। पुलिस के अनुसार, सेक्टर-4 में स्थित कैपिटल पावर सिस्टम लिमिटेड नाम की कंपनी में बिजली के मीटर बनाए जाते हैं। गुरुवार सुबह अचानक फैक्ट्री में आग लग गई। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और दमकल विभाग की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाने की कोशिश शुरू कर दी। हालांकि खबर लिखे जाने तक आग पूरी तरह से नहीं बुझ पाई थी। अधिकारियों के मुताबिक, जब फैक्ट्री में आग लगी, उस समय अंदर करीब 250 कर्मचारी काम कर रहे थे। आग लगते ही वहां अफरा-तफरी मच गई और कर्मचारियों को जल्द से जल्द बाहर निकाला गया। इस हादसे में दो दर्जन से ज्यादा लोग झुलस गए हैं। घायलों को इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। गौतमबुद्धनगर के अपर पुलिस आयुक्त राजीव नारायण मिश्र ने बताया कि आग लगने की सूचना मिलते ही राहत और बचाव कार्य तुरंत शुरू कर दिया गया था। दमकल विभाग की टीम आग पर काबू पाने में लगी हुई है और झुलसे हुए लोगों का अस्पताल में इलाज चल रहा है। अधिकारियों का कहना है कि आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है।
दोहरी नौकरी का खेल खत्म, कोर्ट ने सुनाई 7 साल की सजा
12 Mar, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
उत्तर प्रदेश। से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. जहां एक शख्स ने दो जगहों पर सरकारी विभागों में नौकरी करते पाया गया. मामले का जब खुलासा हुआ तो सब हैरान रह गए. खुलासे के बाद मामला कोर्ट तक पहुंच गया, जहां कोर्ट ने आरोपी को सात साल की सजा और 30 हजार रुपए का जुर्माना वसूलने का आदेश दिया है. दरअसल, यह मामला बाराबंकी जिले के सतरिख थाना क्षेत्र के नरौली गांव का है. जहां नरौली गांव के रहने वाले जय प्रकाश सिंह फर्जी तरीके से दो जगहों पर नौकरी करते पाए गए. उन पर आरोप है कि फर्जी दस्तावेज बनवाकर अलग-अलग जिलों के दो सरकारी विभागों में नौकरी हासिल कर ली. जिसमें पहली नौकरी साल 1979 में प्रतापगढ़ जिले के स्वास्थ्य विभाग में नॉन-मेडिकल असिस्टेंड के पद पर पाई. वहीं दूसरी नौकरी 1993 में अपने ही जिले बाराबंकी में शिक्षा विभाग में शिक्षक के पद पर पाई. आरोपी ने न सिर्फ दूसरी नौकरी ज्वाईन की, बल्कि दोनों जगहों पर वेतन भी लेता रहा. हैरानी की बात है कि यह सिलसिला करीब 15 सालों तक चलता रहा, लेकिन किसी को भी कानों-कान खबर नहीं हुई।
कैसे हुआ खुलासा ?
साल 2009 में एक युवक ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि जय प्रकाश सिंह ने फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से दो जगहों पर नौकरी पाई है. पहले तो लगा कि साजिशन रंजिश की वजह से प्रभात सिंह ने जय प्रकाश सिंह पर आरोप लगाया होगा, लेकिन जब आरटीआई के तहत जानकारी मांगी गई, तब चौंकाने वाला खुलासा हुआ. खुलासे के बाद सब हैरान रह गए कि कैसे एक ही आदमी दो सरकारी विभागों ने एक साथ नौकरी कर सकता है।
कोर्ट ने सुनाई 7 साल की सजा
जांच में जब दो जगहों पर नौकरी करते पाया गया, तो आरोपी जय प्रकाश सिंह के खिलाफ पुलिस ने धोखाधड़ी और कूटरचना के जुड़े गंभीर आरोपों में एफआईआर दर्ज कर ली. इस दौरान उसे नौकरी से निलंबित कर दिया गया और केस कोर्ट पहुंच गया. कोर्ट में मामला काफी समय तक चला. जिसमें कोर्ट ने गवाहों और जांच के आधार पर सरकारी तंत्र को धोखा देने के आरोप को सही पाया. इस दौरान कोर्ट में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुधा सिंह की अदालत ने जय प्रकाश सिंह को 7 साल की सजा और 30 हजार रुपए का जुर्माना लगाया. इसके अलावा सरकारी खजाने से लिए गए वेतन की वसूली का भी आदेश दिया।
गैस सिलेंडर के लिए लंबी कतारें, श्रावस्ती में इंतजार करते-करते महिला हुई बेहोश
12 Mar, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
श्रावस्ती। उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जिले में रसोई गैस सिलेंडर को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। गैस एजेंसियों के बाहर लग रही लंबी कतारों और आपूर्ति में आ रही दिक्कतों के कारण स्थिति तनावपूर्ण हो गई है। आलम यह है कि घंटों लाइन में खड़े रहने के कारण लोग शारीरिक रूप से निढाल हो रहे हैं और भीड़ बेकाबू होती जा रही है। बुधवार को गैस वितरण केंद्र पर उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब लाइन में खड़ी एक रोजेदार महिला अचानक बेहोश होकर गिर पड़ी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, तेज धूप और घंटों के इंतजार के कारण महिला की तबीयत बिगड़ गई। उसे तुरंत स्थानीय लोगों ने सहारा दिया और प्राथमिक उपचार कर होश में लाने की कोशिश की। इस घटना के बाद भीड़ का धैर्य जवाब दे गया। गैस लेने की होड़ में उपभोक्ताओं के बीच तीखी बहस शुरू हो गई, जो देखते ही देखते धक्का-मुक्की और झड़प में तब्दील हो गई। इस हंगामे के दौरान दो अन्य महिलाएं गंभीर रूप से घायल हो गईं, जिन्हें इलाज के लिए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया है। स्थानीय उपभोक्ताओं का आरोप है कि पिछले कई दिनों से सिलेंडर की भारी किल्लत है। लोग सुबह अंधेरे से ही लाइन में लग जाते हैं, लेकिन शाम तक खाली हाथ लौटने को मजबूर हैं। दूसरी ओर, जिला प्रशासन ने किल्लत की खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि आपूर्ति पूरी तरह नियमित है। जिन उपभोक्ताओं के मोबाइल पर ओटीपी (ओटीपी) आता है, उन्हें प्राथमिकता पर सिलेंडर दिया जा रहा है। जिले में कुल 2 लाख 35 हजार कनेक्शन हैं, जिनमें 1.50 लाख उज्ज्वला योजना के अंतर्गत हैं।
डीएम की अपील और नई व्यवस्था
जिलाधिकारी अश्वनी कुमार पांडेय ने स्थिति को स्पष्ट करते हुए बताया कि उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को 25 दिन और सामान्य उपभोक्ताओं को 30 दिन के अंतराल पर सिलेंडर उपलब्ध कराए जाएंगे। उन्होंने जनता से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और वितरण केंद्रों पर अनावश्यक भीड़ न लगाएं। प्रशासन के दावों के बावजूद, जमीनी हकीकत और गैस एजेंसियों पर उमड़ती बेकाबू भीड़ कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस वितरण व्यवस्था को कब तक सुचारू कर पाता है।
भारत-रूस ऊर्जा डील: 3 करोड़ बैरल कच्चे तेल की खरीद पर सहमति
12 Mar, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की सप्लाई में आ रही रुकावटों के बीच भारत ने रूस से भारी मात्रा में तेल खरीदने का फैसला किया है। एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत करीब 3 करोड़ बैरल रूसी कच्चा तेल खरीदेगा। रिपोर्ट में बताया कि, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी) और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी कंपनियों ने रूसी तेल के एग्रीमेंट किए हैं। हाल ही में अमेरिका ने समुद्र में फंसे रूसी तेल के शिपमेंट्स खरीदने के लिए भारत को 30 दिन (3 अप्रैल तक) की छूट देने की बात कही थी। हालांकि, इस पर भारतीय अधिकारी कह चुके हैं कि भारत तेल खरीदने के लिए किसी भी देश की इजाजत पर निर्भर नहीं है।
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमलों के बाद स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के जरिए होने वाली तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है। ऐसे में भारतीय रिफाइनर्स ने उन रूसी जहाजों को सुरक्षित किया है जो पहले से ही एशियाई समुद्र में मौजूद थे, लेकिन उन्हें खरीदार नहीं मिल रहे थे। ट्रेडर्स का कहना है कि इंडियन ऑयल ने करीब 1 करोड़ बैरल और रिलायंस ने भी कम से कम 1 करोड़ बैरल तेल खरीदा है। बाकी बचा हुआ तेल अन्य भारतीय रिफाइनिंग कंपनियों ने लिया है।
रास्ते में ही जहाजों ने भारत की ओर मोड़ा रुख
शिपिंग डेटा से पता चला है कि मायलो और सारा जैसे कई बड़े तेल टैंकर, जो पहले सिंगापुर की ओर जा रहे थे, उन्होंने अब भारत के बंदरगाहों की तरफ अपना रास्ता मोड़ लिया है। अमेरिकी छूट मिलने के तुरंत बाद इन जहाजों के डेस्टीनेशन बदल दिए गए। रूस ने इस बार यूराल्स, ईएसपीओ और वरान्डे जैसे ग्रेड का तेल ऑफर किया है।
सऊदी और इराक से घटाकर फिर रूस पर फोकस
पिछले कुछ महीनों में भारत ने रूस से तेल की खरीद कम कर दी थी और इसकी जगह सऊदी अरब और इराक से ज्यादा तेल लेना शुरू किया था। आंकड़ों के मुताबिक, फरवरी में रूस से आयात घटकर 10.6 लाख बैरल प्रति दिन रह गया था, जो कि 2024 के मध्य में 20 लाख बैरल प्रति दिन से ज्यादा था। अब मिडिल ईस्ट संकट की वजह से एक बार फिर भारत ने रूस की तरफ रुख किया है, ताकि देश में ऊर्जा की किल्लत न हो।
जरूरत का 70 प्रतिशत कच्चा तेल अब दूसरे रास्तों से आएगा
ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को ब्लॉक कर दिया है, जहां से दुनिया की 20 प्रतिशत तेल सप्लाई होती है। वहीं, भारत अपनी जरूरत का 50 प्रतिशत कच्चा तेल और 54 प्रतिशत एलएनजी इसी रास्ते से मंगाता है, लेकिन वर्तमान हालात को देखते हुए भारत ने अपनी रणनीति बदल ली है और इस विवादित रास्ते पर निर्भरता कम कर दी है। वहीं, भारतीय कंपनियां जल्द से जल्द अपना स्टॉक भरना चाहती हैं। भारत ने उन रास्तों से होने वाले कच्चे तेल के आयात में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है, जो होर्मुज के दायरे में नहीं आते।
जंगल में छिपाया था खजाना: नक्सली ठिकाने से करोड़ों कैश और सोना मिला
12 Mar, 2026 09:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जगदलपुर। बस्तर संभाग मुख्यालय जगदलपुर में बुधवार को नक्सल विरोधी अभियान में बड़ी सफलता मिली। दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के 108 नक्सली कैडरों ने आत्मसमर्पण किया। इनमें 44 महिला और 64 पुरुष नक्सली शामिल हैं, जिन पर 3.29 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। इस दौरान नक्सलियों द्वारा जमा किए गए हथियारों और अन्य सामग्री की प्रदर्शनी लगाई गई। अधिकारियों ने 101 घातक हथियार बरामद होने की जानकारी दी।
इन हथियारों में एके 47, इंसास, एलएमजी और बीजीएल शामिल थे। नक्सल इतिहास में पहली बार 3.61 करोड़ रुपये नकद और 1.64 करोड़ रुपये मूल्य का एक किलो सोना बरामद किया गया। इसे अब तक के नक्सल विरोधी अभियानों में सबसे बड़ी डंप बरामदगी माना जा रहा है। यह सभी सामग्री बस्तर रेंज के विभिन्न जिलों से बरामद की गई थी। इनमें बीजापुर, दंतेवाड़ा, सुकमा, नारायणपुर, कांकेर, कोंडागांव और बस्तर जिले शामिल हैं। बरामद किए गए सभी डंप और सामग्री को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया गया। यह प्रदर्शन जगदलपुर स्थित रेंज मुख्यालय में आयोजित आत्मसमर्पण कार्यक्रम के दौरान हुआ। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह सामग्री अलग-अलग अभियानों में मिली थी। इसमें 101 घातक हथियार और बड़ी मात्रा में नकदी व सोना शामिल था।
13 साल से कोमा में पड़े युवक को इच्छामृत्यु की अनुमति, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
12 Mar, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को 31 वर्षीय एक व्यक्ति के लिए निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी। यह शख्स 13 वर्षों से अधिक समय से कोमा की स्थिति में था। अब उसकी कृत्रिम जीवन रक्षक प्रणाली को हटा दिया गया। निष्क्रिय इच्छामृत्यु किसी मरीज को जीवित रखने के लिए आवश्यक जीवन रक्षक उपकरणों या उपचार को रोककर या वापस लेकर जानबूझकर मरने देने का काम है।
हरीश राणा 2013 में एक इमारत की चौथी मंजिल से गिरने के बाद सिर में गंभीर चोटों का शिकार हो गए थे और एक दशक से अधिक समय से कोमा में हैं। न्यायमूर्ति जेबी परदीवाला और केवी विश्वनाथन की पीठ ने एम्स को राणा को उपशामक देखभाल इकाई में भर्ती करने का निर्देश दिया, ताकि चिकित्सा उपचार बंद किया जा सके। पीठ ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि उपचार बंद करने की प्रक्रिया एक सुनियोजित योजना के साथ हो ताकि राणा की गरिमा बनी रहे। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 31 वर्षीय युवक के माता-पिता से मिलने की इच्छा व्यक्त की थी। कोर्ट ने एम्स-दिल्ली के डॉक्टरों के एक द्वितीयक मेडिकल बोर्ड द्वारा तैयार की गई राणा की मेडिकल हिस्ट्री वाली रिपोर्ट का अध्ययन किया था और टिप्पणी की थी कि यह एक दुखद रिपोर्ट है।
रिपोर्ट के अनुसार, उस व्यक्ति की हालत दयनीय
प्राथमिक चिकित्सा समिति ने मरीज की हालत की जांच करने के बाद उसके ठीक होने की संभावना नगण्य होने पर जोर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने 11 दिसंबर को कहा था कि प्राथमिक चिकित्सा बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, उस व्यक्ति की हालत दयनीय है। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 2023 में जारी दिशानिर्देशों के अनुसार, कोमा में पड़े मरीज के लिए कृत्रिम जीवन रक्षक प्रणाली को हटाने के संबंध में विशेषज्ञ की राय लेने के लिए एक प्राथमिक और एक द्वितीयक चिकित्सा बोर्ड का गठन करना होगा।
गैस की किल्लत से बदला किचन का ट्रेंड, इंडक्शन-स्टोव की डिमांड 10–20 गुना बढ़ी
11 Mar, 2026 07:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव और गैस आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच भारत में एलपीजी संकट की आशंका ने उपभोक्ताओं के व्यवहार में बड़ा बदलाव ला दिया है। देश के कई शहरों में एलपीजी सिलेंडर की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ने के बाद इंडक्शन स्टोव की मांग में अचानक तेज़ उछाल देखने को मिली है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार क्विक कॉमर्स और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर इंडक्शन कुकटॉप की बिक्री सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना बढ़ गई है। कुछ प्लेटफॉर्म पर तो स्थिति यह हो गई कि भारी मांग के कारण कई उत्पाद कुछ ही घंटों में आउट ऑफ स्टॉक हो गए। क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म ब्लिंकिट, स्वीगी, इंस्टामार्ट और जेप्टो पर इंडक्शन कुकटॉप पर भारी छूट दी जा रही है। हालांकि तेज़ मांग के चलते इन प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध अधिकांश मॉडल जल्दी ही बिक गए और सीमित स्टॉक ही बचा है।
ई-कॉमर्स कंपनियों के आंकड़े भी मांग में तेज़ वृद्धि की पुष्टि करते हैं। अमेजॉन के अनुसार पिछले 24 घंटों में इंडक्शन कुकटॉप की मांग सामान्य दिनों की तुलना में करीब 20 गुना बढ़ गई है। वहीं फ्लिपकार्ट ने बताया कि पिछले चार-पांच दिनों में बिक्री लगभग तीन गुना बढ़ी है। इसी तरह ऑनलाइन ग्रॉसरी प्लेटफॉर्म बिग बास्केट ने भी बताया कि सोमवार से अब तक इंडक्शन कुकटॉप की बिक्री लगभग पांच गुना तक बढ़ गई है। कंपनी ने इस बढ़ती मांग को देखते हुए अपने मासिक बिक्री अनुमान को तीन गुना तक बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि महानगरों में जहां अधिकतर परिवार एलपीजी सिलेंडर पर निर्भर हैं, वहां गैस की संभावित कमी की आशंका के कारण लोग वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर इंडक्शन स्टोव खरीद रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यदि एलपीजी आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बनी रहती है, तो आने वाले दिनों में इंडक्शन कुकटॉप जैसे वैकल्पिक किचन उपकरणों की मांग और बढ़ सकती है।
गोरखपुर से शुरू होगी परिक्रमा, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद करेंगे 81 दिन का सफर
11 Mar, 2026 06:31 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गोरखपुर। ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने बुधवार (11 मार्च) को बड़ा ऐलान किया. उन्होंने 81 दिनों तक यूपी की परिक्रमा यात्रा की घोषणा किया. इस यात्रा को 'गविष्ठि यात्रा' का नाम दिया. उनकी यात्रा 3 मई से शुरू होकर 23 जुलाई तक चलेगी. ये गोरखपुर से शुरू होगी और गोरखपुर में ही खत्म होगी. उन्होंने कहा कि हम बिल्कुल राजनीति नहीं करेंगे. गाय की रक्षा की बात करेंगे और तथ्य के साथ जनता के सामने रखेंगे। शंकराचार्य ने कहा कि परिक्रमा यात्रा जहां से शुरू होगी, वहीं समापन होगा. उन्होंने कहा कि 24 जुलाई को फिर यहीं इकट्ठा होंगे. बरसाती पहनकर खड़े होंगे लेकिन सभा होगी. इसके साथ ही उन्होंने ऐलान किया कि नागा सेना की तर्ज पर चतुरंगिणी का निर्माण होगा।
कंधमाल में 10 माओवादी मुख्यधारा में लौटे, करोड़ों का इनाम था घोषित
11 Mar, 2026 06:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कंधमाल। ओडिशा के कंधमाल जिले के फूलबनी में बुधवार को 10 नक्सलियों ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। आत्मसमर्पण करने वालों में कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (एम) के एक स्टेट कमेटी सदस्य, एक डिविजनल कमेटी सदस्य, दो एरिया कमेटी सदस्य और छह माओवादी कैडर शामिल हैं।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सरेंडर करने वाले नक्सलियों में सोनू पाटम (उर्फ नीटू), संताई सलाम, लक्ष्मी मडावी (उर्फ अनुपा), सुनील तेलम, मंजुला पुनेम, रामबती आयम, गणेश कुंजाम, सुशीला डूडी, शारिर कुहुदाम और चोडी योडी के नाम शामिल हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार इन नक्सलियों ने सरकार की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया है। प्रशासन ने कहा कि सभी को नियमानुसार पुनर्वास योजना का लाभ दिया जाएगा और उन्हें समाज में फिर से स्थापित करने में सहायता की जाएगी।
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