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मध्य-पूर्व तनाव: दुबई हवाई अड्डे के पास ड्रोन हमले के बाद इजराइल का ईरान पर जवाब
16 Mar, 2026 09:33 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हैदराबाद: ईरान पर अमेरिका और इजराइल का संयुक्त हमला अपने 17वें दिन में प्रवेश कर गया है. इस बीच युद्ध थमने का नाम नहीं ले रहा है. ईरान होर्मुज से जहाजों के गुजरने में बाधा डालना जारी रखा है. यह मसला गरमाता जा रहा है. इसे लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अगर नाटो (NATO) होर्मुज खोलने में अमेरिका की मदद नहीं करेगा तो इसका भविष्य बहुत बुरा होगा. इजराइली वायु सेना (IAF) ने रविवार को बताया कि उसने पिछले एक दिन में पश्चिमी और मध्य ईरान में 200 से ज्यादा ठिकानों पर हमले किए. इन हमलों में मिसाइल सिस्टम, रक्षा प्रतिष्ठान और ऑपरेशनल हेडक्वार्टर जैसे सैन्य बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि अमेरिका ने यूएई में दो जगहों—रास अल-खैमाह और दुबई के बहुत करीब स्थित एक जगह—से खार्ग द्वीप और अबू मूसा द्वीप पर हमला किया. उन्होंने इस कार्रवाई को खतरनाक बताया और कहा कि ईरान सावधानी बरतने की कोशिश करेगा ताकि वहाँ किसी भी आबादी वाले इलाके पर हमला न हो. अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा कि ईरान के इस दावे पर उसके पास कोई प्रतिक्रिया नहीं है. इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि देश ने खार्ग द्वीप पर स्थित सैन्य ठिकानों को पूरी तरह से नष्ट कर दिया. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि तेहरान होर्मुज से जहाजों के गुजरने में बाधा डालना जारी रखता है, तो तेल से जुड़े बुनियादी ढाँचे भी अगला निशाना बन सकते हैं. वहीं तेल की कीमतों और सप्लाई को लेकर दुनिया भर में बढ़ती चिंता के बीच, ट्रंप ने शनिवार को कहा कि उन्हें उम्मीद है कि चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन और अन्य देश होर्मुज को खुला और सुरक्षित रखने के लिए युद्धपोत भेजेंगे. अराघची ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में पड़ोसी देशों से विदेशी हमलावरों को बाहर निकालने का आग्रह किया और ट्रंप की इस अपील को भीख मांगना बताया.
होर्मुज में युद्धपोत भेजने की ट्रंप की गुजारिश पर 'अभी कुछ तय नहीं': जापान
जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने कहा कि उनकी सरकार को वॉशिंगटन से इस बारे में अभी तक कोई जानकारी नहीं मिली है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जापान समेत दूसरे देशों से होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा में मदद के लिए जहाज भेजने की जो अपील की है, उस पर क्या करना है. ताकाइची ने संसद के एक सत्र में बताया कि अधिकारी इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि जापान इस क्षेत्र में अपने जहाजों की सुरक्षा के लिए अपनी कानूनी सीमाओं के दायरे में रहकर क्या-क्या कर सकता है. भले ही अमेरिका की तरफ से कोई गुजारिश आई हो या न आई हो.' रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइज़ुमी ने कहा कि मौजूदा सुरक्षा हालात को देखते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य में युद्धपोत भेजने की उनकी कोई योजना नहीं है.
ट्रंप के अनुरोध के बाद भी होर्मुज में नौसेना का जहाज नहीं भेजेंगे: ऑस्ट्रेलिया
ऑस्ट्रेलिया के परिवहन मंत्री ने सोमवार को कहा कि देश होर्मुज जलडमरूमध्य में नौसेना का कोई जहाज नहीं भेजेगा. यह फैसला तब आया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दूसरे देशों से इस रणनीतिक जलमार्ग की सुरक्षा में मदद के लिए युद्धपोत भेजने का आह्वान किया था. परिवहन मंत्री कैथरीन किंग ने राष्ट्रीय प्रसारक एबीसी से कहा, 'हम होर्मुज जलडमरूमध्य में कोई जहाज नहीं भेजेंगे.'
दक्षिणी लेबनान में इजरायली हमलों में 5 लोगों की मौत: स्वास्थ्य मंत्रालय
लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि रविवार को टायर जिले में हुए एक हमले में तीन लोगों की मौत हो गई और तीन अन्य घायल हो गए. मरजेयौन जिले में हुए एक अन्य हमले में दो लोगों की मौत हुई और चार अन्य घायल हो गए. मंत्रालय ने बताया कि 2 मार्च को हिजबुल्लाह द्वारा उत्तरी इजरायल की ओर रॉकेटों की बौछार करने के बाद, जब हिजबुल्लाह और इजराइल के बीच संघर्ष फिर से भड़का तब से इजराइली हमलों में लेबनान में 850 लोगों की मौत हो चुकी है. इनमें 107 बच्चे और 66 महिलाएं शामिल हैं. मंत्रालय ने आगे बताया कि इन हमलों में 2026 लोग घायल भी हुए हैं.
अराघची ने ट्रंप के उन दावों को खारिज किया कि ईरान युद्धविराम चाहता है
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उन दावों को खारिज कर दिया कि ईरान युद्धविराम चाहता है. उन्होंने कहा कि ईरान जब तक जरूरी होगा, अपनी रक्षा के लिए तैयार है. सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर किए गए हमलों का भी बचाव किया. अराघची ने कहा कि तेहरान तब तक सैन्य कार्रवाई जारी रखेगा जब तक अमेरिका इस 'अवैध युद्ध' को खत्म नहीं कर देता. इस न्यूज चैनल को दिए एक इंटरव्यू में ईरानी नेता ने उन दावों को भी खारिज कर दिया कि ईरान ने बातचीत या युद्धविराम की मांग की थी. अराघची ने कहा, 'नहीं, हमने कभी युद्धविराम की मांग नहीं की और हमने बातचीत की भी कभी मांग नहीं की. हम जब तक जरूरी होगा, अपनी रक्षा के लिए तैयार हैं.' उन्होंने आगे कहा कि ईरान तब तक सैन्य अभियान जारी रखेगा जब तक अमेरिका अपना रुख नहीं बदल लेता.
इजराइल को उसके युद्ध अपराधों के लिए दंडित किया जाना चाहिए:ईरानी विदेश मंत्री
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इजराइल पर बड़ा आरोप लगाया है. उन्होंने एक्स पर कहा,'ईरान में ईंधन डिपो पर इजराइल की बमबारी अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है और पर्यावरण विनाश के समान है. निवासियों के स्वास्थ्य और कल्याण को दीर्घकालिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है. मिट्टी और भूजल का प्रदूषण पीढ़ियों तक असर डाल सकता है. इजराइल को उसके युद्ध अपराधों के लिए दंडित किया जाना चाहिए.'
विदेशी युद्ध का असर भारत पर: किसानों के खून के आंसू और 1 लाख करोड़ का संकट
16 Mar, 2026 08:47 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हैदराबाद: अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच छिड़े युद्ध ने जहां भारत में पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति पर संकट ला दिया है. वहीं, कारोबार पर भी बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है. इंपोर्ट-एक्सपोर्ट दोनों पर बुरा असर देखने को मिल रहा है. बात एक्सपोर्ट की करें तो भारत अपने कृषि उत्पाद सबसे ज्यादा मिडिल ईस्ट में भेजता है. 2025 में करीब 1 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का एक्सपोर्ट हुआ था.लेकिन, मिडिल ईस्ट संकट के चलते यह कारोबार ठप हो गया है. लाखों टन माल रास्ते में फंसा पड़ा है. क्योंकि, मिडिल ईस्ट के देशों को जाने वाले जल, थल और वायु मार्ग बंद पड़े हैं. इसके अलावा बीमा और शिपिंग लागत भी बढ़ गई है. इससे जहां निर्यातकों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है, वहीं किसानों पर भी बड़ा असर देखने को मिल रहा है. आईए, ETV Bharat की पहली कड़ी में जानते हैं कैसे और कितने कृषि उत्पादों के एक्सपोर्ट पर युद्ध का असर पड़ रहा है.
ईरान-इजराइल युद्ध का भारत के व्यापार पर असर: ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की रिपोर्ट के अनुसार युद्ध के कारण पश्चिम एशिया को लगभग 11.8 अरब डॉलर (करीब 1 लाख करोड़ रुपए) का कृषि-खाद्य निर्यात (चावल, फल, मसाले) खतरे में हैं. बंदरगाहों पर 3,000 से अधिक कंटेनर फंसे हुए हैं.
4 लाख टन बासमती चावल रास्ते में फंसा: ईरान-इजराइल/अमेरिका तनाव ने भारत से बासमती चावल का निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुआ है. लगभग 4 लाख टन चावल पोर्ट्स या रास्ते में फंसा हुआ है. क्योंकि शिपिंग रूट बाधित हो गए हैं. युद्ध के कारण शिपिंग लागत दोगुनी हो गई है, जिससे निर्यातकों को नुकसान हो रहा है. दरअसल, ईरान, भारत के बासमती चावल का प्रमुख आयातक (25% से अधिक हिस्सा) है.लेकिन, युद्ध के कारण ईरान को होने वाली शिपमेंट ठप हो गई है. भारत वैश्विक बाजार में बासमती चावल का अग्रणी निर्यातक है. वर्ष 2024-25 के दौरान देश ने 50312.01 करोड़ रुपए (5944.42 मिलियन अमेरिकी डॉलर) मूल्य का 60 लाख 65 हजार टन से अधिक बासमती चावल विश्व को निर्यात किया. CRISIL रेटिंग्स की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम एशिया के देशों का भारत के बासमती चावल निर्यात में लगभग 70-72% हिस्सा है, जो वर्ष 2024-25 में लगभग 60 लाख टन था.
कंटेनर का भाड़ा हुआ दोगुना, मुनाफा घटा: बासमती चावल और अन्य कृषि उत्पादों के ईरान समेत मिडिल ईस्ट के देशों से जो ऑर्डर 28 फरवरी 2026 के पहले मिले थे, उन्हें शिप कर दिया गया था. लेकिन, युद्ध-जोखिम बीमा और शिपिंग कंटेनरों की कमी के कारण अब भाड़ा दोगुना हो गया है, जिससे प्रति कंटेनर अतिरिक्त 2,000 डॉलर यानी 1.8 लाख रुपए का बोझ पड़ रहा है. जबकि, निर्यातकों को अपनी मार्जिन मनी से देना पड़ रहा है.
कंटेनर का भाड़ा हुआ दोगुना, मुनाफा घटा: बासमती चावल और अन्य कृषि उत्पादों के ईरान समेत मिडिल ईस्ट के देशों से जो ऑर्डर 28 फरवरी 2026 के पहले मिले थे, उन्हें शिप कर दिया गया था. लेकिन, युद्ध-जोखिम बीमा और शिपिंग कंटेनरों की कमी के कारण अब भाड़ा दोगुना हो गया है, जिससे प्रति कंटेनर अतिरिक्त 2,000 डॉलर यानी 1.8 लाख रुपए का बोझ पड़ रहा है. जबकि, निर्यातकों को अपनी मार्जिन मनी से देना पड़ रहा है.किसानों को नुकसान: शिपमेंट रुकने के कारण बासमती चावल समेत अन्य कृषि उत्पादों की कीमतों में भारी गिरावट देखने को मिल रही है. चावल में करीब 600-800 रुपए प्रति कुंतल की गिरावट आ गई है, जिससे किसानों और निर्यातकों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है. निर्यात रुकने से महाराष्ट्र, कर्नाटक और अन्य राज्यों में फलों/सब्जियों की आवक बढ़ गई है और घरेलू दाम गिर गए हैं. इससे फल-सब्जी किसानों को भी नुकसान हो रहा है. इसके अलावा निर्यातकों को भुगतान में देरी का भी सामना करना पड़ रहा है.
खादी देशों को मांस का एक्सपोर्ट रुका: ईरान-इजराइल तनाव के कारण भारत का पश्चिम एशिया को होने वाला मांस और समुद्री भोजन का 16730 करोड़ रुपए (लगभग 1.81 बिलियन डॉलर) का निर्यात प्रभावित हो रहा है. ग्लोबल ट्रेड एंड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के आंकड़ों के अनुसार, भारत ने 2025 में पश्चिम एशिया को 16730 करोड़ रुपए (लगभग 1.81 बिलियन डॉलर) मूल्य की मछली, मांस और प्रोसेस्ड उत्पादों का निर्यात किया.निर्यात किए गए प्रमुख उत्पादों में ताजा या ठंडा गोमांस, जमा हुआ गोमांस, भेड़ और बकरी का मांस, झींगा जैसे क्रस्टेशियन शामिल हैं. पश्चिम एशिया को ताजा या ठंडा गोमांस का निर्यात 2025 में 1,158.39 करोड़ रुपए (139 मिलियन डॉलर) तक पहुंच गया, जो इस उत्पाद के भारत के कुल निर्यात का 97.4 प्रतिशत है. वहीं, इस क्षेत्र को जमे हुए गोमांस का निर्यात 10,500 करोड़ (1.27 अरब डॉलर) रहा, जो भारत के वैश्विक निर्यात का 28.9 प्रतिशत है. भेड़ और बकरी के मांस का निर्यात 790 करोड़ (95.2 मिलियन डॉलर) तक पहुंच गया, जिसमें भारत के कुल निर्यात का 98.9 प्रतिशत पश्चिम एशिया को गया. खाड़ी बाजारों में किसी भी प्रकार की बाधा से भारत के भैंस के मांस और पशुधन निर्यातकों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है. विशेष रूप से उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और तेलंगाना में, जहां अधिकांश प्रोसेस्ड इकाइयां हैं. यदि संघर्ष लंबा चलता है, तो व्यापार के रुकने की आशंका है.
भारत किन देशों को करता है मांस का निर्यात: भारत मध्य पूर्व के देशों को गोमांस और मुर्गी के मांस का प्रमुख रूप से एक्सपोर्ट करता है. GTRI की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत के निर्यात का 70 प्रतिशत से अधिक हिस्सा पश्चिम एशिया को जाता है. इनमें भेड़ और बकरी का मांस (98.9 प्रतिशत), ताजा या ठंडा गोमांस (97.4 प्रतिशत) शामिल है. पशु उत्पादों के निर्यात में भैंस का मांस, भेड़/बकरी का मांस, मुर्गी उत्पाद, पशु आंतें, दूध और दूध उत्पाद, शहद आदि शामिल हैं.
मुंबई पोर्ट पर 1200 करोड़ रुपए की फल-सब्जी फंसी: ईरान-इजराइल संघर्ष के कारण पश्चिम एशिया को होने वाला भारत का फल-सब्जी निर्यात भी बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है. मुंबई (JNPA) बंदरगाह पर 1,200 करोड़ रुपए से अधिक का माल 1,000 से ज्यादा कंटेनर में फंसा हुआ है. इन कंटेनर में केला, अंगूर, अनार, प्याज लोड है. जेबेल अली पोर्ट (दुबई) पर जहाजों की आवाजाही रुकी है और माल भेजने में 20-25 दिन ज्यादा लग रहे हैं. यही नहीं, "वॉर रिस्क सरचार्ज" जो 2000-4000 डॉलर तक का है, से लागत बढ़ गई है. शिपमेंट रुकने से नासिक के अंगूर और महाराष्ट्र से भेजे गए केले, प्याज और अन्य ताजी सब्जियां बंदरगाहों पर सड़ रही हैं.
फल-सब्जियों का कितना होता है निर्यात: 2024-25 के दौरान, भारत ने 15,100 करोड़ रुपए (1818.56 मिलियन अमेरिकी डॉलर) मूल्य के ताजे फल और सब्जियों का निर्यात किया, जिसमें ताजे फल और सब्जियां शामिल थीं. ताजे फल और सब्जियां प्रमुख रूप से बांग्लादेश, यूएई, इराक, नीदरलैंड, नेपाल, मलेशिया, यूके, श्रीलंका, ओमान और उज्बेकिस्तान को निर्यात किए गए.
2360 करोड़ रुपए का डेयरी प्रोडक्ट का एक्सपोर्ट प्रभावित: ईरान-इजरायल संघर्ष के कारण भारत का लगभग 281.1 मिलियन डॉलर यानी 2360 करोड़ रुपए का (28.9% कुल डेयरी निर्यात) डेयरी और प्रोसेस्ड फूड एक्सपोर्ट प्रभावित हुआ है. समुद्री मार्ग बाधित होने और बीमा/शिपिंग लागत बढ़ने से खाड़ी देशों में माल की आपूर्ति रुक गई है, जिससे डेयरी उत्पादों के निर्यात पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है.
अंडा हुआ सस्ता: मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के चलते खाड़ी देशों से निर्यात रुकने के कारण भारत में अंडे की कीमतों में गिरावट आई है. सुरक्षा चिंताओं और परिवहन मार्गों में व्यवधान के चलते संयुक्त अरब अमीरात, ओमान, कतर और बहरीन जैसे देशों के साथ व्यापार ठप हो गया है. परिणामस्वरूप, अंडों की अधिकता के कारण घरेलू अंडों की कीमतों में अचानक गिरावट आई है, जिससे उपभोक्ताओं को राहत मिली है.कर्नाटक और तेलंगाना जैसे राज्यों में अंडे की कीमतें गिरी हैं. यहां एक अंडे की कीमत 7 रुपए से गिरकर 4.60 रुपए तक पहुंच गई है. इससे उन मुर्गी पालकों के लिए चुनौतियां खड़ी हो गई हैं जो निर्यात पर बहुत अधिक निर्भर हैं.
तरबूज की कीमतों में गिरावट: पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण, मध्य पूर्वी बाजारों में निर्यात धीमा होने से भारत में तरबूज की कीमतों में लगातार गिरावट आई है. कुछ क्षेत्रों में कीमतें गिरकर 7 रुपए प्रति किलोग्राम तक हो गई हैं.
SCB मेडिकल कॉलेज में त्रासदी: आग से 10 मरीजों की मौत
16 Mar, 2026 08:31 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कटक (ओडिशा): कटक के SCB मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल के इमरजेंसी डिपार्टमेंट के ट्रॉमा केयर ICU में देर रात आग लग गई. इस घटना में 10 मरीजों की मौत हो गई है. यह घटना सोमवार सुबह करीब 2:30 बजे हॉस्पिटल की पहली मंजिल पर हुई जब अचानक आग की लपटें उठने लगीं, जिससे हॉस्पिटल परिसर में अफरा-तफरी मच गई.
सूचना मिलने पर, हॉस्पिटल की फायर यूनिट मौके पर पहुंची और तुरंत आग पर काबू पाने की कोशिश शुरू कर दी. बाद में, आग बुझाने के लिए तीन फायर टेंडर लगाए गए.
एहतियात के तौर पर, ICU में भर्ती मरीजों को तुरंत बाहर निकाला गया. 10 से अधिक गंभीर रूप से बीमार मरीजों को सुरक्षा और लगातार इलाज के लिए न्यू मेडिसिन ICU में शिफ्ट किया गया.
स्वास्थ्य सचिव, कटक के जिला कलेक्टर और DCP समेत वरिष्ठ अधिकारी स्थिति का जायजा लेने और बचाव कार्यों की निगरानी करने के लिए मौके पर पहुंचे. इमरजेंसी में मदद करने और स्थिति को संभालने के लिए हॉस्पिटल के पास की मुख्य सड़क को बंद कर दिया गया था.
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने भी अस्पताल का दौरा किया, स्थिति का जायजा लिया और घायलों से मुलाकात की.
सीएम माझी ने बताया कि आग लगने की घटना में 10 लोगों की मौत हो गई है. उन्होंने हादसे में मारे गए लोगों के परिवारों के लिए 25 लाख रुपये की अनुग्रह राशि की भी घोषणा की. घायलों से मिलने और अधिकारियों के साथ स्थिति का समीक्षा करने के बाद माझी ने कहा, "आग बिजली के शॉर्ट सर्किट से लगी थी. दुर्भाग्य से, हादसे में 10 लोगों की मौत हो गई है. उच्च स्तरीय जांच शुरू की जाएगी और नतीजों के आधार पर जरूरी कार्रवाई की जाएगी."
उन्होंने आगे कहा, "मरीजों को सुरक्षित निकालने के दौरान हॉस्पिटल के 11 स्टाफ जलने से घायल हो गए. मरने वालों के परिवार वालों को 25 लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी."
सीएम माझी ने कहा कि ट्रॉमा ICU, उसके पास वाले ICU और पहली मंजिल के वार्ड में 23 मरीजों का इलाज चल रहा था. आग में उनमें से सात की मौत हो गई. उन सभी को शिफ्ट किया गया, जिसके बाद तीन और की मौत हो गई. मेडिकल स्टाफ और सिक्योरिटी वालों ने मरीजों को बचाने में अपनी जान जोखिम में डाली; इस दौरान उन्हें भी चोटें आईं, और उनका भी इलाज चल रहा है
उन्होंने कहा कि जब हम सत्ता में आए, तो हमने विभाग को अग्नि सुरक्षा उपाय बेहतर करने के निर्देश दिए थे. इस वित्तीय वर्ष में, हमने इसके लिए 420 करोड़ रुपये का बजट रखा है. काम चल रहा है. अगले अगले वित्तीय वर्ष में, हमने इसके लिए 400 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं...मैं इस घटना की न्यायिक जांच का आदेश दे रहा हूं. इस घटना के लिए जो भी जिम्मेदार पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.
नवीन पटनायक ने संवेदना व्यक्त की
ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री और विपक्ष के नेता नवीन पटनायक ने पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की. उन्होंने ट्वीट किया, "कटक में SCB मेडिकल में आग लगने की घटना, जिसमें कई लोगों की मौत हो गई, बहुत दिल दहला देने वाली है. मैं दुखी परिवार के सदस्यों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं, साथ ही दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना करता हूं. साथ ही, मैं आग में गंभीर रूप से घायल लोगों के जल्दी ठीक होने की प्रार्थना करता हूं. मैं राज्य सरकार से सभी घायलों के लिए सबसे अच्छी मेडिकल सुविधाएं सुनिश्चित करने का आग्रह करता हूं.
सोफिया फिरदौस ने न्यायिक जांच की मांग की
घटना के बाद बारामती-कटक से कांग्रेस विधायक सोफिया फिरदौस भी मौके पर पहुंची और पीड़ित परिवारों से बात की. मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, यह बहुत दुखद घटना है. मैं उच्च स्तरीय न्यायिक जांच की मांग करती हूं और एक तय समयसीमा में कमियों को समझने और सख्त एक्शन लेने और यह सुनिश्चित करने की मांग करती हूं कि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसलिए विभाग की तरफ से उच्च स्तरीय जांच बहुत जरूरी है. उन्होंने कहा कि इस लापरवाही में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जरूरत है.
दिल्ली के नेयर बाजार में लगी भीषण आग, 50 दुकानें जलकर राख
15 Mar, 2026 06:17 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। दक्षिण दिल्ली के मशहूर नेचर बाजार में रविवार सुबह आग लगने से भारी तबाही हुई। इस भीषण आग में हस्तशिल्प और कलाकृतियों की करीब 50 दुकानें जलकर खाक हो गई हैं। दिल्ली अग्निशमन सेवा के मुताबिक आग लगने की सूचना सुबह 7:37 बजे मिली। चूंकि बाजार में ज्यादातर अस्थायी और अर्ध-स्थायी दुकानें थीं, जिनमें लकड़ी, कपड़े और हस्तशिल्प का सामान भरा था, इसलिए आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। देखते ही देखते पूरे आसमान में काले धुएं का गुबार छा गया। दमकल विभाग ने तुरंत 10 गाड़ियां मौके पर भेजीं।
मीडिया रिपोर्ट में अधिकारी के हवाले से बताया कि आग लाडो सराय क्षेत्र में अंधेरिया मोड़ के पास स्थित नेचर बाजार में लगी जहां हस्तशिल्प और अन्य सामान बेचने वाली कई अस्थायी और अर्ध-स्थायी दुकानें लगी। दमकलकर्मियों ने आग पर काबू पाने और उसे फैलने से रोकने के लिए व्यापक अभियान चलाया। इस घटना में लगभग 50 दुकानें जलकर नष्ट हो गईं। दमकलकर्मी आग को पूरी तरह बुझाने और इलाके में शीतलन अभियान चलाया। खबर लिखे जाने तक आग लगने के कारणों का अब तक पता नहीं चल पाया है। इस दौरान भीड़ को नियंत्रित करने और पुलिस अधिकारी भी मौके पर पहुंचे ।
पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान, मतदान 9, 23 और 29 अप्रैल को
15 Mar, 2026 05:17 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जानें पश्चिम बंगाल में कब हैं चुनाव
असम, केरल और पुडुचेरी में 9 अप्रैल को वोटिंग तो तमिलनाडु में 23 अप्रैल
नई दिल्ली। भारत निर्वाचन आयोग ने रविवार को पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा कर दी। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि असम, केरला, पुडुचेरी, तमिलनाडु और वेस्ट बंगाल में विधानसभा चुनाव अप्रैल में होंगे, जबकि मतगणना 4 मई 2026 को की जाएगी।
चुनाव आयोग द्वारा घोषित चुनाव कार्यक्रम के अनुसार असम, केरल और पुडुचेरी में 9 अप्रैल को एक ही चरण में मतदान होगा, जबकि तमिलनाडु में 23 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे। वहीं पश्चिम बंगाल में चुनाव दो चरणों में संपन्न होंगे, पहला चरण 23 अप्रैल को जबकि दूसरा चरण 29 अप्रैल को आयोजित किया जाएगा। सभी राज्यों के चुनाव परिणाम 4 मई को घोषित किए जाएंगे।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बताया कि इन पांच राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश में कुल 17.4 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का उपयोग करेंगे। चुनाव के लिए लगभग 2.19 लाख मतदान केंद्र बनाए गए हैं और करीब 25 लाख ईवीएम मशीनों के जरिए कुल 824 विधानसभा सीटों पर मतदान कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि चुनाव की तैयारियों की समीक्षा के लिए निर्वाचन आयोग ने हाल ही में सभी चुनावी राज्यों का दौरा किया था। इस दौरान आयोग ने विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों, जिला निर्वाचन अधिकारियों, पुलिस अधिकारियों और प्रवर्तन एजेंसियों के नोडल अधिकारियों से मुलाकात कर सुझाव लिए। इसके अलावा संबंधित राज्यों के मुख्य सचिवों, पुलिस महानिदेशकों और मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के साथ भी बैठकें आयोजित की गईं।
फेक और गलत सूचना रोकने विशेष इंतेजाम
चुनाव आयोग ने इस बार सोशल मीडिया पर फेक न्यूज और गलत सूचना को रोकने के लिए भी विशेष दिशानिर्देश जारी किए हैं। आयोग का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाए रखने के लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे।
आदर्श आचार संहिता लागू
चुनाव की घोषणा के साथ ही इन राज्यों में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। इसके तहत सरकारें नई योजनाओं की घोषणा या बड़े विकास कार्यों की शुरुआत नहीं कर सकेंगी। राजनीतिक दृष्टि से यह चुनाव काफी अहम माने जा रहे हैं। वर्तमान में पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की सरकार है, तमिलनाडु में दृविण मुनेत्रकणहम, केरल में लेफ्ट डेमो्क्रेटिक फ्रंट, असम में भारतीय जनता पार्टी और पुडुचेरी में आल इंडिया एनआर कॉंग्रेस-भाजपा गठबंधन सत्ता में है।
हरीश राणा की इच्छामृत्यु प्रक्रिया शुरू, AIIMS में बनाई गई विशेष चिकित्सक टीम
15 Mar, 2026 03:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गाजियाबाद: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद का एक परिवार अपने कलेजे के टुकड़े को खुद से दूर जाता देख रहा है। ऐसी बीमारी जिसने बेटे को बेड पर ऐसा पटका, फिर उठ न पाया। 13 सालों से पेड़ की तरह यानी वेजिटेटिव अवस्था में पड़े बेटे को देखकर एक मां का दिल भी डूब गया। बूढ़ी होती हडि्डयों में बेटे को उठाने की क्षमता नहीं बची। देखभाल करने की ताकत कम पड़ने लगी, ऐसी स्थिति में कोर्ट जाना पड़ा। जिस बेटे को नौ महीने कोख में पाला। 19 सालों तक सामने बड़ा होते देखा। उसके बचपन से लेकर किशोरावस्था और फिर युवा होने तक की सारी बातें अब उस मां की आंखों के आगे तैर रही हैं। क्योंकि, अब वह बेटा जो घर के एक बेड पर पेड़ बना पड़ा था, नहीं है। एम्स में भर्ती कराया गया है। हम बात कर रहे हैं गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन निवासी हरीश राणा की। अशोक राणा और निर्मला राणा का जीवन 13 सालों से जिस बेटे के आगे-पीछे घूमता रहा, अब वह घर में नहीं है। हरीश की इच्छामृत्यु याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद प्रक्रिया को पूरी कराने के लिए। मां भावुक है। बचपन की यादें आंखों में तैरती है तो आंसुओं की धार फूट पड़ती है। सिसकियां एक जवान बेटे के बेड पर पड़े लाचार बनने की बात करते हुए फूट जाती है।
घर में प्यारा था हरीश
हरीश राणा में घर में प्यारा था। बड़ा था तो शैतानी भी करता था। मम्मी डांटने लगती तो घर के कोने में छिप जाता था। फिर चुपचाप आता। मां के गले लग जाता। उसके चेहरे को सहलाने लगता। मां उन क्षणों को याद करते हुए भावुक होती हैं। कहती हैं कि हमारा पहला बच्चा था। सबसे अधिक लाड़-प्यार उसे ही मिला। मां कहती हैं कि वर्षों से बिस्तर पर लेटा है। शरीर पर जगह-जगह घाव हो गया है। हम रोज उसकी सफाई करते थे। छोटे बच्चे की तरह। बचपन में जैसे करते थे। अब उसकी तकलीफ नहीं देखी जाती। इसलिए, हमने कड़े दिल से उसे जाने की इजाजत दे दी। भगवान से प्रार्थना है कि मेरे बेटे को इस पीड़ा से मुक्ति दे दें।
1993 में हुआ था जन्म
हरीश का जन्म 12 सितंबर 1993 को दिल्ली में हुआ था। निर्मला देवी बताती हैं कि बेटे के पैदा होने पर घर खुशियों से गूंज उठा था। घर में गीत गाए थे। वह कभी जिद्दी नहीं रहा। समझाने पर समझ जाता था। वह हंसमुख स्वाभाव का था। खुद हंसता और दूसरों को भी हंसाता रहता था। दिल्ली से 12वीं करने के बाद अपने सिविल इंजीनियरिंग के सपने को पूरा करने चंडीगढ़ गया था।मां कहती हैं कि 21 अगस्त 2013 का दिन मेरी दुनिया को उजाड़ने वाला दिन था। बेटे के पीजी की चौथी मंजिल से गिरने की खबर मिली। डॉक्टरों ने कहा कि ठीक नहीं हो सकता है। हमारा दिल नहीं माना। हमने हर जगह इलाज कराया। व्रत, पूजा-पाठ से लेकर तमाम जतन किए, लेकिन बेटा ठीक नहीं हो सका।
मौत मांगना आसान नहीं
13 साल से जिंदगी-मौत से जूझ बेटे की देखभाल में जुटे परिवार ने काफी संघर्ष किया। इलाज में पैसे बहाए, लेकिन उम्मीद टूटती रही। आखिरकार, मां-बाप ने इच्छा मृत्यु के लिए अर्जी दायर की। हरीश के इलाज पर हर महीने करीब 70 हजार रुपये तक का खर्च आता था। इलाज में पुरखों का घर और जमीन सब बिक गई। दिल्ली स्थित तीन मंजिला मकान तक बिक गया। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पिता अशोक राणा ने कहा था कि अपनी औलाद को ऐसे पल-पल तड़पते देखना बहुत मुश्किल होता है।
एम्स में शुरू हुई प्रक्रिया
एम्स में भर्ती कराए जाने के बाद हरीश राणा की इच्छामृत्यु की प्रक्रिया को शुरू कराया गया है। एम्स प्रबंधन ने आंकोएनेस्थीसिया और पैलिएटिव केयर के विशेषज्ञ डॉक्टर के नेतृत्व में एक कमिटी बनाई है। इसमें अलग-अलग कई विभागों के डॉक्टर भी शामिल हैं। इस कमिटी की देखरेख में हरीश के स्वास्थ्य की देखभाल और सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अमल होगा। सीनियर डॉक्टर के अनुसार, पैलिएटिव केयर वार्ड में छह बेड की सुविधा है। हरीश के स्वास्थ्य का मूल्यांकन शुरू कर दिया गया है। डॉक्टर आगे की प्रक्रिया निर्धारित करेंगे।
डॉक्टर के मुताबिक, हरीश के गले में एक ट्यूब डली है। इसके माध्यम से वह सांस लेते हैं। 13 वर्ष पहले वेंटिलेटर सपोर्ट दिए जाने के दौरान यह ट्यूब डाली गई थी। इसके बाद से ही यह ट्यूब लगी हुई है। सांस लेने के लिए किसी तरह का कृत्रिम सपोर्ट नहीं दिया गया है। वह खुद से सांस ले पा रहे हैं। पेट में लगी ट्यूब के माध्यम से उन्हें पोषण दिया जाता है। साथ ही, उन्हें कैथेटर लगाया गया है। सुप्रीम कोर्ट के 11 मार्च के पैसिव यूथेनेशिया की अनुमति के तहत हरीश के जीवन रक्षक उपकरणों को चरणबद्ध तरीके से हटाया जाएगा।
एम्स में डॉक्टर और नर्सिंग कर्मचारी हरीश राणा की देखभाल कर रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि अस्पताल में उनका पैलिएटिव केयर होगा। जीवन बचाने के लिए कोई एक्टिव इलाज या वेंटिलेटर सपोर्ट उन्हें नहीं दिया जाएगा। पैलिएटिव केयर में मरीज को दर्द या किसी तरह की पीड़ा होने पर उससे राहत देना होता है। ऐसे में हरीश के कई दिनों तक एम्स में एडमिट रहने की उम्मीद की जा रही है।
मोनालिसा की शादी में PFI कनेक्शन, डायरेक्टर ने CM और PM से इंसाफ की अपील की
15 Mar, 2026 10:41 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: महाकुंभ (Mahakumbh) से लाइमलाइट में आईं मोनालिसा (Monalisa) की शादी को लेकर बड़ा बवाल मचा हुआ है. बीते दिन उन्होंने केरल में फरमान खान संग कोर्ट मैरिज की थी. मोनालिसा के इस फैसले से उनकी डेब्यू फिल्म के डायरेक्टर सनोज मिश्रा काफी गुस्से में है. डायरेक्टर ने इससे जुड़ा एक वीडियो अपने सोशल मीडिया हैंडल पर शेयर किया है.डायरेक्टर सनोज मिश्रा ने अपने सोशल मीडिया हैंडल इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया है. जिसमें उन्होंने मोनालिसा की शादी को लव जिहाद बताया है. डायरेक्टर ने वीडियो शेयर कर कैप्शन में लिखा, ‘मोनालिसा को बहकाकर जिस तरह भोले भाले बंजारों को धोखा देकर पीएफआई और कट्टरपंथी संगठनों ने केरल जाकर लव जिहाद किया है.’
‘मैं तमाशबीन नहीं बन सकता पिता जय सिंह के अनुसार लड़की नाबालिग है और झूठे कागज बनकर एक घंटे में विवाह का प्रमाणपत्र दे देना कट्टरपंथियों के मजबूत नेटवर्क को साबित करता है. मैं इन जिहादियों के षड्यंत्र को उजागर करने और बंजारा समुदाय को इंसाफ दिलाने की लड़ाई पर उनके गांव खरगोन जिले के महेश्वर के लिए आज 14 मार्च को निकल चुका हूं.’
अपने पोस्ट के अंत में डायरेक्टर ने मध्यप्रदेश के सीएम मोहन यादव, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ, पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से अपील भी की है. उन्होंने लिखा, ‘मुख्यमंत्री मोहन यादव जी से अपील है कि इस गरीब दलित समुदाय के साथ हुए अत्याचार को संज्ञान में लेकर तुरंत कानूनी कार्रवाई करने का आदेश जारी करें. साथ ही सभी सनातन धर्म गुरुओं संगठनों से अपील है कि सभी महेश्वर आकर बंजारा समुदाय को न्याय दिलाने में सहयोग करें.’
आखिर क्या है पूरा मामला?
गौरतलब है कि महाकुंभ 2025 के दौरान माला बेचने के दौरान मोनालिसा काफी वायरल हुई. इसके बाद सोशल मीडिया पर उसकी तुलना बड़ी-बड़ी एक्ट्रेसेस से की जाने लगी. इसके बाद डायरेक्टर सनोज मिश्रा ने उन्हें फिल्म ऑफर की. जिसका नाम ‘द डायरी ऑफ मणिपुर’ है. वहीं फिल्म रिलीज नहीं हुई है, एक गाने की शूटिंग अभी भी बची हुई लेकिन इस बीच मोनालिसा ने शादी कर ली और अब देखना होगा कि आगे क्या होता है. बता दें कि मोनालिसा ने अपने बॉयफ्रेंड फरमान खान संग केरल के तिरुवनंतपुरम के पास पूवर इलाके में अरुमानूर श्री नैनार देवा मंदिर में पारंपरिक हिंदू रीति-रिवाज से शादी की है.
सीमा पर पाक आतंकवादियों की फजीहत, सुरक्षा बलों ने की कामयाब कार्रवाई
15 Mar, 2026 09:37 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर के उरी सेक्टर में सेना को बड़ी सफलता मिली है. सेना ने घुसपैठ की कोशिश नाकाम कर दिया. इस दौरान हुई गोलीबारी में एक पाकिस्तानी आतंकवादी मारा गया. फिलहाल इलाके में सुरक्षा बलों का तलाशी अभियान जारी है. घटनास्थल से बड़ी मात्रा में हथियार और गोलाबारूद बरामद किए गए.
सेना ने रविवार को बताया कि उसने जम्मू-कश्मीर के उरी सेक्टर में नियंत्रण रेखा (LoC) के पास घुसपैठ की एक कोशिश को नाकाम कर दिया है, जिसमें एक पाकिस्तानी आतंकवादी मारा गया. सेना की श्रीनगर स्थित चिनार कोर ने अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट किया, 'घुसपैठ की कोशिश के बारे में जम्मू-कश्मीर पुलिस से मिली एक खास खुफिया जानकारी के आधार पर, 14-15 मार्च की दरमियानी रात को उरी सेक्टर के बुछार इलाके में एक संयुक्त अभियान शुरू किया गया.'
सेना ने बताया कि सैनिकों ने झाड़ियों में एक आतंकवादी की संदिग्ध हलचल देखी. सेना ने कहा, 'घेराबंदी को फिर से व्यवस्थित किया गया और आतंकवादी को ललकारा गया, जिसके जवाब में आतंकवादी ने अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी. इस मुठभेड़ में एक पाकिस्तानी आतंकवादी मारा गया. मौके से एके राइफल, पिस्तौल और भारी मात्रा में गोला-बारूद सहित युद्धक सामग्री बरामद की गई है.' आखिरी रिपोर्ट मिलने तक यह अभियान जारी था.
तेल, गैस के बाद अब भारत की इंटरनेट व्यवस्था को चोट पहुंच सकता हैं मिडिल ईस्ट में जारी तनाव
15 Mar, 2026 09:36 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में लगातार बढ़ते तनाव के बीच में एक नया खतरा सामने दिख रहा है, जिसका बहुत बड़ा असर भारत पर पड़ सकता है। दरअसल, तनाव का असर दुनिया की इंटरनेट व्यवस्था को भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ इलाके में संघर्ष बढ़ता है, तब उस इलाके के समुद्र के नीचे बिछी फाइबर-ऑप्टिक्स केबल्स को नुकसान पहुंच सकता है। ये वहीं केबल्स हैं, जिससे दुनिया का ज्यादातर इंटरनेट डेटा गुजरता है।
बात दें कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है। इस रास्ते से बड़ी मात्रा में तेल गुजरता है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि समुद्र की सतह के नीचे यहां से कई महत्वपूर्ण इंटरनेट केबल्स भी गुजरती हैं। ये केबल्स एशिया, पश्चिम एशिया और यूरोप को डिजिटल रूप से जोड़ती हैं। एक के अनुसार भारत से यूरोप को जोड़ने वाली कई बड़ी केबल्स इसी क्षेत्र से होकर गुजरती हैं। इसलिए यह इलाका भारत के लिए भी डिजिटल कनेक्टिविटी का बेहद अहम कॉरिडोर माना जाता है।
इंटरनेट कनेक्टिविटी को मजबूत बनाने के लिए दुनिया की बड़ी टेक कंपनियां और टेलीकॉम ऑपरेटर लगातार नए अंडरसी केबल नेटवर्क में निवेश कर रहे हैं। हाल ही में गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने नई दिल्ली की यात्रा के दौरान इंडिया-अमेरिका कनेक्ट प्रोजेक्ट की घोषणा की। इसका मकसद भारत को वैश्विक डिजिटल नेटवर्क से और मजबूत तरीके से जोड़ना है।
रिपोर्ट के मुताबिक भारत का लगभग एक-तिहाई पश्चिम दिशा की इंटरनेट ट्रैफिक इन्हीं केबल्स के जरिए गुजरती है। इसका मतलब अगर इस क्षेत्र में कोई बड़ी रुकावट आती है, तब भारत और यूरोप के बीच डेटा ट्रांसमिशन प्रभावित हो सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक इंटरनेट नेटवर्क में बैकअप सिस्टम भी मौजूद हैं।
इस पूरे मामले से जुड़े एक जानकार ने कहा, समुद्री केबल्स में रेडंडेंसी होती है। अगर एक केबल कट भी जाए, तब डेटा दूसरे रास्तों से भेजा जा सकता है, लेकिन अगर कई केबल्स एक साथ प्रभावित हो जाएं, तब बाकी रूट्स पर ज्यादा लोड पड़ जाएगा। इसके बाद इंटरनेट की स्पीड स्लो हो सकती है और सर्विस में दिक्कतें आ सकती हैं।
उन्होंने कहा कि इसका असर तुरंत दिखाई नहीं देगा। दुनिया भर में इंटरनेट सर्वर रिजर्व में रखे जाते हैं। भारत के पास भी इसतरह के सिस्टम हैं। इस कारण कम से कम एक हफ्ते तक बड़ा असर देखने को नहीं मिलेगा। इसके अलावा अटलांटिक महासागर से आने वाले केबल्स भी विकल्प के रूप में मौजूद हैं।
एक अन्य जानकार ने कहा कि, अभी तक इंटरनेट कनेक्टिविटी पर कोई असर नहीं पड़ा है, लेकिन अगर केबल्स काट दी गईं या टेलीकॉम और पावर इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला हुआ, तब स्थिति गंभीर हो सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक भारत का अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट ट्रैफिक मुख्य रूप से दो बड़े गेटवे से बाहर जाता है। एक मुंबई में और दूसरा चेन्नई में। मुंबई के रास्ते जाने वाला डेटा अरब सागर और खाड़ी क्षेत्र से होकर यूरोप तक पहुंचता है, इसलिए इस इलाके में किसी भी तरह की गड़बड़ी भारत के डिजिटल नेटवर्क को प्रभावित कर सकती है।
साइबर सिक्योरिटी विशेषज्ञ ने बताया कि दुनिया का इंटरनेट सैटेलाइट्स से नहीं बल्कि समुद्र के नीचे बिछी केबल्स से चलता है। उन्होंने कहा, दुनिया के 99 प्रतिशत से ज्यादा डेटा अंडरसी फाइबर-ऑप्टिक केबल्स से गुजरता है। यही डिजिटल अर्थव्यवस्था की असली रीढ़ हैं। साइबर सिक्योरिटी विशेषज्ञ के मुताबिक रेड सी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ के आसपास का इलाका आज दुनिया का अहम डिजिटल हाईवे बन चुका है। अगर यहां कोई रुकावट आती है, तब इंटरनेट सर्विसेज़ स्लो हो सकती हैं और ग्लोबल कनेक्टिविटी प्रभावित हो सकती है। उन्होंने चेतावनी दी कि युद्ध की स्थिति में ये केबल्स बेहद असुरक्षित हो जाती हैं। उनके मुताबिक, अब दुनिया एक नए सीबेड इंफ्रास्ट्रक्चर वॉर की तरफ बढ़ रही है। जैसे तेल पाइपलाइन और समुद्री रास्ते रणनीतिक संपत्ति माने जाते हैं, वैसे ही अब इंटरनेट केबल्स भी वैश्विक शक्ति संतुलन का अहम हिस्सा बन गए हैं।
अब ट्रैफिक जाम से मिलेगी निजात आ रही फ्लाइंग टैक्सी, 1500 किमी तक भरेगी उड़ान
15 Mar, 2026 08:33 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। तकनीक के विकास के साथ परिवहन के नए विकल्प सामने आ रहे हैं। इन्हीं में से एक है फ्लाइंग टैक्सी, जिसे भविष्य के शहरी परिवहन का अहम साधन माना जा रहा है। हाल ही में चीन में 10 यात्रियों को ले जाने में सक्षम एक इलेक्ट्रिक फ्लाइंग टैक्सी का परीक्षण किया है। वी5000 मॉडल की यह टैक्सी 5 टन माल की ढुलाई कर सकती है। यात्री वाली टैक्सी को स्काई ड्रैगन और माल ढुलाई वाली को मैट्रिक्स नाम दिया गया है। यह वर्टिकल टेकऑफ एंड लैंडिंग मोड में हेलिकॉप्टर की तरह सीधे ऊपर उड़ान भरती है। इसके लिए लंबे रनवे की जरूरत नहीं होती। इन्हें इमारतों की छतों या छोटे हेलिपैड से भी उड़ाया जा सकता है। हाइब्रिड मॉडल 1500 किमी की दूरी तय करने में सक्षम है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया के कई देश इस तकनीक पर काम कर रहे है। चीन, अमेरिका और यूरोप में इस दिशा में शोध और परीक्षण जारी है, जबकि भारत में भी शुरुआती स्तर पर काम शुरु हो रहा है। भारत में जल्द ही पहली स्वदेशी एयर टैक्सी सेवा शुरू होने की संभावना है।
आईआईटी मद्रास के सहयोग से एक कंपनी ने एक ई-विटोल विमान विकसित किया है, जिसे इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में प्रदर्शित किया गया था। 2027 में पहली एयर एम्बुलेंस सेवा शुरू करने की योजना है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले सालों में फ्लाइंग टैक्सी शहरी परिवहन की तस्वीर बदल सकती है।
भारत के महानगरों को ट्रैफिक जाम से छुट्टी देने के लिए 2026-2028 तक दिल्ली-एनसीआर, मुंबई और बेंगलुरु जैसे शहरों में इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी सेवा शुरू होने की उम्मीद है। ये टैक्सी गुरुग्राम से जेवर एयरपोर्ट का सफर मिनट में तय करेंगी। 200 मील प्रति घंटे की स्पीड वाली ये टैक्सी 10 यात्रियों को सेवा दे सकेगी और ट्रैफिक जाम से बचाएगी।
अनोखी शिल्पकला और रहस्यमय आकर्षण – किराडू मंदिर
14 Mar, 2026 11:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जयपुर। राजस्थान के बाड़मेर जिले के रेगिस्तान में स्थित किराडू मंदिर अपनी रहस्यमयता और अनोखी शैली के लिए अलग पहचाना जाता है। यह कोई साधारण मंदिर नहीं है, बल्कि पांच मंदिरों का एक समूह है, जिसमें से एक मुख्य मंदिर भगवान विष्णु को और बाकी चार महादेव को समर्पित हैं। खास बात यह है कि यह उत्तर भारत में होने के बावजूद दक्षिण भारतीय शैली में निर्मित है। किराडू मंदिर की खूबसूरती देखकर इसे राजस्थान का खजुराहो भी कहा जाता है। प्रत्येक दीवार, खंभा और छत नक्काशी से भरी हुई है, जो हजारों साल पुराने इन मंदिरों की कला और परिश्रम को दर्शाती है। इस समूह का प्रमुख मंदिर सोमेश्वर मंदिर है, जो भगवान शिव को समर्पित है, जबकि अन्य चार मंदिर भगवान विष्णु के लिए बनाए गए हैं। समय के साथ कई मूर्तियां टूट चुकी हैं, लेकिन मंदिर की भव्यता और रहस्य आज भी बरकरार है। स्थानीय लोगों का मानना है कि इस मंदिर के पीछे एक साधु का श्राप जुड़ा हुआ है।
कहा जाता है कि कई साल पहले एक साधु अपने शिष्यों के साथ किराडू आए और कुछ समय रुकने के बाद देश भ्रमण के लिए निकल पड़े। उनके शिष्य अचानक बीमार पड़ गए, लेकिन गांव के लोग मदद करने से इनकार कर गए। केवल एक कुम्हारिन ने उनकी सेवा की। जब साधु वापस आए और शिष्यों की इस हालत को देखा, तो उनका गुस्सा सातवें आसमान पर था। उन्होंने पूरे क्षेत्र पर श्राप दे दिया कि जहां मानवता का अभाव हो, वहां के लोग भी पत्थर बन जाएं। साधु ने उस कुम्हारिन को भी चेतावनी दी कि वह शाम से पहले गांव छोड़ दे और कभी पीछे मुड़कर न देखे। लेकिन कुम्हारिन ने पीछे मुड़कर देखा और वह भी पत्थर में बदल गई। तभी से कहा जाता है कि जो कोई भी किराडू मंदिर में शाम के बाद ठहरता है, वह पत्थर बन जाता है।
आज भी किराडू मंदिर एक धार्मिक स्थल के साथ-साथ ऐतिहासिक और रहस्यमय अनुभव प्रदान करता है। सुबह यहां पूरा परिसर जीवंत और चहल-पहल से भरा होता है, लेकिन जैसे ही शाम होती है, लोग जल्दी बाहर निकलने लगते हैं। कोई भी शाम के बाद मंदिर में ठहरना पसंद नहीं करता, और यह रहस्य और कहानी अभी भी स्थानीय लोगों और यात्रियों के बीच जीवित है।
जल संकट की चेतावनी: शहरों की बढ़ती मुश्किलें और भविष्य की चुनौती
14 Mar, 2026 10:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। जल संकट को लेकर हो रहे शोध और आने वाली रिपोर्ट काफी डराने वाली हैं। नीति आयोग की एक रिपोर्ट ने पहले ही आगाह किया था कि वर्ष 2030 तक भारत की लगभग 40 प्रतिशत आबादी के पास स्वच्छ पेयजल की पर्याप्त उपलब्धता नहीं होगी। दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे शहर अब दुनिया के सबसे अधिक जल-संकटग्रस्त क्षेत्रों की सूची में शामिल हो गए हैं। कई इलाकों में स्थिति इतनी विकट है कि लोग पूरी तरह से पानी के टैंकरों पर निर्भर हैं और अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए घंटों लंबी कतारों में खड़े रहने को मजबूर हैं।
हाल के वर्षों में बेंगलुरु से आई खाली बर्तनों के साथ टैंकरों का इंतजार करते लोगों की तस्वीरों ने इस समस्या की भयावहता को जगजाहिर किया है। इससे पहले वर्ष 2019 में चेन्नई भी इसी तरह के भीषण संकट का सामना कर चुका है। विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि शहरों में पानी की यह किल्लत अब केवल गर्मियों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि एक स्थायी संकट का रूप ले चुकी है। शहरी जल संकट के पीछे अनियंत्रित भूजल दोहन, जर्जर जल आपूर्ति ढांचा, झीलों-तालाबों का विलुप्त होना और तेजी से बढ़ता शहरीकरण मुख्य कारण हैं। बोरवेल के जरिए जमीन के भीतर का जल स्तर लगातार गिर रहा है, वहीं पुरानी पाइपलाइनों में रिसाव के कारण बड़ी मात्रा में पानी व्यर्थ बह जाता है।इस समस्या के समाधान के लिए स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने अर्थ्स फ्यूचर जर्नल में एक नवीन मॉडल का सुझाव दिया है। पुणे शहर के उदाहरण से यह बताया गया है कि यदि किसानों को सिंचाई के अतिरिक्त पानी को विनियमित टैंकर नेटवर्क के माध्यम से शहरी परिवारों को बेचने की कानूनी अनुमति दी जाए, तो पानी की लागत में भारी कमी आ सकती है। शोध के अनुसार, सही नीतियों के क्रियान्वयन से कुल जल आपूर्ति में मात्र एक प्रतिशत की वृद्धि करके भी हर व्यक्ति को प्रतिदिन कम से कम 40 लीटर पानी उपलब्ध कराया जा सकता है। स्पष्ट है कि जल संरक्षण और प्रभावी प्रबंधन ही इस संकट का एकमात्र स्थायी समाधान है।वैश्विक अनुमानों के अनुसार, वर्ष 2050 तक दुनिया की आधी शहरी आबादी जल संकट की चपेट में होगी, जिसमें भारतीय शहरों की संख्या सर्वाधिक हो सकती है। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के एक अध्ययन के मुताबिक, यदि वर्तमान हालात नहीं सुधरे तो कम आय वाले शहरी परिवारों को अपनी कुल कमाई का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा केवल पानी खरीदने पर खर्च करना पड़ सकता है।
जंग की राह पर ईरान: सैन्य ताकत और रणनीति का खुलासा
14 Mar, 2026 07:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में चल रही जंग ने दुनिया के सुपर पावर्स को कई सबक सिखाया है। ईरान ने अमेरिका और इजारइल के बेहद महंगे और विनाशक हथियारों को बुरी तरह तबाह कर दिया है जिसकी कल्पना किसी ने भी नहीं की थी। दुनिया के तमाम रणनीतिकार यह मानते थे कि अमेरिकी-इजराइली हमले के बाद ईरान कुछ घंटों या दिनों में सरेंडर कर देगा और युद्ध विराम की गुहार लगाएगा, लेकिन ईरान की रणनीति और सैन्य तैयारियों ने दुनिया को चौंका दिया है। इस जंग से दुनिया की तमाम बड़ी ताकतों को बड़ी सीख मिल गई है। इसमें भारत भी शामिल है।
बता दें ईरान के साथ जंग में एक सबसे बड़ी सीख यह मिली है कि मौजूदा वक्त के युद्ध को केवल घातक और विनाशक हथियारों के दम पर नहीं जीता जा सकता। अमेरिका और इजराइल के पास पांचवीं पीढ़ी के सबसे आधुनिक फाइटर जेट एफ-35 और एफ-22, पैट्रियट मिसाइल सिस्टम, थाड डिफेंस सिस्टम, बी-2 बॉम्बर जैसे कई बार घातक हथियार हैं, लेकिन ईरान की रणनीति के आगे ये हथियार पूरी तरह बेकार साबित हुए इनको ऑपरेटर करने की लागत इतनी है कि यह किसी भी बड़ी अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ सकते हैं।
अमेरिका ने ईरान के साथ जंग में यही गलती की है। ईरान ने इस जंग में पहले बेहद सस्ते ड्रोन्स और मिसाइलों से वार किए और अमेरिका ने इन ड्रोन्स को मारने के लिए बेहद महंगी मिसाइलों और डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल किया। इससे अमेरिका-इजराइल के लिए इन सस्ते ड्रोन्स को मारना बहुत महंगा साबित हुआ। इतना ही नहीं ईरान ने इजराइल और मीडिय ईस्ट के देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन से हमलों की बारिश कर दी। इससे इनको व्यापक स्तर पर मिसाइलों और डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल करना पड़ा।
अब एक रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि अमेरिका-इजराइल के पास अब अपनी डिफेंस के लिए मिसाइलें कम बची हैं। पूरी दुनिया के सामरिक मामलों के एक्सपर्ट ईरान की इस रणनीति को जबर्दस्त बता रहे हैं। यूक्रेन के साथ रूस के जंग में भी ऐसी ही स्थिति देखने को मिली थी। यूक्रेन ने सस्ते ड्रोन्स के दम पर रूस को भारी सैन्य नुकसान पहुंचाया है। कुल मिलाकर एस-400 जैसे बेहद आधुनिक डिफेंस सिस्टम से हर हवाई खतरे पर वार करना समझदारी नहीं है। एस-400 दुनिया का एक सबसे आधुनिक डिफेंस सिस्टम है और यह 400 किमी दूर के खतरों पर वार कर सकता है। इस डिफेंस सिस्टम को मुख्य रूस से फाइटर जेट्स और खतरनाक मिसाइलों को रोकने के लिए बनाया गया है।
ईरानी नाविकों की भारत से सुरक्षित वापसी, अमेरिका के बीच तनाव के दौरान दी थी पनाह
14 Mar, 2026 05:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अमेरिका। से तनाव के बीच इस महीने की शुरुआत में कोच्चि पहुंचे एक ईरानी युद्धपोत के चालक दल के 100 अधिक गैर-जरूरी नाविकों को उनके देश वापस भेद दिया गया है। हालांकि, यह युद्धपोत अभी भी दक्षिणी बंदरगाह कोच्चि पर ठहरा हुआ है। इस घटनाक्रम से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि इन नाविकों को मानवीय आधार पर भारत की मदद से शुक्रवार देर रात तुर्किये की एयरलाइंस की उड़ान से वापस भेजा गया।
ईरानी युद्धपोत को अमेरिकी पनडुब्बी ने बनाया था निशाना
बताया जा रहा है कि यह युद्धपोत (आईआरआईएस लावन) कोलंबो में ठहरा था। इसी क्षेत्र में चार मार्च को श्रीलंका के तट के पास एक अमेरिकी पनडुब्बी ने दूसरे ईरानी युद्धपोत आईआरआईएस देना को डुबो दिया था। वापस भेजे गए नाविक ईरान की नौसेना के जहाज आईआरआईएस लावन के चालक दल के सदस्य थे। यह जहाज उसी दिन कोच्चि बंदरगाह पहुंचा था, जिस दिन हिंद महासागर में नौसैनिक टकराव की घटना सामने आई थी।
आईआरआईएस में कितने नाविक हैं?
सूत्रों के मुताबिक, इस जहाज पर शुरुआत में कुल 183 लोग मौजूद थे। गैर-जरूरी नाविकों के चले जाने के बाद अब लगभग 50 नाविक ही जहाज पर बचे हैं, जो संचालन और रखरखाव से जुड़े काम संभाल रहे हैं। भारतीय अधिकारी तेहरान और वॉशिंगटन के बीच तेजी से बिगड़ती स्थिति को देखते हुए जहाज के कोच्चि पहुंचने के बाद से स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। अधिकारियों ने संकेत दिया कि कोच्चि में ईरानी युद्धपोत की मौजूदगी को सावधानी के साथ संभाला जा रहा है। साथ ही समुद्री नियमों और कूटनीतिक संवेदनशीलता का भी पूरा ध्यान रखा जा रहा है। जहाज पर मौजूद बाकी सदस्य अभी भी वहीं रह रहे हैं। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हुआ कि यह युद्धपोत भारतीय समुद्री क्षेत्र से कब रवाना होगा। समुद्री और सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे मामले और क्षेत्र की स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए हैं।
दर्दनाक हादसा टला, लिफ्ट में फंसे बच्चे के हाथ को लोगों ने बचाया
14 Mar, 2026 04:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
महाराष्ट्र। लिफ्ट में छोटे बच्चों के साथ जरा-सी लापरवाही कितनी खतरनाक हो सकती है, इसका एक मामला पुणे के दिघी इलाके में सामने आया है। यहां एक मासूम बच्ची का हाथ लिफ्ट के दरवाजे में फंस गया। हालांकि समय रहते उसका हाथ सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। जानकारी के मुताबिक, एक महिला अपनी कुछ महीने की बच्ची को लेकर लिफ्ट में जा रही थी। लिफ्ट में उनके साथ कुछ अन्य लोग भी मौजूद थे। इसी दौरान लिफ्ट का दरवाजा बंद होने लगा और बच्ची ने दरवाजे पर अपना हाथ रख दिया। जब लिफ्ट तय मंजिल पर पहुंची और दरवाजा खुलने के बाद दोबारा बंद होने लगा, तभी बच्ची का हाथ दरवाजे में फंस गया। यह देखते ही लिफ्ट में मौजूद लोग घबरा गए। सभी ने मिलकर बच्ची का हाथ निकालने की कोशिश की, लेकिन शुरुआत में हाथ आसानी से बाहर नहीं निकल पाया।
कुछ मिनटों की मशक्कत के बाद आखिरकार बच्ची का हाथ सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इसके बाद वहां मौजूद सभी लोगों ने राहत की सांस ली। पूरी घटना वहां लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। गनीमत रही कि इस हादसे में बच्ची को कोई गंभीर चोट नहीं आई। हालांकि कुछ मिनटों के लिए यह घटना वहां मौजूद सभी लोगों के लिए बेहद डरावनी बन गई थी। इस घटना के बाद लोगों ने अपील की है कि लिफ्ट का इस्तेमाल करते समय खासकर छोटे बच्चों के साथ विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। बच्चों को लिफ्ट के दरवाजों, बटन और किनारों से दूर रखना जरूरी है, क्योंकि थोड़ी-सी लापरवाही भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। अगर चाहें तो मैं इसे और ज्यादा टीवी न्यूज़ स्टाइल, एंकर कॉपी या 30-40 सेकंड की VO स्क्रिप्ट में भी बना सकता हूँ।
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