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क्रिकेट से राजनीति तक का सफर, पूर्व भारतीय खिलाड़ी अब चुनावी मैदान में
17 Mar, 2026 01:09 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता|पश्चिम बंगाल में चुनावी बिगुल बज चुका है. इस बार राज्य में दो चरणों में मतदान होने वाला है. 24 अप्रैल और 29 अप्रैल को राज्य की सभी 294 सीटों पर मतदान होना है. सभी राजनैतिक दलों ने अपने-अपने उम्मीदवारों की लिस्ट भी जारी कर दी है. भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिम बंगाल में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों के लिए उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है. इसमें पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज अशोक डिंडा भी शामिल हैं. अशोक डिंडा पर बीजेपी ने एक बार फिर भरोसा जताते हुए उन्हें इस बार भी उम्मीदवार बनाया है. अशोक डिंडा को बीजेपी ने मोयना सीट से उम्मीदवार घोषित किया है|
2021 में जीते थे चुनाव
बता दें कि इससे पहले भी उन्होंने साल 2021 में पश्चिम बंगाल की मोयना सीट से जीत दर्ज की थी और फिलहाल वह यहां से विधायक हैं. आगमी चुनाव पश्चिम बंगाल से मोयना विधानसभा सीट से उम्मीदवार अशोक डिंडा ने भारत के लिए 4 साल खेले हैं. क्रिकेट में उनका करियर ज्यादा लंबा नहीं रहा लेकिन अशोक डिंडा राजनीति में खूब नाम कमा रहे हैं. अशोक डिंडा ने साल 2009 में टीम इंडिया के लिए टी20 इंटरनेशनल में डेब्यू किया था. वहीं, 2010 में वनडे क्रिकेट में डेब्यू किया|
2013 में खेला था आखिरी मैच
साल 2013 में अशोक डिंडा ने अपना आखिरी मैच खेला था. इन चार सालों में उन्होंने 13 वनडे मैचों की 13 पारियों में गेंदबाजी करते हुए 14 विकेट लिए. इसमें उनकी बेस्ट परफोर्मेंस 2/44 रनों की रही. वहीं टी 20 क्रिकेट की बात करें तो 9 मैचों की 9 पारियों में गेंदबाजी करते हुए 17 विकेट चटकाएं थे. इसमें उनका बेस्ट प्रदर्शन 4/19 रनों का रहा|
पाकिस्तान के खिलाफ लिए थे 3 विकेट
साल 2013 में डिंडा ने पाकिस्तान के खिलाफ अपने टी20 करियर का आखिरी मैच खेला था. इस मुकाबले में उन्होंने पाकिस्तानी बल्लेबाजों की कमर तोड़ते हुए शानदार गेंदबाजी की थी और 3 विकेट चटकाए थे. हालांकि, आपको जानकर हैरानी होगी यह उनके करियर का आखिरी टी20 मैच था. इतनी शानदार गेंदबाजी के बाद भी उनको बाहर कर दिया गया और उनका करियर चौपट हो गया. फिर अशोक डिंडा को कभी वापसी करने का मौका नहीं मिला|
भ्रामक जानकारी पर CBSE का कड़ा कदम, सोशल मीडिया यूजर्स को चेतावनी
17 Mar, 2026 11:07 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने सोशल मीडिया पर परीक्षाओं और मूल्यांकन प्रक्रिया से जुड़ी भ्रामक तथा तथ्यात्मक रूप से गलत जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है. बोर्ड ने 16 मार्च 2026 को एक सर्कुलर जारी कर चेतावनी दी है कि ऐसी गतिविधियां परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता को प्रभावित करती हैं और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी. सीबीएसई के परीक्षा नियंत्रक डॉ. संयम भारद्वाज ने सर्कुलर को जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षा 2026 के मूल्यांकन के दौरान सोशल मीडिया पर अफवाहें और गलत जानकारी फैल रही है.
सीबीएसई ने सर्कुलर में कहा है कि कुछ व्यक्ति, जो मूल्यांकन प्रक्रिया में सीधे शामिल नहीं हैं या डिजिटल मूल्यांकन (ऑन स्क्रीन मार्किंग) से जुड़े हैं, सोशल मीडिया पर गलत और भ्रामक जानकारी पोस्ट कर रहे हैं. यह पोस्ट छात्रों, अभिभावकों और अन्य हितधारकों में अनावश्यक भ्रम पैदा कर रहे हैं तथा परीक्षा व्यवस्था की साख को नुकसान पहुंचा रहे हैं. बोर्ड ने कहा कि ऐसी गतिविधियां परीक्षा प्रक्रिया की गोपनीयता और निष्पक्षता को खतरे में डालती हैं.
सीबीएसई के प्रमुख निर्देश और प्रतिबंध:
सीबीएसई परीक्षाओं या मूल्यांकन प्रक्रिया से संबंधित कोई भी झूठी या भ्रामक जानकारी सोशल मीडिया पर फैलाना पूरी तरह प्रतिबंधित है.
किसी भी व्यक्ति को सीबीएसई का नाम, लोगो या सीबीएसई भवन की तस्वीरों का उपयोग करके भ्रम पैदा करने या लोगों को गुमराह करने की अनुमति नहीं है.
ऐसी गतिविधियों में शामिल पाए जाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी.
हितधारकों को सलाह दी जाती है कि वह केवल सीबीएसई के आधिकारिक चैनलों और वेबसाइट www.cbse.gov.in से जारी अपडेट्स पर ही विश्वास करें. सोशल मीडिया पर बिना सत्यापन वाली पोस्ट्स को महत्व न दें.
आधिकारिक संचार केवल बोर्ड के अधिकृत माध्यमों से ही जारी किए जाते हैं.
परीक्षा व्यवस्था की अखंडता बनाए रखने की अपील: सीबीएसई ने सभी से अपील की है कि वह परीक्षा व्यवस्था की अखंडता और गोपनीयता बनाए रखने में पूरा सहयोग करें. बोर्ड ने जोर दिया कि अवेरिफाइड जानकारी सोशल मीडिया पर अपलोड न करें, क्योंकि इससे छात्रों और अभिभावकों में अनावश्यक चिंता और भ्रम फैल रहा है.
चुनाव से पहले राजनीति में अपराध पर बड़ा सवाल
17 Mar, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पश्चिम बंगाल। चुनाव से पहले एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें बड़ा खुलासा हुआ है. इस रिपोर्ट ने बंगाल की राजनीति को लेकर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक बंगाल के 47 प्रतिशत मौजूदा विधायकों के ऊपर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं. यह सिर्फ किसी एक पार्टी के विधायकों का डेटा नहीं है, बल्कि इसमें सभी पार्टियों के विधायक शामिल हैं. बंगाल चुनाव से ठीक पहले इस रिपोर्ट ने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है. बंगाल में इस बार कुल दो चरणों में मतदान होगा, जिसका परिणाम 4 मई को आएगा।
क्या कहती है ADR रिपोर्ट?
ADR रिपोर्ट के मुताबिक, बंगाल के कुल 294 विधायकों में से 291 मौजूदा विधायकों द्वारा दिए गए हलफनामों की जांच-पड़ताल की, तो काफी चौंकाने वाले खुलासे हुए. 291 विधायकों में 136 विधायक यानी 47 प्रतिशत के ऊपर आपराधिक मामले चल रहे हैं. इतना ही नहीं 109 विधायकों के ऊपर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं. यह रिपोर्ट सिर्फ मौजूदा विधायकों के हलफनामे के आधार पर है।
8 विधायकों के ऊपर हत्या का मामला
रिपोर्ट के मुताबिक बंगाल के 294 विधायकों में 8 के ऊपर हत्या के मामले का जिक्र है, तो वहीं 29 विधायकों के ऊपर हत्या के प्रयास का मामला दर्ज है. महिलाओं के खिलाफ अपराध करने के मामले 22 विधायको पर तो वहीं दुष्कर्म से जुड़ा मामला भी एक विधायक के ऊपर दर्ज है. यानी कि गंभीर से गंभीर मामले भी विधायकों के ऊपर दर्ज हैं।
भाजपा विधायकों के ऊपर 66 प्रतिशत आपराधिक मामले
एडीआर के रिपोर्ट के अनुसार, सबसे ज्यादा मामले भले की टीएमसी के विधायकों के ऊपर दर्ज हों, लेकिन भाजपा के विधायकों के ऊपर 66 प्रतिशत मामले दर्ज हैं, जो टीएमसी से करीब 25 प्रतिशत ज्यादा है. यानी कि संख्या भले ही टीएमसी विधायकों की ज्यादा हो, लेकिन भाजपा का आपराधिक प्रतिशत काफी ज्यादा है. टीएमसी के कुल 223 विधायकों में से 92 यानी 41 प्रतिशत विधायकों के ऊपर आपराधिक मामले हैं, तो वहीं भाजपा के 64 विधायकों में से 42 विधायकों के ऊपर हलफनामें में आपराधिक मामलों का जिक्र है।
भारत में गैस का मुकाबला: जानें LPG बनाम PNG की खपत की स्थिति
17 Mar, 2026 10:07 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: भारत में घरों में खाना पकाने के लिए ज्यादातर लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) का इस्तेमाल होता है. पिछले 10 वर्षों में बड़े कल्याणकारी कार्यक्रमों और बढ़ते डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क की वजह से यह ट्रेंड और तेज हुआ है. राष्ट्रीय ऊर्जा डेटा का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि पूरे देश में LPG और पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) के इस्तेमाल में बहुत बड़ा फर्क है. हालांकि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) जैसी स्कीमों के जरिये LPG सिलेंडर दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों तक भी पहुंच गए हैं, लेकिन PNG कनेक्शन अभी भी कुछ शहरी इलाकों में ही हैं, जहां पाइपलाइन के बुनियादी ढांचे का विकास किया गया है.
एलपीजी सिलेंडर का आसानी से परिवहन किया जा सकता है और बड़े क्षेत्र में उपलब्ध है, इसके उलट PNG की सप्लाई पाइपलाइन के माध्यम से की जाती है, जिसके लिए बहुत अधिक इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होती है. यह भारत के क्लीन कुकिंग फ्यूल (स्वच्छ खाना पकाने का ईंधन) के लिए सफल कोशिश को दिखाता है, लेकिन वे यह भी दिखाते हैं कि भारत को गैस-आधारित अर्थव्यवस्था बनाने में अभी भी मुश्किल हो रही है.
पिछले 30 वर्षों में भारत में LPG की खपत में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है. इसकी वजह अर्थव्यवस्था में सुधार और नई घरेलू LPG स्कीमों के जरिये कुकिंग गैस तक पहुंच में बढ़ोतरी है. इसकी वजह भारत सरकार की नीतिगत पहलों के जरिये इन स्कीमों को बढ़ाना है.
पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल के डेटा के अनुसार, भारत में LPG की कुल खपत 1998-99 में 446,000 मीट्रिक टन (TMT) से 2025-26 तक लगभग छह गुना बढ़ने का अनुमान है.
2000 और 2010 के दशक भारत में LPG की खपत में सबसे तेजी से बढ़ोतरी वाले साल थे, क्योंकि औसत सालाना खपत 8% से 11% के बीच बढ़ी थी. PMUY स्कीम शुरू होने के साथ 2016-17 में LPG की खपत की दर में भारी बढ़ोतरी हुई, जब पूरे भारत में LPG की खपत में साल-दर-साल लगभग 10.1% की बढ़ोतरी हुई, जिसका मुख्य कारण LPG इस्तेमाल करने वाले कुल घरों की संख्या में लाखों नए घर जुड़ना था.लेकिन 2020 के बाद से LPG के इंस्टॉलेशन और इस्तेमाल में तेजी से कमी आई है, क्योंकि देश के लगभग सभी इलाकों में पहले से ही घरों में LPG कनेक्शन बांटे जा चुके हैं.PMUY से पहले, गांव के घरों में खाना पकाने के लिए लकड़ी, खेती के सामान और गोबर जैसे ईंधन पर बहुत ज्यादा निर्भरता थी, और PMUY ने कम आय वाले घरों को या तो फ्री या सब्सिडी वाले सिलेंडर के साथ मुफ्त LPG कनेक्शन देकर, गांव के किचन के लिए LPG सेवा को एक विकल्प के तौर पर देकर इस निर्भरता को पूरी तरह से बदल दिया.LPG सिलेंडर को सड़क के रास्ते देश के लगभग किसी भी हिस्से में ले जाया जा सकता है, जबकि PNG के लिए बड़े पाइपलाइन नेटवर्क, सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम और अर्बन प्लानिंग इंटीग्रेशन की जरूरत होती है.
सबसे बड़े एलपीजी उपभोक्ता आधार वाले राज्य
राज्यों में एलपीजी के उपयोग का पैटर्न भारत के जनसांख्यिकीय वितरण और कल्याण कवरेज को दर्शाता है.अकेले उत्तर प्रदेश में भारत के कुल LPG उपभोक्ताओं का लगभग 15% हिस्सा है, जो देश के सबसे अधिक आबादी वाले राज्य में LPG पर निर्भरता के स्तर को उजागर करता है.
PMUY स्कीम के तहत
उत्तर प्रदेश में 1.88 करोड़ लाभार्थी हैं.
पश्चिम बंगाल में 1.24 करोड़ लाभार्थी हैं.
बिहार में 1.18 करोड़ लाभार्थी हैं.
मध्य प्रदेश में 89 लाख लाभार्थी हैं.
राजस्थान में 74.3 लाख लाभार्थी हैं.
इन राज्यों में ग्रामीण आबादी भी काफी ज्यादा है. जनगणना के आंकड़ों के अनुसार:
उत्तर प्रदेश में ग्रामीण आबादी: 77.7%
बिहार में ग्रामीण आबादी: 88.7%
मध्य प्रदेश में ग्रामीण आबादी: 72.4%
राजस्थान में ग्रामीण आबादी: 75.1%
गांवों में ज्यादा होने की वजह से ही इन राज्यों में LPG कनेक्शन की इतनी अधिक मांग है.
ज्यादा LPG इस्तेमाल करते हैं शहरी परिवार
ग्रामीण राज्यों में LPG इस्तेमाल करने वालों की संख्या ज्यादा होने के बावजूद, आंकड़ों से पता चलता है कि शहरी परिवार काफी ज्यादा LPG इस्तेमाल करते हैं.
उदाहरण के लिए:
दिल्ली के घर औसतन 11.4 किलोग्राम प्रति महीना LPG इस्तेमाल करते हैं
उत्तर प्रदेश के घर लगभग 7.7 किलोग्राम प्रति महीना एलपीजी इस्तेमाल करते हैं
बिहार के घर लगभग 6.7 किलोग्राम प्रति महीना एलपीजी इस्तेमाल करते हैं
चूंकि एक मानक घरेलू LPG सिलेंडर में 14.2 किलो गैस होती है, इसलिए बिहार में एक घर हर महीने आधे से भी कम सिलेंडर इस्तेमाल करता है. इससे पता चलता है कि LPG कनेक्शन वाले कई ग्रामीण परिवार अभी भी पुराने ईंधन स्रोतों से खाना पका रहे हैं या सिलेंडर को लंबे समय तक इस्तेमाल कर रहे हैं. कंजम्पशन गैप PMUY लाभार्थी के डिस्ट्रीब्यूशन से काफी जुड़ा हुआ है.
चूंकि ज्यादातर PMUY कनेक्शन ग्रामीण इलाकों में हैं, इसलिए कई घरों में LPG तो है, लेकिन वे शहरी घरों की तुलना में इसका कम इस्तेमाल करते हैं, जो खाना पकाने के लिए लगभग पूरी तरह से LPG पर निर्भर हैं.गैस इस्तेमाल का पैटर्न आय के बंटवारे से प्रभावित होता है. आम तौर पर, जिन राज्यों में आय ज्यादा होती है, वहां हर घर में LPG का औसत महीने का इस्तेमाल ज्यादा होता है, जो उनकी ज्यादा खरीदने की क्षमता और LPG पर खाना पकाने की निर्भरता को दिखाता है.
जब हम हर घर में कुल LPG खपत और औसत LPG खपत की तुलना करते हैं, तो एक साफ विरोधाभास दिखता है.उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार और मध्य प्रदेश जैसे अधिक आबादी वाले और ज्यादा LPG कनेक्शन वाले राज्य, कुल खपत में सबसे ऊपर हैं; लेकिन, हर घर के हिसाब से औसत खपत में वे काफी नीचे हैं.उदाहरण के लिए, उत्तर प्रदेश में LPG की खपत सबसे अधिक 377.4 TMT प्रति महीना है; हालांकि, औसत घरेलू खपत के हिसाब से यह देश में 22वें स्थान पर है.इससे पता चलता है कि हालांकि LPG कनेक्शन बहुत बढ़ गया है, लेकिन हर घर में असल में जितनी LPG की खपत होती है, उसका भौगोलिक रूप से कोई खास मतलब या वजह नहीं है.
पूरे देश में PNG की वृद्धि स्थिर नहीं
LPG अभी भी घर में खाना पकाने के लिए इस्तेमाल होने वाला मुख्य ईंधन है; हालांकि, देश भर में CGD नेटवर्क के विस्तार को देखते हुए PNG अपनी वृद्धि में लगातार तरक्की कर रहा है.PNG की पहुंच को लेकर भारत के अलग-अलग इलाकों में मतभेद हैं.
पश्चिमी भारत सबसे आगे
पश्चिमी राज्यों में PNG अपनाने का स्तर सबसे अधिक है.
लगभग 71.8 लाख PNG कनेक्शन
LPG उपभोक्ताओं की तुलना में 15.7% पहुंच
गुजरात 39.7% PNG पहुंच के साथ सबसे आगे है, जो देश में सबसे अधिक है. गुजरात सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क अपनाने वाले शुरुआती राज्यों में से एक था.
महाराष्ट्र में भी PNG की अच्छी वृद्धि हुई है, जहां लगभग 36.17 लाख कनेक्शन हैं, जो LPG यूजर्स की तुलना में लगभग 14% पहुंच दिखाता है.
उत्तरी भारत में PNG का विस्तार
उत्तरी राज्यों में PNG की पहुंच ठीक-ठाक है.
इस इलाके में 41.37 लाख PNG कनेक्शन हैं, जो 6.1% पहुंच दिखाता है.
इस इलाके में:
दिल्ली में PNG की पहुंच लगभग 29.3% है.
उत्तर प्रदेश में सिर्फ 16.5 लाख PNG कनेक्शन हैं.
पूर्वी भारत में PNG की पहुंच सीमित
अब तक, अनुमान है कि: पूर्वी भारत में 4.48 लाख पीएनजी कनेक्शन दिए गए हैं और 1.4% पहुंच है. पश्चिम बंगाल और बिहार राज्यों में LPG के काफी यूजर हैं; हालांकि, उनके पास पाइपलाइन का इंफ्रास्ट्रक्चर सीमित है.
दक्षिण भारत
इसी तरह, दक्षिण भारत में लगभग 10.36 लाख PNG कनेक्शन हैं और 1.5% पहुंच है. हालांकि तमिलनाडु और केरल में LPG यूजर्स की संख्या काफी है, लेकिन बड़े शहरों में पाइप्ड गैस का इंफ्रास्ट्रक्चर सीमित है.
नॉर्थ-ईस्ट में PNG की पहुंच बहुत कम
नॉर्थ-ईस्ट इलाके में सिर्फ 1.2 लाख PNG कनेक्शन हैं, जो LPG कंज्यूमर्स के मुकाबले लगभग 2% है.भौगोलिक चुनौतियों और नेशनल पाइपलाइन इंफ्रास्ट्रक्चर की सीमाओं की वजह से, LPG सिलेंडर पूरे भारत में खाना पकाने के ईंधन का मुख्य जरिया बन गए हैं.
LPG इंफ्रास्ट्रक्चर में बढ़ोतरी
भारत की जनगणना के अनुसार, पिछली जनगणना के बाद से पूरे भारत में उपभोक्ताओं को LPG देने में काफी बढ़ोतरी हुई है.
अप्रैल 2014 से...
LPG कनेक्शन 14.52 करोड़ से बढ़कर 32.83 करोड़ हो गए.
LPG डिस्ट्रीब्यूटर 13,896 से बढ़कर 25,532 हो गए.
90% से अधिक नए डिस्ट्रीब्यूटर ग्रामीण इलाकों में सेवा देते हैं.
30.43 करोड़ से अधिक LPG उपभोक्त PAHAL डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर स्कीम के तहत रजिस्टर्ड हैं, जिससे टारगेटेड सब्सिडी ट्रांसफर हो पाता है.
इस बीच, 'गिव इट अप' अभियान के तहत 1.14 करोड़ से अधिक परिवारों ने अपनी मर्जी से एलपीजी सब्सिडी छोड़ दी.
उज्ज्वला परिवारों में LPG की खपत बढ़ी
सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि PMUY के लाभार्थियों के बीच LPG के इस्तेमाल में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. उज्ज्वला परिवारों में प्रति व्यक्ति LPG सिलेंडर की खपत इस तरह बढ़ी है:
2019–20 में हर साल 3.01 सिलेंडर
2023–24 में 3.95 सिलेंडर
2024–25 में 4.34 सिलेंडर (आनुपातिक)
इस स्कीम के शुरू होने के बाद से, PMUY परिवारों को लगभग 222 करोड़ LPG रिफिल डिलीवर किए गए हैं, और रोजाना लगभग 13 लाख रिफिल लिए जा रहे हैं.
ऊर्जा सुरक्षा की चिंताएं और होर्मुज कारक
भारत के LPG विस्तार ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति (Global Energy Supply) में रुकावटों का खतरा भी बढ़ा दिया है.भारत की कुल LPG जरूरतों का लगभग 60% आयात किया जाता है, जिसमें से 90% होर्मुज स्ट्रेट से होकर आता है, जो दुनिया में तेल व्यापार का एक बड़ा मार्ग है.2024 में हर दिन लगभग 20 मिलियन बैरल कच्चा तेल होर्मुज स्ट्रेट से ट्रांसपोर्ट किया गया; यह मात्रा दुनिया के कुल पेट्रोलियम तरल पदार्थों (पेट्रोल, डीजल, LPG) की खपत का लगभग 20% है. इस क्षेत्र से कच्चे तेल के प्रवाह में कोई भी रुकावट शिपमेंट में देरी, माल ढुलाई और इंश्योरेंस कॉस्ट में बढ़ोतरी, या फ्यूल सोर्स मिलने में देरी का कारण बन सकती है.भारत के लिए ऐसी बाधाओं का जोखिम खास तौर पर ज्यादा है, क्योंकि LPG एक बहुत जरूरी ईंधन है जिसका इस्तेमाल देश के करोड़ों घरों में खाना पकाने के लिए किया जाता है.
गैस-आधारित अर्थव्यवस्था में बदलाव
साथ ही, भारत अपने प्राकृतिक गैस इंफ्रास्ट्रक्चर को विकसित करने में निवेश कर रहा है ताकि वह अपने ऊर्जा के स्रोतों को आयातित LPG से हटाकर गैस-आधारित अर्थव्यवस्था की ओर ले जा सके.
मुख्य विकास में शामिल हैं:
भारत में चालू गैस पाइपलाइन की लंबाई 15,340 किलोमीटर (2014) से बढ़ाकर लगभग 25,000 किमी (2024) करना. कम से कम 10,800 किमी नई पाइपलाइनें जोड़ी जाएंगी. 307 भौगोलिक क्षेत्रों में सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन के लिए पाइप की इजाजत है. पाइपलाइनों के टैरिफ भी एक जैसे किए जाएंगे ताकि उन्हें सस्ता और उपलब्ध बनाया जा सके. इन उपायों का उद्देश्य बड़े डिमांड सेंटर को जोड़ना और समय के साथ PNG को बड़े पैमाने पर अपनाना है.
डुअल एनर्जी ट्रांजिशन चुनौती
आंकड़े भारत के घरेलू ऊर्जा बदलाव में एक दोहरी चुनौती को दिखाते हैं. एक तरफ, मजबूत कल्याणकारी कार्यक्रम और लचीली वितरण प्रणाली की वजह से LPG लगभग सभी तक पहुंच गई है. दूसरी तरफ, क्योंकि भारत अभी भी अपना PNG इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ा रहा है, जिसका ज्यादातर हिस्सा अभी मुख्य रूप से भारत के शहरी क्षेत्रों में विकसित किया गया है; असल में यह एक टू-स्पीड ट्रांजिशन है जहां ज्यादातर ग्रामीण/अर्ध-शहरी इलाके खाना पकाने के लिए LPG का इस्तेमाल करेंगे, जबकि अधिक विकसित, शहरी इलाकों में PNG को अपनाने की रफ्तार धीमी होगी.
इस बीच, आयातित LPG पर भारत की निर्भरता भू-राजनीति बाधाओं या समुद्री व्यापार मार्ग पर रुकावटों के रूप में भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बड़ा जोखिम पैदा करती है.
भारत को मिली राहत, 'शिवालिक' LPG जहाज ने 40 हजार टन गैस मुंद्रा पोर्ट पर उतारी
17 Mar, 2026 09:54 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कच्छ (गुजरात) : मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच भारतीय जहाज 'शिवालिक' 40,000 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर सोमवार को गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पर सुरक्षित पहुंच गया. यह जहाज होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित निकलने के बाद पोर्ट पर पहुंच गया.
इस बारे में नई दिल्ली में पश्चिम एशिया के हाल के डेवलपमेंट्स पर पत्तन, पोत परिवहन और जहाजरानी मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने बताया, “शिवालिक एलपीजी कैरियर, जो फारस की खाड़ी से रवाना हुआ था, होर्मुज स्ट्रेट पार कर भारत की ओर आ चुका है. कार्गो के डिस्चार्ज में कोई देरी न हो, इसके लिए पोर्ट पर डॉक्यूमेंटेशन और प्रायोरिटी बर्थिंग का इंतज़ाम कर लिया गया है."
जहाजरानी मंत्रालय के अधिकारी ने आगे कहा कि एलपीजी ले जाने वाला एक और भारतीय जहाज 'नंदा देवी' मंगलवार आएगा.
सिन्हा ने कहा कि भारतीय झंडे वाला जहाज, 'जग लाडकी', जो यूएई से लगभग 81,000 टन मुरबन कच्चा तेल लेकर निकला था, सुरक्षित रूप से भारत के रास्ते में है. अधिकारी ने कहा कि फ़ारस की खाड़ी इलाके में सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं और पिछले 24 घंटों में किसी घटना की खबर नहीं है. इसलिए, अब फारस की खाड़ी में भारतीय झंडे वाले 22 जहाज बचे हैं, जिनमें कुल 611 नाविक सवार हैं.
इससे पहले, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने तेहरान के साथ सीधी बातचीत को होर्मुज जलडमरूमध्य से समुद्री यातायात फिर से शुरू करने का सबसे अच्छा तरीका बताया था, क्योंकि भारत पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अपनी ऊर्जा सुरक्षा को बचाना चाहता है.
फाइनेंशियल टाइम्स यूके को दिए एक इंटरव्यू में, केंद्रीय मंत्री ने कहा कि नई दिल्ली अभी ईरान के साथ इस जरूरी पानी के रास्ते को फिर से खोलने में मदद करने के लिए बातचीत कर रहा है, जो दुनिया के तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा संभालता है.
उन्होंने कहा कि इन बातचीत से पहले से ही कुछ नतीजे मिल रहे हैं, जिससे पता चलता है कि भारत को तेहरान से अलग होने के बजाय तर्क करना और कोऑर्डिनेट करना ज़्यादा असरदार लगता है. जयशंकर ने कहा, "निश्चित रूप से, भारत के नजरिए से, यह बेहतर है कि हम तर्क करें और हम तालमेल बिठाएं और हमें समाधान मिले, न कि ऐसा न हो. हालांकि यह एक अच्छा डेवलपमेंट है, लेकिन बातचीत जारी है क्योंकि इस पर लगातार काम हो रहा है."
मंत्री ने हाल ही में शिवालिक और नंदा देवी से गुजरने को इस कूटनीतिक रणनीति को प्रैक्टिकल सफलता बताया. टैंकर लगभग 92,712 मीट्रिक टन लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) ले जा रहे थे.हालांकि, जयशंकर ने साफ किया कि सभी भारतीय झंडे वाले जहाजों के लिए अभी तक कोई औपचारिक "ब्लैंकेट अरेंजमेंट" नहीं बनाया गया है. उन्होंने बताया कि जहाजों के ट्रांज़िट को अभी "केस-बाय-केस बेसिस" पर मैनेज किया जा रहा है.
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि होर्मुज का रास्ता "हमारे दुश्मनों, हमारे खिलाफ यह कायरतापूर्ण हमला करने वालों और उनके साथियों के लिए बंद है."
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि इस खास जलमार्ग से जहाजों का गुजरना खास हालात में होगा, क्योंकि उन्होंने इसे इजराइल और यूएस द्वारा इस इलाके में पैदा की गई असुरक्षा बताया है. उन्होंने यह भी कहा कि ईरान की सेना इस रास्ते को कंट्रोल करती है और कोई भी देश इसका इस्तेमाल ईरान पर हमला करने के लिए नहीं कर सकता.
उन्होंने कहा कि एक तटीय देश होने के नाते, ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य में जरूरी कदम उठाने का अधिकार है ताकि राष्ट्रीय सुरक्षा पक्की हो सके और हमलावरों को जलमार्ग का गलत इस्तेमाल करने से रोका जा सके.
बघाई ने कहा कि ईरान ऐतिहासिक रूप से स्ट्रेट से सुरक्षित रास्ते का गार्डियन रहा है, लेकिन उन्होंने मौजूदा हालात बनाने के लिए अमेरिका और इजराइल को दोषी ठहराया. इस बीच, जैसे ही पश्चिम एशिया में लड़ाई अपने तीसरे हफ़्ते में पहुंच रही है, यूएस और इजराइली सेनाएं ईरान पर बमबारी जारी रखे हुए हैं, जबकि ईरानी जवाबी हमले भी जारी हैं, और कई इज़राइली शहरों में नुकसान की खबर है.
भीषण सड़क दुर्घटना: हनुमानगढ़ में बस-ट्रक आमने-सामने, 5 की जान गई
17 Mar, 2026 09:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हनुमानगढ़ : राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में मंगलवार को एक दर्दनाक सड़क हादसा सामने आया है. रावतसर थाना क्षेत्र के अंतर्गत मेगा हाईवे पर बरमसर के पास एक यात्री बस और ट्रक के बीच भीषण भिड़ंत हो गई. यह टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बस का एक हिस्सा पूरी तरह से पिचक गया, जिससे मौके पर ही 5 यात्रियों की दर्दनाक मौत हो गई. रावतसर SDM संजय कुमार ने हादसे कि पुष्टि करते हुए बताया कि हादसे में 5 लोगों कि मौत हो चुकी है, 3 गंभीर घायलों को हनुमानगढ़ जिला अस्पताल रेफर किया गया है, 6 लोगों का रावतसर अस्पताल मे ही इलाज चल रहा है.
मौके पर मची अफरा-तफरी : जानकारी के अनुसार, यात्री बस श्रीगंगानगर से जयपुर की ओर जा रही थी. जैसे ही बस बरमसर के पास पहुंची, सामने से आ रहे एक ट्रक से उसकी सीधी भिड़ंत हो गई. हादसे के बाद यात्रियों में चीख-पुकार मच गई और हाईवे पर लंबा जाम लग गया. सूचना मिलते ही रावतसर पुलिस और प्रशासनिक अमला तुरंत मौके पर पहुंचा और स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को बस से बाहर निकाला.
हादसे की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम संजय कुमार और पुलिस के आला अधिकारी रावतसर ट्रोमा सेंटर पहुंचे. अस्पताल में घायलों का उपचार जारी है, जहां चिकित्सकों ने 3 लोगों की हालत नाजुक बताते हुए उन्हें उच्च चिकित्सा केंद्रों के लिए रेफर कर दिया है. पुलिस अब मृतकों की शिनाख्त करने और हादसे के सटीक कारणों का पता लगाने में जुटी है.
नेपानगर में कागज मिल की आवाज फिर गूंजी, बॉयलर लाइट अप के साथ परीक्षण सफल
17 Mar, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बुरहानपुर : नेपानगर स्थित एशिया की सबसे बड़े और पुराने अखबारी कागज कारखाने नेपा लिमिटेड मिल सोमवार को फिर शुरू कर दी गई. केंद्रीय भारी उद्योग मंत्रालय (MHI) की आर्थिक सलाहकार डॉ. रेणुका मिश्रा, स्वतंत्र निर्देशक सीए मिलिंद कनाड़े ने बॉयलर लाइट-अप के साथ मिल संचालन की प्रकिया शुरू कराई. उनकी मौजूदगी में सफल ट्रायल किया गया और नेपा मिल में पेपर मशीन से उत्पादन शुरू किया.
सफल ट्रायल के बाद मिल के अधिकारियों सहित कर्मचारियों में उत्साह देखा गया, यह दृश्य देखते ही सभी के चेहरे खुशी से खिल उठे, इस दौरान कर्मचारियों ने अपनी खुशी जाहिर की, अब इस मिल के पूर्णजीवित होने की उम्मीद जाग उठी है.
कई सालों से बंद पड़ी थी मिल
लंबे समय बाद ट्रायल ऑपरेशन के तहत बॉयलर लाइट-अप कर मिल संचालन की प्रक्रिया का सफल परीक्षण हुआ, मिल की उंची चिमनी से धुआं उठा और पेपर मशीनों ने उत्पादन की प्रारंभिक प्रक्रिया शुरू की, तो क्षेत्र में खुशी का माहौल बन गया. नेपा मिल में कई सालों से बंद पड़ी मशीनों को चालू किया गया, जैसे ही कर्मचारियों के कानों में मशीनों की आवाज गूंजी तो पुरानी यादें ताजा हो गईं.
हजारों परिवारओं को मिलेगा रोजगार
जनसंपर्क अधिकारी संदीप ठाकरे ने खुशी जाहिर करते हुए कहा, '' एशिया की सबसे बड़ी और पुरानी अखबारी कागज वाली नेपा मिल न सिर्फ एक औद्योगिक उपक्रम है, बल्कि हजारों परिवारों की आजीविका का प्रमुख साधन भी है. केंद्रीय भारी उद्योग मंत्रालय की आर्थिक सलाहकार डॉ. रेणुका मिश्रा और स्वतंत्र निदेशक सी.ए मिलिंद कनाडे ने नेपा लिमिटेड का दौरा किया, उन्होंने उत्पादन प्रक्रिया का बारीकी से निरीक्षण किया, इसके अलावा नवीनीकृत संयंत्रों की कार्यप्रणाली का भी जायजा लिया है.''
75 साल पुरानी मिल को मिला जीवन दान
जनसंपर्क अधिकारी संदीप ठाकरे के मुताबिक, '' 23 अगस्त 2022 को तत्कालीन केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री डॉ. महेंद्रनाथ पांडेय ने मिल में नवीनीकृत संयंत्रों का शुभारंभ किया था, करीबन 75 साल पुरानी यह मिल एशिया की सबसे बड़ी और पहली मिल में शुमार है, यही वजह है कि नेपा मिल पहली न्यूजप्रिंट कागज मिल भी मानी जाती है, खास बात यह है कि साल 1995 में गुलाबी समाचार पत्र कागज पेश करने का श्रेय भी इसी को जाता है.
वीआईपी दर्शन पर रोक और मोबाइल-हथियार प्रतिबंध के साथ राम मंदिर में सुरक्षा बढ़ाई गई
16 Mar, 2026 11:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अयोध्या। श्रीराम मंदिर में 19 मार्च राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू राम मंदिर परिसर में श्री राम यंत्र की स्थापना और वैदिक अनुष्ठानों में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी। यह कार्यक्रम चैत्र नवरात्रि के पहले दिन (वासंतिक नवरात्र) और हिंदू नववर्ष (वर्ष प्रतिपदा) के अवसर पर आयोजित हो रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहेंगे, जिससे भारी भीड़ की उम्मीद है।
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा के लिए विशेष व्यवस्थाएं की हैं। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के मुताबिक 19 मार्च को वीआईपी पास या विशेष दर्शन की सुविधा उपलब्ध नहीं होगी। केवल आमंत्रित अतिथियों को ही निर्धारित रास्ते (रंगमहल बैरियर/क्रासिंग वन) से प्रवेश मिलेगा। वहीं, आम श्रद्धालुओं के लिए दर्शन सुबह छह बजे से देर शाम तक निर्बाध रूप से चलते रहेंगे। किसी भी तरह की बाधा नहीं आएगी। सुरक्षा के मद्देनजर मंदिर परिसर में मोबाइल फोन लेकर जाने पर प्रतिबंध लगाया गया है। इससे भक्त पूरी तरह भक्ति में लीन रह सकें और सुरक्षा मजबूत हो। यदि कोई व्यक्ति अपने साथ सिक्योरिटी गार्ड लाता है, तो उन्हें भी परिसर में एंट्री नहीं मिलेगी। परिसर में लाइसेंसी रिवॉल्वर, तलवार, बंदूक आदि ले जाना मना है। हालांकि, सिख समुदाय के सदस्यों को कानूनी रूप से अनुमत छोटा कृपाण (गले में पहना हुआ) रखने की छूट रहेगी। आमंत्रित अतिथियों के पास व्यक्तिगत होंगे; इन्हें किसी और को सौंपा नहीं जा सकेगा।
ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि कार्यक्रम में करीब 3500-5000 लोग शामिल होंगे, जिनमें यूपी-उत्तराखंड के निधि समर्पण अभियान के कार्यकर्ता, विश्व हिंदू परिषद के 45 पदाधिकारी, लगभग 350 संत और मंदिर निर्माण में योगदान देने वाले श्रमिक शामिल हैं। राम मंदिर आंदोलन के कई पुराने सहयोगियों को इस बार निमंत्रण नहीं दिया गया है। भक्तों की सुविधा के लिए नवरात्रि व्रत रखने वाले भक्तों के लिए परिसर में फल, मखाना, मूंगफली, आलू के चिप्स जैसे उपवास-अनुकूल भोजन उपलब्ध होगा। साथ ही पीने का पानी और शौचालयरू पर्याप्त व्यवस्था की गई है। ट्रस्ट का कहना है कि ये कदम भक्तों की सुरक्षा, व्यवस्था और भक्ति के निर्विघ्न अनुभव के लिए उठाए गए हैं। राष्ट्रपति के दौरे के दौरान मंदिर परिसर में वैदिक विद्वानों द्वारा अनुष्ठान होंगे, और श्रमिकों को सम्मानित किया जाएगा। यह दिन अयोध्या के लिए बेहद खास होगा, जहां लाखों श्रद्धालु रामलला के दर्शन के लिए पहुंच सकते हैं।
चित्तौड़गढ़ किले से योगी की हुंकार.............क्या खिलजी, बाबर, औरंगजेब के वंश का कोई अस्तिव दिखाता
16 Mar, 2026 09:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चित्तौड़गढ़। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जौहर मेला के मौके पर राजस्थान के चित्तौड़गढ़ किला में आयोजित कार्यक्रम में राजस्थान की वीर भूमि और उसके ऐतिहासिक गौरव की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि जब भी वे इस पवित्र भूमि को देखते हैं, तब उन्हें एक प्रसिद्ध पंक्ति याद आती है—“यह एकलिंग का आसन है, इस पर न किसी का शासन है। इस कथन के माध्यम से उन्होंने मेवाड़ की स्वतंत्रता, स्वाभिमान और शौर्य की परंपरा को रेखांकित किया।
अपने संबोधन में योगी ने कहा कि आज अलाउद्दीन खिलजी और उसके वंश के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। इसतरह बाबर, औरंगजेब और अकबर के वंश का कोई स्पष्ट अस्तित्व दिखाई नहीं देता, जबकि महाराणा प्रताप की वंशावली आज भी जीवित है और हमारे समाज में सम्मानित है। उन्होंने कहा कि इसी प्रकार रानी पद्मिनी (पद्मावती) की परंपरा भी आज हमारे सामने प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है।
सीएम योगी ने कहा कि राजस्थान की वीर भूमि से पूरे देश को प्रेरणा मिलती है। उन्होंने महाराणा सांगा, महाराणा कुंभा और बप्पा रावल जैसे महान योद्धाओं का उल्लेख कर कहा कि इनकी वीरता और बलिदान की परंपरा को हर भारतीय नमन करता है। उनके अनुसार, देश के किसी भी कोने—उत्तर, दक्षिण, पूर्व या पश्चिम—में भारत के लोग इन महान वीरों की गाथाओं से प्रेरणा लेते हैं।
अपने भाषण में मुख्यमंत्री ने यूपी में कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा के मुद्दे पर भी बात की। उन्होंने कहा कि जब उत्तर प्रदेश में उनकी सरकार बनी, तब उन्होंने प्रदेशवासियों से वादा किया था कि अपराध और अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति रहेगी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि कोई व्यक्ति किसी बहन या बेटी की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने की कोशिश करेगा, तब उस अपराधी को कड़ी सजा दी जाएगी।
योगी ने कहा कि आज उत्तर प्रदेश में 25 करोड़ की आबादी होने के बावजूद कानून-व्यवस्था में बड़ा सुधार हुआ है। पहले कई लड़कियों को पढ़ाई के लिए दूर रिश्तेदारों के यहां रहना पड़ता था, लेकिन अब वे अपने घर से ही 5-10 किलोमीटर दूर स्कूल या कॉलेज जा रही हैं। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में महिलाएं अब रात की शिफ्ट में भी कार्यालयों और कारखानों में काम कर सुरक्षित अपने घर लौट रही हैं, जो महिला सुरक्षा में सुधार का बड़ा उदाहरण है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में जो सकारात्मक परिवर्तन दिखाई दे रहा है, वह नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में संभव हुआ है। योगी के अनुसार, इस परिवर्तन के पीछे राजस्थान की वीर भूमि की प्रेरणा भी महत्वपूर्ण है। योगी ने कहा कि चित्तौड़गढ़ किला केवल पत्थरों से बना एक किला नहीं है, बल्कि यह भारत की अस्मिता और गौरव का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जब भी भारत संकट में होता है या युवाओं को प्रेरित करने की बात आती है, तब लोगों के मन में अक्सर तीन महान नाम आते हैं, महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी महाराज और गुरु गोविंद सिंह। ये सभी महानायक भारत के शौर्य, साहस और राष्ट्रभक्ति के प्रतीक हैं, जिनकी गाथाएं आज भी देशवासियों को नई ऊर्जा और प्रेरणा प्रदान करती हैं।
सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली, हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने भी याचिका की डिस्पोज
16 Mar, 2026 08:02 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
एक ही दिन सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में दायर की गई थी याचिका, सिंगल बेंच में सुनवाई के निर्देश; कंट्री लिकर टेंडर पर विवाद जारी
मध्यप्रदेश में कंट्री लिकर सप्लाई टेंडर को लेकर चल रहे विवाद के बीच याचिका दायर करने वाले डिस्टलरीज समूह को अदालतों से राहत नहीं मिल सकी। सूत्रों के अनुसार मामले में पहले सर्वोच्च न्यायालय में याचिका लगाई गई, जहां से इसे यह कहते हुए वापस भेज दिया गया कि मामले की सुनवाई हाईकोर्ट की सिंगल बेंच द्वारा ही की जाएगी। इसके बाद मामला हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच (DB) के समक्ष भी पहुंचा, लेकिन वहां भी याचिका का निराकरण कर दिया गया और स्पष्ट किया गया कि प्रकरण की सुनवाई सिंगल बेंच में ही होगी। बताया जा रहा है कि याचिका लगाने वाले डिस्टलरीज और उनके मालिकों को अंततः पीछे हटना पड़ा। सूत्रों का यह भी दावा है कि इस मामले से जुड़े कई तथ्यों की जानकारी भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) और मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश तक भी पहुंचाई गई थी। बताया जा रहा है कि याचिका 09 मार्च को एक ही दिन सर्वोच्च न्यायालय और हाईकोर्ट दोनों जगह दायर की गई थी। इस बीच आबकारी आयुक्त द्वारा मध्यप्रदेश के 55 जिलों में अरबों रुपये के कंट्री लिकर सप्लाई टेंडर की तारीख बढ़ा दी गई है, जिससे शराब कारोबार में हलचल और तेज हो गई है।
दो न्यायाधीश का मामले से अलग होना ऐतिहासिक
हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान दो न्यायाधीशों ने इस मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग कर लिया था, जबकि तीसरे न्यायाधीश ने याचिकाकर्ता को कोई अंतरिम राहत देने से इंकार कर दिया। अदालत ने राज्य शासन को दो सप्ताह के भीतर जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं, जिसमें से लगभग एक सप्ताह का समय बीत चुका है।
(MPSIDC) के अरबों रुपये तथा विभाग के करोड़ों रुपये बकाया बताए जा रहे है
सूत्रों के अनुसार याचिका से जुड़े डिस्टलर पर एमपीएसआईडीसी (MPSIDC) के अरबों रुपये तथा विभाग के करोड़ों रुपये बकाया बताए जा रहे हैं। साथ ही उन पर ब्लैकलिस्टेड और सजा प्राप्त होने के आरोप भी चर्चा में हैं। वहीं यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि कुछ अधिकारियों द्वारा कथित रूप से एक निजी कंपनी के पक्ष में खड़े होने की शिकायत लोकायुक्त तक पहुंचाई गई है।
जी एस टी चोरी में गए थे जेल
सूत्रों का कहना है कि संबंधित कंपनी के मालिकों पर पहले भी फर्जीवाड़ा कर टैक्स चोरी करने के मामले दर्ज हो चुके हैं और उन्हें जेल भी जाना पड़ा था। इतना ही नहीं, आरोप है कि वे अक्सर आबकारी आयुक्त के कैंप कार्यालय भोपाल में देखे जाते रहे हैं। सूत्रों के अनुसार एक बार कैंप कार्यालय से हड़बड़ी में निकलने का उनका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसके बाद यह मामला और ज्यादा चर्चा में आ गया।
20 मार्च को होगी सुनवाई
फिलहाल इस पूरे मामले में हाईकोर्ट की सिंगल बेंच में आगे की सुनवाई और शासन के जवाब का इंतजार किया जा रहा है, जिससे मध्यप्रदेश के शराब कारोबार से जुड़े इस बड़े विवाद पर अगला फैसला तय होगा।
3 कांग्रेस और 1 RJD MLA राज्यसभा चुनाव में गैरहाजिर, तेजस्वी की मुश्किल बढ़ी
16 Mar, 2026 05:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना। चुनाव आयोग ने 16 मार्च को 10 राज्यों में राज्यसभा चुनाव कराने की घोषणा की थी. आज सोमवार को 37 सीटों पर चुनाव होना है, लेकिन इसमें 26 सीटों पर निर्विरोध उम्मीदवार जीत गए हैं. बिहार में राज्यसभा की कुल 5 सीटें हैं, जिसको लेकर कशमकश जारी है. 4 सीटों पर एनडीए गठबंधन की जीत तय मानी जा रही है, तो वहीं 5वीं सीट पर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों संघर्ष कर रहे हैं. इसी बीच एक ऐसी खबर आई, जो विपक्ष को हैरान कर देने वाली है. इसके साथ ही एक सियासी बयानबाजी को भी जन्म दे दिया है। जानकारी के अनुसार, राज्यसभा चुनाव के लिए बिहार में 9 बजे से शुरू हुई वोटिंग में अब तक सभी विधायकों ने मतदान कर दिया है, सिर्फ विपक्ष के 4 विधायकों को छोड़कर. ये चारों विधायक मतदान के एक दिन पहले से ही पार्टी से संपर्क तोड़ चुके हैं. यानी 4 विधायकों ने मतदान नहीं किया. यहां जानते हैं, उन चारों विधायकों के बारे में, जिन्होंने मतदान नहीं किया।
मनोज विश्वास
मनोज विश्वास बिहार के फारबिसगंज से विधायक हैं, जो कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे. मनोज की पहचान युवा नेता के रूप में उभरी है. मतदान के एक दिन पहले जब सभी विपक्ष के विधायकों को पटना के एक होटल में एकत्रित होने के लिए बुलाया गया, तो मनोज अनुपस्थित रहे. इसी दौरान से तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे थे. लेकिन आज राज्यसभा चुनाव में मतदान करने के लिए नहीं पहुंचना, विपक्ष के लिए चिंता बढ़ा दी है।
मनोहर प्रसाद
मनोहर प्रसाद भी कांग्रेस पार्टी से विधायक हैं. जो कटिहार जिले की मनिहारी सीट से विधानसभा पहुंचे थे. मनोहर प्रसाद की पहचान जमीनी नेता के तौर पर है, लेकिन राज्यसभा चुनाव के लिए विधानसभा न पहुंचना पार्टी के लिए चिंता बढ़ा दी है।
सुरेंद्र कुशवाहा
सुरेंद्र कुशवाहा का बिहार की राजनीति में अच्छा खासा प्रभाव माना जाता है. सुरेंद्र वाल्मीकिनगर से कांग्रेस के विधायक हैं. लेकिन कांग्रेस पार्टी के समर्थित आरजेडी प्रत्याशी के लिए वोट देने नहीं पहुंचे. यानी कांग्रेस पार्टी के कुल तीन विधायक मतदान देनें नहीं पहुंचे हैं।
फैसल रहमान
फैसल रहमान इकलौते ऐसे विधायक हैं, जो आरजेडी के टिकट पर विधायक बनने के बाद भी मतदान देते समय फरार हैं. फैसल रहमान ढाका से विधायक हैं. फैसल रहमान की अनुपस्थिति ने न सिर्फ आरजेडी, बल्कि इंडिया गठबंधन की चिंता बढ़ा दी है।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने आर्मेनिया को किया थैंक यू, ईरान से लौटे 550 से ज्यादा भारतीय
16 Mar, 2026 04:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ईरान। मिडिल ईस्ट में बढ़े तनाव के बीच भारत ने ईरान से 550 लोगों को बाहर निकाला है. इसकी जानकारी भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने दी है. मिडिल ईस्ट जहां ईरान और इजरायल के बीच जंग छिड़ी है. इस दौरान ईरान से सुरक्षित भारत वापस लाना किसी चुनौती से कम नहीं है. ईरान से सुरक्षित वापस लाना भारत सरकार का यह कदम दिखाता है कि वे अपने देश के नागरिकों के लिए कितने तत्पर हैं। भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “ईरान से अब तक 550 से अधिक भारतीय नागरिकों की सुरक्षित निकासी में सहयोग देने के लिए आर्मेनिया सरकार और वहां की जनता का धन्यवाद. इन चुनौतीपूर्ण समय में उनके सहयोग के लिए हम आभारी हैं”।
28 फरवरी से जंग जारी
दरअसल, इन दिनों मिडिल ईस्ट में अमेरिका और इजरायल के हमले से हालात काफी गंभीर बने हुए हैं. ईरान भी जवाबी कार्रवाई देने में पीछे नहीं हट रहा है, लगातार हवाई हमले और बमबारी जारी रखे हुए है. 28 फरवरी को शुरू हुए इस युद्ध में हजारों की तादात में भारतीय फंसे हुए हैं, जिन्होंने भारत सरकार से वतन वापसी की गुहार लगाई थी. ईरान में फंसे भारतीयों के संपर्क में लगातार भारतीय दूतावास और कई अधिकारियों की टीमें जुटी थी. इधर विदेश मंत्री भी लगातार अपने नागरिकों को वापस लाने के लिए बातचीत कर रहे थे. इसी बीच विदेश मंत्री ने बताया कि ईरान से 550 लोगों को निकालकर भारत लाया गया है।
एस जयशंकर ने कई बार विदेश मंत्री से की थी बात
विदेश मंत्री ने बताया कि आर्मेनिया सरकार ने भारतीयों को सुरक्षित स्वदेश लाने में काफी मदद की. इसका फायदा रेस्क्यू ऑपरेशन में हुआ. बता दें, भारतीयों को वापस अपने देश लाने के लिए विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कई बार ईरान के विदेश मंत्री से फोन पर बातचीत की है. इस दौरान एस जयशंकर ने न सिर्फ ईरान के विदेश मंत्री बल्कि कई देशों को विदेश मंत्री से फोन पर बातचीत कर मिडिल ईस्ट पर चल रहे तनाव को लेकर चर्चा की थी।
विजय की राजनीति में पहली बड़ी परीक्षा, तमिलनाडु चुनाव में NDA भी मैदान में
16 Mar, 2026 02:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तमिलनाडु। विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो गया है. चुनाव आयोग के अनुसार, 23 अप्रैल को मतदान होगा, जिसकी गिनती 4 मई को होगी. इस बार का तमिलनाडु चुनाव काफी दिलचस्प रहने वाला है, क्योंकि इस चुनाव में सीएम स्टालिन की साख दांव पर लगी है. वहीं ‘थलपति’ विजय की पहली परीक्षा होगी, तो EPS के लिए ‘करो या मरो’ की स्थिति देखने को मिलेगी. भाजपा भी इस चुनाव में पीछे नहीं रहने वाली है. भाजपा अपने वोट शेयर बढ़ाने के लिए युवा और शहरी मतदाताओं को लुभाने का प्रयास कर सकती है. जानें क्या है तमिलनाडु का राजनीतिक समीकरण?
तमिलगा वेट्री कझगम (विजय की पार्टी)
अभिनेता से राजनेता बने विजय भी इस बार अपनी नई पार्टी को लेकर विधानसभा चुनाव में उतरेंगे. विजय के लिए यह किसी अग्नि परीक्षा से कम नहीं है, क्योंकि पहली बार विजय राजनीतिक परीक्षा के लिए तैयार हैं. तमिलनाडु में माना जा रहा है कि विजय एक विकल्प के रूप में उभर रहे हैं, लेकिन अब देखना यह होगा कि वे कितना कमाल दिखा पाते हैं. लेकिन विजय के पास युवाओं का अच्छा खासा सपोर्ट माना जा रहा है।
डीएमके (स्टालिन की पार्टी)
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की विधानसभा चुनाव में साख दांव पर लगी है. स्टालिन डीएमके के अध्यक्ष भी हैं. वर्तमान में तमिलनाडु में डीएमके की सरकार है और स्टालिन मुख्यमंत्री हैं. स्टालिन विधानसभा चुनाव में अपनी जनकल्याणी योजनाओं को लेकर चुनावी रण में हैं. अब देखना यह होता है कि डीएमके का शासन मॉडल मतदाताओं को पसंद आता है या नहीं।
AIADMK (ई के पलानीस्वामी)
तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री ई के पलानीस्वामी की AIADMK पार्टी है. पलानीस्वामी को EPS भी कहा जाता है. इस चुनाव में EPS पार्टी सत्ताधारी दल डीएमके के खिलाफ महंगाई, बेरोजगारी और शासन से जुड़े मुद्दों को लेकर चुनावी मैदान में उतरेगी. AIADMK पार्टी प्रमुख जयललिता के निधन के बाद कुछ खास कमाल नहीं दिखाई. इस बार देखना यह होगा कि खुद को AIADMK पार्टी के प्रमुख नेता के रूप में स्थापित करने वाले पलानीस्वामी क्या कमाल दिखाएंगे।
एनडीए
तमिलनाडु में वैसे तो क्षेत्रीय पार्टियों का दबदबा है, लेकिन एनडीए भी पीछा नहीं छोड़ने वाली है. एनडीए भी चुनाव में अपने पूरे दमखम के साथ उतरेगी. हालांकि अभी से तैयारियां शुरू कर दी गई हैं. एनडीए दल की प्रमुख पार्टी भाजपा को पूरी उम्मीद है कि इस बार के चुनाव में पिछली बार की अपेक्षा ज्यादा सीटें और वोट प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद है। फिलहाल, मतदान से पहले सभी दल अपनी-अपनी जीत का दावा करने से पीछे नहीं हटते हैं. अब देखना यह होगा कि तमिलनाडु की जनता किसे अपना नेता चुनती है. इसके लिए 4 मई का इंतजार करना पड़ेगा।
ओडिशा में भीषण आग की घटना, राष्ट्रपति और नेताओं ने जताया दुख
16 Mar, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। ओडिशा के कटक में सोमवार को एक दर्दनाक हादसा हुआ। यहां एससीबी मेडिकल कॉलेज अस्पताल के आईसीयू में अचानक भीषण आग लग गई। इस हादसे में 10 लोगों की मौत हो गई और 11 लोग घायल हो गए। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने इस घटना की जानकारी दी है। हादसे की खबर मिलते ही मुख्यमंत्री तुरंत अस्पताल पहुंचे और मौके पर हालात का जायजा लिया।
राष्ट्रपति ने जताया दुख
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को ओडिशा के अस्पताल में आग लगने की घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने इस हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रकट कीं और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। घटना पर राष्ट्रपति मुर्मू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने लिखा, 'ओडिशा के कटक में एक अस्पताल में आग लगने की दुखद घटना में लोगों की मौत से मुझे बहुत दुख हुआ है। शोक में डूबे परिवारों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं। मैं घायलों के जल्द ठीक होने की प्रार्थना करती हूं।'
हादसे पर पूर्व मुख्यमंत्री ने जताया दुख
वहीं ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री और विपक्ष के नेता नवीन पटनायक ने कटक के एससीबी मेडिकल अस्पताल में आग की घटना पर गहरा दुख जताया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, 'कटक के एससीबी मेडिकल अस्पताल में लगी आग की घटना, जिसमें कई लोगों की मौत हो गई, बेहद दुखद है। मैं शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं और दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना करता हूं। इसके साथ ही, मैं आग में गंभीर रूप से घायल हुए लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं। मैं राज्य सरकार से सभी घायलों के लिए सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधाएं सुनिश्चित करने का आग्रह करता हूं। कटक के मेयर और तंगी चौद्वार के विधायक को घटनास्थल पर पहुंचकर सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए गए हैं।'
उत्तराखंड ठंड से सजी, गंगोत्री-हर्षिल में बर्फबारी और टिहरी में बर्फ के फाहे
16 Mar, 2026 09:54 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
उत्तरकाशी/टिहरी: उत्तराखंड में एक बार फिर से मौसम का मिजाज बदल गया है. जिससे ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी देखने को मिली है. जबकि, निचले इलाकों में हल्की बारिश हुई है. केदारनाथ के बाद गंगोत्री, यमुनोत्री धाम समेत ऊंचाई वाले गांवों में बर्फबारी शुरू हो गई है. उधर, टिहरी के दूरस्थ गंगी गांव में भी बर्फ के फाहे गिर रहे हैं.
उत्तरकाशी जिले में बारिश और बर्फबारी: रविवार देर शाम को गंगोत्री, यमुनोत्री धाम, हर्षिल समेत तमाम ऊंचाई वाले गांवों में बर्फबारी शुरू हो गई है. लंबे समय बाद हुई बारिश और बर्फबारी से फसलों को संजीवनी मिली है. साथ ही वनाग्नि को रोकने में भी यह कारगर साबित होगी. क्योंकि, कई जगहों पर जंगल जल रहे हैं. माना जा रहा है कि इससे वनाग्नि पर लगाम लग पाएगी.
टिहरी के सीमांत गंगी गांव में बर्फबारी: जहां एक तरफ पहाड़ों में गर्मी से तापमान बढ़ गया था तो वहीं दूसरी तरफ अचानक मौसम में परिवर्तन हुआ है. जिससे अचानक बारिश के साथ बर्फबारी शुरू हो गई. टिहरी जिले के सीमांत एवं दूरस्थ गंगी गांव में भी बर्फबारी हो रही है. जिससे मौसम ठंडा और खुशनुमा हो गया है.
केदारनाथ धाम में हुई बर्फबारी: वहीं, बाबा केदार के दर पर भी बर्फबारी हुई है. जिससे धाम में हल्की बर्फ की परत जम गई. साथ ही पारा काफी लुढ़क गया है. कड़ाके की ठंड के बावजूद केदारनाथ धाम की सुरक्षा में पुलिस और आईटीबीपी के जवान तैनात हैं. वहीं, बर्फबारी से चारधाम यात्रा की तैयारियां भी प्रभावित हुई है.
विश्व धरोहर दिवस पर रायपुर में सजी विरासत की अनोखी झलक, संरक्षण पर विशेषज्ञों का मंथन
बंदूक से विकास की ओर: सुकमा के तुंगल इको-पर्यटन केंद्र की प्रेरक कहानी
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हमने सीवर सफाई के काम को चुनौती के रुप में स्वीकार किया है और हम बदलाव लाकर दिखाएंगे : ऊर्जा मंत्री तोमर
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आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना में उत्कृष्ट प्रदर्शन पर छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर मिले दो प्रतिष्ठित पुरस्कार
राज्यमंत्री गौर का सख्त रुख: लापरवाही पर एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करने के निर्देश
महतारी वंदन योजना से संवर रही पहाड़ी कोरवा परिवारों की तकदीर
