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वनतारा मामले में सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट बयान: कानून का कोई उल्लंघन नहीं
20 Mar, 2026 09:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने वनतारा के खिलाफ दायर एक फाउंडेशन की याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि वनतारा में किसी भी तरह के घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन नहीं हुआ है। वनतारा के खिलाफ ये याचिका करणार्थम विरम नाम की एक फाउंडेशन ने दायर की थी। याचिका में केंद्र सरकार, केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण और अन्य को निर्देश देने की मांग की गई थी। इसमें वनतारा पर जानवरों से संबंधित कानूनों के उल्लंघन का आरोप लगाया था।
कोर्ट ने पिछले साल इस तरह की एक याचिका खारिज कर दी थी। कोर्ट ने जस्टिस जे चेलमेश्वर की अध्यक्षता वाली एसआईटी की वनतारा को दी गई क्लीन चिट को स्वीकार कर लिया था। फाउंडेशन की याचिका पर जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एन वी अंजारिया की पीठ ने एसआईटी की रिपोर्ट को सही ठहराया। यह मुद्दा नया नहीं है। इससे जुड़ी एक याचिका पहले भी दायर हो चुकी थी, जिस पर कोर्ट पहले ही विचार कर चुका है। 15 सितंबर 2025 को कोर्ट ने एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया था। याचिकाकर्ता ने जिस अंतरराष्ट्रीय दस्तावेज का हवाला दिया, वह उसके पक्ष में नहीं था।
जानकारी के मुताबिक जानवरों का आयात जरूरी परमिट और दस्तावेजों के साथ किया गया था, और यह व्यापार के लिए नहीं था। अगर जानवरों का आयात पहले सही तरीके से हुआ है, तो बाद में आपत्ति उठाने से वह अवैध नहीं बन जाता। केंद्र सरकार और संबंधित संस्थाएं वनतारा और उसके हाथी ट्रस्ट को 2019 से अब तक दी गई सभी अनुमति, मान्यता और लाइसेंस का पूरा रिकॉर्ड कोर्ट में पेश करें। खास तौर पर जानवरों के आयात और निर्यात से जुड़े सभी लाइसेंस और परमिट की जानकारी दी जाए। एक नई स्वतंत्र राष्ट्रीय समिति बनाई जाए, जो वन्यजीव व्यापार की निगरानी करे। इस समिति का नेतृत्व सुप्रीम कोर्ट के एक रिटायर्ड जज करें।
चार सदस्यीय एसआईटी का नेतृत्व पूर्व जज जस्टिस जे चेलमेश्वर ने किया था और टीम में जस्टिस राघवेंद्र चौहान, पूर्व मुंबई पुलिस कमिश्नर हेमंत नागराले और कस्टम्स अधिकारी अनिश गुप्ता शामिल थे। एसआईटी ने 12 सितंबर को रिपोर्ट सौंप दी थी। कोर्ट ने एसआईटी की सराहना की और कहा कि समिति को मानदेय भी दिया जाए।
नक्सलियों की सरेंडर की बड़ी खबर: 11 ने किया आत्मसमर्पण, छह महिलाएं
20 Mar, 2026 08:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गृह मंत्री शाह ने मार्च 2026 तक नक्सलवाद को पूरी तरह से खत्म करने का रखा है लक्ष्य
गढ़चिरोली। महाराष्ट्र के गढ़चिरोली जिले में गुरुवार को 5 वरिष्ठ सदस्यों समेत 11 माओवादी उग्रवादियों ने आत्मसमर्पण कर दिया। अधिकारियों ने बताया कि यह घटनाक्रम क्षेत्र में वामपंथी उग्रवाद की गतिविधियों में आई भारी गिरावट को दर्शाता है। इस समूह में छह महिलाएं शामिल थीं और इन पर कुल 68 लाख रुपए का इनाम था। गढ़चिरोली पुलिस के मुताबिक उन्होंने पुलिस और सीआरपीएफ के जवानों के सामने अपने हथियार डाले। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक छत्तीसगढ़ से सटी सीमा वाले गढ़चिरोली जिले में कभी नक्सली गतिविधियां काफी प्रचलित थीं। हालांकि, पुलिस का दावा है कि ऐसी गतिविधियां भामरागड उपमंडल के सीमावर्ती क्षेत्रों तक ही सीमित हैं। आत्मसमर्पण करने वालों में डिविजनल कमेटी सदस्य सोनी उर्फ बाली वट्टे मट्टामी (45) और एरिया कमेटी सचिव बुदारी उर्फ रामबत्ती मट्टामी (40) सुखलाल कोकसा (31), शांति उर्फ सोमारी तेलामी (28), यमुनाक्का उर्फ रुखमक्का पेंदाम (60), गणेश कोवासी (21), मिनाको उर्फ जमानी मट्टामी (22), धनु वेलंजे (38), सुनीता उर्फ वांगे होयम (25), रमेश मडावी (28) और किशोर शामिल हैं।
पुलिस ने पिछले साल अक्टूबर में एक अहम घटनाक्रम का भी जिक्र किया, जब वरिष्ठ माओवादी नेता मल्लोजुला वेणुगोपाल राव उर्फ भूपति ने 61 अन्य वरिष्ठ कैडरों के साथ गढ़चिरौली में महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फड़नवीस के सामने आत्मसमर्पण किया था। विशेष पुलिस महानिरीक्षक ने शेष माओवादी सदस्यों से हिंसा छोड़ने और मुख्यधारा के समाज में लौटने का आग्रह किया। बता दें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मार्च 2026 तक नक्सलवाद को पूरी तरह से समाप्त करने का लक्ष्य रखा है। सरकार छत्तीसगढ़, झारखंड, महाराष्ट्र और ओडिशा जैसे प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा अभियान और विकास प्रयासों को तेज करने की योजना बना रही है। पिछले कुछ सालों में नक्सलियों से जुड़ी घटनाओं में काफी कमी आई है।
भारत ने खाड़ी क्षेत्र में बढ़ाई युद्धपोतों की तैनाती, नौसेना अलर्ट जारी
20 Mar, 2026 10:46 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में गहराते सैन्य संकट और युद्ध के बीच वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की जीवनरेखा माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव चरम पर पहुंच गया है। इस संवेदनशील समुद्री मार्ग पर बढ़ते खतरों को देखते हुए भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। भारतीय नौसेना ने खाड़ी क्षेत्र में अपने युद्धपोतों की संख्या बढ़ाने का फैसला किया है, ताकि कच्चे तेल और गैस लेकर आने वाले भारतीय जहाजों को सुरक्षित मार्ग प्रदान किया जा सके।रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इस जलमार्ग के एक तरफ फारस की खाड़ी और दूसरी ओर ओमान की खाड़ी स्थित है। भारत अपनी तेल और गैस की जरूरतों के लिए कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों पर निर्भर है, जिनके टैंकर इसी मार्ग से होकर गुजरते हैं। वर्तमान में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते टकराव के कारण इस मार्ग पर आवाजाही लगभग ठप हो गई है, जिससे भारत के करीब 22 व्यापारिक जहाज वहां फंसे हुए हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नौसेना ने वहां मौजूद तीन युद्धपोतों के साथ अतिरिक्त जहाजों को तैनात करने का निर्णय लिया है, जिससे कुल संख्या छह से सात तक हो जाएगी। भारतीय नौसेना यह मिशन ऑपरेशन संकल्प के तहत चला रही है। इस अभियान की शुरुआत वर्ष 2019 में समुद्री सुरक्षा और भारतीय व्यापारिक जहाजों में भरोसा बनाए रखने के उद्देश्य से की गई थी। नौसेना की इस मुस्तैदी का सकारात्मक परिणाम भी देखने को मिला है। हाल ही में शिवालिक और नंदा देवी नामक दो एलपीजी जहाजों को करीब 92,712 मीट्रिक टन गैस के साथ सुरक्षित भारतीय तटों तक पहुँचाया गया है। इसके अलावा, एक भारतीय युद्धपोत ने हाल ही में यूएई के फुजैरा पोर्ट से निकले तेल टैंकर को एस्कॉर्ट कर सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराया। उल्लेखनीय है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से वैश्विक कच्चे तेल की लगभग 20 प्रतिशत आपूर्ति होती है। ऐसे में भारत की यह सैन्य तैनाती न केवल राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए अनिवार्य है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मार्गों में स्थिरता बनाए रखने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। नौसेना अदन की खाड़ी में भी 2008 से लगातार एंटी-पायरेसी मिशन चला रही है, जो समुद्र में भारत की बढ़ती शक्ति और जिम्मेदारी को दर्शाता है।
टोल न भरने पर दोगुना जुर्माना, यात्रियों के लिए बड़ा चेतावनी संदेश
20 Mar, 2026 09:44 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। अगर आप हाईवे पर सफर करते हैं और कभी-कभी टोल देना भूल जाते हैं, तब अब सावधान हो जाए। मोदी सरकार ने नए नियम लागू कर दिए हैं, इसके तहत बिना टोल चुकाए निकलना अब काफी महंगा साबित हो सकता है। नए नियमों के अनुसार, अगर कोई वाहन चालक टोल टैक्स नहीं देता है, तब वाहन चालक को अब टोल की रकम का दोगुना जुर्माना भरना होगा, यानी अगर आपका टोल 100 था, तब अब आपको 200 तक का भुगतान करना होगा। यह कदम टोल चोरी को रोकने और सिस्टम को ज्यादा पारदर्शी बनाने के लिए उठाया गया है। सबसे खास बात यह है कि अब मोदी सरकार टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर सीधे आपके मोबाइल पर नोटिस भेजेगी। ये ई-नोटिस संदेश, ईमेल और मैसेजिंग ऐप के जरिए भेजे जाएंगे, यानी अब आप यह बहाना नहीं बना सकते कि आपको जानकारी नहीं मिली।
अगर कोई व्यक्ति नोटिस मिलने के बाद भी 15 दिनों के अंदर जुर्माना नहीं भरता है, तब उसके लिए परेशानी और बढ़ सकती है। केंद्र सरकार ने इसतरह के मामलों में वाहन पोटर्ल की सेवाएं बंद कर सकती है। इसका मतलब है कि आप अपने वाहन से जुड़े जरूरी काम जैसे आरसी अपडेट, ट्रांसफर या अन्य ऑनलाइन सुविधाएं नहीं कर पाएंगे। इन नियमों का मकसद टोल कलेक्शन सिस्टम को मजबूत बनाना और नियमों का पालन सुनिश्चित करना है। खासकर फास्टटैग सिस्टम लागू होने के बाद भी कुछ लोग जानबूझकर टोल से बचने की कोशिश करते हैं, जिसे अब रोकने की तैयारी की गई है।
स्पा के नाम पर देह व्यापार, नागपुर पुलिस ने की कार्रवाई
20 Mar, 2026 08:25 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नागपुर। नागपुर के एक रिहायशी इलाके में स्पा सेंटर की आड़ में चल रहे देह व्यापार का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। बेलतरोड़ी पुलिस ने ‘7सी वेलनेस स्पा’ पर छापा मारकर दो महिलाओं को मुक्त कराया और एक महिला संचालक को गिरफ्तार किया।
पुलिस को पहले से सूचना मिली थी कि मनीषनगर क्षेत्र में स्थित इस स्पा सेंटर में अवैध गतिविधियां संचालित हो रही हैं। इसके बाद वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक के मार्गदर्शन में टीम ने नकली ग्राहक भेजकर जाल बिछाया। जांच के दौरान यह पुष्टि हुई कि यहां देह व्यापार कराया जा रहा था। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी महिला बाहरी राज्यों, खासकर ओडिशा की महिलाओं को पैसों का लालच देकर इस काम में धकेलती थी। छापेमारी के दौरान नकद राशि और मोबाइल सहित करीब 15 हजार रुपये का सामान जब्त किया गया। दोनों पीड़ित महिलाओं को सुरक्षित स्थान पर रखकर उनके पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू की गई है।
सीकर में ओले और तेज बारिश, देशभर के कई क्षेत्रों में मौसम बदला
20 Mar, 2026 07:41 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। देश के कई हिस्सों में मौसम ने अचानक करवट ली है। राजस्थान के सीकर में लगातार दूसरे दिन तेज बरसात के साथ ओले गिरे हैं। आंधी-बारिश के कारण हुए हादसे में जैसलमेर में दो भाइयों की मौत हो गई। वहीं मध्यप्रदेश में भोपाल, इंदौर-ग्वालियर सहित 33 जिलों में आंधी-बारिश और 3 जिलों में ओले गिरने का अलर्ट है। मौसम विभाग ने अगले 3 दिन प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में 30 से 50 किलोमीटर प्रतिघंटे तक की रफ्तार से आंधी चलने का अनुमान जाहिर किया है।
उधर हरियाणा के रेवाड़ी में रात में हुई तेज बारिश के साथ ओले गिरे। आंधी के चलते सड़कों पर लगे होर्डिंग भी उखड़ गए। बारिश के कारण दिन के तापमान में गिरावट देखने को मिल रही है। आने वाले दिनों में दिन के तापमान में 2 से 3 डिग्री की गिरावट देखने को मिलेगी। उत्तराखंड के उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग और पिथौरागढ़ के ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी हुई। वहीं हिमाचल के चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी और शिमला जिलों में तेज बारिश, आंधी, बिजली गिरने और ओले गिरने की संभावना है। नगालैंड में तेज तूफान और बारिश से 46 परिवार प्रभावित हुए हैं। चुमौकेडिमा और पेरेन जिलों में कई घरों और बिजली के खंभों को नुकसान पहुंचा है। मोन जिले के एक सरकारी स्कूल को भी नुकसान हुआ, जिससे मिड-डे मील प्रभावित हुआ। हालांकि अब तक कोई जनहानि नहीं हुई है।
अस्पताल आग मामले में कार्रवाई, चार अफसर निलंबित; बीजेडी ने उठाया सवाल
19 Mar, 2026 09:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कटक। कटक के श्रीराम चंद्र भंज मेडिकल कॉलेज अस्पताल में आग लगने की घटना के दो दिन बाद ओडिशा सरकार ने चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। इनमें अग्निशमन सेवा के 3 और विद्युत विभाग का एक अफसर शामिल है। इस बीच विपक्षी पार्टी बीजू जनता दल (बीजेडी) ने इस निलंबन को सिर्फ दिखावा बताया। बीजेडी के प्रवक्ता लेनिन मोहंती ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने इतने संवेदनशील मामले को लेकर बहुत ही लापरवाही भरा रवैया अपनाया है।
बता दें एससीबी मेडिकल कॉलेज में 14-15 मार्च की दरमियानी रात 3 बजे आग लगी थी। हादसे में मरने वाले मरीजों की संख्या अब 12 हो गई है। इनमें से 7 ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, 5 की मौत इलाज के दौरान हुई। आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट बताया गया था।
साइबर फ्रॉड रैकेट की साजिश हुई नाकाम, श्रीनगर पुलिस ने सात को पकड़ा
19 Mar, 2026 08:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
श्रीनगर। श्रीनगर में एक हाईटेक अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है, इसमें सात आरोपी गिरफ्तार किए गए। यह रैकेट विदेशी और लोकल लोगों को निशाना बनाकर ऑनलाइन धोखाधड़ी करता था। जांच एजेंसियों को पहले से तकनीकी और भरोसेमंद इनपुट मिले थे, जिसके आधार पर सीआईके ने विशेष टीम बनाई। टीम ने डिजिटल इंटेलिजेंस इकट्ठा कर रंगरेथ इंडस्ट्रियल एरिया में मुख्य ऑपरेशनल हब का पता लगाया और शहर के विभिन्न हिस्सों में समन्वित छापेमारी की। छापेमारी के दौरान 13 मोबाइल, 9 लैपटॉप, वीओआईपी सिस्टम, सिम कार्ड, नेटवर्क डिवाइस और डिजिटल स्टोरेज मीडिया जब्त किए गए। जांच में पता चला कि आरोपी एक बड़े संगठित साइबर क्राइम सिंडिकेट का हिस्सा थे, जो जम्मू-कश्मीर और विदेशों में फैला था। यह नेटवर्क विशेष रूप से यूएसए, यूके और कनाडा के नागरिकों को निशाना बनाता था। आरोपियों ने वीओआईपी आधारित गुप्त कॉल सेंटर और इंटरनेशनल वर्चुअल नंबर का इस्तेमाल कर अपनी असली लोकेशन छुपाई। वे नकली याहू मेल वेबसाइट और गूगल विज्ञापनों के जरिए लोगों को कॉल सेंटर तक लाते और उनसे बैंकिंग व निजी जानकारी निकालते। पैसे म्यूल अकाउंट और क्रिप्टो वॉलेट के जरिए ट्रांसफर किए जाते और कई बार घुमाकर असली स्रोत छुपाया जाता। पीड़ितों को यह विश्वास दिलाया जाता कि उनके डिवाइस या बैंक से समझौता हुआ है और तकनीकी सहायता के लिए भुगतान करना होगा। धोखाधड़ी से कमाए गए पैसे डिजिटल वॉलेट, बैंकिंग चैनल और क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर ट्रैकिंग मुश्किल बनाई जाती थी। इस पूरी प्रक्रिया में नकद लेन-देन शामिल नहीं था, जिससे यह पूरी तरह डिजिटल और आधुनिक साइबर फ्रॉड बन गया। अनुमानित लेन-देन कई करोड़ रुपये का है। कानून के तहत एफआईआर दर्ज की जा रही है, जिसमें धोखाधड़ी, आपराधिक साज़िश और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धाराएं शामिल हैं। अभी भी संदिग्धों को पकड़ने और नेटवर्क की जांच के लिए राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रयास जारी हैं, साथ ही जब्त उपकरणों का फोरेंसिक विश्लेषण किया जा रहा है और पैसों के लेन-देन का पता लगाने का काम चल रहा है।
केरल के सीएम के पास एक करोड़ से ज्यादा की संपत्ति
19 Mar, 2026 06:03 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
केरल| के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने धर्मदम विधानसभा क्षेत्र से अपना नामांकन पत्र दाखिल करते हुए एक करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति घोषित की है। उन्होंने चल और अचल दोनों तरह की संपत्तियों का विवरण दिया है। विजयन तीसरी बार मुख्यमंत्री पद के लिए चुनाव लड़ रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने अपने हलफनामे में 45 लाख रुपये से अधिक की चल संपत्ति का उल्लेख किया है। इसमें विभिन्न बैंकों में जमा राशि और कन्नूर इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड सहित विभिन्न कंपनियों के शेयर शामिल हैं। उनकी अचल संपत्ति 56 लाख रुपये से अधिक है, जिसमें एक आवासीय संपत्ति और पथिरियाड अंसोम में 78 सेंट कृषि भूमि शामिल है।
पत्नी के नाम भी 96 लाख की संपत्ति
उनकी पत्नी के पास 60 लाख रुपये से अधिक की चल संपत्ति है, जिसमें 80 ग्राम सोना भी शामिल है। उनकी पत्नी की अचल संपत्ति 36 लाख रुपये है। मुख्यमंत्री और उनकी पत्नी ने किसी भी देनदारी से इन्कार किया है। वित्त वर्ष 2024-25 में विजयन की आय 5.33 लाख रुपये थी, जबकि उनकी पत्नी की आय 5.77 लाख रुपये थी। विजयन ने 1963 में थालास्सेरी के सरकारी ब्रेनन कॉलेज से प्री-यूनिवर्सिटी कोर्स किया था।
मुख्यमंत्री पर लंबित मामले
विजयन ने अपने हलफनामे में बताया है कि उन पर छह मामले लंबित हैं। इनमें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एक मामला है जिसमें प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा की जा रही एक जांच शामिल है। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम का मामला एसएनसी-लैवलीन से संबंधित है, जिसमें केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने उनके बरी होने के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में अपील दायर की है। यह मामला अभी भी शीर्ष अदालत में लंबित है।
ईडी जांच का विवरण
ईडी की जांच केरल इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट फंड बोर्ड (केआईआईएफबी) द्वारा बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण हेतु मसाला बॉन्ड फंड के उपयोग से संबंधित है। एजेंसी ने विजयन को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। हालांकि, केरल उच्च न्यायालय ने इस नोटिस पर रोक लगा दी है। केरल में 9 अप्रैल को चुनाव होने हैं।
संयुक्त राष्ट्र ने सराहा भारत, बाल मृत्यु दर में आई भारी कमी
19 Mar, 2026 05:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। चैत्र नवरात के पावन मौके पर संयुक्त राष्ट्र की तरफ से रिपोर्ट सामने आई है, इस रिपोर्ट में बताया गया हैं कि भारत में बाल मृत्यु दर में भारी गिरावट हुई है। संयुक्त राष्ट्र ने बाल मृत्यु दर में गिरावट को लेकर भारत की जमकर सराहना कर मोदी सरकार की तारीफ की है। वहीं, रिपोर्ट पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। पीएम मोदी ने लिखा कि यूएन की रिपोर्ट में बच्चों की मौत में तेज गिरावट के लिए भारत की तारीफ हुई है। संयुक्त राष्ट्र बाल मृत्युदर अनुमान अंतर-एजेंसी समूह (यूएनआईजीएमई) की ताजा रिपोर्ट 2025 के मुताबिक, बच्चों की मौत की दर को कम करने में दुनियाभर में हुई तरक्की में भारत अहम योगदान देने वाला देश बना है। रिपोर्ट में बच्चों के बचने के नतीजों को बेहतर बनाने के लिए, खासकर नवजात और पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मौत के मामले में देश की लगातार और बड़े पैमाने पर प्रयास किए गए है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इन नतीजों ने मजबूत, केंद्र और राज्यों द्वारा संचालित तथा मानकों पर आधारित सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली की प्रभावशीलता को दिखाया है। इसमें बताया गया हैं कि भारत ने राष्ट्रीय दृष्टिकोण को जमीनी स्तर पर मापने योग्य परिणामों में बदलने के लिए ठोस प्रयास किए हैं।
नवजात शिशु मृत्यु दर में 70 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है, जो 1990 में 57 से घटकर 2024 में 17 हो गई है। पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर में 79 फीसदी की भारी गिरावट देखी गई, जो 1990 में 127 से घटकर 2024 में 27 हो गई है।
बीते दो दशकों में भारत ने दक्षिण एशिया क्षेत्र में बच्चों की मृत्यु दर को कम करने की कोशिशों में अहम भूमिका निभाई है। 1990 से पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मौतों में 76 फीसदी की कमी आई है और 2000 से 68 फीसदी की कमी आई। इस क्षेत्र में पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर में काफी कमी आई है। 2000 में हर 1,000 जीवित जन्मों पर 92 मौतों से घटकर 2024 में करीब 32 हो गई है, जो बच्चों के स्वास्थ्य के नतीजों में लगातार हो रही बढ़ोतरी को दिखाता है। भारत के खास दखल ने निमोनिया, डायरिया, मलेरिया और जन्म से जुड़ी दिक्कतों जैसी रोकी जा सकने वाली बीमारियों से होने वाली मौतों को कम करने में मदद की है।
नवजात शिशु की आवश्यक देखभाल (एनआईसीयू) में भारत के सुधार का खास असर हुआ है। पूरे दक्षिण एशिया में, 2000 से एनआईसीयू वाले बच्चों की मौत के मामले में करीब 60 फीसदी की कमी आई है और 1-59 महीने के बच्चों की मौत की दर में 75 फीसदी से ज्यादा की कमी आई है। हालांकि दक्षिण एशिया में अभी भी दुनियाभर में पांच साल से कम उम्र के बच्चों की लगभग 25 फीसदी मौतें होती हैं, लेकिन इस इलाके ने दुनिया भर में सबसे तेजी से कमी की है।
संकट में कूटनीतिक पहल: रूस ने भारत को ईरान-अमेरिका के बीच मध्यस्थ बनने के लिए कहा
19 Mar, 2026 10:11 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति बहाली की कोशिशें तेज हो गई हैं। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव के कारण वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया है। इस बीच रूस ने भारत की वैश्विक स्थिति को देखते हुए इस युद्ध को सुलझाने के लिए उससे मध्यस्थता करने की अपील की है। रूस का मानना है कि भारत इस दिशा में एक निर्णायक और सकारात्मक भूमिका निभा सकता है।
रूस के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों की कड़ी आलोचना की है। रूस ने इन हमलों को अकारण आक्रमण करार देते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की मांग की है। रूसी प्रवक्ता मारिया जाखारोवा ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में पैदा हुए गंभीर संकट का समाधान खोजने के लिए भारत जैसी प्रभावशाली शक्ति की आवश्यकता है। जाखारोवा के अनुसार, भारत एक जिम्मेदार राष्ट्र है और इस तनाव को कम करने में सक्षम है। गौरतलब है कि भारत ने भी हमेशा से विवादों को बातचीत और कूटनीति के माध्यम से सुलझाने की वकालत की है। 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ संयुक्त सैन्य कार्रवाई शुरू किए जाने के बाद से यह युद्ध अब चौथे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है। इस संघर्ष का सबसे बुरा असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा है। इजरायली हमलों में ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड, जो दुनिया का सबसे बड़ा गैस फील्ड है, को निशाना बनाया गया है। इसके बाद कच्चे तेल की कीमतों में 6.3 प्रतिशत का उछाल आया और यह 109.95 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। वहीं, यूरोप में गैस की कीमतों में भी 9.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
भारत पर आर्थिक और रणनीतिक प्रभाव
भारत के लिए यह युद्ध दोहरी चुनौती लेकर आया है। भारत अपनी तेल और गैस की जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा मध्य पूर्व के देशों, विशेषकर सऊदी अरब और यूएई से आयात करता है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकाबंदी ने भारत की ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को बाधित कर दिया है। हालांकि, भारत ने रूस से कच्चे तेल का आयात बढ़ाकर इस कमी की आंशिक भरपाई की कोशिश की है, लेकिन बढ़ती कीमतों और सप्लाई रूट में व्यवधान ने चिंताएं बढ़ा दी हैं। दूसरी ओर, ऐसी खबरें भी सामने आ रही हैं कि रूस ईरान को सैटेलाइट डेटा और उन्नत ड्रोन तकनीक मुहैया करा रहा है ताकि वह अमेरिकी बलों का मुकाबला कर सके। हालांकि, इन दावों की अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। वर्तमान स्थिति को देखते हुए पूरी दुनिया की निगाहें अब भारत के अगले कदम पर टिकी हैं।
चाहते थे राहत, मिली त्रासदी: पालम में आग से 9 की मौत, वजह जानकर होश उड़ेंगे
19 Mar, 2026 09:09 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के पालम इलाके में बुधवार की सुबह खुशियों और उम्मीदों की जगह मातम में बदल गई। पालम के साधनानगर स्थित एक चार मंजिला इमारत में भीषण आग लगने से 3 मासूम बच्चों समेत एक ही परिवार के 9 सदस्यों की झुलसने और दम घुटने से मौत हो गई। घटना के कारणों को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। कुछ स्थानीय लोगों का कहना है कि पानी की मोटर चालू रह गई थी, जिससे निकली चिंगारी ने आग पकड़ ली। हालांकि, पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम विस्तृत जांच कर रही है ताकि सटीक कारणों का पता लगाया जा सके। देर शाम पोस्टमार्टम के बाद सभी 9 मृतकों का अंतिम संस्कार कर दिया गया, जिससे पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई।
घटना के समय बिल्डिंग में मौजूद तीन अन्य लोगों ने अपनी जान बचाने के लिए ऊपरी मंजिलों से छलांग लगा दी, जिसके कारण वे गंभीर रूप से घायल हो गए और फिलहाल अस्पताल में जीवन और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं। राम चौक मार्केट के डब्ल्यूजेड ब्लॉक स्थित इस इमारत के मालिक व्यवसायी और स्थानीय बाजार संघ के अध्यक्ष 70 वर्षीय राजेंद्र कश्यप हैं। नियति का क्रूर खेल देखिए कि राजेंद्र कश्यप घटना से दो दिन पहले व्यापारिक कार्य से गोवा गए थे। बुधवार को जब वे वापस लौटे, तो उनका हंसता-खेलता परिवार उजड़ चुका था। शुरुआती जांच में सामने आया है कि आग लगने की मुख्य वजह भूतल पर हुआ शॉर्ट सर्किट था, जिसने देखते ही देखते पूरी इमारत को अपनी चपेट में ले लिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सुबह करीब 7 बजे इमारत से धुएं का गुबार उठता देखा गया। बिल्डिंग के तहखाने, भूतल और पहली मंजिल पर प्रवेश मॉडरेट नाम का कपड़ा और सौंदर्य प्रसाधन का शोरूम था। कपड़ों और कॉस्मेटिक्स के बड़े भंडार ने आग के लिए ईंधन का काम किया, जिससे लपटें बेहद तेजी से फैलीं। जैसे ही आग निचली मंजिलों पर भड़की, ऊपरी मंजिलों पर रह रहा परिवार फंस गया और पूरी इमारत एक डेथ ट्रैप में तब्दील हो गई। बचाव दल को तीसरी मंजिल के एक हॉल से 7 शव और बाथरूम से 2 शव बरामद हुए। राहत और बचाव कार्य के लिए दमकल की 30 गाड़ियां और करीब 100 दमकलकर्मी मौके पर पहुंचे। पुलिस और एनडीआरएफ की टीमों ने घंटों की मशक्कत के बाद 12 लोगों को मलबे से बाहर निकाला, लेकिन अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने 9 को मृत घोषित कर दिया। स्थानीय निवासी योगेश शर्मा ने बताया कि उन्होंने और उनके बेटे ने शोरूम का शटर तोड़कर लोगों को बचाने की कोशिश की, लेकिन भीषण लपटों के आगे वे बेबस थे। आग बुझाने में करीब पांच घंटे का समय लगा।
एलपीजी का उत्पादन तेजी से बढ़ा, ईंधन की कोई परेशानी नहीं—सावधान रहें अफवाहों से
19 Mar, 2026 08:06 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पश्चिम-एशिया में युद्ध के बीच सरकार ने बुधवार बताया कि एलपीजी के मामले में खासतौर पर गैस वितरकों के पास लग रही लोगों की लंबी कतार चिंता का विषय बना हुआ है। लेकिन आपूर्ति को सुचारू रूप से जारी रखने के लिए रिफाइनरियों ने एलपीजी का घरेलू उत्पादन बढ़ाकर 40 फीसदी तक कर दिया है। वहीं, देश में पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है। तेल कंपनियां अपनी शत-प्रतिशत क्षमता के साथ उत्पादन कर रही हैं। फिलहाल इस मामले को लेकर केंद्र के पास कहीं से भी कमी या ड्राई आउट की कोई शिकायत नहीं आई है। इसलिए आम जनता से यह अपील है कि वो किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान न दें। सिलेंडर की बुकिंग के लिए ऑनलाइन माध्यम का ही प्रयोग करें। तेल कंपनियां पहले की तरह उपभोक्ताओं के घरों तक सिलेंडर की डिलीवरी करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। वर्तमान में ऑनलाइन गैस बुकिंग का आंकड़ा 93 फीसदी तक जा पहुंचा है। यह जानकारी 18 मार्च को राजधानी में पश्चिम-एशिया के हालात पर आयोजित की गई अंतर-मंत्रालयी प्रेस वार्ता में केंद्रीय पेट्रोलियम-प्राकृतिक गैस मंत्रालय में संयुक्त सचिव (मार्केटिंग-तेल रिफाइनरी) सुजाता शर्मा ने दी है।
राज्यों को एलपीजी का अतिरिक्त आवंटन
उन्होंने बताया कि एलपीजी से पीएनजी की ओर आगे बढ़ने की दिशा में केंद्र ने राज्यों को एक पत्र लिखकर 10 फीसदी अतिरिक्त कमर्शियल एलपीजी का आवंटन करने की पेशकश भी की है। जिससे सीजीडी नेटवर्क मजबूत होगा। मूल रूप से मौजूदा हालात में दिया जाने वाला यह एक प्रकार का प्रोत्साहन है, जो चरणबद्ध रूप से लागू होगा। इसके अलावा सीजीडी के पास गैस कनेक्शन को लेकर किए जा रहे आवेदनों को मंजूरी देने के लिए राज्य-जिला स्तरीय समितियों के गठन पर 1 फीसदी, डीम्ड अनुमतियों से जुड़े आदेश पर 2 फीसदी, डिग-रेस्टोर योजना लागू करने पर 3 फीसदी और वार्षिक लीज शुल्क कम करने के लिए 4 फीसदी अतिरिक्त आवंटन किया जाएगा। इसके अलावा पीएनजी नेटवर्क के विस्तार के लिए भी सरकार ने पूर्व में राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों को लिखित रूप से जरूरी दिशानिर्देश जारी कर दिए हैं।
दुनिया के 40 देशों से जारी तेल की खरीद
शर्मा ने कहा कि हमने उपभोक्ताओं से ये अपील भी की है कि जहां तक संभव हो सके एलपीजी को छोड़कर पीएनजी कनेक्शन लें। इसका जमीनी रूप से असर भी दिखने लगा है। बीते दो सप्ताह में कंपनियों द्वारा कुल करीब 1 लाख 20 हजार नए कनेक्शन दिए जा चुके हैं। केंद्रीय दिशानिर्देशों की अंतिम अनुपालना की जिम्मेदारी राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों की है। उनके माध्यम से ही घरेलू और कमर्शियल उपभोक्ताओं को तेजी से पीएनजी कनेक्शन मिल सकेंगे। 15 राज्यों ने वितरकों को कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर दिए हैं। बीते करीब चार दिनों में देश में 7 हजार 200 टन कमर्शियल एलपीजी उत्थान हुआ है। कच्चे तेल की भी देश में कोई कमी नहीं है। फिलहाल भारत दुनिया के 40 देशों से इसकी खरीद कर रहा है।
देश में औद्योगिक क्रांति: भारत औद्योगिक विकास योजना से 100 नए पार्कों का निर्माण
18 Mar, 2026 09:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को 33,660 करोड़ रुपये की भारत औद्योगिक विकास योजना (भव्य) को मंजूरी प्रदान कर दी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इस प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इसके तहत देश भर में 100 प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक पार्कों का निर्माण किया जायेगा जिससे विनिर्माण को गति मिलेगी।
उन्होंने बताया कि हर औद्योगिक पार्क 100 एकड़ से 1,000 एकड़ के क्षेत्रफल में होगा। पूर्वोत्तर राज्यों और पर्वतीय इलाकों के लिए न्यूनतम 25 एकड़ की सीमा रखी गईहै। केंद्र सरकार प्रति एकड़ एक करोड़ रुपए की वित्तीय मदद देगी जिससे पार्कों के अंदर सड़कें, भूमिगत यूटिलिटी सुविधाएं, नाली, साझा ट्रीटमेंट संयंत्र और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी तथा प्रशासनिक तंत्र तैयार किए जाएंगे। साथ ही निवेशकों के लिए फैक्ट्री शेड, जांच प्रयोगशालाएं और वेयरहाउस भी पहले से तैयार होंगे। श्रमिकों के रहने के लिए घर और अन्य सहायक सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी। इसके अलावा, परियोजना लागत के 25 प्रतिशत तक की केंद्रीय मदद बाह्य बुनियादी ढांचों के लिए दी जायेगी।
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि सरकार की नीतियों में स्थिरता, प्रतिभा भंडार और डिजाइनिंग की क्षमता के दम पर भारत विनिर्माण के लिए एक पसंदीदा गंतव्य बन कर उभरा है। प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक पार्कों से ‘आत्मनिर्भर भारत’ तथा ‘मेक इन इंडिया’ को समर्थन मिलेगा और विशेषकर युवा वर्ग को काफी लाभ होगा। उन्हें विनिर्माण सेक्टर में रोजगार के अवसर मिलेंगे और आने वाले समय में देश को बहुत फायदा होगा।
उन्होंने बताया कि यह छह साल का कार्यक्रम होगा। राज्य सरकारों, केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों और निजी डेवलपरों के साथ मिलकर कुल 34,000 एकड़ में निवेश के लिए तैयार क्षेत्र विकसित करने का लक्ष्य है। औद्योगिक पार्क के विकास के लिए शहरों का चयन चैलेंज के आधार पर किया जायेगा। योजना से विनिर्माण कंपनियों, एमएसएमई, स्टार्टअप और वैश्विक निवेशकों को लाभ की उम्मीद है। विनिर्माण गतिविधियां बढ़ने से कामगार, लॉजिस्टिक्स सेवा प्रदाता, सेवा क्षेत्र की कंपनियां और स्थानीय लोग भी लाभान्वित होंगे।
2584 करोड़ रुपए की लघु जल विद्युत परियोजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल का हरी झंडी
18 Mar, 2026 08:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। सरकार ने विशेष रूप से देश के दूर-दराज के क्षेत्रों में पन बिजली क्षमता का दोहन करने के लिए 2584 करोड़ रुपए की लागत से ‘लघु जल विद्युत विकास योजना’ शुरू करने का निर्णय लिया है जिसके अंतर्गत करीब 1500 मेगावाट क्षमता की परियोजनाओं की स्थापना की जायेगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई बैठक में इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।
सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बैठक के बाद संवाददाता सम्मेलन में बताया कि ‘लघु जल विद्युत विकास योजना’ को वित्त वर्ष 2026-27 से वित्त वर्ष 2030-31 की अवधि के लिए स्वीकृति दी गई है और इसकी कुल लागत 2584.60 करोड़ रुपए है। इस योजना के अंतर्गत लगभग 1500 मेगावाट क्षमता की लघु जल विद्युत परियोजनाओं की स्थापना की जाएगी।
उन्होंने कहा कि यह योजना विभिन्न राज्यों में 1 से 25 मेगावाट क्षमता वाली लघु जल विद्युत परियोजनाओं को स्थापित करने में सहायता प्रदान करेगी और विशेष रूप से पहाड़ी तथा पूर्वोत्तर राज्यों को लाभान्वित करेगी, जहां ऐसी परियोजनाओं की अधिक संभावनाएं हैं। पूर्वोत्तर राज्यों तथा अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगे जिलों में प्रति मेगावाट 3.6 करोड़ रुपए या परियोजना लागत का 30 प्रतिशत (जो भी कम हो) तक की केंद्रीय वित्तीय सहायता दी जाएगी, जिसकी अधिकतम सीमा प्रति परियोजना 30 करोड़ रुपए होगी। अन्य राज्यों में प्रति मेगावाट 2.4 करोड़ रुपए या परियोजना लागत का 20 प्रतिशत (जो भी कम हो) तक सहायता दी जाएगी, जिसकी अधिकतम सीमा प्रति परियोजना 20 करोड़ रुपए होगी।
इससे दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में लघु जल विद्युत क्षमता का उपयोग करने में सहायता मिलेगी। ऐसी परियोजनाओं के लिए 2,532 करोड़ रुपए निर्धारित किए गए हैं। इससे लघु जल विद्युत क्षेत्र में लगभग 15,000 करोड़ रुपए का निवेश आने की संभावना है, जिससे स्वच्छ ऊर्जा पहल को बढ़ावा मिलेगा, दूर दराज के और ग्रामीण क्षेत्रों में निवेश बढ़ेगा तथा रोजगार के महत्वपूर्ण अवसर उत्पन्न होंगे। यह निवेश संयंत्र और मशीनरी के 100 प्रतिशत स्वदेशी स्रोतों से उपयोग को भी प्रोत्साहित करेगा, जिससे आत्मनिर्भर भारत के उद्देश्य की पूर्ति होगी।
यह योजना राज्यों को लगभग 200 परियोजनाओं के लिए विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन तैयार करने के लिए भी प्रोत्साहित करेगी, जिससे भविष्य में लघु जल विद्युत परियोजनाओं की एक श्रृंखला तैयार हो सके। इसके लिए राज्य और केंद्र सरकार की एजेंसियों को सहायता प्रदान करने के लिए 30 करोड़ रुपए निर्धारित किए गए हैं।
यह योजना परियोजना निर्माण के दौरान 51 लाख मानव-दिवस रोजगार प्रदान करेगी तथा इन लघु जल विद्युत परियोजनाओं के संचालन और रखरखाव में भी रोजगार के अवसर उत्पन्न करेगी, जो मुख्यतः ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में स्थापित होंगी। लघु जल विद्युत परियोजनाएं विकेंद्रीकृत प्रकृति की होने के कारण लंबी प्रसारण लाइनों की आवश्यकता कम होती है, जिससे प्रसारण हानि भी कम होती है।
इस योजना के शुरू होने से लघु जल विद्युत क्षेत्र को पुनर्जीवित किया जाएगा और उपलब्ध क्षमता का तेज गति से दोहन संभव होगा। लघु जल विद्युत परियोजनाएं पर्यावरण के अनुकूल होती हैं, क्योंकि इनमें बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण, वनों की कटाई और समुदायों के विस्थापन से बचा जा सकता है। यह योजना स्थानीय निवेश को बढ़ावा देकर दूरस्थ क्षेत्रों के सामाजिक-आर्थिक विकास को भी प्रोत्साहित करेगी तथा 40 से 60 वर्ष या उससे अधिक की परियोजना आयु के साथ दीर्घकालिक रोजगार के अवसर भी प्रदान करेगी।
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