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खौफनाक हमला: ओमान के पास भारतीय नाविकों ने बचाई अपनी जान
22 Mar, 2026 10:50 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: खाड़ी क्षेत्र में 'स्काई लाइट' जहाज पर हुए भयानक हमले में फंसे भारतीय नाविकों को आखिरकार बचा लिया गया है. इस हादसे में सुरक्षित बचे दो नाविक, अब्दुल रहमान मंडल और विक्रम घोष मुंबई लौट आए हैं. इस खौफनाक हादसे के बाद दोनों नाविक गहरे सदमे में थे. यहां, आपबीती बताते हुए कहा- 'अब, हम चैन की नींद सो सकते हैं.'
घटना का विवरण
अब्दुल रहमान ने बताया, "1 मार्च 2026 को जब हम ओमान के खसाब बंदरगाह के पास थे, तब हमारे जहाज 'स्काई लाइट' पर मिसाइल या ड्रोन से हमला हुआ. सुबह करीब 6:45 से 7:00 बजे के बीच एक जोरदार धमाका हुआ. मैं बिस्तर से गिर गया. मेरी नींद खुल गई. हर तरफ धुआं ही धुआं था. अपनी जान बचाने के लिए हर कोई दरवाजा खोलकर बाहर भाग रहा था."
उन्होंने आगे बताया, "बाहर आने के बाद हमें एहसास हुआ कि हमारे कैप्टन और ऑयलर कहीं दिखाई नहीं दे रहे हैं. हमने उन्हें जोर-जोर से आवाजें दीं, लेकिन काफी देर तक कोई जवाब नहीं मिला." जहाज पर कुल 10 भारतीय और 12 ईरानी कर्मचारी और अधिकारी मौजूद थे. ईरानी कर्मचारी तेल के टैंकों की सफाई के लिए आए थे.
कैसे बची जान
अब्दुल ने बताया, "हमने दूर एक दूसरा जहाज देखा. लेकिन वह पहले हमारे पास नहीं आया. हम मदद के लिए चिल्ला रहे थे. लगभग 45 मिनट से एक घंटे बाद, जब हमने उन्हें बताया कि हमारे तेल के टैंक खाली हैं, तब वे हमारे करीब आए. इसके बाद, सभी ने लाइफ जैकेट पहनी और रस्सियों के सहारे दूसरे जहाज पर चढ़कर अपनी जान बचाई."
अब्दुल ने बताया कि कैप्टन आशीष कुमार और ऑयलर दलीप सिंह का कोई सुराग नहीं मिला. बाद में पता चला कि उनकी मौत हो चुकी है. बचाव के बाद सभी को ओमान के खसाब बंदरगाह ले जाया गया, जहां घायलों का इलाज हुआ. वहां से वे 18 तारीख को भारत लौटे.
विक्रम घोष ने बताया, "ओमान में रहते हुए हम हर पल इस डर में थे कि फिर से हमला हो सकता है. जहां हम थे, वहां से हमारा जहाज साफ दिख रहा था और आसपास अभी भी धमाके हो रहे थे." उन्होंने आगे कहा, "हमारे पास न तो सामान बचा था और न ही कोई दस्तावेज. भारत सरकार ने हमारे लिए 'व्हाइट कार्ड' (आपातकालीन यात्रा दस्तावेज़) जारी किए, जिसके बाद हमें ओमान से भारत लाया गया."
650 भारतीय नाविक खतरे में
'फॉरवर्ड सीमेन यूनियन ऑफ इंडिया' के महासचिव मनोज यादव ने बताया कि वर्तमान में ईरान और आसपास के क्षेत्र में 22 भारतीय जहाजों पर लगभग 650 भारतीय चालक दल और अधिकारी तैनात हैं. इसके अलावा, विदेशी झंडे वाले जहाजों पर करीब 23,000 भारतीय काम कर रहे हैं. उन्होंने केंद्र सरकार से इन सभी की सुरक्षित वापसी के लिए तुरंत कदम उठाने की अपील की है और कहा कि उनका संगठन इस बारे में लगातार सरकार के संपर्क में है.
बेटी के जन्म पर गुस्साए पिता ने 15 दिन की बच्ची को जहर देकर मौत के घाट उतारा
22 Mar, 2026 09:50 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बेलगावी (कर्नाटक): कर्नाटक के बेलगावी जिले के उक्कड़ गांव में एक रूह कंपा देने वाली घटना सामने आई है. यहां एक पिता ने अपनी ही 15 दिन की नवजात बच्ची को जहर देकर मौत के घाट उतार दिया. पुलिस जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि आरोपी पिता केवल इसलिए अपनी बेटी का दुश्मन बन गया क्योंकि वह बेटा चाहता था.
क्या है पूरा मामला
पुलिस के अनुसार, आरोपी भीमराय चिप्पडी 17 मार्च को उक्कड़ गांव में अपनी ससुराल गया था. वह अपनी पत्नी शीला और नवजात बच्ची से मिलने के बहाने वहां पहुंचा था. उस दिन भारी बारिश हो रही थी और बच्ची की मां सो रही थी. इसी का फायदा उठाकर भीमराय ने मासूम के दूध पीने वाली बोतल के ऊपरी हिस्से में जहर लगा दिया और उसे पिला दिया.
जहर शरीर में फैलते ही बच्ची के मुंह से झाग निकलने लगा और वह जोर-जोर से रोने लगी. बच्ची के रोने की आवाज सुनकर जब मां की नींद खुली, तो आरोपी भीमराय तुरंत वहां से भाग निकला. कुछ ही देर में उस मासूम ने अपनी मां की गोद में दम तोड़ दिया.
बेटी को मायके छोड़ने का बनाता था दबाव
पुलिस कमिश्नर भूषण बोरसे ने बताया कि आरोपी भीमराय अपनी पत्नी शीला पर लगातार दबाव बना रहा था कि वह बच्ची को अपने मायके में ही छोड़ दे और अकेली उसके साथ घर चले. उसे बेटी का पैदा होना मंजूर नहीं था. प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हो गया है कि बच्ची की हत्या केवल उसके 'लड़की' होने के कारण की गई है.
पुलिस की कार्रवाई
मृतक बच्ची की मां शीला की शिकायत पर काकती पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया था. पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी पिता भीमराय को गिरफ्तार कर लिया है और उसे हिंडाल्गा जेल भेज दिया गया है. पुलिस कमिश्नर ने कहा कि मामले की आगे की जांच जारी है ताकि आरोपी को सख्त से सख्त सजा दिलाई जा सके.
होर्मुज संकट में राहत: सरकार ने LPG और ईंधन की आपूर्ति बढ़ाई, सुरक्षा मजबूत
22 Mar, 2026 08:47 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: ईरान के खिलाफ इजरायल-अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य भू-राजनीतिक तनाव का केंद्र बन गया है. हालांकि, तनाव के बीच ही सही भारत सरकार ने एलपीजी और ईंधन की आपूर्ति बढ़ाई तथा नाविकों और नागरिकों की सुरक्षा को मजबूत किया है.
बता दें कि, होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने के कारण पश्चिम एशिया क्षेत्र में बढ़ते तनाव के मद्देनजर, भारतीय सरकार ने ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करने, समुद्री सुरक्षा की रक्षा करने और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाए हैं. विभिन्न मंत्रालयों के सरकारी अधिकारियों ने व्यवधानों को रोकने और आवश्यक सेवाओं की स्थिरता बनाए रखने के लिए समन्वित कार्रवाई की है.
ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित, रिफाइनरी संचालन पूरी क्षमता से चल रहा है
विश्व बाजार में अनिश्चितता के बावजूद, सरकार ने जनता को आश्वस्त किया है कि पेट्रोल और डीजल आम तौर पर पूरे देश में उपलब्ध हैं और घरेलू रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं क्योंकि उनके पास कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार है. सिस्टम में पर्याप्त पेट्रोल और डीजल मौजूद है, और सभी तेल बाजार कंपनियों ने अपने ईंधन स्टेशनों पर ईंधन की कमी की कोई सूचना नहीं दी है.
अधिकारियों ने जनता से ईंधन की अफरा-तफरी न मचाने का आग्रह किया है और आश्वासन दिया है कि इन ईंधनों की वितरण प्रणाली में कोई समस्या नहीं है और आपूर्ति श्रृंखला में कोई व्यवधान नहीं है. उन्होंने रिफाइनरियों से घरेलू एलपीजी का उत्पादन बढ़ा दिया है, इसलिए एलपीजी की उपभोक्ता मांग में वृद्धि के दौरान अधिक आपूर्ति उपलब्ध होगी.
आवश्यक क्षेत्रों की पहचान के लिए प्राकृतिक गैस वितरण को प्राथमिकता
वर्तमान में प्राप्त सीमित आपूर्ति को प्रबंधित करने के लिए, सरकार ने प्राकृतिक गैस का वितरण उन क्षेत्रों तक पहुंचाने का निर्णय लिया है जहां इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है. आम तौर पर, घरेलू पाइपलाइन द्वारा प्राकृतिक गैस (डी-पीएनजी) और परिवहन के लिए सीएनजी की आपूर्ति स्थिर बनी हुई है.
इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड, महानगर गैस लिमिटेड, गेल गैस और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड सहित शहर गैस वितरण (सीजीडी) कंपनियों को पीएनजी कनेक्शन को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया गया है, विशेष रूप से रेस्तरां, होटल और कैंटीन जैसे वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों के लिए पीएनजी कनेक्शन को प्राथिमिकता दी जा रही है. कंपनियां उपभोक्ताओं को एलपीजी से पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस (पीएनजी) से बने नए ईंधन में बदलने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु प्रोत्साहन प्रदान कर रही हैं.
इसके अतिरिक्त, सरकार ने राज्य और केंद्र सरकार के मंत्रालयों को सीजीडी परियोजनाओं के निर्माण के लिए अनुमोदन प्रक्रिया में तेजी लाने के कई आदेश जारी किए हैं. नियामक एजेंसियों ने भी आदेश दिया है कि गैस कनेक्शन के लिए किसी भी नए आवेदन को त्वरित प्रक्रिया के आधार पर पूरा किया जाए, जबकि केंद्र सरकार की एजेंसियों को निर्देश दिया गया है कि जब भी संभव हो, वे जल्द से जल्द पीएनजी (पेट्रोलियम गैस) का उपयोग शुरू कर दें.
वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण एलपीजी आपूर्ति प्रभावित हो रही है. हालांकि, भारत सरकार के अनुसार, घरेलू आपूर्ति में कोई परेशानी नहीं हो रही है. इसका मतलब है कि बिक्री (वितरण) स्तर पर उत्पाद की कोई कमी नहीं बताई गई है, और वितरण सामान्य दर पर हो रहा है.
वहीं, कमर्शियल उपयोगकर्ताओं के लिए, एलपीजी आपूर्ति आंशिक रूप से बहाल कर दी गई है और इसे धीरे-धीरे बढ़ाया जा रहा है. केंद्र ने अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों, सामुदायिक रसोई और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को प्राथमिकता देते हुए आवंटन को सामान्य आपूर्ति के 50 फीसदी तक बढ़ा दिया है. वाणिज्यिक एलपीजी आवंटन का लगभग आधा हिस्सा वर्तमान में अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों को दिया जा रहा है.
केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों से आग्रह किया है कि वे अपने व्यावसायिक ग्राहकों का कारोबार पीएनजी में स्थानांतरित करें, और इसके लिए प्रोत्साहन के तौर पर अतिरिक्त एलपीजी उपलब्ध कराने का प्रावधान किया है. एलपीजी पर निर्भरता कम करने के लिए सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को केरोसिन के अतिरिक्त 48,000 किलोलीटर एलपीजी उपलब्ध कराई है.
अब राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को केरोसिन और कोयले जैसे अन्य ईंधनों का उपयोग करने की अनुमति है, विशेष रूप से एलपीजी के छोटे और मध्यम आकार के उपयोगकर्ताओं के लिए. कोयला मंत्रालय ने कोल इंडिया और सिंगारेनी कोलियरीज को राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को कोयले की आपूर्ति बढ़ाने का निर्देश दिया है ताकि ईंधन की कमी से प्रभावित उद्योगों और उपभोक्ताओं को आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके.
राज्य सरकारों को आवश्यक वस्तु अधिनियम और अन्य कानूनों के तहत सतर्कता बढ़ाने का निर्देश दिया गया है ताकि ईंधन की जमाखोरी और कालाबाजारी को रोका जा सके. अब तक देशभर में 3,500 छापे मारे जा चुके हैं, जिनमें उत्तर प्रदेश, तेलंगाना और महाराष्ट्र सहित कई राज्यों से लगभग 1,400 एलपीजी सिलेंडर जब्त किए गए हैं.
सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने भी खुदरा दुकानों और एलपीजी वितरण केंद्रों पर 2000 से अधिक अनियोजित जांच/निरीक्षण किए हैं ताकि उपभोक्ताओं तक एलपीजी और ईंधन की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके. आवश्यक ईंधनों के वितरण को सुचारू रूप से चलाने के लिए 32 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने नियंत्रण कक्ष और जिला स्तरीय निगरानी समितियां स्थापित की हैं. गलत सूचनाओं का मुकाबला करने और अनावश्यक दहशत को रोकने के लिए दैनिक प्रेस विज्ञप्तियां और सलाह जारी की जाती हैं.
लोगों ने जताई नाराजगी, सोशल मीडिया पर हो रही तीखी प्रतिक्रिया
21 Mar, 2026 10:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
उत्तर प्रदेश। के श्रावस्ती जिले में एक मंदिर के पास इफ्तार पार्टी करने का मामला सामने आया है, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी देखी गई और पुलिस ने कार्रवाई करते हुए चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया है।
क्या हुआ था?
यह घटना श्रावस्ती के सिरसिया थाना क्षेत्र में भारत-नेपाल सीमा के पास स्थित सोनपथरी मंदिर और बाबा के आश्रम के पास की है। जानकारी के अनुसार, रमजान के आखिरी दिनों में कुछ लोग वहां रोजा खोलने (इफ्तार) के लिए पहुंचे थे। वायरल वीडियो में करीब 15-20 लोग इफ्तार करते हुए दिखाई दे रहे हैं। आरोप है कि उन्होंने मंदिर के पास मांसाहारी भोजन किया और उसके बचे हुए हिस्से पास की झील में फेंक दिए। बताया जा रहा है कि इसी झील के पानी का इस्तेमाल मंदिर में भोजन बनाने के लिए किया जाता है।
लोगों में नाराजगी
जैसे ही यह वीडियो सामने आया, स्थानीय लोगों और धार्मिक संगठनों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई। उनका कहना है कि इससे उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची है, क्योंकि यह स्थान पूजा-पाठ और धार्मिक कार्यक्रमों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
पुलिस की कार्रवाई
मंदिर के पुजारी शरणानंद महाराज की शिकायत के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू की। पुलिस अधिकारी सतीश कुमार के अनुसार, 19 मार्च को मिली शिकायत और वीडियो के आधार पर कार्रवाई करते हुए चार लोगों जमाल, इरफान, इमरान और जहीर को गिरफ्तार कर लिया गया है। इन सभी पर धार्मिक भावनाओं को आहत करने का आरोप लगाया गया है। साथ ही, पुलिस अन्य लोगों की पहचान करने में भी जुटी हुई है। पुलिस का कहना है कि मामले की पूरी जांच की जा रही है और यदि अन्य लोग भी दोषी पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
न्यायिक सुधारों में पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर
21 Mar, 2026 09:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बंगलूरू|सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश, जस्टिस बीवी नागरत्ना ने देश की न्यायपालिका में लंबित मामलों की बढ़ती संख्या पर चिंता व्यक्त करते हुए, इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए एक 'न्यायिक सुधार आयोग' के गठन का प्रस्ताव रखा है। उन्होंने कहा कि न्याय वितरण प्रणाली में हो रही देरी के पीछे कई हितधारकों के बीच मौजूद प्रणालीगत प्रोत्साहन एक बड़ी वजह हैं। ये बातें उन्होंने शनिवार को सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) द्वारा आयोजित 'न्यायिक शासन की पुनर्कल्पना: लोकतांत्रिक न्याय के लिए संस्थाओं को मजबूत करना' विषय पर आयोजित पहले राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान कही। जस्टिस नागरत्ना, जो 'लंबित मामलों से त्वरित न्याय तक: भारतीय अदालतों में न्याय वितरण पर पुनर्विचार' विषय पर पैनल चर्चा का हिस्सा थीं, ने विस्तार से बताया कि प्रस्तावित आयोग में न केवल सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों और जिला न्यायपालिका के सदस्य शामिल होने चाहिए, बल्कि बार के प्रतिनिधि, महान्यायवादी, सॉलिसिटर जनरल और बार के संस्थागत स्तर के कुछ सदस्य, जैसे बार अध्यक्ष, भी होने चाहिए। इसके अलावा, लंबित मामलों को कम करने के लिए अंतः-संस्थागत संवाद को सक्षम बनाने के लिए सरकार का प्रतिनिधित्व भी आवश्यक है।
हितधारकों के दृष्टिकोण से विलंब के कारण
न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कई हितधारकों के दृष्टिकोण से न्याय प्रक्रिया में विलंब के कारणों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि एक वादी अक्सर यथास्थिति से लाभान्वित होता है, जिससे वह कार्यवाही को लंबा खींचने का प्रयास करता है। वकील, जिन्हें प्रति पेशी और विस्तारित समय-सीमा से लाभ होता है, स्थगन और स्थगन को पसंद करते हैं। सरकारी विभाग, हार स्वीकार करने के बजाय अपील करके नौकरशाही जोखिम को कम करते हैं। वहीं, न्यायाधीश, विशेषकर निचली अदालतों के न्यायाधीश, अपीलीय उलटफेर के भय से सतर्कता से कार्य करते हैं और आक्रामक तरीके से मामलों का निपटारा करने के बजाय प्रक्रियात्मक सावधानी बरतना पसंद करते हैं। यद्यपि ये निर्णय व्यक्तिगत स्तर पर तर्कसंगत लग सकते हैं, लेकिन ये समग्र प्रणाली के लिए हानिकारक हैं और केवल प्रणालीगत देरी को जन्म देते हैं।
प्रणालीगत विलंब को तोड़ने की आवश्यकता
इस संतुलन को तोड़ने के लिए, जस्टिस नागरत्ना ने सुझाव दिया कि केवल न्यायाधीशों के बेहतर आचरण, प्रक्रियात्मक समय-सीमाओं के पालन, वकीलों से स्थगन न मांगने का आग्रह, सरकार से मुकदमेबाजी कम करने की अपेक्षा, या अदालतों से चौबीसों घंटे काम करने और न्यायाधीशों से छुट्टी न लेने की उम्मीद करने के बजाय, लंबित मामलों को कम करने के लिए एक न्यायिक आयोग के माध्यम से संस्थागत हस्तक्षेप की आवश्यकता है।
लंबित मामलों से जुड़े मुद्दे
लंबित मामलों के संबंध में, न्यायाधीश ने अदालती आंकड़ों में दोषपूर्ण दायर किए गए मामलों को शामिल करने पर सवाल उठाया। उनका सुझाव था कि ऐसे मामलों को तब तक गिना नहीं जाना चाहिए जब तक कि वे सुनवाई के लिए प्रक्रियात्मक रूप से तैयार न हों। उन्होंने सरकार को मुकदमेबाजी का सबसे बड़ा जनरेटर के रूप में भी रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि अधिकारी अक्सर जांच से बचने के लिए अपील दायर करते हैं, भले ही विवादों को पहले ही निपटाया जा सकता हो। इससे मामले अनावश्यक रूप से कई न्यायिक स्तरों से गुजरते हैं। उन्होंने कहा, सरकार सार्वजनिक रूप से न्यायिक बैकलॉग के बारे में चिंता व्यक्त करती है, जबकि साथ ही अथक मुकदमेबाजी के माध्यम से उस बैकलॉग को बढ़ाती रहती है।
क्षमता की बाधाएं और समाधान
जस्टिस नागरत्ना ने आगे कहा कि न्यायाधीशों की नियुक्ति में देरी, बुनियादी ढांचे की कमी और प्रौद्योगिकी का अपर्याप्त उपयोग सहित अपर्याप्त सार्वजनिक निवेश के कारण न्यायिक क्षमता बाधित होती है। सुझाए गए उपायों में, उन्होंने बेहतर मामले प्रबंधन, अनावश्यक स्थगन पर अंकुश, प्रौद्योगिकी को अपनाना, मामलों को प्राथमिकता देना, वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्र को बढ़ावा देना और विशेष पीठों का निर्माण शामिल है। उन्होंने वकीलों से पेशेवर और नैतिक मानकों का पालन करने, वादियों से तुच्छ अपीलों से बचने और सरकार से एक व्यावहारिक मुकदमेबाजी नीति अपनाने और न्यायपालिका में समय पर धन और नियुक्तियों को सुनिश्चित करने का भी आग्रह किया।
‘ताला लगाने वाले ही देते हैं ईद मुबारक’, उमर फारूक का आरोप।
21 Mar, 2026 03:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कश्मीर। घाटी के एक प्रमुख धार्मिक और राजनीतिक नेता मीरवाइज उमर फारूक ने शनिवार को ईद के दिन श्रीनगर स्थित जामा मस्जिद के दरवाजे बंद रहने पर गहरी चिंता और दुख व्यक्त किया। उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग मस्जिदों और ईदगाहों पर ताला लगाते हैं, वही सबसे पहले ‘ईद मुबारक’ की बधाई देते हैं। मीरवाइज उमर फारूक ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर लिखा कि लगातार सातवें साल जामा मस्जिद में ईद की नमाज पर रोक लगी हुई है। इसके चलते मुसलमानों के लिए जश्न का दिन इस बार भी खुशी की बजाय निराशा और दुख में बदल गया।
धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक
उनका कहना है कि इस तरह की पाबंदियां और नजरबंदियां न केवल धार्मिक स्वतंत्रता पर सवाल उठाती हैं, बल्कि लोगों की भावनाओं और विश्वास को भी ठेस पहुंचाती हैं। जामा मस्जिद श्रीनगर का एक ऐसा स्थान है जो लंबे समय से धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक रहा है। यहां आने वाले लोग न केवल नमाज अदा करते हैं, बल्कि सामाजिक और आध्यात्मिक एकता का अनुभव भी करते हैं। लेकिन इन पाबंदियों के चलते इस महत्वपूर्ण अवसर पर हजारों मुसलमानों का अधिकार सीमित किया जा रहा है।
पारिवारिक और धार्मिक जश्न अधूरा
उनका कहना है कि ईद का दिन सिर्फ इबादत का अवसर नहीं है, बल्कि परिवार और समाज के लिए खुशी, मिलन और भाईचारे का प्रतीक भी है। जब ऐसी पाबंदियां लगाई जाती हैं, तो लोगों का यह पारिवारिक और धार्मिक जश्न अधूरा रह जाता है।
ताले लगाने वाले ही देते है मुबारक
मीरवाइज उमर फारूक ने इसे समय की बड़ी विडंबना करार दिया कि जो लोग मस्जिदों और ईदगाहों पर ताले लगाते हैं, वही सबसे पहले मुसलमानों को ‘ईद मुबारक’ की बधाई देते हैं।
मस्जिद के दरवाजे बंद होने पर जताई थी चिंता
गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर के अलगाववादी नेता मीरवाइज उमर फारूक ने इससे पहले पिछले शुक्रवार को भी श्रीनगर स्थित जामा मस्जिद के दरवाजे बंद होने पर चिंता जताई थी। उनका कहना है कि रमजान के पावन महीने और ईद के दिन जामा मस्जिद के दरवाजे बंद रखने के फैसले ने मुस्लिम समुदाय की खुशी और जश्न को गम में बदल दिया है।
सरकार का बड़ा फैसला, राशन वितरण प्रणाली में बदलाव लागू।
21 Mar, 2026 01:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
देशभर। के करोड़ों राशन कार्ड धारकों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। महंगाई के इस दौर में जहां हर परिवार अपने खर्चों को संभालने की कोशिश कर रहा है। वहीं सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। इस फैसले का सीधा फायदा उन लोगों को मिलेगा जो अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए सरकारी राशन पर निर्भर हैं। अब लोगों को हर महीने राशन लेने की चिंता से काफी हद तक राहत मिलने वाली है। सरकार की नई व्यवस्था के अनुसार, अब पात्र लाभार्थियों को अप्रैल, मई और जून 2026 का राशन एक साथ दिया जाएगा यानी अब हर महीने राशन की दुकान पर जाने की जरूरत नहीं होगी। यह फैसला खासतौर पर उन लोगों के लिए फायदेमंद है, जो कामकाजी हैं या हर महीने समय निकालना उनके लिए मुश्किल होता है। इसके साथ ही राशन वितरण केंद्रों पर भीड़ कम होगी और व्यवस्था ज्यादा सुचारु तरीके से चल सकेगी। कई बार लोग किसी कारणवश अपना मासिक राशन नहीं ले पाते थे, लेकिन अब एक साथ तीन महीने का राशन मिलने से उन्हें उनका पूरा हक मिल सकेगा। राशन प्राप्त करने के लिए लाभार्थियों को अपने नजदीकी फेयर प्राइस शॉप यानी राशन की दुकान पर जाना होगा। सरकार द्वारा तय की गई तारीख और समय के अनुसार ही वितरण किया जाएगा, इसलिए समय का ध्यान रखना जरूरी है। कई स्थानों पर ई-पॉस मशीन और डिजिटल सिस्टम के जरिए राशन दिया जा रहा है, जिससे पारदर्शिता बनी रहती है और गड़बड़ी की संभावना कम होती है। राशन लेते समय लाभार्थियों को अपना राशन कार्ड या आधार से जुड़ी जानकारी साथ रखना जरूरी होगा, ताकि किसी प्रकार की परेशानी न हो। इस फैसले का सबसे ज्यादा लाभ गांवों और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को मिलेगा। इन क्षेत्रों में हर महीने राशन लेने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे समय और पैसे दोनों खर्च होते हैं। अब एक बार में तीन महीने का राशन मिलने से उनकी यह समस्या काफी हद तक कम हो जाएगी। इसके अलावा बुजुर्गों और महिलाओं को भी बड़ी राहत मिलेगी, जिन्हें बार-बार बाहर जाकर राशन लेना मुश्किल होता है। कुल मिलाकर सरकार का यह कदम आम लोगों की सुविधा और समय की बचत के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है।
युवाओं को साधने के लिए नए अभियान में जुटा वामदल।
21 Mar, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता। पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव में एक महीने का समय शेष रह गया है। इस बात को देखते हुए चुनावी रण में राजनीतिक पार्टियों ने अपनी-अपनी तैयारी तेज कर दी है, जिसके चलते आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति भी सातवें आसमान पर पहुंच गई है। सभी दल अपने-अपने मुद्दे पर दांव खेलने की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में अब सीपीआई(एम)-नेतृत्व वाला लेफ्ट फ्रंट एक बार फिर युवाओं को लेकर अपना दांव खेलने की तैयारी कर रहा है। इसके तहत पार्टी नौकरी सृजन को अपनी प्रमुख नीति के तौर पर पेश कर रही है। सीपीआई (एम) की तरफ से नौकरी सृजन नीति का मुख्य उद्देश्य युवाओं को फिर से पार्टी के साथ जोड़ना है, क्योंकि पिछले चुनावों में युवा मतदाता लेफ्ट से काफी दूर हो गए थे। इसके बारे में पार्टी के केंद्रीय समिति सदस्य सामिक लाहिरी ने बताया कि पार्टी ने इस बार कई युवा उम्मीदवार और युवा स्वयंसेवक मैदान में उतारे हैं। उनका मानना है कि युवा वर्ग की भागीदारी चुनाव में निर्णायक होगी।
सीपीआई (एम) का वैकल्पिक रोजगार नीति पर जोर
इतना ही नहीं लाहिरी ने इस बात पर भी जोर दिया कि राज्य में रोजगार की कमी है। लगभग 1.25 करोड़ लोग नौकरी न मिलने के कारण राज्य छोड़ चुके हैं। लेफ्ट फ्रंट ने राज्य के लिए एक वैकल्पिक रोजगार नीति तैयार की है, जिसे अपने चुनावी घोषणापत्र में जल्द ही जनता के सामने रखा जाएगा। लाहिरी ने बताया कि पार्टी का पूरा जोर इस चुनाव में नौकरी सृजन पर रहेगा।
224 क्षेत्रों में उतारे उम्मीदवार
बता दें कि पार्टी के उम्मीदवार पहले ही चुनाव प्रचार में जुट गए हैं और स्थानीय स्तर पर घर-घर जाकर मतदाताओं से बातचीत कर रहे हैं। लेफ्ट फ्रंट ने अब तक 294 सीटों वाली विधानसभा में 224 क्षेत्रों के लिए उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं। साथ ही, सीपीआई(एमएल)-लिबरेशन और इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ) भी फ्रंट के सहयोगी के रूप में उम्मीदवार उतारेंगे।
रैलियों को लेकर क्या है पार्टी की योजना?
लाहिरी ने बताया कि पार्टी बड़ी रैलियों के बजाय छोटे स्थानीय बैठक और व्यक्तिगत बातचीत पर ज्यादा ध्यान दे रही है। इसके साथ ही पार्टी सोशल मीडिया का भी भरपूर इस्तेमाल कर रही है, ताकि जेन-जी तक आसानी से संदेश पहुंचाया जा सके। पार्टी के स्वयंसेवक बिना किसी भुगतान के यह काम कर रहे हैं और सभी सामग्री जैसे पोस्टर, स्लोगन, रील्स आदि अपने दम पर तैयार कर रहे हैं।
इन समस्याओं पर सीपीआई (एम) का फोकस
इतना ही नहीं सीपीआई(एम) के केंद्रीय समिति सदस्य सुझन चक्रवर्ती ने कहा कि राज्य में शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य सेवा और कानून-व्यवस्था जैसी समस्याएं गंभीर हैं। उनका कहना है कि तृणमूल कांग्रेस की सरकार के दौरान राज्य बुरी तरह प्रभावित हुआ है और इस चुनाव में लेफ्ट फ्रंट का मुख्य मुद्दा बंगाल को बचाना होगा। ध्यान दिला दें कि लेफ्ट फ्रंट ने पिछले चुनावों में अपना समर्थन खो दिया था। 2011 में लेफ्ट फ्रंट को कुल वोट का 39% मिला था, जबकि 2021 में यह केवल 4.73% रह गया। 2024 के लोकसभा चुनाव में सीपीआई(एम) ने 5.73% वोट हासिल किया। पार्टी इस चुनाव में व्यक्तिगत संपर्क और मोहल्ला बैठक के माध्यम से मतदाताओं को वापस अपने पक्ष में लाने की कोशिश कर रही है। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव दो चरणों में होने हैं। पहला 23 अप्रैल और दूसरा 29 अप्रैल को। मतगणना 4 मई को होगी।
इलाज के लिए आए परिवार की संदिग्ध हालात में मौत।
21 Mar, 2026 11:51 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तिरुवनंतपुरम। केरल के कोच्चि से दिल को झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। शहर के वडुथला इलाके में एक किराए के मकान में एक ही परिवार के पांच लोग मृत पाए गए हैं। मृतकों में दो महिलाएं और तीन मासूम बच्चे शामिल हैं। शुरुआती जांच में पुलिस इसे सामूहिक आत्महत्या का मामला मान रही है। अंदेशा जताया जा रहा है कि पहले परिवार के बड़ों ने बच्चों की जान ली, इसके बाद खुद भी मौत को गले लगा लिया।
इलाज के लिए आए थे कोच्चि
पुलिस के मुताबिक, मृतक परिवार मूल रूप से तिरुवनंतपुरम का रहने वाला था। परिवार पिछले कुछ महीनों से वडुथला में एक किराए के मकान में रह रहा था। बताया जा रहा है कि वे परिवार के किसी सदस्य का पास के ही एक निजी अस्पताल में इलाज कराने के सिलसिले में यहां आए थे। मृतकों की पहचान कनकलता और उनकी बेटी अश्वथी के रूप में हुई है। बाकी तीन मृतक अश्वथी के ही बच्चे थे।
ऐसे खुला राज
अब आपके मन में सवाल उठ रहा होगा कि आखिर कमरे में पांच लोगों की मौत के बारे में पता कैसे चला? एर्नाकुलम नॉर्थ पुलिस स्टेशन के अधिकारियों ने कहा कि यह परिवार शुक्रवार से ही घर से बाहर नहीं निकला था। मकान मालिक को जब सबकुछ ठीक नहीं लगा तो, उन्होंने घर जाकर देखा। अंदर का नजारा देख उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। पांचों सदस्यों के शव घर के भीतर ही पड़े थे। आनन-फानन में मकान मालिक ने पुलिस को सूचना दी।
पहले बच्चों को मारा, फिर खुद दी जान!
सूचना मिलते ही पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। पुलिस सूत्रों का कहना है कि शुरुआती हालात को देखते हुए यह हत्या और फिर आत्महत्या का मामला लग रहा है। आशंका है कि दोनों महिलाओं ने मिलकर पहले तीनों बच्चों की हत्या की और उसके बाद खुदकुशी कर ली। हालांकि, मौत की असली वजह का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट और आगे की जांच के बाद ही चल पाएगा। फिलहाल पुलिस मृतकों के रिश्तेदारों से संपर्क साधने की कोशिश कर रही है। पुलिस ने मामला भी दर्ज कर लिया है। आगे की जांच जारी है।
‘मतदान का अधिकार नहीं छीनने देंगे’, सीएम ममता का बयान।
21 Mar, 2026 10:12 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में चुनाव से पहले माहौल गर्म हो गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ईद के मौके पर बड़ा राजनीतिक संदेश देते हुए भाजपा पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि लोगों के वोट देने के अधिकार को छीना नहीं जाने दिया जाएगा और इसके खिलाफ आखिरी दम तक लड़ाई लड़ी जाएगी। कोलकाता के रेड रोड पर ईद की नमाज के बाद हजारों लोगों को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार चुनाव से पहले वोटर लिस्ट में बदलाव के जरिए लोगों के अधिकार छीनने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी लोकतंत्र और हर नागरिक के अधिकार की रक्षा के लिए खड़ी है।
वोटर लिस्ट पर क्या है विवाद?
तृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि चुनाव से पहले चल रही वोटर लिस्ट की विशेष जांच में बड़ी संख्या में लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं। पार्टी का कहना है कि खासकर अल्पसंख्यक इलाकों में यह प्रक्रिया ज्यादा प्रभाव डाल रही है। ममता बनर्जी ने चेतावनी दी कि वोटर लिस्ट के नाम पर किसी भी तरह का अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
ममता का सख्त संदेश
ममता बनर्जी ने साफ कहा कि जो लोग बंगाल को बांटने और समाज में दरार डालने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें यहां सफल नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी हर हाल में जनता के अधिकार की रक्षा करेगी और भाजपा की किसी भी कोशिश का मजबूती से मुकाबला करेगी।
एकता का संदेश और सियासी संकेत
मुख्यमंत्री ने बंगाल की सांप्रदायिक सौहार्द की परंपरा का जिक्र करते हुए कहा कि यहां हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई सभी मिलकर रहते हैं। उन्होंने साफ कहा कि राज्य में किसी भी तरह की नफरत या विभाजन की राजनीति को जगह नहीं मिलेगी। उनका यह बयान चुनावी माहौल में एक बड़ा सियासी संकेत माना जा रहा है।
‘हद से ज्यादा नुकसान हो रहा, जंग बंद हो’, थरूर का बयान।
21 Mar, 2026 09:06 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध को लेकर कांग्रेस नेता शशि थरूर ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि इस संघर्ष से हो रहा नुकसान अब स्वीकार्य सीमा से बाहर जा चुका है और इसे तुरंत रोका जाना चाहिए। थरूर ने साफ कहा कि यह युद्ध सिर्फ लड़ने वाले देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर भारत समेत पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। नई दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बात करते हुए थरूर ने कहा कि वह हमेशा से शांति के पक्षधर रहे हैं। उन्होंने कहा कि युद्ध किसी समस्या का हल नहीं है और अब समय आ गया है कि दोनों पक्ष अपने रुख में नरमी लाएं। उन्होंने भारत से भी अपील की कि वह इस युद्ध को खत्म कराने में बड़ी भूमिका निभाए।
भारत और दुनिया पर क्या असर?
थरूर ने कहा कि यह संघर्ष आम लोगों की जिंदगी को सीधे प्रभावित कर रहा है। उन्होंने बताया कि तेल और गैस की कीमतें बढ़ रही हैं, जिससे भारत समेत कई देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि इस युद्ध का असर सिर्फ पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया इसके असर को महसूस कर रही है।
युद्ध पर सख्त टिप्पणी
कांग्रेस नेता ने कहा कि युद्ध एक बेकार और नुकसानदेह प्रक्रिया है। उन्होंने अपने संयुक्त राष्ट्र के अनुभव का हवाला देते हुए कहा कि सैनिक खुद युद्ध नहीं चाहते, क्योंकि वे जानते हैं कि इसमें कितना दर्द और नुकसान होता है। उन्होंने कहा कि रोज निर्दोष लोग मारे जा रहे हैं, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं।
अंतरराष्ट्रीय प्रयास की जरूरत
थरूर ने कहा कि अब समय आ गया है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस युद्ध को खत्म करने के लिए कोशिश की जाए। उन्होंने ओमान के विदेश मंत्री की अपील का जिक्र करते हुए कहा कि कई देश चाहते हैं कि यह संघर्ष जल्द खत्म हो। उन्होंने भारत से भी इस दिशा में आगे बढ़कर नेतृत्व करने की बात कही।
महिलाओं को कम टिकट पर भी बोले
इस दौरान थरूर ने महिलाओं को कम टिकट दिए जाने के मुद्दे पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि महिलाओं की भागीदारी बढ़नी चाहिए, क्योंकि वे आबादी का आधा हिस्सा हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उम्मीदवार चयन में जीत की संभावना को भी ध्यान में रखा जाता है, लेकिन भविष्य में महिला आरक्षण से यह स्थिति बेहतर हो सकती है।
सियासी समीकरण बदले, दोनों नेताओं ने साथ लड़ने का किया ऐलान।
21 Mar, 2026 06:32 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तमिलनाडु। की राजनीति में 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले हलचल तेज हो गई है। एक नई राजनीतिक साझेदारी की चर्चा जोर पकड़ रही है, जिसने राज्य की सियासत को और दिलचस्प बना दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री जे जयललिता की करीबी सहयोगी वीके शशिकला ने हाल ही में अपनी नई पार्टी ऑल इंडिया पुराची थलाइवर मक्कल मुनेत्र कषगम बनाई है। शशिकला ने घोषणा की है कि उनकी पार्टी 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में अन्य समान विचारधारा वाले दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी। इसी क्रम में शशिकला ने एस रामदास से मुलाकात की, जो पट्टाली मक्कल कच्ची (पीएमके) के संस्थापक हैं। इस मुलाकात के बाद दोनों नेताओं ने संकेत दिया कि वे मिलकर चुनाव लड़ सकते हैं। रामदास ने कहा कि यह गठबंधन तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा असर डाल रहा है और इससे कई लोगों में हलचल मच गई है। उन्होंने बताया कि यह नया मोर्चा राज्य की सभी 234 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जल्द ही कुछ और दल भी इस गठबंधन में शामिल हो सकते हैं।
पिता और बेटे के साथ राजनीतिक मतभेद
इस बीच, रामदास के बेटे अनबुमणि रामदास ने अलग राजनीतिक रास्ता अपनाते हुए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में शामिल होकर अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम के साथ समझौता किया है। इस वजह से पिता और बेटे के बीच राजनीतिक मतभेद की भी चर्चा हो रही है।
तमिलनाडु का सियासी समीकरण
हालांकि तमिलनाडु में मुख्य मुकाबला फिलहाल द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के नेतृत्व वाले गठबंधन और एनडीए के बीच माना जा रहा है एनडीए में AIADMK के साथ भारतीय जनता पार्टी और PMK जैसे दल शामिल हैं। वहीं, अभिनेता विजय भी अपनी पार्टी तमिलगा वेत्री कषगम के जरिए इस चुनाव में पहली बार उतरने जा रहे हैं। इससे चुनाव त्रिकोणीय मुकाबला बन सकता है। कुल मिलाकर, शशिकला और रामदास की संभावित साझेदारी ने तमिलनाडु की राजनीति को नया मोड़ दे दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस नए गठबंधन में और कौन-कौन शामिल होता है और इसका चुनावी परिणामों पर क्या असर पड़ता है।
लिफ्ट हादसे को लेकर राजनीति तेज, आरोप-प्रत्यारोप शुरू।
21 Mar, 2026 06:07 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
उत्तरी कोलकाता। के सरकारी आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में एक व्यक्ति की कथित तौर पर लिफ्ट में फंसने से मौत हो गई, जिससे विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक तूफान खड़ा हो गया है। विपक्षी भाजपा ने लापरवाही का आरोप लगाते हुए हत्या की जांच की मांग की है। विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने इस मौत को हत्या करार दिया और इसके लिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, जो स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख भी हैं, स्वास्थ्य सचिव नारायण स्वरूप निगम और अस्पताल अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया। सुवेंदु अधिकारी ने पुरबा मेदिनीपुर में चुनाव प्रचार के दौरान पत्रकारों से कहा मेरे पास दस्तावेज हैं... उन्होंने जानबूझकर मरम्मत के अधीन चल रही लिफ्ट का इस्तेमाल करके (उस व्यक्ति की) हत्या कर दी। हत्या का मामला तुरंत दर्ज किया जाना चाहिए। पीड़ित के परिवार के अनुसार, लगभग 40 वर्ष की आयु का वह व्यक्ति लिफ्ट में अचानक खराबी आने पर अंदर फंस गया। उन्होंने आरोप लगाया कि लिफ्ट मरम्मत के अधीन थी, उस समय कोई ऑपरेटर ड्यूटी पर नहीं था और उसे ठीक से सुरक्षित नहीं किया गया था। अस्पताल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि घायल अवस्था और नाक से खून बहने की हालत में उस व्यक्ति को बचाया गया और उसे आपातकालीन इकाई में ले जाया गया, जहां बाद में उसकी मौत हो गई। पुलिस ने कहा कि चल रही जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
सुरक्षा कारणों से इंडियन एयरलाइंस को मिली उड़ान संबंधी नई सलाह
20 Mar, 2026 11:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में इजराइल और ईरान के बीच भीषण जंग ने अब वैश्विक नागरिक उड्डयन के लिए जोखिम वाली स्थिति पैदा कर दी है। भारत के विमानन नियामक, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने शुक्रवार को एडवाइजरी जारी करते हुए भारतीय एयरलाइंस को खाड़ी क्षेत्र के 9 अहम हवाई क्षेत्रों से पूरी तरह बचने की सलाह दी है। एडवाइज़री के मुताबिक डीजीसीए ने एयरलाइंस से बहरीन, ईरान, इराक, इजराइल, जॉर्डन, कुवैत, लेबनान, कतर और संयुक्त अरब अमीरात के हवाई क्षेत्रों से बचने को कहा है। भारतीय एयरलाइंस ओमान और सऊदी अरब के हवाई क्षेत्रों के ऊपर कुछ शर्तों के अधीन उड़ानें संचालित कर सकती हैं, डीजीसीए ने एयरलाइंस से कहा कि वे सऊदी अरब और ओमान के हवाई क्षेत्र के भीतर एफएल 320 या 32,000 फीट से नीचे उड़ानें संचालित न करें, जो निम्नलिखित अनिवार्य रिपोर्टिंग बिंदुओं द्वारा परिभाषित खंडों के दक्षिण में हैं। 9 हवाई क्षेत्रों के बारे में डीजीसीए ने एयरलाइंस से कहा कि वे प्रभावित हवाई क्षेत्र के अंदर... सभी उड़ान स्तरों और ऊंचाइयों पर उड़ान भरने से बचें। कोई भी जारी संचालन ऑपरेटर के विवेक पर होगा, जो उनके सुरक्षा जोखिम आकलन पर आधारित होगा। प्रभावित क्षेत्र के हवाई अड्डों के लिए संचालन, जहां अन्य अंतरराष्ट्रीय वाहक वर्तमान में उड़ान भर रहे हैं, उसमें सभी संभावित स्थितियों को कवर करने के लिए मज़बूत आपातकालीन योजना शामिल होनी चाहिए, जो ऑपरेटरों द्वारा सुरक्षा जोखिम आकलन का हिस्सा हों। डीजीसीए ने कहा कि यह एडवाइज़री तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है और 28 मार्च तक वैध रहेगी, जब तक कि आगे के घटनाक्रमों द्वारा इसकी समीक्षा या इसे बदला न जाए। ऑपरेटरों को सलाह दी जाती है कि वे अपने उड़ान चालक दल को नवीनतम नोटम और उड़ान को प्रभावित करने वाले हवाई क्षेत्र प्रतिबंधों के बारे में जानकारी दें, जो पहले से ही हवा में हैं। बता दें नोटम का अर्थ है विमान चालकों के लिए सूचना, जो पायलटों और चालक दल को हवाई क्षेत्र और हवाई अड्डों के बारे में वास्तविक समय के अपडेट प्रदान करता है। संयुक्त राज्य अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरानी क्षेत्र के अंदर लक्ष्यों के खिलाफ किए गए हालिया सैन्य हमलों के कारण नागरिक उड्डयन के लिए एक उच्च जोखिम वाला वातावरण बन गया है। इन हमलों के जवाब में ईरान ने जवाबी उपायों की घोषणा की है। डीजीसीए ने कहा कि वर्तमान स्थिति नागरिक उड़ान संचालन के लिए गंभीर खतरे पैदा करती है।
पीएम मोदी की सक्रिय कूटनीति, पांच देशों के नेताओं को किया फोन
20 Mar, 2026 10:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में छिड़ी जंग ने दुनिया को परेशान कर दिया है। कई देश ऊर्जा संकट के दौर से गुजर रहे हैं। पाकिस्तान, नेपाल, श्रीलंका जैसे देशों में पेट्रोल-डीजल के साथ ही गैस की कमी आ गई है। स्थिति को देखकर इन देशों ने कीमतें भी बढ़ा दी है, जिसका असर जनता पर सीधे पड़ रहा है। तमाम देश ईरान युद्ध को बंद कराने में अपने-अपने स्तर से जुटे गए हैं। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दिशा में पहली बार सामूहिक तौर पर बड़ी पहल की है। पीएम मोदी ने पांच देशों के राष्ट्राध्यक्षों से बात कर वेस्ट एशिया के मौजूदा हालात पर गंभीर चिंता जाहिर की है। उन्होंने इसके साथ ही संघर्ष और तनाव कम करने की दिशा में कदम उठाने का आग्रह किया है। इसके साथ ही पीएम मोदी ने एनर्जी फैसिलिटी यानी पेट्रोल और गैस के संयंत्रों पर हमले की भी कड़े शब्दों में निंदा की है।
वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने कूटनीतिक स्तर पर सक्रियता तेज की है। प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुवार देर रात को कतर, फ्रांस, जॉर्डन, ओमान और मलेशिया के नेताओं से अलग-अलग फोन पर बातचीत कर क्षेत्र की स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की। प्रधानमंत्री मोदी ने इन सभी वार्ताओं में एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हो रहे हमलों की कड़ी निंदा कर कहा कि इसतरह के हमले न केवल क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित करते हैं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर भी गंभीर असर डाल सकते हैं। उन्होंने खास तौर पर होर्मुज स्ट्रेट में सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया, जो अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा परिवहन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग है।
कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी के साथ बातचीत में प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के समर्थन का आश्वासन दिया और क्षेत्र में ऊर्जा ढांचे पर हमलों की निंदा की। उन्होंने कतर में रह रहे भारतीय समुदाय की देखभाल और सहयोग के लिए उनका आभार भी व्यक्त किया। जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला-सेंकड से बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें अग्रिम ईद की शुभकामनाएं दीं और क्षेत्रीय हालात पर चिंता जाहिर की है। दोनों नेताओं ने सहमति जाहिर की, कि संवाद और कूटनीति ही शांति बहाली का एकमात्र रास्ता है।
वहीं फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ बातचीत में भी प्रधानमंत्री मोदी ने तनाव कम करने और कूटनीतिक प्रयासों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। दोनों नेताओं ने वेस्ट एशिया में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए आपसी समन्वय जारी रखने पर सहमति जाहिर की। वहीं, ओमान के सुल्तान सुल्तान हैथम बिन तारिक अल सैद के साथ हुई बातचीत को प्रधानमंत्री मोदी ने प्रोडक्टिव बताया। उन्होंने ओमान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई और संकट के दौरान हजारों लोगों, खासकर भारतीयों की सुरक्षित वापसी में ओमान की भूमिका की सराहना की। इसके बाद पीएम मोदी ने मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम से भी बातचीत की है।
पश्चिम एशिया क्षेत्र में हालात लगातार गंभीर हो रहे हैं। ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में तेल और गैस प्रतिष्ठानों पर हमले तेज किए हैं, जो कथित तौर पर उसके साउथ पार्स गैस फील्ड पर हुए हमले के जवाब में हुए हैं। यह गैस फील्ड दुनिया का सबसे बड़ा प्राकृतिक गैस भंडार माना जाता है और कतर के साथ साझा किया जाता है।
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