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जल्द ही भारत पहुंचेंगे एलपीजी लेकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार कर चुके दो भारतीय जहाज
24 Mar, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । एलपीजी लेकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार कर चुके दो भारतीय जहाज (Two Indian Ships crossed Strait of Hormuz carrying LPG) जल्द ही भारत पहुंचेंगे (Will reach India Soon) । इससे उम्मीद बंधी है कि भारत में एलपीजी संकट कम होगा ।
शिप-ट्रैकिंग डेटा से पता चला है कि जहाज, जग वसंत और पाइन गैस, सुरक्षित रास्ते की मंजूरी मिलने के बाद, रणनीतिक रूप से अहम होर्मुज स्ट्रेट पार कर चुके हैं। जहाज लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) लेकर आ रहे हैं, जिसका इस्तेमाल भारत में खाना पकाने के लिए बड़े पैमाने पर होता है। जहाजों ने अपने ट्रैकिंग सिस्टम के जरिए भारतीय मालिकाना हक का संकेत दिया, जो कई जहाजों द्वारा इस सेंसिटिव रास्ते पर चलने के लिए उठाया गया एक एहतियाती कदम था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगर जहाजों की यात्रा बिना किसी रुकावट के जारी रहती है, तो उनके सोमवार शाम तक ओमान की खाड़ी पहुंचने की उम्मीद है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, होर्मुज स्ट्रेट से पूरा रास्ता तय करने में लगभग 14 घंटे लगते हैं। यह सब कुछ ऐसे समय में हुआ है जब स्ट्रेट, जो तेल और गैस शिपमेंट के लिए एक अहम ग्लोबल रास्ता है, फरवरी के आखिर में इस इलाके में यूएस और इजरायली हमलों के बाद बढ़ते तनाव से बुरी तरह प्रभावित हुआ है। तब से, ईरान ने पानी के रास्ते से आने-जाने पर काफी हद तक रोक लगा दी है, और बातचीत के बाद सिर्फ भारत समेत कुछ देशों से जुड़े चुनिंदा जहाजों को ही गुजरने की इजाजत दी है।
शिपिंग पैटर्न से पता चलता है कि ईरान जहाजों को अपने समुद्र तट के किनारे से गुजरने का निर्देश देकर ट्रैफिक को कंट्रोल कर रहा है। इसके उलट, ओमान के पास के आम रास्ते में जोखिम देखा गया है; इस महीने की शुरुआत में एक जहाज पर हमला होने की खबर है। ‘जग वसंत’ और ‘पाइन गैस’ दोनों ने फरवरी के आखिर में, लड़ाई बढ़ने से ठीक पहले, फारस की खाड़ी में एंट्री की थी। जग वसंत ने कुवैत से एलपीजी लोड की, जबकि पाइन गैस ने यूएई के रुवाइस से अपना माल उठाया। तनाव की वजह से इस इलाके में फंसे हुए थे। इस महीने की शुरुआत में, भारतीय झंडे वाले दो और एलपीजी कैरियर ने भी इसी तरह की यात्राएं सफलतापूर्वक पूरी की थीं।
NIA की कार्रवाई: लाल किला विस्फोट मामले में कश्मीर में नौ स्थानों पर छापेमारी
23 Mar, 2026 09:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
श्रीनगर। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने दिल्ली के लाल किले के पास पिछले साल 10 नवंबर को हुए कार बम विस्फोट मामले की जांच के तहत सोमवार को कश्मीर में नौ स्थानों पर छापेमारी की। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों के अनुसार, श्रीनगर, बारामुला, कुपवाड़ा और कुलगाम जिलों में उन व्यक्तियों से जुड़े ठिकानों पर तलाशी ली गयी, जिन्हें विस्फोट के पीछे कथित “आतंकी मॉड्यूल” से जुड़ा माना जा रहा है। इस विस्फोट में 11 लोगों की मौत हो गई थी और 32 अन्य घायल हुए थे।
एनआईए के एक प्रवक्ता ने कहा, “जम्मू-कश्मीर के विभिन्न स्थानों पर नौ जगहों पर तलाशी अभियान चलाया जा रहा है।” सूत्रों के अनुसार, बारामुला जिले के रफियाबाद निवासी डॉ. बिलाल नसीर मल्ला के घर पर भी तलाशी ली गई, जिसे इस मामले में गिरफ्तार किया गया है। कुपवाड़ा जिले के लंगेट क्षेत्र में भी छापेमारी जारी है। इसके अलावा श्रीनगर के नौगाम इलाके और दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले में भी कई स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया गया।
एनआईए इस मामले में अब तक कई डॉक्टरों सहित 11 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। इस विस्फोट का मुख्य आरोपी डॉ. उमर उन नबी हमले में ही मारा गया था। उल्लेखनीय है कि पिछले साल 10 नवंबर को राष्ट्रीय राजधानी के लाल किले के पास भीड़भाड़ वाले इलाके में विस्फोटकों से भरी कार में धमाका हुआ था, जिसमें 11 लोगों की मौत हो गयी थी और अन्य 32 घायल हो गए थे।
मुख्य सड़क जाम में फंसे लोग, अतिक्रमण बना रोजमर्रा की मुसीबत
23 Mar, 2026 08:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पिनगवां। कस्बा पिनगवां का मुख्य मार्ग इन दिनों अतिक्रमण की चपेट में हैं, इसके चलते यहां रोजाना जाम की समस्या आम है। सड़क किनारे अवैध कब्जे और यातायात व्यवस्था की अनदेखी के कारण लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोग इस समस्या से काफी समय से जूझ रहे हैं, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। जानकारी के अनुसार, मुख्य मार्ग पर रेहड़ी-पटरी वाले अपने ठेले सड़क के किनारे लगाते हैं, जिससे रास्ता संकरा हो जाता है।
वहीं, दुकानदार भी अपनी दुकानों के सामने बरामदों तक सामान फैलाकर अतिक्रमण कर लेते हैं। इसके अलावा ऑटो रिक्शा चालक भी सड़क पर ही खड़े होकर सवारियां बैठाते हैं, जिससे यातायात और अधिक बाधित हो जाता है। स्थानीय निवासी हिदायत खान, रफीक खान, लियाकत अली, सलीम खान, इमरान खान और सहरून खान का कहना है कि आए दिन लगने वाला जाम लोगों के लिए सिरदर्द बन चुका है। खासकर सुबह और शाम के समय स्थिति और भी खराब हो जाती है, जब लोगों को घंटों जाम में फंसे रहना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार प्रशासन को इस समस्या से अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि अतिक्रमण हटाने के लिए अभियान चलाया जाए और यातायात व्यवस्था को दुरुस्त किया जाए, ताकि आमजन को राहत मिल सके। यदि जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो आने वाले समय में हालात और बिगड़ सकते हैं।
कई बार अतिक्रमण हटाने के लिए अभियान चलाया गया है और दुकानदारों व रेहड़ी वालों को चेतावनी भी दी गई है, लेकिन इसके बावजूद वे बार-बार सड़क पर कब्जा कर लेते हैं। उन्होंने कहा कि अब जल्द ही नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। -मनोज कुमार सरपंच प्रतिनिधि
कोल्ड स्टोरेज हादसा: अमोनिया गैस टैंक फटने से प्रयागराज में बड़ी त्रासदी
23 Mar, 2026 07:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
प्रयागराज: गंगापार इलाके के फाफामऊ के पास चंदापुर गांव में स्थित कोल्ड स्टोरेज धराशायी हो गया। तेज आवाज के साथ अमोनिया गैस टैंक फटने के चलते हादसा हुआ है। कोल्ड स्टोरेज जिस समय गिरा उस समय वहां पर दो दर्जन से अधिक मजदूर मौजूद थे, जो मलबे में दब गए। हादसे में आठ मजदूरों की मौत बताई जा रही है। छह की हालत नाजुक है। एनडीआरएफ टीम बचाव कार्य में जुटी है। घायलों को एसआरएन अस्पताल में भर्ती कराया गया है। यह कोल्ड स्टोरेज पूर्व मंत्री अहमद का बताया जा रहा है। फाफामऊ क्षेत्र के चंदापुर में प्रयागराज-लखनऊ हाईवे पर स्थित सपा नेता और पूर्व मंत्री अंसार अहमद का कोल्ड स्टोरेज तेज धमाके के साथ धराशायी हो गया। अमोनिया गैस टैंक फटने के चलते यह हादसा हुआ है। मलबे में डेढ़ दर्जन से अधिक मजदूर दब गए। आनन फानन में सभी को बाहर निकाला गया। इसमें आठ मजदूरों के मौत की बात कही जा रही है। छह की हालत नाजुक बताई जा रही है। जिले भर की एंबुलेंस को राहत बचाव कार्य में लगाया गया है। एनडीआरएफ और एसडीआरफ की टीम रेस्क्यू आपरेशन में जुटी है।हादसे के चलते मलाक हरहर में लखनऊ हाईवे पर वाहनों का आवागमन ठप हो गया है।
मौके पर जिलाधिकारी मनीष कुमा वर्मा, पुलिस कमिश्नर जोगेंद्र कुमार समेत तमाम अधिकारी मौके पर पहुंच गए हैं। मलबे में डेढ़ दर्जन से अधिक लोग दब गए। घायलों को बाहर निकालकर एंबुलेंस से एसआरएन अस्पताल पहुंचाया गया है। फाफामऊ समेत आसपास के कई थानों की फोर्स मौके पर पहुंच गई है। बताया जा रहा है कि मौके से निकाले गए चार मजदूरों की हालत नाजुक बनी हुई है। मौके पर एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीम बचाव कार्य में जुट गई है। दर्जन भर से अधिक जेसीबी मलबो को हटाकर दबे हुए लोगों को खोज रही है। शाम सवा चार बजे तक तीन शव निकाले जा चुके हैं। सभी मजदूर बिहार के सहरसा जिले के बताए जा रहे हैं। एक मृतक की पहचान सहरसा के ज्योतिष के रूप में हुई है।
पिता-पुत्र के बीच खींचतान, शीर्ष अदालत ने सौंपा मामला सिविल कोर्ट को
23 Mar, 2026 06:10 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली|तमिलनाडु की राजनीति में रसूख रखने वाली पार्टी पीएमके के भीतर 'वर्चस्व का युद्ध' छिड़ा है। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने पार्टी के भीतर चुनाव चिह्न को लेकर चल रहे विवाद पर अपना रुख साफ कर दिया है। शीर्ष अदालत ने मद्रास हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है। हाई कोर्ट ने कहा था कि 'आम' चुनाव चिह्न पर मालिकाना हक का फैसला चुनाव आयोग नहीं, बल्कि सिविल कोर्ट करेगा।
क्या है पूरा विवाद?
दरअसल, पीएमके संस्थापक रामदास अपने बेटे के खिलाफ चल रहे हैं। उन्होंने पार्टी के नाम, झंडे और चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करने से रोकने के लिए कानूनी मोर्चा खोल दिया है। इतना ही नहीं, पिछले साल रामदास ने अपने बेटे अंबुमणि को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया था। इसके बाद से ही दोनों गुटों में तलवारें खिंची हुई हैं। रामदास चाहते हैं कि चुनाव आयोग या तो उनके गुट को 'आम' का चिह्न आवंटित करे या फिर इसे पूरी तरह फ्रीज कर दे।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या-क्या कहा?
चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि यह विवाद एक गैर-पंजीकृत राजनीतिक दल के भीतर का है। इसलिए चुनाव आयोग इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकता। कोर्ट ने कहा, "हम हाई कोर्ट के आदेश में कोई खामी नहीं पाते। चुनाव चिह्न के आवंटन का विवाद सिविल कोर्ट के जरिए ही सुलझाया जाना चाहिए।" हालांकि, तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को देखते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि सिविल कोर्ट को इस पर जल्द सुनवाई करनी चाहिए।
विधानसभा चुनाव पर क्या होगा असर?
तमिलनाडु और पुडुचेरी में 23 अप्रैल को विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में चुनाव चिह्न का 'फ्रीज' होना या किसी एक गुट के पास जाना जीत-हार का बड़ा अंतर पैदा कर सकता है। अगर मामला सिविल कोर्ट में लंबा खिंचता है, तो संभव है कि दोनों गुटों को नए चुनाव चिह्न के साथ मैदान में उतरना पड़े।
सरकार का किसान हित में कदम, समर्थन मूल्य बढ़ाया
23 Mar, 2026 03:03 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लखनऊ|मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित लोकभवन में हुई सरकार की कैबिनेट की बैठक में किसानों से हित में बड़ा फैसला लिया गया. इसके अलावा भी इस कैबिनेट बैठक में 35 और महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी मिली है. इस बैठक में खाद्य एवं रसद विभाग से जुड़े अहम फैसले के तहत बताया गया है कि इस बर्ष गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2585 रुपये प्रतिकिलो निर्धारित किया गया है|
कब से कब तक होगी प्रदेश में गेंहू की खरीद
गौरतलब है कि इस बार राज्य में गेंहू की खरीद 30 मार्च 2026 से 15 जून 2026 तक की जाएगी. इसके लिए सभी 75 जिलों में करीब 6500 क्रय केंद्र स्थापित किए जाएंगे. कैबिनेट की इस बैठक में निर्णय लिया गया है कि इस वर्ष खरीद की व्यवस्था आठ एजेंसियों के माध्यम से की जाएगी. जिनमें भारतीय खाद्य निगम, उत्तर प्रदेश मंडी परिषद, प्रांतीय सहकारी संघ, प्रादेशिक सहकारी संघ, उत्तर प्रदेश राज्य भंडारण निगम, राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ और राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ शामिल हैं|
बैठक उर्जा विभाग से जुड़े अहम फैसले
इतना ही नहीं इस बैठक में उर्जा विभाग से जुड़े भी कई फैसले लिए गए. जिसमें घाटमपुर पावर प्लांट में 660 मेगावॉट की तीन यूनिट लगाने का प्रावधान था, इनमें से दो यूनिट शुरू हो चुकी हैं, जबकि तीसरी यूनिट जल्द शुरू होगी. इस प्लांट के लिए झारखंड के दुमका में पछवारा कोल माइन 2016 में आवंटित की गई थी, कोल माइन के विकास के लिए 2242.90 करोड़ की राशि को कैबिनेट की मंजूरी मिली. घाटमपुर पावर प्लांट केंद्र और राज्य सरकार का संयुक्त उपक्रम है|
Trinamool Congress की नई रणनीति, उत्तर-दक्षिण में अलग-अलग अभियान
23 Mar, 2026 01:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की तैयारियां सभी दलों ने पूरे दमखम के साथ शुरू कर दी है. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का पूरा फोकस इस बार बंगाल चुनाव में ही है. ऐसे में 15 सालों तक सत्ता में काबिज रहने वाली टीएमसी के लिए बड़ी चुनौती है. टीएमसी ने भी जीत के लिए सारे हथकंडे अपनाने शुरू कर दिए हैं और तैयारियों में जुट गई है. बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उत्तरी बंगाल से तो अपने भतीजे और पार्टी के महासचिव अभिषेक बनर्जी को दक्षिण बंगाल की जिम्मेदारी सौंप दी है. दोनों भाजपा का मुकाबला करने के लिए तैयार हैं. ममता बनर्जी और उनके भतीजे 24 मार्च से प्रचार-प्रसार की शुरुआत करेंगे।
उत्तर बंगाल में BJP से कैसे निपटेंगी ममता?
वैसे तो बंगाल टीएमसी का गढ़ माना जाता है, लेकिन उत्तर बंगाल भाजपा का गढ़ माना जाता रहा है. इसलिए यहां का जिम्मा खुद सीएम ममता बनर्जी ने उठाया है. 24 मार्च को दार्जिलिंग जिले के माटीगारा और जलपाईगुड़ी के मैनागुड़ी से चुनावी सभा को संबोधित करेंगी. यहां टीएमसी पूरी ताकत के साथ भाजपा को टक्कर देने के लिए तैयार है. इन क्षेत्रों में भाजपा ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के दौरान अपनी मजबूत स्थिति को बनाए रखा है।
हर वोटर्स पर TMC की नजर
उत्तर बंगाल पर टीएमसी अपनी एक बार फिर राजनीतिक पकड़ को मजबूत करने के लिए हरसंभव प्रयास में जुटी है. पिछले चुनाव में टीएमसी का प्रदर्शन ठीक-ठाक रहा लेकिन भाजपा ने भी इन इलाकों में अपनी पैठ बनाने की कोशिश की है. इसलिए टीएमसी इसे भाजपा की चुनौती मान रही है और पूरे दमखम के साथ टक्कर देने के लिए तैयार बैठी है. भाजपा यहां पर राजबंशी, आदिवासी और प्रवासी समुदायों पर फोकस रख रही है, तो वहीं टीएमसी भी इन मतदाताओं पर नजर बनाए हुए है. कुल मिलाकर यहां मुकाबला दिलचस्प रहने वाला है।
24 मार्च से अभिषेक बनर्जी करेंगे चुनावी सभा का आगाज
एक छोर से जहां टीएमसी की अध्यक्ष और सीएम ममता बनर्जी मोर्चा थामे हुए हैं, तो वहीं दूसरे छोर पर उनके भतीजे और पार्टी के महासचिव अभिषेक बनर्जी मोर्चा थामने के लिए तैयार बैठे हैं. 24 मार्च को अभिषेक बनर्जी दक्षिण बंगाल से चुनाव प्रचार-प्रसार की औपचारिक रूप से शुरुआत करेंगे. हालांकि, यह क्षेत्र पहले से ही टीएमसी का मजबूत गढ़ माना जाता है. 24 मार्च को अभिषेक दक्षिण 24 परगना में सभा को संबोधित करेंगे और 25 मार्च को दासपुर, केशियारी और नारायणगढ़ में रैलियों को संबोधित करेंगे।
बड़ी खुशखबरी: ईंधन की किल्लत के बीच मंगलुरु में आया तेल और गैस का जहाज
23 Mar, 2026 10:16 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मंगलुरु (कर्नाटक): इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते वैश्विक तनाव और युद्ध के माहौल के बीच, कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले के न्यू मंगलुरु पोर्ट (NMPA) पर ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बड़ी हलचल देखी गई है. शनिवार और रविवार को रूस से भारी मात्रा में कच्चा तेल और अमेरिका से एलपीजी लेकर दो बड़े जहाज सुरक्षित पहुंच गए हैं.
रूस से आया 96,000 मीट्रिक टन कच्चा तेल
रूस के प्रिमोर्स्क (Primorsk) बंदरगाह से 'एक्वा टाइटन' नामक विशाल जहाज शनिवार देर रात मंगलुरु पहुंचा. इस जहाज में लगभग 96,000 मीट्रिक टन 'यूराल क्रूड ऑयल' (कच्चा तेल) लदा हुआ है. अधिकारियों के मुताबिक, यह तेल मंगलुरु रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (MRPL) के लिए मंगाया गया है. वर्तमान में जहाज से तेल उतारने की प्रक्रिया जारी है, जो स्थानीय रिफाइनरी की जरूरतों को पूरा करेगा.
अमेरिका से पहुंची 16,000 मीट्रिक टन रसोई गैस
कच्चे तेल के साथ-साथ गैस आपूर्ति के मोर्चे पर भी राहत भरी खबर है. रविवार सुबह अमेरिका के टेक्सस से 'पिक्सिस पायोनियर' नामक मालवाहक जहाज 16,000 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर मंगलुरु बंदरगाह पहुंचा. यह खेप मंगलुरु स्थित 'एजिस गैस स्टोरेज यूनिट' को सप्लाई की जा रही है. न्यू मंगलुरु पोर्ट अथॉरिटी के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि गैस उतारने का काम शुरू कर दिया गया है और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं.
क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा के लिए अहम
वैश्विक स्तर पर चल रहे युद्ध और अस्थिरता के बीच रूस और अमेरिका जैसे देशों से ईंधन की यह निर्बाध आपूर्ति भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है. अधिकारियों ने बताया कि दोनों जहाजों के आगमन और अनलोडिंग की प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित और सुचारू रूप से चल रही है.
धर्म और राजनीति की टकराहट: चारधाम मंदिरों में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर रोक बनी विवाद का केंद्र
23 Mar, 2026 10:14 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
देहरादून (उत्तराखंड): देवभूमि उत्तराखंड में धार्मिक आस्था हमेशा से लोगों को जोड़ने का माध्यम रही है, लेकिन इस बार धामों से जुड़े कुछ फैसलों ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है. आमतौर पर राजनीतिक बयानबाजी या सरकारी नीतियां ही विवाद की वजह बनती हैं, लेकिन अब मंदिर समितियों के निर्णय खुद चर्चा के केंद्र में आ गए हैं. ताजा मामला गंगोत्री धाम और बदरी केदार मंदिर समिति से जुड़े फैसलों का है, जिसने राज्य की राजनीति और समाज दोनों को आमने-सामने ला दिया है.
गैर हिंदुओं के प्रवेश पर रोक: दरअसल कुछ समय पहले बदरी केदार मंदिर समिति ने बदरीनाथ धाम और केदारनाथ धाम में गैर सनातनियों के प्रवेश को लेकर सख्त रुख अपनाया था. इसके बाद अब गंगोत्री धाम से भी इसी तरह का निर्णय सामने आया है, जिसने इस पूरे मुद्दे को और ज्यादा संवेदनशील बना दिया है. गंगोत्री मंदिर समिति ने गैर सनातनियों के प्रवेश पर रोक लगाने के साथ-साथ कुछ विशेष शर्तें भी तय की हैं.
पंचगव्य का करना होगा पान: समिति के फैसले के अनुसार यदि कोई गैर सनातनी गंगोत्री धाम में प्रवेश करना चाहता है, तो उसे पंचगव्य का पान करना होगा. पंचगव्य, जो कि सनातन परंपरा में बेहद पवित्र माना जाता है, पांच तत्वों गोमूत्र, गोबर, दूध, दही और घी से मिलकर तैयार होता है. सनातन धर्म में गाय को माता का दर्जा दिया गया है, इसलिए इन तत्वों का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व बहुत अधिक माना जाता है. समिति का तर्क है कि पंचगव्य का सेवन व्यक्ति की आस्था को स्पष्ट करता है और उसे शुद्ध बनाता है, जिससे वह धाम में प्रवेश के योग्य हो जाता है.
मामले में कांग्रेस ने क्या कहा: हालांकि इस निर्णय के सामने आते ही राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है. विपक्षी दलों ने इसे समाज को बांटने वाला कदम करार दिया है. कांग्रेस नेताओं का कहना है कि मुस्लिम समाज मूर्ति पूजा में विश्वास नहीं रखता, इसलिए वह पहले से ही ऐसे मंदिरों में दर्शन के लिए नहीं जाता. ऐसे में इस तरह के फैसले अनावश्यक हैं और केवल समाज में विभाजन पैदा करने के लिए लिए गए हैं. कांग्रेस इसे चुनाव से पहले का राजनीतिक एजेंडा भी बता रही है, जिसका मकसद सामाजिक सौहार्द को प्रभावित कर चुनावी लाभ लेना है.
बीजेपी के नेता दे रहे ये तर्क: वहीं दूसरी ओर सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी इस मुद्दे पर संतुलित रुख अपनाती नजर आ रही है. पार्टी के विधायक विनोद चमोली ने कहा कि इस तरह के कठोर फैसलों की शायद जरूरत नहीं थी, क्योंकि मुस्लिम समाज खुद ही मूर्ति पूजा नहीं करता और ऐसे धामों में नहीं आता. हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि आजकल कई लोग धार्मिक स्थलों पर केवल सोशल मीडिया के लिए रील बनाने या मनोरंजन के उद्देश्य से पहुंचते हैं, जिससे धामों की गरिमा प्रभावित होती है. उनके अनुसार ऐसे लोगों को रोकने के लिए ही समिति ने यह कदम उठाया हो सकता है.
गैर सनातनी को देना होगा एफिडेविट: इससे पहले बदरी केदार मंदिर समिति ने भी गैर सनातनियों के प्रवेश को लेकर एक और शर्त रखी थी. समिति ने कहा था कि यदि कोई गैर सनातनी इन धामों के दर्शन करना चाहता है, तो उसे एक एफिडेविट देना होगा, जिसमें उसकी आस्था और नियमों के पालन की बात दर्ज होगी. यह निर्णय भी काफी चर्चा में रहा और इसे लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं.
फैसले पर उठ रहे सवाल: अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या धार्मिक स्थलों की पवित्रता बनाए रखने के लिए इस तरह के सख्त कदम जरूरी हैं, या फिर ये फैसले समाज में नई खाई पैदा कर सकते हैं. एक तरफ जहां मंदिर समितियां अपनी परंपराओं और मान्यताओं की रक्षा की बात कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ आलोचकों का मानना है कि इस तरह के निर्णय भारत जैसे बहु-सांस्कृतिक समाज में विभाजन को बढ़ावा दे सकते हैं.
चारधाम यात्रा में पहुंचते हैं लाखों श्रद्धालु: गौरतलब है कि उत्तराखंड के ये चारों धाम बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र हैं. ऐसे में इन धामों से जुड़े किसी भी फैसले का असर व्यापक स्तर पर पड़ता है. यही वजह है कि इस मुद्दे पर केवल स्थानीय ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है.
क्या धार्मिक व्यवस्थाओं में दिखेगा बदलाव: फिलहाल यह स्पष्ट है कि आस्था और परंपरा के नाम पर लिए गए इन फैसलों ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है. आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह विवाद किस दिशा में जाता है, क्या यह केवल राजनीतिक बहस बनकर रह जाएगा या फिर इससे धार्मिक व्यवस्थाओं में कोई स्थायी बदलाव देखने को मिलेगा.
बिहार दिवस स्पेशल: नालंदा यूनिवर्सिटी – ज्ञान का वैश्विक केन्द्र
23 Mar, 2026 09:10 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पटना : 22 मार्च को जब पूरा राज्य 'बिहार दिवस' मना रहा है, तो हमारा सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है. बिहार सिर्फ एक राज्य नहीं, बल्कि वह भूमि है जिसने पूरी दुनिया को ज्ञान का प्रकाश दिया. जब नालंदा विश्वविद्यालय की चर्चा होती है, तो हमारी आंखों के सामने लाल ईंटों के खंडहर उभर आते हैं. लेकिन आज जो महज एक खंडहर है, वह कभी दुनिया का सबसे बड़ा और पहला आवासीय विश्वविद्यालय हुआ करता था.
दुनिया का सबसे पुराना विश्वविद्यालय : एक ऐसा संस्थान जिसने 700 सालों तक पूरी दुनिया में ज्ञान की अलख जगाई. अगर 1193 में आक्रांता बख्तियार खिलजी ने इसे आग न लगाई होती, तो आज ऑक्सफोर्ड और कैंब्रिज जैसी यूनिवर्सिटी का नाम किसी की जुबान पर नहीं होता, बल्कि पूरी दुनिया 'नालंदा' का ही लोहा मान रही होती. नालंदा को यूनेस्को ने विश्व धरोहर घोषित किया हुआ है.
413 ई. में हुई थी स्थापना : सम्राटों का मिला साथ स्थानीय टूरिस्ट गाइड और इतिहास के जानकार अनिल कुमार और शिवप्रिय कुमार बताते हैं कि नालंदा महाविहार (बौद्ध विश्वविद्यालय) की स्थापना 5वीं शताब्दी (413 ईस्वी) में गुप्त वंश के शासक कुमार गुप्त ने की थी. बाद में इस विश्वविद्यालय को सम्राट हर्षवर्धन और 9वीं सदी में पाल शासकों का भरपूर संरक्षण मिला. खुदाई में मिली मुद्राओं से भी इसकी पुष्टि होती है. यह उस दौर का ऐसा विश्वविद्यालय था, जिसे चलाने के लिए आसपास के 200 गांवों का लगान दान में दिया जाता था.
अलग-अलग विषयों पर होती थी पढ़ाई : आज के दौर में भले ही हर विषय के लिए अलग-अलग संस्थान हों, लेकिन 5वीं सदी में नालंदा एकमात्र ऐसी संस्था थी, जहां साहित्य, ज्योतिष, मनोविज्ञान, कानून, खगोल विज्ञान, विज्ञान, युद्ध कला, इतिहास, गणित, वास्तुकला, अर्थशास्त्र, चिकित्सा (आयुर्वेद) और योग की एक साथ पढ़ाई होती थी. यहां दाखिला लेना आसान नहीं था.
"यहां प्रवेश के लिए मगध साम्राज्य और बौद्ध धर्म से जुड़े 10 कठिन सवाल पूछे जाते थे. जो छात्र 3 का सही जवाब दे देता था, उसे दाखिला मिल जाता था. एक बार दाखिला मिलने के बाद छात्र की शिक्षा, रहना और खाना सब कुछ पूरी तरह मुफ्त होता था."- प्रवीण कुमार, टूरिस्ट गाइड
विश्व का पहला आवासीय विश्वविद्यालय : नालंदा विश्वविद्यालय विश्व का पहला आवासीय विश्वविद्यालय था. इसका परिसर इतना विशाल था कि इसमें 300 से ज्यादा छात्रों के कमरे और 7 बड़े-बड़े हॉल थे. यहां भारत के अलग-अलग राज्यों के अलावा चीन, तिब्बत, जापान, कोरिया, मंगोलिया, ग्रीस, ईरान और इंडोनेशिया जैसे देशों से छात्र पढ़ने आते थे. एक समय में यहां 10,000 छात्र अध्ययन करते थे और उन्हें पढ़ाने के लिए 2000 विद्वान शिक्षक नियुक्त थे. सम्राट हर्षवर्धन, धर्मपाल, वसुबंधु, आर्यभट्ट और नागार्जुन जैसे महान विद्वान इसी विश्वविद्यालय की देन हैं.
9 मंजिला लाइब्रेरी सबसे बड़ी धरोहर : चीनी यात्री ह्वेन सांग और इत्सिंग ने यहां ज्ञान प्राप्त किया और लौटकर दुनिया को नालंदा की महानता बताई. नालंदा की सबसे बड़ी धरोहर इसकी 9 मंजिला लाइब्रेरी थी, जिसे 'धर्मगंज' कहा जाता था. इसमें 3 लाख से अधिक हस्तलिखित किताबें और पांडुलिपियां मौजूद थीं. लेकिन 1193 में बख्तियार खिलजी नाम के एक लुटेरे आक्रांता ने इस पूरे विश्वविद्यालय को तहस-नहस कर दिया.
बख्तियार खिलजी ने ईर्श्या में जलाई लाइब्रेरी : इतिहासकार बताते हैं कि एक बार बख्तियार खिलजी बहुत बीमार पड़ गया. उसके हकीमों के इलाज से कोई फायदा नहीं हुआ. तब नालंदा विश्वविद्यालय के आयुर्वेद विभाग के प्रमुख आचार्य राहुल श्रीभद्र ने उसका इलाज किया. खिलजी भारत की दवा नहीं खाना चाहता था, इसलिए आचार्य ने कुरान के पन्नों पर दवा का लेप लगा दिया. कुरान पढ़ते हुए दवा उसके शरीर में गई और वह ठीक हो गया.
कई महीने तक धधकती रही नालंदा की लाइब्रेरी : लेकिन, एहसान मानने के बजाय खिलजी इस बात से चिढ़ गया कि एक 'काफिर' (गैर-मुस्लिम) वैद्य उसके हकीमों से ज्यादा ज्ञानी कैसे हो सकता है? इसी ईर्ष्या और कट्टरता में उसने पूरे नालंदा विश्वविद्यालय में आग लगवा दी. उस आग में कई धर्माचार्य, शिक्षक और विद्यार्थी जिंदा जल गए. लाइब्रेरी में इतनी किताबें थीं कि आग कई महीनों तक धधकती रही और किताबों का धुआं उठता रहा. खिलजी ने सिर्फ एक इमारत को नहीं, बल्कि भारत की एक पूरी समृद्ध शिक्षण व्यवस्था को जलाकर राख कर दिया था.
22 साल तक हुई खुदाई : आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) द्वारा 1915 से 1937 तक यहां 22 वर्षों तक खुदाई की गई. इस खुदाई में भगवान बुद्ध के अवशेष, छात्रों के कमरे, चैत्य (मंदिर), कुएं, अन्न भंडार, जले हुए चावल और अष्टधातु की कई मूर्तियां मिलीं. ये सभी आज भी नालंदा संग्रहालय में सुरक्षित रखी गई हैं. गाइड शिवप्रिय कुमार बताते हैं कि आज जो हम खंडहर देखते हैं, वह पूरे विश्वविद्यालय के मूल आकार का महज 10 प्रतिशत ही है.
प्राचीन गौरव फिर लौटाने की कोशिश : भले ही आज नालंदा खंडहर में तब्दील हो चुका है, लेकिन इसके अवशेष आज भी चीख-चीख कर गवाही देते हैं कि भारत का ज्ञान और विज्ञान कितना समृद्ध था. बिहार दिवस के मौके पर हमें अपनी इस महान विरासत पर गर्व करना चाहिए. हालांकि, साल 2010 में नए 'नालंदा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी' की स्थापना कर उस प्राचीन गौरव को फिर से लौटाने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन प्राचीन नालंदा की उस अनुशासित और लोकतांत्रिक व्यवस्था की बराबरी शायद ही कभी कोई कर पाए.
''प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय की ऐतिहासिकता और गरिमा इतनी विरल रही है कि दक्षिण एशियाई देशों के संगठन की एक बैठक में विदेशी शिक्षाविदों ने इसे पुनर्जीवित करने का प्रस्ताव रखा था. इसी परिप्रेक्ष्य में साल 2010 में नए नालंदा अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय की नींव रखी गई और 2014 से यह क्रियाशील हुआ.''- डॉ. धीरेंद्र उपाध्याय, प्रोफेसर, राजगीर सरकारी डिग्री कॉलेज
2024 में पीएम ने किया उद्घाटन : हाल ही में वर्ष 2024 में देश के प्रधानमंत्री द्वारा इसका विधिवत उद्घाटन किया गया. यह नया परिसर पुराने खंडहर से करीब 12-13 किलोमीटर दूर राजगीर की सुरम्य वादियों में प्रकृति की गोद में स्थापित किया गया है, जो कभी 16 महाजनपदों में सबसे शक्तिशाली मगध साम्राज्य की राजधानी हुआ करता था.
''वर्तमान में नालंदा अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय स्नातकोत्तर और पीएचडी की पढ़ाई अनवरत रूप से जारी है. नए परिसर में मुख्य रूप से इतिहास, दर्शनशास्त्र, पर्यावरण व पारिस्थितिकी और विभिन्न धर्मों के तुलनात्मक अध्ययन की शिक्षा दी जा रही है.''- डॉ. धीरेंद्र उपाध्याय, प्रोफेसर, राजगीर सरकारी डिग्री कॉलेज
कई देशों के छात्र यहां आते हैं पढ़ने : डॉ. धीरेन्द्र उपाध्याय के मुताबिक प्राचीन काल की तरह ही आज भी नालंदा अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय में वियतनाम, लाओस, थाईलैंड, श्रीलंका, जापान, दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे देशों से छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं, साथ ही भारत के कुछ राज्यों के विद्यार्थी भी यहां शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं.
'छात्र-शिक्षक अनुपात में कमी' : डॉ. धीरेंद्र उपाध्याय प्राचीन और वर्तमान व्यवस्था का तुलनात्मक आकलन करते हुए एक चिंता भी जताते हैं. वे कहते हैं, "प्राचीन नालंदा में जहां 10 हजार छात्र और 2 हजार प्रोफेसर थे, उसके अनुपात में आज नए विश्वविद्यालय में छात्र-छात्राओं की संख्या नगण्य है. इस अंतरराष्ट्रीय संस्थान को व्यापक प्रचार-प्रसार की सख्त जरूरत है. प्राचीन नालंदा की जीवंतता को देश भर में प्रचारित किया जाए, ताकि इसकी सार्थकता तभी साबित हो जब भारत के कोने-कोने से विद्यार्थी यहां आकर विद्या अध्ययन का लाभ उठाएं.''
सुरक्षा अलर्ट: सिक्किम के कई रास्ते बंद, एवलांच खतरे के बीच पर्यटक निकाले जा रहे
23 Mar, 2026 08:02 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सिलीगुड़ी: सिक्किम प्रशासन ने हिमस्खलन (Avalanche) के गंभीर खतरे को लेकर चेतावनी जारी की है. अगले 24 घंटों के दौरान नाथुला, ज़ुलुक और थांग घाटी के क्षेत्रों में हिमस्खलन हो सकता है. रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) के तहत काम करने वाले 'डिफेंस जियो-इंफॉर्मेटिक्स रिसर्च एस्टेब्लिशमेंट' ने अगले 24 घंटों के भीतर पूरे सिक्किम में हिमस्खलन की भविष्यवाणी करते हुए पूर्वानुमान जारी किया है.
प्रशासन और सेना ने इन इलाकों से पर्यटकों और स्थानीय निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का काम शुरू कर दिया है. गौरतलब है कि उत्तरी और पूर्वी सिक्किम में पिछले कुछ दिनों से लगातार बर्फबारी हो रही है. इसके कारण लाचेन से थांगू और थांगू से गुरुडोंगमार को जोड़ने वाले रास्ते पूरी तरह से बंद हो गए हैं. इस वजह से कई पर्यटक अलग-अलग होटलों में फंसे हुए हैं.
इसके अलावा, भारी बर्फबारी के कारण युमथांग से जीरो पॉइंट को जोड़ने वाली सड़क पूरी तरह बंद हो गई है. हालांकि चुंगथांग से लाचुंग और मंगन जाने वाले कई रास्ते खुले हुए हैं, लेकिन भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है और केवल हल्के वाहनों को ही जाने की अनुमति दी गई है.
सिक्किम मौसम विभाग के निदेशक डॉ. गोपीनाथ राहा ने कहा, "ऊंचाई वाले पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी जारी रहेगी. संदकफू सहित पूरे सिक्किम में हिमपात होता रहेगा. गरज के साथ भारी बारिश होने की भी संभावना है. पहाड़ों और मैदानों दोनों क्षेत्रों में एक साथ बारिश होने की उम्मीद है."
इस बीच, अलीपुर मौसम विभाग ने घोषणा की है कि दार्जिलिंग, कालिम्पोंग, जलपाईगुड़ी, अलीपुरद्वार, कूचबिहार और उत्तर दिनाजपुर में 28 मार्च तक गरज के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है. दक्षिण दिनाजपुर और मालदा में 24 मार्च तक बारिश का पूर्वानुमान बना हुआ है, जिसके बाद मौसम सामान्य होने की उम्मीद है. उत्तर बंगाल के चार जिलों के लिए 24 मार्च तक के लिए अलर्ट जारी किया गया है. मौसम विभाग ने दक्षिण बंगाल के अधिकांश जिलों के लिए भी 24 मार्च तक बारिश का अनुमान जताया है.
इस चेतावनी के बाद सिक्किम के लोगों के मन में तीन साल पहले की भयानक घटना की यादें ताजा हो गयीं. बता दें कि 2023 में सिक्किम की दक्षिण ल्होनक झील में आई आपदा ने लोगों के मन में जो दहशत पैदा की थी, वह आज भी यादों में ताजा है. सिक्किम के लोग अभी तक उस भयानक घटना के सदमे से पूरी तरह उबर भी नहीं पाए थे कि अब चिंता की एक नई लहर ने जनता को अपनी चपेट में ले लिया है.
जहरीले दूध से हड़कंप: आंध्र प्रदेश में 16 मौतें, कई की हालत गंभीर
22 Mar, 2026 08:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पूर्वी गोदावरी। आंध्र प्रदेश में एक दर्दनाक घटना ने खाद्य सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता खड़ी कर दी है। आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले में मिलावटी दूध पीने से अब तक 16 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि तीन मरीजों की हालत अभी भी नाजुक बनी हुई है। लालाचेरुवु, चौदेस्वरनगर और स्वरूपनगर जैसे इलाकों में फरवरी के मध्य से ही लोगों के बीमार पड़ने की घटनाएं सामने आने लगी थीं। पीड़ितों में उल्टी, तेज पेट दर्द, पेशाब रुकना और किडनी फेलियर जैसे खतरनाक लक्षण देखे गए।
जांच में खुलासा हुआ कि नरसापुरम गांव की एक स्थानीय डेयरी यूनिट से सप्लाई किए गए दूध में एथिलीन ग्लाइकॉल नामक जहरीला रसायन मिला हुआ था। यह पदार्थ आमतौर पर एंटी-फ्रीज में इस्तेमाल किया जाता है और मानव शरीर के लिए बेहद घातक माना जाता है। इस जहरीले दूध के सेवन से 100 से अधिक परिवार प्रभावित हुए, जिनमें बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल हैं। कई मरीजों को गंभीर स्थिति में अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उन्हें डायलिसिस और वेंटिलेटर सपोर्ट तक की जरूरत पड़ी।
स्वास्थ्य विभाग की जांच में यह भी सामने आया कि पीड़ितों के शरीर में ब्लड यूरिया और सीरम क्रिएटिनिन का स्तर असामान्य रूप से बढ़ा हुआ था, जो किडनी को गंभीर नुकसान पहुंचने का संकेत है। घटना के बाद प्रशासन ने तुरंत दूध की सप्लाई पर रोक लगा दी और प्रभावित इलाकों में घर-घर जाकर सर्वे शुरू किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने संदिग्ध दूध विक्रेता को गिरफ्तार कर लिया है। फूड सेफ्टी विभाग ने डेयरी यूनिट से दूध, दही, घी और पानी के नमूने एकत्र किए हैं, वहीं पशुपालन विभाग ने पशु चारे और पानी की भी जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने अप्राकृतिक मौत का मामला दर्ज कर जांच तेज कर दी है। वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी इलाज की निगरानी कर रहे हैं और रैपिड रिस्पांस टीमें लगातार लोगों की जांच कर रही हैं।
इस हादसे ने साफ कर दिया है कि रोजमर्रा के उपयोग में आने वाले खाद्य पदार्थ भी लापरवाही और लालच के कारण जानलेवा बन सकते हैं। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन इस घटना ने पूरे देश में खाद्य गुणवत्ता और निगरानी तंत्र को लेकर बहस छेड़ दी है।
भारत ने फ्यूल सप्लाई और शिपिंग सुरक्षा पर कड़ा रुख अपनाया, होर्मुज में जहाजों पर 24×7 निगरानी
22 Mar, 2026 07:10 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध के बीच एनर्जी प्लांट्स पर हमलों ने वैश्विक तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है. तेल और गैस संकट पहले से बढ़ा हुआ है और अब इसके और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है. दुनिया के 22 देशों ने मिलकर ईरान से हमले रोकने और होर्मुज स्ट्रेट को खोलने की अपील की है. इसी बीच भारत सरकार ने भी अपना प्लान-बी (Modi Govt Plan-B) एक्टिव कर दिया है और फ्यूल सप्लाई समेत शिपिंग सुरक्षा के उपाय तेज कर दिए हैं.
सरकारी अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी का पर्याप्त भंडार मौजूद है और रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं. इसके अलावा खाड़ी में भारतीय जहाजों की भी कड़ी निगरानी की जा रही है.
रिपोर्ट के मुताबिक मिडिल ईस्ट में युद्ध से बढ़ते तनाव के कारण ग्लोबल एनर्जी रूट्स में रुकावटें आ रही हैं, जिसमें सबसे चिंता का विषय होर्मुज स्ट्रेट का बंद होना है. खराब वैश्विक हालातों के बीच केंद्र सरकार ने ईंधन आपूर्ति सुचारू रखने, समुद्री मार्गों पर सुरक्षित आवाजाही और भारतीय नागरिकों को सहायता देने के लिए इमरजेंसी उपाय तेज कर दिए हैं.
अधिकारियों के अनुसार, भारत के पास कच्चा तेल, पेट्रोल, डीजल और एलपीजी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है. साथ ही सप्लाई में रुकावट से देशभर में घबराहट में की जा रही एलपीजी खरीदारी (LPG Panic Buying) को रोकने के लिए अतिरिक्त कदम उठाए गए हैं.
आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि देश की सभी रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं. घरेलू मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त कच्चे तेल का रिजर्व बना हुआ है. पेट्रोल-डीजल का स्टॉक पर्याप्त है और रिटेल सेक्टर में ईंधन की कोई कमी नहीं है. सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे घबराहट में तेल-गैस की खरीदारी न करें. ऑयल डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियां दिशा-निर्देशों के अनुसार आपूर्ति नियमित जारी रख रही हैं. एलपीजी उत्पादन भी बढ़ाया गया है, जिससे हाल के दिनों में घबराहट में की गई सिलेंडर बुकिंग में कमी आई है.
सरकार ने व्यवसायों के लिए सप्लाई संबंधी दिक्कतों को कम करने के लिए आंशिक कमर्शियल एलपीजी आपूर्ति बहाल की है और राज्यों को आवंटन बढ़ाया है. अब कुल उपलब्धता करीब 50% हो गई है और रेस्टोरेंट, होटल, इंडस्ट्रियल कैंटीन, हॉस्पिटल्स, एजुकेशन इंस्टीट्यूट्स और सामुदायिक रसोई को प्राथमिकता दी गई है.
सिटी गैस डिस्ट्रिब्यूशन कंपनियों को घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों दोनों के लिए PNG कनेक्शन प्राथमिकता से देने के निर्देश दिए गए हैं. इसके अलावा, राज्यों के लिए अतिरिक्त केरोसिन आवंटन को मंजूरी दी गई है और छोटे-मध्यम उपभोक्ताओं के लिए कोयले की आपूर्ति बढ़ाई गई है. अधिकारियों के मुताबिक, ये कदम ग्लोबल शिपिंग बाधित होने की स्थिति में एनर्जी सुरक्षा बनाए रखने के उद्देश्य से उठाए गए हैं.
पोर्ट और शिपिंग मंत्रालय होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने के बाद से भारतीय जहाजों की आवाजाही पर लगातार नजर रख रहा है. इसके लिए 24×7 कंट्रोल रूम सक्रिय है, जो लगातार अपडेट देता है. अधिकारियों ने कहा कि अभी तक हमलों के बीच भारतीय जहाजों से जुड़ी कोई घटना सामने नहीं आई है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान और बहरीन समेत अन्य क्षेत्रीय नेताओं से बातचीत की और समुद्री मार्गों को खुला रखने के साथ-साथ ग्लोबल सप्लाई चेन की सुरक्षा पर जोर दिया. सरकार ने साफ किया कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और बेरोकटोक समुद्री व्यापार हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है. सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें और अफवाहों में न फंसें.
घर के दाम स्थिर रहेंगे, खाड़ी युद्ध खत्म होने के बावजूद रिपोर्ट में चेतावनी
22 Mar, 2026 11:52 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में चल रहा संघर्ष समाप्त भी हो जाता है तब भी रियल एस्टेट के बढ़े हुए खर्चों में तुरंत कमी नहीं आएगी. रियल एस्टेट क्षेत्र में व्यापक सेवाएं देने वाली एक अंतरराष्ट्रीय प्रॉपर्टी कंसल्टेंट कंपनी एनरॉक ग्रुप ने यह अनुमान लगाया है. मार्च 2026 की शुरुआत से 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) की नाकेबंदी ने निर्माण सामग्री की बढ़ती कीमतों और आपूर्ति में देरी के कारण इस क्षेत्र को बुरी तरह प्रभावित किया है.
मौजूदा स्थिति के कारण 'होर्मुज जलडमरूमध्य' की नाकेबंदी का हवाला देते हुए, एनरॉक ग्रुप ने कहा कि इस नाकेबंदी के कारण जहाजों को रास्ता बदलना पड़ा है. इसके परिणामस्वरूप यात्रा में 10 से 20 दिन का अतिरिक्त समय लग रहा है और निर्माण सामग्री की शिपिंग लागत प्रति कंटेनर 1.5 लाख से 3.5 लाख रुपये तक बढ़ गई है.
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के अनुसार, वर्ष 2025 में भारत ने पश्चिम एशिया से 98.7 बिलियन डॉलर मूल्य के सामान का आयात किया, जिससे यह क्षेत्र ऊर्जा, उर्वरक (fertilizers) और औद्योगिक इनपुट के एक अनिवार्य प्रदाता के रूप में स्थापित हुआ है. भारत के चूना पत्थर, सल्फर और जिप्सम के कुल आयात का 60% से अधिक हिस्सा पश्चिम एशिया से आता है, ऐसे में निर्माण, उर्वरक और रसायन क्षेत्रों को संभावित कमी का सामना करना पड़ सकता है.
स्टील की कीमतों का जिक्र करते हुए रिपोर्ट में कहा गया, "स्टील की कीमतें लगभग 20% बढ़ गई हैं, जो पहले के 62,000 रुपये प्रति टन से बढ़कर अब 72,000 रुपये प्रति टन हो गई हैं. एक मोटे अनुमान के अनुसार, इससे मुंबई में ऊंची इमारतों की निर्माण लागत में लगभग 50 रुपये प्रति वर्ग फुट का इजाफा हो गया है.
मुंबई में फिलहाल 10,000 से अधिक लग्जरी यूनिट्स का निर्माण चल रहा है. 'हॉट रोल्ड कॉइल' (स्टील का एक प्रकार) की कीमत अभी 51,000-56,000 रुपये के बीच है और यदि स्थिति नहीं सुधरी, तो जून तक यह 62,000 रुपये तक पहुंच सकती है.
एनरॉक ग्रुप की रिपोर्ट के अनुसार, "गगनचुंबी इमारतों को मजबूती देने के लिए कंक्रीट के साथ स्टील की छड़ों का इस्तेमाल किया जाता है, और इस बढ़ी हुई लागत का सीधा संबंध निर्माण की कीमत और गति से है. इसके अलावा, निर्माण कार्यों में इस्तेमाल होने वाली क्रेनों और मिक्सर मशीनों के लिए लगने वाले डीजल की कीमतें भी ब्रेंट क्रूड (कच्चे तेल) के 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने से सीधे तौर पर प्रभावित हुई हैं. कीमतों का यह झटका मुंबई, दिल्ली-एनसीआर, हैदराबाद और देश के अन्य ऊंची इमारतों वाले शहरों के निर्माण स्थलों पर साफ तौर पर दिखाई देगा."
रिपोर्ट में आगे कहा गया है, "अगर खाड़ी युद्ध कल खत्म भी हो जाए, होर्मुज जलडमरूमध्य खुल जाए और जहाजों की आवाजाही सामान्य रूप से शुरू हो जाए, तब भी रियल एस्टेट की बढ़ी हुई लागत तुरंत कम नहीं होगी. हमें उम्मीद है कि जहाजों के जमावड़े (pileups) को साफ होने में 2 से 8 सप्ताह का समय लगेगा, क्योंकि मालवाहक कंपनियां इस रास्ते की सुरक्षा का परीक्षण करेंगी. इसके अलावा, पहले से तय अनुबंधों में 'फ्रेट सरचार्ज' (माल ढुलाई शुल्क) और बढ़ी हुई शिपिंग बीमा दरें ऊंची ही बनी रहेंगी."
इसमें आगे जोड़ा गया कि पूरी स्थिति को सामान्य होने में 1 से 3 महीने का समय लगेगा और निश्चित रूप से, वैश्विक शिपिंग के फिर से शुरू होने से भी डेवलपर्स को मानसून से पहले की अपनी सामान्य समय सीमा (timelines) को पूरा करने में मदद नहीं मिलेगी.
पिछले हफ्ते, एनरॉक ग्रुप के चेयरमैन अनुज पुरी ने बताया था कि पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति अब सिर्फ एक सैद्धांतिक खतरा नहीं रह गई है, बल्कि यह भारतीय रियल एस्टेट बाजार के लिए एक जटिल और बहुआयामी चुनौती बन गई है. उन्होंने जोर देकर कहा कि निर्माण लागत, जो हाल के वर्षों में पहले ही बढ़ चुकी है, इस मौजूदा स्थिति के कारण फिर से बढ़ने की पूरी संभावना है.
वैष्णो देवी में भारी भीड़, यात्रा रोकनी पड़ी; 39,000 लोगों ने मां के दर्शन किए
22 Mar, 2026 10:51 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जम्मू : माता वैष्णो देवी के गुफा मंदिर की यात्रा शनिवार को भवन में भारी भीड़ के कारण रोक दी गई, जबकि दोपहर बाद तक 39,000 भक्तों ने पूजा-अर्चना की.
चल रहे चैत्र नवरात्रि के कारण भीड़ बढ़ गई है, जो 19 मार्च से शुरू हुई थी और 27 मार्च को खत्म होगी. श्राइन बोर्ड को इस दौरान देश भर से भक्तों की भारी भीड़ की उम्मीद है.
श्राइन बोर्ड के एक अधिकारी ने कहा, "भवन में भारी भीड़ के कारण यात्रा को कुछ समय के लिए रोक दिया गया है." उन्होंने कहा कि पुलिस गाड़ियों ने यात्रा रोकने की घोषणा की, और रविवार सुबह 4 बजे से नया रजिस्ट्रेशन फिर से शुरू होगा.
घोषणा में कहा गया, "तीर्थयात्रियों से उनके होटलों में वापस जाने के लिए कहा गया है क्योंकि यात्रा रोक दी गई है." अधिकारियों ने बताया कि शनिवार को 39,000 से ज़्यादा तीर्थयात्री पवित्र शहर कटरा गए और जम्मू-कश्मीर के रियासी ज़िले में त्रिकुटा पहाड़ियों पर बने माता वैष्णो देवी मंदिर में पूजा-अर्चना की.
उन्होंने बताया कि भारी भीड़ के कारण शनिवार शाम 4 बजे यात्रा रोक दी गई. अधिकारियों ने बताया कि रजिस्ट्रेशन के बाद 10,000 से ज़्यादा तीर्थयात्री गुफा मंदिर के रास्ते में भी हैं.
नवरात्रि के तीसरे दिन सैकड़ों भक्त 'जय माता दी' का नारा लगाते हुए माता वैष्णो देवी मंदिर के रास्ते पर देवी का आशीर्वाद लेने के लिए जाते देखे गए. अधिकारियों ने कटरा बेस कैंप और मंदिर के रास्ते में सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए कई लेवल की सुरक्षा व्यवस्था की है.
अधिकारियों ने बताया कि गुरुवार को मंदिर में पवित्र शत चंडी महायज्ञ शुरू हो गया है, जो चैत्र नवरात्रि 2026 की शुभ शुरुआत का संकेत है. उन्होंने कहा कि पवित्र गुफा में वैदिक मंत्रों और रीति-रिवाजों की दिव्य तरंगें पूरी इंसानियत के लिए शांति, खुशहाली और भलाई का आशीर्वाद मांग रही हैं.
उन्होंने आगे कहा कि तीर्थयात्रियों की बड़ी संख्या में आने की उम्मीद को देखते हुए, श्राइन बोर्ड ने एक आसान और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध यात्रा अनुभव सुनिश्चित करने के लिए तीर्थयात्रियों पर केंद्रित व्यापक व्यवस्था की है.
10वीं-12वीं बोर्ड के विद्यार्थियों को द्वितीय अवसर परीक्षा का मिलेगा मौका : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
पश्चिम बंगाल में भाजपा के समर्थन में उतरे डॉ. मोहन यादव, जनसभा को किया संबोधित
राहुल गांधी की 6 गारंटियां: तमिलनाडु की महिलाओं और छात्रों को हर महीने मिलेंगे 2000 रुपये।
प्रशासन का सख्त एक्शन: बिना लाइसेंस चल रही चांदी रिफाइनरी सील, मौके से आधुनिक मशीनें बरामद।
ईरान की सख्ती: अब जहाजों को लेनी होगी IRGC की इजाजत
साहब की बहाली के लिए बाबू ने मांगी घूस: 40 हजार रुपये के साथ पकड़े गए स्थापना शाखा प्रभारी।
अनुभव का सम्मान या परीक्षा का दबाव? पात्रता परीक्षा पर मप्र के शिक्षकों ने खोला मोर्चा
ग्रामीणों की बहादुरी से बची दो जानें, लेकिन अंचल और पूनम को नहीं बचा सका कोई
