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‘प्रहार’ LMG से बढ़ी सेना की ताकत, Adani Defence & Aerospace ने सौंपी पहली खेप
28 Mar, 2026 11:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस ने शनिवार को भारतीय सशस्त्र बलों को 2,000 ‘प्रहार’ लाइट मशीन गन (एलएमजी) की पहली खेप सौंप दी। इस दौरान कंपनी के सीईओ आशीष राजवंशी ने इसे ‘मेक इन इंडिया’ पहल के इतिहास में एक बड़ा ‘मील का पत्थर’ बताया।राष्ट्रीय राजनीति अपडेट7.62 मिमी कैलिबर की यह आधुनिक मशीन गन ग्वालियर के बाहरी इलाके में स्थित कंपनी के स्मॉल आर्म्स कॉम्प्लेक्स में तैयार की गई है। कार्यक्रम के दौरान न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस के सीईओ आशीष राजवंशी ने कहा कि कंपनी को सात साल में कुल 41,000 एलएमजी देने का लक्ष्य मिला है, लेकिन जिस तेजी से हमारी टीम काम कर रही है, उससे हम यह लक्ष्य तीन साल से भी कम समय में हासिल कर सकते हैं। उन्होंने आगे बताया कि पहली 2,000 एलएमजी की डिलीवरी के बाद कंपनी हर महीने 1,000 मशीन गन बनाने की क्षमता हासिल कर चुकी है, जो अब तक का एक अनोखा रिकॉर्ड है।सीईओ राजवंशी ने कहा कि यह उपलब्धि ‘मेक इन इंडिया’ रणनीति की वजह से संभव हो पाई है। उन्होंने बताया कि शुरुआती दौर में टेक्नोलॉजी पार्टनर्स से मदद मिली, जिसके बाद कंपनी ने लगातार मेहनत और अनुभव के दम पर खुद को मजबूत किया। उन्होंने यह भी कहा कि साल 2020 में ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन के साथ इस यात्रा की शुरुआत हुई थी और पिछले छह वर्षों में कंपनी एक छोटे कंपोनेंट निर्माता से पूरी तरह हथियार बनाने वाली कंपनी (ओईएम) बन गई है। इस कार्यक्रम में रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ए अनबरसु भी मौजूद रहे। उन्होंने सेना के लिए भेजी जा रही पहली खेप वाले ट्रकों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। अनबरसु ने कहा कि यह उपलब्धि दिखाती है कि भारत अब तेजी से रक्षा सौदों को उत्पादन और डिलीवरी में बदलने की क्षमता रखता है, जो देश की रक्षा ताकत को और मजबूत करेगा।
स्टार्टअप इकोसिस्टम में उछाल, डीप टेक और AI ने बदली तस्वीर
28 Mar, 2026 09:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली | भारत का टेक स्टार्टअप सेक्टर अब तेजी से बदल रहा है। पहले जहां सिर्फ विस्तार पर जोर था, वहीं अब कंपनियां बेहतर कामकाज और मजबूत नतीजों पर ध्यान दे रही हैं। नैसकॉम और जिननोव की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2025 में स्टार्टअप ने 9.1 अरब डॉलर का निवेश जुटाया, जो पिछले साल के मुकाबले 23 प्रतिशत ज्यादा है।रिपोर्ट के अनुसार, स्टार्टअप सेक्टर का निवेश जुटाने का तरीका भी पहले से ज्यादा सख्त और समझदारी भरा हो गया है। पैसा उन्हीं स्टार्टअप्स को मिल रहा है जो अपना बिजनेस बढ़ाने और कमाई करने के लिए तैयार हैं। यह बदलाव संकेत देता है कि,भारत का स्टार्टअप सेक्टर अब एक नए दौर में प्रवेश कर रहा है, जहां मजबूती और स्थिर विकास पर ज्यादा फोकस रहेगा।इस रिपोर्ट के अनुसार, भारत में डीपटेक सेक्टर तेजी से मजबूत हो रहा है। इसे नवाचार का अहम आधार माना जा रहा है। देश में इस समय 4,200 से ज्यादा डीपटेक स्टार्टअप काम कर रहे हैं, जिनमें से 550 से अधिक कंपनियां सिर्फ साल 2025 में शुरू हुई हैं।साल 2025 में इन डीपटेक स्टार्टअप्स ने करीब 2.3 अरब डॉलर का निवेश जुटाया, जो पिछले साल के मुकाबले 37 प्रतिशत ज्यादा है। खास बात यह है कि निवेश का माहौल भले ही पहले से ज्यादा सख्त और चुनिंदा हो गया हो, फिर भी निवेशकों का भरोसा इस सेक्टर पर बना हुआ है। यह दिखाता है कि डीपटेक स्टार्टअप्स में भविष्य की बड़ी संभावनाएं देखी जा रही हैं।आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस डीपटेक सेक्टर की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभर रही है। यह तकनीक इस क्षेत्र के विकास को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रही है। डीपटेक स्टार्टअप्स में एआई की हिस्सेदारी करीब 84 प्रतिशत है, जबकि कुल जुटाए गए निवेश में इसका हिस्सा 91 प्रतिशत तक पहुंच गया है। तेजी से बढ़ती यह तकनीक अब अलग-अलग उद्योगों और बिजनेस एप्लीकेशनों में भी इस्तेमाल होने लगी है, जिससे कंपनियों के काम करने का तरीका बदल रहा है और नई संभावनाएं बन रही हैं।
ममता सरकार के खिलाफ BJP का आरोप-पत्र जारी, TMC ने भी खोला मोर्चा
28 Mar, 2026 08:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता। पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव के चलते आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को पश्चिम बंगाल सरकार के खिलाफ 'आरोप-पत्र' जारी किया। अब इस पर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने पलटवार करते हुए भाजपा के खिलाफ 'चार्जशीट' जारी की है। तृणमूल कांग्रेस ने न केवल भाजपा-शासित राज्यों में महिला सुरक्षा पर सवाल उठाए, बल्कि मणिपुर में जातीय हिंसा और बंगाल में डिटेंशन कैंप मॉडल लागू करने की भाजपा की कथित मंशा पर भी तीखा हमला बोला।
मणिपुर तीन साल से खून से लथपथ :टीएमसी
टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने मणिपुर में हुई जातीय हिंसा पर अमित शाह से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि यह पूर्वोत्तर राज्य पिछले तीन वर्षों से 'खून से लथपथ' है। उन्होंने आगे कहा कि भाजपा बंगाली और बांग्लादेशियों के बीच की लकीर को धुंधला करना चाहती है, ताकि वह असम की तर्ज पर बनाए गए अपने नफरत भरे डिटेंशन कैंप मॉडल को बंगाल में भी लागू कर सके।महुआ मोइत्रा ने अमित शाह की पश्चिम बंगाल सरकार के खिलाफ 'चार्जशीट' पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "आपने हर बंगाली को अपराधी घोषित कर दिया है। आप इसे चार चरणों में करते हैं: पहले आप हमारा अपमान करते हैं, फिर आप हमें वंचित करते हैं, फिर आप हमें अपराधी बनाते हैं, और फिर आप हमें परेशान करते हैं।"
ईडी पर भी खड़े किए सवाल
मोइत्रा ने यह भी आरोप लगाया कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) गृह मंत्री के अधीन काम करता है। उन्होंने बताया कि ईडी ने लगभग 6,000 मामले दर्ज किए हैं, जिनमें से 98% विपक्षी नेताओं के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा कि केवल 25 लोगों को दोषी ठहराया गया है, जो 0.42% की दर है।
चुनावी माहौल में स्थानीय मुद्दे बनाम बाहरी प्रभाव, ओवैसी और SIR की भूमिका पर चर्चा
28 Mar, 2026 07:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता। पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव की तारीखों के एलान के साथ सिसायी उठापटक बढ़ गई है। पश्चिम बंगाल सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोर रहा है। सत्ता पक्ष और विपक्ष की ओर से उम्मीदवारों का एलान होने के साथ आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी जारी है। इस हफ्ते खबरों के खिलाड़ी में पश्चिम बंगला के चुनाव और वहां चुनावी मुद्दों पर चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार रामकृपाल सिंह, विनोद अग्निहोत्री, पूर्णिमा त्रिपाठी, राकेश शुक्ल और अनुराग वर्मा मौजूद रहे।
रामकृपाल सिंह: बंगाल में कोई एक मुद्दा नहीं है। बंगाल के लेबर फोर्स में उस तरह का असंतोष नहीं है। वोटर दो तरह का होता है एक मुझे क्या मिला और दूसरा हमें क्या मिला वाला वोटर। ओवैसी फैक्टर जिस तरह महाराष्ट्र, बिहार में चला है अगर वो बंगाल में चलता है तो वो असर करेगा। दूसरा एसआईआर में जो वोट कटेंगे वो भी असर डालेंगे।
पूर्णिमा त्रिपाठी: ममता के सामने चुनौती बहुत बड़ी है। तीन बार से लगाता ममता मुख्यमंत्री हैं। उनको अपने खिलाफ उत्तपन्न हुई सत्ता विरोधी लहर से भी निपटना होगा। दूसरा एसआईआर में जो नाम कटे हैं, उसका भी असर दोनों तरफ होगा। मुझे लगता है कि ममता पर इसका असर ज्यादा होगा। केरल में चुनाव आयोग की चिट्ठी पर भाजपा की मोहर वाला ममला हुआ है वो भी कई संकेत देता है। दूसरा ओवैसी और हुमायूं कबीर भी ममता की मुश्किल बढ़ा सकते हैं।
अनुराग वर्मा: ये चुनाव भाजपा और ममता बनर्जी दोनों के लिए प्रतिष्ठा का सवाल है। जब से भाजपा सत्ता में आई तब चार क्षेत्रीय छत्रप थे। नवीन पटनायक को भाजपा ने हटा दिया। नीतीश को भी सम्मान जनक तरीके से भाजपा विदा कर रही है। अखिलेश हार गए। अब केवल ममता ही हैं जो भाजपा को चुभ रही हैं। ममता अगर हारती हैं तो बंगाल का जो वोटर है वो जिसे चुनता है लंबे समय के लिए चुनता है। ओवैसी और हुमायूं कबीर भी ममता की मुश्किल बढ़ा रहे हैं।
राकेश शुक्ल: ये चुनाव डर और विश्वास के बीच चल रहा है। इसके बीच में ममता बनर्जी ने एसआईआर को सबसे बड़ा मुद्दा बना दिया है। जिन लोगों का नाम कट गया उसके लिए ममता के लोग कह रहे हैं कि भाजपा ने नाम कटवा दिया। दूसरा अगर नाम जुड़ जा रहा है तो कहा जा रहा है कि ममता ने यह नाम जुड़वा दिया। ममता इस बार 2011 की तरह चुनाव लड़ रही हैं।
विनोद अग्निहोत्री: ध्रुवीकरण की राजनीति बंगाल में 2016 के चुनाव से चल रही है। 2021 के चुनाव में ममता ने सफलतापूर्वक इसकी काट निकाली थी। जो वोट कभी वाम दलों को मिलता था वो अब ममता को मिलता है। ये वोटर बंगाल में बड़ी तादाद में है। ये चुनाव बहुत दिलचस्प होगा। भाजपा इस चुनाव में पूरी ताकत लगाएगी।
चुनावी गड़बड़ियों पर रोक लगाने के उद्देश्य से सुप्रीम कोर्ट में नई पहल
28 Mar, 2026 05:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। चुनावी प्रक्रिया में धांधली को रोकने के उद्देश्य से सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है। इस याचिका में दोहरी वोटिंग, पहचान बदलकर वोट डालने और फर्जी मतदाताओं द्वारा वोट डालने के मामलों का जिक्र किया गया है। याचिकाकर्ता ने आगामी विधानसभा चुनावों में मतदान केंद्रों पर फिंगरप्रिंट और आइरिस बायोमेट्रिक पहचान प्रणाली लागू करने के लिए चुनाव आयोग को निर्देश देने की मांग की है।यह जनहित याचिका अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा दायर की गई है। संविधान के अनुच्छेद 32 का हवाला देते हुए याचिका में मौजूदा सुरक्षा उपायों के बावजूद रिश्वतखोरी, अनुचित प्रभाव, पहचान छिपाकर वोट डालना, दोहरी वोटिंग और फर्जी वोटिंग की निरंतर घटनाओं पर चिंता जताई गई है।याचिकाकर्ता ने शीर्ष अदालत से आग्रह किया है कि वह चुनाव आयोग को विशेष रूप से आगामी विधानसभा चुनावों में मतदान केंद्रों पर फिंगरप्रिंट और आइरिस-आधारित बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण शुरू करने का निर्देश दे। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल वास्तविक मतदाता ही वोट डाल सकें और एक नागरिक, एक वोट के सिद्धांत का कड़ाई से पालन हो।
मौजूदा मतदाता पहचान प्रणाली की कमियां
याचिका में तर्क दिया गया है कि वर्तमान मतदाता पहचान विधियां, जो काफी हद तक मतदाता पहचान पत्र और मैन्युअल सत्यापन पर आधारित हैं, पुरानी तस्वीरों, लिपिकीय त्रुटियों और वास्तविक समय सत्यापन की कमी के कारण दुरुपयोग की संभावनाओं से ग्रस्त हैं। याचिका में कहा गया है कि बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण, जो अद्वितीय और गैर-डुप्लिकेट होता है, पहचान छिपाकर वोट डालने और कई बार वोट डालने जैसी समस्याओं को प्रभावी ढंग से समाप्त कर देगा।
चुनाव आयोग की शक्तियां और संवैधानिक दायित्व
स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के संवैधानिक जनादेश पर प्रकाश डालते हुए याचिका में कहा गया है कि चुनाव आयोग के पास अनुच्छेद 324 के तहत ऐसी तकनीकी उपाय शुरू करने की पूर्ण शक्तियां हैं और वह मतदाता पहचान को मजबूत करने के लिए प्रासंगिक नियमों में संशोधन कर सकता है।याचिकाकर्ता ने यह भी बताया है कि बायोमेट्रिक सत्यापन प्रवासी मतदाताओं, डुप्लिकेट चुनावी प्रविष्टियों और फर्जी मतदाताओं से संबंधित मुद्दों को हल करने में मदद कर सकता है। साथ ही चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए एक वास्तविक समय ऑडिट ट्रेल भी बना सकता है।
प्रवर्तन निदेशालय ने 2.37 करोड़ की संपत्ति जब्त, भूमि अधिग्रहण घोटाले में बड़ा कदम
28 Mar, 2026 04:29 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली |अरुणाचल प्रदेश प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने ट्रांस-अरुणाचल राजमार्ग (टीएएच) भूमि अधिग्रहण मुआवजे घोटाले में कार्रवाई करते हुए 2.37 करोड़ रुपये की संपत्ति अस्थायी रूप से जब्त कर ली है। जब्त की गई संपत्तियों में 47,350 वर्ग मीटर जमीन भी शामिल है। इनमें से एक संपत्ति अरुणाचल प्रदेश के डोलो गांव, कुरुंग कुमे जिले में स्थित है। यह संपत्ति, तादार बाबिन के नाम पर है। दूसरी संपत्ति में एक पारंपरिक घर है, जो केयी पान्योर जिले के याचुली के जठ गांव में स्थित है। ये संपत्ति 'लिखा माज' के नाम पर है। ये दोनों संपत्तियां, सरकारी मुआवजे की धनराशि के धोखाधड़ीपूर्ण दुरुपयोग से प्राप्त अपराध की आय से खरीदी गई हैं। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत की गई है।
44.98 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान
यह जांच ट्रांस-अरुणाचल राजमार्ग (टीएएच) परियोजना (पोटिन-बोपी खंड) के तहत भूमि अधिग्रहण मुआवजे के आकलन और वितरण में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं से संबंधित है। तथ्य-जांच समिति (एफएफसी) के निष्कर्षों से पता चला है कि स्वीकार्य मुआवजे के मुकाबले लगभग 44.98 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान किया गया है। इसके चलते सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ है। जांच में कई लोक सेवकों और निजी व्यक्तियों की सुनियोजित साजिश में संलिप्तता का खुलासा हुआ है। इनमें 'जीरो' के तत्कालीन उपायुक्त केमो लोलेन भी शामिल हैं। उन्होंने मुआवजा खाते के संयुक्त हस्ताक्षरकर्ता के रूप में धोखाधड़ीपूर्ण भुगतानों को अधिकृत करने और सुगम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
मनगढ़ंत संरचनात्मक आकलन तैयार करने में मदद
जीरो के तत्कालीन जिला भूमि राजस्व एवं निपटान अधिकारी (डीएलआरएसओ) भरत लिंगु ने हेराफेरी से तैयार किए गए मुआवजे के दावों को संसाधित और अनुमोदित किया था। उसके बाद संरचनात्मक आकलन दल के सदस्य और कनिष्ठ अभियंता टोको ताजे, ने उन दावों को बढ़ा-चढ़ाकर और मनगढ़ंत संरचनात्मक आकलन तैयार करने में सहायता की। टोको ताथ, ने लाभार्थियों को धोखाधड़ी से शामिल करने में सहायता की। कनिष्ठ अभियंता कबाक भट्ट, जिसने मध्यस्थ संस्थाओं के माध्यम से धन के हेरफेर और कालानुक्रम में हेरफेर करने में मदद की। इसके अलावा, लिखा माज और तादर बाबिन, जिन्हें लाभार्थी के रूप में दिखाया गया है, ने बिना किसी वैध अधिकार के मुआवजे की बड़ी रकम प्राप्त की। उन्होंने जानबूझकर ऐसे धन के हेरफेर, निकासी और उपयोग में भाग लिया, जिससे अपराध की आय को छिपाकर उसे बेदाग संपत्ति के रूप में प्रदर्शित करने में सहायता मिली।
आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य बरामद
इससे पहले, ईडी ने 06.02.2026 को अरुणाचल प्रदेश और असम में कई परिसरों पर तलाशी अभियान चलाया था, जिसके परिणामस्वरूप लिखा माज से 2.40 करोड़ रुपये और तादर बाबिन से 22 लाख रुपये नकद जब्त किए गए। लगभग 1.19 करोड़ रुपये के बैंक बैलेंस फ्रीज किए गए। तलाशी के दौरान आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य बरामद हुए हैं। इससे पहले, ईडी ने आरोपियों से जुड़े बैंक खातों और जमाओं में लगभग 3.95 करोड़ रुपये की राशि की पहचान कर उसे फ्रीज कर दिया था। इस प्रकार, वर्तमान मामले में कुर्की, जब्ती और फ्रीजिंग के माध्यम से अब तक प्राप्त अपराध की कुल आय लगभग 10.13 करोड़ रुपये है। ईडी ने इससे पहले 12.03.2024 को विशेष न्यायालय (पीएमएलए), युपिया के समक्ष कबाक भट्ट के खिलाफ अभियोजन शिकायत दर्ज की थी। न्यायालय ने 14.03.2024 को इसका संज्ञान लिया। आगे की जांच में अपराध से प्राप्त अतिरिक्त धनराशि की पहचान हुई और अन्य आरोपियों की संलिप्तता का पता चला, जिसके परिणामस्वरूप पीएमएलए के प्रावधानों के तहत अंततः जब्ती के लिए अपराध से प्राप्त धनराशि के समतुल्य मूल्य को सुरक्षित करने हेतु वर्तमान कुर्की की गई है।
एनसीईआरटी और यूजीसी के नियमों पर सफाई, पाठ्यक्रम में बदलाव के संकेत
28 Mar, 2026 04:08 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली | देश की शिक्षा व्यवस्था और पाठ्यक्रम को लेकर चल रहे घमासान पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने स्वीकार किया कि UGC के नए नियमों और NCERT की किताबों में 'न्यायिक भ्रष्टाचार' जैसे विषयों को शामिल करने से जो विवाद पैदा हुए, उन्हें टाला जा सकता था। उन्होंने माना कि इन मुद्दों को जिस तरह से समाज के सामने पेश किया गया, उसमें कमी रह गई।
"हम भेदभाव के खिलाफ हैं"
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि सरकार की मंशा किसी को भी प्रताड़ित करने की नहीं है। उन्होंने कहा कि हमारा संवैधानिक कर्तव्य है कि समाज के किसी भी वर्ग के साथ भेदभाव न हो। चाहे वह अनुसूचित जाति (SC), जनजाति (ST) हो या अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), हम समानता के पक्षधर हैं।"
सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में तैयार हो रहा नया सिलेबस
NCERT विवाद पर शिक्षा मंत्री ने बताया कि अब चीजें अदालती दिशा-निर्देशों के तहत आगे बढ़ रही हैं। दरअसल, कक्षा 8 की सोशल साइंस की किताब में 'न्यायिक भ्रष्टाचार' और जजों की कमी जैसे मुद्दों को जिस तरह से लिखा गया था, उस पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई थी। इसके बाद NCERT ने माफी मांगते हुए उस किताब को वापस ले लिया था।शिक्षा मंत्री ने जानकारी दी है कि अब इस अध्याय को फिर से लिखने के लिए जस्टिस इंदु मल्होत्रा के नेतृत्व में तीन सदस्यीय कमेटी बनाई गई है। इस कमेटी में पूर्व अटार्नी जनरल और एक प्रतिष्ठित शिक्षाविद भी शामिल हैं। यह कमेटी भोपाल लॉ एकेडमी के सुझावों को भी शामिल करेगी। इतना ही नहीं, नया अध्याय तैयार कर कोर्ट के सामने पेश किया जाएगा।
UGC नियमों पर सस्पेंस बरकरार
जनवरी 2026 में लागू हुए 'UGC इक्विटी रेगुलेशन' को लेकर भी मंत्री ने अपनी बात रखी। इन नियमों का मकसद कैंपस में भेदभाव रोकना था, लेकिन सामान्य वर्ग के छात्रों की ओर से इसे कोर्ट में चुनौती दी गई थी। फिलहाल यह मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। उन्होंने कहा कि शीर्ष अदालत का जो भी फैसला होगा, सरकार उसे पूरी निष्ठा से लागू करेगी। धर्मेंद्र प्रधान के इस बयान से साफ है कि आने वाले समय में शिक्षा और न्यायपालिका के बीच समन्वय को लेकर ज्यादा संवेदनशीलता बरती जाएगी।
द्रविड़ मुनेत्र कड़गम ने घोषित किए प्रत्याशी, चुनावी रणनीति हुई साफ
28 Mar, 2026 04:08 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चेन्नई | तमिलनाडु विधानसभा चुनावों को लेकर सियासी बिसात बिछ चुकी है। मुख्यमंत्री और डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन ने गठबंधन सहयोगियों के बीच सीटों के बंटवारे का एलान कर दिया है।कुल 234 विधानसभा सीटों में से डीएमके खुद 164 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। इसके साथ ही स्टालिन ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी पार्टी की मजबूत पकड़ को बरकरार रखना चाहते हैं।
कांग्रेस को मिली 28 सीटें
गठबंधन के प्रमुख सहयोगी दल कांग्रेस को 28 सीटें दी गई हैं। वहीं, इस बार सबसे बड़ा उलटफेर डीएमडीके को लेकर देखने को मिला है। पार्टी को 10 सीटें आवंटित की गई हैं।अन्य सहयोगियों में वीसीके (VCK) को 8, सीपीआई और सीपीआई-एम को 5-5 सीटें, जबकि एमडीएमके (MDMK) को 4 सीटें मिली हैं। मुस्लिम मतदाताओं के बीच पैठ रखने वाली पार्टी आईयूएमएल (IUML) और एमएमके (MMK) को 2-2 सीटें दी गई हैं। एमजेके (MJK) व एसडीपीआई (SDPI) को 1-1 सीट दी गई हैं।
अमरावती को लेकर फिर तेज हुई सियासत, विधानसभा में प्रस्ताव पारित
28 Mar, 2026 03:47 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली | आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने राज्य विधानसभा में अमरावती को स्थायी राजधानी के रूप में मान्यता देने के लिए एक प्रस्ताव पेश किया। इसके साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार से अमरावती को आधिकारिक तौर पर राजधानी का कानूनी दर्जा देने की भी मांग की। यह प्रस्ताव एक विशेष विधानसभा सत्र के दौरान लाया गया, जिसमें विपक्षी पार्टी वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के विधायक मौजूद नहीं रहे।
इस प्रस्ताव के पीछे की कहानी
दरअसल, अमरावती की कहानी आंध्र प्रदेश के 2014 के विभाजन से जुड़ी है। आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम 2014के तहत राज्य दो हिस्सों आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में बंट गया था। उस समय तय किया गया था कि हैदराबाद 10 साल तक दोनों राज्यों की साझा राजधानी रहेगा और इस दौरान आंध्र प्रदेश को अपनी नई राजधानी विकसित करनी होगी।इसी पृष्ठभूमि में नायडू ने अमरावती को अपनी ड्रीम राजधानी परियोजना के रूप में आगे बढ़ाया। 2014 में सत्ता में आने के बाद उन्होंने विशेषज्ञों की मदद से अमरावती को राजधानी के रूप में चुना और विकास की दिशा में कदम बढ़ाए। हालांकि, परियोजना को पर्यावरणीय और वित्तीय चुनौतियों का सामना करना पड़ा, बावजूद इसके राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण से राहत मिलने के बाद इसके आगे बढ़ने की उम्मीद जगी थी।लेकिन 2019 के विधानसभा चुनाव में बड़ा राजनीतिक बदलाव हुआ। वाई एस जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व में YSRCP ने भारी बहुमत हासिल किया और सत्ता में आने के बाद अमरावती परियोजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया। नई सरकार ने विदेशी बैंकों से लिए जाने वाले कर्ज को भी वापस कर दिया और तीन राजधानियों अमरावती (विधायी), विशाखापट्टनम (कार्यकारी) और कुरनूल (न्यायिक) का प्रस्ताव सामने रखा।अब एक बार फिर सत्ता में लौटे नायडू ने अमरावती को स्थायी राजधानी बनाने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए इस मुद्दे को राजनीतिक और प्रशासनिक रूप से पुनर्जीवित कर दिया है। यह प्रस्ताव न केवल राज्य की राजधानी को लेकर जारी असमंजस को खत्म करने की कोशिश है, बल्कि पिछले एक दशक से चल रही राजनीतिक खींचतान का नया अध्याय भी खोलता है।
सभी हाईकोर्ट को निर्देश: दुष्कर्म पीड़ितों की पहचान हर हाल में गोपनीय रखी जाए
28 Mar, 2026 03:28 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली | सुप्रीम कोर्ट ने दुष्कर्म मामलों में पीड़िता की पहचान उजागर किए जाने पर कड़ा रुख अपनाते हुए इसे सबसे कड़े शब्दों में निंदनीय बताया है। शीर्ष अदालत ने सभी हाईकोर्ट को निर्देश दिया है कि वे यह सुनिश्चित करें कि कोर्ट के आदेशों में पीड़िता या उसके परिवार की पहचान किसी भी रूप में सामने न आए।न्यायमूर्ति संजय करोल और एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहा कि 2018 के निपुण सक्सेना बनाम यूनियन ऑफ इंडिया फैसले में स्पष्ट किया गया था कि किसी भी माध्यम (प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक या सोशल मीडिया) में पीड़िता की पहचान उजागर नहीं की जा सकती।
कानून का पालन न होने पर जताई चिंता
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इसके बावजूद निचली अदालतों में इस नियम का पालन नहीं हो रहा है। इसके पीछे अदालतों की उदासीनता और इस तरह के अपराधों से जुड़े सामाजिक कलंक के प्रति जागरूकता की कमी को जिम्मेदार बताया गया।
कानूनी प्रावधानों पर जोर
अदालत ने बताया कि 1983 में भारतीय दंड संहिता में संशोधन कर धारा 228A जोड़ी गई थी, जिसका उद्देश्य दुष्कर्म पीड़िताओं की पहचान को सार्वजनिक होने से रोकना है। इससे पहले ऐसा कोई स्पष्ट कानूनी प्रतिबंध नहीं था, जिससे पीड़िताओं को सामाजिक बहिष्कार और मानसिक आघात का सामना करना पड़ता था।
हाईकोर्ट को सख्त निर्देश
पीठ ने अपने आदेश की प्रति सभी हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को भेजने का निर्देश दिया है, ताकि इस कानून का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जा सके। यह टिप्पणी उस दौरान आई, जब अदालत हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के एक फैसले की समीक्षा कर रही थी, जिसमें नौ साल की बच्ची से दुष्कर्म के आरोपी को बरी कर दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में छोटे-छोटे विरोधाभासों को ज्यादा महत्व नहीं देना चाहिए।
रैली के दौरान CM हिमंत बिस्वा सरमा के साथ अनोखी घटना, सोशल मीडिया पर चर्चा तेज
28 Mar, 2026 02:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
असम | असम की सभी 126 विधानसभा सीटों के लिए वोटिंग 9 अप्रैल को एक ही चरण में होनी है. मतदान से पहले धकुआखाना और लखीमपुर में रैलियों को संबोधित किया. मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा को लखीमपुर जिले में अपने चुनाव प्रचार के पहुंचे थे. यहां पर रैली को संबोधित करने के बाद जब वे जनता से हाथ मिलाते हुए भीड़ के बीच से गुजर रहे थे तो एक चौंकाने वाली घटना सामने आई |
सीएम हिमंता के प्रति महिला समर्थकों का स्नेह
दरअसल लोगों से मुलाकात के दौरान सीएम हिमंता के प्रति महिला समर्थकों से जबरदस्त स्नेह देखने को मिला. सीएम जब लोगों के बीच से गुजर रहे थे तो एक महिला समर्थक ने उन्हें किस कर लिया, सोशल मीडिया इस घटना का एक वीडियो तेजी से वयारल हो रहा है. इस वीडियो में दिखाया गया कि जैसे ही वह उस भीड़ वाले इलाके से गुजरे, भीड़ ने उन्हें घेर लिया, गले लगाया और यहां तक कि चूमा भी ले लिया |
किस सीट से चुनावी मैदान में होंगे सीएम हिमंता
बता दें कि असम के मुख्यमंत्री अपनी पारंपरिक सीट जालुकबारी से चुनाव लड़ने वाले हैं. गुरुवार को, मुख्यमंत्री ने राज्य विधानसभा चुनावों से पहले लखीमपुर में एक चुनावी रैली भी की. यहां पर जनता को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री हिमंता ने कहा कि मतदाता BJP को दोबारा सत्ता में लाने के लिए उत्सुक हैं. उन्होंने कहा,’बड़े-बड़े मुद्दे बनाने की कोई जरूरत नहीं है. लोग उत्साहित हैं और हम चुनावों के लिए तैयार हैं.’सरमा ने यह भी बताया कि गठबंधन का विजन डॉक्यूमेंट आने वाले दिनों में जारी किया जाएगा, जिसमें शासन के लिए उसका रोडमैप बताया जाएगा |’
कब होगी असम वोटिंग
सभी 126 विधानसभा सीटों के लिए वोटिंग 9 अप्रैल को एक ही चरण में होगी, जबकि वोटों की गिनती 4 मई को होनी है. असम में 126 सीटों वाली विधानसभा के लिए मौजूदा BJP के नेतृत्व वाली NDA सरकार और कांग्रेस के बीच मुकाबला होगा. अगर इस बार भाजपा जीतती है तो लगातार तीसरी बार असम में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बन जाएगी |
पश्चिम बंगाल में सियासी संग्राम, तृणमूल की पकड़ पर भाजपा की नजर
28 Mar, 2026 12:36 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पश्चिम बंगाल| विधानसभा चुनाव में मुकाबला स्पष्ट रूप से दो ध्रुवों में सिमटता दिख रहा है। तृणमूल कांग्रेस इस बार गढ़ बचाने की चुनौती से जूझ रही है, जबकि मुख्य विपक्ष भाजपा सत्ता के करीब पहुंचने की रणनीति पर जुटी है। चुनाव का पूरा नैरेटिव अब रक्षा बनाम विस्तार की सीधी जंग में बदल चुका है। यह सीधी जंग ही बंगाल के चुनाव को हाल के वर्षों का सबसे अहम और संभावित रूप से ऐतिहासिक बना रहा है। वर्ष 2021 के चुनाव में मुकाबला द्विध्रुवीय नहीं दिख रहा था, लेकिन नतीजों ने साफ कर दिया था कि मुकाबला इन्हीं दो दलों के बीच था।कांग्रेस और वामदल कहीं टिक नहीं सके थे। राजनीतिक विशेषज्ञ भी मानते हैं कि 2026 का चुनाव बंगाल की राजनीति के लिए निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है। एक तरफ तृणमूल अपना मजबूत जनादेश बचाने की कोशिश में है, तो दूसरी ओर भाजपा और बेहतर प्रदर्शन कर ममता का तिलिस्म तोड़कर सत्ता के करीब पहुंचने की सबसे बड़ी कोशिश कर रही है। चुनाव तय करेगा कि बंगाल क्षेत्रीय प्रभुत्व के मॉडल को बरकरार रखता है या राष्ट्रीय विस्तार की राजनीति को स्वीकार करता है। यह चुनाव सिर्फ सीटों का नहीं, बल्कि राजनीतिक संतुलन बदलने की संभावनाओं का चुनाव बन गया है।
वोट स्विंग से बदल सकता है चुनाव
पिछले चुनाव में तृणमूल को 48 और भाजपा को 38% वोट मिले थे। 2016 और 2021 में 40 से ज्यादा सीटों पर जीत का अंतर 5 हजार वोट से कम रहा। 2 से 5% वोट स्विंग भी कई सीटों पर नतीजे पलट सकता है।
क्यों अलग है 2026 का मुकाबला?
बंगाल की राजनीति में लंबे समय तक बहुकोणीय मुकाबले की परंपरा रही। पहले वाम दलों का वर्चस्व, फिर तृणमूल का उभार, लेकिन 2026 में पहली बार तस्वीर स्पष्ट रूप से द्विध्रुवीय दिख रही है।2011 के बाद पहली बार सत्ताधारी दल को इतने मजबूत प्रतिद्वंद्वी का सामना करना पड़ रहा है।2021 में भाजपा का वोट शेयर करीब 38% तक पहुंचा, जो उसे वास्तविक चुनौतीकर्ता बनाता है।सत्ता परिवर्तन की चर्चा अब सिर्फ संभावना नहीं, बल्कि चुनावी विमर्श का हिस्सा बन चुकी है।
तृणमूल: पिछले चुनाव से कहीं बड़ी चुनौती
तृणमूल ने 2021 में 213 सीटों के साथ भारी बहुमत हासिल किया था, लेकिन 2026 में चुनौती कहीं ज्यादा जटिल है।सत्ता-विरोधी लहर: 15 साल के शासन के बाद स्थानीय असंतोष|भ्रष्टाचार के आरोप: शिक्षक भर्ती, नगर निकाय जैसे मुद्दों ने छवि पर असर डाला। इसके चलते तृणमूल ने 74 विधायकों का टिकट भी काटा।ताकत: महिला और अल्पसंख्यक वोट पर पकड़, बूथ स्तर तक संगठित कैडर।
भाजपा: मजबूत मौजूदगी से सत्ता की ओर बढ़ते कदम
भाजपा के लिए यह चुनाव विस्तार का निर्णायक मौका है। 2021 में 77 सीटों और लगभग 38% वोट शेयर के साथ पार्टी ने बंगाल में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई थी।रणनीतिक ताकत: राष्ट्रीय मुद्दों के साथ लोकल असंतोष को जोड़ना, केंद्रीय नेतृत्व की आक्रामक चुनावी मौजूदगी, संगठन का बूथ स्तर तक विस्तार, भ्रष्टाचार बनाम विकास का नैरेटिव और तेज हो सकता है।
संसद में गूंजेगा नक्सल मुद्दा, 31 मार्च तक क्या होगा लक्ष्य पूरा?
28 Mar, 2026 12:19 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। देश को नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त करने के लक्ष्य पर अब संसद में भी सीधी चर्चा होने जा रही है। केंद्र सरकार ने 31 मार्च 2026 तक नक्सल मुक्त भारत बनाने की समयसीमा तय की है। इसी दिशा में 30 मार्च को लोकसभा में इस मुद्दे पर अहम चर्चा होगी। यह चर्चा ऐसे समय में हो रही है, जब लगातार सरेंडर और ऑपरेशन के चलते नक्सल नेटवर्क कमजोर पड़ता दिख रहा है और सरकार अपने लक्ष्य के करीब पहुंचने का दावा कर रही है।लोकसभा की कार्यसूची के अनुसार, शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे इस मुद्दे पर चर्चा की शुरुआत करेंगे। यह चर्चा नियम 193 के तहत होगी, जिसमें सदस्य बिना वोटिंग के किसी अहम मुद्दे पर विस्तार से अपनी बात रखते हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पहले ही कई बार कह चुके हैं कि सरकार 31 मार्च 2026 तक देश को नक्सलवाद से मुक्त करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इस दिशा में लगातार अभियान चलाया जा रहा है।
क्या सरेंडर से कमजोर पड़ रहा है नक्सल नेटवर्क?
पिछले एक साल में कई बड़े माओवादी नेताओं ने हथियार छोड़कर मुख्यधारा का रास्ता अपनाया है। हाल ही में 25 मार्च को ओडिशा में वांछित माओवादी नेता सुकृ समेत चार अन्य ने पुलिस के सामने सरेंडर किया। इन पर कुल 66 लाख रुपये का इनाम था। सरेंडर के दौरान उन्होंने एके-47, आईएनएसएएस और अन्य हथियार भी जमा कराए। इससे साफ संकेत मिलता है कि नक्सल संगठन की ताकत तेजी से घट रही है।
क्या नक्सल प्रभावित इलाकों में स्थिति नियंत्रण में है?
ओडिशा पुलिस के एडीजी (एंटी-नक्सल ऑपरेशन) संजीव पांडा के मुताबिक, कंधमाल जिले में अब सिर्फ 8-9 नक्सली ही बचे हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में ऑपरेशन और तेज किए जाएंगे, ताकि तय समयसीमा तक पूरी तरह सफलता मिल सके। उन्होंने बाकी नक्सलियों से भी सरेंडर करने की अपील की और भरोसा दिलाया कि सरकार की पुनर्वास नीति का पूरा लाभ दिया जाएगा।
क्या बस्तर में नक्सलियों की कमर टूट चुकी है?
छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है। दंडकारण्य इलाके में सक्रिय माओवादी संगठन के बड़े नेता पप्पा राव समेत 17 नक्सलियों ने 17 मार्च को सरेंडर किया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दंडकारण्य में पहली बार नक्सल संगठन लगभग नेतृत्वविहीन हो गया है। यह सरकार के लिए बड़ी सफलता मानी जा रही है।
क्या पुनर्वास नीति बन रही है गेम चेंजर?
सरकार की पुनर्वास और मुख्यधारा में लाने की नीति इस बदलाव की बड़ी वजह मानी जा रही है। कई शीर्ष माओवादी नेताओं ने इसी नीति के तहत आत्मसमर्पण किया है। सरकार का मानना है कि कड़े ऑपरेशन के साथ-साथ पुनर्वास की रणनीति ने नक्सलवाद को कमजोर करने में अहम भूमिका निभाई है। अब देखना होगा कि 31 मार्च की समयसीमा तक सरकार अपने लक्ष्य को पूरी तरह हासिल कर पाती है या नहीं।
15 साल का हिसाब-किताब: अमित शाह आज TMC के खिलाफ खोलेंगे मोर्चा
28 Mar, 2026 12:02 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता।केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 28 मार्च को पश्चिम बंगाल के दौरे पर रहेंगे। गृह मंत्री शाह आज एक अहम प्रेस कॉन्फ्रेंस को भी संबोधित करेंगे। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा की ‘अभियोगनामा’ पेश करेंगे, जिसमें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की 15 साल की सरकार पर लगाए गए कथित भ्रष्टाचार और प्रशासनिक विफलताओं का पूरा विवरण होगा।भाजपा के वरिष्ठ नेता के अनुसार, ‘अभियोगनामा’ में 14 सेक्टरों में टीएमसी सरकार की कथित नाकामियों को उजागर किया जाएगा। इसमें प्रशासनिक भ्रष्टाचार, कानून-व्यवस्था की स्थिति, महिलाओं की सुरक्षा, सिंडिकेट राज का प्रभुत्व, स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र में संकट जैसी समस्याओं को प्रमुख रूप से शामिल किया गया है।
टीएमसी सरकार की कथित भ्रष्टाचार की देंगे ब्यूरा
बंगाल भाजपा के सूत्रों के अनुसार, 'गृह मंत्री अमित शाह एक खास प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे और टीएमसी सरकार के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल करेंगे। आरोपपत्र में पिछले कई वर्षों में टीएमसी सरकार के दौरान कथित भ्रष्टाचार, शासन की विफलताओं और कानून-व्यवस्था संबंधी चिंताओं का विस्तृत विवरण होने की उम्मीद है। वरिष्ठ भाजपा नेताओं का संकेत है कि दस्तावेज में भर्ती में कथित अनियमितताओं, वित्तीय कुप्रबंधन और पार्टी की ओर से कथित तौर पर प्रशासनिक खामियों जैसे मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।'आरोपपत्र के अलावा, भाजपा तृणमूल कांग्रेस के शासनकाल में हुए 15 वर्षों के कुशासन और भ्रष्टाचार को उजागर करने वाला एक विस्तृत पत्र जारी करने जा रही है। इस पत्र में राज्य में शासन व्यवस्था की कमियों से संबंधित पार्टी के दावों का समर्थन करने के लिए आंकड़े, केस स्टडी और क्षेत्रवार आकलन संकलित किए जाने की संभावना है।भाजपा से यह भी उम्मीद की जा रही है कि वह पश्चिम बंगाल में कथित माफिया शासन के मुद्दों पर अपने राजनीतिक संदेश को और अधिक प्रभावी बनाएगी। पार्टी नेताओं ने जोर देकर कहा है कि सत्ता में आने पर वे कोयला, रेत और पत्थर जैसे प्राकृतिक संसाधनों के खनन और व्यापार में शामिल अवैध नेटवर्क को खत्म करने के लिए सख्त कार्रवाई करेंगे और संसाधन प्रबंधन में अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करेंगे।
अप्रैल के पहले सप्ताह में संकल्प पत्र जारी होने की संभावना
शाह यह दस्तावेज शनिवार दोपहर न्यू टाउन के एक होटल में जारी करेंगे। हालांकि, शुक्रवार रात शहर और आसपास के इलाकों में तूफान के कारण उनकी कोलकाता आगमन में दो घंटे की देरी हुई। भाजपा इस ‘अभियोगनामा’ का उपयोग टीएमसी की कथित कमियों को उजागर करने के लिए करेगी और इसके बाद संकल्प पत्र के माध्यम से अपने विकल्पों और योजनाओं को जनता के सामने पेश करेगी। संकल्प पत्र अप्रैल के पहले सप्ताह में जारी होने की संभावना है।पिछले दो महीनों में अमित शाह ने कई बार पश्चिम बंगाल का दौरा किया, जिसमें संगठनात्मक बैठकें, जनसभा और ‘परिवर्तन यात्रा’ शामिल रही। इन गतिविधियों का उद्देश्य भाजपा के जमीनी स्तर के नेटवर्क को मजबूत करना और चुनाव रणनीति को अंतिम रूप देना है। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा की 294 सीटों पर चुनाव 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में होंगे, जबकि मतगणना 4 मई को निर्धारित है।
कांग्रेस का डबल बयान: नेपाल के पीएम को शुभकामनाएं, कर्नाटक नीति कोर्ट में
28 Mar, 2026 11:56 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । कांग्रेस ने शनिवार को बालेंद्र शाह को नेपाल के प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने पर बधाई दी। पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि उन्हें पूरा भरोसा है कि भारत-नेपाल की साझेदारी और भी मजबूत होगी। खरगे ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर कहा "भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की ओर से मैं बालेंद्र शाह को नेपाल के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेने पर हार्दिक बधाई देता हूं।भारत-नेपाल संबंध गहरे लोगों से लोगों तक जुड़े रिश्तों और साझा सांस्कृतिक विरासत पर आधारित हैं। हमें भरोसा है कि यह साझेदारी और मजबूत होगी, और हमारे दोनों देशों के लिए शांति, समृद्धि और पारस्परिक प्रगति सुनिश्चित करेगी।"
लोकसभा में नक्सल समस्या पर चर्चा सोमवार को
लोकसभा में सोमवार, 30 मार्च को मोदी सरकार की नक्सल समस्या को खत्म करने की कोशिशों पर चर्चा होगी। इसे “लेफ्ट विंग एक्सट्रीमिज्म से देश को मुक्त करने के प्रयास” के तहत सूचीबद्ध किया गया है। गृह मंत्री अमित शाह ने पहले ही कहा था कि मार्च 2026 तक नक्सल खतरा पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा। यह चर्चा बिना वोटिंग या प्रस्ताव के, नियम 193 के तहत होगी। नोटिस TDP सांसद बिरेड्डी शबारी और शिवसेना के श्रीकांत शिंदे ने दिया था।
कर्नाटक में मासिक अवकाश नीति पर याचिका
15 महिला पेशेवरों ने कर्नाटक उच्च न्यायालय में सरकार की मासिक अवकाश नीति के खिलाफ याचिका दायर की। यह नीति महिलाओं को प्रति माह एक दिन सवेतन अवकाश देती है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह नीति असंवैधानिक और भेदभावपूर्ण है।
शिक्षा में सुधार पर R N रवि का बयान
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल R N रवि ने कहा कि भारत के शिक्षा ढांचे में औपनिवेशिक कमजोरियों को ठीक किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “ज्ञान ही शक्ति है। भारत एक बार विश्व शिक्षा केंद्र था और अब सही दिशा में लौट रहा है।” उन्होंने NEP 2020 और कौशल, शोध, डिजिटल शिक्षा पर जोर दिया।
तेलंगाना में ईंधन और एआई पर कदम
तेलंगाना के CM A Revanth Reddy ने कहा कि राज्य में ईंधन आपूर्ति सुरक्षित है और पर्याप्त भंडार मौजूद है। उन्होंने कहा कि AI कंपनियों पर टैक्स लगाने पर विचार किया जा रहा है ताकि ऑटोमेशन से नौकरी खोने वालों की भरपाई हो सके। राज्य में EVs को बढ़ावा दिया जा रहा है।
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