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होर्मुज संकट से हड़कंप: Strait of Hormuz बंद होने से ऊर्जा आपूर्ति पर बड़ा खतरा
30 Mar, 2026 09:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। ईरान के साथ अमेरिका और इजरायल के हमलों की वजह से होर्मुज स्ट्रेट बंद है। इसकी वजह से मिडिल ईस्ट का तेल बाकी दुनिया में नहीं जा रहा है। हालात इसतरह के हैं कि तमाम देशों को घटते तेल स्टॉक का असर महसूस हो रहा है। प्रमुख अमेरिकी वित्तीय संस्था जेपी मॉर्गन ने पिछले हफ्ते जारी रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि जैसे-जैसे यह झटका पश्चिम की ओर बढ़ेगा, एशिया पर इसका असर सबसे पहले पड़ेगा। रिपोर्ट के अनुसार अगला नंबर अमेरिका और यूरोप का होगा। आमतौर पर, फारस की खाड़ी से तेल का शिपमेंट 10 से 20 दिनों में एशिया पहुंचता है। करीब 20 से 35 दिनों में यूरोप और अफ्रीका और फिर आखिर में करीब 35 से 45 दिनों के बाद अमेरिका पहुंचते हैं। मॉर्गन की रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिम की ओर बढ़ रही सप्लाई में रुकावट की वजह से एशिया को सबसे पहले दबाव महसूस होगा। आखिरी तेल टैंकर 28 फरवरी को स्ट्रेट से निकला था और युद्ध से पहले ये आखिरी शिपमेंट ज्यादातर खत्म हो चुके हैं।
दक्षिण-पूर्व एशिया पर खास तौर पर बुरा असर पड़ेगा। इस इलाके में तेल एक्सपोर्ट में महीने-दर-महीने 41 फीसदी की गिरावट का जिक्र कर रिपोर्ट में कहा गया, “तेल से संबंधित मुख्य चुनौती कीमत से फिजिकल कमी में बदल गई है। दक्षिण पूर्व एशिया के बाद स्थिति से अफ्रीका प्रभावित होगा, जिसका असर अप्रैल की शुरुआत तक और बढ़ जाएगा, हालांकि यह लोकल स्टॉक लेवल और देश में आयात किए गए तेल पर कितने आश्रित हैं, इस पर निर्भर करता है। मॉर्गन ने कहा कि तनाव के शुरुआती संकेत दिख रहे हैं। केन्या में रिटेल लेवल पर फ्यूल की कमी हो रही है, जबकि तंजानिया के पास अभी काफी स्टॉक है। यूरोप पर इसका असर अप्रैल के बीच तक महसूस होने की संभावना है, हालांकि उसके पास मजबूत इन्वेंट्री बफर और अल्टरनेटिव अटलांटिक बेसिन सप्लाई का फायदा है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका को सबसे आखिर में झटका लगेगा, क्योंकि उसका घरेलू प्रोडक्शन काफी है। इसलिए शायद उस शॉर्ट-टर्म फिजिकल शॉर्टेज महसूस नहीं होगी, हालांकि कैलिफोर्निया सप्लाई की चुनौतियों के लिए खास तौर पर कमजोर है और देश को ऊंची कीमतों का सामना करना पड़ेगा।
किस सीट से कौन उम्मीदवार? पट्टाली मक्कल कच्ची की फाइनल लिस्ट जारी
30 Mar, 2026 07:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चेन्नई | पट्टाली मक्कल काची (पीएमके) के अध्यक्ष अंबुमणि रामदास ने सोमवार को आगामी तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी के उम्मीदवारों की अंतिम सूची जारी की। एआईएडीएमके के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के तहत पीएमके को चुनाव लड़ने के लिए 18 सीटें दी गई हैं।
पीएमके ने 15 उम्मीदवारों के नामों का किया एलान
तीन सीटों के उम्मीदवारों की घोषणा पहले ही की जा चुकी थी, जबकि रामदास ने बाकी 15 उम्मीदवारों के नामों का ऐलान किया, जो पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे। जारी सूची के अनुसार, पेरंबूर से कवि एम. तिलगाबामा, धर्मपुरी से सौमिया अंबुमणि, वृद्दाचलम से तमिलरासी अधिमूलम और सलेम पश्चिम से एम कार्ति को उम्मीदवार बनाया गया है। इसी तरह पेन्नागरम से पाडी वी. सेल्वम, पोलुर से सीआर भास्करन, तिरुपुरूर से वकील के बालू, जयंकोंडम से के. वैथि और सलेम पश्चिम से एस. सदासिवम को टिकट दिया गया है।विकरवंडी से सी शिवकुमार, शोलिंगुर से वकील के.सरवणन, मयिलादुथुरई से सिथमल्ली ए. पलानीचामी, उथिरमेरूर से पी. महेश कुमार और रिशिवंदियम से ए.पी. चेझियन को उम्मीदवार बनाया गया है। पार्टी ने कट्टुमन्नारकोइल (एससी) सीट से अंबु चोलन को मैदान में उतारा है।
एआईएडीएमके ने की 169 सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा
इससे पहले एआईएडीएमके ने घोषणा की थी कि वह 234 में से 169 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, जबकि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) 27 सीटों पर, पीएमके 18, अम्मा मक्कल मुनेत्र कड़गम (एएमएमके) 11, तमिल मानिला कांग्रेस पांच, इंडिया जननायगा काची (आईजेके) एक और पुराची भारतम एक सीट पर चुनाव लड़ेगी।
पीएमके प्रमुख ने डीएमके सरकार पर साधा निशाना
इससे पहले, पीएमके प्रमुख अंबुमणि रामदास ने मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के नेतृत्व वाली द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) सरकार पर भी निशाना साधते हुए खराब शासन और कुप्रबंधन के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा, सामाजिक न्याय और जनकल्याण जैसे मुद्दों की अनदेखी हो रही है> उन्होंने भरोसा जताया कि एनडीए गठबंधन 200 से ज्यादा सीटें जीतेगा।
चुनाव और मतगणना कब होंगे?
तमिलनाडु की 234 विधानसभा सीटों पर पिछली बार की तरह इस बार भी एक ही चरण में 23 अप्रैल को मतदान कराया जाएगा। वहीं, मतगणना 4 मई को होगी। तमिलनाडु में विधानसभा का कार्यकाल 10 मई 2026 को खत्म हो रहा है। राज्य में पिछली बार चुनाव 6 अप्रैल 2021 को कराए गए थे। मतगणना 2 मई 2021 को हुई थी।
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव का रण
सीटें-234, बहुमत- 118
अधिसूचना- 30 मार्च
नामांकन की आखिरी तारीख- 6 अप्रैल
नामांकन पत्रों की जांच- 7 अप्रैल
नाम वापसी की आखिरी तारीख- 9 अप्रैल
मतदान- 23 अप्रैल
नतीजे- 4 मई
बिना दस्तावेज भी शादीशुदा माना जाएगा? जनगणना में नए प्रस्ताव पर बहस
30 Mar, 2026 06:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली | भारत की अगली जनगणना एक अप्रैल से शुरू होने जा रही है. ये जनगणना कई कारणों से चर्चा में है. इनमें एक बड़ा कारण लिव-इन-रिलेशनशिप में रहने वाले लोगों से जुड़ा भी है. जनगणना से पहले सरकार ने साफ कर दिया है कि लिव-इन में रहने वाले जोड़े जो स्थाई हैं, उन्हें सरकार शादीशुदा जोड़े के रूप में दर्जा देने की योजना बना रही है |
बिना फेरे लिए ही कहलाएंगे मैरिड
जनगणना 2027 में बदलते समाज की झलक देखने को मिलने वाली है. सरकार ने जनगणना के ऑफिशियल पोर्टल पर जारी किए गए निर्देशों में लिव इन को लेकर बताया है. इसके मुताबिक अगली जनगणना में लिव-इन में रहने वाले कपल बिना फेरे लिए ही मैरिड कहलाएंगे. सरकार उन्हें शादीशुदा का दर्जा देगी. इसको लेकर जनगणना के पोर्टल पर पूछे जाने वाले FAQ में सरकार ने नियमों को स्पष्ट भी कर दिया है. जिसके कारण लोगों को संबंधित मामले में किसी भी तरह की कोई दिक्कत या कन्फ्यूजन ना हो |
किसी भी अधिकारी को कोई दस्तावेज नहीं देना होगा
लिव-इन में रहने वाले जो भी कपल जनगणना में खुद को शादीशुदा जोड़े के तौर पर दर्ज करवाना चाहते हैं, उन्हें किसी भी अधिकारी को कोई सर्टिफिकेट दिखाने की जरूरत नहीं होगी. ना ही कोई अधिकारी लिव-इन कपल से कोई भी मैरिड सर्टिफिकेट मांगेगा. सिर्फ पोर्टल पर जानकारी भरनी होगी या फिर अधिकारी को जानकारी देनी होगी. जो भी सूचना आप अधिकारी को देंगे, वही जानकारी मानी जाएगी. मतलब जो भी जानकारी होगी, वो स्वघोषित होगी |
लिव-इन कपल से 33 सवाल पूछे जाएंगे
जो लिव-इन कपल शादीशुदा दर्जा पाना चाहते हैं, उनसे कुल 33 सवाल पूछे जाएंगे. जनगणना कर्मचारी घर-घर जाकर ये सवाल करेंगे. जिनकी लिस्ट नीचे दी गई है.आपके पास कौन से वाहन हैं. घर में मैरिड कप की संख्या कितनी है. घर पक्का है या मिट्टी का बना हुआ है. परिवार के मुखिया की कैटगरी क्या है(SC, ST या अन्य) |
30 सितंबर तक चलेगी जनगणना
जनगणना 2027 के लिए प्रक्रिया एक अप्रैल 2026 से शुरू होगी, जो कि 30 सितंबर तक चलेगी. एक अप्रैल से 30 सितंबर तक चलने वाली इस जनगणना प्रक्रिया में अलग-अलग राज्य अपने हिसाब से तारीखों का निर्धारण कर सकेंगे. इस प्रक्रियो को 15 और 30 दिनों यानी 45 में करने का निर्धारण किया गया है. पहले 15 दिनों में लोगों को खुद से ऑनलाइन पोर्टल पर (सेल्फ-एन्यूमरेशन) और इसके बाद 30 दिनों में गणना करने वाले कर्मचारी घर-घर जाकर जानकारी जुटाएंगे |
मजदूरों को बेसहारा छोड़ने का आरोप, मल्लिकार्जुन खरगे ने उठाए सवाल
30 Mar, 2026 05:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली | कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने मनरेगा के तहत मिलने वाले काम के अधिकार को खत्म कर दिया और नई घोषित योजना का जमीनी स्तर पर कोई असर नहीं दिख रहा। खरगे ने कहा कि इससे लाखों मजदूरों की आजीविका पर सीधा असर पड़ा है।खरगे ने कहा कि सरकार ने जिस वीबी-जी-राम जी योजना का प्रचार किया। वह जमीन पर कहीं दिखाई नहीं दे रही है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्सर कोविड काल की बात करते हैं, लेकिन यह भूल जाते हैं कि उसी समय मनरेगा ने लाखों मजदूरों को राहत दी थी। अब हालात यह हैं कि कई राज्यों में काम बंद होने की शिकायतें आ रही हैं।
क्या मनरेगा में काम बंद होने के आरोप हैं?
खरगे ने कहा कि बिहार के मुजफ्फरपुर में पिछले 87 दिनों से 12,000 मजदूर काम न मिलने के कारण प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों से भी मनरेगा के काम रुकने की खबरें सामने आ रही हैं। कुछ जगहों पर अधिकारियों को नए काम शुरू न करने के निर्देश मिलने की भी बात कही जा रही है।
वीबी-जी राम जी योजना का जमीनी असर कितना?
कांग्रेस का आरोप है कि 21 दिसंबर 2025 को अधिसूचित की गई वीबी-जी राम जी योजना का कोई असर नहीं दिख रहा है। खरगे ने कहा कि सरकार ने इसका खूब प्रचार किया, लेकिन मजदूरों को इसका कोई फायदा नहीं मिला। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पुरानी योजना कमजोर की जा रही है, तो नई योजना लागू क्यों नहीं हो रही।
क्या सीएजी रिपोर्ट में भी सामने आई कमियां?
खरगे ने महाराष्ट्र की सीएजी रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि पिछले पांच साल में मनरेगा के तहत स्वीकृत कामों में से 53 प्रतिशत से भी कम पूरे हुए हैं। उन्होंने कहा कि करीब 2.5 लाख काम ऐसे हैं, जो शुरू ही नहीं हो पाए। इससे यह साफ होता है कि योजना को कमजोर किया गया है।
क्या मजदूरों की हालत और खराब हुई है?
खरगे ने कहा कि एलपीजी की कमी और उद्योगों की खराब स्थिति के कारण कई मजदूर शहरों से गांव लौटने को मजबूर हुए हैं। लेकिन गांव में भी उन्हें काम नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि इससे मजदूरों की आर्थिक स्थिति और खराब हो रही है।
सरकार पर क्या है मुख्य आरोप?
कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा सरकार ने मनरेगा को कमजोर कर दिया है और मजदूरों के अधिकार छीन लिए हैं। खरगे ने कहा कि कोविड जैसे मुश्किल समय में मनरेगा ने लोगों को सहारा दिया था, लेकिन अब सरकार उस व्यवस्था को खत्म कर रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि मनरेगा और रोजगार का मुद्दा आने वाले समय में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है। ग्रामीण इलाकों में काम और आय की कमी का असर चुनावी माहौल पर भी पड़ सकता है।
प्रकृति की रक्षा में लद्दाख का मॉडल, पर्यावरण संरक्षण में वैज्ञानिक पहल
30 Mar, 2026 04:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। देश में बढ़ते जलवायु संकट(climate crisis) के बीच लद्दाख(Ladakh) ने पर्यावरण संरक्षण (environmental conservation)और सतत विकास (sustainable development)की दिशा में एक बड़ा और सराहनीय कदम उठाया है। यहां पारंपरिक उपायों से आगे बढ़ते हुए एक समग्र और वैज्ञानिक मॉडल लागू किया गया है, जिसमें भूजल नियंत्रण, ग्लेशियर निगरानी, जल संरक्षण, टिकाऊ पर्यटन और जैविक खेती को एक साथ जोड़ा गया है। यह पहल केवल पर्यावरण बचाने तक सीमित नहीं, बल्कि जल, जमीन और आजीविका के बीच संतुलन बनाने की दीर्घकालिक योजना भी है।
भूजल दोहन पर सख्ती, संकटग्रस्त क्षेत्रों में रोक
लद्दाख प्रशासन ने जल संकट की जड़ पर प्रहार करते हुए लेह जिले के अर्ध-संकटग्रस्त क्षेत्रों में भूजल दोहन पर कड़ा नियंत्रण लागू किया है। 23 दिसंबर 2024 के आदेश के तहत इन इलाकों में नए बोरवेल खोदने पर प्रभावी रोक लगा दी गई है। यह कदम भूजल स्तर को गिरने से बचाने और जल संसाधनों के संरक्षण के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।
ग्लेशियरों की सैटेलाइट निगरानी से बढ़ी सुरक्षा
जलवायु परिवर्तन का सबसे बड़ा असर हिमालयी ग्लेशियरों पर पड़ रहा है। इसे ध्यान में रखते हुए इसरो की मदद से ‘जियो-स्पेशियल लद्दाख’ परियोजना शुरू की गई है। इस परियोजना के तहत रिमोट सेंसिंग तकनीक से ग्लेशियरों और ग्लेशियल झीलों की निगरानी की जा रही है। इससे ग्लेशियरों के पिघलने, झीलों के फैलाव और संभावित खतरों का समय रहते आकलन किया जा सकता है।ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी झील फटने के खतरे को देखते हुए संवेदनशील क्षेत्रों को इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर, लेह से जोड़ने की योजना बनाई गई है। इस प्रस्ताव को राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को भेजा गया है, ताकि समय रहते चेतावनी जारी की जा सके।
जल संरक्षण ढांचे का बड़े स्तर पर विस्तार
जल संरक्षण के लिए लद्दाख में व्यापक स्तर पर संरचनाएं विकसित की गई हैं। मनरेगा और अन्य सरकारी योजनाओं के तहत 800 से अधिक जल संचयन संरचनाएं बनाई गई हैं। इसके अलावा वाटरशेड मैनेजमेंट कार्यक्रम के तहत जल टैंक, तालाब, नहरें और चेक डैम तैयार किए गए हैं।लेह शहर में ‘टी-ट्रेंच’ परियोजना को फिर से शुरू किया गया है, जिससे भूजल रिचार्ज बढ़ाने और प्राकृतिक जल स्रोतों को संरक्षित करने में मदद मिलेगी। इन प्रयासों का मकसद वर्षा जल को संचित करना और सूखे जैसी परिस्थितियों से निपटना है।
टिकाऊ पर्यटन की दिशा में नई पहल
पर्यटन से बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए लद्दाख प्रशासन ने नई नीतियां लागू की हैं। 2024 की सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट नीति के तहत होटल और गेस्ट हाउस में विकेंद्रीकृत एसटीपी लगाने को बढ़ावा दिया जा रहा है। साथ ही 2025 के लिए नई प्रोत्साहन योजना भी तैयार की जा रही है, जिससे पर्यावरण के अनुकूल पर्यटन को बढ़ावा मिल सके।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला: OBC आरक्षण मामले में आदेश बदला, दो मामलों की जांच फिर से
30 Mar, 2026 03:02 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भोपाल। मध्य प्रदेश से जुड़े OBC आरक्षण मामले में एक बड़ा अपडेट सामने आया है, सुप्रीम कोर्ट ने अपने पिछले आदेश में संशोधन करते हुए OBC आरक्षण से जुड़े 2 मामले रिकॉल किये है, नयेना देश के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने 87:13 के फार्मूले को चुनौती देने वाले मामले रिकॉल किये हैं वहीं 13% आरक्षण को होल्ड रखने पर भी सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा ये सुनवाई अप्रैल के दूसरे हफ्ते में होगी। उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने ने 54 याचिकाएँ मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ट्रांसफर की थी
ओबीसी एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से कोर्ट में दलील देने वाले सीनियर अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के द्वारा ओबीसी आरक्षण के प्रकरणों में 19 फरवरी 2026 को दिए आदेश में महत्वपूर्ण संशोधन करते हुए 54 प्रकरणों को मध्यप्र देश हाईकोर्ट वापस भेजा गया जिसमें से दो प्रकरण में अब सुप्रीम कोर्ट ही सुनवाई करेगा। संशोधित आदेश में सुप्रीम कोर्ट के द्वारा ओबीसी आरक्षण के बकाया 52 प्रकरणों को जबलपुर हाई कोर्ट में ट्रांसफर किया गया है।
मध्य प्रदेश शासन की ओर से ओबीसी आरक्षण के प्रकरणों में ओबीसी वर्ग का शासन की ओर से पक्ष रखने हेतु राज्यपाल द्वारा नियुक्त विशेष अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर एवं विनायक प्रसाद शाह ने बताया कि मध्य प्रदेश हाई कोर्ट जबलपुर में ओबीसी आरक्षण के बिचाराधीन सभी प्रकरणों को मध्य प्रदेश सरकार (महाधिवक्ता) द्वारा सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर कराए गए थे, जो दो अलग-अलग बन्चों में अलग-अलग खंडपीठ के समक्ष पेंडिंग थे, जिनमें से लगभग एक दर्जन मामले जो जस्टिस नरसिम्हा एवं जस्टिस आलोक आराधे के समक्ष नियत थे, तथा जिनमें ओबीसी एडवोकेट्स वेलफेयर द्वारा नियमित सुनवाई हेतु आवेदन दाखिल किए हैं थे उनमें सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिनांक 19 फरवरी 2026 को फाइनल आदेश पारित कर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट को वापस भेज दिए गए थे तथा सुप्रीम कोर्ट द्वारा, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायमूर्ति से उक्त समस्त प्रकरणों को विशेष बेंच गठित कर 3 महीने के अंदर निराकृत करने के आदेश पारित किए गए थे।
19 फरवरी को दिए आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने किया संशोधन
ओबीसी एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा दीपक कुमार पटेल के नाम से एक रिव्यू याचिका MA/529/26 दाखिल की गई थी जिस पर सुप्रीम कोर्ट के द्वारा खुले न्यायालय में 20 मार्च 2026 को विस्तृत सुनवाई करते हुए पूर्व में दिए अपने आदेश में संशोधन कर 52 प्रकरण जो मध्य प्रदेश सरकार द्वारा ट्रांसफर कराए गए थे, उनको भी 20 मार्च के आदेश से मध्य प्रदेश हाई कोर्ट को वापस भेज दिए गए हैं, तथा दो विशेष अनुमत याचिकाएं जो पूर्व में सुप्रीम कोर्ट द्वारा मध्य प्रदेश हाई कोर्ट को वापस की गई थी इसकी जानकारी 30 मार्च को वेबसाइड पर अपलोड की गई है।
ये दो मामले सुप्रीम कोर्ट ने किये रिकाल
उक्त आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने दो एसएलपी जिनमें दीपक कुमार पटेल विरुद्ध मध्य प्रदेश शासन एवं हरिशंकर बरोदिया विरुद्ध मध्य प्रदेश शासन को अपने समक्ष सुनवाई हेतु रिकॉल कर लिए गए हैं, 19 फरवरी वाला शेष आदेश यथावत रहेगा। ओबीसी एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से कोर्ट में दलील देने वाले सीनियर अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर, विनायक प्रसाद शाह, वरुण ठाकुर ने पक्ष रखा उन समस्त मामलों को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में 02/04/2026 को सुनवाई नियत हैं।
सड़क हादसे में सुरक्षित रहे कांग्रेस सांसद, एयरबैग न खुलने से चिंता व्यक्त की
30 Mar, 2026 01:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई। महाराष्ट्र के भंडारा-गोंदिया क्षेत्र से कांग्रेस सांसद डॉ. प्रशांत पडोले सोमवार सुबह एक सड़क दुर्घटना का शिकार हो गए। यह हादसा उस समय हुआ जब वे अपने निजी वाहन से भंडारा से नागपुर एयरपोर्ट के लिए निकले थे। सांसद को दिल्ली में आयोजित संसद सत्र में शामिल होने के लिए उड़ान भरनी थी, लेकिन रास्ते में ही एक अनियंत्रित ट्रक ने उनकी कार को जोरदार टक्कर मार दी। गनीमत यह रही कि इस भीषण टक्कर के बावजूद सांसद और उनके ड्राइवर को कोई गंभीर चोट नहीं आई, हालांकि वाहन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है।
दुर्घटना के तुरंत बाद सांसद डॉ. प्रशांत पडोले ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए इस घटना की जानकारी साझा की। उन्होंने केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को टैग करते हुए देश में सड़क सुरक्षा और वाहनों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा, सांसद सुरक्षित नहीं, तो जनता का क्या होगा? उन्होंने विशेष रूप से कार की सुरक्षा प्रणाली पर नाराजगी जताते हुए कहा कि इतनी जोरदार टक्कर के बाद भी वाहन के एयरबैग नहीं खुले। उन्होंने सरकार से मांग की कि वाहन निर्माता कंपनियों को सख्त आदेश दिए जाने चाहिए ताकि दुर्घटना के समय सुरक्षा उपकरण सही ढंग से काम करें।
हादसे के बाद सांसद ने गजब की कर्तव्यनिष्ठा और जीवटता का परिचय दिया। मामूली चोटों और कार के क्षतिग्रस्त होने के बावजूद उन्होंने अपना दिल्ली दौरा रद्द नहीं किया। प्राथमिक उपचार के बाद, उन्होंने एक दोपहिया वाहन से लिफ्ट ली और नागपुर एयरपोर्ट पहुंचे, जहां से वे संसद सत्र में शामिल होने के लिए दिल्ली के लिए रवाना हो गए। उनके समर्थकों और स्थानीय नागरिकों ने उनकी इस सक्रियता की सराहना की है, लेकिन साथ ही बार-बार हो रहे हादसों पर चिंता भी जताई है।
उल्लेखनीय है कि डॉ. प्रशांत पडोले के साथ यह दूसरी बड़ी सड़क दुर्घटना है। इससे पहले सितंबर 2025 में भी वे एक सड़क हादसे का शिकार हुए थे। उस समय वे मुंबई से भंडारा लौट रहे थे, तभी सुबह के वक्त नागपुर बायपास के पास उनकी कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। पिछले साल हुए उस हादसे में भी वे और उनके ड्राइवर बाल-बाल बचे थे। एक साल के भीतर दूसरी बार हुए इस हादसे ने सुरक्षा मानकों और व्यस्त राजमार्गों पर भारी वाहनों की आवाजाही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और टक्कर मारने वाले ट्रक की पहचान की कोशिश की जा रही है।
राजधानी में आतंकी साजिश नाकाम: शब्बीर अहमद दबोचा गया
30 Mar, 2026 10:43 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सोमवार को सुरक्षा एजेंसियों को बड़ी सफलता हाथ लगी है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने लश्कर के आतंकी शब्बीर अहमद को गिरफ्तार किया है। राजधानी दिल्ली में सुरक्षा एजेंसियों ने बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े शख्स शब्बीर अहमद को गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी एक गुप्त सूचना के आधार पर की गई, जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उसे दबोच लिया।
सूत्रों के अनुसार, आरोपी लंबे समय से संदिग्ध गतिविधियों में शामिल था और उसके संबंध आतंकी नेटवर्क से जुड़े बताए जा रहे हैं। जांच एजेंसियां उससे पूछताछ कर रही हैं, ताकि उसके संपर्कों और संभावित साजिशों का पता लगाया जा सके। बताया जा रहा है कि शब्बीर अहमद किसी बड़ी साजिश को अंजाम देने की फिराक में था, लेकिन समय रहते सुरक्षा एजेंसियों ने उसे गिरफ्तार कर लिया। उसके पास से कुछ संदिग्ध सामग्री भी बरामद होने की खबर है, जिसकी जांच की जा रही है। फिलहाल, सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही हैं और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि उसके नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल हैं। राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था को भी एहतियात के तौर पर और कड़ा कर दिया गया है।
निर्यात पर संकट की मार: खाड़ी हालात से बढ़ी लागत और लॉजिस्टिक्स बनी चुनौती
30 Mar, 2026 10:36 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। खाड़ी क्षेत्र में अमरीका-ईरान संघर्ष से तेल-गैस आयात में परेशानी के अलावा भारत के कृषि और डेयरी क्षेत्र के 10.68 अरब डॉलर के निर्यात पर संकट खड़ा हो गया है। इसके अलावा जैम-ज्वैलरी, हैंंडीक्राफ्ट व छोटे उद्योगों (एमएसएमई) का निर्यात भी बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। पश्चिम एशिया के देशों को होने वाला यह निर्यात मांग, लॉजिस्टिक्स बाधाओं और बढ़ती लागत के चलते मुश्किल में है। इससे मुख्य रूप से महाराष्ट्र, गुजरात व कर्नाटक के अलावा राजस्थान, मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़ के निर्यातक परेशान हैं। केंद्र सरकार ने होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित आवाजाही में बाधा से उपजे हालात में लौट रहे निर्यात जहाजों के लिए विशेष राहत के उपाय शुरू किए हैं लेकिन निर्यातकों को और मदद की उम्मीद है। दरअसल, मध्य पूर्व, विशेषकर गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (जीसीसी) के देश जैसे यूएई, सऊदी अरब, ओमान, कुवैत, कतर और बहरीन और इसके साथ ईरान, इराक और यमन, भारतीय कृषि और डेयरी उत्पादों के प्रमुख बाजार हैं। इन देशों में भारत के कुल कृषि निर्यात का करीब 20.5% हिस्सा जाता है। करीब एक महीने बाद भी हालात सामान्य नहीं होने से भारतीय निर्यातकों पर संकट गहराने लगा है।
अंतर मंत्रालयी समूह सक्रिय, मिल सकती है राहत
स्थिति की निगरानी के लिए सरकार ने युद्ध शुरू होने के दो दिन बाद ही ‘सप्लाई चेन लचीलापन’ के लिए अंतर-मंत्रालयी समूह (आईएमजी) सक्रिय कर दिया था और बाद में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में मंत्री समूह बनाया है। सूत्रों ने बताया कि संकट और लंबा खिंचा तो सरकार एमएसएमई और अर्थव्यवस्था के कमजोर वर्गों के लिए राहत पैकेज की घोषणा कर सकती है, ताकि उन्हें बचाने और घरेलू बाजार में मुद्रास्फीति को नियंत्रण में रखने में मदद मिले।
सरकार ने किए निर्यातकों को राहत के उपाय
रिलीफ योजना (19 मार्च): डीजीएफटी ने निर्यात जोखिम कम करने को 497 करोड़ रुपए की विशेष योजना शुरू की।
समयसीमा में राहत: बिना अतिरिक्त शुल्क के निर्यात दायित्व पूरा करने की समय सीमा 31 अगस्त 2026 तक बढ़ाई ।
कस्टम प्रक्रिया आसान: कस्टम बोर्ड ने फंसे माल के लिए सरल क्लीयरेंस, ट्रांजिट और री-एक्सपोर्ट की सुविधा दी।
लॉजिस्टिक व कार्गो को राहत: हॉर्मूज से लौट रहे कार्गो के लिए बर्थिंग, ऑफलोडिंग, शिपिंग बिल रद्द करने और बैक-टू-टाउन की सुविधा, जांच-जुर्माना माफ
बंदरगाहों पर विशेष व्यवस्था: प्रमुख बंदरगाहों पर 24×7 नोडल अधिकारी, अतिरिक्त स्टोरेज, जल्दी खराब होने वाले सामान की प्राथमिकता और शुल्क में छूट जैसे कदम लागू किए गए।
निर्यातकों ने व्यवधानों की रिपोर्ट दी: प्रसाद
सरकार स्थिति पर बारीकी से नजर रख रही है, जिसमें भारत के बाहरी व्यापार, शिपिंग मार्गों और लॉजिस्टिक्स श्रृंखलाओं पर इसके प्रभाव भी शामिल हैं। निर्यातकों ने माल ढुलाई दरों में वृद्धि, युद्ध-जोखिम अधिभार लगाए जाने, कंटेनरों की कमी, शिपमेंट शेड्यूल में देरी और बंदरगाहों पर भीड़भाड़ जैसे व्यवधानों की सरकार को रिपोर्ट दी है।
जितिन प्रसाद, वाणिज्य राज्य मंत्री (राज्यसभा में एक सवाल पर लिखित जवाब में दिया)
राजस्थान: कंटेनर अटके, निर्यातकों पर आर्थिक बोझ
राजस्थान के करीब 120 कंटेनर ओमान पोर्ट पर रोके जाने की जानकारी मिल रही है। राजस्थान से हैंडीक्राफ्ट व मसाले का निर्यात प्रभावित हुआ है। निर्यातक राजेश गुप्ता ने कहा कि हाल ही भेजे गए उनके दो कंटेनर सऊदी अरब पहुंचने के बजाय ओमान के पोर्ट पर ही उतार दिए गए। एक कंटेनर को वापस मंगाने में करीब तीन लाख रुपए तक का अतिरिक्त खर्च आएगा, जो निर्यातकों के लिए बड़ा आर्थिक बोझ है।
छत्तीसगढ़: चावल, सिल्क कोसा, हर्बल प्रोडक्ट अटका
युद्ध की वजह से छत्तीसगढ़ से चावल के निर्यात में 20% का असर पड़ा है। चावल फिलहाल वाइजैक पोर्ट में अटका हुआ है। इसके अलावा स्पेशल स्टील, सिल्क कोसा, जड़ी बूटी का हर्बल प्रोडक्ट और बस्तर आर्ट के सामान का निर्यात भी बाधित हुआ है।
मध्यप्रदेश: बासमती, डेयरी उत्पाद प्रभावित
मध्यप्रदेश से बासमती चावल, डेयरी उत्पाद, मीट सहित फल-सब्जियों का निर्यात प्रभावित हुआ है। निर्यात रुकने ढाई से तीन लाख टन बासमती सहित अन्य माल बंदरगाह पर अटका है और गोदामों में भारी स्टॉक जमा है। चावल मिलर्स श्रीराम माहेश्वरी का कहना है किचावल निर्यातक परेशान हैं। शिप का भाड़ा 25 से 30% तक बढ़ गया है। घरेलू बाजार में दाम घट गए हैं।
गर्मी से बचाव का नया तरीका: खास ईंटों से ठंडा रहेगा घर, कम होगा खर्च
30 Mar, 2026 10:32 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गुवाहाटी : गर्मी के दिनों में घर को ठंडा करने के लिए महंगे यंत्रों और भारी बिजली की जरूरत होती है। इसी ऊर्जा को बचाने की दिशा में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान आईआईटी गुवाहाटी (IIT Guwahati) ने राहतभरा कदम उठाया है। शोधकर्ताओं ने ऐसी ईंटें तैयार की हैं, जो सस्ती होने के साथ ही घर को ठंडा रखने में भी मददगार होगी। इन ईंटों की खासियत यह है कि ये बाहर की गर्मी को दीवार के अंदर आने से रोकती है। इससे घर के भीतर का तापमान सामान्य बना रहता है।
एसी और कूलर चलाने की ज़रूरत कम पड़ेगी
आईआईटी गुवाहाटी के शोधकर्ताओं का दावा है कि इन ईंटों के इस्तेमाल से घरों में एसी और कूलर चलाने की ज़रूरत कम पड़ेगी, जिससे सीधे तौर पर बिजली की बचत होगी। पर्यावरण अनुकूल ये ईटें बढ़ती गर्मी और बिजली के भारी बिल की परेशानी के बीच यह तकनीक मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए वरदान साबित हो सकती है। एसी कम चलने से प्रदूषण भी कम होगा, जो पर्यावरण के लिए काफी फायदेमंद साबित होगा।
कचरे से बनी हैं ये खास ईंटें
आईआईटी गुवाहाटी के स्कूल ऑफ एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग व स्कूल ऑफ एग्रो एंड रूरल टेक्रोलॉजी के शोधार्थियों ने इन ईटों को तैयार किया है। इन ईंटों को तैयार करने के लिए टीम ने खेती और उद्योगों से निकलने वाले कचरे और सामान्य मिट्टी का प्रयोग किया। इससे प्रदूषण कम करने में मदद मिलेगी। शोधकर्ताओं का कहना है कि ये ईंटें परंपरागत लाल ईंटों की तुलना में काफी हल्की और मज़बूत हैं, जिससे इमारतों का वज़न भी कम होगा।
बिजली बिल होगा कम
शोधार्थियों के अनुसार इन ईंटों के निर्माण में थर्मल इंसुलेशन का खास ध्यान रखा गया है। इससे बिजली का बिल भी कम होगा, जिससे लोगों को बड़ी राहत मिलेगी और पैसों की बचत होगी। गर्मी के मौसम में ये ईंटें सूरज की तपिश को सोख लेती हैं और कमरे के भीतर का माहौल ठंडा बनाए रखती हैं। 28 से 38 डिग्री सेल्सियस तापमान और नमी वाले स्थानों के लिए यह ईटें मुफीद हैं। इन ईटों के व्यवसायिक उपयोग के लिए सर्टिफिकेशन और उद्योग से जुड़े लोगों से भी अब बातचीत की जा रही है।
हवाई सफर में सनसनी: इमरजेंसी गेट खोलने की कोशिश, आरोपी बोला- भूत का साया था
30 Mar, 2026 09:27 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाराणसी : वाराणसी जा रही एक इंडिगो फ्लाइट में शनिवार रात उस समय अफरातफरी मच गई जब एक यात्री ने इमरजेंसी एग्जिट गेट खोलने की कोशिश करने लगा। यह घटना बेंगलुरु से वाराणसी जा रही फ्लाइट 6E-185 में हुई है। सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह रही कि जब फ्लाइट में मौजूद लोग और क्रू मेंबर आरोपी यात्री को रोकने की कोशिश की तो उसने भूत के वश में होने का झूठा दिखावा किया। यह घटना फ्लाइट के लैंड होने से ठीक पहले हुई, जिससे यात्रियों में दहशत फैल गई और सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए। आरोपी यात्री की पहचान मोहम्मद अदनान के रूप में हुई है।
क्रू ने रोका और अदनान को सख्त चेतावनी दी
जानकारी के मुताबिक, अदनान उत्तर प्रदेश के मऊ जिले का रहने वाला है। उड़ान भरने के करीब 15 मिनट बाद ही अदनान इमरजेंसी गेट के साथ छेड़छाड़ करने लगा। इसके बाद केबिन क्रू ने तुरंत उसे रोक दिया और दुबारा ऐसा नहीं करने की सख्त चेतावनी दी। उस समय अदनान ने इसे गलती बताया और बाद में पूरे सफर के दौरान सामान्य व्यवहार करता रहा। क्रू की सतर्कता के कारण उस समय कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ और फ्लाइट सामान्य तरीके से आगे बढ़ती रही।
दो बार गेट खोलने की कोशिश की
लेकिन यह शांती ज्यादा देर तक नहीं बनी रही और कुछ ही देर बाद अदनान ने फिर इमरजेंसी गेट से छेड़छाड़ करने की कोशिश की। रात के करीब 10:20 बज रहे थे और विमान वाराणसी के लाल बहादुर शास्त्री इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर लैंडिंग के लिए करीब 500 फीट की ऊंचाई पर था। तभी अचानक अदनान एक बार फिर से इमरजेंसी एग्जिट गेट खोलने की कोशिश करने लगा। जैसे ही क्रू ने पायलट को इसकी सूचना दी, पायलट ने तुरंत सूझबूझ दिखाते हुए लैंडिंग रोक दी और गो-अराउंड का फैसला लिया। इसके बाद विमान को सुरक्षित तरीके से दोबारा उतारा गया और रात 10:35 बजे लैंडिंग कराई गई।
जांच के दौरान भूत के वश में होने का किय दावा
फ्लाइट के सुरक्षित उतरने के बाद अदनान को तुरंत एयरपोर्ट सुरक्षा और सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स (CISF) के हवाले कर दिया गया। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पूछताछ के दौरान अदनान ने पहले कहा कि उसे अपने व्यवहार के बारे में कुछ पता नहीं, लेकिन बाद में उसने दावा किया कि वह भूत के वश में था। पुलिस के अनुसार, आरोपी गोवा से छुट्टियां मनाकर लौट रहा था और उसे यह भी नहीं पता था कि वह जिस हैंडल को खींच रहा था, वह इमरजेंसी डोर का कंट्रोल है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और परिवार को सूचित कर दिया गया है।
परिवहन विभाग अलर्ट: चारधाम यात्रा से पहले वाहनों के लिए ग्रीन कार्ड अनिवार्य
30 Mar, 2026 08:22 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
देहरादून: चारधाम यात्रा को लेकर हर साल काफी तैयारियां की जाती है। परिवहन विभाग भी वाहनों की आवाजाही को लेकर कई तरह की तैयारी करता है। आज से इन मार्गों पर संचालित होने वाले वाहनों के ग्रीन कार्ड बनाना शुरू किए जाएंगे। वाहन चालकों के लिए इन मार्गों से गुजरने के लिए ये कार्ड अनिवार्य किया गया है।
देहरादून की आशारोड़ी चेक पोस्ट, ऋषिकेश, विकास नगर, हरिद्वार और रुड़की आरटीओ कार्यालय में ग्रीन कार्ड बनाने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। 15 अप्रैल से रुड़की की नारसन पोस्ट पर यह कार्ड बनाए जाएंगे। आरटीओ प्रशासन को पारदर्शिता से इसे बनाने के निर्देश दिए गए हैं। साल 2025 में यात्रा के समय तकरीबन 32000 व्यावसायिक वाहनों के ग्रीन कार्ड बनाए गए थे।
कब शुरू होगी चारधाम यात्रा
चार धाम यात्रा की शुरुआत 19 अप्रैल को यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ हो जाएगी। ऐसे में बाहरी राज्यों के वाहनों के प्रवेश से पहले स्थानीय वाहनों के ग्रीन कार्ड बनाए जाएंगे ताकि उन्हें लाइन में लंबा इंतजार ना करना पड़े।
जिस भी चालक को वाहन का कार्ड बनवाना है उन्हें अपने साथ वहां लेकर आना होगा। अगर गाड़ी के दस्तावेज पूरे होंगे तभी ग्रीन कार्ड जारी किया जाएगा। इस दौरान तकनीकी निरीक्षण भी किया जाएगा और यह देखा जाएगा की गाड़ी में किस तरह की कमी है। अगर कोई कमी सामने आती है तो कार्ड बनाने पर रोक लगाई जाएगी।
तैनात की गई विशेष टीम
जिन कार्यालयों और चेक पोस्ट पर ग्रीन कार्ड बनाए जाने वाले हैं। वहां पर तकनीकी टीम के साथ प्रशासन की विशेष टीम तैनात रहेगी। प्रतिदिन कितने ग्रीन कार्ड बने हैं इसकी जानकारी आरटीओ प्रशासन को उपलब्ध कराई जाएगी।
परिवहन मंत्री करेंगे उद्घाटन
हरिद्वार के आरटीओ कार्यालय में आज परिवहन मंत्री प्रदीप बत्रा ग्रीन कार्ड काउंटर का उद्घाटन करेंगे। इसके लिए तैयारियां पूरी कर ली गई है। आरटीओ प्रशासन की ओर से वाहन चालकों के लिए यूपीआई भुगतान के सुविधा उपलब्ध करवाई गई है। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि धनराशि सीधे सरकारी कोष को प्राप्त हो सके। वहीं ग्रीन कार्ड बनने की सूचना संबंधित व्यक्ति को मैसेज के जरिए उपलब्ध करवाई जाएगी।
टोल का नया नियम: 1 अप्रैल से कैश बंद, जानें कैसे होगा भुगतान
29 Mar, 2026 01:39 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के साथ ही देशभर के वाहन चालकों के लिए एक बड़ा बदलाव सामने आ रहा है। 1 अप्रैल से टोल प्लाजा पर टोल टैक्स में बढ़ोतरी लागू हो रही है और साथ ही कैश पेमेंट को पूरी तरह बंद कर दिया गया है। अब यात्रियों को केवल FASTag या ऑनलाइन माध्यम से ही भुगतान करना होगा।
अब तक कई लोग टोल प्लाजा पर कैश देकर निकल जाते थे, लेकिन नए नियम के बाद ऐसा करना संभव नहीं होगा। यह बदलाव खासतौर पर उन लोगों के लिए चुनौती बन सकता है, जो अभी भी डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल नहीं करते। ऐसे में यात्रा से पहले FASTag रिचार्ज रखना जरूरी हो जाएगा, नहीं तो रास्ते में परेशानी हो सकती है।
टोल टैक्स में 5 से 10 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी
नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) द्वारा हर साल की तरह इस बार भी टोल टैक्स में बढ़ोतरी की गई है। इस बार यह बढ़ोतरी करीब 5 से 10 प्रतिशत तक रखी गई है। इसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा।
जबलपुर, नागपुर, रायपुर, भोपाल और प्रयागराज जैसे प्रमुख मार्गों पर यात्रा करने वाले वाहन चालकों को अब पहले से ज्यादा पैसा देना होगा। जानकारी के अनुसार, कई टोल प्लाजा पर कार चालकों को 5 से 10 रुपये तक अतिरिक्त भुगतान करना पड़ सकता है। छोटे लगने वाले ये बदलाव लंबी यात्रा में बड़ा खर्च बन सकते हैं।
अब नहीं चलेगा कैश, FASTag और ऑनलाइन पेमेंट अनिवार्य
सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब टोल प्लाजा पर कैश पेमेंट पूरी तरह बंद कर दिया गया है। यानी अगर आपके पास FASTag नहीं है या उसमें बैलेंस नहीं है, तो आपको परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
सरकार का उद्देश्य डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देना और टोल प्लाजा पर लगने वाली लंबी लाइनों को खत्म करना है। FASTag के जरिए भुगतान करने से समय की बचत होती है और ट्रैफिक भी कम होता है। लेकिन जिन लोगों ने अभी तक FASTag नहीं बनवाया है, उनके लिए यह बदलाव मुश्किल खड़ी कर सकता है।
सालाना पास भी महंगा, अब देना होगा ज्यादा पैसा
टोल टैक्स बढ़ने के साथ-साथ सालाना पास की कीमत भी बढ़ा दी गई है। FASTag के जरिए बनने वाले इस पास में करीब 75 रुपये तक की बढ़ोतरी की गई है।
पहले जहां कार के लिए सालाना पास 3000 रुपये का था, अब इसे बढ़ाकर 3075 रुपये कर दिया गया है। इस पास में 200 टोल क्रॉसिंग की सीमा होती है। यानी जो लोग रोजाना एक ही रूट पर यात्रा करते हैं, उनके लिए यह पास थोड़ा महंगा हो गया है।
किन सड़कों पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा
इस बढ़ोतरी का सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो रोजाना या अक्सर हाईवे पर सफर करते हैं। खासतौर पर जबलपुर से नागपुर, रायपुर, भोपाल और प्रयागराज जाने वाले यात्रियों को अब ज्यादा खर्च उठाना होगा।
इसके अलावा जबलपुर से दमोह और सागर रोड पर भी लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। यहां की सड़कें अभी पूरी तरह विकसित नहीं हैं, लेकिन टोल वसूली जारी है। इसी वजह से वाहन चालकों में नाराजगी भी देखने को मिल रही है।
सड़क की स्थिति पर उठ रहे सवाल
टोल टैक्स बढ़ने के साथ ही सड़क की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। कई वाहन चालकों का कहना है कि हर साल टोल टैक्स बढ़ता है, लेकिन सड़कें उसी हिसाब से बेहतर नहीं होतीं।
भोपाल रोड की हालत को लेकर खासतौर पर शिकायतें सामने आई हैं। वहीं जबलपुर से पाटन, तेंदूखेड़ा और गोटेगांव मार्ग पर भी लोग टोल वसूली को लेकर नाराज हैं। लोगों का कहना है कि अगर सुविधा बेहतर नहीं मिल रही, तो टोल बढ़ाना सही नहीं है।
क्या है टोल बढ़ोतरी का आधार
NHAI के अनुसार टोल टैक्स की दरें होलसेल प्राइस इंडेक्स (WPI) के आधार पर तय की जाती हैं। इसके अलावा सड़क की लंबाई, फ्लाईओवर, अंडरपास, टनल जैसी सुविधाओं को भी ध्यान में रखा जाता है। जहां बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर होता है, वहां टोल टैक्स भी ज्यादा होता है। लेकिन कई जगहों पर लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि सुविधाएं पूरी नहीं हैं, फिर भी टोल बढ़ाया जा रहा है।
एनएचएआई के पीडी अमृत लाल साहू के अनुसार, 1 अप्रैल से टोल दरों में औसतन करीब 5 रुपये की बढ़ोतरी की जाएगी। कार चालकों को लगभग 5 रुपये अतिरिक्त भुगतान करना होगा, जबकि अन्य वाहनों के लिए अलग-अलग दरें तय की गई हैं। उन्होंने बताया कि टोल नाकों पर यात्री सुविधाओं को भी लगातार बेहतर किया जा रहा है।
विजयपत सिंघानिया का निधन: रेमंड के पूर्व चेयरमैन के पीछे छोड़ी बड़ी संपत्ति
29 Mar, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
देश के दिग्गज उद्योगपति और रेमंड ग्रुप के पूर्व चेयरमैन विजयपत सिंघानिया का शनिवार शाम मुंबई में 87 साल की उम्र में निधन हो गया। दरअसल उनके परिवार ने इस दुखद खबर की पुष्टि की है। जानकारी दे दें कि रेमंड समूह के वर्तमान चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक गौतम सिंघानिया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपने पिता के निधन की जानकारी साझा की है। दरअसल सिंघानिया का निधन भारतीय उद्योग जगत के लिए एक बड़ी क्षति है, क्योंकि वे न केवल एक सफल कारोबारी थे, वह एक कुशल पायलट भी थे।
दरअसल विजयपत सिंघानिया अपने पीछे लगभग 12 हजार करोड़ रुपये की अनुमानित संपत्ति छोड़ गए हैं। बता दें कि यह राशि उनके जीवनकाल में की गई संपत्ति हस्तांतरण के बावजूद उनकी विशाल व्यावसायिक विरासत का प्रतीक है। दरअसल साल 2015 में, सिंघानिया ने रेमंड समूह में अपनी पूरी 37 प्रतिशत हिस्सेदारी अपने बेटे गौतम सिंघानिया को ट्रांसफर कर दी थी। इस बड़े हस्तांतरण के बाद से, कंपनी की बागडोर पूरी तरह गौतम के हाथों में आ गई थी।
रेमंड समूह का नेतृत्व लगभग दो दशकों तक संभाला
दरअसल विजयपत सिंघानिया ने रेमंड समूह का नेतृत्व लगभग दो दशकों तक संभाला है। उन्होंने वर्ष 1980 में चेयरमैन का पद संभाला और साल 2000 तक इस पद पर बने रहे। वहीं उनके कार्यकाल में रेमंड ने कपड़ा उद्योग में एक नई पहचान बनाई और देश के प्रमुख वस्त्र ब्रांड्स में शामिल हो गया। सिंघानिया की नेतृत्व क्षमता और दूरदृष्टि ने रेमंड को एक छोटे उद्यम से एक राष्ट्रीय पावरहाउस में बदल दिया। उन्होंने 1991 के आर्थिक उदारीकरण से पहले ही कंपनी को कड़ी प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार कर दिया था, जिससे रेमंड बदलती बाजार परिस्थितियों में भी मजबूती से टिकी रही और अपनी अग्रणी स्थिति बनाए रखी।
विजयपत सिंघानिया और उनके बेटे गौतम सिंघानिया के बीच संपत्ति विवाद भी रहा
हालांकि, उनके जीवन में एक दौर ऐसा भी आया जब विजयपत सिंघानिया और उनके बेटे गौतम सिंघानिया के बीच संपत्ति और कंपनी के नियंत्रण को लेकर कानूनी विवाद सामने आया। यह विवाद कुछ साल पहले मीडिया की सुर्खियों में रहा और इसने उद्योग जगत में काफी हलचल मचाई थी। दरअसल पिता और पुत्र के बीच के इस मतभेद ने पारिवारिक संबंधों और व्यावसायिक विरासत के जटिल मुद्दों को उजागर किया। हालांकि, बाद में दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया और यह मामला सुलझा लिया गया, जिससे परिवार और कंपनी दोनों को आगे बढ़ने का अवसर मिला।
वहीं रेमंड समूह के प्रवक्ता के अनुसार, विजयपत सिंघानिया का अंतिम संस्कार रविवार को मुंबई में किया जाएगा। उनके निधन को भारतीय उद्योग जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है।
ब्यूरोक्रेसी में बदलाव: 19 IAS अफसरों के तबादले, नई सूची जारी
29 Mar, 2026 08:28 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग ने 10 आईएएस अधिकारियों का स्थानांतरण (IAS Transfer) किया है। उन्हें नए पद की जिम्मेदारी सौंप गई है। एडीओ और एडीएम समेत कई पदों के प्रभाव में बदलाव हुआ है महाराष्ट्र सरकार ने 8 अधिकारियों को नई जिम्मेदारी सौंपी है। एक जिले की कलेक्टर भी बदले गए हैं। भूपेंद्र पटेल की सरकार ने एक आईएएस अफसर को नया पदभार दिया है। तबादलेऔर नियुक्ति से संबंधित आदेश शुक्रवार को जारी हो चुका है।
पश्चिम बंगाल में बैच 2023 के आईएएस अधिकारी मोइन अहमद को सदर जलपाईगुड़ी (जलपाईगुड़ी एसी विधानसभा क्षेत्र) के एडीओ पद पर नियुक्त किया गया है। सब डिवीजन ऑफिसर सदर अलीपुर साउथ 24 परगना (यादवपुर विधानसभा क्षेत्र) पद पर रवि कुमार मीणा को तैनात किया गया है। एडीएम-1 हावड़ा (जगतबल्लावपुर विधानसभा क्षेत्र) पद पर रवि रंजन को नियुक्त किया गया।
पश्चिम बंगाल में इन्हें भी मिला नया पदभार
कंज्यूमर अफेयर्स डिपार्टमेंट में विशेष सचिव पद पर कार्यरत प्रियदर्शनी एस को एडीएम-3 हुगली पुरसुरा के पद पर नियुक्त किया गया है। एसडीओ, हल्दिया पूर्व मेदनीपुर पद की जिम्मेदारी सुरभी सिंह को सौंपी गई है। एसडीओ कोंटई, पूर्व मेदिनीपुर (कांठी दक्षिण विधानसभा क्षेत्र के पद पर) धूमल प्रतीक को नियुक्त किया गया है। एग्रा, पूर्व मेदनीपुर एडीओ पद पर कर्मवीर केशव को भेजा गया है।
आसनसोल नगर निगम के आयुक्त पद की जिम्मेदारी संभाल रहे एकम जे. सिंह को एडीएम (एलआर), पश्चिम मेदिनीपुर विधानसभा क्षेत्र पद पर भेजा गया है। सीईओ न्यू टाउन कोलकाता डेवलपमेंट अथॉरिटी पद पर कार्यरत अब्दुल साहिद को एडीएम (देव) पश्चिम मेदिनीपुर दासपुर पद की जिम्मेदारी सौंप गई है। प्रियदर्शनी भट्टाचार्य, ज्वाइंट सेक्रेटरी पंचायत एंड रूरल डेवलपमेंट को एडीएम 2 बांकुरा सोनामुखी पद जिम्मेदारी दी गई है।
गुजरात आईएएस ट्रांसफर
गुजरात सरकार ने बैच 2023 की आईएएस अधिकारी एप्पलापल्ली सुष्मिता को प्रांत अधिकारी महुवा, जिला भावनगर पद पर पदस्थ किया गया है। इससे पहले वह हलोल प्रांत अधिकारी पद की जिम्मेदारी संभाल रही थी। इससे संबंधित आदेश राज्यपाल के नाम पर सामान्य प्रशासन विभाग ने जारी किया है।
महाराष्ट्र आईएएस तबादला
आईएएस अधिकारी रूबल प्रखर अग्रवाल प्रबंध निदेशक महा मुंबई मेट्रो ऑपरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड मुंबई को कोंकण संभाग मुंबई का संभागीय आयुक्त बनाया गया है।
नयना गुंडे, आयुक्त, महिला एवं बाल विकास पुणे को स्थानांतरित करके अमरावती संभाग का संभागीय आयुक्त बनाया गया है।
श्वेता सिंगला, अमरावती संभाग संभागीय आयुक्त को स्थानांतरित करके प्रबंध निदेशक महा मुंबई मेट्रो ऑपरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड पद की जिम्मेदारी दी गई है।
अशोक काकडे कलेक्टर सांगली को प्रबंध निदेशक महाराष्ट्र एग्रो इंडस्टरीज डेवलपमेंट कॉरपोरेशन पद पर पदस्थित किया गया है।
राहुल रेखावार को सदस्य सचिव महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पद की जिम्मेदारी सौंप गई है।
एम देवेंद्र सिंह को संयुक्त आयुक्त ग्रेटर मुंबई नगर निगम पद पर भेजा गया है।
डॉ. मैनाक घोष, मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिला परिषद धाराशिव को कलेक्टर सांगली पद की जिम्मेदारी दी गई है।
प्रियंवदा महादलकर को मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिला परिषद धारायशिव पद पर भेजा गया।
साहब की बहाली के लिए बाबू ने मांगी घूस: 40 हजार रुपये के साथ पकड़े गए स्थापना शाखा प्रभारी।
अनुभव का सम्मान या परीक्षा का दबाव? पात्रता परीक्षा पर मप्र के शिक्षकों ने खोला मोर्चा
ग्रामीणों की बहादुरी से बची दो जानें, लेकिन अंचल और पूनम को नहीं बचा सका कोई
"सस्पेंड करो या कोर्ट झेलने को तैयार रहो" - भाजपा नेता संतोष परवाल की तीखी चेतावनी
Health Tips: पाचन तंत्र को लोहे जैसा मजबूत बना देगा 30/30/3 नियम, आज ही करें ट्राई।
20 अप्रैल तक करना होगा सरेंडर: कोर्ट ने दोषी को दी राहत, मगर पुलिस को दी नसीहत
"अब विकास में बाधा नहीं सहेगा बंगाल": भाजपा के समर्थन में बोले डॉ. मोहन यादव
भारत का करारा जवाब: पाकिस्तान ने समंदर में दिखाई बौखलाहट, भारत ने दोगुनी ताकत से घेरा
डायमंड सिटी को जाम से मिलेगी मुक्ति; सूरत मेट्रो के 8.5 किमी लंबे रूट पर टेस्टिंग जारी।
देवघर और हजारीबाग में नए चेहरों की एंट्री; झारखंड सरकार ने प्रशासनिक अमले में किया बड़ा उलटफेर।
