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आपूर्ति संकट का असर: बोतलबंद पानी महंगा होने की संभावना, उद्योग पर बढ़ा दबाव
4 Apr, 2026 10:01 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली | भारत में जहां एक ओर तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार जाने की चेतावनी है, वहीं दूसरी ओर पश्चिम एशिया में अमेरिका– इस्राइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब आम उपभोक्ताओं तक पहुंचने लगा है। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और आपूर्ति बाधित होने से देश का लगभग 6 अरब डॉलर का बोतलबंद पानी उद्योग दबाव में है, जिससे आने वाले दिनों में कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका बढ़ गई है। भारत में अप्रैल और मई के महीनों में पानी और ठंडे पेय पदार्थों की मांग चरम पर होती है। ऐसे समय में साफ पेयजल की कमी, भूजल प्रदूषण और बुनियादी ढांचे की खामियों के कारण बड़ी आबादी बोतलबंद पानी पर निर्भर रहती है। डेटा फॉर इंडिया के अध्ययन के अनुसार शहरी क्षेत्रों के लगभग 15% और ग्रामीण क्षेत्रों के 6% परिवार पीने के लिए पैकेज्ड पानी का उपयोग करते हैं। पश्चिम एशिया में तनाव के चलते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है।
पूरे पैकेजिंग उद्योग पर असर की आशंका
केमको प्लास्टिक इंडस्ट्रीज के निदेशक वैभव सराओगी का कहना है कि पीईटी प्रीफॉर्म की कीमतों में वृद्धि का असर केवल बोतलबंद पानी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे पैकेजिंग उद्योग को प्रभावित करेगा। उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनियों के लिए लंबे समय तक लागत को खुद वहन करना संभव नहीं होगा। यदि कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और आपूर्ति बाधित रहती है तो आने वाले हफ्तों में बोतलबंद पानी सहित अन्य पेय पदार्थों की कीमतों में वृद्धि तय मानी जा रही है, जिसका सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।
महाराष्ट्र में 20% इकाइयों में उत्पादन बंद
महाराष्ट्र बोतलबंद पानी निर्माता संघ के अध्यक्ष विजय सिंह दुब्बल के अनुसार पीईटी प्रीफॉर्म जिनसे प्लास्टिक बोतलें बनाई जाती हैं, उनकी कीमत 115 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर लगभग 180 रुपये हो गई है और बाजार में इनकी कमी भी देखी जा रही है। कच्चे माल की बढ़ती लागत और आपूर्ति संकट के कारण महाराष्ट्र में लगभग 20% बोतल निर्माण इकाइयों ने अस्थायी रूप से संचालन बंद कर दिया है।
भारत, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है, इस दबाव को सीधे महसूस कर रहा है। बोतलबंद पानी की कीमतों पर सबसे बड़ा असर प्लास्टिक पैकेजिंग की लागत बढ़ने से पड़ रहा है। कच्चे तेल से बनने वाले पीईटी (पॉलीएथिलीन टेरेफ्थेलेट) रेजिन की कीमतों में तेज वृद्धि हुई है।
सुरक्षा बलों की सफलता: मणिपुर में सीमा क्षेत्र से चार उग्रवादियों को पकड़ा गया
4 Apr, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली | केंद्र सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पेट्रोलियम उत्पादों व एलपीजी की जमाखोरी तथा कालाबाजारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने जरूरी वस्तु अधिनियम और एलपीजी नियंत्रण आदेश के प्रावधानों का हवाला देते हुए, राज्यों से प्रवर्तन तेज करने, तेल विपणन कंपनियों के समन्वय से दैनिक छापे-निरीक्षण और हेराफेरी तथा गलत सूचनाओं के खिलाफ कड़ी निगरानी रखने को कहा है। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, राज्यों को दैनिक आधार पर मीडिया के जरिये जनता को जानकारी पहुंचाने, नियंत्रण कक्ष और हेल्पलाइन स्थापित करने और ईंधन की उपलब्धता के बारे में जनता को आश्वस्त करने के लिए फर्जी खबरों का सक्रिय रूप से मुकाबला करने का भी निर्देश दिया गया है। सरकार ने नागरिकों को पेट्रोल और डीजल की अफरा-तफरी में खरीदारी न करने और एलपीजी की अनावश्यक बुकिंग से बचने की सलाह दी है।
सुरक्षा से खिलवाड़- रेल कोचों में पुराने पुर्जे लगाए
संसद की लोक लेखा समिति (पीएसी) ने भुवनेश्वर के मंचेश्वर स्थित रेलवे कैरिज रिपेयर वर्कशॉप की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि कोचों की मरम्मत के दौरान नए सामान की जगह पुराने पुर्जों का इस्तेमाल किया गया, जो सीधे तौर पर यात्री सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है। 2025 में संसद में पेश की गई कैग रिपोर्ट के आधार पर पीएसी ने पाया कि 2020 से 2023 के बीच मरम्मत किए गए 3,402 कोचों में से 131 कोच ओवरहॉलिंग के 100 दिनों के भीतर खराब हो गए। समिति ने कहा, मरम्मत के दौरान 19 अनिवार्य रूप से बदलने योग्य पुर्जों की जगह सेकेंड-हैंड पुर्जों का उपयोग किया गया, जो रेलवे के स्थापित मानकों का उल्लंघन है। पीएसी ने कोच फेलियर की रिपोर्टिंग में भी बड़ी चूक पकड़ी है। 131 विफल कोचों में से सिर्फ 14 की जानकारी वर्कशॉप को दी गई। शेष 117 मामलों को छिपा लिया गया। समिति ने इसे डाटा में हेराफेरी करार देते हुए डिपो और वर्कशॉप के बीच समन्वय की कमी पर फटकार लगाई है।
गुजरात यूसीसी बिल असांविधानिक, हाईकोर्ट जाएंगे- पर्सनल लॉ बोर्ड
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने गुजरात विधानसभा से पारित समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक को असांविधानिक करार देते हुए इसे गुजरात हाईकोर्ट में चुनौती देने का निर्णय लिया है। बोर्ड ने शुक्रवार को दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यह विधेयक धार्मिक स्वतंत्रता और नागरिक अधिकारों का उल्लंघन है।बोर्ड प्रवक्ता एसक्यूआर इलियास ने कहा कि यह कानून अल्पसंख्यकों पर बहुसंख्यक सामाजिक मानदंडों को थोपने का प्रयास है। उन्होंने तर्क दिया कि संविधान के अनुच्छेद 44 के तहत यूसीसी केवल एक नीति निर्देशक तत्व है, जो मौलिक अधिकारों की तरह अनिवार्य रूप से लागू नहीं किया जा सकता। उल्लेखनीय है कि गुजरात विधानसभा ने हाल में विवाह, तलाक और उत्तराधिकार के लिए एक साझा कानूनी ढांचा पारित किया है, जिसमें बहुविवाह पर रोक और लिव-इन संबंधों का अनिवार्य पंजीकरण शामिल है। बोर्ड का कहना है कि वे उत्तराखंड यूसीसी को पहले चुनौती दे चुके हैं और अब गुजरात के मामले में भी कानूनी रुख अपनाएंगे।
चलती ट्रेन में बेटी की हत्या, पिता गिरफ्तार
असम के लखीमपुर जिले के सिलानिबारी स्टेशन पर शुक्रवार एक ट्रेन के अंदर पिता ने छह साल की बेटी की हत्या कर दी। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (एनएफआर) के एक प्रवक्ता के मुताबिक, रेलवे पुलिस बल और सरकारी रेलवे पुलिस ने तुरंत मौके पर पहुंच आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। यह वारदात सुबह करीब 9.15 बजे 15813 डेकारगांव-मुरकोंगसेलेक एक्सप्रेस के एक जनरल कोच के अंदर हुई। प्रवक्ता ने बताया कि चश्मदीदों के बयान दर्ज करने और पुलिस अधिकारियों के बच्ची के शव को कब्जे में लेने के बाद यह ट्रेन सुबह 10.58 बजे सिलानिबारी से रवाना हुई। उन्होंने आगे कहा कि हालांकि, बच्ची की हत्या के पीछे का मकसद पता नहीं चल पाया है।
गंगा के अधिकतर हिस्सों में नहाने योग्य हुआ पानी- सरकार
सरकार ने कहा है कि गंगा नदी के प्रदूषण में काफी कमी आई है। अब अधिकतर स्थानों पर पानी नहाने के मानकों के अनुरूप है। लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी ने बताया कि उत्तराखंड, बिहार और बंगाल में पानी के पीएच और ऑक्सीजन स्तर संतोषजनक हैं। हालांकि, उत्तर प्रदेश के कानपुर और गाजीपुर जैसे कुछ हिस्सों में अभी सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि 2017 की तुलना में औद्योगिक कचरे के बहाव में 23.9% की कमी दर्ज की गई है।
मालदा हिंसा: न्यायिक अधिकारियों और केंद्रीय बलों पर हमला पूरी तरह सुनियोजित
पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के कालियाचक में हुई हिंसक घटना को लेकर पुलिस की रिपोर्ट ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अदालत में जमा कराई गई रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी अधिकारियों, न्यायिक पदाधिकारियों और उन्हें बचाने पहुंचे केंद्रीय बलों पर सुनियोजित तरीके से हमला किया गया था। सूत्रों के मुताबिक मोथाबाड़ी थाना पुलिस ने शुक्रवार को अदालत में दाखिल रिपोर्ट में कहा कि घटना उस समय हुई जब बीडीओ कार्यालय से न्यायिक अधिकारियों का काफिला बाहर निकल रहा था। इसी दौरान पहले से मौजूद भीड़ ने काफिले को निशाना बनाते हुए पथराव और हमला शुरू कर दिया। सूत्रों के मुताबिक रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि सिर्फ जजों के काफिले ही नहीं, बल्कि मौके पर पहुंचे सीआरपीएफ जवानों पर भी हमला किया गया। हमले में केंद्रीय बलों की गाड़ियों के शीशे तोड़े गए और कई सुरक्षाकर्मी घायल हुए। घायलों में एक चालक, एक सीआरपीएफ सब-इंस्पेक्टर और अन्य कर्मियों के जख्मी होने की पुष्टि की गई है। पुलिस के अनुसार, घटना से पहले 1 अप्रैल की शाम बीडीओ कार्यालय के सामने करीब 100 अज्ञात लोगों की भीड़ इकट्ठा हुई थी। आरोप है कि इसी भीड़ को उकसाकर काफिले पर हमला कराया गया। भीड़ ने बैरिकेड लगाकर रास्ता रोका और फिर ईंट-पत्थरों से हमला किया। इस घटना ने चुनाव से पहले राज्य में कानून-व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है। खासतौर पर उस समय जब राज्य में पहले से ही केंद्रीय बलों की तैनाती की गई है, ऐसे में इतनी बड़ी संख्या में लोगों का एकत्र होना और हमला करना सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज हो गई है।
मणिपुर में म्यांमार सीमा के पास चार उग्रवादी गिरफ्तार
मणिपुर के तेंगनुपाल जिले में भारत-म्यांमार सीमा के पास चार आतंकवादियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने शनिवार को बताया कि गिरफ्तारियां मोरेह पुलिस थाना क्षेत्र के यांगौबुंग गांव से की गईं। गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के कीशम सुमंत मैतेई (25), एनआरएफएम के अंगोम सोमोरजीत सिंह (32), और कांगलेइपाक कम्युनिस्ट पार्टी (एमएफएल) के युमनाम नाओबा सिंह (26) और खुंद्रकपम श्यामसन मैतेई (25) के रूप में की गई। पुलिस ने बताया कि राज्य में जबरन वसूली और आपराधिक गतिविधियों में शामिल लोगों को पकड़ने के लिए खुफिया जानकारी के आधार पर व्यापक स्तर पर तलाशी अभियान, घेराबंदी और खोज अभियान चलाए जा रहे हैं।
शशि थरूर के काफिले पर हमले से तनाव: केरल में सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
4 Apr, 2026 09:50 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तिरुवनंतपुरम | कांग्रेस सांसद शशि थरूर के काफिले को निशाना बनाते हुए उनके गनमैन और ड्राइवर पर कथित हमला किए जाने का मामला सामने आया है। पुलिस ने शनिवार को बताया कि इस संबंध में एक व्यक्ति को हिरासत में लिया गया है, जबकि अन्य आरोपियों की पहचान कर ली गई है और उन्हें जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।
कब हुई घटना?
पुलिस के मुताबिक, यह घटना शुक्रवार शाम करीब 7:30 बजे वांडूर के तिरुवाली के पास चेल्लीथोडे इलाके में हुई। उस समय थरूर कांग्रेस नेता एपी अनिलकुमार के चुनाव प्रचार कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे।
एफआईआर में क्या बताया गया?
वांडूर पुलिस ने बताया कि सांसद के गनमैन रतीश केपी की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया गया है। एफआईआर के अनुसार, आरोपियों का एक पांच सदस्यीय समूह दो वाहनों में सवार होकर आया और उन्होंने सांसद के काफिले की गाड़ी को रास्ते में रोक लिया।पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जिस स्थान पर घटना हुई वह सड़क काफी संकरी है। गनमैन ने केवल आगे चल रहे वाहन से काफिले को रास्ता देने के लिए थोड़ा तेज चलने का अनुरोध किया था। इसी बात को लेकर विवाद हुआ और जब गनमैन ने रास्ता साफ कराने की कोशिश की, तो आरोपियों ने उस पर और ड्राइवर पर कथित तौर पर हमला कर दिया।
आरोपियों की पहचान कर ली गई है
घटना के बाद पुलिस और स्थानीय प्रशासन हरकत में आए। देर रात एक आरोपी को हिरासत में ले लिया गया, जबकि बाकी आरोपियों की पहचान कर ली गई है। पुलिस का कहना है कि सभी आरोपियों को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। फिलहाल मामले में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है और घटना के पीछे के कारणों की विस्तृत पड़ताल की जा रही है।
भीषण दुर्घटना: नासिक में कुएं में गिरी कार, छह बच्चों सहित 9 की जान गई
4 Apr, 2026 09:13 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नासिक | महाराष्ट्र के नासिक जिले में शुक्रवार रात एक दर्दनाक हादसे में एक ही परिवार के नौ लोगों की मौत हो गई। मृतकों में छह बच्चे भी शामिल हैं। पुलिस ने शनिवार को इसकी जानकारी दी।
कैसे हुआ हादसा?
पुलिस के अनुसार, यह हादसा शुक्रवार रात करीब 10 बजे डिंडोरी कस्बे के शिवाजी नगर इलाके में हुआ। परिवार के सभी सदस्य एक समारोह में शामिल होकर घर लौट रहे थे, तभी उनकी कार अनियंत्रित होकर पास के एक कुएं में जा गिरी।
परिवार के सभी सदस्यों की हुई मौत
सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और आपातकालीन सेवाएं मौके पर पहुंचीं। राहत-बचाव अभियान के तहत दो क्रेन और तैराकों की मदद से आधी रात के आसपास कार और उसमें सवार सभी लोगों को बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक सभी की मौत हो चुकी थी।पुलिस ने बताया कि सभी मृतक डिंडोरी तालुका के इंदोरे गांव निवासी दरगुड़े परिवार के सदस्य थे। मृतकों की पहचान सुनील दत्तू दरगुड़े (32), उनकी पत्नी रेशमा, आशा अनिल दरगुड़े (32) और परिवार के छह बच्चों के रूप में हुई है। बच्चों में पांच लड़कियां (उम्र 7 से 14 वर्ष) और एक 11 वर्षीय लड़का शामिल है।सभी शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए डिंडोरी के सरकारी अस्पताल भेज दिया गया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और हादसे के कारणों की जांच की जा रही है।
आंधी-बारिश और ओलों का अलर्ट: तेज हवाओं के बीच सुरक्षित रहें
3 Apr, 2026 11:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़। हरियाणा के आसमान पर छाई काली घटाओं ने प्रदेश भर में एक बार फिर चिंता और डर का माहौल पैदा कर दिया है। सक्रिय हुए नए पश्चिमी विक्षोभ के कारण मौसम विभाग ने राज्य के अधिकांश हिस्सों में येलो और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, आज हरियाणा के कई जिलों में कुदरत का कड़ा रुख देखने को मिल सकता है, विशेषकर दक्षिण हरियाणा के इलाकों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलने वाली तूफानी हवाओं और ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है। आसमानी बिजली कड़कने और तेज आंधी के कारण सामान्य जनजीवन प्रभावित होने की आशंका है।
बीती रात हिसार, सिरसा और फतेहाबाद जैसे जिलों में मौसम का मिजाज अचानक बदल गया। तेज हवाओं के साथ हुई जोरदार बारिश ने रात के सन्नाटे को चीर दिया, वहीं धूल भरी आंधी ने कई क्षेत्रों में विजिबिलिटी कम कर दी। इससे पहले 31 मार्च को हुई बेमौसम बारिश ने प्रदेश के करीब 100 गांवों में गेहूं और सरसों की तैयार फसलों को भारी नुकसान पहुँचाया था, जिससे किसान पहले से ही सदमे में हैं। ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, हिसार, फतेहाबाद, सिरसा, भिवानी और महेंद्रगढ़ जैसे जिले हॉटस्पॉट बने हुए हैं, जहाँ आंधी और ओलों का दोहरा हमला हो सकता है। वहीं अंबाला, पंचकूला और यमुनानगर में बिजली गिरने का खतरा मंडरा रहा है, जबकि रोहतक और सोनीपत जैसे मध्य क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है।
तापमान के आंकड़ों पर नजर डालें तो गुरुग्राम 37.8 डिग्री सेल्सियस के साथ राज्य का सबसे गर्म इलाका बना हुआ है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि अगले 48 घंटों के दौरान होने वाली इस तूफानी बारिश के बाद गर्मी के तेवर थोड़े ढीले पड़ेंगे और पारे में गिरावट दर्ज की जाएगी। प्रशासन ने नागरिकों को आने वाले दो दिनों तक विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है, क्योंकि आसमान से बरसती यह आफत कृषि और बुनियादी ढांचे के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। खेतों में खड़ी पकी हुई फसल को बचाना इस वक्त किसानों के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता और चिंता का विषय बना हुआ है।
भारत के लिए राहत की खबर: रूस ने संकट के बीच किया समर्थन
3 Apr, 2026 10:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में ईरान की अमेरिका और इजरायल के खिलाफ बढ़ती सैन्य सक्रियता और होर्मुज स्ट्रेट पर संभावित नाकेबंदी से उपजे वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच भारत के लिए रूस से एक अत्यंत सुखद खबर आई है। भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर और रूस के प्रथम उप-प्रधानमंत्री डेनिस मंतुरोव के बीच हुई उच्च स्तरीय मुलाकात में रूस ने भारत को आश्वस्त किया है कि वह कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की सप्लाई बढ़ाने के लिए पूरी तरह तैयार है। यह आश्वासन ऐसे समय में आया है जब होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने की आशंका से खाड़ी देशों से होने वाली ऊर्जा आपूर्ति पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। इस संकटपूर्ण घड़ी में रूस ने एक वैकल्पिक और सबसे भरोसेमंद साझेदार के रूप में अपनी भूमिका स्पष्ट कर दी है, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था और सामरिक हितों को बड़ी मजबूती मिली है।
रूस के उप-प्रधानमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री से मुलाकात के दौरान स्पष्ट किया कि रूसी कंपनियां भारत को तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने में सक्षम हैं। आंकड़ों के लिहाज से देखें तो ईरान युद्ध के तनाव के बीच मार्च महीने में ही रूस से भारत को होने वाली तेल सप्लाई में 90 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ऊर्जा के साथ-साथ रूस ने भारत के कृषि क्षेत्र की सुरक्षा का भी संकल्प लिया है। डेनिस मंतुरोव ने जानकारी दी कि रूस ने वर्ष 2025 के अंत तक भारत को खनिज उर्वरकों की आपूर्ति में 40 प्रतिशत का इजाफा किया है और भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए यूरिया उत्पादन की संयुक्त परियोजनाओं पर भी तेजी से काम चल रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बैठक को व्यापार, कनेक्टिविटी और उर्वरक जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने वाला बताया है। वहीं विदेश मंत्री जयशंकर ने ऊर्जा, टेक्नोलॉजी, नवाचार और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सहयोग पर विस्तार से चर्चा की। हाल के दिनों में वैश्विक प्रतिबंधों के बावजूद रूस फिर से भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा है। इसके साथ ही दोनों देशों के बीच परमाणु ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र में भी सहयोग नई ऊंचाइयों को छू रहा है। तमिलनाडु के कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र का काम तय समय पर आगे बढ़ रहा है, वहीं रक्षा मोर्चे पर भारत ने रूस से पांच और एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम खरीदने का निर्णय लिया है। रूस का यह अटूट सहयोग न केवल भारत की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, बल्कि वैश्विक भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को और अधिक प्रगाढ़ बनाएगा।
पर्यावरण बचाएँ और पुरस्कार जीतें: कचरा बदलें राशन में
3 Apr, 2026 09:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हैदराबाद। यहां एक ऐसा स्टार्टअप शुरु किया गया है जो कचरे के बदले राशन मुहैया कराता है। साथ ही पुरस्कार भी प्रदान करता है। इसके लिए एक ऐप तैयार किया गया है जिससे गाड़ी बुलाने का समय तय होता है और निर्धारित स्थान पर वाहन जाता है और कचरा ले जाता है। कचरे की गंभीर समस्या से निपटने के लिए वर्ष 2022 में अभिषेक अग्रवाल द्वारा स्थापित स्टार्टअप गुडीबैग एक बेहद प्रभावशाली और क्रांतिकारी समाधान लेकर आया है।
गुडीबैग की कार्यप्रणाली को बेहद पारदर्शी और यूजर-फ्रेंडली बनाया गया है। शहर के निवासियों को केवल अपने घर के सूखे कचरे, जैसे प्लास्टिक, कागज, धातु और पुराने कपड़ों को अलग-अलग करना होता है। इसके बाद उपभोक्ता मोबाइल ऐप के माध्यम से अपनी सुविधानुसार कचरा पिकअप का समय निर्धारित कर सकते हैं। इस सेवा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें कचरे की कोई न्यूनतम मात्रा तय नहीं की गई है, जिससे छोटे परिवार या अकेले रहने वाले लोग भी आसानी से इस अभियान का हिस्सा बन सकते हैं। एकत्रित किए गए कचरे को लगभग 40 अलग-अलग श्रेणियों में वैज्ञानिक तरीके से छांटा जाता है। इसमें से प्लास्टिक वेस्ट को टाइल्स जैसे टिकाऊ निर्माण उत्पादों में बदला जाता है, जबकि अन्य सामग्रियों को रीसाइकल के लिए संबंधित उद्योगों को भेज दिया जाता है।
यह स्टार्टअप नागरिकों को उनके घर के सूखे कचरे के बदले न केवल डिजिटल रिवॉर्ड्स दे रहा है, बल्कि उन्हें रोजमर्रा के इस्तेमाल का किराने का सामान और आकर्षक पुरस्कार भी प्रदान कर रहा है। इस अभिनव पहल का मुख्य उद्देश्य वेस्ट मैनेजमेंट की प्रक्रिया को आम जनता के लिए व्यवहारिक, सरल और आर्थिक रूप से फायदेमंद बनाना है ताकि स्वच्छता एक जिम्मेदारी के साथ-साथ लाभ का सौदा भी बन सके।यह स्टार्टअप अपने अनोखे रिवॉर्ड मॉडल के कारण तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। उपयोगकर्ताओं द्वारा दिए गए कचरे के वजन के आधार पर उनके डिजिटल वॉलेट में पॉइंट्स क्रेडिट किए जाते हैं। इन पॉइंट्स को ऐप के माध्यम से दाल, चावल, तेल जैसे किराने के सामान और अन्य इको-फ्रेंडली उत्पादों के लिए भुनाया जा सकता है। कंपनी मात्र 72 घंटों के भीतर इन रिवॉर्ड्स की होम डिलीवरी सुनिश्चित करती है, जो वेस्ट टू वेल्थ के सपने को हकीकत में बदल रहा है। आंकड़ों के अनुसार, अब तक इस पहल से लगभग 30,000 सक्रिय उपयोगकर्ता जुड़ चुके हैं और 90,000 किलोग्राम से अधिक कचरे को सफलतापूर्वक रीसायकल किया जा चुका है। संस्थापक अभिषेक अग्रवाल का लक्ष्य इस सफल मॉडल को जल्द ही देश के अन्य प्रमुख शहरों में विस्तारित करना है, ताकि कचरा प्रबंधन की दिशा में एक बड़ा बदलाव लाया जा सके। ऐसी पहल साबित करती है कि सही प्रोत्साहन मिलने पर आम नागरिक भी पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं।
हरियाणा के पूर्व CM के खिलाफ सभी आरोप कोर्ट ने खारिज किए
3 Apr, 2026 09:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पंचकूला|पंचकूला के एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) प्लॉट आवंटन केस में हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और वरिष्ठ कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा को आज बड़ी राहत मिली है। सीबीआई कोर्ट ने इस मामले में हुड्डा और वोरा के खिलाफ सभी आरोप खारिज कर दिए हैं, जिससे दोनों नेताओं को आरोपमुक्त कर दिया गया है। यह फैसला पंचकूला की विशेष सीबीआई कोर्ट ने पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट के पिछले आदेश के आधार पर दिया है, जिसने मामले में आरोप तय करने के आदेशों को रद्द कर दिया था।
मामले में आरोप तय किए जाने के आदेश को पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और एजेएल की ओर से पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट में चुनौती दी गई थी। हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि प्रथम दृष्टया आरोपों को समर्थन देने के लिए पर्याप्त और ठोस साक्ष्य मौजूद नहीं हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बिना किसी मजबूत आधार के आपराधिक मुकदमा जारी रखना न्यायिक प्रक्रिया के सिद्धांतों के खिलाफ है। इसी आधार पर हाई कोर्ट ने निचली अदालत के आरोप तय करने के आदेशों को रद्द कर दिया था, जिसके बाद सीबीआई कोर्ट ने अब हुड्डा और वोरा को आरोपमुक्त करने का फैसला सुनाया है।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा मामला पंचकूला के सेक्टर-6 में करीब 3,360 वर्ग मीटर के एक सरकारी भूखंड के आवंटन से जुड़ा था। जांच एजेंसी सीबीआई ने आरोप लगाया था कि यह प्लॉट कथित तौर पर बाजार मूल्य से काफी कम कीमत पर एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) को आवंटित किया गया था। सीबीआई के अनुसार, इस आवंटन से सरकारी राजस्व को भारी नुकसान हुआ था। जांच एजेंसी का आरोप था कि 64.93 करोड़ रुपये की अनुमानित बाजार कीमत वाला यह प्लॉट एजेएल को केवल 69 लाख 39 हजार रुपये में दिया गया था।
सीबीआई ने इस मामले में 27 जनवरी 2017 को केस दर्ज किया था। इसके बाद 1 दिसंबर 2018 को चार्जशीट दायर की गई थी। इस चार्जशीट में भूपेंद्र सिंह हुड्डा के साथ-साथ हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों को भी आरोपी बनाया गया था। आरोप था कि हुड्डा ने मुख्यमंत्री के तौर पर अपने पद का दुरुपयोग करते हुए यह आवंटन किया था, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान हुआ।
हाई कोर्ट में भूपेंद्र सिंह हुड्डा और एजेएल ने तर्क दिया था कि आरोपों को साबित करने के लिए ठोस सबूत नहीं हैं। हाई कोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार करते हुए अपने विस्तृत आदेश में कहा कि किसी भी आपराधिक मामले को आगे बढ़ाने के लिए प्राथमिक सबूतों का मजबूत होना अनिवार्य है। यदि प्रारंभिक जांच में ही पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलते, तो आपराधिक मुकदमे को जारी रखना अनुचित होता है। कोर्ट ने इस सिद्धांत को ध्यान में रखते हुए आरोप तय करने के आदेशों को निरस्त किया था।
कोर्ट से राहत मिलने के बाद भूपेंद्र सिंह हुड्डा की प्रतिक्रिया
सीबीआई कोर्ट से राहत मिलने के बाद भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उन्हें पहले से ही न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था और आज का फैसला इस भरोसे को मजबूत करता है। इस फैसले को हुड्डा और कांग्रेस पार्टी के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक जीत के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि यह मामला कई सालों से उनकी छवि पर असर डाल रहा था। वरिष्ठ कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा को भी इसी मामले में आरोपमुक्त किया गया है, जो पार्टी के लिए एक और सकारात्मक खबर है। इस फैसले से हुड्डा और वोरा अब इस कानूनी प्रक्रिया से पूरी तरह बाहर आ गए हैं।
आईएनएस अरिदमन: भारत की नौसैनिक ताकत में नया परमाणु मोड़
3 Apr, 2026 08:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारत अपनी समुद्री सीमा की सुरक्षा और परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को एक नए स्तर पर ले जाने के लिए तैयार है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को एक्स पर पोस्ट के जरिए भारत की तीसरी स्वदेशी परमाणु-संचालित पनडुब्बी, आईएनएस अरिदमन के जल्द ही नौसेना में शामिल होने का संकेत दिया है। उन्होंने लिखा- यह सिर्फ एक शब्द नहीं है, इसका मतलब है शक्ति-अरिदमन!
जानकारी के मुताबिक लंबी दूरी की मिसाइल क्षमता से लैस, अरिदमन से भारत की समुद्री-आधारित परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को मजबूती मिलने की उम्मीद है। यह देश के परमाणु सिद्धांत के अनुरूप, इसकी मारक क्षमता और जीवित रहने की क्षमता-दोनों को बढ़ाएगी। यह घोषणा उनके विशाखापत्तनम दौरे के साथ हुई, जहां वे आज स्वदेशी रूप से निर्मित उन्नत स्टील्थ फ्रिगेट तारागिरी को नौसेना में शामिल करने वाले हैं। विशाखापत्तनम जो भारत की परमाणु पनडुब्बियों का घर है, उनके निर्माण केंद्र और वर्तमान होम पोर्ट- दोनों के रूप में कार्य करता है।
आईएनएस अरिदमन ने अपने समुद्री परीक्षणों का अंतिम चरण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है और अब यह स्ट्रेटेजिक फोर्सेज कमांड में शामिल होने के लिए तैयार है। यह अपनी पूर्ववर्ती पनडुब्बियों आईएनएस अरिहंत और आईएनएस अरिघात के नक्शेकदम पर चलेगी। करीब 7,000 टन विस्थापन वाली अरिदमन, अपनी श्रेणी की पिछली पनडुब्बियों की तुलना में थोड़ी बड़ी है। इसमें बेहतर स्टील्थ और ध्वनिक प्रदर्शन के लिए अधिक सुव्यवस्थित ढांचा है। यह पनडुब्बी भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र द्वारा विकसित एक उन्नत 83 एमडब्ल्यु प्रेशराइज्ड वॉटर रिएक्टर द्वारा संचालित है।
रिपोर्ट के मुताबिक अपनी पूर्ववर्ती पनडुब्बियों के विपरीत, अरिदमन आठ ऊर्ध्वाधर लॉन्च ट्यूबों से लैस है जो आईएनएस अरिहंत की क्षमता से दोगुनी है। यह इसे 3,500 किमी की मारक क्षमता वाली आठ के-4 लंबी दूरी की मिसाइलें, या 750 किमी की मारक क्षमता वाली 24 के-15 मिसाइलें ले जाने में सक्षम बनाती है। इसके शामिल होने से भारत समुद्र में निरंतर प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखने में सक्षम होगा, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि हर समय कम से कम एक परमाणु-हथियारों से लैस पनडुब्बी गश्त पर रहे।
पिछले साल की शुरुआत में नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी ने भी कहा था कि आईएनएस अरिदमन को अप्रैल और मई के बीच नौसेना में शामिल किया जाएगा। दिसंबर 2025 में वार्षिक प्री-नेवी डे कार्यक्रम में बोलते हुए एडमिरल त्रिपाठी ने पुष्टि की थी कि यह उन्नत पनडुब्बी अब अपने परीक्षणों के अंतिम चरण में प्रवेश कर चुकी है।
TMC कार्यालय में जवानों के कैरम खेलने पर गिरी थी गाज
3 Apr, 2026 07:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीरभूम|पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में ड्यूटी के दौरान टीएमसी कार्यालय में सीआरपीएफ जवानों के 'कैरम' खेलने की सजा अब 'कमांडेंट' को नहीं मिलेगी। सीआरपीएफ के नई दिल्ली स्थित मुख्यालय के डीआईजी (सीआर एंड विजिलेंस) ने एक अप्रैल को निलंबन रद्द करने का आदेश जारी किया है। बिना किसी विभागीय जांच के कमांडेंट का निलंबन, यह मामला सीआरपीएफ में तूल पकड़ने लगा था। कैडर अफसरों में इस आदेश को लेकर नाराजगी थी। इसे एकतरफा कार्रवाई बताया गया।
बता दें कि यह मामला पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले का है। यहां पर सीआरपीएफ की एफ-123 वीं बटालियन, जिन्हें एडहॉक बटालियन संख्या 318 के नियंत्रण में सियूरी पुलिस स्टेशन के अंतर्गत सामान्य एरिया में तैनात किया गया था। कानून व्यवस्था की ड्यूटी के दौरान 27 मार्च को उक्त बटालियन का एक सेक्शन 'टीएमसी' कार्यालय में 'कैरम' खेलते हुए पाया गया। यह मामला सोशल मीडिया में भी खूब चला था। यह शिकायत, चुनाव आयोग के पास भी पहुंची थी।
इसके चलते सीआरपीएफ के एसआई 'जीडी' जनवेद सिंह, हवलदार श्याम प्रमोद बाबूलाल, सिपाही जयपाल गोदरु वैद्य, आजाद पटेल, अनिल कुमार लोधी और सुरेश प्रजापत को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया। यह कार्रवाई यहीं पर समाप्त नहीं हुई, इसके बाद सीआरपीएफ मुख्यालय ने एडहॉक कमांडेंट अनूप कुमार सिंह को भी सस्पेंड कर दिया। अनूप सिंह, 123वीं बटालियन में 'सेकेंड इन कमांड' हैं। उन्हें चुनावी ड्यूटी के दौरान 318 वीं बटालियन का एडहॉक कमांडेंट बनाया गया था।
अनूप कुमार सिंह, कैरम खेलने के दौरान जवानों के साथ नहीं थे। उनका नाम किसी सोशल मीडिया में भी नहीं था। सिंह का कसूर इतना था कि उनके नियंत्रण वाली बटालियन के जवान कैरम खेलने में शामिल थे। इसी वजह से उन्हें सस्पेंड कर दिया गया। कैडर अफसरों ने इस मामले में कहा था कि बल मुख्यालय ने यहां पर निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की। दूसरे बलों या पुलिस में निचले स्तर पर कई तरह की शिकायतें आती हैं। ऐसे सभी मामलों में कमांडेंट या एसपी के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती। अगर कहीं पर ऐसी कार्रवाई होती भी है तो नियमानुसार, पहले उस मामले की गहराई से जांच होती है। यहां पर तो बल मुख्यालय ने तुरंत ही कमांडेंट को सस्पेंड करने का आदेश जारी कर दिया था।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने होर्मुज पर सरकार की नीतियों का समर्थन किया
3 Apr, 2026 06:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली|होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बने तनाव के बीच कांग्रेस के भीतर एक और ऐसा बयान सामने आया है, जिसने पार्टी की राजनीतिक लाइन पर नई चर्चा छेड़ दी है। शशि थरूर और मनीष तिवारी के बाद अब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा ने भी भारत सरकार की कूटनीतिक नीति का खुलकर समर्थन किया है। आनंद शर्मा ने कहा कि इस संकट के समय भारत के राजनयिक, दूतावास और अधिकारी बहुत मेहनत से काम कर रहे हैं और उनकी कोशिशों को राजनीतिक नजर से नहीं देखना चाहिए। उन्होंने साफ कहा कि इस तरह के संवेदनशील मुद्दे पर दलगत राजनीति करना देशहित के खिलाफ होगा।
आनंद शर्मा ने कहा कि भारत ने होर्मुज संकट को अब तक संतुलित और समझदारी भरे तरीके से संभाला है। उनके मुताबिक भारत उन गिने-चुने देशों में है, जहां सबसे अधिक जहाज या तो सुरक्षित निकल पाए हैं या उन्हें भारत की ओर मोड़ दिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि अब तक भारतीय प्रवासी पूरी तरह सुरक्षित हैं। शर्मा ने जोर देकर कहा कि ऐसे संकट में देश के भीतर राष्ट्रीय सहमति और एकजुटता जरूरी होती है। उनका कहना था कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हो सकते हैं, लेकिन जब देश, नागरिकों और विदेशों में काम कर रहे भारतीय अधिकारियों की बात हो, तब पूरे राजनीतिक नेतृत्व को एक सुर में बोलना चाहिए।
क्या आनंद शर्मा ने सरकार की कूटनीति को खुला समर्थन दिया?
आनंद शर्मा के बयान में सरकार के रुख की साफ सराहना दिखी। उन्होंने कहा कि भारत के राजनयिक तिरंगे को ऊंचा रखे हुए हैं और वे देश के लोगों के लिए काम कर रहे हैं। ऐसे में उनका हौसला बढ़ाया जाना चाहिए। शर्मा ने कहा कि भारत इस संकट में न किसी एक तरफ झुका है और न ही किसी के दबाव में आया है। उन्होंने इसे कुशल कूटनीति बताया। उनका कहना था कि यही वजह है कि भारत अब तक अपने लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित कर पाया है। उन्होंने माना कि इस समय सबसे बड़ी जिम्मेदारी यह है कि विदेशों में रह रहे भारतीय सुरक्षित रहें और भारत की साख भी बनी रहे।
क्या पार्टी लाइन से अलग बयान पर कांग्रेस के भीतर सवाल उठे?
आनंद शर्मा से जब यह पूछा गया कि क्या उनका बयान कांग्रेस की तय लाइन से अलग है, तो उन्होंने उलटा सवाल किया कि आखिर पार्टी लाइन है क्या। उन्होंने कहा कि किसी एक व्यक्ति के बयान को पार्टी लाइन नहीं माना जा सकता। शर्मा ने सुझाव दिया कि कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक होनी चाहिए और वहीं चर्चा के बाद पार्टी का आधिकारिक रुख तय होना चाहिए। इस बयान से साफ संकेत मिला कि पश्चिम एशिया और होर्मुज जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय मुद्दे पर कांग्रेस के भीतर भी अलग-अलग सोच मौजूद है। साथ ही यह भी जाहिर हुआ कि पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेता ऐसे मामलों में सरकार के खिलाफ सीधी टकराव वाली राजनीति के पक्ष में नहीं हैं।
क्या सरकार को विपक्ष के साथ संवाद और बढ़ाना चाहिए?
आनंद शर्मा ने यह भी कहा कि सरकार ने ऑल पार्टी मीटिंग की है, लेकिन इसे और मजबूत बनाने की जरूरत है। उनके मुताबिक यह संवाद एक बार की औपचारिकता बनकर नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे लगातार जारी रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय हित में सरकार और विपक्ष के बीच भरोसे का माहौल जरूरी है। ऐसे संकट में देश को एकजुट दिखना चाहिए। शर्मा ने यह भी साफ किया कि सरकार के पास ज्यादा जानकारी होती है, क्योंकि वही अंतरराष्ट्रीय नेताओं और दूसरे देशों के साथ सीधे संपर्क में होती है। इसलिए कुछ फैसले वही बेहतर तरीके से ले सकती है। उनका कहना था कि नई दिल्ली दुनिया की बड़ी राजधानियों से संपर्क में है और यह प्रक्रिया जारी रहनी चाहिए।
क्या होर्मुज संकट में भारत की प्राथमिकता सिर्फ भारतीयों की सुरक्षा है?
आनंद शर्मा के पूरे बयान का सबसे बड़ा संदेश यही रहा कि इस संकट में भारत की पहली चिंता अपने नागरिकों, प्रवासियों और समुद्री हितों की सुरक्षा है। उन्होंने कहा कि भारत का संतुलित रुख इसलिए जरूरी है, क्योंकि उसे किसी खेमे में खड़े होने के बजाय अपने राष्ट्रीय हित को देखना है। यही कारण है कि उन्होंने राजनीतिक बहस से ऊपर उठकर राष्ट्रीय एकता की बात की। उनके बयान ने यह भी दिखाया कि कांग्रेस के भीतर ऐसे नेता मौजूद हैं, जो विदेश नीति जैसे मामलों में सरकार के अच्छे कदमों को स्वीकार करने में हिचक नहीं रखते। शशि थरूर और मनीष तिवारी के बाद आनंद शर्मा का यह बयान उसी कड़ी का नया संकेत माना जा रहा है।
मंटुरोव की भारत यात्रा: कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर बातचीत
3 Apr, 2026 02:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। रूस के पहले उपप्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव दो दिवसीय दौरे पर भारत पहुंचे हैं। उनका यह दौरा दो और तीन अप्रैल 2026 तक है। इस दौरान उन्होंने भारत के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात की और पश्चिम एशिया समेत कई मुद्दों पर चर्चा की।
विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी कि मंटुरोव ने 3 अप्रैल को नई दिल्ली में विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर के साथ बैठक की। मंटुरोव व्यापार, अर्थव्यवस्था, विज्ञान, तकनीक और सांस्कृतिक सहयोग पर बने भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग के सह-अध्यक्ष भी हैं। दोनों पक्षों ने व्यापार, उद्योग, ऊर्जा और उर्वरक के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर बात की। इसके अलावा कनेक्टिविटी, तकनीक, नवाचार और जरूरी खनिजों में नए मौकों पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों नेताओं ने पिछले साल दिसंबर में हुए 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के फैसलों को लागू करने की प्रगति की समीक्षा की। इसके अलावा मंटुरोव ने पश्चिम एशिया के संघर्ष और दुनिया के अन्य बड़े घटनाक्रमों पर भी अपने विचार साझा किए। अपने दौरे के दौरान मंटुरोव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की। इसके अलावा उन्होंने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के साथ भी मुलाकात की।
डिप्टी पीएम के साथ मुलाकात के बाद विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट में कहा, ‘गुरुवार को नई दिल्ली में रूस के प्रथम उप प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव की मेजबानी करके मुझे प्रसन्नता हुई। हमने अपने द्विपक्षीय सहयोग पर गहन चर्चा की, जिसमें व्यापार, उद्योग, ऊर्जा, उर्वरक, कनेक्टिविटी और मोबिलिटी पर विशेष ध्यान दिया गया। साथ ही, प्रौद्योगिकी, नवाचार और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में मौजूद नए अवसरों पर भी बात हुई। हमने क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया, जिसमें पश्चिम एशिया में चल रहा संघर्ष भी शामिल है।’
इससे पहले रूसी संघ के पहले उप-प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस मुलाकात में दोनों नेताओं ने भारत-रूस संबंधों की प्रगति पर चर्चा की। प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात के दौरान उन्होंने आपसी सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों में हुई प्रगति के बारे में जानकारी दी, जिसमें व्यापार और आर्थिक साझेदारी, उर्वरक, कनेक्टिविटी और लोगों के बीच संबंध शामिल हैं।
पर्दे के पीछे की कूटनीति: भारत और पाकिस्तान की ट्रैक-2 बैठक में क्या चल रहा है?
3 Apr, 2026 01:31 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारत और पाकिस्तान (India and Pakistan) के बीच आधिकारिक संबंधों में भले ठहराव बना हुआ हो, लेकिन अनौपचारिक ‘ट्रैक-2’ कूटनीति का चैनल सक्रिय है। फरवरी 2026 में दोहा (Queue) में दोनों देशों के प्रतिनिधियों की एक अहम बैठक हुई, जिसमें बिना औपचारिक घोषणा के संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा की गई। पहलगाम में पाकिस्तान समर्थित आतंकी हमले के बाद बढ़ी तल्खी के बीच यह बातचीत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
भारत-पाक के बीच बैक-चैनल संवाद का यह सिलसिला नया नहीं है। दशकों से इस तरह की वार्ताएं चलती रही हैं और एक समय दोनों देशों के बीच करीब 20 समानांतर ट्रैक-2 संवाद भी सक्रिय थे।
क्या है ‘ट्रैक-2’ कूटनीति?
‘ट्रैक-2’ कूटनीति वह अनौपचारिक बातचीत है जिसमें पूर्व अधिकारी, विशेषज्ञ, पत्रकार, कारोबारी और नागरिक समाज के प्रतिनिधि शामिल होते हैं। इसका उद्देश्य राजनीतिक दबाव से दूर रहकर भरोसा कायम करना और संभावित समाधान तलाशना होता है। ‘ट्रैक-2’ शब्द 1981 में अमेरिकी राजनयिक जोसेफ मोंटविले ने दिया था। भारत-पाक के बीच ‘नीमराणा संवाद’ इस श्रेणी की प्रमुख पहल मानी जाती है।
ट्रैक-1 और ट्रैक-1.5 से अंतर
ट्रैक-1: सरकार-से-सरकार औपचारिक वार्ता, जैसे कैंप डेविड समझौता
ट्रैक-1.5: सेवारत अधिकारी अनौपचारिक मंच पर विशेषज्ञों के साथ शामिल
ट्रैक-2: पूरी तरह गैर-सरकारी और गोपनीय संवाद
इन बैठकों की खासियत यह है कि इनके बाद न कोई प्रेस विज्ञप्ति जारी होती है और न आधिकारिक पुष्टि। इनसे मिले संकेतों का उपयोग सरकारें नीति तय करने में करती हैं।
वैश्विक उदाहरण
1993 के ओस्लो समझौता से पहले नॉर्वे में इजरायली शिक्षाविदों और फिलिस्तीन मुक्ति संगठन (PLO) के प्रतिनिधियों के बीच इसी तरह की अनौपचारिक बातचीत हुई थी, जिसने बाद में औपचारिक समझौते का रास्ता बनाया।
चीन के साथ संवाद की भूमिका
2020 की गलवान घाटी झड़प के बाद भारत-चीन संबंधों में तनाव बढ़ गया था। हालांकि ट्रैक-2 वार्ताओं ने संवाद बनाए रखा। 2025 में तियानजिन में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात हुई, जिसके बाद संपर्क बहाल होने के संकेत मिले।
रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान प्रयास
2022 में रूस‑यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत ने ट्रैक-2 और ट्रैक-1.5 मंचों के जरिए यूरोप, रूस और यूक्रेन के प्रतिनिधियों से बातचीत जारी रखी। भारत ने सार्वजनिक रूप से रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखते हुए मानवीय समाधान पर जोर दिया।
कनाडा के साथ रिश्तों में नरमी
हरदीप सिंह निज्जर मामले के बाद भारत-कनाडा संबंधों में तनाव बढ़ा था। बाद में ट्रैक-1.5 संवाद के जरिए बातचीत आगे बढ़ी। नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की मुलाकातों के बाद रिश्तों में सुधार हुआ। दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार 50 अरब डॉलर तक ले जाने और व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (CEPA) पर चर्चा आगे बढ़ाई।
क्यों अहम है यह कूटनीति
विशेषज्ञों के अनुसार, जब औपचारिक वार्ता ठप हो जाती है, तब ट्रैक-2 चैनल संवाद की डोर बनाए रखते हैं। भारत-पाक के बीच कतर में हुई हालिया बैठक को भी भविष्य में आधिकारिक बातचीत की जमीन तैयार करने की कोशिश माना जा रहा है।
भारत भड़का: होर्मुज स्ट्रेट घटना पर 60 देशों की बैठक में कड़ा संदेश
3 Apr, 2026 11:12 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Iran-US War: इजरायल-अमेरिका और ईरान युद्ध के बीच भारत ने होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने की मांग तेज कर दी है। ब्रिटेन की ओर से बुलाई गई एक अहम बैठक में भारत ने साफ कहा कि अंतर्राष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर आवाजाही बिना किसी बाधा के जारी रहनी चाहिए। भारत ने कहा कि इस युद्ध में जलमार्ग पर अपने लोगों को खोने वाला भारत एकमात्र देश है।
बैठक में अमेरिका नहीं हुआ शामिल
बता दें कि यह बैठक ऐसे समय पर हुई जब युद्ध के कारण ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने की आशंका बढ़ती जा रही है। इसमें 60 से ज़्यादा देशों ने हिस्सा लिया, हालांकि अमेरिका इसमें शामिल नहीं हुआ। बैठक का मुख्य उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए कूटनीतिक और राजनीतिक समाधान तलाशना था।
‘भारत पर पड़ा सीधा असर’
विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बैठक में भारत का पक्ष रखते हुए कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा आने से भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा असर पड़ रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि समुद्री रास्तों की सुरक्षा और फ्री नेविगेशन अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
भारत ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि वह समुद्री सुरक्षा और खुले व्यापारिक रास्तों का समर्थन करता है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत की प्राथमिकता है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही बहाल हो।
कर्नाटक में LPG संकट गहराया: 300 से ज्यादा पंप बंद, इंडियन ऑयल ने बढ़ाई सप्लाई
3 Apr, 2026 09:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बंगलूरू। कर्नाटक (Karnataka ) में इन दिनों ऑटो एलपीजी (Auto LPG.) की मांग अचानक बहुत तेजी से बढ़ गई है। इसकी वजह यह है कि बंगलूरू और राज्य के कई हिस्सों में 300 से ज्यादा निजी एलपीजी पंप बंद (Over 300 Pumps Shut Down) हो गए हैं या आंशिक रूप से काम कर रहे हैं। ऐसे में लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस स्थिति को देखते हुए इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (इंडियन ऑयल) (Indian Oil Corporation ) ने बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने पूरे कर्नाटक में ऑटो एलपीजी की सप्लाई काफी बढ़ा दी है, ताकि ऑटो रिक्शा और एलपीजी से चलने वाली गाड़ियों को ईंधन की कमी न हो।
कंपनी के मुताबिक, अभी वह अपने 55 ऑटो एलपीजी डिस्पेंसिंग स्टेशनों (ALDS) के जरिए राज्य में जरूरत पूरी कर रही है। निजी पंप बंद होने के कारण अब ज्यादा लोग सरकारी पंपों पर निर्भर हो गए हैं, जिससे यहां दबाव भी काफी बढ़ गया है। इंडियन ऑयल के अधिकारी वी. वेत्रिसेल्वाक्कुमार ने बताया कि कंपनी ने हालात को संभालने के लिए विशेष इंतजाम किए हैं, ताकि सप्लाई लगातार जारी रहे और लोगों को परेशानी न हो।
क्या कहता है आंकड़ा, समझिए
आंकड़ों के अनुसार, कर्नाटक में इंडियन ऑयल के पंपों पर रोजाना बिक्री बढ़कर करीब 59.53 मीट्रिक टन तक पहुंच गई है, जबकि पिछले तीन महीनों में यह औसतन 43.4 मीट्रिक टन थी। यानी मांग में काफी बड़ा उछाल आया है।
कंपनी ने दिलाया भरोसा
इसके साथ ही कंपनी ने यह भी भरोसा दिलाया है कि वह सरकार के निर्देशों का पालन करते हुए सभी क्षेत्रों में ईंधन की बराबर आपूर्ति सुनिश्चित करेगी। कुल मिलाकर, निजी पंपों के बंद होने से बनी स्थिति को संभालने के लिए इंडियन ऑयल पूरी तरह सक्रिय हो गया है, ताकि आम लोगों को किसी तरह की दिक्कत न हो।
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