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देश दहशत फैलाने की साजिश नाकाम? ISI लिंक केस में NIA की एंट्री
5 Apr, 2026 08:37 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली: पाकिस्तान की आईएसआई (ISI) ने पंजाब और दिल्ली समेत भारत में कई जगहों पर आतंकी हमले करने के लिए अपने हैंडलर्स को सक्रिय कर दिया है. इस इनपुट के बाद, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने हाल ही में पंजाब से हथियारों, गोला-बारूद और IED की एक बड़ी खेप बरामद होने के बाद एक केस अपने हाथ में ले लिया है.
रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान की इंटेलिजेंस एजेंसी (ISI) का एक ऑपरेटिव जसवीर चौधरी, इंडिया में मौजूद रिक्रूट्स (भर्ती किए गए लोग) के जरिए आतंकी हमले की साजिश कर रहा है. असल में, बॉर्डर पार से ड्रोन के जरिए भारत में गिराया गया कंसाइनमेंट, जिसे बाद में फरवरी में पंजाब पुलिस ने जब्त कर लिया था, इसी आतंकी साजिश का हिस्सा था.
खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तानी आतंकी चौधरी वाट्सएप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए अपने भारतीय गुर्गों के लगातार संपर्क में था. एनआईए ने 21 मार्च को UAPA और BNS के अलग-अलग धाराओं के तहत केस दर्ज किया. केस भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 के सेक्शन 61(2); UA(P) एक्ट, 1967 के सेक्शन 18 और 20; एक्सप्लोसिव सब्सटेंस एक्ट, 1904 के सेक्शन 4; और आर्म्स एक्ट, 1959 के सेक्शन 25(1)(D) के तहत दर्ज किया गया था.
पंजाब पुलिस से केस अपने हाथ में लेने के बाद, एनआईए ने 21 मार्च को एक एफआईआर दर्ज की. एफआईआर में कहा गया है कि 10 फरवरी को, पंजाब पुलिस के स्टेट स्पेशल ऑपरेशन सेल को पक्की जानकारी मिली कि एक पाकिस्तानी ऑपरेटिव जसवीर चौधरी के कहने पर, उसके भारतीय साथियों ने भारत-पाक बॉर्डर के पार ड्रोन के जरिए हथियारों, गोला-बारूद और IED की एक बड़ी खेप हासिल की है, जिसका मकसद पंजाब, दिल्ली और भारत के दूसरे हिस्सों में अलग-अलग जगहों पर IED ब्लास्ट करके जान-माल का नुकसान करना था.
असल में, केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देशों के बाद एनआईए ने यह केस अपने हाथ में ले लिया. NIA को दी गई और इस रिपोर्टर द्वारा देखी गई इंटेलिजेंस रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तानी ऑपरेटिव जसवीर चौधरी ने भारतीय साथियों की मदद से एक ग्रुप बनाया है.
एनआईए को दिए गए इंटेलिजेंस इनपुट में कहा गया है कि, जसवीर चौधरी पंजाब बॉर्डर के रास्ते पाकिस्तान से हथियार, गोला-बारूद और आईईडी की स्मगलिंग कर रहा है और उन्हें अपने भारतीय साथियों को दे रहा है. उनका इरादा भारत के अलग-अलग शहरों, दिल्ली और पंजाब में बड़े पैमाने पर आतंकवादी हमले और बम धमाके करना है, ताकि भारत की शांति और एकता को खत्म किया जा सके.
हालांकि पंजाब पुलिस ने 10 फरवरी को हथियारों और गोला-बारूद की खेप इकट्ठा करने वाले शुभम कुमार उर्फ शुभम श्रीवास्तव (उत्तर प्रदेश के सीतापुर का रहने वाला) नाम के एक भारतीय रंगरूट को गिरफ्तार किया था, लेकिन एजेंसियों का मानना है कि पाकिस्तानी हैंडलर चौधरी ने देश भर में आतंकी वारदातों को अंजाम देने के लिए ऐसे ही दूसरे ग्रुप बनाए होंगे.
शुभम से पूछताछ के बाद पता चला कि आईईडी कई राज्यों में लक्षित हमले करने के लिए था. यह खेप अमृतसर-जालंधर जीटी रोड पर दरगढ़ से बरामद की गई थी.
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश एंटी-टेररिज्म स्क्वॉड (ATS) ने शुक्रवार को पाकिस्तान से जुड़े एक तोड़फोड़ और जासूसी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया और चार लोगों को गिरफ्तार किया, जिन पर आरोप है कि वे बॉर्डर पार के हैंडलर्स के कहने पर आतंक फैलाने का काम कर रहे थे.
एटीएस के मुताबिक, आरोपियों को खास जगहों, गाड़ियों और रेलवे सिग्नल बॉक्स की रेकी करने और पूरे उत्तर प्रदेश में दहशत फैलाने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के लिए आगजनी करने का काम सौंपा गया था.
Mamata Banerjee का ‘दिल्ली टारगेट’ प्लान, क्या बदलेगी सियासी तस्वीर?
4 Apr, 2026 10:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दिल्ली। विधानसभा चुनाव पश्चिम बंगाल में है, लेकिन टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी दिल्ली को निशाने पर ले रही हैं. चुनावी रणनीति और उसे लागू करने में माहिर ममता बनर्जी का ‘दिल्ली चलो’ का नारा क्या वाकई में मोदी सरकार के लिए चिंता का सबब है? यह सवाल राजनीतिक गलियारों में उठने लगे हैं. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हाल ही में भारतीय जनता पार्टी और केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला किया. उन्होंने अपने एक बयान में दावा है कि 2026 के आखिर तक नरेंद्र मोदी की सरकार गिर सकती है और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) का अगला राजनीतिक लक्ष्य “दिल्ली” होगा. उनके इस बयान ने राष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है. यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की राजनीतिक सरगर्मी तेज हो चुकी है और बीजेपी-टीएमसी के बीच मुकाबला काफी आक्रामक होता जा रहा है. आप आखिर तक इस खबर को पढ़ते रहिए, फिर आप समझ पाएंगे कि ममता बनर्जी ने यह बयान किस संदर्भ में दिया, इसके पीछे की राजनीतिक रणनीति क्या है और इसका राष्ट्रीय राजनीति पर क्या असर पड़ सकता है।
क्या कहा ममता बनर्जी ने?
एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि बीजेपी और केंद्र सरकार जनता के अधिकारों को कमजोर कर रही है और लोकतांत्रिक संस्थाओं का दुरुपयोग कर रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रियाओं और प्रशासनिक फैसलों के जरिए उनकी सरकार को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है. इसी संदर्भ में उन्होंने दावा किया कि केंद्र की सरकार ज्यादा समय तक नहीं टिकेगी और आने वाले समय में राजनीतिक परिस्थितियाँ बदल सकती हैं. उन्होंने यह भी कहा कि बंगाल में जीत के बाद उनकी पार्टी राष्ट्रीय राजनीति में भी बड़ी भूमिका निभाने का लक्ष्य रखती है और “दिल्ली को टारगेट” करेगी।
बंगाल चुनाव और बयान का संदर्भ
दरअसल, पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से राजनीतिक तापमान चरम पर है. चुनाव टीएमसी और बीजेपी के बीच सीधा मुकाबला देखा जा रहा है. पिछले चुनाव यानी 2021 में ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने 215 सीटें जीतकर सत्ता बरकरार रखी थी, जबकि बीजेपी मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभरी थी. अब 2026 के चुनाव को दोनों पार्टियां प्रतिष्ठा की लड़ाई के रूप में देख रही हैं. ममता बनर्जी का यह बयान इसी चुनावी माहौल में आया है, जहां वे अपने समर्थकों को यह संदेश देना चाहती हैं कि टीएमसी केवल राज्य की राजनीति तक सीमित नहीं है बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी चुनौती देने की क्षमता रखती है. यानी, दीदी का यह दांव अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों को चार्ज करने के लिए है. वह किसी भी सूरत में बीजेपी के अंडरग्राउंड अग्रेसिव प्रचार को हावी नहीं होने देना चाहती. वह अपने बयान से सिद्ध करना चाहती हैं कि उनका कद पीएम नरेंद्र मोदी के बराबर है, और उसे वह बंगाल की जंग के बाद चुनौती देंगी।
चुनाव आयोग और बीजेपी पर आरोप
ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग और बीजेपी पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि कुछ प्रशासनिक कदमों और चुनावी प्रक्रियाओं के जरिए राज्य सरकार की शक्तियों को कम करने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मतदाता सूची से नाम हटाने या अन्य तकनीकी प्रक्रियाओं के माध्यम से चुनावी माहौल को प्रभावित करने की कोशिश हो रही है. ऐसे आरोपों के जरिए वे यह संदेश देने की कोशिश कर रही हैं कि उनकी पार्टी “लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा” की लड़ाई लड़ रही है।
‘दिल्ली टारगेट’ का राजनीतिक मतलब?
ममता बनर्जी के “दिल्ली टारगेट” वाले बयान का सीधा मतलब अपनी टीम के मोराल को बूस्ट करने के साथ-साथ केंद्र की सत्ता को चुनौती देना है. टीएमसी लंबे समय से राष्ट्रीय राजनीति में अपनी भूमिका बढ़ाने की कोशिश कर रही है. पिछले कुछ वर्षों में पार्टी ने गोवा, त्रिपुरा और उत्तर-पूर्व के कुछ राज्यों में संगठन विस्तार की कोशिश की है. इसके अलावा कई विपक्षी नेताओं के साथ ममता बनर्जी की मुलाकातें भी इस रणनीति का हिस्सा मानी जाती हैं. राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, अगर टीएमसी 2026 में बंगाल में फिर से मजबूत जीत दर्ज करती है, तो ममता बनर्जी विपक्षी राजनीति में और अधिक प्रभावशाली नेता बन सकती हैं।
बीजेपी की रणनीति और जवाब
दूसरी ओर बीजेपी भी बंगाल को लेकर अंडरग्राउंड आक्रामक रणनीति अपना रही है. अंडरग्राउंड आक्रामक रणनीति से मतलब ठीक वैसे ही है, जैसे पार्टी ने हरियाणा, महाराष्ट्र और दिल्ली में अपने कैंपेन को अंजाम दिया. यानी, साइलेंट किलर की तरह पार्टी का कैंपेन मुहल्ला बैठकों और ड्राइंग रूम के जरिए किया जा रहा है. पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने दावा किया है कि 2026 के चुनाव में बंगाल में सत्ता परिवर्तन हो सकता है. बीजेपी का आरोप है कि राज्य में भ्रष्टाचार, प्रशासनिक विफलता और राजनीतिक हिंसा जैसी समस्याएं बढ़ी हैं. इसी मुद्दे को लेकर पार्टी ममता सरकार के खिलाफ अभियान चला रही है. इस तरह बंगाल चुनाव केवल राज्य की सत्ता का सवाल नहीं रह गया है, बल्कि यह राष्ट्रीय राजनीति के लिए भी महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत दे सकता है।
BJP या कांग्रेस? राघव चड्ढा के अगले कदम पर बड़ी अटकलें
4 Apr, 2026 08:10 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली : राघव चड्ढा के आम आदमी पार्टी छोड़ने की अटकलों के बीच कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने दावा किया कि उनका कांग्रेस में जाना संभव नहीं और वे बीजेपी में जा सकते हैं. हालांकि चड्ढा पहले ही पार्टी न छोड़ने की बात साफ कर चुके हैं. वहीं अब आप नेता राघव चड्ढा से कई मौकों पर उनकी चुप्पी को लेकर सवाल खड़े कर रहे हैं.
नई दिल्ली. आम आदमी पार्टी (आप) के वरिष्ठ नेता राघव चड्ढा को लेकर सियासी गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं. सवाल उठ रहा है कि क्या वह पार्टी छोड़ सकते हैं और अगर ऐसा होता है तो उनका अगला ठिकाना बीजेपी या कांग्रेस में से कौन होगा? इसी बीच कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने एक बड़ा दावा कर राजनीतिक बहस को और हवा दे दी है.संदीप दीक्षित ने आरोप लगाया कि राघव चड्ढा और अरविंद केजरीवाल के बीच मतभेद बढ़ रहे हैं.उन्होंने कहा कि चड्ढा का कांग्रेस में जाना संभव नहीं है और वे भविष्य में बीजेपी का रुख कर सकते हैं. दीक्षित ने यह भी आरोप लगाया कि पंजाब की राजनीति में कई तरह की अनियमितताएं हुईं और इसको लेकर आप के अंदर ही टकराव की स्थिति बनी. हालांकि इन आरोपों और दावों के बीच राघव चड्ढा खुद कई बार साफ कर चुके हैं कि वे आम आदमी पार्टी के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं. उन्होंने सार्वजनिक मंचों पर कहा है कि वे अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में काम कर रहे हैं और पार्टी छोड़ने का कोई सवाल ही नहीं उठता.
राघव चड्ढा को सांसद संजय सिंह का जवाब
आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने राघव चड्ढा को जवाब देते हुए कहा कि राघव चड्ढा का एक वीडियो आया है. बड़े अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है जब देश के तमाम मुद्दों पर संसद में प्रस्ताव आता है आप साइन नहीं करते (समर्थन नहीं देते). बीजेपी के खिलाफ आप आवाज नहीं निकालते हो. तमाम जो मुद्दे जनहित से जुड़े हैं पार्टी के कार्यकर्ताओं को गुजरात में पीटा जाता है आप उस पर नहीं बोलते. जब विपक्ष मुद्दों पर सदन से वॉकआउट करता है तो आप वॉकआउट नहीं करते. ये सारी तमाम चीजें है जिसका जवाब देश आपसे चाहता है और देश के लोग आपसे चाहते हैं.
पावर कट अलर्ट: जालंधर के कई क्षेत्रों में 6 घंटे नहीं आएगी बिजली
4 Apr, 2026 08:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जालंधर | कई इलाकों में रविवार, 5 अप्रैल 2026 को बिजली आपूर्ति प्रभावित रहने वाली है। यह कटौती 66 केवी चारा मंडी सबस्टेशन में जरूरी मरम्मत कार्य के चलते की जाएगी।
इस समय तक बंद रहेगी बिजली सप्लाई
बिजली विभाग के अनुसार, सुबह 9 बजे से दोपहर 3 बजे तक सप्लाई बंद रहेगी। इस दौरान चारा मंडी पावर स्टेशन से जुड़े कई 11 केवी फीडर अस्थायी रूप से बंद रहेंगे, जिससे शहर के विभिन्न हिस्सों में बिजली नहीं पहुंचेगी।
ये इलाके होंगे प्रभावित
जिन फीडरों पर असर पड़ेगा, उनमें मॉडल हाउस, नकोदर रोड, भार्गव कैंप, राजपूत नगर, बूटा मंडी, विश्वकर्मा मंदिर, दशहरा ग्राउंड और रविदास भवन क्षेत्र शामिल हैं।बिजली कटौती के चलते मॉडल हाउस, बूटा मंडी, चपली चौक, श्री रविदास चौक, रामेश्वर कॉलोनी, आबादपुरा, लिंक कॉलोनी, नारी निकेतन, प्रताप नगर, सिल्वर हाइट्स, संत नगर, बैंक कॉलोनी, लाजपत नगर और आसपास के कई इलाकों में आपूर्ति बाधित रहेगी।
बिजली विभाग ने लोगों से की अपील
बिजली विभाग ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे इस निर्धारित समय के दौरान आवश्यक कार्य पहले ही निपटा लें और असुविधा से बचने के लिए सहयोग करें। विभाग का कहना है कि मरम्मत कार्य पूरा होते ही सप्लाई बहाल कर दी जाएगी। यह रखरखाव कार्य बिजली व्यवस्था को सुचारू और सुरक्षित बनाए रखने के लिए किया जा रहा है।
सत्ता विरोधी लहर बनाम मोदी फैक्टर, बंगाल में BJP की राह
4 Apr, 2026 07:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलकाता|पश्चिम बंगाल में आगामी चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है. इस बार का चुनाव कई बड़े मुद्दों के इर्द-गिर्द घूमता नजर आ रहा है. धार्मिक ध्रुवीकरण एक बार फिर चुनावी बहस के केंद्र में है, जहां बीजेपी इसे अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए इस्तेमाल करती दिख रही है, वहीं विपक्ष इसे सामाजिक ताने-बाने के लिए खतरा बता रहा है. दूसरी तरफ राज्य में वामपंथी दलों, खासकर सीपीएम की खस्ता हालत भी एक बड़ा फैक्टर बन गई है, जिससे विपक्षी वोटों के बिखराव की संभावना ज्यादा नजर आ रही है|
बंगाल में सत्ता विरोधी लहर को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं. लंबे समय से सत्ता में रही ममता सरकार के खिलाफ कुछ इलाकों में नाराजगी देखी जा रही है, जिसे बीजेपी भुनाने की कोशिश में है. इसके साथ ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (संघ) का लगातार बढ़ता संगठनात्मक विस्तार जमीनी स्तर पर पार्टी को मजबूती दे रहा है|
बीजेपी को चुनाव में किस बात से ज्यादा उम्मीद?
पश्चिम बंगाल चुनाव में इस बार सबसे बड़ा फैक्टर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को माना जा रहा है. ऐसा कहा जा रहा है कि बीजेपी पूरा चुनाव पीएम मोदी के फेस पर ही लड़ती नजर आ रही है. साल 2021 के विधानसभा चुनावों के नतीजे भी सबके सामने हैं. उस समय बीजेपी ने भले ही अपने प्रदर्शन में शानदार इजाफा किया हो, लेकिन सत्ता से काफी दूर थी. इस बार बीजेपी पूरी कोशिश कर रही है कि बंगाल में सरकार बनाई जाए. ऐसा इसलिए भी कि बीजेपी के लिए बंगाल आखिरी किला है, जहां अब तक जीत दर्ज नहीं हुई है|
बंगाल में सीपीएम का सफाया
पश्चिम बंगाल और असम जैसे राज्यों में एक समय पर सीपीएम की तूती बोला करती थी. हालांकि पिछले कई सालों से इस पार्टी को केवल हार का ही मुंह देखना पड़ रहा है. इसके साथ ही दिग्गज नेताओं ने पार्टी से पलायन कर लिया है और नेतृत्व का ‘अकाल’ सा पड़ गया है. यही वजह है कि इस समय बंगाल में ममता बनर्जी का मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी से ही है|
बंगाल में संघ ने किया अपना विस्तार
पश्चिम बंगाल में साल 2021 के बाद से जितनी एक्टिव भारतीय जनता पार्टी हुई है. उससे कहीं ज्यादा यहां संघ का विस्तार देखने को मिला है. कई बार खुद संघ प्रमुख मोहन भागवत भी बंगाल का दौरान कर चुके हैं. पिछले 10 सालों की बात करें तो आज बंगाल में बीजेपी मजबूत स्थिति में नजर आ रही है और इसमें सबसे बड़ा योगदान संघ का ही माना जा रहा है. फिर भी बीजेपी के लिए बंगाल का रण जीतना इतना आसान नहीं होने वाला है|
2021 जैसी हिंसा का डर?
बंगाल में चुनावों का परिणाम चाहे कुछ भी हों. लेकिन सभी को डर है कि वोटिंग के बाद साल 2021 के जैसे ही हिंसा न भड़क जाए. पिछले विधानसभा चुनावों में 1300 से ज्यादा जगहों पर हिंसा देखने को मिली थी. इसी को देखते हुए चुनाव आयोग ने भी अपनी कमर कस ली है. आयोग ने फैसला लिया है कि मतदान खत्म होने के बाद भी राज्य 700 से ज्यादा कंपनियां तैनात रहेंगी, जिनकी नजर उपद्रवियों पर रहेगी. ताकि चुनाव में किसी तरह की कोई हिंसा न हो सके|
अंतरिक्ष से अद्भुत नज़ारा: Artemis II ने रचा नया इतिहास
4 Apr, 2026 01:52 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली | नासा के आर्टेमिस II मिशन पर गए अंतरिक्ष यात्रियों ने चांद के पास पहुंचते हुए धरती की बेहद शानदार और मनमोहक तस्वीरें भेजी हैं।कमांडर रीड वाइजमैन द्वारा ली गई एक तस्वीर में पृथ्वी का घुमावदार हिस्सा ओरियन कैप्सूल की खिड़की से नजर आ रहा है। दूसरी तस्वीर में पूरी धरती दिखाई दे रही है, जिसमें महासागर, सफेद बादल और हरी रोशनी वाली ऑरोरा साफ नजर आ रही है।रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह पिछले आधे से ज्यादा सदी में पहली बार है जब इंसान चंद्रमा के इतने करीब पहुंचा है।नासा ने एक्स पर तस्वीर साझा करते हुए लिखा, “आर्टेमिस II क्रू द्वारा ली गई इस तस्वीर में धरती पर इंसानी गतिविधियों की रोशनी दिखाई दे रही है। नीचे की ओर सूर्य की रोशनी धरती के किनारे को रोशन कर रही है।”पहली तस्वीर में ज्यादा शटर स्पीड के कारण धरती से आने वाली रोशनी ज्यादा कैद हुई, जबकि दूसरी तस्वीर में कम शटर स्पीड के जरिए रात में चमकती धरती को बेहतर तरीके से दिखाया गया है।एक अन्य तस्वीर में धरती पर दिन और रात के बीच की साफ सीमा दिखाई देती है, जिसे ‘टर्मिनेटर’ कहा जाता है।नासा ने इस तस्वीर के साथ लिखा, “चाहे हम जाग रहे हों या सपने देख रहे हों, हम सभी इसी ग्रह पर साथ हैं।”एक्सप्लोरेशन सिस्टम लीडर लकीशा हॉकिन्स ने कहा, “यह सोचकर अच्छा लगता है कि हमारे चार अंतरिक्ष यात्रियों को छोड़कर इस तस्वीर में हम सभी शामिल हैं।” उन्होंने यह भी बताया कि मिशन अच्छी तरह से आगे बढ़ रहा है।शुक्रवार देर शाम तक नासा के अंतरिक्ष यात्री धरती से करीब 1,80,000 किलोमीटर दूर पहुंच चुके थे, और चंद्रमा के पास पहुंचने के लिए उन्हें अभी करीब 2,40,000 किलोमीटर और यात्रा करनी है, जहां वे संभवतः सोमवार तक पहुंचेंगे।तीन अमेरिकी और एक कनाडाई सदस्य की टीम अपने ओरियन कैप्सूल में सवार होकर चंद्रमा का चक्कर लगाने, यू-टर्न लेने और बिना लैंडिंग किए सीधे धरती पर वापस लौटने की योजना बना रही है। यह टीम 1972 में हुए अपोलो 17 के बाद चंद्रमा तक पहुंचने वाली पहली मानव टीम बन गई है।
‘मुस्लिम विरोधी’ बयान पर सियासत गरमाई: पलानीस्वामी ने स्टालिन को दिया जवाब
4 Apr, 2026 01:01 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वेल्लोर | अन्नाद्रमुक (एआईएडीएमके) के महासचिव ई. के. पलानीस्वामी ने द्रमुक (डीएमके) प्रमुख और मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन पर निशाना साधा। पलानीस्वामी ने डीएमके नेता पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि स्टालिन केवल भाजपा के साथ गठबंधन के कारण उनकी पार्टी को 'मुस्लिम-विरोधी' करार दे रहे हैं।पलानीस्वामी ने कहा कि द्रमुक ने अल्पसंख्यकों को धोखा देकर उनके वोटों से सत्ता हासिल की। उन्होंने तिरुनेलवेली में एक पुलिस उप-निरीक्षक का मामला बताया, जिसने मुख्यमंत्री से जान खतरे में होने की शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने कहा. "किसी ने ध्यान नहीं दिया। अगले दिन नमाज पूरी करने के बाद उसकी बेरहमी से हत्या कर दी गई। क्या इस तरह आप अल्पसंख्यकों की रक्षा करते हैं?"
गिनाईं अपने शासन की अल्पसंख्यकों के लिए योजनाएं
अन्नाद्रमुक शासन के दौरान मुसलमानों के लिए लागू की गई कल्याणकारी योजनाओं की एक श्रृंखला को सूचीबद्ध करते हुए पलानीस्वामी ने द्रमुक के ट्रैक रिकॉर्ड पर सवाल खड़े किए। उन्होंने पूछा, "स्टालिन हमें सिर्फ इसलिए मुस्लिम-विरोधी बता रहे हैं क्योंकि हमने गठबंधन बनाया है। द्रमुक ने 1999 के लोकसभा चुनाव और 2001 के विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा के साथ गठबंधन किया था। क्या तब भाजपा एक अच्छी पार्टी थी?"मुख्यमंत्री स्टालिन के इस दावे की पृष्ठभूमि में कि प्रधानमंत्री ने केवल राजग (एनडीए) का उल्लेख किया और पलानीस्वामी को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार तक नहीं कहा, अन्नाद्रमुक प्रमुख ने इस बात पर जोर दिया कि अन्नाद्रमुक सरकार बनाएगी और वही मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार हैं।
स्टालिन के आरोपों का चुन-चुन कर दिया जवाब
अम्बुर के पास एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए अन्नाद्रमुक नेता ने स्टालिन द्वारा लगाए गए कई आरोपों को खारिज किया। विपक्षी दल के नेता ने कहा कि स्टालिन का यह कहना कि "पलानीस्वामी ने कई विफलताओं को देखा है", अहंकार को दर्शाता है और उन्हें अपने अतीत को देखना चाहिए।पलानीस्वामी ने 2011 के विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय द्रमुक मुख्य विपक्षी दल का दर्जा भी हासिल नहीं कर पाई थी। उन्होंने कहा कि 2011 से 2021 तक, अन्नाद्रमुक ने कई चुनाव जीते और महत्वपूर्ण रूप से गठबंधन के बिना भी जीत हासिल की।अन्नाद्रमुक प्रमुख ने आगे कहा, "सिर्फ विधानसभा चुनाव ही नहीं, 2014 के लोकसभा चुनाव में भी हमने 37 सीटें जीतीं। तब आपने एक भी सीट नहीं जीती। आपने कई उपचुनाव नहीं जीते और स्थानीय निकाय चुनाव भी नहीं जीते। सहकारी समिति चुनावों में अन्नाद्रमुक ने 98 प्रतिशत सीटें जीतीं। 10 साल (2011-21) तक सत्ता से बाहर रहने के बाद क्या द्रमुक को हमारे बारे में बात करने का अधिकार है?"
सुशासन देने में विफल रही डीएमके :पलानीस्वामी
पलानीस्वामी ने आरोप लगाया कि जब द्रमुक को सत्ता में आने का मौका मिला, तो वह सुशासन देने में विफल रही। उन्होंने कहा, "तब जब आप विपक्ष के नेता थे, आपने धोखे से लोगों को ठग कर सत्ता हासिल की। लेकिन आपने अपने वादे पूरे नहीं किए। किसान, सफाई कर्मचारी, डॉक्टर, नर्स और सरकारी कर्मचारी सभी विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। आपने पुरानी पेंशन योजना लागू करने का वादा किया था, लेकिन आपने उन्हें धोखा दिया। क्या हमें एक ऐसी सरकार चाहिए जिसने लोगों को फिर से धोखा दिया हो?"महिलाओं के लिए 1,000 रुपये की मासिक सहायता योजना का उल्लेख करते हुए पलानीस्वामी ने कहा कि उनकी पार्टी ने सरकार को यह वादा पूरा करने के लिए मजबूर किया। उन्होंने कहा, "मैंने विधानसभा में यह मुद्दा उठाया। अन्नाद्रमुक के दबाव के कारण ही उन्होंने इसे 28 महीने बाद दिया। उन्होंने स्वेच्छा से इसे नहीं दिया।"
होर्मुज बंद होने का असर कम करने की तैयारी: खाड़ी देशों की नई ऊर्जा योजना
4 Apr, 2026 01:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली | इस्राइल-अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार (2 अप्रैल) को एलान किया कि ईरान में अपने लक्ष्य पूरे करने के बाद ही उनकी सेना इस युद्ध से बाहर निकलेगी। उन्होंने कहा कि इस काम में दो से तीन हफ्ते का समय लग सकता है। इस बीच अपनी ऊर्जा सप्लाई के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भर खाड़ी देश, जैसे- संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, कुवैत, आदि इसके आगे भी बंद रहने की संभावना को देखते हुए तेल-गैस पहुंचाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर विचार कर रहे हैं। जिन योजनाओं पर विचार किया जा रहा है, उनमें से एक योजना खुद भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से बनाई गई थी। हालांकि, इस पर लंबे समय से काम अटका है। आइये जानते हैं कि खाड़ी देश अब होर्मुज से आगे व्यवस्था पर विचार क्यों कर रहे हैं? जिन वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर विचार किया जा रहा है, वह क्या हैं? योजनाओं में भारत की क्या भूमिका रही है? अगर योजना जमीन पर उतरती है तो इससे भारत को क्या फायदा होगा? आइये जानते हैं...
खाड़ी देश अब होर्मुज से आगे व्यवस्था पर विचार क्यों कर रहे हैं?
खाड़ी देश होर्मुज जलडमरूमध्य को बायपास करने के लिए नए तेल परिवहन मार्गों और पाइपलाइन नेटवर्क पर विचार कर रहे हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह यही है कि युद्ध की वजह से यह अहम समुद्री मार्ग बेहद संवेदनशील हो गया है। यहां न सिर्फ ईरान खाड़ी देशों के तेल-गैस और आपूर्ति से जुड़े टैंकरों-जहाजों को निशाना बना रहा है, बल्कि अपनी मर्जी से कुछ देशों को ही यहां से निकलने की अनुमति दे रहा है। इसके चलते खाड़ी देशों को खासा नुकसान उठाना पड़ा है।
ईरान का बढ़ता नियंत्रण और व्यवधान
अमेरिका-इस्राइल हमलों के बाद ईरान ने इस संकरे जलमार्ग को चुनिंदा तरीके से बंद घोषित कर दिया। इसका असर यह हुआ कि यहां से गुजरने वाले यातायात में 95% से ज्यादा की गिरावट आई। अब इस मार्ग से गुजरने वाले किसी भी जहाज को तेहरान की पूर्व-मंजूरी लेनी पड़ती है, जिससे खाड़ी देशों के निर्यातकों पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।
वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर संकट
शांति के समय में दुनिया भर के 20% तेल और गैस (लगभग 20 मिलियन बैरल प्रतिदिन) की आपूर्ति इसी जलडमरूमध्य से होती है। इस मार्ग में रुकावट पूरी दुनिया की आपूर्ति और खाड़ी देशों के खजाने को प्रभावित कर रही हैं। इसके कारण कच्चे तेल की कीमतों के साथ-साथ शिपिंग और बीमा की लागत में भी भारी उछाल आया है। इसका पूरा असर यह है कि अधिकतर देशों में तेल-गैस की कीमतें आसमान छू रही हैं।
एकल 'चोकपॉइंट' पर निर्भरता खत्म करना
अधिकारियों और उद्योग जगत के दिग्गजों को एहसास हो गया है कि वे अपने निर्यात के लिए केवल एक चोकपॉइंट पर निर्भर नहीं रह सकते हैं। उनका मानना है कि भविष्य की स्थिरता के लिए पाइपलाइनों, रेलवे और सड़कों का एक वैकल्पिक और व्यापक नेटवर्क बनाना ही एकमात्र व्यावहारिक उपाय है। इससे ये देश दूसरों की तरफ से खड़ी की गई रुकावटों से निपट सकेंगे और अपने फैसले खुद कर सकेंगे।
किन वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर विचार कर रहे खाड़ी देश?
1. सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन का विस्तार
यह 1,200 किलोमीटर लंबी मौजूदा पाइपलाइन सऊदी अरब के तेल क्षेत्रों से लाल सागर के तट (यानबू बंदरगाह) तक जाती है, जो होर्मुज को पूरी तरह से बायपास कर देती है। सऊदी अरब अब इस पाइपलाइन की क्षमता बढ़ाने पर विचार कर रहा है, ताकि इसके जरिए अधिक तेल का निर्यात किया जा सके।सऊदी अरामको के सीईओ अमीन नासर ने पिछले महीने कुछ विश्लेषकों को बताया था कि सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को वर्तमान में अपनी मुख्य रणनीति बताया है। वहीं, खाड़ी के एक वरिष्ठ ऊर्जा कार्यकारी ने इस मौजूदा पाइपलाइन के निर्माण को एक जीनियस मास्टरस्ट्रोक करार दिया, जो आज संकट के समय काम आ रही है।
2. आईएमईसी और भूमध्य सागर कॉरिडोर
'भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा' (आईएमईसी) पर भी प्रमुखता से विचार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य पाइपलाइनों, रेलवे और सड़कों के एक नए नेटवर्क के माध्यम से अरब प्रायद्वीप को भूमध्य सागर, खासतौर पर इस्राइल के हाइफा बंदरगाह या मिस्र के बंदरगाहों से जोड़ना है। इस्राइली कंपनी न्यूमेड एनर्जी के सीईओ योसी अबू का भी कहना है कि क्षेत्रीय देशों को अपने भाग्य का नियंत्रण स्वयं करने के लिए एक-दूसरे के साथ मिलकर पाइपलाइनों और रेलवे का जमीनी नेटवर्क बिछाना चाहिए, ताकि कोई और उनकी आपूर्ति को बाधित न कर सके।
3. यूएई की अबू धाबी क्रूड ऑयल पाइपलाइन (फूजैरह मार्ग)
तत्काल विकल्प के रूप में, यूएई अपनी मौजूदा हबशान-फूजैरह पाइपलाइन की क्षमता बढ़ाने पर विचार कर रहा है। यह 380 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन तेल को सीधे ओमान की खाड़ी तक पहुंचाती है। साथ ही फूजैरह के लिए एक "प्लान बी" के तहत दूसरी नई पाइपलाइन बनाने पर भी चर्चा हुई है।
4. इराक से जुड़े मार्ग और इराक-तुर्किये पाइपलाइन
इराक को तुर्की के भूमध्यसागर स्थित तट- सेहान से जोड़ने वाली मौजूदा इराक-तुर्की क्रूड ऑयल पाइपलाइन भी एक विकल्प है। इसके अलावा, इराक से जॉर्डन, सीरिया या तुर्की होते हुए नए क्रॉस-बॉर्डर मार्गों पर भी चर्चा हो रही है। हालांकि ये बहुत महंगे मार्ग हैं, जहां से निर्यात में 15 से 20 अरब डॉलर तक का सालाना अतिरिक्त खर्च आ सकता है।कैट ग्रुप के सीईओ क्रिस्टोफर बुश ने चेतावनी दी है कि नई पाइपलाइनें बिछाना बेहद खर्चीला और जटिल है। उनके अनुमान के अनुसार, सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन जैसी परियोजना को आज के समय में बनाने में कम से कम 5 अरब डॉलर का खर्च आएगा, जबकि इराक से सीरिया या तुर्की जैसे देशों से गुजरने वाले जटिल रास्तों पर 15 से 20 अरब डॉलर का खर्च आ सकता है।
5. लाल सागर पर नए निर्यात टर्मिनल
सऊदी अरब लाल सागर के तट पर अतिरिक्त निर्यात टर्मिनल विकसित करने की भी योजना बना रहा है, जिसमें नियोम परियोजना के तहत बन रहा गहरे पानी वाला बंदरगाह (डीपवॉटर पोर्ट) शामिल हो सकता है।स्वतंत्र ऊर्जा विश्लेषक जॉर्ज वोलोशिन ने आगाह किया है कि पाइपलाइनें और पंपिंग स्टेशन और टर्मिनल स्थिर और भारी लागत वाले लक्ष्य होते हैं, जिन्हें दुश्मन अपने ड्रोन्स या मिसाइलों से आसानी से निशाना बना सकता है। इसके अलावा, बुश ने इराक जैसे प्रस्तावित मार्गों में जिंदा बमों और आतंकियों की मौजूदगी जैसे गंभीर सुरक्षा जोखिमों की ओर इशारा किया है। ट्रकों के माध्यम से तेल ले जाने के सड़क परिवहन विकल्प को भी वोलोशिन ने अत्यधिक खर्चीला और लॉजिस्टिक रूप से एक बुरा सपना बताया है।
6. ओमान के बंदरगाहों तक पाइपलाइन
दक्षिण में ओमान के बंदरगाहों तक तेल ले जाने के विकल्प पर भी विचार किया गया है, हालांकि बुश का कहना है कि रेगिस्तान और सख्त चट्टानी पहाड़ों के कारण इस मार्ग में भारी इंजीनियरिंग चुनौतियां हैं । साथ ही इस योजना के जमीन पर उतरने में बाकी व्यवस्थाओं से ज्यादा समय भी लग सकता है।
भारत की किस योजना पर चल रही बात?
खाड़ी देशों के तेल निर्यात के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य के विकल्प के तौर पर भारत से जुड़ी जिस प्रमुख योजना पर सबसे अधिक चर्चा हो रही है, वह है भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा' (आईएमईसी)। इसका मकसद एक एकीकृत परिवहन नेटवर्क के माध्यम से भारत को मध्य पूर्व (खाड़ी देशों) के रास्ते यूरोप से जोड़ना है।इस गलियारे के तहत केवल एक पाइपलाइन नहीं बिछाई जाएगी, बल्कि यह बंदरगाहों, रेलवे लाइनों, सड़कों और तेल/गैस पाइपलाइनों का एक व्यापक संयुक्त नेटवर्क होगा। यह कॉरिडोर भारत से शुरू होकर यूएई, सऊदी अरब, जॉर्डन और इस्राइल से गुजरते हुए भूमध्य सागर तक जाएगा और वहां से सीधे यूरोप को जोड़ेगा।
क्या है इस योजना में भारत की भूमिका?
इस परियोजना की घोषणा पहली बार सितंबर 2023 में नई दिल्ली में आयोजित जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान की गई थी। हाल ही में अपनी इस्राइल यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आईएमईसी के साथ-साथ आई2यू2 (भारत, इस्राइल, यूएई और अमेरिका) के तहत बुनियादी ढांचे और ऊर्जा क्षेत्र में मजबूत सहयोग का आह्वान किया था।
इस परियोजना में मौजूदा मुश्किलें क्या?
इस योजना को धरातल पर उतारने में सबसे बड़ी चुनौती राजनीतिक हितों को साधना है, खासकर सऊदी अरब को इस बात के लिए राजी करना कि इस मार्ग में इस्राइल के हाइफा बंदरगाह को शामिल किया जाए। दरअसल, खाड़ी के कई देश इस्राइल के साथ औपचारिक या अनौपचारिक तौर पर जुड़ गए हैं, लेकिन सऊदी खुले तौर पर साथ इस्राइल के साथ करीबी को नहीं दर्शाता। मौजूदा संकट को देखते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य पर दुनिया की निर्भरता खत्म करने के लिए आईएमईसी के इस व्यापक क्रॉस-बॉर्डर नेटवर्क को एक मजबूत और दीर्घकालिक रणनीतिक विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।
होर्मुज के विकल्पों का कैसे फायदा उठा सकते हैं भारत-अन्य देश?
होर्मुज जलडमरूमध्य के विकल्पों, खासकर पाइपलाइनों और आईएमईसी जैसे व्यापारिक गलियारों का विकास केवल मौजूदा ऊर्जा संकट को टालने का जरिया नहीं बनेगा, बल्कि इससे भारत, खाड़ी देशों और पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए दूरगामी रणनीतिक और आर्थिक लाभ पैदा हो सकते हैं।
1. भारत को होने वाले फायदे
व्यापक और सुरक्षित व्यापार मार्ग: अमेरिका समर्थित भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा लंबी अवधि में केवल तेल और गैस ही नहीं, बल्कि कई अन्य प्रकार के व्यापारिक सामानों का भी सुरक्षित और लेनदेन सुनिश्चित करेगा।निर्बाध ऊर्जा सुरक्षा: भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक खाड़ी देशों पर निर्भर है। नए विकल्पों के तैयार होने से भारत को बिना किसी रणनीतिक जोखिम के कच्चे तेल की निर्बाध आपूर्ति मिल सकेगी।मजबूत रणनीतिक स्थिति: भारत, इस्राइल, यूएई, अमेरिका के साथ-साथ यूरोपीय देशों के इस आईएमईसी नेटवर्क से जुड़ने से भारत इन देशों के साथ ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा और बुनियादी ढांचे के संयुक्त विकास में सीधी तरह से जुड़ जाएगा। इसका असर यह होगा कि भारत के लिए ऊर्जा जरूरतों के लाने-ले जाने के खर्च कम होंगे। साथ ही इन देशों के साथ व्यापार के जरिए करीबी रिश्ते भी स्थापित होंगे।
2. खाड़ी देशों को क्या फायदा?
दूसरी तरफ नए नेटवर्क के बन जाने से सभी खाड़ी देश युद्ध जैसी स्थिति में भी अपने ऊर्जा निर्यात और राजस्व को सुरक्षित रख सकेंगे। सऊदी अरब की मौजूदा ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन जैसे बुनियादी ढांचे ने यह साबित कर दिया है कि संकट के समय में भी निर्बाध निर्यात बनाए रखा जा सकता है।
3. इस्राइल और यूरोप के लाभ?
वैकल्पिक पाइपलाइन नेटवर्क के भूमध्य सागर की ओर जाने से इस्राइल का हाइफा बंदरगाह एक प्रमुख वैश्विक हब बन सकता है। इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भी कह चुके हैं कि ईरान के होर्मुज को बंद करने की स्थिति में आगे इन वैकल्पिक मार्गों, खासतौर पर आईएमईसी और भूमध्य सागर की तरफ जाने वाले नेटवर्क से दीर्घकालिक स्थिरता और सुरक्षा बढ़ जाएगी।चूंकि होर्मुज की वजह से दुनिया की तेल सप्लाई बाधित नहीं होगी, इसलिए लंबी अवधि में तेल की कीमतों पर असर नहीं पड़ेगा और यूरोप समेत पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजारों में स्थिरता आएगी। साथ ही शिपिंग उद्योग के जोखिम भी कम होंगे। इस पूरे घटनाक्रम पर अटलांटिक काउंसिल की वरिष्ठ सलाहकार मैसून कफाफी के अनुसार, अब यह चर्चा केवल काल्पनिक नहीं रह गई है, बल्कि जमीनी हकीकत में बदल रही है। उनका मानना है कि वर्तमान ऊर्जा संकट ने खाड़ी देशों को नए सिरे से सोचने पर मजबूर कर दिया है और अब स्थिति के युद्ध से पहले की स्थिति में लौटने की कोई उम्मीद नहीं है। कफाफी का मानना है कि सबसे सुरक्षित और लचीला विकल्प किसी एक पाइपलाइन पर निर्भर रहना नहीं है, बल्कि कई पाइपलाइनों और रेलवे कॉरिडोर का एक विस्तृत नेटवर्क बनाना है। हालांकि, इसे साकार करना सबसे कठिन काम होगा।विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि कई देशों से गुजरने वाले क्रॉस-बॉर्डर (सीमा-पार) नेटवर्क के मामले में देशों की व्यक्तिगत नीतियां आड़े आ सकती हैं। इनके स्वामित्व, संचालन और तेल प्रवाह के नियंत्रण को लेकर होने वाले राजनीतिक विवाद किसी भी क्षेत्रीय नेटवर्क के निर्माण में एक बड़ी बाधा साबित होंगे।
लव जिहाद आरोपों पर हंगामा: हुबली में लड़की के परिवार पर केस दर्ज
4 Apr, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बंगलूरू | कर्नाटक के हुबली शहर में एक मामला इन दिनों काफी चर्चा में है, जहां एक युवक-युवती के रिश्ते को लेकर विवाद इतना बढ़ गया कि मामला मारपीट, अपहरण और गंभीर आरोप-प्रत्यारोप तक पहुंच गया। युवती की मां की ओर से विद्यानगर पुलिस स्टेशन में दो अलग-अलग शिकायतें दर्ज कराई गई हैं। वहीं, अब युवक के पिता ने युवती के परिवार के खिलाफ गंभीर आरोपों में मामला दर्ज कराया है।
पीड़िता के परिवार ने लगाए ये आरोप
पूरे मामले की शुरुआत लव जिहाद के आरोपों से हुई, जिसमें हिंदू युवती के परिवार की ओर से युवक समीर पर गंभीर आरोप लगाए गए। लड़की के परिवार ने आरोप लगाया कि समीर ने ना सिर्फ उसे बहलाने की कोशिश की, बल्कि उसके साथ मारपीट और यहां तक कि दुष्कर्म की कोशिश भी की। इस संबंध में विद्यानगर पुलिस स्टेशन में युवती की मां की ओर से दो अलग-अलग शिकायतें दर्ज कराई गई हैं। इन शिकायतों में समीर के अलावा उसकी बहन और कुछ अन्य लोगों के नाम भी शामिल किए गए हैं। पुलिस इन सभी आरोपों की जांच कर रही है।
आरोपी के परिवार ने भी दर्ज कराई एफआईआर
वहीं दूसरी ओर, समीर की तरफ से भी आरोप लगाए गए हैं। अशोका नगर पुलिस स्टेशन में समीर और उसके परिवार की ओर से शिकायत दर्ज कराई गई है। समीर के पिता शरीफ मुल्ला ने आरोप लगाया कि उनके बेटे पर करीब 50-60 लोगों की भीड़ ने हमला किया। शिकायत के मुताबिक, यह हमला शहर के सिल्वर पार्क इलाके में हुआ, जहां चिंतनमंथन नाम के व्यक्ति और उसके बेटे के साथ 50-60 लोग इकट्ठा हुए। आरोप है कि इन लोगों ने समीर के साथ मारपीट की, उसे जबरन एक ऑटो में बैठाकर किडनैप किया और फिर उसे एक गौशाला में ले जाकर बेरहमी से पीटा।
लव जिहाद के आरोपों पर युवक के परिजनों ने क्या कहा?
यह भी आरोप है कि हमलावरों ने फावड़े और लात-घूंसों से समीर को मारा और उसे जान से मारने की धमकी दी। घायल हालत में समीर को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से उसने पुलिस को बयान दिया। इस मामले में पुलिस ने विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया है और जांच जारी है।इस पूरे घटनाक्रम के बीच समीर के परिवार ने लव जिहाद के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि समीर और युवती पिछले तीन साल से एक-दूसरे को जानते थे और दोनों आपसी सहमति से रिश्ते में थे।समीर की बहन ने तो यहां तक कहा कि उनके पास ऐसे कई फोटो और सबूत हैं, जो यह साबित कर सकते हैं कि यह रिश्ता पुराना और सहमति से था। उन्होंने युवती के परिवार पर विक्टिम कार्ड खेलने का आरोप भी लगाया।फिलहाल पुलिस दोनों पक्षों की शिकायतों के आधार पर मामले की जांच कर रही है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन भी सतर्क है और स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
टैबलेट से मिले 121 आपत्तिजनक वीडियो: नासिक में गंभीर अपराध का पर्दाफाश
4 Apr, 2026 11:59 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नासिक | महाराष्ट्र के नासिक से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां ब्लैकमेल की शिकायत करने वाला एक वरिष्ठ नागरिक खुद यौन शोषण के आरोप में गिरफ्तार हो गया। पुलिस जांच में उसके खिलाफ गंभीर खुलासे हुए हैं।
बुजुर्ग ने क्या शिकायत दर्ज कराई थी?
पुलिस के अनुसार, सतपुर इलाके में रहने वाले रविंद्र गणपत एरंडे ने पहले शिकायत दर्ज कराई थी कि कुछ लोगों ने उसके कार्यालय से टैबलेट चोरी कर लिया और निजी फोटो-वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी देकर उससे 12 लाख रुपये की वसूली की कोशिश की। उसने बताया था कि वह पहले ही 10 हजार रुपये दे चुका है और गुरुवार को 50 हजार रुपये देने वाला था।
पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया?
शिकायत के आधार पर पुलिस ने जाल बिछाकर चार आरोपियों आकाश पुंडलिक बकरे, प्रकाश रामदास पानपटिल, सूरज सुनील गवई और श्रीपत भीमराव शिंदे को गिरफ्तार किया। उनके पास से चार मोबाइल फोन, दो पेन ड्राइव और एक मेमोरी कार्ड बरामद किए गए।
कैसे हुए बुजुर्ग का अपराध का खुलासा?
जब पुलिस ने इन उपकरणों की जांच की, तो उसमें 121 अश्लील और आपत्तिजनक वीडियो क्लिप मिले, जिनमें कई महिलाओं और शिकायतकर्ता के परिचित शामिल थे। जांच के दौरान मामले ने नया मोड़ लिया, जब एक महिला सामने आई और उसने एरंडे पर कई बार यौन शोषण का आरोप लगाया।महिला का आरोप है कि एरंडे ने उसके बेटे को सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर अलग-अलग होटलों में उसके साथ दुष्कर्म किया। इस शिकायत के बाद पुलिस ने एरंडे को शुक्रवार को गिरफ्तार कर लिया।बुजुर्ग पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 69 (छल से यौन संबंध) सहित अन्य धाराओं, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत मामला दर्ज किया गया है।प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि एरंडे ने कई महिलाओं का यौन शोषण किया और उनके अश्लील वीडियो बनाए। पुलिस ने अन्य संभावित पीड़ित महिलाओं से आगे आकर शिकायत दर्ज कराने की अपील की है और उनकी पहचान गोपनीय रखने का आश्वासन दिया है।
चुनावी मंच से गरजे योगी: असम में कांग्रेस और UDF को दी कड़ी चुनौती
4 Apr, 2026 11:09 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दिसपुर | यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा, "कांग्रेस ने UDF के साथ मिलकर पहचान का संकट खड़ा किया। ये पहचान का संकट किसी एक क्षेत्र में नहीं था.तुष्टीकरण की नीति पर चलकर इन्होंने असमियां पहचान को पूरी तरह समाप्त करने का प्रयास किया। इन्होंने घुसपैठियों को घुसाकर असम के सामने पहचान का संकट खड़ा किया.जब पीएम मोदी के नेतृत्व में दिल्ली में सरकार बनी और असम में बीजेपी की सरकार आई पहले सर्वानंद सोनोवाल के नेतृत्व में और फिर हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में जब यहां पर फिर से सरकार बनी तो ये सरकार असम की पहचान को संरक्षित कर ही रही है और असम संगीत, संस्कृति, असम से जुड़े हुए महापुरुष, उनके नायक, महानायक योद्धा को सम्मान मिल रहा है अब असम में विकास देखने को मिल रहा है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि उसने कांग्रेस पार्टी ने केरल में UDF के साथ मिलकर “पहचान का संकट” पैदा किया। उन्होंने कहा कि यह संकट केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विभिन्न राज्यों में सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान को प्रभावित करने वाला रहा है। योगी आदित्यनाथ ने विशेष रूप से असम का उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस ने तुष्टीकरण की नीति अपनाकर वहां की मूल “असमिया पहचान” को कमजोर करने की कोशिश की। उनके अनुसार, वोट बैंक की राजनीति के चलते कांग्रेस ने ऐसे फैसले लिए, जिनसे स्थानीय संस्कृति, भाषा और परंपराओं पर प्रतिकूल असर पड़ा।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जब कोई राजनीतिक दल तुष्टीकरण की नीति अपनाता है, तो वह समाज को बांटने का काम करता है और दीर्घकाल में इससे राष्ट्रीय एकता पर भी असर पड़ता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने सत्ता में रहते हुए ऐसी नीतियां लागू कीं, जिनसे कुछ खास समुदायों को लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई, जबकि व्यापक समाज के हितों की अनदेखी हुई। योगी आदित्यनाथ के मुताबिक, असम में अवैध घुसपैठ और जनसंख्या असंतुलन जैसे मुद्दे भी इसी नीति का परिणाम हैं, जिससे स्थानीय लोगों में असुरक्षा की भावना पैदा हुई।
उन्होंने आगे कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकारें इसके विपरीत “सबका साथ, सबका विकास” के सिद्धांत पर काम कर रही हैं और हर नागरिक की पहचान और अधिकारों की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। योगी ने यह भी दावा किया कि भाजपा ने सांस्कृतिक विरासत और स्थानीय परंपराओं को संरक्षित करने के लिए कई कदम उठाए हैं, जिससे लोगों में आत्मगौरव की भावना बढ़ी है। उनके बयान को राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह विभिन्न राज्यों में चल रही वैचारिक बहस को और तेज करता है। इस मुद्दे पर विपक्ष और अन्य दलों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं, जिससे आने वाले समय में राजनीतिक माहौल और गर्म होने की संभावना है।
बागदा सीट पर रोमांच: सोमा और मधुपर्णा ठाकुर के बीच कड़ा मुकाबला
4 Apr, 2026 10:48 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बागदा | पश्चिम बंगाल की उत्तर 24 परगना की बागदा सीट पर मुकाबला बेहद दिलचस्प हो चला है। भाजपा के सोमा ठाकुर का मुकाबला तृणमूल कांग्रेस प्रत्याशी मधुपर्णा ठाकुर से है। सोमा केंद्रीय मंत्री शांतनु ठाकुर की पत्नी हैं, जबकि मधुपर्णा रिश्ते में उनकी ननद लगती है। इससे मुकाबला भावनात्मक और प्रतीकात्मक दोनों ही स्तरों पर महत्वपूर्ण हो गया है।
ननद-भाभी की इस लड़ाई में मतुआ समुदाय का वोट निर्णायक बन गया है। शांतनु ठाकुर के परिवार का इस समुदाय के बीच खासा प्रभाव माना जाता है, जिससे यह चुनाव और भी अहम हो गया है। इस मुकाबले से एक ही परिवार के भीतर दो अलग राजनीतिक विचारधाराएं आमने-सामने हैं-एक भाजपा के साथ, दूसरी तृणमूल के साथ। भाजपा ठाकुर उपनाम और मतुआ पहचान के सहारे वोटों का ध्रुवीकरण करने की कोशिश कर रही है। सोमा का उम्मीदवार बनना भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
ठाकुरबाड़ी- एक परिवार, एक आंदोलन, एक वोट बैंक
मतुआ समुदाय की नींव 19वीं सदी में समाज सुधारक हरिचंद ठाकुर ने रखी थी, जिसे उनके पुत्र गुरुचंद ठाकुर ने मजबूत किया। यह आंदोलन मूलतः दलित-नामशूद्र समुदाय के सामाजिक और धार्मिक उत्थान से जुड़ा था। बांग्लादेश (पूर्वी पाकिस्तान) से आए शरणार्थियों के बीच इस समुदाय का गहरा प्रभाव रहा है। ठाकुर परिवार, जिसे आम तौर पर ठाकुरबाड़ी कहा जाता है, इस आंदोलन का केंद्र रहा है। इस परिवार का राजनीतिक प्रभाव आज भी बरकरार है।
मतुआ वोट: सबसे बड़ा फैक्टर
बंगाल की राजनीति में मतुआ समुदाय को किंगमेकर माना जाता है। 2 से 3 करोड़ मतुआ वोटरों का असर करीब 60 से 70 सीटों पर पड़ता है। बागदा, बोनगांव, ठाकुरनगर और आसपास के क्षेत्रों में इनकी निर्णायक भूमिका होती है। भाजपा ने सीएए और शरणार्थी मुद्दों से समुदाय में पकड़ मजबूत करने की कोशिश की है। बता दें कि, बागदा विधानसभा सीट लगातार तीन बार से तृणमूल कांग्रेस के कब्जे में है।
CBSE सिलेबस को लेकर बवाल: तमिलनाडु CM स्टालिन का केंद्र पर बड़ा आरोप
4 Apr, 2026 10:41 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तिरुवनंतपुरम | तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने सीबीएसई के नए पाठ्यक्रम ढांचे की कड़ी आलोचना की। उन्होंने इसे भाषाई थोपने की सुनियोजित कोशिश बताते हुए आरोप लगाया कि यह नीति हिंदी को बढ़ावा देती है और क्षेत्रीय भाषाओं को कमजोर करती है।स्टालिन ने कहा कि यह ढांचा संघीय ढांचे को नुकसान पहुंचाता है, गैर-हिंदी भाषी राज्यों के साथ भेदभाव करता है और छात्रों व शिक्षकों पर अतिरिक्त बोझ डालता है। उन्होंने केंद्र सरकार से भारत की भाषाई विविधता का सम्मान करने और राज्यों के अधिकारों की रक्षा करने की अपील की।दरअसल, सीबीएसी 2026-27 शैक्षणिक सत्र से चरणबद्ध तरीके से तीन-भाषा नीति लागू करने जा रहा है, जिसकी शुरुआत कक्षा 6 से होगी। इस नीति के तहत छात्रों को एक अतिरिक्त भाषा सीखनी होगी और तीन भाषाओं में से कम से कम दो भारतीय भाषाएं अनिवार्य होंगी।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने विस्तृत पोस्ट में स्टालिन ने कहा कि यह कोई साधारण शैक्षणिक सुधार नहीं है, बल्कि एक चिंताजनक और सुनियोजित प्रयास है, जो हमारी पुरानी आशंकाओं को सही साबित करता है। भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने के नाम पर भाजपा-नीत एनडीए सरकार एक केंद्रीकृत एजेंडा चला रही है, जो हिंदी को बढ़ावा देता है और देश की समृद्ध भाषाई विरासत को व्यवस्थित रूप से हाशिये पर डालता है।
उन्होंने तीन-भाषा फॉर्मूले को हिंदी को गैर-हिंदी राज्यों में विस्तार देने का एक छिपा हुआ तंत्र बताया और कहा कि यह नीति संरचनात्मक रूप से हिंदी भाषी छात्रों को लाभ पहुंचाती है, जिससे निष्पक्षता, संघवाद और क्षेत्रीय समानता प्रभावित होती है।
स्टालिन ने सवाल उठाया कि दक्षिणी राज्यों के छात्रों के लिए यह नीति व्यवहार में हिंदी को अनिवार्य बना देती है, लेकिन क्या हिंदी भाषी राज्यों में तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम या यहां तक कि बंगाली और मराठी सीखना अनिवार्य किया जाएगा? उन्होंने कहा कि इस तरह की पारस्परिकता का अभाव इस नीति की एकतरफा और भेदभावपूर्ण प्रकृति को उजागर करता है।
मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि वही केंद्र सरकार, जो केंद्रीय विद्यालय संगठन के स्कूलों में तमिल को अनिवार्य नहीं बना पाई और पर्याप्त तमिल शिक्षकों की नियुक्ति भी नहीं कर सकी, अब राज्यों को भारतीय भाषाओं के प्रचार का पाठ पढ़ा रही है। यह प्रतिबद्धता नहीं, बल्कि खुली पाखंडता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार तमिलनाडु और अन्य राज्यों द्वारा उठाई गई लोकतांत्रिक चिंताओं को नजरअंदाज करते हुए हिंदी थोपने के लिए प्रतिबद्ध नजर आती है। स्टालिन ने इसे सहकारी संघवाद के सिद्धांतों पर सीधा हमला और करोड़ों भारतीयों की भाषाई पहचान का अपमान बताया।
साथ ही उन्होंने एआईएडीएमके और तमिलनाडु में उसके एनडीए सहयोगियों से सवाल किया कि क्या वे इस थोप जाने का समर्थन करते हैं या छात्रों के अधिकार, पहचान और भविष्य की रक्षा के लिए खड़े होंगे।
आपूर्ति संकट का असर: बोतलबंद पानी महंगा होने की संभावना, उद्योग पर बढ़ा दबाव
4 Apr, 2026 10:01 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली | भारत में जहां एक ओर तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार जाने की चेतावनी है, वहीं दूसरी ओर पश्चिम एशिया में अमेरिका– इस्राइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब आम उपभोक्ताओं तक पहुंचने लगा है। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और आपूर्ति बाधित होने से देश का लगभग 6 अरब डॉलर का बोतलबंद पानी उद्योग दबाव में है, जिससे आने वाले दिनों में कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका बढ़ गई है। भारत में अप्रैल और मई के महीनों में पानी और ठंडे पेय पदार्थों की मांग चरम पर होती है। ऐसे समय में साफ पेयजल की कमी, भूजल प्रदूषण और बुनियादी ढांचे की खामियों के कारण बड़ी आबादी बोतलबंद पानी पर निर्भर रहती है। डेटा फॉर इंडिया के अध्ययन के अनुसार शहरी क्षेत्रों के लगभग 15% और ग्रामीण क्षेत्रों के 6% परिवार पीने के लिए पैकेज्ड पानी का उपयोग करते हैं। पश्चिम एशिया में तनाव के चलते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है।
पूरे पैकेजिंग उद्योग पर असर की आशंका
केमको प्लास्टिक इंडस्ट्रीज के निदेशक वैभव सराओगी का कहना है कि पीईटी प्रीफॉर्म की कीमतों में वृद्धि का असर केवल बोतलबंद पानी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे पैकेजिंग उद्योग को प्रभावित करेगा। उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनियों के लिए लंबे समय तक लागत को खुद वहन करना संभव नहीं होगा। यदि कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और आपूर्ति बाधित रहती है तो आने वाले हफ्तों में बोतलबंद पानी सहित अन्य पेय पदार्थों की कीमतों में वृद्धि तय मानी जा रही है, जिसका सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।
महाराष्ट्र में 20% इकाइयों में उत्पादन बंद
महाराष्ट्र बोतलबंद पानी निर्माता संघ के अध्यक्ष विजय सिंह दुब्बल के अनुसार पीईटी प्रीफॉर्म जिनसे प्लास्टिक बोतलें बनाई जाती हैं, उनकी कीमत 115 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर लगभग 180 रुपये हो गई है और बाजार में इनकी कमी भी देखी जा रही है। कच्चे माल की बढ़ती लागत और आपूर्ति संकट के कारण महाराष्ट्र में लगभग 20% बोतल निर्माण इकाइयों ने अस्थायी रूप से संचालन बंद कर दिया है।
भारत, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है, इस दबाव को सीधे महसूस कर रहा है। बोतलबंद पानी की कीमतों पर सबसे बड़ा असर प्लास्टिक पैकेजिंग की लागत बढ़ने से पड़ रहा है। कच्चे तेल से बनने वाले पीईटी (पॉलीएथिलीन टेरेफ्थेलेट) रेजिन की कीमतों में तेज वृद्धि हुई है।
सुरक्षा बलों की सफलता: मणिपुर में सीमा क्षेत्र से चार उग्रवादियों को पकड़ा गया
4 Apr, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली | केंद्र सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पेट्रोलियम उत्पादों व एलपीजी की जमाखोरी तथा कालाबाजारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने जरूरी वस्तु अधिनियम और एलपीजी नियंत्रण आदेश के प्रावधानों का हवाला देते हुए, राज्यों से प्रवर्तन तेज करने, तेल विपणन कंपनियों के समन्वय से दैनिक छापे-निरीक्षण और हेराफेरी तथा गलत सूचनाओं के खिलाफ कड़ी निगरानी रखने को कहा है। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, राज्यों को दैनिक आधार पर मीडिया के जरिये जनता को जानकारी पहुंचाने, नियंत्रण कक्ष और हेल्पलाइन स्थापित करने और ईंधन की उपलब्धता के बारे में जनता को आश्वस्त करने के लिए फर्जी खबरों का सक्रिय रूप से मुकाबला करने का भी निर्देश दिया गया है। सरकार ने नागरिकों को पेट्रोल और डीजल की अफरा-तफरी में खरीदारी न करने और एलपीजी की अनावश्यक बुकिंग से बचने की सलाह दी है।
सुरक्षा से खिलवाड़- रेल कोचों में पुराने पुर्जे लगाए
संसद की लोक लेखा समिति (पीएसी) ने भुवनेश्वर के मंचेश्वर स्थित रेलवे कैरिज रिपेयर वर्कशॉप की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि कोचों की मरम्मत के दौरान नए सामान की जगह पुराने पुर्जों का इस्तेमाल किया गया, जो सीधे तौर पर यात्री सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है। 2025 में संसद में पेश की गई कैग रिपोर्ट के आधार पर पीएसी ने पाया कि 2020 से 2023 के बीच मरम्मत किए गए 3,402 कोचों में से 131 कोच ओवरहॉलिंग के 100 दिनों के भीतर खराब हो गए। समिति ने कहा, मरम्मत के दौरान 19 अनिवार्य रूप से बदलने योग्य पुर्जों की जगह सेकेंड-हैंड पुर्जों का उपयोग किया गया, जो रेलवे के स्थापित मानकों का उल्लंघन है। पीएसी ने कोच फेलियर की रिपोर्टिंग में भी बड़ी चूक पकड़ी है। 131 विफल कोचों में से सिर्फ 14 की जानकारी वर्कशॉप को दी गई। शेष 117 मामलों को छिपा लिया गया। समिति ने इसे डाटा में हेराफेरी करार देते हुए डिपो और वर्कशॉप के बीच समन्वय की कमी पर फटकार लगाई है।
गुजरात यूसीसी बिल असांविधानिक, हाईकोर्ट जाएंगे- पर्सनल लॉ बोर्ड
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने गुजरात विधानसभा से पारित समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक को असांविधानिक करार देते हुए इसे गुजरात हाईकोर्ट में चुनौती देने का निर्णय लिया है। बोर्ड ने शुक्रवार को दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यह विधेयक धार्मिक स्वतंत्रता और नागरिक अधिकारों का उल्लंघन है।बोर्ड प्रवक्ता एसक्यूआर इलियास ने कहा कि यह कानून अल्पसंख्यकों पर बहुसंख्यक सामाजिक मानदंडों को थोपने का प्रयास है। उन्होंने तर्क दिया कि संविधान के अनुच्छेद 44 के तहत यूसीसी केवल एक नीति निर्देशक तत्व है, जो मौलिक अधिकारों की तरह अनिवार्य रूप से लागू नहीं किया जा सकता। उल्लेखनीय है कि गुजरात विधानसभा ने हाल में विवाह, तलाक और उत्तराधिकार के लिए एक साझा कानूनी ढांचा पारित किया है, जिसमें बहुविवाह पर रोक और लिव-इन संबंधों का अनिवार्य पंजीकरण शामिल है। बोर्ड का कहना है कि वे उत्तराखंड यूसीसी को पहले चुनौती दे चुके हैं और अब गुजरात के मामले में भी कानूनी रुख अपनाएंगे।
चलती ट्रेन में बेटी की हत्या, पिता गिरफ्तार
असम के लखीमपुर जिले के सिलानिबारी स्टेशन पर शुक्रवार एक ट्रेन के अंदर पिता ने छह साल की बेटी की हत्या कर दी। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (एनएफआर) के एक प्रवक्ता के मुताबिक, रेलवे पुलिस बल और सरकारी रेलवे पुलिस ने तुरंत मौके पर पहुंच आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। यह वारदात सुबह करीब 9.15 बजे 15813 डेकारगांव-मुरकोंगसेलेक एक्सप्रेस के एक जनरल कोच के अंदर हुई। प्रवक्ता ने बताया कि चश्मदीदों के बयान दर्ज करने और पुलिस अधिकारियों के बच्ची के शव को कब्जे में लेने के बाद यह ट्रेन सुबह 10.58 बजे सिलानिबारी से रवाना हुई। उन्होंने आगे कहा कि हालांकि, बच्ची की हत्या के पीछे का मकसद पता नहीं चल पाया है।
गंगा के अधिकतर हिस्सों में नहाने योग्य हुआ पानी- सरकार
सरकार ने कहा है कि गंगा नदी के प्रदूषण में काफी कमी आई है। अब अधिकतर स्थानों पर पानी नहाने के मानकों के अनुरूप है। लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी ने बताया कि उत्तराखंड, बिहार और बंगाल में पानी के पीएच और ऑक्सीजन स्तर संतोषजनक हैं। हालांकि, उत्तर प्रदेश के कानपुर और गाजीपुर जैसे कुछ हिस्सों में अभी सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि 2017 की तुलना में औद्योगिक कचरे के बहाव में 23.9% की कमी दर्ज की गई है।
मालदा हिंसा: न्यायिक अधिकारियों और केंद्रीय बलों पर हमला पूरी तरह सुनियोजित
पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के कालियाचक में हुई हिंसक घटना को लेकर पुलिस की रिपोर्ट ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अदालत में जमा कराई गई रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी अधिकारियों, न्यायिक पदाधिकारियों और उन्हें बचाने पहुंचे केंद्रीय बलों पर सुनियोजित तरीके से हमला किया गया था। सूत्रों के मुताबिक मोथाबाड़ी थाना पुलिस ने शुक्रवार को अदालत में दाखिल रिपोर्ट में कहा कि घटना उस समय हुई जब बीडीओ कार्यालय से न्यायिक अधिकारियों का काफिला बाहर निकल रहा था। इसी दौरान पहले से मौजूद भीड़ ने काफिले को निशाना बनाते हुए पथराव और हमला शुरू कर दिया। सूत्रों के मुताबिक रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि सिर्फ जजों के काफिले ही नहीं, बल्कि मौके पर पहुंचे सीआरपीएफ जवानों पर भी हमला किया गया। हमले में केंद्रीय बलों की गाड़ियों के शीशे तोड़े गए और कई सुरक्षाकर्मी घायल हुए। घायलों में एक चालक, एक सीआरपीएफ सब-इंस्पेक्टर और अन्य कर्मियों के जख्मी होने की पुष्टि की गई है। पुलिस के अनुसार, घटना से पहले 1 अप्रैल की शाम बीडीओ कार्यालय के सामने करीब 100 अज्ञात लोगों की भीड़ इकट्ठा हुई थी। आरोप है कि इसी भीड़ को उकसाकर काफिले पर हमला कराया गया। भीड़ ने बैरिकेड लगाकर रास्ता रोका और फिर ईंट-पत्थरों से हमला किया। इस घटना ने चुनाव से पहले राज्य में कानून-व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है। खासतौर पर उस समय जब राज्य में पहले से ही केंद्रीय बलों की तैनाती की गई है, ऐसे में इतनी बड़ी संख्या में लोगों का एकत्र होना और हमला करना सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज हो गई है।
मणिपुर में म्यांमार सीमा के पास चार उग्रवादी गिरफ्तार
मणिपुर के तेंगनुपाल जिले में भारत-म्यांमार सीमा के पास चार आतंकवादियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने शनिवार को बताया कि गिरफ्तारियां मोरेह पुलिस थाना क्षेत्र के यांगौबुंग गांव से की गईं। गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के कीशम सुमंत मैतेई (25), एनआरएफएम के अंगोम सोमोरजीत सिंह (32), और कांगलेइपाक कम्युनिस्ट पार्टी (एमएफएल) के युमनाम नाओबा सिंह (26) और खुंद्रकपम श्यामसन मैतेई (25) के रूप में की गई। पुलिस ने बताया कि राज्य में जबरन वसूली और आपराधिक गतिविधियों में शामिल लोगों को पकड़ने के लिए खुफिया जानकारी के आधार पर व्यापक स्तर पर तलाशी अभियान, घेराबंदी और खोज अभियान चलाए जा रहे हैं।
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