कटिहार के इस मंदिर से बेशकीमती अष्टधातु की मूर्तियां चोरी
कटिहार। कोढ़ा नगर पंचायत के गेड़ाबरही बस्ती वार्ड नंबर 4 स्थित ऐतिहासिक ठाकुर बाड़ी मंदिर से बीती रात चोरों ने अष्टधातु से बनी राम, जानकी, लक्ष्मण और हनुमान जी की बेशकीमती मूर्तियां चुरा लीं। इस मंदिर की स्थापना करीब 150 वर्ष पूर्व चमन सिंह ने की थी और तब से लेकर आज तक इस मंदिर की सेवा सिंह परिवार के द्वारा सात पीढ़ियों से की जा रही है।
घटना की जानकारी तब हुई जब मंगलवार की सुबह मंदिर के सेवादार सुभाष सिंह मंदिर का गेट खोलने पहुंचे। उन्होंने देखा कि मंदिर का ताला टूटा हुआ है और सभी मूर्तियां अपने स्थान से गायब हैं। उन्होंने तुरंत इसकी सूचना अपने परिजनों और कोइरा थाना प्रभारी सुजीत कुमार को दी।
बताया जाता है कि सोमवार की शाम मंदिर परिसर में आरती की गई थी जिसमें सभी मूर्तियां अपने स्थान पर मौजूद थीं। लेकिन बीती रात चोर भारी संख्या में आए और इस चोरी की घटना को अंजाम देकर फरार हो गए।
स्थानीय लोगों के अनुसार, ये मूर्तियां अष्टधातु से बनी थीं और इनकी कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक करोड़ से डेढ़ करोड़ रुपये के बीच आंकी जा रही है। मंदिर के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व को लेकर पूरे इलाके में आक्रोश का माहौल है।
उल्लेखनीय है कि चमन सिंह, हरि सिंह, हेमनारायण सिंह, महेंद्र नारायण सिंह, श्याम नारायण सिंह, किशन सिंह और केशव सिंह जैसे परिवार के लोग पीढ़ियों से इस मंदिर के सेवादार रहे हैं।
आज भी उनके वंशज इस परंपरा का निर्वहन कर रहे हैं। इस घटना को लेकर महेंद्र नारायण सिंह, विजय सिंह, धीरेंद्र प्रसाद सिंह, सुभाष चंद्र सिंह, मनोरंजन सिंह, सोनू सिंह, चंदन सिंह, किशन सिंह, छोटू सिंह, मोनू सिंह समेत कई ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि चोरी गई मूर्तियों को जल्द बरामद किया जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
कोढ़ा पुलिस ने सभी सीसीटीवी फुटेज को खंगालना शुरू कर दिया है। नगर पंचायत क्षेत्र में सीसीटीवी की निगरानी के बावजूद इतनी बड़ी चोरी होना सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर रहा है।
पुलिस की टीम लगातार जांच कर रही है और कहा जा रहा है कि चोरों को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
ग्रामीणों ने की अपील
स्थानीय ग्रामीणों ने धार्मिक भावनाओं से जुड़ी इस घटना को लेकर कोडरमा प्रशासन से सख्त और तत्काल कार्रवाई की मांग की है, ताकि मंदिर की प्रतिष्ठा बहाल हो और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

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