मोहन भागवत के 'घर वापसी' बयान पर भड़के मौलाना अरशद मदनी
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत द्वारा 'घर वापसी' और पूर्वजों को लेकर दिए गए हालिया बयान ने देश के सियासी और धार्मिक गलियारों में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया है। मदनी ने भागवत के दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि "सिर्फ उन्हीं ने अपनी मां का दूध पिया है," जो यह साबित करने की कोशिश कर रहे हैं कि सबके पूर्वज हिंदू थे। उनका यह पलटवार सोशल मीडिया से लेकर मुख्यधारा की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है।
विवाद की जड़ मोहन भागवत का वह संबोधन है जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत में रहने वाले सभी लोगों का डीएनए एक है और सभी के पूर्वज हिंदू थे, इसलिए जो लोग दूसरे धर्मों में चले गए हैं, उन्हें अपनी जड़ों की ओर लौटना चाहिए। इस पर आपत्ति जताते हुए मौलाना मदनी ने स्पष्ट किया कि इस्लाम का इतिहास और पहचान अपनी जगह स्वतंत्र है। उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान थोपना ऐतिहासिक और धार्मिक रूप से गलत है। मदनी के अनुसार, हर इंसान को अपने धर्म और पूर्वजों की पहचान का पूरा अधिकार है और किसी एक विचारधारा को सब पर मढ़ा नहीं जा सकता।
मौलाना मदनी ने यह भी तर्क दिया कि इस तरह की बयानबाजी से समाज में दूरियां बढ़ती हैं और भाईचारे को नुकसान पहुँचता है। उन्होंने भागवत के 'डीएनए' वाले तर्क पर कटाक्ष करते हुए कहा कि अगर पूर्वजों की ही बात करनी है, तो मनुष्य की उत्पत्ति और इतिहास के धार्मिक ग्रंथों के अपने-अपने प्रमाण हैं। फिलहाल इस जुबानी जंग ने 'घर वापसी' और 'साझा विरासत' के मुद्दे पर एक बार फिर नई बहस छेड़ दी है, जहाँ एक पक्ष अपनी सांस्कृतिक एकता की बात कर रहा है, तो दूसरा पक्ष अपनी धार्मिक स्वायत्तता और पहचान को बचाने की दलील दे रहा है।
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