‘ईसाई समुदाय के खिलाफ कानून’: FCRA संशोधन पर सतीशन का हमला
नई दिल्ली | केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता वीडी सतीशन ने शनिवार को केंद्र सरकार और बीजेपी पर तीखा हमला बोला और उन्हें भेड़ की खाल में भेड़िया बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी एक तरफ क्रिसमस के दौरान चर्चों और बिशप के घरों में केक लेकर जाती है, लेकिन दूसरी तरफ ऐसे कानून लाती है जो ईसाई समुदाय के हितों को प्रभावित करते हैं।कासरगोड में मीडिया से बातचीत के दौरान सतीशन ने कहा कि प्रस्तावित विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) संशोधन बेहद खतरनाक हैं। उनके अनुसार, इन संशोधनों के तहत केंद्र सरकार किसी भी विदेशी फंड प्राप्त करने वाली संस्था का लाइसेंस बिना स्पष्ट कारण बताए नवीनीकृत करने से इनकार कर सकती है। इतना ही नहीं, जिन संस्थाओं का लाइसेंस रिन्यू नहीं होगा, उनकी संपत्तियों पर भी केंद्र सरकार कब्जा कर सकती है।उन्होंने केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी को सलाह दी कि वे इस बिल को ठीक से पढ़ें। गोपी ने हाल ही में कहा था कि यह संशोधन किसी खास धर्म या समुदाय के खिलाफ नहीं है, बल्कि देश के हितों और संपत्तियों की सुरक्षा के लिए है।
संपत्तियों को निशाना बनाने के उद्देश्य लाया जा रहा कानून
सतीशन ने दावा किया कि कांग्रेस ने एफसीआरए कानून अवैध विदेशी फंडिंग को रोकने के लिए बनाया था, लेकिन मौजूदा संशोधन अल्पसंख्यक समुदायों की संपत्तियों को निशाना बनाने के उद्देश्य से लाए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि भविष्य में सरकार चर्च से जुड़ा कोई नया कानून भी ला सकती है, जैसा कि वक्फ कानून में संशोधन के जरिए किया गया।
वाम सरकार और एसडीपीआई पर भी निशाना
सतीशन ने केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन और एलडीएफ पर भी हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि CPI(M) ने अपने ही रुख के खिलाफ जाकर SDPI जैसे संगठन का समर्थन स्वीकार किया है, जिसे पार्टी पहले चरमपंथी बता चुकी है।उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और पार्टी नेतृत्व सत्ता में बने रहने के लिए ऐसे संगठनों का समर्थन लेने को तैयार हैं। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि विजयन कांग्रेस पर वेलफेयर पार्टी के समर्थन को लेकर हमला करते हैं, लेकिन एसडीपीआई, पीडीपी और आरएसएस के समर्थन पर चुप रहते हैं, जो उनकी दोहरेपन को दर्शाता है।
हिंसा और चुनावी माहौल पर चिंता
विपक्ष के नेता ने आरोप लगाया कि आगामी 9 अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले एलडीएफ हार के डर से हिंसा का सहारा ले रहा है। उन्होंने कांग्रेस सांसद शशि थरूर के गनमैन और ड्राइवर पर हुए हमले, उनके काफिले को रोके जाने और कई जगहों पर यूडीएफ के प्रचार सामग्री को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं को इसका उदाहरण बताया।सतीशन ने कहा कि इस तरह की घटनाएं यूडीएफ को नहीं रोक पाएंगी। उन्होंने दावा किया कि यूडीएफ राज्य में मजबूत एंटी-इंकम्बेंसी के दम पर चुनाव में 100 से अधिक सीटें जीतने जा रहा है।इसके साथ ही उन्होंने उन सर्वेक्षणों को अविश्वसनीय बताया, जिनमें मुकाबला कांटे का बताया जा रहा है। उनके मुताबिक, जमीनी हकीकत में यूडीएफ और एलडीएफ के बीच बड़ा अंतर है और इसका फायदा विपक्षी गठबंधन को मिलेगा।

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