अमेरिकी जासूसी से घबराया चीन, स्मार्टफोन यूजर्स को किया अलर्ट
लंबे समय से अमेरिका चीन पर जासूसी करने का आरोप लगाता आया है. चीन अपने देश में गूगल से लेकर पढ़ाई और रोजमर्रा के काम आने वाली सभी ऐप खुद बनाता है और देशवासियों को वही ऐप यूज करने की सलाह देता है. फिर भी दावा किया जा रहा है कि कुछ डिवाइस के जरीए चीन की सुरक्षा को खतरा है. चीन के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्रालय (MSS) ने चेतावनी दी है कि स्मार्ट डिवाइस राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए छिपे हुए खतरे पैदा करते हैं.
मंत्रालय ने चीन की साइबर सिक्योरिटी इंडस्ट्री एलायंस (CCIA) की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए ये चेतावनी दी है. रिपोर्ट में अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की ओर से वैश्विक स्तर पर मोबाइल डिवाइस पर बड़े पैमाने पर साइबर हमले और निगरानी का खुलासा किया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक स्मार्ट फोन अब राज्य-स्तरीय साइबर युद्ध में प्रमुख लक्ष्य बन गए हैं.
स्मार्ट डिवाइस से हो रहा डेटा चोरी
स्मार्ट डिवाइस जितना हमारी जिंदगी को आसान बनाते हैं, उतना ही ये खतरनाक भी है. रिपोर्ट में डिवाइस से गुप्त डेटा चोरी के विभिन्न तरीकों पर रोशनी डाली गई है. इनमें सिम कार्ड की कमजोरियों का फायदा उठाकर लोकेशन ट्रैक करना, मैसेज चुराना और कॉल करना शामिल है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ कंपनियों ने खुफिया एजेंसियों को बैकडोर से मदद दी है, जिसकी वजह से डिवाइस में स्पाइवेयर इंस्टॉलेशन संभव हो सका, जिससे विदेशी सरकारी कर्मियों के फोन भी इसकी चपेट में आए हैं. साथ ही बताया गया है कि प्री-इंस्टॉल्ड ऐप्स और मोबाइल नेटवर्क की कमजोरियों का भी डेटा चोरी के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है, जिसमें नेटवर्क हाइजैकिंग और नकली बेस स्टेशन शामिल हैं.
सुरक्षा प्रणाली में सुधार की जरूरत
MSS ने स्मार्ट उपकरणों से डेटा चोरी को रोकने के लिए एक अच्छी, बहुस्तरीय सुरक्षा सिस्टम बनाने की जरूरत पर जोर दिया है. इसमें हार्डवेयर, ऑपरेटिंग सिस्टम, डेटा और एप्लिकेशन एनवायरनमेंट की सुरक्षा शामिल है. मंत्रालय ने सार्वजनिक साइबर सुरक्षा जागरूकता बढ़ाने और संवेदनशील पदों पर काम करने वालों को बाहरी डिवाइस और ऐप्स से बचने, संदिग्ध लिंक से सावधान रहने और अच्छी डिजिटल स्वच्छता बनाए रखने की सलाह दी है.

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