बीजापुर में 'मार्कशीट माफिया' का खेल! फर्जी मार्कशीट पर मचा बवाल, शासन का लोगो तक गायब
नए शिक्षा सत्र की शुरुआत हो चुकी है, स्कूलों की घंटी फिर से गूंजने लगी है, लेकिन बीजापुर जिले में सैकड़ों नहीं बल्कि हजारों बच्चों का दाखिला अब तक अधर में लटका हुआ है। वजह 5वीं और 8वीं बोर्ड परीक्षा की मार्कशीट में हुई बड़ी गड़बड़ी।
जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग
जिले के कई स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को जो अंकसूचियाँ दी गईं, उनमें जन्मतिथि, स्कूल का नाम, परीक्षा केंद्र और यहां तक कि यू-डाइस कोड तक में भारी त्रुटियाँ हैं। कुछ तो ऐसे भी मामले सामने आए हैं, जिनमें छत्तीसगढ़ शासन का लोगो ही छूट गया है।
पालकों ने इस लापरवाही को बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ बताया है। वे संबंधित प्रिंटिंग एजेंसी और शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की माँग कर रहे हैं।
कार्रवाई शुरू, अस्थायी प्रवेश का आदेश
जिला शिक्षा अधिकारी एल. एल. धनेलिया ने बताया कि लापरवाही के जिम्मेदार शाखा प्रभारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। त्रुटियों को सुधारने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। जब तक नई अंकसूचियाँ नहीं मिल जातीं, तब तक विद्यार्थियों को प्रगति पत्र और टीसी के आधार पर अस्थायी रूप से प्रवेश देने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं, ताकि बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो।
प्रिंटिंग में हुई भारी चूक
जानकारी के अनुसार, मार्कशीट छापने का कार्य दुर्ग की एक प्राइवेट प्रिंटिंग कंपनी को सौंपा गया था। लेकिन कंपनी ने भारी लापरवाही बरतते हुए हजारों छात्रों की मार्कशीट में गंभीर गलतियाँ कर दीं। भोपालपटनम ब्लॉक के कुछ स्कूलों में स्कूल का नाम तक गलत छप गया है। बीजापुर जिले में इस वर्ष 5वीं की परीक्षा में 4648 और 8वीं में 3748 विद्यार्थी शामिल हुए थे। इनमें से बड़ी संख्या में छात्रों की अंकसूचियों में गलतियाँ पाई गई हैं।
प्रवेश पर पड़ा असर
इन गलतियों के कारण छात्र-छात्राओं के स्कूलों में एडमिशन में अड़चन आ रही है। पालक एक स्कूल से दूसरे स्कूल, और फिर कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं। कई छात्रों का भविष्य इस त्रुटि की वजह से खतरे में है।

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