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रैपिड सपोर्ट फोर्सेज ने यूएई से मिले चीन हाथियारों से किया कत्लेआम.....2,000 से अधिक निहत्थे नागरिकों की हत्या
30 Oct, 2025 08:37 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अबूधाबी । सूडान में रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (आरएसएफ) और सूडानी सेना (एसएएफ) के बीच चल रहे गृहयुद्ध ने भयानक रूप ले लिया है, खासकर दारफुर क्षेत्र के अल-फशर शहर में। सूडानी सेना के सहयोगी सैन्य समूह जॉइंट फोर्स ने आरोप लगाया है कि आरएसएफ ने 26 और 27 अक्टूबर को अल-फशर शहर में 2,000 से अधिक निहत्थे नागरिकों की हत्या कर दी है, जिनमें ज्यादातर महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग शामिल हैं। येल यूनिवर्सिटी के ह्यूमेनिटेरियन रिसर्च लैब (एचआरएल ) के सैटेलाइट विश्लेषण में कहा गया है कि यह गैर-अरब समुदायों (जैसे फुर, जाघावा और बर्टी) का जानबूझकर किया गया जातीय सफाया है। एचआरएल के सैटेलाइट विश्लेषण में शहर के चारों ओर लाशों के समूह और खून से सनी लाल रंग की मिट्टी दिखाई दे रही है, जो अंतरिक्ष से भी देखी जा सकती है। रिपोर्टों के अनुसार, आरएसएफ के लड़ाके घर-घर जाकर तलाशी अभियान के बहाने नागरिकों को गोली मार रहे हैं, और एक वीडियो में महिलाओं और बच्चों को कतार में बिठाकर सामने से अंधाधुंध गोलियां बरसाई जाती दिख रही हैं। 18 महीनों की घेराबंदी के बाद आरएसएफ ने अल-फशर शहर पर कब्जा कर लिया है और अब उनका दारफुर क्षेत्र के सभी पाँचों राज्य मुख्यालयों पर नियंत्रण हो गया है।
अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की रिपोर्टों के अनुसार, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने आरएसएफ को चीनी हथियारों और ड्रोन की आपूर्ति में भारी इजाफा किया है। लेकिन यूएई इन आरोपों से इंकार करता रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, अबू धाबी से चीनी रेनबो सीरीज के ड्रोन, छोटे हथियार, भारी मशीनगन, तोपें, वाहन और गोला-बारूद की भारी मात्रा में आरएसएफ को सप्लाई की जा रही है। दारफुर में नागरिकों को मारने के लिए इन्हीं हथियारों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसे संयुक्त राष्ट्र ने संभावित जातीय सफाया करार दिया है।
आरएसएफ के नेता मोहम्मद हमदान दगालो (हेमेटी) को यूएई का घनिष्ठ सहयोगी बताया जाता है, जिन्होंने दुबई में अपना बिजनेस हेडक्वार्टर स्थापित किया है। आरएसएफ की आर्थिक जड़ें दारफुर की खदानों से अवैध सोने की दुबई के रास्ते तस्करी से मजबूत हुई हैं। यह जानकारी सूडान में जारी संकट और नागरिक हत्याओं की गंभीरता को उजागर करती है, साथ ही इसमें बाहरी देशों की कथित भागीदारी पर भी सवाल उठाती है।
विदेश दौरे पर ट्रंप..........उधर अमेरिकी सीनेट में उनके खिलाफ हो गया खेला
30 Oct, 2025 08:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इनदिनों एशिया के दौरे पर है। तभी अमेरिका में उनके खिलाफ खेला हो गया। दरअसल अमेरिकी सीनेट ने एक बिल पास किया है जो ब्राजील पर लगाए गए उनके टैरिफ (आयात शुल्क) को चुनौती देता है। यह बिल उस राष्ट्रीय आपातकाल को समाप्त करने से संबंधित है, जो कि ट्रंप ने इसी साल जुलाई 2025 में ब्राजील के खिलाफ घोषित किया था। यह बिल रिपब्लिकन बहुमत वाली सीनेट ने पास किया। सीनेट में यह प्रस्ताव 52-48 वोटों से पारित हुआ, जिसमें ट्रंप की अपनी रिपब्लिकन पार्टी के 5 सीनेटर्स ने भी उनके खिलाफ वोट दिया।
बात दें कि ट्रंप प्रशासन ने ब्राजील पर भारी आयात कर लगाते हुए आरोप लगाया था कि वह अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश नीति और अर्थव्यवस्था के लिए खतरा बन रहा है। एक और कारण ब्राजील द्वारा अपने पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो का राजनीतिक उत्पीड़न बताया गया था। ब्राजील का कहना है कि पिछले 15 सालों में अमेरिका का 410 अरब डालर का व्यापार सरप्लस रहा है, यानी अमेरिका को कोई नुकसान नहीं, बल्कि फायदा हुआ है। अब यह प्रस्ताव अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) में जाएगा। प्रतिनिधि सभा में रिपब्लिकन बहुमत होने के कारण इसके पास होने की संभावना कम है, क्योंकि हाउस रिपब्लिकन पहले भी ट्रंप की व्यापार नीति को चुनौती देने वाले प्रस्तावों को रोक चुके हैं। सीनेट में इस सप्ताह कनाडा पर लगे ट्रंप के टैरिफ खत्म करने का और अन्य देशों पर लगाए गए वैश्विक टैरिफ की समीक्षा करने का प्रस्ताव भी पेश किया जाना है। विपक्षी सांसदों ने आरोप लगाया कि ट्रंप झूठे आपातकालीन आदेशों का उपयोग करके अपनी व्यापारिक नीति को राजनीतिक हथियार बना रहे हैं। उनका तर्क है कि इन टैरिफ की वजह से ही अमेरिकी उपभोक्ताओं पर महंगाई का बोझ बढ़ रहा है।
भारत में पुरुष और महिलाओं के वेतन का अंतर हुआ सबसे कम
29 Oct, 2025 04:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लंदन । भारत ने लैंगिक समानता के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। हाल ही में जारी एक वैश्विक रिपोर्ट के अनुसार, भारत अब उन देशों में शामिल हो गया है जहां पुरुष और महिला के वेतन में अंतर सबसे कम है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में पुरुष और महिला कर्मचारियों की औसत सैलरी अब लगभग समान है, जो 13,000 से 23,000 डॉलर के बीच दर्ज की गई है।
यह रिपोर्ट वैश्विक वेतन प्रबंधन कंपनी डील द्वारा तैयार की गई है, जिसमें 150 देशों के एक मिलियन से अधिक कॉन्ट्रैक्ट्स और 35,000 से ज्यादा कंपनियों के डेटा का विश्लेषण किया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में कंपनियां अब वेतन निर्धारण में डेटा आधारित और पारदर्शी प्रक्रियाओं का उपयोग कर रही हैं, जिससे वेतन असमानता में कमी आई है। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि भारत में इंजीनियरिंग और डेटा प्रोफेशनल्स की औसत सैलरी में इस साल भारी गिरावट दर्ज की गई है। वर्ष 2024 में जहां इनकी औसत आय 36,000 डॉलर थी, वहीं 2025 में यह घटकर 22,000 डॉलर रह गई। इसके बावजूद भारत में हाइब्रिड वर्क मॉडल का चलन मजबूत है, लगभग 60 से 70 प्रतिशत कर्मचारी फुल-टाइम और 30 से 40 प्रतिशत कॉन्ट्रैक्ट या अस्थायी आधार पर काम कर रहे हैं।
डील के एशिया-पैसिफिक प्रमुख मार्क सैमलाल के अनुसार, भारत में पुरुष-महिला वेतन अंतर में कमी एक सकारात्मक संकेत है। यह दर्शाता है कि कंपनियां अब योग्यता और प्रदर्शन को प्राथमिकता दे रही हैं। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा अभी भी औसतन सबसे अधिक वेतन देने वाले देश हैं। वहीं, एआई, साइबर सिक्योरिटी और डिजिटल मार्केटिंग जैसे क्षेत्रों में पेशेवरों को 20-25 प्रतिशत तक अधिक वेतन मिलता है, क्योंकि इन क्षेत्रों में कुशल प्रतिभाओं की कमी है।
दिलचस्प रूप से, रिपोर्ट में पाया गया कि सेल्स और मार्केटिंग सेक्टर में लिंग आधारित वेतन अंतर सबसे कम है, जबकि टेक्नोलॉजी और प्रोडक्ट से जुड़े कार्यों में यह अंतर अब भी अपेक्षाकृत अधिक बना हुआ है। कुल मिलाकर, भारत का यह प्रदर्शन कार्यस्थल पर लैंगिक समानता और पारदर्शिता की दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है।
11 करोड़ साल पहले धरती पर रहता था ये जानवर, खुदाई के दौरान अचानक निकल आया
29 Oct, 2025 03:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
आटोवा। कनाडा की खदानों में काम करने वाले खनिकों ने डायनासोर का ऐसा जीवाश्म खोजा है, जिसे वैज्ञानिक ‘जीवित ममी बता रहे हैं। यह खोज अब तक के सबसे सुरक्षित संरक्षित डायनासोर जीवाश्मों में से एक मानी जा रही है। इसमें न केवल त्वचा और कवच पूरी तरह सुरक्षित हैं, बल्कि आंत जैसे आंतरिक अंग भी संरक्षित अवस्था में मिले हैं, जिससे 11 करोड़ साल पुराने इस जीव के शरीर रचना और जीवनशैली की अनोखी झलक मिलती है। यह जीवाश्म अल्बर्टा स्थित रॉयल टायरल म्यूजियम में रखा गया है।
वैज्ञानिकों ने बताया कि यह जीव नोडोसॉर परिवार का था। ये भारी-भरकम, कवचधारी शाकाहारी डायनासोर थे जो क्रेटेशियस युग में पृथ्वी पर रहते थे। इसकी हालत इतनी बेहतरीन है कि विशेषज्ञों ने इसके मूल स्वरूप को पुनर्निर्मित कर लिया है, जिसमें त्वचा के पैटर्न और मुलायम ऊतक तक साफ दिखाई देते हैं। यह खोज पूरी तरह अचानक हुई। कनाडा के फोर्ट मैकमरे के पास सनकोर मिलेनियम माइन में काम कर रहे मजदूर जब ड्रिलिंग कर रहे थे, तब उन्हें कोयले या चट्टान की बजाय यह जीवाश्म मिला।
रिपोर्टों के अनुसार, जीवाश्म में न केवल बाहरी त्वचा संरचना दिखाई दे रही है, बल्कि हड्डियाँ भी पूरी तरह जुड़ी हुई अवस्था में हैं। आंतरिक अंगों के अवशेष भी स्पष्ट हैं। जीवित अवस्था में यह डायनासोर करीब 1,400 किलोग्राम वजन का रहा होगा, जबकि जीवाश्म स्वरूप में इसका वजन करीब 1,100 किलोग्राम है जो यह दिखाता है कि ये कितनी अच्छी तरह संरक्षित है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि यह डायनासोर किसी जलाशय के किनारे मरा और उसका शरीर समुद्र की तलहटी में जा बसा। वहां मौजूद खनिज तत्वों ने बहुत तेजी से इसके शरीर को ढक लिया, जिससे सड़न शुरू होने से पहले ही उसका बाहरी आवरण और अंदरूनी संरचना दोनों सुरक्षित रह गए। रॉयल टायरल म्यूजियम के पेलिओन्टोलॉजिस्ट डॉन हेंडरसन के अनुसार, ‘इस जीवाश्म में हड्डियों के साथ अब भी मुलायम ऊतक चिपके हुए हैं। यह डायनासोर की खोजों में लगभग असंभव स्थिति है। शोधकर्ताओं को इसके पेट के हिस्से में पूर्ण रूप से संरक्षित आंतें मिली हैं, जो अब तक किसी भी नोडोसॉर में पहली बार देखी गई हैं। इससे वैज्ञानिकों को इस प्रजाति के पाचन तंत्र को समझने में बड़ी मदद मिली है।
ट्रंप ने खुद की जमकर तारीफ की कहा- मेरे पास अच्छे नंबर, फिर लडूंगा चुनाव
29 Oct, 2025 02:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप खुद की तारीफ करने से पीछे नहीं हटते हैं उन्होंने अपनी एशिया यात्रा के दौरान एयरफोर्स वन पर पत्रकारों से बातचीत में 2028 के राष्ट्रपति चुनाव में तीसरे कार्यकाल की संभावना पर खुलकर संकेत दिए हैं। उनके पूर्व व्हाइट हाउस रणनीतिकार स्टीव बैनन के उस सुझाव पर सवाल पूछे जाने पर, जिसमें बैनन ने कहा था कि ट्रंप को असंवैधानिक तरीके से तीसरा कार्यकाल लड़ना चाहिए, ट्रंप ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, मुझे ऐसा करना बहुत पसंद होगा। मेरे पास अब तक के सबसे बेहतरीन नंबर हैं। हालांकि, उन्होंने तुरंत यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने इस बारे में वास्तव में अभी तक नहीं सोचा है। यह बयान ट्रंप की उस लंबे समय से चली आ रही अटकलों को नई जान देता है, जहां वे संविधान के 22वें संशोधन का उल्लंघन करते हुए तीसरी बार चुनाव लड़ने की कल्पना को बार-बार जीवंत करते रहे हैं।
ट्रंप ने बातचीत के दौरान रिपब्लिकन पार्टी के भविष्य के नेताओं पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पार्टी में बहुत अच्छे लोग हैं जो 2028 के चुनाव में मजबूत दावेदार साबित हो सकते हैं। विशेष रूप से, उन्होंने विदेश मंत्री मार्को रुबियो और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का नाम लिया। ट्रंप ने हंसते हुए कहा, हमारे पास बहुत बढ़िया लोग हैं... मार्को शानदार हैं। और जेडी तो बेहतरीन हैं- मुझे नहीं लगता कि कोई इन दोनों के खिलाफ चुनाव लड़ेगा। अगर ये दोनों एक साथ आएं, तो यह अजेय साबित होगा, उन्होंने जोड़ा रुबियो, जो विमान के केबिन में ट्रंप के पीछे खड़े थे, ने शर्माते हुए सिर झुका लिया, जबकि वेंस का नाम सुनकर ट्रंप ने और जोर दिया। यह बयान रिपब्लिकन पार्टी में उत्तराधिकार की होड़ को और तेज करता है, जहां ट्रंप के वफादार अभी भी उनके लंबे शासन की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप के करीबी सहयोगी स्टीव बैनन ने हाल ही में अपने पॉडकास्ट में दावा किया था कि एक योजना तैयार है जिसके तहत ट्रंप तीसरी बार चुनाव लड़ सकते हैं। हालांकि, अमेरिकी संविधान किसी भी राष्ट्रपति को दो कार्यकाल से अधिक पद पर बने रहने की अनुमति नहीं देता। मलेशिया में सफल दौरे के बाद ट्रंप टोक्यो (जापान) पहुंचे हैं, जो उनकी एशिया यात्रा का दूसरा चरण है। कुआलालंपुर छोड़ने से पहले उन्होंने मलेशियाई अधिकारियों और नागरिकों को हाथ हिलाकर विदाई दी। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, अभी-अभी मलेशिया छोड़ रहा हूं एक शानदार और ऊर्जावान देश। बड़े ट्रेड और रेयर अर्थ डील्स पर हस्ताक्षर किए, और सबसे महत्वपूर्ण, थाईलैंड और कंबोडिया के बीच शांति संधि पर हस्ताक्षर किए। अब कोई युद्ध नहीं! लाखों जिंदगियां बचीं। यह करना मेरे लिए सम्मान की बात है।
गाजा में अपने सैनिक भेजने की तैयारी में पाकिस्तान........इंटरनेशनल स्टैबिलाइजेशन फोर्स का हिस्सा बनेगा
29 Oct, 2025 01:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कराची। फिलिस्तीन (गाजा) में सैनिक भेजने की पाकिस्तान की योजना इंटरनेशनल स्टैबिलाइजेशन फोर्स (आईएफएस) का हिस्सा बनने की है। पाकिस्तान सरकार चाहती है कि उसकी सेना गाजा स्टेबिलाइजेशन फोर्स का हिस्सा बने। इस फोर्स में ज्यादातर सैनिक मुस्लिम बहुल देशों के सैनिक है। इस फोर्स की जिम्मेदारी: आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना, यह सुनिश्चित करना कि हमास निरस्त्र हो, बॉर्डर क्रॉसिंग की सुरक्षा करना, मानवीय सहायता को लोगों तक पहुंचाना, गाजा में इमारतों के पुनर्निर्माण की निगरानी करना।
अमेरिकी प्रशासन की सलाह पर इस फोर्स में इंडोनेशिया, यूएई (संयुक्त अरब अमीरात), मिस्र, कतर, तुर्की और अजरबैजान जैसे देशों की सेनाएं शामिल हो सकती हैं। इंडोनेशिया, पाकिस्तान और अजरबैजान को आईएफएस में मुख्य योगदानकर्ता माना जा रहा है। इंडोनेशिया ने सार्वजनिक रूप से 20,000 सैनिक भेजने की पेशकश की है। वहीं इजरायल ने तुर्की के इस फोर्स में शामिल होने पर आपत्ति जताकर कहा है कि वह तय करेगा कि किन देशों को गाजा में जाने की अनुमति मिलेगी। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने तुर्की के सुरक्षा बलों की भूमिका का विरोध करने की बात भी कही थी। इजरायल की मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, नेतन्याहू प्रशासन ने यह स्पष्ट किया है कि पाकिस्तानी सेना गाजा में केवल शांति व्यवस्था कायम करेगी और किसी भी संघर्ष में हिस्सा नहीं लेगी। माना जा रहा है कि पाकिस्तान इस कदम से इस्लामिक दुनिया में खुद को एक मजबूत देश के तौर पर स्थापित करना चाहता है। पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर इस पहल में रुचि ले रहे हैं। वर्तमान में पाकिस्तान सरकार और सेना के बीच मामले पर विचार-विमर्श चल रहा है, और सरकार के इसमें भाग लेने के पक्ष में होने के संकेत मिले हैं। यह इंटरनेशनल स्टैबिलाइजेशन फोर्स अमेरिकी मध्यस्थता वाले गाजा शांति समझौते का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
कनाडा में माफिया नेटवर्क सक्रिय! भारतीय उद्योगपति की हत्या, पंजाबी सिंगर को धमकी
29 Oct, 2025 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। कनाडा में भारतीय मूल के एक उद्योगपति दर्शन सिंह साहसी की हत्या और पंजाबी गायक के घर पर फायरिंग की दो बड़ी वारदातों की जिम्मेदारी कुख्यात लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने ली है। दोनों घटनाएं कनाडा के एबॉट्सफोर्ड इलाके में हुईं और इनका सीधा संबंध राजस्थान पुलिस द्वारा गैंग के सदस्य जगदीप सिंह उर्फ जग्गा की अमेरिका में गिरफ्तारी से जोड़ा जा रहा है।
गैंग से जुड़े गोल्डी ढिल्लों ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर बताया कि भारतीय उद्योगपति दर्शन सिंह साहसी की हत्या उनके गिरोह ने की है। ढिल्लों ने दावा किया कि साहसी एक बड़े ड्रग कारोबार से जुड़ा था और उसने गैंग को पैसे नहीं दिए, जिसके बाद उसे गोली मार दी गई। इसी पोस्ट में गोल्डी ने पंजाबी सिंगर चन्नी नट्टन के घर पर हुई गोलीबारी की जिम्मेदारी भी ली। उसने लिखा, “गायक चन्नी नट्टन के घर पर कल हुई फायरिंग का कारण सरदार खेड़ा है।” साथ ही म्यूजिक इंडस्ट्री को चेतावनी देते हुए कहा कि भविष्य में जो भी कलाकार सरदार खेड़ा के साथ काम करेगा, वह अपने नुकसान के लिए खुद जिम्मेदार होगा, क्योंकि गैंग खेड़ा को लगातार “भारी नुकसान” पहुंचाता रहेगा। इन घटनाओं ने कनाडा में रह रहे भारतीय समुदाय में दहशत फैला दी है। स्थानीय पुलिस ने जांच शुरू कर दी है, वहीं भारत में भी एजेंसियां इन गैंग्स के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क पर नजर रख रही हैं।
14,000 किलोमीटर की रेंज, तबाही का दूसरा नाम है ये मिसाइल........ट्रंप दिख रहे परेशान
28 Oct, 2025 04:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मॉस्को । रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने घोषणा की कि रूस ने अपनी परमाणु-संचालित क्रूज मिसाइल बुरेवेस्तनिक का सफल परीक्षण किया है। रूसी सशस्त्र बलों के जनरल स्टाफ के प्रमुख वैलेरी गेरासिमोव के अनुसार, मिसाइल परीक्षण के दौरान लगभग 15 घंटे तक हवा में रही और करीब 14,000 किलोमीटर की दूरी तय की। पुतिन ने दावा किया कि यह मिसाइल दुनिया में किसी अन्य देश के पास नहीं है और यह दुश्मन की मिसाइल रक्षा प्रणालियों को आसानी से चकमा दे सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक यह मिसाइल हवाई और मिसाइल रक्षा प्रणालियों को भेदने में सक्षम है। पुतिन ने कहा कि इस हथियार को जल्द ही तैनात करने की तैयारी की जाएगी और इसके उपयोग के तरीकों पर विचार किया जाएगा तथा बुनियादी ढांचा तैयार किया जाएगा।
यह परीक्षण तब हुआ है जब रूस और अमेरिका के बीच कूटनीतिक रिश्ते और खराब हुए हैं, खासकर अमेरिका द्वारा रूस की दो बड़ी तेल कंपनियों पर प्रतिबंध लगाने के बाद। पिछले सप्ताह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ प्रस्तावित शिखर सम्मेलन भी रद्द हो गया था, जिससे तनाव और बढ़ गया था। रूस ने पिछले सप्ताह पुतिन की निगरानी में एक रणनीतिक परमाणु बल अभ्यास भी किया था। रूसी विशेष दूत किरिल दिमित्रिएव ने अमेरिकी दौरे के दौरान अमेरिकी प्रशासन को सफल परीक्षण और युद्धक्षेत्र के अपडेट की जानकारी दी थी। मॉस्को के मेयर सर्गेई सोबयानिन के अनुसार, शहर की हवाई रक्षा प्रणालियों ने दर्जनों ड्रोनों को मार गिराया, जिससे ज़ुकोव्स्की और डोमोडेडोवो हवाई अड्डों पर कुछ समय के लिए उड़ानें रोक दी गईं। रूस के बेलगोरोद क्षेत्र में यूक्रेन के हमलों में छह नागरिक घायल हो गए।
यूक्रेन पर रूस के हमले तेज
रूस ने शनिवार से रविवार की रात यूक्रेन पर 100 से अधिक ड्रोन हमले किए। इन हमलों में कीव में ऊंची इमारतों को निशाना बनाया गया, जिसमें कई लोग सो रहे थे। यूक्रेन के आंतरिक मंत्री इहोर क्लिमेंको ने बताया कि कीव में हुए हवाई हमलों में एक 19 साल की लड़की और उसकी 46 साल की मां सहित तीन लोगों की मौत हो गई। इसके अलावा 33 लोग घायल हुए, जिसमें सात बच्चे शामिल हैं। कीव के मेयर विटाली क्लिट्स्को ने कहा कि घायलों में एक चार साल का बच्चा भी है। आठ लोगों को अस्पताल में भर्ती किया। कीव के डेसनियान्स्की क्षेत्र में एक नौ मंजिला इमारत में आग लग गई, जहां से 13 लोगों को सुरक्षित निकाला गया।
नाखून हमारे शरीर की आंतरिक सेहत का संकेत : आयुर्वेद
28 Oct, 2025 03:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लंदन। आयुर्वेद में नाखूनों को शरीर का आईना कहा गया है, क्योंकि इनके रंग, बनावट और आकार से यह पता लगाया जा सकता है कि शरीर के भीतर कोई समस्या तो नहीं। अक्सर लोग नाखूनों को केवल हाथों की खूबसूरती का प्रतीक मानते हैं, लेकिन वास्तव में नाखून हमारे शरीर की आंतरिक सेहत का भी संकेत देते हैं।
नाखून मुख्य रूप से केराटिन और क्यूटिकल से बने होते हैं। केराटिन एक प्रकार का प्रोटीन है, जो बालों और त्वचा के ऊतकों का निर्माण करता है और नाखूनों की ऊपरी परत को सुरक्षित रखता है। यह नाखूनों को मजबूती देता है और चोट लगने पर घाव को जल्दी भरने में मदद करता है। वहीं, क्यूटिकल नाखूनों को त्वचा से जोड़े रखने का काम करता है और बैक्टीरिया व फंगस को अंदर प्रवेश करने से रोकता है। इसे नाखून और त्वचा का “बॉडीगार्ड” भी कहा जाता है। नाखून न केवल हाथों की सुंदरता बढ़ाते हैं, बल्कि उंगलियों को भी सुरक्षा प्रदान करते हैं। यह उंगलियों की ऊपरी सतह को चोट और संक्रमण से बचाते हैं तथा उनकी पकड़ को मजबूत बनाते हैं।
इसके कारण हम भारी या सख्त वस्तुएं आसानी से उठा पाते हैं। नाखूनों की स्थिति कई बार शरीर के भीतर चल रही परेशानियों की ओर संकेत करती है। उदाहरण के लिए, अगर नाखून पीले हो रहे हैं, तो यह फंगल संक्रमण या लिवर से जुड़ी समस्या का संकेत हो सकता है। नाखूनों का सफेद होना शरीर में खून, विटामिन बी12 और फोलिक एसिड की कमी दर्शाता है। वहीं, नाखूनों पर अचानक बनने वाली रेखाएं थायराइड जैसी हार्मोनल गड़बड़ी का संकेत देती हैं। ऐसे लक्षण दिखने पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है, क्योंकि यह किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या का शुरुआती संकेत हो सकता है। नाखूनों की देखभाल के लिए बहुत जटिल उपायों की जरूरत नहीं होती। घर पर ही कुछ आसान घरेलू नुस्खों से इन्हें स्वस्थ और सुंदर रखा जा सकता है।
नींबू और जैतून के तेल का मिश्रण बनाकर नाखूनों की मालिश करने और कुछ देर तक उन्हें उसमें डुबोकर रखने से नाखूनों का पीलापन दूर होता है। वहीं, नारियल या बादाम के तेल से नियमित लेप करने पर नाखून मजबूत बनते हैं। सिर्फ बाहरी देखभाल ही नहीं, बल्कि सही खानपान भी नाखूनों के स्वास्थ्य के लिए उतना ही जरूरी है। आयुर्वेद में नाखूनों को हड्डियों से जुड़ा माना गया है। जब हड्डियां कमजोर होती हैं, तो नाखूनों का टूटना शुरू हो जाता है। इसलिए आहार में पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम और विटामिन डी शामिल करना चाहिए। विटामिन डी की पर्याप्त मात्रा शरीर में कैल्शियम के अवशोषण में मदद करती है, जिससे नाखून मजबूत बने रहते हैं और जल्दी नहीं टूटते।
बर्फ, भूख, थकावट और बीमारी से मारी गई थी नेपोलियन की सेना: शोध
28 Oct, 2025 02:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लंदन । नेपोलियन बोनापार्ट ने अक्टूबर 1812 में जब रूस से अपनी विशाल सेना को पीछे हटने का आदेश दिया, तो उनके लिए यह विनाशकारी साबित हुआ। लगभग तीन लाख सैनिक बर्फ, भूख, थकावट और बीमारियों से जूझते हुए मारे गए। लंबे समय तक यह माना जाता रहा कि कड़ाके की ठंड और भूख ही इस तबाही के प्रमुख कारण थे, लेकिन हाल ही में सामने आई एक नई स्टडी ने इतिहास के इस पन्ने को फिर से खोल दिया है। वैज्ञानिकों ने डीएनए एनालिसिस के जरिए पाया है कि इन सैनिकों की मौत में जूं से फैलने वाले बैक्टीरिया और दूषित भोजन से होने वाली बीमारियों की भी बड़ी भूमिका थी। इस रिसर्च का नेतृत्व इंस्टीट्यूट पाश्चर के माइक्रोबियल पैलियोजेनोमिक्स यूनिट के प्रमुख निकोलस रास्कोवन और उनकी टीम ने किया। उन्होंने लिथुआनिया के विलनियस शहर में मिली एक सामूहिक कब्र से नेपोलियन की ग्रैंड आर्मी के सैनिकों के दांतों का डीएनए परीक्षण किया।
दशकों पहले किए गए अध्ययन में टाइफस और ट्रेंच फीवर जैसी बीमारियों के संकेत मिले थे, लेकिन इस बार इस्तेमाल की गई आधुनिक “शॉटगन सीक्वेंसिंग” तकनीक ने और गहराई से जांच की अनुमति दी। इस तकनीक की मदद से वैज्ञानिक उन डीएनए अंशों की पहचान कर सके जो इंसानों में बीमारी पैदा करने वाले 185 तरह के बैक्टीरिया से मेल खाते थे। शोध में पाया गया कि एक सैनिक के दांतों में बोरेलिया रिकरेंटिस नामक बैक्टीरिया के निशान मिले, जो जूं से फैलने वाले “रिलैप्सिंग फीवर” का कारण होता है।
चार अन्य सैनिक साल्मोनेला एंटेरिका बैक्टीरिया के एक प्रकार से संक्रमित पाए गए, जिससे पैराटाइफाइड बुखार होता है। यह बीमारी दूषित पानी या भोजन के सेवन से फैलती है। टीम का मानना है कि इन चार में से एक सैनिक को दोनों बीमारियां एक साथ हो सकती थीं। ये नतीजे उन ऐतिहासिक विवरणों से मेल खाते हैं जिनमें सैनिकों को बुखार, दस्त और कमजोरी जैसी शिकायतों से जूझते हुए बताया गया था। रिसर्चर्स ने बताया कि पिछली स्टडीज में टाइफस या ट्रेंच फीवर पैदा करने वाले बैक्टीरिया के संकेत मिले थे, लेकिन इस बार ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला। उनका मानना है कि ऐसा इसलिए हो सकता है क्योंकि या तो सैनिक इन बीमारियों से संक्रमित नहीं थे या फिर संक्रमण बहुत हल्का था, जिसकी डीएनए मौजूदगी अब मिट चुकी है। एक संभावना यह भी है कि इतने वर्षों तक मिट्टी में दफन रहने के कारण डीएनए डिग्रेड हो गया हो या फिर नमूनों में उसकी मात्रा इतनी कम रही हो कि तकनीक उसे पकड़ नहीं सकी।
टीम ने अपने निष्कर्षों की पुष्टि के लिए कई स्टैटिस्टिकल टेस्ट और जेनेटिक एनालिसिस किए। उन्होंने यह भी जांचा कि डीएनए वास्तव में प्राचीन स्रोत से आया है और यह बैक्टीरिया के विकासक्रम में कहां स्थित है। अध्ययन में कहा गया कि इन सैनिकों की मौत का असली कारण सिर्फ ठंड या थकान नहीं था, बल्कि यह कई कारकों का संयुक्त प्रभाव था अत्यधिक ठंड, भूख, पैराटाइफाइड बुखार, रिलैप्सिंग फीवर और जूं से फैली बीमारियों का संगम। हालांकि जूं से होने वाला रिलैप्सिंग फीवर खुद में प्राणघातक नहीं होता, लेकिन पहले से ही कमजोर और भूखे सैनिकों के लिए यह जानलेवा साबित हुआ।
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच शांति वार्ता फेल होने से चीन के माथे पर चिंता की लकीर
28 Oct, 2025 01:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्तांबुल । तुर्की के इस्तांबुल में चल रही अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच शांति वार्ता फिर नाकाम होती दिख रही है। दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच लिखित गारंटी, शरणार्थी वापसी और सीमा सुरक्षा को लेकर बातचीत बेनतीजा रही। रिपोर्ट के मुताबिक, तालिबान नेतृत्व ने पाकिस्तान की शर्तों को ‘अविश्वास पर आधारित’ बताकर खारिज कर दिया। सूत्रों के अनुसार, इस विफलता का बड़ा कारण पाकिस्तान की बढ़त हासिल करने की नीति और तालिबान पर गहराता शक हैं।
खुफिया सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तान चाहता था कि अफगानिस्तान लिखित में यह भरोसा दें कि अफगान धरती का इस्तेमाल तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) की ओर से नहीं होगा। लेकिन तालिबान सरकार ने इस शर्त को अपनी संप्रभुता पर चोट बताया और साफ इंकार कर दिया। अफगानिस्तान ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान 15 लाख से ज़्यादा अवैध अफगान शरणार्थियों की जबरन वापसी कराकर मानवीय संकट खड़ा कर रहा है। तालिबान ने कहा कि इस्लामाबाद ‘शरणार्थियों के मुद्दे को राजनीतिक ब्लैकमेल’ के औजार की तरह इस्तेमाल कर रहा है।
इसी दौरान रविवार को खैबर पख्तूनख्वा सीमा पर फिर झड़पें हुईं, जिसमें 5 पाकिस्तानी सैनिक और 25 उग्रवादी मारे गए। पाकिस्तान ने खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में पड़ोसी देश अफगानिस्तान से घुसपैठ की दो बड़ी कोशिशों को नाकाम कर चार आत्मघाती हमलावरों सहित 25 आतंकवादियों को मार गिराया। सेना की मीडिया शाखा ने बताया कि पांच सैनिक भी मारे गए।
वहीं तालिबान और पाकिस्तान के बीच सहमति नहीं बनने से चीन चिंतित है, क्योंकि असफल बातचीत सीपीईसी–अफगानिस्तान एक्सटेंशन कॉरिडोर के लिए झटका। पाकिस्तान का कहना है कि तालिबान सरकार उग्रवादियों पर काबू नहीं कर पा रही, जबकि काबुल का जवाब है कि पाकिस्तान को अपनी सुरक्षा खुद संभालनी चाहिए। खुफिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि अक्टूबर के मध्य से टीटीपी गुटों की सीमा पार आवाजाही फिर शुरू हो गई है। यह आवाजाही खोस्त और पक्तिका रूट से हो रही है। यही नहीं, वार्ता के बाद संयुक्त बयान तक जारी न हो पाने से तुर्की की मध्यस्थ छवि पर भी असर पड़ा है। वहीं दूसरी तरफ तुर्की के राजनयिकों ने स्वीकार किया कि ‘दोनों पक्षों ने इस्तांबुल को सिर्फ प्रतीकात्मक मंच’ की तरह इस्तेमाल किया, ताकि मुस्लिम भाईचारे का दिखावा किया जा सके।
पाक सेना की कार्रवाई के खिलाफ विदेश में प्रदर्शन, दक्षिण कोरिया में बलूचिस्तान का दर्द गूंजा
28 Oct, 2025 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सियोल। पाकिस्तान की सेना के खिलाफ अब विरोध की आवाजें देश ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी सुनाई देने लगी हैं। दरअसल दक्षिण कोरिया के शहर बुसान में सोमवार को सैकड़ों लोगों ने बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। यह विरोध ठीक एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (एपेक) शिखर सम्मेलन से पहले हुआ, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप सहित कई वैश्विक नेता शामिल थे। ऐसे समय में यह प्रदर्शन पाकिस्तान के लिए बड़ी शर्मिंदगी बन गया है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक बलूच नेशनल मूवमेंट (बीएनएम) के कार्यकर्ताओं ने बुसान की सड़कों पर बलूचिस्तान के लिए न्याय, जेहरी की घेराबंदी खत्म करो और बलूच नरसंहार बंद करो जैसे नारे लगाए। उन्होंने स्थानीय लोगों के बीच अंग्रेजी और कोरियाई भाषा में पर्चे बांटकर बताया कि बलूचिस्तान के जेहरी क्षेत्र में पाकिस्तानी सेना ने किस तरह की तबाही मचाई है। इन पर्चों में आरोप लगाया गया कि सेना लोगों को घरों से उठाती है, फिर उन्हें लापता कर देती है या मार देती है। प्रदर्शनकारियों ने कहा, जेहरी खून से लथपथ है और अब दुनिया को चुप नहीं रहना चाहिए।
विरोध के दौरान बीएनएम कार्यकर्ताओं ने टूटे घरों और पीड़ित परिवारों की तस्वीरें भी प्रदर्शित कीं। संगठन के अनुसार, हालिया हवाई हमलों में 10 बच्चों समेत 20 से अधिक नागरिक मारे गए हैं, जबकि 50 से ज्यादा युवकों को जबरन गायब कर दिया गया है। आरोप यह भी लगाया गया कि पाकिस्तानी सेना ने अस्पतालों को सैन्य ठिकानों में बदल दिया है और इलाके में 24 घंटे का कर्फ्यू लगा रखा है।
पाकिस्तानी सेना के खिलाफ यह विरोध केवल दक्षिण कोरिया तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पिछले सप्ताह नीदरलैंड के उट्रेच में भी इसी तरह का प्रदर्शन हुआ था। इस प्रदर्शन के दौरान मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई को “युद्ध अपराध” करार दिया। वहीं, अमेरिका में व्हाइट हाउस के बाहर भी बीएनएम ने प्रदर्शन कर पाकिस्तान को आतंकवादी राज्य बताया। संगठन ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान बलूचिस्तान और अन्य इलाकों के प्राकृतिक संसाधनों का शोषण कर रहा है। इसी के साथ ही बीएनएम ने एमनेस्टी इंटरनेशनल और संयुक्त राष्ट्र से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। एपेक सम्मेलन के दौरान हुए इस विरोध ने पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय साख पर एक और गहरा धब्बा लगा दिया है, क्योंकि अब वैश्विक समुदाय उसके मानवाधिकार रिकॉर्ड पर गंभीर सवाल उठा रहा है।
ट्रंप का दावा.......आठ महीनों में आठ युद्ध खत्म किए, जल्द पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच जंग रुकवा दूंगा
27 Oct, 2025 04:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कुआलालंपुर । अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को लगता है कि वे दुनिया का हर युद्ध खत्म करा सकते है। उन्होंने कहा है कि वे पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच जारी सीमा विवाद को ‘बहुत जल्दी सुलझा देने वाले है। यानी ट्रंप कह रहे हैं कि जिस दुश्मन से अमेरिका दो दशक तक लड़का रहा अब उस तालिबान का युद्ध वह खत्म कराएंगे। ट्रंप ने इस मौके पर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर की सराहना कर कहा कि ‘दोनों बेहतरीन लोग हैं’ और उन्हें भरोसा है कि इस विवाद का समाधान ‘जल्द निकल आएगा।
थाई प्रधानमंत्री अनुतिन चार्नवीराकुल और कंबोडियाई प्रधानमंत्री हुन मानेत ने मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की मौजूदगी में शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता दोनों देशों के बीच जुलाई में हुए संघर्षविराम को औपचारिक रूप से मान्यता देता है और सीमा पर शांति की बहाली की दिशा में ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। ट्रंप ने कहा, ‘यह दक्षिण-पूर्व एशिया के लोगों के लिए ऐतिहासिक दिन है। इस समझौते से दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव खत्म होगा और स्थायी शांति की नींव पड़ेगी।’
इस मौके पर ट्रंप ने कहा कि उनके प्रशासन ने ‘सिर्फ आठ महीनों में आठ युद्ध खत्म किए हैं’ और अब केवल एक संघर्ष बाकी है जो पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच जारी है। उन्होंने कहा, ‘मुझे दोनों देश अच्छी तरह जानते हैं, और मुझे पूरा भरोसा है कि यह मसला भी जल्द सुलझेगा। समझौते के साथ अमेरिका ने कंबोडिया के साथ एक प्रमुख व्यापारिक समझौता और थाईलैंड के साथ क्रिटिकल मिनरल्स (ख़निज संसाधन) पर करार किया।
कंबोडिया के पीएम ने की सराहना
कंबोडिया के प्रधानमंत्री मानेत ने भी ट्रंप, चीन सरकार और मलेशिया की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि ये समझौता भरोसे को पुनर्निर्माण करने और आगे बढ़ने का वक्त है। दरअसल, जुलाई में थाईलैंड और कंबोडिया के बीच सीमा पर भड़के संघर्ष ने दर्जनों लोगों की जान चली गई थी और लाखों लोग बेघर हो गए थे। ये विवाद फ्रांसीसी उपनिवेशवाद काल से चली आ रही सीमा विवाद पर आधारित था, जिसमें प्रीहविहार मंदिर क्षेत्र शामिल है। संघर्ष के तीसरे दिन ट्रंप ने दोनों देशों के तत्कालीन नेताओं से फोन पर बातचीत की और संघर्ष खत्म करने की अपील की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि युद्ध नहीं रुका, तब वाशिंगटन के साथ उनके ट्रेड वार्ताओं को रोक दिया जाएगा।
रोजगार के लिए खतरा नहीं है एआई, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस में बढ़ रहीं हैं नौकरियां
27 Oct, 2025 03:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन । लोग मानकर चल रहे हैं कि आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) की वजह से नौकरियों पर खतरा मंडराने लगेगा। लाखों लोग बेरोजगार हो जाएंगे, लेकिन सच्चाई इससे हटकर है। हालिया आंकड़े बताते हैं कि एआई अब नौकरियों के लिए खतरा नहीं रह गया है, बल्कि यह जरूरत बन गया है। वैश्विक ऑनलाइन भर्ती मंच ‘इनडीड’ ने अपनी हालिया रिपोर्ट में बताया कि देश में कृत्रिम मेधा (एआई) कौशल से जुड़ी नौकरियों की लगातार मांग बढ़ रही है। सितंबर महीने में एआई-संबंधित नौकरियों में 11.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि एक साल पहले की समान अवधि में यह 8.2 प्रतिशत थी।
रिपोर्ट में बताया गया है कि एआई से जुड़ी नौकरियां मुख्य रूप से प्रौद्योगिकी क्षेत्र में केंद्रित हैं लेकिन अब इनका विस्तार धीरे-धीरे अन्य क्षेत्रों में भी हो रहा है। डेटा और एनालिटिक्स क्षेत्र में लगभग 39 प्रतिशत, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट में 23 प्रतिशत, बीमा क्षेत्र में 18 प्रतिशत और वैज्ञानिक अनुसंधान में 17 प्रतिशत नौकरियों के आवेदनों में एआई का उल्लेख है। एआई कौशल की मांग इंजीनियरिंग के सभी क्षेत्रों में देखी जा रही है। इनमें औद्योगिक इंजीनियरिंग (17 प्रतिशत), मैकेनिकल इंजीनियरिंग (11 प्रतिशत) और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग (9.2 प्रतिशत) का स्थान प्रमुख है।
रिपोर्ट के मुताबिक, तीन महीने पहले एआई कौशल वाली नौकरियों में 10.6 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई थी। इनडीड के एशिया-प्रशांत क्षेत्र के वरिष्ठ अर्थशास्त्री कैलम पिकरिंग ने कहा कि भारत अन्य बाजारों की तुलना में ऐसी नौकरियों के मामले में कहीं आगे है। भारत को छोड़कर केवल सिंगापुर में ही एआई से जुड़ी नौकरियों की मांग का प्रतिशत इतना अधिक है। यह साफ दिखाता है कि भारत में कई नियोक्ता एआई पर पूरी तरह ध्यान दे रहे हैं। यह रिपोर्ट इनडीड के मंच पर पोस्ट की गई भर्तियों के ब्योरे पर आधारित है। रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर में भर्ती के कुल विज्ञापनों में 0.8 प्रतिशत गिरावट आई, जो भर्तियां कम होने का लगातार छठा महीना है। हालांकि, रिपोर्ट कहती है कि देश में संगठित क्षेत्र मजबूत बना हुआ है और पर्याप्त नौकरियां भी उपलब्ध हैं। इनडीड ने कहा कि एआई के बढ़ते प्रभाव के कारण नियोक्ताओं को विशेषज्ञ और उच्च-कुशल कर्मचारियों की तलाश है, जो डेटा एनालिटिक्स और स्वचालन जैसे एआई कौशल में दक्ष हों। मौजूदा समय में ऐसे कुशल कर्मचारियों की संख्या कम है। कंपनियों का मानना है कि एआई के इस्तेमाल से उनकी उत्पादन क्षमता को बढ़ाया जा सकता है। इसका उपयोग गणना से लेकर शोध और विश्लेषण में भी बखूबी किया जाता है, जिसकी मदद से भविष्य का आकलन करना और गुणवत्ता को बढ़ाना आसान होगा। यही वजह है कि कंपनियों का खास जोर उन लोगों पर होता है, जो एआई के इस्तेमाल को लेकर सजग रहते हैं और इसमें दक्ष होते हैं।
आत्मविश्वास और मनःस्थिति के बारे में बताती है आपके बैठने की आदत
27 Oct, 2025 02:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लंदन। पैर क्रॉस कर बैठने की मुद्रा व्यक्ति के आत्मविश्वास, व्यक्तित्व और मानसिक स्थिति के बारे में बहुत कुछ बताती है। जिस तरह कोई अपने पैरों को क्रॉस करता है, उससे उसके भीतर के भाव और सोच झलकते हैं। बॉडी लैंग्वेज के विशेषज्ञों के अनुसार, पुरुषों में अक्सर देखा जाता है कि वे एक टखने को दूसरे घुटने के ऊपर रखते हैं, जिसे “फिगर 4 पोज” कहा जाता है। यह आत्मविश्वास, खुलेपन और सहजता का संकेत है। वहीं, महिलाएं घुटनों पर पैर क्रॉस करके और एक पैर को आगे की ओर हल्का फैलाकर बैठना पसंद करती हैं। यह मुद्रा न केवल शालीनता और सौंदर्य को दर्शाती है बल्कि आत्म-नियंत्रण और आत्म-सम्मान का भी प्रतीक है।
कई लोगों के लिए यह मुद्रा आरामदायक भी होती है। लंबे समय तक बैठने वालों को यह कूल्हों और पीठ पर पड़ने वाले दबाव को कम करने में मदद करती है। ब्रिटिश शाही परिवार की सदस्य केट मिडलटन और मेघन मार्कल को अक्सर इसी तरह बैठते देखा गया है, जिससे यह मुद्रा गरिमा और संतुलन का प्रतीक मानी जाती है। हालांकि, पैर क्रॉस करके बैठना हमेशा सहजता का संकेत नहीं होता। यदि कोई व्यक्ति पैर और हाथ दोनों को कसकर पकड़कर बैठा हो, तो यह उसकी भावनात्मक असुरक्षा या तनाव को दर्शा सकता है।
वहीं, किसी व्यक्ति का पैर आपकी दिशा में मुड़ा होना इस बात का संकेत है कि वह आप या आपकी बातों में रुचि रखता है। फोटोशूट्स या फैशन शोज़ में मॉडल्स भी इस पोज़ का इस्तेमाल करती हैं क्योंकि इससे उनके पैर लंबे और आकर्षक दिखते हैं। खड़े होकर पैर क्रॉस करना थकान मिटाने या शरीर के संतुलन को बदलने का तरीका भी हो सकता है। हालांकि इस मुद्रा के कुछ शारीरिक नुकसान भी हैं। लंबे समय तक पैर क्रॉस करके बैठने से ब्लड सर्कुलेशन बाधित हो सकता है, जिससे पैरों में सुन्नपन, ऐंठन या वेरिकोज वेन्स की समस्या हो सकती है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बैठने के बीच-बीच में उठकर टहलें और पैरों को सीधा रखें, ताकि रक्त प्रवाह सामान्य बना रहे।
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