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अमेरिका में ग्रीनलैंड पर कब्जे का बिल पेश
14 Jan, 2026 10:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
51वां राज्य बनाने का अधिकार मिलेगा, 300 सालों से यह डेनमाक्र का हिस्सा
वॉशिंगटन। अमेरिकी सांसद कांग्रेसमैन रैंडी फाइन ने ग्रीनलैंड एनेक्सेशन एंड स्टेटहुड एक्ट नामक एक बिल पेश किया है। इस बिल का मकसद अमेरिकी सरकार को ग्रीनलैंड को अपने कब्जे में लेने और बाद में इसे अमेरिका का राज्य बनाने के लिए कानूनी अधिकार देना है। सांसद रैंडी फाइन ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके इस बिल की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह कदम रूस-चीन के प्रभाव को रोकने के लिए बहुत जरूरी है। इसके बाद संसद को राज्य बनने के लिए जरूरी सुधारों की पूरी रिपोर्ट सौंपी जाएगी।
अगर बिल पास हुआ तो अमेरिका को ग्रीनलैंड को अपना 51वां राज्य बनाने का अधिकार मिल जाएगा। हालांकि, यह बिल अभी सिर्फ पेश हुआ है इसे हाउस और सीनेट दोनों में पास होना है। कई विशेषज्ञों का कहना है कि यह बहुत मुश्किल से पास होगा, क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है। ग्रीनलैंड पर पिछले 300 सालों से ज्यादा समय से डेनमार्क का कंट्रोल है।
ग्रीनलैंड अमेरिकी रक्षा के लिए जरूरी
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया। उन्होंने जोर देते हुए कहा है कि ग्रीनलैंड अमेरिकी रक्षा के लिए जरूरी है। उन्होंने हाल ही में कहा था कि अमेरिका को ग्रीनलैंड की जरूरत है और वे इस दिशा में कदम उठा रहे हैं, चाहे दूसरे देश इसे पसंद करें या नहीं। ट्रम्प प्रशासन ने ग्रीनलैंड के लोगों को अमेरिका में शामिल होने के लिए पैसे देने जैसे तरीकों पर भी चर्चा की है। डेनमार्क और ग्रीनलैंड के अधिकारियों ने ट्रम्प के इस तरीके की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने इसे असम्मानजनक बताया।
विरोध की आग में धधक रहा ईरान...
14 Jan, 2026 10:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
खामेनेई की वॉर्निंग के बाद मरने वालों की संख्या बढ़ी, अब तक 2000 से अधिक लोगों की मौत, कतर से हमला करेगा अमेरिका, ईरान की दो टूक...
लड़ोगे तो लडेंग़े, मारोगे तो मरोगे...
नई दिल्ली। ईरान में बगावत की आग धधक रही है जहां जनता खामेनेई शासन के खिलाफ पीछे हटने को तैयार नहीं है। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प में अब तक 2000 लोगों की मौत हो चुकी है। ईरान में हो रहे आंदोलन को अमेरिका खुला समर्थन दे रहा है और राष्ट्रपति ट्रंप बार-बार कह रहे हैं कि वो ईरान में हस्तक्षेप कर सकते हैं। अमेरिका की इन धमकियों के बीच अब ईरान ने कहा है कि अगर उस पर हमला होता है तो वो चुप नहीं बैठेगा, वो भी युद्ध के लिए तैयार है। लड़ोगे तो लडेंग़े, मारोगे तो मरोगे। ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर कालिबाफ ने अमेरिका को एक बार फिर चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका अशांति से जूझ रहे ईरान में हस्तक्षेप करता है, तो क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों, जहाजों और अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाया जाएगा। उधर, अमेरिका ने इस बीच मध्य-पूर्व में अपने सबसे बड़े मिलिट्री बेस कतर के अल उदैद एयर बेस पर अपने युद्धक विमानों की गतिविधियां बढ़ा दी है। जहां से वह ईरान पर हमला करने की तैयारी कर रहा है।
ईरान के सरकारी ब्रॉडकास्टर प्रेस टीवी के अनुसार, कालिबाफ ने चेतावनी देते हुए कहा कि आइए और देखिए कि क्षेत्र में अमेरिकी जहाजों और सैन्य ठिकानों का क्या हाल होता है। आइए और ईरानी राष्ट्र की आग में इस कदर जलिए कि यह इतिहास में सभी दमनकारी अमेरिकी शासकों के लिए एक स्थायी सबक बन जाए। अगर आप कुछ करते हैं तो समझ ही जाएंगे कि आपके साथ और इस क्षेत्र के साथ क्या होगा। अमेरिकी राष्ट्रपति ईरान में प्रदर्शनों को देखते हुए वहां सैन्य कार्रवाई के विकल्प पर विचार कर रहे हैं। ट्रंप ने रविवार को एयर फोर्स वन में पत्रकारों से कहा था कि सेना इस पर नजर बनाए हुए है और हम कुछ बेहद कड़े विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। हम फैसला करेंगे।
कतर के एयर बेस पर अमेरिका ने बढ़ाई गतिविधि
अमेरिका ने इस बीच मध्य-पूर्व में अपने सबसे बड़े मिलिट्री बेस कतर के अल उदैद एयर बेस पर अपने युद्धक विमानों की गतिविधियां बढ़ा दी है। ईरान की सीमा से करीब 200 से 300 किलोमीटर दूर स्थित कतर के अल उदैद एयर बेस पर अमेरिकी फाइटर जेट्स की गतिविधियों में इजाफा हुआ है। इसी बीच अमेरिकी सरकार ने एक आपात अलर्ट जारी कर अपने नागरिकों से ईरान छोडऩे का आग्रह किया है। इजरायली मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक, रविवार रात अल उदैद एयर बेस से कई अमेरिकी युद्धक विमानों ने उड़ान भरी, जिनमें केसी-135 एरियल रिफ्यूलिंग टैंकर और बी-52 रणनीतिक बॉम्बर शामिल थे। दोहा से लगभग 35 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में स्थित यह एयर बेस 10 हजार से अधिक अमेरिकी सैनिकों का ठिकाना है। यह क्षेत्र में अमेरिका के सबसे बड़े सैन्य अड्डों में से एक है। यहां 4,500 मीटर लंबा रनवे है, जिस पर बी-52 जैसे बड़े स्ट्रैटजिक बॉम्बर और सैन्य परिवहन विमान आसानी से उतर सकते हैं और उड़ान भर सकते हैं।
प्रदर्शनों में मौतों का आंकड़ा बढ़ा
ईरान में देशभर में जारी प्रदर्शनों में मरने वालों की संख्या बढक़र कम से कम 2000 हो गई है। हालांकि, आशंका जताई जा रही है कि मरने वालों की संख्या इसके कई गुना अधिक हो सकती है। यह आंकड़ा अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी की ओर से जारी किया गया है। यह समूह पिछले कई सालों के प्रदर्शनों के दौरान लगातार सटीक जानकारी देता रहा है। एजेंसी ईरान के भीतर सक्रिय एक्टिविस्ट्स के एक नेटवर्क पर निर्भर करती है, जो सभी रिपोर्ट की गई मौतों की पुष्टि करता है। प्रदर्शनों को देखते हुए ईरान ने देशभर में इंटरनेट बैन कर दिया है और स्टारलिंक सैटेलाइट इंटरनेट को भी लगभग जैम कर दिया गया है। मीडिया पर पाबंदी की वजह से ईरान के प्रदर्शनों के पैमाने को समझना मुश्किल बना हुआ है। ईरानी सरकारी मीडिया ने इन प्रदर्शनों के बारे में बहुत कम जानकारी दी है। सोशल मीडिया पर शेयर कुछ वीडियो में प्रदर्शन कर रहे लोग और गोलियों की आवाज सुनी जा सकती है। इन पाबंदियों के बावजूद, प्रदर्शन रुकते हुए नहीं दिख रहे हैं। प्रदर्शनकारियों पर सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की उस धमकी का भी असर नहीं हो रहा जिसमें उन्होंने कहा था दंगाइयों को उनकी सही जगह दिखा देंगे।
अगर वो आजमाना चाहते हैं तो हम तैयार...
ईरान में जनविद्रोह की आवाज लगातार बुलंद हो रही है। लेकिन इस आवाज को कुचलने के लिए ईरानी सत्ता प्रतिष्ठान हर मुमकिन कोशिश कर रहा है। ईरान से आ रही खबरों के मुताबिक ईरानी अधिकारियों ने पूरे देश में इंटरनेट तो बंद ही कर दिया था। अब ईरानी पुलिस घर-घर जाकर लोगों के छतों से सैटेलाइट डिश ज़ब्त कर रही है। यही नहीं प्रदर्शनकारियों की पहचान का पता लगाने के लिए पुलिस प्राइवेट सिक्योरिटी कैमरों से फुटेज लेकर जानकारी इक_ा कर रही है। इस बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि तेहरान अमेरिका के किसी भी कदम के लिए तैयार है, जिसमें मिलिट्री कदम भी शामिल हैं। विदेश मंत्री अराघची ने अमेरिकी सरकार को खुली चुनौती दी है और कहा है कि ईरान किसी भी जंग के लिए तैयार है। अराघची ने कहा कि हम किसी भी कदम के लिए तैयार हैं। अगर वे फिर से मिलिट्री ऑप्शन आजमाना चाहते हैं, जिसे वे पहले ही आजमा चुके हैं, तो हम तैयार हैं।अराघची ने कहा कि पिछले साल की 12 दिनों की लड़ाई के बाद ईरान ने अपनी क्षमता में इजाफा किया है।
1 लाख से ज्यादा वीजा रद्द किए
14 Jan, 2026 09:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिका ने 2025 में अब तक 1 लाख से ज्यादा वीजा रद्द कर दिए हैं। इनमें करीब 8 हजार छात्र और 2,500 स्पेशल वर्क वीजा शामिल हैं। यह कार्रवाई आपराधिक गतिविधियों से जुड़े मामलों को लेकर इमिग्रेशन पर सख्ती के तहत की गई है। जानकारी अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने दी। विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि अमेरिका को सुरक्षित रखने के लिए ऐसे लोगों को देश से बाहर किया जाएगा। मंत्रालय के मुताबिक जिन विदेशी नागरिकों के खिलाफ अपराध से जुड़े मामले सामने आए, उनके वीजा रद्द किए गए हैं। 2025 में रद्द किए गए वीजा की संख्या 2024 के मुकाबले दोगुनी से ज्यादा है। 2024 में करीब 40 हजार वीजा रद्द किए गए थे। रिपोर्ट के मुताबिक 2025 में ज्यादातर बिजनेस और टूरिस्ट वीजा थे, जिनमें ओवरस्टे के मामले सामने आए। वहीं 8 हजार छात्रों और 2,500 स्पेशल वीजा धारकों के वीजा कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों के चलते रद्द किए गए।
गोल्ड चोरी का 8वां आरोपी गिरफ्तार
14 Jan, 2026 08:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
टोरंटो। कनाडा के इतिहास की सबसे बड़ी गोल्ड चोरी के मामले में पुलिस ने 8वें आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने सोमवार को टोरंटो पियर्सन इंटरनेशनल एयरपोर्ट से अर्सलान चौधरी को पकड़ा। वह दुबई से उड़ान भरकर टोरंटो पहुंचा था। पुलिस ने बताया कि 2023 में टोरंटो एयरपोर्ट से 180 करोड़ रुपए से ज्यादा कीमत का सोना चोरी हुआ था। इस मामले में एक अन्य आरोपी के भारत में होने का भी दावा किया गया है। पुलिस के मुताबिक, अरसलान चौधरी पर 5 हजार डॉलर से अधिक की चोरी, अपराध से हासिल संपत्ति रखने और आपराधिक साजिश के आरोप लगाए गए हैं। जांच एजेंसियों का कहना है कि यह गिरफ्तारी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रोजेक्ट 24के नाम से चल रही जांच का अहम हिस्सा है।
छात्रों और वर्क वीजा धारकों को बड़ा झटका
13 Jan, 2026 01:12 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अमेरिका |अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के दोबारा सत्ता संभालने के बाद से अब तक एक लाख से भी ज्यादा वीजा रद्द किए जा चुके हैं। अमेरिकी विदेश विभाग ने सोमवार को इस बारे में जानकारी दी। विदेश विभाग ने बताया कि यह एक साल के भीतर वीजा रद्द किए जाने का अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है।खास बात है कि इनमें 8 हजार छात्र भी शामिल हैं। सोमवार को विदेश विभाग ने सोशल मीडिया पोस्ट किया, 'हम अमेरिका को सुरक्षित रखने के लिए इन बदमाशों को डिपोर्ट करना जारी रखेंगे।' आगे कहा गया, 'विदेश विभाग ने 8 हजार स्टूडेंट वीजा और 2500 स्पेशलाइज्ड वीजा समेत 1 लाख से ज्यादा वीजा वापस ले लिए हैं।'
क्यों किए रद्द
इनमें से हजारों वीजा अपराधों के कारण रद्द किए गए हैं, जिनमें मारपीट और शराब पीकर गाड़ी चलाने जैसे मामले शामिल हैं। विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने कहा कि ट्रंप प्रशासन की सबसे बड़ी प्राथमिकता अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा और देश की संप्रभुता को बनाए रखना है। आंकड़ों के लिहाज से देखें तो 20 जनवरी, 2025 को ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के बाद से रद्द किए गए वीजा की संख्या जो बाइडन के शासन वाले साल 2024 की तुलना में ढाई गुना ज्यादा है।अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने विशेष रूप से उन छात्रों के वीजा रद्द करने पर जोर दिया है जिन्होंने इजरायल के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लिया था। इसके लिए उन्होंने एक पुराने कानून का सहारा लिया है। इसके तहत अमेरिकी विदेश नीति के खिलाफ जाने वाले विदेशियों के अमेरिका में प्रवेश पर रोक लगाने की अनुमति है।
H-1B वीजा पर पहले ही सख्ती
खास बात है कि 15 दिसंबर से अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने H-1B वीजा की गहन स्क्रीनिंग तेज कर दी है। इनमें H-4 वीजा भी शामिल है। खास बात है कि आवेदकों की सोशल मीडिया पोस्ट्स तक की जांच की जा रही है। ऐसे में H-1B वीजा के कई इंटरव्यू टल गए हैं। अमेरिका का विदेश मंत्रालय पहले ही कहता रहा है कि अमेरिकी वीजा सुविधा है, अधिकार नहीं है।
कहा: अगर टैरिफ मामले में सरकार का पक्ष न चले, तो अमेरिका बर्बाद
13 Jan, 2026 01:03 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अमेरिका |अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले दावा किया है कि अगर सुप्रीम कोर्ट टैरिफ को गैर कानूनी ठहराता है कि तो अमेरिका बर्बाद हो जाएगा। उन्होंने कहा है कि इससे देश को खरबों डॉलर के नुकसान हो जाएगा। बता दें कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट इस हफ्ते इस मामले में अपना फैसला सुना सकता है। कोर्ट में ट्रंप की व्यापक टैरिफ नीति को चुनौती दी गई है और इसे एक असंवैधानिक कदम बताया गया है।इससे पहले ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा कि अगर शीर्ष अदालत उनकी नीति के खिलाफ फैसला सुनाती है, तो अमेरिकी कंपनियों को सैकड़ों अरब डॉलर वापस करने होंगे। उन्होंने कहा, "उन्होंने कहा, "जब इन निवेशों को जोड़ा जाएगा, तो हम खरबों डॉलर की बात कर रहे हैं!" उन्होंने कहा, “यह बहुत बड़ी गड़बड़ हो जाएगी, और हमारे देश के लिए भुगतान करना लगभग असंभव होगा।”ट्रंप को याद आई पुरानी दोस्ती, अगले साल आ सकते हैं भारत पर 500% टैरिफ लगाएगा US? बिल को मंजूरी मिलने पर सरकार का मुंहतोड़ जवाब ट्रंप ने आगे कहा, "दूसरे शब्दों में अगर सुप्रीम कोर्ट इस राष्ट्रीय सुरक्षा मामले में अमेरिका के खिलाफ फैसला सुनाता है, तो हम बर्बाद हो जाएंगे!" ट्रंप ने इससे पहले भी कई बार इससे तरह की चेतावनी दी है। बीते दिसंबर महीने में ट्रंप ने चेतावनी दी थी की टैरिफ लगाने की उनके अधिकार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का कोई भी संभावित फैसला राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन जाएगा।
कहा: महिलाएं अपने भविष्य और अधिकार तय करें
13 Jan, 2026 12:55 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ईरान |नोबेल पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफजई ने ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि ये विरोध अचानक नहीं हुए। ईरान में सरकार ने बहुत पहले से ही लड़कियों और महिलाओं की आजादी पर सख्त पाबंदियां लगा रखी हैं। खासकर शिक्षा में उन्हें बहुत कम अधिकार मिलते हैं। उन्होंने कहा, ‘दुनिया की बाकी लड़कियों की तरह ईरानी लड़कियां भी सम्मान और गरिमा के साथ जीना चाहती हैं। वे सिर्फ पढ़ाई नहीं, बल्कि पूरी जिंदगी में अपनी मर्जी से फैसले लेना चाहती हैं।’मलाला यूसुफजई ने कहा, ‘ईरान के लोग कई सालों से इस अन्याय के खिलाफ बोलते आ रहे हैं। लेकिन अपनी जान जोखिम में डालकर भी उनकी आवाज दबा दी जाती रही है। ये नियम सिर्फ स्कूल तक सीमित नहीं हैं। पूरे समाज में महिलाओं पर अलग तरह के नियंत्रण हैं - जैसे अलग-अलग बैठना, हर समय निगरानी रखना और गलती करने पर सजा मिलना।’ उन्होंने कहा कि इन सबकी वजह से महिलाओं को अपनी पसंद की जिंदगी जीने, फैसले लेने और सुरक्षित महसूस करने का हक नहीं मिल पाता। ईरानी महिलाएं और लड़कियां अब अपनी आवाज सुनाई देने और अपना भविष्य खुद तय करने की मांग कर रही हैं।
ईरानी महिलाओं के समर्थन में क्या कहा
मलाला यूसुफजई ने साफ कहा कि वे ईरान की जनता और खासकर लड़कियों के साथ खड़ी हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान का भविष्य ईरान के लोग ही खुद बनाएं और इसमें महिलाओं व लड़कियों की अहम भूमिका हो। कोई बाहर का देश या दमनकारी सरकार इसमें दखल न दे। मालूम हो कि अभी ईरान में महंगाई, बेरोजगारी और महिलाओं के अधिकारों पर रोक के खिलाफ बड़े प्रदर्शन हो रहे हैं। मलाला की यह बात दुनिया भर में ईरानी महिलाओं के संघर्ष को मजबूत समर्थन दे रही है।
अमेरिका का नया कदम बढ़ा सकता है वैश्विक व्यापार पर दबाव
13 Jan, 2026 12:34 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अमेरिका |अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस वाला फॉर्मूला ही ईरान पर लागू करने का फैसला किया है। उन्होंने ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर टैरिफ लगाने की घोषणा की है। साथ ही इन टैरिफ को तत्काल प्रभाव से लागू भी कर दिया है। खास बात है कि भारत भी चीनी, चाय, दवा, सूखे मेवे जैसी कई चीजों का व्यापार ईरान के साथ करता है। फिलहाल, अमेरिका ने भारत को लेकर खासतौर पर कुछ नहीं कहा है।ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, 'तत्काल प्रभाव से लागू। कोई भी देश जो इस्लामिक गणराज्य ईरान के साथ व्यापार करता है, उसे अमेरिका के साथ कर रहे किसी भी या सभी बिजनेस पर 25 प्रतिशत टैरिफ देना होगा। यह आदेश अंतिम और निर्णायक है।' खबर है कि चीन, ब्राजील, तुर्किए और रूस समेत कई देश ईरान के साथ व्यापार करते हैं।
भारत और ईरान में व्यापार
तेहरान में भारतीय दूतावास के अनुसार, भारत और ईरान बड़े कारोबारी साझेदार हैं हाल के वर्षों में ईरान के 5 बड़े ट्रेड पार्टनर्स में शामिल हो गया है। भारत की तरफ से ईरान में चावल, चाय, शक्कर, दवाएं, स्टेपल फाइबर्स, इलेक्ट्रिकल मशीनरी, आर्टिफिशियल ज्वेलरी आदि निर्यात की जाती हैं। वहीं, भारत ईरान से सूखे मेवे, इनऑर्गेनिक/ऑर्गेनिक केमिकल, कांच का सामान आदि चीजें आयात करता है।
ईरान और अमेरिका के बीच क्या हो रहा
ट्रंप ने कहा कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसक कार्रवाई को लेकर ईरान पर हमले की उनकी चेतावनी के बाद तेहरान वाशिंगटन के साथ बातचीत करना चाहता है। ट्रंप की यह टिप्पणी ऐसे समय में सामने आई है, जब अधिकार कार्यकर्ताओं ने सोमवार को कहा कि ईरान में प्रदर्शनों में मरने वालों की संख्या बढ़कर कम से कम 599 हो गई है।हालांकि, ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति की टिप्पणी पर फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं व्यक्त की है। उनकी यह टिप्पणी ओमान के विदेश मंत्री की सप्ताहांत में हुई ईरान यात्रा के बाद आई है, जो लंबे समय से वॉशिंगटन और तेहरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका में रहे हैं। यह भी स्पष्ट नहीं है कि ईरान क्या पेशकश कर सकता है, खासकर तब जब ट्रंप ने उसके परमाणु कार्यक्रम और बैलिस्टिक मिसाइल बेड़े को लेकर कड़ी शर्तें रखी हैं, जिसे तेहरान अपनी राष्ट्रीय रक्षा के लिए महत्वपूर्ण मानता है।
क्या ऑप्शन
इससे पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय वाइट हाउस की आंतरिक चर्चाओं से परिचित दो लोगों ने बताया था कि राष्ट्रपति ट्रंप और उनकी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम ईरान के खिलाफ संभावित कदम पर विचार कर रही है। जिनमें साइबर हमले और अमेरिका या इजरायल द्वारा सीधे सैन्य हमले शामिल हैं। इन लोगों ने सार्वजनिक रूप से टिप्पणी करने की अनुमति न होने के कारण नाम गोपनीय रखने की शर्त पर यह जानकारी दी।
ईरान में कुछ बड़ा होने की आशंका, तैनात किए खूंखार गार्ड, सैन्य ठिकानों को किया अलर्ट
12 Jan, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान। ईरान के सभी 31 प्रांतों और लगभग 180 शहरों में अयातुल्ला खामेनेई के शासन के खिलाफ भड़का जनाक्रोश अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। राजधानी तेहरान समेत देश के कोने-कोने में प्रदर्शनकारी बेकाबू हो चुके हैं और स्थिति केवल सड़कों पर विरोध तक सीमित नहीं रही, बल्कि अब शासन के भीतर भी बगावत के सुर उठने लगे हैं। अंतरराष्ट्रीय दबाव और अमेरिका की ओर से मिल रही लगातार धमकियों के बीच, सुप्रीम लीडर खामेनेई ने अपनी सत्ता बचाने के लिए देश के गुप्त सैन्य संसाधनों को सक्रिय कर दिया है।
रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने अपनी रहस्यमयी मिसाइल सिटीज यानी जमीन के भीतर बने उन विशाल सैन्य ठिकानों को अलर्ट पर रखा है, जहां लंबी दूरी तक मार करने वाली घातक मिसाइलों का जखीरा मौजूद है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान इस समय पिछले वर्ष हुए युद्धों से भी अधिक उच्च स्तर की सैन्य तैयारी में है। देश के आंतरिक हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस और सेना के कुछ हिस्सों में हो रही बगावत को देखते हुए खामेनेई ने अपने सबसे वफादार दस्ते इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स को सड़कों पर उतार दिया है। कॉर्प्स को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे किसी भी कीमत पर विद्रोहियों की आवाज को दबाएं। शासन ने प्रदर्शनकारियों को डराने के लिए बेहद सख्त रुख अपनाते हुए ऐलान किया है कि विद्रोह करने वालों को ईश्वर का दुश्मन माना जाएगा। ईरानी कानून के अनुसार, इस श्रेणी में आने वाले दोषियों के लिए फांसी, हाथ-पैर काटने या देश निकाला देने जैसी बर्बर सजाओं का प्रावधान है। यह कदम सीधे तौर पर जनता के मन में खौफ पैदा करने के उद्देश्य से उठाया गया है। मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि शासन न केवल आम जनता, बल्कि उन सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ भी दमनकारी कार्रवाई कर रहा है जिन्होंने निहत्थे नागरिकों पर गोली चलाने से इनकार कर दिया। कई पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार कर अज्ञात स्थानों पर ले जाया गया है। पिछले दो हफ्तों की हिंसा में अब तक 62 से अधिक लोगों के मारे जाने की पुष्टि हुई है, जबकि हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या 2,277 को पार कर गई है। गिरफ्तार किए गए लोगों में बड़ी संख्या में छात्र और नाबालिग भी शामिल हैं। तेहरान की गलियों से लेकर अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक गलियारों तक, यह चर्चा तेज है कि क्या खामेनेई का यह मिसाइल दांव और कठोर दमन उनकी सत्ता को बचा पाएगा, या फिर यह विद्रोह ईरान में एक नए युग की शुरुआत करेगा।
BIG BREAKING: अमेरिकी राजनीति में भूचाल...ट्रंप के इस पोस्ट ने वेनेजुएला में खड़ा किया नया संकट, जानें क्या है मामला
12 Jan, 2026 11:50 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Venezuela President: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ में खुद को ‘वेनेजुएला के कार्यवाहक राष्ट्रपति’ घोषित किया है. पोस्ट के अनुसार, ट्रंप जनवरी 2026 से वेनेजुएला के मौजूदा राष्ट्रपति हैं. हालांकि, ट्रंप अपने बयानों और सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर हमेशा सुर्खियों पर रहते हैं. अब उनकी इस पोस्ट ने हलचल बढ़ा दी है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुद को वेनेजुएला के कार्यवाहक राष्ट्रपति घोषित करने के बाद एक बार फिर चर्चा में हैं. उनका सोशल मीडिया पोस्ट भी काफी वायरल हो रहा है. पिछले कई महीनों से वेनेजुएला को लेकर ट्रंप काफी सख्ती दिखा रहे हैं. हाल ही में अमेरिका ने वेनेजुएला के खिलाफ बड़े पैमाने पर कार्रवाई करते हुए वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सीलिया फ्लोरेस को गिरफ्तार कर न्यूयॉर्क ले जाया गया था.
नार्को-टेररिज्म की साजिश के लगाए थे आरोप
अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो पर नार्को-टेररिज्म की साजिश के आरोप लगाए थे. इसके बाद ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका “वेनेजुएला को तब तक चलाएगा जब तक हम एक सुरक्षित, सही और समझदारी वाला ट्रांजिशन नहीं कर लेते हैं.
डेल्सी रोड्रिग्ज ली हैं राष्ट्रपति पद की शपथ
डोनाल्ड ट्रंप ने कार्रवाई के बाद साफ कहा था कि हम यह जोखिम नहीं ले सकते कि कोई और वेनेजुएला पर कब्जा कर ले जिसके मन में वेनेजुएला के लोगों का हित न हो. हालांकि राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद वेनेजुएला की कमान, उसकी वाइस प्रेसिडेंट और तेल मंत्री, डेल्सी रोड्रिग्ज को सौंपी गई थी.
वेनेजुएल के तेल पर डोनाल्ड ट्रंप की नजर
डोनाल्ड ट्रंप का पूरा फोकस वेनेजुएला के तेल पर है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति मादुरो के करीबी लोग अमेरिकी शर्तों का पालन नहीं करते, तो आगे भी सैन्य कार्रवाई की जाएगी. यानी ट्रंप का साफ कहना है कि वेनेजुएला के तेल पर कंट्रोल हमारा होना चाहिए. ट्रंप ने यह भी दावा किया कि अमेरिका 50 मिलियन बैरल वेनेजुएला क्रूड ऑयल को रिफाइन और बेचने की योजना बना रहा है.
भारत-चीन की नौसेनाएं दक्षिण पूर्व एशिया पर अपना हक जताने आईं आमने-सामने?
12 Jan, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग। भारत-चीन में दक्षिण पूर्व एशिया पर कब्जे की नई जंग शुरू हो गई है। इसके तहत दोनों ही देश अपनी-अपनी नौसेनाओं को इस इलाके में तैनात कर रहे हैं। चीन और भारत का यह शक्ति प्रदर्शन क्षेत्रीय देशों के साथ संबंधों को मजबूत करने की कवायद का हिस्सा है। इस बीच भारतीय रक्षा मंत्रालय ने कहा कि फर्स्ट ट्रेनिंग स्क्वाड्रन के चार जहाजों को अधिकारियों के ट्रेनिंग कोर्स के हिस्से के रूप में मिशन पर भेजा जाएगा, इस दौरान वे सिंगापुर, इंडोनेशिया और थाईलैंड का दौरा करेंगे।
चीन ने भी विदेशों में अपनी सैन्य मौजूदगी बनाए रखने की कोशिशों के तहत 15 नवंबर से 22 दिसंबर तक गहरे समुद्र में व्यापक ट्रेनिंग के लिए अपने तीन युद्धपोतों को तैनात किया था। इस दौरान चीनी युद्धपोतों ने वियतनाम, मलेशिया और इंडोनेशिया का दौरा किया। चीनी युद्धपोतों ने इन देशों की नौसेनाओं के साथ एक्सपीरियंस भी शेयर किया और जमीनी ट्रेनिंग भी की। हालांकि, यह युद्धाभ्यास नहीं था।
रिपोर्ट के मुताबिक दक्षिण-पूर्व एशिया रणनीतिक रूप से पूर्व में चीन और पश्चिम में भारत के बीच स्थित है। इस क्षेत्र में चीन और भारत सैन्य तैनाती, हथियारों की बिक्री और नौसेना की उपस्थिति के जरिए क्षेत्रीय देशों के साथ रक्षा संबंधों को गहरा कर अपना प्रभाव बढ़ा रहे हैं। पेंटागन की एक रिपोर्ट के मुताबिक चीन फर्स्ट आइलैंड चेन जो चीन और अधिकांश दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों की सीमा से लगता है उसको अपना रणनीतिक केंद्र मानता है। हिंद महासागर में चीन की बढ़ती पहुंच का मुकाबला करने के लिए भारत भी एक्ट ईस्ट पॉलिसी के अनुरूप दक्षिण पूर्व एशिया में अपना भू-राजनीतिक प्रभाव बढ़ा रहा है। ऐसे में भारत दोबारा अपनी खोई हुई जमीन को पाने और शक्ति को संतुलित करने के लिए इस क्षेत्र में तेजी से काम कर रहा है।
भारतीय नौसेना का फर्स्ट ट्रेनिंग स्क्वाड्रन में आईएनएस तीर, शार्दुल, सुजाता और आईसीजीएस सारथी जहाज शामिल हैं। इस स्क्वाड्रन को अधिकारी प्रशिक्षुओं को व्यापक परिचालन और क्रॉस-कल्चरल अनुभव प्रदान करने के लिए तैनात किया जाएगा, जिसमें छह मित्र विदेशी देशों के प्रशिक्षु भी शामिल हैं। युद्धपोतों पर सवार कर्मियों में भारतीय सेना और वायु सेना के सदस्य भी शामिल होंगे, जिसका लक्ष्य तीनों सेनाओं के बीच सामंजस्य को मजबूत करना है।
मादुरो और फ्लोरेस की वेनेजुएला वापसी तक एक मिनट भी आराम नहीं करुंगी
12 Jan, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
काराकास। वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज ने अमेरिकी सेना की हिरासत में लिए गए निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस की देश वापसी का संकल्प लिया है। रोड्रिग्ज ने कहा कि मादुरो और फ्लोरेस की वेनेजुएला वापसी तक वह एक मिनट भी आराम नहीं करेंगी। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक एक कार्यक्रम में रोड्रिग्ज ने कहा कि वेनेजुएला के नेतृत्व या शासन कार्यक्रम के बारे में कोई अनिश्चितता नहीं है।
उन्होंने कहा कि वेनेजुएला के लोग प्रभारी हैं और एक सरकार है, जो राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की है। उन्होंने शांति, स्थिरता और देश के भविष्य की गारंटी के लिए एकता का आह्वान किया। रोड्रिग्ज ने कहा कि एक साल पहले उन्होंने मादुरो के साथ उनके तीसरे कार्यकाल की शुरुआत में शपथ ली थी। आज एक साल बाद हम उनकी आजादी के लिए शपथ ले रहे हैं। रोड्रिग्ज ने कहा कि राष्ट्रीय एकता मादुरो को बचाने के प्रयास में निर्णायक होगी। इसी बीच कार्यवाहक राष्ट्रपति रोड्रिग्ज ने पुष्टि की कि उनकी सरकार मादुरो की ओर से निर्धारित सात कार्य योजनाओं को जारी रखे हुए है।
बता दें अमेरिकी सेना ने 3 जनवरी को काराकास और वेनेजुएला के तीन अन्य शहरों में सैन्य हमले किए थे। इस ऑपरेशन में अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो को उनकी पत्नी समेत हिरासत में ले लिया था। अमेरिका की इस कार्रवाई की दुनियाभर में निंदा की गई और कई देशों ने अपनी चिंताएं भी जाहिर कीं। इस बीच ट्रंप ने कहा कि वेनेजुएला ने राजनीतिक कैदियों को रिहा करना शुरू कर दिया है। उन्होंने इसे प्रत्यक्ष अमेरिकी कार्रवाई का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि मुझे उम्मीद है कि वे कैदी याद रखेंगे कि वे कितने भाग्यशाली हैं कि अमेरिका आया और उसने वह किया जो करना जरूरी था।
ईरानी विद्रोह से क्या तीसरे विश्व युद्ध की नींव तैयार हो गई है? रुस-चीन भी हैं तैयार
12 Jan, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान। ईरान में विरोध प्रदर्शन तेज होते जा रहे हैं। ईरानी रियाल की भारी गिरावट से शुरू हुए ये प्रदर्शन अब इतने बड़े स्तर पर पहुंच गए हैं कि पूरी दुनिया और खासतौर पर अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप भी इसमें इनवॉल्व हो रहे हैं। आशंका ये है कि तेल का खेल बिगड़ते देखकर चीन और रूस भी इस बार शायद चुप रहेंगे। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या तीसरे विश्व युद्ध की नींव तैयार हो गई है? मौजूदा हालात और बिगड़े तो क्या ईरान की सड़कों पर खून-खराबा होगा? फिर संकट की घड़ी में ईरान के साथ कौन-कौन से देश खड़े होंगे?
ईरान ने अपनी ताकतवर सैन्य इकाई इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स को मैक्सिमम अलर्ट पर रखा है। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने आदेश दिया है कि आईआरजीसी पूरी तरह तैयार रहे। इस अलर्ट को जून 2025 में इजराइल के साथ हुई 12 दिनों की जंग से भी ज्यादा गंभीर माना है। इस तनाव के बीच सोशल मीडिया पर इजराइल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू का एक पुराना वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वे ईरान की जनता से आजादी के लिए लड़ने की अपील करते नजर आ रहे हैं। इसी बीच ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी ने भी जनता से जोरदार विरोध प्रदर्शन करने की अपील की है। उन्होंने तेल, गैस और ऊर्जा क्षेत्र के कर्मचारियों से देशव्यापी हड़ताल करने और बड़े पैमाने पर सड़कों पर उतरने का आह्वान किया है।
ईरान में भू-राजनीतिक तनाव के बीच चीन, रूस और ईरान के युद्धपोत दक्षिण अफ्रीका पहुंच चुके हैं। यहां तीनों देशों के बीच संयुक्त नौसैनिक अभ्यास हो रहा है। माना जा रहा है कि रूस आईआरजीसी को आधुनिक हथियारों, एयर डिफेंस मिसाइलों और रडार सिस्टम की ट्रेनिंग दे सकता है।
ईरान का सबसे बड़ा युद्धपोत मकरान, चीनी और रूसी जहाजों के साथ मौजूद है। दक्षिण अफ्रीका की रक्षा सेना का कहना है कि इन अभ्यासों से आपसी सैन्य तालमेल और अनुभव साझा करने में मदद मिलेगी। ईरानी दूतावास ने एक्स पर बयान जारी कर अमेरिका पर मनोवैज्ञानिक युद्ध, सैन्य हस्तक्षेप की धमकी, झूठी खबरें फैलाने और हिंसा भड़काने का आरोप लगाया है। ईरान का कहना है कि ये सभी कदम संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है।
इस बीच अमेरिकी वायुसेना का सी-17 ग्लोबमास्टर विमान जर्मनी से मध्य पूर्व की ओर उड़ता देखा गया है। यह विमान भारी हथियार, टैंक और सैनिक ले जाने में सक्षम है। कुछ रिपोर्टे्स में ये भी कहा गया कि अमेरिकी केसी-135 स्ट्रैटोटैंकर विमान फारस की खाड़ी और इराकी हवाई क्षेत्र में फ्यूल भरते देखा गया है। ऐसा नहीं है कि वो अमेरिका ही इस तैयारी में लगा हुआ है ईरान के समर्थन में चीन भी खुलकर आ गया है उसने कहा है कि वह ईरान की संप्रभुता की रक्षा के लिए आर्थिक, खुफिया, तकनीकी या सैन्य मदद देने को तैयार है। कई रक्षा विशेषज्ञों ने कहा है कि चीन बाहरी ताकतों के समर्थन से फैलाए जा रहे अस्थिरता के खिलाफ ईरानी सरकार के साथ खड़ा है। रिपोर्ट्स कह रही हैं कि चीन वेनेजुएला के बाद अपने एक और तेल के स्रोत को यूं ही नहीं जाने देगा।
ब्रिटेन सांसद ने बांग्लादेश में हिंदुओं की रक्षा के लिए सरकार से किया हस्ताक्षेप का आग्रह
12 Jan, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लंदन। ब्रिटेन में विपक्ष की नेता प्रीति पटेल ने सरकार से बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की हत्याओं समेत हिंसा में बढ़ोतरी के मामले में हस्तक्षेप करने और देश में स्थिरता लाने के लिए अपने प्रभाव का इस्तेमाल करने का आह्वान किया है। विपक्षी दल कंजर्वेटिव पार्टी की सांसद प्रीति पटेल ने सोशल मीडिया पर ब्रिटेन के विदेश मंत्री यवेट कूपर को लिखा अपना पत्र पोस्ट किया, जिसमें लेबर पार्टी सरकार से ‘हाउस ऑफ कॉमन्स’ में इस मुद्दे पर बयान देने का भी आह्वान किया है।
सांसद पटेल ने कहा कि बांग्लादेश की स्थिति बेहद चिंताजनक है। धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा की जानी चाहिए और हिंदुओं की हत्याएं और उन पर हो रहे अत्याचार गलत हैं और इन्हें रोकना होगा। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन सरकार को बांग्लादेश में स्थिरता लाने और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करने और अल्पसंख्यकों को सुरक्षित रखने के लिए अपने प्रभाव और समन्वय शक्तियों का इस्तेमाल करना चाहिए। कूपर को लिखे अपने पत्र में प्रीति पटेल ने हाल के हफ्तों में बांग्लादेश में कम से कम छह हिंदुओं की हत्या की खबरों का जिक्र किया है।
US से तनाव के बीच दिल्ली पहुंचे ट्रंप के करीबी… बोले- भारत का बहुत अच्छा लग रहा है
11 Jan, 2026 08:07 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारत और अमेरिका (India and America) के रिश्तों में तनाव के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) के करीबी माने जाने वाले नामित अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर (US Ambassador Sergio Gor) नई दिल्ली पहुंच गए हैं। गोर (38) ने नवंबर के मध्य में भारत में अमेरिकी राजदूत के रूप में शपथ ली। शुक्रवार रात नयी दिल्ली पहुंचने के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा, ‘‘भारत में आकर बहुत अच्छा लग रहा है। हमारे दोनों देशों के लिए आगे अपार अवसर हैं।’’ भारत में उनका आगमन ऐसे समय हुआ है जब अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लटनिक के एक दावे के बाद दोनों पक्षों के बीच नया विवाद खड़ा हो गया है। लटनिक ने कहा था कि दोनों देशों के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौता पिछले साल इसलिए नहीं हो सका, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन नहीं किया।
भारत ने शुक्रवार को इस दावे को खारिज कर दिया और लटनिक की टिप्पणियों को गलत बताया। गोर ‘व्हाइट हाउस’ के कार्मिक निदेशक के रूप में कार्यरत थे, जब राष्ट्रपति ट्रंप ने अगस्त में उन्हें भारत में अगले अमेरिकी राजदूत के रूप में नामित किया था। ट्रंप द्वारा भारतीय वस्तुओं पर शुल्क (टैरिफ) को दोगुना करके 50 प्रतिशत करने के बाद दोनों देशों के बीच संबंध गंभीर तनाव में है। शुल्क के अलावा, कई अन्य मुद्दों पर भी संबंधों में गिरावट आई है, जिनमें पिछले साल मई में ट्रंप द्वारा भारत-पाकिस्तान संघर्ष को समाप्त करने का दावा और अमेरिका की नयी आव्रजन नीति शामिल है।
अमेरिकी सीनेट ने अक्टूबर में गोर को भारत में अमेरिका के अगले राजदूत के रूप में नियुक्त करने की मंजूरी दी। गोर के शपथ ग्रहण समारोह के बाद ट्रंप ने कहा था, ‘‘मुझे सर्जियो गोर पर भरोसा है कि वह हमारे देश के सबसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय संबंधों में से एक, यानी भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने में मदद करेंगे।’’
गोर ने अपनी नयी भूमिका को अपने जीवन का ‘‘सबसे बड़ा सम्मान” बताया था और कहा था कि वह अमेरिका और भारत के बीच संबंधों को ‘‘मजबूत’’ करने के लिए उत्सुक हैं। उन्होंने 2024 के राष्ट्रपति चुनाव से पहले ट्रंप के प्रचार अभियान की राजनीतिक कार्रवाई समिति (पीएसी) में एक प्रमुख भूमिका निभाई, और नए प्रशासन में राजनीतिक नियुक्तियों की जांच का काम सौंपे जाने के बाद उनका प्रभाव कई गुना बढ़ गया। पिछले साल जनवरी में भारत में तत्कालीन अमेरिकी राजदूत एरिक गार्सेटी ने पद से इस्तीफा दे दिया, जिससे ट्रंप प्रशासन के लिए अपना नया राजदूत नियुक्त करने का मार्ग प्रशस्त हो गया। सीनेट से मंजूरी के कुछ दिनों बाद गोर ने अक्टूबर में छह दिनों के लिए भारत का दौरा किया था। इस दौरे के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात की थी।
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