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बिल गेट्स ने एपस्टीन के दावों को बताया बेतुका, कहा- रूसी लड़कियों से संबंध नहीं बनाए
3 Feb, 2026 10:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन । माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक और अरबपति बिल गेट्स ने रूसी लड़कियों के साथ यौन संबंध और यौन रोग होने के आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। ये आरोप यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों में उठाए गए थे। इसमें कहा गया था कि गेट्स ने एपस्टीन के माध्यम से रूसी लड़कियों से संबंध बनाए और उसके बाद यौन रोग (एसटीडी) हुआ। बिल गेट्स के प्रवक्ता ने इन दावों को झूठा और बेतुका बताकर कहा कि यह सिर्फ गेट्स की छवि खराब करने की कोशिश है। दस्तावेजों से यह पता चलता है कि एपस्टीन गेट्स से नाराज था कि उसने उससे दूरी बनाई और इसी वजह से झूठे आरोप लगाए। अमेरिकी न्याय विभाग ने 30 जनवरी को एपस्टीन जांच से जुड़े करीब 30 लाख पन्नों, 2,000 वीडियो और 1.8 लाख तस्वीरें सार्वजनिक कीं। इन फाइलों में एपस्टीन ने दावा किया कि यौन रोग होने के बाद गेट्स ने उससे एंटीबायोटिक दवाएं मांगी थीं, ताकि वह उन्हें अपनी पूर्व पत्नी मेलिंडा गेट्स को बिना बताए दे सके। रिपोर्ट के अनुसार, एपस्टीन ने गेट्स पर आरोप लगाया कि उन्होंने अपनी छवि बचाने के लिए छह साल पुरानी दोस्ती तोड़ दी।
गेट्स पहले भी एपस्टीन के साथ संबंधों पर पछतावा जता चुके हैं। उन्होंने कहा था कि उनसे मिलने का उद्देश्य केवल गेट्स फाउंडेशन के लिए दान जुटाना था और किसी भी तरह की गलत गतिविधियों में उनका कोई शामिल नहीं था। गेट्स ने 2019 में स्पष्ट किया कि उनका एपस्टीन के साथ कोई कारोबारी या व्यक्तिगत गलत संबंध नहीं था और वे कभी किसी निजी पार्टी या कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए। रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि 2011 से 2013 के बीच गेट्स ने एपस्टीन से कई बार मुलाकात की, जिसमें न्यूयॉर्क स्थित उसके घर पर देर रात तक रहना और निजी विमान से यात्रा करना शामिल था। गेट्स और उनकी पूर्व पत्नी मेलिंडा फ्रेंच गेट्स की शादी 1994 में हुई थी और 2021 में तलाक हो गया। मेलिंडा ने बाद में कहा कि बिल के अफेयर्स और एपस्टीन से संबंध उनके तलाक की मुख्य वजह बने।
अफेयर्स के चलते गेट्स का मेलिंडा से तलाक हुआ
बिल और मेलिंडा गेट्स की शादी 1994 में हुई थी। दोनों का 2021 में तलाक हो गया था। मेलिंडा ने बाद में कहा था कि गेट्स के अफेयर्स और एपस्टीन से संबंध उनके तलाक की बड़ी वजह बने। गेट्स और एपस्टीन की मुलाकातों की खबरें सामने आने के बाद 2019 में मेलिंडा ने वकीलों से बात की थी।
पेरिस में बनेगा पहला पारंपरिक हिंदू मंदिर, भेजे गए तराशे हुए पत्थर
3 Feb, 2026 09:29 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बुसी-सेंट-जॉर्जेस (पेरिस) । फ्रांस के बुसी-सेंट-जॉर्जेस में बीएपीएस स्वामीनारायण हिंदू मंदिर के निर्माण के लिए भारत से पहली बार हाथ से तराशे गए पत्थर यहां पहुंचे। फ्रांस का यह पहला पारंपरिक हिंदू मंदिर होगा। यह मंदिर सदियों पुरानी भारतीय शिल्पकला, वास्तुकला और आध्यात्मिक परंपरा का जीवंत उदाहरण बनेगा। इन पत्थरों को भारत के कुशल कारीगरों ने पारंपरिक तकनीकों से तैयार किया है, जिनमें बारीक नक्काशी, सांस्कृतिक प्रतीक और आध्यात्मिक भावनाएं समाहित हैं। फ्रांस पहुंचने के बाद इन पत्थरों से मंदिर निर्माण का कार्य भारतीय और फ्रांसीसी कारीगरों की संयुक्त टीम द्वारा किया जाएगा। खास बात यह है कि फ्रांसीसी टीम में वे विशेषज्ञ भी शामिल हैं, जिन्होंने ऐतिहासिक नोट्रे-डेम कैथेड्रल की मरम्मत में अहम भूमिका निभाई थी। इससे दोनों देशों की पारंपरिक शिल्पकला और आधुनिक इंजीनियरिंग का अनोखा संगम देखने को मिलेगा।
यह सहयोग न केवल तकनीकी दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि सांस्कृतिक आदान-प्रदान का भी सशक्त उदाहरण प्रस्तुत करता है। यह मंदिर केवल एक पूजा स्थल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह संस्कृति, शिक्षा, आध्यात्मिकता और सामुदायिक गतिविधियों का केंद्र बनेगा। यहां भारतीय परंपराओं, मूल्यों और जीवन दर्शन को समझने का अवसर मिलेगा, जिससे फ्रांस में रहने वाले भारतीय समुदाय के साथ-साथ स्थानीय लोग भी जुड़ सकेंगे। मंदिर के पूरा होने के बाद यह भारत और फ्रांस के बीच मित्रता और आपसी सम्मान का स्थायी प्रतीक बनेगा। पत्थरों के आगमन के अवसर पर आयोजित समारोह में स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर के प्रतिनिधियों के साथ-साथ सामुदायिक प्रमुखों ने भी शिरकत की। बीएपीएस पेरिस मंदिर प्रोजेक्ट के सीईओ श्री संजय करा ने कहा कि हर पत्थर अपने साथ विरासत, श्रद्धा और उद्देश्य लेकर आया है।
उन्होंने इसे भारतीय परंपरा और फ्रांसीसी इंजीनियरिंग का सुंदर मिलन बताया। भारत के राजदूत संजीव कुमार सिंघला ने भी इस परियोजना को दोनों देशों की शिल्पकला और सांस्कृतिक मूल्यों का शानदार संगम करार दिया। फ्रांस के अधिकारियों ने भी इस मंदिर को सद्भाव, साझेदारी और सांस्कृतिक संवाद का नया अध्याय बताया। उनका मानना है कि यह परियोजना विविध संस्कृतियों के बीच समझ और सम्मान को और गहरा करेगी। बीएपीएस पेरिस मंदिर का निर्माण कार्य जून 2024 में शुरू हुआ था और इसके 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है।
सौ साल बाद अमेरिका में भयंकर ठंड, ठिठुरन के चलते पेड़ों से टपकने लगीं छिपकलियां
3 Feb, 2026 08:25 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिका के एक बड़े हिस्से में इन दिनों बॉम्ब साइक्लोन ने भारी तबाही मचाई है। बर्फीले तूफान और कड़ाके की ठंड के कारण देश के कई राज्यों में जनजीवन पूरी तरह ठप हो गया है। नॉर्थ कैरोलिना से लेकर फ्लोरिडा तक, कड़ाके की ठंड ने दशकों पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक कम से कम दो लोगों की जान जा चुकी है और हजारों उड़ानें रद्द होने से यात्री हवाई अड्डों पर फंसे हुए हैं। तूफान के कारण सड़कों पर फिसलन बढ़ गई है, जिससे यातायात व्यवस्था चरमरा गई है। सबसे चौंकाने वाले हालात फ्लोरिडा में देखने को मिले, जहाँ पारा शून्य से नीचे जाने के कारण पेड़ों पर रहने वाले इगुआना(छिपकली) सुन्न होकर नीचे गिरने लगे। स्थानीय स्तर पर इसे ‘इगुआना की बारिश’कहा जा रहा है। 1 फरवरी को फ्लोरिडा के कई हिस्सों में तापमान ऐतिहासिक रूप से गिरा, जिसने वन्यजीवों और स्थानीय निवासियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
फ्लोरिडा के ऑरलैंडो में न्यूनतम तापमान माइनस 4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो फरवरी महीने में साल 1923 के बाद का सबसे कम तापमान है। 100 साल बाद आई इस रिकॉर्ड ठंड ने मौसम वैज्ञानिकों को भी हैरान कर दिया है। सामान्यतः यहाँ इन दिनों तापमान 12 से 23 डिग्री के बीच रहता है। ठंड के कारण ठंडे खून वाले जीव इगुआना के शरीर ने काम करना बंद कर दिया और वे सड़कों व फुटपाथों पर बेसुध पड़े नजर आए। प्रशासन ने वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए इमरजेंसी आदेश जारी किए हैं, जिसके तहत नागरिकों को इन जीवों को सुरक्षित स्थानों या सरकारी दफ्तरों तक पहुंचाने की छूट दी गई है। बचाव कार्य में जुटी जेसिका किलगोर के मुताबिक, ठंड की तीव्रता इतनी अधिक थी कि सड़कों से सैकड़ों किलो इगुआना इकट्ठा किए गए, जिनमें से कई की मौत हो चुकी थी।
तूफान का सबसे विनाशकारी असर नॉर्थ कैरोलिना में देखा गया, जहाँ लेक्सिंगटन और वाल्नट माउंटेन्स जैसे इलाकों में 40 से 56 सेंटीमीटर तक बर्फ की मोटी चादर जम गई है। राज्य के गवर्नर जोश स्टाइन ने पुष्टि की है कि बर्फबारी और खराब दृश्यता के चलते पिछले दो दिनों में लगभग 1,000 सड़क हादसे हुए हैं। इसी दौरान गैस्टोनिया शहर में एक ट्रक रेलवे क्रॉसिंग पर फंस गया और तेज रफ्तार ट्रेन ने उसे टक्कर मार दी, हालांकि ड्राइवर की सूझबूझ से एक बड़ा हादसा टल गया। प्रशासन ने लोगों को फ्रॉस्टबाइट की चेतावनी देते हुए घरों में रहने की सलाह दी है। ठंड और बर्फबारी ने बिजली आपूर्ति और हवाई सेवाओं को भी बुरी तरह प्रभावित किया है। शार्लोट डगलस इंटरनेशनल एयरपोर्ट से 800 से अधिक उड़ानें रद्द की गई हैं, जबकि मिसिसिपी, टेनेसी और लुइसियाना सहित कई राज्यों में करीब 1.58 लाख लोग बिना बिजली के रहने को मजबूर हैं। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि हालांकि बर्फबारी में कुछ कमी आ सकती है, लेकिन आने वाले दिनों में चलने वाली तेज बर्फीली हवाएं और भीषण ठंड मुश्किलों को और बढ़ा सकती हैं। नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे मौसम की पल-पल की जानकारी लेते रहें और सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करें।
सीक्रेट मीटिंग से बढ़ा तनाव, पेंटागन में ईरान को लेकर अमेरिका-इजरायल की अहम चर्चा
2 Feb, 2026 12:33 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मिडिल ईस्ट (Middle East) इन दिनों एक बार फिर जंग के मुहाने पर खड़ा है जहां अमेरिका-इजरायल (America-Israel) और ईरान (Iran) के बीच युद्ध (war) शुरू होने की आशंका गहराती जा रही है। इस बीच अब पेंटागन में अमेरिका और इजरायल के बीच एक सीक्रेट मीटिंग हुई है। इस मीटिंग के अंदर क्या हुआ इसे लेकर फिलहाल सस्पेंस बना हुआ है, लेकिन यह बात तय है कि बैठक के केंद्र में ईरान ही रहा। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब ईरान ने चेतावनी दी है कि अमेरिका का ईरान कोई भी हमला क्षेत्रीय युद्ध में बदलते देर नहीं लगेगी।
एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका और इजरायल के कुछ टॉप सैन्य नेताओं ने बीते शुक्रवार को पेंटागन में बंद कमरे में बातचीत की। यह बैठक अमेरिकी जनरल डैन केन और इजरायली सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ स्टाफ आयल जमीर के बीच हुई। जानकारी के मुताबिक जमीर के वॉशिंगटन से लौटते ही इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने देश के शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों के साथ ताबड़तोड़ बैठकें की हैं।
इजरायली मीडिया ने बताया कि इन बैठकों में रक्षा मंत्री इज़राइल काट्ज़, ज़मीर, मोसाद प्रमुख डेविड बार्निया और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। काट्ज के कार्यालय ने पुष्टि की कि उन्होंने इजरायल की सैन्य तैयारियों और किसी भी संभावित अंजाम के लिए तैयारियों की समीक्षा करने के लिए जमीर से मुलाकात की। इजरायली मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी अधिकारी अब ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को लेकर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। इससे पहले यह खबरें सामने आई थीं कि सऊदी अरब और यूएई जैसे मुस्लिम देशों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान पर हमला ना करने के लिए मना लिया है। हालांकि अब हमले की संभावनाएं एक बार फिर बढ़ गई हैं।
खामेनेई की चेतावनी
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने रविवार को चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू करता है, तो यह संघर्ष केवल दो देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे क्षेत्र में फैल जाएगा। फार्स के अनुसार खामेनेई ने यह टिप्पणी तेहरान में एक बैठक के दौरान की। खामेनेई ने कहा कि ईरान युद्ध की शुरुआत नहीं करेगा और किसी भी देश पर हमला करने की मंशा नहीं रखता, लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि “ईरानी जनता उन लोगों को करारा जवाब देगी, जो उस पर हमला करने या परेशान करने की कोशिश करेंगे।” उन्होंने जोर देकर कहा, “अमेरिकियों को यह समझ लेना चाहिए कि अगर युद्ध छेड़ा गया, तो इस बार यह एक क्षेत्रीय युद्ध होगा।”
इससे पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि विमानवाहक पोत अब्राहम लिंकन के नेतृत्व में एक विशाल नौसैनिक बेड़ा ईरान की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी थी कि अमेरिका के साथ समझौते के लिए ईरान के पास समय तेजी से खत्म हो रहा है।
राजनयिक तनाव चरम पर: EU के कदम से भड़का ईरान, यूरोपीय सेनाओं पर कड़ा एक्शन
2 Feb, 2026 11:32 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
डेस्क। ईरान की संसद अध्यक्ष ने रविवार को कहा कि इस्लामी गणराज्य अब यूरोपीय संघ के सभी सैन्य बलों को आतंकवादी समूह मानता है। मोहम्मद बगेर कलीबाफ की यह टिप्पणी पिछले सप्ताह यूरोपीय संघ द्वारा ईरान के अर्धसैनिक रिवोल्यूशनरी गार्ड को देश में राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शनों पर खूनी दमन में उसकी भूमिका के लिए एक आतंकवादी समूह के रूप में सूचीबद्ध करने के समझौते के बाद आई है।
कलीबाफ ने इस घोषणा के लिए 2019 के एक कानून का हवाला दिया। यह कानून अमेरिका द्वारा गार्ड को आतंकवादी समूह घोषित करने के बाद पारित किया गया था। यह ईरान को ऐसे किसी भी राष्ट्र के खिलाफ जवाबी कार्रवाई करने की अनुमति देता है जो इस निर्णय का अनुसरण करता है। कलीबाफ ने यह घोषणा तब की जब वह और अन्य लोग संसद में गार्ड की वर्दी पहने हुए थे। कलीबाफ गार्ड में कमांडर थे।
एपस्टीन फाइल्स से फिर मचा हड़कंप, नई लिस्ट में इवांका ट्रंप और एलन मस्क
2 Feb, 2026 09:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिकी न्याय विभाग ने जेफरी एपस्टीन (Jeffrey Epstein) से जुड़े लाखों दस्तावेजों की नई और अंतिम सूची (final list) जारी की है। इस बैच में 30 लाख से अधिक पेज, 1.8 लाख तस्वीरें और 2000 वीडियो क्लिप्स शामिल हैं। एपस्टीन फाइल्स (Epstein) नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण और ट्रैफिकिंग नेटवर्क से जुड़े जांच दस्तावेज हैं।
मालूम हो कि एपस्टीन फाइल्स अमेरिकी वित्तीय और दोषी यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन से जुड़े जांच के कागजात हैं। इसके जरिए नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण और ट्रैफिकिंग नेटवर्क का खुलासा हुआ है। एपस्टीन की 2019 में मौत के बाद ये फाइलें FBI और न्याय विभाग के पास थीं। 2025 में पारित एपस्टीन फाइल्स ट्रांसपेरेंसी एक्ट के तहत अमेरिकी न्याय विभाग ने इन्हें सार्वजनिक किया। नई एपस्टीन फाइल्स में नामों की सूची इस प्रकार से है…
डोनाल्ड ट्रंप: राष्ट्रपति का नाम ताजा बैच में आया है। एक हिस्से में लिखा है, ‘रेडैक्टेड ने एक अज्ञात महिला मित्र की रिपोर्ट की, जिसे लगभग 25 साल पहले न्यू जर्सी में राष्ट्रपति ट्रंप पर ओरल सेक्स करने के लिए मजबूर किया गया था। दोस्त ने एलेक्सिस को बताया कि वह उस समय लगभग 13-14 साल की थी और उसने कथित तौर पर ओरल सेक्स के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप को काट लिया। काटने पर हंसने के बाद दोस्त को चेहरे पर मारा गया। दोस्त ने कहा कि उसे एपस्टीन से भी दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा।’
इवांका ट्रंप: एक ईमेल के सब्जेट में लिखा है, ‘जैरेड कुशरर, इवांका ट्रंप विकी वार्ड की बुक के लिए तैयार हो रही हैं।’
एलन मस्क: दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति का भी जिक्र है, लेकिन यह एपस्टीन के द्वीप पर संभावित यात्राओं के संदर्भ में है।
बिल गेट्स: फाइलों में गेट्स के खिलाफ कई आरोप लगाए गए हैं, जिसमें रूसी लड़कियों से एसटीडी होने का दावा भी शामिल है।
एपस्टीन फाइलों में कई नए नाम भी आए हैं। इनमें एहुद बाराक, लैरी समर्स, बिल रिचर्डसन, प्रिंस एंड्र्यू, सारा फर्ग्यूसन, माइकल जैक्सन, मिक जैगर, केविन स्पेसी, डायना रॉस, क्रिस टकर, वॉल्टर क्रॉनकाइट, वुडी एलन, रिचर्ड ब्रैनसन, पीटर थील, लेस वेक्सनर, नोम चॉम्स्की और स्टीफन हॉकिंग शामिल हैं। मालूम हो कि ये दस्तावेज जांच से जुड़े हैं और इनमें कई आरोप असत्यापित या टिप्स के रूप में हैं।
अवैध कब्जों पर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई, NH पर ढाबे भी टूटे
2 Feb, 2026 08:52 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हरियाणा|हरियाणा के पलवल में अवैध निर्माण के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई। जिला नगर योजनाकार (डीटीपी) विभाग ने जिले में अवैध कॉलोनियों और निर्माणों के खिलाफ अभियान चलाया है। पिछले तीन दिनों में खजूरका, असावटी और बघौला गांवों में छह अवैध कॉलोनियों तथा राष्ट्रीय राजमार्ग की 30 मीटर चौड़ी हरी पट्टी में बने अवैध निर्माणों पर तोड़फोड़ की कार्रवाई की गई।जिला नगर योजनाकार अधिकारी (डीटीपीओ) अनिल मलिक ने बताया कि उनकी टीम ने खजूरका गांव की राजस्व संपदा में काटी गई दो अवैध कॉलोनियों में तोड़फोड़ की। इसके बाद असावटी और बघौला गांवों में तीन अन्य अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई की गई।अभियान के तहत साढ़े छह एकड़ भूमि पर विकसित की जा रही तीन अवैध कॉलोनियों में 15 डीपीसी, दो रिहायशी मकान और एक प्रॉपर्टी डीलर का कार्यालय ध्वस्त किया गया। राष्ट्रीय राजमार्ग पर 30 मीटर के दायरे में बने दो ढाबे, एक इंडस्ट्रियल शेड और छह चारदीवारियां भी तोड़ी गई।गुरुग्राम में ग्रामीण क्षेत्र के 25 लिंक रोड होंगे चौड़े, 6 फीट और बढ़ेगी चौड़ाई गुरुग्राम के सोहना में बनेगी नई इंडस्ट्रियल टाउनशिप, NCR में बढ़ेंगे जॉब-रोजगार बघौला गांव में राजस्व संपदा में काटी गई एक और अवैध कॉलोनी में भी तोड़फोड़ की गई। इस कार्रवाई के दौरान तोड़फोड़ की डीटीपीओ अनिल मलिक स्वयं ड्यूटी मजिस्ट्रेट के रूप में मौजूद रहे।
राजनयिक संकट गहराया: दक्षिण अफ्रीका और इजरायल आमने-सामने, दोनों ने अपनाया सख्त रुख
2 Feb, 2026 08:28 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अंकारा। दक्षिण अफ्रीका और इजरायल (South Africa and Israel) के बीच लंबे समय से चला आ रहा कूटनीतिक तनाव (Diplomatic tension) अब खुली टकराव की स्थिति में पहुंच गया है। दक्षिण अफ्रीका ने इजरायल के उप-राजदूत और कार्यवाहक एरियल सेडमैन को देश छोड़ने का आदेश दिया है। जवाब में इजरायल ने भी दक्षिण अफ्रीका के एक वरिष्ठ राजनयिक को निष्कासित करते हुए 72 घंटे के भीतर देश छोड़ने को कहा है।
दक्षिण अफ्रीकी विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को एरियल सेडमैन को पर्सोना नॉन ग्राटा घोषित किया। सरकार ने आरोप लगाया कि सेडमैन के व्यवहार और सार्वजनिक बयानों से देश की गरिमा और संप्रभुता को ठेस पहुंची है।
निष्कासन के पीछे ये रहे कारण
राष्ट्रपति पर टिप्पणी: विदेश मंत्रालय का कहना है कि सोशल मीडिया पर की गई पोस्ट के जरिए राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा का अपमान किया गया।
राजनयिक नियमों की अनदेखी: इजरायली अधिकारियों की दक्षिण अफ्रीका यात्रा की जानकारी औपचारिक रूप से साझा नहीं की गई। हाल ही में इजरायली विदेश मंत्रालय के अधिकारी डेविड सारंगा देश में मौजूद थे।
संप्रभुता पर सवाल: दक्षिण अफ्रीका का आरोप है कि इजरायल के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल सरकार के खिलाफ अपमानजनक हमलों के लिए किया गया।
इजरायल का त्वरित पलटवार
दक्षिण अफ्रीका के फैसले के कुछ ही घंटों बाद इजरायल ने भी कड़ा जवाब दिया। इजरायली विदेश मंत्रालय ने वरिष्ठ दक्षिण अफ्रीकी राजनयिक शॉन एडवर्ड बायनेवेल्ड को निष्कासित करते हुए उन्हें 72 घंटे के भीतर देश छोड़ने का निर्देश दिया।
क्यों बिगड़े रिश्ते?
दोनों देशों के बीच तनाव कोई नया नहीं है।
गाजा युद्ध और ICJ मामला: दक्षिण अफ्रीका ने अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में इजरायल के खिलाफ फिलिस्तीनियों पर नरसंहार का आरोप लगाते हुए याचिका दायर की है।
हमास को लेकर विवाद: इजरायल ने आरोप लगाया है कि दक्षिण अफ्रीका हमास का समर्थन कर रहा है और उसकी कानूनी लड़ाई लड़ रहा है।
राजनयिक स्तर में कटौती: 2023 में ही इजरायल ने अपने मुख्य राजदूत को वापस बुला लिया था, जिसके बाद एरियल सेडमैन सबसे वरिष्ठ अधिकारी के तौर पर तैनात थे।
क्या अमेरिका करेगा हस्तक्षेप?
इस पूरे विवाद पर अमेरिका की नजर बनी हुई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका, दक्षिण अफ्रीका की विदेश नीति का मुखर आलोचक रहा है। वाशिंगटन ने उस पर ईरान और हमास के प्रति नरम रुख अपनाने का आरोप लगाया है। बीते वर्ष अमेरिका ने दक्षिण अफ्रीका के राजदूत इब्राहिम रसूल को भी उनके ‘MAGA’ आंदोलन पर दिए गए बयानों के चलते निष्कासित कर दिया था।
देश के भीतर भी उठे सवाल
दक्षिण अफ्रीका में इस फैसले को लेकर विरोध के स्वर भी सुनाई दे रहे हैं। साउथ अफ्रीकन ज्यूइश बोर्ड ऑफ डेप्युटीज की अध्यक्ष कारेन मिलनर ने इसे जरूरत से ज्यादा कठोर कदम बताया। उनका कहना है कि कुछ सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर वरिष्ठ राजनयिक को निष्कासित करना अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के लिहाज से उचित नहीं है।
पाकिस्तान प्रेम में डूबी बांग्लादेश की यूनुस सरकार फिर उठाएगी भारत विरोधी कदम
1 Feb, 2026 02:07 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका। बांग्लादेश की मोहम्मद यूनुस सरकार पाकिस्तान के साथ लगातार रिश्ते मजबूत करने में जुटी है, वहीं पुराने दोस्त भारत के साथ दुश्मनी बढ़ रहे है। अब यूनुस सरकार एक ऐसा कदम उठाने की तैयारी कर रही है, जिसका सीधा असर भारत पर होगा। रिपोर्ट के मुताबिक, यूनुस सरकार बांग्लादेश में आयात होकर आने वाले सूती धागे पर कस्टम ड्यूटी लगाने वाली है। बांग्लादेश अपने सूती धागे का ज्यादातर आयात भारत से करता है, जो देश की टेक्सटाइल इंडस्ट्री के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। यह ड्यूटी 10 से 20 प्रतिशत के बीच हो सकती है। बांग्लादेश को उम्मीद है कि कस्टम ड्यूटी लगाने से घरेलू कपास की कीमतों में गिरावट रुक सकती है।
बांग्लादेश की यूनस सरकार इस समय मुश्किल में फंसी है। एक ओर टेक्सटाइल मिलों के भारी विरोध का सामना कर रही है, जिनका कहना है कि ड्यूटी फ्री आयात ने उन्हें बर्बादी के कगार पर पहुंचा दिया है। वहीं, कपड़ा निर्यातक चेतावनी दे रहे हैं कि कोई भी नई ड्यूटी देश की वैश्विक प्रतिस्पर्धा को कमजोर करेगी।
भारत बांग्लादेश को सूती धागे का सबसे बड़ा निर्यातक हैं। भारत ने 2025 में 3.57 अरब डॉलर मूल्य के सूती धागे का निर्यात किया था। बांग्लादेश इसका सबसे खरीदार था, जिसने कुल शिपमेंट का 45.9 प्रतिशत आयात किया। वहीं, बांग्लादेश के कुल आयात में भारतीय हिस्सा 82 प्रतिशत है। लेकिन बांग्लादेश में इसका विरोध हो रहा हैं और कहा जा रहा है कि इससे घरेलू कपास उत्पादकों को भारी नुकसान हो रहा है, क्योंकि कीमतें लगातार गिर रही हैं।
कपड़ा निर्यातक इस मुद्दे को अलग तरह से देख रहे हैं। निर्यातकों का तर्क है कि स्थानीय स्तर पर तैयार धागा बहुत महंगा है और गुणवत्ता में भी सही नहीं होता। बांग्लादेश प्रमुख टेक्सटाइल का निर्यातक और ग्लोबल ब्रांड भारतीय सप्लाई को पसंद करते हैं। बांग्लादेश में भारतीय धागे के आयात की यह बड़ी वजह है। एक्सपोर्टर को डर है कि आयात में किसी भी रुकावट से लागत बढ़ेगी, शिपमेंट में देरी होगी और अंत में इसका असर देश के ग्लोबल टेक्सटाइल मार्केट पर होगा।
पिछले साल अप्रैल में यूनुस सरकार ने प्रमुख लैंडपोर्ट के माध्यम से भारत से धागा आयात करने की अनुमति देना बंद किया था। इसके पहले बांग्लादेश को भारत से होने वाले धागा निर्यात का 32 प्रतिशत जमीन के रास्ते होता था। हालांकि, इसके बाद भी घरेलू धागे की मांग में ज्यादा सुधार नहीं हुआ।
मात्र 14 साल की उम्र में मां बनी बच्ची ने बताए प्रेग्नेंसी के नुकसान
1 Feb, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन । अमेरिका के अर्कांसास की 14 साल की बच्ची बेला और 12 साल के बच्चे हंटर ने कम उम्र में माता-पिता बनने से होने वाली परेशानी और नुकसान के बारे में बताया है। दोनों बच्चों की कहानी एक टीवी चैनल पर शुरू हुई एक रिएलिटी शो में दिखाई गई। इस शो में कम उम्र में मां-बाप बनने वाले किशोरों को आमंत्रित किया जाता है। बेला और हंटर एक साल पहले मिले और धीरे-धीरे उनका प्यार बढ़ा। दोनों अपने माता-पिता से छुपकर मिलते रहे। लेकिन पिछले साल मार्च में मामला सार्वजनिक हो गया, जब बेला की प्रेग्नेंसी का पता चला। इससे पहले जुलाई 2024 में जब बेला को गर्भधारण की पुष्टि हुई, तो हंटर के माता-पिता ने उसे अबॉर्शन करने का सुझाव दिया, जबकि बेला के माता-पिता ने उसका साथ दिया। बेला ने सोशल मीडिया पर कहा कि उन्होंने कभी गर्भधारण की कोशिश नहीं की थी और उनका मकसद यह दिखाना है कि युवा उम्र में प्रेग्नेंसी के नुकसान क्या हो सकते हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि उनके माता-पिता ने कठिन परिस्थितियों में उनका साथ दिया, जो कई अन्य किशोर माता-पिता के लिए उदाहरण है। दोनों का बच्चा, वीजली, पिछले साल मार्च में पैदा हुआ। सोशल मीडिया पर इस जोड़ी के चर्चे तेजी से हुए और लोगों ने कम उम्र में मातृत्व और पितृत्व की इस स्थिति को लेकर अपनी प्रतिक्रियाएं दीं। कई लोगों ने इसे बेहद अजीब और चिंताजनक बताया। बेला और हंटर की कहानी एक बार फिर यह दर्शाती है कि किशोर उम्र में भावनात्मक और शारीरिक तैयारियों के बिना रिलेशनशिप और प्रेग्नेंसी में उतरना कितनी बड़ी चुनौती बन सकता है।
टीएलसी के शो के माध्यम से, दोनों युवा माता-पिता ने यह संदेश देने की कोशिश की कि यंग प्रेग्नेंसी केवल ग्लैमर नहीं बल्कि गंभीर जिम्मेदारी और मुश्किलों से भरी होती है। यह मामला अमेरिका में किशोर प्रेग्नेंसी और कम उम्र में माता-पिता बनने के सामाजिक और नैतिक मुद्दों पर बहस को फिर से जिंदा कर गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि माता-पिता, शिक्षक और समाज को इस तरह की परिस्थितियों में किशोरों को सही दिशा दिखाने और आवश्यक मार्गदर्शन देने की जरूरत है। इस कहानी ने दर्शकों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि प्यार और रिश्ते में उम्र, समझ और जिम्मेदारी कितनी अहम भूमिका निभाते हैं।
आइबेरियन पेनिनसुला घीरे-धीरे घूम रहा अपनी जगह से: शोध
1 Feb, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लंदन । यूरोप और अफ्रीका के बीच स्थित आइबेरियन पेनिनसुला, जिसमें स्पेन और पुर्तगाल शामिल हैं, अपनी जगह से बहुत ही धीमी गति से घूम रहा है। वैज्ञानिक रिसर्च में सामने आया है कि यह बदलाव इतना सूक्ष्म है कि आम लोग इसे महसूस नहीं कर सकते, लेकिन आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक विश्लेषण के जरिए इसके स्पष्ट संकेत सामने आए हैं। पृथ्वी की सतह से जुड़ी इस अहम खोज ने भूगर्भीय गतिविधियों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। रिसर्च के मुताबिक आइबेरियन पेनिनसुला घड़ी की दिशा में यानी क्लॉकवाइज रोटेशन कर रहा है। वैज्ञानिकों ने इसके लिए सैटेलाइट आधारित जीएनएसएस ट्रैकिंग स्टेशनों के डेटा और पिछले कई वर्षों के भूकंपों के सिग्नल्स का गहन विश्लेषण किया। इन आंकड़ों से पता चला कि यह क्षेत्र पूरी तरह स्थिर नहीं है, बल्कि बेहद धीमी गति से घूम रहा है। यह रोटेशन प्रति वर्ष एक मिलीमीटर से भी कम है, जिसे इंसानी नजर या रोजमर्रा के अनुभव से महसूस करना असंभव है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इसकी गति इंसान के नाखून बढ़ने की रफ्तार से भी कम है। यह भूगर्भीय बदलाव मुख्य रूप से अफ्रीकी और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेट्स के आपसी टकराव का नतीजा माना जा रहा है। ये दोनों प्लेट्स लगातार एक-दूसरे की ओर बढ़ रही हैं और उनके बीच का दबाव आइबेरियन पेनिनसुला पर असर डाल रहा है।
यह पेनिनसुला इन दोनों विशाल प्लेट्स के बीच फंसे एक ब्लॉक की तरह है, जिस पर दबाव समान रूप से नहीं पड़ता। इसी असमान दबाव के कारण यह क्षेत्र सीधा खिसकने के बजाय हल्का सा घूम रहा है। जिब्राल्टर जलडमरूमध्य के आसपास का इलाका इस प्रक्रिया में खास भूमिका निभा रहा है। वैज्ञानिकों के अनुसार जिब्राल्टर आर्क एक तरह से बफर की तरह काम करता है, जो टेक्टोनिक दबाव को कुछ हद तक सोख लेता है। आर्क के पूर्वी हिस्से में तनाव अपेक्षाकृत कम है, जबकि पश्चिमी हिस्से में प्लेट्स का टकराव ज्यादा सीधा और मजबूत है। इसी वजह से आइबेरियन पेनिनसुला का दक्षिणी और पश्चिमी हिस्सा रोटेशन के संकेत ज्यादा साफ दिखाता है। वहीं इसका उत्तरी हिस्सा यूरेशियन प्लेट से अधिक मजबूती से जुड़ा हुआ माना जाता है। इस खोज के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या भविष्य में इससे भूकंप का खतरा बढ़ सकता है।
वैज्ञानिकों ने फिलहाल किसी तत्काल या बड़े खतरे की चेतावनी नहीं दी है। उनका कहना है कि रोटेशन की गति बहुत धीमी है और तनाव लंबे समय में धीरे-धीरे रिलीज होता रहता है। हालांकि यह अध्ययन उन इलाकों की पहचान करने में मददगार साबित हो सकता है, जहां भूगर्भीय तनाव जमा हो रहा है और जहां भूकंप के झटके पहले भी महसूस किए जाते रहे हैं। रिसर्च से वैज्ञानिकों को जमीन के नीचे मौजूद अदृश्य फॉल्ट लाइनों को बेहतर तरीके से समझने और मैप करने में मदद मिलेगी।
भिखारी बना आतंकी मसूद अजहर का बेटा, डिजिटल भिखारी बनकर आतंक के लिए जुटा रहा फंड
1 Feb, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। पाकिस्तान में वर्तमान सत्ता और सैन्य नेतृत्व के संरक्षण में आतंकी संगठनों ने फंड जुटाने के लिए अब दान-धर्म और मानवीय संवेदनाओं को अपना नया हथियार बना लिया है। हाल ही में आई एक विस्तृत रिपोर्ट ने यह चौंकाने वाला खुलासा किया है कि कैसे प्रतिबंधित आतंकी संगठन वैश्विक निगरानी से बचने के लिए भीख मांगने के तरीकों में बदलाव कर रहे हैं। ये संगठन अब सड़कों से लेकर सोशल मीडिया तक सक्रिय हैं और दुनिया भर से दया की भीख मांगकर आतंकवाद की जड़ें मजबूत कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि आतंकी फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में पाकिस्तान का रिकॉर्ड हमेशा से संदिग्ध रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को गुमराह करने के लिए पाकिस्तान ने कई बार कागजी कार्रवाई तो की, लेकिन जमीनी स्तर पर आतंकी फंडिंग रोकने के लिए कोई ठोस संस्थागत कदम नहीं उठाए। यही कारण है कि जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे संगठन अब खुलेआम नए रातों पर चल रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, जैश-ए-मोहम्मद ने गाजा संकट को धन जुटाने के अवसर के रूप में इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। जैश प्रमुख मसूद अजहर ने अपने बेटे हम्माद अजहर को एक आधुनिक भिखारी के रूप में मैदान में उतारा है। हम्माद, गाजा के नाम पर राहत सहायता जुटाने के बहाने आतंकी गतिविधियों के लिए फंड इकट्ठा करने वाली मुहिम का नेतृत्व कर रहा है। पकड़े जाने के डर से वह सोशल मीडिया पर अपनी असली पहचान छिपाकर ‘कैसर अहमद’के नाम से सक्रिय है और लोगों से ‘खालिद अहमद’के नाम से दर्ज डिजिटल वॉलेट (ईजीपैसा) खातों में पैसा भेजने की अपील करता है। हैरानी की बात यह है कि वह गाजा की महिलाओं के वीडियो का इस्तेमाल अपनी दानशीलता के प्रचार के लिए कर रहा है ताकि पाकिस्तान और खाड़ी देशों से मोटी रकम वसूली जा सके।
मस्जिदों के निर्माण के नाम पर चंदा
इसके अलावा, जैश-ए-मोहम्मद ने पाकिस्तान के भीतर 300 से अधिक मस्जिदों के निर्माण के नाम पर एक विशाल चंदा अभियान शुरू किया है। डिजिटल वॉलेट्स के जरिए करीब 3.91 अरब पाकिस्तानी रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। इन मरकजों (केंद्रों) का निर्माण कथित तौर पर धार्मिक उद्देश्यों के लिए दिखाया जा रहा है, लेकिन इनका असल इस्तेमाल आतंकी विचारधारा के प्रसार और प्रशिक्षण के लिए होने की आशंका है। दूसरी ओर, लश्कर-ए-तैयबा ने भी अपनी रणनीति बदलते हुए बैंक खातों का उपयोग लगभग बंद कर दिया है। फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) जैसी अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की पकड़ से बचने के लिए अब यह संगठन सीधे डिजिटल वॉलेट्स का सहारा ले रहा है, जिनका ट्रैक रिकॉर्ड रखना मुश्किल होता है।
रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि इन आतंकी संगठनों का अंतिम लक्ष्य केवल धन जुटाना नहीं, बल्कि एक कट्टरपंथी विचारधारा को वैश्विक स्तर पर स्थापित करना है। मानवीय गतिविधियों, मस्जिदों और युद्ध प्रभावित क्षेत्रों के बहाने जुटाया गया यह भीख का पैसा अंततः वैश्विक सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बनता जा रहा है।
ऑक्सफोर्ड की रिपोर्ट: 2050 तक गर्मी से उबलने लगेगी धरती, 4 अरब लोगों का मिट जाएगा अस्तित्व!
1 Feb, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लंदन। सूरज की तपिश आने वाले दशकों में इस कदर कहर बरपाएगी कि इंसानी बस्तियां भट्टी में तब्दील हो जाएंगी। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की एक ताजा और बेहद चिंताजनक रिसर्च के अनुसार, वर्ष 2050 तक दुनिया की लगभग 40 प्रतिशत आबादी, यानी करीब 4 अरब लोग ऐसी जानलेवा गर्मी का सामना करेंगे, जिसे सह पाना मानव शरीर के लिए नामुमकिन होगा और उनका अस्तित्व पर संकट आ जाएगा। वैज्ञानिकों ने इस रिपोर्ट को 2026 की सबसे खौफनाक चेतावनी बताते हुए स्पष्ट किया है कि हम एक ऐसे भविष्य की ओर बढ़ रहे हैं जहां धरती पानी की तरह उबलने लगेगी।
ऑक्सफोर्ड के वैज्ञानिकों ने विशेष रूप से भारत, नाइजीरिया और इंडोनेशिया के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इन देशों में गर्मी का सबसे वीभत्स रूप देखने को मिलेगा। जब पारा 45 से 50 डिग्री सेल्सियस को पार कर जाएगा, तब मानव शरीर के अंदरूनी अंग खुद को ठंडा रख पाने में विफल होने लगेंगे, जिससे बड़े पैमाने पर ऑर्गन फेलियर का खतरा बढ़ जाएगा। भारत के संदर्भ में यह स्थिति और भी भयावह है क्योंकि यहां की एक विशाल आबादी के पास एयर कंडीशनिंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि आने वाले समय में गर्मी से होने वाली मौतों का आंकड़ा किसी बड़ी सुनामी की तरह विनाशकारी होगा।
आंकड़े बताते हैं कि साल 2010 में जहां केवल 1.5 अरब लोग इस खतरे के दायरे में थे, वहीं 2050 तक यह संख्या दोगुनी से भी अधिक होकर 3.8 अरब तक पहुंच जाएगी। यह संकट केवल गर्म देशों तक सीमित नहीं रहेगा। रूस, कनाडा और फिनलैंड जैसे ठंडे देशों के लिए भी यह गैस चैंबर जैसी स्थिति पैदा करेगा। इन देशों के घर और बुनियादी ढांचा सर्दी से बचाव के लिए बने हैं, जो भीषण गर्मी को सोखकर घरों के अंदर का तापमान और अधिक बढ़ा देंगे। ऑक्सफोर्ड की प्रमुख शोधकर्ता राधिका खोसला ने चेतावनी दी है कि यदि वैश्विक तापमान में 1.5 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि की सीमा पार होती है, तो शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि व्यवस्था पूरी तरह चरमरा जाएगी। फसलें जलकर राख हो जाएंगी, जिससे वैश्विक स्तर पर भुखमरी और खाद्य संकट पैदा होगा। रिपोर्ट के अनुसार, रहने लायक सुरक्षित ठिकानों की तलाश में करोड़ों लोग पलायन करने को मजबूर होंगे, जिससे दुनिया भर में सामाजिक और आर्थिक अस्थिरता पैदा होगी। यह रिपोर्ट स्पष्ट संदेश देती है कि यदि अभी कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाला समय केवल आग और धुएं की पहचान बनकर रह जाएगा।
एपस्टीन फाइल्स में अमेरिकी राष्ट्रपति को लेकर किया दावा, इजराइल के दबाव में थे ट्रंप
1 Feb, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। जेफरी एपस्टीन से जुड़े दस्तावेज के नए बैच में कई गंभीर और सनसनीखेज आरोप सामने आए हैं। एफबीआई की रिपोर्ट में एक विश्वसनीय गोपनीय सूत्र के हवाले से दावा किया गया है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर इजराइल का दबाव था। रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया है कि ट्रंप के दामाद जैरेड कुशनर का ट्रंप के कारोबारी समूह और राष्ट्रपति पद के कामकाज में दोनों पर जरूरत से ज्यादा दखल था। यह भी कहा गया है कि कुशनर के परिवार के कथित तौर पर भ्रष्टाचार, रूसी पैसों के लेनदेन और कट्टर यहूदी चबाड नेटवर्क से संबंध रहे हैं।
रिपोर्ट में यह आरोप भी लगाया गया है कि जेफरी एपस्टीन के वकील को इजराइली की मोसाद ने प्रभावशाली छात्रों को प्रभावित करने के लिए अपने पक्ष में कर लिया था। रिपोर्ट में कुशनर के पारिवारिक इतिहास का भी जिक्र है। इसमें कहा गया है कि उनके पिता को पहले वित्तीय मामलों में दोषी ठहराया गया था, लेकिन बाद में डोनाल्ड ट्रंप ने उन्हें राष्ट्रपति क्षमा दे दी थी।
अमेरिकी न्याय विभाग की ओर से जारी दस्तावेजों में सामने आया कि टेस्ला के मालिक एलन मस्क और जेफरी एपस्टीन के बीच ईमेल पर हुई बातचीत पहले मानी जा रही जानकारी से कहीं ज्यादा विस्तृत थी। इन ईमेल में एपस्टीन ने मस्क को अमेरिकी वर्जिन आइलैंड्स स्थित अपने निजी द्वीप पर आने का न्योता दिया था और संभावित तारीखों, यात्रा की व्यवस्था और मुलाकातों पर चर्चा की थी। हालांकि यह साफ नहीं है कि मस्क कभी वहां गए या नहीं।
दस्तावेज में माइक्रोसॉफ्ट के को-फाउंडर बिल गेट्स को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। दस्तावेजों में दावा किया गया है कि रूसी महिलाओं के साथ संबंध बनाने के बाद गेट्स को यौन रोग हो गया था। इनमें यह भी दावा किया गया है कि उन्होंने चुपचाप अपनी उस समय की पत्नी मेलिंडा गेट्स को देने के लिए एंटीबायोटिक दवाएं मांगी थीं। ये दावे एपस्टीन की ओर से 2013 में खुद को लिखे गए ईमेल में दर्ज बताए गए हैं और शुक्रवार को अमेरिकी न्याय विभाग की ओर से जारी किए गए लाखों दस्तावेजों का हिस्सा हैं। हालांकि इन सभी आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
अमेरिका ने जारी कीं नई फाइलें, भारतीय फिल्म निर्देशक मीरा नायर और मस्क के नामों का खुलासा
31 Jan, 2026 05:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिकी न्याय विभाग (जस्टिस डिपार्टमेंट) द्वारा शुक्रवार देर रात जेफ्री एपस्टीन सेक्स स्कैंडल से संबंधित नई गोपनीय फाइलों को सार्वजनिक किए जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हड़कंप मच गया है। इन फाइलों में लाखों पन्ने, हजारों तस्वीरें शामिल हैं, जो दुनिया के कई प्रभावशाली व्यक्तियों के एपस्टीन और उसकी सहयोगी गिस्लीन मैक्सवेल के साथ संबंधों पर नई रोशनी डालते हैं। इस ताजा खुलासे में प्रसिद्ध भारतीय फिल्म निर्देशक मीरा नायर और टेस्ला के सीईओ इलॉन मस्क का नाम भी सामने आया है।
दस्तावेजों के अनुसार, अमेरिकी फिल्म पब्लिसिस्ट पेगी सीगल ने 21 अक्टूबर 2009 को जेफ्री एपस्टीन को एक ईमेल भेजा था। इस ईमेल में पेगी ने गिस्लीन मैक्सवेल के मैनहट्टन स्थित टाउनहाउस में आयोजित एक आफ्टर-पार्टी का जिक्र किया है। यह पार्टी मीरा नायर की 2009 में रिलीज हुई फिल्म एमेलिया की स्क्रीनिंग के उपलक्ष्य में रखी गई थी। इस फिल्म में हिलेरी स्वैंक और रिचर्ड गियर जैसे बड़े सितारों ने काम किया था। ईमेल में बताया गया है कि इस पार्टी में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन, अमेजन के संस्थापक जेफ बेजोस और खुद मीरा नायर समेत कई हाई-प्रोफाइल हस्तियां मौजूद थीं। गौरतलब है कि मीरा नायर न्यूयॉर्क के राजनेता जोहरान ममदानी की मां हैं और सिनेमा जगत का एक प्रतिष्ठित चेहरा हैं।
इन नई फाइलों में कुल 30 लाख पेज, 1 लाख 80 हजार तस्वीरें और 2 हजार से ज्यादा वीडियो शामिल हैं, जो इस स्कैंडल की व्यापकता को दर्शाते हैं। इसके अलावा, दस्तावेजों में इलॉन मस्क और एपस्टीन के बीच 2012 और 2013 के दौरान हुए ईमेल संवादों का भी विवरण है। इन ईमेल से पता चलता है कि एपस्टीन ने मस्क को अपने निजी द्वीप पर आने के लिए कई बार आमंत्रित किया था। एपस्टीन ने मस्क के साथ यात्रा की तारीखों, हेलीकॉप्टर व्यवस्था और वहां होने वाली पार्टियों के बारे में विस्तृत चर्चा की थी। ईमेल संवाद के अनुसार, नवंबर 2012 में एपस्टीन ने मस्क से पूछा था कि द्वीप पर आने के लिए हेलीकॉप्टर में कितने लोग होंगे, जिस पर मस्क ने जवाब दिया था कि शायद केवल वे और उनकी तत्कालीन पत्नी तलुला रिले आएंगे। इसी बातचीत के दौरान मस्क ने उत्सुकतापूर्वक पूछा था, आपके द्वीप पर सबसे जंगली (वाइल्डेस्ट) पार्टी किस दिन होगी? इसके बाद 2013 में भी दोनों के बीच यात्रा के समय को लेकर ईमेल का आदान-प्रदान हुआ था।
हालांकि, जारी किए गए इन दस्तावेजों में इस बात की कोई पुख्ता पुष्टि नहीं हुई है कि इलॉन मस्क वास्तव में कभी उस द्वीप पर गए थे। मस्क पहले भी सार्वजनिक रूप से इन दावों का खंडन कर चुके हैं। पिछले वर्ष जब उनका नाम प्रारंभिक फाइलों में आया था, तब उन्होंने स्पष्ट किया था कि एपस्टीन ने उन्हें बुलाने की कोशिश जरूर की थी, लेकिन उन्होंने कभी उसका निमंत्रण स्वीकार नहीं किया। एपस्टीन केस से जुड़ी ये नई फाइलें आने वाले दिनों में कई और रसूखदार लोगों की मुश्किलों को बढ़ा सकती हैं।
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