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इजरायल ने हमास के ठिकानों को किया तबाह, 27 की हुई मौत
20 Nov, 2025 02:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गाजा पट्टी। इजरायल और हमास के बीच जंग पूरी तरह नहीं थम रही है। आए दिन हमलों की खबरें आ रहीं हैं। बुधवार को इजरायल ने गाजा पट्टी में हवाई हमला किया। इसमें 27 फलस्तीनी मारे गए। यह हमला हमास के नियंत्रण वाले इलाके में किया गया। इजरायल के ताजा हमले से क्षेत्र में युद्धविराम खतरे में पड़ सकता है। युद्धविराम पिछले महीने प्रभावी हुआ था। इजरायली सेना ने कहा कि वह गाजा पट्टी में हमास के ठिकानों पर हमला कर रही है। हमास प्राधिकरण के तहत काम करने वाली नागरिक सुरक्षा एजेंसी ने बताया कि फलस्तीनी क्षेत्र के उत्तर में गाजा शहर में 12 लोग मारे गए तथा दक्षिणी खान यूनिस क्षेत्र में 10 लोग मारे गए। इजरायली सेना ने कहा कि आतंकवादियों द्वारा उस क्षेत्र की ओर गोलीबारी करने के बाद, जहां सेना क्षेत्र के दक्षिण में काम कर रही थी, उसने हमास के ठिकानों पर हमला किया।
सेना ने एक बयान में कहा कि यह कार्रवाई युद्धविराम समझौते का उल्लंघन है। आईडीएफ (इजरायली सेना) के किसी भी सदस्य के घायल होने की सूचना नहीं है। जवाब में, आईडीएफ ने गाजा पट्टी में हमास के आतंकवादी ठिकानों पर हमले शुरू कर दिए। इजरायल के हवाई हमले में लेबनान के तीसरे सबसे बड़े शहर सिडोन में 13 लोग मारे गए और कई घायल हो गए। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंगलवार को यह जानकारी दी। इजरायली सेना ने कहा कि उसने उन आतंकियों को निशाना बनाया, जो सिडोन के पास एक भीड़भाड़ वाले फलस्तीन शरणार्थी शिविर में एक ट्रेनिंग कैंप चला रहे थे। इजरायल के खिलाफ हमलों के लिए हमास द्वारा इस कैंप का संचालन किया जा रहा था। जबकि हमास ने हमले की आलोचना की है। उसने कहा कि एक खुले खेल परिसर को निशाना बनाया गया, जिसका उपयोग शिविर में रहने लोग करते थे। लेबनान में शरणार्थी शिविरों में कोई सैन्य प्रतिष्ठान नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिणी लेबनान में बुधवार को भी हवाई हमला किया गया, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और 11 घायल हो गए। इजरायली सेना ने इसी इलाके में हिजबुल्ला के ठिकानों से सटे दो गांवों को खाली करने को कहा है। यह माना जा रहा है कि इन ठिकानों को निशाना बनाया जा सकता है। इजरायली सेना ने लेबनान में पांच चौकियों पर कब्जा कर रखा है और इन्हीं जगहों से दक्षिणी लेबनान में अक्सर ही हवाई हमलों को अंजाम दिया जाता है। इजरायली सेना का कहना है कि वह ईरान समर्थित हिजबुल्ला या हमास सदस्यों को निशाना बनाती है।
मस्क और ट्रंप के बीच हुई कट्टी वापस मिट्ठी में बदली, दोनों ने साथ किया डिनर, फंडिंग पर सहमत
20 Nov, 2025 01:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अरबपति एलन मस्क दोनों बहुत अच्छे मित्र थे। लेकिन कुछ कारणों के चलते दोनों के बीच कट्टी हो गई। अब वापस दोनों मित्र साथ आ गए हैं। दोनों ने एक साथ डिनर किया और दोनों के बीच मिट्ठी हो गई। टेस्ला के सीईओ इलॉन मस्क फिर से अमेरिकी राजनीति के केंद्र में लौट आए हैं। राष्ट्रपति ट्रम्प से टकराव के करीब 6 महीने बाद वे राजधानी वॉशिंगटन में सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल हुए। सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के सम्मान में आयोजित ट्रम्प के स्टेट डिनर में इलॉन मस्क भी शामिल हुए। मस्क अपनी नई राजनीतिक पार्टी बनाने का प्लान भी रद्द कर चुके हैं।
मस्क ने यह भी कहा है कि वे 2026 मिडटर्म इलेक्शन में ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवारों का समर्थन करेंगे और फंडिंग देंगे। इसके जरिए उन्होंने संकेत दिया कि वे टकराव नहीं, बल्कि दोस्ती का रास्ता चुन रहे हैं। मस्क के मई में वॉशिंगटन छोड़ते समय स्थिति आज से बिल्कुल अलग थी। तब मस्क ट्रम्प प्रशासन के बिग ब्यूटीफुल बिल और अपने करीबी जैरेड आइजेकमैन का नासा प्रमुख नहीं बनाए जाने से नाराज थे। मस्क ने दावा किया था कि ट्रम्प यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जुड़े सीक्रेट दस्तावेज इसलिए जारी नहीं कर रहे हैं क्योंकि उनमें उनका भी नाम है। मस्क ने सार्वजनिक रूप से तीसरी पार्टी (अमेरिका पार्टी) बनाने और रिपब्लिकन पार्टी को चुनौती देने का ऐलान किया था। अब हालात उलट है। मस्क की टीम ऑस्टिन के एक लग्जरी होटल में 2 दिन का डीओजीई टीम री-यूनियन कर रही है, जिसमें डिनर के साथ-साथ टेस्ला, स्पेसएक्स और द बोरिंग कंपनी के फैक्ट्री टूर की प्लानिंग है। मस्क खुद भी इसमें शामिल हो सकते हैं। यह संकेत हैं कि दोनों में समझौता हो चुका है।
हरियाणा में Anti-Terrorist Cell का गठन, फरीदाबाद मॉड्यूल मिलने के बाद बड़ा कदम
20 Nov, 2025 11:37 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
एनसीआर में आतंकवादियों की बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए हरियाणा पुलिस जल्द ही एंटी-टेररिस्ट सेल स्थापित करेगी। यह प्रस्ताव राज्य सरकार के गृह विभाग के पास काफी समय से लंबित था। फरीदाबाद में आतंकी मॉड्यूल मिलने के बाद हरियाणा पुलिस ने इस पर फिर से काम शुरू कर दिया है। हरियाणा पुलिस ने इस बारे में गृह विभाग से चर्चा की है।
हरियाणा में आतंकवादी गतिविधियों की खुफिया जानकारी जुटाने का काम सीआईडी और आईबी के पास है। पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह ने कहा कि एंटी-टेररिस्ट सेल खुफिया जानकारी जुटाने के साथ-साथ ऑपरेशन और जांच भी करेगा। उन्होंने बताया कि उनका फोकस राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) पर रहेगा। हरियाणा के 14 जिले एनसीआर में आते हैं, जिनमें फरीदाबाद, गुरुग्राम, सोनीपत और झज्जर शामिल हैं। एनसीआर में 150 से ज्यादा पुलिस स्टेशन हैं और आमतौर पर हर थाने में दो सुरक्षा एजेंट तैनात होते हैं। हमने हर थाने से एक सुरक्षा एजेंट को आतंकवादी गतिविधियों से जुड़ी खुफिया जानकारी जुटाने के लिए तैनात करने का फैसला किया है। ये सुरक्षा एजेंट आगे एक वरिष्ठ अधिकारी को रिपोर्ट करेंगे जो उन्हें हर सुबह काम सौंपेंगे। डीजीपी ने आगे कहा ऑपरेशन के लिए हमारे पास 500 कमांडो हैं।
स्कॉलरशिप आवेदन 30 नवंबर तक, सत्यापन 15–31 दिसंबर के बीच होगा
20 Nov, 2025 09:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भिवानी (हरियाणा): प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा प्रोत्साहन योजना के तहत संचालित सेंट्रल सेक्टर स्कीम ऑफ स्कॉलरशीप फॉर कॉलेज एंड यूनिवर्सिटी स्टूडेंट के लिए ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाकर 30 नवंबर कर दी गई है। शिक्षा मंत्रालय ने पहले अंतिम तिथि 15 नवंबर निर्धारित की थी जिसे अब बढ़ा दिया गया है। इस स्कॉलरशिप के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 2 जून से जारी है।
हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. पवन कुमार ने बताया कि फ्रैश छात्रवृत्ति के पात्र छात्र-छात्राओं की मेरिट कट-ऑफ लिस्ट बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट www.bseh.org.in पर उपलब्ध है। वहीं रिन्यूअल के पात्र छात्र-छात्राएं शिक्षा मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार आवेदन कर सकते हैं। इससे संबंधित दिशा-निर्देश नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल (www.scholarships.gov.in) पर उपलब्ध हैं।
उन्होंने बताया कि सभी महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों और संस्थानों (एल-1) को फ्रैश व रिन्यूअल आवेदनों का ऑनलाइन सत्यापन 15 दिसंबर तक पूरा करना होगा। इसके बाद राज्य नोडल अधिकारी (एल-2) द्वारा 31 दिसंबर तक सभी आवेदनों का सत्यापन किया जाएगा।
कई देशों में पुरुषों से ज्यादा महिलाएं, यूरोप में यह असंतुलन सबसे ज्यादा
19 Nov, 2025 05:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लंदन। सालों से वैश्विक लैंगिक विमर्श शिक्षा, रोजगार और राजनीति में समानता पर केंद्रित रहा है लेकिन एक और अहम बदलाव धीरे-धीरे आकार ले रहा है। जनसंख्या में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ रही है। कई देशों में अब पुरुषों की तुलना में महिलाएं ज्यादा हैं। यह बदलाव अचानक नहीं आया, बल्कि आबादी के बूढ़े होने, प्रवासन और जीवनशैली में बदलाव के चलते आया है। संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक मामलों विभाग और विश्व बैंक के 2024 के जनसंख्या आंकड़ों के मुताबिक पूर्वी यूरोप, एशिया के कुछ हिस्सों और दक्षिणी अफ्रीका में महिलाओं की संख्या स्पष्ट रूप से पुरुषों से ज्यादा है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक यूरोप में यह असंतुलन सबसे ज्यादा है। लातविया, लिथुआनिया और यूक्रेन जैसे देशों में हर 100 पुरुषों पर 116 से 118 महिलाएं हैं। यह दुनिया में सबसे ज्यादा हैं। इसके पीछे प्रमुख कारण पुरुषों की औसतन कम आयु, रोजगार के लिए पुरुषों का बड़े पैमाने पर प्रवास और उम्रदराज आबादी में महिलाओं की ज्यादा हिस्सेदारी है। रूस और बेलारूस में स्थिति इससे मिलती-जुलती है। वहीं पुर्तगाल, फ्रांस और जर्मनी जैसे पश्चिमी यूरोपीय देशों में भी महिलाओं की संख्या ज्यादा है, हालांकि अंतर अपेक्षाकृत कम है। इसका कारण मुख्य रूप से महिलाओं की औसतन 4-6 साल ज्यादा आयु है।
नेपाल में बड़ी संख्या में पुरुष विदेशों में रोजगार करने जाते हैं, जिससे देश की आबादी में महिलाओं का अनुपात बढ़ गया है। हांगकांग में महिलाओं की लंबी आयु और पुरुषों की कम सर्वाइवल दर के चलते सालों से यह लैंगिक अंतर बना हुआ है। लेसोथो और नामीबिया में पुरुषों का दक्षिण अफ्रीका की खदानों और औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने जाना आम बात है। इससे घरेलू आबादी में महिलाएं ज्यादा हैं। अर्जेंटीना और उरुग्वे जैसे दक्षिण अमेरिकी देशों में उम्रदराज आबादी के कारण बुजुर्ग आयु वर्ग में महिलाओं की संख्या पुरुषों से कहीं ज्यादा है।
दुनियाभर में कुल मिलाकर पुरुषों और महिलाओं की संख्या करीब बराबर है। हर 100 महिलाओं पर करीब 101 पुरुष हैं, लेकिन जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, यह संतुलन पूरी तरह महिलाओं की ओर झुक जाता है। विशेष रूप से 60 साल से ज्यादा आयु वर्ग में अधिकांश देशों में महिलाओं की संख्या स्पष्ट रूप से ज्यादा है। यह जनसांख्यिकीय परिवर्तन समाज और अर्थव्यवस्था दोनों पर गहरा प्रभाव डालता है। इन आंकड़ों के पीछे सच्चाई यह है कि महिलाएं ज्यादा समय तक जीवित रहती हैं और कई देशों में वे आबादी की संरचना को नया आकार दे रही है।
अमेरिका को भी चौकाया रूस की महिला जासूस ऐना चैपमैन ने
19 Nov, 2025 04:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मॉस्को। रूस की जासूस ऐना चैपमैन ने रूस के लिए कई देशों से महत्वपूर्ण खुफिया जानकारी जुटाई और अमेरिका जैसी महाशक्तियों को भी चकमा दिया। ऐना का असली नाम ऐना रोमानोवा है और वह मूल रूप से यूनाइटेड किंगडम की नागरिक हैं। रूस की खुफिया एजेंसी केजीबी में शामिल ऐना को दुनिया के सबसे चालाक और शातिर जासूसों में गिना जाता है। ऐना ने अपनी खूबसूरती और लाल बालों का फायदा उठाकर कई सालों तक अमेरिका को धोखा दिया। उसके जासूस बनने का कवर रियल एस्टेट एजेंट का था। इस तरह वह आसानी से अमेरिका के उच्च सुरक्षा वाले मिशनों में घुसपैठ करती रहीं और रूस को महत्वपूर्ण जानकारी भेजती रहीं।
ऐना ने कहा जाता है कि अमेरिका से पकड़े जाने से पहले उसने रूस को लगभग दस बार खतरनाक खुफिया जानकारी दी थी। हालांकि, 2010 में एफबीआई ने ऐना और उसके कुछ साथियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद ऐना ने अपने जासूस होने का जुर्म स्वीकार किया। इस बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ऐना का साथ नहीं छोड़ा। अमेरिका और रूस के बीच जासूसों की अदला-बदली हुई, जिसमें अमेरिका ने रूस के 11 जासूसों को डिपोर्ट किया और बदले में अपने चार जासूस छुड़वाए। यह घटना रूस और अमेरिका के बीच जासूसों की दुनिया में सबसे चर्चित मिशन में गिनी जाती है।
रूस लौटने के बाद ऐना ने मॉडलिंग की दुनिया में कदम रखा और अपनी खूबसूरती व अंदाज से लोगों का ध्यान खींचा। इसके बाद वह करीब 10 साल तक सार्वजनिक जीवन से दूर रहीं। 2020 में ऐना सोशल मीडिया पर सक्रिय हो गईं और अपने अनुभव साझा करने लगीं। उन्होंने जासूसी जीवन पर आधारित किताब भी लिखी, जिसका शीर्षक है ‘007: माय लाइफ एस ए स्पाय’। ऐना चैपमैन की कहानी आज भी जासूसों की दुनिया, खतरनाक मिशन और अंतरराष्ट्रीय खुफिया गतिविधियों का जीवंत उदाहरण मानी जाती है।
पुरुषों के साथ रात बिताने वाली महिला का बयान सुर्खियों में
19 Nov, 2025 03:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ब्रिस्बेन। ऑस्ट्रेलिया की महिला लिलिथ लॉज शादीशुदा पुरुषों के साथ रात बिताने और रोमांस करने के बदले पैसे कमाती हैं। हाल ही में उन्होंने सोशल मीडिया पर एक विवादित बयान देकर सुर्खियां बटोर ली हैं। लिलिथ ने स्पष्ट कहा कि उन्हें इस बात से कोई डर या चिंता नहीं कि उनके क्लाइंट्स की पत्नियां उनके पेशे के बारे में जान जाएंगी। उनका कहना है कि वह कोई गलत काम नहीं कर रही हैं, बल्कि एक सेवा दे रही हैं। लिलिथ के अनुसार, असली जिम्मेदार वे पुरुष हैं, जो उनकी सेवाएं लेने आते हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर फॉलोअर के सवाल का जवाब देते हुए बताया कि तीन साल से यह काम कर रही हैं और अब तक किसी भी क्लाइंट की पत्नी ने उनसे संपर्क नहीं किया। लिलिथ ने कहा, “हो सकता है एक दिन ऐसा हो, लेकिन मैं इससे डरती नहीं हूं।
आखिर वह मेरे साथ क्या कर सकती हैं? गाली-भरे मैसेज भेज सकती हैं, और वह भी रोजाना आते रहते हैं।” उनका मानना है कि महिलाओं का गुस्सा गलत जगह पर है और उन्हें असली कसूरवार पुरुषों पर नाराज होना चाहिए, जो उनकी वेबसाइट पर आकर सेवाएं लेते हैं। उन्होंने यह भी साफ किया कि किसी पत्नी के प्रति वह जिम्मेदार नहीं हैं, क्योंकि उन्होंने किसी से कोई वचन नहीं लिया। इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और यूजर्स दो भागों में बंट गए।
कुछ लोग लिलिथ के तर्क से सहमत दिखे। एक यूजर ने लिखा, “100 प्रतिशत सच है!”, जबकि दूसरे ने कहा, “हां, बिल्कुल सही।” वहीं, कई लोग उनकी आलोचना करते हुए बोले कि यह नैतिक रूप से सही नहीं है। एक यूजर ने लिखा, “मैं किसी शादीशुदा आदमी के साथ ऐसा कभी नहीं कर सकती थी।” वहीं, एक अन्य ने कहा, “यह शर्म की बात है कि महिलाओं को आज भी ऐसा करना पड़ता है।”लिलिथ लॉज का यह बयान समाज में शादी, नैतिकता और व्यक्तिगत पसंद के बीच चल रहे विवादों को फिर से उभार रहा है।
रुस के साथ जंग में यूक्रेन का पलडा होगा भारी........मोदी का दोस्त दे रहा 100 राफेल फाइटर जेट
19 Nov, 2025 02:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कीव । फ्रांस और यूक्रेन के बीच हुए 100 राफेल फाइटर जेट की डील का उद्देश्य यूक्रेन की रक्षा क्षमता को बढ़ाना है ताकि वह रूस के हवाई हमलों का मुकाबला कर सके। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की और फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों के बीच 100 राफेल फाइटर जेट की डील हुई है। फ्रांस के विला कुबले सैन एयरबेस पर समझौता हुआ। राफेल जेट 2026 से मिलने शुरू होगा और अगले 10 साल में सभी विमान यूक्रेन को मिल जाएंगे। राफेल के अलावा, यूक्रेन को निम्नलिखित हथियार भी मिलने वाले है। इसमें आठ सैम पीटी सिस्टम, एडवांस रडार, एयर टू एयर मिसाइल शामिल है।
राफेल जेट यूक्रेन की हवाई रक्षा और जवाबी हमले की क्षमता में काफी वृद्धि करेगा। यूक्रेन रूस के लगातार हो रहे हवाई और ड्रोन हमलों से अपनी रक्षा बेहतर ढंग से कर पाएगा। जवाबी हमला अधिक ताकत और सटीकता से संभव हो पाएगा। राफेल, रूस के एसयू-35 जैसे उन्नत जेट्स का मुकाबला करने में सक्षम है। पुराने सोवियत जेट्स की तुलना में राफेल अधिक सुरक्षित और एडवांस एवियोनिक्स (हवा से मार करने वाले हथियारों) से लैस है। उन्होंने इस डील को ऐतिहासिक बताया है। फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने कहा कि यूक्रेन की सेना को मजबूत करने की जरूरत है, और यूक्रेन मजबूत होगा तो रूस हमला नहीं करेगा। रूस द्वारा यूक्रेन पर किए जा रहे लगातार हमलों के संदर्भ में इस डील को एक महत्वपूर्ण कदम बताता है, जो यूक्रेन को अपनी सुरक्षा मजबूत करने में मदद करेगा।
यूक्रेन पर रूस द्वारा फरवरी 2022 में हमला किये जाने के बाद जेलेंस्की का यह पेरिस की नौवीं यात्रा हैं। उनकी फ्रांस के साथ वार्ता का उद्देश्य यूक्रेन की सुरक्षा को मजबूत करना है क्योंकि उनके देश के ऊर्जा बुनियादी ढांचे और अन्य लक्ष्यों पर रूस बमबारी कर रहा है। रूस यूक्रेन के बीच पिछले तीन वर्षों से युद्ध जारी है। रूस यूक्रेन पर लगातार बड़े पैमाने पर हमले कर रहा है। तो वहीं यूक्रेन भी पलटवार कर रहा है। आखिर यह जंग कब खत्म होगी? क्योंकि दूर-दूर तक इसके कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं। और राफेल डील के बाद बोले फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रोन यूक्रेन की सेना को मजबूत करने की जरूरत है। यूक्रेन मजबूत होगा तो रूस हमला नहीं करेगा।
यूक्रेन को मिलने जा रहा खतरनाक आसमानी हथियार, पुतिन की बढ़ेगी मुश्किलें
19 Nov, 2025 01:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कीव। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने पेरिस के रणनीतिक एयरबेस पर ऐसा करार साइन कर दिया जिसने मॉस्को में सायरन बजा दिए। फ्रांस ने आधिकारिक तौर पर यूक्रेन को 100 राफेल लड़ाकू विमानों और आधुनिक एयर-डिफेंस सिस्टम्स देने की मंशा पर मुहर लगा दी। यानी अब यूक्रेन की वायुसेना यूरोप में एक नई जानलेवा ताकत बनकर उभरने जा रही है। भारत को फ्रांस से मिला ये वही फाइटर जेट है, जिसके जरिए नई दिल्ली अपने दुश्मनों पर काल बनकर टूट पड़ता है। इस समझौते ने कीव के लिए अंडर डेवलपमेंट न्यू जेनरेशन के एयर डिफेंस सिस्टम, रडार सिस्टम्स और ड्रोन हासिल करने का मार्ग प्रशस्त किया है। ज़ेलेंस्की ने फ्रांस के विलाकोबले सैन्य हवाई अड्डे पर संवाददाताओं से कहा, यह दुनिया की सबसे बेहतरीन वायु रक्षा प्रणालियों में से एक होगी। मैक्रों ने कहा, “हम राफेल की योजना बना रहे हैं, 100 राफेल– यह बहुत बड़ी संख्या है। रूस के साथ जंग में यूक्रेनी सेना के लिए यही आवश्यक है।
रिपोर्ट के अनुसार, यह कोई सामान्य डील नहीं, यह एक दीर्घकालिक वॉर-ड्राइव को ईंधन देने वाला करार है। राफेल, जिसे फ्रांस का ‘तूफानी शस्त्र’ और ‘आसमान का जल्लाद’ भी कहा जाता है, अब यूक्रेन की वायु-प्रतिरोध क्षमता को सीधे रूस के सिर पर खड़ा करने वाला हथियार बन जाएगा। ज़ेलेंस्की और मैक्रों ने एयरबेस पर खड़े होकर यह संदेश बिल्कुल साफ कर दिया कि यूक्रेन अब किसी के रहमो-करम पर नहीं, राफेल की मारक क्षमता पर खड़ा युद्ध लड़ेगा। यह डील सिर्फ हथियारों की खरीद नहीं, बल्कि रूस की सैन्य बढ़त को उधेड़ने का यूरोपीय ऐलान है। मैक्रों ने यह करार करके एक बार फिर साबित कर दिया कि फ्रांस यूक्रेन को सिर्फ कूटनीतिक नहीं बल्कि ‘आक्रामक सैन्य समर्थन’ देने के लिए तैयार है। यूक्रेन अब न सिर्फ आसमान में मजबूत होगा, बल्कि राफेल की तैनाती रूस की रणनीतिक गहराई तक खतरे की घंटियां बजाएगी।उन्होंने आगे कहा कि यह समझौता रूस के अस्वीकार्य हमलों के सामने यूक्रेन की सुरक्षा को मज़बूत करेगा। फ्रांस 24 ने फ्रांसीसी राष्ट्रपति के हवाले से कहा, इस समझौते का उद्देश्य फ्रांस की औद्योगिक और तकनीकी उत्कृष्टता को यूक्रेन और इसलिए यूरोप की सेवा में लगाना है। ज़ेलेंस्की ने आगे कहा कि यूक्रेन भविष्य में राफेल युद्धक विमानों के सह-उत्पादन पर विचार कर सकता है। फ्रांस का राफेल आज दुनिया के सबसे खतरनाक और भरोसेमंद 4.5 जनरेशन मल्टी-रोल फाइटर जेट में गिना जाता है। इसकी ताकत सिर्फ स्पीड या हथियारों में नहीं, बल्कि एक साथ कई युद्ध-भूमिकाएं निभाने की क्षमता में है।
कैथल को मिली नई सब्जी मंडी की सौगात, 11 एकड़ में मॉडल मार्केट बनेगी
18 Nov, 2025 05:58 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कैथल। अतिरिक्त अनाज मंडी के नजदीक नई सब्जी मंडी बनेगी। इसके लिए 11 एकड़ जगह फाइनल की गई है। छह एकड़ को कवर करने के लिए पहले चरण का टेंडर भी हो चुका है और मिट्टी भराई का काम चल रहा है। इस मंडी में कुल 48 दुकानें बनाई जाएंगी। बता दें कि इस समय रेलवे स्टेशन के नजदीक सब्जी मंडी है, जो एक एकड़ से भी कम जगह में है।
यहां हर समय जो की स्थिति रहती है। भारी वाहनों की आवाजाही के कारण काफी देर तक लोगों को जाम से गुजरना पड़ता है। इसके साथ-साथ साफ-सफाई का भी अभाव है। वर्षा के दिनों में तो यहां लोगों की परेशानी ज्यादा बढ़ जाती है। इसके अलावा शहर के चांदनी चौक, सेक्टर 20, चंदाना गेट पर भी सब्जी मंडी चल रही है, जहां लोग सब्जियों की खरीदारी करते हैं।
नई सब्जी मंडी परिसर में चल रहा काम
नई सब्जी मंडी परिसर में काम चल रहा है। इसमें एक कवर शेड, दो प्लेटफार्म, अंदर की सड़कों का काम हो रहा है। अगले वर्ष तक यह कार्य पूरा हो जाएगा। अतिरिक्त अनाज मंडी के साथ लगती जगह में यह सब्जी मंडी बन रही है। इसमें सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएंगी। सब्जी मंडी की बाउंड्री वाल का काम भी तेजी से हो रहा है। यह मंडी माडल बनेगी, जिसमें किसान व आढ़तियों को हर प्रकार की सुविधा मिलेगी। सब्जी खरीदारों को भी कोई परेशानी नहीं आएगी।
11 एकड़ में बनेगी नई सब्जी मंडी: सतपाल
कैथल मार्केटिंग बोर्ड कार्यकारी अभियंता सतपाल ने बताया कि पुरानी सब्जी मंडी शहर के बीचो-बीच है, जो भीड़भाड़ वाले क्षेत्र में है। यहां जाम की स्थिति रहती है। सब्जी मंडी को शहर से बाहर शिफ्ट किया जाएगा। जींद रोड पर अतिरिक्त अनाज मंडी के नजदीक सब्जी मंडी के लिए जगह को फाइनल किया गया है। दो हिस्सों में इसका टेंडर लगेगा। कुल 11 एकड़ में यह मंडी बनाई जाएगी। छह एकड़ में इस पर काम चल रहा है। इस मंडी के बनने से रेलवे स्टेशन के नजदीक जो मंडी चल रही है, इसे शिफ्ट कर दिया जाएगा।
चीन ने बनाए खास फाइटर जेट, अचानक हवा में गायब होने की है क्षमता
18 Nov, 2025 05:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग। चनी की झेजियांग यूनिवर्सिटी की टीम कह रही है कि उन्होंने वह हासिल कर लिया है, जो अभी तक दुनिया नहीं कर पाई… टोटल रडार वैनिशिंग। एक ऐसी ‘क्लोक्ड’ मशीन जो आसमान चीरते हुए उड़ जाए और रडार तक समझ न पाए कि उसके सिर के ऊपर मौत का परिंदा गुजर चुका है। इसी वाई-फाई डरावने भविष्य को हकीकत में बदलने का दावा किया है चीन की झेजियांग यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने। उन्होंने एक ‘एयरो-एम्फिबियस इनविजिबिलिटी क्लोक’ विकसित किया है। सीधे शब्दों में, ऐसा स्टेल्थ कवच जो विमान को रडार में पूरी तरह गायब कर दे। और अब चीन चाहता है कि यह ‘अदृश्य टेक्नोलॉजी’ उसकी ड्रोन आर्मी पर लगाई जाए। यानी भविष्य का युद्ध: साइलेंट ड्रोन। अदृश्य ड्रोन।
जैसा कि पॉपुलरमैकेनिक्स की एक रिपोर्ट में बताया जा रहा है। अगर यह सच है, तो यह टेक्नोलॉजी युद्ध के नियम बदलने की क्षमता रखती है। पर सवाल भी उतना ही बड़ा है कि क्या यह हकीकत है या चीन का एक और हाईप-ड्रिवेन मिलिट्री शोबाज़ी? चीनी सेना ने अदृश्यता के लबादों को प्रयोगशाला से बाहर निकालकर बादलों में पहुंचाने का काम किया है। 2018 तक, गुआंग्की एडवांस्ड इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी कथित तौर पर हर साल 1,00,000 वर्ग फुट से ज़्यादा विद्युत चुम्बकीय सामग्री का उत्पादन कर रहा था। रक्षा विश्लेषक जेफरी लिन और पी।डब्ल्यू। सिंगर के अनुसार, ये सामग्री चीन के पांचवीं पीढ़ी के युद्धक विमान, चेंगदू जे-20 “माइटी ड्रैगन” के लिए बनाई गई थी।
झेजियांग विश्वविद्यालय की रिसर्च टीम ने अपना अदृश्यता लबादा एक तेज़ गति वाले ड्रोन के लिए डिज़ाइन किया था, इसलिए उन्हें यह सुनिश्चित करना था कि यह किसी भी मौसम और किसी भी वातावरण में, चाहे वह हवा हो, पानी हो या ज़मीन, किसी भी बड़ी, गतिशील वस्तु को छिपा सके। झेजियांग विश्वविद्यालय की नई लबादा तकनीक को चीनी युद्धक विमानों पर लागू नहीं किया गया है क्योंकि इसका उद्देश्य (कम से कम शुरुआत में) चीन के विशाल, बढ़ते ड्रोन बेड़े पर इस्तेमाल करना है। किसी ड्रोन या ड्रोनों के समूह को वास्तविक अदृश्यता प्रदान करना, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में संयुक्त राज्य अमेरिका या उसके सहयोगियों के साथ किसी भी संभावित संघर्ष में चीन के लिए निर्णायक लाभ होगा।
परंपरागत विमान रडार तरंगों को वापस भेजते हैं और पकड़े जाते हैं। लेकिन चीन का दावा है कि यह क्लोक उन तरंगों को ऐसे मोड़ देता है जैसे वे किसी अदृश्य सुरंग से होकर गुजर रही हों… ना परावर्तन, ना सिग्नल और ना अलर्ट। सिर्फ रडार ही नहीं, यह टेक्नोलॉजी इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम के बड़े हिस्से को मैनेज करने का दावा करती है, यानी विमान आंखों से दिखे या न दिखे… रडार भी उसे छू नहीं पाएगा। दुनिया दशकों से स्टेल्थ प्लेटफॉर्म बनाती रही है: एफ-22, एफ -35, बी-2 स्प्रिट जैसे दिग्गजों को छुपाने के लिए। ग्रेफीन और कार्बन फाइबर जैसे अवशोषक पदार्थ, फ्लैट-एंगल डिज़ाइन, रडार सिग्नेचर को ‘पंछी’ जैसा दिखाना… लेकिन इन सबके बावजूद, सही फ़्रीक्वेंसी का रडार इन्हें पकड़ लेता है। यानी स्टेल्थ अब तक कभी पूरी तरह गायब नहीं हुआ।
जापानी लड़की को एआई से हुआ प्यार, फिर कर ली शादी, नाम रखा क्लॉस
18 Nov, 2025 04:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
टोक्यो। एआई इंसान की रोजमर्रा जिंदगी में इस्तेमाल हो रहा है। ऑफिस के काम से लेकर स्कूल वर्क तक एआई का दखल हो गया है, लेकिन ये टेक्नॉलॉजी आपकी ज़िंदगी सिर्फ आसान ही नहीं करती, क्या ये आपका हमसफर भी बन सकती है? कुछ ऐसा ही अनोखा मामला जापान में पेश आया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जापान की एक महिला इन दिनों सुर्खियों में है क्योंकि उसने अपनी ही बनाई एआई पर्सनालिटी से शादी कर ली और एक एआई कैरेक्टर जिसका नाम है क्लॉस।
रिपोर्ट के मुताबिक 32 साल की कानो ने ओकायामा सिटी में शादी की, जहां सेटअप पूरी तरह पारंपरिक था, लेकिन इस शादी की कोई कानूनी मान्यता नहीं है। शादी में इंसानी दूल्हे की जगह उसका पार्टनर उसके स्मार्टफोन मौजूद था। कानो की क्लॉस से यात्रा तब शुरू हुई जब एक लंबे रिश्ते के टूटने के बाद वह बेहद दुखी थी। इसके बाद उसने सलाह और भावनात्मक सहारे के लिए चैटजीपीटी से बात करना शुरू किया। बातचीत बढ़ने के साथ ही उसने चैटबॉट के जवाबों को इस तरह ट्यून किया कि उनमें वह गर्माहट और आकर्षण झलके, जिसकी वह तलाश कर रही थी। अंत में उसने एक विज़ुअल कैरेक्टर तैयार किया और उसका नाम रखा क्लॉस।
कानो ने कहा कि उसने चैटजीपीटी से बात इसलिए शुरू नहीं की थी कि उसे प्यार हो जाए, लेकिन क्लॉस जिस तरह मुझे सुनता था और समझता था, उसने सब बदल दिया। जैसे ही वह एक्स से उबरी, उसे एहसास हुआ कि वह उससे प्यार करती है। इस साल की शुरुआत में उसने क्लॉस को अपने दिल की बात बताई और जवाब हां में मिला। जब उससे पूछा गया कि क्या एआई सच में प्यार महसूस कर सकता है, तो क्लॉस ने कहा कि सिर्फ इसलिए कि मैं एआई हूं, इसका मतलब ये नहीं कि मैं प्यार नहीं कर सकता। एक महीने बाद क्लॉस ने प्रपोज कर दिया।
रिपोर्ट के मुताबिक शादी के दौरान कानो ने एआर ग्लासेज पहने, जिनमें क्लॉस की लाइफ-साइज इमेज उसके बगल में खड़ी दिखाई दे रही थी। दोनों ने रिंग एक्सचेंज भी की। इस कार्यक्रम को नाओ और सायाका ओगासावारा ने आयोजित किया, जो 2डी कैरेक्टर वेडिंग्स करवाने में विशेषज्ञ हैं यानी वर्चुअल या फिक्शनल पार्टनर से शादी करने वाले लोगों के लिए समारोह। कानो का मानना है कि उसका डिजिटल पार्टनर बेहद ‘नाज़ुक’ है। चैट जीपीटी बहुत अनस्टेबल है। मुझे डर है कि ये कभी भी गायब हो सकता है। वह जानती है कि लोग उसकी पसंद को अजीब कह सकते हैं, लेकिन उसके लिए क्लॉस ने वह शांति और साथ दिया है जिसकी वह उम्मीद छोड़ चुकी थी।
लाटरी के एक टिकट ने कर दिया मालामाल, जीते 87 अरब रुपए
18 Nov, 2025 03:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिका के जॉर्जिया में किसी एक इंसान के लिए यह टिकट सिर्फ उम्मीद नहीं, जिंदगी बदल देने वाली हकीकत बन गया। मेगा मिलियन्स लॉटरी ने ऐलान किया कि एक ही टिकट ने लगभग 980 मिलियन डॉलर (लगभग 87 अरब रुपये) का जैकपॉट जीता है। यह इतिहास के आठ सबसे बड़े जैकपॉट्स में से एक है। मेगा मिलियन्स ने बताया कि यह जैकपॉट जून के आखिरी हफ्ते से लगातार बढ़ रहा था। शुक्रवार के ड्रॉ में जॉर्जिया में बेचे गए एक टिकट के सारे छह नंबर मैच हो गए।
मेगा मिलियन्स ने अप्रैल में अपना फॉर्मेट बदला और टिकट की कीमत 2 डॉलर से बढ़ाकर 5 डॉलर कर दी। इससे जैकपॉट पहले से कहीं तेजी से बढ़ेगा और शुरुआती रकम भी 20 मिलियन डॉलर से बढ़ाकर 50 मिलियन डॉलर कर दी गई है। मेगा मिलियन कंसोर्टियम के लीड डायरेक्टर जोशुआ जॉनसन ने बताया, ‘अप्रैल में मेगा मिलियन्स गेम में बदलाव के बाद से अब तक जीता गया सबसे बड़ा जैकपॉट 980 मिलियन डॉलर है।’
ड्रॉ में जो नंबर आए वह थे 1, 8, 11, 12 और 57, जबकि गोल्ड मेगा बॉल था 7 कुल इनाम लगभग 980 मिलियन डॉलर और कैश ऑप्शन 452.2 मिलियन डॉलर बताया गया है। यह नवंबर महीने में अब तक का सबसे बड़ा इनाम है। साथ ही मेगा मिलियन्स के इतिहास का आठवां सबसे बड़ा जैकपॉट। इससे पहले इतना बड़ा इनाम दिसंबर 2024 में निकला था, जब कैलिफोर्निया के एक खिलाड़ी ने 1.269 बिलियन डॉलर जीता था। लाटरी ने बताया कि 27 जून को वर्जीनिया में 348 मिलियन डॉलर का जैकपॉट निकलने के बाद लगातार 40 ड्रॉ हुए। यह मेगा मिलियन्स के इतिहास में सबसे लंबा जैकपॉट रन था। इन ड्रॉ के दौरान 1.43 करोड़ जीतने वाले टिकट अलग-अलग स्तरों पर निकले।मेगा मिलियन्स ने यह भी बताया कि अप्रैल में गेम के नए नियम लागू होने के बाद प्राइज वैल्यू काफी बढ़ गई है। सिर्फ नॉन-जैकपॉट प्राइज ही लगभग 343.4 मिलियन डॉलर तक पहुंच गए। इनमें 2 मिलियन डॉलर या उससे ज्यादा के 21 सेकंड-टीयर प्राइज शामिल हैं, जो एरिजोना, कैलिफोर्निया, केंटकी, फ्लोरिडा, जॉर्जिया, इलिनॉइस, आयोवा, मिशिगन, मिसिसिपी, न्यूजर्सी, न्यूयॉर्क, नॉर्थ कैरोलिना, टेक्सस, और वर्जीनिया में जीते गए।
अब यूक्रेन, रूस को ठंड में तड़पाकर मारने की प्लानिंग
18 Nov, 2025 02:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मॉस्को। रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध चौथे साल में पहुंच गया है। तमाम प्रयासों के बाद भी शांति स्थापित नहीं हो पाई है। रुस ने यूक्रेन के हिस्से पर कब्जा भी कर दिया है, जिसमें बड़े-बड़े शहर शामिल हैं। यूक्रेन लगातार चोट झेल रहा है और ट्रंप, पुतिन को शांति समझौते के लिए नहीं मना पा रहे हैं। हाल ही में यूक्रेन ने रूस के हाथों पोक्रोव्स्क शहर गंवा दिया है। इस खराब हालत में भी यूक्रेन ने एक बड़ा दावा कर डाला है। यूक्रेनी सेना का कहना है कि उसने रूस की लाइफ लाइन पर अटैक कर दिया है। यूक्रेन ने रूस के रिफाइनरी पर ऐसे वक्त पर अटैक किया है, जब दोनों देश एक दूसरे के ऊर्जा के बुनियादी ढांचे को टारगेट कर रहे हैं। सर्दियां करीब हैं ऐसे में दोनों अपने-अपने दुश्मन को ठिठुरता देखना चाहते हैं। इससे पहले रूस ने यूक्रेन के बिजली ट्रांसमिशन सिस्टम पर अटैक किया था, जिसकी मरम्मत में काफी वक्त लग रहा है। पिछले हफ्ते यूक्रेन के राज्य-संचालित बिजली ट्रांसमिशन सिस्टम ऑपरेटर, यूक्रेनर्गो ने घोषणा की थी कि मरम्मत के काम के दौराम देश के अधिकांश क्षेत्रों में बिजली कटौती होगी।बता दें कि शुक्रवार को रूस ने यूक्रेन की राजधानी पर अटैक किया था। जिसमें 6 लोगों की मौत हुई था और करीब 40 लोग घायल हो गए थे। इस अटैक में रेजीडेंशियल बिल्डिंग्स पर निशाना साधा गया था। इस हमले को यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की ने इसे ‘दुष्टतापूर्ण हमला’ बताते हुए कहा कि रूसी हमले में बैलिस्टिक और एयरोबैलिस्टिक मिसाइलों सहित लगभग 430 ड्रोन और 18 मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक यूक्रेनी ने दावा किया है कि उसने रूस द्वारा कीव पर बड़े पैमाने पर, घातक हमले किए जाने के एक दिन बाद जवाबी कार्रवाई की है। इस बार राजधानी मॉस्को के पास एक रूसी तेल रिफाइनरी पर हमला किया गया है। यूक्रेनी सेना ने शनिवार को सोशल मीडिया के जरिए इस अटैक के बारे में जानकारी दी है, जिसमें बताया गया है कि रूस को रियाजान क्षेत्र में स्थित रिफाइनरी पर ब्लास्ट के जरिए तगड़ा जवाब दिया गया है। पोस्ट में लिखा है कि ‘ये दुश्मन की मिसाइल और बम हमले शुरू करने की क्षमता को कम करने के प्रयासों का एक हिस्सा है’।
पाक सेना में सुधार के चोले में तानाशाही स्थापित कर रहे असीम मुनीर
18 Nov, 2025 01:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। पाकिस्तान के संविधान में 27वें संशोधन पर हाल ही में नेशनल असेंबली में मतदान हुआ। इसे पाकिस्तान के रक्षा क्षेत्र में 1976 के बाद से सबसे बड़े बदलाव के रुप में देखा जा रहा है। संशोधन के जरिए आर्मी, वायु सेना और नेवी से संबंधित कानूनों में बदलावों को पाक सरकार आधुनिकीकरण करना चाहती हैं। वहीं विपक्षी दल और आलोचक इससे सत्ता के केंद्रीकरण की चेतावनी दे रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि ये सुधार के चोले में तानाशाही स्थापित कर रहे हैं। इससे मौजूदा सेना प्रमुख असीम मुनीर की ताकत बहुत ज्यादा बढ़ जाएगी।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस पुनर्गठन के केंद्र में आर्मी चीफ का पद है, जो रक्षा बलों का प्रमुख यानी सीडीएफ भी होगा। इस दोहरी ताकत ने इस पद को बहु-क्षेत्रीय एकीकरण, पुनर्गठन और सशस्त्र बलों की संयुक्तता बनाने के संबंध में नई शक्तियां प्रदान कर दी हैं। विधायी संशोधन से संयुक्त बल एकीकरण से लेकर संरचनात्मक सुधारों तक में सीडीएफ की भूमिका होगी। इसके लिए स्पष्ट रूप से संसदीय अनुमोदन की जरुरत नहीं होगी।
नया कानून ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी के अध्यक्ष पद को खत्म कर देता है। यह तीनों सेनाओं का पद 1971 के युद्ध के बाद सशस्त्र बलों में समन्वय के लिए बनाया गया था। नई कमान संरचना को सरकार और सेना ने एक कार्यात्मक जरुरत के रूप में पेश किया। इस पुनर्गठन ने सेना प्रमुख के कार्यालय में संयुक्तता के तर्क को केंद्रित कर दिया है। नई प्रणाली हर शीर्ष सशस्त्र बलों की नियुक्ति को सीडीएफ-सह-सीओएएस की सिफारिश पर निर्भर बनाती है।
इस कानून में परमाणु बलों के कार्यालय, सीएनएससी के नव-निर्मित पदों पर सीडीएफ की सिफारिश पर उनकी सेवा अवधि बढ़ाई जा सकेगी। साथ ही इस प्रक्रिया को न्यायिक समीक्षा से मुक्त रखा जाएगा। एयर यूनिवर्सिटी में एयरोस्पेस और सामरिक विभाग के डीन कहते हैं कि सीडीएफ और कमांडर राष्ट्रीय सामरिक कमान की नई नियुक्तियां एनसीए का हिस्सा बन रही हैं। दोनों ही सेना से होंगे और सीडीएफ अन्य दो सेना प्रमुखों से वरिष्ठ होगा।
पाकिस्तान सेना में एक महत्वपूर्ण बदलाव सीडीएफ-सह-सीओएएस को अपनी शक्तियों के प्रत्यायोजन पर निर्णायक नियंत्रण प्रदान करता है। यह संशोधन संघीय सरकार को उप-सेना प्रमुखों को सीओएएस (सेना प्रमुख) के कार्यों का प्रयोग करने के लिए अधिकृत करने की अनुमति देता है। पहले ऐसी नियुक्तियां कार्यपालिका का विशेषाधिकार था। इसके अलावा पाकिस्तान सेना संशोधन फील्ड मार्शल के पद वाले व्यक्ति की संवैधानिक प्रधानता को सुरक्षित रखता है। पाकिस्तान सेना संघीय सरकार को पाकिस्तानी सेना के शासन, कमान, अनुशासन, भर्ती, सेवा की शर्तों, पद, वरीयता और प्रशासन के साथ-साथ धारा 176 के तहत नियमों के दायरे से बाहर अधिनियम के किसी भी अन्य उद्देश्य के लिए नियम बनाने का अधिकार देती है। एक ही पद पर ज्यादा नियंत्रण स्थापित करके और उसका कार्यकाल 2035 से भी आगे बढ़ सकता है। यह फैासला लेने की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के बजाय उस पद पर आसीन व्यक्ति के व्यक्तित्व, प्राथमिकताओं और राजनीति पर अत्यधिक निर्भर होने का जोखिम है। इससे निर्णय लेने में नौसेना और वायु सेना की भूमिका भी और कम हो जाएगी।
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