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पाकिस्तान सेना का दावा: ऑपरेशन में 50 से ज्यादा नागरिक-सैनिक हताहत
5 Feb, 2026 04:44 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पाकिस्तानी सेना ने गुरुवार को जानकारी दी कि अशांत बलूचिस्तान प्रांत में विद्रोहियों के खिलाफ चलाए गए अभियान में 216 विद्रोही मारे गए हैं। हालांकि, कई दिनों तक चले इस खूनी संघर्ष में 36 आम नागरिकों और सेना के 22 जवानों को भी अपनी जान गंवानी पड़ी। सेना की मीडिया विंग, इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) ने एक बयान दावा किया कि 26 जनवरी को शुरू किया गया 'रद-उल-फितना-1' नाम का यह ऑपरेशन अब सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है।
क्या बोली पाकिस्तानी सेना?
सेना ने बताया कि पंजगुर और हरनाई जिले के बाहरी इलाकों में विद्रोहियों के छिपे होने की पक्की खुफिया जानकारी मिली थी। इसके बाद सुरक्षा बलों ने वहां कार्रवाई शुरू की। सेना ने विद्रोहियों के ठिकानों पर हमला बोला, जिसमें शुरुआत में 41 विद्रोही मारे गए। बाद में सुरक्षा बलों की जवाबी कार्रवाई और सफाई अभियान के दौरान कुल 216 विद्रोहियों को मार गिराया गया। सेना का दावा है कि इस कार्रवाई से विद्रोही नेटवर्क के नेतृत्व, उनके कमांड स्ट्रक्चर और काम करने की क्षमता को भारी नुकसान पहुंचा है।
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रेलवे हुआ बहाल
इस बीच, पाकिस्तान रेलवे के प्रवक्ता मुहम्मद काशिफ ने बताया कि पांच दिनों तक बंद रहने के बाद बलूचिस्तान में रेल सेवा फिर से बहाल कर दी गई है। हमलों के दौरान कई जगहों पर रेलवे ट्रैक को नुकसान पहुंचा था, जिससे सुरक्षा कारणों से क्वेटा से ट्रेनों की आवाजाही रोक दी गई थी। अब मरम्मत के बाद यातायात सामान्य हो रहा है।
असेंबली में पास हुए प्रस्ताव
उधर, पाकिस्तान की नेशनल असेंबली ने मंगलवार को एक प्रस्ताव पास किया। इसमें सरकार से मांग की गई कि वह विद्रोही और उसे मदद देने वालों के खिलाफ एक सख्त और आक्रामक राष्ट्रीय रणनीति अपनाए। गौरतलब है कि ईरान और अफगानिस्तान सीमा से सटा बलूचिस्तान लंबे समय से हिंसा का केंद्र रहा है। यहां बलूच विद्रोही अक्सर 60 अरब डॉलर वाले चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (सी-पैक) प्रोजेक्ट्स को निशाना बनाते हैं। मार्च 2025 में भी बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने जाफर एक्सप्रेस ट्रेन के अपहरण की जिम्मेदारी ली थी, जिसमें 31 लोगों की मौत हुई थी और 300 से ज्यादा यात्री बंधक बनाए गए थे।
चुनावी घोषणापत्र में नरमी, भारत से सहयोग बढ़ाने की बात
5 Feb, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बांग्लादेश में इसी महीने 12 फरवरी को चुनाव हैं। ऐसे में देश के अंदर प्रमुख राजनीतिक दल जमात-ए इस्लामी एक अहम ताकत के रूप में उभरती नजर आ रही है। भारत विरोधी गुट के रूप में पहचान जाने वाले जमात ने अपना बुधवार (04 फरवरी) को घोषणा पत्र जारी किया, जिसमें उन्होंने भारत के साथ अच्छे रिश्तों पर जोर दिया।
जमात ने जारी किया 41 सूत्रीय घोषणापत्र
बांग्लादेश की प्रमुख इस्लामी पार्टी जमात-ए-इस्लामी ने चुनावों से पहले 41 सूत्रीय घोषणापत्र जारी किया, जिसमें न्याय और आर्थिक क्षेत्रों में सुधारों के साथ-साथ मंत्रिमंडल में महिलाओं को शामिल करने का वादा किया गया है। जमात के प्रमुख शफीकुर रहमान ने घोषणापत्र जारी किया, जिसमें पार्टी के सत्ता में आने पर 'राजकब्जा में पर्याप्त संख्या में महिलाओं को शामिल करने' का वादा किया गया।, हालांकि पार्टी ने कोई भी महिला उम्मीदवार को चुनावी मैदान में नहीं उतार है।
पड़ोसी देशों के साथ बेहतरी संबंध पर जोर
इस्लामिक कंजर्वेटिव पार्टी जमात-ए-इस्लामी ने अपने घोषणापत्र में भारत सहित पड़ोसी देशों के साथ रचनात्मक और सहयोगात्मक रिश्ते बनाए रखने का वादा किया है। पार्टी के बयान के अनुसार ये संबंध आपसी सम्मान और निष्पक्षता के आधारित होंगे। घोषणापत्र में दावा किया गया कि भारत, श्रीलंका, भूटान, नेपाल, म्यांमार, मालदीव और थाइलैंड के साथ शांतिपूर्ण, मित्रतापूर्ण और सहयोगी संबंध स्थापित किए जाएंगे। पार्टी ने कहा कि क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और साझा समृद्धि के लिए पड़ोसियों के साथ संवाद और सहयोग को प्राथमिकता दी जाएगी।इस घोषणापत्र का अनावरण ढाका के एक होटल में जमात प्रमुख डॉ. शफीकुर रहमान ने किया। इस दौरान उन्होंने सभा को संबोधित करते हुए इस बात पर जोर दिया कि उनकी राजनीतिक दृष्टि पार्टी की जीत से कहीं बढ़कर है। उन्होंने कहा, 'मैं केवल जमात की जीत नहीं चाहता। मैं बांग्लादेश के सभी 18 करोड़ नागरिकों की जीत चाहता हूं। मैं किसी एक समूह या परिवार पर केंद्रित राजनीति में विश्वास नहीं करता; मैं जनता की राजनीति में विश्वास करता हूं।घोषणापत्र 26 प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित है। पहले खंड में एक न्यायसंगत, सशक्त और मानवीय बांग्लादेश के निर्माण पर बल दिया गया है। इसके बाद के खंड स्वतंत्र विदेश नीति, सुदृढ़ रक्षा क्षमता, ऊर्जा क्षेत्र में सुधार, सतत आर्थिक विकास और रोजगार सृजन पर केंद्रित हैं। इसमें कृषि और खाद्य सुरक्षा, मत्स्य पालन और पशुधन विकास, पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन शमन, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा में सुधार, बुनियादी ढांचा विकास और युवाओं के नेतृत्व वाली प्रौद्योगिकी पहलों को भी शामिल किया गया है।
जमात-ए-इस्लामी के चुनावी घोषणापत्र में 26 प्राथमिकता वाले क्षेत्र
राष्ट्रीय संप्रभुता, स्वतंत्रता और राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देते हुए एक अडिग राज्य का निर्माण करना।
भेदभाव से मुक्त, न्यायसंगत, निष्पक्ष और मानवीय बांग्लादेश की स्थापना करना।
युवाओं को सशक्त बनाएं और उन्हें शासन में केंद्रीय भूमिका देना।
महिलाओं के लिए एक सुरक्षित, गरिमामय और सहभागी राज्य सुनिश्चित करना।
समग्र कानून व्यवस्था में सुधार के माध्यम से मादक पदार्थों, जबरन वसूली और आतंकवाद से मुक्त एक सुरक्षित देश का निर्माण करना।
सभी स्तरों पर ईमानदार नेतृत्व स्थापित और संस्थागत सुधारों के माध्यम से भ्रष्टाचार मुक्त राज्य बनान।
प्रौद्योगिकी आधारित, आधुनिक और स्मार्ट समाज का विकास का दावा।
प्रौद्योगिकी, विनिर्माण, कृषि और उद्योग में व्यापक रोजगार सृजित करना, निःशुल्क आवेदन, योग्यता आधारित भर्ती सुनिश्चित और सरकारी नौकरियों में सभी प्रकार के भेदभाव को खत्म करना।
वित्तीय और बैंकिंग प्रणालियों में विश्वास बनाना और एक पारदर्शी, निवेश- और व्यवसाय-अनुकूल अर्थव्यवस्था का निर्माण करना।
आनुपातिक प्रतिनिधित्व (पीआर) के तहत निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित कराना और एक प्रभावी लोकतंत्र को सुदृढ़ करने के लिए कार्यवाहक व्यवस्था को मजबूत करना।
मौलिक मानवाधिकारों की रक्षा करते हुए अतीत में राज्य प्रायोजित हत्याओं, गुमशुदा लोगों और गैर-न्यायिक अपराधों के लिए न्याय प्रदान करवाना।
जुलाई विद्रोह के इतिहास को संरक्षित करना, शहीदों और घायल लड़ाकों के परिवारों का पुनर्वास और जुलाई चार्टर को लागू करना।
प्रौद्योगिकी को अपनाने और किसानों को बेहतर सहायता प्रदान करने के माध्यम से कृषि क्रांति को बढ़ावा देना।
2030 तक मिलावट रहित खाद्य सुरक्षा प्राप्त करना और 'तीन शून्य विजन' को लागू करा: शून्य पर्यावरणीय गिरावट, शून्य अपशिष्ट और शून्य बाढ़ जोखिम।
लघु एवं मध्यम आकार के उद्योगों का विस्तार करें, औद्योगिक विकास को बढ़ावा दें, घरेलू और विदेशी निवेश के अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करें और व्यापक रोजगार सृजित करें।
श्रमिकों के वेतन और जीवन स्तर में सुधार करना और सुरक्षित और सम्मानजनक कामकाजी परिस्थितियों करना, विशेष रूप से महिलाओं के लिए।
प्रवासियों के लिए मतदान के अधिकार और अन्य सभी अधिकारों की गारंटी।
सभी के लिए समान नागरिक अधिकार स्थापित करना, चाहे वे बहुसंख्यक हों या अल्पसंख्यक।
आधुनिक, सार्वभौमिक स्वास्थ्य सेवा प्रदान करें, जिसमें गरीबों और वंचितों के लिए चरणबद्ध रूप से मुफ्त पहुंच बने।
समकालीन वैश्विक मांगों को पूरा करने के लिए शिक्षा प्रणाली में सुधार और धीरे-धीरे मुफ्त शिक्षा सुनिश्चित।
वस्तुओं की कीमतों को वहनीय सीमा के भीतर स्थिर करना और बुनियादी आवश्यकताओं तक पहुंच सुनिश्चित बनाना।
परिवहन प्रणालियों में सुधाj, ढाका और संभागीय शहरों के बीच यात्रा के समय को 2-3 घंटे तक कम करना।
निम्न और मध्यम आय वाले परिवारों के लिए कम लागत वाले आवास उपलब्ध कराएं।
फासीवादी ढांचों को पूरी तरह से समाप्त करना, न्यायिक और संस्थागत सुधारों को जारी रखना
सुरक्षित रोजगार सुनिश्चित करने और धीरे-धीरे सभी नागरिकों के लिए अंतरराष्ट्रीय मानक सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा लागू करने पर जोर।
सभी स्तरों पर पारदर्शिता और जवाबदेही के माध्यम से सुशासन सुनिश्चित करें, जिससे एक समृद्ध और कल्याणकारी राज्य की स्थापना हो सके।
कासिम सूरी की बदली जिंदगी, अमेरिका में टैक्सी चलाकर कर रहे गुजारा
5 Feb, 2026 10:52 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के पूर्व डिप्टी स्पीकर और पीटीआई (तहरीक-ए-इंसाफ) के वरिष्ठ नेता कासिम खान सूरी का एक वीडियो सामने आया है, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया। कभी पाकिस्तानी संसद के सत्र की अध्यक्षता करने वाले सूरी ने खुलासा किया है कि वे अपना पेट भरने के लिए इन दिनों अमेरिका में उबर (Uber) टैक्सी चला रहे हैं।
क्या बोले पूर्व डिप्टी स्पीकर?
हाल ही में पीटीआई की अमेरिकी शाखा के साझा किए गए एक वीडियो में सूरी ने अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने बताया कि उन्हें भारी आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा है। सूरी का आरोप है कि जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान का समर्थन करने की वजह से उन्हें राजनीतिक उत्पीड़न झेलना पड़ा। उनके मुताबिक, पाकिस्तान सरकार ने उन पर दर्जनों मनगढ़ंत मामले दर्ज किए, उनके बैंक खाते सील कर दिए और संपत्ति जब्त कर ली। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके परिवार के सदस्यों का अपहरण किया गया, जिसके कारण उन्हें मजबूरी में देश छोड़ना पड़ा।
अपनी नौकरी पर क्या बोले सूरी?
अपनी मौजूदा नौकरी को लेकर सूरी ने कहा, "मैंने कभी नहीं सोचा था कि मुझे यह काम करना पड़ेगा, लेकिन इसमें कोई शर्म नहीं है।" उन्होंने कहा वे चोरी, भ्रष्टाचार या हराम की कमाई करने के बजाय मेहनत करके पैसा कमाना पसंद करते हैं। बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि ईमानदारी से की गई मेहनत में ही असली सम्मान है।
ट्रंप और शी जिनपिंग ने की फोन पर लंबी बातचीत, ईरान और ताइवान समेत कई मुद्दों पर हुई चर्चा
इमरान खान का साथ देने की मिली सजा
कासिम सूरी पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के करीबी माने जाते हैं। इतनी मुश्किलों के बावजूद सूरी को अपने फैसलों पर कोई पछतावा नहीं है। उन्होंने कहा, "यह वह कीमत है जो लोकतंत्र, कानून के शासन और पाकिस्तान के लोगों के सम्मान के लिए इमरान खान के साथ खड़े होने के लिए चुकानी पड़ती है।"
इमरान खान की स्थिति पर जताई चिंता
सूरी ने 2023 से जेल में बंद इमरान खान और उनकी पत्नी बुशरा बीबी की स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि खान को अन्यायपूर्ण तरीके से जेल में रखा गया है और उन्हें एकांत कारावास में रखकर वकीलों से मिलने नहीं दिया जा रहा। हालांकि, पाकिस्तानी अधिकारियों ने दुर्व्यवहार के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि खान को कानून के अनुसार ही रखा गया है।
अमेरिकी कानून के शिकंजे में मादुरो, अर्जेंटीना की बड़ी मांग
5 Feb, 2026 10:31 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अर्जेंटीना के एक जज ने बुधवार को अमेरिका से वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को सौंपने की औपचारिक मांग की है। फिलहाल वह न्यूयॉर्क की एक जेल में बंद हैं और उन पर नशीले पदार्थों की तस्करी के आरोप हैं। गौरतलब है कि अमेरिकी सेना ने एक विशेष ऑपरेशन में पिछले महीने मादुरो को पकड़ा था।
मादुरो पर लगे हैं कई गंभीर आरोप
मामले में अर्जेंटीना के संघीय जज ने एक वारंट पर हस्ताक्षर किए हैं। इस काराकास में मादुरो पर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने अपने शासन के दौरान प्रदर्शनकारियों और राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ हिंसा करवाई। इसमें लोगों को प्रताड़ित करना और जबरन गायब करना शामिल है।
मामलों में नागरिकों को बनाया गया है वादी
इस मामलों में उन वेनेजुएला के नागरिकों को वादी बनाया गया है जिन्होंने सुरक्षा बलों और खुफिया एजेंटों के हाथों भयानक यातनाएं झेली हैं। यह कानूनी लड़ाई साल 2023 में ब्यूनस आयर्स में मानवाधिकार संगठनों ने शुरू की थी। यहां की अदालतें पहले भी देश के बाहर मानवाधिकार हनन के मामलों की जांच करती रही हैं। तीन जनवरी को अमेरिकी सेना ने मादुरो को सत्ता से हटाया था, जिसके बाद अर्जेंटीना के सरकारी वकीलों ने जज रामोस से इस प्रत्यर्पण अनुरोध को आगे बढ़ाने का आग्रह किया था।
'कभी हंसते नहीं देखा, सबसे खराब रिपोर्टर', एपस्टीन फाइल्स पर पूछा सवाल तो महिला पत्रकार पर भड़के ट्रंप
अमेरिका में इस मामले में चल रहा केस
अर्जेंटीना ने 1997 की प्रत्यर्पण संधि का हवाला देते हुए यह मांग की है। हालांकि, इसकी संभावना कम है कि ट्रंप प्रशासन इस पर तुरंत अमल करेगा। इसका मुख्य कारण अमेरिका में मादुरो पर चल रहा मुकदमा है। मादुरो और उनकी पत्नी सीलिया फ्लोर्स अभी ब्रुकलिन की जेल में हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने 25 वर्षों तक ड्रग कार्टेल के साथ मिलकर अमेरिका में हजारों टन ड्रग भेजने में मदद की।
क्या है राजनीतिक समीकरण?
राजनीतिक समीकरणों की बात करें तो अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर माइली खुद को डोनाल्ड ट्रंप का करीबी सहयोगी मानते हैं और उन्होंने मादुरो की गिरफ्तारी का स्वागत किया था। मानवाधिकार संगठनों ने इस प्रत्यर्पण अनुरोध को ऐतिहासिक बताया है। 'अर्जेंटीना फोरम फॉर द डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसी' ने कहा कि यह उन पीड़ितों की जीत है जिन्होंने ताकतवर लोगों के खिलाफ बोलने की हिम्मत दिखाई। अब अर्जेंटीना का विदेश मंत्रालय यह आधिकारिक अनुरोध वाशिंगटन डीसी भेजेगा, जहां अमेरिकी कानूनी विभाग इस पर विचार करेगा।
“कभी हंसते नहीं देखा”, पत्रकार पर ट्रंप की तीखी टिप्पणी
5 Feb, 2026 09:52 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने फैसलों और तेवर के लिए हमेशा से सुर्खियों में रहते हैं। दूसरी बार राष्ट्रपति का पद संभाल रहे ट्रंप के कई कदमों में पूरी दुनिया में हलचल मचा दी है। हाल ही में ट्रंप एपस्टीन फाइल्स, वेनेजुएला सहित कई मामलों पर अमेरिकी मीडिया के निशाने पर हैं। इस बीच ट्रंप ने एक प्रेस वार्ता के दौरान महिला पत्रकार पर व्यक्तिगत निशाना साधा, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
ओवल ऑफिस में महिला पत्रकार पर निजी टिप्पणी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार (03 फरवरी) को ओवल ऑफिस में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। इस दौरान एपस्टीन फाइलों के बारे में सवाल पूछे जाने पर ट्रंप भड़के हए नजर आए। ऐसे में उन्होंने सीएनएन की महिला संवाददाता की आलोचना की। ट्रंप ने उन्हें 'सबसे खराब पत्रकार' कहा और उनके संस्थान को 'बेईमान संगठन' बताया।
कॉलिन्स ने दावा सवाल, भड़के ट्रंप क्या बोले?
दरअसल, सीएनएन की वरिष्ठ व्हाइट हाउस संवाददाता कैटलान कॉलिन्स ने डोनाल्ड ट्रंप से अमेरिकी न्याय विभाग की ओर से जारी अहम जानकारी को संपादित करने और एपस्टीन पीड़ितों की नाराजगी के बारे में सवाल दागा, उन्होंने सीधा राष्ट्रपति से पूछा कि पीड़ित लोगों से आप क्या कहेंगे, जिनका न्याय नहीं मिला है। इस सवाल पर थोड़े असहज दिखे। उन्होंने जवाब देते हुए कहा कि, 'मुझे लगता है कि अब देश को किसी और चीज पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि मेरे बारे में कुछ भी सामने नहीं आया है।'
इंटरनेट पर वायरल हो रहा प्रेस वार्ता का Video
इसी के साथ उन्होंने महिला पत्रकार को सबसे खराब बताया और कहा कि मैंने कभी आपको मुस्कुराते नहीं देखा। इसी के साथ उनके मीडिया संस्थान को भी घेरा। जिसका वीडियो इंटरनेट पर वायरल हो रहा है। हालांकि यह पहली बार नहीं है, जब ट्रंप और कॉलिन्स के बीच बहस देखी गई है।
अब जानिए वीडियो में क्या है?
महिला पत्रकार ने सवाल पूछा कि डीओजी की ओर से एपस्टीन फाइल्स में संपादन की वजह से पीड़ितों में नाराजगी है। उन्होंने ट्रंप से पूछा कि न्याय न मिलने से पीड़ितों से आप क्या कहेंगे? इस सवाल के बाद पहले को ट्रंप थोड़ा शांत नजर आए फिर जवाब देते हुए कहा कि मेरे बारे में कुछ नहीं निकला, ये मेरे खिलाफ साजिश थी। उन्होंने आगे कहा कि देश को अब स्वास्थ्य देखभाल जैसे मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए। करना चाहिए। हालांकि जब पत्रकार कॉलिन्स ने पीड़ितों के बयान पर जोर दिया तो ट्रंप भड़क हुए नजर आए और दो टूक कहा कि 'आप सबसे खराब रिपोर्टर हैं'। इतना ही नहीं यह भी कहा कि आप जैसे लोगों की वजह से सीएनएन की रेटिंग्स गिर रही हैं।ट्रंप ने आगे उखड़ते हुए कहा कि आप एक युवा महिला हैं, मुझे नहीं लगता कि मैंने कभी आपको मुस्कुराते देखा है। मैं आपको 10 साल से जानता हूं, आपके चेहरे पर मुस्कान नहीं दिखी। आप इसलिए नहीं मुस्कुरा रही, क्योंकि आप जानती हैं कि सच नहीं बोल रही।
‘धुरंधर’ पर उठे सवाल, बलूच नेता बोले- सच्चाई नहीं दिखाई गई
5 Feb, 2026 09:25 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बलूचिस्तान इन दिनों अलग-अलग वजहों से सुर्खियों में हैं। पहली वजह है पिछले दिनों पाकिस्तान के अंदर क्वेटा, ग्वादर, मस्तंग और नोशकी में हुए हमले। इन हमलों की जिम्मेदारी बलूच लिबरेशन आर्मी ने ली। दूसरी वजह है पाकिस्तान की सेना की जवाबी कार्रवाई, जिसमें 177 बलूच विद्रोहियों को मार गिराने का दावा किया गया है। तीसरी वजह है पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ का कबूलनामा, जिसमें उन्होंने कहा है कि बलूच लड़कों के सामने पाक सेना कमजोर और बेबस है क्योंकि बलूच लड़ाके सेना से ज्यादा ताकतवर हैं। चौथी वजह है हाल ही में आई एक फिल्म 'धुरंधर', जिसमें बलूचिस्तान की पृष्ठभूमि दिखाई गई है। इस फिल्म के दूसरे पार्ट का टीजर भी हाल ही में जारी हुआ है। इन सब वजहों के बीच बड़ा सवाल यह है कि बलूचिस्तान में जो कुछ हो रहा है, क्या उसकी हकीकत दुनिया के सामने जस की तस मौजूद है। इसका जवाब दे रहे हैं बलूचिस्तान के शीर्ष नेता मीर यार बलूच।
'हम अपनी फिल्म बनाएंगे'
अमर उजाला डिजिटल को दिए एक्सक्लूसिव बयान में मीर यार कहते हैं कि बलूचिस्तान केवल संघर्ष की भूमि नहीं, बल्कि अन्याय की कहानी है, जिसे बार-बार नजरअंदाज किया गया है। फिल्म 'धुरंधर' बलूचिस्तान के इतिहास, आजादी के संघर्ष और बलोच संस्कृति को सही तरीके से नहीं दिखा पाई। मीर यार बलूच ने बड़ा एलान करते हुए बताया कि बलूचिस्तान की हकीकत पर हम अपनी एक अलग फिल्म बनाएंगे, जो बलूच लोगों के इतिहास, उनकी संस्कृति और आजादी के लिए उनके संघर्ष को बयां करेगी।
बलूचिस्तान के बारे में
बलूचिस्तान का इतिहास हजारों साल पुराना है। यहां मेहरगढ़ जैसी सभ्यताएं थीं, जो 7000 ईसा पूर्व की मानी जाती हैं। वहीं, आधुनिक इतिहास में ब्रिटिश काल में यह इलाका रणनीतिक कारणों से अंग्रेजों के नियंत्रण में रहा। 1947 में पाकिस्तान में शामिल होने के बाद यहां विरोध शुरू हुआ। अब तक यहां पांच बड़े विद्रोह हो चुके हैं। 1948,1958-59, 1962-63,1973-77 के बाद 2004 से अब तक यह विद्रोह जारी है। इन सभी विद्रोह में बलूच लड़ाकों की हर बार मांगें वही रहीं- स्वायत्तता, संसाधनों पर हक और सम्मान।
कौन हैं मीर यार बलूच?
मीर यार बलूच बलूचिस्तान के एक प्रमुख राष्ट्रवादी नेता, मानवाधिकार कार्यकर्ता और लेखक हैं। वे 'आजाद बलूचिस्तान आंदोलन' के अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता और प्रतिनिधि हैं। वे बलूचिस्तान की आजादी के संघर्ष से जुड़े प्रमुख चेहरों में से एक हैं। मई 2025 में मीर यार बलूच ने बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) के प्रवक्ता के रूप में पाकिस्तान से बलूचिस्तान की औपचारिक स्वतंत्रता की घोषणा कर दी थी। न्यूज मीडिया या डिजिटल मीडिया पर उनकी कोई तस्वीर उपलब्ध नहीं है। एक वायरल तस्वीर पर उन्होंने खुद कहा था कि तस्वीर में नजर आ रहे शख्स वे नहीं हैं क्योंकि सुरक्षा कारणों से वे अपनी तस्वीरें नहीं खिंचवाते।
ईशान थरूर की छंटनी पर खुला दर्द, मिले अनुभवों पर जताई प्रतिक्रिया
5 Feb, 2026 08:59 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद शशि थरूर के बेटे दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित अखबारों में से एक ‘वॉशिंगटन पोस्ट’ में काम करते थे. ‘वॉशिंगटन पोस्ट’ ने हाल ही में अपने कुल स्टाप का लगभग एक-तिहाई से अधिक कर्मचारियों की छटनी कर दी. इसमें छटनी में शशि थरूर के बेटे ईशान थरूर भी शामिल हैं. ईशान थरूर ने खुद ही अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी दी है. ईशान ने इसे ‘एक बुरा दिन’ बताया है.ईशान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “आज मुझे ‘वॉशिंगटन पोस्ट’ से निकाल दिया गया है. मेरे साथ-साथ अधिकांश अंतर्राष्ट्रीय कर्मचारी और कई अन्य शानदार सहकर्मी भी निकाले गए हैं. मैं अपने न्यूज रूम और विशेष रूप से उन बेमिसाल पत्रकारों के लिए बहुत दुखी हूं. जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वॉशिंगटन पोस्ट की सेवा की. संपादक और संवाददाता जो लगभग 12 वर्षों से मेरे मित्र और सहयोगी रहे हैं. उनके साथ काम करना मेरे लिए सम्मान की बात रही है.”
2017 में की थी शुरुआत
उन्होंने आगे लिखा, “मैंने जनवरी 2017 में वर्ल्डव्यू कॉलम की शुरुआत की थी ताकि पाठकों को दुनिया और उसमें अमेरिका की भूमिका को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिल सके और मैं उन पांच लाख वफादार पाठकों का आभारी हूं, जिन्होंने वर्षों तक सप्ताह में कई बार इस कॉलम को पढ़ा.” इसके साथ ही उन्होंने एक और पोस्ट किया है, जिसमें लिखा, “एक बुरा दिन”.
संसद के गेट पर भिड़ंत, राहुल गांधी ने रवनीत बिट्टू को बताया ‘गद्दार दोस्त’, बीजेपी नेता ने कहा- ‘देश का दुश्मन’
300 से अधिक कर्मचारियों को हटाया
ईशान थरूर ने ‘एक्स’ पर अपनी प्रतिक्रिया वाशिंगटन पोस्ट द्वारा बुधवार को बड़े पैमाने पर छंटनी की घोषणा के बाद दी है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी ने वर्तमान में चल रहे स्पोर्ट्स डेस्क को बंद कर दिया है. इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टिंग का भी दायरा कम कर दिया है. यानी कई रिपोर्टरों को भी बाहर का रास्ता दिखाया है. कंपनी के एक तिहाई कर्मचारी (300 से अधिक) की छंटनी है.
गाजा में तनाव चरम पर, हमले में 19 की जान गई
4 Feb, 2026 05:53 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गाजा पट्टी में संघर्ष विराम लागू होने के बाद भी हिंसा रुकती नजर नहीं आ रही है। ताजा घटनाक्रम में इस्राइली गोलीबारी में कम से कम 19 फलस्तीनी नागरिकों की मौत हो गई, जिनमें बड़ी संख्या महिलाओं और बच्चों की बताई गई है। अस्पताल अधिकारियों ने मौतों की पुष्टि की है। इस्राइल की ओर से कहा गया है कि कार्रवाई उसके सैनिकों पर मिलिटेंट गोलीबारी के जवाब में की गई।
हमले की वजह क्या बताई गई?
इस्राइली सेना के अनुसार, गाजा में तैनात सैनिकों पर पहले उग्रवादियों ने गोलीबारी की, जिसमें एक रिजर्व सैनिक गंभीर रूप से घायल हो गया। इसके बाद सेना ने हवाई और जमीनी यूनिट के जरिए जवाबी कार्रवाई की। सेना ने इसे संघर्ष विराम समझौते का उल्लंघन बताते हुए कहा कि सैनिकों की सुरक्षा के लिए जवाबी फायरिंग जरूरी थी।
कितने लोग मारे गए, कौन-कौन शामिल?
अस्पताल अधिकारियों के मुताबिक मरने वालों में सात महिलाएं और पांच बच्चे शामिल हैं। मृतकों में पांच महीने का शिशु और सिर्फ दस दिन की बच्ची भी शामिल है। गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, संघर्ष विराम लागू होने के बाद से अब तक 530 से ज्यादा फलस्तीनी इस्राइली हमलों में मारे जा चुके हैं। ये आंकड़े लगातार बढ़ते तनाव को दिखाते हैं।
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अस्पताल और स्थानीय प्रशासन ने क्या कहा?
गाजा सिटी के शिफा अस्पताल के निदेशक ने कहा कि गाजा के लोगों के खिलाफ युद्ध जैसे हालात जारी हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि संघर्ष विराम का वास्तविक असर जमीन पर क्यों नहीं दिख रहा। स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि लगातार हमलों से आम लोगों में डर बना हुआ है और हालात सामान्य नहीं हो पा रहे हैं।
किन इलाकों में हुए हमले?
उत्तरी गाजा के तुफ्फाह इलाके में एक इमारत पर फायरिंग में 11 लोगों की मौत हुई, जिनमें एक ही परिवार के कई सदस्य थे। दक्षिणी शहर खान यूनिस में एक परिवार के टेंट पर हमले में तीन लोगों की जान गई, जिनमें एक 12 साल का लड़का भी शामिल था। गाजा सिटी के ज़ैतून इलाके में टैंक शेलिंग से तीन और लोगों की मौत हुई, जिनमें पति-पत्नी भी थे।
अब तक कुल कितना नुकसान?
गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार युद्ध शुरू होने के बाद से 71,800 से ज्यादा फलस्तीनी मारे जा चुके हैं। मंत्रालय लड़ाकों और आम नागरिकों का अलग-अलग आंकड़ा जारी नहीं करता, लेकिन उसके रिकॉर्ड को संयुक्त राष्ट्र और कई स्वतंत्र विशेषज्ञ आम तौर पर भरोसेमंद मानते हैं। लगातार बढ़ती मौतों ने संघर्ष विराम की प्रभावशीलता पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
टैरिफ के डर से बदला मेक्सिको का रुख, पानी समझौते पर सहमति
4 Feb, 2026 12:39 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मेक्सिको और अमेरिका के बीच पानी को लेकर एक अहम समझौता हुआ है। इस समझौते के तहत मेक्सिको अब हर साल अमेरिका को तय मात्रा में पानी देगा, ताकि भविष्य में कोई अनिश्चितता न रहे। बता दें कि, इससे पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले चेतावनी दी थी कि अगर मेक्सिको ने ज्यादा और समय पर पानी नहीं दिया, तो वह मैक्सिको से आने वाले सामान पर पांच फीसदी तक टैरिफ (आयात शुल्क) बढ़ा सकते हैं। इसके बाद दोनों देशों के बीच कई महीनों से बातचीत चल रही थी।
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अमेरिका-मेक्सिको के बीच क्या है नया समझौता?
नए समझौते के अनुसार, मेक्सिको मौजूदा पांच साल के चक्र में हर साल कम से कम 3.5 लाख एकड़-फुट पानी अमेरिका को देगा। एक एकड़-फुट पानी का मतलब है- 1 एकड़ जमीन पर 1 फुट गहराई तक पानी।
पुराने समझौते में क्या दिक्कत थी?
1944 की जल संधि के तहत मेक्सिको को हर पांच साल में 17.5 लाख एकड़-फुट पानी अमेरिका को देना होता था। औसतन यह भी सालाना 3.5 लाख एकड़-फुट ही बनता है, लेकिन अमेरिका का आरोप था कि मेक्सिको शुरू के वर्षों में कम पानी देता है, बाद में आखिरी वर्षों में पूरा करता है, इससे टेक्सास के किसानों को नुकसान होता है। नया समझौता इस समस्या को खत्म करेगा, क्योंकि अब हर साल न्यूनतम पानी देना अनिवार्य होगा।
क्या है मेक्सिको की चिंता?
हालांकि अमेरिका इस समझौते को बड़ी जीत बता रहा है, लेकिन मेक्सिको में यह मुद्दा संवेदनशील है। खासतौर पर उत्तरी राज्यों में सूखे की स्थिति है। सीमावर्ती राज्य तामाउलिपास में किसानों का कहना है कि पानी की कमी के कारण कई लोगों ने फसल बोई ही नहीं।
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समझौते पर ट्रंप और शीनबाम की बातचीत
यह समझौता पिछले हफ्ते ट्रंप और मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम के बीच फोन पर हुई बातचीत के बाद संभव हुआ। दिसंबर में शीनबाम ने कहा था कि मेक्सिको पुराने जल बकाये को चुकाने के लिए ज्यादा पानी भेजेगा।
बलूच लड़ाकों के सामने पस्त पाक सेना, ख्वाजा आसिफ का बड़ा बयान
4 Feb, 2026 12:36 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पाकिस्तान आंतरिक अस्थिरता से जूझ रहा है। पाकिस्तानी सेना बलूचिस्तान प्रांत में अलगाववादी संगठन बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर रही है। अपने अभियान को पाकिस्तान ने 'ऑपरेशन हेरोफ फेज 2' नाम दिया है। बलूच विद्रोहियों ने अशांत प्रांत के कई कस्बों में एक साथ कई हमले किए। जिसमें कम से कम 80 सुरक्षाकर्मी मारे गए और 30 से अधिक सरकारी संपत्तियां तहस-नहस को गईं।
रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ का बड़ा कबूलनामा
वहीं पाकिस्तान का दावा है कि आर्मी एक्शन में कम से कम 177 बलूच विद्रोहियों को मारा गया है। हालांकि बलूच राष्ट्रीय आंदोलन के प्रमुख नेता हकीम बलूच ने इस्लामाबाद के दावे को खारिज किया है। इस बीच अब पाकिस्तान की बेबसी पूरी दुनिया के सामने आ गई है। जिसको खुद पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ कबूल किया है।
बलूच लड़कों के सामने पाक सेना अक्षम: ख्वाजा
बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना बलोच लिब्रेशन आर्मी के सामने कमजोर और असहाय नजर आ रही है। सेना ने बलूच लड़ाकों के सामने घुटने टेक दिए हैं। जिसपर बड़ा कुबूलनामा पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने किया है। ख्वाजा आसिफ ने नेशनल असेंबली में अपनी बेबसी का रोना रोया और स्वीकार किया है कि पाकिस्तानी सेना बलूच लड़ाकों का सामना करने में अक्षम है। ख्वाजा ने इस बात को स्वीकार किया कि बीएलए की ताकत बहुत ज्यादा है। उन्होंने कहा कि बलूचिस्तान भौगोलिक रूप से पाकिस्तान के 40 फीसदी से ज्यादा हिस्से पर फैला हुआ है। इसे नियंत्रित करना किसी घनी आबादी वाले शहर को नियंत्रित करने से कहीं ज्यादा मुश्किल है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इसके लिए बड़ी तादाद में सैनिकों की तैनाती की जरूरत है। इसी के साथ उन्होंने कबूल किया कि हमारे सैनिक वहां तैनात हैं और उनके खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं, लेकिन इतने बड़े क्षेत्र की सुरक्षा और गश्त करने में वे शारीरिक रूप से असमर्थ हैं।
ट्रेड डील पर ट्रंप की प्रेस सचिव का बड़ा दावा, बदलेगी भारत की तेल नीति
4 Feb, 2026 11:40 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारत और अमेरिका |के बीच नए व्यापारिक युग की शुरुआत हो चुकी है। सोमवार (02 फरवरी) को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर लगाया पारस्परिक टैरिफ 18 फीसदी कर दिया। इसी के साथ लंबे समय से अटके व्यापार समझौते पर भी ट्रंप ने सहमति जताई है। ऐसे में अब व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने भारत-अमेरिका के व्यापार समझौते पर जानकारी साझा की है। उन्होंने दावा किया कि पीएम मोदी ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था में बड़े निवेश का वादा किया है।प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने बुधवार को अमेरिका-भारत समझौते, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच सौहार्दपूर्ण संबंधों का जिक्र किया। लेविट ने दावा किया कि प्रधानमंत्री मोदी रूसी तेल की खरीद बंद करने और इसके बजाय अमेरिका और संभवत वेनेजुएला से तेल खरीदने पर सहमत हो गए।
कैरोलिन लेविट ने ट्रेड डील पर क्या बताया?
वॉशिंगटन में मीडिया से बात करते हुए कैरोलिन लेविट ने कहा, 'भारत ने न सिर्फ रूस से तेल खरीदना बंद करने की प्रतिबद्धता जताई है, बल्कि अमेरिका से तेल खरीदने की भी प्रतिबद्धता जताई है, और संभवतः वेनेजुएला से भी, जिसका सीधा लाभ अब अमेरिका और अमेरिकी जनता को मिलेगा। प्रधानमंत्री मोदी ने ऊर्जा, परिवहन और कृषि उत्पादों सहित अमेरिका में 500 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है। यह एक और शानदार व्यापार समझौता है।'
दोनों देशों के बीच बहुत अच्छे संबंध: लेविट
पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच हुई बातचीत के बाद व्हाइट हाउस के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए कैरोलिन लेविट ने कहा कि ये प्रतिबद्धताएं दोनों देशों के नेताओं के बीच हुई सीधी बातचीत के बाद की गई है। उन्होंने कहा, 'जैसा कि आप सभी ने देखा, राष्ट्रपति ने भारत के साथ एक और बड़ा व्यापार समझौता किया। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से सीधे बात की; दोनों देशों के बीच बहुत अच्छे संबंध हैं।
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'राष्ट्रपति के टैरिफ कारगर साबित हो रहे'
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तारीफ करते हुए लेविट ने कहा कि ट्रंप के टैरिफ अमेरिकी अर्थव्यवस्था में नकदी की आपूर्ति कर रहे हैं। उन्होंने कहा, 'राष्ट्रपति के टैरिफ कारगर साबित हो रहे हैं और उनका आर्थिक एजेंडा भी काम कर रहा है। टैरिफ लगाने के साथ-साथ अमेरिका में विनिर्माण और निवेश को बढ़ावा देने से रोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं। राष्ट्रपति ने दुनिया भर के देशों और कंपनियों से अमेरिका में निवेश लाने में अहम भूमिका निभाई है। पिछले कुछ महीनों में हमने निर्माण क्षेत्र में रोजगार में भारी वृद्धि देखी है। ऐसा इसलिए है क्योंकि ये कारखाने यहीं अमेरिका में बनाए जा रहे हैं और हम अमेरिकियों को रोजगार दे रहे हैं।'
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ट्रंप ने टैरिफ में कटौती की घोषणा की, मोदी की तारीफ
बता दें कि टैरिफ को लेकर एक साल के राजनयिक तनाव के बाद वॉशिंगटन और नई दिल्ली के बीच नए सिरे से रिश्ते मजबूत होने जा रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने रविवार को घोषणा करते हुए बताया था कि भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ घटकर 18 प्रतिशत कर दिया गया, साथ ही रूसी तेल से जुड़े अतिरिक्त 25 प्रतिशत जुर्माना भी हटा दिया जाएगा। साथ ही व्यापार समझौते पर भी सहमति जाहिर की। ट्रंप की इस घोषणा के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने शुल्क कटौती की पुष्टि की। उन्होंने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि अब भारतीय उत्पादों को अमेरिकी बाजार में कम शुल्क देना होगा। हालांकि, समझौते की अन्य शर्तें अभी तक स्पष्ट नहीं हैं।
भारत-अमेरिका समझौते से बौखलाया पाकिस्तान, सोशल मीडिया पर उड़ रही खिल्ली
4 Feb, 2026 09:17 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अमेरिका ने भारत पर लगी 50 प्रतिशत टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत करने की घोषणा की है. जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की जी-हूजूरी करने वाले पाकिस्तान को तगड़ा झटका मिला है. अब तो खुद पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर का मजाक उड़ा रहे हैं. पाकिस्तानियों ने सोशल मीडिया पर भारत की तारीफ करते हुए लिखा, “भारत ने बिना अपने आत्मसम्मान से समझौता किए टैरिफ को कम कराया, जबकि ट्रंप ने आसिम मुनीर के साथ रखैल वाला बर्ताव किया. इसके बावजूद पाकिस्तान पर भारत से ज्यादा टैरिफ लगाई गई है.”अमेरिका ने भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया था. इसके बाद भारत पर रूसी तेल खरीदी का आरोप लगाते हुए 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगा दिया था. यानी भारत पर कुल 50 प्रतिशत टैरिफ लगाई गई थी. लेकिन अब सोमवार की रात को अमेरिकी राष्ट्रपति ने इसे कम करके 18 प्रतिशत करने का ऐलान किया है. जल्द ही इसकी आधिकारिक घोषणा भी की जाएगी. सबसे बड़ी खास बात है कि इसके लिए भारत ने अमेरिका से किसी भी समझौते की हामी नहीं भरी है और न ही किसानों के हित से कोई समझौता किया. टैरिफ कम करने की घोषणा के बाद पाकिस्तान के लोगों में वहां के प्रधानमंत्री और सेना प्रमुख के खिलाफ जमकर नाराजगी है.
पाकिस्तानियों ने जताई नाराजगी
सोशल मीडिया पर एक पाकिस्तानी यूजर ने आसिम मुनीर के लिए काफी भला-बुरा लिखा. यूजर्स ने आसिम मुनीर की रोते हुए फोटो शेयर कर लिखा, “आसिम मुनीर के साथ ट्रंप ने रखैल वाला बर्ताव किया है, जिसमें सभी गंदे और अवैध काम करवाए जाते हैं. जब पाकिस्तान को कुछ देने का नंबर आता है, तो कह दिया जाता है कि मैं परिवार के फैसले का पालन करने के लिए मजबूर हूं, मुझे भूल जाओ.”
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एक और पाकिस्तानी यूजर्स ने आसिम मुनीर और शहबाज के खिलाफ अपना नाराजगी जाहिर करते हुए लिखा, ट्रंप को खुश करने की कोशिशों के बावजूद पाकिस्तान पर 19 प्रतिशत का टैरिफ लगाया गया है, जबकि पड़ोसी देश भारत पर सिर्फ 18 प्रतिशत का टैरिफ. यूजर्स ने कटाक्ष करते हुए लिखा- शानदार विदेश नीति की उपलब्धि!. कई लोग तो मुनीर और शहबाज की फोटो को लेकर मजाक उड़ा रहे हैं. उनका कहना है कि चापलूसी और फोटो खिंचवाना बेकार है.
पुतिन के राइट हैंड का दावा! यूक्रेन का जल्द खेल खत्म करेंगे?
3 Feb, 2026 01:36 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मॉस्को। रूस की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष दिमित्री मेदवेदेव ने एक बड़ा और सनसनीखेज बयान देते हुए दावा किया है कि यूक्रेन के साथ जारी संघर्ष में रूस की सैन्य विजयअब पूरी तरह साफ दिखाई देने लगी है। युद्ध के चार साल पूरे होने के करीब पहुँचने पर मेदवेदेव का यह आत्मविश्वास भरा लहजा पश्चिमी देशों के लिए एक गंभीर चेतावनी माना जा रहा है। उन्होंने न केवल रूस की जीत का दम भरा, बल्कि भविष्य की रणनीति और अमेरिकी नेतृत्व पर भी अपनी बेबाक राय रखी। मेदवेदेव ने स्पष्ट किया कि रूस अब युद्ध के बाद की स्थितियों पर विचार कर रहा है, जो यह संकेत देता है कि क्रेमलिन अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के बेहद करीब है। उनका साफ संकेत था कि अब यूक्रेन का जल्द खेल खत्म करेंगे?
मेदवेदेव ने एक साक्षात्कार के दौरान पूरे आत्मविश्वास के साथ कहा कि सैन्य जीत का तथ्य अब कई पैमानों पर उभरकर सामने आने लगा है। उन्होंने कहा कि यह अब बिल्कुल स्पष्ट है कि रूस अपनी मंजिल के करीब पहुँच चुका है और उसका विशेष सैन्य अभियान अपने सभी निर्धारित उद्देश्यों को पूरा करेगा। उन्होंने अपनी व्यक्तिगत इच्छा व्यक्त करते हुए कहा कि वह चाहते हैं कि यह पूरी प्रक्रिया जितनी जल्दी हो सके, उतनी जल्दी पूर्णता तक पहुँचे। रूसी नेतृत्व के इस रुख से यह संदेश गया है कि वे अब इस लंबे खिंचते संघर्ष को निर्णायक अंजाम तक पहुँचाने के मूड में हैं।
साक्षात्कार के दौरान मेदवेदेव ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की वैश्विक भूमिका पर भी दिलचस्प टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप वास्तव में इतिहास के पन्नों में खुद को एक शांतिदूतया शांति स्थापित करने वाले व्यक्तित्व के रूप में दर्ज कराने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं। युद्ध के चौथे साल में प्रवेश करने से ठीक पहले आया यह बयान वैश्विक राजनीति में नई चर्चाएं छेड़ रहा है। रूस अब केवल सैन्य अभियानों तक सीमित नहीं है, बल्कि वह युद्ध के खात्मे के बाद के परिदृश्यों और अंतरराष्ट्रीय समीकरणों पर भी गंभीरता से विचार कर रहा है। मेदवेदेव के इस रुख ने उन अटकलों को और हवा दे दी है कि आने वाले समय में रूस और अमेरिका के बीच वार्ता की मेज पर कुछ बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। फिलहाल, मॉस्को अपने सैन्य विजय के दावे पर अडिग है और वैश्विक मंच पर अपनी जीत की पटकथा तैयार करने में जुटा है।
इस साल नेपाल पहुंचने वाले भारतीय पयर्टकों की संख्या में हुआ इजाफा
3 Feb, 2026 12:34 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
काठमांडू । नए साल 2026 की शुरुआत में ही नेपाल के पर्यटन उद्योग में जबरदस्त उछाल आया। नेपाल पर्यटन बोर्ड द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक जनवरी में नेपाल पहुंचने वाले अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की संख्या में 15.7फीसदी की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस रिकॉर्ड तोड़ कामयाबी का सबसे बड़ा श्रेय भारत को जाता है, क्योंकि नेपाल आने वाले हर चार में से एक से ज्यादा पर्यटक भारतीय हैं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जनवरी 2026 में नेपाल में हवाई मार्ग से कुल 92,573 अंतरराष्ट्रीय पर्यटक पहुंचे, जबकि जनवरी 2025 में यह संख्या 79,991 थी। पर्यटकों की इस भीड़ में भारत ने अपना दबदबा कायम रखा है। आंकड़े बताते हैं कि भारतीयों का नेपाल के प्रति आकर्षण तेजी से बढ़ रहा है। पिछले साल जनवरी में जहां 20,485 भारतीय हवाई मार्ग से नेपाल पहुंचे थे, वहीं इस साल यह संख्या 30फीसदी बढ़कर 26,624 हो गई है। दक्षिण एशियाई देशों की बात करें तो कुल पर्यटकों का लगभग 40फीसदी हिस्सा इसी क्षेत्र से आया है।
नेपाल पर्यटन बोर्ड के मुताबिक पर्यटकों की इस बढ़ती संख्या के पीछे तीन मुख्य कारण हैं- बेहतर कनेक्टिविटी से भारत और अन्य देशों से नेपाल के लिए हवाई उड़ानों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। नेपाल ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने पर्यटन स्थलों का प्रभावी ढंग से प्रचार किया है। सुरक्षित और सुंदर पर्यटन गंतव्य के रूप में नेपाल की छवि वैश्विक स्तर पर मजबूत हुई है।
देश पर्यटकों की संख्या
भारत 26,624
चीन 9,101
अमेरिका 8,406
बांग्लादेश 5,814
ऑस्ट्रेलिया 4,957
तालिबान सरकार ने गर्भनिरोधक गोलियों के इस्तेमाल पर लगाई रोक, कई क्लीनिक बंद
3 Feb, 2026 12:32 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
काबुल। अफगानिस्तान में तालिबान सरकार ने महिलाओं के लिए गर्भनिरोधक गोलियों के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। देशभर में क्लीनिक बंद हो रहे हैं। महिलाओं को गर्भधारण या मिसकैरेज का इलाज नहीं मिल पा रहा है। बदगीस प्रांत की एक निजी क्लीनिक में चेतावनी देते हुए सभी दवाएं नष्ट कर दी गई हैं। जवजजान प्रांत में 30 साल से क्लीनिक चला रही एक डॉक्टर कहती हैं, तालिबान के सत्ता में आने के बाद गर्भनिरोधक गोली तेजी से खत्म हो रही हैं। यहां 70 में से 30 महिलाओं को इसकी जरूरत होती थी। कंधार प्रांत समेत कई जगहों पर सीधे पुरुष डॉक्टरों से इलाज लेने पर सख्ती है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक 36 साल की एक महिला ने कहा कि अब अपने बच्चों को पहचान ही नहीं पाती। कंधार के गांव में अपनी मां के घर पर बैठी, वह चुपचाप हिलती रहती हैं। नौ बार गर्भवती और छह बार मिसकैरेज हो चुका है। पति और ससुराल वालों के दबाव में वह मानसिक और शारीरिक रूप से टूट चुकी हैं। उनकी मां कहती है कि उन्हें डर और लगातार प्रेगनेंसी ने तोड़ दिया है। वहीं कंधार की 42 साल की महिला 12 बच्चों की मां हैं। वे बताती हैं कि अब उन्हें उठना भी मुश्किल होता है। हड्डियों में दर्द रहता है। पति किसी भी गर्भनिरोधक को लेने से साफ मना कर देते हैं।
29 साल की महिला भूकंप के बाद तंबू में रहने लगी थीं। लगातार तीन दिन टॉयलेट नहीं जा सकीं। उन्हें आंत की समस्या हुई। डॉक्टरों ने चेताया कि अब गर्भवती हुई, तो जान जा सकती है। लेकिन एक साल बाद फिर गर्भवती हो गई। बच्चे को जन्म दिया। जान तो बच गईं, लेकिन अब रक्तस्राव से जूझ रही है। संयुक्त राष्ट्र और वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय फंडिंग पिछले साल कम होने से 440 से ज्यादा अस्पताल और क्लिनिक बंद हो गए। ग्रामीण इलाकों में महिलाएं कई घंटे चलकर क्लिनिक तक पहुंचती हैं। महिलाएं अकेले ही घर पर जन्म देती हैं। गर्भवती और स्तनपान कराने वाली 80फीसदी महिलाएं कुपोषित हैं। उनमें एनीमिया, विटामिन की कमी और लो ब्लड प्रेशर है।
रिपोर्ट के मुताबिक 12 साल से ज्यादा उम्र की लड़कियों को माध्यमिक और उच्च शिक्षा में पढ़ाई की अनुमति नहीं। कई प्रांतों में लड़कियों के स्कूल बंद कर दिए गए हैं। कई सरकारी और निजी क्षेत्रों में महिलाएं काम नहीं कर सकतीं। डॉक्टर, नर्स, शिक्षक जैसी महिलाओं की नौकरी प्रभावित हुई। महिलाएं घर से बाहर पुरुष अभिभावक के बिना नहीं जा सकतीं। महिलाओं को हिजाब या बुर्का पहनना जरुरी है। संगीत, खेल और मनोरंजन में महिलाओं की भागीदारी प्रतिबंधित है।
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