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इराक में अवार्डी अमेरिकी पत्रकार का अपहरण, घसीटकर कार में बैठाकर हुए फरार
2 Apr, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बगदाद। इराक की राजधानी बगदाद में मंगलवार को सड़कों पर चहल-पहल थी, तभी कुछ अज्ञात नकाबपोश आए और एक अमेरिकी पत्रकार को पकड़कर ले गए। ये अवॉर्ड विनिंग अमेरिकी पत्रकार शेली किटल्सन थीं, जिनका बीच बाजार अपहरण कर लिया गया है। इराकी आंतरिक मंत्रालय और पुलिस सूत्रों ने इसकी पुष्टि की है। ये पूरी खौफनाक घटना सीसीटीवी में साफ दिखाई दे रही है।
मीडिया रिपोर्ट में चश्मदीदों और पुलिस सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि शेली किटल्सन अपनी कार से कहीं जा रही थीं, तभी दो गाड़ियों ने उनका रास्ता रोक लिया। फुटेज में दिख रहा है कि हथियारबंद नकाबपोशों ने शेली की कार का दरवाजा जबरन खोला और उन्हें अपनी गाड़ी की ओर ले गए। चश्मदीदों का कहना है कि शेली चिल्लाती रहीं, लेकिन अपहरणकर्ता ने उन्हें बंदूक की बट मारकर चुप करा दिया और अपनी गाड़ी में बैठाकर फरार हो गए।
शेली किटल्सन कोई साधारण नाम नहीं हैं, वे एक जांबाज और अवॉर्ड विनिंग जर्नलिस्ट हैं जो लंबे समय से मिडिल ईस्ट के खतरनाक इलाकों से रिपोर्टिंग कर रही हैं। शेली के पास अमेरिकी पासपोर्ट है, जो इस किडनैपिंग को एक अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक मुद्दा बनाता है। शेली अक्सर इराक और सीरिया में सक्रिय आतंकी गुटों और मिलिशिया के खिलाफ लिखती रही हैं। माना जा रहा है कि उनकी हालिया रिपोर्टिंग की वजह से ही वे किसी ताकतवर गुट के निशाने पर आ गईं। बताया जा रहा है कि किडनैप होने के बाद अमेरिकी पत्रकार शेली को छुड़ा लिया गया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक इराकी सुरक्षा बलों ने अपहरणकर्ताओं की कार का पीछा किया। इस दौरान किडनैपर्स की गाड़ी अनियंत्रित होकर पलट गई। सुरक्षा बलों ने मौके से एक संदिग्ध को गिरफ्तार किया है और पत्रकार को उनके चंगुल से छुड़ा लिया। बताया जा रहा है कि गाड़ी पलटने के कारण शेली किट्लसन को चोटें आई हैं, जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया।
प्लॉट और नौकरी का झांसा, तीन लोगों से लाखों की ठगी
2 Apr, 2026 09:10 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बहादुरगढ़ (हरियाणा)। बहादुरगढ़ के आर्य नगर निवासी एक शिक्षक सहित तीन लोगों से सस्ते प्लॉट और सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर करीब 11 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। पीड़ितों ने आरोपी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। शिकायतकर्ता विक्रांत पुत्र प्रताप सिंह ने बताया कि वह दिल्ली के झाड़ौदा स्थित एक निजी स्कूल में अध्यापक है। वह गांव गोयला कलां निवासी अभिषेक को पिछले 6-7 वर्षों से जानता है। आरोप है कि नवंबर 2025 में अभिषेक ने एचएसवीपी के सेक्टर-11 बहादुरगढ़ में कम कीमत पर मकान दिलाने और विक्रांत को लैंड रिकॉर्ड एंड रेवेन्यू विभाग में तथा उसकी पत्नी पूनम को केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्रालय के तहत बहादुरगढ़ कोर्ट में सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा दिया।
इसके अलावा आरोपी ने विक्रांत के साले दिनेश और पड़ोसन निर्मला को भी सस्ते प्लॉट दिलाने का लालच दिया। भरोसा कर पीड़ितों ने अलग-अलग समय पर आरोपी को करीब 11 लाख रुपये दे दिए। आरोप है कि आरोपी ने नौकरी और प्लॉट के नाम पर फर्जी जॉइनिंग लेटर, आईडी कार्ड और अन्य दस्तावेज भी उपलब्ध कराए। बाद में जांच करने पर कागजात फर्जी पाए गए। पीड़ितों ने जब रुपये वापस मांगे तो आरोपी ने केवल आंशिक राशि लौटाई और बाकी पैसे देने में टालमटोल कर रहा है। पीड़ितों ने पुलिस से मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की है। पुलिस ने मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है।
परमाणु हथियारों की होड़ का जिन्न आया बोतल से बाहर, सऊदी, तुर्की, जापान ने भरी हुंकार
2 Apr, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। अमेरिका-इजराल लगातार ईरान पर बमबारी कर रहे हैं। वहीं ईरान भी लगातार उनके हमलों का जवाब पूरी ताकत से दे रहा है। इस युद्ध ने दुनिया को एक ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है, जहां से वापसी का रास्ता धुंधला नजर आता है। पिछले एक साल में अमेरिका-इजराइल ने ईरान पर दो बड़े हमले किए। इन हमलों का मुख्य मकसद ईरान की परमाणु क्षमता को खत्म करना था, जिसे अमेरिका और इजराइल अपने लिए खतरा मानते हैं। ईरान में पिछले पांच हफ्तों से सैन्य अभियान जारी है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जानकारों का मानना है कि इस जंग ने दुनिया भर में परमाणु हथियारों की होड़ के उस जिन्न को बोतल से बाहर निकाल दिया है, जिसे दशकों तक काबू में रखने की कोशिश की गई थी। ईरान में शासन बदलने और उसके परमाणु कार्यक्रम को जमींदोज करने की जिद अब उल्टी पड़ती नजर आ रही है। यूरोप से लेकर पूर्वी एशिया तक के देश अपनी परमाणु नीति पर दोबारा विचार करने को मजबूर हैं। कई देश अब इस बात पर सवाल उठा रहे हैं कि क्या उन्हें अपने शक्तिशाली सहयोगियों पर आंख मूंदकर भरोसा करना चाहिए? ट्रंप प्रशासन की अनिश्चितता और बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच, अब अपनी संप्रभुता बचाने के लिए खुद के परमाणु हथियार बनाने का विकल्प सबसे ऊपर आ गया है। यह शीत युद्ध के बाद बनी वैश्विक व्यवस्था से एक बहुत बड़ा भटकाव है।
एक वक्त था जब कई देश अमेरिका की परमाणु छतरी के नीचे खुद को महफूज मानते थे, लेकिन आज स्थिति बदल चुकी है। यूरोप में जर्मनी और पोलैंड जैसे देश अब फ्रांस के उस प्रस्ताव पर गंभीरता से चर्चा कर रहे हैं, जिसमें यूरोपीय परमाणु गारंटी की बात कही गई है। उन्हें डर है कि अमेरिका किसी भी वक्त अपने हाथ खींच सकता है। वहीं, एशिया-प्रशांत क्षेत्र में जापान और दक्षिण कोरिया की चिंताएं भी चरम पर हैं।
खुद अमेरिका ने भी संकेत दिए हैं कि वह 33 साल के अंतराल के बाद परमाणु परीक्षण फिर से शुरू कर सकता है। रूस की पोसीडॉन अंडरवाटर ड्रोन और ब्यूरेवेस्टनिक क्रूज मिसाइल जैसी तकनीक ने अमेरिका की नींद उड़ा दी है। सऊदी अधिकारियों ने पहले ही साफ कर दिया था कि अगर ईरान बम बनाता है, तो वे भी पीछे नहीं रहेंगे। हाल ही में पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुए रक्षा समझौते ने इस आग में घी डालने का काम किया है। पाकिस्तान ने संकेत दिए हैं कि जरूरत पड़ने पर उसके परमाणु हथियार सऊदी अरब के लिए उपलब्ध रहेंगे।
नाटो सदस्य तुर्की भी इस दौड़ से बाहर नहीं रहना चाहता। तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान परमाणु शक्ति बनता है, तो तुर्की को भी इस रेस में शामिल होना पड़ेगा। ईरान के खिलाफ मौजूदा सैन्य कार्रवाई ने दुनिया को एक कड़ा सबक दिया है। लीबिया और यूक्रेन जैसे देशों का उदाहरण सबके सामने है, जिन्होंने अपने परमाणु विकल्प छोड़ दिए और बाद में उन्हें बाहरी हमलों का सामना करना पड़ा।
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के महानिदेशक राफेल मारियानो ग्रॉसी ने इस प्रवृत्ति पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने चेतावनी दी है कि ज्यादा देशों के पास परमाणु हथियार होने से दुनिया सुरक्षित नहीं, बल्कि और भी खतरनाक हो जाएगी। विशेषज्ञों का कहना है कि आज का माहौल परमाणु हथियारों के पक्ष में वैसा ही है जैसा पहले कभी नहीं था। अगर देशों को लगता है कि सामूहिक सुरक्षा का वादा सिर्फ एक दिखावा है, तो वे निश्चित रूप से सबसे बड़े हथियार की ओर ही देखेंगे।
ईरान युद्ध ने उस अंतरराष्ट्रीय तंत्र की पोल खोल दी है जो परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने के लिए बनाया गया था। ईरान की संसद में अब एनपीटी से बाहर निकलने के लिए बिल पेश किया जा रहा है। उनका तर्क है कि जब यह संधि उनके ठिकानों की रक्षा नहीं कर सकती, तो इसमें रहने का कोई मतलब नहीं है। अप्रैल 2026 में न्यूयॉर्क में होने वाली एनपीटी रिव्यू कॉन्फ्रेंस में बड़े टकराव की आशंका है।
मौसम विभाग का अलर्ट, ठंडी हवाओं का असर जारी रहेगा
2 Apr, 2026 08:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिसार (हरियाणा)। मार्च महीने के आखिरी दिन ओलावृष्टि-बारिश के बाद बुधवार को दिन भर आसमान में बादल छाए रहे। ओलावृष्टि के बाद दिन व रात के तापमान में गिरावट रही। अप्रैल में भी लगातार 7 से 8 पश्चिम विक्षोभ सक्रिय होंगे। इस वजह से तापमान सामान्य या इससे कम ही रहेगा। 2 अप्रैल की रात से नया पश्चिम विक्षोभ सक्रिय होने से कुछ क्षेत्रों में हल्की बूंदाबांदी के आसार हैं। मौसम विशेषज्ञ डॉ. चंद्रमोहन ने बताया कि अप्रैल में भी मौसम में लगातार बदलाव देखने को मिलेंगे। अप्रैल महीने में कुल 7-8 पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होंगे। पहले पखवाड़े में लगातार एक के बाद एक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होंगे। 2-3 अप्रैल ,दूसरा 7-8 अप्रैल को फिर बाद 11-12 अप्रैल से उत्तरी पर्वतीय क्षेत्रों पर बर्फबारी और मैदानी राज्यों विशेषकर हरियाणा एनसीआर दिल्ली में बार बार मौसम में बदलाव देखने को मिलेंगे। इस दौरान हरियाणा एनसीआर दिल्ली में आंधी चलने के साथ साथ बारिश हो सकती है जिसकी वजह से संपूर्ण इलाके में दिन और रात के तापमान सामान्य और सामान्य से नीचे बने रहेंगे। दूसरे पखवाड़े में 1-2 पश्चिमी विक्षोभ कमजोर पड़ती नजर आ रही हैं। गुजरात और राजस्थान पर एक प्रति चक्रवातीय परिसंचरण तंत्र विकसित होने की वजह से संपूर्ण मैदानी राज्यों विशेषकर हरियाणा एनसीआर दिल्ली में तापमान में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। तीसरे सप्ताह में प्रति चक्रवातीय परिसंचरण तंत्र कमजोर पड़ने लगेगा और पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने से हरियाणा एनसीआर दिल्ली में अप्रैल माह के अंतिम 10 दिनों के दौरान एक बार फिर से मौसम में बदलाव देखने को मिलेगा। इस दौरान बारिश और तेज गति से हवा चल सकती है।
बिजली गिरने से किशोर की मौत
गांव कंवलगढ़ में मंगलवार शाम को बिजली गिरने से किशोर दिलबाज (15) की मौत हो गई। मृतक के चाचा करमजीत ने बताया कि उनका घर खेत में ढाणी के तौर पर बने हुए हैं। बारिश के चलते दिलबाज पॉलिथीन से घर की छत को ढक रहा था। इसी दौरान तेज गर्जना के साथ दिलबाज पर बिजली गिर गई। इससे वह बुरी तरह से झुलस गया और मौके पर ही उसने दम तोड़ दिया। पुलिस ने मृतक के चाचा करमजीत के बयान पर इत्तफाकिया कार्रवाई कर शव का पोस्टमार्टम करवाकर परिजनों को सौंप दिया है।
ट्रंप का एक और दावा: ईरान के नए राष्ट्रपति ने सीजफायर की मांग रखी, लेकिन ‘होर्मुज स्ट्रेट’ खोले बगैर नहीं होगा युद्धविराम
2 Apr, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान के “नए राष्ट्रपति” ने अमेरिका से संपर्क कर युद्धविराम (सीजफायर) की गुजारिश की है। ट्रंप ने यह बात अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर साझा की।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट करते हुए अपने ताजा बयान में कहा, कि ईरान के नए नेतृत्व का रवैया पहले की तुलना में कम कट्टर और अधिक समझदार है, और उसने अमेरिका से युद्ध रोकने का अनुरोध किया है। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि वे ईरान के किस नेता की बात कर रहे हैं। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका तभी युद्धविराम पर विचार करेगा, जब होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह से खुला, सुरक्षित और स्वतंत्र रूप से संचालित होगा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि ऐसा नहीं हुआ, तो अमेरिका ईरान के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जारी रखेगा। अपने बयान में उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर ईरान को “स्टोन एज” तक धकेल दिया जाएगा।
पहले भी कर चुके हैं बड़ा दावा
इससे पहले भी ट्रंप ने कहा था कि वे 2–3 हफ्तों के भीतर ईरान से जुड़े संघर्ष को समाप्त कर सकते हैं। उनका यह ताजा बयान कुछ और ही कह रहा है, जिसमें स्पष्टता का अभाव बताया गया है। ट्रंप के इस दावे पर कई सवाल भी उठ रहे हैं। उन्होंने “नए राष्ट्रपति” का नाम नहीं बताया, जिससे बात होने की बात उन्होंने कही है। ईरान की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। ऐसे में यह बयान फिलहाल राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
प्रॉपर्टी बाजार में बड़ा बदलाव, 9 महीने बाद फिर बढ़े कलेक्टर रेट
1 Apr, 2026 03:53 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़। हरियाणा की 14 तहसीलों और उप तहसीलों में बुधवार यानी आज से नए कलेक्टर रेट लागू हो जाएंगे। जहां ज्यादा लेनदेन हुआ है, उन स्थानों पर सरकार ने अधिक कलेक्टर रेट बढ़ाए हैं। प्रदेश के 7.43 फीसदी यानी कुल 11,947 क्षेत्रों में 75 फीसदी तक कलेक्टर रेट में बढ़ोतरी की गई है। गुरुग्राम के सेक्टर-28 में रिहायशी संपत्ति 2024 में 71,600 रुपये प्रति वर्ग गज थी। बीते साल इसमें 30 फीसदी बढ़ोतरी हुई थी और यह 93,080 रुपये प्रति वर्ग हो गई थी। अब 45 फीसदी बढ़ोतरी से इसकी कीमत 1,34,944 रुपये वर्ग गज हो जाएगी। इसी तरह बहादुरगढ़ में टीचर कॉलोनी, रणजीत कॉलोनी, भगवान कॉलोनी में रेट महंगे हुए हैं। हालांकि, कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में 130 फीसदी बढ़ोतरी को घटाकर 75 प्रतिशत कर दिया गया है। जींद में फव्वारा चौक, अपोलो रोड, डिफेंस कॉलोनी में व्यावसायिक भूमि के रेट 20 फीसदी तक बढ़ाए गए हैं। रेवाड़ी में धारूहेड़ा क्षेत्र के अलावलपुर, आसदपुर, खटावली, महेश्वरी और कापड़ीवास आदि गांवों में 45 से 60 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है। सोनीपत में कृषि भूमि में अधिक खरीद-फरोख्त हुई है। ऐसे में इन्हीं क्षेत्रों में 15 से 75 फीसदी तक दाम बढ़े हैं। यमुनानगर में फव्वारा चौक से कमानी चौक तक व्यवसायिक जमीन में 75 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है। यहां 90,800 रुपये प्रति वर्ग से 1,58,900 रुपये प्रति वर्ग गज तक दाम हो गए हैं। इसी तरह पानीपत में जीटी रोड पर करनाल की तरफ करीब 60 से 75 प्रतिशत तक रेट बढ़ाए हैं। करनाल रोड पर सर्वाधिक प्रति वर्ग गज 17 हजार की बढ़ोतरी हुई है। कुरुक्षेत्र में सबसे ज्यादा इस्माइलाबाद में 75 फीसदी तक रेट बढ़े हैं। करनाल में 75 फीसदी तक रेट बढ़ाए गए हैं। वहीं, कैथल में अभी नए रेट पोर्टल पर अपडेट नहीं हो सके हैं। अंबाला के सेक्टरों में रिहायशी व व्यावसायिक भूमि के रेट 75 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है। पोर्टल पर नए कलेक्टर रेट अपडेट करने का काम जारी है। नए रेट बुधवार से लागू होंगे। -हेमा शर्मा, सचिव हरियाणा राजस्व विभाग।
नौ माह पहले बढ़े थे रेट
साल 2025 में एक अगस्त को कलेक्टर रेट में बढ़ोतरी हुई थी। नौ माह बाद फिर से कलेक्टर रेट में बढ़ोतरी के पीछे सरकार के राजस्व व आपदा प्रबंधन विभाग ने तर्क दिया है कि सभी क्षेत्रों की 50 फीसदी रजिस्ट्रियों का विश्लेषण होना है। राजस्व विभाग के मुताबिक, कलेक्टर रेट में संशोधन एक फार्मूला आधारित है। जिन क्षेत्रों में कम, मध्यम और सर्वाधिक रजिस्ट्री होती हैं उसी के अनुसार स्लैब तैयार किया जाता है।
अमेरिकी कंपनियों पर ईरान की कार्रवाई, राजनीतिक दबाव या प्रतिशोध की तैयारी?
1 Apr, 2026 02:46 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Iran Israel war: ईरान-इजरायल-अमेरिका जंग को 33 दिनों से ज्यादा का समय हो चुका है. यह जंग खत्म होने के बजाय तेजी से बढ़ती ही जा रही है. इस जंग में कई और देश भी शामिल हो रहे हैं. अभी तक इस जंग में केवल सैन्य ठिकानों को ही निशाना बनाया जा रहा था. हालांकि अब ईरान ने अमेरिकी कंपनियों पर हमले का खुला ऐलान कर दिया है. जिन कंपनियों पर हमले की बात कही जा रही है उनकी ईरान की तरफ से एक लिस्ट भी जारी की गई है. टेक कंपनियों पर हमला करने के पीछे की सबसे बड़ी वजह उनका युद्ध में अमेरिका और इजराइल की मदद करना माना जा रहा है.
ईरान की तरफ से हमले का खुला ऐलान भारतीय समय अनुसार मंगलवार देर शाम किया गया था. इसके लिए बाकायदा ईरान ने एक लिस्ट जारी की है. इस लिस्ट में Apple, Google, Meta, IBM, Tesla और Boeing जैसी 18 बड़ी अमेरिकी टेक कंपनियां हैं. ईरान के इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) का कहना है कि इन कंपनियों को 1 अप्रैल की शाम 8 बजे निशाना बनाया जाएगा. IRGC ने आरोप लगाया है कि ये कंपनियां ईरानी अधिकारियों के ‘टारगेटेड असेसिनेशन’ में शामिल थीं.
क्या है हमले की असली वजह?
अमेरिका की तरफ से लगातार ईरान के सैन्य ठिकानों के साथ-साथ रिहायशी इलाकों में भी हमले किए जा रहे हैं. इन हमलों में अब तक हजारों की संख्या में लोग मारे जा चुके हैं तो वहीं बड़ी संख्या में लोग घर छोड़ने पर मजबूर हुए हैं. अमेरिका की कई बड़ी टेक कंपनियां मिडिल ईस्ट के देशों में काम कर रही हैं. ईरान का आरोप है कि ये सभी कंपनियां भले ही मिडिल ईस्ट के देशों में बैठकर काम कर रही हैं. लेकिन ये सभी यहां बैठकर ईरान के खिलाफ ही काम कर रही हैं.
आईआरजीसी के बयान में कहा गया, “ईरान में आतंक के हर काम के जवाब में इन कंपनियों को अपनी सुविधाओं की तबाही की जाएगी. ” IRGC ने आरोप लगाया है कि ये कंपनियां ईरानी अधिकारियों के ‘टारगेटेड असैसिनेशन’ में शामिल थीं. IRGC ने इन कंपनियों को ‘आतंकवादी कंपनियां’ बताया है. आरोप लगाया कि इनका इस्तेमाल बिना पायलट वाले ड्रोन उड़ाने और सटीक निशाना चुनने में किया जा रहा है.
टेक कंपनियों की वजह से मारे गए ईरान के नेता?
अमेरिकी टेक कंपनियों पर हमला करने के पीछे की सबसे बड़ी वजह ईरान के कई सीनियर नेताओं की मौत मानी जा रही है. ईरान का आरोप है कि इन टेक कंपनियों ने ही देश के कई सीनियर लीडर्स की जानकारी अमेरिका और इजराइल को शेयर की है. इन टेक कंपनियों की बदौलत ही अमेरिका-इजरायल इतना बड़ा हमला कर पाया है. IRGC का मानना है कि इन कंपनियों की मदद से ही उसके टॉप लीडर की मारे गए हैं. यही वजह है कि ईरान अब इन कंपनियों से बदला लेने की तैयारी कर रहा है.
किन कंपनियों पर होंगे हमले?
ईरान ने जिन कंपनियों को धमकी दी है, उनमें शामिल हैं – Apple, Meta, Google, Microsoft, Intel, IBM, Dell, Tesla, Nvidia, Boeing, HP, Cisco, Oracle, Planter, J.P. Morgan, GE, Spire Solutions और G42 जैसी कंपनियां शामिल हैं. ईरान की तरफ से हमले का समय भी बताया गया है. ईरान ने सभी टेक कंपनियों के कर्मचारियों को चेतावनी दी है. इसमें कहा है कि हम इन कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों को सलाह देते हैं कि वे अपनी जान बचाने के लिए तुरंत अपने काम करने की जगह छोड़ दें.’
क्या है अमेरिका का रिएक्शन?
ईरान की धमकी के बाद अमेरिका का रियेक्शन भी सामने आ गया है. व्हाइट हाउस के अधिकारियां ने कहा कि वह ईरान के किसी भी हमले का रोकने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं. इस तरह की धमकियों से कुछ नहीं होगा हम कल भी तैयार थे आज भी हमलों के लिए पूरी तरह से तैयार हैं.
ईरान-बहरीन बयान से सनसनी, एमेजॉन मुख्यालय पर मिसाइल हमले का दावा
1 Apr, 2026 12:03 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। ईरान ने बहरीन में मौजूद एमेजॉन के हेडक्वार्टर पर मिसाइल हमला किया है जिससे बैटेलको हेडक्वार्टर की बिल्डिंग को भारी नुकसान पहुंचा है। यह बिल्डिंग बहरीन के हमाला में स्थित है। बैटेलको, बहरीन की सबसे बड़ी टेलीकम्युनिकेशन कंपनी है और एमेजॉन वेब सर्विसेज़ के बुनियादी ढांचे को होस्ट करती है। बहरीन सरकार ने इस हमले की पुष्टि की है। गौरतलब है कि ईरान ने मंगलवार को ही धमकी दी थी कि 1 अप्रैल से मिडिल ईस्ट में अमेरिकी कंपनियों को निशाना बनाया जाएगा और अब इसकी शुरुआत हो गई है।
तुर्की पर मिसाइल से हमला: ईरान ने किया इंकार, फाल्स फ्लैग ऑपरेशन की आशंका
1 Apr, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्तांबुल। तुर्की में हाल ही में एक मिसाइल हमले की खबर सामने आई, जिसे नाटो के एयर डिफेंस सिस्टम ने इंटरसेप्ट किया। प्रारंभिक रिपोर्ट्स में इसे ईरान से दागे जाने का दावा किया गया था, लेकिन ईरान ने स्पष्ट रूप से इस बात से इंकार किया है। ईरान का कहना है कि उसने तुर्की या उसके पड़ोसी देशों पर कोई हमला नहीं किया है।
विश्लेषकों का मानना है कि अगर यह हमला ईरान की ओर से नहीं किया गया था, तो इसे फाल्स फ्लैग ऑपरेशन के तौर पर देखा जा सकता है। इसका उद्देश्य संभावित रूप से नाटो देशों को युद्ध में खींचना और क्षेत्रीय तनाव बढ़ाना हो सकता है। इस संदर्भ में अमेरिका और इज़राइल पर ऐसे साजिश के आरोप लग रहे हैं।
तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोगान ने स्थिति को संभालते हुए कहा कि यदि कुर्दिश लड़ाके ईरान में हमले की योजना बनाते हैं तो तुर्की इसे गंभीरता से लेगा। उन्होंने किसी भी उकसावे या प्रतिक्रिया में संयम बरतने का संकेत दिया। विशेषज्ञों का कहना है कि तुर्की, जो नाटो का सदस्य है, ने फिलहाल युद्ध में शामिल होने से खुद को अलग रखा है, ताकि क्षेत्रीय जटिलता और नाटो देशों की भागीदारी पर कोई दबाव न पड़े। मिडिल ईस्ट के पड़ोसी देश जैसे मिस्र और अज़रबैजान भी इस घटना पर सतर्क हैं।
यह घटना चौथी बार सामने आई है जब तुर्की पर कथित मिसाइल हमला हुआ है और सभी बार ईरान ने हमले से इंकार किया। इससे मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने की संभावना बनी हुई है।
समझौता छिपाना पड़ा भारी, हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट का आदेश रद्द किया
1 Apr, 2026 11:27 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अंबाला की फैमिली कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें एक व्यक्ति को अपनी पूर्व पत्नी को 5,000 रुपये प्रतिमाह गुजारा भत्ता देने का निर्देश दिया गया था। अदालत ने पाया कि यह आदेश स्थापित कानूनी सिद्धांतों के विपरीत था। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि याचिकाकर्ता महिला ने पूर्व में हुए समझौते और 16 लाख रुपये की प्राप्ति का तथ्य छिपाया। कोर्ट के अनुसार, यह राशि पहले दायर एक सिविल मामले में गुजारा भत्ता के रूप में दी जा चुकी थी। सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि दोनों पक्षों के बीच तलाक हो चुका था और इसके बावजूद महिला ने मासिक भत्ता की मांग की। हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाने वाला पक्ष अदालत से राहत पाने का हकदार नहीं हो सकता। अदालत ने अंबाला फैमिली कोर्ट के आदेश को त्रुटिपूर्ण बताते हुए रद्द कर दिया और कहा कि यह स्थापित कानून के विपरीत था, इसलिए इसे बरकरार नहीं रखा जा सकता। मामले में गुरमीत कौर को फैमिली कोर्ट ने प्रति माह 5,000 रुपये गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया था। इसके खिलाफ पति ने हाईकोर्ट में रिवीजन याचिका दायर की थी। सुनवाई में सामने आया कि महिला को पहले ही 16 लाख रुपये की एकमुश्त राशि मिल चुकी थी और दोनों के बीच समझौते के आधार पर तलाक हो चुका था। हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में दोहराया कि न्यायालय के समक्ष तथ्यों को छिपाना गंभीर मामला है और ऐसे मामलों में राहत नहीं दी जा सकती।
चीन में निर्माणाधीन टनल में भीषण धमाका, 4 मजदूरों की मौत, 09 घायल
1 Apr, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग। दक्षिण-पश्चिम चीन के चोंगकिंग क्षेत्र में एक निर्माणाधीन सुरंग में हुए भीषण विस्फोट ने चार मजदूरों की जान ले ली, जबकि 9 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। यह हादसा सोमवार दोपहर उस समय हुआ, जब एक राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना के तहत सुरंग निर्माण का काम चल रहा था।
स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, यह सुरंग हुबेई और सिचुआन प्रांतों को जोड़ने के लिए बनाई जा रही थी। वानझोउ जिला परिवहन आयोग ने बताया कि धमाका इतना तेज था कि मौके पर मौजूद कई मजदूर इसकी चपेट में आ गए। प्रारंभिक रिपोर्ट के मुताबिक, घटना के बाद एक मजदूर लापता हो गया था और 12 लोग घायल बताए गए थे। बाद में बचाव दल ने मलबे से लापता व्यक्ति का शव बरामद किया, जबकि अस्पताल में इलाज के दौरान तीन अन्य घायलों ने दम तोड़ दिया। इस प्रकार मृतकों की संख्या बढ़कर चार हो गई।
जांच में शुरुआती तौर पर सामने आया है कि सुरंग के भीतर ज्वलनशील गैस जमा हो गई थी, जिससे यह विस्फोट हुआ। हालांकि, अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि हादसे के सही कारणों का पता लगाने के लिए विस्तृत तकनीकी जांच जारी है। घटना के बाद प्रशासन ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया। घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। साथ ही, सुरक्षा के मद्देनजर निर्माण कार्य को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है और पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी गई है।
रूस का सैन्य ट्रांसपोर्ट विमान क्रीमिया में क्रैश, 29 की जान गई
1 Apr, 2026 10:48 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मॉस्को: रूसी रक्षा मंत्रालय ने बुधवार तड़के पुष्टि की कि क्रीमिया में एक रूसी एएन-26 सैन्य परिवहन विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने से चालक दल के छह सदस्यों और 23 यात्रियों की मौत हो गई. घटनास्थल पर मौजूद एक सूत्र ने तास (TASS) न्यूज एजेंसी को बताया कि विमान एक चट्टान से टकरा गया.शिन्हुआ न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार रूसी रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार देर रात बताया कि क्रीमिया प्रायद्वीप के ऊपर एक निर्धारित उड़ान के दौरान An-26 विमान से संपर्क टूट गया था. शुरुआती जानकारी के मुताबिक यह दुर्घटना किसी तकनीकी खराबी के कारण हुई थी और विमान पर किसी भी तरह की शत्रुतापूर्ण गोलीबारी नहीं की गई थी.
रक्षा मंत्रालय ने बताया, '31 मार्च को मॉस्को के समय के अनुसार लगभग 18:00 बजे, एएन-26 सैन्य परिवहन विमान से संपर्क टूट गया, जब वह क्रीमिया प्रायद्वीप के ऊपर एक निर्धारित उड़ान पर था.' मंत्रालय ने आगे कहा, 'खोज और बचाव दल ने विमान के दुर्घटनास्थल का पता लगा लिया है. घटनास्थल से मिली रिपोर्टों के अनुसार विमान में सवार चालक दल के छह सदस्य और 23 यात्री मारे गए हैं.'
मंत्रालय की रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया कि विमान में कुल कितने लोग सवार थे, लेकिन इस विमान में किसी भी जीवित बचे व्यक्ति का कोई जिक्र नहीं किया गया. एएन-26 एक हल्का सामरिक सैन्य परिवहन विमान है, जो दशकों से सेना का मुख्य आधार रहा है और यह कम तथा मध्यम दूरी तक माल और 40 यात्रियों तक को ले जाने में सक्षम है.
दिसंबर 2025 की शुरुआत में भी इसी तरह की एक घटना हुई थी, जब रूस ने एक एंटोनोव ट्रांसपोर्ट विमान से जुड़े एक जानलेवा सैन्य विमानन हादसे की जानकारी दी थी. 9 दिसंबर को मॉस्को के पूर्व में स्थित इवानोवो क्षेत्र के इवानकोवो गाँव के पास एक एंटोनोव एएन-22 विमान टेस्ट फ़्लाइट के दौरान क्रैश हो गया.
यह विमान मरम्मत के काम के बाद उड़ान पर निकला था, जिससे यह संकेत मिलता है कि घटना के समय विमान का रखरखाव के बाद का परीक्षण चल रहा था. रूसी अधिकारियों ने पुष्टि की कि इस हादसे में कोई भी जीवित नहीं बचा. हालाँकि, आधिकारिक बयान में शुरू में विमान में सवार लोगों की संख्या का जिक्र नहीं किया गया था, लेकिन सरकारी समाचार एजेंसी तास (TASS) ने पहले बताया था कि विमान में चालक दल के सात सदस्य सवार थे. इस हादसे में सभी लोगों की मौत हो गई, जो संबंधित सैन्य विमानन इकाई के लिए एक दुखद क्षति है.
छात्र की मौत से सनसनी, हॉस्टल रूम में मिला शव
1 Apr, 2026 10:32 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कुरुक्षेत्र। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एनआईटी) कुरुक्षेत्र में पढ़ाई कर रहे एक छात्र ने हॉस्टल नंबर-8 में मंगलवार देर रात फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतक की पहचान पवन कुमार निवासी मेवात के रूप में हुई है। वह बीटेक इलेक्ट्रिकल, पांचवें सेमेस्टर की पढ़ाई कर रहा था। देर रात तक छात्र के कमरे से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ। पवन कुमार हॉस्टल के ब्लॉक-सी के कमरा नंबर 452 में रह रहा था। उसने अज्ञात कारणों से कमरे में पंखे से फंदा लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। पवन शाम से ही अपने हॉस्टल के कमरे में था। दोस्तों ने जब उसे फंदे से लटके देखा तो तुरंत बाद हॉस्टल सिक्योरिटी को सूचना दी। इसके बाद मामले की सूचना थर्ड गेट चौकी पुलिस को दी गई। पुलिस चौकी थर्ड के प्रभारी विनोद कुमार ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया। साथ ही पुलिस की फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल पर जाकर साक्ष्य जुटाए। उन्होंने कहा कि छात्र के कमरे से एक नोटबुक मिली है जिसमें कर्ज के बारे में कुछ लिखा गया है। इस एंगल से भी जांच की जाएगी। सूचना मिलते ही एनआईटी निदेशक सहित अन्य अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। आसपास के छात्रों से जानकारी जुटाई गई। देर रात तक कारणों का खुलासा नहीं हो सका। पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है। एनआईटी निदेशक डॉ. बीवी रमन्ना रेड्डी ने कहा कि फिलहाल संस्थान का कार्यभार अधिकारिक तौर पर डॉ ब्रह्मजीत के पास है। वे ही घटना के संबंध में जानकारी दे सकते हैं। डॉ ब्रह्मजीत से संपर्क नहीं हो सका।
होर्मुज संकट के बीच ट्रम्प का सख्त बयान: अब अमेरिका नहीं करेगा किसी की मदद
1 Apr, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। डोनाल्ड ट्रम्प ने वैश्विक ऊर्जा संकट और होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति को लेकर कड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अब अमेरिका किसी भी देश की मदद के लिए आगे नहीं आएगा और देशों को अपने हालात खुद संभालने होंगे।
सोशल मीडिया पर जारी बयान में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि जो देश, खासकर ब्रिटेन, होर्मुज स्ट्रेट से ईंधन नहीं ला पा रहे हैं, उन्हें अमेरिका से तेल खरीदना चाहिए क्योंकि अमेरिका के पास पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। उन्होंने दो टूक अंदाज में कहा कि अगर देश चाहें तो “हिम्मत दिखाएं और खुद होर्मुज स्ट्रेट जाकर तेल ले लें”, क्योंकि अमेरिका अब उनकी मदद के लिए नहीं आएगा।
राष्ट्रपति ट्रम्प ने यह भी दावा किया कि ईरान काफी हद तक कमजोर हो चुका है और क्षेत्र में सबसे कठिन चरण पहले ही पार हो चुका है। उनके अनुसार अब बाकी देशों को अपनी ऊर्जा जरूरतों को लेकर खुद पहल करनी होगी।
इस बयान को वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजार में अमेरिका की बदलती नीति के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे अंतरराष्ट्रीय संबंधों और तेल आपूर्ति की रणनीतियों पर व्यापक असर पड़ सकता है।
फ्लोरिडा एयरपोर्ट का नाम होगा अब प्रेसिडेंट डोनाल्ड जे. ट्रम्प इंटरनेशनल एयरपोर्ट
1 Apr, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिका के फ्लोरिडा में स्थित पाम बीच इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम बदलकर अब डोनाल्ड ट्रम्प के नाम पर रखा जाएगा। इस फैसले के तहत एयरपोर्ट का नया नाम ‘प्रेसिडेंट डोनाल्ड जे. ट्रम्प इंटरनेशनल एयरपोर्ट’ होगा।
यह निर्णय फ्लोरिडा के गवर्नर रॉन डीसैंटिस द्वारा एक विधेयक पर हस्ताक्षर करने के बाद लिया गया। अब इस नाम परिवर्तन को लागू करने के लिए फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (एफएए) को औपचारिक प्रस्ताव भेजा जाएगा। एफएए की मंजूरी मिलने के बाद फ्लाइट चार्ट, नेविगेशन सिस्टम और एयरपोर्ट साइनेज में बदलाव किया जाएगा। संभावना है कि यह नया नाम 1 जुलाई से लागू हो सकता है।
यदि यह प्रक्रिया पूरी हो जाती है, तो ट्रम्प पहले ऐसे अमेरिकी राष्ट्रपति बन जाएंगे, जिनके कार्यकाल के दौरान ही उनके नाम पर किसी एयरपोर्ट का नाम रखा जाएगा। इसके साथ ही पाम बीच इंटरनेशनल एयरपोर्ट अमेरिका का नौवां ऐसा वाणिज्यिक हवाईअड्डा बन जाएगा, जिसका नाम किसी राष्ट्रपति पर होगा। यह एयरपोर्ट ट्रम्प के निजी निवास मार-ए-लागो एस्टेट के बेहद करीब स्थित है, जो इस फैसले को और खास बनाता है।
नाम बदलने की प्रक्रिया जटिल
अमेरिका में किसी एयरपोर्ट का नाम बदलना केवल प्रशासनिक फैसला नहीं होता, बल्कि इसमें स्थानीय, राज्य और संघीय स्तर की मंजूरी शामिल होती है। आमतौर पर पहले स्थानीय निकाय या एयरपोर्ट अथॉरिटी प्रस्ताव पारित करती है, इसके बाद राज्य सरकार की मंजूरी ली जाती है और अंत में एफएए इसे आधिकारिक रूप से लागू करता है। हालांकि एयरपोर्ट का कोड आमतौर पर नहीं बदला जाता, लेकिन इस मामले में सांसद ब्रायन मस्ट ने तीन अक्षरों वाला कोड पीबीआई से बदलकर डीजेटी करने का प्रस्ताव भी रखा है।
ट्रम्प के नाम पर बढ़ रहे संस्थान
एयरपोर्ट के अलावा भी ट्रम्प के नाम पर कई अन्य संस्थानों के नाम रखने के प्रस्ताव सामने आए हैं, जिनमें नेवी के वॉरशिप, निवेश वीजा प्रोग्राम, सरकारी वेबसाइट्स और बचत योजनाएं शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला अमेरिकी राजनीति में प्रतीकात्मक और ऐतिहासिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
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