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कोलंबिया में हुआ विमान हादसा, सांसद सहित 15 लोगों की मौत, पहाड़ी इलाके में मिला मलबा
30 Jan, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलंबिया। दक्षिण अमेरिकी देश कोलंबिया से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है, जहां बुधवार, को एक विमान दुर्घटना में एक सांसद और चुनावी उम्मीदवार सहित कुल 15 लोगों की जान चली गई। विमानन अधिकारियों द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, यह हादसा वेनेजुएला सीमा के पास उत्तर संतांदर के दुर्गम पहाड़ी इलाके में हुआ। दुर्घटनाग्रस्त विमान कोलंबिया की सरकारी एयरलाइन सटेना का था। ट्विन इंजन वाले इस प्रोपेलर विमान ने कुकुटा शहर से ओकाणा के लिए उड़ान भरी थी। उड़ान भरने के मात्र 12 मिनट बाद ही विमान का संपर्क एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीएस) से टूट गया, जिससे हड़कंप मच गया।
घंटों चले गहन खोजी अभियान के बाद, वायुसेना को प्लाया डी बेलन के ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्र में विमान का मलबा मिला। राहत और बचाव दल जब तक वहां पहुंचे, तब तक विमान में सवार सभी 15 यात्रियों की मृत्यु हो चुकी थी। इस हादसे में जान गंवाने वालों में 36 वर्षीय डायोजनीज क्विंटरो भी शामिल हैं, जो कोलंबिया की संसद के सक्रिय सदस्य थे। क्विंटरो कटाटुम्बो क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते थे, जो लंबे समय से संघर्ष और कोका की खेती के लिए चर्चा में रहता है। वह 2022 में उन 16 विशेष प्रतिनिधियों में से एक चुने गए थे, जिन्हें देश के दशकों पुराने आंतरिक संघर्ष के पीड़ितों के लिए आरक्षित सीटों पर जगह मिली थी। उनके साथ ही आगामी चुनाव के उम्मीदवार कार्लोस साल्सेडो की भी इस दुखद घटना में मृत्यु हो गई। जिस स्थान पर यह विमान क्रैश हुआ, वह एंडीज पर्वतमाला का एक बेहद ऊबड़-खाबड़ और चुनौतीपूर्ण इलाका है। यह क्षेत्र कोलंबिया के सबसे बड़े गुरिल्ला समूह, नेशनल लिबरेशन आर्मी के प्रभाव वाला माना जाता है। प्रारंभिक अनुमानों के अनुसार, क्षेत्र का कठिन भूगोल और अचानक बदलने वाला मौसम इस हादसे की वजह हो सकता है। कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो ने इस त्रासदी पर गहरा शोक व्यक्त किया है और पीड़ितों के परिवारों के प्रति संवेदनाएं प्रकट की हैं। फिलहाल विमानन एजेंसियां इस बात की विस्तृत जांच कर रही हैं कि हादसे का असली कारण तकनीकी खराबी थी या खराब मौसम। गौरतलब है कि इससे एक दिन पूर्व ही भारत में भी एक बड़ा विमान हादसा हुआ था, जिसमें महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार की बारामती में चार्टर प्लेन क्रैश होने से मृत्यु हो गई थी।
हवा में विमान का पहिया गिर जाने के बाद भी पायलट ने अटलांटिक के ऊपर तय किया 10 घंटे का सफर
30 Jan, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लंदन। विमान यात्रा के दौरान किसी तकनीकी खराबी की खबर मात्र से यात्रियों और चालक दल के पसीने छूट जाते हैं, लेकिन हाल ही में अटलांटिक महासागर के ऊपर एक ऐसा वाकया पेश आया जिसने विमानन विशेषज्ञों को भी हैरान कर दिया। लास वेगास से लंदन जा रहे एक एयरबस ए350-1000 विमान का पहिया टेकऑफ के तुरंत बाद ही निकलकर नीचे गिर गया। इस बड़ी गड़बड़ी के बावजूद, पायलट ने सूझबूझ का परिचय देते हुए न केवल उड़ान जारी रखी, बल्कि 10 घंटे का लंबा सफर तय कर विमान को सुरक्षित लैंडिंग भी कराई।
यह घटना सोमवार रात की है जब ब्रिटिश एयरवेज की उड़ान ने लास वेगास के हैरी रीड इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़ान भरी थी। जैसे ही विमान ने रनवे से ऊंचाई पकड़नी शुरू की, पीछे के लैंडिंग गियर से एक काला पहिया अलग होकर नीचे गिरता हुआ दिखाई दिया। इस रोंगटे खड़े कर देने वाले दृश्य को जमीन पर मौजूद लोगों ने कैमरे में कैद कर लिया, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। घटना के बाद एयरपोर्ट प्रशासन और स्टाफ की सांसें अटकी रहीं, लेकिन पायलट ने अटलांटिक महासागर के ऊपर से विमान को ले जाने का साहसिक निर्णय लिया। हैरानी की बात यह है कि डेटा के अनुसार, विमान न केवल सुरक्षित लैंडिंग करने में सफल रहा, बल्कि लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट पर अपने निर्धारित समय से करीब 27 मिनट पहले ही पहुंच गया। विमान के सुरक्षित उतरते ही एयरपोर्ट स्टाफ और यात्रियों ने राहत की सांस ली। हालांकि, इस बात की जांच अभी भी जारी है कि उड़ान भरते समय इतना महत्वपूर्ण हिस्सा विमान से कैसे अलग हो गया।
इस मामले पर एयरलाइंस ने अपना आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि उनके लिए यात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि है और वे इस घटना की जांच में विमानन अधिकारियों का पूरा सहयोग कर रहे हैं। लास वेगास एयरपोर्ट प्रशासन ने पुष्टि की है कि रनवे से खोया हुआ टायर बरामद कर लिया गया है और इस पूरी घटना में किसी को भी कोई चोट नहीं आई है। विशेषज्ञों का कहना है कि एयरबस ए350-1000 जैसे विशालकाय विमानों में कई पहिए होते हैं, जो इस तरह के आपातकाल को संभालने के लिए डिजाइन किए जाते हैं। यदि एक पहिया निकल भी जाए, तो बाकी पहिए लैंडिंग के समय विमान का वजन संभालने की क्षमता रखते हैं। फिर भी, टेकऑफ के वक्त इस तरह की खराबी आना सुरक्षा के मानकों पर बड़े सवाल खड़े करता है।
प्राकृतिक चीजों से उपचार की 500 साल पुरानी किताब मिली
29 Jan, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मैनचेस्टर। यूनिवर्सिटी ऑफ मैनचेस्टर के वैज्ञानिकों को 1531 के आसपास की एक पुरानी किताब मिली है, जो यूरोप के पुनर्जागरण काल की मानी जा रही है। यह किताब जॉन रायलैंड्स लाइब्रेरी में सुरक्षित रखी गई थी और इसे बार्थोलोमाउस वोग्थेर नाम के एक नेत्र चिकित्सक ने लिखा था। इस किताब में उस दौर में आम लोगों को होने वाली बीमारियों और उनके उपचारों का विस्तार से जिक्र किया गया है। उस समय डॉक्टर और वैद्य प्राकृतिक चीजों के जरिए इलाज करने की सलाह देते थे। मसलन, दिल से जुड़ी बीमारियों के लिए अगर की लकड़ी का इस्तेमाल बताया गया था, जिसे दिल को साफ करने और धड़कन सामान्य रखने में सहायक माना जाता था। किताब में सिर दर्द जैसी आम समस्या के लिए भी अजीब उपाय दर्ज हैं। उस समय लोगों को तंबाकू के पाइप में दालचीनी डालकर पीने की सलाह दी जाती थी। लेकिन सबसे ज्यादा चौंकाने वाले उपाय गंजेपन और बालों की मजबूती से जुड़े हैं। उस दौर में यह माना जाता था कि बाल झड़ना एक बीमारी है और इसे ठीक करने के लिए सिर पर इंसानी मल लगाने की सलाह दी जाती थी। लोगों का विश्वास था कि ऐसा करने से सिर की बीमारी दूर हो जाएगी और दोबारा बाल उगने लगेंगे।
इतना ही नहीं, मजबूत और घने बालों के लिए छिपकली के सिरों को पीसकर बने मिश्रण को सिर पर लगाने का भी उल्लेख किताब में मिलता है। किताब में सिर्फ बालों से जुड़े ही नहीं, बल्कि मुंह के छालों के इलाज के लिए भी हैरान करने वाले तरीके दर्ज हैं। उस समय हिप्पोपोटेमस यानी दरियाई घोड़े के दांतों का इस्तेमाल मुंह के छालों को ठीक करने के लिए किया जाता था। शोधकर्ताओं का कहना है कि इस किताब में अलग-अलग तरह की हैंडराइटिंग देखने को मिलती है, जिससे अंदाजा लगाया जाता है कि इसमें कई लोगों ने अपने-अपने अनुभव और उपचार जोड़े होंगे। हालांकि, यह साफ नहीं है कि इन उपायों को लिखने वाले चिकित्सकों ने खुद इन्हें अपनाया था या नहीं। राहत की बात यह है कि किताब में दर्ज सभी उपचार नुकसानदेह नहीं थे, लेकिन कई तरीके आज के नजरिए से बेहद अजीब और अविश्वसनीय लगते हैं।
बता दें कि दुनिया में शायद ही कोई ऐसा इंसान होगा जिसे अपने झड़ते बाल अच्छे लगते हों। खासकर पुरुष गंजेपन से बचने के लिए हर मुमकिन कोशिश करते हैं, वहीं महिलाओं में बाल झड़ने की समस्या कई बार मानसिक तनाव और अवसाद तक की वजह बन जाती है। आज के दौर में विग, हेयर ट्रांसप्लांट और एडवांस्ड ट्रीटमेंट जैसे कई विकल्प मौजूद हैं, लेकिन 15वीं और 16वीं सदी में हालात बिल्कुल अलग थे। उस समय आधुनिक चिकित्सा का अभाव था और लोग बाल उगाने के लिए ऐसे देसी और अजीब उपाय अपनाते थे।
दुनिया को धमका रहे ट्रंप बोले- नूरी अल-मलिकी प्रधानमंत्री बने तो इराक को तबाह कर देंगे
29 Jan, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिकी राजनीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में उस वक्त हड़कंप मच गया जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के खिलाफ एक नाटकीय सैन्य कार्रवाई को अंजाम देते हुए उन्हें कराकस से न्यूयॉर्क पहुंचा दिया। इस बड़ी कार्रवाई के तुरंत बाद अब ट्रंप की नजर इराक के सत्ता गलियारे पर टिक गई है। इराक में हाल ही में हुए चुनावों के बाद रुझान पूर्व प्रधानमंत्री नूरी अल-मलिकी के पक्ष में दिखाई दे रहे हैं, लेकिन ट्रंप ने आधिकारिक नतीजे आने से पहले ही इराक को कड़े लहजे में चेतावनी जारी कर दी है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने साफ तौर पर कहा कि यदि नूरी अल-मलिकी दोबारा सत्ता में लौटते हैं, तो इसके परिणाम बेहद गंभीर और विनाशकारी होंगे। ट्रंप ने इराक को धमकी दी कि अल-मलिकी के प्रधानमंत्री बनने की स्थिति में अमेरिका इराक को पूरी तरह तबाह कर देगा। उन्होंने अल-मलिकी की नीतियों को सनकी करार देते हुए दावा किया कि उनके पिछले आठ साल के शासनकाल के दौरान इराक केवल गरीबी और अराजकता की ओर बढ़ा है। ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया कि यदि वे फिर से सत्ता संभालते हैं, तो अमेरिका इराक को मिलने वाली किसी भी प्रकार की सहायता पर तत्काल रोक लगा देगा। नूरी अल-मलिकी इराक के एक कद्दावर नेता हैं, जो 2006 से 2014 तक दो बार प्रधानमंत्री रह चुके हैं। 1968 में जन्मे अल-मलिकी का राजनीतिक सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। सद्दाम हुसैन के शासनकाल के दौरान उन्होंने बाथ पार्टी का विरोध किया, जिसके चलते उन्हें 1979-80 में मौत की सजा सुनाई गई थी। वे लंबे समय तक निर्वासन में रहे और 2003 में अमेरिकी आक्रमण के बाद ही इराक वापस लौटे। वर्तमान में उन्हें शिया कोऑर्डिनेशन फ्रेमवर्क का समर्थन प्राप्त है, जिसके पास संसद में बहुमत है। गठबंधन का मानना है कि अल-मलिकी के पास अनुभव की कोई कमी नहीं है, जबकि ट्रंप को उनमें सद्दाम हुसैन जैसी प्रवृत्तियां और ईरान के प्रति झुकाव नजर आता है।
ट्रंप की इस नाराजगी के पीछे की मुख्य वजह अल-मलिकी के शासनकाल में उभरे शिया अर्धसैनिक बल और ईरान के साथ उनके करीबी संबंध हैं। 2014 में जब आईएसआईएस का प्रभाव बढ़ा, तब अल-मलिकी ने सुन्नी चरमपंथियों से लड़ने के लिए कई हथियारबंद समूह बनाए थे। अमेरिका इन गैर-सरकारी सशस्त्र समूहों को भंग करने की मांग करता रहा है। अमेरिका के विशेष दूत मार्क सवाया पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि इन समूहों पर लगाम न लगाने से इराक फिर से पतन की ओर बढ़ सकता है। हालांकि, जानकारों का मानना है कि ट्रंप के लिए इराक में सैन्य हस्तक्षेप करना इतना आसान नहीं होगा। इतिहास गवाह है कि 2003 में सद्दाम हुसैन को हटाने के लिए किए गए अमेरिकी आक्रमण ने इराक को सालों तक अस्थिरता, सांप्रदायिक हिंसा और आतंकवाद की आग में झोंक दिया था। उस युद्ध में 4,400 से अधिक अमेरिकी सैनिक मारे गए और अमेरिका पर भारी वित्तीय बोझ पड़ा। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या ट्रंप अपनी धमकियों को हकीकत में बदलते हैं या यह महज एक कूटनीतिक दबाव बनाने की रणनीति है।
मोहम्मद यूनुस ने अपने ही देश पर साधा निशाना, बोले- फ्रॉड में वर्ल्ड चैम्पियन बन गया बांग्लादेश
29 Jan, 2026 10:39 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस (Mohammad Yunus) ने कहा कि बांग्लादेश (Bangladesh) ने फ्रॉड करने में चैम्पियन (Champion) बनने की छवि कमाई है। दरअसल, वह दस्तावेजों में जालसाजी को लेकर नाराजगी जाहिर कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश से कई वीजा आवेदन (visa application) जाली दस्तावेजों के कारण रिजेक्ट हो रहे हैं। खास बात है कि हाल ही में अमेरिका ने वीजा बॉन्ड लिस्ट में विस्तार किया था, जिसमें बांग्लादेश को भी शामिल किया था।
ऐसा क्यों बोले
ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, यूनुस ने बुधवार को कहा कि बांग्लादेश ने फ्रॉड में वर्ल्ड चैम्पियन की खराब पहचान बनाई है। उन्होंने कहा, ‘सबकुछ नकली है। कई देश हमारे पासपोर्ट स्वीकार नहीं करते हैं। वीजा नकली हैं, पासपोर्ट नकली हैं।’ उन्होंने कहा, ‘आपने खबरें देखी होंगी…। हमने फ्रॉड की ऐसी फैक्ट्री तैयार की है।’
यूनुस चार दिवसीय डिजिटल डिवाइस एंड इनोवेशन एक्सपो 2026 पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि बांग्लादेशियों को विदेश में वीजा आवेदन अस्वीकार होने का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि इसकी बड़ी वजह जाली दस्तावेज हैं। उन्होंने कहा कि इनमें शिक्षा से जुड़े नकली दस्तावेज भी शामिल हैं।
उदाहरण भी दिया
उन्होंने कहा, ‘मैंने ऐसे मामले देखे हैं, जहां लोगों ने फर्जी प्रमाण पत्र लगाकर वीजा के लिए आवेदन दिए हैं। एक महिला ने डॉक्टर के तौर पर आवेदन दिया, लेकिन उसके सभी दस्तावेज जाली थे।’ उन्होंने कहा कि ऐसे ही कामों के चलते कई देशों ने बांग्लादेश के नागरिकों को एंट्री देने से इनकार कर दिया है।
उन्होंने कहा, ‘ये फ्रॉड इंटेलीजेंस और क्रिएटिविटी से किए जा रहे हैं, लेकिन सब गलत कारणों के लिए।’ मुख्य सलाहकार ने कहा, ‘अगर हम तकनीकी रूप से आगे बढ़ना चाहते हैं, तो हम यह सुनिश्चित करें कि निष्पक्षता और ईमानदारी हो। हम इस देश को फ्रॉड की फैक्ट्री नहीं बनने देना चाहते। हम दुनिया में सिर उठा कर चलना चाहते हैं।’
जेल में इमरान खान के मेडिकल मर्डर की साजिश का आरोप, पाकिस्तान में बढ़ा तनाव
29 Jan, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पीटीआई प्रमुख इमरान खान की सेहत को लेकर आई एक ताजा मेडिकल रिपोर्ट ने पूरे देश में खलबली मचा दी है। रावलपिंडी की अडियाला जेल में बंद इमरान खान एक गंभीर नेत्र रोग से जूझ रहे हैं, जिससे उनकी दाहिनी आंख की रोशनी हमेशा के लिए जाने का खतरा पैदा हो गया है। मेडिकल टीम के अनुसार, इमरान खान सेंट्रल रेटिनल वेन ऑक्लूजन नाम की बीमारी की चपेट में हैं। इस स्थिति में आंख की रेटिना की नसों में खून का थक्का जम जाता है, जिससे दृष्टि बाधित हो जाती है। यदि उन्हें तुरंत विशेषज्ञ उपचार नहीं मिला, तो वे अपनी एक आंख की रोशनी पूरी तरह खो सकते हैं।
पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के डॉक्टरों के एक प्रतिनिधिमंडल ने जेल में उनकी जांच करने के बाद स्पष्ट चेतावनी दी है कि इमरान खान को तत्काल एक विशेषज्ञ अस्पताल और अत्याधुनिक ऑपरेशन थिएटर की आवश्यकता है। डॉक्टरों का मानना है कि जेल के भीतर उपलब्ध सीमित संसाधनों से उनकी आंख का इलाज करना संभव नहीं है। उत्तर पाकिस्तान में चल रही भीषण शीतलहर और जेल की सूखी ठंड ने उनकी एलर्जी और संक्रमण को और अधिक गंभीर बना दिया है, जिससे स्थिति नियंत्रण से बाहर होती जा रही है। इमरान खान की पार्टी और उनके परिवार ने वर्तमान शहबाज शरीफ सरकार और सैन्य प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनकी बहनों, अलीमा और उज्मा खान का कहना है कि इमरान को जानबूझकर सॉलिटरी कन्फाइनमेंट (काल कोठरी) में रखकर मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। 2 दिसंबर 2025 से पिछले लगभग 55 दिनों से उन्हें दुनिया से पूरी तरह काटकर रखा गया है। टॉर्चर की इंतहा यह है कि उन्हें उनके वकीलों और सगे परिजनों तक से मिलने की अनुमति नहीं दी जा रही है। समर्थकों के बीच यह डर गहराता जा रहा है कि यह जेल में उनके मेडिकल मर्डर की एक सोची-समझी साजिश है ताकि उन्हें शारीरिक रूप से अक्षम किया जा सके। इमरान की बहनों ने मांग की है कि उन्हें फौरन शौकत खानम अस्पताल स्थानांतरित किया जाए, जहां उनका उचित इलाज हो सके। इस बीच, 31 जनवरी 2026 को होने वाला अगला मेडिकल रिव्यू पाकिस्तान की राजनीति के लिए निर्णायक साबित हो सकता है। यदि मेडिकल रिपोर्ट में उनकी हालत और बिगड़ी हुई पाई गई, तो पाकिस्तान की सड़कों पर उनके समर्थकों का गुस्सा फूट सकता है, जिससे गृहयुद्ध जैसी स्थितियां पैदा होने की आशंका जताई जा रही है। जेल प्रशासन और सरकार ने फिलहाल इन आरोपों पर चुप्पी साध रखी है, लेकिन बढ़ता तनाव किसी बड़े राजनीतिक विस्फोट की ओर इशारा कर रहा है।
पिता फ्रेड ट्रम्प को कोई स्वास्थ्य समस्या नहीं थी, सिवाय एक के! फिर भूल गए ट्रंप
29 Jan, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की सेहत और मानसिक तेजी को लेकर फिर बहस छिड़ गई है। एक इंटरव्यू में ट्रम्प ने अपने दिवंगत पिता फ्रेड ट्रम्प की बीमारी के बारे में बात करते हुए बीमारी का नाम भूल गए। ट्रम्प ने कहा कि वे अल्जाइमर यानी (भूलने की बीमारी) से ग्रस्त नहीं हैं और उनकी सेहत परफेक्ट है। ट्रम्प ने अपने पिता के बारे में कहा कि फ्रेड ट्रम्प का दिल बहुत मजबूत था और उन्हें कोई स्वास्थ्य समस्या नहीं थी, सिवाय एक के। इसके बाद ट्रम्प शब्द भूल गए।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप ने दिमाग पर जोर देते हुए कहा कि क्या कहते हैं उस बीमारी को? ट्रम्प ने अपनी माथे की ओर इशारा किया और कैरोलाइन लेविट की तरफ देखा। लेविट ने तुरंत कहा अल्जाइमर। ट्रम्प ने फिर कहा कि अल्जाइमर जैसी चीज। खैर, मुझे यह नहीं है। जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें भी यह बीमारी है, तो ट्रम्प ने इसे खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि नहीं मैं इसके बारे में बिल्कुल नहीं सोचता। इंटरव्यू में ट्रम्प ने अपनी स्टैमिना पर जोर देते हुए कहा कि वे आज भी वैसा ही महसूस करते हैं जैसा 40 साल पहले करते थे। व्हाइट हाउस ने भी इन चिंताओं को कम करने की कोशिश की।
रिपोर्ट के मुताबिक कम्युनिकेशंस डायरेक्टर ने बयान जारी कर कहा कि राष्ट्रपति सुपरह्यूमन की तरह काम करते हैं। व्हाइट हाउस सेक्रेटरी कैरोलाइन लेविट ने कहा कि ट्रम्प रात देर तक काम करते हैं और स्टाफ से ज्यादा मेहनत करते हैं। कुछ हफ्ते पहले ट्रम्प ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किया था कि व्हाइट हाउस डॉक्टरों ने उन्हें परफेक्ट बताया है। हाल के महीनों में ट्रम्प की सेहत पर सवाल खड़े हो रहे हैं। हाल ही में वह एयरफोर्स वन पर चढ़ते समय ठोकर खाकर गिर गए थे, कैबिनेट मीटिंग में झपकी ली, हाथों पर चोट के निशान दिखे, टखनों में सूजन आई और एक बार सार्वजनिक रूप से लंबे समय तक गायब रहने की अफवाहें फैलीं। अगस्त में ट्रम्प इज डेड ट्रेंड होने पर व्हाइट हाउस को सफाई देनी पड़ी थी कि राष्ट्रपति जिंदा हैं।
अमेरिका के बिना खुद की रक्षा नहीं कर सकता यूरोप, इसके लिए बढ़ाना होगा रक्षा खर्च
29 Jan, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। नाटो के महासचिव मार्क रुट ने ब्रुसेल्स में यूरोपीय संसद को संबोधित करते हुए चेतावनी दी कि यूरोप अमेरिका के बिना खुद की रक्षा नहीं कर सकता है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक रुट ने कहा कि अगर वे वास्तव में अकेले ही ऐसा करना चाहते हैं तो उन्हें अपने रक्षा खर्च को 10फीसदी तक बढ़ाना होगा, अपनी परमाणु क्षमता का निर्माण करना होगा, जिसकी लागत अरबों यूरो होगी। अभी नाटो के खर्च में यूरोपीय देशों का कुल योगदान केवल 30फीसदी है, जो देशों की जीडीपी का औसतन 2फीसदी है।
रिपोर्ट के मुताबिक रुट ने ट्रम्प के आर्कटिक क्षेत्र और ग्रीनलैंड की मजबूत रक्षा की रणनीति का समर्थन किया। रुट ने कहा कि उन्होंने ट्रम्प को उनकी बढ़ती धमकियों से पीछे हटने के लिए मनाया और ग्रीनलैंड को लेकर समझौते की दिशा में ले जाने की कोशिश की। ट्रम्प ने 21 जनवरी को दावोस में रुट के साथ ग्रीनलैंड को लेकर बातचीत की थी। डेनमार्क और ग्रीनलैंड के नेता इस बात से नाराज हो गए थे कि ट्रम्प और रुट उनके पीठ पीछे ग्रीनलैंड के भविष्य पर बात कर रहे हैं। यूरोपीय संसद के कई सदस्यों ने रुट से पूछा कि उन्होंने ट्रम्प से क्या चर्चा की और इसका डेनमार्क व ग्रीनलैंड पर क्या असर होगा।
बता दें ट्रम्प ने पिछले हफ्ते दावा किया था कि ग्रीनलैंड के भविष्य को लेकर नाटो के साथ एक समझौते का ढांचा तैयार हो गया है, जिससे यूरोप में राहत मिली, हालांकि कई लोग चिंतित हैं कि ट्रम्प अपना मन बदल सकते हैं। रुट ने कहा कि 70 साल बाद भी यूरोप अमेरिकी सैन्य शक्ति पर निर्भर है। यूरोप को अपनी मजबूत रक्षा के लिए बहुत अधिक खर्च करना होगा, यहां तक कि अपना परमाणु हथियार बनाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि 2035 तक 5फीसदी जीडीपी रक्षा खर्च काफी नहीं, इसे 10फीसदी तक ले जाना होगा। उस स्थिति में आप हमारी स्वतंत्रता के अंतिम गारंटर यानी अमेरिकी परमाणु सुरक्षा कवच को खो देंगे। अगर यूरोप अकेला चल सके तो मेरी ओर से शुभकामनाएं। रुट ने ट्रम्प की बात दोहराई कि चीन और रूस आर्कटिक सुरक्षा के लिए खतरा बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि ट्रम्प अच्छा काम कर रहे हैं, मैं जानता हूं कि इससे कई लोग चिढ़ रहे हैं।
ड्रोन तकनीक को नई दिशा देगा चमगादड के उडान का तरीका
28 Jan, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लंदन । वैज्ञानिकों के लिए लंबे समय से सवाल बना हुआ था कि पिच-ब्लैक अंधेरे में चमगादड़ इतनी सटीकता से रास्ता कैसे पहचान लेते हैं। घने जंगल, चारों तरफ घुप्प अंधेरा और तेज रफ्तार उड़ान, इसके बावजूद चमगादड़ कभी पेड़ों, पत्तियों या टहनियों से नहीं टकराते। ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टल के वैज्ञानिकों ने इस रहस्य से पर्दा उठा दिया है। यह खोज न केवल प्रकृति की अद्भुत क्षमता को सामने लाती है, बल्कि भविष्य की ड्रोन और रोबोटिक तकनीक को भी नई दिशा दे सकती है। अब तक माना जाता था कि चमगादड़ पूरी तरह इको-लोकेशन यानी ध्वनि तरंगों के सहारे उड़ान भरते हैं और आसपास मौजूद हर चीज को सोनार की तरह मैप करते हैं। लेकिन नई स्टडी के मुताबिक, चमगादड़ सिर्फ आवाज़ की गूंज पर निर्भर नहीं रहते। वे ध्वनि के प्रवाह और उसकी गति को भी महसूस करते हैं, जिसे वैज्ञानिकों ने “अकूस्टिक फ्लो वेलोसिटी” नाम दिया है। इसका मतलब यह हुआ कि चमगादड़ हर पत्ती या टहनी की अलग-अलग दूरी नहीं मापते, बल्कि ध्वनि के बहाव के पैटर्न से यह समझ लेते हैं कि सामने का वातावरण कितना घना है और किस रफ्तार से आगे बढ़ना सुरक्षित रहेगा।
इस सिद्धांत को साबित करने के लिए वैज्ञानिकों ने एक खास प्रयोग किया, जिसे “बैट एक्सेलेरेटर मशीन” नाम दिया गया। यह करीब आठ मीटर लंबा एक उड़ान कॉरिडोर था, जिसमें लगभग 8,000 कृत्रिम पत्तियां लगाकर घने जंगल जैसा माहौल तैयार किया गया। इस प्रयोग में 100 से ज्यादा पिपिस्ट्रेल प्रजाति के चमगादड़ों की उड़ान को बारीकी से ट्रैक किया गया। वैज्ञानिकों ने इन नकली पत्तियों को आगे-पीछे खिसकाया, जिससे ध्वनि तरंगों के प्रवाह की गति बदलती रही। जब पत्तियां चमगादड़ों की ओर बढ़ाईं गईं और उन्हें ध्वनि का प्रवाह तेज महसूस हुआ, तो उन्होंने अपनी उड़ान की रफ्तार लगभग 28 प्रतिशत तक कम कर ली।
वहीं, जब पत्तियां पीछे हटाईं गईं और ध्वनि प्रवाह धीमा लगा, तो चमगादड़ों ने अपनी स्पीड बढ़ा दी। इससे यह साफ हुआ कि चमगादड़ वातावरण की गति को समझकर अपने उड़ान नियंत्रण को तुरंत बदल लेते हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह प्रक्रिया डॉप्लर शिफ्ट के सिद्धांत पर आधारित है, वही सिद्धांत जिसकी वजह से एंबुलेंस के पास आने और दूर जाने पर सायरन की आवाज़ बदलती हुई महसूस होती है। यानी चमगादड़ सिर्फ “आवाज़ से देख” नहीं रहे होते, बल्कि वे आसपास की गति और बनावट को महसूस कर रहे होते हैं। इस खोज को ड्रोन और रोबोटिक्स की दुनिया में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
पेंशनर्स को भी दी जाएगी प्रेग्नेंसी से पहले के प्रेनेटल चेकअप की सुविधा
28 Jan, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग । हाल ही में चीन में लागू की गई एक नई स्वास्थ्य नीति सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा का विषय बनी हुई है। इस नीति ने चीन में जन्म दर बढ़ाने की सरकारी कोशिशों को एक नया और विवादास्पद मोड़ दे दिया है। इस नीति के तहत पेंशनर्स को भी प्रेग्नेंसी से पहले होने वाले प्रेनेटल चेकअप की सुविधा दी जाएगी। इतना ही नहीं, इसके खर्च की भरपाई सरकार करेगी। राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा प्रशासन की घोषणा के मुताबिक 1 जनवरी, 2026 से सामाजिक बीमा योजना से जुड़े स्वरोजगार करने वाले नागरिक और पेंशनर्स प्रेनेटल जांच का खर्च क्लेम कर सकते हैं। इसमें प्रति व्यक्ति रीइम्बर्समेंट की अधिकतम राशि 3,000 युआन से बढ़ाकर 10,000 युआन कर दी गई है।
इसके अलावा, शहर में काम करने वाले पुरुष कर्मचारी अपनी बेरोजगार पत्नी के प्रेनेटल खर्च का भी दावा कर सकते हैं। हालांकि, नीति में पेंशनर्स को शामिल किए जाने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने हैरानी और तंज भरी प्रतिक्रियाएं दी। कई यूजर्स ने इसे अव्यावहारिक और हास्यास्पद बताया। चीन में पुरुषों की सेवानिवृत्ति उम्र पहले 60 साल और महिलाओं की 50-55 साल थी, जिसे अब क्रमश: 63 और 55-58 साल तक बढ़ाया जा रहा है। शोध के अनुसार, महिलाओं की औसत मेनोपॉज उम्र करीब 49 साल है, इसलिए कई लोगों को पेंशनर्स के लिए प्रेनेटल चेकअप की योजना अजीब लगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम सरकार की जन्म दर बढ़ाने की कोशिशों का हिस्सा है। चीन में जन्म दर लंबे समय से घट रही थी, लेकिन हाल ही में यह 6.77 प्रति हजार तक बढ़ी, जो सात साल में पहली वृद्धि है। 2015 में वन चाइल्ड पॉलिसी खत्म करने के बाद 2021 में तीन बच्चों की अनुमति दी गई और पिछले साल तीन साल से कम उम्र के बच्चों के लिए 3,600 युआन की चाइल्डकेयर सहायता की घोषणा की गई थी।
इसके अलावा, सरकार ने 2026 से कंडोम और अन्य गर्भनिरोधकों पर 13 प्रतिशत वैट लगाने का निर्णय भी लिया है। कुछ क्षेत्रों में महिलाओं से मासिक धर्म की जानकारी मांगी जा रही है, जबकि विश्वविद्यालय छात्रों को रोमांटिक रिश्ते बनाने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर लोग इस नीति को अजीब और जरूरत से ज्यादा क़दम बता रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि 50 साल से अधिक उम्र में भी कुछ मामलों में गर्भधारण संभव है।
ईरान पर कभी भी हमला कर सकता है अमेरिका- जंगी जहाज समंदर में उतरे, हमले के लिए ठिकाने भी चिन्हित
28 Jan, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। मध्य पूर्व में एक बार फिर युद्ध की आहट तेज हो गई है क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिकी नौसेना का विशाल एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस अब्राहम लिंकन तीन अन्य घातक युद्धपोतों के साथ पश्चिम एशिया के रणनीतिक जलक्षेत्र में तैनात हो चुका है। इस भारी सैन्य जमावड़े ने पूरे क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है। अपुष्ट खबरों के अनुसार, सुरक्षा कारणों से ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को एक सुरक्षित बंकर में स्थानांतरित कर दिया गया है और प्रशासन की कमान फिलहाल उनके बेटे के हाथों में होने की चर्चा है। हालांकि अमेरिका की सेंट्रल कमांड ने इस तैनाती को केवल क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने का एक कदम बताया है, लेकिन कूटनीतिक गलियारों में इसे ईरान पर एक निर्णायक प्रहार की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है।
सैन्य सूत्रों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों का दावा है कि अमेरिका ने ईरान के उन वरिष्ठ अधिकारियों और ठिकानों को चिन्हित किया है, जो दमनकारी नीतियों और क्षेत्रीय अस्थिरता के लिए जिम्मेदार माने जाते हैं। खुफिया इनपुट के अनुसार, वर्तमान में ईरान की आंतरिक स्थिति 1979 की क्रांति के बाद के सबसे कमजोर दौर से गुजर रही है। देश न केवल गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है, बल्कि शासन की जनता पर पकड़ भी पहले के मुकाबले काफी ढीली हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को खुफिया एजेंसियों ने सूचित किया है कि यह ईरान की सैन्य और रणनीतिक क्षमताओं को कमजोर करने का सबसे उपयुक्त समय हो सकता है। ट्रंप प्रशासन ने ईरान को चेतावनी दी है कि यदि स्थिति और बिगड़ी, तो सैन्य कार्रवाई से पीछे नहीं हटा जाएगा।
इस संभावित संघर्ष के बीच भू-राजनीतिक समीकरण भी तेजी से बदल रहे हैं। ईरान के पड़ोसी और क्षेत्रीय शक्ति संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी संप्रभुता का सम्मान करता है और किसी भी युद्ध का हिस्सा नहीं बनेगा। यूएई के विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि वह अपनी जमीन, हवाई क्षेत्र या समुद्री सीमा का उपयोग ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य हमले के लिए नहीं होने देगा। यह घोषणा अमेरिका के लिए एक बड़ा कूटनीतिक झटका मानी जा रही है, क्योंकि खाड़ी देशों के सहयोग के बिना बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान चलाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। यूएई ने साफ कर दिया है कि वह किसी भी शत्रुतापूर्ण गतिविधि के लिए न तो आधार प्रदान करेगा और न ही कोई लॉजिस्टिक सहायता देगा।
दूसरी ओर, ईरान ने इन धमकियों का जवाब बेहद तल्ख लहजे में दिया है। तेहरान के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि उनकी सेना हाई अलर्ट पर है और किसी भी छोटे या सीमित हमले को पूर्ण युद्ध की घोषणा माना जाएगा। ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि उसके परमाणु ठिकानों या सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया, तो इसका जवाब इतना कठोर होगा कि पूरा क्षेत्र इसकी चपेट में आ जाएगा। गौरतलब है कि पिछले वर्ष भी इसी तरह के तनाव के दौरान अमेरिका ने अपने बी-2 बॉम्बर्स के जरिए कुछ खास ठिकानों को निशाना बनाया था। वर्तमान में खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी नौसैनिक बेड़े, जिसे आर्माडा कहा जा रहा है, की मौजूदगी ने यह संकेत दे दिए हैं कि आने वाले कुछ दिन वैश्विक शांति और तेल आपूर्ति की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील होने वाले हैं।
चीन के परमाणु हथियार अब अमेरिका की मुट्ठी में? शी जनरल झांग का कच्चा चिट्ठा
28 Jan, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग। चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के भीतर एक ऐसा भूचाल आया है जिसने बीजिंग की सत्ता के गलियारों को हिलाकर रख दिया है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सबसे वफादार माने जाने वाले और सेंट्रल मिलिट्री कमीशन (सीएमसी) के उपाध्यक्ष, 75 वर्षीय जनरल झांग यूक्सिया के खिलाफ भ्रष्टाचार और जासूसी के बेहद गंभीर आरोपों के तहत जांच शुरू कर दी गई है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जनरल झांग पर चीन के परमाणु हथियार कार्यक्रम से जुड़ा अत्यंत गोपनीय कोर टेक्निकल डेटा अमेरिका को लीक करने का संदेह है। इसका मतलब है कि चीन के परमाणु हथियार अब अमेरिका की मुट्ठी में हो सकते? इस सनसनीखेज खुलासे के बाद न केवल चीन में बल्कि वैश्विक रक्षा विशेषज्ञों के बीच भी हड़कंप मच गया है।
चीनी रक्षा मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर इस कार्रवाई को अनुशासन और कानून का गंभीर उल्लंघन करार दिया है। सूत्रों के मुताबिक, चीनी सेना के भीतर हुई एक आंतरिक ब्रीफिंग में जनरल झांग पर कई संगीन आरोप मढ़े गए हैं। इनमें सबसे गंभीर आरोप परमाणु हथियारों की तकनीकी जानकारी साझा करना है, जो चीन की संप्रभुता और सैन्य शक्ति के लिए सबसे बड़ा खतरा माना जा रहा है। इसके अतिरिक्त, झांग पर सेना में उच्च पदों पर पदोन्नति के बदले मोटी रिश्वत लेने, अपने पद का दुरुपयोग करने और सेना के भीतर अपना एक समानांतर राजनीतिक गुट बनाने के आरोप भी लगे हैं। यह मामला इसलिए ऐतिहासिक है क्योंकि झांग को राष्ट्रपति जिनपिंग का दाहिना हाथ माना जाता था और उनके खिलाफ कार्रवाई शी जिनपिंग के नेतृत्व वाली कम्युनिस्ट पार्टी के भीतर बढ़ते अविश्वास को दर्शाती है।
जांच का दायरा केवल जनरल झांग तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर पूरे सैन्य नेटवर्क पर देखा जा रहा है। जांच अधिकारियों ने उन सभी वरिष्ठ अफसरों के मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त कर लिए हैं जिन्हें झांग के कार्यकाल के दौरान पदोन्नत किया गया था। यह कार्रवाई सेना के खरीद सिस्टम में फैले गहरे भ्रष्टाचार के नेटवर्क को उखाड़ फेंकने की कोशिश का हिस्सा मानी जा रही है। गौरतलब है कि 2023 से अब तक चीन ने 50 से अधिक वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों और रक्षा उद्योग के प्रमुखों को उनके पदों से हटाया है, जिसमें पूर्व रक्षा मंत्री ली शांगफू का नाम भी शामिल है। इस घटनाक्रम के बाद बीजिंग में तनाव का माहौल है और सोशल मीडिया पर तख्तापलट जैसी कई अपुष्ट अफवाहें तैर रही हैं। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि जनरल झांग की हिरासत के दौरान सुरक्षा बलों के बीच झड़पें भी हुई हैं, हालांकि इनकी कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि परमाणु डेटा लीक का आरोप राजनीतिक रूप से प्रेरित भी हो सकता है ताकि एक शक्तिशाली जनरल को पूरी तरह खत्म किया जा सके। वॉशिंगटन स्थित चीनी दूतावास ने इस मामले पर अधिक टिप्पणी न करते हुए इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति बताया है। फिलहाल, चीन ने परमाणु लीक के विशिष्ट आरोपों पर चुप्पी साध रखी है, लेकिन इस कार्रवाई ने चीनी सेना की आंतरिक स्थिरता और उसके परमाणु सुरक्षा चक्र पर बड़े सवालिया निशान लगा दिए हैं।
खुलेआम हो रही हिंसा, अमेरिकी जनता से अनदेखा करने को कहा जा रहा
28 Jan, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिका में इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (आईसीई) को लेकर बहस और तेज हो गई है। न्यूयॉर्क सिटी के मेयर जोहरान ममदानी ने एक बार फिर आईसीई को पूरी तरह खत्म करने की मांग। उन्होंने आरोप लगाया कि यह एजेंसी खुलेआम हिंसा कर रही है, जिसे अमेरिकी जनता से अनदेखा करने को कहा जा रहा है। एक्स पर जारी बयान में ममदानी ने कहा कि आईसीई ने दिनदहाड़े रैनी गुड की हत्या की। तीन हफ्ते भी नहीं बीते थे कि एलेक्स प्रेट्टी को गोलियां मारी गईं। हर दिन हम देखते हैं कि लोगों को उनकी कारों, उनके घरों और उनकी जिंदगी से जबरन छीना जा रहा है। इस क्रूरता से नजरें नहीं फेर सकते। आईसीई को खत्म करो।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक एक कार्यक्रम में दिए इंटरव्यू में ममदानी ने मिनियापोलिस में हुई हालिया घटनाओं को भयावह बताया। उन्होंने नेताओं पर आरोप लगाया कि वे अमेरिकियों से उनकी आंखों और कानों पर भरोसा न करने को कह रहे हैं। ममदानी ने कहा कि रैनी गुड से जुड़ा वीडियो साफ है और उसे देखने के बाद किसी और नतीजे पर पहुंचना मुमकिन नहीं। रैनी गुड, 37 साल की अमेरिकी नागरिक थीं। जिन्हें 7 जनवरी को उनकी कार में बैठे हुए आईसीई एजेंट ने गोली मार दी थी।
अधिकारियों के मुताबिक वह किसी इमिग्रेशन रेड का लक्ष्य नहीं थीं। इस घटना के बाद मिनियापोलिस में कई हफ्तों तक विरोध प्रदर्शन हुए। इसके कुछ ही समय बाद, 37 साल के एलेक्स प्रेट्टी की भी एक घटना में मौत हो गई, जहां कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन एजेंट ने उन पर कई गोलियां बरसाईं थी। जोहरान ममदानी का कहना है कि यह डर सिर्फ मिनियापोलिस तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि न्यूयॉर्क के लोग भी खुद को आतंकित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने दो टूक कहा कि वह न्यूयॉर्क सिटी में ऐसी कार्रवाइयों को रोकने के लिए हर संभव कदम उठाएंगे। बढ़ते विरोध और जांच के बीच ममदानी ने कहा कि अमेरिकी जनता सच सुनना और सच देखना चाहती है।
ट्रंप के हाथ में नीला निशान........इस मेडिसिन के ज्यादा खुराक लेने से
27 Jan, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बाएं हाथ नीले निशान देखने को मिले हैं। नीले निशान की तस्वीरें जब सामने आईं, तब अमेरिका से लेकर दुनिया की मीडिया में हलचल मच गई। सबसे ज्यादा चर्चा उनकी उम्र को लेकर होने लगी। व्हाइट हाउस ने पहले ही इस मामले पर सफाई दी थी। इसके बाद में दावोस से लौटते वक्त एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बात कर ट्रंप ने खुद इसका कारण बताया। उन्होंने कहा कि वह रोज ज्यादा मात्रा में एस्पिरिन लेते हैं, इसलिए उन्हें अगर थोड़ी चोट भी लगाने से जल्दी नील पड़ जाता है।
ट्रंप ने बताया कि यह निशान दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान तब पड़ा, जब उनका हाथ एक टेबल से टकरा गया। उन्होंने कहा, लोग कहते हैं दिल के लिए एस्पिरिन लो, लेकिन अगर शरीर पर नीले निशान नहीं चाहते....तब मत लो। मैं बड़ी वाली एस्पिरिन मेडिसिन लेता हूं। उन्होंने कहा कि डॉक्टर उन्हें ऐसा न करने की सलाह देते हैं। ट्रंप के शब्दों में, डॉक्टर कहते हैं कि आप बहुत स्वस्थ हैं, आपको इसकी जरूरत नहीं है। लेकिन फिर भी मैं कोई खतरा नहीं लेना चाहता। व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने कहा कि बोर्ड ऑफ पीस की घोषणा के दौरान ट्रंप का हाथ साइनिंग टेबल के कोने से टकरा गया था। इसकारण निशान पड़ा।
रिपोर्ट के मुताबिक चार डॉक्टरों ने इस बारे में बताय कि यह संभव है कि एस्पिरिन की ज्यादा खुराक से ऐसा नीला निशान पड़ गया हो। एस्पिरिन खून को पतला करती है, जिससे हल्की चोट भी साफ दिखाती है और देर से भरती है। इस महीने की शुरुआत में दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने बताया था कि वह डॉक्टरों की सलाह से ज्यादा मात्रा में एस्पिरिन लेते हैं। उनका कहना था कि वह चाहते हैं कि दिल में खून आसानी से बहता रहे। उन्होंने इस ‘अच्छा पतला खून’ कहा था।
बात दें कि बीते साल भी ट्रंप के हाथ पर नीले निशान दिखाई दिए थे। तब व्हाइट हाउस ने कहा था कि वह लगातार लोगों से हाथ मिलाते हैं, इसलिए ऐसा होता है। 79 साल के ट्रंप अमेरिका के इतिहास में दूसरे सबसे उम्रदराज राष्ट्रपति हैं। उनसे पहले जो बाइडेन इस पद पर रहे, जो 82 साल की उम्र में पद छोड़कर गए थे। बाइडेन ने उम्र और सेहत पर उठते सवालों के चलते 2024 का चुनाव नहीं लड़ा था।
बेटे की भविष्यवाणी हुई सच: ब्रिटेन में जोम्बी नाइफ संस्कृति ने ली 16 साल के किशोर की जान
27 Jan, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ब्रिस्टल। किसी भी माँ के लिए उसका बच्चा उसकी पूरी दुनिया होता है, लेकिन अगर वही बच्चा अपनी मौत का अंदेशा बार-बार जताने लगे, तो यह किसी डरावने सपने से कम नहीं होता। ब्रिटेन के ब्रिस्टल शहर से एक ऐसी ही रूह कपा देने वाली घटना सामने आई है, जहाँ 16 साल के माइकी रोनन की उसके ही डर के अनुरूप हत्या कर दी गई। माइकी अक्सर अपनी माँ हेली से कहा करता था कि उसे डर लगता है कि कोई उसे चाकू मार देगा। वह अपने आसपास बढ़ते अपराधों और चाकूबाजी की घटनाओं को देखकर अपनी मौत की भविष्यवाणी पहले ही कर चुका था, जो अंततः एक खौफनाक हकीकत में बदल गई।
हादसे वाले दिन की यादें साझा करते हुए हेली ने बताया कि उस शाम माइकी एक हाउस पार्टी में जा रहा था। घर से निकलते वक्त उसने फोन पर अपनी माँ को लव यू मॉम कहा था, जो उसके आखिरी शब्द साबित हुए। हेली उस समय एक पुरस्कार समारोह में थीं और उन्हें जरा भी अंदाजा नहीं था कि उनका बेटा कुछ ही घंटों में इस दुनिया से चला जाएगा। समारोह खत्म होने के बाद जब उन्होंने अपना फोन देखा, तो उस पर 30 से अधिक मिस्ड कॉल थीं। घबराहट में वापस फोन करने पर माइकी के दोस्त ने चीखते हुए बताया कि उसे चाकू मार दिया गया है। जब तक हेली मौके पर पहुँचीं, पुलिस के घेरे और फॉरेंसिक टेंट ने यह साफ कर दिया था कि उनकी दुनिया उजड़ चुकी है।
पुलिस जांच में जो तथ्य सामने आए, वे बेहद विचलित करने वाले थे। माइकी की गर्दन पर जोम्बी नाइफ (एक अत्यंत घातक और बड़ा चाकू) से सिर्फ एक वार किया गया था, जो उसकी जान लेने के लिए पर्याप्त था। सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि माइकी का किसी भी आपराधिक गैंग से कोई संबंध नहीं था और न ही उसका कोई पिछला रिकॉर्ड था, वह बस संगीत का शौकीन एक सामान्य किशोर था। इस मामले में पुलिस ने 16 साल के शेन कनिंघम और उसके साथियों को गिरफ्तार किया। अदालत ने शेन को हत्या का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है, जिसमें उसे कम से कम 16 साल जेल में बिताने होंगे।
अदालती फैसले के बावजूद हेली का दर्द कम नहीं हुआ है। उनका कहना है कि यह इंसाफ अधूरा है क्योंकि उनका बेटा कभी वापस नहीं आएगा, जबकि हत्यारा अपनी आधी उम्र बीतने से पहले ही जेल से बाहर आकर नई जिंदगी शुरू कर सकेगा। हेली अब सरकार से जोम्बी नाइफ जैसे खतरनाक हथियारों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग कर रही हैं ताकि किसी और परिवार को यह त्रासदी न झेलनी पड़े। विशेषज्ञों का भी मानना है कि वर्तमान में युवाओं के बीच अपराध का पैटर्न बदल गया है। अब किशोर अपनी सुरक्षा के नाम पर साथ में चाकू रखना एक सामान्य बात समझने लगे हैं, जिसके कारण छोटी सी बहस भी पल भर में कत्ल में तब्दील हो जाती है। यह घटना समाज में बढ़ती हिंसा और घातक हथियारों की आसान उपलब्धता पर एक गंभीर चेतावनी है।
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