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शाहाबाद अनाज मंडी में बड़ा हादसा, चार बच्चों की मां की गई जान
15 Apr, 2026 12:42 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कुरुक्षेत्र। शाहाबाद अनाज मंडी में हुए गेहूं से भरी बोरियों के ढेर के नीचे दबने से 27 वर्षीय महिला मजदूर हसीना खातून मौके पर ही अपनी जान गंवा बैठी। मृतक यमुनानगर के बिलासपुर गांव की रहने वाली थी और वर्तमान में अपने पति राहुल कुमार व चार छोटे बच्चों के साथ शाहाबाद की अटारी कालोनी में रह रही थी। वह अनाज मंडी की 103 नंबर दुकान पर झाड़ू-पोछा का काम करती थी।
पति राहुल कुमार ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि हसीना सुबह करीब चार बजे मंडी में गेहूं इकट्ठा करने और सफाई का काम करने गई थी। वह गेहूं के रैक के नीचे से गेहूं इक्कट्ठी कर रही थी, जैसे ही नीचे की बोरी के पास से गेहूं निकालने लगी तो अचानक रैक में लगी भारी बोरियों उनके ऊपर गिर पड़ी। बोरियों के भारी दबाव से उनके सिर और माथे पर गहरी चोट आई और घटना इतनी अचानक हुई कि आसपास मौजूद लोग कुछ समझ पाते, उससे पहले ही हसीना की मौके पर ही मौत हो गई। मंडी में काम करने वाले मजदूरों ने बताया कि महिला के साथ आई अन्य तीन से चार महिला हसीना को बोरियों के नीचे दबता देख शोर मचाते हुए मौके से भाग गई। आसपास काम कर रहे अन्य मजदूरों ने तुरंत बोरियों को हटाकर महिला को बाहर निकाला, लेकिन तब तक उनकी सांसें थम चुकी थी। मजदूरों ने तुरंत डायल-112 को सूचना दी। पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम करवाने के बाद परिजनों को सौंप दिया। पुलिस ने पति राहुल कुमार का बयान पर मामले में इत्तेफाकिया कार्रवाई की है।
रैक में थी लगभग 700 बोरियां
मंडी में उठान धीमा चल रहा है। इसके चलते आढ़ती गेहूं की तुलाई करने के बाद जगह कम होने के चलते बोरियों का रैक लगवा देते हैं। आढ़ती ने यह रैक रात दो बजे मजदूरों से लगवाया था और सुबह करीब चार बजे यह हादसा हो गया। रैक में लगभग 700 के करीब बोरियां थी, जिसमें सुबह मजदूरों को और भी बोरियां लगानी थी।
हादसा मंडी सुरक्षा पर कर रहा गंभीर सवाल खड़े
हादसा मंडी में सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़ा कर रहा है कि इतनी रात को कोई बोरियों के पास से गेहूं एकत्रित कर रहा है और आसानी से उसे बिना रोक टोक ले जाता है तो मंडी के चौकीदार उस समय क्या कर रहे होते हैं। दूसरी तरफ उठान समय पर क्यों नहीं करवाया गया। यह तो गनीमत रही की बोरियां रात के समय खिसकी अगर दिन में खिसकती तो गेहूं लेकर आए किसान व आस-पास काम कर रहें मजदूर भी इसके चपेट में आ सकते थे, जिससे बड़ा हादसा हो सकता था। इस सवाल के जवाब में मंडी सचिव कृष्ण मलिक का कहना है कि सीजन में मजदूरों का देर रात तक आना जाना लगा रहता है और सीजन में देर रात तक काम करते हैं तो कोई उन्हें परिसर में कुछ कहता नहीं है। बाहर ले जाने की बात पर उन्होंने कहा कि मंडी लाडवा व बराड़ा रोड पर स्थित है और यहां पूरी रात वाहन आते जाते रहते हैं। कोई पैदल अगर कुछ लेकर जा रहा है तो चौकीदार पूछताछ कर लेता है। परंतु रात के समय गाड़ियों को चेक नहीं किया जाता।
पति के बयान पर इत्तेफाकिया कार्रवाई कर शव सौंपा : जगदीश चंद
थाना शाहाबाद के प्रभारी जगदीश चंद ने बताया कि महिला दिन में मंडी में ही काम करती थी और रात के समय रैक के पास से बोरियों में निकली गेहूं एकत्रित करती थी। पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि महिला रैक के नीचे लगी बोरियों के पास गेहूं इक्कट्ठा करने की प्रयास कर रही थी और इसी प्रयास में बोरियां हिल गई और महिला पर आ गिरी।
मामले में नियमानुसार की जाएगी कार्रवाई : कृष्ण मलिक
शाहाबाद मार्केट कमेटी के सचिव कृष्ण मलिक ने कहा कि पूरी घटना बेहद दुखद है। पूरे मामले की जांच की जा रही है कि महिला कहां काम करती थी और मंडी में इतनी रात को आई कैसे। वहीं इस बारे में चौकीदार से भी पूछताछ की जा रही है। पूरे मामले में जो भी नियमों का उल्लंघन करता हुआ पाया गया उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिकी दादागीरी के चलते दुनिया में मचेगा तेल को लेकर हाहाकार
15 Apr, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की घोषणा के बाद अमेरिकी नौसेना सोमवार से ही इस सामरिक जलमार्ग पर ईरानी बंदरगाहों की ओर जाने वाले और वहां से आने वाले जहाजों की आवाजाही पर रोक लगाएगी। इस फैसले के बाद खाड़ी क्षेत्र में सैन्य संघर्ष की आशंका तेज हो गई है, जिसका सीधा असर वैश्विक तेल आपूर्ति पर पड़ सकता है।यूएस सेंट्रल कमांड द्वारा जारी बयान के अनुसार, अमेरिकी बल ईरानी बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों में आने-जाने वाले सभी देशों के जहाजों की नाकेबंदी शुरू कर देंगे। यह आदेश अरब की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के सभी ईरानी बंदरगाहों पर निष्पक्ष रूप से लागू होगा। हालांकि, अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि होर्मुज से गैर-ईरानी बंदरगाहों की ओर जाने वाले जहाजों को बाधित नहीं किया जाएगा। नाविकों को सलाह दी गई है कि वे अमेरिकी नौसेना के संपर्क में रहें और सुरक्षा निर्देशों का पालन करें।
यह कड़ा फैसला पाकिस्तान में हुई उस द्विपक्षीय वार्ता के विफल होने के बाद आया है, जिसमें दोनों देश परमाणु हथियारों के मुद्दे पर किसी सहमति पर नहीं पहुंच सके थे। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर अपने कड़े रुख को स्पष्ट करते हुए कहा कि ईरानी प्रशासन को पैसा और परमाणु हथियार चाहिए, जिसे अमेरिका किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने अमेरिकी नौसेना को निर्देश दिया है कि वे उन सभी जहाजों की पहचान करें जिन्होंने ईरान को जलमार्ग का टोल भुगतान किया है। ट्रंप ने चेतावनी दी कि ईरान को भुगतान करने वाले किसी भी जहाज को सुरक्षित आवागमन की अनुमति नहीं दी जाएगी। दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिकी दावे को चुनौती देते हुए इस जलमार्ग पर अपना नियंत्रण होने की बात दोहराई है। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड नौसेना ने रविवार को कड़े शब्दों में कहा कि होर्मुज के पास आने वाले किसी भी विदेशी सैन्य जहाज को दृढ़ और बलपूर्वक जवाब दिया जाएगा। ईरान के इस रुख से स्पष्ट है कि वह अमेरिका की नाकेबंदी के आगे झुकने को तैयार नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों सेनाओं के बीच टकराव होता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं, जिससे दुनिया के कई देशों में गंभीर तेल संकट पैदा हो जाएगा। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें इस महत्वपूर्ण जलमार्ग पर टिकी हैं, जहां तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है।
ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी से भड़का चीन कहा- हमारे काम में दखल न दे अमेरिका
15 Apr, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग। होर्मुज के बहाने ईरान को चारों तरफ से अमेरिका घेरने में लगा हुआ है। इसी घेराबंदी के चलते उसने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी कर दी। इससे चीन भड़क गया है और अमेरिका को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि हमारे काम में किसी भी तरह दखल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। चीन का यह बयान ऐसे समय पर सामने आया है, जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से चीन के जहाजों को वापस लौटना पड़ा। पाकिस्तान में हुई ईरान के साथ वार्ता फेल होने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाकेबंदी के आदेश दिए थे। बता दें कि अमेरिका-ईरान वार्ता के विफल रहने और नाकेबंदी की घोषणा के बाद तेल कीमतों में तेज उछाल देखा गया। ब्रेंट क्रूड 101.88 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी क्रूड 104.69 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। विश्लेषकों का मानना है कि होर्मुज पर तनाव की आशंका के चलते दुनिया के एनर्जी मार्केट में अस्थिरता बनी रह सकती है।
चीन के रक्षा मंत्री डोंग जुन ने कहा कि उनका देश क्षेत्र में शांति और स्थिरता के पक्ष में है, लेकिन वह ईरान के साथ अपने ऊर्जा और व्यापार समझौतों का सम्मान करेगा और अपने हितों में किसी बाहरी दखल को स्वीकार नहीं करेगा। चीन ने इस बात पर जोर दिया है कि स्ट्रेट पर ईरान का नियंत्रण है और यह जलमार्ग चीन के लिए खुला रहेगा। उन्होंने कहा, हमारे जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पानी में आ और जा रहे हैं। ईरान के साथ हमारे व्यापार और ऊर्जा के समझौते हैं। हम उन समझौतों का सम्मान करेंगे और उन्हें निभाएंगे, और हम उम्मीद करते हैं कि दूसरे हमारे मामलों में दखल नहीं देंगे।
स्पेन,आस्ट्रेलिया जैसे देशों में नाराजगी
स्पेन की रक्षा मंत्री मार्गरीटा रोब्लेस ने नाकेबंदी की चेतावनी को बेमतलब करार देते हुए कहा कि यह संघर्ष पहले ही दुनिया को एक खतरनाक स्थिति में ले जा चुका है। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज ने कहा कि उन्हें नाकेबंदी में शामिल होने के लिए कोई अनुरोध नहीं मिला है और जलमार्ग सभी देशों के लिए खुला रहना चाहिए।
ईरान ने कहा तो ध्वस्त कर देंगे बंदरगाह
वहीं दूसरी तरफ जवाब में ईरान ने फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के सभी बंदरगाहों को निशाना बनाने की धमकी दी। इससे दोनों पक्षों के बीच युद्ध-विराम के विफल होने और लड़ाई फिर से छिड़ने की आशंका बढ़ गई है। समुद्री सुरक्षा की निगरानी करने वाली यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस एजेंसी ने नाविकों के लिए एक नोटिस जारी किया, जिसमें कहा गया है कि नाकेबंदी में बंदरगाहों और ऊर्जा बुनियादी ढांचे सहित पूरी ईरानी तटरेखा शामिल है। इसमें कहा गया है कि गैर-ईरानी ठिकानों से आने वाले या वहां जाने वाले जहाजों के लिए स्ट्रेट से गुजरने पर प्रतिबंध नहीं होने की खबरें हैं, लेकिन क्षेत्र में जहाजों को सैन्य उपस्थिति का सामना करना पड़ सकता है।
सिनेमा के जरिए मुकाबला! ‘धुरंधर’ के बाद पाकिस्तान ला रहा ‘मेरा ल्यारी’
15 Apr, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मुंबई: बॉक्स ऑफिस (Box Office) पर इन दिनों फिल्म धुरंधर: द रिवेंज (Dhurandhar: The Revenge) का जबरदस्त क्रेज देखने को मिल रहा है. फिल्म 1700 करोड़ का बिजनेस कर इंडस्ट्री के हर रिकॉर्ड को तोड़ रही है. हर तरफ इसी फिल्म की चर्चा है. दिलचस्प बात ये है कि पाकिस्तान भी इसकी पॉपुलैरिटी से अछूता नहीं है. उस मुल्क में फिल्म बैन होने के बावजूद लोग इसे देखने के तरीके ढूंढ रहे हैं. इतना ही नहीं वहां की फिल्म इंडस्ट्री ने धुरंधर में दिखाई गई कहानी का जवाब देने की तैयारी भी पूरी कर ली है.
धुरंधर से बौखलाया पाकिस्तान!
धुरंधर में दिखाया गया है कि कैसे हमजा (रणवीर सिंह) पाकिस्तान के ल्यारी में जाता है और वहां पर राज करने वाले कुख्यात रहमान डकैत (अक्षय खन्ना) की बलोच गैंग में शामिल होता है. फिर धीरे-धीरे पूरे पाकिस्तान से आतंक का खात्मा करता है. धुरंधर में जिस तरह से ल्यारी को दिखाया गया है, इससे पाकिस्तानी आवाम इतनी बौखला गई है कि जवाब देने की तैयारी कर बैठी है. खासकर फिल्म में जिस तरह से ल्यारी को गैंगवार और आतंक अड्डा बताया गया, ये बात लोगों को नागवार गुजरी है.अब वहां एक नई फिल्म बनाई गई है, जिसका नाम है ‘मेरा ल्यारी’. ये फिल्म कराची के ल्यारी इलाके पर बेस्ड है और इसका मकसद वहां की छवि को बेहतर तरीके से दिखाना बताया जा रहा है. धुरंधर की रिलीज के बाद से ही पाकिस्तानी आवाम अपनी गुस्सा जाहिर कर रही थी .इसी बात से नाराज होकर मेकर्स ने ‘मेरा ल्यारी’ बनाई, ताकि दुनिया को वहां की दूसरी साइड दिखाई जा सके.
मेरा ल्यारी दिखाएगी रहमान डकैत का सच?
फिल्म की एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर आयशा ओमर ने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर कर बताया कि ‘मेरा ल्यारी’ का प्रीमियर लंदन के ब्रिटिश फिल्म इंस्टीट्यूट में होने जा रहा है. ये फिल्म यूके एशियन फिल्म फेस्टिवल में 2 मई को दिखाई जाएगी और इसके बाद इसे पाकिस्तान समेत दुनियाभर में रिलीज करने की तैयारी है. वहीं सिनेमाघरों में इसके एक हफ्ते बाद 8 मई को रिलीज की जाएगी. आयशा फिल्म की एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर तो हैं ही साथ ही इसमें एक्टिंग भी कर रही हैं. ये उनकी डेब्यू फिल्म है.
स्टारकास्ट की बात करें तो फिल्म में पावरी हो रही है फेम दानानीर मोबीन, नायर ऐजाज, अदनान साह टीपू, और समीना मुमताज जैसे कई सेलेब्स नजर आएंगे. अब देखना दिलचस्प होगा कि ‘धुरंधर 2’ के जवाब में आई ‘मेरा लियारी’ दर्शकों को कितनी पसंद आती है और क्या ये सच में लियारी की इमेज बदल पाती है या नहीं. वहीं धुरंधर ने दुनिया को रहमान डकैत का जैसा टेरर दिखाया था, क्या मेरा ल्यारी इससे इंसाफ कर पाएगा.
क्रिकेट से आगे बढ़े युवा, फुटबॉल-वॉलीबॉल की ओर बढ़ा रुझान
15 Apr, 2026 10:14 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हरियाणा। लंबे समय से कुश्ती और कबड्डी खेल के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन अब प्रदेश में खेलों का ट्रेंड तेजी से बदल रहा है और खिलाड़ियों की एक नई पौध तैयार हो रही है। नए सत्र 2026-27 के लिए खेल विभाग की ओर से जारी आंकड़े बताते हैं कि पारंपरिक खेलों के साथ-साथ फुटबॉल और वॉलीबाॅल का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में इन खेलों की नर्सरियों की संख्या भी लगातार बढ़ाई जा रही है और युवा खिलाड़ियों का रुझान इनकी ओर साफ दिखाई दे रहा है। प्रत्येक नर्सरी में 25 खिलाड़ी खेलते हैं। प्रदेशभर में इस बार 1063 खेल नर्सरियां अलॉट की गई हैं, जो पिछले साल की 976 नर्सरियों से 87 ज्यादा हैं। लेकिन सरकार की ओर से कुल 2 हजार नर्सरियों के संचालित करवाने का लक्ष्य है। इन नर्सरियों के जरिए खिलाड़ियों को शुरुआती स्तर से ही ट्रेनिंग दी जाएगी। अब भी कबड्डी 148 नर्सरियों के साथ टॉप पर है, लेकिन फुटबॉल (69) और वॉलीबाॅल (64) तेजी से अपनी जगह बना रहे हैं। कुश्ती की 74 नर्सरियां हैं। अन्य खेलों की बढ़ती संख्या बताती है कि युवाओं की पसंद और नजरिया अब बदल रहा है।
फुटबॉल-वॉलीबाॅल के क्रेज बढ़ने के मुख्य वजह
हरियाणा में फुटबॉल कोच हरविंदर सिंह के मुताबिक इस बदलाव के पीछे सबसे पहली वजह प्रदेश के स्कूल और कॉलेज स्तर पर इन खेलों को ज्यादा बढ़ावा मिलना है। गांवों में भी अब फुटबॉल और वॉलीबाॅल के मैदान आसानी से तैयार हो जाते हैं। इससे बच्चों की भागीदारी बढ़ी है। इसी तरह दूसरी वजह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खिलाड़ियों के लिए तेजी से बढ़ते मौके भी है। फुटबॉल और वॉलीबाॅल में करियर के विकल्प बढ़ने से युवा इनकी ओर आकर्षित हो रहे हैं। इसके अलावा सोशल मीडिया और टीवी पर बड़े टूर्नामेंट देखने से भी बच्चों में इन खेलों के प्रति उत्साह बढ़ा है। वहीं, तीसरी अहम वजह इन खेलों में कम खर्च और आसान संसाधन है, जहां कुश्ती के लिए अखाड़ा और विशेष व्यवस्था चाहिए, इसी तरह दूसरे खेलों में संसाधनों की व्यवस्था पर भारी खर्च है। वहीं फुटबॉल और वॉलीबाॅल कम संसाधनों में भी खेले जा सकते हैं।
जिलों में भी दिखा नया ट्रेंड
खेल नर्सरियों के आंकड़ों में भी यह बदलाव साफ नजर आता है। हिसार 119 नर्सरियों के साथ सबसे बड़ा स्पोर्ट्स हब बनकर उभरा है, जबकि जींद 108 के साथ दूसरे स्थान पर है। कैथल, भिवानी, करनाल और रोहतक जैसे जिलों में भी बड़ी संख्या में नर्सरियां अलॉट की गई हैं। गुरुग्राम, फरीदाबाद और पंचकूला अभी पीछे हैं, जबकि सबसे पीछे नूंह है।
इन जिलों में इतनी नर्सरियां अलॉट
हिसार - 119
जीद - 108
कैथल - 82
भिवानी - 67
करनाल - 75
रोहतक - 65
सोनीपत - 65
झज्जर - 28
यमुनानगर - 28
दादरी - 25
अंबाला - 22
पंचकूला - 18
नूंह - 12
अमेरिका-ईरान के बीच शांति के लिए फिर शुरु होगी वार्ता, मध्यस्थता में जुटे कई देश?
15 Apr, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई हालिया उच्च स्तरीय वार्ता के बेनतीजा रहने के बाद, दोनों देश एक बार फिर मेज पर आमने-सामने बैठने की तैयारी कर रहे हैं। हालिया अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार, मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव को कम करने और एक स्थायी युद्धविराम समझौते पर पहुंचने के उद्देश्य से दोनों देशों के बीच पर्दे के पीछे राजनयिक संपर्क फिर से सक्रिय हो गए हैं। इस महीने की शुरुआत में हुआ अस्थायी युद्धविराम जल्द ही समाप्त होने वाला है, जिससे पहले एक ठोस समाधान खोजने का दबाव दोनों पक्षों पर बना हुआ है।
रिपोर्टों के मुताबिक, इस्लामाबाद वार्ता विफल होने के बावजूद दोनों ही देशों ने संकेत दिए हैं कि बातचीत के रास्ते पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने पाकिस्तान से विदा होते समय स्पष्ट किया था कि उन्होंने ईरान के सामने वाशिंगटन का अंतिम और सर्वोत्तम प्रस्ताव रख दिया है। हालांकि, ईरानी पक्ष ने उन शर्तों को तत्काल स्वीकार नहीं किया, जिसके कारण वार्ता का पहला दौर बिना किसी ठोस समझौते के समाप्त हो गया। अब चर्चा है कि दूसरे चरण की वार्ता भी इस्लामाबाद में ही आयोजित की जा सकती है, जहां पाकिस्तान मुख्य मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। वर्तमान में पाकिस्तान के अधिकारी दोनों देशों के निरंतर संपर्क में हैं ताकि अस्थायी सीजफायर की अवधि समाप्त होने से पहले किसी स्थायी शांति समझौते पर मुहर लग सके। हालांकि, वाशिंगटन की सख्त शर्तों और तेहरान के अपने रुख पर अड़े रहने के कारण चुनौतियां बरकरार हैं। आने वाले कुछ दिन वैश्विक राजनीति और क्षेत्रीय शांति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं, क्योंकि इसी पर तय होगा कि यह कूटनीतिक प्रयास युद्ध को रोकने में कितने सफल साबित होते हैं। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सोमवार को इस संबंध में सकारात्मक संकेत देते हुए कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच अगले दौर की वार्ता जल्द ही शुरू होने की उम्मीद है। 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद यह पहला मौका था जब दोनों देशों के शीर्ष अधिकारियों ने सीधे तौर पर बातचीत में हिस्सा लिया। आसिफ ने संसद भवन के बाहर मीडिया से बात करते हुए कहा कि पिछले दौर की बातचीत के बाद एक तरह का संतोष है क्योंकि अब तक कोई नकारात्मक घटनाक्रम सामने नहीं आया है। उन्होंने इसे एक रचनात्मक दिशा में बढ़ता कदम बताया है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में युद्ध के बादल: अमेरिका ने की ईरान की नाकेबंदी, 15 से ज्यादा युद्धपोत तैनात
15 Apr, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। सामरिक रूप से महत्वपूर्ण फारस की खाड़ी में स्थित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। ईरान द्वारा इस समुद्री रास्ते पर नियंत्रण की कोशिशों के जवाब में अब अमेरिका ने भी वहां कड़ा पहरा लगा दिया है। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने इस क्षेत्र में अपने 15 से ज्यादा शक्तिशाली युद्धपोत तैनात कर दिए हैं, जो ईरानी बंदरगाहों और तटीय इलाकों के आसपास पूर्ण नाकेबंदी लागू कर रहे हैं। इस सैन्य कार्रवाई के बाद खाड़ी क्षेत्र में युद्ध जैसे हालात पैदा हो गए हैं।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने पुष्टि की है कि यह नाकेबंदी बेहद सख्ती के साथ लागू की जा रही है। इस ऑपरेशन का मुख्य आकर्षण अमेरिका का अत्याधुनिक युद्धपोत यूएसएस ट्रिपोली है। इस जहाज को विशेष रूप से फाइटर जेट्स के संचालन के लिए डिजाइन किया गया है, जो एक समय में 20 से अधिक एफ-35बी लाइटनिंग 2 स्टील्थ फाइटर जेट ऑपरेट करने की क्षमता रखता है। इसके अलावा, एमवी-22 ओस्प्रे विमान और हेलिकॉप्टरों के जरिए भी होर्मुज जलमार्ग की निरंतर निगरानी की जा रही है। बयान के अनुसार, नाकेबंदी का उद्देश्य उन सभी जहाजों को रोकना है जो ईरान के बंदरगाहों में प्रवेश कर रहे हैं या वहां से बाहर जा रहे हैं। हालांकि, अमेरिका ने यह साफ किया है कि यह कार्रवाई केवल ईरान केंद्रित है। जो जहाज अन्य देशों के बंदरगाहों के लिए इस रास्ते का उपयोग कर रहे हैं, उन्हें सुरक्षित मार्ग दिया जाएगा। इसी बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि ईरान का कोई भी फास्ट अटैकर जहाज नाकेबंदी के करीब आता है, तो उसे तुरंत नष्ट कर दिया जाएगा।
दरअसल, यह तनाव तब शुरू हुआ जब पिछले शनिवार को पाकिस्तान में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच हुई शांति वार्ता बेनतीजा रही। 28 फरवरी को हुए सशर्त युद्ध-विराम को स्थायी समझौते में बदलने की कोशिशें नाकाम होने के बाद अमेरिका ने सैन्य दबाव बढ़ाने का फैसला किया। अमेरिका के इस एक्शन पर ईरान ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरानी सेना ने धमकी दी है कि यदि उनके बंदरगाहों को रोका गया, तो फारस और ओमान की खाड़ी का कोई भी बंदरगाह सुरक्षित नहीं रहेगा। ईरान का कहना है कि सुरक्षा या तो सबके लिए होगी या किसी के लिए भी नहीं। फिलहाल, अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या कूटनीति के जरिए इस सैन्य टकराव को टाला जा सकेगा या क्षेत्र एक बड़े संघर्ष की ओर बढ़ेगा।
हरियाणा की सियासत में बड़ा बदलाव, विधानसभा सीटें बढ़कर 119
15 Apr, 2026 08:06 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़। केंद्र सरकार ने लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं को एक तिहाई यानी 33 फीसदी आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। इसके लिए एक साथ तीन विधेयक लाए जा रहे हैं। इसमें एक विधेयक परिसीमन आयोग के गठन से जुड़ा है। जिसका उद्देश्य सीटों व चुनावी क्षेत्र की सीमाओं का नए सिरे से निर्धारण करना है। परिसीमन के बाद ही महिला आरक्षण को लागू किया जा सकेगा। नए परिसीमन के तहत राज्यों में लोकसभा सीटों की संख्या बढ़कर 850 हो जाएगी। इनमें से 815 सीटें राज्यों में और 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों में होंगी। अभी लोकसभा में 543 सीटें हैं। हरियाणा की भी लोकसभा की सीटें 10 से बढ़कर 15 हो जाएंगी।
अभी लोकसभा की हैं 10 सीटें
सीटों के मौजूदा बंटवारे को देखें तो हरियाणा के पास लोकसभा की कुल 543 में से 1.89 फीसदी यानी 10 सीटें हैं। अगर 815 सदस्यों वाली लोकसभा में भी यह अनुपात बरकरार रखा जाता है, तो हरियाणा के पास 15 सीटें होंगी, जिनमें से 5 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। वहीं, विधानसभा में अभी 90 सीटें हैं, नए परिसीमन के हिसाब से बढ़कर 119 या 120 सीटें हो जाएंगी। इनमें से 40 सीटें सिर्फ महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। यानी लोकसभा हो या विधानसभा में हर तीसरी सीट महिला प्रतिनिधि की होगी। नए परिसीमन व लोकसभा व विधानसभा में 33 फीसदी आरक्षण लागू होने की कार्यवाही को आगे बढ़ाने की बात से पूरे हरियाणा में हलचल तेज हो गई है।
हरियाणा को विधानसभा का नया भवन जरूरी होगा
विधानसभा की सीटें बढ़ने से 2029 से पहले हरियाणा को नए विधानसभा की भी आवश्यकता पड़ेगी। वर्तमान विधानसभा भवन नए परिसीमन के हिसाब से छोटा पड़ेगा। इसमें विधायकों, अधिकारियों और मीडिया के लिए पर्याप्त स्थान और सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, जिससे कार्य संचालन में कई बार कठिनाई आती है। पिछले कई वर्षों से हरियाणा सरकार इस दिशा में नए भवन के निर्माण या वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर प्रयासरत रहे हैं। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष ज्ञान चंद गुप्ता के कार्यकाल के दौरान चंडीगढ़ प्रशासन के साथ नई जमीन के लिए भूमि आदान-प्रदान को लेकर बातचीत लगभग अंतिम चरण तक पहुंच चुकी थी। हालांकि, यह प्रक्रिया पूरी तरह आगे नहीं बढ़ पाई।
फरीदाबाद, गुरुग्राम व सोनीपत में सबसे ज्यादा सीटें बढ़ेगी
नए परिसीमन के हिसाब से गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत व करनाल जिले में विधानसभा की सबसे ज्यादा सीटें बढ़ेंगी। 2011 के जनसंख्या के अनुसार फरीदाबाद जिले की आबादी 18 लाख से ज्यादा है। वहीं, गुरुग्राम की 15 लाख, करनाल की 15 लाख और सोनीपत की साढ़े 14 लाख आबादी है। ये सारे शहर शहरी इलाके हैं। ऐसे में अब हरियाणा में शहरी विधानसभा क्षेत्र ज्यादा होंगे। यानी हरियाणा में राजनीति जो अभी ग्रामीण क्षेत्रों पर केंद्रित है, अब वह शहरी केंद्रित हो सकती है। इससे खासकर क्षेत्रीय दलों के सामने नया संकट आ सकता है। क्षेत्रीय दलों की राजनीति मुख्य रूप से ग्रामीण इलाकों पर ही केंद्रित रहती है।
16 साल तक सत्ता में रहे विक्टर ऑर्बन प्रधानमंत्री चुनाव हारे, ट्रंप-पुतिन के हैं करीबी
15 Apr, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बुडापेस्ट। हंगरी के पीएम विक्टर ऑर्बन चुनाव हार गए हैं। वे 16 साल से सत्ता पर काबिज थे। हंगरी की जनता ने विपक्षी तिस्जा पार्टी के पीटर मग्यार को अपना अगला पीएम चुना लिया है। मग्यार पहले ऑर्बन की पार्टी फिदेस से जुड़े थे, लेकिन पार्टी में भ्रष्टाचार के खिलाफ उनसे अलग हो गए थे। ऑर्बन दुनिया के गिने-चुने नेताओं में हैं, जो डोनाल्ड ट्रम्प, व्लादिमीर पुतिन के करीबी हैं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस बार के चुनाव में करीब 80फीसदी रिकॉर्ड मतदान हुआ था। नतीजों को बड़े राजनीतिक उलटफेर के रूप में देखा जा रहा है। इसका असर यूरोप और ग्लोबल राजनीति पर पड़ेगा। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने 7 अप्रैल 2026 को हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट का दौरा किया। उनका यह दौरा काफी चर्चा में रहा, क्योंकि यह हंगरी के संसदीय चुनाव से सिर्फ पांच दिन पहले हुआ था और इसे पीएम विक्टर ऑर्बन के समर्थन के तौर पर देखा गया था। अमेरिकी इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब कोई मौजूदा उपराष्ट्रपति दूसरे देश जाकर किसी खास नेता के पक्ष में चुनाव प्रचार करता नजर आया हो।
रिपोर्ट के मुताबिक शुरुआती नतीजों में तिस्जा पार्टी ने 199 में 138 सीटों पर जीत दर्ज की है। वहीं ऑर्बन की फिदेस पार्टी को सिर्फ 55 सीटें ही मिली हैं। तिस्जा को करीब 53फीसदी और फिदेस को करीब 37फीसदी वोट मिले। इन चुनाव नतीजों के बाद बुडापेस्ट में देर रात तक मनाया गया। डेन्यूब नदी किनारे हजारों लोग जमा हुए। कारों के हॉर्न, झंडे और नारेबाजी के बीच जश्न चलता रहा। कई जगह लोगों ने रूसियों घर जाओ जैसे नारे लगाए।
स्कूल में गोलीबारी से दहशत, पूर्व छात्र ने बरसाईं गोलियां
14 Apr, 2026 08:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अंकारा। तुर्किए के एक स्कूल में हुई गोलीबारी की घटना ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी है। एक पूर्व छात्र ने स्कूल के अंदर घुसकर अंधाधुंध फायरिंग कर दी, जिसमें कई लोग घायल हो गए। इस घटना ने एक बार फिर स्कूलों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं और स्थानीय प्रशासन को अलर्ट कर दिया है। यह घटना सिवेरेक जिले के एक स्कूल में हुई, जहां आरोपी ने गलियारे में घुसकर अचानक गोलीबारी शुरू कर दी। अधिकारियों के मुताबिक इस हमले में कुल 16 लोग घायल हुए हैं, जिनमें शिक्षक, छात्र और अन्य कर्मचारी शामिल हैं। घटना के बाद आरोपी ने खुद को गोली मार ली और उसकी मौत हो गई।
हमले में छात्र और शिक्षक भी हुए घायल
घटना में घायल 16 लोगों में चार शिक्षक और 10 छात्र शामिल हैं। इसके अलावा एक पुलिसकर्मी और एक कैंटीन कर्मचारी भी घायल हुए हैं। प्रशासन के अनुसार चार लोगों की हालत मध्यम बताई गई है, जिन्हें शहर के बड़े अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जबकि बाकी का इलाज स्थानीय अस्पताल में चल रहा है।
आरोपी स्कूल का ही पूर्व छात्र था
अधिकारियों ने बताया कि हमलावर उसी स्कूल का पूर्व छात्र था, जिसने सिर्फ 9वीं कक्षा तक वहां पढ़ाई की थी। बाद में वह ओपन स्कूल में चला गया था। वर्ष 2007 में जन्मे इस युवक ने पुलिस द्वारा पकड़ने की कोशिश के दौरान आत्महत्या कर ली।
प्रशासन ने स्कूल को खाली कराया
घटना के तुरंत बाद प्रशासन ने पूरे स्कूल को खाली करा दिया और इलाके को सुरक्षित कर लिया। तुर्की के सानलिउरफा प्रांत के गवर्नर हसन सिल्दाक ने अस्पताल पहुंचकर घायलों से मुलाकात की और स्थिति की जानकारी ली।
घटना की जांच में क्या आया सामने
प्रशासन ने इस मामले की जांच कई स्तरों पर शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि आरोपी का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था। मुख्य अभियोजक कार्यालय इस मामले की न्यायिक जांच करेगा, जबकि प्रशासनिक जांच भी जारी है।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना के बाद स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ गई है। हालांकि प्रशासन ने कहा कि सभी जरूरी सुरक्षा उपाय किए गए थे, लेकिन इस तरह की घटनाएं फिर भी हो सकती हैं। सरकार ने आश्वासन दिया है कि पूरी सच्चाई सामने लाई जाएगी और जिम्मेदारियों को तय किया जाएगा।
कर्ज संकट गहराया: यूएई की पाकिस्तान से 3 अरब डॉलर लौटाने की सख्त अपील
14 Apr, 2026 04:34 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों और विदेशी कर्ज के चौतरफा दबाव के बीच पाकिस्तान की आर्थिक चुनौतियां एक बार फिर चरम पर पहुंच गई हैं। देश के विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने की जद्दोजहद के बीच संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने पाकिस्तान को दिए गए 3 अरब डॉलर के कर्ज की पूरी अदायगी की मांग कर दी है। पिछले सात वर्षों में यह पहला मौका है जब यूएई ने कर्ज चुकाने की अवधि को आगे बढ़ाने या मोहलत देने से साफ इनकार कर दिया है। इस अप्रत्याशित मांग ने शहबाज शरीफ सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं और देश के बाहरी वित्तीय सुरक्षा कवच पर गंभीर संकट पैदा कर दिया है।
वाशिंगटन में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और वर्ल्ड बैंक की बैठकों के दौरान वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने स्वीकार किया कि यूएई के साथ कर्ज अदायगी की समय सीमा बढ़ाने पर सहमति नहीं बन पाई है। इस कमी को पूरा करने के लिए अब पाकिस्तान वाणिज्यिक विकल्पों और अन्य देशों से नए कर्ज लेने पर विचार कर रहा है। हालांकि, वित्त मंत्री ने दावा किया कि मार्च के अंत तक पाकिस्तान के पास 16.4 अरब डॉलर का मुद्रा भंडार था, जो तीन महीने के आयात के लिए पर्याप्त है। उन्होंने भरोसा जताया कि पाकिस्तान अपने कर्जदाताओं का पैसा चुकाने के लिए प्रतिबद्ध है और इसके लिए वैकल्पिक संसाधनों का इंतजाम किया जा रहा है।
अपनी आर्थिक स्थिति को संभालने के लिए पाकिस्तान अब चार साल के अंतराल के बाद ग्लोबल बॉन्ड मार्केट में उतरने की तैयारी कर रहा है। सरकार जल्द ही यूरोबॉन्ड, इस्लामिक सुकुक और पांडा बॉन्ड जारी करने की योजना बना रही है। विशेष रूप से, चीनी मुद्रा युआन में कर्ज लेने के लिए पांडा बॉन्ड जारी किए जाएंगे, जिसे एशियन डेवलपमेंट बैंक का समर्थन प्राप्त होगा। इसका शुरुआती लक्ष्य 25 करोड़ डॉलर रखा गया है, जिसे बाद में 1 अरब डॉलर तक बढ़ाया जाएगा।
दूसरी ओर, पाकिस्तान को उम्मीद है कि आईएमएफ जल्द ही 7 अरब डॉलर के बेलआउट प्रोग्राम की अगली किश्त को मंजूरी दे देगा, जिससे देश को लगभग 1.3 अरब डॉलर की तत्काल राहत मिल सकेगी। फिलहाल सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह तेल संकट के बावजूद आईएमएफ से मौजूदा प्रोग्राम की रकम बढ़ाने की मांग नहीं कर रही है। कुल मिलाकर, पाकिस्तान इस समय एक ऐसे दोराहे पर खड़ा है जहां उसे पुराने कर्जों को चुकाने के लिए नए और महंगे कर्ज लेने पड़ रहे हैं। वैश्विक स्तर पर तेल की आपूर्ति में बाधा और मध्य पूर्व के तनाव ने इस्लामाबाद की राह को और भी कठिन बना दिया है।
मध्यस्थता के प्रयासों से अमेरिका-ईरान बातचीत की वापसी की उम्मीद, कई देश सक्रिय
14 Apr, 2026 03:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई हालिया उच्च स्तरीय वार्ता के बेनतीजा रहने के बाद, दोनों देश एक बार फिर मेज पर आमने-सामने बैठने की तैयारी कर रहे हैं। हालिया अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार, मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव को कम करने और एक स्थायी युद्धविराम समझौते पर पहुंचने के उद्देश्य से दोनों देशों के बीच पर्दे के पीछे राजनयिक संपर्क फिर से सक्रिय हो गए हैं। इस महीने की शुरुआत में हुआ अस्थायी युद्धविराम जल्द ही समाप्त होने वाला है, जिससे पहले एक ठोस समाधान खोजने का दबाव दोनों पक्षों पर बना हुआ है।
रिपोर्टों के मुताबिक, इस्लामाबाद वार्ता विफल होने के बावजूद दोनों ही देशों ने संकेत दिए हैं कि बातचीत के रास्ते पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने पाकिस्तान से विदा होते समय स्पष्ट किया था कि उन्होंने ईरान के सामने वाशिंगटन का अंतिम और सर्वोत्तम प्रस्ताव रख दिया है। हालांकि, ईरानी पक्ष ने उन शर्तों को तत्काल स्वीकार नहीं किया, जिसके कारण वार्ता का पहला दौर बिना किसी ठोस समझौते के समाप्त हो गया। अब चर्चा है कि दूसरे चरण की वार्ता भी इस्लामाबाद में ही आयोजित की जा सकती है, जहां पाकिस्तान मुख्य मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। वर्तमान में पाकिस्तान के अधिकारी दोनों देशों के निरंतर संपर्क में हैं ताकि अस्थायी सीजफायर की अवधि समाप्त होने से पहले किसी स्थायी शांति समझौते पर मुहर लग सके। हालांकि, वाशिंगटन की सख्त शर्तों और तेहरान के अपने रुख पर अड़े रहने के कारण चुनौतियां बरकरार हैं। आने वाले कुछ दिन वैश्विक राजनीति और क्षेत्रीय शांति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं, क्योंकि इसी पर तय होगा कि यह कूटनीतिक प्रयास युद्ध को रोकने में कितने सफल साबित होते हैं। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सोमवार को इस संबंध में सकारात्मक संकेत देते हुए कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच अगले दौर की वार्ता जल्द ही शुरू होने की उम्मीद है। 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद यह पहला मौका था जब दोनों देशों के शीर्ष अधिकारियों ने सीधे तौर पर बातचीत में हिस्सा लिया। आसिफ ने संसद भवन के बाहर मीडिया से बात करते हुए कहा कि पिछले दौर की बातचीत के बाद एक तरह का संतोष है क्योंकि अब तक कोई नकारात्मक घटनाक्रम सामने नहीं आया है। उन्होंने इसे एक रचनात्मक दिशा में बढ़ता कदम बताया है।
सांस्कृतिक प्रसारण पर बवाल: पाकिस्तान में टीवी चैनल को मिला नोटिस
14 Apr, 2026 02:27 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। दिग्गज भारतीय गायिका आशा भोसले के निधन के बाद उन्हें श्रद्धांजलि देना पड़ोसी देश पाकिस्तान के एक निजी समाचार चैनल को भारी पड़ गया है। पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया नियामक प्राधिकरण ने चैनल को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए स्पष्टीकरण मांगा है कि उसने अपनी रिपोर्टिंग के दौरान भारतीय सामग्री का प्रसारण क्यों किया। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब पूरी दुनिया संगीत जगत की इस महान हस्ती को याद कर रही है।
नियामक संस्था द्वारा जारी पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि पाकिस्तान में भारतीय कंटेंट का प्रसारण पूरी तरह प्रतिबंधित है। नोटिस में पाकिस्तान के सर्वोच्च न्यायालय के 2018 के उस फैसले का हवाला दिया गया है, जिसमें भारतीय फिल्मों, गानों और अन्य सामग्री के प्रसारण पर रोक लगाई गई थी। प्राधिकरण के अनुसार, चैनल ने आशा भोसले की मृत्यु की खबर दिखाते समय उनके गानों और फिल्मों के दृश्यों का उपयोग कर अदालत के आदेशों का जानबूझकर उल्लंघन किया है। इस कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए चैनल के प्रबंध निदेशक ने इसे परंपराओं के विपरीत बताया। उन्होंने एक पोस्ट में कहा कि महान कलाकारों की मृत्यु पर उनके कार्यों को याद करना और उनकी कला की सराहना करना हमेशा से पत्रकारिता और समाज की परंपरा रही है। उन्होंने तर्क दिया कि आशा भोसले जैसी कालजयी गायिका के योगदान को देखते हुए उनके यादगार गीतों को साझा करना स्वाभाविक था, लेकिन नियामक ने इसे नियमों का उल्लंघन माना।
गौरतलब है कि आशा भोसले का रविवार को मुंबई के एक अस्पताल में 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया था। सोमवार को मुंबई के शिवाजी पार्क श्मशान घाट पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। आठ दशकों लंबे अपने करियर में लगभग 12,000 गीतों को आवाज देने वाली इस गायिका को अंतिम विदाई देने के लिए राजनीति और सिनेमा जगत की तमाम बड़ी हस्तियां मौजूद रहीं। विडंबना यह है कि जहां पूरी दुनिया उनके संगीत का जश्न मना रही है, वहीं सीमा पार उनके गीतों को प्रसारित करना एक कानूनी अपराध बन गया है। यह घटना दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों में बढ़ती कड़वाहट और कड़े प्रतिबंधों को उजागर करती है।
होर्मुज तनाव बढ़ा: चीन ने अमेरिका से कहा—हमारे व्यापार में दखल न दे
14 Apr, 2026 01:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग। होर्मुज के बहाने ईरान को चारों तरफ से अमेरिका घेरने में लगा हुआ है। इसी घेराबंदी के चलते उसने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी कर दी। इससे चीन भड़क गया है और अमेरिका को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि हमारे काम में किसी भी तरह दखल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। चीन का यह बयान ऐसे समय पर सामने आया है, जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से चीन के जहाजों को वापस लौटना पड़ा। पाकिस्तान में हुई ईरान के साथ वार्ता फेल होने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाकेबंदी के आदेश दिए थे। बता दें कि अमेरिका-ईरान वार्ता के विफल रहने और नाकेबंदी की घोषणा के बाद तेल कीमतों में तेज उछाल देखा गया। ब्रेंट क्रूड 101.88 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी क्रूड 104.69 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। विश्लेषकों का मानना है कि होर्मुज पर तनाव की आशंका के चलते दुनिया के एनर्जी मार्केट में अस्थिरता बनी रह सकती है।
चीन के रक्षा मंत्री डोंग जुन ने कहा कि उनका देश क्षेत्र में शांति और स्थिरता के पक्ष में है, लेकिन वह ईरान के साथ अपने ऊर्जा और व्यापार समझौतों का सम्मान करेगा और अपने हितों में किसी बाहरी दखल को स्वीकार नहीं करेगा। चीन ने इस बात पर जोर दिया है कि स्ट्रेट पर ईरान का नियंत्रण है और यह जलमार्ग चीन के लिए खुला रहेगा। उन्होंने कहा, हमारे जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पानी में आ और जा रहे हैं। ईरान के साथ हमारे व्यापार और ऊर्जा के समझौते हैं। हम उन समझौतों का सम्मान करेंगे और उन्हें निभाएंगे, और हम उम्मीद करते हैं कि दूसरे हमारे मामलों में दखल नहीं देंगे।
स्पेन,आस्ट्रेलिया जैसे देशों में नाराजगी
स्पेन की रक्षा मंत्री मार्गरीटा रोब्लेस ने नाकेबंदी की चेतावनी को बेमतलब करार देते हुए कहा कि यह संघर्ष पहले ही दुनिया को एक खतरनाक स्थिति में ले जा चुका है। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज ने कहा कि उन्हें नाकेबंदी में शामिल होने के लिए कोई अनुरोध नहीं मिला है और जलमार्ग सभी देशों के लिए खुला रहना चाहिए।
ईरान ने कहा तो ध्वस्त कर देंगे बंदरगाह
वहीं दूसरी तरफ जवाब में ईरान ने फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के सभी बंदरगाहों को निशाना बनाने की धमकी दी। इससे दोनों पक्षों के बीच युद्ध-विराम के विफल होने और लड़ाई फिर से छिड़ने की आशंका बढ़ गई है। समुद्री सुरक्षा की निगरानी करने वाली यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस एजेंसी ने नाविकों के लिए एक नोटिस जारी किया, जिसमें कहा गया है कि नाकेबंदी में बंदरगाहों और ऊर्जा बुनियादी ढांचे सहित पूरी ईरानी तटरेखा शामिल है। इसमें कहा गया है कि गैर-ईरानी ठिकानों से आने वाले या वहां जाने वाले जहाजों के लिए स्ट्रेट से गुजरने पर प्रतिबंध नहीं होने की खबरें हैं, लेकिन क्षेत्र में जहाजों को सैन्य उपस्थिति का सामना करना पड़ सकता है।
होर्मुज संकट गहराया: अमेरिकी दादागीरी से वैश्विक तेल आपूर्ति पर खतरे के बादल
14 Apr, 2026 12:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की घोषणा के बाद अमेरिकी नौसेना सोमवार से ही इस सामरिक जलमार्ग पर ईरानी बंदरगाहों की ओर जाने वाले और वहां से आने वाले जहाजों की आवाजाही पर रोक लगाएगी। इस फैसले के बाद खाड़ी क्षेत्र में सैन्य संघर्ष की आशंका तेज हो गई है, जिसका सीधा असर वैश्विक तेल आपूर्ति पर पड़ सकता है।यूएस सेंट्रल कमांड द्वारा जारी बयान के अनुसार, अमेरिकी बल ईरानी बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों में आने-जाने वाले सभी देशों के जहाजों की नाकेबंदी शुरू कर देंगे। यह आदेश अरब की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के सभी ईरानी बंदरगाहों पर निष्पक्ष रूप से लागू होगा। हालांकि, अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि होर्मुज से गैर-ईरानी बंदरगाहों की ओर जाने वाले जहाजों को बाधित नहीं किया जाएगा। नाविकों को सलाह दी गई है कि वे अमेरिकी नौसेना के संपर्क में रहें और सुरक्षा निर्देशों का पालन करें।
यह कड़ा फैसला पाकिस्तान में हुई उस द्विपक्षीय वार्ता के विफल होने के बाद आया है, जिसमें दोनों देश परमाणु हथियारों के मुद्दे पर किसी सहमति पर नहीं पहुंच सके थे। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर अपने कड़े रुख को स्पष्ट करते हुए कहा कि ईरानी प्रशासन को पैसा और परमाणु हथियार चाहिए, जिसे अमेरिका किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने अमेरिकी नौसेना को निर्देश दिया है कि वे उन सभी जहाजों की पहचान करें जिन्होंने ईरान को जलमार्ग का टोल भुगतान किया है। ट्रंप ने चेतावनी दी कि ईरान को भुगतान करने वाले किसी भी जहाज को सुरक्षित आवागमन की अनुमति नहीं दी जाएगी। दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिकी दावे को चुनौती देते हुए इस जलमार्ग पर अपना नियंत्रण होने की बात दोहराई है। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड नौसेना ने रविवार को कड़े शब्दों में कहा कि होर्मुज के पास आने वाले किसी भी विदेशी सैन्य जहाज को दृढ़ और बलपूर्वक जवाब दिया जाएगा। ईरान के इस रुख से स्पष्ट है कि वह अमेरिका की नाकेबंदी के आगे झुकने को तैयार नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों सेनाओं के बीच टकराव होता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं, जिससे दुनिया के कई देशों में गंभीर तेल संकट पैदा हो जाएगा। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें इस महत्वपूर्ण जलमार्ग पर टिकी हैं, जहां तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है।
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