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पीढ़ियां बदल सकती हैं, लेकिन सच नहीं, 1971 में बांग्लादेशियों ने चुकाई थी भारी कीमत
10 Dec, 2025 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका। बांग्लादेश की राजधानी ढाका के छात्रों ने विजय दिवस से पहले बड़ा प्रदर्शन किया है और कहा है कि रजाकरों के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता है। ढाका यूनिवर्सिटी के छात्रों ने पाकिस्तान को चुनौती दी। उन्होंने 1971 की जंग में पराजित पाकिस्तान का झंडा भेजकर साफ संदेश लिखा- नो कॉम्प्रमाइज विद रजाकर। छात्रों ने 1971 में पाकिस्तान द्वारा बांग्लादेश में किए गए नरसंहार का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि एक अलग राष्ट्र के रूप में आने के लिए बांग्लादेश के लोगों ने भारी कीमत चुकाई है। इन छात्रों का कहना था- पीढ़ियां बदल सकती हैं, लेकिन सच नहीं बदलता।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ढाका यूनिवर्सिटी के छात्रों ने कहा कि 1971 में 30 लाख शहीदों और 2 लाख महिलाओं की अस्मिता पर हमले हुए थे। इतनी भारी कीमत पर मिली आजादी से किसी तरह का समझौता नहीं होगा। बता दें बांग्लादेश अपना विजय दिवस हर साल 16 दिसंबर को मनाता है। इस दिन 1971 में पाकिस्तानी सेना ने ढाका में भारतीय सेना और मुक्ति वाहिनी के सामने आत्मसमर्पण किया था। इसके साथ ही बांग्लादेश एक स्वतंत्र देश बना। इस मौके पर बांग्लादेश में लंबा कार्यक्रम चलता है। बांग्लादेश में इस कार्यक्रम की तैयारी शुरू हो गई हैं।
मोहम्मद यूनुस पिछले साल शेख हसीना की सरकार के पतन के बाद देश के मुख्य प्रशासक हैं। यूनुस के राज में बांग्लादेश ने परंपरागत मूल्यों से इतर जाकर पाकिस्तान से हाथ मिलाया है। इसके बाद यूनुस और पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ की मुलाकात न्यूयॉर्क और काहिरा में हुई। पाकिस्तान की सेना के बड़े अफसर ढाका के दौरे पर आए और ढाका के अफसर पाकिस्तान दौरे पर गए। बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच स्वार्थ पर आधारित संबंधों का भारत पर भी असर है। रिपोर्ट के मुताबिक लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादी बांग्लादेश के अंदर सक्रिय हैं। ये आतंकी भारतीय सीमा के पास भी आजादी से घूम रहे हैं।
बता दें मार्च 1971 में जब पूर्वी पाकिस्तान में जब बंगाली राष्ट्रवाद उभरा तो इसे कुचलने के लिए 25 मार्च 1971 की रात को पाकिस्तानी सरकार ने “ऑपरेशन सर्चलाइट” शुरू किया। पाकिस्तानी सेना ने ढाका विश्वविद्यालय, पुलिस लाइन्स और हिंदू बस्तियों पर हमला किया। छात्रों, प्रोफेसरों, बुद्धिजीवियों और पत्रकारों को चुन-चुनकर मारा गया। इस दौरान पहले ही कुछ हफ्तों में ही लाखों लोग मारे गए। ऑपरेशन सर्चलाइट को इतिहास के सबसे भयानक नरसंहारों में गिना जाता है। पाकिस्तानी सेना और उसके सहयोगी रजाकार, अल-बद्र, अल-शम्स जैसे अर्धसैनिक दस्तों ने अवामी लीग समर्थकों और बुद्धिजीवियों को निशाना बनाया। महिलाओं से रेप किया गया। अंतरराष्ट्रीय आयोगों के मुताबिक 2-4 लाख महिलाएं रेप का शिकार हुई थीं।
लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट पर हड़कंप, काली मिर्च के स्प्रे से यात्रियों पर हमला
9 Dec, 2025 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लंदन।हीथ्रो एयरपोर्ट के टर्मिनल 3 पर उस समय हड़कंप मच गया, जब मल्टीस्टोरी कार पार्क में काली मिर्च के स्प्रे से लोगों पर हमला किए जाने की सूचना सामने आई। मेट्रोपॉलिटन पुलिस के अनुसार, हमलावरों के एक समूह ने कई लोगों पर पेपर स्प्रे का इस्तेमाल किया और इसके बाद मौके से फरार हो गया। घटना सुबह 8 बजकर 11 मिनट पर हुई, जिसके तुरंत बाद एयरपोर्ट परिसर और आसपास के क्षेत्रों में अफरा-तफरी फैल गई।
सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक अधिकतर हमलावर भाग चुके थे। हालांकि एक संदिग्ध को गिरफ्तार कर लिया गया है, जिससे आर्म्ड पुलिस पूछताछ कर रही है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह हमला किसी व्यक्तिगत विवाद का नतीजा था और इसमें शामिल लोग एक-दूसरे को पहले से जानते थे। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इसे आतंकवाद से जुड़ा मामला नहीं माना जा रहा है, लेकिन एहतियात के तौर पर एयरपोर्ट पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है।लंदन एम्बुलेंस सर्विस भी तुरंत घटनास्थल पर पहुंची और प्रभावित लोगों को अस्पताल ले जाया गया। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, किसी की चोटें गंभीर नहीं हैं और सभी घायलों का इलाज चल रहा है। लंदन फायर ब्रिगेड भी 8 बजकर 14 मिनट पर सहायता के लिए पहुंची और अब भी मौके पर तैनात है। अधिकारियों ने इसे महत्वपूर्ण घटना बताते हुए राहत और सुरक्षा कार्यों में कई टीमों को लगाया है।
हीथ्रो एयरपोर्ट प्रशासन ने यात्रियों को सलाह दी है कि वे अतिरिक्त समय लेकर आएं और अपनी उड़ानों से संबंधित जानकारी एयरलाइन से अवश्य चेक करें। हमले के चलते कुछ समय के लिए ट्रैफिक प्रभावित हुआ, लेकिन बाद में हालात सामान्य होने लगे। यात्रियों में शुरुआती दहशत जरूर देखी गई, हालांकि सुरक्षा एजेंसियों की त्वरित कार्रवाई के कारण स्थिति नियंत्रण में आ गई। पुलिस मामले की जांच जारी रखे हुए है और बाकी हमलावरों की तलाश की जा रही है।
मैक्रो ने चीन में जाकर जिनपिंग को दी धमकी, दुनिया में मच गया हड़कंप
9 Dec, 2025 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने वैश्विक व्यापार युद्ध में नया मोड़ ला दिया है। चीन के बढ़ते व्यापार सरप्लस और यूरोप के लिए गंभीर होते आर्थिक असंतुलन पर तीखा रुख अपनाते हुए मैक्रों ने स्पष्ट संकेत दिया है कि यदि बीजिंग ने यूरोपीय यूनियन के साथ अपने व्यापार घाटे को कम करने के लिए कदम नहीं उठाए, तो यूरोप भी अमेरिका की तरह चीनी सामानों पर भारी टैरिफ लगा सकता है। अपनी हालिया चीन यात्रा के बाद दिए गए एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि यह यूरोपीय उद्योग के लिए “जीवन और मृत्यु” जैसा सवाल है और अब यूरोप चीन की एकतरफा व्यापार नीति को चुपचाप स्वीकार नहीं करेगा।
मैक्रों का सबसे तीखा हमला चीन की उस नीति पर था जिसके कारण यूरोप चीनी उत्पादों का डंपिंग ग्राउंड बनता जा रहा है। उन्होंने बताया कि चीन यूरोप को बेचने के लिए बड़े पैमाने पर सामान भेज रहा है, लेकिन यूरोपीय कंपनियों के लिए चीन के बाजार में प्रवेश लगातार मुश्किल होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि चीन का यह व्यापार मॉडल अस्थिर है—“अगर ग्राहक ही कमजोर हो गया, तो चीन अपना माल किसे बेचेगा?” यह बयान यूरोपीय नेतृत्व की बढ़ती नाराजगी और आने वाले कड़े कदमों की स्पष्ट चेतावनी है।
मैक्रों ने बीजिंग के सामने यह भी साफ किया कि स्थिति सुधारने के लिए समय सीमित है। यदि चीन ने प्रतिक्रिया नहीं दी, तो यूरोप आने वाले महीनों में अमेरिका की तर्ज पर टैरिफ लगाने जैसे कदम उठाने को मजबूर होगा। यूरोप अब तक चीन के मुकाबले अपेक्षाकृत नरम माना जाता था, लेकिन मैक्रों की यह चेतावनी उस दौर के अंत की ओर संकेत करती है। यूरोपीय यूनियन का चीन के साथ व्यापार घाटा 2019 के बाद से लगभग 60प्रतिशत बढ़ चुका है। सस्ते चीनी इलेक्ट्रिक वाहनों, सोलर पैनलों और स्टील ने यूरोप के बाजारों में बड़ी हिस्सेदारी ले ली है। इसके विपरीत, यूरोपीय कंपनियों को चीन में व्यापार करने के लिए कठोर नियमों और प्रतिबंधों से गुजरना पड़ता है। फ्रांस समेत कई देशों की घरेलू उद्योग इस असंतुलन से प्रभावित हो रही है। मैक्रों ने कहा कि यूरोप न केवल चीन की आक्रामक विनिर्माण नीति से जूझ रहा है, बल्कि अमेरिका की “अमेरिका फर्स्ट” नीति से भी दबाव में है। ट्रंप प्रशासन द्वारा बढ़ाए गए संरक्षणवादी कदमों के कारण चीन जब अमेरिका को निर्यात सीमित करता है, तो उसका अतिरिक्त माल यूरोपीय बाजारों में भर जाता है और कीमतें ध्वस्त हो जाती हैं। उन्होंने इसे यूरोप के लिए अत्यंत खतरनाक स्थिति बताते हुए कहा कि इससे यूरोपीय उद्योग का मॉडल कमजोर हो रहा है।
सिर्फ चेतावनी ही नहीं, मैक्रों ने चीन को एक समझौता प्रस्ताव भी दिया है। उन्होंने सुझाव दिया कि यूरोप सेमीकंडक्टर मशीनरी के निर्यात पर लगी पाबंदियों में ढील दे सकता है—जो चीन की टेक इंडस्ट्री के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसके बदले, चीन को अपने ‘रेयर अर्थ मिनरल्स’ के निर्यात पर लगी सीमाएं हटानी होंगी। ये खनिज बैटरी, मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा उद्योग के लिए अहम हैं और चीन इनका सबसे बड़ा उत्पादक है। मैक्रों ने यह भी कहा कि चीनी कंपनियों को केवल सामान बेचने के बजाय यूरोप में निवेश करना चाहिए और नई फैक्ट्रियां स्थापित कर स्थानीय अर्थव्यवस्था में मूल्य जोड़ना चाहिए। उनका मानना है कि इसी संतुलित और पारस्परिक लाभ वाले मॉडल से वैश्विक व्यापार को स्थिरता मिल सकती है। इस पूरे घटनाक्रम ने संकेत दिया है कि आने वाले समय में यूरोप–चीन संबंधों में बड़े बदलाव देखे जा सकते हैं और वैश्विक व्यापार युद्ध का अगला चरण और भी तीखा हो सकता है।
जेलेंस्की को डोनाल्ड ट्रंप के बेटे ने कहा भ्रष्टाचारी, पीस प्लान न पढ़ने पर भड़के राष्ट्रपति
9 Dec, 2025 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बेटे जूनियर डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उनके पिता यूक्रेन शांति प्रक्रिया से पीछे हट सकते हैं। उन्होंने यह बयान कतर में एक सम्मेलन के दौरान दिया। ट्रंप जूनियर ने कहा कि उनके पिता की नीति हमेशा अनिश्चित और अप्रत्याशित रहती है। उनकी बात इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप ने जेलेंस्की को लेकर एक बयान देते हुए कहा कि उनके शांति मसौदे को उन्होंने पढ़ा तक नहीं।
अब सबको यही चिंता है कि क्या अमेरिका, यूक्रेन को छोड़ देगा, जिसके जवाब में ट्रंप जूनियर ने कहा कि अमेरिका, यूक्रेन को छोड़ना नहीं चाहता लेकिन अमेरिकियों में अब युद्ध के लिए पैसे देना का उत्साह खत्म हो गया है। उन्होंने बताया कि जब वह पूरे देश में रिपब्लिकन समर्थकों से मिलते हैं, तो अधिकांश लोग यूक्रेन को अपनी प्राथमिक चिंता नहीं मानते। ट्रंप जूनियर ने ये भी दावा किया कि लगभग 2 लाख अमेरिकियों से सीधी बातचीत के बाद ज्यादातर लोगों ने माना कि रूस-यूक्रेन युद्ध उनकी प्राथमिक समस्याओं में शामिल नहीं है। जब उनसे पूछा गया कि क्या राष्ट्रपति ट्रंप यूक्रेन की शांति वार्ता से हट सकते हैं, तो ट्रंप जूनियर ने कहा- ‘मुझे लगता है वह ऐसा कर सकते हैं।’ उन्होंने कहा कि ट्रंप की खासियत ही यह है कि कोई नहीं जानता कि वह अगला कदम क्या उठाएंगे, क्योंकि वह पुराने ढर्रे पर चलने वाले नेताओं की तरह काम नहीं करते। ट्रंप जूनियर ने कहा कि अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने यूक्रेन युद्ध को गलत तरीके से पेश किया है। उन्होंने दावा किया कि यूक्रेन युद्ध से पहले, रूस से भी ज्यादा भ्रष्ट था और यह बात अमेरिकी रिपोर्टों में भी कही गई है। उन्होंने कहा कि यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की को एक देवता जैसा दर्जा दे दिया गया है, जबकि उनके शासन में लंबे समय से भ्रष्टाचार और अनियमितताएं रही हैं। अक्सर इन्हें नजरअंदाज कर दिया गया। उन्होंने जेलेंस्की के भ्रष्टाचार पर खुलकर बात की और कहा कि वे पवित्र नहीं हैं।
एक सैनिक की मौत के बाद थाई सेना ने कंबोडिया पर की एयर स्ट्राइक
9 Dec, 2025 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बैंगकॉक,। थाईलैंड और कंबोडिया एक बार फिर आमने-सामने आ गए हैं। ट्रंप की मध्यस्थता में हुए सीजफायर के बावजूद सोमवार को थाई सेना ने कंबोडिया पर हमला कर दिया। थाई सेना के प्रवक्ता ने कहा कि सोमवार को थाईलैंड ने अपने पड़ोसी कंबोडिया पर एयर स्ट्राइक की। दोनों पक्ष अपने विवादित बॉर्डर पर हुई लड़ाई के लिए एक-दूसरे को जिम्मेदार बता रहे हैं, जिसमें एक थाई सैनिक की मौत हो गई थी।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सोमवार सुबह उबोन रात्चाथानी प्रांत में कंबोडियाई सैनिकों पर फायरिंग के बाद सुवारी ने एक बयान में कहा कि सेना को रिपोर्ट मिली कि थाई सैनिकों पर सपोर्टिंग फायर वेपन से हमला किया गया है, जिससे एक सैनिक मारा गया और चार घायल हो गए, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई की गई। कई इलाकों में मिलिट्री टारगेट पर एयरक्राफ्ट से हमला करना शुरू कर दिया है। कंबोडिया के रक्षा मंत्रालय की प्रवक्ता माली सोचेता ने कहा कि थाई सेनाओं ने सोमवार सुबह प्रीह विहियर और ओडर मींची के बॉर्डर वाले प्रांतों में कंबोडियाई सैनिकों पर हमला किया। थाईलैंड पर टैमोन थॉम मंदिर पर टैंकों से कई गोलियां चलाने और प्रीह विहियर मंदिर के पास के दूसरे इलाकों पर हमला करने का आरोप है। उन्होंने कहा कि कंबोडिया ने कोई जवाबी कार्रवाई नहीं की है।
ओडर मींचे प्रांतीय प्रशासन के कंबोडियाई प्रवक्ता ने कहा कि सदियों पुराने तमोन थॉम और ता क्रबेई मंदिरों के इलाकों में गोलीबारी की खबर है। बॉर्डर के पास रहने वाले कई गांववाले सुरक्षित जगहों पर भाग रहे हैं। थाईलैंड के सेकंड आर्मी रीजन ने कहा है कि लड़ाई के बाद से थाईलैंड में करीब 35,000 लोगों को कंबोडिया के पास वाले बॉर्डर के इलाकों से निकाला गया है। थाई सेना ने कंबोडियाई सेना पर बुरी राम प्रांत में आम लोगों के इलाकों की ओर बीएम-21 रॉकेट दागने का भी आरोप है। जिसमें किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।
दोनों देशों ने रविवार को एक छोटी झड़प की खबर दी थी, जिसमें थाईलैंड की सेना के दो सैनिक घायल हुए थे। कुछ महीनों पहले थाईलैंड और कंबोडिया के बीच पांच दिनों तक झड़पें हुईं थी। जिसमें 43 लोग मारे गए थे साथ ही 300,000 लोग बेघर हो गये थे। इससे भीषण तबाही के बाद युद्धविराम लागू किया गया था। लड़ाई खत्म कराने में अमेरिका, चीन और मलेशिया ने बीच-बचाव किया था।
मलेशिया रीजनल ब्लॉक आसियान का चेयरमैन है। अक्टूबर में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने थाईलैंड और कंबोडिया के बीच एक फॉलो-ऑन जॉइंट डिक्लेरेशन पर को-साइन किया, जिसमें सीजफायर को बढ़ाने पर सहमत होने के बाद देशों के साथ नए ट्रेड डील्स की बात कही गई थी, लेकिन पिछले महीने थाईलैंड ने एक कथित लैंडमाइन ब्लास्ट में कई सैनिकों के घायल होने के बाद डील सस्पेंड कर दी थी, जिसके बाद दोनों देशों के बीच छिटपुट झडपों की खबरें आती रहीं। यह विवाद इस इलाके में फ्रांस के कॉलोनियल शासन के दौरान मैप की गई सीमाओं को लेकर बना हुआ है, जिसमें दोनों देश कुछ सीमा मंदिरों पर अपना दावा करते हैं।
ऑस्ट्रिया की बर्फीली चोटी पर विंटर चाइल्ड की ठंड से मौत, बॉयफ्रेंड पर लगे आरोप
9 Dec, 2025 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
न्यूयार्क। ऑस्ट्रिया के सबसे ऊंचे पहाड़ ग्रॉसग्लॉकनर पर 33 साल की महिला कर्स्टिन गर्टनर ठंड से मौत हो गई वह पहाड़ पर ठंड में बर्फ की तरह जम गईं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कर्स्टिन साल्जबर्ग की रहने वाली थीं और सोशल मीडिया पर खुद को विंटर चाइल्ड और माउंटेन पर्सन कहती थीं। जनवरी में वह अपने बॉयफ्रेंड थॉमस प्लामबेर्गर के साथ पहाड़ पर चढ़ाई करने गई थीं। थॉमस 39 साल के हैं और एक अनुभवी माउंटेन गाइड हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक दोनों ने अपनी चढ़ाई दो घंटे देरी से शुरू की और ऊपर पहुंचते-पहुंचते मौसम बहुत ही खराब हो गया। तापमान -20 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया और हवाएं तूफानी रफ्तार से चलने लगीं। पहाड़ की चोटी से करीब 150 फीट नीचे कर्स्टिन बहुत थक गईं थीं, उनका शरीर ठंड से सुन्न होने लगा और वह उलझन में दिखीं।
रिपोर्ट के मुताबिक सरकारी वकील का आरोप है कि इतनी खराब हालत में होने के बावजूद थॉमस रात करीब 2 बजे कर्स्टिन को वहीं छोड़कर मदद लेने निकल गए। उन्होंने न तो उनके ऊपर इमरजेंसी ब्लैंकेट डाला, न ही उनके पास मौजूद सेफ्टी कवर का इस्तेमाल किया। यहां तक कि थॉमस ने तुरंत रेस्क्यू टीम को कॉल भी नहीं किया और फोन साइलेंट कर दिया, जिससे रेस्क्यू टीम की कॉल्स मिस हो गईं।
जानकारी के मुताबिक पहाड़ की वेबकैम फुटेज में भी सिर्फ एक हेडलैंप दिखाई दिया, जो शिखर से दूर जाता दिखा। तेज हवाओं और खराब मौसम के कारण रेस्क्यू टीम सुबह वहां पहुंची। तब तक कर्स्टिन की मौत हो चुकी थी। थॉमस पर अब गंभीर लापरवाही बरतने से हुई हत्या का आरोप है, और दोषी पाए जाने पर उन्हें तीन साल की सजा हो सकती है। उनके वकील का कहना है कि यह बस एक हादसा था। यह मामला 19 फरवरी 2026 को इनसब्रुक रीजनल कोर्ट में सुना जाएगा।
भारत से लौटते ही पुतिन के खिलाफ साजिश करने लगे यूरोपीय देश
8 Dec, 2025 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मॉस्को। भारत की यात्रा से लौटते ही रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के खिलाफ यूरोपीय देश साजिश में जुट गए हैं। दुनिया की सबसे संपन्न लोकतांत्रिक अर्थव्यवस्थाएं रूस के समुद्री तेल व्यापार पर अपने अब तक के सबसे कठोर कदम की तैयारी में लग गई हैं। दरअसल यूरोपीय संघ (ईयू) और जी7 देश रूस के खिलाफ एक नई महासाजिश रच रहे हैं जिसके तहत ये देश रूसी तेल निर्यात पर पूर्ण समुद्री बैन लगाने की योजना बना रहे हैं। यह कदम रूस की युद्ध अर्थव्यवस्था को सीधा निशाना बनाएगा, क्योंकि तेल रूस के केंद्रीय बजट का लगभग एक-चौथाई हिस्सा मुहैया कराता है। एक विशेष रिपोर्ट के अनुसार, यह योजना रूसी तेल की कीमत सीमा (प्राइस कैप) को पूरी तरह समाप्त कर देगी और पश्चिमी टैंकरों, बीमा तथा झंडियों के उपयोग पर रोक लगा देगी। क्या यह वैश्विक तेल बाजार में भूचाल लाएगा? आइए पूरे घटनाक्रम को विस्तार से समझते हैं।
रिपोर्टस में दावे किए जा रहे हैं कि जी7 देशों और यूरोपीय संघ ने रूसी कच्चे तेल के लिए समुद्री सेवाओं पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने पर विचार शुरू कर दिया है। यह कदम पश्चिमी जहाजों और बीमा सेवाओं को रोक देगा, जो अभी भी रूस के तेल निर्यात का बड़ा हिस्सा ढो रहे हैं। 2022 में रूस के यूक्रेन पर आक्रमण के बाद जी7 देशों (अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान) और ईयू ने रूसी तेल आयात पर प्रतिबंध लगा दिया। लेकिन पूरी तरह बंद करने के बजाय, उन्होंने एक चालाक तंत्र अपनाया- प्राइस कैप। इसके तहत रूसी कच्चे तेल की कीमत 60 डॉलर प्रति बैरल से नीचे रखने पर पश्चिमी शिपिंग और बीमा सेवाएं उपलब्ध रहती हैं। इससे रूस को तेल बेचने में दिक्कत तो हुई, लेकिन पूरी तरह रुकावट नहीं लगी।
समय के साथ रूस ने इसे चकमा दिया। मॉस्को ने शैडो फ्लीट नामक एक गुप्त जहाजी बेड़ा विकसित किया- पुराने, बिना पश्चिमी नियमन वाले टैंकर जो ईरान और वेनेजुएला जैसे देशों से प्रेरित हैं। सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि जी7 और ईयू अब प्राइस कैप को ताक पर रखकर पूर्ण समुद्री सेवाओं प्रतिबंध (फुल मारिटाइम सर्विसेज बैन) लाने की बात कर रहे हैं। इसका मतलब? रूसी तेल या ईंधन को ले जाने वाले किसी भी जहाज को पश्चिमी टैंकर, बीमा या पंजीकरण सेवाएं नहीं मिलेंगी – चाहे वह कहीं भी जा रहा हो। यह योजना मुख्य रूप से रूस के एशियाई बाजारों को निशाना बनाएगी। रूस का एक-तिहाई से अधिक तेल निर्यात (मुख्यतः भारत और चीन को) अभी भी ग्रीस, साइप्रस और माल्टा जैसे ईयू देशों के टैंकरों से होता है।
अमेरिका में 7.0 की तीव्रता से आया भूकंप, कनाडा को भी हिला डाला
8 Dec, 2025 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिका के अलास्का में 7.0 की तीव्रता से आए भूकंप ने कनाडा तक को हिला डाला। लोग दहशत में आ गए और घरों से बाहर निकल आए।अमेरिकी भूगर्भ सर्वेक्षण (यूएसजीएस) के अनुसार, भूकंप का केंद्र अलास्का की राजधानी जूनो से लगभग 370 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम और कनाडा के व्हाइटहॉर्स से करीब 250 किलोमीटर पश्चिम में था। झटके इतने तेज थे कि हजारों किलोमीटर दूर बसे इलाकों में भी लोगों ने जमीन को हिलते महसूस किया। हालांकि, राहत की बात यह है कि अभी तक किसी बड़े नुकसान या किसी के घायल होने की खबर नहीं है। साथ ही, अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि इस भूकंप से सुनामी का कोई खतरा नहीं है।
भूकंप का सबसे नजदीकी कनाडाई शहर हैन्स जंक्शन बताया गया, जो केंद्र से करीब 130 किलोमीटर दूर है। 2022 की जनगणना के अनुसार, यहां लगभग 1,000 लोग रहते हैं। वहीं, अमेरिकी शहर याकुटात, जिसकी आबादी 662 है, भूकंप के केंद्र से मात्र 90 किलोमीटर दूर है। इसलिए दोनों क्षेत्रों में लोग काफी डर गए। भूकंप की गहराई करीब 10 किलोमीटर बताई गई है, यानी सतह के काफी पास, जिससे झटके और भी अधिक महसूस हुए। इसके बाद कई छोटे आफ्टरशॉक्स दर्ज किए गए, जिसकी वजह से लोगों में डर बना हुआ है। कनाडा के व्हाइटहॉर्स में रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस की अधिकारी कैलिस्टा मैकलाउड ने बताया कि उन्हें भूकंप के तुरंत बाद इमरजेंसी कॉल मिलीं। उन्होंने कहा, ‘झटके काफी तेज महसूस हुए। सोशल मीडिया पर भी बड़ी संख्या में लोग बता रहे हैं कि उनके घर हिल गए।’ नेचुरल रिसोर्सेज कनाडा की सिस्मोलॉजिस्ट ऐलिसन बर्ड के अनुसार, भूकंप का असर जिस इलाके में सबसे ज्यादा हुआ है, वह बेहद पर्वतीय और कम आबादी वाला क्षेत्र है। उन्होंने कहा कि अब तक मिली जानकारी के अनुसार केवल घरों की दीवारों और शेल्फ से सामान गिरने की घटनाएं सामने आई हैं, लेकिन किसी संरचनात्मक नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है।
यह सीजफायर नहीं कहा जा सकता, जब तक इजराइली सेना पूरी तरह गाजा से नहीं हटे
8 Dec, 2025 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दोहा। कतर के पीएम शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी ने कहा है कि गाजा में मौजूदा हालात को सीजफायर नहीं कहा जा सकता। इसके लिए पूरे इलाके से इजराइल को हटना होगा। अल थानी ने यह बात एक चर्चा के दौरान कही। अल थानी ने कहा कि अमेरिका के नेतृत्व में अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थ गाजा में शांति समझौते को पक्का करने के लिए दूसरे चरण के लिए आगे का रास्ता बनाने पर काम कर रहे हैं। उन्होंने गाजा में शांति प्रक्रिया को एक अहम मोड़ पर बताया।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अल थानी ने कहा कि हमने अभी जो किया है, वह एक ठहराव है। हम इसे अभी सीजफायर नहीं मान सकते। युद्धविराम तब तक पूरा नहीं हो सकता जब तक इजराइली सेना पूरी तरह से गाजा से वापस नहीं हो जाती। गाजा में स्थिरता आ जाए, लोग आ-जा सकें, जो आज नहीं है। बता दें बीते 10 अक्टूबर को अमेरिकी पीस प्लान के तहत हुए युद्धविराम की शुरुआत में इजराइल ने अपनी सेना को एक येलो लाइन पर वापस बुला लिया था। यह काल्पनिक येलो लाइन मानचित्र पर गाजा पट्टी को मोटे तौर पर पूर्व और पश्चिमी हिस्सों में बांटती है। इसके साथ ही इजराइल को राफा बॉर्डर क्रॉसिंग को फिर से खोलने की इजाजत देनी थी, लेकिन वह एक महीने से ज्यादा समय तक यह कहकर टाल दिया कि हमास को गाजा में बचे हुए मृत बंधकों के अवशेष सौंपने होंगे।
बता दें अक्टूबर में हुए युद्धविराम ने दो साल से चल रही लड़ाई को रोक दिया है। हालांकि, दोनों पक्ष एक दूसरे पर उल्लंघन का आरोप लगाते हैं। गाजा में हमास के स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि 10 अक्टूबर को युद्धविराम लागू होने के बाद से अब तक 360 से ज्यादा फिलिस्तीनी इजराइली फायरिंग में मारे गए हैं। नई हिंसा में हॉस्पिटल ने बताया कि गाजा शहर के उत्तर-पश्चिम में इजराइली एयरस्ट्राइक में दो फिलिस्तीनी मारे गए। इजराइली सेना ने कहा कि उस पर जगह पर एयरस्ट्राइक के बारे में जानकारी नहीं थी। हालांकि, इसने बताया कि इजराइली सैनिकों ने शनिवार को तीन मिलिटेंट को मार गिराया, जो येलो लाइन पार करके इजराइल नियंत्रित उत्तरी गाजा में घुस आए थे।
भारत को 1500 किमी रेंज की कालिब्र क्रूज मिसाइलें देगा रुस, नौसेना को मिलेगी ताकत
8 Dec, 2025 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मॉस्को। रूस ने भारत को 1500 किमी रेंज की कालिब्र क्रूज मिसाइलों से लैस करने का प्रस्ताव दिया है। इसे स्टैंडर्ड 533 एमएम टॉरपीडो ट्यूब का इस्तेमाल करके भारतीय सबमरीन से फायर किया जा सकता है, जो उसे 1500 किमी की दूरी तक हमला करने की क्षमता प्रदान करेगी। रूसी अधिकारियों ने इस साल की शुरुआत में मॉस्को में भारतीय नौसेना के डेलीगेशन को इस बारे में जानकारी दी थी। इसमें प्लेटफॉर्म को बड़े बदलाव के बिना डीप-स्ट्राइक लैंड अटैक कैपेबिलिटी का वादा किया है। इसके साथ ही इसमें ब्रह्मोस और निर्भय-क्लास सिस्टम के साथ एक और ऑप्शन भी जोड़ा गया है। इस क्रूज मिसाइल से भारत की सबमरीन फ्लीट की फायरपावर में अहम बढ़ोतरी होगी।
रिपोर्ट के मुताबिक कालिब्र की 1500 किमी की रेंज फारस की खाड़ी से लेकर मलक्का स्ट्रेट तक एक बड़े दायरे में अहम इकनॉमिक और मिलिट्री नोट्स को कवर करेगी। हालांकि, भारत के डीआरडीओ ने रूस के सात एनपीओएम के साथ मिलकर स्वदेशी एसएलसीएम को लंबे समय के लिए लक्ष्य बनाया है, लेकिन रक्षा एक्सपर्ट कालिब्र को कम जोखिम और ज्यादा असर वाली अंतरिम क्षमता के तौर पर देखते हैं, जो जरूरी समय और ऑपरेशनल अनुभव खरीदती है। रूस ने यूक्रेन में अपने मिलिट्री ऑपरेशन में कालिब्र मिसाइलों को बड़े पैमाने पर तैनात किया है। भारत ने रूस के साथ कालिब्र फैमिली की दूसरी मिसाइलों के लिए डील की है। इस साल फरवरी की शुरुआत में भारत ने रूस के साथ कालिब्र-पीएल एंटी-शिप क्रूज मिसाइल खरीदने के लिए समझौता किया था।
अमेरिकी हमले में नाव में सवार 11 लोगों की मौत पर घिरे ट्रंप व हेगसेथ
8 Dec, 2025 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। वेनेजुएला से ड्रग्स सप्लाई के खिलाफ अभियान चला रहे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका लगा है। यह पूरा मामला 2 सितंबर को एक नाव पर अमेरिकी हमले के साथ शुरू हुआ। अमेरिका सरकार के मुताबिक इस नाव पर ड्रग्स लदे हुए थे और वह अमेरिका आ रही थी, लेकिन अब इस मामले पर सामने आई नई रिपोर्ट के मुताबिक वह नाव अमेरिका आ ही नहीं रही थी, जिस पर हमला करके ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस ऑपरेशन की कमान संभालने वाले एडमिरल ने सीनेटर्स को बताया कि यह नाव एक बड़े जहाज की तरफ जा रही थी, जो कि दक्षिण अमेरिकी देश सूरीनाम की तरफ जा रहा था। बता दें अमेरिकी नौसेना की तरफ से किए गए इस हमले में नाव पर सवार 11 लोगों की मौत हो गई थी।
ट्रंप ने इस स्ट्राइक का एक वीडियो साझा करते हुए लिखा था- यह स्ट्राइक तब की गई जब वेनेज़ुएला से आए ये पुख्ता तौर पर पहचान लिए गए नर्को-टेररिस्ट अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में ड्रग्स अमेरिका की ओर ले जा रहे थे। ये हिंसक ड्रग-तस्कर कार्टेल अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश नीति और अमेरिकी हितों के लिए खतरा हैं। स्ट्राइक में तीन पुरुष मारे गए। रिपोर्ट के मुताबिक एडमिरल ने बताया कि नाव दूसरे जहाज की तरफ जा रही थी, लेकिन नौसेना उसका पता नहीं लगा सकी। हालांकि, इस बात की संभावना है कि नाव सूरीनाम से अमेरिका की तरफ जा सकती थी, लेकिन सामान्यता सूरीनाम से जाने वाले ड्रग्स के रास्ते यूरोप की तरफ जाते हैं।
इस रिपोर्ट के खुलासे के बाद अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ की भूमिका अब जांच के दायरे में आ गई है। क्योंकि उन्होंने ही इस नाव को उड़ाने का आदेश दिया था। रिपोर्ट के मुताबिक एडमिरल ने सांसदों को बताया कि उसके समझ के मुताबिक मिशन का लक्ष्य सभी 11 लोगों को मारना और नाव को डुबो देना था। इस कारण हेगसेथ पर अब “पूरी वीडियो फुटेज जारी करने” का भारी दबाव बढ़ रहा है। बता दें हेगसेथ इस समय सिग्नल चैट के जरिए अमेरिका सैनिकों की लोकेशन को हूती विद्रोहियों के सामने सार्वजनिक करने के आरोप का भी सामना कर रहे हैं। ऐसे में इस मामले के खुलासे ने उनकी परेशानियों को और बढ़ा दिया है।
अमेरिकी हमले में नाव में सवार 11 लोगों की मौत पर घिरे ट्रंप व हेगसेथ
7 Dec, 2025 03:21 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। वेनेजुएला से ड्रग्स सप्लाई के खिलाफ अभियान चला रहे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका लगा है। यह पूरा मामला 2 सितंबर को एक नाव पर अमेरिकी हमले के साथ शुरू हुआ। अमेरिका सरकार के मुताबिक इस नाव पर ड्रग्स लदे हुए थे और वह अमेरिका आ रही थी, लेकिन अब इस मामले पर सामने आई नई रिपोर्ट के मुताबिक वह नाव अमेरिका आ ही नहीं रही थी, जिस पर हमला करके ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस ऑपरेशन की कमान संभालने वाले एडमिरल ने सीनेटर्स को बताया कि यह नाव एक बड़े जहाज की तरफ जा रही थी, जो कि दक्षिण अमेरिकी देश सूरीनाम की तरफ जा रहा था। बता दें अमेरिकी नौसेना की तरफ से किए गए इस हमले में नाव पर सवार 11 लोगों की मौत हो गई थी।
ट्रंप ने इस स्ट्राइक का एक वीडियो साझा करते हुए लिखा था- यह स्ट्राइक तब की गई जब वेनेज़ुएला से आए ये पुख्ता तौर पर पहचान लिए गए नर्को-टेररिस्ट अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में ड्रग्स अमेरिका की ओर ले जा रहे थे। ये हिंसक ड्रग-तस्कर कार्टेल अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश नीति और अमेरिकी हितों के लिए खतरा हैं। स्ट्राइक में तीन पुरुष मारे गए। रिपोर्ट के मुताबिक एडमिरल ने बताया कि नाव दूसरे जहाज की तरफ जा रही थी, लेकिन नौसेना उसका पता नहीं लगा सकी। हालांकि, इस बात की संभावना है कि नाव सूरीनाम से अमेरिका की तरफ जा सकती थी, लेकिन सामान्यता सूरीनाम से जाने वाले ड्रग्स के रास्ते यूरोप की तरफ जाते हैं।
इस रिपोर्ट के खुलासे के बाद अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ की भूमिका अब जांच के दायरे में आ गई है। क्योंकि उन्होंने ही इस नाव को उड़ाने का आदेश दिया था। रिपोर्ट के मुताबिक एडमिरल ने सांसदों को बताया कि उसके समझ के मुताबिक मिशन का लक्ष्य सभी 11 लोगों को मारना और नाव को डुबो देना था। इस कारण हेगसेथ पर अब “पूरी वीडियो फुटेज जारी करने” का भारी दबाव बढ़ रहा है। बता दें हेगसेथ इस समय सिग्नल चैट के जरिए अमेरिका सैनिकों की लोकेशन को हूती विद्रोहियों के सामने सार्वजनिक करने के आरोप का भी सामना कर रहे हैं। ऐसे में इस मामले के खुलासे ने उनकी परेशानियों को और बढ़ा दिया है।
क्यों और कैसे झुक गई शहबाज सरकार और कैसे मुनीर बन गए ‘सुपर पावर’
7 Dec, 2025 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। पाकिस्तान की सियासत में चल रही लंबी खींचतान, सौदेबाजी और सत्ता संघर्ष का अंत आखिरकार उसी दिशा में गया, जिसकी लंबे समय से चर्चा थी। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अंततः सेना के दबदबे के आगे झुकते हुए जनरल आसिम मुनीर की ‘सुपर पावर’ नियुक्ति पर अपनी मुहर लगा दी। राष्ट्रपति आसिफ अली ज़रदारी ने भी इस प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए पाकिस्तान की सत्ता संरचना में एक ऐतिहासिक बदलाव की शुरुआत कर दी है। अब इस पर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर शहबाज सरकार मुनीर के सामने झुक कैसे गई और ऐसा क्या दांव चला गया कि मुनीर सीडीएफ भी बन गए।
राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद फील्ड मार्शल जनरल आसिम मुनीर न केवल पाकिस्तान के चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ (सीओएएस) बने रहेंगे, बल्कि वे देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेस (सीडीएफ) भी बन गए हैं। इस तरह पाकिस्तान के तीनों सेनाओं यानी थल, जल और वायु सेना की कमान अब एक ही अधिकारी के हाथों में होगी। यह नियुक्ति पाकिस्तान के संविधान में किए गए 27वें संशोधन के बाद संभव हुई है, जिसने सेना प्रमुख के अधिकार अभूतपूर्व रूप से बढ़ा दिए हैं।
कई हफ्तों की सौदेबाजी का नतीजा
इस फाइल पर हस्ताक्षर में हुई देरी महज तकनीकी नहीं थी। इस्लामाबाद के सत्ता गलियारों में पिछले कई हफ्तों से तनाव और खामोशी का दौर चल रहा था। सूत्रों के अनुसार, यह देरी शहबाज सरकार, नवाज शरीफ, उनकी बेटी मरियम नवाज, और सेना प्रमुख आसिम मुनीर के बीच गहन ‘गिव एंड टेक’ पर चली बातचीत का नतीजा थी।
पीएमएल-एन नेतृत्व, खासकर नवाज शरीफ, इस पावरफुल नियुक्ति के बदले में राजनीतिक सुरक्षा चाहते थे। नवाज, जो चौथी बार प्रधानमंत्री बनने के अपने सपने को पूरा होते देख रहे हैं, चाहते थे कि भविष्य में सेना उनका रास्ता न रोके। एक वरिष्ठ पीएमएल-एन सूत्र के अनुसार, यदि मुनीर अगले पांच साल सीडीएफ और सीओएएस बने रहना चाहते हैं, तो उन्हें नवाज शरीफ की सत्ता में वापसी सुनिश्चित करनी होगी।
सरकार के पास कोई विकल्प नहीं रहा?
सूत्रों का कहना है कि नवाज ने भविष्य की सेना नियुक्तियों में भी अपनी राय को महत्व देने की शर्त रखी थी। अंततः शहबाज सरकार ने प्रस्ताव को मंजूरी दी, जो यह दर्शाता है कि या तो सेना ने सभी राजनीतिक आश्वासन दे दिए, या सरकार के पास मानने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था।
वायुसेना को साधने की कोशिश
तनावपूर्ण माहौल के बीच राष्ट्रपति ज़रदारी ने एयर चीफ मार्शल जहीर अहमद बाबर सिद्धू के कार्यकाल में दो साल का विस्तार भी मंजूर किया। इसे आसिम मुनीर द्वारा सभी बलों को साथ लेकर चलने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
पाकिस्तान के भविष्य पर गहरा प्रभाव
आसिम मुनीर के हाथों में सीओएएस, सीडीएफ और फील्ड मार्शल जैसे रैंक का एक साथ आना पाकिस्तान में सत्ता के अभूतपूर्व केंद्रीकरण की ओर इशारा करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह नियुक्ति पाकिस्तान के ‘हाइब्रिड शासन मॉडल’ को और मजबूत करती है, जिसमें सरकार दिखती है लेकिन असली ताकत सेना के पास होती है। शहबाज सरकार द्वारा मुनीर को यह सुपर पावर देना इस बात की खुली स्वीकारोक्ति है कि पाकिस्तान में असली ‘किंगमेकर’ कौन है। नवाज शरीफ को सत्ता में वापसी के लिए जिस तरह सेना के सामने झुकना पड़ा, उसने एक बार फिर पाकिस्तान की असैन्य सरकार की मजबूरी उजागर कर दी है।
सिर्फ खाना ही नहीं............पुतिन के साथ उनका विशेष पानी भी चलता हमेशा साथ
7 Dec, 2025 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मॉस्को। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दुनिया के उन दुर्लभ नेताओं में शुमार हैं, जो अपने पीने और खाने के पानी को हमेशा अपने साथ रखते हैं। चाहे वह विदेश में किसी दौरे पर हों, उनका पानी हमेशा उनके साथ होता है। इतना ही नहीं, उनका टूथब्रश तक इसी पानी से इस्तेमाल होता है। नहाने और टॉयलेट के लिए पुतिन होटल के पानी का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन इसके लिए भी सुरक्षा टीम पहले से पूरी जांच करती है।
दुनिया में अमेरिका जैसे देशों के राष्ट्रपति अपने पानी के लिए ऐसा प्रावधान नहीं रखते, लेकिन रूस के पुतिन, उत्तर कोरिया के किम जोंग उन और चीन के शी जिनपिंग अपने खाने और पीने के पानी को साथ लेकर चलते हैं। जब पुतिन विदेश दौरे पर होते हैं, तब उनके साथ एक टीम होती है, जो उनके खाने-पीने की सामग्री और पानी की सुरक्षा को देखती है।
पुतिन के लिए पानी की बोतलें विशेष विमान से आती हैं। जैसे ही वह किसी देश में पहुँचते हैं, उनके लिए लदी हुई बोतलें होटल तक पहुंचाती हैं। दिनभर के कार्यक्रमों, मीटिंग्स और अन्य गतिविधियों में भी उनकी टीम पानी के खास इंतजाम रखती है, ताकि पुतिन को किसी भी समय सुरक्षित पानी मिल सके। सार्वजनिक और अंतरराष्ट्रीय मीटिंग्स में भी उनके पास हमेशा यही पानी रहता है। वह आम तौर पर छोटे-छोटे सिप में पानी पीते हैं और चाय-कॉफी का सेवन नहीं करते।
पुतिन के साथ उनकी किचन टीम और फूड टेस्टिंग लैब होती है, जो उनके लिए भोजन तैयार करती है। होटल में पहुंचते ही फटाफट किचन सेटअप होता है और रूस से लाए गए भोजन और सीलबंद बोतलबंद पानी का इस्तेमाल किया जाता है। सुरक्षा टीम यह सुनिश्चित करती है कि कोई भी वस्तु या पानी असुरक्षित न हो, और किसी भी तरह का वेस्ट तुरंत नष्ट किया जाता है।
हालांकि सार्वजनिक आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन यह स्पष्ट है कि पुतिन अपने विदेशी दौरे में होटल या स्थानीय पानी का बिल्कुल भी उपयोग नहीं करते। वे केवल अपने साथ लाया हुआ रूस का पानी पीते हैं और खाना बनाने में भी इसी पानी का इस्तेमाल किया जाता है। नहाने के लिए होटल का पानी इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन केवल तब जब सुरक्षा टीम ने पूरी तरह जांच लिया हो। हाथ धोना, टूथब्रश या मुंह साफ करने के लिए भी उनके अपने पानी का इस्तेमाल किया जाता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति को मिला ‘शांति पुरस्कार’, उत्साहित होकर खुद ही उठाकर गले में डाल लिया
7 Dec, 2025 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन,। आखिरकार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को शांति का पुरस्कार मिल ही गया। फुटबॉल की वैश्विक संस्था (फीफा) अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपने नए फीफा शांति पुरस्कार से सम्मानित किया है। यह पुरस्कार खेल से इतर वैश्विक शांति को ध्यान में रखकर बनाया गया है और ट्रंप इसके पहले विजेता हैं। ट्रंप ने खुद ही इसे अपने गले में डाल लिया। इसके साथ ही ट्रंप को एक सर्टिफिकेट भी दिया गया, जिसमें ट्रंप को दुनिया में शांति और एकता बढ़ाने में योगदान देने वाला बताया गया।
डोनाल्ड ट्रंप का नोबेल शांति पुरस्कार के लिए प्रेम किसी से छिपा नहीं है। ऐसा माना जा रहा है कि फीफा द्वारा इस साल से शुरू किया जा रहा है शांति पुरस्कार ट्रंप को ही मिलेगा। वैसे बी फीफा के वर्तमान अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो को ट्रंप का करीबी माना जाता है। वह कई बार खुले तौर पर इस बात को कह चुके हैं कि गाजा संघर्ष में युद्धविराम करवाने के लिए ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार मिलना ही चाहिए। फीफा के अगले विश्वकप के लिए आयोजित किए जा रहे एक कार्यक्रम में जियानी ने अमेरिकी राष्ट्रपति का स्वागत करते हुए ट्रंप को यह पुरस्कार देने का ऐलान किया। उन्होंने कहा, यह आपके लिए एक सुंदर मेडल है, जिसे आप जहां चाहें, वहां पहन सकते हैं। इसके बाद ट्रंप ने तुरंत ही इसे अपने गले में डाल लिया। इसके साथ ही ट्रंप को एक सर्टिफिकेट भी दिया गया, जिसमें ट्रंप को दुनिया में शांति और एकता बढ़ाने में योगदान देने वाला बताया गया।
इसके अलावा जियानी ने ट्रंप को एक सोने की ट्राफी भी भेंट की। इस पर आगे ट्रंप का नाम लिखा हुआ था। उन्होंने कहा, आप इस शांति पुरस्कार के योग्य हैं, अपनी कोशिशों और उपलब्धियों के लिए।फीफा शांति पुरस्कार मिलने के बाद ट्रंप उत्साहित नजर आए। उन्होंने कहा, यह मेरे जीवन के सबसे बड़े सम्मानों में से एक है। इसके बाद उन्होंने अपने परिवार, खासतौर पर अपनी पत्नी मेलानिया का धन्यवाद दिया और मेजबान देशों कनाडा और मेक्सिको के नेताओं की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह तीनों देशों के लिए बेहतर रहेगा।
नोबेल (1901 से) दुनिया का सबसे प्रतिष्ठित शांति पुरस्कार है, जिसे स्वतंत्र नॉर्वेजियन कमिटी देती है और मदर टेरेसा, मलाला, मंडेला जैसे दिग्गजों को मिल चुका है। वहीं फीफा पीस प्राइज पूरी तरह नया है, जिसके नियम-पद्धति अस्पष्ट हैं और पहला विजेता खुद फीफा अध्यक्ष ने चुना। सोशल मीडिया पर लोग इसे मजाक बना रहे हैं। ज्यादातर यूजर्स इसे ट्रंप को खुश करने के लिए बनाया गया अवॉर्ड और फीफा का सेल्फ-गोल जैसे कमेंट कर रहे हैं।
भावुक होकर बोले ट्रंप– यह मेरे जीवन का सबसे बड़ा सम्मान
राष्ट्रपति ट्रंप को फीफा ने अपना पहला ‘फीफा पीस प्राइज’देकर दुनिया को चौंका दिया। 2025 में शुरू हुए इस नए पुरस्कार के पहले विजेता ट्रंप बने। दोहा में आयोजित समारोह में ट्रंप ने पुरस्कार लेते हुए भावुक स्वर में कहा, यह सचमुच मेरे जीवन का सबसे बड़ा सम्मान है। उन्होंने अपनी पत्नी और पूर्व फर्स्ट लेडी मेलानिया ट्रंप को भी धन्यवाद दिया।
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