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ट्रक से 550 बोरियां यूरिया बरामद, दस्तावेजों की जांच शुरू
21 Feb, 2026 01:37 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
यमुनानगर। जिले में कृषि-ग्रेड यूरिया की अवैध तस्करी के खिलाफ कृषि विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पांसरा के पास से 550 बोरियों से लदा एक ट्रक पकड़ा है। विभाग की टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर यह कार्रवाई की। पकड़ी गई यूरिया खाद किसानों के लिए निर्धारित थी, जिसे कथित रूप से अवैध रूप से ले जाया जा रहा था।
जानकारी के मुताबिक बरामद यूरिया कृभको (कृषक भारती को-ऑपरेटिव लिमिटेड) द्वारा निर्मित है। यह खेप कैथल जिले से लाई जा रही थी। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि खाद को नियमों के विपरीत तरीके से परिवहन किया जा रहा था।
उप निदेशक कृषि आदित्य प्रताप डबास ने बताया कि जिले में यूरिया की कालाबाज़ारी और अवैध भंडारण को लेकर विभाग पूरी तरह सतर्क है। किसानों के हितों के साथ किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मामले की सूचना तुरंत पुलिस को दी गई। इसके बाद थाना सदर में प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। ट्रक और यूरिया की बोरियों को कब्जे में लेकर जांच की जा रही है। परिवहन से जुड़े दस्तावेजों और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। उनका कहना है कि जिले में उर्वरकों की आपूर्ति व्यवस्था को पारदर्शी बनाए रखने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है। विभाग ने किसानों से भी अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की कालाबाज़ारी या संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत प्रशासन को दें।
हादसे में बस कंडक्टर की मौत, छह यात्री घायल
21 Feb, 2026 12:51 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सोनीपत। नेशनल हाईवे-44 पर सोनीपत में राई फ्लाईओवर के पास एक भीषण सड़क हादसा हुआ, जिसमें अमृतसर से दिल्ली जा रही एक वॉल्वो बस ने सड़क किनारे खराब खड़े ट्रक में जोरदार टक्कर मार दी। इस हादसे में बस के कंडक्टर की मौके पर मौत हो गई, जबकि ड्राइवर समेत 6 यात्री घायल हो गए।
बस सोनीपत के राई फ्लाईओवर के नजदीक पहुंची थी। अचानक सड़क किनारे खड़ा एक खराब ट्रक बस की चपेट में आ गया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बस का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। मृतक कंडक्टर की पहचान अमन के रूप में हुई है, जो अमृतसर का निवासी था।
गंभीर रूप से घायल ड्राइवर निकेश भी अमृतसर का रहने वाला है। घायलों में एक ही परिवार के तीन सदस्य शामिल हैं। जिनकी पहचान दीपक मल्होत्रा, दिवाकर मल्होत्रा और सुषमा मल्होत्रा के तौर पर हुई है। यह परिवार अमृतसर में किसी शादी समारोह से लौट रहा था और वॉल्वो बस से दिल्ली जा रहा था।
घायलों को तत्काल मौके पर पहुंची एम्बुलेंस की मदद से सोनीपत सिविल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। वहीं, कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है, और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें हाई सेंटर रेफर किया जा सकता है। पुलिस ने हादसे की जांच शुरू कर दी है।
बोर्ड ऑफ पीस की पहली बैठक में पाकिस्तान की जमकर हुई बेइज्जती, हाशिए पर पीएम शरीफ
21 Feb, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा गाजा के पुनर्निर्माण और शांति बहाली के लिए गठित बोर्ड ऑफ पीस की पहली औपचारिक बैठक ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के नए समीकरण स्पष्ट कर दिए हैं। वाशिंगटन में आयोजित इस हाई-प्रोफाइल बैठक में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की उपस्थिति ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पूरी बैठक के दौरान पाकिस्तान न केवल कूटनीतिक रूप से असहज दिखा, बल्कि सांकेतिक तौर पर भी उसे किनारे कर दिया गया। इस घटनाक्रम ने विशेषज्ञों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या अमेरिका की नई शांति योजना में पाकिस्तान अपनी प्रासंगिकता खोता जा रहा है।
बैठक के बाद जब आधिकारिक ग्रुप फोटो जारी की गई, तो उसने पाकिस्तान की वर्तमान कूटनीतिक स्थिति की एक धुंधली तस्वीर पेश की। सूत्रों के अनुसार, जहां राष्ट्रपति ट्रंप के साथ उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विदेश मंत्री मार्को रुबियो केंद्रीय भूमिका में थे, वहीं सऊदी अरब, कतर और इंडोनेशिया जैसे मुस्लिम जगत के प्रभावशाली देशों के नेताओं को उनके ठीक पीछे प्रमुखता दी गई। इसके विपरीत, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को फ्रेम के अंतिम किनारों पर जगह मिली। कूटनीतिक जानकारों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नेताओं का स्थान और उनकी स्थिति केवल एक संयोग नहीं होती, बल्कि यह उस देश के महत्व का संकेत देती है।
बैठक में मौजूद राजनयिक सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल पूरे समय असहज दिखा। इसका मुख्य कारण गाजा के मुद्दे पर पाकिस्तान का अस्पष्ट रुख माना जा रहा है। ट्रंप की इस योजना के तहत सदस्य देशों से गाजा में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए हजारों सैनिकों की टुकड़ी भेजने की उम्मीद की गई थी। हालांकि पाकिस्तान ने शुरुआती दौर में इसमें रुचि दिखाई थी, लेकिन अब इस्लामाबाद अपनी सेना भेजने के निर्णय पर हिचकिचा रहा है। इसका सीधा परिणाम तब दिखा जब राष्ट्रपति ट्रंप ने सैन्य मदद देने वाले देशों की सूची पढ़ी। उन्होंने इंडोनेशिया, मोरक्को, अल्बानिया, कोसोवो, कजाकिस्तान, मिस्र और जॉर्डन का नाम तो लिया, लेकिन इस सूची से पाकिस्तान का नाम पूरी तरह गायब था। वाशिंगटन के गलियारों में यह चर्चा आम रही कि पाकिस्तान अक्सर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बड़े दावे तो करता है, लेकिन जब वास्तविक प्रतिबद्धता और संसाधनों की बात आती है, तो वह पीछे हट जाता है। गाजा के पुनर्निर्माण के लिए लगभग 70 अरब डॉलर की आवश्यकता है, जिसके लिए अब तक 5 अरब डॉलर का फंड जुट पाया है। इस वित्तीय सहयोग में भी पाकिस्तान का कोई उल्लेखनीय योगदान नजर नहीं आया। हालांकि, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को उस समय थोड़ी व्यक्तिगत राहत मिली जब राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने भाषण में उनकी और पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर की तारीफ की। ट्रंप ने अपने चिर-परिचित मजाकिया लहजे में पुराने विवादों को याद करते हुए कहा, मुझे यह व्यक्ति (शहबाज शरीफ) पसंद है। उन्होंने जनरल मुनीर को एक मजबूत फाइटर करार दिया और उनके हवाले से फिर वही पुराना दावा दोहराया कि ट्रंप ने भारत-पाक युद्ध को रोककर 2.5 करोड़ लोगों की जान बचाई थी।
ट्रंप द्वारा गठित बोर्ड ऑफ पीस को वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र के एक संभावित विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। इसका प्राथमिक लक्ष्य युद्धग्रस्त क्षेत्रों में पुनर्निर्माण और शांति स्थापित करना है। 40 से अधिक देशों और भारत जैसे पर्यवेक्षकों की मौजूदगी में हुई इस बैठक ने पाकिस्तान को एक कड़वी सच्चाई का अहसास कराया है। यदि इस्लामाबाद ने अपनी प्राथमिकताओं और वैश्विक मुद्दों पर ठोस योगदान को लेकर स्पष्टता नहीं दिखाई, तो भविष्य में वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर केवल एक दर्शक बनकर रह जाएगा।
सात महीने से फरार चल रहे आरोपी को किया गया गिरफ्तार
21 Feb, 2026 11:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिसार। हिसार पुलिस ने एक हत्या की गुत्थी को सुलझाकर आरोपी को गिरफ्तार किया है। साथी का मोबाइल फोन चोरी करने के संदेह में एक युवक को मौत के घाट उतारने व उसके हाथ बांधकर लाश को हिसार-सिरसा रेलवे ट्रैक पर फेंकने के सनसनीखेज मामले को हिसार जीआरपी पुलिस ने सात माह बाद ट्रेस आउट किया है।
जीआरपी थाना प्रभारी श्याम सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम ने शुक्रवार को यूपी के चाकूबाज शातिर बदमाश को पकड़ा है। आरोपी ने जीआरपी टीम की पूछताछ में सनसनीखेज खुलासा किया है। आरोपी ने अपना अपराध कबूल करते हुए पूछताछ में बताया कि वह नशे का आदी है।
वह पंजाब से अपने दोस्त के साथ हिसार आया तो रात के समय ट्रेन में उसके साथी का मोबाइल चोरी हो गया था। ट्रेन में उनके पास ही सीट पर सो रहे एक युवक पर संदेह हुआ तो उसे बुरी तरह पीटा। इसके बाद कपड़े से गला घोंटकर मार डाला। बाद में उसके हाथ बांधकर रेलवे ट्रैक पर शव फेंक कर फरार हो गया।
ट्रंप की ईरान को दी 10 दिन वाली चेतावनी, बोले– डील नहीं हुई तो ‘कुछ बड़ा’ होगा
21 Feb, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी तनाव के बीच कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि अगले 10 दिनों में कोई सार्थक समझौता नहीं हुआ तो हालात गंभीर हो सकते हैं। उन्होंने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि डील न होने की स्थिति में बुरी चीजें होंगी और अमेरिका कड़े कदम उठा सकता है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने यह बयान वॉशिंगटन में आयोजित बोर्ड ऑफ पीस कार्यक्रम के दौरान दिया। उन्होंने कहा कि ईरानी प्रतिनिधियों के साथ बातचीत जारी है और अब तक की वार्ता “रचनात्मक” रही है। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इतिहास बताता है कि ईरान के साथ एक ठोस और प्रभावी समझौता करना आसान नहीं है।
अमेरिकी वार्ताकारों का जिक्र
राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिकी वार्ताकार स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों ईरान के साथ अप्रत्यक्ष वार्ता का नेतृत्व कर रहे हैं। ट्रंप के मुताबिक, उनकी बैठकों का माहौल सकारात्मक रहा है, लेकिन अंतिम सहमति तक पहुंचना अभी बाकी है। उन्होंने कहा, शायद हम समझौता कर लें, शायद नहीं। आपको अगले लगभग 10 दिनों में पता चल जाएगा।
बढ़ता तनाव और सैन्य तैयारियां
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ने मध्य-पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है। विमानवाहक पोत, लड़ाकू जेट और अतिरिक्त रक्षा प्रणालियां क्षेत्र में तैनात की गई हैं। वहीं सैटेलाइट तस्वीरों में संकेत मिले हैं कि ईरान अपने परमाणु और मिसाइल ठिकानों को मजबूत कर रहा है। हालांकि तेहरान लगातार इनकार करता रहा है कि वह परमाणु हथियार विकसित कर रहा है।
2015 परमाणु समझौते की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में 2015 के ईरान परमाणु समझौते से अमेरिका को बाहर कर लिया था। यह समझौता औपचारिक रूप से जेसीपीओए के नाम से जाना जाता है। ट्रंप का कहना था कि यह समझौता कमजोर और अपर्याप्त है। बाद में पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन के कार्यकाल में इस समझौते को पुनर्जीवित करने की कोशिश हुई, लेकिन कोई अंतिम परिणाम नहीं निकला। हाल ही में जेनेवा में हुई वार्ता को दोनों पक्षों ने सकारात्मक बताया, हालांकि वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि कई बड़े मतभेद अब भी कायम हैं।
AI से नौकरियों का खतरा? ओपनएआई के CEO सैम ऑल्टमैन ने दिया बड़ा बयान, एलन मस्क पर भी कही ये बात
21 Feb, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। ओपनएआई (OpenAI) के सीईओ सैम ऑल्टमैन (CEO Sam Altman) ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर अहम बातें कही हैं। उन्होंने कहा कि AI अब हाई स्कूल (High School) स्तर की गणित से आगे बढ़कर मानव ज्ञान (Human knowledge) की सीमाओं को छू रहा है। एक साल पहले जहां AI केवल हाई स्कूल मैथ कर पाता था, अब यह नई रिसर्च और फिजिक्स में भी सक्षम हो गया है। ऑल्टमैन ने ओपनएआई को रिसर्च-फर्स्ट कंपनी बताया, जहां प्रोडक्ट भी रिसर्च का नतीजा होता है। ये बातें उन्होंने शुक्रवार को नई दिल्ली में मीडिया कार्यक्रम में कही।
भारत में AI को लेकर उत्साह
ऑल्टमैन ने भारत को लेकर अपनी उत्सुकता जताई। उन्होंने कहा कि भारत में बिल्डर एनर्जी जबरदस्त है और आईआईटी दिल्ली में सुबह का माहौल शानदार था। भारत चैटजीपीटी के टॉप यूजर्स में से एक है, जहां लोग कोडिंग, डेटा एनालिसिस और सीखने के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं। ओपनएआई ने मुंबई और बेंगलुरु में नए ऑफिस खोलने की घोषणा की और टीसीएस, मेकमाईट्रिप, जियोहॉटस्टार जैसी कंपनियों के साथ पार्टनरशिप की। ऑल्टमैन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा की तारीफ करते हुए कहा कि भारत को AI के सभी लेयर्स पर खेलना चाहिए।
सुपरइंटेलिजेंस और बैलेंस ऑफ पावर
एजीआई (Artificial General Intelligence) पर ऑल्टमैन ने कहा कि अब यह काफी करीब है, जबकि ASI (Artificial Super Intelligence) कुछ साल दूर है। उन्होंने जोर दिया कि किसी एक देश या कंपनी के पास सुपरइंटेलिजेंस का कंट्रोल नहीं होना चाहिए, क्योंकि इससे वैश्विक असंतुलन पैदा होगा। AI के डेमोक्रेटाइजेशन की आवश्यकता बताते हुए उन्होंने कहा कि गार्डरेल्स के साथ AI हर किसी के हाथ में होना चाहिए।
AI और नौकरियों पर असर
नौकरियों को लेकर ऑल्टमैन ने इतिहास का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि इंडस्ट्रियल रेवोल्यूशन में भी लोग डरते थे, लेकिन समाज ने एडजस्ट किया। AI से कई प्रोफेशन बदलेंगे या समाप्त होंगे, लेकिन नए अवसर भी उत्पन्न होंगे और लोग नई चीजें करेंगे। उन्होंने AI को मानव एजेंसी बढ़ाने वाला बताया।
एलन मस्क और ऊर्जा पर टिपण्णी
ऑल्टमैन ने एलन मस्क की तारीफ की, साथ ही प्रतिस्पर्धा को स्वीकार किया। ऊर्जा खपत पर उन्होंने कहा कि वाटर यूज के दावे फेक हैं, लेकिन सोलर और न्यूक्लियर एनर्जी की ओर तेजी से बढ़ना होगा। उन्होंने ग्लोबल कोऑपरेशन, डेमोक्रेसी और संतुलित विकास पर जोर दिया।
पुलिस ने ब्रिटेन के किंग चार्ल्स तृतीय के छोटे भाई एंड्रयू को किया गिरफ्तार
21 Feb, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लंदन। ब्रिटेन के किंग चार्ल्स तृतीय के छोटे भाई एंड्रयू माउंटबेटन-विंडसर को सार्वजनिक पद पर रहते हुए कदाचार के मामले में गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि उन्होंने गोपनीय सरकारी दस्तावेज यौन अपराधी जेफ्री एप्स्टीन को भेजे थे। हालांकि, पूरे दिन पूछताछ के बाद उन्हें गुरुवार देर शाम रिहा कर दिया गया। पुलिस ने बयान जारी कर कहा कि 60 साल के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया था, जिसे अब जांच के बाद रिहा कर दिया गया है। इसका मतलब है कि अभी न तो उन पर आरोप तय किए गए हैं और न ही उन्हें पूरी तरह क्लीन चिट मिली है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस ने पुष्टि की कि नॉरफॉक में तलाशी अभियान चलाया गया, जो अब समाप्त हो चुका है। ब्रिटेन के कानून के तहत गिरफ्तारी के लिए पुलिस के पास अपराध का उचित संदेह और आधार होना जरूरी होता है। पुलिस ने आरोपी का नाम सार्वजनिक नहीं किया, जो ब्रिटेन की सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स में स्पष्ट रूप से एंड्रयू का नाम सामने आया है।
बता दें जिस दिन यानी गुरुवार को यह कार्रवाई हुई, उसी दिन एंड्रयू 66 वर्ष के हुए। गिरफ्तारी के बाद पुलिस स्टेशन से बाहर निकलते समय उनकी तस्वीरें सामने आईं, जिनमें वे बेहद थके और सदमे में दिखे। वहीं इस मामले में प्रिंस चार्ल्स तृतीय ने कहा कि उनके भाई एंड्रयू माउंटबेटन विंडसर के मामले की जांच में कानून को अपना काम करना चाहिए। पूर्व शाही प्रेस सचिव ऐल्सा एंडरसन ने कहा कि वह हतप्रभ और टूटे हुए लग रहे थे। यह उनकी शाही छवि के पतन का एक और प्रतीक है।
बता दें एंड्रयू पिछले कई सालों से जेफ्री एप्स्टीन से संबंधों को लेकर विवादों में रहे हैं। हाल ही में अमेरिकी कांग्रेस की ओर से एप्स्टीन से जुड़ी फाइलों के सार्वजनिक होने के बाद मामला और गर्म हो गया। ब्रिटेन के पीएम कीयर स्टार्मर ने कहा कि कानून के सामने सभी समान हैं। कोई भी कानून से ऊपर नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि जिनके पास भी महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हिंसा से जुड़ी जानकारी है, उन्हें आगे आना चाहिए। पिछले साल किंग चार्ल्स ने एंड्रयू से ‘प्रिंस’ और ‘ड्यूक ऑफ यॉर्क’ की उपाधियां वापस ले ली थीं। एंड्रयू ने सभी आरोपों से इनकार किया है। फिलहाल मामले की जांच चल रही है।
पाकिस्तान के परमाणु हथियार इजराइल के लिए एक बड़ा खतरा
21 Feb, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
यरूशलेम। इजराइल के पूर्व पीएम नफ्ताली बेनेट ने पाकिस्तान के परमाणु हथियारों को लेकर दिए बयान ने अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति में हलचल मचा दी है, बल्कि पाकिस्तान की शहबाज सरकार के लिए भी मुसीबत खड़ी कर दी है। बेनेट ने सीधे तौर पर पाकिस्तान के परमाणु हथियारों को इजराइल के लिए एक बड़ा खतरा बताया है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक यरूशलेम में अमेरिकी यहूदी संगठनों के अध्यक्षों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए नफ्ताली बेनेट के बयान ने पाकिस्तान के रक्षा गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। बेनेट ने कहा कि क्षेत्र में एक नया और खतरनाक गठबंधन आकार ले रहा है। बेनेट ने दावा किया कि इजराइल के खिलाफ एक नया मोर्चा तैयार हो रहा है, जिसमें तुर्की, कतर, और मुस्लिम ब्रदरहुड शामिल हैं। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि इस गठबंधन को परमाणु हथियारों से लैस पाकिस्तान का समर्थन मिला हुआ है। तुर्की के नेतृत्व में चल रहा यह गठबंधन इजराइल के प्रति शत्रुता को बढ़ावा दे रहा है। उन्होंने तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन को ‘खतरनाक विरोधी’ बताते हुए चेतावनी दी कि ‘तुर्की अब नया ईरान’ बनता जा रहा है।
इजराइल से आए इस बयान के बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय को बचाव में आना पड़ा। विदेश कार्यालय की प्रवक्ता ने नफ्ताली बेनेट के बयान को पूरी तरह से ‘अटकलबाजी और अनुमान’ पर आधारित बताया है। प्रवक्ता ने कहा कि हम ऐसे देश के अधिकारी के बयान पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे जिसे हम मान्यता तक नहीं देते। यह पूरी तरह से बेतुका बयान है।
इजराइल की इस नाराजगी के पीछे हाल के दिनों में हुए कुछ बड़े रक्षा समझौते हैं। पाकिस्तान ने सऊदी अरब के साथ एक ‘रणनीतिक पारस्परिक रक्षा समझौता’ किया है, जिसके तहत किसी भी देश पर हमला दोनों देशों पर हमला माना जाएगा। सऊदी अरब के पास अथाह पैसा है। तुर्की के पास आधुनिक रक्षा उद्योग और ड्रोन तकनीक है। पाकिस्तान एकमात्र मुस्लिम देश है जिसके पास परमाणु बम और लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ये तीनों ताकतें एक साथ आती हैं, तो यह इजराइल के वर्चस्व के लिए बड़ी चुनौती होगी।
थिंक टैंक के मुताबिक अमेरिका और इजराइल के हितों को प्राथमिकता दिए जाने के कारण अब ये देश अपने दोस्तों और दुश्मनों की पहचान के लिए नए तंत्र विकसित कर रहे हैं। इजराइल में एक बड़ा धड़ा यह मानता है कि पाकिस्तान के परमाणु हथियार ईरान के संभावित हथियारों से कहीं ज्यादा खतरनाक हैं। इजराइली मीडिया और थिंक टैंक लगातार इस बात को उठाते रहे हैं कि पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम को सऊदी अरब ने ही फंडिंग दी थी, इसलिए संकट की स्थिति में ये हथियार सऊदी अरब के लिए ‘परमाणु छत्र’ का काम कर सकते हैं। पाकिस्तान आधिकारिक तौर पर हमेशा यही कहता आया है कि उसके परमाणु हथियार केवल भारत के खिलाफ रक्षा के लिए हैं, लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि जब सऊदी अरब और पाकिस्तान अपने गठबंधन को सार्वजनिक करते हैं, तो वे उन अफवाहों को हवा देते हैं जो पहले केवल बंद कमरों में होती थीं।
जंग को खत्म करने के लिए हिस्टोरिकल बकवास की जरूरत नहीं: जेलेंस्की
21 Feb, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जिनेवा। जिनेवा में रूस और यूक्रेन के बीच बुधवार को बैठक हुई थी। इस बैठक के बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की रूस पर भड़क गए। जेलेंस्की ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा- मुझे इस जंग को खत्म करने और डिप्लोमेसी की तरफ बढ़ने के लिए हिस्टोरिकल बकवास की जरूरत नहीं है, क्योंकि यह बस देर करने का तरीका है। मैंने पुतिन से कम हिस्ट्री की किताबें नहीं पढ़ी हैं और मैंने बहुत कुछ सीखा है। मैं उनके देश के बारे में उनसे ज्यादा जानता हूं जितना वे यूक्रेन के बारे में जानते हैं, सिर्फ इसलिए क्योंकि मैं रूस गया हूं, कई शहरों में, और मैं वहां बहुत से लोगों को जानता था। वे इतनी बार यूक्रेन कभी नहीं गए होंगे। वे सिर्फ बड़े शहरों में गए थे। मैं छोटे शहरों में भी गया, उत्तरी हिस्से से लेकर दक्षिणी हिस्से तक हर जगह।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जेलेंस्की ने कहा कि मैं पुतिन की सोच जानता हूं, इसीलिए मैं इन सब चीजों पर समय बर्बाद नहीं करना चाहता। यह उनके बारे में है1 उन्होंने ऐसा सिस्टम बनाने का फैसला किया है। रूसियों ने खुद को बदलने का फैसला किया है। जेलेंस्की ने कहा कि हमारे खिलाफ एक बड़ी जंग छिड़ी हुई है। यह हमारी जिंदगी है। मैं उनसे बस यही बात करना चाहता हूं कि मुझे लगता है कि हमें इसे सबसे कामयाब तरीके से हल करने की जरूरत है। मेरा मतलब है कि इस जंग को जल्द खत्म करना है, इसलिए मैं सिर्फ ऐसी चीजों के बारे में ही बात करना चाहता हूं।
जेलेंस्की ने कहा कि मुझे पता है कि अमेरिकी और शायद कुछ यूरोपीय देश रूस के साथ नाटो और रूस के बीच एक नए डॉक्यूमेंट पर चर्चा कर रहे हैं। जब उनके पास ऐसा डॉक्यूमेंट होगा, तो वे हर चीज पर चर्चा कर सकते हैं, लेकिन मेरे लिए यह जरूरी है कि वे नाटो में हमारी संभावित जगह पर हमारे साथ चर्चा करें। सिर्फ रूसियों के साथ नहीं, हमारे साथ, क्योंकि यह हमारे बारे में है, लेकिन वे हमारे बिना भी ऐसा कर सकते हैं। हो सकता है कि हमें कुछ पता न हो। किसी भी हाल में अगर कोई हैरान होता है तो हम उस पर प्रतिक्रिया देंगे।
अमेरिकी सांसद का दावा कहा- भारत पर ज्यादा टैरिफ लगाने का बहाना खोज रहे हैं ट्रंप
20 Feb, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक संबंधों में टैरिफ (आयात शुल्क) को लेकर खींचतान कम होने का नाम नहीं ले रही है। अमेरिकी सांसद ब्रैड शर्मन ने एक चौंकाने वाला दावा करते हुए कहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अभी भी भारत के खिलाफ भारी टैरिफ लगाने के बहाने तलाश रहे हैं। शर्मन के अनुसार, भारत को रूसी तेल की खरीद के नाम पर अलग से निशाना बनाया जा रहा है, जबकि इसी मुद्दे पर अन्य देशों के प्रति नरम रुख अपनाया जा रहा है।
सांसद ब्रैड शर्मन ने ट्रंप सरकार की नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि राष्ट्रपति दावा कर रहे हैं कि रूसी तेल के आयात के कारण भारत पर सख्ती जरूरी है। हालांकि, आंकड़ों के साथ इस तर्क को काटते हुए उन्होंने बताया कि हंगरी जैसा देश अपना 90 प्रतिशत तेल रूस से लेता है और उस पर कोई टैरिफ नहीं है। वहीं, रूस के सबसे बड़े खरीदार चीन पर भी रूसी तेल के कारण कोई अतिरिक्त प्रतिबंध नहीं लगाए गए हैं। शर्मन ने जोर देकर कहा कि भारत अपनी जरूरतों का केवल 21 प्रतिशत कच्चा तेल ही रूस से लेता है, फिर भी एक रणनीतिक सहयोगी होने के बावजूद उसे निशाना बनाना अनुचित है। उन्होंने मांग की है कि प्रशासन को तत्काल इस भेदभावपूर्ण नीति में बदलाव करना चाहिए।
हाल के महीनों में इस व्यापार युद्ध का असर भारत के निर्यात आंकड़ों पर साफ दिखाई दिया है। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी में अमेरिका को भारत का वस्तु निर्यात लगभग 21.77 प्रतिशत गिरकर 6.6 अरब डॉलर रह गया। यह गिरावट पिछले साल के सितंबर, अक्टूबर और दिसंबर महीनों में भी दर्ज की गई थी। हालांकि, इसी अवधि में अमेरिका से भारत का आयात 23.71 प्रतिशत बढ़कर 4.5 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। उल्लेखनीय है कि अमेरिका ने अगस्त में भारतीय वस्तुओं पर 50 प्रतिशत का भारी शुल्क लगाया था, जिसे हाल ही में एक अंतरिम समझौते के बाद घटाकर 18 प्रतिशत किया गया है। दिलचस्प बात यह है कि टैरिफ की इस मार से खुद अमेरिकी जनता भी त्रस्त है। फेडरल रिजर्व बैंक ऑफ न्यूयॉर्क के अर्थशास्त्रियों के एक नए विश्लेषण से पता चला है कि इन आयात शुल्कों का करीब 90 प्रतिशत बोझ विदेशी कंपनियों के बजाय खुद अमेरिकी उपभोक्ताओं और कारोबारियों ने उठाया है। एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, इन शुल्कों के कारण 2025 में हर अमेरिकी परिवार पर औसतन 1000 डॉलर का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ा, जो 2026 में बढ़कर 1300 डॉलर होने का अनुमान है। ऐसे में यह नीति न केवल भारत-अमेरिका व्यापारिक रिश्तों को प्रभावित कर रही है, बल्कि घरेलू स्तर पर भी महंगाई का कारण बन रही है।
अमेरिकी सेना इस वीकेंड तक ईरान पर कर सकती है हमला! ट्रंप के इशारे का इंतजार
20 Feb, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक बड़ा सैन्य कदम उठाया जा सकता है। मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि अमेरिकी सेना इस वीकेंड तक ईरान पर हमला करने के लिए तैयार है, हालांकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अभी अंतिम फैसला नहीं लिया है। सूत्रों ने बताया कि व्हाइट हाउस को जानकारी दे दी गई है कि अगर आदेश मिलता है तो अमेरिकी सेना कुछ ही घंटों में कार्रवाई कर सकती है। पिछले कुछ दिनों में मिडिल ईस्ट में अमेरिकी वायु और नौसैनिक ताकत में भारी बढ़ोतरी की गई है। दुनिया का सबसे आधुनिक विमानवाहक पोत गेराल्ड आर फोर्ड क्षेत्र में पहुंच सकते है।
ब्रिटेन में तैनात अमेरिकी फाइटर जेट और ईंधन भरने वाले टैंकर विमानों को मिडिल ईस्ट में भेजा जा रहा है। सूत्र ने बताया कि राष्ट्रपति इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। वह सैन्य कार्रवाई के पक्ष और विपक्ष दोनों तर्क सुन रहे हैं। जिनेवा में ईरान और अमेरिका के प्रतिनिधियों के बीच करीब साढ़े तीन घंटे तक अप्रत्यक्ष बातचीत हुई। ईरान ने कहा कि कुछ ‘मार्गदर्शक सिद्धांतों’ पर सहमति बनी है, लेकिन अमेरिकी पक्ष का कहना है कि अभी कई मुद्दों पर साफ बातचीत होनी बाकी है।
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने कहा कि कूटनीति ट्रंप की पहली पसंद है, लेकिन सैन्य विकल्प भी मेज पर मौजूद है। उन्होंने किसी समयसीमा का ऐलान करने से इनकार किया। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो 28 फरवरी को इजराइल जाएंगे और पीएम बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात करेंगे। इजराइल लगातार ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए है। उधर सैटेलाइट तस्वीरों से संकेत मिले हैं कि ईरान अपने परमाणु ठिकानों को और मजबूत कर रहा है। कई अहम स्थलों को कंक्रीट और मिट्टी की मोटी परत से ढका जा रहा है, ताकि संभावित हवाई हमलों से बचाव हो सके। फिलहाल ट्रंप ने सार्वजनिक तौर पर साफ टार्गेट नहीं बताया है कि हमला होने की स्थिति में उसका अंतिम उद्देश्य क्या होगा। उन्होंने सिर्फ इतना कहा है कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिया जाएगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले कुछ दिन बेहद अहम होंगे।
पाकिस्तान में शेरशाह सूरी की प्रतिमा हटाने पर छिड़ी बहस, सरंग खान की प्रतिमा लगाई
20 Feb, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लाहौर,। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के झेलम में शेरशाह सूरी की प्रतिमा हटाए जाने की खबर ने बहस छेड़ दी है। कुछ दिन पहले ही स्थानीय प्रशासन ने चौराहे पर लगी प्रतिमा को हटाकर उसकी जगह सुल्तान सरंग खान गखर की मूर्ति लगा दी है। इस तरह सिंध के कुछ इलाकों में भी पुराने शासकों से जुड़ी प्रतिमाओं और प्रतीकों को हटाने की खबरें सामने आई हैं। सवाल उठ रहा है कि जिन ऐतिहासिक शख्सियतों को पाकिस्तान दशकों तक अपना गौरव बताता रहा, उनसे दूरी क्यों बनाई जा रही है? शेरशाह सूरी की प्रतिमा हटाए जाने की घटना ने यह सवाल खड़ा किया है कि क्या पाकिस्तान अपने ऐतिहासिक प्रतीकों को अब नई नजर से देख रहा है? अब उनकी मूर्तियां हटाई जा रहीं है और उनके स्थान पर स्थानीय नायकों को क्यों जगह दी जा रही है?
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक 1947 में भारत से अलग होकर बने पाकिस्तान ने अपनी वैचारिक नींव मुस्लिम पहचान पर रखी थी। देश के संस्थापक मुहम्मद अली जिन्ना ने एक अलग राष्ट्र की परिकल्पना की थी। इसके बाद पाकिस्तान के इतिहास लेखन में मध्यकालीन इस्लामी शासकों को प्रमुखता दी गई। शेरशाह सूरी, महमूद गजनी और मुहम्मद गोरी जैसे शासकों को वहां की पाठ्य पुस्तकों में मुस्लिम शक्ति और विजय के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया। शेरशाह सूरी को ग्रैंड ट्रंक रोड का निर्माता और कुशल प्रशासक बताया गया। महमूद गजनवी और मुहम्मद गोरी को भारतीय उपमहाद्वीप में मुस्लिम शासन की नींव रखने वाला बताया और पाकिस्तानी मुस्लिम कौम का हीरो माना।
पाकिस्तान ने अपने सैन्य उपकरणों के नाम भी इन शासकों पर रखे। उदाहरण के लिए, पाकिस्तान की शॉर्ट रेंज बैलिस्टिक मिसाइल का नाम गजनवी और मीडियम रेंज मिसाइल का नाम गौरी रखा। यह दिखाता है कि इन ऐतिहासिक व्यक्तित्वों को राष्ट्रीय गौरव से जोड़ा गया। ऐसे में झेलम में शेरशाह सूरी की प्रतिमा हटाए जाने को केवल स्थानीय प्रशासनिक फैसला मानना आसान नहीं है। बता दें शेरशाह सूरी का जन्म 15वीं सदी के अंत में बिहार के सासाराम में हुआ था। वे अफगान मूल के सूरी कबीले से थे। उन्होंने 16वीं सदी में दिल्ली की गद्दी पर कब्जा किया और मुगल बादशाह हुमायूं को कुछ समय के लिए सत्ता से बेदखल कर दिया था। शेरशाह सूरी (1486-1545) उत्तर भारत में सूरी साम्राज्य के संस्थापक थे। उन्होंने 1540 से 1545 तक केवल पांच सालों के लिए दिल्ली पर शासन किया था। उनका शासनकाल छोटा था, लेकिन प्रशासनिक सुधारों के लिए उन्हें जाना जाता है। उन्होंने सड़क, डाक व्यवस्था और राजस्व प्रणाली में बदलाव किए। यही कारण है कि भारतीय इतिहास में उन्हें एक सक्षम शासक के रूप में भी याद किया जाता है।
इतिहासकार बताते हैं कि महमूद गजनवी और मोहम्मद गौरी दोनों का मूल अफगानिस्तान और मध्य एशिया से जुड़ा था। हाल के वर्षों में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के रिश्तों में तनाव देखने को मिला है। सीमा पर झड़पों और कूटनीतिक मतभेदों ने दोनों देशों के संबंधों को प्रभावित किया है। पाकिस्तान में अब ऐतिहासिक प्रतीकों की पुनर्व्याख्या हो रही है। झेलम में सुल्तान सरंग खान गखर की प्रतिमा स्थापित किया जाना भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है, जहां स्थानीय नायकों को आगे लाने की कोशिश हो रही है।
रिहाई की मांग को लेकर अटक ब्रिज पर इमरान समर्थकों का कब्जा, मुनीर ने भेजी सेना
20 Feb, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। पाकिस्तान के पूर्व पीएम इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर पाकिस्तान में हालात बेकाबू हो गए हैं। इमरान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के हजारों समर्थकों ने खैबर प्रांत में सामरिक और रणनीतिक रूप से अहम अटक ब्रिज पर बुधवार को कब्जा कर लिया। ब्रिज के दोनों ओर इमरान समर्थकों के जमावड़े के कारण वाहन अटग गए।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पीटीआई के तेवरों को देखते हुए पाक आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने इस्लामाबाद, पेशावर व रावलपिंडी कैंट से करीब 5 हजार सैनिकों को रवाना किया। उधर, खैबर के सीएम सुहैल अफरीदी ने रिहाई के लिए युवाओं की इमरान रिलीज फोर्स बनाने का ऐलान किया है। इमरान के समर्थन में तहाफुज पार्टी (टीटीपी) ने भी इस्लामाबाद कूच का ऐलान किया है।
इमरान समर्थकों के अटक ब्रिज पर कब्जे से खैबर सूबा से पाक से कट गया है। इससे पाकिस्तान में अफरा-तफरी मच गई। आनन फानन में मुनीर को फौज भेजने का फैसला लेना पड़ा। बता दें पूर्व पीएम इमरान खान अगस्त, 2023 से इस्लामाबाद की अडियाला जेल में बंद हैं। अभी वे तोशाखाना भ्रष्टाचार मामले में 14 साल की जेल काट रहे हैं। इमरान की पत्नी बुशरा बीबी भी अडियाला जेल में सजा काट रही है। इमरान के खिलाफ करीब एक सौ से ज्यादा मामले दर्ज हैं। इसमें से करीब एक दर्जन मामले लोअर-हाईकोर्ट में चल रहे हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक इमरान को जेल में रखने में आर्मी चीफ मुनीर की बड़ी भूमिका है। पीएम रहते हुए इमरान ने मुनीर को खुफिया एजेंसी आईएसआई चीफ के पद से हटा दिया था। जानकारों के मुताबिक इमरान की जेल पर भले ही मुनीर का ताला हो, लेकिन इसकी चाबी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के पास है। अंतराष्ट्रीय स्तर पर फ्री इमरान मूवमेंट के बाद भी ट्रम्प मुनीर पर रिहाई का दबाव डालने के मूड में नहीं हैं।
दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति यून सुक येओल को उम्रकैद
20 Feb, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सियोल। दक्षिण कोरिया की एक अदालत ने पूर्व राष्ट्रपति यून सुक येओल को 2024 में देश में मार्शल लॉ लागू करने, सत्ता के दुरुपयोग और विद्रोह की साजिश रचने का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अभियोजकों ने उनके लिए मृत्युदंड की मांग की थी, लेकिन अदालत ने उम्रकैद का फैसला दिया। इसी मामले में पूर्व रक्षा मंत्री को 30 साल की सजा सुनाई गई है। दक्षिण कोरिया में 1997 के बाद से किसी को फांसी नहीं दी गई है, इसलिए मृत्युदंड व्यवहारिक रूप से स्थगित माना जाता है।
65 वर्षीय यून पर आरोप था कि उन्होंने दिसंबर 2024 में सेना और पुलिस बलों को सक्रिय कर उदारवादी बहुमत वाली नेशनल असेंबली पर नियंत्रण की कोशिश की। भारी हथियारों से लैस सुरक्षा बलों ने संसद भवन की घेराबंदी की, हालांकि सांसदों ने अवरोध तोड़कर भीतर पहुंचते हुए सर्वसम्मति से मार्शल लॉ हटाने के पक्ष में मतदान किया। करीब छह घंटे बाद आपात आदेश वापस लेना पड़ा। इस घटना से देश में गहरा राजनीतिक संकट पैदा हो गया था।
अदालत ने पाया कि असंवैधानिक आपात आदेश के जरिए लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने की कोशिश की गई। अभियोजन पक्ष का तर्क था कि इस कदम से संसद और चुनाव आयोग के कामकाज को बाधित किया गया।
मार्शल लॉ लागू कराने में शामिल अन्य अधिकारियों पर भी कार्रवाई हुई है। पूर्व रक्षा मंत्री किम योंग ह्यून को 30 वर्ष की सजा सुनाई गई। इसके अलावा, पूर्व प्रधानमंत्री हेन ड्यूक-सू को एक अलग मामले में 23 वर्ष की सजा दी गई है। उन पर कैबिनेट प्रक्रिया में हेरफेर और शपथ के तहत झूठ बोलने का आरोप सिद्ध हुआ। हान डक-सू ने फैसले के खिलाफ अपील दायर की है।
इस फैसले को दक्षिण कोरिया की लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए ऐतिहासिक और निर्णायक माना जा रहा है।
मोहन भागवत के 'घर वापसी' बयान पर भड़के मौलाना अरशद मदनी
19 Feb, 2026 03:49 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत द्वारा 'घर वापसी' और पूर्वजों को लेकर दिए गए हालिया बयान ने देश के सियासी और धार्मिक गलियारों में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया है। मदनी ने भागवत के दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि "सिर्फ उन्हीं ने अपनी मां का दूध पिया है," जो यह साबित करने की कोशिश कर रहे हैं कि सबके पूर्वज हिंदू थे। उनका यह पलटवार सोशल मीडिया से लेकर मुख्यधारा की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है।
विवाद की जड़ मोहन भागवत का वह संबोधन है जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत में रहने वाले सभी लोगों का डीएनए एक है और सभी के पूर्वज हिंदू थे, इसलिए जो लोग दूसरे धर्मों में चले गए हैं, उन्हें अपनी जड़ों की ओर लौटना चाहिए। इस पर आपत्ति जताते हुए मौलाना मदनी ने स्पष्ट किया कि इस्लाम का इतिहास और पहचान अपनी जगह स्वतंत्र है। उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान थोपना ऐतिहासिक और धार्मिक रूप से गलत है। मदनी के अनुसार, हर इंसान को अपने धर्म और पूर्वजों की पहचान का पूरा अधिकार है और किसी एक विचारधारा को सब पर मढ़ा नहीं जा सकता।
मौलाना मदनी ने यह भी तर्क दिया कि इस तरह की बयानबाजी से समाज में दूरियां बढ़ती हैं और भाईचारे को नुकसान पहुँचता है। उन्होंने भागवत के 'डीएनए' वाले तर्क पर कटाक्ष करते हुए कहा कि अगर पूर्वजों की ही बात करनी है, तो मनुष्य की उत्पत्ति और इतिहास के धार्मिक ग्रंथों के अपने-अपने प्रमाण हैं। फिलहाल इस जुबानी जंग ने 'घर वापसी' और 'साझा विरासत' के मुद्दे पर एक बार फिर नई बहस छेड़ दी है, जहाँ एक पक्ष अपनी सांस्कृतिक एकता की बात कर रहा है, तो दूसरा पक्ष अपनी धार्मिक स्वायत्तता और पहचान को बचाने की दलील दे रहा है।
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