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पाकिस्तान की एयर स्ट्राइक में कई मासूमों की गई जान, अफगानिस्तान बोला- बदला लेंगे
23 Feb, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
काबुल। अफगानिस्तान ने सीमावर्ती इलाकों में पाकिस्तान की एयर स्ट्राइक की पुष्टि करते हुए कहा है कि इस हमले में दर्जनों नागरिकों मारे गए हैं। तालिबान के प्रवक्ता जुबिउल्लाह मुजाहित ने कहा है कि बीती रात नांगरहार और पाकटिका प्रांतों में पाकिस्तान ने अचानक हवाई हमला कर दिया। इसमें दर्जनों लोगों की जान चली गई, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तानी सेना ने नांगरहार में एक रिहाइशी इमारत पर हमला किया जिसमें एक परिवार के करीब 23 लोग रहते थे। मलबे में परिवार दब गया है। अब तक इसमें से केवल चार लोगों को ही निकाला जा सका है। तालिबान ने बताया है कि पाकिस्तान ने बेरमाल और आरगुन जिलों में हवाई हमले किए हैं। इस्लामाबाद की तरफ से कहा गया था कि पाकिस्तान में हुए आतंकी हमले का बदला लेने के लिए सीमावर्ती इलाकों में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक जबीउल्लाह मुजाबित ने कहा कि पाकिस्तान ने नापाक हरकत करके मासूमों की जान ली है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी सेना ने घुसपैठ की है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के जनरल इसी तरह की हरकतें करके अपनी छवि सुधारने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के हवाई क्षेत्र में दखल दिया है। ऐसे में अफगानिस्तान के पास भी जवाब देने का अधिकार है। सही समय आने पर हमला किया जाएगा। पाकिस्तान का कहना है कि खैबर-पख्तूनख्वा के बन्नू इलाके में शनिवार को एक आत्मघाती हमले में सेना के एक लेफ्टिनेंट कर्नल और एक सैनिक की मौत हो गई थी और उसी का बदला लेने के लिए यह एयर स्ट्राइक की गई है। इसके बाद सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि पाकिस्तान के पास इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि इस्लामाबाद की शिया मस्जिद पर हमला और शनिवार को बन्नू में हुई घटना समेत आतंकवाद की ये घटनाएं कथित तौर पर ख्वारिज ने अफगानिस्तान स्थित अपने आकाओं और संचालकों के इशारे पर की थीं।
मंत्रालय ने कहा कि इन हमलों की जिम्मेदारी फितना अल ख्वारिज (एफएके) से संबंधित अफगानिस्तान स्थित पाकिस्तानी तालिबान और उनके सहयोगियों तथा इस्लामिक स्टेट ऑफ खुरसान प्रांत ने ली है। उसने कहा कि पाकिस्तान को यह भी उम्मीद है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय सकारात्मक एवं रचनात्मक भूमिका निभाते हुए तालिबान शासन से दोहा समझौते के तहत अपनी इन प्रतिबद्धताओं का पालन करने का आग्रह करेगा कि वह अन्य देशों के खिलाफ अपनी भूमि का उपयोग होने से रोके और यह कार्य क्षेत्रीय एवं वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान ने हमेशा क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने का प्रयास किया है, लेकिन हमारे नागरिकों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
बर्फीला तूफान और भारी बर्फबारी को लेकर न्यूयॉर्क और बोस्टन अलर्ट पर, 1500 से ज्यादा उड़ानें रद्द
23 Feb, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। संयुक्त राज्य अमेरिका के पूर्वी तट पर तीव्र शीतकालीन तूफान की चेतावनी से जनजीवन प्रभावित हो गया है। अमेरिकी मौसम विभाग के अनुसार सेंट्रल अटलांटिक और उत्तर-पूर्वी राज्यों में भारी बर्फबारी, तेज हवाओं और तटीय बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। हालात को देखते हुए न्यूयॉर्क और बोस्टन सहित कई बड़े शहरों में अलर्ट जारी किया गया है। खराब मौसम के चलते 1500 से अधिक उड़ानें रद्द कर दी गई हैं।
अमेरिका की राष्ट्रीय मौसम सेवा के मौसम पूर्वानुमान केंद्र के मुताबिक दक्षिण-पूर्वी क्षेत्र में बना निम्न दबाव तंत्र (लो प्रेशर सिस्टम) दक्षिणी मध्य अटलांटिक तट की ओर बढ़ रहा है और तेजी से गहराते हुए उत्तर-पूर्व की ओर आगे बढ़ेगा। इस प्रणाली के कारण सोमवार तक व्यापक और गंभीर प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।
एक से दो फीट तक बर्फबारी की आशंका
पूर्वानुमान के अनुसार कुछ इलाकों में बर्फबारी की दर एक इंच प्रति घंटे से अधिक हो सकती है। कुल बर्फबारी एक से दो फीट तक पहुंचने की संभावना है, जिससे सड़क और हवाई यात्रा लगभग ठप हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारी और गीली बर्फ के साथ तेज हवाओं का संयोजन बिजली आपूर्ति बाधित कर सकता है और कई क्षेत्रों में पावर कट की स्थिति बन सकती है।
112 किमी प्रति घंटा तक चलेंगी हवाएं
डेलावेयर से दक्षिण-पूर्वी न्यू इंग्लैंड तक तटीय क्षेत्रों में 64 से 113 किलोमीटर प्रति घंटे (लगभग 112 किमी प्रति घंटा) की रफ्तार से हवा के झोंके चलने की आशंका है। तेज हवाओं के कारण दृश्यता में भारी कमी आएगी और यात्रा बेहद खतरनाक हो सकती है। तटीय न्यू जर्सी से लेकर केप कॉड तक मध्यम स्तर की बाढ़ और सड़कों के जलमग्न होने की चेतावनी जारी की गई है।
मौसम विभाग ने कहा है कि रविवार रात के दौरान हालात और बिगड़ सकते हैं, जब बर्फबारी की तीव्रता चरम पर होगी।
अधिकारियों ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने, आपातकालीन किट तैयार रखने और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की है। विशेषज्ञों के अनुसार फरवरी में अटलांटिक तट पर ऐसे शक्तिशाली शीतकालीन तूफान सामान्य हैं, जब ठंडी महाद्वीपीय हवाएं अपेक्षाकृत गर्म अटलांटिक महासागर के संपर्क में आती हैं और तेजी से तीव्र मौसम प्रणाली का निर्माण करती हैं।
अगर इजराइल चाहे तो वह पूरे मिडिल ईस्ट पर कर सकता है कब्जा
23 Feb, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दोहा। अमेरिकी राजदूत के एक बयान पर मिडिल ईस्ट में नया विवाद खड़ा हो गया है। इजराइल में अमेरिका के राजदूत माइक हकाबी ने मिडिल ईस्ट के देशों को लेकर कहा कि अगर इजराइल चाहे तो वह सब कब्जा कर सकता है। इस टिप्पणी के बाद 14 अरब और इस्लामिक देशों ने संयुक्त बयान जारी कर इसकी कड़ी निंदा की है। यह बयान एक इंटरव्यू के दौरान आया। जिसमें राजदूत से पूछा कि क्या आधुनिक इजराइल का दावा उस भूभाग पर हो सकता है, जो इराक की यूफ्रेटीस नदी से लेकर मिस्र की नील नदी तक फैला है। इस पर हकाबी ने जवाब दिया, अगर वे सब ले लें तो भी ठीक होगा यानी अगर इजराइल इलाके पर भी कब्जा कर ले तो वो सही होगा।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक शनिवार रात दोहा से जारी संयुक्त बयान में कतर, मिस्र, जॉर्डन, यूएई, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, तुर्किये, सऊदी अरब, कुवैत, ओमान, बहरीन, लेबनान, सीरिया और फिलिस्तीन के विदेश मंत्रालयों ने इन टिप्पणियों को खतरनाक और भड़काऊ बताया। साथ ही गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल, अरब लीग और ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन के सचिवालयों ने भी इस पर आपत्ति जताई। संयुक्त बयान में कहा गया है कि इस तरह की बातें यह संकेत देती हैं कि इजराइल को अरब देशों की जमीन पर कब्जे का अधिकार मिल सकता है, जिसमें कब्जे वाला वेस्ट बैंक भी शामिल है। हस्ताक्षर करने वाले देशों ने साफ कहा कि कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्रों या किसी अन्य अरब भूमि पर इजराइल की कोई संप्रभुता नहीं है।
रिपोर्ट के मुताबिक बयान में यह भी कहा गया कि ऐसी टिप्पणियां अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों का स्पष्ट उल्लंघन हैं और क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता के लिए गंभीर खतरा पैदा करती हैं। इंटरव्यू में जिस क्षेत्र का जिक्र किया गया, उसमें आज का लेबनान, सीरिया, जॉर्डन और सऊदी अरब के हिस्से शामिल हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक जब विवाद बढ़ा तो अमेरिकी राजदूत हकाबी ने अपने बयान को कुछ हद तक अतिशयोक्ति बताया और कहा कि इजराइल अपनी मौजूदा सीमाओं का विस्तार नहीं कर रहा, बल्कि उसे अपनी वर्तमान जमीन के अंदर सुरक्षा का अधिकार है। हालांकि, उनके बयान की चौतरफा आलोचना हुई और सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इस बयान को इजराइल के ग्रेटर इजराइल प्लान से भी जोड़ा। इसके बावजूद अरब और इस्लामिक देशों ने ऐसे उकसाने वाले बयानों को तुरंत रोकने की मांग की और चेतावनी दी कि दूसरों की जमीन पर नियंत्रण को वैध ठहराने वाली बातें शांति नहीं, बल्कि तनाव और हिंसा को बढ़ावा देती हैं।
यात्री बस के नदी में गिरने से 18 लोगों की मौत, कई घायल; विदेशी पर्यटक भी थे सवार
23 Feb, 2026 09:43 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
काठमांडू. नेपाल (Nepal) के धादिंग जिले में सोमवार तड़के एक भीषण हादसा (terrible accident) हुआ। पोखरा से काठमांडू (Kathmandu) जा रही एक यात्री बस (bus) त्रिशूली नदी (Trishuli River) में जा गिरी। इस हादसे में कम से कम 18 लोगों की मौत हो गई। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना भारतीय समयनुसार रात करीब एक बजे चिनाधारा क्षेत्र के पास हुई। बस में करीब 40 से 45 से अधिक यात्री सवार थे। इनमें कुछ विदेशी पर्यटक भी सवार थे।
बताया जा रहा है कि मृतकों की संख्या 18 है। इनमें छह महिलाएं और 11 पुरुष शामिल हैं। हादसे में 25 से 27 लोग घायल हुए हैं, जिन्हें अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। घायलों में आठ महिलाएं, 18 पुरुष और एक नाबालिग लड़की शामिल है।
कैसे हुआ हादसा?
बस पृथ्वी राजमार्ग पर चल रही थी। बताया जा रहा है कि बेनीघाट रोरांग ग्रामीण नगरपालिका-5 के भैसेपाटी इलाके के पास बस अचानक अनियंत्रित हो गई। वाहन सड़क से फिसलकर करीब 300 मीटर नीचे ढलान से होते हुए नदी किनारे जा गिरा। बस बुरी तरह क्षतिग्रस्त हालत में मिली।
पुलिस ने कहा कि हादसे के कारणों की जांच की जा रही है। प्रारंभिक आशंका है कि चालक ने नियंत्रण खो दिया या सड़क की स्थिति खराब थी। बस में क्षमता से अधिक यात्री होने की भी जांच की जा रही है। प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को सूचना दे दी है।
रात में राहत कार्य की चुनौती
हादसा रात के समय हुआ, जिससे बचाव अभियान में दिक्कत आई। नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस बल, नेपाल पुलिस और स्थानीय लोग मिलकर राहत कार्य में जुटे। हाईवे रेस्क्यू मैनेजमेंट समिति के अध्यक्ष राजकुमार ठाकुरी ने बताया कि घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया। अंधेरा और नदी का बहाव बचाव कार्य के लिए बड़ी चुनौती बना रहा।
टैरिफ को रद्द करने के फैसले से बौखलाए ट्रंप, दुनिया पर फोड़ा टैरिफ बम
23 Feb, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन,। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट से मिली हार के बाद एक बार फिर से टैरिफ बम फोड़ दिया है। यूएस सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप द्वारा दुनिया के तमाम देशों पर लगाए गए रेसिप्रोकल टैरिफ को गैरकानूनी बताकर इसे रद्द करने का फैसला सुनाया था, तो इसके तुरंत बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने सभी देशों पर 10 फीसदी का ग्लोबल टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया। इसके महज 24 घंटे के अंदर ही उन्होंने फिर से टैरिफ बम फोड़ा और इसे बढ़ाकर 15फीसदी कर दिया है। अमेरिका के इस कदम को लेकर सुप्रीम कोर्ट में ट्रंप को झटका देने वाले भारतीय-अमेरिकी वकील नील कत्याल ने सवाल उठाए हैं।
बता दें ट्रंप ने ग्लोबल टैरिफ को बढ़ा दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट के जरिए ऐलान किया कि यूएस तत्काल प्रभाव से दुनिया भर के देशों पर लागू 10 फीसदी टैरिफ को बढ़ाते हुए 15फीसदी करने जा रहा है। इस टैरिफ हाइक के साथ ही उन्होंने फिर से पुराना दावा दोहराते हुए कहा है कि तमाम देश दशकों से अमेरिका का फायदा उठाते आ रहे हैं और टैरिफ से जुड़ा ये फैसला उसी का जवाब है। उन्होंने ये भी कहा कि टैरिफ हाइक पूरी तरह से कानून के दायरे में है और इसकी जांच-परख भी की जा चुकी है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में नील कत्याल ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप के लिए धारा 122 पर भरोसा करते हुए इसका सहारा लेना मुश्किल नजर आता है, क्योंकि इसी मामले में अमेरिकी न्याय विभाग ने सुप्रीम कोर्ट को इसके विपरीत बताया था। उन्होंने कहा कि धारा 122 का यहां कोई स्पष्ट अनुप्रयोग नहीं है, क्योंकि ट्रंप ने जिस आपातकालीन स्थिति का हवाला दिया था, वह व्यापार घाटे से जुड़ी है, कत्याल ने आगे कहा कि अगर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बड़े स्तर पर दुनिया के देशों के ऊपर टैरिफ लगाना ही चाहते हैं, तो उन्हें इसके लिए अमेरिकी तरीका अपनाना चाहिए और कांग्रेस के पास जाना चाहिए।
बता दें कत्याल वह भारतीय-अमेरिकी वकील हैं, जिनकी अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में दलीलों ने ट्रंप टैरिफ को चारों खाने चित कर दिया था। उन्होंने कोर्ट में कहा था कि अमेरिकी संसद कांग्रेस के पास व्यापार को विनियमित करने की शक्ति है, लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप इस शक्ति को मनमाने ढंग से इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं।
बांग्लादेश ने भारतीयों के लिए टूरिस्ट वीजा सेवा बहाल की, आज से सभी डिप्लोमैटिक मिशन में फिर शुरू होगी प्रक्रिया
23 Feb, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका। बांग्लादेश ने भारत के साथ रिश्तों में सुधार की दिशा में अहम कदम उठाते हुए भारतीय नागरिकों के लिए टूरिस्ट वीजा सेवा फिर से शुरू करने की घोषणा की है। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने रविवार को बताया कि भारत में स्थित बांग्लादेशी डिप्लोमैटिक मिशन सोमवार से पर्यटक वीजा जारी करना फिर से शुरू कर देंगे।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सुरक्षा कारणों के चलते बांग्लादेश सरकार ने पहले टूरिस्ट वीजा सेवाएं अस्थायी रूप से रोक दी थीं। हालांकि हालिया चुनावों के बाद हालात सामान्य होने पर अब इस सेवा को पूर्ण रूप से बहाल किया जा रहा है। अधिकारी ने स्पष्ट किया कि टूरिस्ट वीजा औपचारिक रूप से पूरी तरह बंद नहीं किए गए थे, बल्कि केवल सीमित और अर्जेंट मामलों में जारी किए जा रहे थे।
इन शहरों में फिर शुरू होगी सेवा
भारत में स्थित बांग्लादेश हाई कमीशन नई दिल्ली के अलावा गुवाहाटी, अगरतला, मुंबई और कोलकाता में मौजूद मिशनों में भी सोमवार से टूरिस्ट वीजा की प्रक्रिया सामान्य रूप से शुरू हो जाएगी। अधिकारी के अनुसार, अन्य श्रेणियों के वीजा पहले से जारी किए जा रहे थे, लेकिन पर्यटक वीजा बड़े पैमाने पर अब फिर से बहाल किए जा रहे हैं। विदेश मंत्रालय के अधिकारी ने कहा कि स्थिति की समीक्षा के बाद यह निर्णय लिया गया है और अब सभी प्रकार की वीजा सेवाएं नियमित रूप से उपलब्ध रहेंगी।
बताया गया कि 12 फरवरी को बांग्लादेश में हुए चुनावों के मद्देनजर 15 जनवरी से 15 फरवरी तक टूरिस्ट वीजा सेवाएं निलंबित करने का निर्देश दिया गया था। उस अवधि में अर्जेंट मामलों में ही वीजा जारी किए जा रहे थे। सुरक्षा कारणों से भूटान और नेपाल के लिए भी सेवाएं अस्थायी रूप से रोकी गई थीं।
रिश्तों में सुधार का संकेत
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत और बांग्लादेश के बीच सामान्य कूटनीतिक और जन-से-जन संपर्क को मजबूत करने की दिशा में सकारात्मक संकेत है। पर्यटन, व्यापार और पारिवारिक यात्राओं पर इसका सीधा असर पड़ेगा।
बैकाल झील की बर्फ में फंसी चीनी पर्यटकों की बस, 8 की मौत
22 Feb, 2026 09:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग। चीनी पर्यटकों को ले जा रही एक बस रूस की बैकाल झील की बर्फ में धंस गई, जिससे आठ लोगों की मौत हो गई। मीडिया रिपोर्ट में अधिकारियों ने यह जानकारी दी। इरकुत्स्क क्षेत्र के गवर्नर ने टेलीग्राम पर एक पोस्ट में लिखा कि शुक्रवार को हुई इस घटना में जमी हुई झील को पार कर रही बस से एक चीनी पर्यटक बचने में कामयाब रहा। उन्होंने बताया कि मृतकों में सात चीनी पर्यटक और बस का चालक शामिल हैं। रूस के आपातकालीन मंत्रालय ने बताया कि बचाव दल ने अभियान शुरू करने से पहले पानी के अंदर के कैमरों का इस्तेमाल किया।
नासा ने टाल दिया अपना मून मिशन, अब मार्च में नहीं होगी लॉन्चिंग, जानिए क्या है वजह ?
22 Feb, 2026 08:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (US space agency NASA) ने अपने मून मिशन आर्टेमिस-2 (Moon Mission Artemis-2) की लॉन्चिंग को फिलहाल टाल दिया है। मिशन मार्च में शुरू होने वाला था, लेकिन अब रॉकेट और यान दोनों को लॉन्च पैड से हटा लिया गया है। नासा ने बताया कि इस फैसले का कारण रॉकेट में आई तकनीकी खराबी (Technical Fault) है। विशेष रूप से, स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) में हीलियम लीक की समस्या आई थी, जिसके कारण मिशन को स्थगित किया गया है। नासा के चीफ जेरेड आइजैकमैन ने शनिवार को बताया कि उनकी टीम के लिए यह निर्णय निराशाजनक था, क्योंकि मिशन के लिए काफी मेहनत की गई थी। उन्होंने कहा, “हम महत्वपूर्ण मिशनों को बहुत सावधानी से संचालित करते हैं। 1960 के दशक में जब नासा ने इतिहास रचा था, तब भी कई बाधाएं आई थीं, और मिशन में देरी हुई थी।”
हीलियम का रॉकेट सिस्टम में महत्व
रॉकेट सिस्टम में हीलियम का अहम रोल होता है। यह प्रोपेलेंट टैंक में प्रेशर बनाए रखता है और इंजन को संचालित करने में मदद करता है। अब एलएलएस रॉकेट और ओरियन अंतरिक्ष यान को मरम्मत के लिए व्हीकल असेंबली बिल्डिंग में भेजा जाएगा।
नासा का मिशन प्लान
नासा का उद्देश्य आर्टेमिस-2 मिशन के दौरान अंतरिक्ष-यात्रियों को शून्य-गुरुत्वाकर्षण में एक छोटे से केबिन में काम करने का अनुभव कराना था। मिशन के दौरान, अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन की तुलना में पृथ्वी की निचली ऑर्बिट में रेडिएशन का स्तर अधिक होगा, लेकिन यह सुरक्षित रहेगा। पृथ्वी पर लौटने के बाद, अंतरिक्ष-यात्री एक ऊबड़-खाबड़ वायुमंडलीय वापसी का अनुभव करेंगे और अमेरिका के पश्चिमी तट के पास प्रशांत महासागर में लैंड करेंगे।
यह मिशन चांद पर लैंडिंग के लिए नहीं था। नासा का कहना है कि आर्टेमिस-2 का मुख्य उद्देश्य आर्टेमिस-3 मिशन के लिए अंतरिक्ष-यात्रियों की चांद पर लैंडिंग की तैयारी करना था। आर्टेमिस-3 मिशन में, नासा का प्लान है कि अंतरिक्ष-यात्री चांद के दक्षिणी ध्रुव पर जाएं, और इसके बाद चांद पर मानवों की निरंतर उपस्थिति स्थापित करने की योजना है।
आर्टेमिस-4 और आर्टेमिस-5 मिशन के तहत चांद के चारों ओर एक स्पेस स्टेशन “गेटवे” का निर्माण किया जाएगा। इसके बाद, चांद पर और लैंडिंग होगी, और गेटवे में अतिरिक्त हिस्से जोड़े जाएंगे। इस कार्यक्रम का उद्देश्य चांद पर स्थायी मानव उपस्थिति बनाना है, जैसा कि नासा ने 1960 और 1970 के दशक के अपोलो कार्यक्रम के दौरान किया था।
अफगानिस्तान पर पाकिस्तान का हवाई हमला: महिलाओं और बच्चों समेत 20 लोगों की जान गई
22 Feb, 2026 02:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
काबुल: पाकिस्तानी एयर फोर्स ने अफगानिस्तान के पक्तिका प्रांत के बरमल जिले में एक धार्मिक मदरसे को निशाना बनाकर हमला किया. टोलो न्यूज ने सूत्रों के हवाले से बताया. टोलो न्यूज के अनुसार पाकिस्तानी जेट विमानों ने नंगरहार प्रांत के खोगयानी जिले में भी कई हवाई हमले किए.
अफगान सरकार के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने रविवार को एक्स पर पोस्ट किया कि पाकिस्तान ने नंगरहार और पक्तिका प्रांतों में हमारे आम नागरिकों पर बमबारी की. इसमें महिलाओं और बच्चों समेत कम से कम 20 लोग हताहत हुए.
टोलो न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान ने शनिवार से पक्तिका के बरमल और अरगुन के साथ-साथ नंगरहार के खोगयानी, बहसोद और घनी खेल जिलों में कई हमले किए. पाकिस्तानी मीडिया सोर्स ने भी इस्लामाबाद के हवाई हमले की पुष्टि की. उन्होंने बताया कि ये हमले पाकिस्तान-अफगानिस्तान बॉर्डर पर कथित आतंकवादी शिविरों पर फोकस कर किए गए.
जियो न्यूज ने पाकिस्तान के सूचना मंत्रालय का हवाला देते हुए बताया कि हमलों में फितना अल ख्वारिज (FAK), उसके सहयोगी संगठनों और दाएश खोरासान प्रांत (DKP) के सात कैंप और ठिकानों को निशाना बनाया गया. साथ ही दावा किया गया कि यह कार्रवाई रमजान के दौरान इस्लामाबाद, बाजौर और बन्नू में हुए हाल के आत्मघाती हमलों के जवाब में सही और सटीक तरीके से की गई.
जियो न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, मिनिस्ट्री ने आरोप लगाया कि सुसाइड बॉम्बिंग अफगानिस्तान के लीडरशिप और हैंडलर्स के कहने पर किए गए थे और इसकी जिम्मेदारी तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और दाएश से जुड़े लोगों ने ली थी.
इस्लामाबाद के इस दावे के बावजूद कि उसने बार-बार अफगान तालिबान से आतंकवादी ग्रुप को अफगान इलाके का इस्तेमाल करने से रोकने की अपील की है, पाकिस्तान खुद लंबे समय से इस इलाके में काम कर रहे अलग-अलग आतंकवादी संगठनों को सुरक्षित पनाहगाह और लॉजिस्टिक सपोर्ट देने के लिए अंतरराष्ट्रीय जांच का सामना कर रहा है.
अपने बयान में पाकिस्तान ने कहा कि उसे उम्मीद है कि अंतरिम अफगान सरकार अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करेगी और पाकिस्तान के खिलाफ अपनी जमीन का इस्तेमाल होने से रोकेगी.
इसने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी कहा कि वे अफगान अधिकारियों पर दोहा समझौते के तहत किए गए वादों को पूरा करने के लिए दबाव डालें. डॉन के मुताबिक, पाकिस्तान के विदेश ऑफिस ने गुरुवार को कहा कि बाजौर में एक जानलेवा हमले के बाद बॉर्डर पार तनाव बढ़ने के बीच पाकिस्तान अपने नागरिकों की जान बचाने के लिए अफगानिस्तान को टारगेट करने का अधिकार रखता है.
डॉन के मुताबिक पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में कहा, 'पाकिस्तान पूरी तरह से मांग करता है कि अफगान क्षेत्र का इस्तेमाल पाकिस्तान के अंदर आतंकवाद के लिए नहीं किया जाना चाहिए. इसलिए जब तक यह मांग पूरी नहीं होती धैर्य रखते हुए सभी विकल्प खुले रहेंगे.
भारतीय मूल के धुरंधर ने निकाली ट्रंप की हेकड़ी, नील कत्याल के तर्कों से पलट गया फैसला
22 Feb, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन।अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक निर्णय सुनाते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए व्यापक व्यापारिक शुल्कों (टैरिफ) को असंवैधानिक करार देकर रद्द कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि राष्ट्रपति ने कांग्रेस की अनिवार्य मंजूरी के बिना इतने बड़े पैमाने पर कर लगाकर अपनी संवैधानिक और कानूनी सीमाओं का उल्लंघन किया है। इस कानूनी लड़ाई के केंद्र में भारतीय मूल के अमेरिकी वकील नील कत्याल रहे, जिन्होंने राष्ट्रपति की शक्तियों को सीधी चुनौती दी। पूर्व कार्यवाहक सॉलिसिटर जनरल नील कत्याल ने अदालत में तर्क दिया कि ट्रंप ने 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट का दुरुपयोग करते हुए लगभग हर व्यापारिक साझेदार देश से आने वाले सामान पर अनुचित और अवैध टैक्स थोप दिया था। फैसले के बाद कत्याल ने इसे संविधान की जीत बताते हुए कहा कि अमेरिका में राष्ट्रपति शक्तिशाली हो सकते हैं, लेकिन संविधान सर्वोपरि है और कर लगाने का अधिकार केवल जनता द्वारा चुनी गई कांग्रेस के पास है।
कत्याल के साथ इस महत्वपूर्ण मामले में एक और भारतीय-अमेरिकी कानूनी विशेषज्ञ प्रतीक शाह भी शामिल थे, जो एकिन गंप में सुप्रीम कोर्ट मामलों के प्रमुख हैं। शाह ने लर्निंग रिसोर्सेज और हैंड टु माइंड जैसी शैक्षणिक खिलौना कंपनियों का प्रतिनिधित्व करते हुए तर्क दिया कि राष्ट्रपति की कार्यकारी शक्तियां असीमित नहीं हो सकतीं। नील कत्याल अमेरिका के कानूनी जगत का एक ऐसा नाम हैं जिन्होंने अब तक सुप्रीम कोर्ट में 50 से अधिक मामलों में पैरवी की है। शिकागो में भारतीय प्रवासी माता-पिता के घर जन्मे कत्याल ने येल लॉ स्कूल से शिक्षा प्राप्त की और प्रसिद्ध विशेषज्ञ अखिल अमर के मार्गदर्शन में संवैधानिक बारीकियां सीखीं। उनकी पहचान एक ऐसे वकील के रूप में रही है जो राष्ट्रपति की विवादास्पद नीतियों, जैसे मुस्लिम देशों पर ट्रैवल बैन और तेजी से डिपोर्टेशन की कोशिशों के खिलाफ अदालत में डटकर खड़े हुए हैं। उनके परिवार का भी अकादमिक और कानूनी जगत में गहरा दखल है; उनकी बहन सोनिया कत्याल कानून की प्रोफेसर हैं, जबकि उनके गुरु अखिल अमर और उनके भाई विक्रम अमर कानून के क्षेत्र में प्रतिष्ठित नाम हैं।
अदालत के इस फैसले पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने इस निर्णय को बेतुका करार देते हुए उन न्यायाधीशों की आलोचना की जिन्होंने टैरिफ के खिलाफ मतदान किया। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि वे इस कानूनी बाधा से पीछे हटने वाले नहीं हैं और उन्होंने राजस्व जुटाने के लिए एक नई और आक्रामक रणनीति की घोषणा कर दी है। कोर्ट के फैसले के तुरंत बाद ट्रंप ने सभी देशों से आयात होने वाले सामान पर 10 फीसदी का नया वैश्विक टैरिफ लगाने वाले दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए। उन्होंने घोषणा की कि यह नया टैरिफ तत्काल प्रभाव से लागू होगा, जो उनके अमेरिका फर्स्ट व्यापार एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए अपरिहार्य है। ट्रंप के इस कदम ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय व्यापार बाजार और कानूनी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है, जिससे आने वाले समय में एक नए कानूनी और कूटनीतिक टकराव के संकेत मिल रहे हैं।
कतर और बहरीन के मिलिट्री बेस खाली कर रही अमेरिकी सेना? सैकड़ों सैनिकों को निकाला
22 Feb, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। ईरान और अमेरिका के बीच गहराते तनाव के बीच मध्य पूर्व के सामरिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा रिपोर्टों के अनुसार, खाड़ी क्षेत्र में संभावित सैन्य कार्रवाई की आहट अब जमीन पर भी दिखाई देने लगी है। कतर के अल उदैद एयर बेस और बहरीन में स्थित महत्वपूर्ण अमेरिकी सैन्य ठिकानों से सैकड़ों सैनिकों को बाहर निकाला गया है। बहरीन, जो अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े (फिफ्थ फ्लीट) का मुख्य केंद्र है, वहां से सैनिकों की यह आवाजाही पेंटागन द्वारा एहतियाती कदम बताई जा रही है। हाल ही में सीरिया से भी अमेरिकी सैन्य टुकड़ियों की वापसी की खबरें आई थीं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि अमेरिका ईरान के विरुद्ध किसी भी संभावित टकराव से पहले अपने संसाधनों को सुरक्षित और पुनर्गठित कर रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस स्थिति पर कड़ा रुख अपनाते हुए संकेत दिया है कि वे ईरान पर सीमित सैन्य हमले के विकल्प को पूरी तरह खारिज नहीं कर रहे हैं। एक हालिया बयान में उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि परमाणु कार्यक्रम पर निर्धारित समय सीमा के भीतर समझौता नहीं होता है, तो परिणाम गंभीर हो सकते हैं। कुछ रणनीतिक रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि यदि सैन्य कार्रवाई होती है, तो ईरान के शीर्ष नेतृत्व को सीधे तौर पर लक्षित किया जा सकता है। ट्रंप प्रशासन ने ईरान को अपनी नीतियों में सुधार के लिए 10 से 15 दिन का समय दिया है, जिसे एक अंतिम चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।
दूसरी ओर, ईरान ने इस दबाव के बीच कूटनीति का रास्ता भी खुला रखा है। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने घोषणा की है कि उनका देश अगले दो से तीन दिनों में परमाणु समझौते का एक नया मसौदा (ड्राफ्ट) तैयार कर लेगा। अराघची ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया को दिए साक्षात्कार में संतुलित रुख अपनाते हुए कहा कि ईरान शांति और युद्ध, दोनों ही स्थितियों के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने उम्मीद जताई कि एक सप्ताह के भीतर इस मसौदे पर गंभीर बातचीत शुरू हो सकती है, हालांकि उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि ईरान अपने राष्ट्रीय हितों और संप्रभुता से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेगा। वर्तमान में खाड़ी क्षेत्र एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहाँ एक तरफ भारी सैन्य लामबंदी हो रही है और दूसरी तरफ संकट टालने के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी हैं।
पाकिस्तान में 3.9 की तीव्रता का भूकंप, जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं
22 Feb, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। पाकिस्तान में शनिवार की सुबह रिक्टर पैमाने पर 3.9 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया है। यह जानकारी भारत के नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (एनसीएस) ने दी है। एनसीएस के मुताबिक भूकंप का केंद्र जमीन से करीब 10 किलोमीटर नीचे दर्ज की गई। 3.9 तीव्रता का भूकंप आमतौर पर हल्के झटकों की श्रेणी में आता है। ऐसी तीव्रता के भूकंप से सामान्यतः बड़े पैमाने पर नुकसान की संभावना कम रहती है, हालांकि स्थानीय स्तर पर लोगों को झटके महसूस होते हैं। फिलहाल किसी तरह के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है। स्थानीय प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान भूकंप के नजरिए से संवेदनशील क्षेत्र में स्थित है, जहां समय-समय पर हल्के और मध्यम तीव्रता के भूकंप आते रहते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि 10 किमी की गहराई पर आए भूकंप के झटके सतह पर ज्यादा स्पष्ट रूप से महसूस हो सकते हैं, लेकिन तीव्रता कम होने के कारण बड़े नुकसान की आशंका कम रहती है। पाकिस्तान को दुनिया के सबसे अधिक भूकंप प्रभावित देशों में गिना जाता है। इसकी मुख्य वजह इसका भौगोलिक क्षेत्र है। यह उस क्षेत्र में स्थित है जहां इंडियन टेक्टोनिक प्लेट और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेट आपस में टकराती हैं। इन प्लेटों की लगातार गति और दबाव के कारण इस इलाके में भूकंपीय गतिविधियां बार-बार होती रहती हैं।
बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा और गिलगित-बाल्टिस्तान जैसे क्षेत्र प्रमुख फॉल्ट लाइनों के पास स्थित हैं। इन इलाकों में जमीन के नीचे प्लेटों की हलचल ज्यादा सक्रिय रहती है, जिससे यहां बड़े और विनाशकारी भूकंप आने का खतरा ज्यादा रहता है। इतिहास में बलूचिस्तान और उत्तरी पाकिस्तान कई भीषण भूकंप झेल चुके हैं, जिनसे भारी जान-माल का नुकसान हुआ था।
अमेरिका के टॉयमेकर ने टैरिफ को लेकर सु्प्रीम कोर्ट में ट्रंप को दी मात!
22 Feb, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा लगाए गए व्यापक आपातकालीन टैरिफ को अवैध घोषित कर दिया है। इस फैसले के बाद सबसे ज्यादा जिस नाम की चर्चा है वह है, रिक वोल्डनबर्ग, जो ट्रंप की आक्रामक टैरिफ नीति के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में पहुंचे। बता दें टैरिफ की मार और सप्लाई चेन की अनिश्चितता के बीच, लर्निंग रिसोर्सेज के सीईओ रिक वोल्डनबर्ग ने इस कानूनी लड़ाई का नेतृत्व किया है। रिक वोल्डनबर्ग ने ट्रंप प्रशासन के आईईईपीए कानून के इस्तेमाल को चुनौती देते हुए, तर्क दिया कि ये नीतियां बड़ी कंपनियों के लिए नहीं बल्कि उन मध्यम वर्गीय उद्योगों के लिए काल हैं जो पीढ़ियों से चल रहे हैं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप की टैरिफ को चुनौती देने वाले रिक वोल्डनबर्ग शिकागो में एक पारिवारिक टॉय कंपनी चलाते हैं। ट्रंप प्रशासन के लिबरेशन डे टैरिफ की घोषणा के कुछ ही दिनों के अंदर उन्होंने वकीलों से संपर्क कर ट्रंप के खिलाफ मुकदमा दायर किया था। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से उनको जीत मिली है और ट्रंप को हार। उन्होंने कोर्ट में तर्क दिया था कि टैरिफ छोटे और मिड-साइज बिजनेस को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा रहे हैं, जबकि बड़ी कंपनियां लॉबिंग और संसाधनों के दम पर खुद को बचा लेती हैं।
वोल्डनबर्ग की कंपनी अपने ज्यादातर एजुकेशनल खिलौने एशिया में बनाती है। ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए आईईईपीए कानून के तहत टैरिफ के कारण लागत में अचानक बढ़ोत्तरी हो गई और कंपनी को नुकसान का सामना करना पड़ा, जिसके चलते वोल्डनबर्ग ने या वेयरहाउस प्रोजेक्ट नई भर्ती रोक दी। यही नहीं उनकी कंपनी को मार्केटिंग बजट में भी कटौती करनी पड़ी। ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ के बाद उन्हें इस बात का एहसास हुआ कि कंपनी छोटी हो जाएगी और कम कमाई करेगी, और वही हुआ भी।
वोल्डनबर्ग की कंपनी पर सबसे ज्यादा असर लोकप्रिय प्रोडक्ट पर पड़ा। टैरिफ शुल्क के उतार-चढ़ाव के बीच उनकी कंपनी को कभी भारत शरणार्थियों की तरह अलग-अलग देशों में उत्पादन शिफ्ट करने को मजबूर हो गई थी। यह समस्या सिर्फ उनकी ही कंपनी के लिए नहीं बल्कि अन्य अमेरिकी कंपनियों के लिए भी थी, लेकिन बड़े अमेरिकी कॉरपोरेट्स इस कानूनी लड़ाई से दूरी बनाए रहे। एक्सपर्ट के मुताबिक बड़ी कंपनियों के पास कैश रिजर्व और सप्लाई चेन मैनेजमेंट की क्षमता होती है, इसलिए वे सीधे कोर्ट जाने के बजाय लॉबिंग पर जोर देती हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक वोल्डनबर्ग के साथ दर्जनों छोटे व्यवसाय और कुछ गैर-लाभकारी संगठन खड़े हुए। कोर्ट में कंपनियों का तर्क था कि 1977 का आईईईपीए कानून राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने की अनुमति नहीं देता। अमेरिका की निचली अदालतों ने भी ट्रंप की टैरिफ को कानून का उल्लंघन बताया था।
SC के फैसले के खिलाफ ट्रंप के तीखे तेवर… रिफंड की बजाए नए टैरिफ को 10 से बढ़ाकर 15% किया
22 Feb, 2026 08:41 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली/वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के एक बड़े फैसले के बाद हार मानने के बजाय अपने तेवर और कड़े कर लिए हैं. कल सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप द्वारा लगाए गए इमरजेंसी टैरिफ (Emergency Tariff) को अवैध करार दे दिया था. कोर्ट का कहना था कि राष्ट्रपति ने अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल किया है. इस फैसले से उन कंपनियों को बड़ी राहत मिली थी जो अरबों डॉलर का टैक्स भर रही थीं. लेकिन ट्रंप ने तुरंत पलटवार करते हुए नए ग्लोबल टैरिफ को 10% से बढ़ाकर 15% करने का फैसला किया है.।
ट्रंप ने साफ कर दिया है कि वह अपनी ट्रेड पॉलिसी से पीछे नहीं हटेंगे. उन्होंने कहा कि वह ‘सेक्शन 122’ जैसी दूसरी कानूनी शक्तियों का इस्तेमाल करेंगे. राष्ट्रपति का यह अड़ियल रवैया बता रहा है कि आने वाले दिनों में अमेरिका और उसके व्यापारिक साझेदारों के बीच तनाव और बढ़ेगा. इस फैसले के बाद अब सबसे बड़ा सवाल रिफंड को लेकर खड़ा हो गया है. कंपनियां अपने अरबों डॉलर वापस मांग रही हैं, लेकिन ट्रंप प्रशासन लंबी कानूनी लड़ाई की तैयारी में है।
1. सेक्शन 122 क्या है और ट्रंप इसे हथियार क्यों बना रहे हैं?
सुप्रीम कोर्ट के झटके के बाद ट्रंप ने अब ‘ट्रेड एक्ट 1974’ के सेक्शन 122 का सहारा लिया है. यह कानून राष्ट्रपति को अधिकार देता है कि वह गंभीर व्यापार घाटे को रोकने के लिए 15% तक का अस्थाई टैरिफ लगा सकते हैं. हालांकि, इसकी एक बड़ी सीमा है कि यह सिर्फ 150 दिनों के लिए ही प्रभावी रह सकता है. इसके बाद राष्ट्रपति को संसद यानी कांग्रेस से मंजूरी लेनी होगी.
ट्रंप का मानना है कि इससे उन्हें वह ताकत वापस मिल जाएगी जो कोर्ट ने उनसे छीनी है. उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जजों पर भी निशाना साधा और इसे देश के लिए एक बुरा फैसला बताया. एक्सपर्ट्स का कहना है कि ट्रंप इस कानून का इस्तेमाल इसलिए कर रहे हैं क्योंकि इसमें जांच की लंबी प्रक्रिया की जरूरत नहीं होती. वह इसे तुरंत लागू करके अपनी ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति को बरकरार रखना चाहते हैं।
2. इलिनोय के गवर्नर ने ट्रंप को 8.7 अरब डॉलर का बिल क्यों थमाया?
इस पूरे विवाद में अब राजनीति भी गर्मा गई है. इलिनोय के गवर्नर जेबी प्रित्ज़कर ने ट्रंप को एक औपचारिक इनवॉइस यानी बिल भेजा है. इसमें उन्होंने ट्रंप से 8.68 अरब डॉलर के रिफंड की मांग की है. गवर्नर का तर्क है कि ट्रंप के अवैध टैरिफ की वजह से उनके राज्य के हर परिवार को करीब 1700 डॉलर का नुकसान हुआ है. उन्होंने इसे ‘पास्ट ड्यू’ यानी बकाया राशि बताते हुए सोशल मीडिया पर लिखा।
हालांकि, कानूनी तौर पर यह मामला इतना सीधा नहीं है. टैरिफ का भुगतान कंपनियां करती हैं, आम जनता नहीं. कंपनियां इस बोझ को ग्राहकों पर डालती हैं जिससे महंगाई बढ़ती है. ऐसे में अगर रिफंड मिलता भी है, तो वह कंपनियों को मिलेगा न कि सीधे आम लोगों को. अर्थशास्त्रियों का मानना है कि वॉलमार्ट या कॉस्टको जैसी कंपनियां ग्राहकों को पुराना पैसा वापस नहीं करेंगी।
3. क्या रिफंड की जंग अगले 5 सालों तक खिंच सकती है?
रिफंड के मुद्दे पर ट्रंप ने जो बयान दिया है, उसने बिजनेस जगत की नींद उड़ा दी है. ट्रंप ने कहा, ‘मुझे लगता है कि इस पर अगले दो साल या शायद पांच साल तक मुकदमा चलेगा’. इसका मतलब है कि जिन कंपनियों ने पिछले साल अरबों डॉलर का टैक्स दिया है, उन्हें अपना पैसा वापस पाने के लिए कोर्ट के चक्कर काटने होंगे. ट्रंप प्रशासन ने पहले वादा किया था कि अगर कोर्ट का फैसला खिलाफ आया तो पैसा वापस कर दिया जाएगा।
अब प्रशासन अपने ही वादे से मुकरता दिख रहा है. हजारों कंपनियों ने पहले ही सरकार पर केस कर रखा है. अब इन मामलों की सुनवाई ‘कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड’ में होगी. छोटे व्यापारियों के लिए यह स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, क्योंकि उनके पास लंबी कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए फंड नहीं है।
4. भारत और ग्लोबल मार्केट पर इस फैसले का क्या असर होगा?
भारत के लिए यह खबर मिली-जुली है. एक तरफ सुप्रीम कोर्ट के फैसले से भारत पर लगे कुछ पुराने टैरिफ अवैध हो गए हैं. लेकिन ट्रंप के नए 10-15% ग्लोबल टैरिफ ने फिर से अनिश्चितता पैदा कर दी है. भारत का वाणिज्य मंत्रालय इस पूरे घटनाक्रम पर बारीक नजर रख रहा है. मंत्रालय ने कहा है कि वह कोर्ट के फैसले और ट्रंप के बयानों का एनालिसिस कर रहा है।
5. क्या बर्बाद होगा ग्लोबल मार्केट?
ट्रंप ने हिंट दिया है कि ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच वह तेल और अन्य चीजों पर दबाव बनाने के लिए मिलिट्री एक्शन भी ले सकते हैं. अगर ऐसा होता है, तो ग्लोबल सप्लाई चेन पूरी तरह चरमरा जाएगी. भारतीय निर्यातकों के लिए आने वाले 150 दिन बहुत चुनौतीपूर्ण होने वाले हैं, क्योंकि ट्रंप की नई नीति किसी भी वक्त लागू हो सकती है।
बांग्लादेश सरकार के सामने भारत से रिश्ते सुधारने, अल्पसंख्यकों की हिफाजत जैसी चुनौतियां
22 Feb, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका। बांग्लादेश में अब बीएनपी की सरकार है। बहुमत से चुनी गई नई सरकार के सामने देश की इकोनॉमी को दोबारा पटरी पर लाने, भारत से रिश्ते सुधारने, अल्पसंख्यकों की हिफाजत करने के साथ ही कट्टरपंथ से निपटने की चुनौतियां हैं। बीएनपी के सेंट्रल कमेटी मेंबर और सांसद डॉ. अब्दुल मोईन खान जिनमा पार्टी और सरकार की पॉलिसी बनाने में अहम योगदान है। मोईन खान पीएम रहमान के करीबी सलाहकार माने जाते हैं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मोईन खान ने कहा सरकार के सामने पहली चुनौती इकोनॉमी को सुधारना है। बांग्लादेश से लाखों डॉलर बाहर ले जाए गए। इंडस्ट्री खत्म कर दी गई हैं। कारोबारी सरकार का हिस्सा बन गए। दूसरी चुनौती लोकतांत्रिक ढांचे को बेहतर बनाना है। तीसरी चुनौती संस्थाओं की बहाली करने की है। ब्यूरोक्रेसी से लेकर ज्यूडिशियरी और बैंकिंग सिस्टम तक, सब बहाल करना है। अवामी लीग की तानाशाही और गलत नीतियों की वजह से ये हालात बने।
उन्होंने कहा कि बांग्लादेश की विदेश नीति का मूलमंत्र है- दोस्ती सभी के साथ, दुश्मनी किसी से नहीं। बीएनपी इसी पर यकीन करती है। हम आगे भी इसी पॉलिसी को फॉलो करेंगे। विदेश नीति की ताली एक हाथ से नहीं बजती। इसमें दोनों तरफ से गर्मजोशी होनी चाहिए। पड़ोसी देशों से रिश्तों को लेकर उन्होंने कहा भारत जैसे पड़ोसी मुल्क के साथ रिश्ते इस बात पर निर्भर करते हैं कि भारत ने अपनी पॉलिसी में कैसे बदलाव किए हैं। भारत के नेताओं, फॉरेन और डिफेंस पॉलिसी बनाने वालों को साथ मिलकर बांग्लादेश के लिए पॉलिसी बनानी चाहिए। मुझे लगता है कि भारत को बांग्लादेश के लिए विदेश नीति में बदलाव करना होगा। उसे समझना होगा कि पिछले डेढ़ दशक में क्या गड़बड़ी हुई है।
मोईन खान ने कहा कि शेख हसीना मामला एक मुद्दा है। अगर आप किसी से पूछेंगे कि आपके देश को जिसने बर्बाद किया और वो दूसरे देश में पनाह लिए हुए है, तो ये भावना आनी स्वाभाविक है। बिल्कुल। भारत पर निर्भर करता है कि वो क्या करना चाहते हैं। अगर किसी ने 18 करोड़ लोगों के साथ नाइंसाफी की है, तो इंसाफ होना चाहिए। मुझे लगता है कि भारत बांग्लादेश के बारे में अपनी समझ बढ़ाएगा। अगर वे अपनी विदेश नीति की खामियों पर सोचेंगे, तो निश्चित रूप से कोशिश करेंगे। हमारे नेता तारिक रहमान ने कहा है कि हम नफरत की राजनीति नहीं करते हैं। हम ये तय करना चाहते हैं कि इंसाफ हो। बांग्लादेश के लोगों ने इस पर खुद राय बनाई है। इस मामले में कानूनी रास्ते और प्रक्रिया को देखा जाएगा। बांग्लादेश के लोग धार्मिक प्रवृत्ति के हैं। वे धार्मिक रूप से कट्टर हैं, ये कहना सही नहीं होगा। बांग्लादेश में इस्लाम को मानने वाले ज्यादा हैं, लेकिन उनकी सोच हिंदू, क्रिश्चियन, बौद्ध सभी को लेकर खुली हुई है। कुछ लोग धर्म को राजनीति का टूल बनाने की कोशिश करते हैं।
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