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पाकिस्तान में बेटी को कॉलेज छोड़ने जा रहे पादरी को गोलियों से भूना
11 Dec, 2025 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों पर अत्याचार रुकने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा घटना पंजाब प्रांत की है, जहां एक पादरी की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस हमले ने पूरे ईसाई समुदाय को दहशत में डाल दिया है। अल्पसंख्यक अधिकारों के लिए काम करने वाले प्रमुख संगठन ‘द वॉयस ऑफ पाकिस्तान माइनॉरिटी’ ने इस हत्या पर कड़ी प्रतिक्रिया जताते हुए कहा है कि यह घटना देश में धार्मिक अल्पसंख्यकों की असुरक्षा और बढ़ते कट्टरपन की भयावह हकीकत को सामने लाती है। डरावनी बात यह है कि इसी पादरी पर दो महीने पहले भी हमला हुआ था, लेकिन तब वह बच गए थे।
इस बार हमलावरों ने उन्हें निशाना बनाकर मौत के घाट उतार दिया। पादरी कामरान अपने परिवार में पत्नी सल्मिना और तीन बच्चों को छोड़ गए हैं। मानवाधिकार संगठन ने प्रशासन की लापरवाही पर सवाल उठाते हुए कहा कि पाकिस्तान में न्याय की उम्मीद दिन पर दिन कमजोर पड़ती जा रही है। संगठन के अनुसार, 5 दिसंबर को पादरी कामरान अपनी बेटी को कॉलेज छोड़ने के लिए घर से निकले थे। जैसे ही वे कार की ओर बढ़े, बाइक पर आए दो बदमाशों ने उन पर नजदीक से गोलियां दाग दीं। उन्हें तुरंत गुजरांवाला के जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। यह हमला एक बार फिर पाकिस्तान की कानून व्यवस्था और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता खड़ी करता है।
इस वारदात का दर्द इसलिए भी गहरा है क्योंकि पादरी कामरान ने अपना जीवन मानव सेवा में लगाया था। अक्टूबर में उन पर इस्लामाबाद में कुछ कट्टरपंथियों ने गोलीबारी की थी, जिसमें वे घायल हुए थे। तब उनकी जान बच गई थी, लेकिन दूसरी बार के हमले में वे नहीं बच सके। इससे साफ दिखता है कि हमलावर न तो कानून से डरते हैं और न ही प्रशासन को उनकी गतिविधियों पर काबू है। संगठन ने कहा है कि इस हत्या ने ईसाई समुदाय के भीतर पहले से मौजूद भय को और बढ़ा दिया है। यह कोई अकेली घटना नहीं, बल्कि हाल के वर्षों में अल्पसंख्यकों पर बढ़ते हमलों की श्रृंखला का हिस्सा है। समुदाय के लोग लगातार असुरक्षा और हिंसा के साये में जीने को मजबूर हैं। भले ही पुलिस ने जांच शुरू कर दी है, लेकिन स्थानीय प्रशासन की उदासीनता के कारण न्याय मिलने की उम्मीद बेहद क्षीण मानी जा रही है। पादरी कामरान की हत्या एक बार फिर दिखाती है कि पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यक किस हद तक हाशिये पर धकेले जा चुके हैं और उनकी सुरक्षा एक गंभीर सवाल बन चुकी है।
मोदी-पुतिन की दोस्ती से चिढ़े ट्रंप, भारत पर लगा सकते हैं एक और टैरिफ, दिए संकेत
10 Dec, 2025 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। हाल ही में रुसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा पर दुनिया के कई देशों की नजरें लगीं हुई है। अमेरिका एक एक कदम पर नजर बनाए हुए था। अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए है कि जल्द ही भारत पर एक और टैरिफ लगाया जा सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका अब भारत से आयात होने वाले चावल पर टैरिफ बढ़ा सकता है। साथ ही वह कनाडा से आयातिति उर्वरक पर भी टैरिफ बढ़ाने पर विचार कर रहा है। अमेरिकी उत्पादकों ने डोनाल्ड ट्रंप से मार्केट में सस्ते विदेशी चावल की शिकायत की है। बता दें कि अमेरिका ने भारत पर 50 फीसदी का टैरिफ लगाया है। वहीं दोनों देशों के बीच ट्रेड टॉक इस सप्ताह एक बार फिर शुरू होने वाली है। 10 और 11 दिसंबर को अमेरिका का प्रतिनिधिमंडल भारत के प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक करेगा और द्विपक्षीय व्यापार समझौता करने का प्रयास करेगा। भारत के वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल भारत की तरफ से मुख्य वार्ताकार होंगे।
डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी किसानों के लिए 12 अरब डॉलर का बेलाउट पैकेज जारी किया है। इस मौके पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि सरकार जांच करेगी कि अमेरिकी की मार्केट में सस्ता विदेशी चावल कितना आ रहा है। किसानों ने डोनाल्ड ट्रंप पर कड़े कदम उठाने का दबाव बनाने की कोशिश की। किसानों ने कहा कि चावल के विदेशी आयात पर सब्सिडी की वजह से घरेलू चावल को सही कीमत नहीं मिल पाती है। इसपर ट्रंप ने कहा कि वे लोग धोखा दे रहे हैं और उनपर टैरिफ बढ़ाने की जरूरत है। डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि अब वह कनाडा के उर्वरक पर भी टैरिफ बढ़ाने वाले हैं। लूसियाना के केनेडी राइस मिल के सीईओ मेरिल केनेडी ने ट्रंप से कहा कि भारत, थाइलैंड और चीन से सबसे ज्यादा चावल आ रहा है। उन्होंने कहा कि इन देशों पर टैरिफ लगा है लेकिन चावल पर टैरिफ दोगुना करने की जरूरत है। हम चाहते हैं कि उनपर और ज्यादा टैरिफ लगाया जाए। डोनाल्ड ट्रंप ने तुरंत अपने वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट से उन देशों की लिस्ट बनाने का निर्देश दिया जो कि अमेरिका में ज्यादा चावल निर्यात कर रहे हैं। केनेडी ने कहा कि ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए शुल्क काम कर रहे हैं, ‘लेकिन हमें इसे और बढ़ाने की जरूरत है। वट्रंप ने फिर बेसेंट की ओर देखते हुए कहा, ‘भारत, मुझे भारत के बारे में बताइए। भारत को ऐसा करने की अनुमति क्यों है? उन्हें शुल्क देना होगा। क्या उन्हें चावल पर छूट मिली हुई है?’ इस पर बेसेंट ने कहा, नहीं सर, हम अभी उनके साथ व्यापार सौदे पर बातचीत कर रहे हैं।
केनेडी ने ट्रंप को यह भी बताया कि भारत के खिलाफ विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में एक मामला चल रहा है। उन्होंने कहा, यह उन देशों पर शुल्क लगाकर बहुत जल्दी हल हो जाएगा, जो अवैध रूप से सामान भेज रहे हैं। आपकी समस्या एक दिन में हल हो जाएगी इसलिए हमें उच्चतम न्यायालय में मुकदमा जीतना है। आंकड़ों के अनुसार, भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश है और वैश्विक बाजार में 28 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है। वह शीर्ष निर्यातक भी है, जिसकी 2024-25 में वैश्विक निर्यात में 30.3 प्रतिशत की हिस्सेदारी है। भारत चावल की जो किस्में वैश्विक स्तर पर निर्यात करता है, उनमें सोना मसूरी अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे बाजारों में पसंद की जाती है।
चीन ने अमेरिका को चेताया कहा- अब हम तीनों मिलकर तय करेंगे ग्लोबल साउथ का भविष्य
10 Dec, 2025 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग। भारत, चीन और रुस मिलकर अब ग्लोबल साउथ का भविष्य तय करेंगे। ये बात चीन ने अमेरिका को चेताते हुए कही है। चीन ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की हालिया भारत यात्रा पर सकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त की है। चीन ने तीनों देशों (चीन, रूस और भारत) को ग्लोबल साउथ का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए कहा कि इनके बीच अच्छे त्रिपक्षीय संबंध क्षेत्रीय एवं वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए लाभकारी सिद्ध होंगे।
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि चीन, रूस और भारत उभरती बाजार अर्थव्यवस्थाएं हैं तथा वैश्विक दक्षिण के अहम सदस्य हैं। उन्होंने कहा कि तीनों देशों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंध बनाए रखना न सिर्फ उनके अपने हित में है, बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक शांति, सुरक्षा, स्थिरता तथा समृद्धि के लिए भी अनुकूल है। भारत-चीन संबंधों (जो 2020 के पूर्वी लद्दाख गतिरोध के बाद ठंडे पड़े थे और अब सामान्यीकरण की राह पर हैं) के बारे में प्रवक्ता ने कहा कि चीन दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाते हुए भारत के साथ निरंतर, मजबूत और स्थिर संबंधों को बढ़ावा देना चाहता है। उन्होंने कहा कि चीन-भारत संबंधों के मामले में हम भारत के साथ मिलकर इन संबंधों को रणनीतिक ऊंचाई और दीर्घकालिक परिप्रेक्ष्य से देखने-संभालने को तैयार हैं, ताकि दोनों देशों के सतत, सुदृढ़ और स्थिर विकास को बढ़ावा मिले, दोनों देशों और उनके लोगों को वास्तविक लाभ पहुंचे तथा एशिया और उससे आगे शांति व समृद्धि में योगदान दिया जा सके।
बता दें कि राष्ट्रपति पुतिन 4-5 दिसंबर को भारत की आधिकारिक यात्रा पर आए थे। 2021 के बाद यह उनकी पहली भारत यात्रा थी। इस दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर हुए। दोनों पक्षों ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक ले जाने के लक्ष्य के साथ एक दीर्घकालिक आर्थिक सहयोग कार्यक्रम पर भी सहमति जताई। गौरतलब है कि बीजिंग और मॉस्को के बीच गहरे एवं मजबूत संबंधों को देखते हुए पुतिन की भारत यात्रा पर चीन की पैनी नजर थी। यात्रा से पहले नई दिल्ली और बीजिंग संबंधों पर की गई पुतिन की टिप्पणियों के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में गुओ जियाकुन ने कहा कि चीन रूस और भारत दोनों के साथ द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है। दरअसल, भारत दौरे से पहले एक साक्षात्कार में पुतिन ने कहा था कि भारत और चीन रूस के सबसे करीबी मित्र हैं और मॉस्को इन रिश्तों को बहुत महत्व देता है। उन्होंने एक एक इंटरव्यू में यह भी कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि भारत और चीन का नेतृत्व आपसी विवादों का समाधान स्वयं निकालने में सक्षम है और रूस को उनके द्विपक्षीय मामलों में दखल देने का कोई अधिकार नहीं है। चीनी सरकारी मीडिया ने पुतिन की भारत-चीन संबंधों वाली इन टिप्पणियों को प्रमुखता से प्रकाशित किया।
भारत को मुनीर की कड़ी चेतावनी- अब हमला हुआ तो मिलेगा कड़ा जवाब
10 Dec, 2025 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद,। पाकिस्तान के नए चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (सीडीएफ) फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने रावलपिंडी स्थित जीएचक्यू में औपचारिक रूप से अपना पद संभाल लिया। समारोह में उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। पदभार ग्रहण करते ही अपने पहले संबोधन में उन्होंने पड़ोसी देशों, खासकर भारत और अफगानिस्तान को कड़े संदेश दिए।
सीडीएफ मुनीर ने समारोह के दौरान सोमवार को कहा, कि पाकिस्तान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से किसी भी प्रकार का समझौता संभव नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में पाकिस्तान पर कोई हमला होता है, तो उसका जवाब पहले से भी ज्यादा तीखा, तेज और प्रभावी होगा। यही नहीं उन्होंने सीधे तौर पर कहा, भारत किसी गलतफहमी में न रहे। खुद पाकिस्तान किसी को भी परखने की अनुमति नहीं देगा। यदि कोई आक्रामक कदम उठाया गया, तो उसका परिणाम तुरंत मिलेगा। उन्होंने आगे कहा कि आधुनिक युद्ध अब परंपरागत सीमाओं से आगे बढ़ चुका है और साइबरस्पेस, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम, स्पेस, इन्फॉर्मेशन वॉरफेयर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्वांटम टेक्नोलॉजी जैसे नए क्षेत्रों में फैल चुका है। ऐसे में पाकिस्तान की सेनाओं को भी समय के साथ खुद को रूपांतरित करने की आवश्यकता है।
अपने संबोधन में आसिम मुनीर ने मई में हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस दौरान पाकिस्तान ने भारत को मुंहतोड़ जवाब दिया था। उन्होंने पाकिस्तानी सेना के जवानों और नागरिकों की सहनशीलता तथा धैर्य की प्रशंसा करते हुए कहा कि देश के सभी वर्गों ने एकजुट होकर चुनौतियों का सामना किया।
अफगानिस्तान को लेकर भी फील्ड मार्शल मुनीर ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने अफगान तालिबान को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि उन्हें पाकिस्तान तालिबान (टीटीपी) और पाकिस्तान सरकार में से किसी एक को ही चुनना होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि अफगानिस्तान की जमीन से सक्रिय आतंकियों को समर्थन मिल रहा है। उन्होंने दोहराया कि पाकिस्तान शांति का समर्थक है, लेकिन अपनी सुरक्षा को लेकर किसी तरह की ढील नहीं बरती जाएगी। मुनीर ने यह भी कहा कि अफगान तालिबान उन समूहों को सहायता दे रहा है जिनका संबंध भारत से भी बताया जाता है। पाकिस्तान लंबे समय से टीटीपी को आतंकवादी संगठन मानता है और उस पर भारत की ओर से समर्थन पाने का आरोप लगाता रहा है।
अनंत अंबानी को ग्लोबल ह्यूमनिटेरियन अवॉर्ड: वन्यजीव संरक्षण में नई मिसाल
10 Dec, 2025 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। भारत के उद्योगपति अनंत अंबानी, रिलायंस इंडस्ट्रीज के ‘वनतारा’ संस्थापक, को ‘ग्लोबल ह्यूमनिटेरियन अवॉर्ड फॉर एनिमल वेलफेयर’ से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार उन्हें पशु कल्याण और संरक्षण के क्षेत्र में उनके अद्वितीय योगदान के लिए दिया गया। अनंत अंबानी इस सम्मान को पाने वाले सबसे युवा और पहले एशियाई व्यक्ति बन गए हैं। यह सम्मान वॉशिंगटन डीसी में आयोजित एक भव्य समारोह में प्रदान किया गया, जिसमें दुनिया भर के वन्यजीव संरक्षण विशेषज्ञ और पशु कल्याण कार्यकर्ता शामिल हुए।
ग्लोबल ह्यूमन सोसाइटी ने इस पुरस्कार के जरिए अनंत अंबानी और उनके नेतृत्व में स्थापित वनतारा की सराहना की। वनतारा ने बड़े पैमाने पर रेस्क्यू, पुनर्वास और प्रजातियों के संरक्षण की परिभाषा बदल दी है। उनके कार्यों ने पशु कल्याण और संरक्षण में एक नया वैश्विक मानक स्थापित किया है। संस्था ने कहा कि वनतारा केवल एक रेस्क्यू सेंटर नहीं है, बल्कि यह एक अभयारण्य है, जो हर जीवन को गरिमा, देखभाल और उम्मीद देने के लिए समर्पित है। समारोह में ग्लोबल ह्यूमन सोसाइटी की प्रेसिडेंट डॉ रॉबिन गैन्जर्ट ने कहा, “वनतारा को ‘ग्लोबल ह्यूमन सर्टिफाइड’ का दर्जा मिलना देखभाल में उत्कृष्टता और जानवरों के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। अनंत अंबानी ने करुणा को कार्यरूप देने का नया वैश्विक मानक स्थापित किया है।उन्होंने यह भी कहा कि वनतारा के उद्देश्य, पैमाने और भावना ने आधुनिक पशु कल्याण के लिए एक नया बेंचमार्क तय किया है।
सम्मान ग्रहण करते हुए अनंत अंबानी ने कहा, संरक्षण कल के लिए नहीं, बल्कि आज का धर्म है। वनतारा के माध्यम से हम सेवा की भावना से निर्देशित होकर हर जीवन को गरिमा और देखभाल देना चाहते हैं। जानवर हमें संतुलन, विनम्रता और विश्वास सिखाते हैं। यह सम्मान हमारे सिद्धांत ‘सर्व भूत हित’ की पुष्टि करता है।
इस पुरस्कार के पिछले विजेताओं में हॉलीवुड के दिग्गज शर्ली मैकलेन, जॉन वेन, बेटी व्हाइट और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी और बिल क्लिंटन शामिल रहे हैं। वनतारा को यह मान्यता कठोर ऑडिट और वैश्विक विशेषज्ञों के निरीक्षण के बाद मिली, जिसमें पशु कल्याण, व्यवहार विज्ञान, पशु चिकित्सा और नैतिकता के पहलुओं का मूल्यांकन किया गया। वनतारा ‘एक्स सीटू’ और ‘इन सीटू’ संरक्षण को जोड़ते हुए वन्यजीवों के दीर्घकालिक संरक्षण का मॉडल पेश करता है। समारोह में आईयूसीएन के पूर्व चेयर डॉ जॉन पॉल रोड्रिग्ज, कोलोसल बायोसाइंसेज के मैट जेम्स और कई प्रमुख अमेरिकी चिड़ियाघरों के सीईओ शामिल थे। भारत से डॉ नीलम खैरे, डॉ वीबी प्रकाश और डॉ केके सरमा जैसे विशेषज्ञ भी उपस्थित थे।अमेरिकन ह्यूमन सोसाइटी, जो लगभग 150 वर्षों से पशु कल्याण के क्षेत्र में काम कर रही है, दुनिया की सबसे बड़ी पशु कल्याण संस्था है। यह हर साल 59 देशों में 1.5 अरब से अधिक जानवरों की सुरक्षा और उनके साथ मानवीय व्यवहार सुनिश्चित करती है। इसके इतिहास में कई अमेरिकी राष्ट्रपति और विश्व नेताओं को भी इस संस्था ने सम्मानित किया है। अनंत अंबानी का यह पुरस्कार न केवल उनके व्यक्तिगत योगदान को मान्यता देता है, बल्कि भारत और विश्व में वन्यजीव संरक्षण और पशु कल्याण के लिए नए मानक स्थापित करने का प्रतीक भी है।
पीढ़ियां बदल सकती हैं, लेकिन सच नहीं, 1971 में बांग्लादेशियों ने चुकाई थी भारी कीमत
10 Dec, 2025 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका। बांग्लादेश की राजधानी ढाका के छात्रों ने विजय दिवस से पहले बड़ा प्रदर्शन किया है और कहा है कि रजाकरों के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता है। ढाका यूनिवर्सिटी के छात्रों ने पाकिस्तान को चुनौती दी। उन्होंने 1971 की जंग में पराजित पाकिस्तान का झंडा भेजकर साफ संदेश लिखा- नो कॉम्प्रमाइज विद रजाकर। छात्रों ने 1971 में पाकिस्तान द्वारा बांग्लादेश में किए गए नरसंहार का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि एक अलग राष्ट्र के रूप में आने के लिए बांग्लादेश के लोगों ने भारी कीमत चुकाई है। इन छात्रों का कहना था- पीढ़ियां बदल सकती हैं, लेकिन सच नहीं बदलता।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ढाका यूनिवर्सिटी के छात्रों ने कहा कि 1971 में 30 लाख शहीदों और 2 लाख महिलाओं की अस्मिता पर हमले हुए थे। इतनी भारी कीमत पर मिली आजादी से किसी तरह का समझौता नहीं होगा। बता दें बांग्लादेश अपना विजय दिवस हर साल 16 दिसंबर को मनाता है। इस दिन 1971 में पाकिस्तानी सेना ने ढाका में भारतीय सेना और मुक्ति वाहिनी के सामने आत्मसमर्पण किया था। इसके साथ ही बांग्लादेश एक स्वतंत्र देश बना। इस मौके पर बांग्लादेश में लंबा कार्यक्रम चलता है। बांग्लादेश में इस कार्यक्रम की तैयारी शुरू हो गई हैं।
मोहम्मद यूनुस पिछले साल शेख हसीना की सरकार के पतन के बाद देश के मुख्य प्रशासक हैं। यूनुस के राज में बांग्लादेश ने परंपरागत मूल्यों से इतर जाकर पाकिस्तान से हाथ मिलाया है। इसके बाद यूनुस और पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ की मुलाकात न्यूयॉर्क और काहिरा में हुई। पाकिस्तान की सेना के बड़े अफसर ढाका के दौरे पर आए और ढाका के अफसर पाकिस्तान दौरे पर गए। बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच स्वार्थ पर आधारित संबंधों का भारत पर भी असर है। रिपोर्ट के मुताबिक लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादी बांग्लादेश के अंदर सक्रिय हैं। ये आतंकी भारतीय सीमा के पास भी आजादी से घूम रहे हैं।
बता दें मार्च 1971 में जब पूर्वी पाकिस्तान में जब बंगाली राष्ट्रवाद उभरा तो इसे कुचलने के लिए 25 मार्च 1971 की रात को पाकिस्तानी सरकार ने “ऑपरेशन सर्चलाइट” शुरू किया। पाकिस्तानी सेना ने ढाका विश्वविद्यालय, पुलिस लाइन्स और हिंदू बस्तियों पर हमला किया। छात्रों, प्रोफेसरों, बुद्धिजीवियों और पत्रकारों को चुन-चुनकर मारा गया। इस दौरान पहले ही कुछ हफ्तों में ही लाखों लोग मारे गए। ऑपरेशन सर्चलाइट को इतिहास के सबसे भयानक नरसंहारों में गिना जाता है। पाकिस्तानी सेना और उसके सहयोगी रजाकार, अल-बद्र, अल-शम्स जैसे अर्धसैनिक दस्तों ने अवामी लीग समर्थकों और बुद्धिजीवियों को निशाना बनाया। महिलाओं से रेप किया गया। अंतरराष्ट्रीय आयोगों के मुताबिक 2-4 लाख महिलाएं रेप का शिकार हुई थीं।
लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट पर हड़कंप, काली मिर्च के स्प्रे से यात्रियों पर हमला
9 Dec, 2025 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लंदन।हीथ्रो एयरपोर्ट के टर्मिनल 3 पर उस समय हड़कंप मच गया, जब मल्टीस्टोरी कार पार्क में काली मिर्च के स्प्रे से लोगों पर हमला किए जाने की सूचना सामने आई। मेट्रोपॉलिटन पुलिस के अनुसार, हमलावरों के एक समूह ने कई लोगों पर पेपर स्प्रे का इस्तेमाल किया और इसके बाद मौके से फरार हो गया। घटना सुबह 8 बजकर 11 मिनट पर हुई, जिसके तुरंत बाद एयरपोर्ट परिसर और आसपास के क्षेत्रों में अफरा-तफरी फैल गई।
सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक अधिकतर हमलावर भाग चुके थे। हालांकि एक संदिग्ध को गिरफ्तार कर लिया गया है, जिससे आर्म्ड पुलिस पूछताछ कर रही है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह हमला किसी व्यक्तिगत विवाद का नतीजा था और इसमें शामिल लोग एक-दूसरे को पहले से जानते थे। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इसे आतंकवाद से जुड़ा मामला नहीं माना जा रहा है, लेकिन एहतियात के तौर पर एयरपोर्ट पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है।लंदन एम्बुलेंस सर्विस भी तुरंत घटनास्थल पर पहुंची और प्रभावित लोगों को अस्पताल ले जाया गया। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, किसी की चोटें गंभीर नहीं हैं और सभी घायलों का इलाज चल रहा है। लंदन फायर ब्रिगेड भी 8 बजकर 14 मिनट पर सहायता के लिए पहुंची और अब भी मौके पर तैनात है। अधिकारियों ने इसे महत्वपूर्ण घटना बताते हुए राहत और सुरक्षा कार्यों में कई टीमों को लगाया है।
हीथ्रो एयरपोर्ट प्रशासन ने यात्रियों को सलाह दी है कि वे अतिरिक्त समय लेकर आएं और अपनी उड़ानों से संबंधित जानकारी एयरलाइन से अवश्य चेक करें। हमले के चलते कुछ समय के लिए ट्रैफिक प्रभावित हुआ, लेकिन बाद में हालात सामान्य होने लगे। यात्रियों में शुरुआती दहशत जरूर देखी गई, हालांकि सुरक्षा एजेंसियों की त्वरित कार्रवाई के कारण स्थिति नियंत्रण में आ गई। पुलिस मामले की जांच जारी रखे हुए है और बाकी हमलावरों की तलाश की जा रही है।
मैक्रो ने चीन में जाकर जिनपिंग को दी धमकी, दुनिया में मच गया हड़कंप
9 Dec, 2025 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने वैश्विक व्यापार युद्ध में नया मोड़ ला दिया है। चीन के बढ़ते व्यापार सरप्लस और यूरोप के लिए गंभीर होते आर्थिक असंतुलन पर तीखा रुख अपनाते हुए मैक्रों ने स्पष्ट संकेत दिया है कि यदि बीजिंग ने यूरोपीय यूनियन के साथ अपने व्यापार घाटे को कम करने के लिए कदम नहीं उठाए, तो यूरोप भी अमेरिका की तरह चीनी सामानों पर भारी टैरिफ लगा सकता है। अपनी हालिया चीन यात्रा के बाद दिए गए एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि यह यूरोपीय उद्योग के लिए “जीवन और मृत्यु” जैसा सवाल है और अब यूरोप चीन की एकतरफा व्यापार नीति को चुपचाप स्वीकार नहीं करेगा।
मैक्रों का सबसे तीखा हमला चीन की उस नीति पर था जिसके कारण यूरोप चीनी उत्पादों का डंपिंग ग्राउंड बनता जा रहा है। उन्होंने बताया कि चीन यूरोप को बेचने के लिए बड़े पैमाने पर सामान भेज रहा है, लेकिन यूरोपीय कंपनियों के लिए चीन के बाजार में प्रवेश लगातार मुश्किल होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि चीन का यह व्यापार मॉडल अस्थिर है—“अगर ग्राहक ही कमजोर हो गया, तो चीन अपना माल किसे बेचेगा?” यह बयान यूरोपीय नेतृत्व की बढ़ती नाराजगी और आने वाले कड़े कदमों की स्पष्ट चेतावनी है।
मैक्रों ने बीजिंग के सामने यह भी साफ किया कि स्थिति सुधारने के लिए समय सीमित है। यदि चीन ने प्रतिक्रिया नहीं दी, तो यूरोप आने वाले महीनों में अमेरिका की तर्ज पर टैरिफ लगाने जैसे कदम उठाने को मजबूर होगा। यूरोप अब तक चीन के मुकाबले अपेक्षाकृत नरम माना जाता था, लेकिन मैक्रों की यह चेतावनी उस दौर के अंत की ओर संकेत करती है। यूरोपीय यूनियन का चीन के साथ व्यापार घाटा 2019 के बाद से लगभग 60प्रतिशत बढ़ चुका है। सस्ते चीनी इलेक्ट्रिक वाहनों, सोलर पैनलों और स्टील ने यूरोप के बाजारों में बड़ी हिस्सेदारी ले ली है। इसके विपरीत, यूरोपीय कंपनियों को चीन में व्यापार करने के लिए कठोर नियमों और प्रतिबंधों से गुजरना पड़ता है। फ्रांस समेत कई देशों की घरेलू उद्योग इस असंतुलन से प्रभावित हो रही है। मैक्रों ने कहा कि यूरोप न केवल चीन की आक्रामक विनिर्माण नीति से जूझ रहा है, बल्कि अमेरिका की “अमेरिका फर्स्ट” नीति से भी दबाव में है। ट्रंप प्रशासन द्वारा बढ़ाए गए संरक्षणवादी कदमों के कारण चीन जब अमेरिका को निर्यात सीमित करता है, तो उसका अतिरिक्त माल यूरोपीय बाजारों में भर जाता है और कीमतें ध्वस्त हो जाती हैं। उन्होंने इसे यूरोप के लिए अत्यंत खतरनाक स्थिति बताते हुए कहा कि इससे यूरोपीय उद्योग का मॉडल कमजोर हो रहा है।
सिर्फ चेतावनी ही नहीं, मैक्रों ने चीन को एक समझौता प्रस्ताव भी दिया है। उन्होंने सुझाव दिया कि यूरोप सेमीकंडक्टर मशीनरी के निर्यात पर लगी पाबंदियों में ढील दे सकता है—जो चीन की टेक इंडस्ट्री के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसके बदले, चीन को अपने ‘रेयर अर्थ मिनरल्स’ के निर्यात पर लगी सीमाएं हटानी होंगी। ये खनिज बैटरी, मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा उद्योग के लिए अहम हैं और चीन इनका सबसे बड़ा उत्पादक है। मैक्रों ने यह भी कहा कि चीनी कंपनियों को केवल सामान बेचने के बजाय यूरोप में निवेश करना चाहिए और नई फैक्ट्रियां स्थापित कर स्थानीय अर्थव्यवस्था में मूल्य जोड़ना चाहिए। उनका मानना है कि इसी संतुलित और पारस्परिक लाभ वाले मॉडल से वैश्विक व्यापार को स्थिरता मिल सकती है। इस पूरे घटनाक्रम ने संकेत दिया है कि आने वाले समय में यूरोप–चीन संबंधों में बड़े बदलाव देखे जा सकते हैं और वैश्विक व्यापार युद्ध का अगला चरण और भी तीखा हो सकता है।
जेलेंस्की को डोनाल्ड ट्रंप के बेटे ने कहा भ्रष्टाचारी, पीस प्लान न पढ़ने पर भड़के राष्ट्रपति
9 Dec, 2025 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बेटे जूनियर डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उनके पिता यूक्रेन शांति प्रक्रिया से पीछे हट सकते हैं। उन्होंने यह बयान कतर में एक सम्मेलन के दौरान दिया। ट्रंप जूनियर ने कहा कि उनके पिता की नीति हमेशा अनिश्चित और अप्रत्याशित रहती है। उनकी बात इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप ने जेलेंस्की को लेकर एक बयान देते हुए कहा कि उनके शांति मसौदे को उन्होंने पढ़ा तक नहीं।
अब सबको यही चिंता है कि क्या अमेरिका, यूक्रेन को छोड़ देगा, जिसके जवाब में ट्रंप जूनियर ने कहा कि अमेरिका, यूक्रेन को छोड़ना नहीं चाहता लेकिन अमेरिकियों में अब युद्ध के लिए पैसे देना का उत्साह खत्म हो गया है। उन्होंने बताया कि जब वह पूरे देश में रिपब्लिकन समर्थकों से मिलते हैं, तो अधिकांश लोग यूक्रेन को अपनी प्राथमिक चिंता नहीं मानते। ट्रंप जूनियर ने ये भी दावा किया कि लगभग 2 लाख अमेरिकियों से सीधी बातचीत के बाद ज्यादातर लोगों ने माना कि रूस-यूक्रेन युद्ध उनकी प्राथमिक समस्याओं में शामिल नहीं है। जब उनसे पूछा गया कि क्या राष्ट्रपति ट्रंप यूक्रेन की शांति वार्ता से हट सकते हैं, तो ट्रंप जूनियर ने कहा- ‘मुझे लगता है वह ऐसा कर सकते हैं।’ उन्होंने कहा कि ट्रंप की खासियत ही यह है कि कोई नहीं जानता कि वह अगला कदम क्या उठाएंगे, क्योंकि वह पुराने ढर्रे पर चलने वाले नेताओं की तरह काम नहीं करते। ट्रंप जूनियर ने कहा कि अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने यूक्रेन युद्ध को गलत तरीके से पेश किया है। उन्होंने दावा किया कि यूक्रेन युद्ध से पहले, रूस से भी ज्यादा भ्रष्ट था और यह बात अमेरिकी रिपोर्टों में भी कही गई है। उन्होंने कहा कि यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की को एक देवता जैसा दर्जा दे दिया गया है, जबकि उनके शासन में लंबे समय से भ्रष्टाचार और अनियमितताएं रही हैं। अक्सर इन्हें नजरअंदाज कर दिया गया। उन्होंने जेलेंस्की के भ्रष्टाचार पर खुलकर बात की और कहा कि वे पवित्र नहीं हैं।
एक सैनिक की मौत के बाद थाई सेना ने कंबोडिया पर की एयर स्ट्राइक
9 Dec, 2025 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बैंगकॉक,। थाईलैंड और कंबोडिया एक बार फिर आमने-सामने आ गए हैं। ट्रंप की मध्यस्थता में हुए सीजफायर के बावजूद सोमवार को थाई सेना ने कंबोडिया पर हमला कर दिया। थाई सेना के प्रवक्ता ने कहा कि सोमवार को थाईलैंड ने अपने पड़ोसी कंबोडिया पर एयर स्ट्राइक की। दोनों पक्ष अपने विवादित बॉर्डर पर हुई लड़ाई के लिए एक-दूसरे को जिम्मेदार बता रहे हैं, जिसमें एक थाई सैनिक की मौत हो गई थी।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सोमवार सुबह उबोन रात्चाथानी प्रांत में कंबोडियाई सैनिकों पर फायरिंग के बाद सुवारी ने एक बयान में कहा कि सेना को रिपोर्ट मिली कि थाई सैनिकों पर सपोर्टिंग फायर वेपन से हमला किया गया है, जिससे एक सैनिक मारा गया और चार घायल हो गए, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई की गई। कई इलाकों में मिलिट्री टारगेट पर एयरक्राफ्ट से हमला करना शुरू कर दिया है। कंबोडिया के रक्षा मंत्रालय की प्रवक्ता माली सोचेता ने कहा कि थाई सेनाओं ने सोमवार सुबह प्रीह विहियर और ओडर मींची के बॉर्डर वाले प्रांतों में कंबोडियाई सैनिकों पर हमला किया। थाईलैंड पर टैमोन थॉम मंदिर पर टैंकों से कई गोलियां चलाने और प्रीह विहियर मंदिर के पास के दूसरे इलाकों पर हमला करने का आरोप है। उन्होंने कहा कि कंबोडिया ने कोई जवाबी कार्रवाई नहीं की है।
ओडर मींचे प्रांतीय प्रशासन के कंबोडियाई प्रवक्ता ने कहा कि सदियों पुराने तमोन थॉम और ता क्रबेई मंदिरों के इलाकों में गोलीबारी की खबर है। बॉर्डर के पास रहने वाले कई गांववाले सुरक्षित जगहों पर भाग रहे हैं। थाईलैंड के सेकंड आर्मी रीजन ने कहा है कि लड़ाई के बाद से थाईलैंड में करीब 35,000 लोगों को कंबोडिया के पास वाले बॉर्डर के इलाकों से निकाला गया है। थाई सेना ने कंबोडियाई सेना पर बुरी राम प्रांत में आम लोगों के इलाकों की ओर बीएम-21 रॉकेट दागने का भी आरोप है। जिसमें किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।
दोनों देशों ने रविवार को एक छोटी झड़प की खबर दी थी, जिसमें थाईलैंड की सेना के दो सैनिक घायल हुए थे। कुछ महीनों पहले थाईलैंड और कंबोडिया के बीच पांच दिनों तक झड़पें हुईं थी। जिसमें 43 लोग मारे गए थे साथ ही 300,000 लोग बेघर हो गये थे। इससे भीषण तबाही के बाद युद्धविराम लागू किया गया था। लड़ाई खत्म कराने में अमेरिका, चीन और मलेशिया ने बीच-बचाव किया था।
मलेशिया रीजनल ब्लॉक आसियान का चेयरमैन है। अक्टूबर में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने थाईलैंड और कंबोडिया के बीच एक फॉलो-ऑन जॉइंट डिक्लेरेशन पर को-साइन किया, जिसमें सीजफायर को बढ़ाने पर सहमत होने के बाद देशों के साथ नए ट्रेड डील्स की बात कही गई थी, लेकिन पिछले महीने थाईलैंड ने एक कथित लैंडमाइन ब्लास्ट में कई सैनिकों के घायल होने के बाद डील सस्पेंड कर दी थी, जिसके बाद दोनों देशों के बीच छिटपुट झडपों की खबरें आती रहीं। यह विवाद इस इलाके में फ्रांस के कॉलोनियल शासन के दौरान मैप की गई सीमाओं को लेकर बना हुआ है, जिसमें दोनों देश कुछ सीमा मंदिरों पर अपना दावा करते हैं।
ऑस्ट्रिया की बर्फीली चोटी पर विंटर चाइल्ड की ठंड से मौत, बॉयफ्रेंड पर लगे आरोप
9 Dec, 2025 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
न्यूयार्क। ऑस्ट्रिया के सबसे ऊंचे पहाड़ ग्रॉसग्लॉकनर पर 33 साल की महिला कर्स्टिन गर्टनर ठंड से मौत हो गई वह पहाड़ पर ठंड में बर्फ की तरह जम गईं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कर्स्टिन साल्जबर्ग की रहने वाली थीं और सोशल मीडिया पर खुद को विंटर चाइल्ड और माउंटेन पर्सन कहती थीं। जनवरी में वह अपने बॉयफ्रेंड थॉमस प्लामबेर्गर के साथ पहाड़ पर चढ़ाई करने गई थीं। थॉमस 39 साल के हैं और एक अनुभवी माउंटेन गाइड हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक दोनों ने अपनी चढ़ाई दो घंटे देरी से शुरू की और ऊपर पहुंचते-पहुंचते मौसम बहुत ही खराब हो गया। तापमान -20 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया और हवाएं तूफानी रफ्तार से चलने लगीं। पहाड़ की चोटी से करीब 150 फीट नीचे कर्स्टिन बहुत थक गईं थीं, उनका शरीर ठंड से सुन्न होने लगा और वह उलझन में दिखीं।
रिपोर्ट के मुताबिक सरकारी वकील का आरोप है कि इतनी खराब हालत में होने के बावजूद थॉमस रात करीब 2 बजे कर्स्टिन को वहीं छोड़कर मदद लेने निकल गए। उन्होंने न तो उनके ऊपर इमरजेंसी ब्लैंकेट डाला, न ही उनके पास मौजूद सेफ्टी कवर का इस्तेमाल किया। यहां तक कि थॉमस ने तुरंत रेस्क्यू टीम को कॉल भी नहीं किया और फोन साइलेंट कर दिया, जिससे रेस्क्यू टीम की कॉल्स मिस हो गईं।
जानकारी के मुताबिक पहाड़ की वेबकैम फुटेज में भी सिर्फ एक हेडलैंप दिखाई दिया, जो शिखर से दूर जाता दिखा। तेज हवाओं और खराब मौसम के कारण रेस्क्यू टीम सुबह वहां पहुंची। तब तक कर्स्टिन की मौत हो चुकी थी। थॉमस पर अब गंभीर लापरवाही बरतने से हुई हत्या का आरोप है, और दोषी पाए जाने पर उन्हें तीन साल की सजा हो सकती है। उनके वकील का कहना है कि यह बस एक हादसा था। यह मामला 19 फरवरी 2026 को इनसब्रुक रीजनल कोर्ट में सुना जाएगा।
भारत से लौटते ही पुतिन के खिलाफ साजिश करने लगे यूरोपीय देश
8 Dec, 2025 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मॉस्को। भारत की यात्रा से लौटते ही रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के खिलाफ यूरोपीय देश साजिश में जुट गए हैं। दुनिया की सबसे संपन्न लोकतांत्रिक अर्थव्यवस्थाएं रूस के समुद्री तेल व्यापार पर अपने अब तक के सबसे कठोर कदम की तैयारी में लग गई हैं। दरअसल यूरोपीय संघ (ईयू) और जी7 देश रूस के खिलाफ एक नई महासाजिश रच रहे हैं जिसके तहत ये देश रूसी तेल निर्यात पर पूर्ण समुद्री बैन लगाने की योजना बना रहे हैं। यह कदम रूस की युद्ध अर्थव्यवस्था को सीधा निशाना बनाएगा, क्योंकि तेल रूस के केंद्रीय बजट का लगभग एक-चौथाई हिस्सा मुहैया कराता है। एक विशेष रिपोर्ट के अनुसार, यह योजना रूसी तेल की कीमत सीमा (प्राइस कैप) को पूरी तरह समाप्त कर देगी और पश्चिमी टैंकरों, बीमा तथा झंडियों के उपयोग पर रोक लगा देगी। क्या यह वैश्विक तेल बाजार में भूचाल लाएगा? आइए पूरे घटनाक्रम को विस्तार से समझते हैं।
रिपोर्टस में दावे किए जा रहे हैं कि जी7 देशों और यूरोपीय संघ ने रूसी कच्चे तेल के लिए समुद्री सेवाओं पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने पर विचार शुरू कर दिया है। यह कदम पश्चिमी जहाजों और बीमा सेवाओं को रोक देगा, जो अभी भी रूस के तेल निर्यात का बड़ा हिस्सा ढो रहे हैं। 2022 में रूस के यूक्रेन पर आक्रमण के बाद जी7 देशों (अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान) और ईयू ने रूसी तेल आयात पर प्रतिबंध लगा दिया। लेकिन पूरी तरह बंद करने के बजाय, उन्होंने एक चालाक तंत्र अपनाया- प्राइस कैप। इसके तहत रूसी कच्चे तेल की कीमत 60 डॉलर प्रति बैरल से नीचे रखने पर पश्चिमी शिपिंग और बीमा सेवाएं उपलब्ध रहती हैं। इससे रूस को तेल बेचने में दिक्कत तो हुई, लेकिन पूरी तरह रुकावट नहीं लगी।
समय के साथ रूस ने इसे चकमा दिया। मॉस्को ने शैडो फ्लीट नामक एक गुप्त जहाजी बेड़ा विकसित किया- पुराने, बिना पश्चिमी नियमन वाले टैंकर जो ईरान और वेनेजुएला जैसे देशों से प्रेरित हैं। सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि जी7 और ईयू अब प्राइस कैप को ताक पर रखकर पूर्ण समुद्री सेवाओं प्रतिबंध (फुल मारिटाइम सर्विसेज बैन) लाने की बात कर रहे हैं। इसका मतलब? रूसी तेल या ईंधन को ले जाने वाले किसी भी जहाज को पश्चिमी टैंकर, बीमा या पंजीकरण सेवाएं नहीं मिलेंगी – चाहे वह कहीं भी जा रहा हो। यह योजना मुख्य रूप से रूस के एशियाई बाजारों को निशाना बनाएगी। रूस का एक-तिहाई से अधिक तेल निर्यात (मुख्यतः भारत और चीन को) अभी भी ग्रीस, साइप्रस और माल्टा जैसे ईयू देशों के टैंकरों से होता है।
अमेरिका में 7.0 की तीव्रता से आया भूकंप, कनाडा को भी हिला डाला
8 Dec, 2025 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिका के अलास्का में 7.0 की तीव्रता से आए भूकंप ने कनाडा तक को हिला डाला। लोग दहशत में आ गए और घरों से बाहर निकल आए।अमेरिकी भूगर्भ सर्वेक्षण (यूएसजीएस) के अनुसार, भूकंप का केंद्र अलास्का की राजधानी जूनो से लगभग 370 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम और कनाडा के व्हाइटहॉर्स से करीब 250 किलोमीटर पश्चिम में था। झटके इतने तेज थे कि हजारों किलोमीटर दूर बसे इलाकों में भी लोगों ने जमीन को हिलते महसूस किया। हालांकि, राहत की बात यह है कि अभी तक किसी बड़े नुकसान या किसी के घायल होने की खबर नहीं है। साथ ही, अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि इस भूकंप से सुनामी का कोई खतरा नहीं है।
भूकंप का सबसे नजदीकी कनाडाई शहर हैन्स जंक्शन बताया गया, जो केंद्र से करीब 130 किलोमीटर दूर है। 2022 की जनगणना के अनुसार, यहां लगभग 1,000 लोग रहते हैं। वहीं, अमेरिकी शहर याकुटात, जिसकी आबादी 662 है, भूकंप के केंद्र से मात्र 90 किलोमीटर दूर है। इसलिए दोनों क्षेत्रों में लोग काफी डर गए। भूकंप की गहराई करीब 10 किलोमीटर बताई गई है, यानी सतह के काफी पास, जिससे झटके और भी अधिक महसूस हुए। इसके बाद कई छोटे आफ्टरशॉक्स दर्ज किए गए, जिसकी वजह से लोगों में डर बना हुआ है। कनाडा के व्हाइटहॉर्स में रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस की अधिकारी कैलिस्टा मैकलाउड ने बताया कि उन्हें भूकंप के तुरंत बाद इमरजेंसी कॉल मिलीं। उन्होंने कहा, ‘झटके काफी तेज महसूस हुए। सोशल मीडिया पर भी बड़ी संख्या में लोग बता रहे हैं कि उनके घर हिल गए।’ नेचुरल रिसोर्सेज कनाडा की सिस्मोलॉजिस्ट ऐलिसन बर्ड के अनुसार, भूकंप का असर जिस इलाके में सबसे ज्यादा हुआ है, वह बेहद पर्वतीय और कम आबादी वाला क्षेत्र है। उन्होंने कहा कि अब तक मिली जानकारी के अनुसार केवल घरों की दीवारों और शेल्फ से सामान गिरने की घटनाएं सामने आई हैं, लेकिन किसी संरचनात्मक नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है।
यह सीजफायर नहीं कहा जा सकता, जब तक इजराइली सेना पूरी तरह गाजा से नहीं हटे
8 Dec, 2025 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
दोहा। कतर के पीएम शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी ने कहा है कि गाजा में मौजूदा हालात को सीजफायर नहीं कहा जा सकता। इसके लिए पूरे इलाके से इजराइल को हटना होगा। अल थानी ने यह बात एक चर्चा के दौरान कही। अल थानी ने कहा कि अमेरिका के नेतृत्व में अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थ गाजा में शांति समझौते को पक्का करने के लिए दूसरे चरण के लिए आगे का रास्ता बनाने पर काम कर रहे हैं। उन्होंने गाजा में शांति प्रक्रिया को एक अहम मोड़ पर बताया।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अल थानी ने कहा कि हमने अभी जो किया है, वह एक ठहराव है। हम इसे अभी सीजफायर नहीं मान सकते। युद्धविराम तब तक पूरा नहीं हो सकता जब तक इजराइली सेना पूरी तरह से गाजा से वापस नहीं हो जाती। गाजा में स्थिरता आ जाए, लोग आ-जा सकें, जो आज नहीं है। बता दें बीते 10 अक्टूबर को अमेरिकी पीस प्लान के तहत हुए युद्धविराम की शुरुआत में इजराइल ने अपनी सेना को एक येलो लाइन पर वापस बुला लिया था। यह काल्पनिक येलो लाइन मानचित्र पर गाजा पट्टी को मोटे तौर पर पूर्व और पश्चिमी हिस्सों में बांटती है। इसके साथ ही इजराइल को राफा बॉर्डर क्रॉसिंग को फिर से खोलने की इजाजत देनी थी, लेकिन वह एक महीने से ज्यादा समय तक यह कहकर टाल दिया कि हमास को गाजा में बचे हुए मृत बंधकों के अवशेष सौंपने होंगे।
बता दें अक्टूबर में हुए युद्धविराम ने दो साल से चल रही लड़ाई को रोक दिया है। हालांकि, दोनों पक्ष एक दूसरे पर उल्लंघन का आरोप लगाते हैं। गाजा में हमास के स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि 10 अक्टूबर को युद्धविराम लागू होने के बाद से अब तक 360 से ज्यादा फिलिस्तीनी इजराइली फायरिंग में मारे गए हैं। नई हिंसा में हॉस्पिटल ने बताया कि गाजा शहर के उत्तर-पश्चिम में इजराइली एयरस्ट्राइक में दो फिलिस्तीनी मारे गए। इजराइली सेना ने कहा कि उस पर जगह पर एयरस्ट्राइक के बारे में जानकारी नहीं थी। हालांकि, इसने बताया कि इजराइली सैनिकों ने शनिवार को तीन मिलिटेंट को मार गिराया, जो येलो लाइन पार करके इजराइल नियंत्रित उत्तरी गाजा में घुस आए थे।
भारत को 1500 किमी रेंज की कालिब्र क्रूज मिसाइलें देगा रुस, नौसेना को मिलेगी ताकत
8 Dec, 2025 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मॉस्को। रूस ने भारत को 1500 किमी रेंज की कालिब्र क्रूज मिसाइलों से लैस करने का प्रस्ताव दिया है। इसे स्टैंडर्ड 533 एमएम टॉरपीडो ट्यूब का इस्तेमाल करके भारतीय सबमरीन से फायर किया जा सकता है, जो उसे 1500 किमी की दूरी तक हमला करने की क्षमता प्रदान करेगी। रूसी अधिकारियों ने इस साल की शुरुआत में मॉस्को में भारतीय नौसेना के डेलीगेशन को इस बारे में जानकारी दी थी। इसमें प्लेटफॉर्म को बड़े बदलाव के बिना डीप-स्ट्राइक लैंड अटैक कैपेबिलिटी का वादा किया है। इसके साथ ही इसमें ब्रह्मोस और निर्भय-क्लास सिस्टम के साथ एक और ऑप्शन भी जोड़ा गया है। इस क्रूज मिसाइल से भारत की सबमरीन फ्लीट की फायरपावर में अहम बढ़ोतरी होगी।
रिपोर्ट के मुताबिक कालिब्र की 1500 किमी की रेंज फारस की खाड़ी से लेकर मलक्का स्ट्रेट तक एक बड़े दायरे में अहम इकनॉमिक और मिलिट्री नोट्स को कवर करेगी। हालांकि, भारत के डीआरडीओ ने रूस के सात एनपीओएम के साथ मिलकर स्वदेशी एसएलसीएम को लंबे समय के लिए लक्ष्य बनाया है, लेकिन रक्षा एक्सपर्ट कालिब्र को कम जोखिम और ज्यादा असर वाली अंतरिम क्षमता के तौर पर देखते हैं, जो जरूरी समय और ऑपरेशनल अनुभव खरीदती है। रूस ने यूक्रेन में अपने मिलिट्री ऑपरेशन में कालिब्र मिसाइलों को बड़े पैमाने पर तैनात किया है। भारत ने रूस के साथ कालिब्र फैमिली की दूसरी मिसाइलों के लिए डील की है। इस साल फरवरी की शुरुआत में भारत ने रूस के साथ कालिब्र-पीएल एंटी-शिप क्रूज मिसाइल खरीदने के लिए समझौता किया था।
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