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ट्रंप के सीजफायर कराने के बाद भी नहीं रुक रहा थाईलैंड और कंबोडिया संघर्ष
14 Dec, 2025 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बैंकॉक,। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने थाईलैंड और कंबोडिया के बीच सीजफायर कराने के दावे के बावजूद दोनों देशों के बीच जंग थमती नहीं दिख रही है। कंबोडिया ने दावा किया है कि शनिवार सुबह से थाई सेनाएं विवादित सीमा पर हमले कर रही हैं, वहीं थाईलैंड ने भी कंबोडिया पर अंतरराष्ट्रीय नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया है। फिलहाल, थाईलैंड और कंबोडिया के बीच सैन्य टकराव नहीं रुका। यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि उन्होंने दोनों देशों के बीच सीजफायर कराने में अहम भूमिका निभाई है।
कंबोडिया के सूचना मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि थाई सैन्य बलों ने सीमा पार हमले बंद नहीं किए हैं। मंत्रालय के मुताबिक थाई सेनाएं अब भी बमबारी कर रही हैं और इन हमलों में फाइटर जेट्स का भी इस्तेमाल किया गया है। बयान में कहा गया है थाई सेनाओं ने अब तक बमबारी बंद नहीं की है और हमले लगातार जारी हैं। वहीं, थाईलैंड की सेना ने कंबोडिया के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कंबोडिया बार-बार अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन कर रहा है। थाईलैंड के मुताबिक कंबोडियाई बलों ने नागरिक इलाकों को निशाना बनाया है और सीमा क्षेत्रों में बारूदी सुरंगें बिछाई हैं।
बता दें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार रात थाई पीएम अनुतिन चार्नवीराकुल और कंबोडिया के पीएम हुन मानेत से फोन पर बातचीत के बाद कहा था कि दोनों देश शुक्रवार से ही सभी तरह की गोलीबारी रोकने पर सहमत हो गए हैं। हालांकि ट्रंप के इस दावे के बाद दोनों देशों के नेताओं के बयानों में किसी औपचारिक सीजफायर समझौते का जिक्र नहीं किया है। थाई पीएम अनुतिन चार्नवीराकुल ने साफ कहा कि कोई सीजफायर नहीं हुआ है। जब ट्रंप के दावे पर सवाल किया गया तो थाई विदेश मंत्रालय ने पत्रकारों को पीएम के बयान का हवाला दिया।
कंबोडिया के प्रधानमंत्री हुन मानेत ने शनिवार को फेसबुक पर जारी एक बयान में ट्रंप के साथ हुई बातचीत और मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के साथ पहले हुई चर्चा का जिक्र किया। मानेत ने कहा कि कंबोडिया अब भी विवादों का शांतिपूर्ण समाधान चाहता है। उन्होंने कहा कि कंबोडिया अक्टूबर में मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर में हुए पहले के समझौते के तहत ही विवाद सुलझाने के लिए प्रतिबद्ध है।
ट्रंप के ट्रुथ सोशल पर जारी संदेश के मुताबिक दोनों नेताओं ने तुरंत सभी तरह की गोलीबारी रोकने और उस शांति ढांचे पर वापस लौटने की प्रतिबद्धता जताई है, जिसे पहले अमेरिका की भूमिका और मलेशिया के पीएम अनवर इब्राहिम की मध्यस्थता से तय किया गया था। ट्रंप ने कहा कि वे इस शाम से सभी तरह की फायरिंग रोकने पर सहमत हो गए हैं और मेरे साथ तथा उनके साथ मलेशिया के पीएम अनवर इब्राहिम की मदद से किए गए मूल शांति समझौते पर वापस लौटेंगे। यह नए सीजफायर का ऐलान ऐसे समय किया गया था, जब बीते कुछ दिनों में हुए घातक संघर्षों के चलते हजारों नागरिकों को अपने घर छोड़ने पड़े थे और इस साल की शुरुआत में मलेशिया की मध्यस्थता से हुए संघर्षविराम के टूटने का खतरा पैदा हो गया था। ट्रंप ने अक्टूबर में मलेशिया में हुई फॉलो-अप बैठकों में भी हिस्सा लिया था। वे इस संघर्ष को उन कई विवादों में से एक बताते हैं, जिन्हें उनके मुताबिक उन्होंने सुलझाया है।
ट्रम्प गोल्ड कार्ड के फैसले के खिलाफ अमेरिका के 20 राज्यों ने ठोका मुकदमा
14 Dec, 2025 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिकी प्रशासन ने ट्रम्प गोल्ड कार्ड वीजा के आवेदनों पर 1 मिलियन डॉलर यानी करीब 9 करोड़ रुपए की फीस लगा दी है। इस फैसले के खिलाफ कैलिफोर्निया के नेतृत्व में कुल 20 अमेरिकी राज्यों ने कोर्ट में मुकदमा दायर किया है। इन राज्यों का कहना है कि यह फीस गैर-कानूनी है और इससे अस्पतालों, स्कूलों, यूनिवर्सिटी और सरकारी सेवाओं में पहले से चल रही डॉक्टरों-शिक्षकों की कमी और गंभीर हो जाएगी।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कैलिफोर्निया के अटॉर्नी जनरल रॉब बोंटा ने कहा कि ये वीजा डॉक्टर, नर्स, इंजीनियर, वैज्ञानिक और शिक्षक जैसे उच्च कुशल प्रोफेशनल्स के लिए होता है। दुनियाभर का टैलेंट जब अमेरिका आता है तो पूरा देश आगे बढ़ता है। कैलिफोर्निया के साथ न्यूयॉर्क, इलिनॉय, वॉशिंगटन, मैसाचुसेट्स समेत 20 बड़े राज्य इस मुकदमे में शामिल हैं। राज्यों का तर्क है कि पहले एच-1बी वीजा की फीस 1,000 से 7,500 डॉलर यानी 1 से 6 लाख रुपए के बीच होती थी, लेकिन संसद की मंजूरी के बिना अचानक फीस बढ़ा देना अवैध है। साथ ही यह फीस वीजा प्रोसेसिंग की वास्तविक लागत से सैकड़ों गुना ज्यादा है। उन्होंने इसे प्रशासनिक प्रक्रिया का उल्लंघन बताया। क्योंकि बिना नोटिस और पब्लिक कमेंट के इतना बड़ा नियम नहीं बनाया जा सकता।
रिपोर्ट के मुताबिक राज्यों का कहना है कि इसका सबसे बड़ा असर सरकारी और गैर-लाभकारी संस्थानों पर पड़ेगा। स्कूल, यूनिवर्सिटी और अस्पताल को वीजा में छूट मिलती थी, लेकिन अब एक-एक विदेशी टीचर या डॉक्टर लाने में 9 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इससे ये संस्थान या तो सेवाएं घटाएंगे या दूसरी जरूरी योजनाओं से पैसा काटेंगे। अमेरिकी शिक्षा विभाग की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक इस साल अमेरिका के करीब 75फीसदी डिस्ट्रिक्ट स्कूल को शिक्षक नहीं मिल पा रहे हैं। खासकर स्पेशल एजुकेशन, साइंस और बाइलिंगुअल शिक्षकों की भारी कमी है।
वहीं स्वास्थ्य क्षेत्र में 2024 में करीब 17,000 वीजा डॉक्टरों-नर्सों को दिए गए थे। साल 2036 तक अमेरिका में 86,000 डॉक्टरों की कमी हो सकती है, जो ग्रामीण और गरीब इलाकों में पहले से ही गंभीर है। अमेरिकी सरकार वीजा में फीस बढ़ोतरी को जायज बताती रही है। व्हाइट हाउस का कहना है कि यह कदम वीजा प्रोग्राम के दुरुपयोग को रोकेगा। इसका साथ ही अमेरिकी नागरिकों के वेतन और नौकरियों की रक्षा करेगा। इसके उलट आलोचकों का कहना है कि इससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था को नुकसान होगा। भारत जैसे देशों से आने वाले 70फीसदी से ज्यादा प्रोफेशनल्स पर इसका असर पड़ेगा।
विशेषज्ञों के मुताबिक प्रोफेशनल अब कनाडा, ऑस्ट्रेलिया या यूरोप जैसे देशों की ओर जा सकते हैं। इसके साथ ही ट्रम्प प्रशासन वीजा आवेदकों के सोशल मीडिया के पिछले 5 साल का रिकॉर्ड मांग रहा है। इससे जांच और सख्त हो जाएगी। कुल मिलाकर कुशल विदेशी कर्मचारियों के लिए अमेरिका जाना अब पहले से कहीं ज्यादा महंगा और मुश्किल हो जाएगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने गुरुवार को ट्रम्प गोल्ड कार्ड के लिए अप्लाई प्रोसेस शुरू करने का ऐलान किया था। कार्ड की कीमत 1 मिलियन डॉलर यानी करीब 9 करोड़ रुपए है। हालांकि कंपनियों को कार्ड के लिए 2 मिलियन डॉलर देना होगा। ट्रम्प ने इसी साल फरवरी में ‘गोल्ड कार्ड’ वीजा प्रोग्राम शुरू करने का ऐलान किया था।
लीक दस्तावेज से हड़कंप, यूरोप के खिलाफ अमेरिका की कथित प्लानिंग उजागर
13 Dec, 2025 06:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ब्रिटिश अखबार द टेलीग्राफ ने हाल ही में दावा किया है कि उसके हाथ एक ड्राफ्ट दस्तावेज लगा है. इस लीक हुए दस्तावेज से पता चला है कि अमेरिका, यूरोप को बर्बाद करना चाहता है, साथ ही भारत, चीन समेत एशियाई देशों के साथ नया गठबंधन बनाने की तैयारी कर रहा है | हालांकि इस दस्तावेज को अमेरिका ने फेक बताया है. US का कहना है शुक्रवार को जारी किया गया 29-पेज का US नेशनल सिक्योरिटी स्ट्रैटजी (NSS) ही असली और ऑफिशियल डॉक्यूमेंट है |
लीक दस्तावेज के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन यूरोपीय यूनियन (EU) को रणनीतिक रूप से कमजोर करने के लिए 3 देशों- ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी में सरकार बदलना चाहता है|साथ ही 4 देशों इटली, हंगरी, पोलैंड और ऑस्ट्रिया को EU से अलग करने की प्लानिंग कर रहा है. इसकी ये वजहें हो सकती है |
आर्थिक प्रतिस्पर्धा और व्यापार
यूरोपीयन यूनियन (EU) दुनिया की सबसे बड़ी आपस में जुड़ी हुई अर्थव्यवस्था है. EU का मजबूत होना, अमेरिका के व्यापारिक हितों के लिए चुनौती है. इसे कमजोर करके, अमेरिका यूरोपीय देशों के साथ अलग-अलग व्यापार सौदे कर सकता है, बेहतर ट्रेड डील हासिल कर सकता है. साथ ही यूरोपीय बाजार पर अधिक नियंत्रण रख सकता है| EU में शामिल 27 देशों की कुल GDP लगभग 17 ट्रिलियन डॉलर है. अमेरिका और EU के बीच सालाना 1 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा का व्यापार होता है. EU अमेरिका का सबसे बड़ा बड़ा ट्रेड पार्टनर माना जाता है|
NATO पर वित्तीय बोझ
ट्रंप और उनके मंत्री नाटो खर्च में यूरोप की हिस्सेदारी को लेकर अपनी नाराजगी जता चुके हैं. दरअसल, अमेरिका का कहना है NATO की सुरक्षा व्यवस्था का सबसे बड़ा बोझ वही उठाता है, जबकि कई यूरोपीय देश तय लक्ष्य के मुताबिक खर्च नहीं करते. NATO के नियमों के मुताबिक, सदस्य देशों को अपनी GDP का कम से कम 2% रक्षा पर खर्च करना चाहिए | रूस-यूक्रेन युद्ध और बढ़ते सुरक्षा खतरों के बाद कई यूरोपीय देशों ने रक्षा बजट बढ़ाने शुरू कर दिए हैं, लेकिन अमेरिका अब भी बराबर हिस्सेदारी की मांग करता है. नाटो के 32 सदस्य देश हैं. अमेरिका इसके कुल सैन्य खर्च का लगभग 65 से 70% हिस्सा अकेले उठाता है. इसके बाद जर्मनी (6%), ब्रिटेन (5.4%) और फ्रांस (4.3%) आते हैं |
यूरोप की माइग्रेशन पॉलिसी से नाराजगी
ट्रंप कई मौकों पर यूरोप की कमजोर इमिग्रेशन पॉलिसी को लेकर नाराजगी जता चुके हैं. हाल ही में ट्रंप ने इमिग्रेशन को लेकर ग्रेट रिप्लेसमेंट थ्योरी का जिक्र किया | इस थ्योरी में दावा किया जाता है कि प्रवासियों के आने से यूरोप कमजोर हो रहा है और अपनी पहचान खो रहा है. उन्होंने कहा कि यूरोप के कई नेता बहुत मूर्ख हैं और उनकी प्रवासन नीतियां पूरी तरह असफल साबित हुई हैं. ट्रंप का मानना है कि यूरोप में लगातार हो रहे इमिग्रेशन और फ्री स्पीच पर सेंसरशिप की वजह से सभ्यता के खत्म होने का खतरा मंडरा रहा है |
Core 5- नई वैश्विक व्यवस्था से फायदा
अमेरिका एक नई Core-5 गठबंधन बनाने की सोच रहा है, जिसमें अमेरिका, चीन, रूस, भारत और जापान शामिल होंगे. ये गठबंधन यूरोप को किनारे कर देगा. यह ऐसी रणनीति है, जिससे अमेरिका, यूरोप की सहमति के बिना वैश्विक फैसले ले सकता है |एशिया में अपनी स्थिति मजबूत कर सकता है. यूरोप के बजाय एशियाई महाशक्तियों के साथ सीधे डील कर सकता है |
राष्ट्रवादी सरकारों के साथ गठजोड़
ट्रंप यूरोप के देशों में राइट विंग (दक्षिणपंथी) सरकारों को इसलिए पसंद करते हैं, क्योंकि उनकी सोच और नीतियां कई अहम मुद्दों पर ट्रंप की विचारधारा से मेल खाती हैं. इटली में प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की सरकार सख्त इमिग्रेशन पॉलिसी, राष्ट्रवाद और पारंपरिक मूल्यों की बात करती है. यह रुख ट्रंप की अमेरिका फर्स्ट की सोच से मेल खाता है| हंगरी में प्रधानमंत्री विक्टर ऑर्बन खुले तौर पर अवैध इमिग्रेशन और यूरोपीय यूनियन की नीतियों का विरोध करते हैं. ट्रंप कई बार ऑर्बन की तारीफ कर चुके हैं |
पोलैंड NATO पर रक्षा खर्च बढ़ाने वाले देशों में भी रहा है, जो ट्रंप की मुख्य मांग रही है. ऑस्ट्रिया की सरकार भी इमिग्रेशन सीमित करने और EU की ताकत घटाने की बात करती हैं | ये सभी बातें ट्रंप की सोच से मेल खाती हैं. चारों ही देशों में फिलहाल राइट विंग पार्टियों की सरकार है, यही वजह है कि लीक डॉक्यूमेंट में इन 4 देशों को EU से अलग करने की बात कही गई है |
रूस-चीन को बैलेंस करने की जरूरत
नई रणनीति रूस के साथ रणनीतिक स्थिरता को बढ़ावा देती है. अगर EU कमजोर होता है, तो यूक्रेन युद्ध में यूरोप की आवाज कमजोर होगी और अमेरिका-रूस सीधे समझौता कर सकते हैं | एक एकजुट यूरोप अमेरिका-चीन के बीच चल रहे कॉम्पिटिशन में तीसरी शक्ति बन सकता है | यूरोप को कमजोर करके और Core-5 बनाकर, अमेरिका चीन के साथ सीधे डील कर सकता है |
पुतिन का सख्त संदेश? पाकिस्तान के PM शहबाज़ शरीफ को मीटिंग से पहले कराया 40 मिनट इंतजार
13 Dec, 2025 04:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ इस समय सुर्खियों में बने हुए हैं. शहबाज शरीफ हाल ही में इंटरनेशनल फोरम फॉर पीस एंड ट्रस्ट में हिस्सा लेने तुर्कमेनिस्तान गए थे | इस मौके पर रूस के राष्ट्रपति पुतिन, तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोआन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान भी मौजूद थे. लेकिन, तुर्कमेनिस्तान में पाक पीएम शहबाज शरीफ और रूस के राष्ट्रपति पुतिन को लेकर खूब चर्चा हो रही है. शहबाज शरीफ ने पुतिन से मिलने के लिए 40 मिनट तक इंतजार किया. इसी के बाद अब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी बेइज्जती का सामना करना पड़ा है. हालांकि, अब सामने आया है कि दोस्त तुर्की की ही वजह से पाक पीएम को इतनी फजीहत का सामना करना पड़ा है |
पीएम शहबाज शरीफ उस हॉल में जाकर बैठ गए थे, जहां उन्हें पुतिन से मुलाकात करनी थी. आरटी इंडिया ने एक वीडियो भी रीलीज किया था जिसे बाद में हटा दिया गया, इस वीडियो में एक रूम में पाकिस्तानी और रूसी झंडा है. वहीं, कुर्सी पर अकेले बैठे पाक पीएम पुतिन का इंतजार कर रहे हैं | रिपोर्ट्स के मुताबिक, शहबाज शरीफ ने पूरे 40 मिनट तक पुतिन का इंतजार किया. इसी के बाद अब सामने आ गया है कि आखिर क्यों शहबाज शरीफ को पुतिन का इंतजार करना पड़ा |
क्यों करना पड़ा इंतजार?
शहबाज शरीफ के सामने आए फोटो-वीडियो के बाद सोशल मीडिया पर इसकी खूब चर्चा हो रही है | साथ ही पाक पीएम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेइज्जती का सामना करना पड़ा है. हालांकि, अब सामने आया है कि दोस्त तुर्की की ही वजह से पीएम शहबाज शरीफ को इस बेइज्जती का सामना करना पड़ा है |
रूसी अखबार कोमर्सांत ने इस घटना को लेकर जानकारी दी. रूसी अखबार की रिपोर्ट से ही पता लगता है कि आखिर क्यों शहबाज शरीफ को पुतिन का 40 मिनट तक इंतजार करना पड़ा | अखबार ने रिपोर्ट किया, पुतिन के साथ एर्दोआन की बैठक इतनी लंबी चली कि पास के कमरे में इंतजार कर रहे पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ आधे घंटे तक अकेले बैठे रह गए | अकेले बैठे रहने से वो थक गए. इसी के बाद वो उठे, दरवाजा खोला और सीधे उस हॉल में चले गए जहां पुतिन और तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोआन के बीच बैठक चल रही थी |
एक और रूसी अखबार एमकेआरयू (MKRU) ने भी इस बैठक का जिक्र किया. अखबार ने कहा कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी तुर्की और रूस के राष्ट्रपतियों के बीच हुई बैठक में शामिल हुए और इस दौरान क्षेत्रीय सुरक्षा मुद्दों और मध्यस्थ के रूप में तुर्की की भूमिका पर भी चर्चा हुई | हालांकि, इस संयुक्त बैठक के बाद अभी तक पाकिस्तानी सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है |
पुतिन-एर्दोआन की मीटिंग में घुसे
आरटी इंडिया ने एक वीडियो भी शेयर की थी. वीडियो के अनुसार, तुर्कमेनिस्तान में अंतरराष्ट्रीय फोरम के दौरान, शरीफ की रूस के राष्ट्रपति के साथ तय द्विपक्षीय बैठक में देरी हो गई थी | इसी के चलते वो लंबे समय तक पुतिन का इंतजार करते रहे. इसी के बाद वो उठे और उस कमरे में चले गए जहां राष्ट्रपति पुतिन और तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोआन के बीच बैठक चल रही थी | हालांकि, आरटी इंडिया ने बाद में यह वीडियो यह कहते हुए हटा दिया कि यह पोस्ट घटनाओं की गलत प्रस्तुति हो सकती है|
PAK ने मामले को लेकर क्या कहा?
प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, शहबाज शरीफ ने शुक्रवार को तुर्की, तुर्कमेनिस्तान और ईरान के राष्ट्रपतियों के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी कीं| इसके अलावा, उन्होंने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान, ताजिकिस्तान के राष्ट्रपति इमोमाली रहमान और किर्गिजस्तान के राष्ट्रपति सादिर जपारोव के साथ अनौपचारिक मुलाकातें भी कीं |
प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ की कई नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकों के बाद, प्रधानमंत्री हाउस ने इन बैठकों पर एक रिपोर्ट भी जारी की | पाकिस्तान ने पुतिन और शहबाज शरीफ को लेकर कहा, दोनों नेताओं के बीच कोई औपचारिक द्विपक्षीय बैठक नहीं हुई, लेकिन पाकिस्तानी प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा जारी एक वीडियो में शहबाज शरीफ और व्लादिमीर पुतिन को हाथ मिलाते और बातचीत करते हुए देखा जा सकता है |
भीषण आग से हिल गई फिलीपींस की राजधानी, जानें क्यों होती है आगजनी
13 Dec, 2025 01:19 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
12 दिसंबर 2025 को शाम करीब 6:38 बजे फिलीपींस की राजधानी मनीला के मंडलुयोंग सिटी में एक घनी आबादी वाले रिहायशी इलाके में भीषण आग लग गई. यह आग बैरंगेय प्लेजेंट हिल्स के ब्लॉक 5, नुवेवे दे फेब्रेरो में शुरू हुई और जल्दी ही फैल गई क्योंकि घर हल्की और जल्दी जलने वाली सामग्री से बने थे |
आग की लपटें बहुत ऊंची उठीं और काला धुआं दूर तक दिखाई दिया जिससे शाम का आसमान नारंगी हो गया. आग का अलार्म तेजी से बढ़ता गया और शाम 7:19 बजे तक यह बड़े स्तर पर फैल चुकी थी |
20 से ज्यादा दमकल गाड़ियों ने आग बुझाई
दमकल विभाग ने 20 से ज्यादा फायर ट्रक और आसपास के इलाकों से टीमों को लगाया. आग पर आधी रात तक काबू पा लिया गया लेकिन नुकसान का आकलन अभी जारी है. इस आग से करीब 500 परिवार बेघर हो गए और उनके घर पूरी तरह जलकर राख हो गए. अच्छी बात यह है कि इस हादसे में अभी तक किसी के घायल होने या मरने की कोई खबर नहीं आई |
गरीब बस्तियों में आग मुसीबत बनी
मेट्रो मनीला के गरीब बस्तियों में ऐसी आग बार-बार लगती है क्योंकि वहां घर बहुत करीब-करीब बने होते हैं. बिजली की वायरिंग खराब होती है और गलियां संकरी होती हैं जिससे दमकल गाड़ियां मुश्किल से पहुंच पाती हैं. यह घटना शहर की आग सुरक्षा की समस्याओं को फिर से उजागर करती है |
मनीला के इलाके में आगजनी नई बात नहीं
इससे पहले 6 अगस्त 2025 को टोंडो के हैप्पीलैंड अरोमा इलाके में बड़ी आग लगी जिसमें सैकड़ों परिवार प्रभावित हुए |
सितंबर 2025 में टोंडो में दो अलग-अलग आग लगीं एक 13 सितंबर को हैप्पीलैंड में जिसने करीब 1100 परिवारों को प्रभावित किया और अगले दिन दूसरी आग लगी |
नवंबर 2024 में टोंडो के इस्ला पुटिंग बाटो इलाके में बहुत बड़ी आग लगी जिसमें करीब 1000 घर जल गए और 8000 से ज्यादा लोग बेघर हो गए. यह आग आठ घंटे तक जलती रही और हेलिकॉप्टर से पानी डाला गया |
मार्च 2024 में टोंडो के हैप्पीलैंड में आग लगी जिसमें दमकल कर्मियों पर हमला भी हुआ |
दिसंबर 2023 में भी हैप्पीलैंड में आग से 1500 से ज्यादा लोग बेघर हुए थे
2017 में एक स्लम एरिया में आग से 15000 लोग बेघर हो गए थे |
BNP ने किया बड़ा खुलासा, 17 साल बाद लंदन से लौटे शख्स से बदल सकता है चुनावी खेल
13 Dec, 2025 12:13 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बांग्लादेश में जहां चुनाव की तारीखों का ऐलान हो गया है. 12 फरवरी को देश में चुनाव होंगे. इस बीच अब तक देश में सामने आ रही सबसे बड़ी पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने बड़ा कदम उठाया है | देश की पूर्व पीएम और पार्टी की अध्यक्ष खालिदा जिया की तबीयत बिगड़ती जा रही है. इस बीच बीएनपी ने घोषणा की है कि खालिदा जिया के बेटे और पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष तारिक रहमान 25 दिसंबर को ढाका लौटेंगे. पूरे 17 साल तक वो स्व-निर्वासन (Self-Exile) में लंदन में रहते थे |
इसी के साथ अब 17 साल बाद चुनाव के चलते वो 25 दिसंबर को बांग्लादेश लौटने वाले हैं. पार्टी की तरफ से यह ऐलान ऐसे समय में किया गया है, जब खालिदा जिया की सेहत गंभीर रूप से बिगड़ गई है और राजनीतिक माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है. BNP के महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने बताया कि यह फैसला पार्टी की स्थायी समिति की बैठक में लिया गया |
खालिदा जिया की बिगड़ी तबीयत
उन्होंने कहा, हमें यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि हमारे कार्यकारी अध्यक्ष तारिक रहमान 25 दिसंबर को ढाका लौटेंगे. आलमगीर ने आगे कहा कि पार्टी उनका स्वागत करती है. बांग्लादेश की पूर्व पीएम 80 वर्षीय खालिदा जिया 23 नवंबर से ढाका के एवरकेयर अस्पताल में भर्ती हैं. वो कई बीमारियों से जूझ रही हैं. गुरुवार को उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया |
एक विस्तृत बयान में उनकी मेडिकल बोर्ड के प्रमुख, हृदय रोग विशेषज्ञ शाहाबुद्दीन तालुकदार ने कहा कि जिया के शरीर में ऑक्सीजन का स्तर अचानक गिर गया और कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर बढ़ गया. बयान में कहा गया, उन्हें सांस लेने में दिक्कत बढ़ गई, ऑक्सीजन का स्तर गिर गया और कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर बढ़ गया |
क्यों लौट रहे भारत
रहमान लंबे समय से विदेश से ही पार्टी के वास्तविक नेता के रूप में एक्टिव रहे हैं और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए रणनीति का समन्वय करते रहे हैं. BNP नेताओं ने कहा, अस्पष्ट कारणों से वो अपने देश लौटकर अपनी बीमार मां के साथ नहीं रह पाए हैं |
रहमान की वापसी की घोषणा ऐसे समय में की गई है, जब उससे एक दिन पहले बांग्लादेश के चुनाव आयोग ने पुष्टि की थी कि 13वां संसदीय चुनाव 12 फरवरी को आयोजित किया जाएगा. BNP ने संकेत दिया है कि अगर खालिदा जिया राजनीतिक जिम्मेदारियां निभाने की स्थिति में नहीं होती हैं, तो पार्टी के सत्ता में आने की स्थिति में रहमान को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया जाएगा |
साल 2008 में शेख हसीना के सत्ता में आते ही तारिक रहमान अपने परिवार के साथ लंदन चले गए थे. तारिक पर हसीना सरकार में कई गंभीर मुकदमे दर्ज किए गए थे. तारिक इस वजह से लंदन में ही रह रहे थे |
PM रेस में सबसे आगे
तारिक रहमान पीएम की रेस में बड़ा चेहरा बन कर सामने आ सकते हैं. देश में हो रहे सर्वे में बीएनपी को बढ़त मिलती दिखाई दे रही है. बीएनपी नेता तारिक रहमान पीएम की रेस में सबसे आगे हैं. बांग्लादेश में अब तक जितने भी सर्वे आए हैं, उसमें बीएनपी को ही बढ़त मिलती दिख रही है |
सर्वे अगर रिजल्ट में तब्दील हो जाता है तो तारिक बांग्लादेश के प्रधानमंत्री बन सकते हैं. इससे पहले साल 2001 में तारिक की मां आखिरी बार बांग्लादेश की प्रधानमंत्री नियुक्त हुई थीं. तब से तारिक का परिवार सत्ता से दूर है. इस बीच अगर तारिक बांग्लादेश आ जाते हैं और लोगों के बीच जाते हैं. रणनीति तय करते हैं तो इससे पार्टी को खासा फायदा मिलने की उम्मीद है |
म्यांमार में सैन्य जुंटा ने किया अस्पताल पर हवाई हमला, 31 की मौत, 70 घायल
12 Dec, 2025 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नेपीडा। म्यांमार की सैन्य जुंटा ने गुरुवार को रखाइन स्टेट में बड़ा हमला किया है। म्यांमार सेना ने अस्पताल को निशाना बनाते हुए यह हवाई हमला किया। इस बमबारी में अस्पताल में मौजूद कम से कम 31 लोग मारे गए हैं। वहीं करीब 70 घायल हुए हैं। अराकान आर्मी के गढ़ कहे जाने वाले पश्चिमी रखाइन राज्य के म्राउक-यू शहर स्थित अस्पताल पर ये अटैक ऐसे समय हुआ है, जब जुंटा ने विद्रोहियों पर हमले तेज कर दिए हैं। जुंटा ने इस महीने शुरू होने वाले चुनावों से पहले अपनी सैन्य कार्रवाई तेज की है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अस्पताल कर्मी ने बताया कि स्थिति बहुत भयानक है। अभी तक 31 मौतों की पुष्टि हो चुकी है। ये संख्या और भी बढ़ सकती है। मलबे से 70 घायल लोग निकाले गए हैं। इनमें से कई की हालत गंभीर है। उन्होंने कहा कि रातभर अस्पताल पर बम बरसाए गए। जुंटा सेना ने हालिया दिनों में लगातार हवाई हमले किए हैं। पिछले हफ्ते म्यांमार की जुंटा सेना ने ऊपरी-मध्य क्षेत्र सगाइंग में एक चाय की दुकान पर हवाई हमला किया था। ये हमला तब किया गया था जब यहां काफी भीड़ थी। हमले में कम से कम 18 नागरिकों की मौत हो गई थी और 20 लोग घायल हुए थे।
म्यांमार की सेना ने 28 दिसंबर को चुनाव कराने की घोषणा की है। सेना का कहना है कि यह कदम लड़ाई खत्म करने के लिए उठाया गया है। दूसरी ओर विद्रोही समूहों ने उन इलाकों में चुनाव रोकने की कसम खाई है, जिन पर उनका कब्जा है। सेना इन इलाकों को वापस पाने के लिए हवाई हमले कर रही है। बता दें म्यांमार में तीन साल से ज्यादा समय से गृहयुद्ध चल रहा है। 2021 के सैन्य तख्तापलट के बाद से ही देश में हिंसा जारी है। एक तरफ जुंटा कहा जाने वाला सैन्य शासन है तो दूसरी ओर विद्रोही गुट हैं। इस संघर्ष ने देश में बड़े पैमाने पर विस्थापन और मानवीय संकट पैदा किया है।
पाकिस्तान बार-बार सीमा कर देता है बंद, अफगान को हो रहा व्यापार में भारी नुकसान
12 Dec, 2025 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जेनेवा। भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अफगानिस्तान में पाकिस्तान के हमलों की कड़ी निंदा की। पाकिस्तान के हमलों में महिलाओं, बच्चों और यहां तक कि स्थानीय क्रिकेट खिलाड़ियों की भी मौत हुई है। भारत ने इन्हें अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए ख़तरा बताया है। इस हफ्ते की शुरुआत में तालिबान और पाकिस्तानी सैनिकों के बीच ताजा झड़पें हुईं। दोनों देशों ने दो महीने पहले सीमा पर हफ्तों से चल रही लड़ाई रोकने के लिए संघर्षविराम पर सहमति जताई थी, लेकिन अब दोनों पक्ष एक बार फिर एक-दूसरे पर हमले कर रहे हैं। दोनों ही देशों ने एक-दूसरे पर संघर्षविराम तोड़ने के आरोप लगाए हैं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वतनेनि हरीश ने कहा कि पाकिस्तान की व्यापार और परिवहन आतंकवाद की नीति पर भारत गहरी चिंता व्यक्त करता है। अफगानिस्तान चारों तरफ से जमीन से घिरा है और ऐसे में पाकिस्तान बार-बार उससे लगी सीमा बंद कर देता है जिससे उसके व्यापार को भारी नुकसान पहुंच रहा है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि ने कहा कि हम संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून का पूर्ण सम्मान करने की अपील का समर्थन करते हैं, खासकर निर्दोष नागरिकों की सुरक्षा पर जोर देते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि हम ऐसे कृत्यों की निंदा करते हैं और साथ ही अफगानिस्तान की क्षेत्रीय अखंडता, संप्रभुता और स्वतंत्रता का दृढ़ समर्थन करते हैं। बता दें पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बीच सीमा पर संघर्ष तब शुरू हुआ जब इस साल अक्टूबर की शुरुआत में पाकिस्तान ने काबुल पर हवाई हमला कर दिया था। अफगानिस्तान ने भी जवाबी हमला किया लेकिन लड़ाई उस समय तेज हो गई, जब अफगान विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी भारत यात्रा पर आए थे। यह झड़पें 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद सबसे गंभीर थीं।
कई हफ्तों की लड़ाई के बाद 19 अक्टूबर को कतर और तुर्की की मध्यस्थता से दोनों पक्षों ने संघर्षविराम पर सहमति जताई। तालिबान सरकार के एक प्रवक्ता ने दावा किया कि पाकिस्तान ने ही नई झड़पों की शुरुआत की और काबुल के मजबूरी में जवाब देना पड़ा। हरीश ने कहा कि भारत सुरक्षा स्थिति पर करीबी नजर रखे हुए है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से साथ मिलकर कार्रवाई की अपील करता है ताकि संयुक्त राष्ट्र की तरफ से नामित आतंकी संगठनों- जैसे अल-कायदा, लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और उनके प्रॉक्सी समूह जैसे द रेसिस्टेंस फ्रंट को सीमा पार सक्रिय होने से रोका जा सके।
उन्होंने कहा कि तालिबान के साथ व्यवहारिक संवाद की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान के खिलाफ केवल दंडात्मक नीति असफल साबित हुई है। उन्होंने कहा कि हम संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील करते हैं कि वे ऐसी नीतियां अपनाएं जो अफगानिस्तान के लोगों के लिए स्थायी लाभ ला सकें।
ऑयल टैंकर पर अमेरिका के कई कमांडो रस्सियों के सहारे उतरे और कर लिया कब्जा
12 Dec, 2025 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिका ने वेनेजुएला के तट के पास बीच समंदर में एक बहुत बड़े क्रूड ऑयल टैंकर को जब्त किया है। बुधवार को अमेरिकी अटॉर्नी जनरल पैम बॉन्डी ने सोशल मीडिया पर इस ऑपरेशन का 45 सेकंड का वीडियो जारी किया है। वीडियो में दो सैन्य हेलिकॉप्टर समुद्र के ऊपर तेजी से उड़ते हुए एक टैंकर को घेरते हैं। उनसे कई कमांडो रस्सियों के सहारे टैंकर के डेक पर उतरते हैं और कुछ ही मिनटों में टैंकर को अपने कब्जे में ले लेते हैं।
व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी इस जब्ती की पुष्टि की। दूसरी ओर, वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने इस कार्रवाई को समुद्री डकैती और खुलेआम चोरी करार देते हुए इसकी कड़ी निंदा की है। ट्रम्प ने कहा कि हमने वेनेजुएला के तट पर एक टैंकर जब्त कर लिया है, बहुत बड़ा टैंकर, शायद अब तक का सबसे बड़ा। जब उनसे पूछा गया कि जहाज में भरे लाखों बैरल तेल का क्या होगा, तो ट्रम्प ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि हम रख लेंगे, मुझे ऐसा लगता है।
अटॉर्नी जनरल बॉन्डी ने कहा कि यह जहाज कई सालों से अमेरिकी प्रतिबंधों की सूची में था क्योंकि यह वेनेजुएला और ईरान के प्रतिबंधित तेल को गैरकानूनी तरीके से ले जा रहा था। इस तेल की कमाई से विदेशी आतंकवादी संगठनों को मदद पहुंचाई जा रही थी। वहीं, तीन अमेरिकी अधिकारियों ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि जहाज वेनेजुएला का तेल लेकर जा रहा था। मिलिट्री ऑपरेशन का जहाज के कर्मचारियों ने कोई विरोध नहीं किया और ऑपरेशन में किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचा। बॉन्डी ने इसे पूरी तरह सुरक्षित और सफल ऑपरेशन बताया और कहा कि प्रतिबंधित तेल की तस्करी करने वाले छिपे हुए नेटवर्क को तोड़ने के लिए ऐसे अभियान आगे भी जारी रहेंगे।
वहीं वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने कहा कि अमेरिका उनका तेल हथियाना चाहता है। सितंबर से अब तक अमेरिका कैरेबियन सी में 22 से अधिक हमले कर चुका है, जिनमें 80 से ज्यादा लोग मारे गए। अमेरिका का दावा है कि वेनेजुएला की नाव से नशीले पदार्थों की तस्करी होती हैं। हालांकि अमेरिका ने कभी इसका सबूत नहीं दिया।
जापान में महाभूकंप का अलर्ट, इसका असर हो सकता है भारत तक?
12 Dec, 2025 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
टोक्यो। जापान में हाल ही में 7.5 (बाद में 7.6 से बदलकर) तीव्रता का भूकंप आया, जिसने सड़क, बिजली और मकानों को नुकसान पहुँचाया और 70 सेंटीमीटर तक सुनामी लहरें भी आईं। जापान की मौसम विज्ञान एजेंसी ने ऑफ द कोस्ट ऑफ होक्काइडो एंड सैनरिकु सबसीक्वेंट अर्थक्वेक एडवाइजरी नामक एक विशेष अलर्ट जारी किया है। यह अलर्ट 7.0 या उससे अधिक की तीव्रता वाले भूकंप के बाद सक्रिय होता है। इसका मतलब है कि अगले सात दिनों तक 8 या उससे ज्यादा तीव्रता वाले भूकंप के आने की संभावना सामान्य से अधिक है, हालांकि इसकी कुल संभावना अभी भी कम है। यह महाभूकंप मुख्य रूप से उत्तर-पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में सुनामी और झटकों का खतरा पैदा करेगा, जिससे जापान, रूस का सुदूर पूर्व और संभवतः अलास्का के कुछ हिस्से प्रभावित होगा।
भारत पर असर
जानकारी के अनुसार, भारत पर जापान के इस महाभूकंप का कोई खास असर होने की संभावना नहीं है। रिसर्चों से पता चलता है कि जापान-ट्रेंच प्रकार की घटनाओं से उत्पन्न ऊर्जा प्रशांत महासागर में केंद्रित होती है। हिंद महासागर और भारत मुख्य रूप से सुंडा (जावा) ट्रेंच जैसे सबडक्शन ज़ोन के साथ आने वाले मेगाथ्रस्ट भूकंपों से प्रभावित होते हैं। भारत में अब तक की सबसे भीषण सुनामी 2004 में सुमात्रा के पास आए 9.1 तीव्रता के भूकंप के बाद आई थी। प्रशांत महासागर में आए भूकंपों से भारत में कोई खास असर नहीं पड़ा है। भारतीय वैज्ञानिक भारत के तटों के लिए सुंडा ट्रेंच और अरब सागर को सुनामी का मुख्य स्रोत मानते हैं। जापान की यह चेतावनी भारत के लिए साझा टेक्टोनिक संवेदनशीलता और प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों के महत्व को दर्शाती है, लेकिन इससे आने वाले दिनों में भारतीय तटों पर सुनामी या भूकंप के खतरे के बढ़ने का कोई संकेत नहीं मिलता है।
जापान में बार-बार भूकंप क्यों आते हैं?
जापान एक इसतरह के क्षेत्र में स्थित है जहाँ पैसिफिक प्लेट उत्तरी अमेरिकी और ओखोत्स्क प्लेटों के नीचे खिसकती है। इस प्रक्रिया को सबडक्शन ज़ोन कहते हैं। जापान और कुरिल ट्रेंच के साथ, ये प्लेटें बहुत अधिक दबाव जमा करती हैं, जो कभी-कभी बड़े मेगाथ्रस्ट भूकंपों के रूप में बाहर आता है।
पोखरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्रोजेक्ट में भ्रष्टाचार, मंत्रियों समेत 55 पर मामला दर्ज
12 Dec, 2025 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
काठमांडू। नेपाल में पोखरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्रोजेक्ट में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ है। 2012 में 620 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत वाला यह प्रोजेक्ट 892 करोड़ पर पहुंच गया। जांच के बाद नेपाल की कमिशन फॉर इन्वेस्टिगेशन ऑफ एब्यूज ऑफ अथॉरिटी (सीआईएए) ने पांच पूर्व मंत्रियों, दस पूर्व सचिवों समेत कुल 55 लोगों और चीनी कंपनी चाइना सीएएमसी इंजीनियरिंग पर भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक एयरपोर्ट 2023 में शुरू हुआ था, लेकिन ढाई साल में यहां सिर्फ 45 इंटरनेशनल फ्लाइट्स आईं और करीब 3,000 यात्री पहुंचे, जबकि इसे पश्चिमी नेपाल का अंतरराष्ट्रीय पर्यटन हब घोषित किया गया था। पोखरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को कभी नेपाल के “गेटवे ऑफ वर्ल्ड” के रूप में पेश किया गया। दावा किया गया था कि यह पश्चिमी नेपाल का अंतरराष्ट्रीय पर्यटन हब बनेगा और टूरिस्ट बढ़ेंगे। संचालन के ढाई साल बाद यहां सिर्फ 45 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें दर्ज की गई हैं। हिमालयन एयरलाइंस और सिचुआन एयरलाइंस ने कुछ टेस्ट फ्लाइट्स चलाईं, लेकिन नियमित सेवा नहीं चल सकीं। पोखरा एयरपोर्ट प्रोजेक्ट चीन के एग्जिम बैंक से लोन लेकर बनाई गई थी और इसे नेपाल की पर्यटन क्षमता दोगुनी करने वाला प्रोजेक्ट बताया गया था।
नेपाल की सीआईएए ने पोखरा एयरपोर्ट के निर्माण में भारी अनियमितताओं का खुलासा करते हुए 55 लोगों और चीनी कंपनी चाइना सीएएमसी इंजीनियरिंग कंपनी लिमिटेड पर भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया है। यह नेपाल के इतिहास के सबसे बड़े भ्रष्टाचार मामलों में से एक माना जा रहा है। जांच एजेंसी के मुताबिक नेपाल के कुछ अधिकारियों ने चीनी कंपनी सीएएमसी के साथ मिलकर रकम में अनैतिक फेरबदल किया। एयरपोर्ट का निर्माण 2016 में शुरू हुआ था। उस समय नेपाल के पूर्व पीएम केपी शर्मा ओली थे और चीन के साथ यह डील भी उनकी ही सरकार में औपचारिक रूप से आगे बढ़ी। एयरपोर्ट 2023 में शुरू हुआ, लेकिन बड़े दावों के बावजूद इसके अंतरराष्ट्रीय उड़ानें करीब न के बराबर रहीं।
इस मामले में रामशरण महत (पूर्व वित्त मंत्री), भीम प्रसाद आचार्य (पूर्व पर्यटन एवं नागरिक उड्डयन मंत्री), दीपक चन्द्र अमात्य (पूर्व पर्यटन मंत्री), रामकुमार श्रेष्ठ (पूर्व पर्यटन मंत्री) और बहादुर बोगटी (दिवंगत) (पूर्व पर्यटन मंत्री) को मुख्य आरोपी बनाया गया है। इसके अलावा अधिकारियों में नेपाल नागरिक उड्डयन प्राधिकरण के निलंबित महानिर्देशक प्रदीप अधिकारी, पूर्व महानिर्देशक रत्नचन्द्र लाल सुमन और पूर्व महानिर्देशक त्रिरत्न मानन्धर शामिल हैं।
चीनी महिला के कदम से लोगों के बीच छिडी बहस
11 Dec, 2025 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग । एक चीनी महिला ने ऐसा हैरान कर देने वाला कदम उठाया है, जिसने लोगों के बीच बहस छेड़ दी है। इस महिला ने अपनी ही दो बेटियों के स्थान पर एक बेटी को विज्ञापन के जरिए नौकरी पर रखने की पेशकश की है, जिसके बदले वह करीब 420 डॉलर मासिक वेतन और रहने के लिए एक फ्लैट देने को तैयार है।
एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, हेनान प्रांत की रहने वाली इस महिला का नाम मा है, जिसने एक स्थानीय टीवी कार्यक्रम पर यह विज्ञापन जारी किया। कार्यक्रम के दौरान मा ने बताया कि वह अपनी दो बेटियों के बावजूद अकेली हैं। उनकी बड़ी बेटी ने पोती की परवरिश को लेकर हुए विवाद के बाद उनसे सारे संबंध तोड़ लिए। बड़ी बेटी का कहना है कि वह बेरोजगार है और न तो मा की देखभाल कर सकती है, न ही उससे कोई नाता रखना चाहती है। दूसरी ओर, उनकी छोटी बेटी मानसिक रूप से बीमार है और स्वयं की देखभाल करने में सक्षम नहीं। मा काफी पहले अपने पति से तलाक ले चुकी हैं और समय के साथ अन्य रिश्तेदारों से भी उनका संपर्क धीरे-धीरे समाप्त हो गया। विज्ञापन में मा ने लिखा कि वह अस्थमा से पीड़ित हैं और उन्हें ऐसी लड़की की जरूरत है, जो उनकी देखभाल करे, समय पर अस्पताल ले जाए और उन्हें एक बेटी की तरह स्नेह दे। बदले में वह अपनी संपत्तियों में से एक फ्लैट और 420 डॉलर की नियमित पेंशन देने के साथ, पूरे समझौते का कानूनी कॉन्ट्रैक्ट करने को भी तैयार हैं।
इस अनोखे विज्ञापन ने चीनी सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया पैदा की है। कुछ लोगों ने इसे मानवीय परिस्थिति से उपजा दुखद प्रयास बताया, जबकि कई लोगों ने इसे भावनात्मक शोषण माना। एक यूजर ने लिखा कि ऐसा लगता है जैसे मा किसी ऐसी लड़की की तलाश कर रही है जो उसकी और उसकी बीमार बेटी दोनों की देखभाल करे। एक अन्य व्यक्ति ने टिप्पणी की कि प्रॉपर्टी मार्केट के गिरावट और कम पैसों में दो लोगों की सेवा करने के लिए नेनी भी नहीं मिल सकती। वहीं एक वकील ने कहा कि कानून के अनुसार वृद्ध माता-पिता की देखभाल करना बड़ी बेटी की जिम्मेदारी है और मा इस जिम्मेदारी से कानूनी प्रक्रिया के जरिए अलग नहीं हो सकतीं। ध्यान देने योग्य है कि चीन में बुजुर्गों की अकेलेपन की समस्या लगातार बढ़ रही है। 2021 में हुए सर्वे के अनुसार, 60 वर्ष से अधिक आयु के लगभग 60 प्रतिशत बुजुर्ग अकेले रहते हैं।
दक्षिण कोरिया में चौंकाने वाला साइबर हमला उजागर
11 Dec, 2025 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सियोल। हाल ही में दक्षिण कोरिया में एक चौंकाने वाला साइबर हमला सामने आया है। इस ताजा हमले ने तकनीकी सुरक्षा और निजी गोपनीयता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लगभग 1 लाख 20 हजार सीसीटीवी कैमरों को चार आरोपियों ने हैक कर लिया और उनकी रिकॉर्डिंग को विदेशी वेबसाइट पर यौन शोषण संबंधी सामग्री के रूप में बेचा।
यह घटना इसलिए और भी चिंता का विषय है क्योंकि भारत में भी घरों और दुकानों में सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन अधिकांश लोग इसके साइबर खतरों से अनजान हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, सबसे ज्यादा खतरा आईपी कैमरों को हैक होने का रहता है। ये कैमरे इंटरनेट से जुड़े होने के कारण सुविधाजनक तो हैं, लेकिन साइबर हमलावरों के लिए इन्हें निशाना बनाना आसान हो जाता है।
ज्यादातर कैमरे डिफॉल्ट पासवर्ड के साथ आते हैं, जिसे बदलना लोग भूल जाते हैं। अगर पासवर्ड कमजोर या फैक्ट्री सेट रहता है, तो कोई भी हैकर दूर बैठे-बैठे कैमरा एक्सेस कर सकता है और घर के अंदर की गतिविधियों पर नजर रख सकता है। ‘शोडन’ नाम की वेबसाइट ऐसे कैमरों की खोज करती है और उनकी लाइव फीड को इंटरनेट पर उजागर कर देती है। कई बार हैकर्स इन वीडियो को विदेशी वेबसाइट पर भी अपलोड कर देते हैं। हैकर्स कैमरे का डायरेक्शन बदलकर घर के बेडरूम या निजी जगहों तक की गतिविधियों को देख सकते हैं। इसका मतलब यह है कि आपके रोजमर्रा के काम जैसे सोना, खाना या कपड़े बदलना भी उनके हाथों में आ सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस खतरे से बचने के लिए सबसे जरूरी कदम है मजबूत और अलग-अलग पासवर्ड सेट करना, जिसमें बड़े और छोटे अक्षर, नंबर और स्पेशल कैरेक्टर शामिल हों। इसके अलावा मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन चालू करना, सॉफ्टवेयर और फर्मवेयर को हमेशा लेटेस्ट वर्जन में अपडेट रखना बेहद जरूरी है। साइबर सुरक्षा में सावधानी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। कैमरा कभी अपने आप घूमे या असामान्य आवाज़ आए तो तुरंत पासवर्ड बदलें और साइबर सेल या पुलिस में शिकायत दर्ज कराएं। बेडरूम, बाथरूम या संवेदनशील जगहों में कैमरा लगाने से बचें। अगर ये सरल लेकिन प्रभावी उपाय अपनाए जाएं, तो घरों और दुकानों के कैमरे हैकर्स की पहुंच से सुरक्षित रह सकते हैं।
नेपाल में भ्रष्टाचार: पोखरा एयरपोर्ट में 74 मिलियन डॉलर की गड़बड़ी, 55 अधिकारियों और चीनी कंपनी पर केस
11 Dec, 2025 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
काठमांडू। नेपाल में चीन के बढ़ते प्रभाव को लेकर नया और बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। देश की भ्रष्टाचार जांच आयोग ने पोखरा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के निर्माण में भारी अनियमितता का आरोप लगाते हुए 55 नेपाली अधिकारियों और चीनी कंपनी सीएएमसी इंजीनियरिंग के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। आयोग का दावा है कि इस प्रोजेक्ट में 74 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 10 अरब नेपाली रुपए) से अधिक की धांधली हुई है। इसे नेपाल के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा भ्रष्टाचार मामला माना जा रहा है।
आयोग के अनुसार, 2012 में प्रोजेक्ट की बिडिंग मात्र 169.6 मिलियन डॉलर में हुई थी, लेकिन बाद में खर्च को बढ़ाकर 244 मिलियन डॉलर कर दिया गया। यह अतिरिक्त राशि कथित रूप से अधिकारियों और चीनी कंपनी ने मिलकर हड़पी। पोखरा हवाई अड्डा चीन के एक्जिम बैंक से मिले भारी कर्ज पर बनाया गया था। यह नेपाल के प्रमुख पर्यटन शहर पोखरा में स्थित है, जो अन्नपूर्णा ट्रेकिंग रूट का मुख्य द्वार है। जनवरी 2023 में उद्घाटन के बावजूद हवाई अड्डे पर अंतरराष्ट्रीय उड़ानें लगभग शून्य हैं और यह घाटे में चल रहा है। इस मामले ने नेपाल में चीन की आक्रामक आर्थिक नीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि चीन अपनी कंपनियों और कर्ज के जरिए नेपाल में राजनीतिक तथा आर्थिक प्रभाव बढ़ा रहा है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब नेपाल में भ्रष्टाचार के खिलाफ सितंबर में हुए बड़े जन-आंदोलन में दर्जनों लोग मारे गए थे और सरकार को इस्तीफा देना पड़ा था। अब यह मुकदमा काठमांडू की विशेष अदालत में चलेगा, लेकिन नेपाल में ऐसे बड़े केस अक्सर सालों तक लटके रहते हैं। मार्च 2025 में होने वाले आम चुनाव से ठीक पहले इस मामले ने सियासी पारा और गर्म कर दिया है। विपक्षी दल इसे चीन-समर्थक नेताओं के खिलाफ हथियार बनाने की तैयारी में हैं। नेपाल में बढ़ते चीनी प्रभाव और कर्ज जाल की आशंका के बीच यह मामला आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है।
लिथुआनिया में इमरजेंसी: एक गुब्बारे के कारण थमा पूरा देश, शुरू होगी नई जंग?
11 Dec, 2025 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
विनियस। लिथुआनिया ने रूस के कलिनिनग्राद और बेलारूस से सटी अपनी सीमाओं पर बढ़ते तनाव के बीच बड़ा फैसला लेते हुए पूरे देश में ‘नेशनवाइड इमरजेंसी सिचुएशन’ लागू कर दी है। यह कदम बेलारूस की ओर से लगातार भेजे जा रहे मौसम मापने वाले बैलून के कारण उठाया गया है, जिनका इस्तेमाल छिपकर सिगरेट की तस्करी के लिए किया जा रहा है। सरकार का कहना है कि ये बैलून न केवल अवैध गतिविधियों के लिए खतरा हैं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और हवाई यातायात के लिए भी गंभीर चुनौती बन चुके हैं।
प्रधानमंत्री इंगा रुगिनिएने ने बताया कि हालात दिनों-दिन खराब होते जा रहे हैं। सरकार और सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, इसी वर्ष लगभग 600 बैलून और करीब 200 ड्रोन बेलारूस की तरफ से लिथुआनिया की सीमा पार कर चुके हैं। कई बार ये बैलून विमानों के नियमित लैंडिंग मार्ग में आ गए, जिससे विल्नियस एयरपोर्ट को कई बार बंद करना पड़ा। अक्टूबर के बाद से एयरपोर्ट 60 घंटे से अधिक समय तक बाधित रहा और 30,000 से ज्यादा यात्रियों की उड़ानें प्रभावित हुईं।
यह इमरजेंसी स्तर ‘स्टेट ऑफ इमरजेंसी’ से नीचे है, लेकिन सरकार का मानना है कि स्थिति इतनी गंभीर है कि कड़ा कदम उठाना जरूरी था। इससे पहले लिथुआनिया ने 2022 में यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद भी इमरजेंसी घोषित की थी। इस बार सरकार का कहना है कि बैलून की बढ़ती गतिविधि सोची-समझी रणनीति का हिस्सा लगती है, जिसका उद्देश्य देश में अस्थिरता बढ़ाना है।
लिथुआनिया के आरोपों को बेलारूस ने सिरे से नकार दिया है। बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको का कहना है कि लिथुआनिया इस मुद्दे को राजनीतिक रंग दे रहा है और बैलून से किसी भी तरह का खतरा नहीं है। उन्होंने यहां तक कहा कि क्या लिथुआनिया युद्ध चाहता है, क्योंकि बेलारूस का ऐसा कोई इरादा नहीं है। इसके जवाब में लिथुआनिया के राष्ट्रपति गितानस नाउसैदा ने कहा कि उनके पास पर्याप्त सबूत मौजूद हैं जो दिखाते हैं कि यह बेलारूस की डिसरप्शन रणनीति का हिस्सा है।
तनाव इस कदर बढ़ गया कि लिथुआनिया को अक्टूबर में बेलारूस से लगी दो बॉर्डर चेकपोस्ट बंद करनी पड़ीं। इसके बाद बेलारूस ने जवाबी कार्रवाई करते हुए लिथुआनियाई ट्रकों के अपनी सड़कों पर चलने पर रोक लगा दी, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव और गहरा गया। यूरोपीय संघ ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया है। यूरोपीय कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयन ने इन घटनाओं को ‘हाइब्रिड अटैक’ करार दिया और कहा कि बेलारूस के खिलाफ नए प्रतिबंधों पर विचार किया जा रहा है। ब्रसेल्स में बेलारूस के प्रतिनिधि को तलब कर चेतावनी भी दी गई है। लिथुआनिया का कहना है कि अब यह मामला सिर्फ तस्करी का नहीं रहा, बल्कि एविएशन सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बन गया है। कुछ अधिकारी इसे संभावित ‘आतंकवादी गतिविधि’ की श्रेणी में रखने की बात भी कर रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, ये बैलून 10 किलोमीटर की ऊंचाई तक पहुंच जाते हैं और सीधे विमानों के मार्ग में प्रवेश कर सकते हैं। यदि कोई बैलून किसी यात्री विमान से टकरा जाए, तो बड़ा हादसा हो सकता है। इसी जोखिम को देखते हुए लिथुआनिया ने देशव्यापी इमरजेंसी जैसी स्थिति लागू की है, ताकि हवाई सुरक्षा और राष्ट्रीय स्थिरता को किसी भी खतरे से बचाया जा सके।
नक्सल मुक्त क्षेत्र में विकास की सौगात : साहेबिन कछार में गिरधर सोरी और जुगसाय गोड को मिला जीवन का नया सहारा
‘बिहान’ योजना से बदल रही ग्रामीण महिलाओं की तस्वीर, बिलासो बाई बनीं ‘लखपति दीदी’
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्रद्धेय बृजमोहन मिश्रा की जयंती पर पुष्पांजलि अर्पित की
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कृषि मंत्री के निवास पर पहुंचकर वर-वधू को दिया आशीर्वाद
कृषि मंत्री नेताम ने मिट्टी एवं बीजों की पूजा की और ट्रैक्टर चलाकर बीजों की बुआई की
महतारी वंदन योजना से मिली नई दिशा, प्रेम बाई बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल
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जल जीवन मिशन से ग्राम बंधी की बदली तस्वीर
