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बांग्लादेश के रिश्ते ‘क्षणिक नहीं हमेशा वाले’ हैं, इन्हें कमजोर नहीं किया जा सकता
16 Dec, 2025 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका। भारत-बांग्लादेश में जारी तनाव के बीच भारतीय उच्चायुक्त प्रणय वर्मा ने कहा है कि नई दिल्ली और ढाका के रिश्ते ‘क्षणिक नहीं, बल्कि हमेशा वाले’ हैं और इन्हें कमजोर नहीं किया जा सकता। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब कुछ ही घंटे पहले बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने उन्हें तलब कर पूर्व पीएम शेख हसीना के बयानों को लेकर चिंता जताई थी। बता दें बांग्लादेश की अंतरिम सरकार का आरोप है कि शेख हसीना भारत में रहते हुए ऐसे बयान दे रही हैं जो देश में हिंसा और अशांति भड़का सकते हैं। ये आगामी संसदीय चुनावों को पटरी से उतारने की कोशिश है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इसको लेकर मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने भारत से हसीना के ‘त्वरित प्रत्यर्पण’ की मांग दोहराई। इन घटनाक्रमों के बीच ढाका में एक अकादमिक और सांस्कृतिक संगठन ‘इतिहास ओ ओइतिज्जो परिषद’ के कार्यक्रम में बोलते हुए प्रणय वर्मा ने कहा कि भारत और बांग्लादेश के बीच जो रिश्ता है, वह अस्थायी नहीं है, यह रिश्ता खून और बलिदान से बना है और इसे कमजोर नहीं किया जा सकता। यह कार्यक्रम 16 दिसंबर को मनाए जाने वाले विजय दिवस की 54वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित किया गया था, जो 1971 के मुक्ति संग्राम में पाकिस्तान पर बांग्लादेश की जीत की याद दिलाता है।
प्रणय वर्मा ने कहा कि भारत ने 1971 में बांग्लादेश के लोगों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर संघर्ष किया था और आगे भी एक लोकतांत्रिक, स्थिर, शांतिपूर्ण, प्रगतिशील और समावेशी बांग्लादेश के निर्माण में उसका समर्थन करता रहेगा। वर्मा ने मुक्ति संग्राम को याद करते हुए कहा कि उस संघर्ष में भारत ने अपने ‘बांग्लादेशी भाइयों और बहनों’ का गर्व के साथ साथ दिया था। उन्होंने कहा कि उस दौरान हजारों भारतीय सैनिकों ने अपनी जान गंवाई और असंख्य घायल हुए। उन्होंने कहा कि अब समय है उन मूल्यों को संजोने का, जिनके लिए वह आजादी की लड़ाई लड़ी गई थी।
ऑस्ट्रेलिया में यहूदियों पर हुए हमले को इजराइल ने भड़काने वाला बताया, दी चेतावनी
16 Dec, 2025 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेल अवीव। ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में रविवार को बोंडी बीच पर हुई फायरिंग मामले में मौत का आंकड़ा 16 हो गया है। घटना के चश्मदीदों ने फायरिंग का खौफनाक मंजर बयां किया। इस सबके बीच इजराइल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने ऑस्ट्रेलिया के पीएम एंथनी अल्बनीज पर निशाना साधा है। नेतन्याहू ने इस फायरिंग को भड़काने वाला बताया। नेतन्याहू ने दावा किया है कि ऑस्ट्रेलिया में यहूदियों के खिलाफ हो रही साजिशों को लेकर उन्होंने चार महीने पहले पीएम अल्बनीज को एक खत लिखा था।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पीएम नेतन्याहू ने ऑस्ट्रेलियाई पीएम को चेतावनी देते हुए लिखा, लगभग 4 महीने पहले 17 अगस्त को मैंने पीएम अल्बनीज को एक चिट्ठी भेजी थी, जिसमें मैंने उन्हें आगाह किया था कि ऑस्ट्रेलियाई सरकार की नीति यहूदी-विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा दे रही है। फिलिस्तीनी देश के लिए आपकी मांग यहूदी विरोधी आग में घी डालने का काम करती है। यह ऐसे लोगों को हिम्मत देती है जो ऑस्ट्रेलियाई यहूदियों को धमकाते हैं और यहूदियों से नफरत को बढ़ावा देती है जो अब आपकी सड़कों पर घूम रही है।
इजरायली पीएम ने अल्बनीज पर यहूदियों के विरोध में चल रही गतिविधियों के खिलाफ किसी तरह की कोई कार्रवाई ना करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आपकी सरकार ने ऑस्ट्रेलिया में यहूदियों के विरोध को फैलने से रोकने के लिए कुछ नहीं किया। आपने बीमारी को फैलने दिया, और इसका नतीजा यह है कि आज हमने यहूदियों पर भयानक हमले देखे।
इजराइली पीएम ने कहा कि हमने एक बहादुर आदमी का एक्शन देखा, जो एक मुस्लिम था और मैं उसे सलाम करता हूं, जिसने इन आतंकवादियों में से एक को बेगुनाह यहूदियों को मारने से रोका, लेकिन इसके लिए आपकी सरकार के एक्शन की जरूरत है, जो आप नहीं कर रहे हैं और आपको करना ही होगा, क्योंकि इतिहास हिचकिचाहट और कमजोरी को माफ नहीं करेगा। यह एक्शन और ताकत का सम्मान करेगा।
बता दें बीते दिन सीरिया में दो अमेरिकी सैनिक मारे गए। इसे लेकर इजराइल के पीएम ने कहा, सीरिया में, दो अमेरिकन सैनिकों और एक अमेरिकन इंटरप्रेटर को भी मारा गया। उन्हें इसलिए मारा गया क्योंकि वे हमारे कॉमन कल्चर को रिप्रेजेंट करते हैं। इस हमले के नतीजे में, रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने कहा कि अगर आप दुनिया में कहीं भी अमेरिकियों को टारगेट करते हैं, तो आप अपनी बाकी की छोटी, चिंता भरी जिंदगी यह जानते हुए बिताएंगे कि अमेरिका आपको ढूंढेगा, और बेरहमी से मार डालेगा।
इजरायली पीएम ने चेतावनी दी है कि दुनिया के किसी भी कोने में कोई अगर यहूदियों को चोट पहुंचाएगा, तो उसे बेरहमी से खत्म किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस मामले में हमारी यही नीति है जो अमेरिका की है। हम चुपचाप बैठकर इन हत्यारों को हमें मारने नहीं देंगे।
निकल गई जेलेंस्की की सारी अकड़..........अब नाटो में नहीं शामिल होने की कर रहे बात
16 Dec, 2025 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मॉस्को। बीते 3 सालों से रूस से चले आ रहे संघर्ष के बाद यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की फिलहाल समझौते के मूड में दिख रहे हैं। उनका कहना है कि वे नाटो में शामिल होने की अपनी मांग को वापस लेने को तैयार हैं। इसी मांग को लेकर रूस हमलावर रहा है कि आखिर यूक्रेन नाटो में क्यों शामिल होना चाहता है और यदि वे अमेरिका के नेतृत्व वाले सैन्य संगठन का हिस्सा बनता है, तब उसकी सुरक्षा के लिए खतरा पैदा होगा। इस बीच यूक्रेनी नेता ने यदि नाटो में जाने की डिमांड को ही वापस लेने की बात कर दी है तब फिर उनके झुकाव का संकेत है, लेकिन उन्होंने दो मांगें भी रख दी हैं।
जेलेंस्की ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और उनके दामाद जेरेड कुशनर से कहा है कि वह दो बातें कहना चाहते हैं। पहली बात यह कि वे रूस की ओर से कब्जाए गए इलाकों पर दावेदारी छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं। इसके अलावा वह चाहते हैं कि अमेरिका और पश्चिमी देशों की ओर से यूक्रेन को सुरक्षा की गारंटी मिले। दरअसल ट्रंप ने पिछले दिनों शांति प्रस्ताव को लेकर यह शर्त भी रखी थी कि रूस की ओर से कब्जाए इलाकों का उसी में विलय हो जाए और यूक्रेन की ओर से उस पर सहमति जताकर युद्ध को समाप्त किया जाए।
अब जेलेंस्की ने नाटो वाली शर्त को स्वीकार किया है, लेकिन यूक्रेन के इलाके रूस को सौंपने को लेकर सहमत नहीं हैं। इस वार्ता के दौरान जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज भी उनके साथ बैठे थे। जेलेंस्की ने कहा कि अमेरिका और कुछ यूरोपीय देशों ने यूक्रेन की ओर से नाटो में शामिल होने की कोशिश से इंकार कर दिया है। लेकिन हम चाहते हैं कि नाटो और उसके सहयोगी देशों की ओर से हमें सुरक्षा को लेकर भरोसा दिया जाए।
जॉर्डन की राजधानी पहुंचे PM मोदी, व्यापार, निवेश और रणनीतिक सहयोग पर होगी बातचीत
16 Dec, 2025 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) आज से तीन देशों के अहम दौरे पर है, पीएम मोदी अपनी यात्रा के पहले पड़ाव के तौर पर जॉर्डन पहुंचे। विदेश मंत्रालय के मुताबिक यह दौरा भारत के पश्चिम एशिया और अफ्रीका के साथ रिश्तों को नई मजबूती देने वाला है। व्यापार, निवेश, रणनीतिक सहयोग और क्षेत्रीय मुद्दों पर इस दौरान गहन बातचीत होगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जॉर्डन की राजधानी अमान पहुंचने पर औपचारिक स्वागत किया गया। जॉर्डन के प्रधानमंत्री जाफर हसन ने एयरपोर्ट पर उनका स्वागत किया। प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक अस्थिरता बढ़ी है। भारत इस दौरे के जरिए अपने भरोसेमंद साझेदारों के साथ राजनीतिक, आर्थिक और कूटनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाना चाहता है। खास बात यह है कि जॉर्डन और इथियोपिया की यह पीएम मोदी की पहली पूर्ण द्विपक्षीय यात्रा होगी, जबकि ओमान का यह उनका दूसरा दौरा है।
पीएम मोदी जॉर्डन में किंग अब्दुल्ला द्वितीय से आमने-सामने बातचीत करेंगे। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता होगी। भारत और जॉर्डन के बीच कूटनीतिक संबंधों के 75 साल पूरे हो रहे हैं, ऐसे में यह यात्रा विशेष मानी जा रही है। दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और राजनीतिक सहयोग पर फोकस रहेगा।
दौरे के दूसरे दिन प्रधानमंत्री मोदी और किंग अब्दुल्ला भारत-जॉर्डन व्यापार कार्यक्रम को संबोधित करेंगे। इसमें दोनों देशों के प्रमुख कारोबारी शामिल होंगे। इसके अलावा पीएम मोदी जॉर्डन में बसे भारतीय समुदाय से भी मुलाकात करेंगे। युवराज के साथ वह पेट्रा शहर का दौरा करेंगे, जो भारत के साथ प्राचीन व्यापारिक संबंधों का प्रतीक रहा है।
जॉर्डन के बाद प्रधानमंत्री मोदी 16 से 17 दिसंबर तक इथियोपिया के राजकीय दौरे पर रहेंगे। यह उनकी पहली इथियोपिया यात्रा होगी। यहां वह प्रधानमंत्री अबी अहमद अली से मुलाकात करेंगे। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय रिश्तों के सभी पहलुओं पर चर्चा होगी। भारतीय प्रधानमंत्री इथियोपिया की संसद के संयुक्त सत्र को भी संबोधित करेंगे।
इथियोपिया दौरे के दौरान कई समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर होने की संभावना है। भारत इस यात्रा के जरिए अफ्रीका में दीर्घकालिक और भरोसेमंद साझेदार के रूप में अपनी भूमिका को मजबूत करना चाहता है। एजेंडा 2063 के तहत अफ्रीका की प्राथमिकताओं और वैश्विक मुद्दों पर भी विचार होगा। भारतीय समुदाय से संवाद भी इस यात्रा का अहम हिस्सा रहेगा।
दौरे के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री मोदी 17 से 18 दिसंबर तक ओमान जाएंगे। यह उनकी ओमान की दूसरी यात्रा होगी। भारत और ओमान के कूटनीतिक संबंधों के 70 साल पूरे हो रहे हैं। इस दौरान भारत-ओमान व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते पर खास ध्यान रहेगा। माना जा रहा है कि यह समझौता दोनों देशों के व्यापार और निवेश को नई दिशा देगा।
तानाशाह किम जोंग ने अपनी सेना की तारीफ में कहा- हमारे बहादुर जवान नहीं होते तो रूस को बड़ा नुकसान होता
15 Dec, 2025 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
प्योंगयांग। उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग अपने सैनिकों की जमकर तारीफ कर रहे है। उन्होंने दावा करते हुए कहा कि यदि उत्तर कोरिया की सेना रुस की मदद नहीं करती तो वहां की सेना को भारी नुकसान हो सकता था। वजह ये है कि यूक्रेन की तरफ से बिछाई गई बारुद की सुरंग को हटाने का काम उत्तर कोरिया की सेना ने किया है। अपनी जान जोखिम में डालकर रुसी सेना को भारी नुकसान से बचाने का काम हमारे सैनिकों ने किया है।
तानाशाह किम के मुताबिक इस साल की शुरुआत में कुर्स्क क्षेत्र में भेजे गए उत्तर कोरियाई सैनिकों ने यहां पर बारूदी सुरंगे हटाने का काम किया, जिसकी वजह से हजारों रूसी सैनिकों की जान बची।
शनिवार को उत्तर कोरिया के सरकारी मीडिया पर प्रसारित एक कार्यक्रम में किम जोंग उन ने रूस से वापस लौटे अपने इन सैनिकों की सराहना की। तानाशाह ने कहा, अगस्त से शुरू हुई 120 दिनों की तैनाती के दौरान हमारे सैनिकों ने अभूतपूर्व साहस दिखाया। चाहे अधिकारी हों या सैनिक सभी ने लगभग हर दिन अपनी कल्पना से परे मानसिक और शारीरिक दबावों पर काबू पाते हुए सामूहिक वीरता का परिचय दिया। बारूदी सुरंगे हटाने के काम के दौरान यह लोग अपने शहरों और गांवों को पत्र भी भेजते थे।
किम ने आगे कहा, तीन महीने से भी कम समय में हमारे सैनिकों ने एक बड़े खतरनाक क्षेत्र को रूसी सेना के लिए पूरी तरह से सुरक्षित कर दिया। इसमें हमारे जिन भी सैनिकों की जान गई है। उनकी बहादुरी को हमेशा के लिए अमर बनाने के उद्देश्य से राज्य उनको सम्मान प्रदान करेगा।
सरकारी मीडिया की तरफ से जारी की गई फोटोस में किम साफ तौर पर वापस आए सैनिकों को गले लगाते हुए देखे जा सकते हैं। इनमें से कुछ सैनिक घायल और व्हील चेयर पर भी दिखाई दिए।
इससे पहले, उत्तर कोरिया शुरुआत से ही पुतिन की मदद के लिए कुर्स्क क्षेत्र में सैनिक भेज रहा है। पश्चिमी खुफिया एजेंसियों के मुताबिक इस युद्ध में उत्तर कोरिया ने हजारों सैनिक भेजे हैं। इसके बदले में रूस उसकी वित्तीय सहायता, सैन्य तकनीक, खाद्य सामग्री और ऊर्जा आपूर्ति में मदद कर रहा है। इसकी वजह से अपने परमाणु कार्यक्रम के कारण अलग-थलग पड़े इस देश को अपने अभियान चलाने में मदद मिल रही है।
परीक्षा हॉल में घुसे नकाबपोश ने की अंधाधुंध फायरिंग, 2 छात्रों की मौत 8 घायल
15 Dec, 2025 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। आइलैंड स्थित ब्राउन यूनिवर्सिटी में परीक्षा दे रहे छात्रों पर एक नकाबपोश ने अंधाधुंध फायरिंग कर दी। इस हमले में दो छात्रों की मौत हो गई जबकि 8 घायल हुए हैं। पुलिस ने बताया कि संदिग्ध को अभी गिरफ्तार नहीं किया जा सका है। रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस ने यूनिवर्सिटी कैंपस के अलावा आसपास के इलाके में तलाशी अभियान शुरू किया है।
इस हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि फिलहाल हम पीड़ितों को लिए प्रार्थना कर सकते हैं। उन्होंने कहा, ब्राउन यूनिवर्सिटी में हुई फायरिंग की जानकारी मुझे मिली। एफबीआई मौके पर पहुंच गई है। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा, यह बहुत ही खतरनाक हमला था। हम सभी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। एफबीआई संदिग्ध को पकड़ने के सारे प्रयास कर रही है। बता दें कि अमेरिका में इस तरह की घटनाएं आम हो गई हैं। आए दिन भीड़ में शूटिंग के मामले सामने आते रहते हैं।डिप्टी चीफ ऑफ पुलिस टिमोथी ओ हारा के मुताबिक हमलावर काले कपड़े पहनकर इंजीनियरिंग बिल्डिंग में घुसा था। उसके हाथ में बंदूक थी। उसने अचानक अंधाधुंध भफायरिंग शुरू कर दिया। मेयर ब्रेट स्माइली ने कहा कि सभी छात्रों को हिदायत दी गई है कि वे विश्वविद्यालय परिसर में ही रहें और जब तक कहा ना जाए अपने घरों को लौटने का प्रयास ना करें।मेयर ने कहा कि जल्द ही संदिग्ध को पकड़ लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। हॉस्टल में अपने प्रोजेक्ट पर काम कर रहे एक छात्र ने कहा, जब मैंने गोलियों की आवाज सुनी तो मैं कांप गया। एक अन्य छात्र ने कहा कि वह घटनास्थल से कुछ दूरी पर ही खड़ा था। गोलियों की आवाज सुनकर वे डेस्क के नीचे छिप गए।
भारत ने कभी भी अपनी धरती को बांग्लादेश के हितों के खिलाफ गतिविधियों के लिए इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी - विदेश मंत्रालय
15 Dec, 2025 10:51 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली । भारत के विदेश मंत्रालय ने बांग्लादेश को करारा जवाब देते हुए कहा, भारत बांग्लादेश की अंतरिम सरकार द्वारा प्रेस बयान में किए गए दावों को स्पष्ट रूप से खारिज करता है। भारत ने बांग्लादेश में शांतिपूर्ण माहौल में स्वतंत्र, निष्पक्ष, समावेशी और विश्वसनीय चुनाव कराने के अपने रुख को लगातार दोहराया है। भारत ने कभी भी अपनी धरती को बांग्लादेश के हितों के खिलाफ गतिविधियों के लिए इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी है। विदेश मंत्रालय ने कहा, हमें उम्मीद है कि बांग्लादेश की अंतरिम सरकार आंतरिक कानून व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक उपाय करेगी, जिसमें शांतिपूर्ण चुनाव संपन्न कराना भी शामिल है।
भारत के यह जवाब बांग्लादेश के उस आरोप के बाद सामने आया है जिसमें बांग्लादेश ने दावा किया है कि शेख हसीना को भड़काऊ बयान जारी करने की अनुमति दी जा रही है, जिसमें वह अपने समर्थकों को बांग्लादेश में आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने के लिए उकसा रही हैं। उनके बयान का उद्देश्य आगामी संसदीय चुनावों को विफल करना है। बयान में कहा गया है कि बांग्लादेश हसीना और पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमान खान कमाल को जल्द से जल्द प्रत्यर्पित करने की अपनी मांग एक बार फिर दोहराता है, ताकि वे पिछले महीने विशेष न्यायाधिकरण की ओर से सुनाई गई मौत की सजा का सामना कर सकें।
अमेरिका का नया नियम: H-1B वीजा एप्लीकेंट्स की सोशल मीडिया जांच अनिवार्य, भारतीय प्रोफेशनल्स चिंतित
15 Dec, 2025 10:38 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। ट्रंप प्रशासन ने सोमवार से H-1B वीजा और H-4 वीजा आवेदकों की जांच के आदेश दिए हैं। यह जांच आज (सोमवार) से शुरू होगी। जांच के दौरान सभी की सोशल मीडिया प्रोफाइल भी चेक की जाएगी। ट्रंप प्रशासन ने एक नया आदेश जारी करते हुए कहा है कि 15 दिसंबर से H-1B वीजा का आवेदन करने वालों और उनपर आश्रित लोगों की ऑनलाइन उपस्थिति की समीक्षा की जाएगी।
स्टूडेंट्स पहले से ही इस समीक्षा के दायरे में थे। वहीं, अब अमेरिकी प्रशासन ने ऑनलाइन उपस्थिति के साथ-साथ सोशल मीडिया प्रोफाइल की जांच करने का भी आदेश दिया है। साथ ही H-1B वीजा और H-4 वीजा आवेदक और उनपर आश्रित लोग भी इस जांच के दायरे में आएंगे।
अमेरिकी विभाग ने दिया आदेश
अमेरिकी विभाग के अनुसार, "जांच प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए वीजा आवेदन करने वाले सभी लोगों की सोशल मीडिया प्रोफाइल भी देखी जाएगी। सभी लोगों को अपनी प्रोफाइल प्राइवेट से सार्वजनिक करने का निर्देश दिया गया है।"
अमेरिकी विदेश विभाग का कहना है कि अमेरिका का वीजा लेना अपने आप में एक विशेष अधिकार है। इसलिए वीजा देने से पहले अच्छी तरह से छानबीन करना बेहद जरूरी है। इस दौरान विभाग उन लोगों की पहचान करता है, जो अमेरिका में आने के योग्य नहीं हैं। ऐसे लोग राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं।
विदेश विभाग ने आगे कहा-
हम सभी वीजा आवेदकों की पूरी तरह से जांच करते हैं। इस जांच में एफ, एम और जे श्रेणी के सारे छात्र समेत एक्सचेंट विजिटर भी शामिल होते हैं, जिन्होंने वीजा के लिए आवेदन किया है।
विदेश विभाग ने दी चेतावनी
विदेश विभाग ने चेतावनी देते हुए कहा है कि वीजा जारी करते समय अमेरिका को सतर्क रहने की जरूरत है। इस बात की गहन जांच की जानी चाहिए कि वीजा का आवेदन करने वालों का इराजा कहीं अमेरिका के राष्ट्रीय हितों को नुकसान पहुंचाना तो नहीं है?
बता दें कि H-1B वीजा धारकों में सबसे ज्यादा भारतीय पेशेवर होते हैं। इसी साल सितंबर में ट्रंप ने H-1B वीजा की फीस बढ़ाकर 1 लाख डॉलर कर दी थी।
भारतियों पर कैसे होगा असर?
H-1B वीजा पाने वालों में करीब 70% भारतीय हैं। वित्त वर्ष 2024 में भारत को करीब 80,500 नए H-1B वीजा मिले, इसलिए यह सख्ती सबसे ज्यादा भारतीय पेशेवरों को प्रभावित कर रही है।
अमेरिका एक नए प्रस्ताव पर काम कर रहा है, जिसके तहत टूरिस्ट और बिजनेस ट्रैवलर्स से भी पिछले 5 साल की सोशल मीडिया जानकारी मांगी जा सकती है। इससे यूके, जर्मनी, फ्रांस, जापान, ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के यात्रियों पर भी असर पड़ेगा, जो अब तक वीजा-फ्री यात्रा करते थे।
अमेरिका का पाकिस्तान को लिंक-22 देने से इनकार, पुरानी टेक्नोलॉजी थमाई
15 Dec, 2025 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिका ने पाकिस्तान को एफ-16 लड़ाकू विमानों के लिए 686 मिलियन डॉलर का पैकेज मंजूर किया है। दिखावे में यह डील पाकिस्तान की वायुसेना की ताकत बढ़ाने जैसी लगती है, लेकिन गहराई से देखें तो यह नई क्षमता नहीं, बल्कि पुराने विमानों को किसी तरह घसीटकर उड़ाए रखने की कोशिश है। इस पैकेज में पाकिस्तान को एक भी नया एफ-16 नहीं मिला है। न कोई लंबी दूरी का घातक हथियार, न एडवांस एयर-टू-एयर मिसाइल और न ही इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम।
अमेरिका ने साफ तौर पर पाकिस्तान को सिर्फ मेंटेनेंस, रिपेयर और सेफ्टी से जुड़ा सामान दिया है, ताकि कोल्ड वॉर दौर के ये जेट 2040 तक किसी तरह सेवा में बने रहें। सबसे अहम बात यह है कि पाकिस्तान को जिस डेटा लिंक टेक्नोलॉजी की सबसे ज्यादा जरूरत थी, वह लिंग-22, उसे अमेरिका ने सिरे से देने से इनकार कर दिया है। लिंग-22 को आज की तारीख में लिंग-16 से कहीं ज्यादा आधुनिक, जैम-प्रूफ और लंबी दूरी तक काम करने वाला सिस्टम माना जाता है। यह टेक्नोलॉजी नाटो के चुनिंदा देशों और हाई-एंड फाइटर जेट्स तक ही सीमित है।
इसके उलट पाकिस्तान को सिर्फ लिंग-16 दिया है, जिसे अब विशेषज्ञ पुरानी और सीमित क्षमता वाली टेक्नोलॉजी मानते हैं। आधुनिक युद्ध में जहां चीन, रूस और पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स एडवांस सेंसर फ्यूजन और हाई-स्पीड नेटवर्किंग पर काम कर रहे हैं, वहीं लिंग-16 ऐसी तकनीक है जो जैमिंग और इलेक्ट्रॉनिक हमलों के सामने कमजोर पड़ सकती है यानी साफ शब्दों में कहें तो अमेरिका ने पाकिस्तान को कटिंग-एज टेक्नोलॉजी नहीं, बल्कि ‘सेकेंड लाइन’ का सिस्टम थमा दिया है। इस डील से पाकिस्तान के एफ-16 कुछ साल और उड़ते जरूर रहेंगे, लेकिन उन्हें भविष्य के हाई-टेक युद्ध के लिए तैयार नहीं कहा जा सकता। रणनीतिक हलकों में इसे पाकिस्तान के लिए एफ-16 के नाम पर कबाड़ का सौदा माना जा रहा है, जिसमें दिखावा ज्यादा है और असली ताकत न के बराबर।
अमेरिका ने पाकिस्तान के साथ अपने रक्षा संबंधों में एक बहुत ही सधी हुई लकीर खींच दी है। पाकिस्तान को अपने एफ-16 लड़ाकू विमानों के रखरखाव पैकेज के साथ डाटा लिंक सिस्टम तो मिलेगा, लेकिन वह अत्याधुनिक ‘लिंक 22’ नहीं होगा। अमेरिका ने साफ कर दिया है कि पाकिस्तान को पुराना लेकिन भरोसेमंद ‘लिंक 16’ ही दिया जाएगा। यह फैसला वाशिंगटन के उस दृष्टिकोण को दर्शाता है जिसमें वह पाकिस्तान को आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए तो साथ रखना चाहता है, लेकिन अपनी सबसे बेहतरीन तकनीक उसे नहीं देना चाहता।
अमेरिका ने पाकिस्तान को वह तकनीक देने से साफ इनकार कर दिया है जो उसके सबसे करीबी संधि सहयोगियों के लिए आरक्षित है। लिंक 22 की खासियत है कि यह ‘जैम-रेसिस्टेंट’ है और ‘बियॉन्ड लाइन ऑफ साइट’ (नेटवर्किंग की क्षमता देता है यानी दुश्मन इसे आसानी से जाम नहीं कर सकता और यह बहुत लंबी दूरी तक डेटा शेयर कर सकता है। अमेरिका नहीं चाहता कि इस्लामाबाद के पास इतनी संवेदनशील और अत्याधुनिक नेटवर्किंग क्षमता हो, इसलिए उसे लिंक 16 पर ही संतोष करना होगा।
ऑस्ट्रेलिया दहला: सिडनी में पाकिस्तानी बाप-बेटे की गोलीबारी से 15 मृत, कई घायल
15 Dec, 2025 08:31 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। ऑस्ट्रेलिया के सिडनी स्थित बोंडी बीच पर एक यहूदी त्योहार की तैयारी के दौरान लोगों पर गोलियां बरसाईं गईं। इस हमले में कम से कम 15 लोगों की जान गई है। मामले में जांच शुरू कर दी गई है।
पुलिस ने शुरुआती जांच के बाज बताया कि लोगों पर गोलियां बरसाने वाले दो बंदूकधारी पिता-पुत्र थे। बता दें कि सख्त बंदूक नियंत्रण कानूनों वाले देश ऑस्ट्रेलिया में लगभग तीन दशकों में यह सबसे घातक गोलीबारी की घटना थी।
एक हमलावर मौके पर ढेर
हमले को लेकर न्यू साउथ वेल्स के पुलिस आयुक्त माल लैन्योन ने बताया कि 50 साल के बंदूकधारी साजिद अकरम को पुलिस ने मार गिराया। वहीं, उसके पुत्र 24 साल के नवीद अकरम घायल हो गया और उसका अस्पताल में उपचार चल रहा है।
पाकिस्तानी नागरिक थे हमलावर
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि जांच से जुड़े अमेरिकी खुफिया अधिकारियों के हवाले से बताया कि दोनों पाकिस्तानी नागरिक थे। अकरम के न्यू साउथ वेल्स स्थित ड्राइविंग लाइसेंस की फोटो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है।
10 मिनट तक चली गोलियां
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि सिडनी का बोंडी बीच काफी प्रसिद्ध है, जो रविवार को लोगों से खचाखच भरा हुआ था। हमलावरों ने करीब 10 मिनट तक गोलियां चलाईं। इससे सैकड़ों लोग रेत पर और आस-पास की सड़कों पर इधर-उधर भागने लगे। पुलिस का कहना है कि लक्षित हनुक्का कार्यक्रम में लगभग 1,000 लोग शामिल हुए थे, जो समुद्र तट के पास एक छोटे से पार्क में आयोजित किया गया था।
गाजा में टार्गेट ऑपरेशन, हमास के वरिष्ठ कमांडर राद साद के मारे जाने का दावा
15 Dec, 2025 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेलअवीव। इजरायली सुरक्षा बलों ने दावा किया है कि 13 दिसंबर 2025 को गाजा में किए गए एक टार्गेट ऑपरेशन में हमास के वरिष्ठ कमांडर राद साद को मार गिराया गया। इजरायल के अनुसार, राद साद हमास के सैन्य विंग में हथियार उत्पादन से जुड़े मुख्यालय का प्रमुख था और 7 अक्टूबर 2023 को इजरायल पर हुए बड़े हमले की साजिश रचने वालों में शामिल रहा था। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि वह हाल के महीनों में हमास के सबसे अनुभवी और खतरनाक कमांडरों में गिना जाता था।
इजरायली दावों के मुताबिक, संघर्षविराम के बावजूद राद साद गाजा में हमास की सैन्य संरचना को दोबारा मजबूत करने में जुटा हुआ था। वह हथियारों और विस्फोटकों के निर्माण को तेज करने के साथ-साथ संगठन की लड़ाकू क्षमताओं को पुनर्गठित करने में अहम भूमिका निभा रहा था। बताया गया है कि हाल के हफ्तों में इजरायली सैनिकों पर हुए कई विस्फोटक हमलों के पीछे उसकी सीधी भूमिका थी, जिनमें सुरक्षा बलों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। इजरायल का कहना है कि राद साद पहले गाजा सिटी ब्रिगेड का संस्थापक और कमांडर रह चुका था। इसके अलावा, उसने गाजा में हमास की नौसैनिक ताकत को विकसित करने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया था। वह हमास के सैन्य विंग के शीर्ष नेतृत्व के काफी करीब माना जाता था और संगठन के रणनीतिक फैसलों में उसकी गहरी भागीदारी रही थी। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, उसकी विशेषज्ञता का इस्तेमाल रॉकेट, विस्फोटक उपकरण और अन्य हथियार प्रणालियों के निर्माण में किया जा रहा था।
इजरायली सेना ने यह भी आरोप लगाया है कि राद साद ने उस योजना को तैयार करने में योगदान दिया था, जिसके तहत 7 अक्टूबर 2023 को इजरायल पर हमला किया गया। इस हमले को इजरायल अपने इतिहास के सबसे घातक आतंकी हमलों में से एक मानता है। इजरायल का दावा है कि संघर्षविराम लागू होने के बाद भी राद साद हमास के लिए हथियार बनवाता रहा और उन्हीं हथियारों का इस्तेमाल गाजा में इजरायली सैनिकों पर हमलों में किया गया, जिनमें कई जवानों की मौत हुई। इजरायली सुरक्षा बलों ने स्पष्ट किया है कि हमास के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा। उनका कहना है कि संगठन की सैन्य क्षमताओं को पूरी तरह खत्म करने के लिए ऐसे लक्षित ऑपरेशन जारी रखे जाएंगे और किसी भी ऐसे कमांडर को बख्शा नहीं जाएगा जो इजरायल के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा देता है।
मौत के 11 मिनट बाद लौटी महिला का चौंकाने वाला खुलासा! बताया 'जन्नत और जहन्नुम' में क्या देखा?
14 Dec, 2025 12:26 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Woman Death Experience: विज्ञान भले ही मृत्यु को जीवन का अंतिम सत्य मानता हो, लेकिन अमेरिका की एक महिला ने इस धारणा को चुनौती दी है. 68 वर्षीय शार्लोट होम्स ने दावा किया है कि वह मेडिकल रूप से पूरे 11 मिनट के लिए ‘मर’ चुकी थीं और इस दौरान उन्होंने जन्नत और जहन्नुम दोनों की यात्रा की. शार्लोट का कहना है कि यह ‘अजीबोगरीब’ अनुभव उनकी पूरी जिंदगी बदल चुका है और वह इस रहस्य को दुनिया के साथ साझा कर रही हैं.
मौत के मुंह से वापसी
यह चौंकाने वाली घटना सितंबर 2019 में हुई थी, जब शार्लोट एक नियमित हृदय जांच के लिए अस्पताल गई थीं. अचानक उनका ब्लडप्रेशर बढ़कर खतरनाक स्तर 234/134 पर पहुंच गया. डॉक्टरों ने उन्हें तुरंत भर्ती कर लिया. उनके पति डैनी उनके साथ ही थे. शार्लोट की हालत बिगड़ती चली गई. आखिरकार, एक वक्त ऐसा आया जब मेडिकल टीम की आंखों के सामने ही उनका दिल 11 मिनट के लिए थम गया. डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था. शार्लोट ने इस दौरान जो महसूस किया, वह किसी कल्पना से कम नहीं है.
संगीत की धुन पर जन्नत में झूम रहे थे लोग!
शार्लोट ने अपने अनुभव को याद करते हुए बताया कि जब डॉक्टर उन्हें होश में लाने की कोशिश कर रहे थे, तब उन्हें चारों ओर सबसे खूबसूरत फूलों की खुशबू और मधुर संगीत सुनाई दे रहा था. उन्होंने खुद को अपने शरीर से ऊपर हवा में देखा. उन्होंने कहा, “मैंने अपनी आंखें खोलीं और मुझे पता था कि मैं कहां हूं. मुझे पता था कि मैं स्वर्ग में हूं.” शार्लोट के अनुसार, स्वर्ग की सुंदरता हमारी कल्पना से लाखों गुना ऊपर है. वहां हरियाली, पेड़ और घास सब कुछ संगीत की धुन पर झूम रहा था, मानो हर चीज़ ईश्वर की आराधना कर रही हो. उन्हें स्वर्गदूतों ने मार्गदर्शन दिया और वहां भय का नामोनिशान नहीं था. यह ‘परम आनंद’ जैसा था.
खोए हुए बेटे से मुलाकात और माता-पिता का दीदार
इस दिव्य यात्रा के दौरान शार्लोट की मुलाकात उन सभी प्रियजनों से हुई जिन्हें वह खो चुकी थीं, जिनमें उनके माता-पिता, बहन और अन्य रिश्तेदार शामिल थे. सबसे भावुक पल तब आया जब उन्हें एक छोटे बच्चे से मिलवाया गया. शार्लोट समझ नहीं पा रही थीं कि वह बच्चा कौन है, तभी उन्हें ईश्वर की आवाज़ सुनाई दी. उन्होंने बताया कि यह उनका वह बच्चा है, जिसे उन्होंने साढ़े पांच महीने की गर्भावस्था में खो दिया था. उन्होंने बच्चे को गोद में उठाकर कहा, “शार्लोट, यह एक लड़का है.”
दुर्गंध और चीखों से भरा भयानक नर्क
स्वर्ग की अतुलनीय सुंदरता देखने के बाद शार्लोट ने दावा किया कि भगवान उन्हें कुछ देर के लिए नर्क भी ले गए. यह अनुभव असहनीय और भयानक था. उन्होंने नीचे देखा और उन्हें सड़े हुए मांस जैसी दुर्गंध आई. चारों ओर केवल चीखें सुनाई दे रही थीं.उन्होंने बताया कि उन्हें यह इसलिए दिखाया गया, ताकि वह चेतावनियों के रूप में लोगों को बता सकें कि अगर वे अपना व्यवहार नहीं बदलते हैं, तो उनका क्या अंजाम होगा. वापस जाकर ये सब साझा करो”
नर्क का अनुभव खत्म होने के बाद शार्लोट ने अपने पिता की आवाज़ सुनी, जिन्होंने कहा कि “तुम्हारे पास वापस जाकर ये सब साझा करने का समय है.” इसके तुरंत बाद उन्हें लगा जैसे वह वापस अपने शरीर में समा रही हों. दर्द महसूस होते ही वह ‘जिंदा’ हो गईं. दो हफ़्ते अस्पताल में बिताने के बाद शार्लोट पूरी तरह से ठीक हो गईं और तब से वह इस जीवन बदलने वाले अनुभव को दुनिया के साथ साझा कर रही हैं.
मासिक धर्म के रक्त का इस्तेमाल कर एंडोमेट्रियोसिस जैसी बीमारी के तंत्र को समझेंगे शोधकर्ता
14 Dec, 2025 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। शोधकर्ताओं द्वारा मासिक धर्म के रक्त का इस्तेमाल करके एंडोमेट्रियोसिस जैसे रोगों के तंत्र को समझना, संक्रमण का पता लगाना और क्षतिग्रस्त त्वचा की मरम्मत जैसे कई क्षेत्रों में संभावनाएं तलाशी जा रही हैं, जिसमें एंडोमेट्रियोसिस और कैंसर जैसी बीमारियों के लिए नया इलाज और डायग्नोस्टिक्स विकसित करने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।
मासिक धर्म के रक्त में जीवित प्रतिरक्षा कोशिकाएं होती हैं जो प्रजनन पथ से आती हैं। इनका अध्ययन सूजन को समझने और दर्दनाक यौन संबंधों जैसे लक्षणों के इलाज के लिए नई विधियां विकसित करने में मदद कर सकता है। शोधकर्ता एंडोमेट्रियोसिस से पीड़ित महिलाओं के मासिक धर्म के रक्त से ऑर्गेनॉइड विकसित कर सकते हैं, जो प्रयोगशाला में इस बीमारी के मॉडल बनाने में मदद करता है। मासिक धर्म के द्रव से प्राप्त प्लाज्मा ने क्षतिग्रस्त त्वचा के घावों को पूरी तरह से ठीक करने में मदद की है, जो सामान्य रक्त प्लाज्मा की तुलना में बहुत तेज़ है।
जानकारी के मुताबिक मासिक धर्म के रक्त से प्राप्त स्टेम सेल और अन्य कोशिकाएं कई प्रकार की बीमारियों, जैसे कैंसर के अनुसंधान और उपचार में उपयोग की जा सकती हैं। मासिक धर्म के रक्त से प्राप्त स्टेम कोशिकाएं, जैसे एंडोमेट्रियल पुनर्योजी कोशिकाएं और एंडोमेट्रियल स्ट्रोमल कोशिकाएं, स्टेम सेल थेरेपी के विकास में अहम योगदान दे सकती हैं।
यह शोध अभी अपने शुरुआती चरण में है मासिक धर्म के रक्त के इस्तेमाल से कई रोगों के निदान और उपचार के लिए नई संभावनाओं के द्वार खुल रहे हैं। यह पारंपरिक तरीकों के पूरक के रूप में काम कर सकता है और महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार के लिए नए मार्ग प्रदान कर सकता है।
अमेरिकी कांग्रेस की ट्रंप को दो टूक कहा- भारत पर लगाया 50 प्रतिशत टैरिफ तत्काल हटाएं
14 Dec, 2025 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के तीन सदस्यों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत से आयातित वस्तुओं पर लगाए गए भारी टैरिफ को समाप्त कराने के उद्देश्य से एक प्रस्ताव पेश किया है। इस प्रस्ताव का मकसद भारत से आने वाले उत्पादों पर लगाए गए 50 प्रतिशत तक के आयात शुल्क को रद्द करना है। सांसदों का कहना है कि ये टैरिफ न केवल अवैध हैं, बल्कि अमेरिकी श्रमिकों, उपभोक्ताओं और भारत-अमेरिका द्विपक्षीय संबंधों के लिए भी नुकसानदेह साबित हो रहे हैं।
यह प्रस्ताव प्रतिनिधि डेबोरा रॉस, मार्क वेसी और राजा कृष्णमूर्ति द्वारा प्रस्तुत किया गया है। इसे उस द्विदलीय पहल के अनुरूप माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य अन्य देशों पर लगाए गए समान टैरिफ को खत्म करना और आयात शुल्क बढ़ाने के लिए राष्ट्रपति की आपातकालीन शक्तियों के इस्तेमाल को सीमित करना है। प्रस्ताव में विशेष रूप से अंतर्राष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्ति अधिनियम के तहत भारत पर लगाए गए अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क को रद्द करने की मांग की गई है। ये अतिरिक्त शुल्क 27 अगस्त 2025 को पहले से लागू टैरिफ के ऊपर लगाए गए थे, जिससे कुल आयात शुल्क बढ़कर 50 प्रतिशत तक पहुंच गया था। डेबोरा रॉस ने कहा कि उत्तरी कैरोलिना की अर्थव्यवस्था भारत के साथ व्यापार, निवेश और भारतीय-अमेरिकी समुदाय के जरिए गहराई से जुड़ी हुई है। उनके अनुसार भारतीय कंपनियों ने राज्य में एक अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया है, जिससे जीवन विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अन्य क्षेत्रों में हजारों रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं। इसके साथ ही उत्तरी कैरोलिना के निर्माता हर साल भारत को लाखों डॉलर का सामान निर्यात करते हैं, जिससे दोनों देशों को आर्थिक लाभ होता है।
मार्क वेसी ने इन टैरिफ को उत्तर टेक्सास के आम लोगों पर अतिरिक्त कर जैसा बताया। उन्होंने कहा कि पहले से ही महंगाई और बढ़ती लागत से जूझ रहे परिवारों पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। वेसी के अनुसार भारत अमेरिका का एक अहम सांस्कृतिक, आर्थिक और रणनीतिक साझेदार है, और ऐसे कदम दोनों देशों के रिश्तों को कमजोर करते हैं।
राजा कृष्णमूर्ति ने कहा कि ये टैरिफ पूरी तरह प्रतिउत्पादक हैं। इनसे आपूर्ति श्रृंखलाएं बाधित होती हैं, अमेरिकी श्रमिकों को नुकसान पहुंचता है और उपभोक्ताओं के लिए रोजमर्रा की चीजें महंगी हो जाती हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि टैरिफ हटाने से अमेरिका और भारत के बीच आर्थिक सहयोग और सुरक्षा साझेदारी को मजबूती मिलेगी। यह प्रस्ताव डेमोक्रेट सांसदों द्वारा ट्रंप प्रशासन की एकतरफा व्यापार नीतियों को चुनौती देने और भारत के साथ संबंधों को फिर से संतुलित करने के व्यापक प्रयास का हिस्सा है। इससे पहले भी इन सांसदों ने अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर राष्ट्रपति से टैरिफ नीतियों को वापस लेने और दोनों देशों के बीच तनाव कम करने की अपील की थी। ट्रंप प्रशासन ने अगस्त की शुरुआत में भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया था और कुछ ही दिनों बाद इसमें 25 प्रतिशत की और बढ़ोतरी कर दी गई थी। इसके पीछे भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद को कारण बताया गया था।
रूस-तुर्की की मीटिंग में जबरन घुसे पाक पीएम शहबाज? पुतिन चौंके, पर किया नजरअंदाज
14 Dec, 2025 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अंकारा। तुर्कमेनिस्तान में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम के दौरान पाकिस्तान की कूटनीति को झटका लगा। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मिलने का कार्यक्रम था, लेकिन पुतिन उनसे मिलने नहीं आए। पुतिन उस समय तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन से मुलाकात कर रहे थे, जिससे शहबाज को करीब 40 मिनट तक इंतजार करना पड़ा। लंबे इंतजार के बाद शहबाज ने तय प्रोटोकॉल को तोड़ते हुए पुतिन और एर्दोगन की मीटिंग में अचानक प्रवेश कर लिया। इस दौरान दोनों राष्ट्राध्यक्ष बातचीत में व्यस्त थे और शहबाज की उपस्थिति से माहौल असहज हो गया।
यह पूरी घटना तुर्कमेनिस्तान की तटस्थता की 30वीं वर्षगांठ के अवसर पर हुई। वायरल हुए वीडियो में देखा जा सकता है कि शहबाज शरीफ अपने विदेश मंत्री इशाक डार के साथ अलग कमरे में बैठे हुए बेचैनी महसूस कर रहे थे। तय समय बीत जाने और बुलावे के न आने पर शहबाज अचानक उस हॉल में चले गए जहां पुतिन और एर्दोगन आमने-सामने बातचीत कर रहे थे। शहबाज के अचानक प्रवेश से रूसी और तुर्की अधिकारियों में चौंकाहट फैल गई। वीडियो में स्पष्ट है कि पुतिन बातचीत में असहज नजर आए और शहबाज उनके पास सिंगल सोफे पर बैठे। यह दर्शाता है कि यह बैठक पहले से शहबाज की उपस्थिति के लिए तय नहीं थी और प्रोटोकॉल का उल्लंघन हुआ।
सूत्रों के अनुसार, यह घटना पाकिस्तान की बढ़ती कूटनीतिक बेचैनी को उजागर करती है। शहबाज शरीफ देश में कई गंभीर संकटों का सामना कर रहे हैं, जबकि वास्तविक सत्ता सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर के पास है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय मंच पर मौजूदगी बनाए रखने के प्रयास में यह कदम प्रोटोकॉल की बड़ी चूक माना जा रहा है। खुफिया सूत्रों का कहना है कि पुतिन और एर्दोगन की यह बैठक पहले से तय और संवेदनशील थी। किसी तीसरे नेता का बिना बुलाए प्रवेश न केवल असहज करने वाला था, बल्कि इससे पाकिस्तान की कूटनीतिक स्थिति पर भी सवाल उठे। इस घटना को पाकिस्तान की घटती अंतरराष्ट्रीय हैसियत से जोड़ा जा रहा है। शहबाज को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा और फिर खुद बैठक में घुसना पड़ा, जो इस बात का संकेत है कि इस्लामाबाद अब वैश्विक मंच पर अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने में दबाव महसूस कर रहा है। इस पूरे प्रकरण ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पाकिस्तान को अब प्रभावशाली वैश्विक नेताओं के साथ औपचारिक और प्रभावी संवाद स्थापित करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। शहबाज की यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की कूटनीतिक स्थिति को लेकर चिंता पैदा करती है और वैश्विक मंच पर उसकी कमज़ोरी को उजागर करती है।
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