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ट्रंप ने बढ़ाया सीजफायर का समय, अपनी नाकामी छिपाने पाकिस्तान का लिया नाम
23 Apr, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार तड़के ईरान के साथ चल रहे तनाव के बीच सीजफायर की अवधि आखिरी समय पर बढ़ा दी। यह फैसला उस वक्त लिया गया जब सीजफायर की समय सीमा खत्म होने वाली थी और खुद ट्रंप एक दिन पहले संकेत दे चुके थे कि अगर समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका फिर से ईरान पर बमबारी शुरू कर सकता है। ऐसे में अचानक सीजफायर बढ़ाने का फैसला कई सवाल खड़े करता है। क्या यह रणनीतिक कदम है या फिर अमेरिका अपनी असफलता को छिपाने की कोशिश कर रहा है?
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान की सरकार इस समय अंदर से बंटी हुई है। पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर और पीएम शहबाज शरीफ के अनुरोध पर अमेरिका ने हमला टाल दिया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिकी सेना पूरी तरह तैयार है, लेकिन फिलहाल ईरान को एक संयुक्त प्रस्ताव देने का समय दिया जा रहा है। हालांकि, इस दौरान ईरान के बंदरगाहों की नाकेबंदी जारी रहेगी।
यहीं से इस पूरे घटनाक्रम का विरोधाभास सामने आता है। एक तरफ अमेरिका सीजफायर की बात कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ ईरान के समुद्री व्यापार को रोकने के लिए सख्त नाकेबंदी कर रखी है। अंतरराष्ट्रीय कानून के नजरिए से देखें तो किसी देश के बंदरगाहों की नाकेबंदी को युद्ध जैसी कार्रवाई माना जाता है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या यह वास्तव में सीजफायर है या दबाव बनाने की रणनीति? अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने साफ कहा है कि ईरान के खार्ग आइलैंड पर तेल भंडारण जल्द ही भर जाएगा, जिससे ईरान को अपने तेल उत्पादन को रोकना पड़ सकता है।
खार्ग आइलैंड ईरान के तेल निर्यात का प्रमुख केंद्र है। इसका मतलब यह है कि अमेरिका सीधे तौर पर ईरान की अर्थव्यवस्था को निशाना बना रहा है। साथ ही अमेरिका ने चेतावनी दी है कि जो भी जहाज या व्यक्ति ईरान की मदद करेगा, उस पर सख्त प्रतिबंध लगाए जाएंगे। ईरान ने इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकेर कालीबाफ के सलाहकार महदी मोहम्मदी ने ट्रंप के बयान को बेकार बताया और कहा इसका कोई मतलब नहीं है।
इस बीच कूटनीतिक मोर्चे पर भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वैंस का इस्लामाबाद दौरा रद्द कर दिया गया है। वह दूसरे दौर की वार्ता का नेतृत्व करने वहां जाने वाले थे। उनके साथ विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और वरिष्ठ सलाहकार जेयर्ड कुशनर भी जाने वाले थे। दौरा रद्द होने से साफ होता है कि बातचीत की प्रक्रिया भी पूरी तरह स्थिर नहीं है।
जानकारों का मानना है कि ट्रंप की ओर से पाकिस्तान का नाम आगे करना एक तरह से रणनीतिक असमंजस को छिपाने की कोशिश है। असल में ट्रंप प्रशासन एक कठिन संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। एक तरफ वह ईरान पर अधिकतम दबाव बनाए रखना चाहता है, वहीं दूसरी तरफ खुले युद्ध से भी बचना चाहता है। सीजफायर बढ़ाना इसी रणनीति का हिस्सा है, जहां बातचीत की गुंजाइश भी बनी रहे और दबाव भी कम न हो, लेकिन इस रणनीति में सबसे बड़ा विरोधाभास यही है कि सीजफायर के बावजूद आक्रामक आर्थिक और समुद्री कदम जारी हैं। ईरान इसे साफ तौर पर उकसावे की कार्रवाई मान रहा है और उसने संकेत दिया है कि वह ऐसे दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है। ईरान का दावा है कि उसे प्रतिबंधों से निपटना आता है और वह अपने हितों की रक्षा करना भी जानता है।
नेपाल में बालेन शाह के हनीमून पीरियड में ही शुरु हो गया व्यापक जनआक्रोश.....सड़क पर लोग
23 Apr, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
काठमांडू। नेपाल में बालेन शाह की सरकार बनने के मात्र एक माह के भीतर ही व्यापक जनआक्रोश देखने को मिल रहा है। काठमांडू के मेयर से देश के प्रधानमंत्री पद तक पहुंचे शाह के लिए सत्ता की शुरुआत काफी चुनौतीपूर्ण साबित हो रही है। दो-तिहाई बहुमत के बावजूद उनकी सरकार को सड़कों से लेकर प्रशासनिक केंद्र ‘सिंघा दरबार’ तक विरोध का सामना करना पड़ रहा है। जानकार के मुताबिक 6 माह का समय किसी भी सरकार के लिए हनीमून पीरिड होता हैं, लेकिन बोलेन के खिलाफ सड़कों पर उतरा यह जनसैलाब बताता हैं कि वे अपने किए गए वादों पर खरे उतरते नहीं दिख रहे है।
इस विरोध का सबसे बड़ा कारण भारत से आने वाले सामान पर लगाया गया नया अनिवार्य सीमा शुल्क है। नेपाल सरकार के फैसले के तहत 100 रुपये से अधिक मूल्य के सामान पर शुल्क लगाया जा रहा है, जिससे खासतौर पर सीमावर्ती क्षेत्रों के लोग प्रभावित हुए हैं। इन इलाकों के निवासी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भारत पर काफी हद तक निर्भर रहते हैं। इसके बाद यह नीति उनके लिए आर्थिक बोझ बन गई है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार ने यह निर्णय लेते समय जमीनी वास्तविकताओं को नजरअंदाज किया है, जिससे आम जनता की परेशानियां बढ़ गई हैं।
दूसरा बड़ा मुद्दा छात्र संगठनों से जुड़ा है। बालेन शाह सरकार पर आरोप है कि उसने राजनीतिक दलों से जुड़े छात्र संघों को दरकिनार करने या कमजोर करने की कोशिश की है। इस कारण युवाओं में गहरी नाराजगी देखी जा रही है। छात्र नेताओं का कहना है कि सरकार संवाद के बजाय दमनकारी रवैया अपना रही है। देशभर में स्कूल और कॉलेज के छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किए हैं, जिसमें हजारों की संख्या में छात्र शामिल हुए। कई जगहों पर छात्रों को स्कूल यूनिफॉर्म में तख्तियां लेकर नारेबाजी करते देखा गया, जो इस आंदोलन के व्यापक सामाजिक प्रभाव को दर्शाता है। विरोध का तीसरा बड़ा केंद्र गृह मंत्री सूडान गुरुंग के खिलाफ लगे आरोप हैं। उन पर आय से अधिक संपत्ति रखने और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन में शामिल होने के आरोप लगाए गए हैं। विपक्षी दलों और प्रदर्शनकारियों का दावा है कि गुरुंग के कथित तौर पर ऐसे लोगों से संबंध रहे हैं जो वित्तीय अपराधों में संलिप्त रहे हैं। मीडिया रिपोर्टों में इसतरह के दस्तावेजों का भी जिक्र किया गया है जो विवादास्पद निवेश और शेयरधारिता की ओर इशारा करते हैं। इन आरोपों के चलते उनके इस्तीफे की मांग तेज होती जा रही है और यह मुद्दा आंदोलन का प्रमुख हिस्सा बन गया है।
इन सभी कारणों से बालेन शाह सरकार पर बहुआयामी दबाव बन गया है। आर्थिक नीतियों को लेकर असंतोष, छात्रों का उग्र विरोध और सरकार के भीतर कथित भ्रष्टाचार के आरोप—इन सबने मिलकर स्थिति को गंभीर बना दिया है। जो विरोध शुरुआत में एक नीति के खिलाफ था, वह अब एक व्यापक राजनीतिक चुनौती का रूप ले चुका है। सड़कों पर बढ़ती भीड़ और लगातार हो रहे प्रदर्शनों से यह साफ है कि सरकार को जल्द ही ठोस कदम उठाना होगा।
बालेन शाह सरकार दबाव में
विरोध प्रदर्शन के पैमाने और तीव्रता में वृद्धि के साथ, बालेन शाह सरकार को कई मोर्चों पर प्रतिक्रिया देने के लिए बढ़ते दबाव का सामना करना पड़ रहा है: आर्थिक नीति संबंधी चिंताएँ, छात्र अशांति, और इसके रैंकों के भीतर अनुचितता के आरोप। नीतिगत निर्णयों पर असंतोष के रूप में जो शुरू हुआ वह अब एक व्यापक राजनीतिक चुनौती में बदल गया है, सड़कों पर और नेपाल के राजनीतिक परिदृश्य में विरोध की आवाज़ें तेज़ हो रही हैं।
रुसी टीवी एंकर ने इटली की पीएम मेलोनी को मूर्ख, जानवर व फासीवादी कहा
23 Apr, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रोम। इटली और रूस के बीच कूटनीतिक तनाव उस समय और बढ़ गया जब रूसी टीवी एंकर व्लादिमीर सोलोवियोव ने इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी। अपने शो में उन्होंने मेलोनी को “मूर्ख”, “जंगली जानवर”, “मानवता के लिए कलंक” और “नीच महिला” जैसे शब्दों से संबोधित किया। उन्होंने केवल इतना ही नहीं कहा बल्कि रूसी भाषा में मेलोनी को “फासीवादी” भी बताया और आरोप लगाया कि उन्होंने अपने वोटर्स के साथ-साथ अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प को भी “धोखा” दिया है। इस तरह की व्यक्तिगत और तीखी टिप्पणी ने मामले को और गंभीर बना दिया है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस बयान के बाद इटली सरकार ने सख्त प्रतिक्रिया दी। इटली के विदेश मंत्री ने बताया कि रोम में तैनात रूस के राजदूत को विदेश मंत्रालय में तलब किया गया। वहां इटली की तरफ से इस पूरे मामले पर औपचारिक विरोध दर्ज कराया गया और इस भाषा को “बेहद गंभीर और अस्वीकार्य” बताया। इटली ने साफ कहा है कि वह अपनी पीएम मेलोनी के खिलाफ इस तरह की टिप्पणी बर्दाश्त नहीं करेगा। खास बात यह रही कि इस मुद्दे पर इटली की विपक्षी पार्टियां भी सरकार के साथ खड़ी नजर आईं और सभी ने मिलकर इस बयान की निंदा की।
दरअसल, इटली और रूस के रिश्ते पहले से ही तनावपूर्ण हैं। इसकी मुख्य वजह यूक्रेन है। इटली की सरकार लगातार यूक्रेन का समर्थन कर रही है और उसे सैन्य व मानवीय मदद भी दे रही है। इससे रुस नाराज है। वहीं मेलोनी की सरकार दक्षिणपंथी विचारधारा वाली है, लेकिन उनके गठबंधन में कुछ ऐसे दल भी हैं जिनके रूस के साथ पुराने संबंध हैं। इसके बावजूद मेलोनी ने यूक्रेन के मुद्दे पर रूस के खिलाफ सख्त रुख अपनाया हुआ है।
बता दें हाल में मेलोनी और ट्रंप के बीच भी दूरी देखने को मिली है। पहले दोनों को करीब माना जाता था, लेकिन ईरान युद्ध और कुछ अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर मेलोनी ने ट्रंप के बयानों से अलग रुख अपनाया, जिससे राजनीतिक समीकरण बदलते दिखे। इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि एक टीवी एंकर के बयान ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। पहले से ही यूक्रेन युद्ध के कारण तनाव झेल रहे यूरोप और रूस के रिश्ते अब और बिगड़ते नजर आ रहे हैं। आने वाले समय में यह विवाद और गहरा सकता है, क्योंकि इटली ने इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाने के संकेत दिए हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना जंग का मैदान: भारत आ रहे 'एपामिनोडेस' जहाज पर हमला
22 Apr, 2026 08:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ईरान-अमेरिका तनाव: ईरान और अमेरिका के मध्य बढ़ती तल्खी का सीधा असर अब होर्मुज स्ट्रेट पर दिखाई दे रहा है। इस सामरिक मार्ग से गुजरने वाले जहाजों को दोनों देशों के बीच जारी खींचतान का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। शनिवार को एक भारतीय जहाज पर फायरिंग की घटना के बाद सोमवार को भी तनावपूर्ण स्थिति बनी रही, जब ईरान की इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने भारत आ रहे एक जहाज को रोककर अपने कब्जे में ले लिया।
जहाज पर फायरिंग की वजह फायरिंग के मामले में ईरान का पक्ष है कि जहाज बिना अनुमति के होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने का प्रयास कर रहा था। ईरान ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि वह समुद्री सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं करेगा। ईरान के अनुसार, सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने के कारण ही बल प्रयोग करना पड़ा।
किस जहाज को बनाया गया निशाना? लाइबेरिया के ध्वज वाला 'एपामिनोडेस' (EPAMINODES) नामक जहाज ईरान के होर्मुज स्ट्रेट को पार कर भारत के गुजरात स्थित मुंद्रा पोर्ट की ओर बढ़ रहा था। इसी दौरान उस पर फायरिंग की गई। ईरान का आरोप है कि जहाज के नेविगेशन सिस्टम में हेरफेर की गई थी, जिससे समुद्री सुरक्षा को खतरा पैदा हुआ। इसी कारण जहाज को जब्त कर लिया गया है।
प्रतिशोध की कार्रवाई? ईरानी मीडिया के अनुसार, यूनान (ग्रीक) के एक जहाज पर भी हमला हुआ है। माना जा रहा है कि यह कार्रवाई रविवार (20 अप्रैल) को अमेरिकी सेना द्वारा एक ईरानी जहाज को कब्जे में लेने का जवाब है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान ने महज 48 घंटों के भीतर अमेरिका से अपना बदला ले लिया है। फिलहाल, जब्त किए गए जहाजों—MSC FRANCESCA और EPAMINODES—पर लदे सामान के बारे में कोई आधिकारिक विवरण साझा नहीं किया गया है।
शांति वार्ता पर संकट, होर्मुज में फिर भड़का सैन्य तनाव
22 Apr, 2026 04:52 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान: दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य में एक बार फिर युद्ध की आहट सुनाई दे रही है। बुधवार को ईरानी सेना ने अंतरराष्ट्रीय जलसीमा से गुजर रहे तीन व्यापारिक जहाजों पर अंधाधुंध फायरिंग की, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं। यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका और इस्राइल के साथ ईरान की शांति वार्ता को लेकर कूटनीतिक प्रयास तेज थे।
हमले के पीछे ईरान का तर्क
ईरान की अर्धसैनिक इकाई 'रिवोल्यूशनरी गार्ड' ने बुधवार सुबह इस आक्रामक कार्रवाई को अंजाम दिया। जानकारी के अनुसार, ईरानी बल ने पहले एक कंटेनर जहाज पर गोलियां चलाईं और उसके तुरंत बाद दूसरे जहाज को निशाना बनाया। ईरानी मीडिया का दावा है कि इन जहाजों ने सैन्य चेतावनियों की अनदेखी की थी, जिसके कारण उन पर 'कानूनी कार्रवाई' की गई। कब्जे में लिए गए जहाजों की पहचान एमएससी फ्रांसिस्का और एपाामिनोड्स के रूप में हुई है। इसके कुछ देर बाद एक तीसरे जहाज 'यूफोरिया' पर भी हमला हुआ, जो फिलहाल ईरानी तट के पास फंसा हुआ है।
ट्रंप का दांव पड़ा उल्टा?
यह टकराव उस वक्त बढ़ा जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने बुधवार को समाप्त होने वाले संघर्षविराम (सीजफायर) को अनिश्चित काल के लिए बढ़ाने की घोषणा की थी। ट्रंप को उम्मीद थी कि इससे बातचीत का माहौल बनेगा, लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी जारी रहेगी। ईरान इसी बात से आक्रोशित है। ईरानी राजनयिकों का तर्क है कि जब तक अमेरिका अपनी घेराबंदी पूरी तरह खत्म नहीं करता, वे वार्ता की मेज पर नहीं लौटेंगे।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
होर्मुज में बढ़ते गतिरोध का सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ रहा है:
तेल की कीमतें: अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड $98 प्रति बैरल के पार निकल गया है। युद्ध छिड़ने के बाद से इसमें 35% की वृद्धि हो चुकी है।
महंगाई की मार: ईंधन की सप्लाई बाधित होने से न केवल पेट्रोल-डीजल बल्कि माल ढुलाई महंगी होने के कारण आवश्यक वस्तुओं की कीमतें भी बढ़ रही हैं। यदि यह मार्ग लंबे समय तक बाधित रहा, तो दुनिया के सामने भीषण मंदी का संकट खड़ा हो जाएगा।
क्षेत्रीय स्थिति और कूटनीति
शांति की कोशिशों के बीच पाकिस्तान अभी भी ईरान से किसी सकारात्मक संकेत की प्रतीक्षा कर रहा है। इस्लामाबाद अगले दौर की वार्ता आयोजित करना चाहता है, लेकिन ईरान ने अपना प्रतिनिधिमंडल भेजने से इनकार कर दिया है। मिस्र में तैनात ईरानी दूत मुजतबा फिरदौसी पोर ने साफ कहा कि घेराबंदी जारी रहने तक कोई समझौता संभव नहीं है।
अब तक का नुकसान
28 फरवरी से शुरू हुए इस खूनी संघर्ष ने भारी तबाही मचाई है
ईरान: लगभग 3,375 लोगों की मौत।
लेबनान: 2,290 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं।
इस्राइल: 23 नागरिक और 15 सैनिक हताहत।
अमेरिकी सेना: क्षेत्र में तैनात 13 सैनिकों ने जान गंवाई है।
ईरान के तेवर फिलहाल बेहद कड़े हैं। रिवोल्यूशनरी गार्ड ने चेतावनी दी है कि वे दुश्मन पर 'अकल्पनीय प्रहार' करेंगे। भले ही लेबनान में 10 दिनों का सीजफायर लागू हो, लेकिन दावों और जवाबी हमलों ने इसे बेहद कमजोर कर दिया है। जब तक कोई ठोस कूटनीतिक हल नहीं निकलता, तब तक समुद्र से लेकर जमीन तक अशांति बने रहने की आशंका है।
नेपाल में हंगामा, PM के खिलाफ छात्रों का प्रदर्शन
22 Apr, 2026 01:34 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
काठमांडू:नेपाल में प्रधानमंत्री बालेन शाह के नेतृत्व वाली सरकार के विरुद्ध जन-आक्रोश प्रचंड हो गया है। सत्ता संभाले अभी एक माह का समय भी व्यतीत नहीं हुआ है, लेकिन पूरे देश में जनता विरोध में उतर आई है। राजधानी काठमांडू सहित विभिन्न महानगरों में छात्र, राजनैतिक दल और सामान्य नागरिक लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं।
यह आंदोलन अब केवल गलियों तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के मुख्य प्रशासनिक केंद्र सिंह दरबार तक की दहलीज पर पहुँच चुका है। विरोध का मुख्य कारण सरकार के कुछ हालिया फैसलों से उपजा असंतोष है। विशेषकर, भारत से आयात होने वाले 100 रुपये से अधिक के सामान पर अनिवार्य सीमा शुल्क (कस्टम ड्यूटी) लगाने के निर्णय ने आग में घी डालने का काम किया है।
सीमावर्ती इलाकों में भारी रोष
भारत-नेपाल सीमा पर बसे नागरिकों का तर्क है कि वे अपनी दैनिक आवश्यकताओं के लिए भारतीय बाजारों पर निर्भर हैं, ऐसे में यह नया नियम उनकी आजीविका को सीधे तौर पर प्रभावित कर रहा है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार ने क्षेत्रीय परिस्थितियों की अनदेखी की है, जिससे आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ गया है।
छात्र संगठनों का आंदोलन
असंतोष की दूसरी बड़ी वजह छात्र संघों के प्रति सरकार का सख्त रुख है। छात्र नेताओं का आरोप है कि प्रशासन राजनैतिक दलों से संबद्ध छात्र संगठनों के अस्तित्व को मिटाने का प्रयास कर रहा है। आंदोलन में हजारों छात्र अपनी स्कूल यूनिफॉर्म में शामिल होकर नारेबाजी कर रहे हैं, जो इस विद्रोह की व्यापकता को दर्शाता है।
गृह मंत्री पर गहराया भ्रष्टाचार का साया
प्रदर्शनों के केंद्र में गृह मंत्री सुदान गुरूंग भी हैं, जिन पर पद के दुरुपयोग और आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के गंभीर आरोप लगे हैं। विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों का दावा है कि गुरूंग के संबंध संदिग्ध व्यापारियों से रहे हैं। नेपाली मीडिया में उजागर हुए कुछ दस्तावेजों के बाद अब उनके इस्तीफे की मांग जोर पकड़ने लगी है, जिससे सरकार की साख पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सिरसा के गांव खेड़ी में खेत की ढाणी में गिरा संदिग्ध गुब्बारा
22 Apr, 2026 12:17 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सिरसा/खेड़ी: हरियाणा और राजस्थान की सीमा पर बसे गांव खेड़ी में बुधवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया, जब एक किसान की ढाणी (खेत स्थित आवास) में पाकिस्तान के निशान वाला एक संदिग्ध गुब्बारा उतरा। अंतरराष्ट्रीय प्रतीकों वाले इस गुब्बारे को देखकर स्थानीय ग्रामीणों में सुरक्षा को लेकर चिंता और कौतूहल का माहौल बन गया।
विमान के आकार का गुब्बारा और पाकिस्तानी चिह्न
जानकारी के अनुसार, यह गुब्बारा हूबहू एक छोटे हवाई जहाज के आकार में बना हुआ है। सफेद और हरे रंग के इस गुब्बारे पर 'PIA' (पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस) लिखा हुआ है। साथ ही इस पर पड़ोसी देश का नाम और चांद-सितारे का आधिकारिक चिह्न भी अंकित है।
किसान ने दी पुलिस को सूचना
बुधवार सुबह जब ग्रामीण जयवीर सिंह शर्मा अपनी ढाणी पहुंचे, तो उन्होंने इस अजीबोगरीब गुब्बारे को वहां पड़ा देखा। गुब्बारे पर पाकिस्तानी एयरलाइंस का नाम देखकर उन्होंने तुरंत सतर्कता बरती और इसकी जानकारी कागदाना पुलिस चौकी को दी। सूचना मिलते ही सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस टीम तुरंत हरकत में आई।
पुलिस की प्रारंभिक जांच और बरामदगी
कागदाना चौकी प्रभारी दीपक शर्मा अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और गुब्बारे को सुरक्षित रूप से अपने कब्जे में ले लिया। पुलिस ने घटनास्थल और आसपास के खेतों की सघन तलाशी भी ली।
पुलिस का बयान: चौकी प्रभारी दीपक शर्मा ने बताया कि प्रथम दृष्टया यह गुब्बारा काफी हल्का है। ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि तेज हवा के रुख के कारण यह सीमा पार से उड़कर भारतीय क्षेत्र में आ गया होगा।
जांच जारी: पुलिस ने संबंधित उच्चाधिकारियों को इस बारे में सूचित कर दिया है। हालांकि गुब्बारे के साथ कोई संदिग्ध वस्तु या उपकरण बरामद नहीं हुआ है, फिर भी एहतियात के तौर पर मामले की जांच की जा रही है।
बच्चों की छोटी-छोटी समस्याओं को न करें नजरअंदाज
22 Apr, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लंदन । बचपन में की गई छोटी-मोटी लापरवाही भी बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर गहरा असर डाल सकती है। नेशनल हेल्थ मिशन के अनुसार, बच्चों में पाचन संबंधी समस्याएं काफी आम हैं, लेकिन माता-पिता अक्सर इनके शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं। यदि समय रहते इन संकेतों को पहचान लिया जाए, तो बच्चे को कई गंभीर परेशानियों से बचाया जा सकता है। बच्चों का पाचन तंत्र अभी विकसित हो रहा होता है, इसलिए छोटी-छोटी समस्याएं भी जल्दी बढ़ सकती हैं और आगे चलकर बड़ी समस्या का रूप ले सकती हैं। डॉक्टरों की सलाह है कि माता-पिता को बच्चों के हर छोटे बदलाव पर गहरी नजर रखनी चाहिए ताकि वे स्वस्थ और खुशहाल रह सकें। पहला और सबसे आम संकेत है कब्ज। यदि आपका बच्चा कठोर मल त्याग करता है, शौच के समय रोता-चिल्लाता है, या शौच करने से डरने लगता है, तो यह कब्ज का संकेत हो सकता है। दूसरा महत्वपूर्ण संकेत है दस्त।
बच्चे को बार-बार पतला मल आना दस्त का लक्षण है, जिससे उसके शरीर में पानी की कमी का खतरा बढ़ जाता है और वह सुस्त व कमजोर दिखने लगता है। तीसरा संकेत है पेट में जलन और एसिडिटी। यदि बच्चा बार-बार पेट में जलन की शिकायत करता है, उसे उल्टी आती है या खट्टी डकारें आती हैं, तो यह एसिडिटी या पाचन संबंधी गड़बड़ी का संकेत है। चौथी समस्या है भोजन असहजता या फूड इनटॉलेरेंस। इसमें बच्चा किसी विशेष भोजन, जैसे दूध, गेहूं या ग्लूटेन, को ठीक से पचा नहीं पाता। इसके लक्षण पेट फूलना, दर्द होना या शरीर पर चकत्ते पड़ना हो सकते हैं। पांचवीं समस्या कृमि संक्रमण है, जो अस्वच्छता और साफ-सफाई की कमी के कारण बच्चों में काफी आम है। इसमें बच्चा बार-बार पेट दर्द की शिकायत कर सकता है, उसकी भूख कम हो सकती है, वजन नहीं बढ़ता और कभी-कभी नींद में दांत पीसने जैसी आदतें भी देखने को मिलती हैं।
Rohtak हादसा: कैफे किचन में धमाका, गैस सिलिंडर फटा; अफरातफरी
22 Apr, 2026 11:41 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रोहतक: शहर के व्यस्ततम इलाके सोनीपत स्टैंड पर मंगलवार दोपहर एक पिज्जा-बर्गर कैफे में भीषण आग लग गई। आग की वजह से रसोई में रखा एलपीजी सिलेंडर जोरदार धमाके के साथ फट गया, जिससे आसपास की दुकानों और मकानों में हड़कंप मच गया। राहत की बात यह रही कि इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन संपत्ति का भारी नुकसान हुआ है।
शॉर्ट-सर्किट बना आग का कारण
कैफे संचालक जतिन के अनुसार, दोपहर करीब 3:30 बजे रसोई में कोई मौजूद नहीं था, जबकि नीचे के केबिन में ग्राहक बैठे थे। तभी अचानक शॉर्ट-सर्किट के कारण रसोई में आग भड़क गई। धुआं देख जब कर्मचारी ऊपर पहुंचा, तो लपटें विकराल रूप ले चुकी थीं। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की तीन गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और बचाव कार्य शुरू किया।
धमाके की तीव्रता: 50 मीटर दूर मिली सिलेंडर की बॉडी
आग बुझाने की प्रक्रिया के दौरान रसोई में रखे तीन सिलेंडरों में से एक अचानक फट गया। धमाका इतना जबरदस्त था कि:
पास की एक दुकान और एक मकान के खिड़कियों के शीशे चकनाचूर हो गए।
फटने वाले सिलेंडर का ऊपरी हिस्सा हवा में उड़कर करीब 50 मीटर दूर एक मकान की छत पर जा गिरा।
पास के निजी अस्पताल में मौजूद डॉक्टर, मरीज और मेडिकल स्टोर संचालक दहशत के कारण बाहर निकल आए।
फायर ब्रिगेड की तत्परता से टला बड़ा हादसा
दमकल कर्मियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर रसोई में मौजूद अन्य दो सिलेंडरों को समय रहते बाहर निकाल लिया, अन्यथा तबाही और अधिक हो सकती थी। सिविल लाइन थाना प्रभारी महेंद्र सिंह ने बताया कि आग पर काबू पा लिया गया है, लेकिन देरी होने पर यह एक बड़ी त्रासदी में बदल सकता था।
लाखों का नुकसान, प्रशासन पर उठे सवाल
कैफे संचालक ने बताया कि उन्होंने हाल ही में करीब 4 लाख रुपये निवेश कर यह कैफे शुरू किया था, जो अब पूरी तरह जलकर खाक हो गया है।
इस हादसे ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं:
नियमों की अनदेखी: व्यावसायिक गतिविधि होने के बावजूद कैफे में कमर्शियल की जगह घरेलू गैस सिलेंडरों का इस्तेमाल किया जा रहा था।
अधिकारियों की चुप्पी: शहर में कई स्थानों पर धड़ल्ले से घरेलू सिलेंडरों का व्यावसायिक उपयोग हो रहा है, लेकिन संबंधित विभाग मूकदर्शक बना हुआ है।
ट्रम्प का बयान: ईरान में एकजुटता की कमी, इसलिए बढ़ाया गया सीजफायर
22 Apr, 2026 11:06 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन/इस्लामाबाद: मध्य-पूर्व में युद्ध के बादलों के बीच एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की समय सीमा (डेडलाइन) समाप्त होने से महज कुछ घंटे पहले सीजफायर को अनिश्चितकाल के लिए आगे बढ़ाने का एलान किया है। दिलचस्प बात यह है कि ट्रंप ने इस कूटनीतिक जीत का पूरा श्रेय पाकिस्तान के नेतृत्व को दिया है।
पाकिस्तान बना 'ग्लोबल पीसमेकर'
ट्रंप ने अपनी सोशल मीडिया साइट 'ट्रुथ' पर स्पष्ट किया कि यह फैसला पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के परामर्श के बाद लिया गया है। ट्रंप के अनुसार विभाजित शासन को समय: ईरान का मौजूदा शासन आंतरिक रूप से बंटा हुआ है, इसलिए उन्हें एक ठोस और एकीकृत शांति प्रस्ताव तैयार करने के लिए अतिरिक्त समय दिया गया है। यह पहली बार है जब अमेरिका ने ईरान के लिए कोई निश्चित समय सीमा तय नहीं की है। ट्रंप ने कहा कि हमला तब तक स्थगित रहेगा जब तक ईरान के प्रतिनिधि बातचीत के मेज पर नहीं आ जाते।
सैन्य सतर्कता और नाकाबंदी बरकरार
भले ही ट्रंप ने युद्धविराम बढ़ा दिया हो, लेकिन उन्होंने ईरान पर दबाव कम नहीं किया है। उन्होंने साफ किया कि होर्मूज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz): ईरान के तटीय बंदरगाहों की अमेरिकी नाकाबंदी पहले की तरह जारी रहेगी। अमेरिकी सेना किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह मुस्तैद और सक्षम बनी रहेगी।
इस्लामाबाद में वार्ता का अगला दौर
पाकिस्तान ने इस वैश्विक जिम्मेदारी को निभाने पर गर्व व्यक्त किया है। फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने राष्ट्रपति ट्रंप का आभार जताते हुए कहा कि पाकिस्तान इस संघर्ष के स्थायी समाधान के लिए प्रतिबद्ध है। अब सबकी निगाहें इस्लामाबाद पर टिकी हैं, जहाँ शांति समझौते के लिए दूसरे दौर की वार्ता होनी प्रस्तावित है। पाकिस्तान के लिए इस भूमिका के मायने
आर्थिक तंगी और बिजली कटौती जैसे संकटों से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए यह 'राजनयिक ढाल' संजीवनी साबित हो सकती है वैश्विक स्तर पर एक शांतिदूत के रूप में उभरने से पाकिस्तान की कूटनीतिक साख बढ़ेगी। यदि पाकिस्तान इस तनाव को सुलझाने में सफल रहता है, तो उसे अंतरराष्ट्रीय निवेश आकर्षित करने और अपनी जर्जर अर्थव्यवस्था को संभालने में मदद मिल सकती है।
अमेरिका-ईरान जंग में करीब 3,375 लोगों की मौत.....2,875 पुरुष और 496 महिलाएं
22 Apr, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान । ईरान और अमेरिका के बीच 28 फरवरी को शुरु हुई जंग के बाद अमेरिकी हमलों की वजह से ईरान में करीब 3,375 लोगों की मौत हो गई है। यह आंकड़ा ईरान के विधिक चिकित्सा संगठन के प्रमुख अब्बास मस्जेदी की ओर से दिया गया। मीडिया रिपोर्ट में मस्जेदी के हवाले से बताया कि मारे गए लोगों में से केवल चार की पहचान नहीं हुई है।
उन्होंने यह ब्यौरा नहीं दिया कि हताहतों में कितने आम नागरिक हैं और कितने सुरक्षा बल के जवान हैं, केवल इतना बताया कि मारे गए लोगों में 2,875 पुरुष और 496 महिलाएं शामिल हैं। मस्जेदी ने कहा कि मृतकों में 18 वर्ष या उससे कम आयु के 383 बच्चे भी हैं। इन आंकड़ों से ये सवाल उठ रहे हैं कि इसमें सुरक्षा बलों के सदस्य शामिल हैं या नहीं, खासकर तब जब देश में सैन्य ठिकानों और हथियार भंडारों पर हमले तेज होने की खबरें सामने आई हैं।
चर्चा है कि पाकिस्तान के इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका में दूसरे चरण की वार्ता शुरू होगी। इस वार्ता के लिए अमेरिका पूरी तरह से तैयार दिख रहा है। वहीं ईरान ने बातचीत से इंकार किया है। इसकी मुख्य वजह मुख्य कारण ईरानी बंदरगाहों पर जारी अमेरिकी नाकेबंदी बताया गया है। इस बीच, अमेरिकी सेना ने एक ईरानी मालवाहक जहाज को जब्त किया, जिससे पश्चिम एशिया में नाजुक दौर से गुजर रही शांति पर और अनिश्चितता व्याप्त हो गई है। ईरान ने पुष्टि की कि अमेरिकी नौसेना ने ओमान की खाड़ी में ईरानी जहाज टौस्का को हमला कर जब्त किया, इस घटना को युद्धविराम का उल्लंघन बताकर जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी। ईरान के खत्म उल-अंबिया मुख्यालय ने कहा कि अमेरिकी कार्रवाई ईरानी वाणिज्यिक जहाजों पर हमला है और सशस्त्र समुद्री डकैती करार दिया। ईरानी मीडिया के अनुसार, इस घटना के बाद ईरान ने अमेरिकी युद्धपोतों पर ड्रोन हमले भी किए, हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
ईरानी अधिकारियों ने कहा कि अमेरिकी शर्तें अवास्तविक और अनुचित हैं और जब तक नाकेबंदी नहीं हटायी जाती, वार्ता संभव नहीं है। उन्होंने अमेरिका पर शर्तें बदलने का आरोप भी लगाया। ईरानी मीडिया के अनुसार, मौजूदा परिस्थितियों में वार्ता के सफल होने की कोई स्पष्ट संभावना नहीं है। यह निर्णय तब आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान में फिर वार्ता की घोषणा की है। दोनों देशों के बीच जारी दो सप्ताह का युद्धविराम 22 अप्रैल को समाप्त होने वाला है। इस बीच, अमेरिकी केन्द्रीय कमान (सेंटकॉम) ने पुष्टि की कि अमेरिकी बलों ने अरब सागर में ईरानी झंडे वाले मालवाहक जहाज को रोका। सेंटकॉम के अनुसार, निर्देशित मिसाइल विध्वंसक यूएसएस स्प्रूअन्स ने टौस्का को रोका, जो ईरान के बंदर अब्बास की ओर जा रहा था। कई चेतावनियों के बावजूद जहाज के चालक दल ने निर्देशों का पालन नहीं किया।
सुप्रीम लीडर की मंजूरी के बाद ईरानी प्रतिनिधिमंडल वार्ता को तैयार
22 Apr, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के बीच कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। जानकारी के अनुसार, ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई से हरी झंडी मिलने के बाद ईरानी प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद में संभावित वार्ता के लिए तैयार है। यदि यह बैठक तय होती है, तो अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेन्स आज मंगलवार को ही उच्च स्तरीय टीम के साथ इस्लामाबाद पहुंच सकते हैं। यह पहल ऐसे समय में हो रही है जब मौजूदा संघर्ष विराम की समयसीमा समाप्त होने वाली है।
वार्ता के लिए अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विट्कॉफ और दामाद जे कुशनेर भी शामिल हो सकते हैं। हालांकि, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजेशकियन ने स्पष्ट किया है कि दोनों देशों के बीच “गहरा ऐतिहासिक अविश्वास” अभी भी बना हुआ है, जो वार्ता की राह को जटिल बनाता है। पेज़ेशकियन ने अमेरिका पर भड़काऊ गतिविधि करने और विरोधाभासी बयान देने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह ईरान पर दबाव बनाने की रणनीति हो सकती है। उन्होंने दो टूक कहा, “ईरानी जनता दबाव में झुकने वाली नहीं है।” दूसरी ओर, मीडिया रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने संकेत दिया है कि तेहरान इस वार्ता पर “सकारात्मक विचार” कर रहा है। बैठक में ईरान की ओर से संसद अध्यक्ष मोहम्मद बघेर गलिबफ नेतृत्व कर सकते हैं।
ईरान ने वार्ता के लिए प्रमुख शर्त के रूप में होर्मुज पर अमेरिकी नाकाबंदी हटाने की मांग रखी है। वहीं, ट्रंप ने दोहराया कि ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी, हालांकि उन्होंने ईरानी नेताओं से सीधे मिलने की इच्छा भी जताई है। ट्रंप के हालिया बयान से स्थिति कुछ उलझी भी नजर आई। उन्होंने पहले कहा था कि वेंस तत्काल रवाना होंगे, लेकिन बाद में अमेरिकी अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यात्रा मंगलवार को ही संभव है, वह भी वार्ता की पुष्टि के बाद।
समझौता नहीं तो सैन्य कार्रवाई होगी: ट्रंप
फरवरी के अंत में अमेरिका और इजरायल की कार्रवाई के बाद शुरू हुए इस संघर्ष को रोकने के लिए यह दूसरा बड़ा प्रयास होगा। ट्रंप ने संघर्ष विराम की समयसीमा को 24 घंटे बढ़ाते हुए इसे इस्लामाबाद वार्ता के लिए अहम बताया है। हालांकि, ट्रंप ने चेतावनी भी दी है कि यदि समझौता नहीं हुआ, तो सैन्य कार्रवाई फिर शुरू हो सकती है। इसके बावजूद उन्होंने कहा, “हम जल्दबाजी में कोई खराब समझौता नहीं करेंगे।” गौरतलब है कि इससे पहले 21 घंटे चली बातचीत विफल रही थी, जिसमें ईरान ने परमाणु संवर्धन रोकने की अमेरिकी मांग ठुकरा दी थी।
यमुनानगर में सनसनी, बाइक सवार बदमाशों ने घर पर की फायरिंग
22 Apr, 2026 09:22 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रादौर (यमुनानगर): रादौर के गांव भूरेवाला में मंगलवार और बुधवार की दरम्यानी रात अज्ञात हमलावरों ने भारी आतंक मचाया। बेखौफ बदमाशों ने पूर्व सरपंच के आवास को निशाना बनाते हुए ताबड़तोड़ फायरिंग की, जिससे पूरा इलाका गोलियों की गूंज से दहल उठा।
ताबड़तोड़ फायरिंग से फैली दहशत
जानकारी के मुताबिक, देर रात बाइक पर सवार होकर आए तीन नकाबपोश युवक गांव में दाखिल हुए। उन्होंने पूर्व सरपंच के घर के बाहर रुककर अचानक फायरिंग शुरू कर दी। हमलावरों ने करीब 12 से 15 राउंड गोलियां चलाईं, जिनमें से कई गोलियां घर के दरवाजों और दीवारों पर जा लगीं। गनीमत यह रही कि हमले के समय परिवार के सभी सदस्य घर के सुरक्षित हिस्सों में थे, जिससे किसी को चोट नहीं आई और एक बड़ा हादसा टल गया।
सीसीटीवी में कैद हुए हमलावर
फायरिंग की यह पूरी वारदात घर के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हो गई है। फुटेज में बदमाश बाइक पर सवार होकर आते और गोलियां बरसाकर भागते हुए साफ नजर आ रहे हैं। पुलिस अब इस डिजिटल साक्ष्य के आधार पर हमलावरों के हुलिए और बाइक के नंबर की पड़ताल कर रही है।
पुलिस की कार्रवाई और जांच
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है:
साक्ष्य जुटाना: पुलिस ने घटनास्थल से गोलियों के खोल बरामद किए हैं।
पूछताछ: पूर्व सरपंच के परिवार और आसपास के पड़ोसियों से जानकारी ली जा रही है ताकि किसी पुरानी रंजिश या धमकी के कोण की जांच की जा सके।
सुरक्षा: घटना के बाद से गांव में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बनी हुई है।
कानून व्यवस्था पर सवाल
शांतिपूर्ण ग्रामीण इलाके में इस तरह सरेआम हुई गोलीबारी ने कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय निवासियों में असुरक्षा का भाव है। हालांकि, पुलिस अधिकारियों का दावा है कि आरोपियों के सुराग मिल चुके हैं और बहुत जल्द उन्हें सलाखों के पीछे भेज दिया जाएगा।
अगर इजराइली पीएम नेतन्याहू हंगरी आए तो उन्हें हिसारत में लिया जाएगा
22 Apr, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बुडापेस्ट। हंगरी के नव निर्वाचित पीएम पीटर मैग्यार ने अपने इजराइली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू को हिरासत में लेने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा है कि इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (आईसीसी) में वॉन्टेड किसी भी नेता को हंगरी आने पर गिरफ्तार कर लिया जाएगा। खास बात है कि मैग्यार ने हाल ही में नेतन्याहू को हंगरी आने का न्योता भी दिया था।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पीएम मैग्यार ने कहा कि अगर कोई आईसीसी का सदस्य है और कोई वांछित व्यक्ति हमारे देश की सीमा में प्रवेश करता है, तो उसे हिरासत में लिया जाना चाहिए...हर राज्य और सरकार के प्रमुख इन कानूनों से वाकिफ हैं। उन्होंने साफ कहा कि हंगरी को आईसीसी का सदस्य बना रहने दिया जाएगा। साथ ही कहा कि इस संस्था से हटने के पूर्व पीएम विक्टर ओरबान के फैसले को भी रद्द किया जाएगा।
रिपोर्ट के मुताबिक मैग्यार से नेतन्याहू को हंगरी की नेशनल सेरेमनी में शामिल होने के लिए न्योता देने पर भी सवाल किया। इसपर नव निर्वाचित पीएम मैग्यार ने कहा कि चुनाव जीतने के बाद उन्होंने दुनिया के कई नेताओं से बात की है और सभी को 1956 के आंदोलन की 70 साल पूरे होने पर आमंत्रित किया है। उन्होंने कहा कि इजराइली पीएम नेतन्याहू को यह भी स्पष्ट कर दिया है कि हम आईसीसी से हटने के फैसले को रद्द करने से पीछे नहीं हटेंगे, क्योंकि मेरे सहयोगियों ने इसकी जांच की है और हम अभी भी इस फैसले को रोक सकते हैं।
बता दें बीते साल ओरबान ने ऐलान किया था कि हंगरी आईसीसी से बाहर हो रहा है। यह घोषणा उन्होंने नेतन्याहू से बुडापेस्ट में मुलाकात के बाद की थी। खास बात है कि यह फैसला 2 जून 2026 से प्रभावी होना था। अब बीते सप्ताह मैग्यार ने कहा है कि वह इस फैसले को पलटना चाहते हैं। साथ ही उन्होंने नेतन्याहू को अक्टूबर में हंगरी आने का न्योता भी दिया था।
बता दें अप्रैल में हुए हंगरी चुनाव में मैग्यार ने ओरबान को हरा दिया था। इसके साथ ही ओरबान के 16 साल के शासन का अंत हो गया। खास बात है कि पीटर कभी उनके ही वफादार रहे थे और चुनाव में भ्रष्टाचार और स्वास्थ्य सेवा और सार्वजनिक परिवहन जैसे रोजमर्रा के मुद्दों को उठाया था। साथ ही ओरबान के कार्यकाल में कमजोर पड़े ईयू और नाटो से हंगरी के रिश्तों को मजबूती देने की बात कही थी।
पाकिस्तान ने भारतीय विमानों के लिए अपना एयरस्पेस बंद रखने की अवधि बढ़ाई
22 Apr, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। पाकिस्तान ने भारतीय विमानों के लिए अपने एयरस्पेस को 24 मई तक बंद रखने का निर्णय लिया है। इस फैसले के साथ ही दोनों देशों के बीच हवाई यातायात पर लगी पाबंदियां एक साल से अधिक समय तक जारी रहने वाली हैं।
यह प्रतिबंध पिछले वर्ष पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद लगाया गया था। 22 अप्रैल को हुए इस हमले में 26 लोगों की मौत हो गई थी, जिसके बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव काफी बढ़ गया था। घटना के बाद 24 अप्रैल 2025 से पाकिस्तान ने भारतीय विमानों के लिए अपना एयरस्पेस बंद कर दिया था। इसके जवाब में भारत ने भी 30 अप्रैल 2025 से पाकिस्तानी विमानों के लिए अपने एयरस्पेस के उपयोग पर रोक लगा दी थी। तब से दोनों देशों के बीच यह प्रतिबंध लगातार जारी है।
हवाई क्षेत्र बंद होने का सीधा असर अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों पर पड़ रहा है। एयरलाइंस को लंबा रूट अपनाना पड़ रहा है, जिससे यात्रा का समय बढ़ने के साथ-साथ परिचालन लागत भी अधिक हो रही है। यात्रियों को भी टिकट की कीमतों में बढ़ोतरी और लंबी उड़ानों का सामना करना पड़ रहा है।
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