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सीमा पर बड़ा एक्शन, Pakistan के मंत्री बोले– 297 तालिबान मारे गए
28 Feb, 2026 11:49 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अफगानिस्तान और पाकिस्तान| के बीच जंग के हालात बने हुए हैं और दोनों ओर से ही हमलों का दौर जारी है। इस बीच पाकिस्तानी अधिकारियों ने बताया है कि अफगान तालिबान और उनके सहयोगी आतंकवादी समूहों के लगभग 300 जवान उनके खिलाफ चल रहे अभियान में मारे जा चुके हैं। वहीं, सूचना मंत्री अत्ताउल्लाह तरार ने देर रात दिए अपडेट में कहा कि सुरक्षा बलों ने 297 लड़ाकों को मार गिराया और 450 से अधिक अफगान जवान घायल हो गए।अफगानिस्तान में तालिबान शासन के बारे में बताते हुए मंत्री ने कहा कि ऑपरेशन गजब-लिल-हक के दौरान पाकिस्तान ने उनकी 89 चौकियों को नष्ट कर दिया और 18 अन्य पर कब्जा कर लिया। इसी के साथ लगभग 135 टैंक और बख्तरबंद वाहन भी नष्ट कर दिए गए। मंत्री ने कहा कि पाकिस्तानी वायुसेना ने अफगानिस्तान भर में लगभग 29 स्थानों को भी प्रभावी ढंग से निशाना बनाया।अफगानिस्तान की ओर से सीमा पर एक साथ 53 जगहों पर हमले किए जाने के बाद पाकिस्तान ने ऑपरेशन गजब-लिल-हक नाम का एक जवाबी हमला शुरू किया है। सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने शुक्रवार शाम को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि अफगान तालिबान को पाकिस्तान और आतंकवादी संगठनों के बीच चुनाव करना होगा।
पाकिस्तानी बेस पर बमबारी, Afghanistan की कार्रवाई से मचा हड़कंप
28 Feb, 2026 11:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पाकिस्तान और अफगानिस्तान| खुली जंग छिड़ गई है। पाकिस्तान को तालिबान करारा जबाव दे रहा है। दिन के उजाले में हमले के बाद तालिबान भी चुप नहीं है। इस बीच अफगानिस्तान के तालिबान के नेतृत्व वाले रक्षा मंत्रालय ने एक वीडियो साझा किया है, जिसमें साफ देखा जा सकता है कि कैसे एक के बाद कई पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया है।शुक्रवार को जारी किए गए एक वीडियो में पाकिस्तानी ठिकानों पर हमले दिखाए गए हैं, जो दोनों पड़ोसी देशों के बीच चरम पर पहुंचे संघर्ष को दिखा रहा है। न्यूज एजेंसी पीटीआई ने एक्स पर वीडियो साझा किया है, जो कि तालिबान रक्षा मंत्रालय से जुड़ा है। अफगानिस्तान के तालिबान रक्षा मंत्रालय से संबंधित इस फुटेज को मौजूदा तनाव के बीच की गई जवाबी कार्रवाई के सबूत के रूप में बताया जा रहा है। मंत्रालय का दावा है कि यह वीडियो उसकी नवीनतम सैन्य कार्रवाई को दर्शाता है।
देखिए तालिबान के एयर स्ट्राइक का वीडियो...
एक के बाद कई बम बरसाए
वीडियो में रात के समय हवाई हमले के फुटेज दिखाई दे रहे हैं, जिनमें पहाड़ी इलाकों में विस्फोटों की चमक और पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों पर लक्षित हमले शामिल हैं। हालांकि इन दृश्यों की प्रामाणिकता और सटीक स्थान की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की जा सकी। लेकिन यह वीडियो ऐसे समय में जारी किया गया है, जब दोनों तरफ से हमले जारी हैं। इससे पहले अफगानिस्तान भर में पाकिस्तान ने व्यापक हवाई बमबारी की, जिसमें 29 स्थानों को निशाना बनाया गया था।इधर, अफगानिस्तान के टोलो न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक हमलों में इस्लामाबाद के फैजाबाद के पास एक सैन्य शिविर, नौशेरा में मुख्यालय, जमरुद की सैन्य बस्ती और एबटाबाद में स्थित लक्ष्य शामिल थे। तालिबान मंत्रालय ने इस ऑपरेशन को 'सफल' बताते हुए दावा किया कि उसने पाकिस्तानी सेना के प्रमुख ठिकानों, केंद्रों और सुविधाओं को निशाना बनाया है।
पाकिस्तान का दावा: महत्वपूर्ण क्षति नहीं
वहीं इस हमले को लेकर बीबीसी ने पाकिस्तानी सैन्य अधिकारी के हवाले से बताया कि अफगान तालिबान के दागे गए ड्रोनों ने तीन ठिकानों को निशाना बनाया, जिसमें नौशेरा में सेना का तोपखाना स्कूल, एबटाबाद में एक सैन्य अकादमी के पास का इलाका और स्वाबी में एक प्राथमिक विद्यालय के पास का स्थान बताया गया है। उन्होंने दावा किया कि वायु रक्षा प्रणालियों ने सभी ड्रोनों को रोककर नष्ट कर दिया, और इस घटना में किसी के हताहत होने या महत्वपूर्ण क्षति की कोई खबर नहीं है।
खतरनाक हथियारों संग तानाशाह की बेटी, सामने आया चौंकाने वाला दृश्य
28 Feb, 2026 11:37 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
उत्तर कोरिया| में तानाशाह किम जोंग उन के नेतृत्व का जश्न मनाने वाला एक सप्ताह तक सत्तारूढ़ दल का सम्मेलन चला। इसके बाद किम जोंग उन ने शीर्ष सरकारी और सैन्य अधिकारियों को नई स्नाइपर राइफलें तोहफे में दीं। राज्य मीडिया ने उनकी बेटी किम जू ऐ की एक तस्वीर को प्रमुखता से दिखाया, जिसमें वह शूटिंग रेंज में निशाना साध रही हैं। किम जोंग की बेटी की लगातार पिता के साथ मौजूदगी से यह अटकलें तेज हो रही हैं कि किम उन्हें भविष्य के नेता के रूप में तैयार कर रहे हैं।इस जश्न में किम की ताकतवर बहन किम यो जोंग की भी मौजूद रहीं, जिन्होंने हाल के वर्षों में वॉशिंगटन और सियोल के प्रति उनकी मुखर प्रवक्ता के रूप में कार्य किया है। कांग्रेस में पदोन्नति के बाद अब वह पार्टी की केंद्रीय समिति की महानिदेशक के पद पर कार्यरत हैं। उनका नया पद पार्टी के आंतरिक संचालन और प्रशासनिक मामलों की देखरेख करने वाली उनकी व्यापक भूमिका का संकेत देता है।
किम जोंग के साथ लगातार बढ़ रही बेटी की मौजूदगी
सरकारी मीडिया द्वारा ली गई तस्वीरों में किम यो जोंग और अन्य शीर्ष अधिकारी किम जोंग उन द्वारा दी गई राइफलों को निशाने पर साधते हुए दिखाई दिए। किम की छोटी बेटी, जिसने अपने पिता के समान भूरे रंग का चमड़े का कोट पहना हुआ था, भी बंदूक को पकड़े हुए दिखाई दी, जबकि बंदूक की नली से धुआं निकल रहा था।नवंबर 2022 में एक लंबी दूरी की मिसाइल परीक्षण में पहली बार सार्वजनिक रूप से दिखाई देने के बाद से 13 वर्षीय किम जू ए अपने पिता के साथ सैन्य प्रदर्शनों, कारखाने के उद्घाटन और सितंबर में बीजिंग की यात्रा सहित कई कार्यक्रमों में शामिल हुई है। बीजिंग में किम जोंग उन ने छह साल में चीनी नेता शी जिनपिंग के साथ अपना पहला शिखर सम्मेलन किया था।
अमेरिका से बातचीत के दरवाजे खुले, लेकिन किम ने रखी ये शर्त
इस साल की बैठकों में किम ने उत्तर कोरिया के परमाणु शस्त्रागार को तेज करने की अपनी योजनाओं पर जोर दिया, जो पहले से ही विभिन्न हथियार प्रणालियों से लैस है। इन्हें अमेरिका और एशिया में अमेरिकी सहयोगियों के लिए खतरा माना जाता है। इसके साथ ही उन्होंने प्रतिद्वंद्वी दक्षिण कोरिया के प्रति अपने कठोर रुख की पुष्टि की।हालांकि, उन्होंने अमेरिका के साथ बातचीत के दरवाजे खुले रखे। प्योंगयांग के पहले के रुख को दोहराते हुए उन्होंने कहा कि वॉशिंगटन को लंबे समय से ठप पड़ी बातचीत को फिर से शुरू करने की शर्त के रूप में उत्तर कोरिया के परमाणु निरस्त्रीकरण की मांग को छोड़ देना चाहिए।
पेंटागन की एआई रेस में ओपनएआई को बढ़त, एंथ्रोपिक को झटका
28 Feb, 2026 11:33 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन|अमेरिकी एआई कंपनी ओपनएआई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सैम ऑल्टमैन ने शुक्रवार को कहा कि कंपनी ने अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन के साथ एक समझौता किया है। इसके तहत उसके एआई मॉडल रक्षा एजेंसी के क्लासिफाइड नेटवर्क में 'तकनीकी सुरक्षा उपायों' के साथ इस्तेमाल किए जाएंगे।ऑल्टमैन ने कहा कि कंपनी के दो सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा सिद्धांत घरेलू स्तर पर सामूहिक निगरानी पर रोक और बल प्रयोग की जिम्मेदारी मनुष्यों के हाथ में रखने से जुड़े हैं, जिनमें स्वायत्त हथियार प्रणालियां भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ये सिद्धांत इस समझौते का हिस्सा बनाए गए हैं।
केवल क्लाउड नेटवर्क पर होगी तैनाती
ऑल्टमैन ने कहा, 'हम अपने मॉडलों के सही ढंग से काम करने को सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी सुरक्षा उपाय भी बनाएंगे, जैसा कि युद्ध विभाग भी चाहता था। हम अपने मॉडलों की सहायता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए FDE (फाइनल डेवलपमेंट ऑथेंटिकेशन) तैनात करेंगे, और इन्हें केवल क्लाउड नेटवर्क पर ही तैनात करेंगे। हम युद्ध विभाग से अनुरोध कर रहे हैं कि वह सभी AI कंपनियों को यही शर्तें प्रदान करे, जिन्हें हमारे विचार से सभी को स्वीकार करना चाहिए।'
ट्रंप ने दिए संघीय एजेंसियों को एंथ्रोपिक का इस्तेमाल बंद करने के निर्देश
यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब प्रतिद्वंद्वी एआई स्टार्टअप एंथ्रोपिक ने पेंटागन के साथ अपने समझौते में इसी तरह के सुरक्षा प्रावधानों पर जोर दिया था, जिस पर इस सप्ताह ट्रंप प्रशासन की नाराजगी सामने आई थी। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सभी संघीय एजेंसियों को एंथ्रोपिक टेक्नोलॉजी का उपयोग तुरंत बंद करने के निर्देश दिए हैं।इसी के साथ पेंटागन और एंथ्रोपिक आमने-सामने आ चुके हैं। ट्रंप के एजेंसियों को दिए सख्त आदेश के बाद रिपोर्ट्स के मुताबिक एंथ्रोपिक ने अपनी एआई तकनीक पर 'आपूर्ति चेन जोखिम' का लेबल लगाने के मामले में पेंटागन को अदालत में चुनौती देगा।
ट्रंप प्रशासन के फैसले के खिलाफ एंथ्रोपिक जाएगा कोर्ट
अमेरिका का रक्षा विभाग पेंटागन प्रसिद्ध एआई कंपनी एंथ्रोपिक के साथ उस वक्त गंभीर विवाद में फंस गया है। जब उसने एंथ्रोपिक से कह रहा है कि उसके एआई मॉडल क्लाउड (Claude) को अमेरिकी सेना में बिना रोक-टोक उपयोग करने की अनुमति दें। इसी के साथ कहा गया कि अगर एआई कंपनी ऐसा नहीं करती है, तो उसे सप्लाई चेन रिस्क के रूप में नामित करने की भी चेतावनी दी। यह ऐसा गंभीर कदम है, जो उसके व्यापार को बुरी तरह से प्रभावित कर सकता है।
मिलान में बेकाबू ट्राम ने मचाई तबाही, दुकान में घुसने से दो लोगों की जान गई
28 Feb, 2026 11:28 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इटली| के मिलान शहर में शुक्रवार को एक ट्राम के पटरी से उतरने से बड़ा हादसा हो गया। बेपटरी होने के बाद ट्राम एक इमारत से टकरा गई। इस हादसे में दो लोगों की मौत हो गई और 38 अन्य घायल हो गए। शहर के मेयर ग्यूसेप्पे सला ने घटनास्थल पर पहुंचकर बताया कि मृतकों में से एक व्यक्ति ट्राम के पटरी से उतरने के दौरान उसकी चपेट में आ गया, जबकि दूसरा पीड़ित एक यात्री था।हादसे के बाद कुछ ही देर में मौके पर पहुंचे दमकलकर्मियों ने सदमे में आए यात्रियों को आपातकालीन कंबलों में लपेट दिया, जबकि एंबुलेंस गंभीर रूप से घायल लोगों को अस्पताल ले गई। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने हादसे के बाद मृतकों के लिए अपनी संवेदना व्यक्त की।
चालक ने ट्रैक स्विच को नहीं किया था सक्रिय
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, प्रारंभिक जांच से पता चला है कि चालक ने ट्रैक स्विच को सक्रिय नहीं किया था। यह भी बताया गया है कि दुर्घटना से पहले चालक लाइन के अंतिम स्टॉप से भी आगे निकल गया था। द गार्डियन की रिपोर्ट के अनुसार एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि एक आदमी ट्राम के नीचे फंसा था, जिसका हाथ ट्राम के नीचे आ गया था।मुख्य जांचकर्ता अभियोजक मार्सेलो वियोला ने कहा कि ट्राम के बेपटरी होकर इमारत में घुसने की वजह से बिल्डिंग पर काफी प्रभाव पड़ा है। उन्होंने बताया कि सुरक्षा कारणों के चलते फिलहाल इमारत को खाली करा लिया गया है। सला के अनुसार पीड़ितों में से एक 60 वर्ष से अधिक आयु के इटली के नागरिक थे, जबकि दूसरा एक विदेशी नागरिक था जो शहर में रहता था।
प्रारंभिक जांच में हादसे की क्या वजह आई सामने?
उन्होंने आगे कहा, 'ऐसा नहीं लगता कि यह कोई तकनीकी समस्या थी, बल्कि यह ड्राइवर से संबंधित थी।' प्रत्यक्षदर्शियों ने मीडिया को बताया कि ट्राम तेज गति से चल रही थी। लेकिन यह तुरंत स्पष्ट नहीं हो पाया कि क्या वह ट्राम के लिए निर्धारित 50 किलोमीटर (31 मील) प्रति घंटे की गति सीमा का उल्लंघन कर रही थी।
बेंगलुरु एयरपोर्ट पर एअर इंडिया एक्सप्रेस यात्रियों का प्रदर्शन
28 Feb, 2026 10:39 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बंगलूरू। से नेपाल जाने वाले यात्रियों ने एअर इंडिया के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। इसकी वजह से केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। यात्रियों ने आरोप लगाया कि दो दिनों तक कुप्रबंधन के कारण उनकी यात्रा योजना पूरी तरह बाधित हो गई। एअर इंडिया एक्सप्रेस के प्रवक्ता ने लगातार दो दिनों तक उड़ानें प्रभावित होने की वजह खराब मौसम बताई है। प्रवक्ता ने बताया कि 26 और 27 फरवरी को निर्धारित उड़ानों को काठमांडो में प्रतिकूल मौसम के चलते डायवर्ट करना पड़ा। इस कारण कल (27 फरवरी) की बाधित सेवा के यात्रियों को वापस लाने के लिए आज (28 फरवरी) संचालित की गई अतिरिक्त उड़ान को भी इसी वजह से डायवर्ट करना पड़ा।
यात्रियों को हुई असुविधा
प्रवक्ता ने आगे कहा कि इन यात्रियों को लाने के लिए एक मार्च को एक अतिरिक्त रिकवरी उड़ान की योजना बनाई गई है। इस स्थिति के कारण यात्रियों को काफी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। यात्रियों के मुताबिक, गुरुवार सुबह 10.30 बजे बंगलूरू से काठमांडो के लिए उड़ान भरी गई थी, लेकिन विमान काठमांडो में लैंड नहीं कर सका और वापस लौट आया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस संबंध में स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। बताया गया कि वही विमान शुक्रवार सुबह फिर से रवाना हुआ, लेकिन इस बार भी काठमांडो में नहीं उतर सका और उसे लखनऊ डायवर्ट कर दिया गया। यात्रियों का कहना है कि लखनऊ में उतरने के बाद उन्हें कई घंटों तक विमान के अंदर ही बैठे रहने को मजबूर किया गया।
यात्रियों ने की मुआवजे की मांग
एक यात्री ने विरोध के दौरान कहा, 'हमें घंटों तक विमान के अंदर बिना किसी स्पष्ट जानकारी के रखा गया। कोई यह नहीं बता रहा था कि आखिर हो क्या रहा है।' काफी देर तक इंतजार करने और थकान के बाद यात्रियों ने विमान के भीतर ही प्रदर्शन शुरू कर दिया, जिसके बाद एयरलाइन को उन्हें वापस बंगलूरू लाना पड़ा। बंगलूरू पहुंचने पर कई यात्रियों ने इमिग्रेशन क्षेत्र के पास धरना दिया और दो दिन बर्बाद होने पर नाराजगी जताई। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि उन्हें कुल मिलाकर 30 घंटे से अधिक समय तक विमान के भीतर रखा गया। उन्होंने एयरलाइन पर आरोप लगाते हुए मुआवजे की मांग की।
हांसी में पुलिस-आरोपी आमने-सामने, जवाबी फायरिंग में पैर में गोली
28 Feb, 2026 10:03 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हांसी (हरियाणा)| में छोटू मिष्ठान भण्डार के संचालक हिमांशु उर्फ हन्नी सपड़ा से 50 लाख रुपये की रंगदारी मांगने वाले आरोपी के साथ पुलिस की मुठभेड़ हो गई। आरोपी ने हथियार बरामदगी के दौरान पुलिस टीम पर फायरिंग की, जिसके जवाब में पुलिस ने आत्मरक्षा में गोली चलाई। आरोपी अनुराग के पैर में गोली लगी और वह घायल हो गया। पुलिस ने उसे मौके पर गिरफ्तार कर लिया।मामले की शुरुआत शुक्रवार को हुई जब पुरानी सब्जी मंडी स्थित दुकान में दो बाइक सवार युवकों ने पर्ची फेंककर 50 लाख रुपये की रंगदारी मांगी। पर्ची में लिखा था कि "लाला, 50 लाख की फिरौती है। एक दिन का टाइम है, बाकी काम मेरा है।" इसमें नाम बासु उर्फ अनुराग और हिमांशु का जिक्र था। दुकान मालिक ने तुरंत पुलिस को सूचना दी।पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों अनुराग और हिमांशु को दो घंटे के भीतर गिरफ्तार कर लिया। शनिवार रात करीब 11:10 बजे स्पेशल स्टाफ की टीम आरोपी अनुराग को वारदात में प्रयुक्त अवैध हथियार बरामद करने के लिए सुंदर नगर नहर पुल के पास ले गई। इसी दौरान अनुराग ने मौके का फायदा उठाकर पुलिस पर अचानक फायरिंग कर दी और भागने की कोशिश की। पुलिस टीम ने जवाबी कार्रवाई की और अनुराग के पैर में गोली लगी, जिससे वह घायल हो गया। पुलिस ने तत्काल उसे काबू कर गिरफ्तार किया और प्राथमिक उपचार के लिए नागरिक अस्पताल हांसी भिजवाया, जहां उसका इलाज जारी है।
तारिक ने सत्ता संभालते ही सेंट्रल बैंक के गवर्नर को हटाया, बांग्लादेश में मचा घमासान
28 Feb, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका। बांग्लादेश में सरकार बदलने के बाद भी घमासान थमा नहीं है। अब विवाद सेंट्रल बैंक के गवर्नर को लेकर है। जब मोहम्मद यूनुस की सरकार थी तो उन्होंने अहसान हबीब मंसूर को कमान सौपी थी, लेकिन तारिक रहमान ने सत्ता संभाले ही उन्हें निकाल दिया। सरकार ने अब मोस्तकुर रहमान को बांग्लादेश बैंक का नया गवर्नर बनाया है और इस फैसले ने पूरे देश के आर्थिक और राजनीतिक गलियारों में आग लगा दी है। लोग सवाल कर रहे हैं कि एक कारोबारी को बैंक की चाबी क्यों दे दी गई?
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अहसान हबीब मंसूर जो गवर्नर थे वो जाने-माने अर्थशास्त्री भी थे और उन्हें मोहम्मद यूनुस वाली अंतरिम सरकार ने नियुक्त किया था। उनका कार्यकाल 2028 तक था, लेकिन उन्हें अचानक हटा दिया गया। हैरानी की बात ये है कि मंसूर को खुद नहीं पता था कि उन्हें हटाया जा रहा है। उन्होंने मीडिया से कहा कि न मैंने इस्तीफा दिया, न मुझे आधिकारिक तौर पर हटाया गया। मैंने टीवी पर खबर देखी, तो अपना बोरिया-बिस्तर समेटा और घर चल दिया।
एक रिपोर्ट के मुताबिक अब तक की परंपरा ये रही है कि सेंट्रल बैंक का गवर्नर कोई बड़ा बैंकर, अर्थशास्त्री या अनुभवी अफसर बनता है, लेकिन मोस्तकुर रहमान एक गारमेंट कारोबारी हैं। उनका बैंकिंग या मॉनेटरी पॉलिसी से कोई लेना-देना नहीं है। ऊपर से वह खालिदा जिया की पार्टी में काफी सक्रिय रहे हैं यानी एक राजनैतिक कारोबारी को बैंक की कमान सौंप दी गई है।
सबसे बड़ा बवाल मोस्तकुर रहमान के पिछले रिकॉर्ड को लेकर है। खबरों के मुताबिक गवर्नर बनने के कुछ महीने पहले उनके अपनी कंपनी ‘हेरा स्वेटर्स’ के 89 करोड़ टका के फंसे हुए लोन को री-शेड्यूल किया गया था। उन्हें 10 साल में पैसा लौटाने की मोहलत दी गई। अब सवाल ये उठ रहा है कि जो आदमी खुद अपनी कंपनी के लिए बैंकों से रियायतें ले रहा था, वह पूरे देश के बैंकिंग सिस्टम को ईमानदारी से कैसे चलाएगा? क्या वो उन बैंकों पर सख्ती कर पाएगा जिनसे उन्होंने खुद कर्ज लिया है?
रिपोर्ट के मुताबिक जमात-ए-इस्लामी ने इसे ‘मॉब कल्चर’ की शुरुआत बताया है और कहा कि इस तरह सम्मानित हस्तियों को अपमानित करना अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर देगा। विशेषज्ञों का कहना है कि एक बिजनेसमैन को रेगुलेटर बनाना वैसा ही है जैसे बिल्ली को दूध की रखवाली सौंप देना। कुछ विपक्षी नेताओं ने तो यहां तक कह दिया कि सरकार ने देश के खजाने की ‘लूट’ का रास्ता साफ करने के लिए अपने चहेते कारोबारी को बैठाया है। अब बांग्लादेश में लोगों को लग रहा है कि अगर सेंट्रल बैंक की आजादी खत्म हुई और वहां राजनीति हावी हो गई, तो पहले से ही लड़खड़ाता हुआ बैंकिंग सिस्टम पूरी तरह ढह सकता है।
राजनीतिक टकराव के बाद ममदानी ने व्हाइट हाउस में की ट्रंप से मुलाकात
28 Feb, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी ने व्हाइट हाउस में डोनाल्ड ट्रंप के साथ मुलाकात की। हाल के महीनों में जारी मतभेदों और राजनीतिक टकराव के बाद, इन दो विपरीत विचारधारा वाले नेताओं के बीच यह एक अहम बैठक थी। खास बात यह रही कि दोनों नेताओं की यह मुलाकात पूर्व-निर्धारित सार्वजनिक कार्यक्रम का हिस्सा नहीं थी। ममदानी ने इस बातचीत को एक सार्थक बैठक बताया। उन्होंने कहा कि वे न्यूयॉर्क शहर में और ज्यादा आवास बनाने के लिए उत्सुक हैं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मेयर ममदानी ने कुछ ऐसे प्रस्ताव रखे हैं जिनसे कुछ ही परियोजनाओं में पिछले 50 सालों में बने आवासों से कहीं ज्यादा आवासों का निर्माण हो सकेगा। प्रस्तावित आवास परियोजनाओं के दायरे, स्थान या वित्तपोषण के बारे में तत्काल कोई और जानकारी नहीं दी गई। इस मुलाकात में अप्रवासन को लेकर भी अप्रत्याशित मोड़ आया। व्हाइट हाउस से निकलने के बाद जोहरान ममदानी ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि हमारी पिछली मुलाकात में मैंने कोलंबिया की छात्रा के बारे में अपनी चिंता व्यक्त की थी, जिन्हें शुक्रवार सुबह आईसीई ने हिरासत में लिया था। उन्होंने अभी मुझे सूचित किया है कि उन्हें जल्द ही रिहा कर दिया जाएगा। बाद में अघायेवा को रिहा कर दिया गया।
रिपोर्ट के मुताबिक गुरुवार तड़के संघीय एजेंटों द्वारा कोलंबिया विश्वविद्यालय के मैनहट्टन परिसर में एक आवासीय भवन में प्रवेश करने के बाद उन्हें हिरासत में लिया गया था। कोलंबिया विश्वविद्यालय ने कहा कि आव्रजन अधिकारियों ने उन्हें गिरफ्तार करने के लिए भवन में प्रवेश पाने के लिए गलत जानकारी दी। कार्यवाहक अध्यक्ष ने कहा कि फिलहाल हमारी समझ यह है कि संघीय एजेंटों ने लापता व्यक्ति की तलाश में भवन में प्रवेश पाने के लिए गलत जानकारी दी। हम अधिक जानकारी जुटाने का प्रयास कर रहे हैं।
बता दें व्हाइट हाउस ने इस बैठक पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। यह मुलाकात डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट ममदानी और रिपब्लिकन राष्ट्रपति ट्रंप के बीच बदलते संबंधों को दिखाती है। ट्रंप अक्सर उन शहरों की आलोचना करते रहे हैं, जहां डेमोक्रेटिक पार्टी की सरकार है, खासकर प्रवासन और केंद्र सरकार की नीतियों को लेकर। चुनाव प्रचार के दौरान तीखी बयानबाजी के बावजूद, दोनों अब ओवल ऑफिस में एक से अधिक बार मिल चुके हैं।
सालों तक भारत पर राज करने वाले ईस्ट इंडिया कंपनी का हुआ अंत
28 Feb, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लंदन। कभी एशिया और खासकर भारत की तकदीर तय करने वाली ईस्ट इंडिया कंपनी एक बार फिर इतिहास के पन्नों में सिमट गई है। इस बार उसका अंत किसी साम्राज्य के पतन की तरह नहीं, बल्कि लंदन में एक लक्जरी रिटेल कारोबार के दिवालिया होने के रूप में हुआ है।
बता दें करीब 152 साल पहले निष्क्रिय हो चुकी मूल ईस्ट इंडिया कंपनी को 2010 में भारतीय मूल के ब्रिटिश कारोबारी संजीव मेहता ने इसके नाम के अधिकार खरीद कर फिर से जीवित किया था। उस समय इसे औपनिवेशिक इतिहास पर प्रतीकात्मक पलटवार के रूप में देखा गया। दुनिया भर के मीडिया में सुर्खियां बनीं कि जिस कंपनी ने भारत पर शासन किया, अब वह एक भारतीय के स्वामित्व में है।
अब यह आधुनिक कंपनी भी समाप्त हो गई है। रिपोर्ट के मुताबिक ईस्ट इंडिया कंपनी लिमिटेड ने अक्टूबर 2025 में परिसमापक नियुक्त कर दिए। कंपनी पर छह लाख पाउंड से अधिक की देनदारी अपने मूल समूह के प्रति थी, जो ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स में पंजीकृत था। इसके अलावा उस पर टैक्स बकाया और कर्मचारियों के वेतन से जुड़ी भारी राशि भी बाकी थी। लंदन के मेफेयर स्थित 97 न्यू बॉन्ड स्ट्रीट पर बना इसका शानदार स्टोर अब खाली बताया जा रहा है और वह किराये पर उपलब्ध है। कंपनी की वेबसाइट भी बंद हो चुकी है। इससे जुड़ी अन्य कंपनियां, जिनके नाम में ईस्ट इंडिया शब्द शामिल था, वह भी भंग कर दी गई हैं।
इसे ब्रिटेन के प्रसिद्ध स्टोर फोर्टनम एंड मेसन जैसी श्रेणी में रखा गया था। संजीव मेहता ने इसे औपनिवेशिक प्रतीक को सकारात्मक पहचान देने का प्रयास बताया था। वर्ष 2017 में दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा था कि ऐतिहासिक कंपनी आक्रामकता पर बनी थी, लेकिन आज की कंपनी करुणा और सहयोग की भावना से प्रेरित है। फिर भी व्यावसायिक चुनौतियों और वित्तीय दबावों के बीच यह प्रयोग ज्यादा समय तक टिक नहीं सका। इस प्रकार ईस्ट इंडिया कंपनी का यह दूसरा अवसान भी इतिहास में दर्ज हो गया है।
बता दें मूल ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना 31 दिसंबर 1600 को महारानी एलिजाबेथ-1 के शाही चार्टर के तहत हुई थी। इसे पूर्वी देशों खासकर भारत और दक्षिण पूर्व एशिया के साथ मसालों और अन्य वस्तुओं के व्यापार के लिए बनाया गया था। यह दुनिया की शुरुआती संयुक्त पूंजी कंपनियों में से एक थी, जिसमें निवेशक शेयर खरीद कर लाभ और जोखिम दोनों में भागीदार बनते थे। 1612-13 में इसने सूरत में अपनी पहली व्यापारिक चौकी स्थापित की थी। धीरे धीरे इसे केप ऑफ गुड होप के पूर्व में ब्रिटिश व्यापार पर एकाधिकार मिल गया।
18वीं सदी तक यह कंपनी व्यापारिक संस्था के साथ-साथ एक राजनीतिक शक्ति बन गई थी। उसने किले बनाए, स्थानीय शासकों से संधियां कीं और प्रतिद्वंद्वी यूरोपीय शक्तियों तथा भारतीय राज्यों से युद्ध लड़े। 1757 के प्लासी के युद्ध के बाद बंगाल पर उसका नियंत्रण स्थापित हो गया और वह कर वसूली, न्याय व्यवस्था तथा प्रशासन चलाने लगी। वह मसाले, कपास, रेशम, चाय और नील जैसे उत्पादों के वैश्विक व्यापार का बड़ा हिस्सा नियंत्रित करती थी।
ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन को व्यापक शोषण और दमन के लिए याद किया जाता है। नकदी फसलों की जबरन खेती, कठोर कर व्यवस्था और निर्यात नीतियों ने कई क्षेत्रों में अकाल को और भी भयावह बना दिया था। बंगाल के अकाल में लाखों लोगों की जान गई थी। 1857 का विद्रोह, जिसे सिपाही विद्रोह भी कहा जाता है, कंपनी शासन के अंत की शुरुआत साबित हुआ था। 1858 में ब्रिटिश सरकार ने सीधे नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया था और भारत में ब्रिटिश राज की स्थापना हुई थी। 1874 में ब्रिटिश संसद ने ईस्ट इंडिया कंपनी को पूरी तरह भंग कर दिया था।
ट्रंप ने जेरेड कुश्नर और स्टीव विटकॉफ को यूक्रेन तथा ईरान संकट सुलझाने की सौंपी जिम्मेदारी
27 Feb, 2026 08:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वैश्विक तनाव को सुलझाने के लिए अपने सबसे भरोसेमंद सहयोगियों पर दांव लगाया है। ट्रंप ने अपने दामाद जेरेड कुश्नर और करीबी मित्र स्टीव विटकॉफ को इन संकटों के समाधान के लिए विशेष दूत के रूप में नियुक्त किया है। गुरुवार को स्विट्जरलैंड के जिनेवा में इन दोनों दूतों ने कुछ ही घंटों के भीतर कूटनीतिक सक्रियता दिखाते हुए कई महत्वपूर्ण बैठकें कीं, जिसने अंतरराष्ट्रीय बिरादरी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
जिनेवा में इन दूतों का दौर बेहद व्यस्त रहा। सबसे पहले उन्होंने ओमान के राजदूत के आवास पर ईरानी अधिकारियों के साथ गुप्त वार्ता की। इस बैठक का प्राथमिक उद्देश्य तेहरान के परमाणु कार्यक्रम पर एक टिकाऊ समझौते की रूपरेखा तैयार करना और अमेरिका व इजरायल द्वारा संभावित सैन्य हमलों के खतरे को टालना था। इसके तुरंत बाद, कुश्नर और विटकॉफ ने इंटरकॉन्टिनेंटल होटल में यूक्रेनी प्रतिनिधियों के साथ चर्चा की, जहाँ रूसी आक्रमण के पांचवें वर्ष में प्रवेश करने के बीच शांति की संभावनाओं को तलाशा गया। कूटनीति का यह सिलसिला यहीं नहीं थमा; उन्होंने फोर सीजन्स होटल में रूस और यूक्रेन के दूतों से अलग-अलग मंजिलों पर मुलाकात की, ताकि किसी साझा मंच की गुंजाइश बन सके। देर रात अमेरिका रवाना होने से पहले वे दोबारा ओमान के राजदूत के आवास पर भी गए।
जेरेड कुश्नर और विटकॉफ की यह सक्रियता केवल यूरोप और खाड़ी तक सीमित नहीं है। हाल ही में उन्होंने बोर्ड ऑफ पीस की उद्घाटन बैठक में हिस्सा लिया था, जिसका गठन गाजा पट्टी में हमास और इजरायल के बीच युद्धविराम समझौते की निगरानी के लिए किया गया है। ट्रंप की यह रणनीति स्पष्ट करती है कि वे विदेश विभाग जैसे विशाल और पारंपरिक सरकारी तंत्र के बजाय अपने निजी व व्यावसायिक रूप से सफल सहयोगियों पर अधिक भरोसा कर रहे हैं। हालांकि, विशेषज्ञ इस कार्यप्रणाली को लेकर आशंकित हैं। पूर्व वार्ताकारों का मानना है कि यूक्रेन, ईरान और गाजा जैसे जटिल मुद्दों को एक साथ संभालना व्यावहारिक रूप से असंभव है, क्योंकि इनमें से प्रत्येक मुद्दा तकनीकी और ऐतिहासिक बारीकियों का महासागर है।
व्हाइट हाउस ने इन चिंताओं को खारिज करते हुए तर्क दिया है कि कुश्नर और विटकॉफ का व्यावसायिक बैकग्राउंड उन्हें विश्व नेताओं के साथ प्रभावी ढंग से बातचीत करने में मदद करता है। लेकिन आलोचक उनके व्यक्तिगत व्यावसायिक हितों के टकराव पर सवाल उठा रहे हैं। जेरेड कुश्नर की निवेश फर्म अरबों डॉलर के कतरी फंड का प्रबंधन करती है, वहीं विटकॉफ की क्रिप्टो फर्म के संबंध अबू धाबी के सरकारी फंडों से हैं। रिपब्लिकन सीनेटरों ने भी चिंता जताई है कि ये दूत सीनेट की मंजूरी या किसी सरकारी निगरानी के अधीन नहीं हैं। इसके बावजूद, यूक्रेन ने इस भागीदारी का स्वागत किया है। यूक्रेन को उम्मीद है कि ट्रंप से सीधे संपर्क रखने वाले इन दूतों के माध्यम से राष्ट्रपति जेलेंस्की और व्लादिमीर पुतिन के बीच सीधी वार्ता का रास्ता साफ हो सकेगा। पूर्व अमेरिकी दूतों का मानना है कि ट्रंप से सीधा जुड़ाव एक सकारात्मक पहलू तो है, लेकिन इन मुद्दों की संवेदनशीलता और गहरी समझ की कमी वार्ता को जोखिम में भी डाल सकती है।
अफगान हमले से थरथर कांपा पाकिस्तान फिर आधी रात काबुल में बरसी आग
27 Feb, 2026 07:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
काबुल/इस्लामाबाद। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पर तनाव अब खुले सैन्य टकराव और हमलों में बदलता दिख रहा है। दोनों देशों के दावों और पलटवारों के बीच हालात युद्ध जैसे बन गए हैं। अफगानिस्तान का दावा है कि उसकी जवाबी कार्रवाई में 55 से अधिक पाकिस्तानी सैनिक मारे गए हैं, जबकि कुछ सैनिकों को जिंदा पकड़ा गया है। अफगानी सैनिकों ने डूरंड लाइन पर पाकिस्तान की करीब 15 चौकियों पर कब्जा कर लिया है। वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान ने आधी रात को अफगानिस्तान की राजधानी काबुल समेत कई इलाकों में हवाई हमले कर 130 से अधिक अफगान लड़ाकों को मार गिराने का दावा किया है।
पाकिस्तान ने अफगान तालिबान शासन के खिलाफ ‘ऑपरेशन ग़ज़ब लिल हक’ शुरू करने की घोषणा की है। पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार के अनुसार, इस ऑपरेशन के तहत 133 अफगान तालिबान ऑपरेटिव मारे गए और 200 से अधिक घायल हुए। पाकिस्तान का कहना है कि उसने काबुल के अलावा पक्तिका और कंधार में तालिबान के रक्षा ठिकानों को निशाना बनाया। पाकिस्तानी दावे के मुताबिक 27 चौकियां तबाह की गईं और 9 चौकियों पर कब्जा भी कर लिया गया।
पाकिस्तान का कहना है कि यह कार्रवाई अफगानिस्तान की ओर से किए गए क्रॉस-बॉर्डर हमलों के जवाब में की गई। इस्लामाबाद के अनुसार, अफगान हमलों में उसके 50 से अधिक सैनिक मारे गए थे। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि सेना तालिबान सरकार के हमलों का “करारा जवाब” दे रही है। पाकिस्तान ने यह भी दावा किया कि उसने दो कोर मुख्यालय, तीन ब्रिगेड मुख्यालय, दो गोला-बारूद डिपो और कई सैन्य ठिकाने नष्ट कर दिए। हालांकि, पाकिस्तान ने अपने नुकसान को सीमित बताते हुए कहा कि उसके केवल दो सैनिक मारे गए और तीन घायल हुए हैं। इस्लामाबाद ने काबुल में बड़े पैमाने पर नागरिक हताहत होने के दावों को भी खारिज किया है।
अफगानिस्तान का दावा- पाक चौकियों पर कब्जा
इसी बीच अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने पाकिस्तान के दावों को खारिज करते हुए कहा है कि उसके सैनिकों ने डूरंड लाइन पर पाकिस्तान की 15 चौकियों पर कब्जा कर लिया है। इस्लामिक अमीरात ऑफ अफगानिस्तान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा कि कंधार और हेलमंद में पाकिस्तानी सैन्य पोस्ट को निशाना बनाया गया है। अफगान रक्षा मंत्रालय का दावा है कि कई पाकिस्तानी सैनिक मारे गए और कुछ को जिंदा पकड़ लिया गया है।
पहले भी हुए थे हवाई हमले
संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन, अफगानिस्तान (यूएनएएमए) ने हाल ही में पुष्टि की थी कि पाकिस्तान द्वारा नंगरहार और पक्तिका प्रांतों में किए गए हवाई हमलों में 13 नागरिकों की मौत हुई थी, जिनमें महिलाएं और बच्चे शामिल थे। सीमा पर जारी गोलीबारी और हवाई हमलों ने पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ा दी है। दोनों देशों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है, जबकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय हालात पर नजर बनाए हुए है। फिलहाल, हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं और किसी बड़े संघर्ष की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
हिलेरी क्लिंटन ने जेफ्री एपस्टीन से किसी भी तरह की मुलाकात से किया इनकार
27 Feb, 2026 06:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिका की पूर्व विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने प्रतिनिधि सभा की ‘निगरानी एवं सरकारी सुधार समिति’ के समक्ष पेश होकर जेफ्री एपस्टीन से किसी भी प्रकार के संबंध या मुलाकात से साफ इनकार किया। उन्होंने कहा कि उन्हें एपस्टीन की आपराधिक गतिविधियों की कोई जानकारी नहीं थी और न ही उन्हें उससे मिलने की कोई याद है।
क्लिंटन ने अपने बयान में कहा, मुझे उसकी आपराधिक गतिविधियों के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। मुझे याद नहीं कि मेरी कभी एपस्टीन से मुलाकात हुई हो। मैंने कभी उसके विमान में यात्रा नहीं की और न ही उसके द्वीप, घरों या कार्यालयों का दौरा किया। यह सुनवाई उस जांच के तहत हुई, जिसकी अगुवाई प्रतिनिधि सभा की रिपब्लिकन नेतृत्व वाली समिति कर रही है। जांच का फोकस संघीय एजेंसियों द्वारा जेफ्री एपस्टीन और उसकी सहयोगी जी मैक्सवेल के खिलाफ मामलों के संचालन पर है। एपस्टीन की 2019 में यौन तस्करी के आरोपों के बीच हिरासत में मौत हो गई थी, जबकि मैक्सवेल वर्तमान में संघीय जेल में सजा काट रही है।
जांच पर उठाए सवाल
अपने शुरुआती बयान में क्लिंटन ने समिति की मंशा पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं होने के बावजूद गवाही के लिए बुलाया गया, जो जांच में सहायक नहीं है। उनके अनुसार, यह कार्रवाई पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से जुड़े मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश हो सकती है। क्लिंटन ने कहा कि यह जांच पीड़ितों और बचे लोगों के लिए न्याय सुनिश्चित करने के बजाय राजनीतिक हितों की रक्षा के लिए की जा रही है। उन्होंने दोहराया कि जनवरी में दिए गए अपने शपथ पत्र के अलावा उनके पास बताने को और कुछ नहीं है।
सुनवाई के दौरान विवाद
बंद कमरे में हुई सुनवाई के दौरान एक तस्वीर लीक होकर ऑनलाइन सामने आई, जिस पर क्लिंटन ने कड़ी आपत्ति जताई। सदन के नियमों के तहत ऐसी कार्यवाही के दौरान फोटो लेना प्रतिबंधित है। क्लिंटन ने इसे “बेहद परेशान करने वाला” बताया। समिति के रिपब्लिकन अध्यक्ष जेम्स आर कॉमर ने जांच प्रक्रिया का बचाव करते हुए कहा, कि यह कोई पक्षपातपूर्ण कार्रवाई नहीं है। उन्होंने संकेत दिया कि पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन से भी आगे पूछताछ की जा सकती है। वहीं, समिति के डेमोक्रेट सदस्य यासमिन अंसारी और रॉबर्ट गेरेसिया ने क्लिंटन का समर्थन किया और कहा कि उनके खिलाफ किसी भी गलत काम का प्रमाण नहीं है।
सीनेट में डेमोक्रेटिक नेता कार्लेस ई स्कूमर ने कहा कि वे न्याय विभाग से संबंधित फाइलों की सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने का प्रयास करेंगे। एपस्टीन प्रकरण अमेरिकी राजनीति और न्याय व्यवस्था में लंबे समय से विवाद का विषय रहा है, और यह ताजा सुनवाई उस बहस को एक बार फिर सुर्खियों में ले आई है।
उदयपुर में एक हुए विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना; पारंपरिक रीति-रिवाजों से संपन्न हुई 'शाही शादी'
27 Feb, 2026 05:13 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
उदयपुर। फिल्म 'गीता गोविंदम' और 'डियर कॉमरेड' में अपनी ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री से लाखों दिलों को जीतने वाले विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना अब असल जिंदगी में भी हमसफर बन गए हैं। 26 फरवरी 2026 को उदयपुर के अरावली पहाड़ियों के बीच स्थित आलीशान ITC मेमेंटोस (ITC Mementos) होटल में दोनों ने सात फेरे लिए।
दो संस्कृतियों का मिलन: तेलुगु और कोडवा रीति-रिवाज
इस शादी की सबसे खास बात यह थी कि इसमें दोनों परिवारों की परंपराओं का पूरा सम्मान रखा गया।
सुबह की रस्म: सुबह 10:10 बजे विजय के परिवार की परंपरा के अनुसार तेलुगु हिंदू रीति-रिवाजों से शादी संपन्न हुई।
शाम की रस्म: शाम को रश्मिका की जड़ों का सम्मान करते हुए पारंपरिक कोडवा (कूर्गी) रस्मों को निभाया गया।
कैसा था दूल्हा-दुल्हन का लुक?
सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीरों में यह जोड़ा किसी राजसी जोड़े से कम नहीं लग रहा था:
रश्मिका मंदाना: रश्मिका ने मशहूर डिजाइनर अनामिका खन्ना द्वारा डिजाइन की हुई पारंपरिक 'रस्ट' (नारंगी-लाल) रंग की सिल्क साड़ी पहनी थी, जिसे उन्होंने सोने के भारी गहनों (टेंपल ज्वेलरी) के साथ टीम-अप किया था।
विजय देवरकोंडा: विजय ने क्रीम रंग की धोती और सुनहरे अंगवस्त्रम में एक सादगी भरे लेकिन शाही दूल्हे के रूप में एंट्री की।
'बेस्ट फ्रेंड को बनाया अपनी पत्नी' - विजय का इमोशनल पोस्ट
शादी के बाद विजय देवरकोंडा ने इंस्टाग्राम पर एक बेहद भावुक नोट साझा किया। उन्होंने लिखा, "एक दिन मुझे उसकी कमी महसूस हुई... ऐसी कमी कि मुझे लगा कि मेरा हर दिन और मेरा हर भोजन उसके बिना अधूरा है। इसलिए मैंने अपनी सबसे अच्छी दोस्त को अपनी पत्नी बना लिया।" वहीं रश्मिका ने विजय को अपना 'पति' बताते हुए लिखा कि वे उनके साथ अपनी नई जिंदगी शुरू करने के लिए बेहद उत्साहित हैं।
क्रिकेट मैच और संगीत: प्री-वेडिंग का जलवा
शादी से पहले 24 और 25 फरवरी को हल्दी, मेहंदी और संगीत के कार्यक्रम हुए। इस दौरान मेहमानों के लिए एक खास क्रिकेट मैच का आयोजन किया गया था, जिसे 'विरोश प्रीमियर लीग' (Virosh Premier League) नाम दिया गया। इसमें दोनों परिवारों और दोस्तों ने जमकर मस्ती की।
हैदराबाद में होगा भव्य रिसेप्शन
उदयपुर की शादी एक प्राइवेट अफेयर थी जिसमें केवल करीबी दोस्त और परिवार शामिल हुए। लेकिन फिल्मी हस्तियों और उद्योग जगत के लिए एक बड़ा रिसेप्शन 4 मार्च 2026 को हैदराबाद के ताज कृष्णा होटल में आयोजित किया जाएगा, जिसमें साउथ और बॉलीवुड के बड़े सितारों के शामिल होने की उम्मीद है।
पीएम तारिक रहमान ने आर्मी चीफ जनरल वकर-उज-जमां की ‘कमान’ बहाल की
27 Feb, 2026 05:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका। बांग्लादेश की राजनीति में फरवरी महीना बड़े बदलाव लेकर आया है। 18 महीने के अंतरिम शासन के बाद तारिक रहमान के नेतृत्व में पूर्ण राजनीतिक सरकार के गठन के साथ सत्ता समीकरण बदल गए हैं। इसका सीधा असर सेना पर भी पड़ा है। सेना प्रमुख जनरल वकार-उज-जमां की ‘कमान’ एक बार फिर मजबूत होती दिख रही है।
सूत्रों के अनुसार, अंतरिम सरकार के दौरान सेना पर जो निगरानी और नियंत्रण तंत्र लागू किया गया था, वह अब समाप्त कर दिया गया है। पहले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) सचिवालय के माध्यम से सेना के निर्णयों पर ओवरसाइट रखी जा रही थी। अंतरिम शासन का नेतृत्व कर रहे मोहम्मद यूनुस के कार्यकाल में यह व्यवस्था लागू की गई थी, जिससे सेना मुख्यालय के कई फैसले प्रभावित हुए थे।
दो बड़ी बाधाएं हुईं दूर
जानकारी के मुताबिक, जनरल जमां के पूर्ण अधिकार में दो प्रमुख बाधाएं थीं पहली, राजनीतिक सरकार का अभाव और दूसरी, एनएसए सचिवालय के जरिए सैन्य मामलों में दखल। अब पूर्ण सरकार बनने और निगरानी तंत्र हटने के बाद सेना प्रमुख को राहत मिली है। पूर्व एनएसए और वर्तमान विदेश मंत्री खलिलुर रहमान पर आरोप था कि उन्होंने सैन्य मामलों में गहरी दखलंदाजी की। कई मौकों पर आर्मी मुख्यालय के फैसलों को एनएसए कार्यालय से पलट दिया गया। इससे सेना के भीतर असंतोष की स्थिति बनी रही।
सेना में बड़े फेरबदल
हालिया घटनाक्रम के बाद सेना के शीर्ष पदों पर बदलाव किए गए हैं। जनरल जमां के भरोसेमंद लेफ्टिनेंट जनरल मैनुर्रहमान को चीफ ऑफ जनरल स्टाफ (सीजीएस) नियुक्त किया गया है। वहीं लेफ्टिनेंट जनरल कमरुल हसन को विदेश मंत्रालय में राजनयिक भूमिका सौंपी गई है। ब्रिगेडियर कैसर राशिद को पदोन्नत कर मेजर जनरल बनाया गया और उन्हें डीजीएफआई का महानिदेशक नियुक्त किया गया है।
विश्लेषकों का कहना है कि इन बदलावों से सेना के भीतर कथित ‘जमातीकरण’ में कमी आई है और पेशेवर ढांचे को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा है। जनरल जमां लंबे समय से सेना को एक पेशेवर और राजनीतिक प्रभाव से मुक्त बल के रूप में स्थापित करने की वकालत करते रहे हैं।
बैरकों में वापसी की तैयारी
अंतरिम शासन के दौरान कानून-व्यवस्था संभालने के लिए सेना को सड़कों पर उतारा गया था। अब नई सरकार बनने के बाद उम्मीद है कि सेना धीरे-धीरे बैरकों में लौटेगी। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि कानून-व्यवस्था की स्थिति पूरी तरह सामान्य होने तक सैनिकों की तैनाती जारी रह सकती है।
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