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रूस का दावा: यूक्रेन संकट के पीछे पश्चिम की रणनीति
25 Apr, 2026 10:07 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सर्गेई लावरोव का कड़ा प्रहार: "यूक्रेन के बहाने रूस के खिलाफ सीधा युद्ध लड़ रहा है पश्चिम"
यूक्रेन| रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने पश्चिमी शक्तियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि अब यूक्रेन संघर्ष केवल एक क्षेत्रीय विवाद नहीं, बल्कि रूस के विरुद्ध एक 'खुला युद्ध' बन चुका है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका और उसके सहयोगी देश यूक्रेन को एक ढाल के रूप में इस्तेमाल कर अपना असली एजेंडा चला रहे हैं।
"पश्चिमी मदद के बिना कीव का टिकना असंभव"
रूसी गैर-सरकारी संगठनों के साथ एक संवाद के दौरान लावरोव ने यूक्रेन की वर्तमान स्थिति पर तीखी टिप्पणी की:
मोहरे की तरह इस्तेमाल: उन्होंने कहा कि कीव प्रशासन पश्चिमी देशों के लिए 'भाले की नोक' की तरह काम कर रहा है।
पूर्ण निर्भरता: लावरोव के अनुसार, पश्चिमी हथियारों, सैटेलाइट डेटा, खुफिया सूचनाओं और भारी आर्थिक सहायता के बिना यूक्रेन की सैन्य क्षमता समाप्त हो चुकी होती।
यूरोपीय सैन्य तैयारी: उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ यूरोपीय सैन्य अधिकारी अब सार्वजनिक रूप से रूस के खिलाफ सीधे टकराव की बात करने लगे हैं।
यूरोप से बढ़ता वैश्विक खतरा
रूसी विदेश मंत्री ने इतिहास का हवाला देते हुए चेतावनी दी कि आधुनिक काल में यह तीसरी बार है जब पूरी दुनिया के लिए खतरा यूरोप की धरती से पैदा हो रहा है। उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों की नीतियां अंतरराष्ट्रीय शांति को दांव पर लगाकर अस्थिरता को बढ़ावा दे रही हैं।
धार्मिक दमन का उठाया मुद्दा
लावरोव ने यूक्रेन में 'यूक्रेनी ऑर्थोडॉक्स चर्च' के साथ हो रहे व्यवहार की भी कड़ी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि:
चर्चों पर अवैध कब्जे और तोड़फोड़ की जा रही है।
धर्मगुरुओं और श्रद्धालुओं को निशाना बनाया जा रहा है, जिसके तहत 180 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं।
यूरोपीय संघ का बड़ा दांव: 90 अरब यूरो का सहायता पैकेज
तनाव के बीच यूरोपीय संघ (EU) ने यूक्रेन के लिए एक विशाल सहायता राशि की घोषणा की है:
वित्तीय मदद: कुल 90 अरब यूरो के पैकेज को मंजूरी दी गई है।
रक्षा आवंटन: इसमें से 60 अरब यूरो सैन्य उपकरणों की खरीद और रक्षा उत्पादन बढ़ाने के लिए रखे गए हैं।
प्रतिबंध: साथ ही रूस पर 20वें दौर के प्रतिबंधों को लागू किया गया है, ताकि मॉस्को की आर्थिक और सैन्य शक्ति को कमजोर किया जा सके।
यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने स्पष्ट किया कि यूरोप, यूक्रेन के समर्थन से पीछे हटने वाला नहीं है।
अमेरिका पर संसाधनों की लूट का आरोप
लावरोव ने अमेरिका की विदेश नीति पर प्रहार करते हुए कहा कि वाशिंगटन लोकतंत्र के नाम पर केवल तेल और प्राकृतिक संसाधनों पर कब्जा करना चाहता है। उन्होंने ईरान और वेनेजुएला का उदाहरण देते हुए कहा कि अमेरिका अपने ऊर्जा हितों के लिए किसी भी देश की चुनी हुई सरकार को अस्थिर करने की क्षमता रखता है।
कूटनीति का नया मोर्चा: पाकिस्तान में वार्ता
इसी गहमागहमी के बीच एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक हलचल भी देखने को मिली है। अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर के पाकिस्तान पहुंचने की पुष्टि हुई है। वहां वे ईरानी प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे। माना जा रहा है कि इस गुप्त वार्ता का मुख्य केंद्र पश्चिम एशिया का तनाव और परमाणु मुद्दे हो सकते हैं।
बेड के अंदर छुपाई लाश, जींद में युवक की हत्या का खुलासा
24 Apr, 2026 01:13 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जुलाना। क्षेत्र के नंदगढ़ गांव में एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है, जहाँ एक 40 वर्षीय व्यक्ति की हत्या कर उसकी लाश को घर के ही बेड (दीवान) में छिपा दिया गया। घटना का खुलासा होने के बाद पूरे गांव में सनसनी फैल गई है।
बदबू आने पर हुआ खुलासा
मृतक की पहचान गांव के निवासी चांद के रूप में हुई है। चांद अविवाहित था और अपने भाइयों में सबसे छोटा था। जानकारी के अनुसार, जब घर के भीतर से असहनीय दुर्गंध आने लगी, तब परिजनों और ग्रामीणों को किसी अनहोनी का संदेह हुआ। छानबीन करने पर चांद का शव बेड के अंदर मिला, जिसके बाद तुरंत स्थानीय पुलिस को सूचना दी गई।
फॉरेंसिक टीम ने जुटाए साक्ष्य
मामले की गंभीरता को देखते हुए जुलाना पुलिस के साथ-साथ एसएफएल (स्टेट फॉरेंसिक लैब) की टीम भी मौके पर पहुंची। विशेषज्ञों ने घटनास्थल से फिंगरप्रिंट्स और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्रित किए हैं। पुलिस को अंदेशा है कि हत्या कुछ दिन पहले की गई होगी, जिससे शव गलना शुरू हो गया था।
पुलिस की जांच और कार्रवाई
घटना की जानकारी मिलते ही डीएसपी ऋषभ सोढ़ी और थाना प्रभारी कुलदीप सिंह ने दल-बल के साथ मौके का मुआयना किया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जींद के सामान्य अस्पताल भेज दिया है।
अधिकारियों का कहना है कि:
हत्या के कारणों का फिलहाल पता नहीं चल पाया है।
परिजनों और आसपास के लोगों से गहन पूछताछ की जा रही है।
पुलिस रंजिश और घरेलू विवाद समेत हर संभावित कोण से मामले की तफ्तीश कर रही है।
बलूचिस्तान में रिफाइनरी पर हमला, कर्मचारियों में फैली दहशत, मची अफरा-तफरी
24 Apr, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। पाकिस्तान के दक्षिण-पश्चिमी बलूचिस्तान के दरिग्वान इलाके में स्थित नेशनल रिफाइनरी लिमिटेड के प्लांट पर अज्ञात हथियारबंद हमलावरों ने हमला कर दिया, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। कंपनी के मुताबिक बंदूकधारियों ने अचानक रिफाइनरी परिसर पर फायरिंग शुरू कर दी। उस समय साइट पर मौजूद कर्मचारियों में दहशत फैल गई और कई लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करना पड़ा। घटना की सूचना मिलते ही सुरक्षा बल मौके पर पहुंचे और पूरे इलाके को घेर लिया। सुरक्षा एजेंसियों ने तुरंत क्लियरेंस ऑपरेशन शुरू किया, जिसके बाद हमलावर मौके से फरार हो गए। फिलहाल किसी भी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक रिफाइनरी प्रबंधन ने बताया कि एहतियात के तौर पर कुछ समय के लिए ऑपरेशन रोक दिए गए थे। इमरजेंसी प्रोटोकॉल लागू करते हुए कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित की गई। नुकसान सीमित बताया जा रहा है, लेकिन विस्तृत जांच अभी जारी है। स्थानीय प्रशासन और कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने पूरे क्षेत्र को सील कर दिया है और हमलावरों की पहचान के लिए जांच शुरू कर दी है। साथ ही अन्य तेल और गैस प्रतिष्ठानों की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है। यह हमला ऐसे समय हुआ है जब पाकिस्तान पहले से ही सुरक्षा चुनौतियों से जूझ रहा है, खासकर बलूचिस्तान जैसे संवेदनशील इलाकों में।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के हमले न सिर्फ सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हैं, बल्कि विदेशी निवेशकों के भरोसे को भी प्रभावित कर सकते हैं। इससे पहले भी पाकिस्तान की रिफाइनरी और ऊर्जा क्षेत्र पर असर पड़ा था। अटॉक रिफाइनरी लिमिटेड को हाल ही में अपने ऑपरेशन रोकने पड़े थे, जब इस्लामाबाद में संभावित शांति वार्ता के चलते सुरक्षा कारणों से सड़कों को बंद कर दिया था। इससे कच्चे तेल की सप्लाई और प्रोडक्ट की डिलीवरी पर सीधा असर पड़ा था। वहीं, अमेरिका-ईरान तनाव और होर्मुज के आसपास की नाकेबंदी ने भी पूरे क्षेत्र के ऊर्जा व्यापार पर दबाव बढ़ा दिया है।
ईरान-ट्रंप टकराव बढ़ा, अल्टीमेटम से सीजफायर पर संकट
24 Apr, 2026 11:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान/वाशिंगटन: ईरान और अमेरिका के बीच चल रही तनातनी अब 'आर-पार' की जंग में तब्दील होती दिख रही है। शांति वार्ता की मेज पर सन्नाटा पसरा होने के बीच ईरान ने ट्रंप प्रशासन को सीधे शब्दों में 48 घंटे की समय सीमा (Ultimatum) दे दी है। तेहरान का आरोप है कि अमेरिका वार्ता में जानबूझकर देरी कर रहा है ताकि उसकी अर्थव्यवस्था को और चोट पहुँचाई जा सके।
11 ट्रिलियन डॉलर का 'महा-विवाद'
दोनों देशों के बीच गतिरोध की सबसे बड़ी दीवार वह 11 ट्रिलियन डॉलर (लगभग 900 लाख करोड़ रुपये) की ईरानी संपत्ति है, जिसे अमेरिका ने फ्रीज कर रखा है।
ईरान का दावा: जब तक यह भारी-भरकम राशि जारी नहीं की जाती और ईरानी बंदरगाहों से प्रतिबंध नहीं हटाए जाते, तब तक बातचीत का कोई अर्थ नहीं है।
अमेरिका का रुख: फिलहाल वाशिंगटन ने इन संपत्तियों को मुक्त करने के बदले कई कड़े समझौते की शर्तें रखी हैं, जिस पर सहमति नहीं बन पाई है।
"हवा नहीं, आग बरसेगी": विदेश मंत्री की चेतावनी
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सख्त लहजे में कहा कि यदि अगले दो दिनों के भीतर संपत्तियों को लेकर कोई ठोस लिखित प्रस्ताव नहीं मिलता, तो वर्तमान सीजफायर (युद्धविराम) स्वतः समाप्त मान लिया जाएगा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा:
"अगर हमारी संपत्तियां हमें वापस नहीं मिलती हैं, तो होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद करना हमारा अगला कदम होगा। दुनिया को अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए अमेरिका की जिद की कीमत चुकानी पड़ सकती है।"
दुनिया पर क्या होगा असर?
होर्मुज जलडमरूमध्य का बंद होना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए किसी भूकंप से कम नहीं होगा:
तेल की कीमतें: दुनिया का लगभग 20% तेल इसी रास्ते से गुजरता है। इसके बंद होने से कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं।
वैश्विक मंदी का खतरा: ऊर्जा आपूर्ति में बाधा आने से परिवहन और उत्पादन लागत बढ़ेगी, जिससे वैश्विक महंगाई दर में भारी उछाल आ सकता है।
युद्ध की आशंका: यदि ईरान होर्मुज को बंद करता है, तो अमेरिका और उसके सहयोगी देश सैन्य कार्रवाई कर सकते हैं, जिससे मध्य पूर्व में एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध की शुरुआत हो सकती है।
कूटनीति के लिए आखिरी 48 घंटे
फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें वाशिंगटन की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। क्या ट्रंप प्रशासन ईरान की शर्तों के आगे झुकेगा या फिर यह अल्टीमेटम एक नए संघर्ष का बिगुल फूंकेगा? अगले 48 घंटे वैश्विक शांति और अर्थव्यवस्था के लिए निर्णायक होने वाले हैं।
जातीय समीकरण बनाम अनुभव: अंबाला चुनाव में दो दावेदारों की टक्कर
24 Apr, 2026 11:21 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अंबाला सिटी। नगर निगम चुनाव का बिगुल बज चुका है और शहर की 'सरकार' चुनने के लिए बिसात बिछ गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस, दोनों ने ही मेयर पद के लिए नए चेहरों पर दांव खेला है। दिलचस्प बात यह है कि दोनों ही प्रमुख दलों ने सैनी समाज से ताल्लुक रखने वाली महिला उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है। भाजपा ने अक्षिता सैनी को अपना प्रत्याशी बनाया है, जबकि कांग्रेस ने कुलविंदर कौर को टिकट दिया है।
पुराने नेताओं की साख दांव पर
चूंकि मेयर पद के लिए दोनों ही चेहरे नए हैं, ऐसे में यह मुकाबला सीधे तौर पर पार्टियों के संगठन और पुराने दिग्गज नेताओं की प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है। मतदाता इस बार किसी चेहरे के बजाय पार्टियों के प्रदर्शन और उनके नेताओं के पिछले 'रिपोर्ट कार्ड' के आधार पर फैसला करेंगे।
भाजपा ने महिलाओं और अनुभवी चेहरों पर जताया भरोसा
टिकट वितरण के मामले में भाजपा कांग्रेस से एक कदम आगे नजर आ रही है:
महिला प्रतिनिधित्व: मेयर सहित 8 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित होने के बावजूद भाजपा ने 10 महिलाओं को मैदान में उतारा है, जबकि कांग्रेस ने केवल 8 महिलाओं को प्रत्याशी बनाया है।
अनुभव को प्राथमिकता: भाजपा ने अपने 9 पूर्व पार्षदों को दोबारा मौका दिया है, जिससे पार्टी की रणनीति में अनुभव और जोश का तालमेल दिख रहा है।
जातीय समीकरणों का तालमेल
दोनों पार्टियों ने जातीय गणित को साधने की पूरी कोशिश की है:
सैनी समाज का दबदबा: दोनों दलों द्वारा मेयर पद के लिए सैनी समाज के उम्मीदवार उतारने से यह साफ है कि इस बार नगर निगम की कमान इसी समाज के हाथ में रहने की संभावना है।
विविधता: निगम के कुल 20 वार्डों में वैश्य और पंजाबी समाज को भी दोनों पार्टियों ने उनकी आबादी के हिसाब से पर्याप्त प्रतिनिधित्व दिया है।
अमेरिका ने नौसेना के सेक्रेटरी जॉन फेलन को पद से हटाया
24 Apr, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। ईरान युद्ध के बीच अमेरिका में बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया है। अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने नौसेना सचिव जॉन फेलन को पद से हटा दिया है। पेंटागन ने बुधवार को इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि ये फैसला तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है, हालांकि उन्हें हटाने का कारण नहीं बताया गया है। सूत्रों के मुताबिक ये भी कहा जा रहा है कि फेलन और हेगसेथ के बीच संबंध अच्छे नहीं थे। बताया जा रहा है कि फेलन ने कई बार कमांड चेन को दरकिनार कर सीधे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से संपर्क किया, जिससे नाराजगी बढ़ गई। फेलन के हटने के बाद नौसेना के अंडरसेक्रेटरी हंग काओ को फिलहाल कार्यवाहक जिम्मेदारी दी गई है।
एक माह में ही नेपाल सरकार के गृहमंत्री ने दिया इस्तीफा, वित्तीय मामलों में फंसे
24 Apr, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
काठमांडु। नेपाल में जेन जी आंदोलन के बाद बनी नई बालेन सरकार को एक महीने का भी वक्त नहीं हुआ है और देश के गृहमंत्री सुदन गुरुंग ने इस्तीफा दे दिया है। यह वही सुदन गुरुंग हैं, जो जेन जी आंदोलन में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक चेहरा बनकर उभरे थे। भ्रष्टाचारियों के घर से एक-एक पाई निकाल लाने जैसे बयानों की खूब चर्चा हुआ करती थी। नेपाल सरकार में गृहमंत्री बनने के बाद भी उनकी पहली टिप्पणी यही थी कि मैं भ्रष्ट लोगों को दुनिया के सामने लाऊंगा और बताऊंगा कि नेपाल में कैसे बदलाव हो रहे हैं। उनका कहना था कि यदि उन्होंने कुछ गलती की होगी तो भ्रष्टाचार के मामले में मैं अपने पिता तक को नहीं बख्शूंगा। ऐसे में बड़ा सवाल है कि गुरुंग आखिर खुद कैसे वित्तीय मामलों में फंस गए।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इसकी वजह यह है कि मनी लॉन्ड्रिंग की जांच में घिरे एक कारोबारी के साथ उनके रिश्तों की चर्चा है। उन पर आरोप है कि उस कारोबारी के बिजनेस में सुदन गुरुंग ने कुछ निवेश किया है यानी हिस्सेदारी रखते हैं। यह विवाद इतना बढ़ा कि सुदन गुरुंग को इस्तीफा देना पड़ा। इसके अलावा उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में जांच भी कराई जा सकती है। कारोबारी दीपक भट्ठा का नाम बीते कुछ सालों में चर्चा में रहा है और उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग की जांच चल रही है। ऐसे में उनसे संबंधों के चलते सुदन गुरुंग को अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी है।
रिपोर्ट के मुताबिक मामला यहीं खत्म नहीं हुआ है। पूर्व सचिव शारदा प्रसाद त्रितल और कई अन्य लोगों ने मांग की है कि इस्तीफा ही काफी नहीं है। इस मामले में गहन जांच की जरूरत है। शारदा प्रसाद ने कहा कि यदि सुदन गुरुंग के खिलाफ कुछ नहीं पाया जाता तो फिर उन्हें क्लीन चिट भी मिलनी चाहिए। इसके अलावा गलती पाई जाए तो जांच आगे बढ़नी चाहिए। इस मामले में जांच की मांग तेज हो रही है तो संभव है कि गुरुंग अगले कुछ दिनों में घिर सकते हैं।
माना जा रहा है कि नेपाल पीएम बालेंद्र शाह भी दबाव में हैं और उन्होंने ही इस्तीफा मांगा था। ऐसा इसलिए क्योंकि इस्तीफा देने से पहले सुदन गुरुंग आपदा प्रबंधन विभाग की एक बैठक में थे और मॉनसून से पहले की तैयारी का जायजा ले रहे थे। यह बैठक किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाई थी और सुदन गुरुंग बीच में ही उठ गए। इसके बाद वह सीधे पीएम आवास से निकल गए और फिर मंत्री परिषद के लोगों से मिले। आधे घंटे के बाद उन्होंने सार्वजनिक तौर पर इस्तीफे का ऐलान कर दिया।
इससे स्पष्ट है कि वह पीएम बालेन शाह के कहने पर ही बैठक से निकले थे और उन्हें इस्तीफा देकर आए। हालांकि अब भी वह खुद को निर्दोष बता रहे हैं और क्रांति की गरिमा बनाए रखने की बात कर रहे हैं। उनका कहना है कि जिस शुचिता और ईमानदारी वाले शासन की चाह लेकर आंदोलन हुआ और 46 युवा उसमें मारे गए। उसका अपमान नहीं होना चाहिए। आंदोलन से बनी सरकार की गरिमा बनी रहनी चाहिए। इसलिए निष्पक्ष जांच के उद्देश्य से मैं इस्तीफा दे रहा हूं।
चुनाव आयोग की कार्रवाई: खर्च विवरण नहीं देने वालों पर 5 साल की पाबंदी
24 Apr, 2026 09:09 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हरियाणा। राज्य चुनाव आयोग ने आगामी निकाय चुनावों से पहले एक बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए 115 उम्मीदवारों को अयोग्य घोषित कर दिया है। आयोग की नई अधिसूचना के मुताबिक, ये प्रत्याशी अगले 5 वर्षों तक किसी भी स्तर का चुनाव नहीं लड़ पाएंगे।
यह सख्त कदम उन उम्मीदवारों पर उठाया गया है, जो पिछला चुनाव लड़ने के बाद अपने चुनावी खर्च का अनिवार्य विवरण (Expentiture Details) समय पर जमा करने में विफल रहे।
कार्रवाई का मुख्य कारण
चुनाव नियमों के अनुसार, परिणाम घोषित होने के 30 दिनों के भीतर हर प्रत्याशी को अपने खर्च का पूरा ब्योरा देना होता है। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह एक अनिवार्य प्रक्रिया है। जिन उम्मीदवारों ने तय समय सीमा के भीतर और नोटिस मिलने के बाद भी रिकॉर्ड पेश नहीं किया, उन्हें जिला निर्वाचन अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर अयोग्य ठहराया गया है।
चुनावी खर्च की निर्धारित सीमाएं
आयोग ने विभिन्न पदों के लिए खर्च की अधिकतम सीमा तय की है, जिसका उल्लंघन करना दंडनीय है:
पद का नाम
अधिकतम खर्च सीमा
नगर निगम महापौर (Mayor)
₹30 लाख
नगर परिषद अध्यक्ष
₹20 लाख
नगर निगम पार्षद
₹7.5 लाख
जिला परिषद सदस्य
₹6 लाख
नगर परिषद सदस्य
₹4 लाख
सरपंच
₹2 लाख
क्षेत्रवार अयोग्य उम्मीदवारों की संख्या
आयोग द्वारा जारी सूची के अनुसार, विभिन्न निकायों के अयोग्य घोषित प्रत्याशियों का विवरण इस प्रकार है:
नारनौल नगर परिषद: 41 उम्मीदवार (सर्वाधिक)
सोनीपत नगर निगम: 18 उम्मीदवार
पुन्हाना नगर पालिका: 17 उम्मीदवार
नूंह नगर परिषद: 14 उम्मीदवार
राजौंद नगर पालिका: 13 उम्मीदवार
अन्य: झज्जर (5), फिरोजपुर झिरका (5) और टोहाना (1)।
‘ऑपरेशन इकोनॉमिक फ्यूरी’ के साथ प्रभावी व सफल नौसैनिक नाकेबंदी भी जारी
24 Apr, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने ईरान के साथ अपने युद्धविराम को बढ़ा दिया है, जबकि व्यापक नौसैनिक नाकेबंदी जारी है। व्हाइट हाउस ने कहा है कि बातचीत के लिए कोई समय-सीमा तय नहीं है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलाइन लीविट ने कहा कि अमेरिका दोहरी रणनीति अपना रहा है सैन्य हमलों को रोकते हुए वित्तीय और समुद्री प्रतिबंधों को और कड़ा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने युद्धविराम के विस्तार की घोषणा की है…और ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के कारण पूरी तरह बदनाम हो चुके एक शासन को उदारता से कुछ लचीलापन भी दिया है।
उन्होंने कहा कि सैन्य कार्रवाई में विराम का मतलब दबाव में कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि सैन्य और प्रत्यक्ष हमलों पर युद्धविराम है लेकिन ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक फ्यूरी’ जारी है और प्रभावी व सफल नौसैनिक नाकेबंदी भी जारी है। इस नाकेबंदी से ईरान को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। लीविट ने कहा कि हम इस नाकेबंदी के जरिए उनकी अर्थव्यवस्था को पूरी तरह जकड़ रहे हैं…उन्हें रोज़ 500 मिलियन डॉलर का नुकसान हो रहा है और ईरान तेल की खेप भेजने या भुगतान बनाए रखने में असमर्थ है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने कहा कि आर्थिक दबाव बढ़ने के बावजूद, प्रशासन ने बातचीत के लिए कोई समय-सीमा तय करने से परहेज किया है। राष्ट्रपति ने कोई निश्चित समय-सीमा तय नहीं की है… अंततः समय-सीमा का निर्धारण कमांडर-इन-चीफ द्वारा किया जाएगा और बातचीत के लिए कम समय होने की खबरों को खारिज किया। जब उनसे पूछा गया कि क्या युद्धविराम या नाकेबंदी अनिश्चित काल तक जारी रहेगी, तो लीविट ने जवाब देने से इनकार कर दिया और कहा कि राष्ट्रपति ही तय करेंगे कि “कब उन्हें लगे कि यह संयुक्त राज्य अमेरिका और अमेरिकी जनता के हित में है।”
उन्होंने कहा कि अमेरिकी वार्ताकार पहले ही ईरानी समकक्षों से सीधे संपर्क कर चुके हैं, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि अंततः निर्णय लेने का अधिकार किसके पास है। प्रशासन के रुख का बचाव करते हुए लीविट ने कहा कि वॉशिंगटन के पास बढ़त है। उन्होंने कहा कि इस समय सभी पत्ते राष्ट्रपति ट्रंप के हाथ में हैं… ईरान बहुत कमजोर स्थिति में है। उन्होंने कहा कि संकट के दौरान राष्ट्रपति के सार्वजनिक बयानबाजी से बातचीत पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ा है। अमेरिका और राष्ट्रपति ट्रंप अपनी मांगों और ‘रेड लाइन्स’ को लेकर बहुत स्पष्ट रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन विमानन क्षेत्र के घटनाक्रमों पर नजर रख रहा है, खासकर स्पिरिट एयरलाइंस के संभावित राहत पैकेज की खबरों के बीच, लेकिन इस पर कोई विवरण नहीं दिया।
भारत, चीन और कई देश नरक, नौकरियों पर कब्जा कर उठा रहे फायदा
24 Apr, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिका के डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने बयानों से अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। अपने ट्रुथ सोशल पर एक बेहद कड़ा और विवादित पत्र पोस्ट करते हुए ट्रंप ने भारत, चीन और कई अन्य देशों को नरक बताया है। इसके साथ ही उन्होंने अमेरिका की दशकों पुरानी जन्मसिद्ध नागरिकता की नीति पर तीखा प्रहार किया है। इस पत्र में कैलिफ़ोर्निया के टेक सेक्टर में भर्ती के तरीकों को लेकर कुछ दावे किए गए हैं। इसमें आरोप लगाया गया है कि ज़्यादातर नौकरियां भारत और चीन के लोगों के पास हैं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पत्र में कहा गया है कि दूसरों के लिए मौके बहुत कम हैं, हालांकि इस दावे के समर्थन में कोई सबूत नहीं दिया गया है। यह पत्र जन्मसिद्ध नागरिकता को लेकर चल रही बहस पर केंद्रित है। यह एक अहम मुद्दा है जो अमेरिका में राजनीतिक और कानूनी चर्चाओं में फिर से उठ खड़ा हुआ है। पत्र में दावा किया गया है कि इस नीति की वजह से अप्रवासी अपने बच्चों के लिए नागरिकता हासिल कर लेते हैं और बाद में परिवार के दूसरे सदस्यों को भी बुला लेते हैं।
पत्र में तर्क दिया गया है कि जन्मसिद्ध नागरिकता के मुद्दे पर फ़ैसला अदालतों या वकीलों को नहीं, बल्कि पूरे देश की जनता को वोट के जरिए करना चाहिए। इसमें सोशल मीडिया पर हुए एक पोल का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि ज़्यादातर लोग इस नीति पर रोक लगाने के पक्ष में हैं। साथ ही, इस मामले को देख रही कानूनी संस्थाओं पर भी अविश्वास जताया है। इस पत्र में अमेरिकन सिविल लिबर्टीज़ यूनियन की भी आलोचना की गई है। इस पर आरोप लगाया गया है कि यह ऐसी नीतियों का समर्थन करता है जिनसे अमेरिकी नागरिकों के बजाय अवैध अप्रवासियों को फ़ायदा होता है।
पत्र में इस संगठन को एक अपराधी संस्था बताया गया है। यहां तक कि यह भी सुझाव दिया गया है कि इस पर कानूनों के तहत कार्रवाई होनी चाहिए। ये गंभीर कानूनी प्रावधान हैं जिनका इस्तेमाल आम तौर पर संगठित अपराधों के ख़िलाफ किया जाता है। पत्र में आरोप लगाया गया है कि अप्रवासी स्वास्थ्य सेवा जैसी सार्वजनिक सुविधाओं का गलत फ़ायदा उठाते हैं। इसमें इमरजेंसी रूम में इलाज के लिए जाने का ज़िक्र करते हुए दावा किया गया है कि बिना दस्तावेज़ वाले लोगों के इलाज का खर्च टैक्स देने वाले लोगों को उठाना पड़ता है। इसके अलावा, कैलिफ़ोर्निया जैसे राज्यों में कल्याणकारी योजनाओं में धोखाधड़ी को लेकर भी चिंता जताई गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक पत्र में जन्मसिद्ध नागरिकता को लेकर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई का भी ज़िक्र किया गया है। इसमें अदालत में पेश किए गए कानूनी तर्कों पर असंतोष जताया गया है। पत्र में तर्क दिया कि संविधान की व्याख्या अब आज की असलियत से पूरी तरह कट चुकी है। यह बात आज के जमाने में यात्रा और अप्रवासन के बदलते तरीकों के संदर्भ में खास तौर पर कही गई है।
स्कूलों को धमकी भरे मेल से दहशत, सुरक्षा एजेंसियां सतर्क
23 Apr, 2026 12:11 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अंबाला। अंबाला के सैन्य क्षेत्र और शहर के कई प्रतिष्ठित स्कूलों को ईमेल के माध्यम से बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद हड़कंप मच गया है। वीरवार सुबह मिली इस सूचना के बाद सुरक्षा एजेंसियां और पुलिस बल पूरी तरह मुस्तैद हैं।
सैन्य क्षेत्र के स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी: अलर्ट पर पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां
अंबाला छावनी (कैंट) स्थित आर्मी पब्लिक स्कूल की जूनियर व सीनियर शाखाओं सहित केंद्रीय विद्यालय (नंबर 1, 2, 3 और 4) और एक अन्य बड़े निजी स्कूल को निशाना बनाने की धमकी दी गई है। यह चेतावनी ईमेल के माध्यम से भेजी गई, जिसके बाद प्रशासन में खलबली मच गई।
स्थिति नियंत्रण में, जारी है चेकिंग अभियान
धमकी मिलने के बावजूद स्कूलों में अफरातफरी का माहौल नहीं बनने दिया गया:
छुट्टी नहीं: वर्तमान में किसी भी स्कूल में छुट्टी नहीं की गई है और शैक्षणिक गतिविधियां जारी हैं।
सघन जांच: पुलिस प्रशासन और बम निरोधक दस्ते ने सभी संबंधित स्कूलों के परिसर की बारीकी से तलाशी ली है। पुलिस का दावा है कि स्थिति पूरी तरह सामान्य है और घबराने की आवश्यकता नहीं है।
मेल की सामग्री: अपुष्ट सूत्रों के अनुसार, ईमेल में 'खालिस्तान जिंदाबाद' के नारे और विस्फोट करने की बात कही गई है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर अभी इस मेल के विवरण की पुष्टि होना बाकी है।
छावनी में अभेद्य सुरक्षा: सेना ने संभाला मोर्चा
चूंकि मामला सैन्य क्षेत्र (कैंट) से जुड़ा है, इसलिए सुरक्षा व्यवस्था को बेहद कड़ा कर दिया गया है:
सैन्य पुलिस की तैनाती: स्थानीय पुलिस के साथ-साथ मिलिट्री पुलिस और सेना के जवानों ने भी स्कूलों के बाहर मोर्चा संभाल लिया है।
सख्त निगरानी: स्कूल परिसर के आसपास किसी भी बाहरी व्यक्ति या संदिग्ध वाहन को रुकने की इजाजत नहीं दी जा रही है। चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा बलों का पहरा है।
जांच के घेरे में 'साइबर साजिश'
खुफिया एजेंसियां और साइबर सेल ईमेल के स्रोत का पता लगाने में जुटी हैं:
ट्रेसिंग: तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा ईमेल के सर्वर और लोकेशन को ट्रेस किया जा रहा है ताकि भेजने वाले की पहचान हो सके।
पुराना कनेक्शन: गौरतलब है कि इस साल 26 जनवरी से पहले भी अंबाला के 15 स्कूलों को इसी तरह की फर्जी धमकियां मिली थीं। पुलिस अब इस पहलू पर भी काम कर रही है कि क्या इन दोनों वारदातों के पीछे एक ही शरारती तत्व या गिरोह सक्रिय है।
चीन के ह्यूमनॉइड रोबोट की रफ्तार से पूरी दुनिया हैरत में
23 Apr, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग। पडोसी देश चीन ने रोबोटिक्स के क्षेत्र में अपनी गहरी छाप छोड़ी है, और हालिया प्रगति ने पूरी दुनिया को हैरत में डाल दिया है। चीन में हाल ही में रोबोट्स का मैराथन आयोजित किया गया था, जिसमें देश के कई ह्यूमनॉइड मशीनों ने भाग लिया। इस मैराथन में चीनी रोबोटिक्स कंपनी यूनिट्री रोबोटिक्स ने अपने नवीनतम ‘एच1’ ह्यूमनॉइड रोबोट की रफ्तार से पूरी दुनिया को हैरत में डाल दिया है। एक मैराथन के दौरान जारी किए गए वीडियो में यह रोबोट ट्रैक पर 10.1 मीटर प्रति सेकंड, यानी लगभग 36 किलोमीटर प्रति घंटा की अविश्वसनीय गति से दौड़ता दिखा है। यह रफ्तार विश्व के सबसे तेज धावक, जमैका के दिग्गज एथलीट उसैन बोल्ट द्वारा 2009 में बनाए गए 100 मीटर विश्व रिकॉर्ड की औसत गति के बेहद करीब है। उस ऐतिहासिक दौड़ में, उसैन बोल्ट ने 9.58 सेकंड में 100 मीटर की दूरी तय की थी, जिसकी औसत गति लगभग 10.44 मीटर प्रति सेकंड थी। यूनिट्री का ‘एच1’
अब इस जादुई आंकड़े के बेहद करीब पहुंच गया है। कंपनी ने वीडियो जारी करते हुए गर्व से लिखा, ’10 मीटर/सेकंड!! यूनिट्री ने फिर तोड़ा वर्ल्ड रिकॉर्ड। एक आम इंसान के शरीर वाले आकार के साथ वर्ल्ड चैंपियन की स्पीड।’ ‘एच1’ रोबोट को विशेष रूप से इंसानी चाल और गतिशीलता की नकल करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसका कुल वजन 62 किलोग्राम है और इसके पैरों की लंबाई लगभग 0.8 मीटर है। इसकी अद्भुत गति क्षमताओं के पीछे इन-हाउस विकसित हाई-टॉर्क जॉइंट मोटर्स, एक अनुकूलित गियर सिस्टम और लिदारल तथा डेप्थ कैमरा जैसी अत्याधुनिक सेंसिंग तकनीक का संयोजन है।
हाई-स्पीड टेस्ट के दौरान रोबोट के प्रदर्शन को अधिकतम करने के लिए कुछ गैर-आवश्यक हिस्सों, जैसे कि सिर, को हटा दिया गया था। यूनिट्री रोबोटिक्स के सीईओ वांग जिंगजिंग ने तो यहां तक दावा किया है कि 2026 के मध्य तक उनके ह्यूमनॉइड रोबोट 100 मीटर की रेस में 10 सेकंड की बाधा को भी तोड़ देंगे। इस बीच, चीन की ही एक अन्य कंपनी मिररमी ने फरवरी 2026 में अपना प्रतिद्वंद्वी रोबोट ‘बोल्ट’ पेश किया है, जो 175 सेंटीमीटर लंबा और 75 किलो वजनी है और यह भी 10 मीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से दौड़ने में सक्षम है। अब तकनीक और रोबोटिक्स के शौकीनों की नजरें 19 अप्रैल को बीजिंग में होने वाली ‘ह्यूमनॉइड रोबोट हाफ मैराथन’ पर टिकी हैं। इस महामुकाबले में 70 से अधिक टीमें हिस्सा लेने के लिए लगातार ट्रायल कर रही हैं।
NIT कुरुक्षेत्र में लगातार घटनाओं पर मानवाधिकार आयोग की कार्रवाई, प्रशासन से जवाब तलब
23 Apr, 2026 11:49 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हरियाणा। मानवाधिकार आयोग ने कुरुक्षेत्र स्थित राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) में छात्रों द्वारा आत्महत्या करने और जान देने की कोशिश के बढ़ते मामलों पर कड़ा संज्ञान लिया है। आयोग ने इन घटनाओं को बेहद गंभीर मानते हुए संस्थान के प्रशासन, जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक से जवाब तलब किया है।
NIT कुरुक्षेत्र में छात्रों की मौतों पर मानवाधिकार आयोग सख्त: रिपोर्ट तलब
हरियाणा मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस ललित बत्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने संस्थान में हो रही लगातार दुखद घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त की है। आयोग का मानना है कि छात्रों की सुरक्षा और उनके मानसिक स्वास्थ्य को लेकर संस्थान की मौजूदा व्यवस्था में बड़ी खामियां हैं।
हालिया घटनाओं का सिलसिला
संस्थान में पिछले कुछ महीनों के भीतर कई ऐसी घटनाएं हुई हैं जिन्होंने सबको झकझोर कर रख दिया है:
18 अप्रैल: प्रथम वर्ष के एक छात्र ने हॉस्टल की पांचवीं मंजिल से छलांग लगाकर जान देने की कोशिश की।
16 अप्रैल: द्वितीय वर्ष के एक छात्र का शव उसके कमरे में मिला।
फरवरी-मार्च: इन दो महीनों के दौरान भी दो छात्रों की मौत के मामले सामने आए थे।
संस्थान की कार्रवाई पर असंतोष
आयोग ने स्पष्ट किया कि प्रशासन द्वारा अब तक उठाए गए कदम, जैसे कि दो प्रोफेसरों का तबादला करना, नाकाफी हैं। आयोग के अनुसार:
मानसिक स्वास्थ्य की अनदेखी: यह स्थिति दर्शाती है कि कैंपस में काउंसलिंग और संकट प्रबंधन की उचित व्यवस्था नहीं है।
प्रशासनिक जिम्मेदारी: शैक्षणिक संस्थानों का दायित्व केवल पढ़ाई कराना ही नहीं, बल्कि छात्रों के जीवन की रक्षा करना और उन्हें सुरक्षित माहौल देना भी है।
इन अधिकारियों से मांगा गया जवाब
आयोग ने मामले की तह तक जाने के लिए विस्तृत रिपोर्ट मांगी है:
NIT निदेशक: उन्हें आत्महत्या की परिस्थितियों, उपलब्ध कराई जा रही काउंसलिंग सेवाओं, सुरक्षा प्रबंधों और अचानक हॉस्टल खाली कराने के फैसलों पर स्पष्टीकरण देना होगा।
DC और SP कुरुक्षेत्र: जिला प्रशासन और पुलिस से अब तक की गई जांच और सुरक्षा के लिए उठाए गए प्रशासनिक कदमों की जानकारी मांगी गई है।
सुनवाई की तारीख
असिस्टेंट रजिस्ट्रार डॉ. पुनीत अरोड़ा के मुताबिक, आयोग इस मामले पर 19 मई 2026 को अगली सुनवाई करेगा। सभी संबंधित अधिकारियों को इस तारीख से एक सप्ताह पहले अपनी विस्तृत रिपोर्ट आयोग के कार्यालय में जमा करनी होगी।
सांपला नगरपालिका चुनाव में BJP का दांव, प्रवीण कोच को चेयरमैन उम्मीदवार घोषित
23 Apr, 2026 11:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रोहतक। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के गढ़ माने जाने वाले गढ़ी सांपला-किलोई निर्वाचन क्षेत्र में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। सांपला नगर पालिका चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपनी चुनावी बिसात बिछाते हुए चेयरमैन और वार्ड प्रत्याशियों की सूची जारी कर दी है।
सांपला नगर पालिका चुनाव: भाजपा ने प्रवीण कोच पर खेला दांव
भाजपा ने चेयरमैन पद के लिए प्रवीण कोच को अपना उम्मीदवार बनाया है। गौर करने वाली बात यह है कि प्रवीण कोच हाल ही में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए हैं। उनके पास नगर पालिका का पुराना अनुभव है; उन्होंने 2008 में पार्षद का चुनाव जीता था और पार्षदों के समर्थन से चेयरमैन की कुर्सी भी संभाली थी।
नामांकन की तैयारी
प्रवीण कोच शुक्रवार को अपना नामांकन पत्र दाखिल करेंगे। इस दौरान भाजपा के कई दिग्गज नेताओं के शामिल होने की संभावना है, जो इसे शक्ति प्रदर्शन के रूप में देख रहे हैं। हालांकि, पार्टी के भीतर उन कार्यकर्ताओं को मनाना एक चुनौती होगी जो लंबे समय से चेयरमैन की टिकट की आस लगाए बैठे थे।
वार्ड प्रत्याशियों का गणित
भाजपा ने कुल 16 वार्डों में से 15 उम्मीदवारों के नामों का एलान कर दिया है। केवल वार्ड नंबर 12 के प्रत्याशी की घोषणा अभी शेष है।
महिला प्रतिनिधित्व: पार्टी ने सामाजिक संतुलन साधने के लिए छह महिलाओं को चुनावी मैदान में उतारा है।
उम्मीदवारों की सूची:
वार्ड,प्रत्याशी का नाम
1,रमेश दलाल
2,हेमंत
3,महेश बंसल
4,कमल खटक
5,संजय कुमार
6,विकास
7,अंजु धमीजा
8,अजय
9,अजीत ओहल्याण
10,मीनाक्षी
11,रविका
13,सोनिया
14,आशा
15,अंजू
16,अश्विन
चीन से ईरान को भेजा गिफ्ट, हमने पकड़ा, इसमें कुछ चीजें जो बहुत अच्छी नहीं थीं
23 Apr, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार आरोप लगाया है कि चीन ईरान को युद्ध में हथियार और दूसरी मदद पहुंचा रहा है। ट्रंप ने बुधवार को एक बयान में कहा कि चीन से ईरान के लिए एक गिफ्ट भेजा था, लेकिन इसे अमेरिका ने पकड़ लिया। ट्रंप ने यह भी कहा कि ये अमेरिका के लिए धैर्य की परीक्षा है। बता दें अमेरिका ने चीन पर पहले भी इस तरह के आरोप लगाए हैं। हालांकि चीन ने इसे बेबुनियाद बताते हुए आरोपों को खारिज किया है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक इंटरव्यू में कहा था कि अमेरिका को चीन से गिफ्ट ले जाने वाली नाव मिली है। ट्रंप ने कहा कि हमने कल एक जहाज पकड़ा जिस पर कुछ चीजें थीं, जो बहुत अच्छी नहीं थीं, शायद चीन से कोई गिफ्ट, मुझे नहीं पता। मुझे लगा है कि प्रेसिडेंट शी और हमारे बीच सहमति है, लेकिन ठीक है। जंग ऐसे ही चलती है, है ना?”
बता दें इससे पहले अमेरिका ने ईरान के झंडे वाले कंटेनर जहाज तूस्का को जब्त किया है, जिससे तनाव बढ़ गया है। अमेरिका ने कहा है कि शिप से कई आपत्तिजनक चीजें बरामद हुई हैं। मंगलवार को रिपब्लिकन नेता निक्की हेली ने एक बयान में कहा था कि इस शिप से चीन ईरान को मिसाइल केमिकल की डिलीवरी कर रहा था। वहीं अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक शिप पर कुछ धातु, पाइप और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट शामिल हैं, जिनका इस्तेमाल मिसाइल प्रोग्राम में भी किया जा सकता है। एक अधिकारी ने बताया कि यह जहाज पहले भी ऐसे सामान ले जा चुका है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने जब्त किए शिप को लेकर किए जा रहे दावों को भी झूठा बताया। उन्होंने कहा कि जहाज एक विदेशी कंटेनर शिप है और चीन का इससे कोई संबंध नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि चीन सैन्य सामान के एक्सपोर्ट को बहुत सावधानी और जिम्मेदारी के साथ करता है।
वहीं अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि अगर चीन ईरान को हथियार या युद्ध से जुड़ा सामान देता है, तो यह अमेरिका की रेड लाइन को पार करने जैसा होगा। बता दें ट्रंप पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि जो देश ईरान को हथियार देगा, उस पर 50 फीसदी तक टैरिफ लगाया जा सकता है और इसमें कोई छूट नहीं होगी। ऐसे में नए आरोपों के बाद दोनों देशों के बीच नई जुबानी जंग छिड़ सकती है।
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