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अरबपति टेस्ला का रोबोट बेच रहा है, पॉपकॉर्न
22 Dec, 2025 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बर्लिन। अमेरिकी अरबपति ओर टेस्ला कंपनी के सीईओ एलन मस्क की कंपनी ने एक ऐसा रोबोट तैयार किया है। जो अनोखे काम कर रहा है। जर्मनी की राजधानी बर्लिन में क्रिसमस की छुट्टियों पर वह लोगों को पापकार्न बेचता हुआ नजर आ रहा है। इस रोबोट से पॉपकॉर्न खरीदने के लिए लंबी-लंबी लाइन लग जाती है। यह काम रोबोट पूरी दक्षता के साथ कर रहा है। जिसके कारण इसकी चर्चा हो रही है।
बांग्लादेश ज्वालामुखी पर बैठा: ढाका की सड़कों पर सन्नाटा, हिंदू समुदाय घरों में सिमटा, जगह-जगह पुलिस तैनात
22 Dec, 2025 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका। उस्मान हादी की मौत के बाद बांग्लादेश की राजधानी ढाका ऊपर से भले ही शांत दिखाई दे रही हो, लेकिन यह शांति भय, तनाव और अनिश्चितता से भरी हुई है। सड़कों पर सन्नाटा है, विश्वविद्यालय परिसरों से लेकर मीडिया संस्थानों तक दहशत का माहौल बना हुआ है। जानकार कहते हैं कि अल्पसंख्यक समुदाय, विशेष रूप से हिंदू समुदाय, खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है, जबकि शहर के संवेदनशील इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।
दरअसल, 18 दिसंबर की रात सिंगापुर में इलाज के दौरान उस्मान हादी की मौत की खबर सामने आते ही हालात तेजी से बिगड़ गए। जैसे ही उनके निधन की सूचना फैली, ढाका की सड़कों पर उग्र भीड़ उतर आई। शुरुआत में विरोध प्रदर्शन के रूप में सामने आई भीड़ जल्द ही हिंसक हो गई। मीडिया संस्थानों, सांस्कृतिक केंद्रों और अल्पसंख्यक समुदाय को निशाना बनाकर तोड़फोड़ और हमले किए गए। हादी के शव को सुपुर्द-ए-खाक करने के बाद हालात पर कुछ हद तक काबू पाया गया है। कई इलाकों में सड़कें शांत नजर आ रही हैं और बाजारों में सीमित गतिविधियां दिख रही हैं।
अधिकांश अखबारों में हादी की अंत्येष्टि से जुड़ी खबरें प्रमुखता से प्रकाशित की गईं हैं, लेकिन शहर के अलग-अलग हिस्सों में अब भी विरोध प्रदर्शन और आक्रोश की घटनाएं सामने आ रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह शांति अस्थायी है और किसी भी वक्त हालात फिर से बिगड़ सकते हैं। हिंसा के दौरान जिस तरह स्वतंत्र मीडिया को निशाना बनाया गया, उसने बांग्लादेश के लोकतांत्रिक ढांचे पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अल्पसंख्यकों में चिंता का माहौल
अल्पसंख्यक इलाकों में स्थिति और भी चिंताजनक है। हिंदू समुदाय के कई परिवार घरों में ही रहने को मजबूर हैं। मंदिरों और संवेदनशील इलाकों के बाहर पुलिस का पहरा बढ़ा दिया गया है। प्रशासन का दावा है कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है, लेकिन आम नागरिकों के मन से डर अभी दूर नहीं हुआ है। ऐसे में कहा जा रहा है कि भले ही बांग्लादेश की सड़कों में सन्नाटा पसरा हुआ है, लेकिन युवाओं के गुस्से से लबरेज ज्वालामुखी कब सक्रिय हो जाए कहा नहीं जा सकता है।
बांग्लादेश में स्थिति चिंताजनक, इमाम संगठन ने पीएम मोदी से की हस्तक्षेप की मांग, हिंदू युवक की हत्या मामले में 10 गिरफ्तारी
21 Dec, 2025 05:17 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली/ढाका : बांग्लादेश में अफरा-तफरी का माहौल जारी है. अल्पसंख्यक हिंदुओं को लगातार निशाना बनाया जा रहा है. बांग्लादेश के सिलहट में प्रमुख युवा नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद बढ़े तनाव के मद्देनजर भारतीय सहायक उच्चायोग कार्यालय और वीजा आवेदन केंद्र पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है.
ढाका ट्रिब्यून अखबार के अनुसार, सिलहट मेट्रोपॉलिटन पुलिस के अतिरिक्त उपायुक्त (मीडिया) सैफुल इस्लाम ने कहा कि सुरक्षा के कड़े उपाय इसलिए किए गए हैं ताकि कोई तीसरा पक्ष स्थिति का फायदा न उठा सके. बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने कहा कि एक हिंदू व्यक्ति की पीट-पीटकर हत्या किए जाने के मामले में 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. मैमेनसिंह शहर में गुरुवार को कथित ईशनिंदा को लेकर भीड़ ने दीपू चंद्र दास (25) की पीटकर हत्या कर दी थी और शव को आग लगा दी थी.
जिन लोगों को मामले में आरोपी बनाया गया है, उसमें मोहम्मद लिमोन सरकार (19), मोहम्मद तारेक हुसैन (19), मोहम्मद मानिक मिया (20), इरशाद अली (39), निजुम उद्दीन (20), आलमगीर हुसैन (38) और मोहम्मद मिराज हुसैन अकोन (46) शामिल हैं. इसके अलावा मोहम्मद अजमोल हसन सगीर (26), मोहम्मद शाहिन मिया (19) और मोहम्मद नजमुल को भी पुलिस ने हिरासत में रखा है. इन सभी आरोपियों से पूछताछ जारी है.
बांग्लादेश पुलिस ने बताया कि मजदूरी करने वाले दास को पहले भीड़ ने ईशनिंदा के आरोपों में फैक्टरी के बाहर पीटा और फिर पेड़ से टांग दिया. उन्होंने कहा कि भीड़ ने मृतक के शव को ढाका-मैमेनसिंह राजमार्ग के किनारे छोड़ दिया और बाद में उसमें आग लगा दी.
बांग्लादेश में हर रोज बिगड़ते हालात को लेकर बांग्लादेश स्थित हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद ने चिंता जताई है. संगठन ने सरकार से अपील की है कि वे जल्द से जल्द सख्त कदम उठाए और अल्पसंख्यकों को भरोसे में ले. उन्होंने इस मामले में दोषियों के खिलाफ अविलंब कार्रवाई की भी मांग की है. संगठन ने कहा कि इस मामले के जरिए दोषियों ने सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश की है.
अमेरिका में भारत की राजदूत रह चुकीं निरुपमा राव ने सोशल मीडिए एक्स पर अपने पोस्ट में पश्चिमी देशों को जिम्मेदार ठहराया है. उन्होंने लिखा कि शेख हसीना के विदेशी विरोधियों ने उन्हें संकीर्ण दृष्टिकोण से देखा. इन देशों ने बांग्लादेश की परिस्थिति को झुठलाकर पश्चिमी लोकतांत्रिक मानकों पर उनके शासन को उतारा. उनके अनुसार लंबे समय तक सत्ता में बने रहना, केंद्रीकृत शक्ति, मानवाधिकार रिपोर्टें ये सब हसीना के खिलाफ था. राव ने अपने पोस्ट में लिखा कि बांग्लादेश का आकलन ऐसे किया गया मानो वह डेनमार्क हो, जहां मतदान में समस्या हो, न कि एक नाजुक, घनी आबादी वाला राज्य जिसका हिंसक इस्लामी इतिहास और आघातग्रस्त राजनीतिक संस्कृति हो. उन्होंने कहा कि शेख हसीना चाहे जैसी भी हों, उन्होंने जमात और अन्य भारत विरोधी ताकतों को काबू में रखा था.
बांग्लादेश में दीपू चंद्र दास की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या किए जाने पर, अखिल भारतीय इमाम संगठन के मुख्य इमाम डॉ. इमाम उमर अहमद इल्यासी ने कहा, "मानवता कलंकित हुई है. यह मानवता की हत्या है. जिस क्रूरता से बच्चे की हत्या की गई और उसकी मृत्यु के बाद उसके साथ जो किया गया, उसे पेड़ से लटकाना, सरासर गलत है. जिन बांग्लादेशियों की भारत ने हमेशा मदद की है, ये कृतघ्न बांग्लादेशी भूल गए हैं कि भारत हर तरह से उनके साथ खड़ा रहा है. वे मानवाधिकार संगठन कहां हैं? वे आज आवाज क्यों नहीं उठा रहे हैं? यह किस तरह की इस्लामी शिक्षा है कि वे इस तरह की हत्याएं कर रहे हैं? ये इस्लाम के अनुयायी नहीं हो सकते. प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को हस्तक्षेप करना चाहिए."
ढाका ट्रिब्यून के संपादक रियाज अहमद ने उस्मान हादी की मौत पर बांग्लादेश में भड़की व्यापक हिंसा पर टिप्पणी करते हुए कहा, "इस घटना को बहाना बनाकर, शोक और संवेदना व्यक्त करने वाली विशाल भीड़ में से कुछ असंबद्ध तत्वों ने अत्यधिक हिंसा का सहारा लिया. यदि सरकार ने पहले से ही निवारक उपाय किए होते तो स्थिति को बेहतर ढंग से संभाला जा सकता था. हमने एक राष्ट्र के रूप में एक बहुत बुरा उदाहरण पेश किया है. राज्य को इसे बर्दाश्त नहीं करना चाहिए."
बांग्लादेश की स्थिति पर आरजेडी सांसद मनोज झा कहते हैं, "बांग्लादेश में घटित घटनाएँ चिंताजनक हैं। वहां तख्तापलट होने के बाद भी हमने कहा था कि हमें घटनाक्रम पर कड़ी नजर रखनी चाहिए. मैं लगभग स्तब्ध हूं. जिस तरह से हालात सामने आए हैं, दक्षिण एशिया के इस क्षेत्र पर बहुत सावधानीपूर्वक और गंभीरता से नज़र रखने की ज़रूरत है, और मैं अपनी सरकार से कुछ सक्रिय कदम उठाने की अपेक्षा करता हूं और आग्रह करता हूं."
गाजा में शांति को लेकर खुश हुए अमेरिकी विदेश मंत्री बोले- हम आपके आभारी…
21 Dec, 2025 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका पाकिस्तान की उस पेशकश का बहुत आभारी है, जिसमें इस्लामाबाद ने गाजा में प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल (आईएसएफ) में शामिल होने या कम से कम इस पर विचार करने की इच्छा जताई है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि अभी तक किसी भी देश से औपचारिक सहमति नहीं मांगी गई है और न ही प्राप्त हुई है। यह बयान साल के अंत में आयोजित एक लंबी प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आया, जहां रुबियो से गाजा में शांति स्थापना के लिए पाकिस्तान की भागीदारी पर सवाल पूछा गया।
रुबियो ने कहा कि पाकिस्तान ने हिस्सा बनने की पेशकश की है या कम से कम विचार करने की पेशकश की है, जिसके लिए अमेरिका आभारी है। उन्होंने विश्वास जताया कि कई ऐसे देश हैं जो संघर्ष के सभी पक्षों के लिए स्वीकार्य हैं और इस बल में शामिल होने को तैयार हैं। हालांकि, बल के जनादेश, फंडिंग और नियमों को स्पष्ट करने की जरूरत है, ताकि देशों से ठोस प्रतिबद्धता मांगी जा सके। रुबियो के अनुसार, पहले बोर्ड ऑफ पीस और एक फिलिस्तीनी तकनीकी प्रशासनिक ढांचा स्थापित किया जाएगा, उसके बाद ही आईएसएफ का स्वरूप अंतिम रूप लेगा। यह टिप्पणियां ट्रंप प्रशासन की गाजा शांति योजना को आगे बढ़ाने की कोशिशों के बीच आई हैं, जो इजरायल-हमास युद्ध समाप्त करने पर केंद्रित है। योजना में मुस्लिम बहुल देशों से सैनिकों की भागीदारी पर जोर है। पाकिस्तान ने अभी तक सैनिक भेजने का अंतिम फैसला नहीं लिया है, लेकिन विचार कर रहा है। पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक डार ने पिछले महीने कहा था कि शांति स्थापना में योगदान संभव है, लेकिन हमास को निरस्त्र करना पाकिस्तान की जिम्मेदारी नहीं है। कई देश इस मिशन में शामिल होने को लेकर सतर्क हैं, क्योंकि निरस्त्रीकरण का जनादेश उन्हें सीधे संघर्ष में खींच सकता है और घरेलू स्तर पर विरोध का सामना करना पड़ सकता है।
ट्रंप की 20-सूत्री गाजा योजना अक्टूबर में युद्धविराम के बाद आगे बढ़ रही है, लेकिन प्रगति धीमी है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने नवंबर में योजना को समर्थन देते हुए आईएसएफ गठन की अनुमति दी। अमेरिका ने 70 से अधिक देशों से संपर्क किया है, जिनमें से कुछ ने सैनिक, लॉजिस्टिक्स या उपकरण सहायता की इच्छा जताई है। पाकिस्तान हाल ही में कतर में हुई बैठक में शामिल हुआ, जहां बल की कमांड संरचना पर चर्चा हुई। पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर की वाशिंगटन यात्रा की संभावना है, जहां यह मुद्दा प्रमुख हो सकता है। कुल मिलाकर, आईएसएफ का विचार शुरुआती में है। अमेरिका को कुछ देशों से सकारात्मक संकेत मिले हैं, लेकिन राजनीतिक सहमति, सुरक्षा जोखिम और क्षेत्रीय संवेदनशीलताओं को सुलझाना बाकी है। यह योजना गाजा में स्थायी शांति और पुनर्निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकती है, यदि अंतरराष्ट्रीय सहयोग मजबूत होता है।
पाकिस्तानी भिखारियों से कई देश परेशान, 50 हजार को दिखाया बाहर का रास्ता
21 Dec, 2025 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। पाकिस्तान ने पूरी दुनिया की नाक में दम कर दिया है। कभी आतंकवाद फैलाता है तो कभी भिखारियों की फौज दूसरे देशों में सप्लाई कर देता है। इससे तंग आकर कई देशों ने उन्हे अपने देश से बाहर कर दिया है। इसकी जानकारी खुद पाकिस्तान ने दी है। पाकिस्तान की नेशनल असेंबली की ओवरसीज पाकिस्तानियों और मानवाधिकारों पर स्थायी समिति की बैठक में एफआईए के महानिदेशक रिफ्फत मुख्तार राजा ने जानकारी दी। उन्होंने समिति को बताया कि इस वर्ष 51,000 पाकिस्तानियों को प्रवेश से वंचित किया गया। उन्होंने बताया कि सऊदी अरब में निर्वासन की संख्या सबसे अधिक रही, जहां भीख मांगने के आरोप में 24,000 लोगों को वापस भेजा गया। यूएई ने भी इसी आधार पर 6,000 पाकिस्तानियों को निर्वासित किया, जबकि अजरबैजान से करीब 2,500 भिखारियों को बाहर किया गया।
एफआईए डीजी ने कहा कि उमरा के बहाने यूरोप जाने की कोशिश कर रहे कई लोगों को तब रोका गया, जब उनके दस्तावेजों से यूरोपीय देशों में प्रवेश का इरादा सामने आया। उन्होंने कहा, ‘सबूतों के आधार पर ऐसे यात्रियों को प्रवेश से वंचित किया गया। समिति को यह भी बताया गया कि इस वर्ष 24,000 पाकिस्तानी कंबोडिया गए, जिनमें से 12,000 अब तक वापस नहीं लौटे। वहीं, 4,000 लोग म्यांमार पर्यटक वीजा पर गए, जिनमें से लगभग 2,500 वापस नहीं आए।एफआईए प्रमुख ने कहा कि कड़े नियंत्रण उपायों के चलते पाकिस्तान के पासपोर्ट रैंकिंग में सुधार हुआ है और यह 118वें स्थान से 92वें स्थान पर आ गया है। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान पहले अवैध प्रवासन के मामलों में शीर्ष पांच देशों में शामिल था, लेकिन नीतियों में बदलाव के कारण स्थिति में सुधार आया है। इससे पहले, जनवरी में सऊदी अरब और अमेरिका सहित कई देशों से 200 से अधिक पाकिस्तानियों को एक सप्ताह के भीतर निर्वासित किया गया था।
भ्रष्टाचार मामले में पूर्व पीएम इमरान खान और पत्नी बुशरा को 17-17 साल की सजा
21 Dec, 2025 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की कानूनी परेशानियां पिछले डेढ़ साल से लगातार बढ़ती जा रही हैं। उन्हें पहली बार 9 मई 2023 को भ्रष्टाचार के आरोपों में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद अगस्त 2023 में तोशाखाना मामले में उनकी दूसरी गिरफ्तारी हुई। तब से वे कई मामलों में न्यायिक हिरासत में हैं और अलग-अलग अदालतों में सुनवाई चल रही है। ताजा फैसला उनके खिलाफ चल रहे मामलों की कड़ी में एक अहम मोड़ माना जा रहा है। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और क्रिकेट विश्व कप विजेता कप्तान इमरान खान को भ्रष्टाचार के एक गंभीर मामले में अदालत ने 17 साल की सजा सुनाई है। इसी मामले में उनकी पत्नी बुशरा बीबी को भी समान सजा दी गई है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब उनके जेल में कथित अमानवीय व्यवहार को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं और पाकिस्तान सरकार पर दबाव बढ़ रहा है।
सजा के समय पाकिस्तान में उनके जेल में रखे जाने के तरीके पर भी विवाद है। समर्थकों और पार्टी नेताओं का आरोप है कि इमरान खान को लंबे समय से एकांत कारावास में रखा गया और उन्हें बुनियादी सुविधाएं भी नहीं दी जा रही हैं। इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने चिंता जताई है। हाल ही में संयुक्त राष्ट्र ने पाकिस्तान सरकार से अपील की थी कि उन्हें एकांत कारावास से बाहर निकाला जाए। इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) ने अदालत के फैसले को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि मौजूदा सत्ता प्रतिष्ठान न्यायिक प्रक्रिया का इस्तेमाल करके इमरान खान को राजनीति से बाहर करने की कोशिश कर रहा है। उनका यह भी दावा है कि यह फैसला निष्पक्ष नहीं है और इसे उच्च अदालतों में चुनौती दी जाएगी। वहीं, पाकिस्तान सरकार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। सरकार का कहना है कि देश में कानून अपना काम कर रहा है और अदालतों के फैसलों में किसी तरह का राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं है। भ्रष्टाचार के मामलों में किसी के साथ कोई रियायत नहीं की जाती, चाहे वह कितना ही बड़ा नेता क्यों न हो। इस फैसले के बाद पाकिस्तान की राजनीति में एक बार फिर उथल-पुथल तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। इमरान खान के समर्थकों में नाराजगी बढ़ने की संभावना है, वहीं अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी पाकिस्तान की न्यायिक और मानवाधिकार स्थिति पर बहस तेज हो सकती है।
उस्मान हादी को सुपुर्द-ए-खाक कर सरकार को दिया 24 घंटे का अल्टीमेटम
21 Dec, 2025 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका। बांग्लादेश में हिंसा किसी कीमत रुकने का नाम नहीं ले रही है, हद यह है कि ढाका यूनिवर्सिटी के परिसर में शनिवार को छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी को सुपुर्द-ए-खाक करने साथ ही मौजूदा सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम दे दिया गया है। हादी के अंतिम संस्कार के दौरान यूनिवर्सिटी के आस-पास भारी संख्या में लोगों का हुजूम मौजूद रहा। खास बात यह रही कि हादी के जनाजे में अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस भी हादी के जनाजे में पहुंचे और उनका गुणगान भी किया।
हादी को अंतिम विदाई देते हुए मोहम्मद यूनुस ने कहा, कि आज यहां हजारों की संख्या में लोग जुटे हैं। सिर्फ यहीं नहीं, बल्कि पूरे देश और विदेशों में भी बसे प्रवासी समुदाय के बीच भी लोग हादी के बारे में सुनने को बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने गुणगान करते हुए कहा, हरदिल अजीज उस्मान हादी, हम यहां आपको अलविदा कहने नहीं आए, आप तो हमारे दिलों में बसते हैं। बांग्लादेश का जब तक अस्तित्व रहेगा, आप इस राष्ट्र का हिस्सा बने रहेंगे। यूनुस ने आगे कहा, उस्मान हादी ने हमें सिखाया कि विनम्रता के साथ लोगों तक कैसे पहुंचा जाए। बगैर किसी को ठेस पहुंचाए अपनी बात और अपने विचार कैसे रखे जाएं और गरिमा के साथ चुनावी अभियान कैसे चलाया जाए। हम इस सीख को आत्मसात करते हुए अमल में लाने का संकल्प लेते हैं। उन्होंने कहा कि हम तो अपने देश की राजनीति और संस्कृति को उस मुकाम तक ले जाना चाहते हैं, जहां हादी का उदाहरण हमेशा जीवंत बना रहे। अंत में उन्होंने कहा, हम किसी के सामने झुकेंगे नहीं, दुनिया के सामने सिर ऊंचा रखेंगे। यह जनता से किया गया आपका वादा, हम हर हाल में पूरा करेंगे।
अब्दुल्लाह अल जबेर ने दिया अल्टीमेटम
उस्मान हादी के सहयोगी कहे जाने वाले इंकलाब मंच से जुड़े अब्दुल्लाह अल जबेर ने यूनुस की अंतरिम सरकार को अल्टीमेटम दे दिया है। इसके मुताबिक सरकार अगले 24 घंटे में सार्वजनिक रूप से यह खुलासा करना होगा कि हादी के असली हत्यारे कौन लोग हैं और उनकी गिरफ्तारी के लिए क्या-क्या कदम उठाए गए हैं। इस अल्टीमेटम के बाद समझा जा रहा है कि बांग्लादेश में सरकार की मुसीबतें और बढ़ने वाली हैं, क्योंकि कहीं न कहीं हत्या को लेकर सरकार पर भी आरोप लगे हैं।
विश्व बैंक से पाकिस्तान को 70 करोड़ डॉलर की सहायता, आईएमएफ ने भी लोन को दी मंजूरी
21 Dec, 2025 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका।पाकिस्तान को गंभीर आर्थिक संकट के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी राहत मिली है। विश्व बैंक ने पाकिस्तान की व्यापक आर्थिक स्थिरता और सार्वजनिक सेवाओं को मजबूत करने के उद्देश्य से 70 करोड़ डॉलर (करीब 5,800 करोड़ रुपये) की वित्तीय सहायता को मंजूरी दे दी है। यह सहायता ऐसे समय में दी जा रही है, जब पाकिस्तान भारी कर्ज, बढ़ती महंगाई, विदेशी मुद्रा भंडार की कमी और आर्थिक अस्थिरता से जूझ रहा है। इसी क्रम में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने भी पाकिस्तान को लोन देने की मंजूरी दे दी है, जिससे देश की डगमगाती अर्थव्यवस्था को कुछ सहारा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
विश्व बैंक की यह वित्तीय मदद समावेशी विकास के लिए सार्वजनिक संसाधन–बहु-चरणीय कार्यक्रमबद्ध दृष्टिकोण के तहत दी जाएगी। इस कार्यक्रम के अंतर्गत पाकिस्तान को कुल 1.35 अरब डॉलर तक की फंडिंग मिल सकती है। फिलहाल मंजूर की गई 70 करोड़ डॉलर की राशि इसी दीर्घकालिक कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य पाकिस्तान में आर्थिक सुधारों को गति देना और सार्वजनिक क्षेत्र की सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाना है।
इस स्वीकृत राशि में से 60 करोड़ डॉलर संघीय स्तर के कार्यक्रमों के लिए निर्धारित किए गए हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से सरकार के राजस्व प्रबंधन, बजट प्रणाली, वित्तीय पारदर्शिता और सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार पर जोर दिया जाएगा। वहीं, 10 करोड़ डॉलर सिंध प्रांत के एक विशेष कार्यक्रम के लिए आवंटित किए गए हैं, जिसका लक्ष्य प्रांतीय स्तर पर आर्थिक प्रशासन को मजबूत करना और नागरिक सेवाओं को बेहतर बनाना है।
विश्व बैंक का मानना है कि यह सहायता पाकिस्तान को आर्थिक स्थिरता की दिशा में आगे बढ़ाने में मदद करेगी और सरकार को संरचनात्मक सुधार लागू करने का अवसर देगी। बैंक के अनुसार, बेहतर वित्तीय प्रबंधन और संसाधनों के कुशल उपयोग से देश में विकास की रफ्तार को दोबारा पटरी पर लाया जा सकता है।
उधर, IMF द्वारा लोन को मंजूरी मिलने को भी पाकिस्तान के लिए अहम माना जा रहा है। आईएमएफ की शर्तों के तहत पाकिस्तान को कर सुधार, सब्सिडी में कटौती और वित्तीय अनुशासन जैसे कठिन कदम उठाने होंगे। हालांकि, सरकार का दावा है कि इन सुधारों से दीर्घकाल में अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। विशेषज्ञों का कहना है कि विश्व बैंक और आईएमएफ से मिलने वाली यह सहायता अल्पकालिक राहत तो दे सकती है, लेकिन पाकिस्तान को स्थायी समाधान के लिए व्यापक आर्थिक सुधारों, निर्यात बढ़ाने और निवेश का माहौल सुधारने पर गंभीरता से काम करना होगा।
150 कंप्यूटर लूटे, फाइलें फाड़ीं, बांग्लादेश के मीडिया हाउस में भीड़ का तांडव
20 Dec, 2025 06:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बांग्लादेश में छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद हंगामा मचा हुआ है. देश में लोग सड़कों पर उतर आए हैं. नारेबाजी की गई. आगजनी की गई. साथ ही भीड़ ने मीडिया हाउस पर अटैक किया. शुक्रवार देर रात बांग्लादेश में भीड़ ने ढाका में द डेली स्टार और प्रोथोम आलो के दफ्तरों पर एक साथ हमले किए. इस दौरान कीमती सामान लूटा गया, इमारतों में तोड़फोड़ की गई और पत्रकारों को कई घंटों तक अंदर ही फंसाकर रखा गया. इस दौरान कम से कम 150 कंप्यूटर और कई जरूरी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण चोरी कर लिए गए, जबकि दफ्तरों की कैंटीन और फाइलों को भी तहस-नहस कर दिया गया |
बांग्लादेश में लोगों का गुस्सा छात्र नेता हादी की मौत के बाद फूटा. हादी को हाल ही में सिर पर गोली मारी गई थी. इसी के बाद उन्हें इलाज के लिए सिंगापुर ले जाया गया था. लेकिन, उन्हें बचाया नहीं जा सका. 18 दिसंबर को अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने हादी की मौत का ऐलान किया. उनके यह ऐलान करने के बाद से ही देश में हंगामा मच गया. लोगों का गुस्सा मीडिया हाउस पर भी फूटा |
ऑफिस में मचाई तबाही
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि ये अखबार अशांति फैलाने और राजनीतिक हितों से जुड़े हुए हैं, हालांकि दोनों मीडिया संस्थानों ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया. द डेली स्टार के काजी नजरुल इस्लाम एवेन्यू स्थित दफ्तर में हमलावरों ने आधी रात के आसपास जबरन घुसपैठ की. उन्होंने फर्नीचर और कांच के दरवाजे तोड़ दिए, कंप्यूटर, कैमरे और हार्ड ड्राइव नष्ट कर दीं, शहीद अबू सैयद और मीर महफूजुर रहमान मुग्धो के पोस्टर फाड़ दिए और कई मंजिलों में आग लगा दी |
हालात इतने बिगड़ गए कि आग की लपटों और घने धुएं की वजह से पत्रकारों को छत पर जाना पड़ा. 28 पत्रकारों और कर्मचारियों को कई घंटों तक छत पर शरण लेनी पड़ी. खोजी पत्रकार जायमा इस्लाम ने फेसबुक पर लिखा, मैं अब सांस नहीं ले पा रही हूं. बहुत ज्यादा धुआं है. मैं अंदर फंसी हूं. आप मुझे मार रहे हैं. दमकलकर्मियों, पुलिस और सेना के जवानों ने सुबह करीब 5 बजे फंसे हुए पत्रकारों को बाहर निकाला |
अखबार नहीं हुआ प्रसारित
भीड़ के इस हमले से दफ्तर को भारी नुकसान हुआ और बिजली, पानी और गैस की आपूर्ति काट दी गई. हालात इतने बिगड़ गए कि द डेली स्टार अपने 34 साल के इतिहास में पहली बार अपना अखबार नहीं छाप सका |
इमारत को किया तहस-नहस
न सिर्फ डेली स्टार बल्कि प्रोथोम आलो पर भी हमला हुआ. प्रोथोम आलो के कारवां बाजार स्थित मुख्यालय में हमलावरों ने रात करीब 11:15 बजे हमला शुरू किया. शुरुआत में पुलिस ने उन्हें रोका, लेकिन भीड़ फिर से इकट्ठा हुई और बड़े पैमाने पर हमला किया. इस दौरान ऑफिस की खिड़कियां, फर्नीचर, कंप्यूटर, सीसीटीवी कैमरे, फायर सेफ्टी सिस्टम और कैश लॉकर तोड़ दिए गए. ग्राउंड फ्लोर से लेकर दूसरी मंजिल तक का हिस्सा पूरी तरह तबाह हो गया और इमारत के ओटीटी प्लेटफॉर्म चोरकी को भी भारी नुकसान पहुंचा |
छत पर भागे पत्रकार
कर्मचारियों को जान बचाकर भागना पड़ा. एक कर्मचारी छत से पास की इमारत में कूद गया, जिससे उसे गंभीर चोटें आईं. मीडिया हाउस अपने 27 साल के इतिहास में पहली बार शुक्रवार को अपना अखबार नहीं छाप सका. साथ ही ऑनलाइन सेवाएं भी करीब 17 घंटे तक बंद रहीं |
साथ ही प्रदर्शनकारियों ने रास्ता रोका इसी वजह से दमकल सेवाओं को पहुंचने में देरी हुई. दो फायरफाइटर, एमडी आलमगीर और एमडी शफिउल आलम को करंट लग गया और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया. बाद में पुलिस, सेना ने मिलकर लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला | हिंसा केवल मीडिया संस्थानों तक सीमित नहीं रही. धानमंडी में भीड़ ने छायानट भवन पर हमला किया और संगीत वाद्ययंत्रों, कलाकृतियों और दफ्तरों में तोड़फोड़ की |
किन इलाकों में फैली हिंसा
प्रदर्शन चटगांव, राजशाही, उत्तरा और अन्य इलाकों तक फैल गए, जहां राजनीतिक और सांस्कृतिक संस्थानों को निशाना बनाया गया. चटगांव में प्रदर्शनकारियों की ओर से सहायक भारतीय उच्चायोग पर पत्थर फेंके जाने के बाद पुलिस ने 10 लोगों को हिरासत में लिया |
अंतरिम मुख्य सलाहकार प्रो. मुहम्मद यूनुस ने संपादक मतीउर रहमान और महफूज अनाम से बात कर गहरा दुख जताया और सरकार की ओर से सहयोग का भरोसा दिया. सांस्कृतिक मामलों के सलाहकार मोस्तोफा सरवर फारूकी ने क्षतिग्रस्त संस्थानों की मरम्मत में मदद का आश्वासन दिया |
एडिटर्स काउंसिल, कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स (CPJ) और मीडिया फ्रीडम कोएलिशन सहित राजनीतिक दलों और मीडिया संगठनों ने इन हमलों की निंदा की. स्थानीय पत्रकारों और नागरिक नेताओं ने हमलावरों को समझाने की कोशिश की, जिसके बाद दमकल कर्मियों और पुलिस को आग पर काबू पाने का मौका मिला |
दीपू चंद्र दास हत्याकांड: बांग्लादेश पुलिस ने 7 आरोपी धर दबोचे
20 Dec, 2025 03:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बांग्लादेश इस समय हिंसा और अशांति की आग में घिरा हुआ है. छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद ढाका समेत कई शहरों में विरोध प्रदर्शन, तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं. इसी उथल-पुथल भरे माहौल में सांप्रदायिक हिंसा की एक और दर्दनाक घटना घटी, जिसमें एक हिंदू युवक अपनी जान गंवा बैठा |
मायमनसिंह जिले के वालुका (भालुका) उपजिला से सामने आई इस दिल दहला देने वाली वारदात में कथित तौर पर ईशनिंदा के आरोप में उग्र भीड़ ने 27 वर्षीय दिपु चंद्र दास को बेरहमी से पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दिया. घटना के बाद सुरक्षा बल रैपिड एक्शन बटालियन (RAB) ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मामले में सात संदिग्धों को गिरफ्तार किया है |
7 संदिग्ध हुए गिरफ्तार
घटना के बाद RAB-14 ने अलग-अलग जगहों पर छापेमारी कर सात संदिग्धों को गिरफ्तार किया. गिरफ्तार किए गए लोगों में मोहम्मद लिमोन सरकार (19), मोहम्मद तारिक हुसैन (19), मोहम्मद मानिक मिया (20), एरशाद अली (39),निजुम उद्दीन (20), आलमगीर हुसैन (38) और मोहम्मद मिराज हुसैन आकॉन (46) शामिल हैं. अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ जारी है और मामले की गहराई से जांच की जा रही है |
घटना कब और कैसे हुई?
पुलिस और बांग्ला की रिपोर्ट के अनुसार, गुरुवार रात करीब 9 बजे स्क्वायर मास्टर बारी डुबालिया पाड़ा इलाके में एक उग्र भीड़ ने दिपु चंद्र दास को पकड़ लिया. आरोप लगाया गया कि उसने पैगंबर के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी की है. गुस्साई भीड़ ने युवक को बेरहमी ससे पीटा जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई. इसके बाद हमलावरों ने शव को एक पेड़ से बांधकर आग लगा दी |
कौन थे दिपु चंद्र दास?
दिपु चंद्र दास एक स्थानीय गार्मेंट फैक्ट्री में काम करते थे और इलाके में किराए के मकान में रहता थे. शुरुआती जानकारी के मुताबिक वह लंबे समय से वहीं रह रहे थे. घटना के बाद शव को मायमनसिंह मेडिकल कॉलेज अस्पताल के मुर्दाघर भेज दिया गया है |
राजनीतिक उथल-पुथल के बीच खालिदा जिया की बहू सुरक्षित लंदन पहुंचीं
20 Dec, 2025 01:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बांग्लादेश में इस समय बवाल मचा हुआ है. हाल ही में छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद हंगामा मचा हुआ है. देश में हादी की मौत के बाद लोगों का आक्रोश देखा गया. लाखों लोग सड़कों पर उतर आए. जमकर नारेबाजी की, आगजनी की. इसी बीच जहां बांग्लादेश में अशांति फैली हुई है. वहीं, खालिदा जिया की बहू वापस लंदन रवाना हो गई हैं |
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की तबीयत के चलते इस समय उनकी बहू जुबैदा रहमान उन्हें देखने के लिए आई थीं. जुबैदा 5 दिसंबर को ढाका पहुंची थीं. इसी के बाद बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान की पत्नी जुबैदा रहमान शनिवार को ढाका से लंदन रवाना हो गई हैं |
लंदन के लिए रवाना हुईं जुबैदा
खालिदा जिया की बहू शनिवार को सुबह करीब 8:30 बजे ढाका के हजरत शाहजलाल इंटरनेशनल एयरपोर्ट से कतर एयरवेज की उड़ान से लंदन (यूके) के लिए रवाना हुईं. जुबैदा रहमान 5 दिसंबर को ढाका पहुंची थीं, जब बीएनपी अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की तबीयत बिगड़ गई थी. वो खालिदा जिया को बेहतर इलाज के लिए ब्रिटेन ले जाने की तैयारियों के तहत देश आई थीं. लेकिन, अब देश में मचे बवाल के बीच वो वापस लंदन चली गई हैं |
तारिक रहमान लौटेंगे ढाका
इसी बीच बीबीसी बांग्ला की जानकारी के मुताबिक, बीएनपी के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान के 25 दिसंबर को देश लौटने की संभावना है. राज्य समाचार एजेंसी बीएसएस की रिपोर्ट के मुताबिक, जुबैदा रहमान भी उसी समय तारिक रहमान के साथ ढाका लौटेंगी |
क्यों वापस लौटीं जुबैदा?
जुबैदा रहमान की उड़ान सिलहट में ठहराव के बाद लंदन के हीथ्रो हवाई अड्डे पर पहुंचेगी. उनका लंदन लौटना ऐसे समय हुआ है, जब एक दिन पहले खालिदा जिया के डॉक्टरों ने कहा कि 79 वर्षीय बीएनपी प्रमुख की हालत स्थिर हो गई है. खालिदा जिया की लंबे समय से तबीयत बिगड़ती जा रही है. इसी बीच शुक्रवार को एक राहत की खबर सामने आई है डॉक्टर्स ने कहा है कि उनका हालत अब स्थिर है |
खालिदा जिया का इलाज स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का एक मेडिकल बोर्ड कर रहा है. बोर्ड के एक सदस्य और खालिदा जिया के निजी डॉक्टर प्रोफेसर एजेडएम जाहिद हुसैन ने शुक्रवार को पत्रकारों को बताया कि पिछले एक महीने से उनकी स्थिति काफी हद तक स्थिर बनी हुई है |
वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था
खालिदा जिया बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की अध्यक्ष हैं, 23 नवंबर से कई स्वास्थ्य समस्याओं के चलते ढाका के एवरकेयर अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है. बाद में उन्हें कोरोनरी केयर यूनिट (सीसीयू) में शिफ्ट किया गया. 11 दिसंबर को उनके फेफड़ों और अन्य अंगों को आराम देने के लिए उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया |
पिछले हफ्ते मेडिकल बोर्ड की मंजूरी के साथ उन्हें लंदन ले जाने की योजना थी, लेकिन कतर की ओर से उपलब्ध कराई गई एयर एंबुलेंस ढाका नहीं पहुंच सकी, जिसकी वजह से वो लंदन नहीं जा सकीं |
हादी की मौत से हंगामा
बांग्लादेश में हादी की मौत के बाद कई इलाकों में अशांति देखने को मिली. हादी एक प्रमुख छात्र नेता थे. कुछ ही दिन पहले उन्हें सिर में गोली मार दी गई थी. इसी के बाद उनका सिंगापुर में इलाज चल रहा था. लेकिन, हादी को बचाया नहीं जा सका. गुरुवार को उन्होंने दम तोड़ दिया |
अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने जैसे ही हादी की मौत की खबर का ऐलान किया, उसके तुरंत बाद ही देशभर में हिंसा फैल गई. लोगों ने न सिर्फ सड़कों पर आगजनी की बल्कि देश में मीडिया के ऑफिस पर भी हिंसा की गई. देश के दो प्रमुख अखबारों — डेली स्टार और प्रोथोम आलो — के दफ्तरों में तोड़फोड़ की गई |
पाकिस्तान की राजनीति में भूचाल, इमरान खान-बुशरा बीबी को 17 साल जेल
20 Dec, 2025 12:10 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की कानूनी परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं. शनिवार को एक जवाबदेही अदालत ने बहुचर्चित तोशाखाना-2 भ्रष्टाचार मामले में इमरान खान और उनकी पत्नी बुशरा बीबी को 17-17 साल की जेल की सजा सुनाई. यह फैसला ऐसे वक्त आया है जब इमरान खान पहले से ही जेल में बंद हैं |
इस हाई-प्रोफाइल मामले का फैसला रावलपिंडी की हाई-सिक्योरिटी अदियाला जेल में सुनाया गया. विशेष अदालत के जज शाहरुख अर्जुमंद ने जेल परिसर में ही दोनों को दोषी करार दिया. सुरक्षा कारणों से कोर्ट की कार्यवाही जेल के अंदर कराई गई |
क्या है अदालत का पूरा फैसला
विशेष केंद्रीय जज शाहरुख अर्जुमंद ने रावलपिंडी की हाई-सिक्योरिटी अदियाला जेल में यह फैसला सुनाया. अदालत ने इमरान खान और बुशरा बीबी को पाकिस्तान पीनल कोड की धारा 409 के तहत भी दोषी ठहराते हुए 7-7 साल की अतिरिक्त सज़ा सुनाई. इसके साथ ही दोनों पर कुल एक करोड़ रुपये (10-10 मिलियन रुपये) का जुर्माना भी लगाया गया है. अदियाला जेल अधिकारियों के मुताबिक, फैसला सुनाए जाने के वक्त इमरान खान और बुशरा बीबी कोर्टरूम में मौजूद थे. वहीं, फैसले से पहले इमरान खान के वकील सलमान सफदर को नोटिस भी जारी किया गया था |
क्या है तोशाखाना-2 मामला
यह मामला साल 2021 में सऊदी अरब सरकार से मिले सरकारी उपहारों से जुड़ा है. आरोप है कि इमरान खान और बुशरा बीबी ने इन महंगे तोहफों को नियमों के खिलाफ अपने पास रखा और बाद में कथित तौर पर धोखाधड़ी की. अदालत ने इसे राज्य के साथ विश्वासघात मानते हुए सख्त सज़ा सुनाई |
जांच से सजा तक का सफर
तोशाखाना-2 मामले की शुरुआती जांच राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो (NAB) ने की थी. बाद में NAB संशोधनों के तहत केस को FIA को सौंप दिया गया. सितंबर 2024 में FIA ने जांच पूरी कर अदालत में चालान पेश किया. इसके बाद 12 दिसंबर 2024 को इमरान ख़ान और बुशरा बीबी पर औपचारिक रूप से आरोप तय किए गए. गौरतलब है कि अदालत पहले तोशाखाना-1 मामले में इमरान ख़ान और बुशरा बीबी को बरी कर चुकी है. हालांकि, दूसरे मामले में आई सज़ा ने उनकी कानूनी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं |
नई सजा और बढ़ता विवाद
ताजा सजा ऐसे समय में आई है, जब इमरान खान को जेल में कथित तौर पर अमानवीय व्यवहार का सामना करना पड़ रहा है. उनके समर्थकों और पार्टी पीटीआई ने आरोप लगाया है कि खान को लंबे समय तक एकांत कारावास में रखा गया. इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी आवाज़ उठी है. संयुक्त राष्ट्र ने भी इमरान खान को एकांस कारावास से बाहर निकालने की अपील की है और इसे मानवाधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला बताया था |
महीने में 12 लाख रुपए की आमदनी होगी तभी सऊदी अरब में मिलेगी शराब
19 Dec, 2025 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रियाद । सऊदी अरब ने दशकों पुराने शराब प्रतिबंध में ढील देते हुए गैर-मुस्लिम विदेशी निवासियों को सीमित शराब खरीदने की अनुमति दी है। यह बदलाव राजधानी रियाद की एकमात्र लाइसेंस प्राप्त शराब दुकान से शुरू हुआ है, जो पहले केवल विदेशी राजनयिकों के लिए थी। अब उच्च आय वाले गैर-मुस्लिम एक्सपैट्स भी यहां से शराब खरीद सकते हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, शराब खरीदने के लिए गैर-मुस्लिम विदेशी को मासिक आय कम से कम 50,000 सऊदी रियाल (लगभग 13,300 अमेरिकी डॉलर या 11-12 लाख भारतीय रुपये) साबित करनी होगी। इसके लिए सैलरी स्लिप या आय प्रमाणपत्र दिखाना अनिवार्य है।
दुकान में प्रवेश और खरीदारी पर मासिक कोटा लागू है, जो सरकारी आईडी से जुड़ा होता है। यह सुविधा केवल प्रीमियम रेजीडेंसी धारकों या उच्च आय वाले एक्सपैट्स तक सीमित है। सऊदी नागरिकों और मुस्लिमों के लिए शराब पर पूर्ण प्रतिबंध बरकरार है। सरकार ने अभी इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, और जानकारी अनाम सूत्रों से आई है। यह कदम सऊदी अरब की विजन 2030 योजना का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य तेल पर निर्भरता कम कर पर्यटन, निवेश और व्यवसाय को बढ़ावा देना है। क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के नेतृत्व में देश सामाजिक प्रतिबंधों को शिथिल कर रहा है, जैसे महिलाओं को ड्राइविंग की अनुमति, सार्वजनिक मनोरंजन और संगीत कार्यक्रमों की छूट। शराब की सीमित बिक्री से विदेशी प्रतिभा और निवेशकों को आकर्षित करने का लक्ष्य है, ताकि सऊदी को वैश्विक व्यापारिक केंद्र बनाया जा सके। आने वाले वर्षों में जेद्दा और धहरान में भी नई दुकानें खुलने की योजना है। यह बदलाव सऊदी अरब को आधुनिक और निवेश-अनुकूल छवि देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, हालांकि यह बेहद नियंत्रित और चुनिंदा है।
फिर म्यांमार में कांपी धरती, सुबह-सुबह आए भूकंप से लोग डर गए और घरों से बाहर भागे
19 Dec, 2025 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नेपीडॉ। म्यांमार में सुबह काफी डराने वाली थी। वजह थी कि यहां आए भूकंप ने लोगों को काफी ज्यादा डरा दिया। हालांकि तीव्रता केवल 4.4 मापी गई, लेकिन लोगों को लगा कि कहीं तेज भूकंप आ गया तो भागना भी कठिन हो जाएगा। इसी सोच के चलते लोग घरों से निकले और सुरक्षित स्थान की तरफ भागने लगे। गुरुवार सुबह म्यांमार में भूकंप के झटके महसूस किए गए। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी (एनसीएस) की जानकारी के मुताबिक रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 4.4 मापी गई। भूकंप का केंद्र 26.07 डिग्री उत्तर अक्षांश और 97.00 डिग्री पूर्व देशांतर पर स्थित था, जबकि इसकी गहराई 100 किलोमीटर बताई जा रही है। हालांकि इस भूकंप से अब तक किसी तरह के जान-माल के नुकसान की खबर नहीं है लेकिन फिर भी इसे खतरनाक माना जा रहा है।
म्यांमार के नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी के मुताबिक इससे पहे 11 दिसंबर को म्यांमार में 3.8 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था। वहीं इससे एक दिन पहले, 10 दिसंबर को 4.6 तीव्रता का भूकंप आया, जिसकी गहराई करीब 138 किलोमीटर थी। भूवैज्ञानिकों का कहना है कि म्यांमार अपनी लंबी समुद्री तटरेखा की वजह से भूंकप को लेकर संवेदनशील है। यहां मध्यम से लेकर बड़े भूकंप और सुनामी के खतरे बने रहते हैं। देश चार प्रमुख टेक्टोनिक प्लेटों के एक्टिव होने की वजह से यहां अक्सर धरती में कंपन महसूस किया जाता है। जानकारों के मुताबिक म्यांमार भौगोलिक रूप से भूकंप के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्र में आता है। देश की लंबी समुद्री तटरेखा के कारण यहां मध्यम से लेकर बड़े भूकंप और सुनामी का खतरा बना रहता है। म्यांमार चार प्रमुख टेक्टोनिक प्लेटों- भारतीय, यूरेशियन, सुंडा और बर्मा प्लेट के संगम क्षेत्र में स्थित है। इन प्लेटों के लगातार टकराने और खिसकने की वजह से यहां अक्सर भूकंपीय गतिविधियां देखने को मिलती रहती हैं।
बता दें कि इस साल 2025 की करें तो इस साल 28 मार्च को सेंट्रल म्यांमार में बड़ा भूंकप आया था, जिसमें 7.7 और 6.4 तीव्रता के शक्तिशाली झटके महसूस किए गए थे। म्यांमार से होकर गुजरने वाला करीब 1,400 किलोमीटर लंबा सागाइंग फॉल्ट देश के लिए बड़ा खतरा बना हुआ है। यह फॉल्ट अंडमान क्षेत्र को देश के उत्तरी हिस्से से जोड़ता है और सागाइंग, मांडले, बागो और यांगून जैसे बड़े शहरों के लिए गंभीर भूकंप का जोखिम पैदा करता है। इन शहरों में म्यांमार की लगभग 46 प्रतिशत आबादी रहती है। साल 1903 में म्यांमार के बागो में आए 7.0 तीव्रता के भूकंप का असर यांगून तक महसूस किया गया था।
यूरोप के छोटे सूअरों को हमारे देश के पतन से लाभ उठाने की उम्मीद थी
19 Dec, 2025 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मॉस्को। आम तौर पर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के चेहरे पर दिखने वाली शांति देख दुश्मनों की रूह कांप जाती है। वहीं, हाल ही में पुतिन का एक ऐसा अवतार सामने आया है, जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया। गुस्से में पुतिन के मुंह से ‘छोटे सुअर’ जैसे शब्द निकाल गए। ये तब हुआ जब वह रूस-यूक्रेन के बीच चल रही पीस डील पर बात कर रहे थे, जिसमें दुनिया भर के देश जुड़ चुके हैं, कोई क्रेडिट लेने की होड़ में है तो कई आग में घी डालने का काम कर रहा है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक रक्षा मंत्रालय के साथ वार्षिक बैठक में बोलते हुए पुतिन ने साफ कहा कि अगर डिप्लोमेसी से बात नहीं बनी तो फोर्स का इस्तेमाल करके रूस अपनी मांगे पूरी करके ही मानेगा। उन्होंने कहा कि ‘मॉस्को जिसे अपना ‘विशेष सैन्य अभियान’ मानता है वह लक्ष्य ‘बिना शर्त’ पूरे किए जाएंगे। अगर वे सार्थक चर्चा नहीं चाहते, तो रूस युद्ध के मैदान में अपनी ऐतिहासिक भूमि को मुक्त कराएगा।
पुतिन ने दावा किया कि पिछली अमेरिकी सरकार ने जानबूझकर स्थिति को सशस्त्र संघर्ष की ओर धकेला था। उन्होंने कहा कि वाशिंगटन का मानना था कि रूस थोड़े ही समय में कमजोर पड़ जाएगा और खत्म हो जाएगा। इसके बाद यूरोपीय नेताओं पर बात करते हुए पुतिन गुस्से से लाल हो गए। उन्होंने कहा कि ‘यूरोप के छोटे सूअरों ने पिछली अमेरिकी सरकार का इस में तुरंत साथ दिया, उन्हें हमारे देश के पतन से लाभ उठाने की उम्मीद थी। यूरोपीय देशों और पुतिन की दुश्मनी जगजाहिर है लेकिन इस तरह की टिप्पणियां इशारा करती हैं कि शांति समझौता हो जाने के बाद भी युद्ध का खतरा बना रहेगा।
बता दें हाल ही में अमेरिकी अधिकारियों ने दावा किया कि बर्लिन में यूक्रेन के साथ हुई पिछली वार्ता में करीब 90फीसदी मुद्दों का समाधान हो गया है। बताया गया है कि सबसे कठिन मुद्दों पर बात बन गई है। अभी भी इस बात पर संशय बना हुआ कि रूस की तरफ से किसी तरह कोई समझौता किया जाएगा या नहीं।
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