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Pakistan Airline Sold: आर्थिक संकट में पाकिस्तान ने 135 अरब में बेची PIA
24 Dec, 2025 02:24 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Pakistan Airline Sold—यह खबर पाकिस्तान की बिगड़ती आर्थिक हालत की सबसे बड़ी तस्वीर बनकर सामने आई है। भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार को आखिरकार अपनी सरकारी एयरलाइन पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (PIA) को बेचना पड़ा। लंबे समय से घाटे में चल रही PIA को 135 अरब रुपये में एक लोकल इन्वेस्टमेंट कंपनी को बेच दिया गया है। सरकार ने इससे पहले भी PIA के निजीकरण की कोशिश की थी, लेकिन तब तय मूल्य नहीं मिलने के कारण सौदा टाल दिया गया था।
इस्लामाबाद में PIA के निजीकरण को लेकर एक औपचारिक सेरेमनी आयोजित की गई, जिसमें कई बड़ी कंपनियों ने हिस्सा लिया। बोली प्रक्रिया में लकी सीमेंट, इन्वेस्टमेंट फर्म आरिफ हबीब और निजी एयरलाइन एयरब्लू शामिल रहीं। तीनों कंपनियों ने अपनी सील बंद बिड्स पारदर्शी बॉक्स में जमा कीं। दूसरे चरण में बिड्स खोली गईं, जिसमें सबसे ऊंची बोली आरिफ हबीब इन्वेस्टमेंट फर्म की निकली और उसी ने PIA को खरीद लिया।
PIA के लिए सरकार ने रेफरेंस प्राइस 100 अरब रुपये तय की थी। बोली के दौरान आरिफ हबीब और लकी सीमेंट के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। कीमत बढ़ते-बढ़ते 135 अरब रुपये तक पहुंच गई, जिसके बाद लकी सीमेंट ने पीछे हटते हुए आरिफ हबीब को बधाई दी। इस तरह 135 अरब रुपये में PIA का सौदा तय हुआ, जिसे पाकिस्तान के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा निजीकरण सौदा बताया जा रहा है।
Pakistan Airline Sold होने के पीछे सरकार ने तर्क दिया कि एयरलाइन लंबे समय से लापरवाही, कुप्रबंधन और घाटे की शिकार रही है। सरकार ने 75 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की पेशकश की थी, जबकि शेष 25 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने के लिए निवेशक को 90 दिन का समय दिया गया है। बिक्री से मिलने वाली राशि का 92.5 प्रतिशत PIA में पुनर्निवेश किया जाएगा, जबकि बाकी रकम सरकार को मिलेगी। इसके अलावा नए निवेशक को अगले पांच वर्षों में करीब 80 अरब रुपये का अतिरिक्त निवेश भी करना होगा।
Who Is Nazneen Munni: बांग्लादेश में पत्रकार नाजनीन मुन्नी को कट्टरपंथियों से धमकी
24 Dec, 2025 02:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Who Is Nazneen Munni—:यह सवाल इन दिनों बांग्लादेश में तेजी से बढ़ती हिंसा और मीडिया पर हो रहे हमलों के बीच चर्चा में है। बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले, हिंसक प्रदर्शन और उग्र माहौल के बीच जानी-मानी पत्रकार नाजनीन मुन्नी की सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। कट्टरपंथी समूहों ने ग्लोबल TV बांग्लादेश की न्यूज हेड नाजनीन मुन्नी को पद से हटाने की मांग की है और चेतावनी दी है कि ऐसा न होने पर चैनल के ऑफिस को जला दिया जाएगा।
21 दिसंबर 2025 को खुद को एंटी-डिस्क्रिमिनेशन स्टूडेंट मूवमेंट का सदस्य बताने वाले कुछ युवक ढाका के तेजगांव स्थित ग्लोबल TV के ऑफिस पहुंचे। उन्होंने चैनल प्रबंधन से साफ कहा कि अगर नाजनीन मुन्नी को हटाया नहीं गया, तो ‘प्रथम आलो’ और ‘द डेली स्टार’ की तरह ऑफिस में आग लगा दी जाएगी। इनका आरोप था कि उस्मान हादी की मौत की कवरेज में चैनल ने निष्पक्षता नहीं बरती। इस घटना की पुष्टि संगठन के अध्यक्ष रिफत राशिद ने भी की, जिन्होंने बताया कि एक सदस्य मेमोरेंडम देने ऑफिस गया था।
नाजनीन मुन्नी ने बताया कि घटना के वक्त वह ऑफिस में मौजूद नहीं थीं। बाद में 7–8 युवाओं ने चैनल के मैनेजिंग डायरेक्टर अहमद हुसैन से मुलाकात कर उन्हें हटाने की मांग की और अवामी लीग समर्थक होने का आरोप लगाया। उन्होंने फेसबुक पोस्ट में इस धमकी की जानकारी सार्वजनिक की।
Who Is Nazneen Munni—वह बांग्लादेश की चर्चित पत्रकार हैं और वर्तमान में ग्लोबल TV की न्यूज हेड हैं। इससे पहले वह DBC न्यूज में असाइनमेंट एडिटर रह चुकी हैं। सोशल मीडिया पर उनकी मजबूत मौजूदगी है और 2024 से पहले वह शेख हसीना सरकार की आलोचना को लेकर भी मुखर रही हैं। मौजूदा घटनाक्रम ने बांग्लादेश में मीडिया की स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
समुद्र में विंड टर्बाइन पर ट्रंप ने लगाई रोक, अमेरिका में हरित ऊर्जा को बड़ा झटका
24 Dec, 2025 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिका में हरित ऊर्जा उद्योग के भविष्य पर अनिश्चितता के बादल छा गए हैं। ट्रंप प्रशासन ने एक कड़ा निर्णय लेते हुए समुद्र में निर्माणाधीन सभी प्रमुख ऑफशोर विंड प्रोजेक्ट्स के फेडरल लीज को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। प्रशासन का तर्क है कि समुद्र में स्थापित ये विशाल पवन चक्कियां और उनकी घूमने वाली ब्लेडें राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती हैं। हालांकि, इन कथित खतरों की प्रकृति को लेकर अब तक कोई विस्तृत या सार्वजनिक जानकारी साझा नहीं की गई है, जिससे उद्योग जगत और राजनीतिक हलकों में खलबली मच गई है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से ऑफशोर विंड एनर्जी के आलोचक रहे हैं, और इस ताजा फैसले को उनकी ऊर्जा नीति का सबसे आक्रामक कदम माना जा रहा है। इस आदेश का सीधा असर अरबों डॉलर के निवेश पर पड़ेगा। जानकारों का अनुमान है कि इससे लगभग 6 गीगावॉट बिजली उत्पादन क्षमता ठप हो सकती है, जो आने वाले वर्षों में अमेरिकी ग्रिड का हिस्सा बनने वाली थी। यह निलंबन अटलांटिक महासागर में चल रही पांच बड़ी परियोजनाओं पर लागू होगा। इनमें सबसे महत्वपूर्ण वर्जीनिया का विशाल ऑफशोर विंड फार्म है, जिसे साल 2026 तक पूरा होना था। यह प्रोजेक्ट न केवल अमेरिका का सबसे बड़ा विंड फार्म बनने वाला था, बल्कि वर्जीनिया स्थित दुनिया के सबसे बड़े डेटा सेंटर क्लस्टर की बढ़ती ऊर्जा मांग को पूरा करने के लिए भी बेहद अहम था। इसके अलावा न्यू इंग्लैंड तट के पास चल रहे अन्य प्रोजेक्ट्स भी अब अधर में लटक गए हैं।
अमेरिकी गृह मंत्रालय ने इस फैसले के पीछे रक्षा विभाग की गोपनीय रिपोर्टों का हवाला दिया है। प्रशासन का कहना है कि विंड टर्बाइनों की विशाल ब्लेडें और उनसे होने वाला प्रकाश परावर्तन (रिफ्लेक्शन) रडार प्रणालियों में हस्तक्षेप पैदा कर सकता है। अधिकारियों का दावा है कि ईस्ट कोस्ट पर रडार इंटरफेरेंस के कारण नागरिक इलाकों की निगरानी और सुरक्षा तंत्र प्रभावित हो रहा है। हालांकि, रक्षा विभाग के ही कुछ सूत्रों का कहना है कि इन खतरों को कम करने के तकनीकी उपायों पर अभी विचार किया जा रहा था, लेकिन प्रशासन ने उससे पहले ही निलंबन का रास्ता चुन लिया।
इस फैसले के सामाजिक और आर्थिक परिणाम भी गंभीर होने की आशंका है। राजनीतिक स्तर पर, वर्जीनिया और अन्य राज्यों के सीनेटरों ने इसे राष्ट्रपति की निजी पसंद-नापसंद से प्रेरित बताया है। उनका तर्क है कि यदि सुरक्षा चिंताएं इतनी ही बड़ी थीं, तो प्रशासन को पारदर्शी तरीके से जानकारी देनी चाहिए थी। वहीं, ऑफशोर एनर्जी इंडस्ट्री से जुड़े संगठनों ने चेतावनी दी है कि इस कदम से न केवल हजारों नौकरियां खत्म होंगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय निवेशकों का अमेरिकी ऊर्जा बाजार से भरोसा भी उठ जाएगा। उद्योग जगत का कहना है कि वे पिछले एक दशक से रक्षा विभाग के साथ मिलकर काम कर रहे हैं और हर परियोजना को सभी आवश्यक सुरक्षा मंजूरियां मिलने के बाद ही शुरू किया गया था। अचानक लिए गए इस निर्णय ने अमेरिका के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों और आर्थिक स्थिरता के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।
मुनीर ने दी भारत को धमकी बोले- बांग्लादेश पर हमला मतलब पाकिस्तान पर अटैक!
24 Dec, 2025 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। पाकिस्तान ने सऊदी अरब के साथ डिफेंस एग्रीमेंट किया था। इस एग्रीमेंट के मुताबिक एक देश पर हमला दूसरे देश पर हमला माना जाएगा। अब इसी तरह का एक और समझौता बांग्लादेश के साथ पाकिस्तान करना चाह रहा है। यह समझौता पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच रिश्तों में ऐतिहासिक मोड़ की तरह होगा। दोनों देश एक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट पर काम कर रहे हैं, जिसे दक्षिण एशिया की सुरक्षा राजनीति में बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है। इस प्रस्तावित समझौते को गति देने के लिए पाकिस्तान और बांग्लादेश ने एक उच्चस्तरीय संयुक्त तंत्र का गठन किया है, जिसका प्राथमिक कार्य समझौते की शर्तों को तय करना और एक अंतिम मसौदा तैयार करना है। बताया जा रहा है कि बांग्लादेश का वर्तमान सैन्य नेतृत्व पाकिस्तान के साथ रणनीतिक और रक्षा सहयोग बढ़ाने में विशेष रुचि प्रदर्शित कर रहा है। पिछले कुछ महीनों के घटनाक्रमों पर नजर डालें तो दोनों देशों की थलसेना, वायुसेना और नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच कई दौर की वार्ताएं संपन्न हो चुकी हैं। इन बैठकों के परिणामस्वरूप प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और सैन्य आदान-प्रदान से संबंधित कई समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर भी किए गए हैं, जो भविष्य के व्यापक रक्षा समझौते की नींव माने जा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि बांग्लादेश में शेख हसीना के नेतृत्व वाली सरकार के सत्ता से हटने के बाद वहां के राजनीतिक और कूटनीतिक समीकरणों में भारी बदलाव आया है। पूर्ववर्ती सरकार के समय जो संबंध ठंडे बस्ते में चले गए थे, उन्हें अब रक्षा और सुरक्षा सहयोग के मोर्चे पर फिर से सक्रिय किया जा रहा है। हालांकि, कूटनीतिक सूत्रों का यह भी कहना है कि इस साझा रक्षा समझौते पर प्रगति निरंतर जारी है, लेकिन इसके अंतिम मसौदे और औपचारिक मंजूरी के लिए बांग्लादेश के आगामी आम चुनावों तक प्रतीक्षा की जा सकती है, ताकि आने वाली नई सरकार इसे संवैधानिक वैधता प्रदान कर सके। पाकिस्तान की यह डिफेंस डिप्लोमेसी केवल बांग्लादेश तक ही सीमित नहीं है। सूत्रों के मुताबिक, लगभग आठ अन्य देश भी पाकिस्तान के साथ इसी तरह के रणनीतिक और पारस्परिक रक्षा समझौतों में रुचि दिखा रहे हैं। यह इस्लामाबाद की उस बड़ी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है जिसके तहत वह क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग में अपनी भूमिका को पुनः परिभाषित और मजबूत करना चाहता है। पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच बढ़ता यह सैन्य समन्वय निश्चित रूप से दक्षिण एशिया के अन्य देशों, विशेषकर भारत के लिए एक नई रणनीतिक चुनौती पेश कर सकता है, क्योंकि यह क्षेत्र की पारंपरिक सुरक्षा व्यवस्था में एक बड़ा असंतुलन पैदा करने की क्षमता रखता है।
यूनुस सरकार हर नागरिक की सुरक्षा तय करे, चाहे वह किसी भी धर्म का हो
24 Dec, 2025 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जेनेवा। बांग्लादेश में हिंसा के बीच अल्पसंख्यकों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं पर संयुक्त राष्ट्र ने चिंता जताई है। यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने बयान जारी करते हुए कहा कि हम बांग्लादेश की स्थिति पर फिक्रमंद हैं। हम बांग्लादेश की सरकार से अपील करते हैं कि हर एक नागरिकों की सुरक्षा तय की जाए, चाहे वह किसी भी धर्म से ताल्लुक रखता हो।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक बांग्लादेश में बीते हफ्ते से ढाका समेत कई शहरों में विरोध प्रदर्शन और हिंसक घटनाएं हो रही हैं। युवा नेता उस्मान हादी की मौत के बाद ये हिंसक घटनाएं शुरू हुई हैं। इस दौरान दीपू चंद्रदास की भीड़ के हाथों हत्या ने यूएन समेत दुनिया का ध्यान खींचा है। दीपू की ईशनिंदा के आरोप में ना सिर्फ भीड़ ने हत्या कर दी बल्कि उनको शव को भी जला दिया। स्टीफन दुजारिक ने बांग्लादेश में हिंसा पर चिंता जताते हुए कहा कि जो लोग बहुसंख्यक समुदाय से नहीं हैं, उन्हें भी सुरक्षित महसूस करने का अधिकार है। ऐसे में यह जरूरी है कि बांग्लादेश में हिंसा की घटनाओं को रोकने के लिए यूनुस की अंतरिम सरकार कदम उठाए।
रिपोर्ट के मुताबिक गुटेरेस के प्रवक्ता ने यूनुस सरकार से उम्मीद जताई कि वह हर बांग्लादेशी को सुरक्षित रखने के लिए हर संभव प्रयास करेगी। यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क ने बांग्लादेश के लोगों से शांति बनाए रखने और हिंसा समाप्त करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि फरवरी में होने वाले चुनावों से पहले सभी के लिए सुरक्षित और शांतिपूर्ण माहौल बनना जरूरी है। अमेरिका से भी बांग्लादेश की स्थिति पर चिंता जाहिर की गई है।
कांग्रेसी राजा कृष्णमूर्ति ने कहा कि मैं बांग्लादेश में दीपू चंद्र दास की लक्षित भीड़ द्वारा हत्या से स्तब्ध हूं। सुहास सुब्रमण्यम ने भी ढाका में अल्पसंख्यक समुदायों पर हमलों को चिंताजनक कहा है। बांग्लादेश में बीते एक साल से ज्यादा समय से राजनीतिक उथल पुथल मची है। इन प्रदर्शनों के पीछे दक्षिणपंथी ताकतों साफतौर पर दिखी हैं। ऐसे में इनके प्रदर्शनों में अल्पसंख्यकों और लिबरल मिजाज के लोगों को निशाना बनाया जा रहा है।
मुझे बिल क्लिंटन बहुत पसंद, मेरे उनसे हमेशा अच्छे संबंध रहे हैं
24 Dec, 2025 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। एपस्टीन फाइल्स पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं। इसे लेकर अमेरिकी सियासत में भूचाल आ गया। वहीं अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप का कहना है कि यह अमेरिका की सफलता से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए किया जा रहा है। ट्रंप के मुताबिक कई लोग अंजाने में जेफ्री एपस्टीन से मिले थे और उन्हें एपस्टीन के काले कारनामों की भनक तक नहीं थी। ऐसे में अगर एपस्टीन फाइल्स के सारे नाम सामने आते हैं तो कई लोगों की छवि खराब हो सकती है।
मीडिया रिपो्ट के मुताबिक अमेरिका के न्यायिक विभाग ने शुक्रवार से एपस्टीन फाइल्स रिलीज करना शुरू किया है, जिसके बाद ट्रंप का पहली बार इसपर बयान सामने आया है। ट्रंप का कहना है कि एपस्टीन पर हंगामा मचाने का सीधा मकसद यही है कि वह अमेरिका के विकास में रिपब्लिकन पार्टी की सफलता को नजरअंदाज करना चाहते हैं। एपस्टीन फाइल्स के पहले बैच में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की तस्वीर भी मौजूद थी। जब ट्रंप से इसपर सवाल पूछा तो उन्होंने कहा कि मुझे बिल क्लिंटन बहुत पसंद हैं। मेरे उनसे हमेशा अच्छे संबंध रहे हैं। मुझे एपस्टीन फाइल्स में उनकी तस्वीरें देखना बिल्कुल पसंद नहीं है। वैसे उसमें मेरी भी तस्वीरें हैं। सभी इस आदमी एपस्टीन के दोस्त थे।
ट्रंप ने कहा कि बिल क्लिंटन एक समझदार व्यक्ति हैं। वह इस मामले को संभाल लेंगे, लेकिन एपस्टीन फाइल्स में कई ऐसे लोगों की भी तस्वीरें हैं, जो बेगुनाह है और अंजाने में एपस्टीन से मिले थे। तस्वीरें जारी करने से बहुत लोग नाराज हैं। उनका एपस्टीन से वास्तव में कोई लेना-देना नहीं था।
बता दें अमेरिका के सबसे धनी और प्रभावशाली व्यक्तियों की फेहरिस्त में शुमार जेफ्री एपस्टीन पर यौन तस्करी करने का आरोप है। 2019 में न्यूयॉर्क की जेल में एपस्टीन की मौत हो गई थी, जिसे आत्महत्या करार दिया था। हालांकि, एपस्टीन फाइल्स आज भी दुनिया के लिए राज बनी हुई है।
ट्रंप और उनकी टीम ने बड़े पैमाने पर कारोबारियों से चंदा जुटाया........बदले में किसी को माफी मिली, किसी का केस खत्म हुआ
24 Dec, 2025 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिका में डोनाल्ड ट्रम्प के दूसरी बार राष्ट्रपति बनने के बाद उनकी टीम ने बड़े पैमाने पर चंदा जुटाया है। एक मीडिया हाउस की रिपोर्ट में सामने आया है कि चुनाव के बाद ट्रंप और उनके करीबियों ने करीब 2 अरब डॉलर (18 हजार करोड़ रुपए) अलग-अलग फंड और योजनाओं के लिए इकट्ठा किए। यह रकम उनके चुनाव कैंपेन के लिए जुटाई गई राशि से भी ज्यादा है।
रिपोर्ट के मुताबिक सरकारी कागजात, फंडिंग रिकॉर्ड और कई लोगों से बातचीत करके पता लगा कि कम से कम 346 बड़े दानदाता हैं, जिसमें से हर एक ने 2.5 लाख डॉलर या उससे ज्यादा का चंदा दिया। इन लोगों से ही करीब 50 करोड़ डॉलर से ज्यादा की रकम आई। इसमें से 200 दानदाता हैं, जिन्हें या जिनके कारोबार को ट्रम्प सरकार के फैसलों से फायदा मिला। इसमें सुंदर पिचाई और सत्या नडेला जैसे 6 भारतवंशी बिजनेसमैन शामिल हैं। इन फायदों में कई बातें शामिल हैं। किसी को राष्ट्रपति की तरफ से माफी मिली, किसी के खिलाफ चल रहे केस खत्म हो गए, किसी कंपनी को बड़े सरकारी ठेके मिल गए, तब किसी को सीधे व्हाइट हाउस तक पहुंच मिली या सरकार में बड़ा पद मिला। हालांकि रिपोर्ट कहती है कि यह साबित करना मुश्किल है कि किसी ने पैसा दिया और बदले में सीधा फायदा मिला, लेकिन इतना जरूर है कि पैसे और फायदों का यह रिश्ता सवाल खड़े करता है।
ट्रम्प की टीम ने पैसे जुटाने के लिए कई अलग-अलग रास्ते बनाए। इसमें सबसे बड़ा है एमएजीए (मेक अमेरिका ग्रेट अगेन), जो एक सुपर पीएसी है। पीएसी एक ऐसा संगठन होता है, जो राजनीति के लिए पैसा इकट्ठा करता है और उस पैसे से किसी उम्मीदवार या पार्टी का समर्थन करता है। इसने नवंबर 2024 से जून 2025 के बीच करीब 200 मिलियन डॉलर जुटाए। इसके अलावा ट्रम्प के शपथ ग्रहण समारोह के लिए बनी कमेटी ने करीब 240 मिलियन डॉलर जुटाए, जो अमेरिका के इतिहास में सबसे ज्यादा है। इतना ही नहीं, व्हाइट हाउस में एक शानदार बॉलरूम बनाने के लिए भी चंदा लिया जा रहा है। ट्रम्प का कहना है कि इसके लिए करीब 350 मिलियन डॉलर जुट चुके हैं, हालांकि मीडिया हाऊस को करीब 100 मिलियन डॉलर के दानदाताओं की पुष्टि मिली है।
बेजोस की पूर्व पत्नी मैकेंजी ने दिया अरबों का दान, अमेजन में 43 प्रतिशत घटाई हिस्सेदारी
23 Dec, 2025 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेजन के संस्थापक जेफ बेजोस की पूर्व पत्नी और प्रसिद्ध परोपकारी मैकेंजी स्कॉट ने वर्ष 2025 में दान का एक नया वैश्विक कीर्तिमान स्थापित किया है। अपनी उदारता के लिए जानी जाने वाली स्कॉट ने इस साल कुल 7.1 बिलियन डॉलर (लगभग 7,166,000,000 डॉलर) का दान दिया है, जो किसी भी एक वर्ष में उनके द्वारा दी गई अब तक की सबसे बड़ी राशि है। उनकी आधिकारिक वेबसाइट यील्ड गिविंग पर साझा की गई जानकारी के अनुसार, यह विशाल धनराशि दुनिया भर की 186 विभिन्न संस्थाओं को वितरित की गई है। इन संस्थाओं में मुख्य रूप से विश्वविद्यालय, पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में कार्यरत संगठन और सामाजिक समानता के लिए संघर्ष करने वाली इकाइयां शामिल हैं।
इस वर्ष के दान की सबसे खास बात शैक्षणिक संस्थानों को दिया गया अटूट समर्थन रहा है। मैकेंजी स्कॉट ने हॉवर्ड यूनिवर्सिटी को 88 मिलियन डॉलर का दान दिया, जो इस विश्वविद्यालय के 158 वर्षों के लंबे इतिहास में किसी भी व्यक्तिगत दाता द्वारा दिया गया सबसे बड़ा योगदान है। इसके अलावा, उन्होंने शिक्षा और डिग्री प्राप्ति में सहायता करने वाली संस्था 10,000 डिग्री को 42 मिलियन डॉलर की राशि प्रदान की है। परोपकार की इस लंबी सूची के कारण वे अब दुनिया के सबसे बड़े दानदाताओं की श्रेणी में वॉरेन बफेट और बिल गेट्स जैसे दिग्गजों के समकक्ष आ खड़ी हुई हैं।
वित्तीय मोर्चे पर बात करें तो स्कॉट ने अपनी इस परोपकारी मुहिम को जारी रखने के लिए अमेजन में अपनी हिस्सेदारी को रणनीतिक रूप से कम किया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने हाल ही में लगभग 12.6 बिलियन डॉलर मूल्य के शेयर बेचे हैं। वर्तमान में उनके पास अमेजन के 81.10 मिलियन शेयर शेष हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में काफी कम हैं। वर्ष 2019 में जेफ बेजोस से अलग होने के बाद उन्हें मिली संपत्ति का एक बड़ा हिस्सा उन्होंने दान करने का संकल्प लिया था। लगभग 29.90 बिलियन डॉलर की कुल संपत्ति के साथ वे दुनिया की सबसे अमीर महिलाओं में से एक होने के बावजूद अपनी संपत्ति का 42 प्रतिशत हिस्सा अब तक समाज कल्याण के लिए बेच चुकी हैं।
अंधी रफ्तार से दौड़ रही बस अनियंत्रित होकर पलटी, 15 की मौत, 19 घायल
23 Dec, 2025 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सेमारंग। इंडोनेशिया में एक दर्दनाक हादसा हुआ है। यहां के सेंट्रल जावा प्रांत के सेमारंग शहर में सोमवार तड़के एक भीषण सड़क हादसे में कम से कम 15 लोगों की मौत हो गई, जबकि 19 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। यह दुर्घटना क्राप्याक टोल एग्जिट के पास चौराहे पर हुई, जहां एक तेज रफ्तार बस अनियंत्रित होकर रोड बैरियर से टकरा गई और पलट गई। स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक, हादसा तड़के उस वक्त हुआ जब बस तेज रफ्तार में थी। अचानक चालक का नियंत्रण बस से हट गया और बस सीधे सड़क किनारे लगे बैरियर से जा टकराई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बस पलट गई और कई यात्री उसके अंदर फंस गए। यह हादसा ऐसे समय पर हुआ है, जब कुछ ही दिन पहले इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में एक और दर्दनाक घटना सामने आई थी। जकार्ता में एक रिहायशी घर में आग लगने से पांच लोगों की मौत हो गई थी।
सेमारंग सर्च एंड रेस्क्यू ऑफिस के प्रमुख बुडियोनो ने बताया कि राहत और बचाव अभियान काफी चुनौतीपूर्ण रहा। उन्होंने कहा कि बस के शीशे टूट चुके थे और अंदर घुसने के रास्ते पूरी तरह बंद हो गए थे। कई लोग बस के अंदर फंसे हुए थे, जिन्हें निकालने के लिए बचाव दल को विशेष उपकरणों की मदद से रास्ता बनाना पड़ा। बुडियोनो के अनुसार, रेस्क्यू टीम को पलटी हुई बस के भीतर घुसकर बेहद सावधानी से घायलों तक पहुंचना पड़ा। कांच के टुकड़ों और मुड़ी हुई बस की संरचना के कारण हर कदम जोखिम भरा था, लेकिन कई घंटों की मशक्कत के बाद सभी पीड़ितों को बाहर निकाल लिया गया।
रिपोर्ट के मुताबिक, सेमारंग सर्च एंड रेस्क्यू ऑफिस ने पुष्टि की है कि सभी घायलों को स्थानीय अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है। मृतकों और घायलों की पहचान की प्रक्रिया जारी है, जबकि पुलिस और संबंधित एजेंसियां दुर्घटना के कारणों की जांच कर रही हैं।
आग की घटना भी दर्दनाक थी
जकार्ता रीजनल डिजास्टर मैनेजमेंट के प्रमुख इस्नावा अदजी ने बताया था कि आग गुरुवार रात करीब 8:10 बजे लगी थी। उन्होंने बताया कि आग बुझाने के लिए 10 फायर इंजनों को मौके पर लगाया गया और रात करीब 11 बजे आग पर काबू पाया जा सका। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि जिस घर में आग लगी, उसका इस्तेमाल एक्सेसरीज बनाने के वेयरहाउस के तौर पर भी किया जा रहा था। अधिकारियों का कहना है कि आग लगने की वजह बिजली का शॉर्ट सर्किट हो सकती है, हालांकि मामले की जांच अभी जारी है। लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने इंडोनेशिया में सड़क और अग्नि सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
थाई सेना का चिन्हित इलाकों पर कब्जा, कंबोडिया सेना को पीछे हटने पर किया मजबूर
23 Dec, 2025 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बैकांक,। थाईलैंड के पीएम अनुतिन चार्नविराकुल ने कहा है कि थाई सेना ने करीब सभी चिन्हित इलाकों पर नियंत्रण कर लिया है और अब कंबोडिया की सेना को पीछे हटने के लिए मजबूर किया जा रहा है। इन इलाकों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है, ताकि दोबारा कोई झड़प न हो। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक एक साक्षात्कार में अनुतिन ने बताया कि उन्होंने विदेश मंत्रालय को निर्देश दिया है कि सोमवार को आसियान के विदेश मंत्रियों की विशेष बैठक में थाईलैंड का पक्ष साफ तौर पर रखा जाए।
उन्होंने जोर देकर कहा कि थाईलैंड ने किसी भी समझौते का उल्लंघन नहीं किया है और न ही वह आक्रामक पक्ष है। सरकार द्वारा उठाए गए सभी कदम देश की संप्रभुता और सुरक्षा की रक्षा के लिए हैं। उन्होंने कहा कि थाईलैंड हमेशा अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों का पालन करता रहा है और स्थिति को और ज्यादा बिगड़ने से रोकने की कोशिश कर रहा है। थाईलैंड और कंबोडिया के बीच हुए हालिया संघर्ष में अब तक 34 थाई नागरिकों की मौत हो चुकी है।
रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता सुरसंत कोंगसिरी ने बताया कि सीमा पर झड़पों की घटनाएं अब धीरे-धीरे कम हो रही है। कुछ इलाकों में लोग अपने घरों को लौटने लगे हैं और राहत शिविरों की संख्या भी घटाई गई है। रविवार दोपहर कंबोडिया की सेना ने थाईलैंड के सा काओ प्रांत के सीमावर्ती इलाकों में गोलाबारी जारी रखी। इसके बाद अरण्यप्रथेट जिले के अधिकारियों को निवासियों को सुरक्षित इलाकों में जाने के लिए एक जरूरी नोटिस जारी करना पड़ा।
रिपोर्ट के मुताबिक रॉयल थाई नौसेना के प्रवक्ता ने बताया कि रविवार को त्रात प्रांत के बान नोंग री इलाके में एक अभियान में एक मरीन सैनिक लैंडमाइन पर पैर पड़ने से घायल हो गया। प्रवक्ता ने कहा कि यह घटना दिखाती है कि कंबोडिया की ओर से अब भी लैंडमाइन का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है।
भारत एक संप्रभु देश और भरोसेमंद पार्टनर है, हम व्यापार समझौते पर कर रहे काम: पुतिन
23 Dec, 2025 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मॉस्को। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत को एक संप्रभु देश और भरोसेमंद पार्टनर बताया है। पुतिन ने यह बात रविवार को सुप्रीम यूरेशियन इकनॉमिक काउंसिल के उद्घाटन अवसर पर कही। इस बैठक का मकसद यूरेशियन इकनॉमिक यूनियन के अंदर सहयोग को और गहरा करना है। इस दौरान पुतिन ने कहा कि ईएईयू ने खुद को उभरती हुई मल्टीपोलर दुनिया के एक आत्मनिर्भर केंद्र के रूप में मजबूती से स्थापित किया है। यूरेशियन यूनियन की स्थापना साल 2015 में रूस, बेलारूस और कजाकिस्तान ने की थी, जिसमें आगे चलकर आर्मेनिया और किर्गिस्तान भी शामिल हुए।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस बैठक में पुतिन ने भारत का जिक्र करते हुए कहा कि हम भारत के साथ एक और वरीयता वाले व्यापार समझौते पर काम कर रहे हैं। एक ऐसा देश जो संप्रभु है, भरोसेमंद साझेदार है और जिसकी 1.4 अरब लोगों की आबादी और 4 अरब अमेरिकी डॉलर की जीडीपी है। पुतिन ने कहा कि मुझे उम्मीद है कि सुप्रीम यूरेशियन काउंसिल की बैठक प्रोडक्टिव होगी और हमें आपसी हित के सभी मुद्दों पर प्रगति करने में मदद मिलेगी। इसी महीने की शुरुआत में रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने भारत का दौरा किया था, जहां उन्होंने पीएम मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक की थी।
रिपोर्ट के मुताबिक यात्रा पर पुतिन ने कहा था कि उनका देश भारत को सस्ती और किफायती दरों पर निर्बाध तेल का निर्यात जारी रखेगा। रिपोर्ट में बताया गया है कि भारतीय तेल रिफाइनर्स ने उन रूसी कंपनियों से तेल खरीदना फिर से शुरू कर दिया है, जिन पर पश्चिमी प्रतिबंध नहीं हैं।
न्यूजीलैंड में सिख धार्मिक जुलूस को प्रदर्शनकारियों ने रोका, पुलिस ने संभाले हालात
23 Dec, 2025 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वेलिंगटन। न्यूजीलैंड के साउथ ऑकलैंड में सिख धार्मिक जुलूस को रोकने के लिए स्थानीय प्रदर्शनकारी जुलूस के रास्ते में खड़े हो गए। प्रदर्शनकारी हाथ में बैनर लिए थे, जिस पर लिखा था- यह न्यूजीलैंड है, भारत नहीं। सिख समूहों ने घटना की निंदा करते हुए धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला बताया है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक यह घटना रविवार को नगर कीर्तन के दौरान हुई। जुलूस मनुरेवा में गुरुद्वारा नानकसर थाथ ईश्वर दरबार से शुरू हुआ था। जुलूस जब लौट रहा था, उसी दौरान इसे रोक दिया गया। इस घटना से सिख समूहों में नाराजगी है।
रिपोर्ट के मुताबिक घटना पर शिरोमणी अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने इसे धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला बताया है। बादल ने एक्स पर लिखा- कल न्यूजीलैंड के साउथ ऑकलैंड में स्थानीय प्रदर्शनकारियों के शांतिपूर्ण नगर कीर्तन जुलूस में बाधा डालने की कड़ी निंदा करता हूं। नगर कीर्तन एक पवित्र सिख परंपरा है- यह एक आनंदमय धार्मिक जुलूस है जिसमें श्री गुरुग्रंथ साहिब के भजन गाए जाते हैं, जो भक्ति, एकता और पूरी मानवता को आशीर्वाद देने को बढ़ावा देता है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक स्थानीय युवाओं का समूह बैनर लेकर पहुंचा और जुलूस का रास्ता रोक दिया। इस दौरान उन्होंने हाका डांस किया। हाका एक पारंपरिक माओरी डांस है जिसमें ऐतिहासिक रूप से युद्ध की रस्मों और मजबूत शारीरिक हरकतों का प्रदर्शन किया जाता है। इस दौरान पुलिस मौके पर पहुंची और हालात को काबू करने के लिए दखल दिया। बातचीत के बाद प्रदर्शनकारी हट गए, जिसके बाद जुलूस आगे बढ़ा और सुरक्षित रूप से गुरुद्वारे पहुंचा। घटना ने न्यूजीलैंड में रहने वाले सिख समुदाय के लोगों में अपनी धार्मिक आस्था की सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा हो गई है।
शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर से इस मुद्दे को न्यूजीलैंड सरकार के साथ उठाने की अपील की, जिसे भारतीय समुदाय की सुरक्षा और धार्मिक अधिकारों को सुनिश्चित और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। बादल ने कहा कि धमकाने की ऐसी हरकतें धार्मिक स्वतंत्रता और सार्वभौमिक भाईचारे की भावना के लिए खतरा है।
पाकिस्तान की फ्लाइट में अचानक खुले ऑक्सीजन मास्क, हड़कंप मचने पर करानी पड़ी आपात लैंडिंग
22 Dec, 2025 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लाहौर। पाकिस्तान की एक फ्लाइट में अचानक ऑक्सीजन मॉस्क खुलकर गिरने लगे। इसे देखकर यात्रियों में दहशत फैल गई और हड़कंप मच गया। जब हालात नहीं संभले तो विमान की आपात लैंडिंग सऊदी अरब में कराना पड़ी।जद्दा से लाहौर जा रही पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (पीआईए) की एक फ्लाइट में तकनीकी खराबी का अलर्ट मिला। इस घटना से विमान में सवार यात्रियों में भारी दहशत फैल गई। पीआईए के प्रवक्ता के मुताबिक, फ्लाइट पीके-860 तय कार्यक्रम के अनुसार रात 8 बजे लाहौर पहुंचने वाली थी, लेकिन तकनीकी समस्या सामने आने के बाद विमान को दमाम स्थित किंग फहद इंटरनेशनल एयरपोर्ट की ओर मोड़ दिया गया। विमान में 381 यात्री सवार थे, जिनमें बड़ी संख्या में उमराह जायरीन भी शामिल थे। रिपोर्ट्स के अनुसार, तकनीकी अलर्ट के बाद विमान में ऑक्सीजन मास्क अपने आप गिर गए, जिससे यात्रियों में घबराहट और अफरातफरी मच गई। हालांकि, पायलट और क्रू ने स्थिति को संभालते हुए सुरक्षित लैंडिंग कराई। रिपोर्ट में यह भी याद दिलाया गया कि पिछले महीने पीआईए की एक अन्य फ्लाइट पीके-859 (लाहौर से जेद्दा) को भी उड़ान के दौरान डायवर्ट कर कराची एयरपोर्ट पर उतारना पड़ा था, क्योंकि फर्स्ट ऑफिसर की विंडशील्ड में दरार आ गई थी। इतना ही नहीं, इस साल मार्च में पीआईए की एक घरेलू फ्लाइट पीके-306 लाहौर में उस हालत में उतरी थी, जब उसके लैंडिंग गियर का एक पहिया गायब पाया गया। हैरानी की बात यह रही कि जांच के बावजूद उस पहिए का कोई सुराग नहीं मिला। लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने पीआईए की तकनीकी देखरेख और यात्री सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पाकिस्तान में लगे भूकंप के झटके, डरे लोग घर से भागे
22 Dec, 2025 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। आए दिन कहीं न कहीं भूकंप की खबरें आ रहीं है। अब पाकिस्तान का बलूचिस्तान प्रांत एक बार फिर भूकंप के झटकों से कांप उठा है। सुबह खुजदार जिले में आए इस भूकंप ने लोगों के बीच भारी डर पैदा कर दिया। हालांकि रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता केवल 3.3 मापी गई लेकिन इसके झटके बहुत जोरदार महसूस किए गए। नेशनल सिस्मिक मॉनिटरिंग सेंटर (एनएसएमसी) की रिपोर्ट के अनुसार इस भूकंप की तीव्रता 3.3 रही। इसका केंद्र खुजदार शहर से लगभग 70 किलोमीटर पश्चिम दिशा में था। जबकि गहराई जमीन से मात्र 8 किलोमीटर नीचे थी। बता दें कि बलूचिस्तान भौगोलिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील क्षेत्र है क्योंकि यह भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों के सक्रिय जंक्शन पर स्थित है। यहाँ लगातार होने वाली हलचल के कारण छोटे और मध्यम स्तर के भूकंप आते रहते हैं। भूकंप के झटके लगते ही खुजदार और आसपास के इलाकों में अफरा-तफरी मच गई। लोग अपने घरों और इमारतों से निकलकर खुले मैदानों की ओर भागने लगे। बलूचिस्तान पहले भी विनाशकारी भूकंपों का सामना कर चुका है, इसलिए हल्का झटका भी लोगों को पुरानी यादों से डरा देता है। फिलहाल स्थानीय प्रशासन या आपदा प्रबंधन की ओर से किसी बड़े जान-माल के नुकसान की खबर नहीं मिली है। अधिकारी स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए हैं।
ढाका में दीपू को पहले मारा फिर जलाया, किसी धर्म के खिलाफ नहीं बोला फिर भी मार दिया
22 Dec, 2025 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका। बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ अत्याचार थमने का नाम नहीं ले रहा है। यहां यूनुस का विरोध के बहाने आए दिन सरेराह अल्पसंख्यकों का कत्ल किया जा रहा है। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार चुप्पी साधे मौत को तमाशा समझकर देख रही है। हाल में ही दीपू को पहले मारा गया फिर अधमरा कर उसे पेड़ से लटकाकर जलाया गया। जबकि उसने किसी भी धर्म के खिलाफ एक भी शब्द नहीं बोला था। इसके बाद भी उसे मार दिया गया।
हादी की मौत के बाद प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग है कि उनके हत्यारों को तुरंत सजा दी जाए। इसके साथ ही गृह मामलों के सलाहकार लेफ्टिनेंट जनरल सेवानिवृत्त एमडी जहांगीर आलम चौधरी के इस्तीफे की मांग भी तेज हो गई है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि हादी को गोली मारे जाने के एक हफ्ते बाद भी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो सकी। इंकलाब मंच संगठन के सचिव अब्दुल्ला अल जाबेर ने सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि अगर गृह सलाहकार ने इस्तीफा नहीं दिया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। जनाजे के बाद बड़ी संख्या में लोग शाहबाग चौराहे की ओर बढ़े, जहां इंकिलाब जिंदाबाद और ढाका ढाका जैसे नारे लगाए गए। कुछ प्रदर्शनकारियों ने शाहबाग का नाम बदलकर हादी चत्तर रखने की मांग भी की। बांग्लादेश में राजनीतिक उथल पुथल थमने का नाम नहीं ले रही है। जुलाई 2024 के आंदोलन के प्रमुख युवा नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या के बाद देश में लगातार तीसरे दिन शनिवार को भी विरोध प्रदर्शन जारी रहे। ढाका में कड़ी सुरक्षा के बीच हादी का जनाजा पढ़ा गया, लेकिन इसके साथ ही सड़कों पर गुस्सा और असंतोष साफ दिखाई दिया। शनिवार को मणिक मिया एवेन्यू, जो संसद भवन के पास स्थित है, वहां हादी की जनाजे की नमाज में देशभर से आए हजारों लोग शामिल हुए। ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने भारी सुरक्षा इंतजाम किए थे। करीब 1000 बॉडी वॉर्न कैमरों के साथ बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा ताकि किसी भी हालात को काबू में रखा जा सके।
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