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ईरान में 3500 मौतों के बाद अमेरिकी रक्षा मंत्री ने युद्ध को बताया दुनिया के लिए उपहार
26 Apr, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच जारी भीषण युद्ध में अब तक 3500 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, लेकिन इस मानवीय क्षति के बीच अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ का एक चौंकाने वाला बयान सामने आया है। हेगसेथ ने ईरान के खिलाफ जारी सैन्य कार्रवाई को दुनिया के लिए एक वरदान और उपहार करार दिया है। उनका तर्क है कि यह युद्ध वास्तव में वैश्विक सुरक्षा के लिए ईरान के परमाणु खतरे को जड़ से समाप्त करने की एक अनिवार्य प्रक्रिया है, जिससे अंततः पूरी दुनिया का भला होगा।
रक्षा मंत्री ने ऑपरेशन एपिक फ्यूरी की प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि कुछ ही हफ्तों में अमेरिकी सेना ने निर्णायक बढ़त हासिल कर ली है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका का एकमात्र लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार विकसित न कर पाए। इसके लिए ओमान की खाड़ी से लेकर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र तक अमेरिकी नौसेना ने अभेद्य घेराबंदी कर दी है। ईरान की ओर आने-जाने वाले संदिग्ध जहाजों को सख्ती से मोड़ा जा रहा है। अब तक केवल 34 गैर-ईरानी जहाजों को ही इस क्षेत्र से गुजरने की अनुमति मिली है। हेगसेथ ने यह भी संकेत दिया कि जल्द ही एक और विमानवाहक पोत इस सैन्य अभियान में शामिल होकर अमेरिकी पकड़ को और मजबूत करेगा। युद्ध के मैदान से आ रही खबरों के बीच एयर फोर्स जनरल डैन केन ने सैन्य कड़े रुख की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि पिछले सप्ताह एक विशाल कंटेनर जहाज द्वारा चेतावनी की अनदेखी करने पर सेंटकॉम के आदेश पर उसके इंजन रूम पर सीधी फायरिंग की गई। जहाज को अक्षम करने के बाद अमेरिकी नौसैनिकों ने उस पर कब्जा कर लिया। हालांकि, अमेरिकी दावों के विपरीत लॉयड लिस्ट इंटेलिजेंस और विंडवर्ड जैसी फर्मों का डेटा बताता है कि ईरान का गुमनाम बेड़ा (शैडो फ्लीट) अब भी सक्रिय है। ईरानी टैंकर ट्रैकिंग डेटा के साथ छेड़छाड़ कर और पाकिस्तानी समुद्री सीमा का सहारा लेकर अमेरिकी घेराबंदी को चकमा देने की कोशिश कर रहे हैं। रक्षा मंत्री हेगसेथ ने ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड (आईआरजीसी) की तुलना समुद्री लुटेरों से करते हुए कड़ी चेतावनी दी है कि यदि समुद्र में बारूदी सुरंगें बिछाई गईं, तो उन्हें तुरंत नष्ट कर दिया जाएगा। उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप के रुख को दोहराते हुए साफ किया कि अमेरिका किसी भी समझौते के लिए जल्दबाजी में नहीं है; वार्ता तभी संभव है जब ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह और स्थायी रूप से त्याग दे।
भारतीय 250 यहूदी पहुंचे इजरायल
26 Apr, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेल अवीव। भारत के पूर्वोत्तर राज्यों, मणिपुर और मिजोरम में निवास करने वाले बीने मनेशे समुदाय के लगभग 250 सदस्य गुरुवार को इजराइल पहुंच गए हैं। यह कदम इजराइल सरकार द्वारा पिछले साल शुरू किए गए एक विशेष अभियान का हिस्सा है, जिसके तहत भारत में रह रहे इस समुदाय के लोगों को वापस उनके मूल देश में बसाने की योजना बनाई गई है। इजराइल सरकार ने अगले पांच वर्षों के भीतर हजारों यहूदियों के आव्रजन (इमिग्रेशन) के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करने का वादा किया था, जिसकी पहली कड़ी के रूप में इस समूह का आगमन हुआ है।
इस महत्वपूर्ण पुनर्वास प्रक्रिया को ऑपरेशन विंग्स ऑफ डॉन का नाम दिया गया है। वर्ष 2026 के दौरान इस ऑपरेशन के माध्यम से लगभग 1,200 और लोगों को इजराइल लाने का लक्ष्य रखा गया है। इजराइल के अलिया और इंटीग्रेशन मंत्रालय के अनुसार, आगामी दो सप्ताहों में दो और उड़ानों की व्यवस्था की गई है। इस पूरी पुनर्वास परियोजना के लिए इजराइल सरकार ने लगभग 9 करोड़ शेकेल (तीन करोड़ अमेरिकी डॉलर) का भारी-भरकम बजट आवंटित किया है, ताकि आने वाले नागरिकों को सुव्यवस्थित तरीके से बसाया जा सके।
बीने मनेशे समुदाय का इतिहास काफी दिलचस्प और चर्चाओं भरा रहा है। इस समुदाय का दावा है कि वे बाइबिल में वर्णित मनेशे कबीले के वंशज हैं, जो लगभग 2,700 साल पहले निर्वासित किए गए 10 कबीलों में से एक था। माना जाता है कि सदियों के विस्थापन के दौरान यह समुदाय फारस, अफगानिस्तान, तिब्बत और चीन होता हुआ भारत के पूर्वोत्तर हिस्से तक पहुंचा। लंबी अवधि तक अलग-थलग रहने और स्थानीय संस्कृतियों के प्रभाव के बावजूद, इस समुदाय ने खतना जैसी अपनी कुछ मौलिक यहूदी धार्मिक परंपराओं को जीवित रखा। हालांकि, इनके यहूदी होने को लेकर लंबे समय तक धार्मिक और वैधानिक बहस चलती रही। वर्ष 2005 में सेफारदी समुदाय के मुख्य रब्बी श्लोमो अमर ने अंततः उन्हें इजराइल के वंशज के रूप में मान्यता प्रदान की, जिससे उनके लिए इजराइल की नागरिकता का कानूनी रास्ता साफ हुआ। जानकारों का कहना है कि भारत में रहने के दौरान कई लोग ईसाई धर्म में परिवर्तित हो गए थे, इसलिए इजराइली कानून के तहत पूर्ण नागरिक बनने के लिए उन्हें औपचारिक धर्मांतरण प्रक्रिया से गुजरना होगा। पिछले तीन दशकों में इस समुदाय के करीब 4,000 सदस्य पहले ही इजराइल जा चुके हैं, जबकि 6,000 अन्य अभी भी अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। इजराइल का गठन ही दुनिया भर के यहूदियों को एक सुरक्षित छत प्रदान करने के उद्देश्य से हुआ था, और वर्तमान योजना इसी विचारधारा को मजबूती प्रदान करती है।
वाशिंगटन के होटल में दनादन गोलियां, ट्रंप और वैंस की मौजूदगी से बढ़ी सनसनी
26 Apr, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन: अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन डीसी स्थित हिल्टन होटल में आज उस समय हड़कंप मच गया, जब 'व्हाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स डिनर' के दौरान अचानक फायरिंग शुरू हो गई। इस कार्यक्रम में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी मौजूद थे। गोलीबारी की आवाज सुनते ही कार्यक्रम स्थल पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
सीक्रेट सर्विस की मुस्तैदी से बचे राष्ट्रपति
घटना का जो वीडियो सामने आया है, उसमें देखा जा सकता है कि राष्ट्रपति ट्रंप मंच पर मौजूद थे, तभी होटल के ऊपरी तल पर गोलीबारी हुई। खतरे को भांपते हुए सीक्रेट सर्विस के जवानों ने तुरंत राष्ट्रपति ट्रंप और प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप को सुरक्षा घेरे में ले लिया और सुरक्षित बाहर निकाल लिया। वहीं, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को भी सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। डिनर में शामिल करीब 2600 मेहमानों में दहशत का माहौल था, कई लोगों को जान बचाने के लिए टेबल के नीचे छिपते हुए देखा गया।
संदिग्ध हमलावर हिरासत में
सुरक्षा एजेंसियों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पूरे होटल को खाली करा लिया। घटना के बाद पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में ले लिया गया है और सुरक्षाबलों ने संदिग्ध हमलावर को पकड़ लिया है। राहत की बात यह है कि इस घटना में किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं है।
ट्रंप का बयान: 'हमें इसे फिर से करना होगा'
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर पोस्ट करते हुए बताया कि संदिग्ध हमलावर को हिरासत में ले लिया गया है। उन्होंने कहा, "मैंने सुझाव दिया था कि शो को जारी रखा जाए, लेकिन मैं सुरक्षा और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के निर्देशों का पूर्णतः पालन करूँगा।"
ट्रंप ने आगे कहा कि आज की शाम वैसी नहीं रही जैसी योजना बनाई गई थी। उन्होंने घटना का जिक्र करते हुए कहा कि, "हमें इसे फिर से आयोजित करना होगा।" गौरतलब है कि ट्रंप ने अपने संदेश में याद दिलाया कि 40 साल पहले इसी स्थान पर एक अमेरिकी राष्ट्रपति की हत्या हुई थी, जिसने इस घटना की गंभीरता को और बढ़ा दिया है।
इटली की पीएम मेलोनी ने भारतीय झुमके पहनकर दिया राष्ट्रपति ट्रंप को करारा जवाब!
26 Apr, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रोम। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी एक बार फिर अपनी एक सोशल मीडिया पोस्ट के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का केंद्र बन गई हैं। इस बार वजह कोई आधिकारिक बयान नहीं, बल्कि उनकी एक सेल्फी है जिसमें वे भारतीय शैली के पारंपरिक झुमके पहने नजर आ रही हैं। इस देसी लुक के पीछे छिपा राजनीतिक संदेश इतना तीखा है कि इसकी गूंज वॉशिंगटन से लेकर पूरे यूरोप तक सुनाई दे रही है। मेलोनी ने इस साधारण दिखने वाली तस्वीर के जरिए यह साफ कर दिया है कि उनकी सरकार किसी बाहरी दबाव के आगे झुकने वाली नहीं है।
मेलोनी ने इंस्टाग्राम पर इस सेल्फी को साझा करते हुए एक बेहद सख्त कैप्शन लिखा। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए अपने विरोधियों को सत्ता का प्रचारक बताया और कहा कि वे उन्हें स्थिरता या आजादी का पाठ न पढ़ाएं। मेलोनी ने स्पष्ट शब्दों में लिखा-हमारा कोई मालिक नहीं है और हम किसी से आदेश नहीं लेते। हमारा एकमात्र लक्ष्य इटली का हित है। उनके इस बयान को सीधे तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को दिए गए जवाब के रूप में देखा जा रहा है। दरअसल, ईरान संघर्ष के मुद्दे पर जब मेलोनी ने अमेरिका का बिना शर्त समर्थन करने से इनकार किया था, तब ट्रंप ने उन्हें कायर कहकर संबोधित किया था। मेलोनी का यह ताजा पोस्ट उसी तंज का एक प्रभावी पलटवार है। इस सेल्फी का इंडियन कनेक्शन भी कूटनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मेलोनी का भारतीय झुमके पहनना न केवल भारत और इटली के प्रगाढ़ होते संबंधों की ओर इशारा करता है, बल्कि यह उनकी सॉफ्ट पावर कूटनीति का भी एक हिस्सा है। भारतीय सोशल मीडिया पर इस तस्वीर को लेकर जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है, जिससे भारत में उनकी लोकप्रियता और अधिक बढ़ गई है। विशेषज्ञ इसे मेलोनी की वायरल डिप्लोमेसी कह रहे हैं, जिसके माध्यम से वे फैशन और भावनाओं का उपयोग कर अंतरराष्ट्रीय राजनीति के समीकरणों को प्रभावित कर रही हैं। मेलोनी का यह कड़ा रुख केवल अमेरिका के लिए नहीं, बल्कि यूरोपीय संघ के उन नेताओं के लिए भी एक चेतावनी है जो इटली की नीतियों को नियंत्रित करना चाहते हैं। अपनी इस पोस्ट से मेलोनी ने वैश्विक मंच पर यह संदेश पहुंचा दिया है कि इटली अब किसी रिमोट कंट्रोल से नहीं चलेगा। उनकी इस बेबाकी ने यह साबित कर दिया है कि वे अपनी शर्तों पर राजनीति करने वाली एक सशक्त नेता हैं, जो राष्ट्रहित के साथ कोई समझौता नहीं करेंगी।
माली की राजधानी बमाको समेत कई शहरों में धमाके व गोलीबारी
26 Apr, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बमाको। पश्चिम अफ्रीकी देश माली में शनिवार को बड़ा सुरक्षा संकट देखने को मिला, जब राजधानी बमाको और आसपास के कई शहरों में एक साथ गोलीबारी और धमाकों की घटनाएं सामने आईं। इन हमलों से पूरे क्षेत्र में दहशत फैल गई।
राजधानी बमाको के मोदिबो कीता अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और उसके आसपास भारी गोलीबारी की आवाजें सुनी गईं। यह इलाका माली वायुसेना के एयर बेस के पास स्थित है, जिससे सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया। स्थानीय प्रशासन और सेना ने मीडिया को बताया, कि अज्ञात हथियारबंद समूहों ने कई प्रमुख रणनीतिक स्थानों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। शुरुआती रिपोर्टों में इन हमलों के पीछे अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट से जुड़े गुटों के शामिल होने की आशंका जताई गई है, हालांकि किसी भी संगठन ने अभी तक जिम्मेदारी नहीं ली है।
माली सेना ने बयान जारी कर कहा है कि सुरक्षा बल हमलावरों को रोकने के लिए कार्रवाई कर रहे हैं और कई क्षेत्रों में मुठभेड़ जारी है। हेलीकॉप्टरों की गश्त और अतिरिक्त सैन्य बलों की तैनाती भी की गई है।
कुछ रिपोर्टों के अनुसार, पूर्वोत्तर शहर किदाल और गाओ में भी हिंसा की घटनाएं सामने आई हैं, जहां सशस्त्र समूहों ने कुछ इलाकों पर नियंत्रण का दावा किया है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार स्थानीय निवासियों का कहना था, कि धमाकों और गोलीबारी की आवाजें कई घंटों तक सुनाई देती रहीं, जिससे लोग बाहर नहीं निकले और अपने-अपने घरों में ही कैद होकर रह गए। धमाकों की तीव्रता इतनी अधिक थी कि खिड़कियां और दरवाजे तक हिल गए।
विशेषज्ञों के अनुसार, माली, नाइजर और बुर्किना फासो में पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है और आतंकवादी हमलों में बढ़ोतरी देखी गई है। फिलहाल माली की सेना स्थिति को नियंत्रित करने में जुटी है, लेकिन पूरे क्षेत्र में तनाव और दहशत का माहौल बना हुआ है।
नदी बचाओ अभियान के तहत बड़ी कार्रवाई, प्रशासन का बड़ा कदम
25 Apr, 2026 10:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
काठमांडू में बड़ा एक्शन: बागमती नदी के तट से हटाए गए सैकड़ों अवैध निर्माण, बालेन शाह के प्रयासों को मिली सफलता
काठमांडू। नेपाल की राजधानी काठमांडू को स्वच्छ और व्यवस्थित बनाने के संकल्प के साथ सरकार ने बागमती नदी के किनारों पर बड़ा स्वच्छता अभियान चलाया है। शनिवार को प्रशासन ने नदी तट पर सालों से काबिज अवैध झोपड़ियों और अस्थायी निर्माणों पर बुलडोजर चलाकर उन्हें ध्वस्त कर दिया। इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य बागमती नदी के प्राकृतिक स्वरूप को बहाल करना और शहर के सौंदर्य को निखारना है।
संयुक्त अभियान में हटाए गए सैकड़ों परिवार
यह बड़ी कार्रवाई मेयर बालेन्द्र शाह (बालेन) के नेतृत्व वाली काठमांडू महानगरपालिका और संघीय सरकार ने आपसी तालमेल से पूरी की। सुरक्षा के लिए सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस की टुकड़ियाँ तैनात रहीं।
प्रमुख क्षेत्र: मुख्य रूप से थापाथली और गैरेगौण इलाकों में यह अभियान चलाया गया।
प्रभाव: जानकारी के अनुसार, थापाथली से लगभग 146 और गैरेगौण क्षेत्र से करीब 200 परिवारों को हटाया गया है।
पुनर्वास: बेघर हुए परिवारों के लिए प्रशासन ने संवेदनशीलता दिखाते हुए दशरथ स्टेडियम और कीर्तिपुर नगर पालिका में अस्थायी शिविरों का इंतजाम किया है, जहाँ कई परिवारों को सुरक्षित शिफ्ट कर दिया गया है।
बालेन शाह की पुरानी कोशिशों को मिला अंजाम
बागमती किनारे से अतिक्रमण हटाने की जद्दोजहद लंबे समय से चल रही थी। मेयर बालेन शाह ने पहले भी थापाथली में इस तरह के अभियान की शुरुआत की थी, लेकिन तब केंद्र सरकार (केपी ओली नेतृत्व) का सहयोग न मिलने के कारण मिशन अधूरा रह गया था। इस बार संघीय सरकार के पूर्ण समर्थन के चलते सालों से अटकी इस योजना को सफलतापूर्वक पूरा किया गया।
बिना हंगामे के संपन्न हुई कार्रवाई
आमतौर पर ऐसी विस्थापन कार्रवाइयों में भारी विरोध देखा जाता है, लेकिन इस बार माहौल पूरी तरह शांत रहा। इसके पीछे सरकार की कुशल रणनीति रही:
पूर्व सूचना: प्रशासन ने कार्रवाई से काफी पहले ही लोगों को नोटिस जारी कर दिया था।
स्वेच्छा से सहयोग: लोगों से अपना सामान समेटने की अपील की गई थी, जिसका सकारात्मक असर दिखा।
पुनर्वास का भरोसा: सरकार द्वारा रहने के लिए वैकल्पिक जगह और बुनियादी सुविधाओं के वादे ने लोगों के गुस्से को शांत रखा।
जारी रहेगा सफाई अभियान
काठमांडू प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि यह अभियान केवल थापाथली तक सीमित नहीं है। आने वाले दिनों में शांतिनगर और गौशाला जैसे इलाकों में भी बागमती नदी के किनारों पर बने अवैध निर्माणों को ढहाया जाएगा। सरकार का अंतिम लक्ष्य पूरे काठमांडू शहर को अतिक्रमण मुक्त कर एक आधुनिक और स्वच्छ राजधानी के रूप में विकसित करना है।
गवाह से बड़ी रकम बरामद, पुलिस ने शुरू की आगे की जांच
25 Apr, 2026 05:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
आसाराम और नारायण साईं मामलों में मुख्य गवाह रहे महेंद्र चावला की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। पुलिस ने जबरन वसूली के मामले में कार्रवाई करते हुए उनके पास से अब तक 42 लाख रुपये की नकद राशि बरामद कर ली है। पुलिस रिमांड की अवधि समाप्त होने के बाद शनिवार को महेंद्र चावला को कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।
क्या है पूरा मामला?
महेंद्र चावला, उनके भाई देवेंद्र चावला और भतीजे राम को पुलिस ने 18 अप्रैल को गिरफ्तार किया था। इनके खिलाफ सेक्टर-12 के निवासी भगत सिंह ने चांदनीबाग थाने में केस दर्ज कराया था।
मुख्य आरोप: आरोप है कि महेंद्र चावला ने सनौली गांव के पूर्व सरपंच सुरेंद्र शर्मा के साथ चल रहे एक कानूनी मामले में अपनी गवाही से पलटने के बदले 70 लाख रुपये लिए थे।
अतिरिक्त मांग: शिकायतकर्ता के अनुसार, इसके बाद आरोपियों द्वारा 80 लाख रुपये की और मांग की जा रही थी।
पुलिस की कार्रवाई और बरामदगी
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने महेंद्र चावला को दो बार रिमांड पर लिया:
पहला रिमांड: पहले तीन दिनों की पूछताछ में पुलिस ने 24 लाख रुपये बरामद किए थे। इस दौरान उनके भाई देवेंद्र और भतीजे राम को जेल भेज दिया गया था।
दूसरा रिमांड: महेंद्र चावला को दोबारा दो दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया, जिसमें पुलिस ने 18 लाख रुपये और बरामद किए।
अब तक कुल मिलाकर 42 लाख रुपये की रिकवरी की जा चुकी है।
फरार आरोपी की तलाश
पूछताछ में यह तथ्य सामने आया है कि वसूली गई बाकी की रकम महेंद्र चावला के दूसरे भतीजे के पास है। पुलिस की टीमें फरार आरोपी की गिरफ्तारी और बकाया नकदी की बरामदगी के लिए लगातार छापेमारी कर रही हैं।
आधिकारिक बयान: मुख्यालय डीएसपी सतीश वत्स ने पुष्टि की है कि आरोपी महेंद्र चावला को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है और शेष राशि की बरामदगी के लिए दबिश दी जा रही है।
अमेरिका में सख्ती की तैयारी, विदेशी वर्कर्स पर फोकस
25 Apr, 2026 04:59 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
H-1B वीजा पर संकट: अमेरिकी संसद में नया विधेयक पेश, भारतीय पेशेवरों की राह हो सकती है मुश्किल
वॉशिंगटन। अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के तहत विदेशी कामगारों और प्रवासियों को लेकर नियमों को और सख्त करने की कवायद तेज हो गई है। हाल ही में रिपब्लिकन पार्टी के सांसदों ने अमेरिकी कांग्रेस में एक बेहद कड़ा विधेयक पेश किया है, जिसका सीधा असर भारत और चीन जैसे देशों के कुशल पेशेवरों पर पड़ सकता है।
इस विधेयक का नाम 'एंड एच-1बी वीजा अब्यूज एक्ट 2026' है। इसका मुख्य उद्देश्य विदेशी श्रमिकों की निर्भरता कम कर अमेरिकी नागरिकों के लिए रोजगार के अवसर सुरक्षित करना बताया गया है।
क्या है 'एंड एच-1बी वीजा अब्यूज एक्ट 2026'?
यह विधेयक एरिजोना के रिपब्लिकन सांसद एली क्रेन और उनके सहयोगियों द्वारा पेश किया गया है। इन सांसदों का तर्क है कि बड़ी कंपनियां एच-1बी वीजा का दुरुपयोग कर स्थानीय अमेरिकी नागरिकों के बजाय कम वेतन पर विदेशी पेशेवरों को नियुक्त कर रही हैं।
विधेयक के प्रमुख और कड़े प्रस्ताव:
वीजा पर 3 साल का पूर्ण प्रतिबंध: नए एच-1बी वीजा जारी करने पर तत्काल प्रभाव से तीन साल की रोक लगाने का प्रस्ताव है।
सालाना कोटा में कटौती: हर साल जारी होने वाले वीजा की सीमा को 65,000 से घटाकर मात्र 25,000 करने की बात कही गई है।
न्यूनतम वेतन में भारी वृद्धि: एच-1बी कर्मचारियों का सालाना न्यूनतम वेतन बढ़ाकर 2 लाख डॉलर (लगभग 1.87 करोड़ रुपये) करने का सुझाव है, ताकि कंपनियों के लिए विदेशी कर्मचारी महंगे साबित हों।
H-4 वीजा का खात्मा: पेशेवरों के जीवनसाथी और बच्चों को मिलने वाले आश्रित वीजा (H-4) को बंद करने का प्रस्ताव है।
ग्रीन कार्ड की राह बंद: इस विधेयक के तहत एच-1बी धारकों को स्थायी निवास (ग्रीन कार्ड) हासिल करने से रोकने का प्रावधान है।
छात्रों पर असर: अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए पढ़ाई के बाद काम करने की अनुमति देने वाले ओपीटी (OPT) कार्यक्रम को खत्म करने की बात कही गई है।
भारी-भरकम फीस: विदेशी कर्मचारी रखने पर कंपनियों को 1 लाख डॉलर की अतिरिक्त फीस देनी होगी।
भारत और चीन पर क्या होगा असर?
अगर यह विधेयक कानून बनता है, तो इसका सबसे बड़ा प्रहार भारतीय आईटी सेक्टर और पेशेवरों पर होगा।
आंकड़े: वित्त वर्ष 2024 में कुल मंजूर एच-1बी याचिकाओं में से 71% (लगभग 2.83 लाख) भारतीय नागरिकों की थीं।
प्रवेश पर रोक: नए पेशेवरों के अमेरिका जाने का रास्ता लगभग बंद हो जाएगा और वहां मौजूद लोगों को भी वापस लौटने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।
विकल्प: हालांकि, उच्च पदों पर बैठे अधिकारी L-1 वीजा का उपयोग जारी रख सकेंगे, लेकिन सामान्य आईटी पेशेवरों के लिए मुश्किलें बढ़ जाएंगी।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
जानकारों का मानना है कि इस विधेयक को पारित कराना इतना आसान नहीं होगा। अमेरिकी संसद के दोनों सदनों में इसे बहुमत प्राप्त करना होगा, विशेषकर सीनेट में जहाँ 60 वोटों की आवश्यकता होती है। कई विश्लेषक इसे वास्तविक नीतिगत बदलाव के बजाय एक राजनैतिक संकेत मान रहे हैं।
दूसरी ओर, 'इमिग्रेशन अकाउंटेबिलिटी प्रोजेक्ट' जैसे समूहों का कहना है कि यह अब तक का सबसे मजबूत बिल है जो वास्तव में अमेरिकी श्रमिकों के हितों की रक्षा करेगा।
ट्रंप समर्थकों द्वारा पेश किए गए अन्य प्रमुख विधेयक:
इस नए एक्ट से पहले भी एच-1बी कार्यक्रम को निशाना बनाने वाले कई प्रस्ताव लाए जा चुके हैं:
द एसिमिलेशन एक्ट: एच-1बी को पूरी तरह खत्म करने और वीजा लॉटरी बंद करने का प्रस्ताव।
द एक्साइल एक्ट: साल 2027 तक एच-1बी वीजा की संख्या को शून्य (0) करने की मांग।
द पॉज एक्ट: छात्र प्रशिक्षण कार्यक्रमों को रद्द करने और एच-1बी श्रेणी को ही समाप्त करने का सुझाव।
$100,000 फीस नियम: राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा प्रस्तावित वह नियम जिसमें नए आवेदनों पर भारी शुल्क लगाने की बात कही गई है।
चुनावी मैदान में महिलाओं की मजबूत एंट्री, पार्टियों की नई रणनीति
25 Apr, 2026 03:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़। नारी शक्ति वंदन अधिनियम के संसद में पारित होने के बाद, अब इसका प्रभाव जमीनी स्तर पर भी नजर आने लगा है। आगामी निकाय चुनावों में भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों ने टिकट वितरण में महिलाओं को खासी तरजीह दी है। यह बदलाव साफ संकेत देता है कि राजनीतिक दल अब महिलाओं को केवल 'वोट बैंक' के रूप में ही नहीं, बल्कि सक्रिय नेतृत्व के तौर पर देख रहे हैं।
टिकट वितरण: भाजपा बनाम कांग्रेस
निकाय चुनावों (नगर निगम, परिषद और पालिका) के लिए जारी की गई सूचियों में दोनों प्रमुख दलों ने महिलाओं को महत्वपूर्ण भागीदारी दी है:
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा): पार्टी ने अब तक घोषित 117 उम्मीदवारों में से 47 सीटों पर महिलाओं को चुनावी मैदान में उतारा है। यह कुल सीटों का लगभग 40.7% है।
कांग्रेस: कांग्रेस ने अब तक जारी 45 टिकटों में से 27 महिलाओं को आवंटित किए हैं, जो कि 60% की बड़ी हिस्सेदारी है। हालांकि, कांग्रेस की अंतिम सूची 25 अप्रैल तक आने की संभावना है, जिससे ये आंकड़े बदल सकते हैं।
प्रमुख जिलों में भागीदारी का विवरण
जिला/निकाय
भाजपा (महिला उम्मीदवार)
कांग्रेस (महिला उम्मीदवार)
सोनीपत
22 में से 9
18 में से 9
अंबाला
20 में से 9
20 में से 8
पंचकूला
20 में से 7
18 में से 6
मेयर पद
3 में से 1
3 में से 2
रेवाड़ी
32 में से 13
सूची प्रतीक्षित
सांपला
16 में से 6
सूची प्रतीक्षित
सार्वजनिक स्थानों पर बढ़ी जांच, लोगों से सतर्क रहने की अपील
25 Apr, 2026 02:52 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बांग्लादेश में आतंकी हमले का अलर्ट: संसद और सैन्य ठिकानों सहित कई संवेदनशील स्थलों की सुरक्षा बढ़ाई गई
ढाका। बांग्लादेश में संभावित आतंकवादी हमलों की खुफिया जानकारी मिलने के बाद पूरे देश में 'नेशनल सिक्योरिटी अलर्ट' जारी कर दिया गया है। सुरक्षा एजेंसियों ने राष्ट्रीय संसद, धार्मिक स्थलों, सैन्य प्रतिष्ठानों और सार्वजनिक मनोरंजन केंद्रों को संभावित खतरों की सूची में रखा है। विशेष रूप से शस्त्रागारों (आर्मरियों) की सुरक्षा को लेकर कड़ा निर्देश दिया गया है।
खुफिया रिपोर्ट के बाद बढ़ी हलचल
पुलिस मुख्यालय के वरिष्ठ सूत्रों के अनुसार, यह गोपनीय अलर्ट हालिया खुफिया इनपुट्स के आधार पर जारी किया गया है। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तत्काल कार्रवाई करें।
क्या है अलर्ट की मुख्य वजह?
बताया जा रहा है कि हाल ही में एक प्रतिबंधित चरमपंथी संगठन के सक्रिय सदस्य, इस्तिक अहमद सामी उर्फ अबू बकर की गिरफ्तारी हुई है। पूछताछ में सामने आया है कि वह सेना से बर्खास्त किए गए दो पूर्व कर्मियों के संपर्क में था।
सुरक्षा रिपोर्टों में दो मुख्य साजिशकर्ताओं को चिन्हित किया गया है, जिन्हें देश की सुरक्षा के लिए 'अत्यंत घातक' माना जा रहा है।
हालांकि, आधिकारिक तौर पर अभी किसी विशेष आतंकी संगठन के नाम का खुलासा नहीं किया गया है।
सुरक्षा एजेंसियों को कड़े निर्देश
आतंकवाद विरोधी अभियानों को और तेज करने के लिए पुलिस मुख्यालय ने विशेष इकाइयों को सक्रिय कर दिया है, जिनमें शामिल हैं:
सीआईडी (CID): आपराधिक जांच विभाग को निगरानी तेज करने को कहा गया है।
विशेष शाखा (SB): खुफिया तंत्र को और अधिक मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं।
सीटीटीसी (CTTC): आतंकवाद निरोधक और अंतर्राष्ट्रीय अपराध इकाई को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
US-Iran Talks: ईरान ने साफ किया रुख, शर्तों के बिना बातचीत नहीं
25 Apr, 2026 02:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ईरान और अमेरिका के बीच कूटनीतिक हलचल: मध्यस्थ की भूमिका में पाकिस्तान सक्रिय
तेहरान/इस्लामाबाद। पश्चिम एशिया में जारी भारी तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के मध्य रुकी हुई बातचीत को फिर से शुरू करने की सुगबुगाहट तेज हो गई है। वर्तमान में दोनों देशों के बीच सीधे संवाद के रास्ते बंद हैं, लेकिन बैक-चैनल कूटनीति के जरिए संपर्क साधने के प्रयास किए जा रहे हैं। इस पूरी प्रक्रिया में पाकिस्तान एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में उभरकर सामने आया है।
पाकिस्तान की मध्यस्थता और कूटनीतिक प्रयास
हाल ही में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस्लामाबाद का दौरा किया, जहाँ उन्होंने पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व (जनरल असीम मुनीर) के साथ उच्च स्तरीय वार्ता की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय शांति और दोनों प्रतिद्वंद्वी देशों के बीच संवाद के लिए एक साझा मंच तैयार करना था। पाकिस्तान इस समय वॉशिंगटन और तेहरान के बीच एक सेतु (Bridge) की भूमिका निभाने की पुरजोर कोशिश कर रहा है।
सीधे संवाद की राह में प्रमुख चुनौतियाँ
ईरान ने अमेरिका के साथ किसी भी सीधी मेज पर बैठने के लिए कड़ी शर्तें रखी हैं:
प्रतिबंधों का मुद्दा: ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका अपनी आर्थिक और सामरिक नाकाबंदी खत्म नहीं करता, तब तक सीधी बातचीत संभव नहीं है।
अप्रत्यक्ष संवाद: ईरान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, वर्तमान में कोई भी सीधी बैठक प्रस्तावित नहीं है। तेहरान अपने संदेशों और चिंताओं को पाकिस्तानी दूतों के माध्यम से अमेरिका तक पहुँचाने के विकल्प पर काम कर रहा है।
तनाव के प्रमुख कारण
पिछले कुछ महीनों में दोनों शक्तियों के बीच संबंध अपने सबसे निचले स्तर पर पहुँच गए हैं। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
सैन्य तैनाती: अमेरिका द्वारा क्षेत्र में नौसैनिक बेड़े भेजे जाने से स्थिति संवेदनशील हो गई है।
समुद्री मार्ग का अवरोध: जवाबी कार्रवाई में ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की चेतावनी और जहाजों की जब्ती ने संघर्ष की आशंका बढ़ा दी है।
बंदरगाहों की नाकाबंदी: दोनों पक्षों द्वारा एक-दूसरे के व्यापारिक हितों को चोट पहुँचाने की कोशिशों से अविश्वास और गहरा गया है।
अन्य वैश्विक मध्यस्थ
पाकिस्तान के अलावा ओमान और रूस भी इस कूटनीतिक गतिरोध को कम करने में जुटे हैं। विशेष रूप से ओमान का इतिहास ईरान और अमेरिका के बीच जिनेवा जैसे मंचों पर सफल अप्रत्यक्ष वार्ता कराने का रहा है।
ईरान की आंतरिक राजनीति का असर
ईरान के भीतर चल रही वैचारिक खींचतान भी वार्ता की राह में एक बड़ा रोड़ा है। वहाँ के उदारवादी और कट्टरपंथी धड़ों के बीच कूटनीति को लेकर अलग-अलग राय है। दूसरी ओर, अमेरिकी नेतृत्व ईरान की इस आंतरिक स्थिति पर पैनी नजर रखे हुए है और फिलहाल संघर्ष विराम जैसी स्थितियों को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ाकर कूटनीति को एक मौका देना चाहता है।
मिडिल ईस्ट में हलचल: खामेनेई के बेटे को लेकर फैली खबरों का सच
25 Apr, 2026 12:12 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ईरान-इस्राइल युद्ध: मोजतबा खामेनेई की रहस्यमयी स्थिति और सुरक्षा चक्र पर बड़ा खुलासा
तेहरान/वॉशिंगटन। पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष के बीच ईरान के भावी नेतृत्व को लेकर चर्चाएं तेज हैं। 28 फरवरी को हुए हमले के बाद अमेरिका और इस्राइल को उम्मीद थी कि ईरान में सत्ता परिवर्तन आसान होगा, लेकिन अली खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई ने इस योजना को कड़ी चुनौती दी है।
खुफिया एजेंसियों को दे रहे हैं चकमा
ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, 28 फरवरी के हमले में गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद मोजतबा न सिर्फ जीवित हैं, बल्कि एक गुप्त स्थान से देश और सेना का संचालन कर रहे हैं। सीआईए (CIA) और मोसाद (Mossad) जैसी एजेंसियों से बचने के लिए उनकी सुरक्षा में अभूतपूर्व बदलाव किए गए हैं:
डिजिटल दूरी: उनके ठिकाने पर इंटरनेट या किसी भी इलेक्ट्रॉनिक नेटवर्क का उपयोग पूरी तरह वर्जित है।
मानव श्रृंखला: मोजतबा तक संदेश पहुंचाने के लिए केवल हस्तलिखित पत्रों का उपयोग किया जाता है, जिन्हें भरोसेमंद दूतों के माध्यम से पहुंचाया जाता है।
अज्ञात लोकेशन: उनकी सुरक्षा इतनी कड़ी है कि आईआरजीसी (IRGC) के शीर्ष कमांडर भी सीधे उनसे नहीं मिलते, ताकि कोई उनकी लोकेशन को ट्रैक न कर सके।
सार्वजनिक रूप से सामने न आने की वजह
विशेषज्ञों और ईरानी अधिकारियों के हवाले से खबर है कि मोजतबा शारीरिक रूप से घायल हैं और वह अपनी 'कमजोर' छवि दुनिया के सामने पेश नहीं करना चाहते। यही कारण है कि उनकी ओर से केवल लिखित बयान जारी किए जाते हैं, जिन्हें सरकारी मीडिया द्वारा पढ़ा जाता है।
बदलते दावे और हकीकत
जहाँ अमेरिका और इस्राइल शुरुआत में उनके मारे जाने या पूरी तरह अक्षम होने का दावा कर रहे थे, वहीं अब यह स्पष्ट हो रहा है कि वह मानसिक रूप से सक्रिय हैं। हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों में मोजतबा पूरी तरह स्वतंत्र नहीं हैं और वह 'रिवोल्यूशनरी गार्ड्स' के सहयोग व सामूहिक निर्णयों के आधार पर शासन चला रहे हैं।
जॉर्जिया मेलोनी का देसी अंदाज वायरल, झुमकों ने खींचा ध्यान
25 Apr, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इटली। प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी एक बार फिर इंटरनेट पर सुर्खियां बटोर रही हैं। इस बार उनकी चर्चा का कारण कोई कूटनीतिक समझौता नहीं, बल्कि उनका खास अंदाज और एक्सेसरीज हैं। मेलोनी द्वारा साझा की गई एक हालिया तस्वीर ने भारतीय सोशल मीडिया यूजर्स का ध्यान अपनी ओर खींच लिया, क्योंकि इसमें वे पारंपरिक भारतीय 'झुमका' पहने नजर आईं।
विंटर लुक के साथ भारतीय झुमकों का संगम
जॉर्जिया मेलोनी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर एक सेल्फी साझा की, जिसमें उनका पहनावा काफी पेशेवर और प्रभावशाली था। उन्होंने चारकोल रंग का ब्लेजर और बेज निट टॉप पहना था। उनके इस पॉलिश्ड विंटर लुक में जो चीज सबसे अलग दिखी, वह थे उनके कान के झुमके। इन झुमकों पर घुंघरू शैली की बारीक कारीगरी थी, जो स्पष्ट रूप से भारतीय पारंपरिक आभूषणों की याद दिलाती है।
राजनीतिक संदेश पर भारी पड़ा फैशन
दिलचस्प बात यह है कि इस पोस्ट के जरिए मेलोनी ने इटली के राष्ट्रीय हितों, स्वतंत्रता और प्रचार (Propaganda) को लेकर एक गंभीर राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की थी। हालांकि, भारतीय इंटरनेट यूजर्स की नजरें उनके संदेश से ज्यादा उनके कानों के झुमकों पर टिक गईं। देखते ही देखते यह तस्वीर भारतीय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वायरल हो गई।
भारतीय यूजर्स की प्रतिक्रिया: 'सांस्कृतिक जीत'
तस्वीर वायरल होते ही कमेंट सेक्शन में भारतीयों की प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई:
सांस्कृतिक प्रभाव: कई लोगों ने इसे 'सॉफ्ट पावर' का उदाहरण बताते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति और फैशन अब वैश्विक स्तर पर बड़े नेताओं को भी प्रभावित कर रहा है।
मजेदार मीम्स: कुछ यूजर्स ने इसे हल्के-फुल्के अंदाज में 'बॉलीवुड स्टाइल' बताया, तो कुछ ने कहा कि भारतीय झुमकों की सुंदरता के आगे पूरी दुनिया नतमस्तक है।
अनोखा मेल: यूजर्स इस बात से काफी प्रभावित दिखे कि मेलोनी ने पश्चिमी औपचारिक कपड़ों (वेस्टर्न फॉर्मल्स) के साथ भारतीय झुमकों का इतना सुंदर तालमेल बैठाया है।
वैश्विक मंच पर भारतीय परंपरा का गौरव
भारत में झुमका केवल एक आभूषण नहीं, बल्कि एक गहरी सांस्कृतिक पहचान है। सदियों से यह त्योहारों, शादियों और भारतीय श्रृंगार का अभिन्न अंग रहा है। आज की आधुनिक पीढ़ी भी इसे बड़े चाव से पहनती है।
जब इटली जैसे देश की प्रधानमंत्री वैश्विक मंच पर भारतीय कला का प्रतिनिधित्व करने वाला आभूषण पहनती हैं, तो यह न केवल भारतीयों के लिए गर्व का क्षण बन जाता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि कला और सौंदर्य की कोई भौगोलिक सीमा नहीं होती। मेलोनी का यह 'झुमका मोमेंट' भारतीयों के लिए एक सुखद और अपनापन महसूस कराने वाला पल साबित हुआ।
इस्लामाबाद में सख्त लॉकडाउन, सड़कों पर पसरा सन्नाटा
25 Apr, 2026 11:26 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद इन दिनों कूटनीतिक हलचलों और सख्त सुरक्षा घेरे के कारण पूरी तरह ठहर सी गई है। पिछले एक सप्ताह से जारी सुरक्षा लॉकडाउन ने आम नागरिकों की मुश्किलों को बढ़ा दिया है। यह सब ऐसे समय में हो रहा है जब अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की संभावित वार्ता को लेकर सस्पेंस बना हुआ है। सुरक्षा के मद्देनजर शहर के मुख्य रास्तों को अवरुद्ध कर दिया गया है और दूतावासों वाले 'रेड जोन' को किले में तब्दील कर दिया गया है।
बाजारों पर असर और नागरिकों की बेबसी
इस्लामाबाद का सबसे व्यस्त व्यावसायिक क्षेत्र 'ब्लू एरिया' वर्तमान में सन्नाटे की चपेट में है।
आपूर्ति में कमी: बाजारों और कैफे में जरूरी सामान का संकट खड़ा हो गया है।
यातायात ठप: सार्वजनिक बसें और परिवहन सेवाएं बंद होने से कामकाजी लोग और छात्र अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सुरक्षा के नाम पर पैदा हुई इस अनिश्चितता ने उनके जीवन की गति रोक दी है।
कुछ ही हफ्तों में दूसरा लॉकडाउन
गौरतलब है कि पिछले कुछ हफ्तों के भीतर यह दूसरी बार है जब इस्लामाबाद को पूरी तरह सील किया गया है।
इससे पहले 11 अप्रैल को भी अमेरिका-ईरान वार्ता के दौरान ऐसा ही लॉकडाउन लगाया गया था, हालांकि वह बातचीत बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई थी।
पाबंदियां हटने के कुछ समय बाद, कूटनीतिक सरगर्मियां फिर से तेज होने पर शहर को दोबारा बंद करना पड़ा है।
ईरान के विदेश मंत्री का दौरा और बातचीत का सस्पेंस
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची शुक्रवार देर रात इस्लामाबाद पहुंचे। उन्होंने पाकिस्तान के सेना प्रमुख, विदेश मंत्री और गृह मंत्री के साथ महत्वपूर्ण बैठकें की हैं।
वार्ता पर संशय: अमेरिका और ईरान के बीच सीधी बातचीत होगी या नहीं, इस पर अब भी धुंध छाई हुई है।
मध्यस्थ की भूमिका: ईरान के विदेश मंत्रालय ने साफ किया है कि फिलहाल अमेरिका के साथ कोई सीधी मीटिंग तय नहीं है; वे पाकिस्तान के जरिए अपनी राय साझा करेंगे। दूसरी ओर, व्हाइट हाउस ने अपने विशेष दूतों को पाकिस्तान भेजने के संकेत दिए हैं, लेकिन उनकी टीम अभी इस्लामाबाद नहीं पहुंची है।
क्षेत्रीय शांति के लिए पाकिस्तान की कोशिश
पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने आशा व्यक्त की है कि इस संवाद से मध्य पूर्व में तनाव कम होगा और स्थिरता आएगी। पाकिस्तान फरवरी से जारी अमेरिका-ईरान विवाद को सुलझाने के लिए एक सक्रिय मध्यस्थ की भूमिका निभाने का प्रयास कर रहा है। सरकारी सूत्रों का कहना है कि प्रस्तावित बातचीत की तैयारियां पूरी हैं, बस दोनों पक्षों के रुख स्पष्ट होने का इंतजार है।
समुद्र में बढ़ती सख्ती: US Navy की इंटरसेप्शन कार्रवाई से तनाव
25 Apr, 2026 10:21 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
समुद्र में बढ़ा तनाव: अमेरिकी नौसेना ने ईरानी जहाज को रोका, नाकाबंदी की रणनीति हुई तेज
फ्लोरिडा (अमेरिका)| अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि अमेरिकी नौसेना के गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर USS राफेल पेराल्टा (DDG 115) ने समुद्र में एक ईरानी ध्वज वाले जहाज को सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट किया है। यह कार्रवाई अमेरिका के एक विशेष समुद्री मिशन का हिस्सा है, जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में भू-राजनीतिक गरमाहट एक बार फिर बढ़ गई है।
24 अप्रैल की कार्रवाई का विवरण
नौसेना के सूत्रों के अनुसार, 24 अप्रैल को इस जहाज की संदिग्ध गतिविधियों पर बारीकी से नजर रखी जा रही थी। जब यह स्पष्ट हुआ कि जहाज ईरान के बंदरगाह की ओर अग्रसर है, तब अमेरिकी युद्धपोत ने त्वरित कदम उठाते हुए उसे रोका। इसके बाद अमेरिकी मरीन ने जहाज पर चढ़कर (Boarding) गहन तलाशी अभियान शुरू किया।
अमेरिका की सख्त समुद्री नीति और 'डार्क फ्लीट' पर प्रहार
पेंटागन में आयोजित ब्रीफिंग के दौरान जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने अमेरिका के कड़े रुख को स्पष्ट किया:
समुद्री नाकाबंदी: अमेरिका अब ईरान के खिलाफ और अधिक आक्रामक नाकाबंदी नीति अपना रहा है।
डार्क फ्लीट पर शिकंजा: 8 अप्रैल से शुरू हुए इस अभियान के तहत अब तक 34 जहाजों को रोका जा चुका है। इनमें से कई 'डार्क फ्लीट' (प्रतिबंधित गतिविधियों में शामिल जहाज) श्रेणी के थे।
चेतावनी: अमेरिकी सेना ने साफ कर दिया है कि ईरान के बंदरगाहों की ओर जाने वाले या वहां से निकलने वाले किसी भी संदिग्ध जहाज को जांच का सामना करना होगा।
हालिया सैन्य ऑपरेशंस की श्रृंखला
पिछले कुछ दिनों में अमेरिकी सेना ने कई महत्वपूर्ण जहाजों पर नियंत्रण हासिल किया है:
मोटर वेसल तोस्का: चेतावनी की अनदेखी करने पर अमेरिकी मरीन ने हेलीकॉप्टर के जरिए इस जहाज को जब्त किया।
टैंकर टिफ़नी (20 अप्रैल): इसमें कथित तौर पर प्रतिबंधित ईरानी कच्चा तेल ले जाया जा रहा था, जिसे रोक दिया गया।
मैजेस्टिक एक्स (22 अप्रैल): हिंद महासागर में इस जहाज को अमेरिकी सेना ने अपने कब्जे में लिया।
ऐतिहासिक संदर्भ और सैनिकों का सम्मान
ब्रीफिंग के दौरान जनरल केन ने 1983 के बेरूत हमले को याद करते हुए शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने वर्तमान मिशनों में तैनात सैनिकों के साहस की सराहना करते हुए कहा कि अमेरिकी सेना राष्ट्रपति के आदेश पर किसी भी बड़े सैन्य अभियान को फिर से शुरू करने के लिए पूरी तरह सुसज्जित और तैयार है।
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