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ट्रंप से मुलाकात से पहले रूस का बड़ा एक्शन, यूक्रेन पर ड्रोन-मिसाइल से भीषण हमला
27 Dec, 2025 06:40 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
यूक्रेन युद्ध को खत्म करने की कोशिशों के बीच हालात और ज्यादा तनावपूर्ण हो गए हैं. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की की प्रस्तावित अहम बैठक से ठीक पहले रूस ने कीव और यूक्रेन के कई इलाकों पर मिसाइलों और ड्रोन से जोरदार हमला किया |
इन हमलों ने साफ संकेत दे दिया है कि शांति की राह अभी भी बेहद मुश्किल और खतरों से भरी हुई है. शनिवार सुबह कीव में जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गईं. यूक्रेन की वायु रक्षा प्रणाली तुरंत सक्रिय हो गई और आसमान में रूसी मिसाइलों और ड्रोन को मार गिराने की कोशिश शुरू हुई |
यूक्रेन में जारी हुआ रेड अलर्ट
यूक्रेनी वायुसेना के मुताबिक, रूस ने राजधानी कीव के साथ-साथ देश के उत्तर-पूर्वी और दक्षिणी इलाकों को भी निशाना बनाया. सुबह 8 बजे तक हमले जारी थे और राजधानी में एयर रेड अलर्ट लागू रहा. कीव प्रशासन के अनुसार, इन हमलों में कम से कम आठ लोग घायल हुए हैं. इससे एक दिन पहले रूस ने यूक्रेन के ऊर्जा ढांचे और दक्षिणी ओडेसा क्षेत्र पर भी हमले तेज कर दिए थे |
ट्रंप-जेलेंस्की बैठक से पहले बढ़ा दबाव
इन हमलों का समय बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि रविवार को जेलेंस्की की डोनाल्ड ट्रंप से फ्लोरिडा में मुलाकात होनी है. जेलेंस्की ने कहा है कि इस बैठक में युद्ध रोकने के बाद किन इलाकों पर किसका नियंत्रण होगा, यही सबसे बड़ा मुद्दा रहेगा |यूक्रेनी राष्ट्रपति के मुताबिक, अमेरिका की अगुवाई में तैयार किए जा रहे 20 बिंदुओं वाले शांति प्रस्ताव का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा तैयार हो चुका है. उन्होंने यह भी संकेत दिए कि नए साल से पहले कई बड़े फैसले लिए जा सकते हैं |
जमीन और सुरक्षा गारंटी सबसे बड़ी अड़चन
जेलेंस्की का कहना है कि शांति समझौते में सबसे बड़ा रोड़ा जमीन का बंटवारा है. रूस चाहता है कि यूक्रेन पूर्वी डोनबास क्षेत्र से पीछे हटे, जबकि कीव मौजूदा मोर्चों पर ही युद्धविराम चाहता है. इसके अलावा सुरक्षा गारंटी भी बड़ा मुद्दा है. जेलेंस्की ने कहा कि अमेरिका ने 15 साल की सुरक्षा गारंटी का प्रस्ताव दिया है, लेकिन यूक्रेन इससे ज्यादा मजबूत और कानूनी रूप से बाध्यकारी समझौता चाहता है ताकि भविष्य में रूस दोबारा हमला न कर सके |
पाकिस्तान छोड़ रहे डॉक्टर और इंजीनियर्स, आसिम मुनीर का मजाक उड़ रहा इंटरनेट पर
27 Dec, 2025 04:20 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पाकिस्तान की एक सरकारी रिपोर्ट ने ‘प्रतिभा पलायन’ को लेकर चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. रिपोर्ट के बाद पाकिस्तान की काफी खिल्ली उड़ाई जा रही है. पाकिस्तान के रक्षामंत्री आसिम मुनीर ने इसे ‘ब्रेन गेन’ बताया था, लेकिन अब मुनीर की सोशल मीडिया पर काफी आलोचना हो रही है, मजाक बनाया जा रहा है. इसके साथ ही देश के प्रबुद्ध वर्ग ने पढ़े-लिखे लोगों को लेकर चिंता जताई है |
बता दें, सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, पिछले दो सालों के अंदर पाकिस्तान से करीब 5,000 डॉक्टर, 11 हजार इंजीनियर और 13,000 अकाउंटेंट दूसरे देशों में पलायन कर गए हैं. जिसकी वजह से देश प्रतिभा पलायन के दौर से गुजर रहा है. इसका सबसे बड़ा कारण बिगड़ती अर्थव्यवस्था और राजनीतिक अस्थिरता सामने आई है. जब से यह रिपोर्ट सार्वजनिक हुई है, तब से सेना प्रमुख आसिम मुनीर की काफी आलोचना हो रही है |
खतरे में 24 लाख नौकरियां
सोशल मीडिया पर सरकारी आंकड़े को लेकर पूर्व सीनेटर मुस्तफा नवाज खोखर ने ‘एक्स’ पर लिखा, “पाकिस्तान दुनिया का सबसे बड़ा फ्रीलांसिंग हब है, लेकिन देश को इंटरनेट शटडाउन के कारण 1.62 करोड़ डॉलर का नुकसान झेलना पड़ रहा है. जिसकी वजह से करीब 24 लाख फ्रीलांसिंग नौकरियां खतरे पर हैं.” उन्होंने मुनीर द्वारा की गई बयानबाजी को लेकर सलाह दी कि राजनीति ठीक करो तो अर्थव्यवस्था सुधर जाएगी |
2 सालों में 14 लाख से ज्यादा हुआ पलायन
पाकिस्तान की इस रिपोर्ट ने चिंता पैदा कर दी है. रिपोर्ट के अनुसार, नवंबर 2025 तक करीब 6.87 लाख लोगों ने विदेश में नौकरियों के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है. वहीं, पिछले साल 2024 में 7.27 लाख से अधिक लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराया था. यानी पिछले 2 सालों के बढ़ते आंकड़े पाकिस्तान के लिए चिंताजनक हैं. यह न सिर्फ मजदूरों या खाड़ी देशों में कमाने जा रहे लोगों तक सीमित है, बल्कि इसमें काफी पढ़े-लिखे प्रतिभा के धनी लोग शामिल हैं, जो लगातार देश छोड़ रहे हैं
सोशल मीडिया पर मुनीर बने मजाक
आंकड़ों ने सोशल मीडिया पर बहस का नया मुद्दा खड़ा कर दिया है. टारगेट पर हैं आसिम मुनीर, क्योंकि उन्होंने अभी कुछ महीनों पहले ही अमेरिका में पाकिस्तान प्रवासियों को संबोधित करते हुए देश के पढ़े-लिखे युवाओं और स्किल प्रोफेशनल्स के पलायन को लेकर ‘ब्रेन ड्रेन’ की धारणा को खारिज करते हुए ‘ब्रेन गेन’ बताया. अब इस बयान की काफी आलोचना हो रही है. सोशल मीडिया पर लोगों ने कहा कि किसी प्रकार की सख्ती दिखाकर सरकार पलायन को कम नहीं कर सकती है, प्रतिभा पलायन को रोकने के लिए सरकार को अच्छे अवसर उपलब्ध कराने की जरूरत है |
यूरोप पर मंडराया खतरा, बेलारूस में रूस करेगा हाइपरसोनिक मिसाइल तैनात
27 Dec, 2025 02:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अमेरिका के दो शोधकर्ताओं ने सैटेलाइट तस्वीरों के अध्ययन के आधार पर दावा किया कि रूस, पूर्वी बेलारूस में नई हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइलें तैनात करने की तैयारी कर रहा है. अगर रूस इन मिसाइलों की तैनाती करता है तो यूरोप में रूस की मिसाइल हमले की क्षमता पहले की अपेक्षा और मजबूत हो जाएगी. ये मिसाइलें पुराने एयरबेस पर परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम हैं |
शोधकर्ताओं के अनुसार, बेलारूस के क्रिचेव शहर में एक पुराने एयरबेस के पास मोबाइल ओरेशनिक मिसाइल लॉन्चर तैनात किए जाएंगे. क्रिचेव शहर रूस की राजधानी मिन्स्क से करीब 300 किमी. पूर्व और मॉस्को से करीब 480 किमी. दूर दक्षिण-पश्चिम में स्थित है. शोधकर्ताओं ने कैलिफोर्निया स्थित मिडलबरी इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज और CNA रिसर्च एंड एनालिसिस ऑर्गनाइजेशन की मदद से कमर्शियल सैटैलाइट कंपनी की तस्वीरों के आधार पर विश्वलेषण किया |
कितनी खतरनाक है Oreshnik हाइपरसोनिक मिसाइल?
Oreshnik एक इंटरमीडिएट-रेंज हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसकी मारक क्षमता करीब साढ़े 5 हजार किमी. बताई जाती है. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, बेलारूस में इन मिसाइलों को पहले भी तैनात करने की बात कर चुके हैं |लेकिन उन्होंने इसके लिए जगह नहीं बताई थी. रूस ने इसका परीक्षण नवंबर 2024 में किया था. पुतिन के अनुसार यह मिसाइल मैक-10 से ज्यादा तेज रफ्तार से उड़ने में सक्षम है, जिसे रोक पाना असंभव है |
शीत युद्ध के बाद पहली बार क्षेत्र के बाहर तैनाती
रूस के Oreshnik की तैनाती की खबर उस दौरान आई है, जब New Start संधि को खत्म होने में गिने-चुने दिन ही बचे हैं. सैन्य हथियारों को लेकर यह अमेरिका और रूस के बीच की आखिरी सबसे बड़ी संधि मानी जा रही है. पुतिन ने पिछले साल दिसंबर 2024 में भी बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको से मुलाकात की थी. इस दौरान कहा था कि Oreshnik मिसाइलें बेलारूस में तैनात की जा सकती हैं. रूस के लिए भी यह शीत युद्ध के बाद पहली बार होगा कि जब अपने सीमा क्षेत्र के बाहर हथियारों की तैनाती कर रहा है |
10 Oreshnik मिसाइलें तैनात करने की तैयारी
बता दें, मिसाइल को लेकर बेलारूस के राष्ट्रपति ने पिछले हफ्ते ही कहा था की हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइल तैनात कर दी गई हैं, लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि किस जगह पर ये मिसाइलें तैनात की गई हैं. हालांकि, उन्होंने ये जरूर बताया कि 10 Oreshnik मिसाइलें तैनात की जा सकती हैं. फिलहाल, इन्हें कहां तैनात किया जाएगा, इसकी आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है |
अमेरिका को टक्कर, इस मुस्लिम देश ने भेजा 11 हजार भारतीयों को देश वापिस
27 Dec, 2025 11:35 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सऊदी में बड़ी तादाद में भारतीय कारोबार, रोजगार से लेकर इबादत के मकसद तक से जाते हैं. हाल ही में इसी बीच एक आंकड़ा सामने आया जिसमें बड़ा खुलासा हुआ. इसमें सामने आया कि अमेरिका नहीं सऊदी अरब ने सबसे बड़ी तादाद में भारतीयों को डिपोर्ट किया है. राज्यसभा में पेश किए गए विदेश मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, साल 2025 में 81 देशों से 24 हजार 600 से ज्यादा भारतीयों को डिपोर्ट किया गया |
इनमें सबसे ज्यादा निर्वासन अमेरिका से नहीं, बल्कि सऊदी अरब से हुए, जहां 12 महीनों में 11 हजार से ज्यादा भारतीयों को वापस भेजा गया. इसके मुकाबले, 2025 में अमेरिका से सिर्फ 3,800 भारतीयों को डिपोर्ट किया गया, जिनमें ज्यादातर प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले कर्मचारी थे. रिपोर्ट के अनुसार, यह संख्या पिछले 5 सालों में अमेरिका से दर्ज की गई सबसे ज्यादा निर्वासन संख्या है. विशेषज्ञों का कहना है कि इसकी वजह ट्रंप प्रशासन की ओर से हाल में की गई सख्ती और दस्तावेजों, वीजा स्थिति, कार्य-अनुमति, वीजा पीरियड से अधिक ठहरने जैसे मामलों की बढ़ी हुई जांच है |
किस-किस देश ने भारतीयों को किया डिपोर्ट
पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा भारतीयों को डिपोर्ट सऊदी ने किया. सऊदी ने 11 हजार भारतीयों को निर्वासित किया. वहीं, अमेरिका ने 3,800 को बाहर किया. अमेरिका से किए गए ज्यादातर निर्वासन वॉशिंगटन डीसी (3,414) और ह्यूस्टन (234) से हुए. जिन अन्य देशों से बड़ी संख्या में भारतीयों को निर्वासित किया गया, उनमें म्यांमार (1,591), यूएई (1,469), बहरीन (764), मलेशिया (1,485), थाईलैंड (481) और कंबोडिया (305) शामिल हैं |
क्या है डिपोर्ट करने की वजह
विदेश मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, खासकर खाड़ी देशों से बड़ी संख्या में हुए डिपोर्ट की वजह वीजा या रेजिडेंसी पीरियड से ज्यादा समय तक देश में रहना, वैध कार्य-अनुमति के बिना देश में काम करना, श्रम कानूनों का उल्लंघन करना, नियोक्ता से फरार होना, आपराधिक मामलों में शामिल होना शामिल है |
तेलंगाना सरकार की एनआरआई सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष भीमा रेड्डी ने कहा, खाड़ी देशों में बड़ी तादाद में भारतीय काम करने के लिए जाते हैं. यह खाड़ी देशों में एक आम पैटर्न है. यहां लोग निर्माण क्षेत्र में मजदूरी करते हैं, देखभालकर्ता बनते हैं या घरेलू कामकाज में लगे रहते हैं. इनमें ज्यादातर लोग ऐसे होते हैं जो कम-कुशल श्रमिक होते हैं जो एजेंटों के जरिए से इन देशों में जाते हैं और कई मामलों में और ज्यादा पैसे कमाने की कोशिश में छोटे-मोटे अपराधों में फंस जाते हैं |
उन्होंने आगे कहा, कुछ मामलों में स्थानीय कानूनों और नियमों के बारे में जागरूकता की कमी भी महंगी पड़ती है. कई बार ये लोग जो खाड़ी देशों में जाते हैं यह जागरूक नहीं होते और एजेंट इनके साथ धोखाधड़ी कर देते हैं. यह मजदूर धोखाधड़ी के शिकार बन जाते हैं और विदेश में पुलिस इन्हें पकड़ लेती है और फिर डिपोर्ट कर दिया जाता है |
म्यांमार-कंबोडिया में बढ़ रहा साइबर क्राइम
हालांकि, म्यांमार और कंबोडिया जैसे देशों में निर्वासन का पैटर्न अलग है. रेड्डी के अनुसार, इनमें से ज्यादातर मामले साइबर क्राइम से जुड़े हैं. ये देश बहु-अरब डॉलर के साइबर अपराध उद्योग के प्रमुख केंद्र बन गए हैं, जहां भारतीयों को हाई सैलरी वाली नौकरी का वादा करके फंसाया जाता है, फिर उन्हें अवैध गतिविधियों में काम करने के लिए मजबूर किया जाता है और गिरफ्तार करके डिपोर्ट कर दिया जाता है |
तेलंगाना ओवरसीज मैनपावर कंपनी की नागा भारानी के अनुसार, इसलिए यह अहम है कि मजदूरों को विदेश पहुंचने से पहले नियमों की जानकारी दी जाए. उन्होंने कहा, लोगों को अपने वीजा की समय-सीमा पर नजर रखने और स्थानीय नियमों का पालन करने के लिए कहा जाना चाहिए. वीजा विस्तार के लिए आवेदन करने का हमेशा विकल्प मौजूद होता है |
विद्यार्थियों के निर्वासन की बात करें तो 2025 में ब्रिटेन से सबसे ज्यादा 170 भारतीय छात्रों को देश वापस भेजा गया. इसके बाद ऑस्ट्रेलिया (114), रूस (82) और अमेरिका (45) से सबसे ज्यादा डिपोर्ट किया गया |
नाइजीरिया में ISIS पर अमेरिका का बड़ा हमला, ट्रंप के आदेश पर हुए घातक एयरस्ट्राइक
26 Dec, 2025 12:40 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Nigeria ISIS Airstrike : के तहत अमेरिका ने नाइजीरिया में सक्रिय ISIS आतंकियों के खिलाफ बड़ा सैन्य अभियान चलाया है। गुरुवार रात उत्तर-पश्चिमी नाइजीरिया में कई घातक और सटीक हवाई हमले किए गए। इस कार्रवाई की पुष्टि खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने की है। उन्होंने कहा कि यह ऑपरेशन सीधे उनके आदेश पर अमेरिकी रक्षा विभाग द्वारा अंजाम दिया गया।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि ISIS आतंकी लंबे समय से इलाके में ईसाइयों को निशाना बनाकर उनकी हत्या कर रहे थे। लगातार मिल रही इन हिंसक घटनाओं की जानकारी के बाद अमेरिका ने सख्त कदम उठाने का फैसला किया। राष्ट्रपति ने साफ कहा कि निर्दोष लोगों की हत्या को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने यह भी बताया कि आतंकियों को पहले कई बार चेतावनी दी गई थी, लेकिन जब हमले नहीं रुके तो Nigeria ISIS Airstrike के जरिए उनके ठिकानों को निशाना बनाया गया। ट्रंप के मुताबिक, अमेरिकी रक्षा विभाग ने आतंकियों के ठिकानों पर “परफेक्ट स्ट्राइक” की और यह साबित किया कि ऐसी सैन्य क्षमता केवल संयुक्त राज्य अमेरिका के पास है।
हवाई हमलों के साथ ट्रंप ने आतंकियों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिका उनके नेतृत्व में कट्टर आतंकवाद को पनपने नहीं देगा। उन्होंने अमेरिकी सेना की खुलकर सराहना की और कहा कि सैनिकों ने एक बार फिर देश की ताकत और संकल्प को दुनिया के सामने रखा है।
क्रिसमस के मौके पर ट्रंप का बयान चर्चा में रहा। उन्होंने सेना को शुभकामनाएं देते हुए कहा, “भगवान हमारी सेना को आशीर्वाद दें। मेरी क्रिसमस—यहां तक कि मरे हुए आतंकियों को भी।” Nigeria ISIS Airstrike को अमेरिका की आतंकवाद विरोधी नीति का कड़ा संदेश माना जा रहा है।
खालिदा जिया के बेटे की 17 साल बाद बांग्लादेश वापसी,एयरपोर्ट पर एक लाख लोग पहुंचे, 3 घंटे रोड शो किया
26 Dec, 2025 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका । बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान 17 साल बाद देश लौट आए हैं। वे गिरफ्तारी से बचने के लिए 2008 में लंदन भाग गए थे। तब हसीना सरकार में उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के कई मामले चल रहे थे। तारिक के स्वागत में उनकी पार्टी बीएनपी के 1 लाख से ज्यादा कार्यकर्ता जुटे। ढाका एयरपोर्ट से लेकर 300 फीट रोड तक रोड शो किया। इस 13 किलोमीटर के रास्ते को कवर करने में उन्हें 3 घंटे का समय लगा। 300 फीट रोड पर तारिक ने 17 मिनट भाषण दिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि हम देश में शांति कायम करेंगे और नया बांग्लादेश बनाएंगे। हालांकि उन्होंने शेख हसीना को लेकर एक शब्द भी नहीं कहा। तारिक रहमान ने अपने भाषण में कहा ह िआज बांग्लादेश की जनता बोलने का अपना अधिकार वापस पाना चाहती है। उन्होंने आगे कहा कि अब समय आ गया है कि हम सब मिलकर देश का निर्माण करें। यह देश पहाड़ों और मैदानों के लोगों का है, मुसलमानों, हिंदुओं, बौद्धों और ईसाइयों का है। हम एक सुरक्षित बांग्लादेश बनाना चाहते हैं, जहां हर महिला, पुरुष और बच्चा सुरक्षित रूप से घर से निकल सके और लौट सके।
तारिक ने भाषण में कहा कि उनके पास देश को बेहतर बनाने के लिए एक प्लान है। उन्होंने कहा कि चाहे पुरुष हों, महिलाएं हों या बच्चे, बांग्लादेश की शांति और गरिमा को बनाए रखना हमेशा हमारी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। हम सब मिलकर काम करेंगे और अपने बांग्लादेश का निर्माण करेंगे। तारिक रहमान ने अपने भाषण में कहा कि उनकी यही इच्छा है कि बांग्लादेश का हर आदमी सुरक्षित रहे। उन्होंने सभी से हिंसा से बचने और मिलकर देश के निर्माण में योगदान देने को कहा।
बांग्लादेश में फिर भीड़ हिंसा का कहर: 29 वर्षीय हिंदू युवक की पीट-पीटकर हत्या, इलाके में तनाव
26 Dec, 2025 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका । बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ हिंसा की एक और गंभीर घटना सामने आई है। राजबाड़ी जिले के पांग्शा उपज़िला क्षेत्र में बुधवार देर रात 29 वर्षीय हिंदू युवक की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। मृतक की पहचान अमृत मंडल उर्फ सम्राट के रूप में हुई है। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है, जब कुछ ही दिन पहले दिपु चंद्र दास की हत्या को लेकर देश में पहले से ही तनाव का माहौल बना हुआ है।
पुलिस के अनुसार, यह घटना बुधवार रात करीब 11 बजे होसैनडांगा ओल्ड मार्केट इलाके में हुई। स्थानीय लोगों ने कथित तौर पर अमृत मंडल पर जबरन वसूली (उगाही) का आरोप लगाया, जिसके बाद मामला बहस से बढ़ते हुए हिंसा में बदल गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कुछ ही देर में बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हो गए और अमृत मंडल पर लाठी-डंडों और मुक्कों से हमला कर दिया गया। गंभीर रूप से घायल अवस्था में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
पांग्शा मॉडल पुलिस स्टेशन के प्रभारी शेख मोइनुल इस्लाम ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि अमृत मंडल पुलिस रिकॉर्ड में “सम्राट बहिनी” नामक एक स्थानीय समूह के नेता के रूप में दर्ज था। पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि स्थानीय लोगों के साथ किसी विवाद के बाद स्थिति बेकाबू हो गई और भीड़ हिंसा में तब्दील हो गई। हालांकि, पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि आरोपों की सच्चाई की जांच की जा रही है और कानून को हाथ में लेने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मृतक अमृत मंडल, अक्षय मंडल का पुत्र था और होसैनडांगा गांव का निवासी था। घटना के बाद इलाके में तनाव फैल गया है। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पुलिस बल की अतिरिक्त तैनाती की गई है और संवेदनशील इलाकों में गश्त बढ़ा दी गई है। स्थानीय प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है।
इस घटना ने एक बार फिर बांग्लादेश में भीड़ हिंसा और अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मानवाधिकार संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि कानून व्यवस्था की कमजोरी और त्वरित न्याय की कमी के कारण ऐसी घटनाएं बार-बार सामने आ रही हैं। उनका आरोप है कि अफवाहों या आरोपों के आधार पर किसी व्यक्ति को सरेआम पीट-पीटकर मार देना लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ है।
भारत सहित अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस घटना को लेकर चिंता जताई जा रही है। विश्लेषकों का मानना है कि बांग्लादेश सरकार के लिए यह एक बड़ी चुनौती है कि वह भीड़ हिंसा पर प्रभावी नियंत्रण लगाए और अल्पसंख्यकों में सुरक्षा का भरोसा बहाल करे। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और दोषियों की पहचान कर गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।
“बांग्लादेश दो बार आज़ाद हुआ”: 17 साल बाद देश लौटे तारिक रहमान का बड़ा राजनीतिक संदेश
26 Dec, 2025 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका । बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के कार्यकारी अध्यक्ष तारिक रहमान ने लगभग 17 वर्षों के लंबे निर्वासन के बाद स्वदेश लौटने पर अपने पहले सार्वजनिक संबोधन में देश की राजनीति को लेकर बड़ा और भावनात्मक बयान दिया। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश को “दो बार आज़ादी” मिली है। पहली बार 1971 के मुक्ति संग्राम में और दूसरी बार जुलाई 2024 के जनआंदोलन के माध्यम से। उनके इस बयान को मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य में बेहद अहम माना जा रहा है।
तारिक रहमान ने अपने भाषण की शुरुआत 1971 के मुक्ति संग्राम के शहीदों को श्रद्धांजलि देकर की। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश की स्वतंत्रता केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि लोकतंत्र, आत्मसम्मान और जनता के अधिकारों की निरंतर लड़ाई का प्रतीक है। उन्होंने दावा किया कि जुलाई 2024 में हुए जनआंदोलन ने देश में लोकतांत्रिक आकांक्षाओं को फिर से जीवित किया और जनता की आवाज़ को ताकत दी। बीएनपी नेता ने कहा, “1971 में हमने विदेशी दमन से आज़ादी हासिल की थी और 2024 में जनता ने अपने अधिकारों और लोकतंत्र के लिए फिर से संघर्ष कर देश को आज़ाद कराया।” उनके इस बयान को सत्ता पक्ष के खिलाफ तीखा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है। तारिक रहमान ने संकेत दिया कि उनकी पार्टी आने वाले समय में जनता की उम्मीदों और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए निर्णायक भूमिका निभाएगी। अपने संबोधन में तारिक रहमान ने अपनी मां और बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया का भी भावुक ज़िक्र किया। उन्होंने कहा कि उनकी मां लंबे समय से बीमार हैं, लेकिन तमाम मुश्किलों के बावजूद उन्होंने हमेशा देश और लोकतंत्र के हितों को प्राथमिकता दी। तारिक ने समर्थकों से अपील की कि वे खालिदा जिया के संघर्ष और त्याग से प्रेरणा लें और शांतिपूर्ण तथा लोकतांत्रिक तरीकों से देश के भविष्य को मजबूत करें। तारिक रहमान की वापसी को बीएनपी के लिए एक बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी नेताओं का मानना है कि उनकी मौजूदगी से संगठन को नई ऊर्जा मिलेगी और आगामी चुनावों से पहले पार्टी को मजबूती मिलेगी। ढाका और अन्य शहरों में उनके समर्थकों की भारी भीड़ देखी गई, जिससे यह साफ हो गया कि बीएनपी उन्हें एक बड़े जननेता के रूप में पेश करना चाहती है।
हालांकि, तारिक रहमान का “दो बार आज़ादी” वाला बयान राजनीतिक विवाद भी खड़ा कर सकता है। सत्तारूढ़ दल और उसके समर्थक इसे इतिहास की व्याख्या को तोड़-मरोड़ कर पेश करने की कोशिश बता सकते हैं। बावजूद इसके, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान सीधे तौर पर जनता को भावनात्मक रूप से जोड़ने और 2024 के घटनाक्रम को एक ऐतिहासिक मोड़ के रूप में स्थापित करने की रणनीति का हिस्सा है। कुल मिलाकर, 17 साल बाद देश लौटे तारिक रहमान का यह पहला संबोधन न सिर्फ बीएनपी के लिए बल्कि बांग्लादेश की राजनीति के लिए भी एक नया संकेत माना जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि उनका यह संदेश चुनावी राजनीति और सत्ता संतुलन को किस दिशा में ले जाता है।
चीन के बाद उत्तर कोरिया ने भी दिखाई न्यूक्लियर पावर, परमाणु-संचालित पनडुब्बी का प्रदर्शन
26 Dec, 2025 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
प्योंगयांग,। उत्तर कोरिया के पास पहले से ही दुनिया के सबसे बड़े पनडुब्बी बेड़ों में से एक है, लेकिन वे ज्यादातर पुरानी और शोर करने वाली डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियां हैं। डीजल पनडुब्बियों को अपनी बैटरी चार्ज करने के लिए बार-बार सतह पर आना पड़ता है, जिससे वे रडार की पकड़ में आ जाती हैं। परमाणु पनडुब्बी तब तक पानी के नीचे रह सकती है जब तक चालक दल के लिए भोजन समाप्त न हो जाए। परमाणु पनडुब्बियां पानी के भीतर डीजल पनडुब्बियों की तुलना में काफी तेज गति से चल सकती हैं, जिससे वे दुश्मन के युद्धपोतों से आसानी से बच सकती हैं।
उत्तर कोरिया के लिए परमाणु पनडुब्बी का सबसे बड़ा लाभ अजेयता है। यदि अमेरिका या दक्षिण कोरिया उत्तर कोरिया के जमीनी मिसाइल साइलो को नष्ट भी कर दें, तब समुद्र में छिपी यह पनडुब्बी जवाबी हमला करने के लिए सुरक्षित रहेगी। यह म्युचुअली एश्योर्ड डिस्ट्रक्शन (एमडीए) की स्थिति पैदा करता है, जिससे कोई भी पक्ष युद्ध शुरू करने से डरेगा। उत्तर कोरिया ने रूस को लाखों आर्टिलरी गोले और ह्वासोंग-11 मिसाइलें प्रदान की हैं।
परमाणु रिएक्टर को एक पनडुब्बी के छोटे से हिस्से में फिट करना बहुत ही जटिल इंजीनियरिंग है। विशेषज्ञों का मानना है कि रूस ने मिनिएचराइजेशन और साइलेंसिंग तकनीक (शोर कम करने की तकनीक) साझा की होगी, जो उत्तर कोरिया के पास पहले नहीं थी। यह पनडुब्बी अभी भी निर्माण के चरण में है। वास्तविक चुनौती इसका समुद्री परीक्षण होगा, जहाँ यह देखा जाएगा कि क्या इसका रिएक्टर सुरक्षित रूप से काम करता है और क्या यह बिना पता चले गहरे पानी में गोता लगा सकती है।
किम जोंग उन ने इस पनडुब्बी को युगांतकारी बताया है। उनका मानना है कि यह तकनीक दुश्मन देशों (मुख्यतः अमेरिका और दक्षिण कोरिया) के खिलाफ उनकी परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को कई गुना बढ़ा देगी। पनडुब्बी के हल का पूरा दिखना और उस पर एंटी-कोरोसिव पेंट (जंग-रोधी परत) का होना यह दर्शाता है कि आंतरिक मशीनरी, जैसे रिएक्टर और इंजन, संभवतः स्थापित किए जा चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह जहाज अगले कुछ महीनों में समुद्री परीक्षणों के लिए तैयार हो सकता है।
यह चिंता का विषय क्यों है?
परमाणु-संचालित पनडुब्बियां सामान्य डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों की तुलना में कहीं अधिक खतरनाक होती हैं क्योंकि ये हफ्तों तक पानी के भीतर रह सकती हैं, जिससे दुश्मन के रडार और उपग्रहों के लिए इन्हें ट्रैक करना लगभग असंभव हो जाता है। यदि उत्तर कोरिया पर जमीनी हमला होता है, तो ये पनडुब्बियां समुद्र के भीतर छिपी रहकर जवाबी परमाणु हमला करने में सक्षम होंगी। यह पनडुब्बी किम जोंग के उन पांच प्रमुख सैन्य लक्ष्यों में से एक है, जिसमें हाइपरसोनिक मिसाइलें और जासूसी उपग्रह भी शामिल हैं।
भले ही तस्वीरें प्रभावशाली दिख रही हों, लेकिन कुछ बड़े सवाल अभी भी बने हुए हैं
कड़े अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद उत्तर कोरिया ने परमाणु रिएक्टर को छोटा करने और उसे पनडुब्बी में फिट करने की तकनीक कहाँ से हासिल की? परमाणु पनडुब्बियों को बहुत शांत होना चाहिए। यदि यह पनडुब्बी शोर करती है, तो इसे आधुनिक सोनार सिस्टम से आसानी से पकड़ा जा सकेगा। कई रक्षा विश्लेषकों का संदेह है कि हाल के महीनों में रूस और उत्तर कोरिया के बीच बढ़ती नजदीकी के कारण, रूस ने इस परियोजना में तकनीकी मदद दी हो सकती है।
एप्स्टीन पीड़िता ने एंड्रयू माउंटबेटन को अमेरिका में कटघरे में लाने की मांग की
26 Dec, 2025 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लंदन/वॉशिंगटन । कुख्यात यौन अपराधी जेफ्री एप्स्टीन से जुड़े मामलों ने एक बार फिर ब्रिटेन के शाही परिवार और अंतरराष्ट्रीय सत्ता गलियारों में हलचल मचा दी है। एप्स्टीन की एक पीड़िता मरीना लासेर्दा ने पूर्व शाही सदस्य एंड्रयू माउंटबेटन-विंडसर (पूर्व में प्रिंस एंड्रयू) को अमेरिका में पूछताछ के लिए बुलाने और “न्याय के कटघरे में लाने” की खुली मांग की है। यह मांग ऐसे समय आई है, जब अमेरिका के न्याय विभाग की ओर से जारी किए गए नए एप्स्टीन दस्तावेजों ने पुराने आरोपों को फिर से सुर्खियों में ला दिया है।
मरीना लासेर्दा, जो मूल रूप से ब्राज़ील की रहने वाली हैं और अब अमेरिका में रहती हैं, ने कहा कि एप्स्टीन नेटवर्क से जुड़े कई प्रभावशाली लोग अब तक कानून से बचे हुए हैं। उन्होंने कहा, “यह सिर्फ एक व्यक्ति की बात नहीं है। कई ताकतवर लोग हैं जिन्हें आज तक जवाबदेह नहीं ठहराया गया। माउंटबेटन-विंडसर को भी न्याय के सामने लाया जाना चाहिए।” इस मामले में दिवंगत वर्जीनिया जिउफ्रे के वकील ब्रैड एडवर्ड्स ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि जिन्होंने पहले माउंटबेटन-विंडसर या एप्स्टीन और घिसलेन मैक्सवेल के इनकारों पर भरोसा किया, उन्हें “शर्मिंदा होना चाहिए।” एडवर्ड्स ने जिउफ्रे को “असाधारण रूप से साहसी” बताते हुए कहा कि वर्षों तक उनकी बातों को नज़रअंदाज़ किया गया।
वर्जीनिया जिउफ्रे ने आरोप लगाया था कि वह 2001 में, जब वह मात्र 17 वर्ष की थीं, तब एंड्रयू माउंटबेटन-विंडसर से मिली थीं और उनके साथ यौन शोषण हुआ। एंड्रयू ने इन आरोपों से हमेशा इनकार किया, हालांकि 2022 में उन्होंने जिउफ्रे के साथ अदालत के बाहर समझौता कर लिया था। अप्रैल 2025 में जिउफ्रे की आत्महत्या के बाद यह मामला और भी संवेदनशील हो गया। हाल ही में जारी दस्तावेजों में ऐसे ई-मेल सामने आए हैं, जिनमें कथित तौर पर एंड्रयू माउंटबेटन-विंडसर ने एप्स्टीन की सहयोगी घिसलेन मैक्सवेल से “अनुचित दोस्तों” की व्यवस्था करने को कहा था। इन ई-मेल्स में “मैत्रीपूर्ण, गोपनीय और मज़ेदार” लड़कियों का ज़िक्र भी किया गया है।
तुर्किये में विमान हादसे में लीबिया के सेना प्रमुख की मौत, चार अन्य भी मारे गए
25 Dec, 2025 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अंकारा। तुर्किये में हुए एक दर्दनाक विमान हादसे में लीबिया के सेना प्रमुख (चीफ ऑफ जनरल स्टाफ) जनरल मोहम्मद अली अहमद अल-हद्दाद समेत कुल पांच लोगों की मौत हो गई। लीबिया की त्रिपोली स्थित सरकार ने मंगलवार देर शाम इस हादसे की आधिकारिक पुष्टि की। यह दुर्घटना उस समय हुई, जब अल-हद्दाद तुर्किये की राजधानी अंकारा की आधिकारिक यात्रा पूरी करने के बाद स्वदेश लौट रहे थे।
लीबिया के प्रधानमंत्री अब्दुलहमीद दबीबा ने सोशल मीडिया पर शोक संदेश जारी करते हुए कहा कि जनरल अल-हद्दाद की मौत देश के लिए “अपूरणीय क्षति” है। उन्होंने इसे लीबियाई सेना और पूरे राष्ट्र के लिए गहरा आघात बताया। सरकार के बयान में कहा गया कि अल-हद्दाद और उनके सहयोगी देश की सेवा, अनुशासन और राष्ट्रीय प्रतिबद्धता का प्रतीक थे। तुर्की अधिकारियों के अनुसार, निजी जेट फाल्कन-50 ने 23 दिसंबर की शाम 8:17 बजे अंकारा के एसेनबोगा एयरपोर्ट से उड़ान भरी थी। उड़ान के करीब 15 मिनट बाद विमान में तकनीकी खराबी, विशेष रूप से इलेक्ट्रिकल फेल्योर की सूचना मिली। विमान ने हायमाना क्षेत्र के पास आपात लैंडिंग का अलर्ट भेजा, लेकिन कुछ ही मिनटों बाद रडार से गायब हो गया और संपर्क टूट गया।
तुर्की के राष्ट्रपति कार्यालय के संचार निदेशक बुरहानत्तिन दुरान ने बताया कि रातभर चले सर्च ऑपरेशन के बाद विमान का मलबा अंकारा के दक्षिण में हायमाना के पास बरामद किया गया। गृह मंत्री अली येरलिकाया ने भी पुष्टि की कि हादसे की जांच शुरू कर दी गई है और सभी संबंधित एजेंसियां पूरी सतर्कता से काम कर रही हैं। गौरतलब है कि जनरल अल-हद्दाद पश्चिमी लीबिया के शीर्ष सैन्य कमांडर थे और संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता में लीबिया की बंटी हुई सेना को एकजुट करने की कोशिशों में उनकी अहम भूमिका रही थी। अंकारा यात्रा के दौरान उन्होंने तुर्की के शीर्ष सैन्य अधिकारियों से रक्षा सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा पर महत्वपूर्ण बातचीत की थी।
इज़राइल के खिलाफ नरसंहार मामले में बेल्जियम भी शामिल, आईसीजे में दक्षिण अफ्रीका के पक्ष को मिला समर्थन
25 Dec, 2025 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
द हेग। इज़राइल पर गाजा पट्टी में नरसंहार करने के आरोपों से जुड़े मामले में बेल्जियम भी औपचारिक रूप से शामिल हो गया है। यह मामला दक्षिण अफ्रीका ने संयुक्त राष्ट्र की सर्वोच्च अदालत अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे) में दायर किया था। आईसीजे ने मंगलवार को बयान जारी कर बताया कि बेल्जियम ने इस केस में हस्तक्षेप (इंटरवेंशन) की घोषणा दाखिल कर दी है।
बेल्जियम से पहले ब्राजील, कोलंबिया, आयरलैंड, मेक्सिको, स्पेन और तुर्किये जैसे देश भी इस कानूनी प्रक्रिया में शामिल हो चुके हैं। दक्षिण अफ्रीका ने दिसंबर 2023 में यह मामला दायर करते हुए दावा किया था कि गाजा में इज़राइल की सैन्य कार्रवाई 1948 के संयुक्त राष्ट्र नरसंहार रोकथाम और दंड कन्वेंशन का उल्लंघन है। इज़राइल ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है और इस मामले को राजनीति से प्रेरित बताया है। हालांकि, जनवरी 2024 में आईसीजे ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए इज़राइल को गाजा में नरसंहार रोकने के लिए ठोस कदम उठाने और मानवीय सहायता की निर्बाध पहुंच सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था। अदालत के ये आदेश कानूनी रूप से बाध्यकारी हैं, भले ही इन्हें लागू कराने के लिए आईसीजे के पास कोई प्रत्यक्ष तंत्र नहीं है।
आईसीजे पहले ही यह भी कह चुका है कि कब्जे वाले फ़िलिस्तीनी क्षेत्रों में इज़राइल की मौजूदगी गैरकानूनी है और उसकी नीतियां व्यावहारिक रूप से कब्जे के विस्तार (एनेक्सेशन) के समान हैं। इसके बावजूद इज़राइल ने गाजा और कब्जे वाले वेस्ट बैंक में सैन्य कार्रवाई जारी रखी है, जिस पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना बढ़ती जा रही है। इस बीच, अमेरिका और उसके कुछ यूरोपीय सहयोगी देश इज़राइल को सैन्य और आर्थिक सहायता देना जारी रखे हुए हैं। अमेरिका ने दक्षिण अफ्रीका के मामले को खारिज करते हुए उसकी आलोचना की है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) द्वारा इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और पूर्व रक्षा मंत्री योआव गैलेंट के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए जाने के बाद अमेरिका ने आईसीसी अधिकारियों पर प्रतिबंध भी लगाए हैं।
गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, 10 अक्टूबर से लागू युद्धविराम के बाद भी इज़राइली हमलों में सैकड़ों फ़िलिस्तीनी मारे गए हैं, जबकि अक्टूबर 2023 से अब तक मरने वालों की संख्या 70 हजार से अधिक बताई जा रही है।
अमेरिका में अवैध प्रवासियों पर सख्ती, 30 भारतीय ड्राइवरों समेत 42 गिरफ्तार
25 Dec, 2025 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिका में अवैध प्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी गई है। अमेरिकी सीमा गश्ती दल ने हाल ही में बड़ी कार्रवाई करते हुए 30 भारतीय नागरिकों सहित कुल 42 अवैध प्रवासियों को गिरफ्तार किया है। ये सभी लोग अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे थे और वाणिज्यिक वाहन चलाने का लाइसेंस लेकर सेमीट्रक चला रहे थे।
अमेरिकी सीमा शुल्क एवं सीमा सुरक्षा (सीबीपी) ने बयान जारी कर बताया कि यह कार्रवाई कैलिफोर्निया के एल सेंट्रो सेक्टर में की गई। 23 नवंबर से 12 दिसंबर के बीच सीमा गश्ती एजेंटों ने आव्रजन चौकियों पर वाहनों को रोका और अंतर-एजेंसी अभियानों के तहत इन लोगों को हिरासत में लिया। अधिकारियों के अनुसार, गिरफ्तार किए गए सभी लोग अंतरराज्यीय मार्गों पर सेमीट्रक चला रहे थे। सीबीपी के मुताबिक, गिरफ्तार 42 लोगों में से 30 भारत, दो एल साल्वाडोर से हैं, जबकि शेष लोग चीन, इरिट्रिया, हैती, होंडुरस, मैक्सिको, रूस, सोमालिया, तुर्किये और यूक्रेन जैसे देशों के नागरिक हैं। यह तथ्य सामने आने के बाद अमेरिकी प्रशासन ने वाणिज्यिक परिवहन क्षेत्र में सुरक्षा और नियमों को लेकर चिंता जताई है।
जांच में यह भी सामने आया है कि विभिन्न अमेरिकी राज्यों द्वारा इन लोगों को वाणिज्यिक चालक लाइसेंस जारी किए गए थे। सीबीपी के अनुसार, कैलिफोर्निया ने 31, जबकि फ्लोरिडा, इलिनोइस, इंडियाना, ओहियो, मैरीलैंड, मिनेसोटा, न्यू जर्सी, न्यूयॉर्क, पेंसिल्वेनिया और वाशिंगटन जैसे राज्यों ने मिलकर आठ वाणिज्यिक चालक लाइसेंस जारी किए थे। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इस अंतर-एजेंसी अभियान का मुख्य उद्देश्य आव्रजन कानूनों का सख्ती से पालन कराना, अमेरिकी राजमार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और वाणिज्यिक परिवहन क्षेत्र में नियामक मानकों को बनाए रखना है। सीबीपी ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में अवैध प्रवासियों और नियमों के उल्लंघन पर इसी तरह की और सख्त कार्रवाइयां जारी रहेंगी।
काबुल पर हमले जायज हैं तो भारतीय हमले गलत कैसे हो गए: मौलाना फजलुर रहमान
25 Dec, 2025 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद।पाकिस्तान की राजनीति में इन दिनों एक बड़ा भूचाल आया हुआ है। जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (फजल) के अध्यक्ष मौलाना फजलुर रहमान द्वारा अपनी ही सेना और सरकार के खिलाफ दिए गए कड़े बयानों ने शहबाज शरीफ सरकार और सेना प्रमुख आसिम मुनीर को रक्षात्मक मुद्रा में ला खड़ा किया है। कराची के ल्यारी में आयोजित एक जनसभा में मौलाना फजलुर रहमान ने सीधे तौर पर पाकिस्तान की सैन्य रणनीति और अफगानिस्तान के प्रति उसके दृष्टिकोण पर तीखे सवाल पूछे हैं। उनके इन सवालों ने न केवल देश के भीतर सनसनी फैला दी है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की स्थिति को और अधिक असहज कर दिया है।मौलाना फजलुर रहमान ने पाकिस्तानी जनरलों और हुक्मरानों से दो टूक पूछा कि यदि पाकिस्तान काबुल पर अपने हमलों को जायज मानता है, तो वह भारत द्वारा मुरीदके और बहावलपुर पर की गई स्ट्राइक को गलत कैसे ठहरा सकता है।
उन्होंने कहा कि अगर एक देश दूसरे देश की संप्रभुता का उल्लंघन कर हमला करता है, तो उसे दूसरों पर उंगली उठाने का नैतिक अधिकार नहीं रह जाता। उल्लेखनीय है कि भारत ने मई 2025 में पहलगाम हमले का जवाब देने के लिए पाकिस्तान के भीतर मुरीदके और बहावलपुर जैसे आतंकी अड्डों को निशाना बनाया था। मौलाना के इस बयान ने पाकिस्तान के उस पुराने विमर्श को हिलाकर रख दिया है, जिसमें वह हमेशा खुद को पीड़ित दिखाता आया है। मौलाना के इन तीखे हमलों के बाद पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ को सफाई देने के लिए सामने आना पड़ा। उन्होंने मौलाना फजलुर रहमान की तुलना को गलत और अनुचित करार देते हुए कहा कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के खिलाफ इस्लामाबाद की कार्रवाई और भारत द्वारा किया गया हमला एक समान नहीं हैं। रक्षा मंत्री ने दावा किया कि पाकिस्तान अपनी संप्रभुता की रक्षा कर रहा है, जबकि भारत की कार्रवाई उकसावे वाली और अवैध थी। हालांकि, ख्वाजा आसिफ उन ठोस सबूतों पर चुप्पी साध गए जो पहलगाम के आतंकियों के पास से मिले थे और न ही उनके पास अफगानिस्तान में हुई उस एयर स्ट्राइक का कोई जवाब था, जिसमें मासूम बच्चों की जान गई थी। अफगानिस्तान के साथ पाकिस्तान के बिगड़ते रिश्तों पर भी मौलाना ने सरकार को आईना दिखाया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान एक ऐसा अफगानिस्तान चाहता है जो उसके पक्ष में हो, लेकिन इतिहास गवाह है कि जाहिर शाह से लेकर अशरफ गनी तक, काबुल की सरकारें हमेशा भारत के करीब रही हैं। वर्तमान में पाकिस्तान और अफगान तालिबान के बीच तनाव चरम पर है। पाकिस्तान का आरोप है कि उसकी धरती पर होने वाले हमलों के लिए अफगान जमीन का इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि काबुल इन आरोपों को सिरे से खारिज करता है। दोनों देशों के बीच शांति वार्ता के कई दौर विफल रहे हैं और सीमा पर झड़पें एक आम बात हो गई हैं। मौलाना फजलुर रहमान के इस साहसपूर्ण रुख ने पाकिस्तान के भीतर उस बहस को जन्म दे दिया है, जिसे दबाने की कोशिश सेना और सरकार लंबे समय से करती आ रही थी।
भूकंप के तेज झटकों से दहल गया ताइवान, ताइपे की गगनचुंबी इमारतें हिलीं
25 Dec, 2025 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ताइपे। ताइवान के दक्षिणपूर्वी तटीय शहर ताइतुंग में बुधवार 24 दिसंबर को तेज भूकंप के झटके महसूस किए गए। सेंट्रल वेदर एडमिनिस्ट्रेशन (सीडब्ल्यूए) के मुताबिक भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 6.1 मापी गई। भूकंप का केंद्र ताइतुंग काउंटी हॉल से करीब 10.1 किलोमीटर उत्तर में स्थित था और इसकी गहराई 11.9 किलोमीटर दर्ज की गई। फिलहाल राहत की बात यह रही, कि अब तक किसी प्रकार के जान-माल के नुकसान की कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है।
जानकारी अनुसार भूकंप के झटकों का असर राजधानी ताइपे तक देखने को मिला, जहां गगनचुंबी इमारतें काफी देर तक हिलती रहीं। अचानक आए इन झटकों से लोगों में दहशत फैल गई और कई इलाकों में लोग घरों व दफ्तरों से भागते हुए बाहर निकल आए। भूकंप के बाद ताइपे, काओशुंग, ताइचुंग और ताइनान समेत कई प्रमुख शहरों में अलर्ट जारी कर दिया गया है। सीडब्ल्यूए के मुताबिक, हुलिएन और पिंगतुंग काउंटी में भूकंप की तीव्रता ताइवान के सात स्तर वाले पैमाने पर चार दर्ज की गई। वहीं काओशुंग, नांतौ, ताइनान, चियाई काउंटी, युनलिन, चियाई शहर और चांगहुआ में स्तर तीन तथा ताइचुंग, मियाओली, यिलान, हसिंचु काउंटी, ताओयुआन, न्यू ताइपे और ताइपे में स्तर दो की तीव्रता महसूस की गई।
विशेषज्ञों का कहना है, कि ताइवान दो प्रमुख टेक्टॉनिक प्लेटों के पास स्थित है, जिसके कारण यहां अक्सर भूकंप आते रहते हैं। इससे पहले वर्ष 2016 में ताइवान में 7.3 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसमें 100 से अधिक लोगों की जान चली गई थी। वहीं 1999 में आए भीषण भूकंप में करीब 2000 लोगों की मौत हुई थी।
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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्रद्धेय बृजमोहन मिश्रा की जयंती पर पुष्पांजलि अर्पित की
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कृषि मंत्री के निवास पर पहुंचकर वर-वधू को दिया आशीर्वाद
कृषि मंत्री नेताम ने मिट्टी एवं बीजों की पूजा की और ट्रैक्टर चलाकर बीजों की बुआई की
महतारी वंदन योजना से मिली नई दिशा, प्रेम बाई बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल
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