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रेत के समंदर के बावजूद! सऊदी-UAE क्यों मंगाते हैं ऑस्ट्रेलिया से रेत?
1 Jan, 2026 11:50 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सुनने में अजीब लग सकता है पर दुनिया के सबसे बड़े रेगिस्तानी देशों में गिने जाने वाले सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात को रेत आयात करनी पड़ रही है. सवाल उठता है कि जब इन देशों के पास रेत की कोई कमी नहीं, तो आखिर बाहर से रेत लाने की जरूरत क्यों पड़ रही है?
दरअसल, सऊदी अरब के भविष्य के शहर, UAE की आसमान छूती इमारतें और अरबों डॉलर के मेगा प्रोजेक्ट्स जिस रेत की मांग करते हैं, वह आम नजर आने वाली रेगिस्तानी रेत से बिल्कुल अलग है. यही फर्क इन देशों को ऑस्ट्रेलिया जैसे दूर-दराज़ के देशों की ओर देखने पर मजबूर कर रहा है. आइए इसे विस्तार से समझते हैं |
रेगिस्तान की रेत क्यों फेल हो जाती है?
रेगिस्तानी रेत के कण इतने चिकने होते हैं कि वे सीमेंट के साथ ठीक से चिपक नहीं पाते. नतीजा यह होता है कि कंक्रीट कमजोर बनती है और भारी इमारतों का वजन सहन नहीं कर पाती. इसलिए ऊंची इमारतों, पुलों, मेट्रो और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में खास किस्म की रेत का इस्तेमाल जरूरी होता है |
ऑस्ट्रेलिया बना रेत का बड़ा सप्लायर
ऑस्ट्रेलिया आज दुनिया के बड़े निर्माण-ग्रेड रेत निर्यातकों में शामिल है. साल 2023 में ऑस्ट्रेलिया ने करीब 273 मिलियन डॉलर की रेत का निर्यात किया. 2023 में सऊदी अरब ने ऑस्ट्रेलिया से करीब 1.4 लाख डॉलर की प्राकृतिक निर्माण योग्य रेत खरीदी. यह सिलसिला 2024 में भी जारी रहा, खासकर तब जब सऊदी अरब ने अपने बड़े प्रोजेक्ट्स को तेज रफ्तार दी
सऊदी अरब का विजन 2030, निओम सिटी, द लाइन, रेड सी प्रोजेक्ट और किद्दिया जैसे प्रोजेक्ट्स भारी मात्रा में उच्च गुणवत्ता वाले कंक्रीट की मांग करते हैं. इन प्रोजेक्ट्स में किसी तरह की गुणवत्ता से समझौता संभव नहीं है। ऐसे में विदेशी रेत आयात करना मजबूरी बन गया है |
बुर्ज खलीफा की कहानी भी यही है
दुनिया की सबसे ऊंची इमारत बुर्ज खलीफा के निर्माण में भी स्थानीय रेगिस्तानी रेत का इस्तेमाल नहीं किया गया. इस इमारत को बनाने के लिए करोड़ों लीटर कंक्रीट, हजारों टन स्टील और विशेष निर्माण सामग्री लगी, जिसमें ऑस्ट्रेलिया से मंगाई गई रेत का अहम योगदान रहा |
UAE और कतर भी इसी राह पर
सिर्फ सऊदी अरब ही नहीं, UAE और कतर भी इसी समस्या से जूझ रहे हैं. दुबई और अबू धाबी की तेजी से बदलती स्काईलाइन, आर्टिफिशियल आइलैंड्स और बीच प्रोजेक्ट्स के लिए भारी मात्रा में समुद्री और विदेशी रेत का इस्तेमाल किया गया है. पाम जुमैरा जैसे प्रोजेक्ट्स ने स्थानीय रेत संसाधनों पर भारी दबाव डाला |
दुनिया के सामने खड़ी रेत की कमी
संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के मुताबिक, हर साल दुनिया में करीब 50 अरब टन रेत की खपत हो रही है. यह दुनिया में सबसे ज्यादा निकाली जाने वाली ठोस प्राकृतिक सामग्री बन चुकी है. अनियंत्रित रेत खनन से नदियों का कटाव, जैव विविधता का नुकसान और पर्यावरण संकट गहराता जा रहा है. इस बढ़ते संकट को देखते हुए कई देश मैन्युफैक्चर्ड सैंड और निर्माण कचरे के दोबारा इस्तेमाल जैसे विकल्पों पर काम कर रहे हैं. सऊदी अरब भी ऐसे समाधानों की तलाश में है, ताकि भविष्य में विदेशी रेत पर निर्भरता कम की जा सके |
S-400 के बाद अगला कदम S-350, रूस ने भारत को दिया एडवांस एयर डिफेंस का प्रस्ताव
31 Dec, 2025 11:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रूस ने एक बार फिर भारत के साथ सैन्य चर्चा की है, जिसमें मध्यम दूरी का एयर डिफेंस सिस्टम S-350 वित्याज ऑफर किया है. इसके अलावा अतिरिक्त S-400 रेजिमेंट्स और S-500 सिस्टम पर भी चर्चा हुई | रूस ने जिस एयर डिफेंस सिस्टम S-350 वित्याज को भारत के लिए ऑफर किया है. इसे टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के साथ दिया जाएगा. यानी अब भारत में भी कुछ भाग बनाए जा सकते हैं | जिसकी मदद से S-400 ट्रायम्फ बैटरियों को सपोर्ट मिलेगा. रूस इसे तुरंत उपलब्ध कराने के लिए व्यावहारिक विकल्प का ऑफर दिया है. अगर भारत इस ऑफर को स्वीकार करता है तो देश के एयर डिफेंस सिस्टम को और मजबूती मिलेगी |
बता दें, रूस पहले ही तीन S-400 ‘सुदर्शन चक्र’ भारत को दे चुका है और दो अभी और आने वाले हैं. ‘सुदर्शन चक्र’ की ताकत आपरेशन सिंदूर के समय दुनिया ने देखी. इसकी डील 2019 में हुई थी | अगर बचे दोनों S-400 पहुंच जाएंगे तो भारत के पास कुल 5 S-400 हो जाएंगे. इसके साथ ही इसके अपग्रेड वर्जन S-500 पर भी बातचीत चल रही है. जानिए क्या है S-350 वित्याज की खासियत और कैसे करेगा काम?
S-350 की क्या है खासियत?
S-350 मुख्य रूप से पुराने वाले S-300PS को रिप्लेस करने के लिए डिजाइन किया गया है, जो मध्यम दूरी के लिए सबसे बेस्ट माना जा रहा है |
ऊंचाईः S-350 करीब 20 से 30 किलोमीटर की ऊंचाईे तक इंटरसेप्ट कर सकता है.
रेंजः इसकी रेंज करीब 120 किमी. तक रहती है, जबकि बैलिस्टिक मिसाइलों के लिए 25 से 30 किमी. तक रेंज है |
मिसाइलेंः इसमें मुख्य रूप से एक लॉन्चर में 12 मिसाइलें लोड हो जाती हैं. 9M96E, 9M96E2 और 9M100 मिसाइलों का इसमें सबसे अधिक प्रयोग किया जा सकता है |
क्षमताः S-350 एक साथ 16 टार्गेट्स या 12 बैलिस्टिक टारगेट्स को ट्रैक और अटैक कर सकता है |
फीचर्सः इसमें काफी सारे फीचर्स दिए गए हैं, जो S-400 में दिए गए हैं. यह क्रूज मिसाइलें, प्रिसिजन गाइडेड बम, ड्रोन और स्टेल्थ टारगेट्स को रोकने में सक्षम है |
सीमावर्ती देशों के पास हैं खतरनाक हथियार
भारत के उत्तर पूर्व दिशा में चीन और पश्चिम दिशा में पाकिस्तान यानी दो तरफा सीमाएं हैं. बड़ी बात यह भी है कि इन दोनों देशों के पास खतरनाक लड़ाकू विमान, बैलिस्टिक मिसाइलें, क्रूज मिसाइलें और ड्रोन हैं. ऐसे में भारत के पास भी आधुनिक हथियार होने बहुत जरूरी हैं. अगर भारत के पास S-350 एयर डिफेंस सिस्टम आता है तो इससे सैन्य ताकतों को बढ़ावा मिलेगा. यह सिस्टम रूस की लेयर्ड एयर डिफेंस स्ट्रेटजी का हिस्सा है |
खाड़ी की राजनीति में भूचाल, UAE और सऊदी की लड़ाई में इजराइल को फायदा?
31 Dec, 2025 06:40 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मिडिल ईस्ट और हॉर्न ऑफ अफ्रीका की राजनीति एक नए मोड़ पर खड़ी दिख रही है. 26 दिसंबर 2025 को इजराइल ने सोमालीलैंड को एक स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता दी. इसके बाद अब चर्चा है कि इजराइल और उसके सहयोगी देश दक्षिण यमन को भी देश के तौर पर मान्यता दे सकते हैं | यमन को लेकर सऊदी अरब और यूएई के हित आपस में टकरा रहे हैं. इस हालात से इजराइल को रणनीतिक फायदा मिलता दिख रहा है |
दक्षिण यमन की मांग क्यों हो रही?
दक्षिण यमन पहले एक अलग देश रह चुका है और उसकी सीमाएं साफ तौर पर तय हैं. यहां की राजनीतिक संस्कृति उत्तर यमन की तुलना में ज्यादा उदार मानी जाती है. सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (STC) ने यहां एक काम करने वाला प्रशासन खड़ा किया है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मान्यता न मिलने से उसकी स्थिति कमजोर बनी हुई है |
STC की स्थापना साल 2017 में हुई थी. इस संगठन का नेतृत्व एदरस अल-जोबैदी करते हैं. इसका मुख्यालय यमन के दक्षिणी शहर अदन में है. STC खुद को दक्षिण यमन की आवाज बताता है और उसका मकसद है यमन को दो हिस्सों में बांटना और एक अलग दक्षिणी देश बनाना | इसके समर्थक लगातार दक्षिण यमन का पुराना झंडा लहराते हैं और खुले तौर पर अलग मुल्क की मांग करते हैं |
दक्षिण यमन से इजराइल को क्या फायदा?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर दक्षिण यमन को मान्यता मिलती है, तो ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों और मुस्लिम ब्रदरहुड जैसे संगठनों का असर कम होगा | साथ ही रेड सी और अरब सागर के अहम समुद्री रास्तों पर नियंत्रण मजबूत किया जा सकेगा | यूएई और सऊदी के बीच यमन को लेकर चल रही खींचतान में इजराइल इस स्थिति का फायदा उठा सकता है | इसी वजह से सवाल उठ रहा है कि क्या खाड़ी क्षेत्र में एक नया देश बनने की राह तैयार हो रही है |
किसी देश को मान्यता कैसे दी जाती है?
किसी देश को मान्यता देने का मतलब होता है यह स्वीकार करना कि वह एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र है. आमतौर पर मान्यता दो तरीकों से दी जाती है. पहला तरीका औपचारिक होता है, जिसमें कोई देश आधिकारिक घोषणा करता है. यह घोषणा राष्ट्रपति या विदेश मंत्री के बयान, प्रेस कॉन्फ्रेंस, सरकारी नोटिफिकेशन या संसद में प्रस्ताव के जरिए की जाती है |
इसके बाद दूतावास खोलना, राजदूत नियुक्त करना और द्विपक्षीय संधियां करना मान्यता को मजबूत करता है. दूसरा तरीका व्यवहारिक होता है. इसमें बिना औपचारिक घोषणा के भी किसी इकाई को देश की तरह माना जाता है, जैसे उच्च स्तरीय बातचीत करना, आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल भेजना, लंबे समझौते करना या उसके पासपोर्ट को स्वीकार करना |
चीन की नई रणनीति, पड़ोसी देशों में सैन्य अड्डा बना सकता है भारत के लिए चुनौती
31 Dec, 2025 05:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चीन एक बार फिर अपनी बढ़ती सैन्य महत्वाकांक्षाओं को लेकर चर्चा में है. अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) की ताज़ा रिपोर्ट ने संकेत दिए हैं कि चीन न सिर्फ अपनी सेना का तेज़ी से आधुनिकीकरण कर रहा है, बल्कि भारत के आसपास रणनीतिक तौर पर अहम देशों में सैन्य अड्डे बनाने की संभावनाएं भी तलाश रहा है
न्यूज़वीक की तरफ से जारी एक मैप में जिन देशों के नाम सामने आए हैं, उनमें भारत के चार पड़ोसी पाकिस्तान, बांग्लादेश, म्यांमार और श्रीलंका खास तौर पर ध्यान खींचते हैं. इससे यह सवाल उठने लगा है कि क्या चीन भारत को चारों तरफ से घेरने की रणनीति पर काम कर रहा है?
नए अड्डों के लिए योजना बना रहा है चीन, पेंटागन का दावा
पेंटागन की रिपोर्ट Military and Security Developments Involving the Peoples Republic of China 2025 के मुताबिक, चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) नए विदेशी सैन्य ठिकानों को लेकर सक्रिय रूप से विचार और योजना बना रही है. इन अड्डों का मकसद चीन की नौसेना और वायुसेना को दूर-दराज़ इलाकों तक ऑपरेट करने में मदद देना और जमीनी सुरक्षा बलों को लॉजिस्टिक सपोर्ट देना है |
भारत के पड़ोस में क्यों बढ़ी चिंता?
रिपोर्ट में जिन देशों का जिक्र है, उनमें भारत के चार पड़ोसी देश- पाकिस्तान, बांग्लादेश, म्यांमार और श्रीलंका रणनीतिक रूप से बेहद अहम हैं. पाकिस्तान पहले से ही चीन का करीबी साझेदार है और CPEC के ज़रिए दोनों देशों का सैन्य और आर्थिक सहयोग गहरा हुआ है. बांग्लादेश भारत के पूर्वी मोर्चे पर स्थित है और यहां चीन की सैन्य मौजूदगी भारत की सुरक्षा के लिए नई चुनौती बन सकती है. म्यांमार में चीन पहले से इंफ्रास्ट्रक्चर और बंदरगाह परियोजनाओं में सक्रिय है. वहीं श्रीलंका हिंद महासागर में भारत के लिए बेहद अहम है, जहां चीन की बढ़ती दिलचस्पी पहले ही चिंता का विषय रही है |
अभी कहां-कहां हैं चीन के सैन्य अड्डे?
फिलहाल चीन के पास अपनी सीमा के बाहर दो आधिकारिक सैन्य ठिकाने हैं. पहला, अफ्रीका के जिबूती में स्थित सपोर्ट बेस, जिसे 2017 में स्थापित किया गया था. ये अड्डा हिंद महासागर क्षेत्र में चीनी नौसेना के अभियानों और समुद्री सुरक्षा मिशनों को समर्थन देता है. दूसरा कंबोडिया में हाल ही में शुरू किया गया संयुक्त लॉजिस्टिक्स और ट्रेनिंग सेंटर, जो दक्षिण चीन सागर में चीन की सैन्य मौजूदगी को मजबूत करता है |
चीन का पक्ष क्या है?
पेंटागन की रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए चीन के रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि वह अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत काम करता है और उसकी सैन्य गतिविधियां अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक सुरक्षा और शांति स्थापना के लिए हैं. हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि जमीनी हकीकत इससे कहीं ज्यादा जटिल है |
कैंसर की वजह से अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति की नातिन का निधन, मौत से पहले लिखी दर्दनाक कहानी
31 Dec, 2025 03:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जॉन एफ. केनेडी की नातिन तातियाना श्लॉसबर्ग ( Tatiana Schlossberg) का 35 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है. तातियाना लंबे समय से एक दुर्लभ कैंसर से जूझ रही थीं. यह बीमारी आमतौर पर बुजुर्गों में पाई जाती है, लेकिन किस्मत ने इसे एक युवा मां के हिस्से में डाल दिया. नवंबर 2025 में उन्होंने खुद खुलासा किया था कि वह एक्यूट मायलॉइड ल्यूकेमिया (AML) के एक दुर्लभ प्रकार से पीड़ित हैं |
उनके निधन की जानकारी जॉन एफ. केनेडी प्रेसिडेंशियल लाइब्रेरी एंड म्यूज़ियम ने सोशल मीडिया के जरिए दी. तातियाना ने अपनी मौत से पहले अपनी बीमारी, दर्द, डर और उम्मीदों को शब्दों में ढालकर एक ऐसी कहानी लिखी, जिसने पूरी दुनिया को भावुक कर दिया |
कौन थीं तातियाना श्लॉसबर्ग
तातियाना श्लॉसबर्ग अमेरिका के 35वें राष्ट्रपति जॉन एफ. केनेडी की नातिन और कैरोलिन केनेडी की बेटी थीं. वह एक पर्यावरण पत्रकार थीं और द न्यू यॉर्कर जैसी प्रतिष्ठित मैगजीन के लिए लिखती थीं. वह दो बच्चों की मां थीं और पूरी तरह एक्टिव, फिट और स्वस्थ जीवन जी रही थीं जब तक कि मई 2024 में उनकी जिंदगी अचानक बदल नहीं गई. उस साल उन्हें कैंसर के बारे में पता चला. तब उनकी उम्र 34 साल थी.
किस बीमारी से हुई मौत?
तातियाना को एक्यूट मायलॉइड ल्यूकेमिया (AML) का पता तब चला, जब उन्होंने अपने दूसरे बच्चे को जन्म दिया. डिलीवरी के कुछ घंटों बाद डॉक्टरों ने उनके खून में व्हाइट ब्लड सेल काउंट असामान्य रूप से ज्यादा पाया. जहां सामान्य संख्या 4,000 से 11,000 होती है, वहीं उनका काउंट 1,31,000 तक पहुंच गया था. जांच में सामने आया कि उन्हें AML का एक दुर्लभ म्यूटेशन इनवर्ज़न 3 है, जो ज़्यादातर बुजुर्ग मरीजों में पाया जाता है. डॉक्टरों के मुताबिक यह कैंसर बार-बार लौटने की प्रवृत्ति रखता है और सामान्य इलाज से ठीक नहीं होता |
कीमोथेरेपी से लेकर स्टेम सेल ट्रांसप्लांट तक
तातियाना को कई दौर की कीमोथेरेपी से गुजरना पड़ा. इसके बाद उनकी बहन ने स्टेम सेल डोनेट किए, जिससे पहला बोन मैरो ट्रांसप्लांट हुआ. कुछ समय के लिए वह रिमिशन में भी गईं, लेकिन कैंसर लौट आया | इसके बाद CAR-T सेल थेरेपी समेत कई क्लिनिकल ट्रायल हुए, दूसरा ट्रांसप्लांट भी किया गया, लेकिन बीमारी हर बार वापस लौटती रही. आखिरकार डॉक्टरों ने उन्हें बताया कि शायद वह एक साल से ज्यादा नहीं जी पाएंगी |
मौत से पहले लिखी मार्मिक कहानी
मौत से कुछ समय पहले तातियाना श्लॉसबर्ग ने द न्यू यॉर्कर में एक लंबा और बेहद भावुक लेख लिखा था. लेख का शिर्षक है- A Battle with My Blood. यह लेख उनके नाना, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जॉन एफ. केनेडी की हत्या की 62वीं बरसी पर प्रकाशित हुआ. इस लेख में तातियाना बताती हैं कि जब किसी इंसान को ये एहसास हो जाता है कि उसकी जिंदगी अब ज्यादा लंबी नहीं है तो यादें अपने आप लौटने लगती हैं. बचपन, दोस्त, लोग, जगहें और छोटी-छोटी बातें, सब कुछ एक साथ दिमाग में आने लगता है |
बच्चों से बिछड़ने का दर्द किया बयां
अपने लेख में उन्होंने सबसे ज्यादा दर्द अपने बच्चों से दूर रहने का बताया है. वो लिखती है कि संक्रमण के खतरे की वजह से वो अपनी नवजात बेटी की ठीक से देखभाल भी नहीं कर पाईं. न उसे गोद में ले सकीं, न नहला सकीं, न ठीक से उसके साथ समय बिता सकीं. उन्हें डर था कि कहीं उनकी बेटी उन्हें याद भी रख पाएगी या नहीं. उन्होंने लिखा कि, क्या उसे पता होगा कि मैं उसकी मां हूं? वहीं अपने बेटे के लिए वह हर छोटी याद को अपने भीतर सहेज लेना चाहती थीं | उसकी बातें, उसकी हंसी और उसका उन्हें गले लगाना | लेख के अंत में वह लिखती हैं कि उन्हें नहीं पता मौत के बाद क्या होता है, लेकिन जब तक सांस है, वह यादें संजोती रहेंगी और उम्मीद करती रहेंगी कि उनके बच्चे जानें उनकी मां सिर्फ बीमार नहीं थी, वह उनसे बेहद प्यार करती थी |
अपने पति के लिए भावुक शब्द
तातियाना ने अपने लेख में अपने पति की भी दिल से तारीफ की है. उन्होंने लिखा कि इस मुश्किल दौर में उनके पति हर कदम पर उनके साथ खड़े रहे. वह अस्पताल के फर्श पर सोए, हर डॉक्टर से बात की, बीमा और इलाज से जुड़े सारे फैसले संभाले और उनकी नाराज़गी तक चुपचाप सहते रहे. तातियाना लिखती हैं कि वह खुद को बहुत खुशकिस्मत मानती हैं कि उन्हें ऐसा जीवनसाथी मिला, और उतनी ही दुखी हैं कि उन्हें इतनी जल्दी यह खूबसूरत जिंदगी छोड़नी पड़ रही है |
अधूरी रह गई किताब
तातियाना बताती हैं कि उन्हें इलाज के दौरान बताया गया था कि उन्हें महीनों तक कीमोथेरेपी करानी होगी और फिर बोन मैरो ट्रांसप्लांट से गुजरना पड़ेगा. इलाज लंबा, दर्दनाक और अनिश्चित था. वह समुद्र और पर्यावरण पर एक किताब लिखना चाहती थीं, लेकिन बीमारी ने यह सपना भी छीन लिया. उन्होंने लिखा कि, मैं कभी नहीं जान पाऊंगी कि हमने महासागरों को बचाया या उन्हें बर्बाद होने दिया |
अपने ही रिश्तेदार की नीतियों पर सवाल
अपने लेख में तातियाना ने अपने चचेरे भाई और अमेरिका के हेल्थ एंड ह्यूमन सर्विसेज सेक्रेटरी रॉबर्ट एफ. केनेडी जूनियर की नीतियों पर भी सवाल उठाए. उन्होंने लिखा कि वैक्सीन और मेडिकल रिसर्च को लेकर उनकी सोच कैंसर जैसे गंभीर रोगों से जूझ रहे मरीजों के लिए खतरनाक साबित हो सकती है. तातियाना ने चिंता जताई कि जिन सरकारी फंडिंग और रिसर्च के सहारे उनकी जान बचाने की कोशिश हो रही थी, वही अब कटौती का शिकार हो रही है और इसका असर सिर्फ उन पर नहीं, बल्कि हजारों मरीजों पर पड़ेगा |
क्या फिर आमने-सामने होंगे भारत और पाकिस्तान? अमेरिकी थिंक टैंक की चेतावनी
31 Dec, 2025 01:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारत और पाकिस्तान के बीच साल 2025 के मई महीने में संघर्ष हुआ था. हालांकि कुछ दिनों में सीजफायर हो गया था | ये संघर्ष भी पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद सामने आया था. अब दोनों देशों के को लेकर अमेरिका के एक बड़े थिंक टैंक काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस (CFR) ने बड़ा दावा किया है | इसके मुताबिक साल 2026 में एक बार फिर भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध हो सकता है |
CFR की रिपोर्ट कॉन्फ्लिक्ट्स टू वॉच इन 2026 के अनुसार, कश्मीर में आतंकी गतिविधियां बढ़ने से दोनों देशों के बीच टकराव की संभावना है. इससे पहले भी दोनों देशों के बीच आतंकी घटनाओं के कारण ही संघर्ष देखने को मिला था | संस्था की लेटेस्ट रिपोर्ट में वॉर्निंग जारी करते हुए कहा गया है कि अगले साल भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध हो सकता है |
CFR की रिपोर्ट अमेरिकी विदेश नीति के एक्सपर्ट के सर्वे पर आधारित है. इसमें पूर्व राजनयिक, सैन्य अधिकारी, प्रोफेसर और नीति विशेषज्ञ शामिल होते हैं | हालांकि इस समय दोनों देशों के बीच फिलहाल सीजफायर जारी है |
अमेरिकी थिंक टैंक की रिपोर्ट ने क्या बताया?
अमेरिकी थिंक टैंक की रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा गया कि अगर भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध होता है. तो इसका सीधा असर अमेरिका पर पड़ सकता है |हाल के दिनों में इनपुट सामने आया था कि जम्मू-कश्मीर में 30 से ज्यादा आतंकी छिपे हुए हैं |
रिपोर्ट में भारत-पाकिस्तान के अलावा दूसरे खतरे के बारे में भी बताया गया है. CFR के मुताबिक 2026 में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच भी सशस्त्र संघर्ष की संभावना है | हालांकि इसका असर अमेरिकी हितों पर कम होगा |
पाकिस्तान और अफगानिस्तान में हुई थी झड़पें
अक्टूबर में अफगान तालिबान और आतंकवादियों द्वारा पाकिस्तान की सीमा चौकियों पर बिना किसी उकसावे के हमले शुरू करने के बाद इस्लामाबाद और काबुल सीमा पर झड़पों में शामिल हुए | झड़पों में 200 से अधिक तालिबान और संबद्ध आतंकवादी मारे गए, जबकि 23 पाकिस्तानी सैनिक मातृभूमि की रक्षा करते हुए शहीद हो गए |
पहलगाम हमले के बाद शुरू हुआ था संघर्ष
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकियों ने पर्यटकों को निशाना बनाया था | इसके बाद ही भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ा था.भारत ने आतंकियों से बदला लेने के लिए ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत की थी | इसके बाद दोनों देशों के बीच संघर्ष देखने को मिला | हालांकि कुछ ही समय बाद दोनों के बीच सीजफायर हो गया था |
पुतिन के घर पर हुए ड्रोन हमले से भड़के राष्ट्रपति ट्रंप, अब शांति की उम्मीद भी खत्म
31 Dec, 2025 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध अब एक ऐसे विनाशकारी मोड़ पर आ चुका है, जहां से शांति की रही-सही उम्मीदें भी खत्म होती नजर आ रही हैं। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के नोवगोरोद स्थित निजी आवास पर हुए एक बड़े ड्रोन हमले ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भूचाल ला दिया है। 28-29 दिसंबर 2025 की आधी रात को हुए इस हमले में कुल 91 ड्रोनों का इस्तेमाल किया गया था। हालांकि, रूस की वायु रक्षा प्रणाली (एयर डिफेंस) ने सभी ड्रोनों को समय रहते नष्ट कर दिया, जिससे राष्ट्रपति पुतिन पूरी तरह सुरक्षित हैं, लेकिन इस घटना ने युद्ध की आग को और भड़का दिया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हमले पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे अस्वीकार्य बताया है। ट्रंप का मानना है कि यह हमला न केवल गलत था, बल्कि यह बेहद गलत समय पर किया गया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने खुलासा किया कि इस घटना के बाद खुद पुतिन ने उन्हें फोन कर हमले की जानकारी दी। ट्रंप के अनुसार, पुतिन इस हमले को लेकर अत्यधिक क्रोधित हैं और इसे अपनी हत्या की सीधी साजिश मान रहे हैं। ट्रंप ने कहा, किसी के घर पर हमला करना एक अलग और गंभीर बात है। यह हमला शांति की कोशिशों पर पानी फेरने जैसा है। ट्रंप ने बताया कि पुतिन से उनकी फोन पर लंबी बातचीत हुई, जिसमें पुतिन ने इस हमले को एक बड़ा झटका करार दिया। इस स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ट्रंप ने फिलहाल टॉमहॉक मिसाइलों की आपूर्ति पर भी रोक लगा दी है। उनका मानना है कि वर्तमान माहौल बेहद नाजुक है और ऐसी कोई भी कार्रवाई आग में घी डालने का काम करेगी। चुनाव के समय ट्रंप ने युद्ध को समाप्त कराने का वादा किया था, लेकिन इस ताजा हमले ने उनकी मध्यस्थता की कोशिशों के सामने एक बड़ी दीवार खड़ी कर दी है।
इस पूरे घटनाक्रम पर रूस और यूक्रेन के पक्ष पूरी तरह विरोधाभासी हैं। रूस का दावा है कि यूक्रेन ने सुनियोजित तरीके से 91 ड्रोनों के जरिए राष्ट्रपति के आवास को निशाना बनाया। क्रेमलिन ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस हमले को हल्के में नहीं लेगा और अब वह यूक्रेन के साथ किसी भी बातचीत या अपनी अगली सैन्य कार्रवाई की नीति पर नए सिरे से पुनर्विचार करेगा। रूस की ओर से इसे एक आतंकवादी कृत्य बताया जा रहा है।
यूक्रेन ने आरोपों को खारिज किया
वहीं दूसरी ओर, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। यूक्रेन का कहना है कि उन्होंने ऐसा कोई हमला नहीं किया है। यूक्रेनी प्रशासन का तर्क है कि रूस खुद इस तरह के आरोप लगाकर कीव पर किसी बड़े और भीषण हमले की पृष्ठभूमि तैयार कर रहा है। दो साल से अधिक समय से चल रहे इस युद्ध में पहले ही हजारों लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और लाखों बेघर हो चुके हैं। पुतिन के घर पर हुए इस हमले ने अब इस आशंका को प्रबल कर दिया है कि आने वाले दिनों में रूस की ओर से कोई अत्यंत विनाशकारी जवाबी कार्रवाई देखने को मिल सकती है।
ईरान में महंगाई और गिरती मुद्रा के खिलाफ प्रदर्शन
31 Dec, 2025 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान। ईरान में बिगड़ती आर्थिक स्थिति और राष्ट्रीय मुद्रा रियाल के ऐतिहासिक स्तर तक गिरने के विरोध में राजधानी तेहरान में लगातार दूसरे दिन प्रदर्शन देखने को मिले। इस बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने प्रदर्शनकारियों की “वैध मांगों” को स्वीकार करते हुए सरकार से उन्हें गंभीरता से सुनने और आम लोगों की क्रय शक्ति की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाने का आह्वान किया है।
राष्ट्रपति पेज़ेश्कियन ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर कहा कि आम जनता की आजीविका उनकी रोज़ की सबसे बड़ी चिंता है। उन्होंने बताया कि उन्होंने गृह मंत्री को निर्देश दिए हैं कि वे प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधियों से संवाद के जरिए उनकी मांगों को सुनें, ताकि सरकार पूरी ताकत के साथ समस्याओं का समाधान कर सके और जिम्मेदारीपूर्वक जवाब दे सके। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए ने भी राष्ट्रपति के इन बयानों की पुष्टि की है। ईरान में यह विरोध प्रदर्शन ऐसे समय पर हो रहे हैं, जब रियाल अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है। बीते कुछ हफ्तों में रियाल में तेज गिरावट दर्ज की गई है, जिसका मुख्य कारण अमेरिका और उसके पश्चिमी सहयोगियों द्वारा लगाए गए कड़े प्रतिबंध, कूटनीतिक दबाव और इजरायल के साथ संभावित टकराव की आशंका मानी जा रही है। तेहरान के जोम्हूरी इलाके में स्थित दो प्रमुख टेक्नोलॉजी और मोबाइल फोन बाजारों के दुकानदारों ने रविवार को अपनी दुकानें बंद कर सड़कों पर प्रदर्शन किया। यही हाल ग्रैंड बाजार और उसके आसपास के इलाकों में भी देखने को मिला। सोमवार को भी प्रदर्शन जारी रहे। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में प्रदर्शनकारियों को “डरो मत, हम एक साथ हैं” जैसे नारे लगाते देखा गया। प्रदर्शनों के दौरान कई जगहों पर दंगा-निरोधक बलों की तैनाती की गई। कुछ वीडियो में सुरक्षा बलों को आंसू गैस का इस्तेमाल कर प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करते हुए देखा गया।
ईरान इस समय कई गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। देश में महंगाई दर करीब 50 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, जो दुनिया में सबसे अधिक दरों में शामिल है। इसके अलावा, एक विवादित बजट प्रस्ताव के तहत करों में 62 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की योजना है, जिससे आम जनता की परेशानी और बढ़ सकती है। ऊर्जा संकट भी देश के लिए बड़ी समस्या बना हुआ है। तेहरान समेत कई बड़े शहरों को पानी उपलब्ध कराने वाले बांध लगभग खाली पड़े हैं, जिससे जल संकट गहराता जा रहा है। 9 करोड़ की आबादी वाले देश में लोगों की क्रय शक्ति लगातार गिर रही है।
ईरान का परमाणु कार्यक्रम भी एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय विवाद के केंद्र में है। अमेरिका, इजरायल और यूरोपीय देशों के बढ़ते दबाव के बीच जून में ईरान पर हुए हमलों की यादें अभी भी ताजा हैं। इससे पहले 2022-23 में महसा अमीनी की मौत के बाद हुए देशव्यापी प्रदर्शनों में सैकड़ों लोगों की जान गई थी और हजारों गिरफ्तार किए गए थे। मौजूदा हालात में राष्ट्रपति पेज़ेश्कियन के बयान को सरकार की ओर से नरम रुख और संवाद की पहल के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार प्रदर्शनकारियों की मांगों पर कितना अमल कर पाती है।
भारत ने दुलहस्ती-2 जल विद्युत परियोजना को दी मंजूरी, पाकिस्तान तिलमिलाया
31 Dec, 2025 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान के साथ सिंधु जल समझौते को रद्द कर दिया था। अब भारत ने उसे एक और झटका दिया है। हाल ही में भारत ने चिनाब नदी पर दुलहस्ती-2 जल विद्युत परियोजना को मंजूरी दी है। अब भारत के इस फैसले से पाकिस्तान तिलमिला गया है। अब दुलहस्ती-2 प्रोजेक्ट के बाद से बौखला रहा है। पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तानी सांसद शेरी रहमान ने कहा है कि पानी को हथियार बनाना न तो समझदारी है और न ही ऐसे इलाके में मंजूर है, जो जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण के दबाव के मामले में सबसे आगे है। इससे पहले से ही दुश्मनी और भरोसे के अभाव से जूझ रहे दोतरफा रिश्तों में तनाव और बढ़ेगा।
रिपोर्ट के मुताबिक एक्स पर शेरी रहमान ने लिखा- सिंधु जल समझौता का खुला उल्लंघन करते हुए, भारत ने अभी-अभी चिनाब नदी पर दुलहस्ती स्टेज-2 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है। उन्होंने आगे लिखा- आईडब्ल्यूटी को एकतरफा रद्द नहीं किया जा सकता है। जैसा कि हाल ही में यूएन के रिपोर्ट ने पुष्टि की है, आईडब्ल्यूटी के मुताबिक पाकिस्तान का इंडस, झेलम और चिनाब नदियों के पानी पर नियंत्रण है, जबकि रावी, ब्यास और सतलुज नदियां भारत के कंट्रोल में आती हैं।
बता दें भारत के पर्यावरण मंत्रालय की विशेषज्ञ समिति ने इस महीने की शुरुआत में जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में चिनाब नदी पर दुलहस्ती-2 जलविद्युत परियोजना को मंजूरी दी। इसकी लागत 3,200 करोड़ होगी। भारत सरकार ने दुलहस्ती-2 जलविद्युत परियोजना को मंजूरी देते हुए पाकिस्तान को संदेश दिया कि देश अपने हितों से कोई समझौता नहीं करेगा। भारत ने पहले भी सिंधु जल समझौता रद्द करते हुए कहा था कि पानी और खून साथ-साथ नहीं बह सकते हैं। चिनाब का पानी पाकिस्तान में खेती के लिए बेहद अहम है। चिनाब के पानी पर किसानों की निर्भरता है। ऐसे में अगर किसानों को यह पानी नहीं मिलेगा, तो इसका सीधा असर फसलों पर पड़ेगा और पाकिस्तान में जिस तरह के हालात हैं, उससे साफ है कि पड़ोसी देश के लिए मुश्किलें बढ़ जाएंगी।
मैंने अब तक आठ संघर्षों को खत्म करवाया लेकिन इसका श्रेय मुझे नहीं दिया जाता
31 Dec, 2025 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजराइल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू के साथ द्विपक्षीय बैठक में भारत-पाकिस्तान संघर्ष को खत्म कराने के अपने दावे को फिर दोहराया है। सोमवार को मार-ए-लागो में नेतन्याहू और उनके प्रतिनिधिमंडल के साथ द्विपक्षीय बैठक में ट्रंप ने कहा कि ‘व्हाइट हाउस’ में अपने दूसरे कार्यकाल के पहले वर्ष में उन्होंने अब तक आठ युद्ध रुकवाए हैं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने आर्मेनिया और अजरबैजान के बीच युद्ध रुकवाया, दोनों देशों को ट्रैरिफ लगाने की धमकी दी, साथ ही अन्य संघर्षों को भी खत्म किया, लेकिन इसका श्रेय उन्हें नहीं दिया जाता है। इसके बाद ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष रुकवाने के दावे को भी दोहराया। ट्रंप ने कहा कि अब तक आठ युद्धों का निपटारा किया... अजरबैजान को लेकर पुतिन ने मुझसे कहा था कि मुझे विश्वास नहीं हो रहा कि आपने वह युद्ध सुलझा दिया क्योंकि मैं 10 साल से कोशिश कर रहा था और मैंने सचमुच इसे एक ही दिन में सुलझा दिया।
अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि वे व्यापार करते हैं। मैंने कहा हम आपको व्यापार से अलग कर देंगे। अब कोई व्यापार नहीं। दोनों से...फिर मैंने 200 फीसदी टैरिफ लगा दिया...अगले दिन उन्होंने फोन किया और 35 साल की लड़ाई रोक दी। ट्रंप ने नेतन्याहू के साथ अपनी द्विपक्षीय बैठक से पहले कहा कि क्या इसका श्रेय मुझे मिलता है? नहीं। मैंने आठ युद्ध रुकवाए। भारत और पाकिस्तान के बारे में क्या ख्याल है...तो मैंने उनमें से आठ युद्ध रुकवाए और मैं आपको बाकी के बारे में फिर कभी बताऊंगा।
ट्रंप ने 10 मई को सोशल मीडिया पर घोषणा की थी कि वाशिंगटन की मध्यस्थता में रातभर बातचीत के बाद भारत और पाकिस्तान युद्धविराम पर सहमत हो गए हैं। उसके बाद से ट्रंप 70 से ज्यादा बार यह दावा कर चुके हैं कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष समाप्त कराया है। हालांकि भारत ने किसी भी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप से लगातार इनकार किया है। भारत ने सात मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया जिसमें पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ढांचे को निशाना बनाया था। यह कार्रवाई 22 अप्रैल को पहलगाम हमले के जवाब में की गई थी।
पाक आर्मी चीफ मुनीर ने की भतीजे से बेटी की शादी, कई हस्तियां हुई शामिल
31 Dec, 2025 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। पाकिस्तान के आर्मी चीफ असीम मुनीर ने अपने भतीजे से अपनी बेटी की शादी कर दी। पाकिस्तानी मीडिया ने इसकी पुष्टि की है। पाकिस्तान के एक पत्रकार ने एक्स पर एक वीडियो अपलोड किया है, जिसमें उन्होंने कहा है कि असीम मुनीर ने अपनी बेटी की शादी अपने ही परिवार में कर दी है। वहीं एक और पत्रकार ने कहा है कि फील्ड मार्शल असीम मुनीर ने अपनी बेटी की शादी अपने भाई कासिम मुनीर के बेटे से कर दी है।
पत्रकार ने अपने वीडियो में कहा है कि ये शादी पिछले हफ्ते रावलपिंडी में हुई और मेरे पास जो जानकारी है उसके मुताबिक ये शादी उनके भाई के बेटे के साथ हुई है। उन्होंने कहा है कि ये एक हाई प्रोफाइल शादी थी और उनके भतीजे पहले पाकिस्तान सेना में ही कैप्टन थे और उनका नाम अब्दुर रहमान है और वह सैयद कासिम मुनीर के बेटे हैं। उन्होंने कहा कि असीम मुनीर की चार बेटियां हैं और ये उनकी तीसरी बेटी की शादी थी।
पाकिस्तानी पत्रकार ने आगे कहा कि असीम मुनीर के भतीजे, जिनसे उन्होंने अपनी बेटी की शादी करवाई है, वो पहले सेना में कैप्टन थे, लेकिन बाद में वो सिविल सर्विसेज में चले गए। पाकिस्तान में सेना के अधिकारियों के लिए सिविल सर्विसेज में कोटा होता है और अब वह असिस्टेंट कमिश्नर के तौर पर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस शादी में पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी, पीएम शहबाज शरीफ, पंजाब की सीएम मरियम नवाज शरीफ के साथ कई बड़ी हस्तियां शामिल हुई थीं। इसके अलावा, शादी में कई रिटायर्ड जनरल और चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ भी इस शादी में शामिल हुए। पत्रकार ने खुलासा करते हुए कहा कि संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति इस शादी में शरीक नहीं हुए थे, लेकिन इस शादी में 400 से ज्यादा मेहमान थे, लेकिन सुरक्षा कारणों से इस फंक्शन को काफी गुप्त रखा गया था।
युवा की हत्या का चौंकाने वाला मामला, मुस्लिम दोस्त ने कहा– मजाक कर रहा था
30 Dec, 2025 07:03 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ अत्याचार का मामला थमता नहीं दिख रहा है. बांग्लादेश में एक और हिंदू युवक बजेंद्र बिस्वास(42) की गोली लगने से मौत हो गई. मुस्लिम दोस्त नोमान मियां पर ही हत्या का आरोप है. वहीं घटना के बाद आरोपी ने कहा कि मजाक कर रहा था, तभी अचानक गोली चल गई, जिससे बजेंद्र की मौत हो गई |
फैक्ट्री में गार्ड की नौकरी करता था बजेंद्र बिस्वास
पूरा मामला मयमनसिंह जिले का है. जानकारी के मुताबिक बजेंद्र बिस्वास और नोमान मिया दोनों लबीब ग्रुप गार्मेंट के भालुका उपजिला इलाका स्थित सुल्तान स्वेटर्स लिमिटेड में गार्ड की नौकरी करते थे. 29 दिसंबर सोमवार को दोनों ऑफिस में ही ड्यूटी कर रहे थे. नोमान ने बात करते-करते बजेंद्र पर बंदूक तान दी. आरोपी नोमान का कहना है कि मजाक-मजाक में ट्रिगर दबने से गोली चल गई और बजेंद्र को लग गई. इसके बाद बजेंद्र को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टर्स ने उसे मृत घोषित कर दिया |
हिंदू युवक की हत्या से तनाव बढ़ा
मयमनसिंह जिले में 12 दिनों के अंदर ही किसी दूसरे हिंदू की हत्या कर दी गई. इसके पहले 18 दिसंबर को दीपू चंद नाम के एक हिंदू युवक की बर्बरता के साथ हत्या की गई थी. दूसरी हत्या के बाद इलाके में तनाव बढ़ गया है. मामले में पुलिस ने आरोपी नोमान मियां को गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस का कहना है कि मामले में जांच की जा रही है |
15 दिनों के अंदर 3 हिंदुओं की हत्या
बांग्लादेश में 15 दिनों के अंदर तीन हिंदुओं की हत्या हुई है. इसके पहले 18 दिसंबर को दीपूचंद्र दास को भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला गया था और फिर शव को जला दिया गया. दीप पर ईश निंदा का आरोप लगाकर भीड़ ने मौत के घाट उतार दिया था. आरोप ये भी है कि पुलिस ने जानबूझकर भीड़ को छूट दी थी. इसके अलावा ढाका में अमृत मंडल नाम के युवक की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी |
पहली महिला प्रधानमंत्री खालिदा जिया का जीवन समाप्त, 80 वर्ष की उम्र में निधन
30 Dec, 2025 02:16 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीएनपी की अध्यक्ष और बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया का निधन हो गया है. ढाका के एवरकेयर अस्पताल में इलाज के दौरान मंगलवार (30 दिसंबर) सुबह 6 बजे उन्होंने दम तोड़ दिया. वो लंबे समय से बीमारियों का सामना कर रही थीं. 80 साल की उम्र में खालिदा जिया ने दुनिया को अलविदा कह दिया है |
इस खबर की पुष्टि बीएनपी के फेसबुक पेज ने की. पोस्ट में कहा गया है कि बीएनपी अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया का आज सुबह 6 बजे, फजर की नमाज के तुरंत बाद, निधन हो गया. हम सभी से उनकी आत्मा की शांति के लिए दुआ करने की अपील करते हैं |
किन बीमारियों से जूझ रही थीं
डॉक्टरों के अनुसार, खालिदा जिया को लीवर का सिरोसिस, गठिया, डायबीटीज और हार्ट से जुड़ी गंभीर समस्याएं थीं. पूर्व प्रधानमंत्री लंबे समय से कई तरह की बीमारियों से जूझ रही थीं. डॉक्टर्स उनकी देख-रेख कर रहे थे. साथ ही पिछले दिनों उन्हें वेंटीलेटर पर भी डाला गया था. द डेली स्टार के अनुसार, 23 नवंबर को हार्ट और फेफड़ों में संक्रमण के कारण खालिदा जिया को अस्पताल में भर्ती कराया गया था. पिछले 36 दिनों से उनका इलाज चल रहा था. उन्हें निमोनिया की बीमारी भी थी |
कब होगी जनाजे की नमाज?
पार्टी ने कहा कि खालिदा जिया की जनाजे की नमाज कब होगी इसका ऐलान बाद में किया जाएगा. अभी इसकी जानकारी नहीं दी गई है. पार्टी ने अभी उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है. साथ ही सभी से उनकी आत्मा की शांति के लिए दुआ करने के लिए कहा है |
खालिदा जिया का निधन ऐसे समय में हुआ जब कुछ ही दिन पहले उनके बेटे तारिक रहमान लंदन से पूरे 17 साल बाद बांग्लादेश लौटे हैं, जहां वो 2008 से स्वैच्छिक निर्वासन में रह रहे थे. मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, तारिक ने अस्पताल में अपनी बीमार मां से मुलाकात की थी. तारिक की वापसी पर पार्टी समर्थकों की बड़ी भीड़ उमड़ी और इसे आगामी संसदीय चुनावों से पहले बीएनपी के लिए एक अहम घटनाक्रम माना गया |
कौन थीं खालिदा जिया?
बांग्लादेश की पूर्व पीएम खालिदा जिया का जन्म 15 अगस्त 1945 को हुआ था. वो बांग्लादेश के संस्थापक जिया उर रहमान की पत्नी थीं. उन्होंने पति जिया उर रहमान की हत्या के बाद राजनीति में कदम रखा. बीएनपी पार्टी की जिम्मेदारी संभाली. खालिदा जिया के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप भी लगे. साथ ही साल 2018 में उन्हें जेल तक जाना पड़ा. हालांकि, स्वास्थ्य कारणों से उन्हें रिहा किया गया. लेकिन, वो घर पर ही नजरबंद जैसी स्थिति में रहीं |
बांग्लादेश की पहली महिला PM
खालिदा जिया 1991 से 1996 तक बांग्लादेश की प्रधानमंत्री रहीं और 2001 से 2006 तक दोबारा इस पद पर लौटीं. वो देश की पहली महिला प्रधानमंत्री थीं. वो बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति और सेना प्रमुख जियाउर रहमान की पत्नी थीं |
खालिदा जिया 1991 के राष्ट्रीय चुनाव में जनमत के जरिए सत्ता में आई थीं. उनके कार्यकाल के दौरान संसदीय सिस्टम को बहाल किया गया और स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित किए गए. साल 2007 में, जब सेना समर्थित कार्यवाहक सरकार ने सत्ता संभाली, तो खालिदा जिया को शेख हसीना सहित कई अन्य राजनीतिक नेताओं के साथ जेल में डाल दिया गया. बाद में जिया को रिहा किया गया और उन्होंने 2008 का संसदीय चुनाव लड़ा, लेकिन उनकी पार्टी जीत हासिल नहीं कर सकी |उनके परिवार में उनके बड़े बेटे तारिक, उनकी पत्नी और उनकी बेटी हैं |
सीरिया में सांप्रदायिक दंगा, 4 की मौत
30 Dec, 2025 10:13 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
होम्स। सीरिया में अलावी समुदाय के प्रदर्शनकारियों और विरोधी प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं, जिसमें 4 लोगों की मौत हो गई और दर्जनों घायल हो गए। स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, ये झड़पें होम्स शहर में एक मस्जिद पर हुए बम विस्फोट के दो दिन बाद हुईं, जिसमें 8 लोग मारे गए थे और 18 घायल हुए थे। हजारों की संख्या में अलावी प्रदर्शनकारी सडक़ों पर उतरे, वे अलावी समुदाय के खिलाफ हो रही हत्याओं, गिरफ्तारियों, नौकरियों से बर्खास्तगी और भेदभाव के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। कुछ प्रदर्शनकारियों ने संघीय व्यवस्था की मांग भी की। झड़पों के दौरान, लताकिया में सरकार समर्थक प्रदर्शनकारियों ने अलावी प्रदर्शनकारियों पर पत्थर फेंके। सुरक्षा बलों ने दोनों पक्षों को अलग करने की कोशिश की और हवा में गोलीबारी करके भीड़ को तितर-बितर किया।
बलूचिस्तान के अलग-अलग इलाकों में पाकिस्तानी सेना के 15 सैनिक मारे गए
30 Dec, 2025 09:12 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
क्वेटा। बलूचिस्तान के अलग-अलग इलाकों में पाकिस्तानी सेना के 15 सैनिक पिछले एक हफ्ते में मारे गए हैं। बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए), बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (बीएलएफ) और बलूच रिपब्लिकन गार्ड्स (बीआरजी) ने इन हमलों की जिम्मेदारी ली है। इसमें केच, पंजगुर, तुर्बत, सुराब और नसीराबाद जैसे इलाके शामिल हैं। एक बयान में, बीएलए के प्रवक्ता जीयंद बलूच ने कहा कि बीएलएफ के लड़ाकों ने 23 दिसंबर को केच जिले के तेजबन इलाके में एक पाकिस्तानी आर्मी पोस्ट पर स्वचालित हथियारों और ग्रेनेड-लॉन्चर राउंड का इस्तेमाल करके हमला किया, जिसमें दो सैनिक मारे गए और पोस्ट के भीतर लगे सर्विलांस कैमरे नष्ट हो गए। बीएलए ने कहा कि 25 दिसंबर को दूसरे हमले में, उसने पंजगुर जिले के कटगरी इलाके में चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) रूट पर एक सैन्य वाहन को रिमोट-कंट्रोल्ड विस्फोटक उपकरण से निशाना बनाया। दावा किया कि विस्फोट में छह पाकिस्तानी जवान मारे गए और चार अन्य घायल हो गए।
द बलूचिस्तान पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, प्रवक्ता ने आगे कहा कि ग्रुप ने रविवार को विस्फोटक लगाकर एक और हमला किया, जिससे तुर्बत के डांक इलाके में पाकिस्तानी सेना द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला एक कम्युनिकेशन टावर नष्ट हो गया और ढांचे पर लगे “एक्टिव स्पाई कैमरे” खराब हो गए। इस बीच, बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (बीएलएफ) ने कहा कि उसने 27 दिसंबर को बलूचिस्तान के सुराब जिले में बाथगु क्रॉस पर आरसीडी हाईवे पर रोडब्लॉक ऑपरेशन शुरू किया था।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्रद्धेय बृजमोहन मिश्रा की जयंती पर पुष्पांजलि अर्पित की
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कृषि मंत्री के निवास पर पहुंचकर वर-वधू को दिया आशीर्वाद
कृषि मंत्री नेताम ने मिट्टी एवं बीजों की पूजा की और ट्रैक्टर चलाकर बीजों की बुआई की
महतारी वंदन योजना से मिली नई दिशा, प्रेम बाई बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल
जल गंगा संवर्धन अभियान से जल संरक्षण की दिशा में हुआ अभूतपूर्व कार्य
पानी बचाना हमारी जरूरत भी है और जिम्मेदारी भी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
जल जीवन मिशन से ग्राम बंधी की बदली तस्वीर
प्रधानमंत्री जनमन योजना से बदली सेजाडीह की तस्वीर
आबकारी मामला: पक्षपात के आरोप निराधार, हाई कोर्ट ने केजरीवाल की मांग ठुकराई
प्रकृति और स्थानीय जीवन के कल्याण प्रयासों में ही सेवा की सार्थकता : राज्यपाल पटेल
