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रूस के विदेश मंत्री ने यूक्रेन पर राष्ट्रपति पुतिन के आवास पर 91 ड्रोन से हमले का आरोप लगाया
30 Dec, 2025 08:11 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मास्को। रूस और यूक्रेन के बीच पिछले करीब चार साल से जारी युद्ध को खत्म कराने के लिए शांति समझौते पर बातचीत के बीच एक बड़ा घटनाक्रम हुआ. रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने यूक्रेन पर राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के आवास पर 91 ड्रोन से हमले का आरोप लगाया है. उन्होंने बताया कि ये हमला नोवगोरोड इलाके में स्थित राष्ट्रपति के आधिकारिक निवास को निशाना बनाकर किया गया.
लावरोव ने बताया कि लंबी दूरी के ड्रोन से ये हमला 28-29 दिसंबर की दरमियानी रात को किया गया था. हालांकि रूसी एयर डिफेंस सिस्टम ने सभी ड्रोन्स को हवा में ही मार गिराया. उन्होंने इसे यूक्रेन सरकार द्वारा प्रायोजित आतंकवादी हमला करार दिया और कहा कि ऐसी हरकतों को बिना जवाब दिए नहीं छोड़ा जाएगा. इस हमले के वक्त राष्ट्रपति पुतिन वहां मौजूद थे या नहीं, इस बारे में फिलहाल कोई जानकारी नहीं दी गई है.
रूस ने इन हमलों का बदला लेने की तैयारी कर ली है. ये भी तय कर लिया है कि जवाबी हमला कब और कहां किया जाएगा. इसके साथ ही रूस ने शांति समझौते पर अपने रुख से पलटने के भी संकेत दिए हैं. उसे यूक्रेन पर आतंकी हमला करने का आरोप लगाया है और कहा है कि अब चूंकि यूक्रेन ने आतंकवाद का रास्ता अपना लिया है, ऐसे में वह शांति वार्ता के रुख पर फिर से विचार करेगा.
उधर, यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने रूस के उन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया, जिसमें दावा किया गया है कि यूक्रेन ने नोवगोरोड में में पुतिन के आवास पर हमला करने की कोशिश की है. जेलेंस्की ने इन दावों को मनगढ़ंत झूठ करार दिया. उन्होंने स्पष्ट किया कि यूक्रेन का पुतिन के किसी भी आवास पर हमला करने का कोई इरादा नहीं है.
उन्होंने आरोप लगाया कि मॉस्को ऐसे मनगढ़ंत आरोप इसलिए लगा रहा है ताकि वह कीव और अन्य सरकारी इमारतों पर अपने नए हमलों को जायज ठहरा सके. जेलेंस्की ने कहा कि यह शांति वार्ता में हो रही प्रगति में रोड़ा अटकाने की सोची-समझी साजिश हो सकती है.
जेलेंस्की ने पुतिन को बताया “मैन ऑफ वॉर” और दुनिया से की मजबूत कदम उठाने की अपील
29 Dec, 2025 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कीव रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव पर मिसाइल और ड्रोन से बड़ा हमला किया है। 500 से ज्यादा ड्रोन और 40 मिसाइलों से हुए हमले में कई रिहायशी इलाकों को नुकसान पहुंचा है, इस हमले में दो लोगों की मौत हुई है और चार घायल हुए हैं। यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने पुतिन को “मैन ऑफ वॉर” कहा और दुनिया से उनके खिलाफ मजबूत कदम उठाने की अपील की।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव और उसके आसपास के इलाकों पर अब तक के सबसे बड़े हवाई हमलों में से एक हमला किया। मिसाइल और ड्रोन से हुए इस हमले ने शहर और आसपास के इलाकों को हिला दिया। कई घंटों तक एयर रेड अलर्ट जारी रहा और बिजली गुल रही। इस हमले के बाद जेलेंस्की ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को “मैन ऑफ वॉर” करार दिया।
जेलेंस्की के मुताबिक रूस ने इस हमले में 500 से ज्यादा ड्रोन और 40 से ज्यादा मिसाइलें दागीं। हमला करीब 10 घंटे तक चला। इसका मुख्य निशाना कीव की ऊर्जा सुविधाएं और नागरिक ढांचा था। कनाडा में एक कार्यक्रम के दौरान जेलेंस्की ने कहा कि हम शांति चाहते हैं और पुतिन मैन ऑफ वॉर हैं। उन्होंने पुतिन पर आरोप लगाया कि वह युद्ध को खत्म करने के बजाय उसे लंबा खींचने की कोशिश कर रहे हैं। जेलेंस्की ने दुनिया से अपील की कि पुतिन को रोकने के लिए फ्रंटलाइन और डिप्लोमेसी दोनों जगह मजबूत कदम उठाए जाएं।
यह हमला उस समय हुआ जब जेलेंस्की अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की तैयारी कर रहे हैं। यह बैठक रविवार को फ्लोरिडा के मार-ए-लागो में होने वाली है। इसमें शांति योजना और अमेरिका की संभावित सुरक्षा गारंटी पर चर्चा होने की उम्मीद है। जेलेंस्की ने कनाडा में नाटो और यूरोपीय नेताओं से भी बातचीत की है। हमले के बाद कीव के कई इलाकों में बिजली और हीटिंग की सुविधा ठप हो गई। बचाव दल मलबे में फंसे लोगों को निकालने में जुट गए। आग बुझाने और मरम्मत का काम जारी है।
चीन मिटा रहा तिब्बती पहचान, स्तूप तोड़े, बौद्ध मंत्र हटाकर चीनी झंडे लगाए
29 Dec, 2025 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलंबो। चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) तिब्बती पहचान को मिटाने की लगातार कोशिशें कर रही है। भाषा, धर्म और संस्कृति को निशाना बनाया जा रहा। एक ताजा रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीनी प्रशासन तिब्बती धार्मिक प्रतीकों को हटाकर उनकी जगह जबरन चीनी राष्ट्रवादी प्रतीक थोप रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक सैटेलाइट तस्वीरों से सामने आया है कि तिब्बत की पहाड़ियों पर पत्थरों में उकेरे गए पवित्र बौद्ध मंत्र ओम मणि पद्मे हम को हटाकर वहां चीनी झंडा लगा दिया है। यही नहीं तिब्बती खानाबदोशों को पारंपरिक मणि प्रार्थना ध्वज हटाने के लिए मजबूर किया और उसकी जगह चीनी झंडे लगाने को कहा। इसके साथ ही लोगों को राजनीतिक री-एजुकेशन यानी वैचारिक प्रशिक्षण सत्रों में भी शामिल किया गया।
एक अन्य मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि तिब्बत में सांस्कृतिक दमन हाल के वर्षों में और खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। हाल ही में चीनी अधिकारियों ने आग लगने के खतरे का हवाला देते हुए पारंपरिक प्रार्थना ध्वज जला दिए। स्थानीय लोगों ने इसे तिब्बती धार्मिक परंपराओं को मिटाने की चीन की मुहिम का नया और गंभीर कदम बताया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले कुछ सालों में कई बार मणि प्रार्थना ध्वज और प्रार्थना चक्रों को हटाया गया या तोड़ दिया गया। ये कार्रवाइयां बिना किसी ठोस या तार्किक कारण के की गईं।
इसी दौरान जब तिब्बती आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा का 90वां जन्मदिन मनाया जा रहा था, तब चीनी प्रशासन ने तिब्बत में आवाजाही और धार्मिक गतिविधियों पर कड़ी पाबंदियां लगा दीं। रिपोर्ट के मुताबिक जो लोग बीजिंग के री-एजुकेशन प्रोग्राम का हिस्सा बनने से इनकार करते हैं, उन्हें झूठे आरोपों में हिरासत, लंबी कैद और सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ता है। इटली के धर्म समाजशास्त्री ने इन घटनाओं को अपमान और पवित्रता का हनन बताया। उन्होंने कहा कि सीसीपी तिब्बती धर्म और संस्कृति को खत्म कर उसकी एक बनावटी, पर्यटकों के लिए बनाई गई डिज्नी जैसी छवि छोड़ना चाहती है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि 2025 के मध्य में तिब्बत के खाम प्रांत में करीब 300 बौद्ध स्तूपों को तोड़ दिया गया। सेंट्रल तिब्बतन एडमिनिस्ट्रेशन (सीटीए) ने इसे सांस्कृतिक तोड़फोड़ का खुला कृत्य बताया है, जिसने दुनियाभर के तिब्बतियों को गहरा आघात पहुंचाया है। सीटीए का कहना है कि चीनी अधिकारी इन ध्वंस कार्रवाइयों को सरकारी जमीन और नियमों के उल्लंघन का बहाना बनाकर सही ठहराते हैं, लेकिन पवित्र स्तूपों का मलबा पूरी तरह हटा दिया गया है, जिससे सदियों पुरानी आस्था के निशान भी मिट गए।
बांग्लादेश में हिंदूओं की हत्या पर नेपाल में भी विरोध प्रदर्शन, यूनुस मुर्दाबाद के लगे नारे
29 Dec, 2025 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
काठमांडू। बांग्लादेश में हिंदुओं की हत्या के विरोध में नेपाल में बीरगंज, जनकपुरधाम और गोलबाजार जैसे बड़े शहरों में प्रदर्शन किया गया। वहीं मुस्लिमों ने भी रैली निकालकर यूनुस मुर्दाबाद के नारे लगाए। बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं के खिलाफ हो रही हिंसा अब पड़ोसी देशों में भी भारी आक्रोश पैदा कर रही है। इन प्रदर्शनों का मुख्य कारण हाल ही में बांग्लादेश में हुई हिंदुओं की हत्याएं हैं, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकारों की स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। 18 दिसंबर को 25 साल के हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की मॉब लिंचिंग कर दी गई थी। वहीं बुधवार देर रात अमृत मंडल उर्फ सम्राट को भी भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला।
इन हत्याओं ने बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा को लेकर व्यापक चिंता पैदा कर दी है। बांग्लादेश में अगस्त 2024 में लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई शेख हसीना सरकार के तख्तापलट के बाद मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में बनी अंतरिम सरकार के कार्यकाल में कट्टरपंथियों का प्रभाव काफी बढ़ गया है। बांग्लादेश में हिंदुओं को निशाना बनाकर की जा रही हिंसा के खिलाफ नेपाल में हिंदू अधिकार समूह राष्ट्रीय एकता अभियान ने सिरहा जिले के गोलबाजार इलाके में विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने ईस्ट-वेस्ट हाईवे को जाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने हिंदुओं की हत्या बंद करो अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पक्की करो और मानवाधिकार का सम्मान करो जैसे नारे लगाए।
मुस्लिमों ने भी हिंदुओं पर जुल्म के खिलाफ निकाली रैली
शनिवार को नेपाल में मुस्लिम ग्रुप जमीयत उलेमा-ए नेपाल, बारा और परसा जिला समितियों ने भी बांग्लादेश में हिंदुओं की हत्याओं के खिलाफ परसा जिले के बीरगंज में एक रैली निकाली। जमीयत उलेमा-ए नेपाल के उपाध्यक्ष मौलाना अली असगर मदनी के नेतृत्व में हुई इस रैली में मुस्लिम नेताओं और आम लोगों ने हिस्सा लिया। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने दीपू के कातिल को फांसी देने और हिंदुओं की हत्याएं बंद करने के नारे लगाए। बांग्लादेश सरकार और मोहम्मद यूनुस मुर्दाबाद के भी नारे लगे। हिंदू-मुस्लिम एकता जिंदाबाद के नारे भी लगाए गए।
नए साल से तीन दिन पहले जघन्य हत्याकांड, 5 बच्चों सहित 9 लोगों की चाकू से गोदकर हत्या
29 Dec, 2025 09:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सूरीनाम की राजधानी पारामारिबो के पास स्थित छोटे से कस्बे रिचेल्यू में रविवार को एक भयावह चाकू हमले में कम से कम 9 लोगों की जान चली गई। मृतकों में 5 बच्चे भी शामिल हैं। रिपोर्टों के अनुसार, हमलावर ने अपने 4 बच्चों और पड़ोसियों पर हमला किया, जो उसे रोकने की कोशिश कर रहे थे। शव कई घरों में पाए गए।
यह घटना कॉम्मेविज़ने जिले में हुई, जो पारामारिबो से लगभग 25 किलोमीटर पूर्व में स्थित है। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और हमलावर को उसके पैर में गोली मारकर पकड़ लिया। बाद में आरोपी को इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल ले जाया गया।
रिपोर्टों के अनुसार, 43 वर्षीय आरोपी ने अपनी अलग हो चुकी पत्नी के साथ फोन पर हुए विवाद के बाद यह हमला किया। उसने गुस्से में आकर अपने बच्चों और उन्हें रोकने की कोशिश करने वाले पड़ोसियों पर चाकू से हमला किया। विवाद का कारण यह था कि उसकी अलग हो चुकी पत्नी बच्चों को लेने खुद नहीं आई और किसी अन्य को भेजने से मना कर दिया।
सूरीनाम की राष्ट्रपति ने जताया दुख
सूरीनाम की राष्ट्रपति जेनिफर गिरलिंग-सिमंस ने इस घटना पर गहरा दुख जताया। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, "मैं सभी शोक संतप्त परिवारों को इस अविश्वसनीय रूप से कठिन समय में शक्ति, धैर्य और सांत्वना की कामना करती हूं।"
सूरीनाम, जो कभी डच उपनिवेश रहा है, की कुल जनसंख्या लगभग 6 लाख है। देश में आमतौर पर हत्या की दर बहुत कम रही है। हालांकि Insight Crime के अनुसार, 2024 में यहां हत्या की दर बढ़कर प्रति 1 लाख निवासियों पर 30 तक पहुंच गई है।
ब्रिटेन में इस्लामोफोबिया की परिभाषा पर संकट
29 Dec, 2025 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लंदन । ब्रिटेन में इस्लामोफोबिया यानी मुसलमानों के खिलाफ नफरत को परिभाषित करने को लेकर सरकार की असमर्थता एक बार फिर चर्चा में है। फरवरी 2025 में ब्रिटिश सरकार ने “मुस्लिम विरोधी नफरत/इस्लामोफोबिया” की परिभाषा तय करने के लिए एक कार्यसमूह बनाया था, जिसे अगस्त तक अपनी रिपोर्ट देनी थी। लेकिन अब तक कोई स्पष्ट परिभाषा सामने नहीं आई है।
हाल ही में बीबीसी की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि सरकार इस परिभाषा में “इस्लामोफोबिया” शब्द का ही इस्तेमाल नहीं करेगी और उसकी जगह “मुस्लिम विरोधी शत्रुता” जैसे शब्दों को चुना जाएगा। विशेषज्ञों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का मानना है कि यह कदम बेहद कमजोर और खतरनाक है, क्योंकि इससे इस्लाम के खिलाफ नफरत को अनदेखा किया जा सकता है। लेखक और इतिहासकार जेम्स रेंटन के अनुसार, मुसलमानों के खिलाफ नस्लवाद की जड़ में इस्लाम से नफरत ही है। ऐसे समय में, जब ब्रिटेन में मुसलमानों पर हमलों के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, सरकार का इस मुद्दे से बचना गंभीर चिंता का विषय है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इंग्लैंड और वेल्स में मुसलमानों के खिलाफ धार्मिक नफरत से जुड़े अपराधों में पिछले दो वर्षों में तेज़ बढ़ोतरी हुई है। मार्च 2024 तक इन मामलों में 13 प्रतिशत और मार्च 2025 तक 19 प्रतिशत की और वृद्धि दर्ज की गई। विशेषज्ञों का कहना है कि ये आंकड़े वास्तविक स्थिति से कम हो सकते हैं। आलोचकों का आरोप है कि ब्रिटिश सरकार यहूदी विरोधी नफरत के खिलाफ तो सख्त रुख अपनाती है, लेकिन मुसलमानों की सुरक्षा और इस्लामोफोबिया को लेकर वैसा ही राजनीतिक संकल्प नहीं दिखाती। 2016 में सरकार ने यहूदी विरोधी नफरत की एक अंतरराष्ट्रीय परिभाषा अपनाई थी, लेकिन इस्लामोफोबिया के मामले में अब भी टालमटोल जारी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक सरकार इस्लामोफोबिया को साफ शब्दों में परिभाषित नहीं करेगी, तब तक मुसलमानों के खिलाफ बढ़ती नफरत और हिंसा को प्रभावी ढंग से रोका नहीं जा सकेगा।
इलाज कर रहे डॉक्टर जाहिद का बयान........खालिदा जिया की हालत “बेहद नाजुक”
29 Dec, 2025 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री एवं बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की अध्यक्ष खालिदा जिया की हालत “बेहद नाजुक” बनी हुई है। उनके निजी चिकित्सक ने इसकी जानकारी दी। कई स्वास्थ्य जटिलताओं से जूझ रही 80 साल की खालिदा जिया 23 नवंबर से ‘एवरकेयर’ अस्पताल में उपचाराधीन हैं और उन्हें 11 दिसंबर को वेंटिलेटर पर रखा गया था। डॉ. ए.जेड.एम.जाहिद ने कहा, यह नहीं कहा जा सकता कि उनकी हालत में सुधार हुआ है। फिलहाल उनकी हालत बेहद नाजुक बनी हुई है।’’
रिपोर्ट के अनुसार, डॉ. जाहिद ने देशवासियों से जिया के शीघ्र स्वस्थ होने के लिए प्रार्थना करने की अपील की। उन्होंने कहा, “अगर अल्लाह की रहमत से वह नाजुक दौर से बाहर निकल जाती हैं, तब हमें कुछ सकारात्मक खबर सुनने को मिल सकती है।”
पार्टी सदस्यों के मुताबिक, खालिदा के बेटे एवं बीएनपी के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान ने अस्पताल में दो घंटे से अधिक समय बिताकर आधी रात के आसपास रवाना हुए। स्थानीय और विदेशी दोनों चिकित्सक उनकी देखभाल में लगे हैं। उनकी बहू डॉ. जुबैदा रहमान भी उपचार प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग ले रही हैं। बीएनपी ने पहले संकेत दिया था कि वह खालिदा जिया को उन्नत चिकित्सा उपचार के लिए विदेश ले जाना चाहती है। हालांकि, उनकी वर्तमान शारीरिक स्थिति हवाई यात्रा की अनुमति नहीं देती, इसलिए उनका इलाज फिलहाल देश में ही जारी है।
बांग्लादेश हिंसा के विरोध में लंदन उच्चायोग के बाहर प्रदर्शन, भारतीयों के प्रोटेस्ट में खालिस्तानियों ने डाली बाधा
28 Dec, 2025 03:46 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लंदन. बांग्लादेश (Bangladesh) में जारी हिंसा (violence) की गूंज अब लंदन (London) तक सुनाई दे रही है। इसी क्रम में शनिवार को एक बड़ी खबर तब सामने आई जब बांग्लादेश (Bangladesh) में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रहे अत्याचार के खिलाफ लंदन स्थित बांग्लादेश उच्चायोग (High Commission) के बाहर हो रहे विरोध प्रदर्शन में खलिस्तान समर्थकों ने अपनी खराब मंशा का परिचय दिया। साथ ही इस पूरे विरोध प्रदर्शन में बाधा डालने की कोशिश की। इस घटना के बाद पूरे मामले में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई की रणनीति सामने आने का संदेह बढ़ गया है। आइए जानते है कैसे?
दरअसल बांग्लादेश हिंदू एसोसिएशन और भारतीय समुदाय ने बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों, खासकर दीपु चंद्र दास की निर्मम हत्या के विरोध में शांतिपूर्ण प्रदर्शन आयोजित किया था। लेकिन इसी दौरान कुछ खलिस्तान समर्थक आ गए और प्रदर्शन में हल्की झड़प हो गई।
बांग्लादेश में अब-तक क्यों जारी है हिंसा?
बता दें कि बीते कुछ दिनों से बांग्लादेश में हिंसा बदस्तूर जारी है। ढाका से लेकर चटगांव तक भीड़ के प्रदर्शन और उससे जुड़ी हिंसा की खबरें सामने आ रही हैं। 12 दिसंबर को इंकलाब मंच के छात्र नेता उस्मान हादी को गोली मार दी गई थी। इसके बाद 18 दिसंबर को हादी का सिंगापुर में निधन हो गया और तब से लेकर अब तक बांग्लादेश में लगातार माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है। इसके ठीक बाद चटगांव में एक हिंदू शख्स की लिंचिंग की घटना ने पूरी दुनिया को चौंका दिया।
खालिस्तानी समर्थकों का आने से विवाद क्यों?
बता दें कि खलिस्तान समर्थकों का प्रदर्शन स्थल और समय पर अचानक आना एक संयोग नहीं बल्कि पहले से योजना के तहत किया गया कदम माना जा रहा है। उनके वहां होने का मतलब ये है कि किसी बाहरी शक्ति का हाथ है। सूत्रों के अनुसार पाकिस्तान की आईएसआई लंबे समय से बांग्लादेश और भारत की राजनीतिक और सुरक्षा स्थिति पर असर डाल रही है। ऐसे में आईएसआई का मकसद युवाओं को कट्टरपंथ की ओर मोड़ना और धार्मिक अतिवाद फैलाना है।
खालिस्तानी समर्थकों का मकसद
आईएसआई के इस अभियान के तहत बांग्लादेश में इस्लामवादी समूह हिंदू अल्पसंख्यकों की आवाज दबा रहे हैं। बाहर देशों में खलिस्तान समर्थक हिंदू विरोधी और भारत विरोधी घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। खलिस्तान समर्थकों का यह प्रदर्शन सीधे हिंदुओं के खिलाफ नहीं था, बल्कि इसका असली मकसद बांग्लादेश में हो रहे हिंदू उत्पीड़न की घटनाओं पर से ध्यान हटाकर भारत विरोधी संदेश फैलाना था।
सूत्रों का कहना है कि आईएसआई बांग्लादेश में और बाहर दोनों जगह रणनीति चला रही है। एक तो बांग्लादेश में इस्लामवादी समूह भारत विरोधी संदेश फैलाते हैं और अल्पसंख्यकों की आवाज दबाते हैं। दूसरा पश्चिमी देशों में खलिस्तान समर्थक भारत और हिंदुओं के समर्थन में उठ रही आवाजों को बाधित करते हैं।
PAK राष्ट्रपति जरदारी का बड़ा कबूलनामा, बोले-ऑपरेशन सिंदूर के समय बंकरों में छिपी थी सेना, फिर हुई पाकिस्तान की किरकिरी
28 Dec, 2025 02:44 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद. आतंकियों (terrorists) के पनाहगार पाकिस्तान (Pakistan) को हमेशा से ही अपनी बुजदिल हरकतों के चलते वैश्विक मंच (global stage) पर शर्मसार होना पड़ता है। ऐसे में एक बार फिर ऐसी स्थिति तब आई जब ‘ऑपरेशन सिंदूर’ (Operation Sindoor) के दौरान अपनी ताकत का झूठा बखान करने वाला नापाक पड़ोसी पाकिस्तान की सेना और उसके हालात को लेकर नया और चौंकाने वाला खुलासा हुआ। ये खुलासा किसी और ने नहीं खुद पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी (Asif Ali Zardari) ने किया है।
पाकिस्तानी राष्ट्रपति जरदारी ने बताया कि कैसे ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तानी सेना बंकर में छिपी हुई थी। एक सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित करने के दौरान जरदारी ने यह स्वीकार किया कि तनाव के हालात में पाकिस्तान की सेना बंकरों में छिपी हुई थी और उन्हें खुद भी बंकर में रहने की सलाह दी गई थी।
आर्थिक तंगी से जूझ रहा पाकिस्तान और फिर ये…
बता दें कि राष्ट्रपति जरदारी का यह बयान पाकिस्तान की कमजोर स्थिति को उजागर करता है। गंभीर आर्थिक संकट, बढ़ती महंगाई और कर्ज में डूबे पाकिस्तान के पास न तो मजबूत अर्थव्यवस्था है और न ही लंबी सैन्य तैयारी की क्षमता। ऐसे में पाकिस्तानी सेना के बंकरों में छिपने की बात यह दिखाती है कि पाकिस्तान अंदर से असुरक्षित और दबाव में है।
पहलगाम हमले के जवाब में भारत का एक्शन: ‘ऑपरेशन सिंदूर’
पहलगाम हमले के जवाब में भारत ने 6-7 मई की दरमियानी रात को भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए थे। इस दौरान 9 ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिनमें लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के मुख्यालय और ट्रेनिंग सेंटर शामिल थे। इन जगहों से भारत के खिलाफ आतंकी हमलों की साजिश रची जाती थी।
पहलगाम आतंकी हमला, जब गई थी 26 निर्दोष लोगों की जान
गौरतलब है कि 22 अप्रैल का वो काला दिन, जिसे भारतवासी आज भी नहीं भुला पा रहे। जगह था जम्मू-कश्मीर का पहलगाम। जहां एक साथ कई आतंकियों ने वहां उपस्थित सभी पर्यटकों पर अंधाधुंध गोली चलानी शुरू कर दी। इस आतंकी हमले में कुल 26 लोगों की जान गई। इस घटना को बीते अब तीन महीने से ज्यादा का समय हो चुका है। लेकिन लोगों में नाराजगी और अपनों के खोने का गम अभी भी है। हमले की जिम्मेदारी टीआरएफ ने उसी दिन ली और एक फोटो भी शेयर किया।
ब्राजील के स्कूल में भीषण आग, दूर तक दिखा धुएं का गुबार, उधर ढाका के मदरसे में धमाका
28 Dec, 2025 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रियो ग्रांडे। दुनिया के दो अलग-अलग हिस्सों से आग और विस्फोट की बड़ी खबरें सामने आई हैं। ब्राजील के सांता मारिया शहर में जहां एक 120 साल पुराना ऐतिहासिक स्कूल आग की भेंट चढ़ गया, वहीं बांग्लादेश की राजधानी ढाका में एक मदरसे के भीतर हुए विस्फोट ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। ब्राजील के रियो ग्रांडे दो सुल राज्य से मिली जानकारी के अनुसार, सांता मारिया शहर के एक प्रतिष्ठित निजी स्कूल में शाम करीब 7:30 बजे अचानक भीषण आग लग गई। यह स्कूल 120 साल पुराना है और स्थानीय समुदाय के लिए एक बड़ी सांस्कृतिक विरासत माना जाता है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग इमारत की ऊपरी मंजिलों से शुरू हुई और देखते ही देखते पूरी इमारत को अपनी चपेट में ले लिया। आग की लपटें इतनी भयानक थीं कि उन्हें शहर के दूर-दराज के हिस्सों से भी देखा जा सकता था। सूचना मिलते ही दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। राहत की बात यह रही कि क्रिसमस की छुट्टियों के कारण स्कूल परिसर पूरी तरह खाली था, जिससे किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। सावधानी बरतते हुए प्रशासन ने आसपास की इमारतों को खाली करा लिया था और सड़कों को बंद कर दिया गया था। स्थानीय मेयर और राजनीतिक नेताओं ने इस ऐतिहासिक नुकसान पर गहरा दुख व्यक्त किया है और संस्थान के पुनर्निर्माण में हर संभव मदद का भरोसा दिया है।
मदरसे में धमाका, दीवारें ढहीं
दूसरी ओर, बांग्लादेश की राजधानी ढाका के दक्षिण केरानीगंज इलाके में स्थित उम्माल कुरा इंटरनेशनल मदरसा शुक्रवार को एक जोरदार धमाके से दहल उठा। धमाका इतना शक्तिशाली था कि मदरसे के एक कमरे की छत और दीवारें पूरी तरह ढह गईं। घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने जब मौके पर पहुंचकर तलाशी ली, तो वहां से बम बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री बरामद की गई। प्रारंभिक जांच में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन बम बनाने के सामान की बरामदगी ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सुरक्षा एजेंसियां अब इस बात की तफ्तीश कर रही हैं कि मदरसे के भीतर विस्फोटक सामग्री किस उद्देश्य से रखी गई थी और इस साजिश के पीछे किन तत्वों का हाथ है।
सीरिया में नमाज के दौरान मस्जिद में धमाका, 8 की मौत, 20 से ज्यादा घायल
28 Dec, 2025 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
होम्स। सीरिया के होम्स शहर में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब एक मस्जिद में धमाका हो गया। इस हमले में 8 लोगों की मौत हो गई, जबकि 20 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक यह धमाका होम्स प्रांत के वादी अल-दहब इलाके में स्थित मस्जिद को निशाना बनाकर किया गया। विस्फोट शुक्रवार की नमाज़ के समय हुआ, जिससे मस्जिद में मौजूद लोगों में भगदड़ मच गई। सामने आए वीडियो फुटेज में लोग मस्जिद से बाहर भागते नजर आए, वहीं कई घायलों को अस्पताल ले जाया गया।
रिपोर्ट के मुताबिक धमाका मस्जिद के मुख्य नमाज़ हॉल के एक कोने में हुआ, जिससे दीवार में गड्ढा हो गया और आसपास का इलाका बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। आशंका जताई जा रही है कि यह हमला आत्मघाती हो सकता है या फिर मस्जिद में पहले से विस्फोटक लगाए गए थे। घटना के बाद सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी और जांच शुरू कर दी गई है।
बता दें होम्स शहर में अलावाइट, ईसाई और सुन्नी मुस्लिमों की मिश्रित आबादी रहती है और यह हमला एक अलावाइट (नुसैरी) मस्जिद में हुआ, जिससे देश में सांप्रदायिक तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। फिलहाल किसी भी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन हाल के दिनों में सीरिया में इस्लामिक स्टेट की गतिविधियों में बढ़ोतरी देखी गई है। सेना ने हाल ही में अलेप्पो के पास एक अभियान के दौरान तीन कथित आईएसआईएस आतंकियों को गिरफ्तार किया है। उल्लेखनीय है कि पिछले सप्ताह अमेरिका ने सीरिया में आईएसआईएस ठिकानों पर हवाई हमले किए थे, जो दो अमेरिकी सैनिकों और एक ट्रांसलेटर की हत्या के जवाब में बताए गए थे।
कंपनी मालिक ने 1.7 बिलियन डॉलर के सौदे में रखी अनोखी शर्त, कर्मचारियों को बोनस में दिए 2000 करोड़
28 Dec, 2025 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। कॉरपोरेट जगत में अक्सर मुनाफे और अधिग्रहण की खबरें सुर्खियों में रहती हैं, लेकिन अमेरिका की एक कंपनी के मालिक ने अपने कर्मचारियों के प्रति वफादारी और सम्मान की एक ऐसी मिसाल पेश की है, जिसने पूरी दुनिया का दिल जीत लिया है। फाइबरबॉन्ड कंपनी के मालिक ग्राहम वॉकर ने हाल ही में अपना व्यवसाय ईटन नामक दिग्गज कंपनी को बेच दिया, लेकिन इस सौदे को अंतिम रूप देने से पहले उन्होंने एक ऐसी शर्त रखी जिसे सुनकर व्यापारिक सलाहकार भी हैरान रह गए। वॉकर ने स्पष्ट कर दिया कि कंपनी की कुल बिक्री राशि का 15 प्रतिशत हिस्सा सीधे उन कर्मचारियों को दिया जाएगा, जिन्होंने कंपनी को इस मुकाम तक पहुँचाया है।
यह सौदा 1.7 बिलियन डॉलर (लगभग 14,000 करोड़ रुपये) में तय हुआ। वॉकर की शर्त के अनुसार, बिक्री की राशि में से 240 मिलियन डॉलर (लगभग 2,000 करोड़ रुपये) का बोनस कंपनी के सभी 540 फुल-टाइम कर्मचारियों के लिए आरक्षित किया गया। इस फैसले की सबसे खास बात यह थी कि कर्मचारियों के पास कंपनी का कोई शेयर नहीं था, फिर भी वॉकर ने उन्हें मुनाफे का हिस्सेदार बनाया। इस हिसाब से प्रत्येक कर्मचारी को औसतन 4.4 लाख डॉलर (लगभग 3.7 करोड़ रुपये) मिले, जिसे रिटेंशन अवॉर्ड के रूप में अगले पांच वर्षों में वितरित किया जाएगा। जब जून के महीने में कर्मचारियों को उनके नाम के सीलबंद लिफाफे मिले, तो कई लोगों की आंखों में आंसू आ गए। 29 साल से कंपनी में काम कर रही लेसिया की ने बताया कि उन्होंने 1995 में मात्र 5.35 डॉलर प्रति घंटे की मजदूरी से शुरुआत की थी। बोनस की राशि मिलने के बाद उन्होंने अपना होम लोन चुकाया और खुद का व्यवसाय शुरू करने का सपना पूरा किया। इसी तरह 15 साल से काम कर रही 67 वर्षीय हांग ब्लैकवेल को भी लाखों डॉलर का बोनस मिला, जिससे उन्होंने सम्मानजनक सेवानिवृत्ति ली।
फाइबरबॉन्ड की यात्रा संघर्षों से भरी रही है। 1982 में शुरू हुई यह कंपनी 1998 में भीषण आग के कारण खाक हो गई थी, लेकिन वॉकर परिवार ने उत्पादन बंद होने के बावजूद कर्मचारियों का वेतन नहीं रोका। बाद में डॉट-कॉम मंदी के दौरान भी कंपनी ने कड़े संघर्ष किए। कंपनी की किस्मत तब बदली जब उसने डेटा सेंटर क्षेत्र में भारी निवेश किया और महामारी के दौरान क्लाउड कंप्यूटिंग की मांग बढ़ने से इसकी बिक्री में 400% का उछाल आया। ग्राहम वॉकर के सलाहकारों ने उन्हें चेतावनी दी थी कि बिक्री का 15% कर्मचारियों को देने की शर्त सौदे को जटिल बना सकती है, लेकिन वॉकर अपने फैसले पर अडिग रहे। उनका मानना था कि यह पैसा सिर्फ एक उपहार नहीं, बल्कि उन लोगों के प्रति आभार है जिन्होंने मुश्किल समय में कंपनी का साथ नहीं छोड़ा। यह कदम न केवल कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति को सुधारने वाला साबित हुआ, बल्कि नई मालिक कंपनी के लिए भी संचालन को स्थिर रखने का एक जरिया बना।
जब तक मैं इसे मंजूरी नहीं देता, उनके पास कुछ भी नहीं
28 Dec, 2025 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने यूक्रेन की शांति पहल पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि वाशिंगटन के समर्थन के बिना यूक्रेनी राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की के पास कोई खास प्रभाव नहीं है। एक इंटरव्यू में ट्रम्प ने कहा कि जब तक मैं इसे मंजूरी नहीं देता, उनके पास कुछ भी नहीं है। इसलिए हम देखेंगे कि उनके पास क्या है। उन्होंने कहा कि उन्हें विश्वास है कि वार्ता फलदायी हो सकती है। जेलेंस्की के फ्लोरिडा में ट्रंप से मिलने की उम्मीद है और उन्होंने कहा है कि वे एक नई 20 सूत्री शांति योजना पेश करेंगे। इस योजना में विसैन्यीकृत क्षेत्र के प्रस्ताव शामिल हैं और वार्ता में यूक्रेन के लिए अमेरिकी सुरक्षा गारंटी पर ध्यान केंद्रित किए जाने की उम्मीद है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप ने कीव के नवीनतम प्रस्ताव का समर्थन करने में कोई जल्दबाजी नहीं दिखाई। एक रचनात्मक बैठक की भविष्यवाणी करते हुए, उन्होंने संकेत दिया कि जेलेंस्की के प्रस्तावों को विस्तार से देखे बिना वे उनसे पूरी तरह सहमत नहीं हैं। ट्रंप ने कहा कि मुझे लगता है कि उनके साथ बातचीत अच्छी रहेगी। मुझे लगता है कि व्लादिमीर पुतिन के साथ भी बातचीत अच्छी रहेगी और साथ ही यह भी जोड़ा कि उन्हें रूसी राष्ट्रपति से जल्द ही बात करने की उम्मीद है, मैं ऐसा चाहता हूं।
ट्रम्प की ये टिप्पणी जेलेंस्की के उस बयान के बाद आई है जिसमें उन्होंने कहा था कि संघर्ष को लेकर राजनयिक गतिविधियां तेज होने के बीच उनकी अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रम्प के दामाद जेरेड कुशनर के साथ अच्छी बातचीत हुई। ये हमले नाइजीरिया में आईएसआईएस के ठिकानों पर अमेरिकी हवाई हमलों के बाद हुए जिन्हें ट्रंप ने ईसाईयों की हत्या के जवाब में किए गए हमले बताया था। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने प्रतीकात्मक कारणों से व्यक्तिगत रूप से इन हमलों को एक दिन के लिए टाल दिया था।
जेलेंस्की ने कहा था कि उनकी शांति योजना 90फीसदी तैयार है और वे अमेरिका के साथ सुरक्षा गारंटियों पर अंतिम मुहर चाहते हैं। हालांकि ट्रंप के साफ कर दिया है कि अमेरिका केवल एक सहयोगी नहीं बल्कि निर्णायक की भूमिका में है। ट्रंप ने कहा कि जेलेंस्की के पास तब तक कुछ भी नहीं है, जब तक मैं उसे मंजूर नहीं करता। हम देखेंगे कि उनके पास क्या प्रस्ताव है।
न्यूजीलैंड के पीएम ने एफटीए समझौते को बताया उपलब्धि, विदेशमंत्री ने जताई आपत्ति
28 Dec, 2025 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वैलिन्गटन। न्यूजीलैंड के पीएम क्रिस्टोफर लक्सन ने शनिवार को भारत के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) का स्वागत करते हुए इसे अपनी सरकार की उपलब्धि बताया। यह बयान ऐसे समय आया है, जब कुछ दिन पहले ही न्यूजीलैंड के विदेश मंत्री विंस्टन पीटर्स ने इस समझौते को लेकर आपत्तियां जताई थीं और इसका विरोध किया था। पीएम लक्सन ने कहा कि हमने अपने पहले कार्यकाल में भारत के साथ एफटीए करने का वादा किया था और हमने उसे पूरा किया।
उन्होंने इस समझौते को आर्थिक विकास के लिए अहम बताते हुए कहा कि इससे रोजगार के नए अवसर आय में वृद्धि और निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। लक्सन के मुताबिक यह समझौता 1.4 अरब भारतीय उपभोक्ताओं के विशाल बाजार के दरवाजे न्यूजीलैंड के लिए खोलेगा। लक्सन ने इसे अपनी सरकार के व्यापक एजेंडे से जोड़ते हुए कहा कि यह समझौता बुनियादी सुधार और भविष्य के निर्माण की दिशा में एक ठोस कदम है।
इस समझौते ने न्यूजीलैंड की सत्तारूढ़ गठबंधन सरकार के अंदर मतभेद भी उजागर कर दिए हैं। विदेश मंत्री और न्यूजीलैंड फर्स्ट पार्टी के नेता विंस्टन पीटर्स ने इस समझौते को न तो मुक्त और न ही निष्पक्ष बताया है। पीटर्स ने कहा कि उन्होंने भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर को अपनी पार्टी की चिंताओं से अवगत कराया है। पीटर्स ने आरोप लगाया कि समझौते में गुणवत्ता से अधिक रफ्तार को प्राथमिकता दी गई। एक्स पर एक लंबी पोस्ट में उन्होंने लिखा- न्यूजीलैंड फर्स्ट ने अपने गठबंधन सहयोगी को चेतावनी दी थी कि भारत के साथ कमजोर और जल्दबाजी में समझौता न किया जाए। उनका कहना था कि सरकार को पूरे संसदीय कार्यकाल का उपयोग कर एक बेहतर और संतुलित समझौता करना चाहिए था, जो दोनों देशों के नागरिकों के हित में होता।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस समझौते को लेकर सबसे बड़ा विवाद डेयरी उद्योग को लेकर है। पीटर्स ने आरोप लगाया कि न्यूजीलैंड ने भारत के लिए अपना बाज़ार खोल दिया, लेकिन बदले में भारतीय बाजार में न्यूजीलैंड के डेयरी उत्पादों जैसे दूध, पनीर और मक्खन पर टैरिफ में कोई ठोस रियायत नहीं दी। उन्होंने कहा कि यह समझौता न्यूजीलैंड के किसानों के लिए अच्छा नहीं है और ग्रामीण समुदायों के सामने इसका बचाव करना असंभव है।
यह एफटीए इस सप्ताह पीएम मोदी और क्रिस्टोफर लक्सन के बीच हुई बातचीत के बाद घोषित किया गया था। दोनों नेताओं ने कहा कि यह समझौता अगले पांच सालों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर सकता है और अगले 15 सालों में भारत में 20 अरब डॉलर तक का निवेश ला सकता है। वर्ष 2024 में भारत और न्यूजीलैंड के बीच कुल व्यापार 2.07 अरब डॉलर रहा, जिसमें भारत का निर्यात 1.1 अरब डॉलर था। भारत से प्रमुख निर्यातों में दवाइयां शामिल हैं, जबकि न्यूजीलैंड से कृषि और वानिकी उत्पाद निर्यात किए जाते हैं। भारत सरकार के मुताबिक न्यूजीलैंड ओशिनिया क्षेत्र में भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है।
पीटर्स ने यह भी आरोप लगाया कि यह समझौता व्यापार से ज्यादा भारतीय श्रमिकों की आवाजाही और भारत में निवेश बढ़ाने पर केंद्रित है। उन्होंने दावा किया कि भारतीय नागरिकों के लिए एक नया रोजगार वीजा श्रेणी बनाई गई है, जो ऑस्ट्रेलिया या ब्रिटेन जैसे साझेदारों को नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि न्यूजीलैंड फर्स्ट हर प्रवासन नीति को इस कसौटी पर परखता है कि क्या वह स्थानीय लोगों के रोजगार और आव्रजन प्रणाली की अखंडता की रक्षा करती है। पीटर्स के मुताबिक भारत के साथ किया गया यह समझौता उस कसौटी पर खरा नहीं उतरता, खासकर ऐसे समय में जब न्यूजीलैंड का श्रम बाज़ार पहले से ही दबाव में है।
17 साल बाद मतदान के काबिल, तारिक रहमान की किस सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी
27 Dec, 2025 09:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
17 साल बाद देश लौटकर बीएनपी के एक्टिंग चेयरमैन तारिक रहमान फिर बांग्लादेश के वोटर बन गए | शनिवार को उनका नाम वोटर लिस्ट में शामिल कर लिया गया और उन्होंने नेशनल आइडेंटिटी कार्ड (NID) के लिए रजिस्टर भी करा लिया है | इस बार बांग्लादेश का चुनाव लड़ने में उनका कोई रुकावट नहीं है | तारिक रहमान अपनी पुश्तैनी सीट बोगरा सदर (बोगरा-6) चुनाव क्षेत्र से चुनाव लड़ेंगे. लोकल नेताओं ने उनकी तरफ से नॉमिनेशन पेपर पहले ही ले लिए हैं. बांग्लादेश में 12 फरवरी को जातीय संसद के लिए चुनाव है |
तारिक रहमान लंदन से लौटने के दो दिन बाद शनिवार सुबह ढाका यूनिवर्सिटी इलाके में शहीद उस्मान हादी की कब्र पर जाने के बाद वे अगरगांव गए | वहां उन्होंने इलेक्शन ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट में वोटर के तौर पर रजिस्टर करने और नेशनल आइडेंटिटी कार्ड पाने का काम पूरा किया | तारिक रहमान ने पहले ही ऐलान कर दिया था कि वह 27 दिसंबर को वोटर बनने के लिए जरूरी काम करेंगे. इलेक्शन कमीशन ने भी उसी हिसाब से तैयारी कर ली थी |
तारिक रहमान ने बनवाया अपना वोटर कार्ड
बांग्लादेश आउटलेट प्रथम आलो के अनुसार तारिक रहमान शनिवार दोपहर करीब 1 बजे ढ़ाका के अगरगांव में इलेक्शन बिल्डिंग के पीछे इलेक्टोरल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट बिल्डिंग गए. बिल्डिंग के ग्राउंड फ्लोर पर एक कमरे में बाहर से आए लोगों और खास लोगों को NID से जुड़ी सर्विस दी जाती हैं |
तारिक रहमान उस कमरे में फोटो खिंचवाने, दस फिंगरप्रिंट देने, अपनी आइरिस स्कैन करवाने और साइन करने गए. उस समय बांग्लादेश इलेक्शन कमीशन के सेक्रेटरी अख्तर अहमद मौजूद थे |
इससे पहले सुबह NID विंग के डायरेक्टर जनरल (DG) ASM हुमायूं कबीर ने मीडिया बताया कि वोटर बनने के लिए, व्यक्ति की फोटो, आईरिस और फिंगरप्रिंट लिए जाते हैं. इन्हें EC डेटाबेस में अपलोड किया जाता है. डेटा सेंटर में वोटर्स की जानकारी के साथ इनका क्रॉस-मैच किया जाता है. फिर एक नंबर जेनरेट होता है. यह सॉफ्टवेयर में किया जाता है |
इलेक्शन कमीशन ने आने वाले 13वें पार्लियामेंट्री इलेक्शन के लिए वोटर लिस्ट पहले ही फाइनल कर दी है | हालांकि, वोटर लिस्ट एक्ट कहता है कि चुनाव आयोग किसी भी समय वोटर बनने के लायक किसी भी व्यक्ति का नाम वोटर लिस्ट में शामिल कर सकता है |
2008 में बांग्लादेश छोड़कर चले गए थे तारिक रहमान
बांग्लादेश में पहली फोटो वाली वोटर लिस्ट 1998 के बाद केयरटेकर सरकार के दौरान 2008 में तैयार की गई थी. बीएनपी चेयरपर्सन खालिदा जिया के सबसे बड़े बेटे तारिक रहमान 11 सितंबर, 2008 को जेल से रिहा होकर बांग्लादेश से लंदन चले गए थे. क्योंकि वे विदेश में थे, इसलिए उस समय उनका नाम वोटर लिस्ट में नहीं था. बाद में अवामी लीग के राज में वे देश वापस नहीं आए, न ही वे वोटर बने |
पिछले साल जुलाई में छात्र विद्रोह के बाद शेख हसीना की सरकार का तख्तापलट हुआ था | उसके बाद देश में पहली बार चुनाव होंगे और चुनाव लड़ने के लिए वोटर बनना जरूरी थी, जिसकी प्रक्रिया तारिक रहमान ने पूरी कर ली |
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