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मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव: ईरान पर बड़े हमले के संकेत, इस्राइल को हथियार देगा अमेरिका
7 Mar, 2026 11:03 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन।अमेरिका ने इस्राइल को 12000 भारी बमों की आपूर्ति के लिए 151 मिलियन डॉलर (करीब 1300 करोड़ रुपये) का हथियार सौदा मंजूर किया है। इस फैसले की घोषणा शुक्रवार देर रात अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट ने की। स्टेट डिपार्टमेंट के अनुसार, अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो ने आपातकालीन स्थिति के कारण संसद की सामान्य समीक्षा प्रक्रिया को छोड़कर यह सौदा मंजूर किया।हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया गया कि इस्राइल इन बमों का इस्तेमाल कहां करने की योजना बना रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम इस्राइल की वर्तमान और भविष्य की सुरक्षा क्षमता को मजबूत करेगा, उसकी घरेलू रक्षा को बढ़ाएगा और क्षेत्रीय खतरों के खिलाफ निवारक शक्ति के रूप में काम करेगा।
ईरान पर संभावित हमले की तैयारी
इसी बीच, अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने फॉक्स न्यूज को बताया कि अमेरिका की ओर से ईरान पर आज रात अब तक का सबसे बड़ा हमला किया जाएगा। बेसेंट ने कहा कि यह अभियान ईरानी मिसाइल लॉन्चिंग स्थल और मिसाइल निर्माण कारखानों को निशाना बनाएगा, जिससे उनका सैन्य उत्पादन काफी हद तक प्रभावित होगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ईरान आर्थिक अस्थिरता पैदा करने की कोशिश कर रहा है। बेसेंट ने कहा कि इसका एक बड़ा कारण यह है कि ईरान का नियंत्रण होर्मुज जलडमरूमध्य पर है, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल और गैस मार्गों में से एक माना जाता है। अमेरिका और इस्राइल पहले से ही ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर रहे हैं और हाल के दिनों में कई बड़े हमले किए गए हैं, जिसके बाद क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
रैपर से नेता बने बालेन शाह, अब नेपाल के अगले प्रधानमंत्री बनने की दौड़ में सबसे आगे
7 Mar, 2026 10:56 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नेपाल।की राजनीति में एक अभूतपूर्व उलटफेर की आहट सुनाई दे रही है। 5 मार्च को हुए आम चुनाव के नतीजे आने से पहले ही, पूर्व काठमांडू मेयर बालेन्द्र (बालेन) शाह की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) ने मतगणना में सुनामी की तरह बढ़त बना ली है। दशकों से सत्ता पर काबिज पारंपरिक राजनीतिक दलों को जनता ने जिस तरह हाशिए पर धकेला है, उससे साफ है कि नेपाल की राजनीति में 36 साल बाद किसी एक दल को प्रचंड बहुमत मिलने की ओर अग्रसर है। इस अभूतपूर्व जीत के साथ, बालेन शाह का अगला प्रधानमंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है।
कैसे शुरू हुआ राजनीतिक सफर?
बालेन शाह का यह सफर आसान नही रहा है। साल 2022 में रैप की दुनिया से पहचान बनाने वाले स्ट्रक्चरल इंजीनियर बालेन शाह ने उस वक्त सबको चौंका दिया था, जब उन्होंने नेपाल के बड़े राजनीतिक दलों को हराकर काठमांडू के मेयर का पद जीता। उनका चुनाव चिह्न छड़ी था। उन्हें चुनाव में 61,767 वोट मिले। उन्होंने नेपाली कांग्रेस की सिर्जना सिंह को हराया, जिन्हें 38,341 वोट मिले थे। वहीं, सीपीएन-यूएमएल के उम्मीदवार और पूर्व मेयर केशव स्थापित को 38,117 वोट मिले।अब चार साल बाद 35 साल के बालेन शाह देश के सबसे युवा प्रधानमंत्री बनने की राह पर हैं। उनकी यह सफलता अचानक नहीं मिली है। साल 2013 में वह 'रॉ बर्ज' रैप बैटल से मशहूर हुए थे। मेयर बनने से पहले उन्होंने ढाई साल तक जमीन पर काम किया। उन्होंने हिमालयन व्हाइट हाउस कॉलेज से इंजीनियरिंग की और भारत से मास्टर डिग्री ली। उनकी पढ़ाई और तकनीकी समझ ने जनता का भरोसा जीता।
दशकों पुराने ओली के दबदबे को किया खत्म
बालेन की राजनीतिक रणनीति बहुत सोची-समझी रही है। सितंबर के विरोध प्रदर्शनों में 77 लोगों की मौत के बाद केपी शर्मा ओली ने इस्तीफा दे दिया था। उस समय युवाओं ने बालेन को अंतरिम सरकार का नेतृत्व करने के लिए कहा। बालेन ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया और पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की का समर्थन किया। उन्होंने छह महीने की अस्थायी सरकार के बजाय पांच साल के पूर्ण कार्यकाल को चुना। 18 जनवरी 2026 को बालेन औपचारिक रूप से राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) में शामिल हो गए। उन्होंने अगले ही दिन जनकपुर से अपना चुनाव प्रचार शुरू किया। उन्होंने झापा-05 सीट से चुनाव लड़ने का फैसला किया। यह इलाका दिग्गज नेता केपी शर्मा ओली का गढ़ माना जाता है। जानकारों का मानना है कि बालेन की लोकप्रियता ओली के दशकों पुराने दबदबे को खत्म कर दी है।
क्या था चुनाव का एजेंडा?
बालेन सोशल मीडिया पर बहुत सक्रिय हैं। फेसबुक पर उनके 35 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हैं। वह प्रेस कॉन्फ्रेंस के बजाय सीधे जनता से बात करते हैं। हालांकि, वह अपने कड़े बयानों के लिए विवादों में भी रहे। उन्होंने एक बार अमेरिका, भारत और चीन जैसे देशों के साथ-साथ अपनी ही पार्टी की भी आलोचना की थी। उनके समर्थक उन्हें पुराने नेताओं के विकल्प के रूप में देखते हैं। बालेन का जन्म 1990 में हुआ था। उनके स्वर्गीय पिता राम नारायण शाह एक आयुर्वेदिक डॉक्टर थे। उनका निधन बालेन शाह के मेनस्ट्रीम पॉलिटिक्स में फॉर्मल एंट्री से ठीक पहले हुआ था। राजनीति के साथ-साथ बालेन अभी काठमांडू यूनिवर्सिटी से पीएचडी भी कर रहे हैं। नेपाल अब एक नए मोड़ पर है, जहां पुराने नेताओं की पकड़ कमजोर होती दिख रही है।
पेटागन के साथ समझौते के बाद ओपनएआई कर्मचारियों में नाराजगी, बगावत शुरू
6 Mar, 2026 06:41 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिका में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। अब एआई केवल टेक्नोलॉजी का विषय नहीं रह गया, बल्कि यह जियोपॉलिटिक्स और सैन्य रणनीति का भी अहम हिस्सा बनता जा रहा है। हाल ही में अमेरिकी रक्षा विभाग पेटागन ने अपनी सुरक्षा और रक्षा प्रणालियों में एआई टूल्स के इस्तेमाल की योजना बनाई है। लेकिन इसी को लेकर टेक कंपनियों और उनके कर्मचारियों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई है।
विवाद तब बढ़ा जब अमेरिकी सरकार ने एआई कंपनियों से कहा कि उनके मॉडल्स का उपयोग सैन्य और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कार्यों में हो सकता है। एआई कंपनी एन्थ्रोपिक, जो एआई मॉडल बनाती है, ने इस प्रस्ताव पर आपत्ति जाहिर की है। कंपनी का कहना था कि उसका एआई“मास सर्विलांस” या पूरी तरह स्वचालित हथियारों (ऑटोनोमस वेपन्स) के लिए इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। इस कारण पेटागन और एन्थ्रोपिक के बीच मतभेद बढ़ गए।
वहीं एन्थ्रोपिक के पीछे हटने के बाद एआई कंपनी ओपन एआई ने पेटागन के साथ समझौता कर लिया। इस डील के तहत ओपनएआई के एआई मॉडल्स को सरकारी और रक्षा से जुड़े सिस्टम में इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि ओपन एआई के सीईओ सैम आल्टनमैन ने कहा कि इस समझौते में कई सुरक्षा शर्तें जोड़ी गई हैं। उनके अनुसार एआई का इस्तेमाल घरेलू निगरानी (डोमेस्टिक सर्विलांस) या पूरी तरह ऑटोनोमस हथियार बनाने के लिए नहीं किया जाएगा। इसके बावजूद इस फैसले ने टेक इंडस्ट्री के भीतर बहस को और तेज कर दिया। कई कर्मचारियों को डर है कि अगर एआई का सैन्य उपयोग बढ़ता है, तब भविष्य में इसका दुरुपयोग हो सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार गूगल और ओपन एआई के सैकड़ों कर्मचारियों ने एक खुला पत्र लिखकर एआई के सर्विलांस और ऑटोनोमस हथियारों में इस्तेमाल का विरोध किया। इस विवाद के बाद कुछ लोगों ने विरोध के तौर पर चैटजीपीटी को अपने मोबाइल से हटाना भी शुरू कर दिया। वहीं कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अगर एआई का जिम्मेदारी से उपयोग किया जाए, तब यह राष्ट्रीय सुरक्षा, खुफिया विश्लेषण और युद्ध रणनीति में काफी मददगार साबित हो सकता है। दरअसल, अमेरिकी रक्षा कार्यक्रम प्रोजेक्ट मेवन पहले से ही एआई का उपयोग सैटेलाइट और ड्रोन डेटा के विश्लेषण के लिए कर रहा है, जिससे संभावित लक्ष्यों की पहचान करने में सहायता मिलती है। यही कारण है कि एआई का सैन्य उपयोग अब वैश्विक बहस का विषय बन चुका है।
नूंह में 81 स्कूलों में सिर्फ एक-एक शिक्षक के भरोसे चल रही पढ़ाई
6 Mar, 2026 04:48 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़। हरियाणा के नूह-मेवात में प्राथमिक स्तर पर स्कूली शिक्षा छोड़ने वालों की दर राज्य के औसत से अधिक है। शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने विधानसभा के बजट सत्र के दौरान यह जानकारी दी है। मंत्री ने कहा कि जिले में प्राथमिक स्तर पर स्कूल छोड़ने वालों की दर 2023-24 और 2025-26 के बीच बढ़ी है। विधानसभा में दिए गए आकंड़ों के मुताबिक, प्राथमिक स्तर पर ड्रॉपआउट दर राज्य के औसत 1.70 प्रतिशत के मुकाबले 12.52 प्रतिशत हो गई है।
विधायक आफताब अहमद ने कहा कि नूंह में 37 स्कूलों में शिक्षक नहीं है। 81 स्कूल केवल एक-एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं। साल 2023-24 में 8.61 फीसदी, 2024-25 में 12.52 फीसदी, 2025-26 में 12.84 फीसदी ड्रॉप आउट दर 6वीं से 8वीं की कक्षाओं में रहा है। 11वीं में इन वर्षों में क्रमश: 7.88 फीसदी, 8.69 फीसदी, 4.76 फीसदी ड्रॉप आउट दर रही है। प्रदेश में ड्रॉप आउट दर 6 से 8 कक्षाओं में इन्हीं वर्षों में 4.87 फीसदी, 1.7 फीसदी, 3 फीसदी रहा था। शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने माना कि जिले में 10053 स्वीकृत पद हैं, जिनमें 4804 पद रिक्त हैं।
प्रोजेक्ट एक्सटेंशन के लिए लगाया जाएगा अलग टेंडर
सीएम नायब सिंह सैनी ने विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान कहा कि राज्य सरकार ने तय किया है कि किसी प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन के दौरान यदि कार्य का विस्तार करना जरूरी होगा तो उसके लिए अलग से नया टेंडर जारी किया जाएगा। इससे बजट बढ़ने और एन्हांसमेंट जैसी समस्याओं पर रोक लगाई जा सकेगी। सीएम ने कहा कि वर्तमान में कुछ प्रोजेक्ट को बार-बार एक्सटेंशन दे दिया जाता है। इससे लागत बढ़ने के साथ कई प्रशासनिक दिक्कतें पैदा होती हैं। इन समस्याओं के समाधान के लिए सरकार ने नई व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। अब किसी भी परियोजना में विस्तार की जरूरत होने पर अलग से टेंडर लगाया जाएगा। इस संबंध में सभी विभागों के अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं।
शहरी आवेदकों के लिए प्रॉपर्टी आईडी अनिवार्य
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री कृष्ण कुमार बेदी ने बताया कि शहरी क्षेत्रों में आवासीय पते के सत्यापन के लिए जुलाई 2024 से प्रॉपर्टी आईडी अनिवार्य कर दी गई है। विधायक प्रमोद विज के सवाल पर उन्होंने कहा कि किरायेदार पीपीपी में संबंधित विकल्प चुनकर निवास स्थल की प्रॉपर्टी आईडी दर्ज कर सकते हैं।
खेल विश्वविद्यालय के लिए 491 करोड़ मंजूर
खेल राज्य मंत्री गौरव गौतम ने बताया कि हरियाणा खेल विश्वविद्यालय के बुनियादी ढांचे के विस्तार का प्रस्ताव सरकार के पास विचाराधीन है। विश्वविद्यालय में आधारभूत ढांचे के निर्माण के लिए प्रदेश सरकार ने 491.20 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं। इसमें 371.20 करोड़ रुपये भवन निर्माण और 120 करोड़ रुपये खेल अवसंरचना के विकास के लिए हैं। विश्वविद्यालय का मास्टर प्लान तैयार हो चुका है। विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जा रही है और कार्यान्वयन एजेंसी को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया जारी है।
एपस्टीन से जुड़े खुलासे में ट्रंप का नाम आने से मचा राजनीतिक बवाल
6 Mar, 2026 03:41 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
एपस्टीन फाइल्स को लेकर हुए खुलासों ने पूरी दुनिया को एक घिनौने राज ने अवगत कराया। जब-जब इस मामले में नए खुलासे और नाम सामने आते हैं, वह सभी को चौंका देने वाले होते हैं बड़े से बड़े हस्तियों से लेकार नेता अभिनेका सभी पर इस मामले में आरोप लगे हैं। न्याय विभाग ने गुरुवार को इस मामले में एक महिला के साथ साक्षात्कार के बाद कुछ और बाते सामने आई है। साक्षात्कार को तीन भाग में जारी किया गया है, जिसमें महिला ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है। यह खुलासा न्याय विभाग की तरफ से ऐसे समय प किया गया है जब डेमोक्रेट्स उस पर राष्ट्रपति से जुड़ी सामग्री छिपाने का आरोप लगा रहे हैं। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने इन आरोपों को पूरी तरह से निराधार बताया। साक्षात्कार में डोनाल्ड ट्रम्प से जुड़े कई दावे किए गए हैं।
साक्षात्कार में ट्रंप से जुड़े पांच सबसे महत्वपूर्ण दावे
किशोरी ने लगाया यौन शोषण का आरोप
महिला ने जांचकर्ताओं के बताया कि जब वह 13 से 15 वर्ष की थी, तो एपस्टीन एक बार उसे न्यूयॉर्क या न्यू जर्सी ले गया था। वहां एक बड़ी इमारत में उसकी मुलाकात डोनाल्ड ट्रम्प से हुई थी। बयान के अनुसार कथित यौन शोषण से पहले ट्रंप ने कमरे में मौजूद सभी लोदों को बाहर जाने के लिए कहा। महिला ने अपना बचाव करते हुए ट्रंप को काट लिया। जिसेक बाद लोग कमरे में आ गए। महिला ने बाताया कि इसके बाद ट्रंप दो बार फिर उससे मिले। लेकिन उसके बारे में विस्तार से जानकारी नहीं दी गई।
ट्रम्प और एपस्टीन के बीच ब्लैकमेल का दावा
महिला ने आगे आरोप लगाया कि उसन एपस्टीन और ट्रंप के बीच बातचीत को सुना था। उसने एपस्टीन और ट्रम्प के बीच ब्लैकमेल को लेकर हुई बातचीत सुनी थी। उन्होंने यह भी दावा किया कि ट्रंप ने 'कैसिनो के माध्यम से पैसे की हेराफेरी' के बारे में बात की थी और आरोप लगाया कि एपस्टीन के ब्लैकमेल के बारे में उनके करीबी लोगों को पता था।
ट्रम्प और एपस्टीन के बीच ईर्ष्या के आरोप
महिला ने आगे गवाही में बताया कि उसने दोनों पुरुषों के बीच तनाव महसूस किया। उसने दावा किया कि ट्रंप कभी-कभी एपस्टीन से जलते थे। हालांकि सावर्जनिक रूप ले वे एक जैसा व्यवहार दी करते थे। गवाही के अनुसार, कथित तौर पर दोनों ने लड़कियों के बारे में बात करते समय 'ताजा मांस', 'कलंकित' और 'निष्पक्ष' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था।
अश्लील तस्वीरों से जुड़े ब्लैकमेल के आरोप
गवाह ने आरोप लगाया कि एपस्टीन ने यौन संबंधों के दौरान उसकी अश्लील तस्वीरें लीं और बाद में तस्वीरों से उसकी मां को ब्लैकमेल किया। महिला ने बताया कि एपस्टीन और उसके सहयोगी जिम एटकिंस ने तस्वीरों को सार्वजनिक करने की धमकी दी थी। जिसके बाद उसकी मां को रियल एस्टेट कंपनी से पैसे निकालकर तस्वीरों के बदले देने पड़े। जिसके कारण उसकी मां को जेल जाना पड़ा।
एपस्टीन के नेटवर्क और दुर्व्यवहार के बारे में आरोप
महिला ने दावा किया कि एपस्टीन ने उसके साथ छह से बीस बार यौन शोषण किया था। और कभी-कभी अन्य धनी पुरुष भी मौजूद थे। महिला ने दावा किया कि एपस्टीन इन मुलाकातों के दौरान उन्हें नशा करता था। कभी कभी इसे नई लकड़ियों को भर्ती करने के लिए भी भेजा जाता था।
गर्मी में नहीं होगी पानी की किल्लत, रैनकपुरा में नया बूस्टर शुरू
6 Mar, 2026 02:34 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रोहतक। रैनकपुरा क्षेत्र की छह कॉलोनियों में वर्ष 2007 से बनी पेयजल समस्या इस गर्मी के सीजन में दूर होने वाली है। नए पेयजल बूस्टर से अप्रैल में सप्लाई शुरू करने की विभाग ने तैयारी की है। हालांकि, विभाग ने मार्च से पहले पेयजल उपलब्ध कराने की योजना बनाई थी लेकिन बिजली कनेक्शन प्रक्रिया में देरी होना कारण बताया है।
पुराने शहर के रैनकपुरा क्षेत्रवासी लंबे समय से पेयजल समस्या से जूझ रहे हैं। इसमें खोखराकोट, कबीर कॉलोनी व रैनकपुरा के लोगों को अधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। छह हजार से अधिक लोगों को औसतन छह से 10 पेयजल टैंकर रोजाना मंगाने पड़ रहे हैं।
स्थानीय लोगों की ओर से बार-बार मांग व प्रदर्शन के बाद जन स्वास्थ्य विभाग ने नवंबर 2025 में बूस्टर निर्माण की तैयारी शुरू की थी जिसके बाद विभाग की ओर से पेयजल बूस्टर का निर्माण लगभग पूरा कर लिया गया है।
विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पेयजल बूस्टर में 16 लाख लीटर क्षमता के लिए 120-120 एचपी की दो मोटरें लगाई गई हैं। करीब 1.11 करोड़ की लागत से बने बूस्टर से रैनकपुरा, खोखराकोट, कबीर कॉलोनी, बालकनाथ कॉलोनी, तेज कॉलोनी व फौजी कॉलोनी में पेयजल संकट से राहत मिलेगी। कर्मचारियों व लेबर की ओर से बूस्टर पर फिनिशिंग कार्य किया जा रहा है। पेयजल बूस्टर में मोटरें लगाई जा चुकी हैं। नई पाइप लाइन भी बिछाई जा चुकी है। बूस्टर के लिए बिजली कनेक्शन मांगा गया है। इसके बाद सभी कनेक्शन पूरा कर पेयजल सप्लाई शुरू की जाएगी। जिला प्रशासन से सुचारु पेयजल व्यवस्था के लिए हम लगातार मांग करते रहे हैं। जरूरत पड़ने पर कई बार धरने-प्रदर्शन और रोड जाम किए। अब उम्मीद है कि इस गर्मी में पेयजल संकट दूर होगा।
कनाडा के पीएम कार्नी बोले- कुछ भी हो जाए हम जंग लड़ने से पीछे नहीं हट सकते
6 Mar, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ओटावा। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने मध्य पूर्व में जारी भीषण संघर्ष को लेकर एक बड़ा बयान दिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है। ओटावा में गुरुवार को पत्रकारों से बात करते हुए प्रधानमंत्री कार्नी ने स्पष्ट किया कि अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ चलाए जा रहे युद्ध में कनाडा की सैन्य भागीदारी की संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता है।यदि परिस्थितयां जंग वाली हुई तो कुछ भी हो जाए हम जंग लड़ने से पीछे नहीं हट सकते। उनकी यह टिप्पणी इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इससे पहले उन्होंने एक बयान में कहा था कि संघर्ष को जन्म देने वाले कुछ अमेरिकी-इजरायली हमले अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे से बाहर प्रतीत होते हैं। हालांकि, अब उनके रुख में आया यह बदलाव क्षेत्र में बदलती सैन्य परिस्थितियों की ओर इशारा कर रहा है।
ईरान के प्रति अपनी सरकार का दृष्टिकोण स्पष्ट करते हुए मार्क कार्नी ने कहा कि मध्य पूर्व में अस्थिरता और आतंकवाद का मुख्य स्रोत ईरान ही है। उन्होंने ईरान के मानवाधिकार रिकॉर्ड की कड़ी आलोचना करते हुए जोर दिया कि उसे किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार विकसित करने या प्राप्त करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। कार्नी के अनुसार, कनाडा और उसके अंतरराष्ट्रीय साझेदार लगातार ईरान से अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह समाप्त करने का आग्रह कर रहे हैं। उन्होंने जी7 शिखर सम्मेलन की चर्चाओं और पिछले वर्ष संयुक्त राष्ट्र द्वारा फिर से लागू किए गए कड़े प्रतिबंधों का हवाला देते हुए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।कैनबरा में ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथोनी अल्बानीज के साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भी मार्क कार्नी ने इसी तरह का एकजुट रुख दिखाया। दोनों नेताओं ने मध्य पूर्व में बढ़ती शत्रुता को कम करने की अपील तो की, लेकिन साथ ही ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को वैश्विक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बताया। कनाडा के इस कड़े रुख से संकेत मिल रहे हैं कि यदि ईरान और इजरायल के बीच तनाव और अधिक बढ़ता है, तो कनाडाई सेना पश्चिमी गठबंधन के साथ मिलकर प्रत्यक्ष सैन्य कार्रवाई का हिस्सा बन सकती है। यह घटनाक्रम आने वाले दिनों में पश्चिमी देशों की रणनीति में बड़े बदलाव का संकेत दे रहा है।
कन्याकुमारी से 400 किमी दूर अमेरिकी हमले में ईरानी जहाज डूबा, 80 शव मिले
6 Mar, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलंबो। श्रीलंका के दक्षिणी तट के पास अमेरिकी पनडुब्बी हमले के बाद डूबे एक ईरानी नौसैन्य जहाज से करीब 80 ईरानी नाविकों के शव बरामद हुए हैं। श्रीलंका ने पहले बताया था कि उसकी नौसेना ने बुधवार तड़के करीब 180 नाविकों को लेकर जा रहे आईरिस देना नामक ईरानी जहाज से 32 ईरानी नाविकों को बचाया। श्रीलंकाई नौसेना ने हालांकि इसकी वजह नहीं बताई कि जहाज ने आपातकालीन संदेश क्यों भेजा था।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक वहीं अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि एक अमेरिकी पनडुब्बी ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में एक ईरानी युद्धपोत को डुबो दिया है। उन्होंने कहा कि यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से टॉरपीडो से दुश्मन के जहाज को डुबोने की पहली घटना है। ईरानी जहाज हाल ही में भारत द्वारा आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय नौसैन्य अभ्यास में शामिल हुआ था। भारतीय नौसेना की ओर से तत्काल कोई टिप्पणी नहीं आई है। हेगसेथ ने कहा कि एक अमेरिकी पनडुब्बी ने एक ईरानी युद्धपोत को डुबो दिया, जिसे अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में सुरक्षित समझा जा रहा था, लेकिन उसे टॉरपीडो से डुबो दिया गया, जिस स्थान पर यह हमला हुआ है, वह भारत के कन्याकुमारी से महज 400 किमी दूर है।
श्रीलंकाई उप विदेश मंत्री अरुण चंद्रा ने कहा कि शव अब गॉल के करापिटिया अस्पताल में हैं। श्रीलंकाई नौसेना के प्रवक्ता कमांडर बुद्धिका संपत ने बताया था कि कई शव उस स्थान के पास पाए गए थे, जहां से आपातकालीन संदेश भेजा गया था, हालांकि सटीक संख्या तत्काल पता नहीं चल पाई है। उन्होंने कहा कि इस समय कोई संख्या बताना मुश्किल है, लेकिन शव मिले हैं। उन्होंने कहा कि जब हमारी टीम घटनास्थल पर पहुंचीं, तो हमने बड़ी मात्रा में तेल फैला हुआ देखा, जिससे यह संकेत मिला कि जहाज डूब चुका है। संपत ने पुष्टि की कि जहाज ईरानी था और बचाए गए चालक दल के सदस्य ईरानी नौसेना की वर्दी में थे।
हेराथ ने कहा कि बचाए गए नाविकों को नौसेना के दक्षिणी कमान मुख्यालय में ले जाया गया और बाद में गाले के करापिटिया अस्पताल में भर्ती किया गया। अधिकारियों ने कहा कि दक्षिणी कमान के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का उल्लेख करते हुए हेराथ ने कहा कि श्रीलंका इस स्थिति को लेकर गहरी चिंता व्यक्त करता है और शांतिपूर्ण समाधान की अपील करता है।
बाइक हटाने की बात पर भड़का विवाद, रोहतक में युवक की जान गई
6 Mar, 2026 10:20 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रोहतक।कलानौर खंड के गांव बनियानी में फाग के दिन रास्ते से बाइक हटाने को लेकर हुए झगड़े में घायल युवक विक्रम उर्फ कल्लू (30) ने वीरवार रात को दम तोड़ दिया। विक्रम दो पक्षों में हुए झगड़े में बीच-बचाव करवा रहा था। गांव में माहौल खराब न हो इसलिए पुलिस तैनात की गई है। शव को पोस्टमार्टम के लिए पीजीआई के डेड हाउस में रखवाया गया है। चार मार्च को फाग के दिन ग्रामीण होली खेलने में व्यस्त थे। गांव के युवक साहिल ने कलानौर थाने में कराई एफआईआर में कहा है कि बुधवार शाम करीब चार बजे अपने साथी सतीश के साथ बाइक पर पटवापुर की तरफ से फाग खेलकर आ रहे थे।
रास्ते में गांव के युवक निशांत ने बाइक खड़ी कर रखी थी। जब उन्होंने बाइक हटाने के लिए कहा तो गाली-गलौच करने लगा। साथ में उसके माता-पिता व सात-आठ अन्य लोग भी आ गए। दोनों का रास्ता रोककर मारपीट शुरू कर दी। तभी गांव का युवक बंटी उर्फ मोटी व विक्रम उर्फ कल्लू आ गए। आरोपियों ने उनके साथ भी मारपीट शुरू कर दी। लाठी, डंडे व तेजधार हथियारों से वार किया। ग्रामीणों ने बीच-बचाव कराया। घायलों को पीजीआई ले जाया गया, जहां साहिल के बयान पर निशान व उसके परिजनों सहित 11 लोगों के खिलाफ झगड़े व मारपीट की एफआईआर दर्ज कर जांच पड़ताल शुरू की।
डॉक्टरों ने कल्लू को दे दिया था अनफिट करार
कलानौर पुलिस रात को घायलों के बयान दर्ज करने पीजीआई पहुंची। एमएलआर रिपोर्ट के मुताबिक घायल अशोक को दो जगह, मोंटी को पांच व कल्लू को छह जगह चोट मिली। डॉक्टरों ने कल्लू को अनफिट घोषित कर दिया। रात को उसने दम तोड़ दिया।
फाग के दिन दो पक्षों में झगड़ा हो गया था। इसमें बनियानी गांव के युवकों को घायल हालत में पीजीआई में दाखिल कराया गया। इसमें विक्रम उर्फ कल्लू की मौत हो गई है। आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
समुद्र में बढ़ा तनाव: अमेरिकी हमले में ईरान का ड्रोन कैरियर निशाने पर
6 Mar, 2026 10:07 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ईरान में अमेरिका और इजराइल के हवाई हमले 7वां दिन भी जारी हैं. 28 फरवरी को शुरू हुए सैन्य अभियान के बाद से ईरान में कम से कम 1,230 लोग मारे गए हैं. ईरानी न्यूज एजेंसी फार्स की रिपोर्ट के मुताबिक, राजधानी तेहरान के दक्षिण-पश्चिमी शहर परांद में दो स्कूलों पर मिसाइलों से हमला किया गया.ईरान की तरफ से भी खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इजराइल पर मिसाइल और ड्रोन हमले जारी है. ईरानी हमलों में इजराइल, UAE, कतर, बहरीन, कुवैत और सऊदी अरब को निशाना बनाया जा रहा है.इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के पास अब 'कोई एयर फोर्स नहीं है, कोई एयर डिफेंस नहीं है और एयर फोर्स खत्म हो गई है. उन्होंने कहा कि ईरान इस तरह तबाह किया जा रहा है जैसा लोगों ने पहले कभी नहीं देखा है.उधर, ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव अली लारीजानी ने कहा कि ईरानी सेना अमेरिका के किसी भी जमीनी हमले का 'इंतजार' कर रही है.
अमेरिका ने ईरान के 'ड्रोन कैरियर' पर किया हमला
अमेरिकी सेना ने एक ईरानी जहाज पर हमला किया, जिससे उसमें आग लग गई. अमेरिकी सेना ने जहाज को 'ड्रोन कैरियर' बताया. यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने एक्स पोस्ट में कहा, "अमेरिकी सेना पूरी ईरानी नेवी को डुबोने के मिशन से पीछे नहीं हट रही है. आज, एक ईरानी ड्रोन कैरियर, जो लगभग WWII के एयरक्राफ्ट कैरियर के साइज का है, पर हमला हुआ और अब उसमें आग लगी हुई है.CENTCOM ने पोस्ट में यह साफ नहीं किया कि हमला कहां किया गया था. CENTCOM द्वारा पोस्ट किए गए हमले के एक वीडियो में दिखाया गया है कि अमेरिका द्वारा टक्कर मारे जाने के बाद कथित ईरानी जहाज में आग लग गई और घने धुएं में घिर गया.
कुवैत में धमाकों की खबर
कतारी न्यूज चैनल अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, कुवैत में जोरदार धमाकों की खबर है. एयर रेड सायरन बजने के साथ जोरदार धमाकों की आवाजें भी सुनी गई हैं. वहीं, ईरान की राजधानी तेहरान में लड़ाकू विमानों और धमाकों की आवाजें सुनी गईं.
हमने अभी लड़ना शुरू किया है: अमेरिकी रक्षा सचिव
ईरान के खिलाफ जंग पर अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने कहा कि हमारे मिशन के उद्देश्य के लिए हमारी प्रतिबद्धता और भी बढ़ती है क्योंकि हमारे फायदे बढ़ते रहते हैं... हमारे रक्षात्मक और हमलावर हथियारों का स्टॉक हमें इस अभियान को तब तक जारी रखने में मदद करता है जब तक हमें जरूरत हो... हमने अभी लड़ना शुरू किया है और मजबूती से लड़ना शुरू किया है.
पाक आतंकवादी ने कोर्ट में किया खुलासा कहा- ट्रंप को मारने ईरान मुझे हायर किया था
6 Mar, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सहित कई नेताओं को मौत के घाट उतारे के लिए निकला एक पाकिस्तानी आतंकी पकड़ा गया है। इसने कोर्ट में खुलासा किया कि ईरान के जासूसों ने मुझे ट्रंप की हत्या करने के लिए कहा था। आरोपी आतंकवादी का नाम आसिफ मर्चेंट है। उसकी उम्र 47 साल है। उसने अदालत में बताया कि उसके परिवार को धमकी दी गई थी और उन्हें बचाने के लिए उसे इस साजिश में शामिल होना पड़ा। उसके पास कोई विकल्प नहीं था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, आरोपी आसिफ मर्चेंट ने ब्रुकलिन की संघीय अदालत में जज के सामने कहा, ‘मेरे पास कोई और विकल्प नहीं था। मेरे परिवार को धमकी दी गई थी।’
उसने कहा, ‘उसने मुझे साफ-साफ नहीं बताया कि कौन है, लेकिन उसने तीन नाम लिए: डोनाल्ड ट्रंप, जो बाइडेन और निक्की हेली।’ उस समय डोनाल्ड ट्रंप और जो बाइडेन 2024 के राष्ट्रपति चुनाव के प्रमुख उम्मीदवार थे। निक्की हेली साउथ कैरोलिना की पूर्व गवर्नर हैं। वह एक महीने पहले ही चुनावी दौड़ से बाहर हो गई थीं। उस पर दो अंडरकवर एफबीआई एजेंट्स, जो हिटमैन के रूप में काम कर रहे थे, को हमले के लिए 5,000 डॉलर देने का आरोप है। आरोपी मर्चेंट पहले एक बैंकर था और बाद में उसकी केला व्यापार की कंपनी फेल हो गई थी। उसने अदालत में बताया कि अप्रैल 2024 में उसके ईरानी जासूस हैंडलर ने उसे अमेरिका जाने और शायद किसी की हत्या करने का आदेश दिया था।आसिफ मर्चेंट को अगस्त 2024 में गिरफ्तार किया गया था और जिसने आतंकवाद और हत्या के लिए सुपारी देने के आरोपों से इनकार किया था। उसने दावा किया कि उसके जासूस हैंडलर ने उसे हत्या के साथ-साथ अज्ञात दस्तावेज चुराने का भी आदेश दिया था। उसके हैंडलर का नाम मेहरदाद यूसुफ बताया गया है, जो कथित तौर पर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स का सदस्य था। आरोपी मर्चेंट ने कहा कि उसने साजिश में इसलिए साथ दिया क्योंकि यूसुफ ने उसके ईरान में रह रहे रिश्तेदारों पर दबाव बनाया था। उसने आगे दावा किया कि यूसुफ बिना बताए उसके ईरान स्थित घर के बाहर आया और मुलाकात के दौरान हथियार भी दिखाया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मर्चेंट ने जज से कहा, ‘मेरे परिवार को खतरा था और मुझे यह करना पड़ा।’ एफबीआई की गुप्त सुरक्षा कैमरों ने जून 2024 में क्वींस के एक सस्ते होटल में आरोपी मर्चेंट को एक बैठक के दौरान एक रिपब्लिकन नेता की हत्या की योजना बनाते हुए रिकॉर्ड किया था।
युवा बनाम पुराने नेता: नेपाल में चुनाव मतदान जारी, पीएम सुशीला ने डाला वोट
6 Mar, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
काठमांडू। नेपाल की राजनीति के लिए आज का दिन ऐतिहासिक है, जहाँ देश के सात प्रांतों—कोशी, मधेश, बागमती, गंडकी, लुंबिनी, कर्णाली और सुदूरपश्चिम—में आम चुनाव के लिए मतदान हो रहा है। जहां प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने भी वोट डाला। चुनावी जंग में पुराने दिग्गजों और नए चेहरों के बीच कड़ा मुकाबला है। एक तरफ कम्युनिस्ट पार्टी (यूएमएल) के प्रमुख और पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली अपनी सत्ता वापसी के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं, तो दूसरी तरफ नेपाली कांग्रेस के प्रभावशाली नेता गगन थापा भ्रष्टाचार मुक्ति और रोजगार के वादे के साथ मैदान में हैं। लेकिन इस बार सबसे ज्यादा चर्चा काठमांडू के पूर्व मेयर बालेन शाह की है। एक रैपर और सिविल इंजीनियर से नेता बने बालेन शाह युवाओं और शहरी मतदाताओं के बीच बेहद लोकप्रिय हैं और उन्हें एक बड़े सुधारवादी चेहरे के रूप में देखा जा रहा है। उनके अलावा राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी, राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी और जनमत पार्टी जैसे दल भी प्रमुखता से अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं।
पिछले एक साल से जारी भीषण राजनीतिक उथल-पुथल, भ्रष्टाचार और बेरोजगारी के खिलाफ हुए जन-आंदोलनों के बाद हो रहे ये चुनाव न केवल नई सरकार चुनेंगे, बल्कि नेपाल के लोकतांत्रिक ढांचे की मजबूती की परीक्षा भी लेंगे।
निर्वाचन आयोग ने इस बार मुस्तैदी दिखाते हुए दावा किया है कि प्रत्यक्ष निर्वाचन प्रणाली (फर्स्ट पास्ट द पोस्ट) की 165 सीटों के नतीजे मतपेटियां इकट्ठा होने के 24 घंटे के भीतर घोषित कर दिए जाएंगे, जो 2022 के चुनाव की तुलना में एक बड़ा सुधार होगा। हालांकि, आनुपातिक प्रतिनिधित्व की 110 सीटों की गिनती में दो से तीन दिन का समय लग सकता है। नेपाल का चुनावी सिस्टम काफी जटिल है, जहाँ फर्स्ट पास्ट द पोस्ट और आनुपातिक प्रतिनिधित्व का मिश्रण लागू है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि छोटे दलों और विभिन्न सामाजिक समूहों को भी संसद में जगह मिले। यह चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सितंबर 2025 में नेपाल की जेन-जी पीढ़ी ने बेरोजगारी और राजनीतिक व्यवस्था के खिलाफ सड़कों पर उतरकर बड़ा आंदोलन किया था। उस हिंसा और विरोध प्रदर्शनों के कारण तत्कालीन प्रधानमंत्री को इस्तीफा देना पड़ा था, जिसके बाद पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की के नेतृत्व में बनी अंतरिम सरकार ने छह महीने के भीतर चुनाव कराने का जिम्मा संभाला था।
ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की अंतिम विदाई की तारीख का ऐलान पर सस्पेंस
6 Mar, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान। ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई की अंतिम विदाई को लेकर सस्पेंस गहरा गया है। पहले से तय कार्यक्रम के मुताबिक उनकी अंतिम रस्में गुरुवार को होनी थीं लेकिन सुरक्षा कारणों और इजराइली हमले की आशंका के मद्देनजर इसे टाल दिया गया है। प्रशासन जल्द ही अंतिम संस्कार की नई तारीखों का ऐलान करेगा। बता दें अली खामेनेई की मौत अमेरिका द्वारा उनके दफ्तर पर किए गए भीषण बमबारी में हुई थी। इस हमले में ईरान के कई अन्य शीर्ष नेता भी मारे गए थे।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पहले अमेरिका और इजराइल ने इसकी पुष्टि की जिसके बाद ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने भी आधिकारिक तौर पर उनके निधन और शहादत का ऐलान किया। खामेनेई के अंतिम संस्कार को टालने के पीछे सबसे बड़ा कारण लाखों लोगों की सुरक्षा है। 1989 में खुमैनी के जनाजे में करीब 1 करोड़ लोग जुटे थे। आशंका है कि खामेनेई की विदाई में भी लाखों लोग सड़कों पर उतरेंगे। ईरान को अंदेशा है कि इस विशाल शोक सभा के दौरान इजराइल हमला कर सकता है, जिससे बड़े पैमाने पर जनहानि हो सकती है। इसी वॉर रिस्क के चलते इस्लामिक डेवलपमेंट को-ऑर्डिनेशन काउंसिल ने कार्यक्रम आगे बढ़ाने का फैसला लिया है।
खामेनेई को ईरान के सबसे पवित्र शहरों में से एक मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। मशहद शब्द का अर्थ ही शहीद की जगह है। उन्हें इमाम रजा की पवित्र दरगाह के पास दफनाया जाएगा। ईरानी मीडिया और जनता उनकी मौत को शहादत मान रही है, इसलिए उन्हें पूरे राजकीय और धार्मिक सम्मान के साथ एक शहीद के रूप में दफनाया जाएगा। इस्लामिक प्रचार परिषद के मुताबिक अंतिम रस्में तेहरान की खुमैनी मस्जिद में आयोजित की जाएंगी। ये रस्में कुल 3 दिनों तक चलेंगी जिसके बाद पार्थिव शरीर को मशहद ले जाया जाएगा। फिलहाल तेहरान में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और पूरी दुनिया की नजरें नई तारीखों के ऐलान पर टिकी हैं।
ग्रैंड मोसल्ला में उमड़ा जनसैलाब, खामेनेई को अंतिम विदाई
5 Mar, 2026 03:53 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान। अमेरिका-इस्राइल के हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैय्यद अली खामेनेई के निधन के बाद देश में शोक की लहर दौड़ गई है। सरकारी मीडिया ने जानकारी दी है कि मरहूम अयातुल्ला सैय्यद अली खामेनेई के शव को तेहरान के ग्रैंड मोसल्ला में रखने की तैयारी चल रही है। ग्रैंड मोसल्ला एक बड़ा प्रार्थना स्थल है, जिसका इस्तेमाल शहर के सबसे खास सरकारी और धार्मिक आयोजनों के लिए होता है। यह मरहूम सुप्रीम लीडर के लिए आयोजित तीन दिन के विदाई समारोह का हिस्सा है। मोसल्ला में हजारों शोक मनाने वालों के इकट्ठा होने की उम्मीद है। इस विदाई समारोह के बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
ईरान ने दी धमकी
इस बीच, ईरान ने गुरुवार को इस्राइल की डिमोना परमाणु स्थल को निशाना बनाने की धमकी दी है। ईरान ने कहा कि अगर इस्राइल और अमेरिका ने उसकी सरकार को गिराने की कोशिश की, तो वह इस परमाणु केंद्र को निशाना बनाएंगे। यह धमकी इस्राइल के रक्षा मंत्री इस्राइल काट्ज के बयान के बाद आई है। काट्ज ने कहा था कि ईरान की सरकार जो भी नया नेता लाएगी, वह इस्राइल के लिए एक टारगेट होगा।
ईरान ने बैलिस्टिक मिसाइलों किया हमला
इधर, इस्राइल की सेना ने बताया कि ईरान ने एक बार फिर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया है। इसके कारण यरुशलम, सेंट्रल इस्राइल और वेस्ट बैंक के कुछ हिस्सों में खतरे के सायरन बजने लगे। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (आईआरजीसी) ने 'ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4' के तहत मिसाइल और ड्रोन से हमला किया है। इस ऑपरेशन को 'या हसन इब्न अली' नाम के कोड से शुरू किया गया। आईआरजीसी का दावा है कि उन्होंने इस्राइल और अमेरिका के सात से ज्यादा आधुनिक रडार सिस्टम नष्ट कर दिए हैं।
आईआरजीसी ने दी चेतावनी
ईरान के सरकारी ब्रॉडकास्टर प्रेस टीवी के अनुसार, उनकी मिसाइलों ने इस्राइल के 'थाड' (THAAD) डिफेंस सिस्टम को भी चकमा दे दिया। आईआरजीसी ने दावा किया कि उन्होंने तेल अवीव में इस्राइली रक्षा मंत्रालय और देश के मुख्य एयरपोर्ट 'बेन गुरियन' सहित कई जगहों पर हमला किया है। इन हमलों की वजह से इस्राइल के कई इलाकों में घंटों तक सायरन बजते रहे और लोगों को बंकरों में शरण लेनी पड़ी। आईआरजीसी ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में ये हमले और भी तेज और बड़े पैमाने पर होंगे। अमेरिका का कहना है कि उसका ऑपरेशन अभी शुरू ही हुआ है। इससे संकेत मिलते हैं कि यह युद्ध उम्मीद से ज्यादा लंबा खिंच सकता है।
ईरानी जासूसों के दबाव में Donald Trump-Joe Biden को मारने की योजना, पाकिस्तानी आरोपी का दावा
5 Mar, 2026 12:47 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ब्रुकलिन।अमेरिकी राजनीतिक हस्तियों की हत्या की साजिश रचने के आरोपी पाकिस्तानी नागरिक ने बड़ा खुलासा किया है। न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक उसने अमेरिकी अदालत को बताया कि ईरानी जासूसों ने उसे ट्रंप और बाइडन की हत्या की साजिश रचने के लिए मजबूर किया था। आसिफ मर्चेंट पर ईरान के साथ मिलकर शीर्ष अमेरिकी राजनेताओं की हत्या की साजिश रचने का मुकदमा शुरू हुआ है।
परिवार की रक्षा के लिए साजिश में शामिल
47 वर्षीय आसिफ मर्चेंट ने बुधवार को अदालत में अपना पक्ष रखते हुए दावा किया कि अपने परिवार की रक्षा के लिए उन पर इस साजिश में शामिल होने का दबाव डाला गया था। ब्रुकलिन की एक संघीय अदालत में गवाही के दौरान आतंकवाद और सुपारी लेकर हत्या करने के आरोपी आसिफ मर्चेंट ने कहा कि उसे यह कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा। आरोपी ने दावा किया कि तेहरान में रह रहे अपने परिवार को सुरक्षित रखने के लिए उसे मजबूरी में इस साजिश का हिस्सा बनना पड़ा।
पूर्व बैंकर है आसिफ मर्चेंट
पूर्व बैंकर आसिफ मर्चेंट पर आरोप है कि उसने दो एफबीआई एजेंटों को, जो हत्यारे के भेष में थे 5000 अमेरिकी डॉलर का भुगतान किया था। न्यूयॉर्क पोस्ट के अनुसार मर्चेंट ने दावा किया कि अप्रैल 2024 में एक ईरानी हैंडलर ने उसे अमेरिका आकर 'किसी की हत्या करने' का निर्देश दिया था। हालांकि हैंडलर ने शुरू में किसी एक व्यक्ति का नाम नहीं लिया था, मर्चेंट ने गवाही दी कि उसे तीन लोगों के नाम बताए गए थे। उसने कहा, 'उन्होंने मुझे ठीक से नहीं बताया कि वह कौन है, लेकिन उन्होंने मुझे तीन लोगों के नाम बताए: डोनाल्ड ट्रंप, जो बाइडन और निक्की हेली। उस समय ट्रंप और बाइडेन 2024 के राष्ट्रपति चुनाव के प्रमुख उम्मीदवार थे।
मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ाव और ईरानी जासूस का दावा
अगस्त 2024 में अपनी गिरफ्तारी के बाद से मर्चेंट ने खुद को निर्दोष बताया है। उसने दावा किया कि वह पहले से ही ईरानी शासन को मनी लॉन्ड्रिंग के माध्यम से प्रतिबंधों से बचने में मदद करने में शामिल था। न्यूयॉर्क पोस्ट ने बताया कि उसने अपने हैंडलर के रूप में इस्लामी क्रांतिकारी गार्ड कॉर्प्स के सदस्य मेहरदाद युसुफ की पहचान की। मर्चेंट ने जोर देकर कहा कि उसका सहयोग यूसुफ द्वारा ईरान में रहने वाले उसके परिवार के सदस्यों पर 'दबाव' डालने का परिणाम था। हालांकि उसने ईरान में अपनी पत्नी और बेटी के खिलाफ दी गई धमकियों का विवरण नहीं दिया, लेकिन एक डराने वाले अनुभव का जिक्र किया, जहां यूसुफ उसके घर आया था और हथियार लहराया था। उसने अदालत को बताया कि मेरे परिवार को खतरा था, और मुझे यह करना पड़ा।
न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार जून 2024 के निगरानी फुटेज में मर्चेंट को क्वींस के एक मोटल ( हाईवे या सड़कों के किनारे बना एक छोटा होटल) में साजिश की कार्यप्रणाली पर चर्चा करते हुए दिखाया गया था, और उसने एक लक्ष्य के बारे में पूछा था कि यह लक्ष्य है। यह कैसे मरेगा?
प्लान के सफल होने की नहीं थी उम्मीद
मर्चेंट ने दावा किया कि उसे अपनी गिरफ्तारी की उम्मीद थी और उसने कभी भी साजिश की सफलता की उम्मीद नहीं की थी। उसने गवाही दी कि मुझे नहीं लगता कि मैं सफल हो पाऊंगा। आगे कहा कि मैं यह इतनी स्वेच्छा से नहीं करना चाहता था। उसने यह भी कहा कि 5000 अमेरिकी डॉलर का भुगतान साजिश की अवास्तविकता का संकेत था क्योंकि कोई भी इतने कम पैसे में किसी की हत्या नहीं करता। न्यूयॉर्क पोस्ट ने उसके इस दावे को उजागर किया कि वह 'मानसिक रूप से' पकड़े जाने के लिए तैयार था और अमेरिकी अधिकारियों के साथ सहयोग करने का इरादा रखता था। उसने कहा कि मैं सरकार को बताने वाला था, साथ ही आगे जोड़ा कि मैं ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करना चाहता था। मर्चेंट को दोषी पाए जाने पर उसे आजीवन कारावास की सजा का सामना करना पड़ सकता है।
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