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भारतीय गणित की उपलब्धियां प्रदर्शनी में, जयशंकर ने अतीत के मिथक दूर करने पर जोर
12 May, 2026 01:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
न्यूयॉर्क: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में 'शून्य से अनंत- गणित में भारतीय सभ्यता का योगदान' नामक एक विशेष प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने वैश्विक मंच से स्पष्ट कहा कि विज्ञान और गणित की प्रगति को अब तक बहुत ही संकीर्ण और सीमित नजरिये से देखा गया है, जिसे अब सुधारने का समय आ गया है।
इतिहास की गलत धारणाओं को सुधारने की जरूरत
उद्घाटन भाषण के दौरान जयशंकर ने जोर देकर कहा कि आधुनिक इतिहास में वैज्ञानिक प्रगति की कहानी को लंबे समय तक एक खास भौगोलिक दायरे तक सीमित रखा गया। उन्होंने कहा कि दुनिया में हो रहे राजनीतिक और आर्थिक बदलावों के साथ अब सांस्कृतिक संतुलन भी बदल रहा है। यह प्रदर्शनी केवल अतीत के अंकों का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि उस भारतीय सभ्यता की बौद्धिक जड़ों की झलक है, जिसने पूरी मानवता की प्रगति में आधारभूत भूमिका निभाई है।
प्राचीन भारत से निकले आधुनिक तकनीक के सूत्र
प्रदर्शनी में भारत से निकले उन क्रांतिकारी गणितीय विचारों को प्रमुखता से दिखाया गया है, जिन्होंने आधुनिक दुनिया की नींव रखी। इनमें शून्य, दशमलव प्रणाली, बीजगणित, बाइनरी गणना और ग्रहों के मॉडल जैसी महत्वपूर्ण खोजें शामिल हैं। जयशंकर ने कहा कि आज के तकनीकी युग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बुनियाद बनने वाला 'कोड' भारत में सदियों पहले ही विकसित किया जा चुका था। प्रदर्शनी में महान गणितज्ञ आर्यभट्ट, ब्रह्मगुप्त और भास्कर के योगदान को भी रेखांकित किया गया है।
संयुक्त राष्ट्र में गूंजा भारतीय ज्ञान का गौरव
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन और आईसीसीआर (ICCR) द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में दुनिया भर के राजनयिक और शिक्षाविद् शामिल हुए। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश पर्वतनेनी ने कहा कि गणित एक सार्वभौमिक भाषा है जो मानवता को जोड़ती है। उन्होंने बताया कि भारत ने हमेशा अपना ज्ञान 'ओपन सोर्स' की तरह साझा किया है। 11 से 15 मई तक चलने वाली यह प्रदर्शनी दुनिया को यह संदेश देती है कि प्रगति किसी एक संस्कृति की बपौती नहीं, बल्कि साझा सहयोग का परिणाम है।
वैश्विक यात्रा और भविष्य का दृष्टिकोण
विदेश मंत्री ने अपनी जमैका और सूरीनाम की आधिकारिक यात्रा के समापन पर न्यूयॉर्क में इस प्रदर्शनी का शुभारंभ किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह प्रयास तकनीक को लेकर बनी पुरानी पूर्व धारणाओं को दूर करेगा। उनके अनुसार, जिस तरह तकनीक का लोकतंत्रीकरण हो रहा है, उसी तरह इतिहास का लोकतंत्रीकरण भी अनिवार्य है, ताकि भविष्य की चुनौतियों को व्यापक और सही परिप्रेक्ष्य में समझा जा सके।
शहबाज सरकार की जनता से गुहार, कम करें पेट्रोल-डीजल का इस्तेमाल
12 May, 2026 10:19 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव और समझौते की उम्मीदें धूमिल होने के कारण पाकिस्तान में गहराता आर्थिक संकट कम होने का नाम नहीं ले रहा है। क्षेत्र में बनी अनिश्चितता और ऊर्जा आपूर्ति में आ रही बाधाओं को देखते हुए प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने देशव्यापी 'मितव्ययिता अभियान' (Austerity Drive) को अब 13 जून 2026 तक बढ़ाने का बड़ा फैसला लिया है।
आर्थिक संकट और ऊर्जा आपूर्ति पर गहरा असर
पाकिस्तान अपनी तेल और ऊर्जा की जरूरतों के लिए काफी हद तक पश्चिम एशिया पर निर्भर है। 28 फरवरी को ईरान पर हुए हमलों के बाद से ही सप्लाई लाइन बुरी तरह प्रभावित हुई है। हालांकि 8 अप्रैल से युद्धविराम लागू है, लेकिन ईरान के परमाणु कार्यक्रम और 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़' जैसे विवादित मुद्दों पर अमेरिका और ईरान के बीच सहमति नहीं बन पाई है। इस कूटनीतिक विफलता के कारण पाकिस्तान सरकार को डर है कि आने वाले समय में ईंधन की कमी और भी बढ़ सकती है, जिसके चलते खर्चों में कटौती करना अब मजबूरी बन गया है।
सरकारी खर्चों और ईंधन पर चलेगी कैंची
प्रधानमंत्री द्वारा मंजूर किए गए नए उपायों के तहत सरकार ने संसाधनों को बचाने के लिए कई कड़े प्रतिबंध लगाए हैं:
ईंधन में कटौती: सरकारी वाहनों के लिए मिलने वाले ईंधन भत्ते में 50 प्रतिशत की भारी कमी कर दी गई है। हालांकि, राहत की बात यह है कि एंबुलेंस और सार्वजनिक परिवहन की बसों को इस कटौती से बाहर रखा गया है।
वाहनों पर रोक: लगभग 60 प्रतिशत सरकारी वाहनों को सड़कों से हटाकर बंद रखने का निर्णय लिया गया है।
विदेशी दौरों पर पाबंदी: बेहद जरूरी राष्ट्रीय हितों को छोड़कर सरकारी अधिकारियों के विदेशी दौरों पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है।
महंगाई की मार और वैश्विक स्थिति
मितव्ययिता अभियान के बावजूद पाकिस्तान की जनता पर महंगाई का बोझ कम नहीं हुआ है। ईंधन की कीमतों में हुई बेतहाशा बढ़ोतरी के कारण पाकिस्तान पेट्रोलियम उत्पादों के मामले में दुनिया के सबसे महंगे देशों की सूची में शामिल हो गया है। अप्रैल में इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई वार्ता बेनतीजा रहने के बाद से ही अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। फिलहाल डोनाल्ड ट्रंप ने युद्धविराम को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा तो दिया है, लेकिन स्थायी शांति न होने तक पाकिस्तान अपनी "बचत नीति" पर ही कायम रहेगा।
पंचमुखी हनुमान मंदिर जाते समय सड़क हादसा, परिवार को लगा बड़ा झटका
12 May, 2026 09:35 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
यमुनानगर: जिले के जगाधरी स्थित गंगानगर कॉलोनी में मंगलवार की सुबह एक भीषण सड़क हादसे ने दो परिवारों की खुशियां मातम में बदल दीं। मंदिर दर्शन के लिए निकले एक ही परिवार के तीन सदस्य तेज रफ्तार बस की चपेट में आ गए। इस दर्दनाक टक्कर में महज 13 दिन पहले शादी के बंधन में बंधी नई नवेली दुल्हन और उसकी ननद की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि युवक गंभीर रूप से घायल है।
शादी की खुशियों के बीच पसरा सन्नाटा
गंगानगर कॉलोनी निवासी शिवकुमार का विवाह बीते 29 अप्रैल को 25 वर्षीय खुशबू के साथ हुआ था। मंगलवार सुबह खुशबू अपने पति शिवकुमार और ननद पूजा के साथ पंचमुखी हनुमान मंदिर जाने के लिए बाइक पर निकली थी। बताया जा रहा है कि पूजा शादी के बाद से ही अपने भाई के घर आई हुई थी। मानकपुर इंडस्ट्रियल एरिया के पास पीछे से आ रही महर्षि मारकंडेश्वर यूनिवर्सिटी की बस ने उनकी बाइक को रौंद दिया, जिससे खुशबू और पूजा ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।
एंबुलेंस की देरी और लोगों का गुस्सा
हादसे के बाद मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि घटना के तुरंत बाद कई बार एंबुलेंस को फोन किया गया, लेकिन काफी देर तक कोई सहायता नहीं पहुंची। मदद न मिलने पर स्थानीय लोगों ने निजी वाहन का इंतजाम कर घायल शिवकुमार को यमुनानगर के सिविल अस्पताल पहुंचाया। लोगों में प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की इस सुस्ती को लेकर भारी आक्रोश देखने को मिला।
तेज रफ्तार बस बनी काल
बस चालक का दावा है कि अचानक संतुलन बिगड़ने के कारण यह हादसा हुआ और उस वक्त बस में करीब 15 बच्चे सवार थे। हालांकि, स्थानीय निवासियों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह बस अक्सर अत्यधिक तेज गति से चलाई जाती है। लोगों का कहना है कि पूर्व में कई बार स्कूल प्रबंधन को इस संबंध में शिकायतें दी गई थीं, लेकिन लापरवाही पर कोई लगाम नहीं कसी गई, जिसका खामियाजा आज दो मासूम जिंदगियों को भुगतना पड़ा।
जांच में जुटी पुलिस
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। पुलिस ने दोनों महिलाओं के शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को जब्त कर लिया गया है। पुलिस अब प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और बस चालक की लापरवाही के एंगल से मामले की गहनता से जांच कर रही है।
अमरीका-ईरान संघर्ष में UAE की एंट्री का दावा, रिपोर्ट्स ने बढ़ाई चिंता
12 May, 2026 09:14 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। खाड़ी क्षेत्र में जारी तनाव के बीच एक सनसनीखेज खुलासा हुआ है। 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' की एक रिपोर्ट के अनुसार, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने अप्रैल की शुरुआत में ईरान पर गुप्त रूप से हवाई हमले किए थे। यह कार्रवाई उस समय की गई थी जब अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष विराम (सीजफायर) की घोषणा हुई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, यूएई की वायु सेना ने फारस की खाड़ी में स्थित लावान द्वीप की एक तेल रिफाइनरी को निशाना बनाया था।
यूएई के हमलों का रहस्य और ईरानी तेल कंपनी का बयान
अप्रैल के पहले हफ्ते में यूएई ने हमलों की एक सीरीज को अंजाम दिया। दिलचस्प बात यह है कि उस समय न तो ईरान ने हमलावर देश का नाम सार्वजनिक किया और न ही यूएई ने आधिकारिक तौर पर इसकी जिम्मेदारी ली। हालांकि, 8 अप्रैल को राष्ट्रीय ईरानी तेल शोधन और वितरण कंपनी ने स्वीकार किया था कि लावान द्वीप पर उनके तेल संयंत्रों पर "दुश्मन" द्वारा हमला किया गया है। अब इस नई रिपोर्ट ने उन हमलों के पीछे यूएई का हाथ होने का दावा कर मामले को नया मोड़ दे दिया है।
विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया और अमेरिकी रुख
इस खुलासे पर यूएई के विदेश मंत्रालय ने कोई सीधी टिप्पणी नहीं की है। मंत्रालय ने केवल इतना कहा कि देश के पास अपनी सुरक्षा के लिए किसी भी शत्रुतापूर्ण कार्रवाई का सैन्य बल के साथ जवाब देने का अधिकार सुरक्षित है। वहीं, अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) ने इस पर चुप्पी साध ली है, जबकि व्हाइट हाउस ने संक्षिप्त बयान में कहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास भविष्य की कार्रवाई के लिए सभी विकल्प खुले हुए हैं। यह स्थिति दर्शाती है कि खाड़ी देशों के बीच आपसी तनाव अभी भी चरम पर है।
ईरान पर नाकेबंदी और शांति प्रयासों की स्थिति
गौरतलब है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए बड़े हमलों के बाद क्षेत्र में स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है। हालांकि 7 अप्रैल को दो सप्ताह के संघर्ष विराम की घोषणा की गई थी, लेकिन इस्लामाबाद में हुई कूटनीतिक बातचीत बेनतीजा रही। इसके बाद अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की कड़ी सैन्य नाकेबंदी शुरू कर दी है, जो वर्तमान में भी जारी है। राष्ट्रपति ट्रंप ने संघर्ष विराम की अवधि को आगे बढ़ाया है ताकि ईरान पर शांति प्रस्ताव लाने का दबाव बनाया जा सके।
अमेरिकी रिपोर्ट से सनसनी, पाकिस्तान में छिपे होने का दावा ईरानी विमानों पर
12 May, 2026 08:13 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन/इस्लामाबाद। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक सनसनीखेज अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट ने दक्षिण एशिया की राजनीति में खलबली मचा दी है। अमेरिकी न्यूज चैनल ने दावा किया है कि पाकिस्तान ने ईरान के सैन्य विमानों को अपने एयरबेस पर सुरक्षित पनाह दी ताकि उन्हें अमेरिकी हवाई हमलों से बचाया जा सके। हालांकि, पाकिस्तान सरकार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें आधारहीन बताया है।
ईरानी विमानों के लिए पाकिस्तान का इस्तेमाल
अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से आई इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अप्रैल में जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्धविराम की घोषणा की थी, उसी दौरान ईरान ने अपने कई सैन्य विमान पाकिस्तान के नूर खान एयरबेस भेजे थे। इनमें जासूसी और खुफिया जानकारी जुटाने वाले अत्याधुनिक विमान भी शामिल थे। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने इन विमानों को अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की जद से बाहर रखने के लिए पाकिस्तान की जमीन का रणनीतिक उपयोग किया। इसके अलावा, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ईरान ने अपने कुछ नागरिक विमानों को अफगानिस्तान के काबुल और हेरात हवाई अड्डों पर भी सुरक्षा के लिहाज से तैनात किया था।
अमेरिकी सीनेटर की चेतावनी और पाकिस्तान का रुख
इस खबर के सामने आते ही अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने पाकिस्तान की निष्ठा पर कड़े सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि यदि यह रिपोर्ट सही साबित होती है, तो अमेरिका को ईरान के साथ मध्यस्थता में पाकिस्तान की भूमिका पर गंभीरता से विचार करना होगा। दूसरी तरफ, पाकिस्तान ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। एक पाकिस्तानी सैन्य अधिकारी ने तर्क दिया कि नूर खान एयरबेस घनी आबादी वाले शहर के बीच में स्थित है, जहाँ किसी भी विदेशी विमान को छिपाकर रखना मुमकिन नहीं है क्योंकि वह आसानी से लोगों की नजरों में आ जाएगा।
चीन पर निर्भरता और कूटनीतिक संतुलन
रिपोर्ट में पाकिस्तान की बदलती सैन्य रणनीति और चीन के साथ उसकी बढ़ती नजदीकियों का भी जिक्र किया गया है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) के आंकड़ों के मुताबिक, 2020 से 2024 के बीच पाकिस्तान के कुल विदेशी हथियारों का 80 प्रतिशत हिस्सा अकेले चीन से आया है। विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान इस समय एक कठिन दौर से गुजर रहा है, जहाँ उसे अपने सहयोगी चीन और पड़ोसी देश ईरान के साथ संबंधों को अमेरिका के साथ बिगड़ते रिश्तों के बीच संतुलित करना पड़ रहा है।
सूत्रों का दावा- इजराइल ने चोरी-छिपे इराक में तैयार किया सैन्य अड्डा
11 May, 2026 09:33 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Washington: ईरान के खिलाफ चल रहे हवाई हमलों के बीच एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। अमेरिकी सूत्रों के मुताबिक, इजराइल ने इराक के सुनसान रेगिस्तानी इलाके में एक गुप्त सैन्य ठिकाना (Secret Base) बनाया था। यह ठिकाना इतना गोपनीय था कि इसकी जानकारी बहुत ही कम लोगों को थी। इजराइल ने इस बेस का इस्तेमाल ईरान पर हमला करने वाले अपने लड़ाकू विमानों की मदद और आपातकालीन स्थितियों के लिए किया था।
ईरान पर हमले के लिए बना था 'लॉजिस्टिक हब'
इजराइल से ईरान की दूरी लगभग 1,000 मील है, जो हवाई हमलों के लिए बहुत लंबी दूरी मानी जाती है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इजराइल ने युद्ध शुरू होने से पहले अमेरिका की सहमति से इस बेस का निर्माण किया था। यहाँ इजराइल की स्पेशल फोर्स और 'सर्च-एंड-रेस्क्यू' टीमें तैनात थीं। इनका मुख्य काम यह था कि अगर ईरान पर हमले के दौरान किसी इजराइली पायलट का विमान क्रैश हो जाए, तो उसे तुरंत वहां से सुरक्षित निकाला जा सके।
इराकी सैनिकों ने खोज लिया था ठिकाना, हुआ हमला
यह सीक्रेट बेस मार्च की शुरुआत में लगभग पकड़ा ही गया था। एक स्थानीय चरवाहे की सूचना पर जब इराकी सेना जांच करने पहुंची, तो वहां मौजूद इजराइली सुरक्षा तंत्र ने उन्हें पीछे हटाने के लिए हवाई हमला कर दिया। इस हमले में एक इराकी सैनिक की मौत हो गई। शुरुआत में इराक ने इस हमले के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराते हुए संयुक्त राष्ट्र में शिकायत भी की थी, लेकिन बाद में अमेरिकी अधिकारियों ने साफ किया कि इस मिशन में उनका हाथ नहीं था।
रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है यह इलाका
इराक का पश्चिमी रेगिस्तानी इलाका काफी विशाल और कम आबादी वाला है, जो इसे गुप्त सैन्य गतिविधियों के लिए मुफीद बनाता है। जानकारों के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने भी 1991 और 2003 के युद्धों में ऐसे ठिकानों का इस्तेमाल किया था। इजराइली वायु सेना के प्रमुख ने भी हाल ही में अपने सैनिकों को लिखे पत्र में ऐसे 'कल्पना से परे' सीक्रेट मिशनों का जिक्र किया था, जो अब धीरे-धीरे दुनिया के सामने आ रहे हैं।
पूर्व प्रधानमंत्री थाकसिन शिनवात्रा को मिली रिहाई, थाई राजनीति में हलचल तेज
11 May, 2026 07:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बैंकॉक: थाईलैंड की राजनीति के सबसे कद्दावर और चर्चित नेता, पूर्व प्रधानमंत्री थाकसिन शिनवात्रा रविवार को जेल से बाहर आ गए हैं। भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग के आरोप में एक साल की सजा काट रहे 76 वर्षीय थाकसिन को उनकी उम्र और खराब सेहत के आधार पर पैरोल पर रिहा किया गया है। जब वे बैंकॉक की जेल से बाहर निकले, तो उनके स्वागत के लिए समर्थकों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जिन्होंने 'वी लव थाकसिन' के नारों से आसमान गुंजा दिया।
15 साल के वनवास के बाद मिली बड़ी राहत
टेलीकॉम सेक्टर के अरबपति कारोबारी रहे थाकसिन साल 2001 में पहली बार प्रधानमंत्री बने थे, लेकिन 2006 में सेना ने तख्तापलट कर उन्हें सत्ता से हटा दिया था। इसके बाद वे करीब 15 साल तक देश से बाहर (निर्वासन में) रहे और 2023 में वापस लौटे। शुरुआत में उन्हें आठ साल की सजा सुनाई गई थी, जिसे बाद में थाईलैंड के राजा ने घटाकर एक साल कर दिया था। अब करीब आठ महीने जेल और अस्पताल में बिताने के बाद उन्हें रिहा किया गया है।
रिहाई के बाद भी रहेंगे कड़ी निगरानी में
पैरोल पर बाहर आने के बावजूद थाकसिन को अगले चार महीनों तक सख्त नियमों का पालन करना होगा। उन्हें बैंकॉक स्थित अपने घर पर ही रहना होगा और एक इलेक्ट्रॉनिक मॉनिटरिंग ब्रेसलेट पहनना होगा जिससे उनकी लोकेशन पर नजर रखी जा सके। इसके अलावा उन्हें समय-समय पर अधिकारियों को अपनी रिपोर्ट भी देनी होगी। उनके परिवार और समर्थकों ने उन्हें लाल गुलाब भेंट कर अपनी खुशी जाहिर की।
थाईलैंड की राजनीति में मची है उथल-पुथल
थाकसिन की रिहाई ऐसे वक्त में हुई है जब थाईलैंड का राजनीतिक माहौल काफी गर्म है। हाल ही में उनकी बेटी पैतोंगटार्न शिनवात्रा को, जो देश की सबसे युवा प्रधानमंत्री बनी थीं, एक विवादित मामले के चलते कोर्ट ने पद से हटा दिया था। इस राजनीतिक संकट के बीच थाकसिन का बाहर आना बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनके समर्थकों को उम्मीद है कि उनके आने से उनकी पार्टी 'फेउ थाई' एक बार फिर मजबूती से खड़ी होगी।
विफलताओं पर पर्दा डालने के लिए भारत के खिलाफ बोले पाक सेना प्रमुख
11 May, 2026 04:28 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रावलपिंडी: पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर ने एक बार फिर अपनी पुरानी रणनीति अपनाते हुए भारत के खिलाफ बयानबाजी शुरू कर दी है। रावलपिंडी में एक कार्यक्रम के दौरान मुनीर ने भारत को चेतावनी देते हुए कहा कि किसी भी दुस्साहस का 'दर्दनाक जवाब' दिया जाएगा। हालांकि, जानकारों का कहना है कि यह बयान और कुछ नहीं बल्कि पाकिस्तान की अंदरूनी समस्याओं, जैसे चरमराती अर्थव्यवस्था और राजनीतिक अस्थिरता से अपनी जनता का ध्यान भटकाने का एक जरिया है।
आतंकवाद पर चुप्पी और कश्मीर का पुराना राग
जनरल मुनीर ने अपने भाषण में भारत पर आतंकवाद फैलाने के बेबुनियाद आरोप तो लगाए, लेकिन पाकिस्तान में पल रहे आतंकी संगठनों पर एक शब्द भी नहीं बोला। उन्होंने एक बार फिर कश्मीर मुद्दे को उछालने की कोशिश की और यहां तक दावा कर दिया कि पाकिस्तान में हो रही आतंकी घटनाओं के पीछे भारत का हाथ है। मुनीर का यह रुख उनकी हताशा को साफ दर्शाता है, क्योंकि भारत पहले ही कह चुका है कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद बंद नहीं करता, बातचीत संभव नहीं है।
अपने ही देश में घिरी पाकिस्तानी सेना
हकीकत यह है कि पाकिस्तानी सेना इन दिनों अपने ही घर में उग्रवादी गुटों के सामने बेबस नजर आ रही है। हाल ही में बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) ने सेना को बड़ा नुकसान पहुँचाया है। संगठन का दावा है कि अप्रैल के आखिरी दिनों में हुए हमलों में कम से कम 42 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए। इसके अलावा खैबर पख्तूनख्वा में भी एक भीषण बम धमाके में 21 सुरक्षाकर्मियों की जान चली गई। जनरल मुनीर इन हमलों को रोकने में पूरी तरह नाकाम रहे हैं, जिससे सेना के भीतर ही उनकी कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।
जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश
पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा पूरी तरह चरमरा चुकी है और सेना अपनी गिरती साख बचाने के लिए अब भारत विरोधी बयानबाजी को ढाल बना रही है। पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व असल समस्याओं को हल करने के बजाय 'काल्पनिक दुश्मनों' का डर दिखाकर अपनी सत्ता बचाए रखना चाहता है। हालांकि, अब पाकिस्तान की जनता भी सेना की इस पुरानी चाल को समझने लगी है और वह जुमलों के बजाय असली समाधान चाहती है।
संक्रमित क्रूज शिप पर फंसे भारतीयों को सुरक्षित निकाला गया
11 May, 2026 03:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Madrid: स्पेन के कैनरी द्वीप तट पर हंटा वायरस (Hanta Virus) की आशंका के चलते हड़कंप मच गया, जिसके बाद डच क्रूज शिप 'एमवी होंडियस' से दो भारतीयों समेत सभी 150 यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। रविवार को स्पेनिश स्वास्थ्य अधिकारियों और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने सख्त नियमों के तहत यह बचाव अभियान चलाया। राहत की खबर यह है कि जहाज पर काम करने वाले दोनों भारतीय नागरिक पूरी तरह ठीक हैं और उनमें बीमारी का कोई भी लक्षण नहीं मिला है।
भारतीय दूतावास की निगरानी और क्वारंटाइन
स्पेन के राष्ट्रीय आपातकालीन विभाग के अनुसार, भारतीय दूतावास लगातार वहां के अधिकारियों के टच में है। सुरक्षा के लिहाज से दोनों भारतीयों को आगे की जांच और क्वारंटाइन के लिए नीदरलैंड भेज दिया गया है। स्पेन में भारतीय राजदूत ने भरोसा दिलाया है कि हमारे नागरिकों की सुरक्षा के लिए स्थिति पर 24 घंटे नजर रखी जा रही है। यात्रियों को सुरक्षित निकालने के लिए स्पेनिश सेना और सिविल गार्ड ने खास बसों का इस्तेमाल किया, ताकि वे किसी के संपर्क में न आएं।
WHO की सलाह: घबराने की जरूरत नहीं
हंटा वायरस को लेकर फैली अफवाहों के बीच डब्ल्यूएचओ (WHO) के चीफ टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस ने स्थिति साफ की है। उन्होंने कहा कि यह मामला कोविड-19 जैसा गंभीर नहीं है और आम लोगों के लिए खतरा बहुत कम है। टेड्रोस ने कैनरी द्वीप के लोगों को पत्र लिखकर बताया कि डब्ल्यूएचओ के एक्सपर्ट्स और जरूरी दवाएं पहले से ही जहाज पर मौजूद हैं, इसलिए हालात पूरी तरह कंट्रोल में हैं।
सावधानी के लिए जहाज को रखा गया दूर
एहतियात के तौर पर प्रभावित जहाज को अभी किनारे से दूर समुद्र में ही लंगर डालकर खड़ा किया गया है। यात्रियों को बंदरगाह से सीधे एयरपोर्ट के रनवे तक ले जाया गया, जहां से अलग-अलग देशों के लिए फ्लाइट्स की व्यवस्था की जा रही है। नीदरलैंड उन यात्रियों के लिए स्पेशल फ्लाइट भेज रहा है, जिन्हें उनके देशों ने अब तक वापस नहीं बुलाया है। स्पेनिश यात्रियों को पहले ही मैड्रिड रवाना किया जा चुका है।
NIT में लगातार आत्महत्या के मामलों से बढ़ी चिंता, अब कर्मचारी ने उठाया कदम
11 May, 2026 02:06 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कुरुक्षेत्र: कुरुक्षेत्र नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (NIT) में एक बार फिर दुखद घटना सामने आई है। सोमवार सुबह करीब 6 बजे संस्थान के हॉस्टल नंबर चार की मेस के पीछे एक कर्मचारी ने फंदा लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। इस घटना के बाद से पूरे परिसर में शोक और सन्नाटे का माहौल है।
मेस कर्मचारी ने उठाया आत्मघाती कदम
मृतक की पहचान कौशल के रूप में हुई है, जो उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले का निवासी था। कौशल एनआईटी के हॉस्टल नंबर चार की मेस में रोटियां बनाने का काम करता था। सोमवार की सुबह जब अन्य कर्मचारी काम पर पहुंचे, तो उन्होंने कौशल का शव मेस के पिछले हिस्से में लटका हुआ पाया।
दो महीने में पांचवीं बड़ी घटना
संस्थान के लिए यह समय काफी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। पिछले मात्र दो महीनों के भीतर एनआईटी कुरुक्षेत्र में यह आत्महत्या का पांचवां मामला है। इससे पहले चार छात्र भी अलग-अलग कारणों से खुदकुशी जैसा कदम उठा चुके हैं। लगातार हो रही इन घटनाओं ने प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुलिस जांच और छानबीन शुरू
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अभी तक मौके से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। कौशल ने यह कदम क्यों उठाया, इसके कारणों का पता लगाने के लिए उसके सहयोगियों और परिवार से पूछताछ की जा रही है।
परिसर में पसरा सन्नाटा
एक के बाद एक हो रही इन मौतों से एनआईटी के छात्रों और कर्मचारियों में डर और चिंता का माहौल है। संस्थान प्रशासन इस मामले में फिलहाल चुप्पी साधे हुए है, लेकिन स्थानीय पुलिस हर पहलू से जांच कर रही है ताकि इन घटनाओं के पीछे की असल वजह सामने आ सके। मृतक के परिजनों को सूचित कर दिया गया है।
हरियाणा से सोमनाथ यात्रा होगी आसान, 8 जून से विशेष ट्रेन शुरू
11 May, 2026 12:23 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कुरुक्षेत्र: मुख्यमंत्री नायब सैनी ने आज कुरुक्षेत्र प्रवास के दौरान प्रदेश के श्रद्धालुओं के लिए एक बड़ी घोषणा की। उन्होंने बताया कि आगामी 8 जून को हरियाणा से भक्तों का एक विशाल जत्था विशेष ट्रेन के जरिए सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन के लिए प्रस्थान करेगा। मुख्यमंत्री ने आज गीता स्थली ज्योतिसर में नमन करने के बाद पिहोवा के अरुणाय स्थित श्री संगमेश्वर महादेव मंदिर में 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' में शिरकत की और कलश यात्रा को झंडी दिखाकर रवाना किया।
सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष और गौरवशाली इतिहास
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आज का दिन हर भारतीय के लिए गर्व का विषय है, क्योंकि सोमनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार के 75 वर्ष पूर्ण हो रहे हैं। उन्होंने इतिहास का स्मरण कराते हुए कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल के संकल्प और 1951 में प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के कर-कमलों द्वारा इस मंदिर का पुनरुद्धार हुआ था। मुख्यमंत्री ने कहा कि सोमनाथ का इतिहास केवल पत्थरों की इमारत नहीं, बल्कि भारत की वीरता और अटूट आस्था की विजय गाथा है।
मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना से गरीबों का सपना हो रहा साकार
धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की मदद के लिए मुख्यमंत्री ने 'मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना' की सराहना की। उन्होंने बताया कि इस योजना के अंतर्गत हाल ही में 850 श्रद्धालुओं का दल पांच दिवसीय धार्मिक यात्रा संपन्न कर लौटा है। सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश का हर नागरिक, चाहे उसकी आर्थिक स्थिति कैसी भी हो, देश के प्रमुख तीर्थ स्थलों के दर्शन कर सके।
सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ रहा है आधुनिक भारत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन का लाइव प्रसारण देखने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान केंद्र और राज्य सरकार देश को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का निरंतर प्रयास कर रही हैं। उन्होंने कुरुक्षेत्र का विशेष जिक्र करते हुए कहा कि 'स्वदेश दर्शन योजना' के तहत कुरुक्षेत्र को 2015 में ही 'श्री कृष्णा सर्किट' का हिस्सा बनाया गया था, जिससे यहाँ पर्यटन और सुविधाओं का विस्तार हुआ है।
भविष्य के विकसित भारत का संकल्प
मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि मंदिरों का संरक्षण और तीर्थ यात्राओं का आयोजन केवल अतीत को याद करना नहीं है, बल्कि यह विकसित और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध भारत के निर्माण का एक मजबूत संकल्प है। इस अवसर पर पिहोवा में आयोजित 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' के दौरान श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखा गया और पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। सरकार अब 8 जून की विशेष यात्रा की तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटी है।
मध्य पूर्व में बढ़ा तनाव, ईरान ने जासूसी मामले में उठाया बड़ा कदम
11 May, 2026 12:06 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद/रावलपिंडी: पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने एक बार फिर भारत के खिलाफ तीखी बयानबाजी की है। भारत के 'ऑपरेशन सिंदूर' को एक साल पूरा होने पर अपनी खीझ मिटाते हुए मुनीर ने धमकी दी है कि अगर भविष्य में ऐसी कोई कार्रवाई हुई, तो इसके परिणाम 'दर्दनाक' होंगे। हालांकि, रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान केवल अपनी जनता का ध्यान भटकाने और सेना की गिरती साख को बचाने की एक कोशिश है।
ब्रह्मोस की मार और 'ऑपरेशन सिंदूर' का खौफ
पिछले साल पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' चलाया था। इस ऑपरेशन के दौरान भारतीय सेना ने ब्रह्मोस मिसाइलों का इस्तेमाल करते हुए पाकिस्तान के भीतर स्थित आतंकी ठिकानों और कई महत्वपूर्ण सैन्य केंद्रों को सटीक निशाना बनाया था। इस हमले ने पाकिस्तानी डिफेंस की पोल खोल दी थी। अब एक साल बाद रावलपिंडी के जनरल मुख्यालय (GHQ) में मुनीर उसी हार को 'जीत' बताकर अपनी छवि सुधारने की कोशिश कर रहे हैं।
भाषण में कश्मीर राग और खोखली धमकियां
आसिम मुनीर ने अपने भाषण में फिर से पुराना कश्मीर राग अलापा। उन्होंने कहा कि कश्मीर के बिना पाकिस्तान की कहानी अधूरी है और वे इसका राजनीतिक व कूटनीतिक समर्थन जारी रखेंगे। उन्होंने यह भी दावा किया कि पाकिस्तान की संप्रभुता पर कोई समझौता नहीं होगा। असल में, पाकिस्तान इस वक्त गहरे आर्थिक संकट और आंतरिक अस्थिरता से जूझ रहा है, ऐसे में युद्ध की बात करना केवल जनता को भावनात्मक रूप से उलझाने का एक जरिया है।
जमीनी हकीकत बनाम पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा
मुनीर ने भले ही 'दर्दनाक जवाब' देने की बात कही हो, लेकिन सच्चाई यह है कि पिछले साल के संघर्ष में पाकिस्तानी सेना पूरी तरह बैकफुट पर थी। ब्रह्मोस मिसाइलों की रफ्तार और सटीकता के सामने पाकिस्तान का एयर डिफेंस सिस्टम बौना साबित हुआ था। यही कारण है कि भारतीय रक्षा खेमे में मुनीर के इन बयानों को केवल एक 'गीदड़भभकी' के रूप में देखा जा रहा है।
ईरान में जासूसी के आरोपियों को फांसी, अमेरिका-इजरायल से बढ़ा तनाव
11 May, 2026 11:56 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच पिछले 10 हफ्तों से चल रही जंग को खत्म करने की उम्मीदों को उस वक्त करारा झटका लगा, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के नए शांति प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया। रविवार को ईरान ने इस संघर्ष को थामने के लिए एक औपचारिक प्रस्ताव पेश किया था। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, इस डील में लेबनान में जारी हिंसा को रोकने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे संवेदनशील समुद्री रास्ते पर जहाजों की सुरक्षित आवाजाही का भरोसा दिया गया था। लेकिन जैसे ही यह प्रस्ताव व्हाइट हाउस पहुंचा, ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साफ कर दिया कि यह समझौता अमेरिका के हितों के अनुकूल नहीं है और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।
ईरान की सख्त शर्तें और ट्रंप का इनकार
ईरान ने इस प्रस्ताव के साथ अमेरिका के सामने कई कड़ी शर्तें भी रखी थीं। ईरान चाहता था कि अमेरिका युद्ध से हुए नुकसान का मुआवजा दे, उस पर लगे सभी आर्थिक प्रतिबंधों को तुरंत हटाए और ईरानी तेल की बिक्री पर लगी रोक को खत्म करे। इसके अलावा, ईरान ने भविष्य में किसी भी अमेरिकी हमले के खिलाफ लिखित गारंटी और होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी संप्रभुता का सम्मान करने की मांग की थी। हालांकि, ट्रंप के सख्त रुख ने साफ कर दिया कि अमेरिका इन शर्तों के आगे झुकने को तैयार नहीं है। अमेरिका का तर्क है कि पहले पूरी तरह से युद्धविराम हो, उसके बाद ही परमाणु कार्यक्रम जैसे विवादित मुद्दों पर कोई चर्चा की जाएगी।
कच्चे तेल के दाम बढ़े और पाकिस्तान की मध्यस्थता
ट्रंप के इस कड़े फैसले का असर पूरी दुनिया के बाजारों पर देखने को मिला। जैसे ही डील कैंसिल होने की खबर आई, इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें करीब 3 डॉलर प्रति बैरल तक उछल गईं। इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान की भूमिका भी चर्चा में रही। दरअसल, पाकिस्तान इस जंग में मध्यस्थ (Mediator) के तौर पर काम कर रहा है और उसी ने ईरान का यह संदेश अमेरिका तक पहुंचाया था। हालांकि, पाकिस्तान की तमाम कोशिशों के बावजूद दोनों देशों के बीच की खाई कम होती नहीं दिख रही है और शांति का रास्ता फिर से भटक गया है।
खाड़ी देशों में ड्रोन का साया और एलएनजी जहाज की आवाजाही
एक तरफ जहाँ कूटनीतिक बातचीत फेल हो रही है, वहीं दूसरी तरफ खाड़ी क्षेत्र (Gulf Region) में सैन्य हलचल तेज हो गई है। रविवार को सीजफायर के दावों के बीच यूएई, कतर और कुवैत के ऊपर कई संदिग्ध ड्रोन देखे गए। यूएई ने दो ड्रोन को मार गिराने का दावा किया, जबकि कतर ने अपने समुद्री क्षेत्र में एक जहाज पर हुए हमले की कड़ी निंदा की। इसी तनाव के बीच एक राहत भरी खबर भी आई जब कतर एनर्जी का एक एलएनजी गैस जहाज सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर पाकिस्तान के पोर्ट कासिम के लिए रवाना हुआ। बताया जा रहा है कि जंग शुरू होने के बाद पहली बार ईरान की मंजूरी से कोई गैस जहाज इस रास्ते से गुजरा है, जिसे भरोसे की बहाली की एक छोटी कोशिश माना जा रहा है।
बाइक सवार दोस्तों पर टूटा मौत का कहर, हादसे में 2 की जान गई
11 May, 2026 11:01 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पानीपत: हरियाणा के इसराना थाना क्षेत्र के अंतर्गत शाहपुर अड्डे पर रविवार देर रात एक भीषण सड़क हादसा हो गया। रोहतक के लाखन माजरा गांव से बाइक पर सवार होकर हरिद्वार जा रहे चार दोस्तों को एक अज्ञात वाहन ने जोरदार टक्कर मार दी। इस दर्दनाक हादसे में दो युवकों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हैं।
हरिद्वार की यात्रा बनी काल
जानकारी के अनुसार, लाखन माजरा निवासी प्रदीप (30), रोहित (25), संजय और सोहन रविवार रात करीब 10:30 बजे अपनी बाइक से धार्मिक यात्रा पर हरिद्वार के लिए निकले थे। चारों दोस्त एक ही मोटरसाइकिल पर सवार थे। जैसे ही उनकी बाइक शाहपुर बस स्टैंड के पास पहुंची, पीछे से आ रहे एक तेज रफ्तार अज्ञात वाहन ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बाइक के परखच्चे उड़ गए।
दो दोस्तों की मौत, दो अस्पताल में भर्ती
हादसे के बाद चीख-पुकार मच गई और स्थानीय लोग तुरंत मदद के लिए दौड़े। दुर्भाग्यवश, प्रदीप और रोहित ने इस दुर्घटना में दम तोड़ दिया। वहीं, सोहन और संजय की हालत बेहद गंभीर बनी हुई है। पुलिस ने घायलों को पास के ही एक निजी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया है, जहाँ उनका उपचार जारी है।
पुलिस की कार्रवाई और अज्ञात की तलाश
घटना की सूचना मिलते ही इसराना थाना पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों मृतकों के शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल भेज दिया है। पुलिस ने घटनास्थल का मुआयना किया और अज्ञात वाहन की पहचान के लिए आस-पास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालना शुरू कर दिया है।
घायल के बयान पर मामला दर्ज
हादसे में जीवित बचे एक दोस्त के बयान के आधार पर पुलिस ने अज्ञात वाहन चालक के खिलाफ लापरवाही से गाड़ी चलाने और हत्या का मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी चालक को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। इस हादसे के बाद लाखन माजरा गांव में शोक की लहर दौड़ गई है।
व्यापार युद्ध से ताइवान तक, चीन दौरे में कई बड़े मुद्दों पर चर्चा संभव
11 May, 2026 09:06 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग: दुनिया की दो सबसे बड़ी महाशक्तियों के बीच रिश्तों की जमी बर्फ पिघलती नजर आ रही है। करीब नौ साल के लंबे इंतजार के बाद कोई अमेरिकी राष्ट्रपति चीन के आधिकारिक दौरे पर जा रहा है। चीन के विदेश मंत्रालय ने कन्फर्म किया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 13 से 15 मई तक चीन की यात्रा पर रहेंगे। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब पूरी दुनिया की नजरें ईरान-इस्राइल युद्ध और ग्लोबल एनर्जी संकट पर टिकी हैं। राष्ट्रपति शी जिनपिंग के न्योते पर हो रही यह यात्रा न केवल व्यापार बल्कि ग्लोबल पॉलिटिक्स के लिहाज से भी बहुत 'क्रिटिकल' मानी जा रही है।
ट्रंप का बिजी शेड्यूल: द्विपक्षीय बैठक और वर्किंग लंच
व्हाइट हाउस के मुताबिक, ट्रंप बुधवार शाम को बीजिंग लैंड करेंगे। गुरुवार को उनका जोरदार स्वागत किया जाएगा, जिसके बाद वे राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ हाई-लेवल मीटिंग करेंगे। इस दौरान वे 'टेंपल ऑफ हेवन' का दीदार करेंगे और राजकीय भोज (State Banquet) में शामिल होंगे। शुक्रवार को भी दोनों नेताओं के बीच चाय पर चर्चा और वर्किंग लंच होगा। खबर तो यह भी है कि इस साल के अंत तक शी जिनपिंग भी अमेरिका के दौरे पर जा सकते हैं, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव कम होने की उम्मीद है।
ट्रेड वॉर खत्म करने की कोशिश और बुसान में बातचीत
ट्रंप की इस यात्रा का सबसे बड़ा मकसद व्यापारिक तनाव (Trade Tension) को कम करना है। ट्रंप के पहुंचने से ठीक पहले, चीन के उपप्रधानमंत्री हे लिफेंग और अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट दक्षिण कोरिया के बुसान में व्यापार वार्ता का आखिरी दौर पूरा करेंगे। कोशिश यही है कि जब दोनों बड़े नेता मिलें, तो व्यापारिक समझौतों और टैरिफ को लेकर कोई ठोस रास्ता निकल सके। दोनों देश चाहते हैं कि व्यापारिक मतभेदों को पीछे छोड़कर इकोनॉमी को मजबूती दी जाए।
ताइवान और हथियारों की डील पर बना रहेगा सस्पेंस
भले ही दोनों नेता हाथ मिला रहे हों, लेकिन ताइवान का मुद्दा अभी भी गले की फांस बना हुआ है। अमेरिकी अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि उनकी ताइवान पॉलिसी में कोई बदलाव नहीं आया है। ट्रंप प्रशासन ने संकेत दिया है कि वे ताइवान को हथियारों की सप्लाई जारी रखेंगे, जैसा उन्होंने अपने पिछले कार्यकाल में किया था। चीन के दबाव के बावजूद अमेरिका ताइवान के समर्थन से पीछे हटता नहीं दिख रहा है, जिससे यह साफ है कि बातचीत की मेज पर माहौल काफी गरमागरम रहने वाला है।
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