ख़बर
ट्रंप के ईरान अटैक प्लान से क्यों डरा हुआ है पाकिस्तान, क्या कुछ टूट जाने का खतरा है सता रहा?
17 Jan, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। ईरान पर अमेरिका के संभावित सैन्य हमले की आशंका का सबसे ज्यादा असर पाकिस्तान की चिंता में नजर आ रहा है। डोनाल्ड ट्रंप के अटैक प्लान की चर्चाओं के बीच पाकिस्तान को डर है कि अगर ईरान में सत्ता परिवर्तन या बड़े पैमाने पर अस्थिरता हुई तो उसके अशांत बलूचिस्तान प्रांत में विद्रोह की आग और तेज हो सकती है। यही वजह है कि इस पूरे घटनाक्रम को पाकिस्तान अपने लिए एक गंभीर रणनीतिक खतरे के तौर पर देख रहा है।
यहां बताते चलें कि पाकिस्तान और ईरान के बीच करीब 900 किलोमीटर लंबी सीमा है, जो सीधे पाकिस्तान के सबसे संवेदनशील प्रांत बलूचिस्तान से लगती है। यह वही इलाका है जहां दशकों से अलगाववादी आंदोलन चल रहा है। ईरान का सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत भी इसी सीमा पर स्थित है, जहां रहने वाले बलूच समुदाय के पाकिस्तान के बलूचों से जातीय, भाषाई और जनजातीय संबंध हैं। ऐसे में ईरान में किसी भी तरह की उथल-पुथल का असर सीधे पाकिस्तान पर पड़ सकता है। इस मामले में पाकिस्तान के पूर्व राजदूत आसिफ दुर्रानी का कहना है कि ईरान में चाहे आंतरिक बदलाव हों या बाहरी हस्तक्षेप, उसका सीधा प्रभाव पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा पर पड़ेगा। सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर ईरान में हालात बिगड़े तो बलूच विद्रोही गुटों को नए ठिकाने और समर्थन मिल सकता है, जिससे सीमा पार आतंकवाद, हथियारों की तस्करी और हिंसक घटनाएं बढ़ सकती हैं।
बलूचिस्तान में पहले से ही कई विद्रोही संगठन सक्रिय हैं, जो पाकिस्तानी सुरक्षाबलों के साथ-साथ चीनी परियोजनाओं को भी निशाना बनाते रहे हैं। चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) इस प्रांत से होकर गुजरता है और इसमें किसी भी तरह की अस्थिरता पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका साबित हो सकती है। अलगाववादी गुट खुले तौर पर बलूचिस्तान को पाकिस्तान से अलग करने की मांग कर चुके हैं, जिससे ‘टूटने के डर’ की आशंका और गहरी हो जाती है।
पाकिस्तान को एक और बड़े शरणार्थी संकट का भी डर सता रहा है। 2021 में अफगानिस्तान से लाखों शरणार्थियों के आने से पाकिस्तान पहले ही भारी आर्थिक दबाव में है। अगर ईरान में युद्ध या सत्ता परिवर्तन होता है तो बड़ी संख्या में ईरानी शरणार्थियों के पाकिस्तान आने की आशंका है, जिसे आईएमएफ के कर्ज पर चल रही अर्थव्यवस्था झेल नहीं पाएगी। पूर्व विदेश सचिव जोहर सलीम ने चेतावनी दी है कि ईरान में किसी भी तरह का बाहरी हस्तक्षेप पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर सकता है। पाकिस्तानी मीडिया में भी यह माना जा रहा है कि ईरान में सत्ता का पतन पाकिस्तान के लिए सिर्फ एक कूटनीतिक नहीं, बल्कि अस्तित्व से जुड़ा संकट बन सकता है।
बलूचिस्तान में बड़ी संख्या में घुसे हथियारबंद लोग, सरकारी व निजी बैंकों में की तोड़फोड़
17 Jan, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के खारान जिले में हालात उस वक्त बेकाबू हो गए, जब बड़ी संख्या में हथियारबंद लोग शहर में दाखिल हुए और अलग-अलग इलाकों में हमला करना शुरू कर दिया। एक मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक हमलावरों ने खारान शहर के मुख्य पुलिस थाने को निशाना बनाया और सरकारी व निजी बैंकों में तोड़फोड़ की। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि हमलावर कारों और बाइकों पर सवार थे। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि हमले में कोई पुलिसकर्मी घायल नहीं हुआ, लेकिन पुलिस वाहनों और हथियारों को नुकसान पहुंचा। हमलावर कुछ हथियार अपने साथ ले गए।
पुलिस के मुताबिक हमलावरों ने पुलिस थाने में घुसकर वहां बंद अंडरट्रायल कैदियों को जबरन छुड़ा लिया। इसके बाद कुछ सशस्त्र लोग शहर के बाजार इलाके में पहुंचे, जहां दो से तीन बैंकों को नुकसान पहुंचाया गया। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि हमलावर बैंक से नकदी ले जाने में सफल हुए या नहीं। खारान के सिविल अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट ने बताया कि जिला मुख्यालय अस्पताल में कुल पांच घायल लोगों को लाया गया। इनमें एक युवक को गोली लगी है, जबकि चार बच्चे विस्फोट के छर्रों से घायल हुए हैं। सभी घायलों का इलाज जारी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बड़ी संख्या में हथियारबंद लोगों के शहर में घुस आने से पूरे इलाके में दहशत फैल गई। दुकानों के शटर गिर गए और लोग घरों में दुबक गए। खारान, जो कि क्वेटा से करीब 300 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में स्थित है, लंबे समय से उग्रवाद से प्रभावित इलाकों में गिना जाता है। हालांकि जिले में पहले भी छिटपुट हिंसा की घटनाएं होती रही हैं, लेकिन पहली बार इतनी बड़ी संख्या में सशस्त्र लोगों के सीधे शहर में घुसकर हमला किया है। घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने इलाके की घेराबंदी कर दी है और हमलावरों की तलाश के लिए सर्च ऑपरेशन शुरू किया है। प्रशासन की ओर से फिलहाल किसी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी लेने की पुष्टि नहीं की है।
ईरान में 800 फांसी रोकने, क्या अमेरिकी राष्ट्रपति को इसलिए मिला नोबेल?
17 Jan, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिकी ने ईरान को लेकर बड़ा ऐलान किया है। व्हाइट हाउस ने कहा है कि उसने ईरान में 800 फांसी की सजाएं रोकी हैं और अमेरिका हालात पर नजर बनाए हुए है। व्हाइट हाउस ने यह भी कहा कि अमेरिका के सामने सभी विकल्प खुले हैं, लेकिन इससे पहले खबर आई कि अमेरिका ने ईरान से पर्दे के पीछे समझौता कर लिया है यानी अब ईरान पर किसी भी तरह का हमला नहीं करेगा। इस बीच अमेरिका में एक और अजीबोगरीब घटनाक्रम देखने को मिला। व्हाइट हाउस में उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार सौंपा गया है। सवाल उठता है कि क्या यह पुरस्कार उन्होंने फांसी रुकवाने के लिए मिला और क्या यह नोबेल कमेटी ने सौंपा है? ऐसा नहीं है।
बता दें गुरुवार को वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरीना मचाडो व्हाइट हाउस में ट्रंप से मिलने पहुंची थीं। तभी उन्होंने अपना नोबेल शांति पुरस्कार ट्रंप को सौंपा। हालांकि इससे वह पुरस्कार ट्रंप का नहीं हो जाता, लेकिन फिर भी वह गदगद हैं। ट्रंप ने मारिया कोरीना मचाडो का सार्वजनिक रूप से धन्यवाद किया। उन्होंने नोबेल शांति पुरस्कार सौंपने को ‘आपसी सम्मान का अद्भुत संकेत’ बताया। व्हाइट हाउस में हुई इस हाई-प्रोफाइल मुलाकात को वेनेजुएला के राजनीतिक भविष्य के लिहाज से अहम माना जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब अमेरिका ने देश के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में लिया है।
डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा- आज वेनेजुएला की मारिया कोरीना मचाडो से मिलना मेरे लिए बड़े सम्मान की बात थी। वह एक अद्भुत महिला हैं, जिन्होंने बहुत कुछ झेला है। उन्होंने मेरे किए गए कामों के लिए मुझे अपना नोबेल शांति पुरस्कार भेंट किया। यह आपसी सम्मान का शानदार इशारा है। धन्यवाद, मारिया!’
मचाडो गुरुवार को व्हाइट हाउस पहुंचीं, जहां बंद कमरे में उनकी ट्रंप के साथ बातचीत हुई। सफेद सूट में पहुंचीं मचाडो को एक एसयूवी से व्हाइट हाउस परिसर में ले जाया गया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नोबेल पुरस्कार सौंपने का यह कदम वेनेजुएला की भावी राजनीति पर अमेरिकी प्रभाव बढ़ाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मचाडो नोबेल शांति पुरस्कार की मेडल व्हाइट हाउस में ही छोड़ गईं। मामले से परिचित एक सूत्र ने बताया कि यह मेडल फिलहाल राष्ट्रपति के पास है और व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने पुष्टि की है कि ट्रंप इसे अपने पास रखे हुए हैं।
डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से नोबेल शांति पुरस्कार पाने की इच्छा जाहिर करते रहे हैं और दावा करते हैं कि अपने दूसरे कार्यकाल में कई युद्ध सुलझाने के कारण वे इसके हकदार हैं। नोबेल समिति पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि यह पुरस्कार न तो साझा किया जा सकता है और न ही किसी को स्थानांतरित किया जा सकता है। समिति ने कहा था, ‘मेडल का मालिक बदला जा सकता है, लेकिन नोबेल शांति पुरस्कार विजेता का दर्जा नहीं।
तनाव के बीच ईरान ने इजराइल की तरफ तानी मिलाइलें, भारतीय दूतावास ने की एडवाइजरी जारी
17 Jan, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
यरूशलेम। ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच चल रही तनातनी में एक रहस्यमयी मोड़ आ गया है। एक तरफ खाड़ी देशों ने अमेरिका को ईरान पर अटैक के लिए एयरस्पेस देने से इनकार कर दिया है वहीं दूसरी तरफ ट्रंप नरम पड़ गए हैं। इसके बाद ईरान ने इजराइल के 8 ठिकानों पर मिसाइलें तान दी हैं। इन सबके बीच भारतीय दूतावास द्वारा हाल ही में नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी कर दी है। भारतीय नागरिकों को ‘अत्यधिक सतर्क’ रहने की सलाह देते हुए इजराइल की यात्रा करने से भी मना किया है।
भारतीय दूतावास ने एडवाइजरी में भारतीय नागरिकों को मैसेज देते हुए कहा है कि ‘क्षेत्र में मौजूदा स्थिति को देखते हुए, इजराइल में मौजूद सभी भारतीय नागरिकों को सतर्क रहने और इजराइली अधिकारियों और गृह मोर्चा कमान द्वारा जारी सुरक्षा दिशानिर्देशों और प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करने की सलाह दी है। इसमें लिखा है कि ‘भारतीय नागरिकों को इजराइल की सभी गैर-जरूरी यात्राओं से बचने को कहा है। किसी भी आपात स्थिति में, भारतीय नागरिक भारतीय दूतावास की 24×7 हेल्पलाइन पर संपर्क कर सकते हैं जिसके लिए टेलीफोन: +972-54-7520711; +972-54-3278392 ईमेल जारी किया गया है।
सूत्रों के मुताबिक ईरान ने अपनी खतरनाक बैलिस्टिक मिसाइलों को लॉन्च पैड पर तैनात कर दिया है। ये आठ मिसाइलें सिर्फ हथियार नहीं, बल्कि मौत का पैगाम हैं। ऐसे में डर बना हुआ है कि इजराइल के आसमान में किसी भी वक्त आग बरस सकती है। ईरान की ये मिसाइलें पल भर में शहरों को खंडहर बनाने की ताकत रखती हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि पिछले कुछ घंटों में इजराइल में भी हलचल तेज हो गई है।
नेपाली कांग्रेस में तीसरी बार हुई तोड़फोड़, गगन थापा बने नए अध्यक्ष
16 Jan, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
काठमांडू। नेपाली राजनीति में बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया, जब देश की सबसे पुरानी पार्टी नेपाली कांग्रेस औपचारिक रूप से तीसरी बार दो हिस्सों में बंट गई। पार्टी अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा और महासचिव गगन थापा तथा विश्व प्रकाश शर्मा के बीच लंबे समय से चल रही बातचीत किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी, जिसके बाद विभाजन तय हो गया। इसी क्रम में आयोजित विशेष सम्मेलन में गगन थापा को सर्वसम्मति से नेपाली कांग्रेस का नया अध्यक्ष चुन लिया गया। 49 वर्षीय गगन थापा को पार्टी में एक युवा और सुधारवादी चेहरे के रूप में देखा जाता है। वरिष्ठ नेताओं के अनुसार अध्यक्ष पद के लिए वह इकलौते उम्मीदवार थे, इसलिए औपचारिक चुनाव की आवश्यकता नहीं पड़ी। पार्टी के भीतर मतभेद उस समय और गहरे हो गए, जब गगन थापा और विश्व प्रकाश शर्मा ने शेर बहादुर देउबा से अध्यक्ष पद छोड़ने और आगामी संसदीय चुनाव न लड़ने की मांग की। दोनों नेताओं का तर्क था कि यह कदम सितंबर में हुए युवा आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले जेन-जी युवाओं की भावनाओं के सम्मान में जरूरी है। जेन-जी वह पीढ़ी मानी जाती है जो तकनीक और सोशल मीडिया के साथ बड़ी हुई है और राजनीति में सक्रिय भूमिका चाहती है।
नेपाली कांग्रेस का यह विभाजन पार्टी के इतिहास में तीसरी बार हुआ है। इससे पहले 1953 में बिश्वेश्वर प्रसाद कोइराला और मातृका प्रसाद कोइराला के बीच मतभेदों के कारण पार्टी टूटी थी। दूसरी बार 2002 में माओवादी विद्रोह के दौर में प्रतिनिधि सभा भंग किए जाने के बाद पार्टी विभाजित हुई थी। मौजूदा टूट को पार्टी के लिए एक बड़े राजनीतिक झटके के रूप में देखा जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब देश में राजनीतिक अस्थिरता पहले से मौजूद है।विशेष सम्मेलन को संबोधित करते हुए गगन थापा ने कहा कि अब नेपाली कांग्रेस को अपना चेहरा और सोच दोनों बदलने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि पार्टी उस सरकार का हिस्सा रही है जिसने के पी शर्मा ओली के नेतृत्व में युवाओं के आंदोलन को दबाने की कोशिश की, जिससे जनता का भरोसा कमजोर हुआ। थापा के अनुसार, यदि पार्टी को दोबारा जनता का विश्वास हासिल करना है तो नए नेतृत्व और नई राजनीतिक दिशा के साथ आगे बढ़ना होगा। इसके जवाब में शर्मा ने कहा कि विशेष सम्मेलन ने इस निष्कासन को खारिज कर दिया है और असली पार्टी वही है, जिसे सम्मेलन का समर्थन प्राप्त है। गगन थापा ने दावा किया कि उनके गुट को 60 प्रतिशत से अधिक प्रतिनिधियों का समर्थन हासिल है और उन्होंने देउबा के नेतृत्व वाली केंद्रीय समिति को भंग करने की भी घोषणा की।
सऊदी अरब के 142 साल के बुजुर्ग का निधन, 110 साल में किया था आखिरी निकाह
16 Jan, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रियाद,। सऊदी अरब में देश के सबसे उम्रदराज व्यक्ति नासिर बिन रदान अल राशिद अल वदाई का निधन हो गया है। उनका निधन 8 जनवरी को राजधानी रियाद में हुआ। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक उनके जनाजे की नमाज धाहरान अल जनूब में अदा की गई, जिसमें 7,000 से ज्यादा लोग शामिल हुए। इसके बाद उन्हें उनके पैतृक गांव अल राशिद में दफनाया गया। बताया जाता है कि अल वदाई के 134 बच्चे और पोते-पोतियां हैं।
सऊदी मीडिया का कहना है कि अल वदाई का जन्म 1884 में हुआ था। यह वही साल था जब अमेरिका में स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी का निर्माण शुरू हुआ था। उस समय तक सऊदी अरब का एकीकरण भी नहीं हुआ था। परिवार के मुताबिक अल वदाई ने देश के संस्थापक किंग अब्दुल अजीज से लेकर मौजूदा शासक किंग सलमान तक का दौर देखा है। उन्होंने कई राजाओं, पीढ़ियों और ऐतिहासिक बदलावों को भी देखा था।
रिपोर्ट के मुताबिक अल वदाई की जिंदगी को खास बनाने वाली बातें भी कम नहीं थीं। परिवार का कहना है कि उन्होंने 110 साल की उम्र में आखिरी बार निकाह किया था और बाद में उनके यहां एक बेटी पैदा हुई। धार्मिक आस्था के मामले में भी वे बेहद समर्पित थे। बताया जाता है कि उन्होंने अपने जीवन में 40 से ज्यादा बार हज यात्रा की। हालांकि, उनकी उम्र को लेकर विशेषज्ञों ने सवाल खड़े किए हैं।
ब्रिटेन की मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक किसी व्यक्ति का 142 साल तक जीवित रहना असंभव लगता है। उनके मुताबिक 100 साल की उम्र के बाद हर अगला साल जी पाना सिक्का उछालने जैसा होता है यानी संभावना तो होती है, लेकिन बहुत कम। उन्होंने कहा कि 142 साल तक पहुंचना ऐसा है जैसे 40 बार लगातार सिक्का उछालने पर हर बार एक ही तरफ गिर जाए। अब तक के सत्यापित रिकॉर्ड में दुनिया की सबसे ज्यादा उम्र जीने वाली महिला जीन कैलमेंट थीं, जिनकी उम्र 122 साल थी। इसके बाद काने तनाका जैसी शख्सियतों के नाम आते हैं।
ईरान के खिलाफ तेज और निर्णायक सैन्य कार्रवाई चाहते हैं ट्रंप......लंबी जंग में नहीं फंसना
16 Jan, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम से स्पष्ट किया है कि यदि अमेरिका ईरान के खिलाफ कोई सैन्य कार्रवाई करता है, तब वह तेज और निर्णायक होनी चाहिए। दरअसल ट्रंप लंबे युद्ध में फँसना नहीं चाहते हैं। हालांकि, उनके सलाहकार यह भरोसा नहीं दे पाए हैं कि अमेरिकी हमले से ईरान की मौजूदा सत्ता जल्दी गिरेगी। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि किसी हमले के बाद ईरान की संभावित आक्रामक प्रतिक्रिया का सामना करने के लिए अमेरिका के पास पर्याप्त सैन्य संसाधन क्षेत्र में नहीं हैं। इसलिए ट्रंप शुरुआती तौर पर सीमित सैन्य कार्रवाई को मंजूरी दे सकते हैं, जबकि जरूरत पड़ने पर बड़ी कार्रवाई का विकल्प खुला रहेगा।
इसी बीच ईरान के पूर्व शाह के बेटे रजा पहलवी ने लोकतांत्रिक ईरान का विजन साझा किया। उन्होंने कहा कि मौजूदा शासन ईरान को आतंकवाद, कट्टरता और गरीबी से जोड़ता है, जबकि असली ईरान शांतिप्रिय, समृद्ध और सुंदर देश है। उनके अनुसार, एक स्वतंत्र ईरान परमाणु कार्यक्रम बंद करेगा, आतंकवादी समर्थन खत्म करेगा और क्षेत्रीय-संयुक्त प्रयासों में शामिल होगा। पहलवी ने अमेरिका के साथ संबंध सामान्य करने, इजरायल को मान्यता देने और ‘साइरस अकॉर्ड्स’ के तहत अरब देशों के साथ सहयोग करने का प्रस्ताव रखा। ऊर्जा क्षेत्र में उन्होंने ईरान को भरोसेमंद और पारदर्शी आपूर्तिकर्ता बनाने का वादा किया। शासन में पारदर्शिता, भ्रष्टाचार पर कड़ा नियंत्रण और वैश्विक मानकों को अपनाने पर भी जोर दिया। रजा पहलवी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से ईरानी जनता के साथ खड़ा होने का आह्वान किया और कहा कि धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक सरकार न सिर्फ ईरान, बल्कि पूरे क्षेत्र और दुनिया के लिए लाभकारी होगी। अमेरिकी सेना ने फिलहाल बड़े पैमाने पर कार्रवाई के लिए पर्याप्त संसाधन तैनात नहीं किए हैं, लेकिन क्षेत्र में विमान, जहाज और कर्मी मौजूद हैं जो लक्षित हमलों में सक्षम हैं।
Iran Protest: ईरान में तनाव बरकरार, अमेरिका ने लगाए नए प्रतिबंध
16 Jan, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Iran Protest : ईरान में हालात लगातार गंभीर बने हुए हैं। 28 दिसंबर से शुरू हुए इन प्रदर्शनों के बाद से देश के कई हिस्सों में तनाव की स्थिति बनी हुई है। एक तरफ ईरानी प्रशासन प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रहा है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका खुलकर प्रदर्शनकारियों के समर्थन में सामने आ गया है। इस टकराव ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता बढ़ा दी है।
अमेरिका पहले भी कई बार ईरान को चेतावनी दे चुका है कि वह प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा बंद करे। अमेरिकी प्रशासन का साफ कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना नागरिकों का अधिकार है और उन्हें बल प्रयोग के जरिए दबाना मानवाधिकारों का उल्लंघन है। अमेरिका ने यहां तक कहा है कि अगर प्रदर्शनकारियों की हत्या और दमन नहीं रोका गया, तो वह सख्त कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।
इसी कड़ी में Iran Protest के दौरान गुरुवार को अमेरिका ने बड़ा फैसला लिया। शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को दबाने के आरोप में अमेरिका ने कई ईरानी सुरक्षा अधिकारियों और उनसे जुड़े वित्तीय नेटवर्क पर नए प्रतिबंध लगाने की घोषणा की। इन प्रतिबंधों का उद्देश्य ईरान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ाना और मानवाधिकारों के उल्लंघन को रोकना बताया जा रहा है।
अमेरिका का यह कदम ऐसे समय पर आया है, जब ईरान के हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन जारी हैं और सुरक्षा बलों की कार्रवाई के चलते माहौल और ज्यादा तनावपूर्ण हो गया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी ईरान की स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
165 करोड़ की गोल्ड चोरी के आरोपी प्रीत पनेसर के प्रत्यर्पण की भारत से मांग
16 Jan, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
टोरंटो। 2023 में हुई करीब 20 मिलियन डॉलर यानी करीब 165 करोड़ रुपये की गोल्ड हीस्ट कनाडा के इतिहास की सबसे बड़ी चोरी है। इस मामले में कनाडा सरकार ने भारत से आरोपी प्रीत पनेसर के प्रत्यर्पण की मांग की है। मीडिया रिपोर्ट में कनाडा पुलिस के मुताबिक 32 साल के प्रीत पनेसर इस पूरी चोरी की मुख्य कड़ी था। पनेसर एयर कनाडा में मैनेजर के पद पर काम कर चुका है और उस पर एयर कार्गो सिस्टम का दुरुपयोग कर सोने से भरे कंटेनरों को चोरी करने का आरोप है।
रिपोर्टे के मुताबिक पनेसर ने गोल्ड शिपमेंट की पहचान करके सिस्टम को हैक किया और इसके जरिए सोने भरे कंटेनर को एयरपोर्ट से बाहर निकलवाने में अहम भूमिका निभाई। फरवरी 2025 में जांच में पता चला कि पनेसर भारत में छिपा है। वह पंजाब के मोहाली में किराए के मकान में पकड़ा गया। इस पर प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में छापेमारी करते हुए केस दर्ज किया। संदेह है कि चोरी के बाद करीब 8.5 करोड़ रुपए हवाला सिस्टम के जरिए भारत लाए गए, जिनका उपयोग म्यूजिक और फिल्म इंडस्ट्री के प्रोजेक्ट्स में किया गया। यह पैसा पनेसर की पत्नी की कंपनी के जरिए निवेश किया गया था।
इस बीच कनाडाई पुलिस ने एक और आरोपी अरसलान चौधरी को टोरंटो पियर्सन एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया है। अब तक कुल नौ आरोपियों पर केस दर्ज हो चुका है, जबकि प्रीत पनेसर समेत दो अभी फरार हैं। प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों का कहना है कि अभी तक प्रत्यर्पण का आधिकारिक अनुरोध नहीं मिला है, लेकिन कनाडाई एजेंसियों से संपर्क जारी है। यह मामला दोनों देशों के बीच कानून प्रवर्तन सहयोग की एक बड़ी चुनौती बन गया है।
ट्रप की ग्रीनलैंड पर कब्जे की धमकी के बाद नाटो के 6 देशों के सैनिक तैनात
16 Jan, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
डेनमार्क। ग्रीनलैंड की सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल तेज हो गई है। किसी भी बाहरी खतरे से ग्रीनलैंड को बचाने के लिए नाटो देश सक्रिय हो गए हैं। डेनमार्क की अपील पर अब तक छह नाटो देशों ने वहां अपने सैनिक या सैन्य कर्मी भेजने का फैसला किया है। इनमें स्वीडन, नॉर्वे, जर्मनी, फ्रांस, नीदरलैंड्स और कनाडा शामिल हैं। ग्रीनलैंड डेनमार्क का स्वायत्त क्षेत्र है, लेकिन इसकी रणनीतिक अहमियत के चलते यह वैश्विक राजनीति के केंद्र में आ गया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी बताते हुए उस पर कब्जे की धमकी दी है। ट्रंप का दावा है कि रूस और चीन ग्रीनलैंड का फायदा उठा सकते हैं। इन बयानों के बाद डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने अपने सहयोगी देशों के साथ मिलकर वहां और आसपास के इलाकों में सैन्य मौजूदगी बढ़ानी शुरू कर दी है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सबसे पहले स्वीडन ने ग्रीनलैंड में सैनिक भेजने का ऐलान किया। स्वीडन के पीएम उल्फ क्रिस्टर्सन ने कहा कि डेनमार्क के अनुरोध पर यह कदम उठाया गया है। यह तैनाती डेनमार्क के सैन्य अभ्यास ‘ऑपरेशन आर्कटिक एंड्योरेंस’ के तहत की जा रही है। इसके बाद नॉर्वे के रक्षा मंत्री टोरे सैंडविक ने बताया कि उनका देश भी दो सैन्य कर्मियों को ग्रीनलैंड भेज रहा है। उन्होंने कहा कि नाटो देश आर्कटिक क्षेत्र की सुरक्षा को मजबूत करने के तरीकों पर लगातार चर्चा कर रहे हैं।
जर्मनी ने भी ग्रीनलैंड में सैनिक भेजने की घोषणा की है। जर्मन सरकार के मुताबिक एक टोही मिशन के तहत 13 सैनिक भेजे जाएंगे। यह मिशन डेनमार्क के अनुरोध पर शुरू किया गया है और इसका उद्देश्य यह जानना है कि क्षेत्र की सुरक्षा को और कैसे मजबूत किया जाए, जिसमें समुद्री निगरानी भी शामिल हो सकती है। वहीं फ्रांस के एक सैन्य अधिकारी ने बताया कि फ्रांस ने भी ग्रीनलैंड में अपने सैन्य कर्मी भेजे हैं, जो कई सहयोगी देशों के साथ संयुक्त अभ्यास में हिस्सा लेंगे।
ट्रंप लगातार कहते रहे हैं कि ग्रीनलैंड अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अहम है और नाटो को अमेरिका की मदद करनी चाहिए, लेकिन डेनमार्क समेत नाटो के अन्य सदस्य देश इस मांग को खारिज कर चुके हैं। उनका साफ कहना है कि ग्रीनलैंड डेनमार्क का हिस्सा है और नाटो के नियमों के तहत सदस्य देश एक-दूसरे पर हमला नहीं कर सकते हैं।
मध्य-पूर्व में अमेरिकी मिलिट्री बेस की स्थिति
15 Jan, 2026 06:08 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ईरान |ईरान और अमेरिका में तनातनी चरम पर पहुंच गई है। आशंका जताई जा रही है कि अमेरिका ईरान पर कभी भी सैन्य हमला कर सकता है। यही वजह है कि भारत समेत दुनिया भर के देशों ने अपने-अपने नागरिकों से तुरंत ईरान छोड़ने को कहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस तनातनी को तब और बढ़ा दिया, जब उन्होंने ईरान में प्रदर्शनकारियों से अपना आंदोलन तेज करने का आह्वान किया और कहा कि मदद पहुंच रही है। इस बीच, ईरान ने धमकी दी है कि अगर अमेरिका ने हमला किया वह चुप नहीं बैठेगा और मध्य-पूर्व में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों पर जवाही हमला करेगा।शायद यही वजह है कि अमेरिका ने मध्य-पूर्व में स्थित अपने मिलिट्री बेस से सैनिकों और कर्मियों को वापस बुलाने का फैसला किया है। ईरान ने अमेरिकी हमलों की आशंकाओं के मद्देनजर सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, कतर और तुर्की समेत मिडिल ईस्ट के कई देशों को चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने हमला किया तो वह उनके देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाएगा।
चुप्पी खतरों को कम नहीं करती, US हमले की आशंका के बीच भारत से बोला ईरान
दुनिया भर में अमेरिका के सैन्य अड्डे: कहां, क्यों और कितने अहम?
दुनिया भर में अमेरिका के सैन्य ठिकाने दो तरह हैं। पहला एयर बेस, जहां लड़ाकू विमान रखे जाते हैं और वहां से संचालित किए जाते हैं, और दूसरा नेवल बेस होते हैं, जहां युद्धपोत और नौसैनिक जहाज़ तैनात रहते हैं। जुलाई 2024 तक, अमेरिका के पास दूसरे देशों में कम से कम 128 सैन्य अड्डे हैं। इनमें सबसे बड़ा विदेशी अड्डा दक्षिण कोरिया का कैंप हम्फ्रीज़ है, जो क्षेत्रफल के लिहाज़ से अमेरिका का सबसे बड़ा ओवरसीज़ बेस माना जाता है। ब्राउन यूनिवर्सिटी के वॉटसन इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के मुताबिक, 2001 के बाद 19 से 30 लाख अमेरिकी सैनिकों ने अफगानिस्तान और इराक युद्धों में सेवा दी इनमें से आधे से ज़्यादा सैनिक एक से अधिक बार इन युद्ध क्षेत्रों में भेजे गए।
मिडिल-ईस्ट में कहां-कहां अमेरिकी सैन्य अड्डे?
मध्य-पूर्व के करीब आधा दर्जन मुस्लिम देशों में अमेरिका के सैन्य अड्डे हैं। इनमें सउदी अरब, कतर, UAE, बहरीन, तुर्की, इराक और जॉर्डन शामिल हैं। ये अमेरिकी सैन्य अड्डे मध्य-पूर्व और पश्चिम एशिया में शक्ति संतुलन बनाए रखते हैं। आतंकवाद विरोधी अभियानों में अहम भूमिका निभाते हैं और ईरान, रूस और चीन जैसे देशों पर रणनीतिक दबाव बनाए रखते हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक मिडिल ईस्ट में अमेरिका के कुल 19 मिलिट्री बेस हैं। इनमें से हरेक सैन्य अड्डों पर करीब 40 से 50 हजार सैनिक तैनात हैं। बहरीन में अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े का मुख्यालय है। यह बेड़ा खाड़ी क्षेत्रों खासकर लाल सागर, अरब सागर और हिंद महासागर के कुछ हिस्सों में नौसैनिक सुरक्षा और सैन्य अभियानों की निगरानी करता है। समुद्री रक्षा में यह बेड़ा काफी अहम माना जाता है।
रूस-ईरान समेत 75 देशों के लोगों की US में नो एंट्री, ट्रंप ने दिया एक और झटका
कतर की राजधानी दोहा के पास अल उदैद एयर बेस है, जो रेगिस्तान में 24 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है। यह ईरान से करीब 190 KM की दूरी पर फारस की खाड़ी के किनारे स्थित है। यहां करीब 10,000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड का मुख्यालय है। यह कमांड मिस्र से कजाकिस्तान तक के बड़े क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य अभियानों को संभालता है। पिछले साल जब अमेरिका ने ईरान के परमाणु सुविधा ठिकानों पर हमले किए थे तब ईरान ने कतर में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया था। इस वजह से कतर पहले से ही सचेत है और अमेरिका पर हमले नहीं करने का दबाव बना रहा है।कुवैत: कुवैत में कई अमेरिकी सैन्य बेस हैं। कैंप आरिफजान यूएस आर्मी सेंट्रल कमांड का मुख्यालय है। वहां अली अल सलेम एयर बेस भी है, जो इराक सीमा से 40 किमी दूर, अलग-थलग और कठिन इलाके में स्थित है। कुवैत में ही कैंप ब्यूहरिंग सैन्य अड्डा भी है। 2003 के इराक युद्ध के दौरान ये अड्डा बना था। यह इराक और सीरिया भेजे जाने वाले सैनिकों का ट्रांज़िट बेस है।
ईरान की धमकी से डर गए ट्रंप? मिडिल ईस्ट बेस से वापस बुलाई जा रही अमेरिकी सेना
संयुक्त अरब अमीरात: UAE की राजधानी अबू धाबी के पास अल धफरा एयर बेस है, जो यूएई वायुसेना के साथ साझेदारी में है यहां से ISR और ड्रोन ऑपरेशंस किए जाते हैं। ISIS के खिलाफ अभियानों और क्षेत्रीय निगरानी में यह अड्डा अहम भूमिका निभाता रहा है। दुबई के जिबेल अली पोर्ट औपचारिक बेस नहीं है लेकिन पश्चिम एशिया में अमेरिकी नौसेना का सबसे बड़ा पोर्ट ऑफ कॉल है। यहां अक्सर अमेरिकी विमानवाहक पोत और युद्धपोत आते हैंइराक: पश्चिमी इराक के अनबार प्रांत में ऐन अल असद एयर बेस है। यह इराकी सुरक्षा बलों और नाटो मिशन को समर्थन देता है। 2020 में जनरल कासेम सुलेमानी की मौत का बदला लेने के लिए ईरान ने इस पर मिसाइल हमला किया था। इसके अलावा उत्तरी इराक के कुर्द क्षेत्र में एरबिल एयर बेस इराक में अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य अड्डा है। यह अमेरिकी और सहयोगी देशों के प्रशिक्षण का केंद्र है। यह खुफिया जानकारी, लॉजिस्टिक्स और सैन्य योजना का अहम ठिकाना है।सऊदी अरब: सऊदी अरब के रियाद के दक्षिण में 60 किलोमीटर की दूरी पर प्रिंस सुल्तान एयर बेस है। यह क्षेत्र में हवाई और मिसाइल रक्षा अभियानों का समर्थन करता है। यहां पैट्रियट और THAAD जैसे उन्नत रक्षा सिस्टम तैनात हैं। सऊदी अरब में 2024 तक 2,321 अमेरिकी सैनिक मौजूद थे। क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए सऊदी सेना के साथ अमेरिकी सेना समन्वय कर ऑपरेशन करती है।जॉर्डन: जॉर्डन की राजधानी अम्मान से लगभग 100 किमी दूर अज़्राक में मुवाफ़क़ अल सल्टी एयर बेस है। यहां अमेरिकी वायुसेना की 332वीं एयर एक्सपेडिशनरी विंग तैनात है। यह सीरिया, लेबनान, इज़राइल, जॉर्डन और इराक क्षेत्र में निगरानी, हवाई अभियान और सैन्य समन्वय करती है।तुर्की और अमेरिका मिलकर दक्षिणी अदाना प्रांत में इंसिरलिक एयर बेस चलाते हैं। यहां अमेरिकी परमाणु हथियार रखे हैं। यहां से ISIS के खिलाफ गठबंधन को सहयोग दिया जाता है। तुर्की में 1465 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। इनके अलावा पाकिस्तान, अफगानिस्तान, कजाकिस्तान, किरगिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उज्बेकिस्तान में भी अमेरिकी सैन्य अड्डे हैं। कुल मिलाकर देखें तो ईरान को चारों तरफ से अमेरिकी सैन्य अड्डों ने घेर रखा है।
डोनाल्ड ट्रंप के तेवर पड़े नरम, बोले- ईरान में हत्याएं रूक गई, अब फांसी देने का कोई प्लान नहीं
15 Jan, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन । कई दिनों तक चली धमकियों, चेतावनियों और टकराव की आशंका के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (US President Donald Trump) ने कहा है कि ईरान (Iran) में सरकार-विरोधी प्रदर्शनों (Protests) के दौरान हो रही हत्याएं अब रुक गई हैं। ट्रंप के इस बयान को हाल के दिनों में तीखे और सैन्य कार्रवाई की चेतावनी वाले रुख के बाद अपेक्षाकृत सतर्क संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
ट्रंप का यह बयान 26 वर्षीय ईरानी प्रदर्शनकारी इरफान सुल्तानी के भविष्य को लेकर बढ़ती चिंता के बाद आया है। सुल्तानी को एक हफ्ते से भी कम समय पहले हिरासत में लिया गया था और उनके जल्द फांसी दिए जाने की आशंकाएं जताई जा रही थीं।
हत्या और फांसी दोनों रुकीं: ट्रंप
वॉशिंगटन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि प्रदर्शनकारियों की हत्याएं और प्रस्तावित फांसियां दोनों ही रोक दी गई हैं। ट्रंप ने कहा- मुझे अभी-अभी कुछ जानकारी मिली है कि हत्याएं रुक गई हैं। फांसियां भी रुक गई हैं और अब किसी को फांसी नहीं दी जाएगी, जिसे लेकर पिछले कुछ दिनों से बहुत चर्चा थी।
हालांकि जब उनसे पूछा गया कि उन्हें यह जानकारी किसने दी, तो उन्होंने किसी का नाम बताने से इनकार करते हुए सिर्फ इतना कहा कि ये सूचनाएं दूसरी तरफ के बेहद महत्वपूर्ण स्रोतों से आई हैं।
सुल्तानी की फांसी टली
इसी बीच, नॉर्वे स्थित हेंगा संगठन मानवाधिकार ने बुधवार देर रात बताया कि सुल्तानी की फांसी फिलहाल टाल दी गई है। इस खबर के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुछ राहत देखी गई।
ट्रंप ने कहा कि अब उनका प्रशासन वेट एंड वॉच यानी हालात पर नजर बनाए रखने की नीति अपनाएगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि वाइट हाउस को ईरान की ओर से एक बहुत अच्छा बयान मिला है। हालांकि उन्होंने सैन्य कार्रवाई की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया, खासकर ऐसे समय में जब अमेरिका ने क्षेत्रीय तनाव के बीच कतर के एक एयरबेस से कुछ कर्मियों को वापस बुलाना शुरू कर दिया है।
ईरान ने बंद किया एयरस्पेस, एयर इंडिया और इंडिगो ने यात्रियों के लिए जारी की ट्रैवल एडवाइजरी, उड़ानों के रूट में बदलाव
15 Jan, 2026 09:13 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Air India Advisory: ईरान में हिंसा के बाद तनाव की स्थिति बनी हुई है, अभी भी हालातों में सुधार नहीं हो पाया है. इसी तनाव की वजह से ईरान के ऊपर से गुजरने वाली फ्लाइटों के रूट में बदलाव करना पड़ा है. एअर इंडिया और इंडिगो एयरलाइन ने भी अपने यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए एडवाइजरी जारी की है. ईरान के ऊपर से विमान नहीं गुजरेंगे तो इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था होगी, जिसमें यात्रियों का समय तय समय से ज्यादा लग सकता है, तो वहीं कुछ उड़ानों को रद्द भी किया जा सकता है. इसलिए अगर आप भी यात्रा पर जा रहे हैं तो यात्रा करने से पहले उड़ानों के स्टेटस के बारे में जरूर पता कर लें.
एयर इंडिया ने जारी की एडवाइजरी?
एयर इंडिया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “ईरान में उत्पन्न स्थिति और उसके हवाई क्षेत्र के बंद होने के कारण, तथा हमारे यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, इस क्षेत्र से गुजरने वाली एयर इंडिया की उड़ानें अब वैकल्पिक मार्ग का उपयोग कर रही हैं, जिससे विलंब हो सकता है. कुछ एयर इंडिया की उड़ानें, जिनका मार्ग बदलना फिलहाल संभव नहीं है, रद्द की जा रही हैं. हम यात्रियों से अनुरोध करते हैं कि हवाई अड्डे जाने से पहले हमारी ऑफिशियल वेबसाइट पर अपनी उड़ानों की स्थिति अवश्य देख लें. इस अप्रत्याशित व्यवधान के कारण यात्रियों को हुई असुविधा के लिए एयर इंडिया खेद व्यक्त करती है. हमारे यात्रियों और चालक दल की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है.”
इंडिगो ने भी यात्रियों को दी सलाह
इंडिगो एयरलाइन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर यात्रियों के लिए सलाह दी है, जिसमें लिखा, “ईरान द्वारा अचानक हवाई क्षेत्र बंद किए जाने के कारण, हमारी कुछ अंतरराष्ट्रीय उड़ानें प्रभावित हुई हैं. हमारी टीमें स्थिति का आकलन करने और प्रभावित यात्रियों को सर्वोत्तम संभव विकल्प उपलब्ध कराने के लिए तत्परता से काम कर रही हैं.
यह घटनाक्रम हमारे नियंत्रण से बाहर है, और आपकी यात्रा योजनाओं में हुई असुविधा के लिए हमें खेद है. यदि आपकी उड़ान प्रभावित हुई है, तो हम आपको हमारी वेबसाइट पर जाकर लचीले पुनर्बुकिंग विकल्पों का पता लगाने या अपनी पसंद के अनुसार धनवापसी का दावा करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं. हम इस बदलती स्थिति में आपको सूचित रखने और आपका समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध हैं. आपके धैर्य और समझ के लिए धन्यवाद.
एविएशन एक्सपर्टों का मानना है कि ईरान में राजनैतिक तनाव और एयरस्पेस बंद होने से इसका असर वैश्विक एयर ऑपरेशंस पर दिखाई देगा. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के ऊपर से कोई भी फ्लाइट्स नहीं गुजर रहा है.
सभी एयरलाइनों ने वैकल्पिक मार्ग का इस्तेमाल करना शुरू कर दी हैं. तो वहीं कई अंतरराष्ट्रीय एयरलाइन ने अपने मार्ग बदल दिए या कैंसिल कर दिए. एयर इंडिया ने साफ कहा कि सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा.
एलन मस्क पर हो रही धन वर्षा… एक ही दिन में 42.2 अरब डॉलर बढ़ी दौलत
15 Jan, 2026 08:18 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। दुनिया सबसे अमीर व्यक्ति टेस्ला के एलन मस्क ( World’s Richest Person Elon Musk) की दौलत में भारी इजाफा (Huge Increase Wealth) हुआ है। बुधवार को उनके ऊपर डॉलर की ऐसी बारिश हुई कि एक ही दिन में 42.2 अरब डॉलर पीट दिए। ब्लूमबर्ग बिलेनियर इंडेक्स (Bloomberg Billionaire List) के मुताबिक मस्क की दौलत इस उछाल के बाद 683 अरब डॉलर पर पहुंच गई है। महज 14 दिनों में मस्क की संपत्ति 63.1 अरब डॉलर बढ़ी है।
दूसरी ओर ब्लूमबर्ग बिलेनियर इंडेक्स के टॉप-10 अरबपतियों को बुधवार को बड़े झटके लगे। जेफ बेजोस को 5.22 अरब डॉलर, लैरी एलिसन को 8.85 अरब डॉलर, मार्क जुकरबर्ग को 5.32 अरब डॉलर और बर्नार्ड अर्नाल्ट को 2.48 अरब डॉलर का झटका लगा है। स्टीव बाल्मर को भी 3.55 अबर डॉलर और जेनसेन हुआंग को 2.16 अरब डॉलर की चोट पहुंची है। लैरी पेज को 70.5 मिलियन डॉलर, सर्गेई ब्रिन को 90 मिलियन डॉलर और वॉरेन बफेट को 118 मिलियन डॉलर की चोट पहुंची है।
मस्क दुनिया की सबसे वैल्यूएबल कार बनाने वाली कंपनी टेस्ला और प्राइवेट रॉकेट बिजनेस स्पेसएक्स के CEO हैं। कंपनी के 2025 प्रॉक्सी स्टेटमेंट के अनुसार, मस्क के पास टेस्ला का लगभग 12% हिस्सा है। उनके पास 2018 के कंपनसेशन पैकेज से लगभग 304 मिलियन एक्सरसाइजेबल स्टॉक ऑप्शन भी हैं।
ब्लूमबर्ग के मुताबिक स्पेसएक्स का वैल्यूएशन दिसंबर 2025 के टेंडर ऑफर का इस्तेमाल करके किया गया है, जिसमें कंपनी की वैल्यू लगभग $800 बिलियन आंकी गई है। फेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन के साथ सितंबर 2025 की फाइलिंग के आधार पर एक ट्रस्ट के जरिए मस्क के पास इस प्राइवेट कंपनी का लगभग 42% हिस्सा है। 5% प्राइवेट कंपनी डिस्काउंट लागू किया गया है। दिसंबर 2025 में नए वैल्यूएशन को ध्यान में रखते हुए एक एडजस्टमेंट किया गया, जिससे उनकी नेटवर्थ में $168 बिलियन की बढ़ोतरी हुई।
क्यों उछली दौलत
xAI का वैल्यूएशन जनवरी 2026 के फंडिंग राउंड का इस्तेमाल करके किया गया है, जिसमें 20 अरब डॉलर जुटाए गए और पोस्ट-मनी वैल्यूएशन 230 अरब डॉलर था। कंपनी के कैपिटल स्ट्रक्चर से परिचित एक व्यक्ति के अनुसार, जो अपनी पहचान नहीं बताना चाहता था क्योंकि यह जानकारी प्राइवेट है, इस राउंड के बाद मस्क के पास कंपनी का 51% हिस्सा था। 15% लिक्विडिटी डिस्काउंट लागू किया गया है। नया वैल्यूएशन जनवरी 2026 में लागू किया गया, जिससे उनकी नेटवर्थ में 48 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई।
ईरान में हिंसा बेकाबू, ढाई हजार से ज्यादा मौतों का दावा
14 Jan, 2026 07:10 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान|ईरान में विरोध प्रदर्शन के चलते हालात बेकाबू हो गए हैं। अब तक इन प्रदर्शनों में ढाई हजार से ज्यादा लोगों की जान चली गई है। बिगड़ते हालात के बीच भारत ने ईरान में रह रहे अपने लोगों से तुरंत ईरान छोड़ने की अपील की है। ईरान में स्थित भारतीय दूतावास ने सभी भारतीय नागरिक- टूरिस्ट, बिजनेसमैन, छात्र आदि से देश छोड़ने के लिए कह दिया है। दूतावास ने कहा है कि वे कमर्शियल फ्लाइट्स समेत उपलब्ध ट्रांसपोर्ट के साधनों का इस्तेमाल करके ईरान छोड़ दें। यह फैसला बदलती स्थिति को देखते हुए लिया गया है।दूतावास ने ईरान में सभी भारतीय नागरिकों और PIO को सावधानी बरतने की सलाह दी है, और उनसे उन इलाकों से दूर रहने को कहा है जहां विरोध प्रदर्शन या धरने हो रहे हैं। नागरिकों से आग्रह किया गया है कि वे ईरान में भारतीय दूतावास के संपर्क में रहें और किसी भी नई जानकारी के लिए स्थानीय मीडिया रिपोर्ट पर नजर रखें।दूतावास ने भारतीय नागरिकों से अपने इमिग्रेशन डॉक्यूमेंट्स तैयार रखने का आग्रह किया है। एडवाइजरी में कहा गया है, “ईरान में सभी भारतीय नागरिकों से अनुरोध है कि वे अपने यात्रा और इमिग्रेशन डॉक्यूमेंट्स, जिसमें पासपोर्ट और आईडी शामिल हैं, अपने पास तैयार रखें। इस संबंध में किसी भी सहायता के लिए उनसे भारतीय दूतावास से संपर्क करने का अनुरोध किया जाता है।”
US-ईरान की लड़ाई में फंस गया PAK, 3 संकट ने घेरा; मुनीर को बुलानी पड़ी आपात बैठकये भी पढ़ें:प्रदर्शनकारियों को फांसी पर लटकाएगा ईरान, ट्रंप की धमकियों का भी नहीं असर
ईरान में मरने वालों की संख्या बढ़कर 2,571 हो गई है। अमेरिका की एक मानवाधिकार संस्था ने बुधवार को यह जानकारी दी। अमेरिका की मानवाधिकार संस्था ‘ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट न्यूज एजेंसी’ ने ये आंकड़े बताए हैं। यह एजेंसी हाल के वर्षों में हुई हिंसक घटनाओं के दौरान सटीक जानकारी देने के लिए जानी जाती रही है और ईरान में मौजूद अपने समर्थकों के जरिए सूचनाओं का सत्यापन करती है। संस्था ने कहा कि मरने वालों में 2,403 प्रदर्शनकारी हैं और 147 सरकारी कर्मी हैं। संस्था ने बताया कि मारे गए लोगों में 12 बच्चे और नौ आम नागरिक भी शामिल हैं जो प्रदर्शनों में शामिल नहीं थे। संस्था ने बताया कि 18,000 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है।
सड़क सुरक्षा के लिए पुलिस सख्त: राजधानी के चौक-चौराहों पर ब्रीथ एनालाइजर के साथ तैनात रही टीमें।
खेत से चोरी हुई थीं गायें: भोपाल के गोदरमऊ क्षेत्र में हुई घटना ने बढ़ाई पुलिस की चुनौती।
अपराधियों को संरक्षण देने का आरोप: बृजभूषण और प्रज्वल रेवन्ना मामले पर बरसीं शोभा ओझा
जशपुर में विमान हादसा: आरा पहाड़ पर एयर एम्बुलेंस क्रैश होने से मचा हड़कंप
