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चीन का दोमुंही चेहरा.......इधर शांतिवार्ता, उधर ईरान को एयर डिफेंस सिस्टम देने की तैयारी
12 Apr, 2026 12:40 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिका की खुफिया एजेंसियों के हवाले से दावा हुआ है कि चीन ईरान को अगले कुछ हफ्तों में एक एयर डिफेंस सिस्टम देने की तैयारी में है। यूएस इंटेलिजेंस के हवाले से कहा गया हैं कि चीन अगले कुछ हफ्तों के भीतर ईरान को नए एयर डिफेंस सिस्टम देने जा रहा है। रिपोर्ट में बताया गया हैं कि ये एक भड़काऊ कदम होगा क्योंकि बीजिंग अमेरिका-ईरान के बीच हुए नाजुक संघर्ष विराम में मध्यस्थता करने में मदद की थी और अब वहां ईरान को एयर डिफेंस सिस्टम दे रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मई महीने में चीन की यात्रा पर जाने वाले हैं और अगर ईरान को चीनी एयर डिफेंस भेजने की तैयारी की रिपोर्ट सही है, तब उनकी यात्रा पर असर पड़ेगा। दो सूत्रों के हवाले से मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि इसतरह के संकेत हैं कि बीजिंग इन खेपों को तीसरे देशों के रास्ते भेजने पर काम कर रहा है ताकि उसका नाम नहीं आ सके और एयर डिफेंस सिस्टम के मूल देश का पता नहीं चल पाए।
ईरान को हथियारों की खेप भेजने की तैयारी में चीन
सूत्रों के मुताबिक बीजिंग जिन सिस्टम्स को भेजने की तैयारी कर रहा है वे कंधे से दागी जाने वाली एंटी-एयर मिसाइल सिस्टम्स हैं। इन सिस्टम्स ने पांच हफ्ते तक चले युद्ध के दौरान कम ऊंचाई पर उड़ने वाले अमेरिकी सैन्य विमानों के लिए खतरा पैदा किया था और अगर युद्धविराम टूट जाता है, तब ये फिर से खतरा बन सकते हैं। हालांकि वॉशिंगटन में चीनी दूतावास के एक प्रवक्ता ने कहा चीन ने इस संघर्ष में शामिल किसी भी पक्ष को कभी हथियार नहीं दिए हैं। यह जानकारी पूरी तरह से गलत है।
चीनी दूतावास प्रवक्ता ने कहा कि एक जिम्मेदार बड़े देश के तौर पर चीन हमेशा अपनी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारियों को पूरा करता है। हम अमेरिका से आग्रह करते हैं कि वह बिना किसी आधार के आरोप लगाने, जान-बूझकर गलत संबंध जोड़ने और सनसनी फैलाने से परहेज करें। हमें उम्मीद है कि संबंधित पक्ष तनाव कम करने में मदद के लिए और ज्यादा प्रयास करेगा।
ट्रंप ने संकेत दिया था कि पिछले हफ्ते ईरान ने एफ-15 फाइटर जेट पर हाथ से कंधे पर रखकर चलाई जाने वाली मिसाइल यानी हीट-सीकिंग मिसाइल से हमला किया था जिसमें अमेरिकी विमान गिर गया था। जबकि ईरान ने कहा कि उसने जेट को गिराने के लिए एक नए एयर डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल किया है लेकिन उसने इसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी। यह साफ नहीं है कि वह सिस्टम चीन में बना था या नहीं। सूत्रों ने बताया है कि चीनी कंपनियां ईरान को लगातार ऐसी प्रतिबंधित दोहरे-इस्तेमाल वाली टेक्नोलॉजी बेच रही हैं जिससे ईरान को हथियार बनाने और अपने नेविगेशन सिस्टम को बेहतर बनाने में मदद मिल रही है। लेकिन, अगर चीनी सरकार सीधे तौर पर हथियारों के सिस्टम ईरान को देती है तो यह मदद का एक बिल्कुल नया स्तर होगा।
खाड़ी देशों को बहुत मंहगी पड़ी ट्रंप से दोस्ती, ईरान से जंग ने शक्ति संतुलन की तस्वीर बदली
12 Apr, 2026 11:39 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। मध्य पूर्व में हालिया जंग ने शक्ति संतुलन की पूरी तस्वीर बदलकर रख दी है। जहां कभी अमेरिका के सैन्य ठिकाने उसकी ताकत और प्रभाव को दिखाते थे, वहीं अब बर्बाद हो चुके बेस उसकी सबसे बड़ी कमजोरी दिखा रहे है। ईरान के जवाबी हमलों ने सऊदी अरब, यूएई, कतर और बहरीन जैसे देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ढांचे को गहरी चोट पहुंची है। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका के कम से कम एक दर्जन सैन्य ठिकाने इतने बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं कि अब उनका इस्तेमाल करना मुश्किल हो गया है। एक अमेरिकी अखबार ने पहले ही बताया था कि हमलों की वजह से अमेरिकी एयरबेस इस्तेमाल करने योग्य भी नहीं हैं। हालांकि ट्रंप प्रशासन ने अब तक नुकसान की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।
मिडिल ईस्ट आई की रिपोर्ट पर रक्षा विशेषज्ञों ने बताया कि, यह अमेरिका की ताकत का पूरा ढांचा था, जिसे ईरान ने 40 दिन में बेकार कर दिया। उनका मानना है कि असली नुकसान की तस्वीर अभी भी सामने नहीं आई है। अरब के जिन देशों में ये बेस मौजूद हैं, जैसे कि बहरीन, सऊदी अरब, यूनाइटेड अरब अमीरात, कुवैत और कतर में इन ठिकानों तक पहुंच बेहद सीमित कर दी गई है। जंग के दौरान इन देशों ने अपने आसमान में मिसाइलों की तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्डिंग पर भी रोक लगा दी थी, जिससे यह सवाल भी उठे कि क्या वे इन ठिकानों की असली हालत छिपाना चाहते थे। ईरान ने बहरीन में अमेरिकी नौसेना के फिफ्थ फ्लीट के हेडक्वार्टर को टारगेट किया था, कभी अमेरिका की समुद्री ताकत का केंद्र माना जाता था, अब खुद खतरे में है। विशेषज्ञ कहते हैं, ऐसा नहीं लगता कि हम कभी पहले की तरह वहां अपनी फिफ्थ फ्लीट को वापस रख पाएंगे। यह अब बहुत ज्यादा असुरक्षित हो चुका है।
असल में, अमेरिका का यह सैन्य नेटवर्क 1990 के खाड़ी युद्ध के बाद मजबूत हुआ था। तब से लेकर अब तक करीब 19 बड़े सैन्य ठिकाने इस क्षेत्र में बने, जहां करीब 50,000 सैनिक तैनात रहते हैं। कहा जाता है कि इससे खाड़ी देशों को सुरक्षा मिलती थी और इसके बदले अमेरिका को तेल और मिडिल ईस्ट में अपनी रणनीतिक पकड़ मजबूत करने में मदद मिलती थी। लेकिन इस जंग ने यह समीकरण बिगाड़ दिया है। रिपोर्ट में एक्सपर्ट ने बताया, जब इस तरह के समझौते में एक पक्ष को फायदा कम और नुकसान ज्यादा होने लगे, तब वह रिश्ता कमजोर होने लगता है। जंग के दौरान खाड़ी देशों को अपनी एयर डिफेंस क्षमता पर भारी दबाव झेलना पड़ा, एयरपोर्ट और स्कूल बंद करने पड़े और यहां तक कि उनके ऊर्जा ढांचे पर भी हमले हुए।
विशेषज्ञ ने बताया कि अब ये सैन्य ठिकाने सुरक्षा देने के बजाय हमलों का निशाना बन गए हैं। उन्होंने कहा, ये बेस ईरानी हमलों को रोकने के बजाय खुद उन्हें आकर्षित करने लगे हैं। इससे अमेरिका की सुरक्षा गारंटी पर भरोसा टूटता दिख रहा है। इस पूरी घटना का एक बड़ा असर यह हो सकता है कि खाड़ी देश अब अपनी सुरक्षा के लिए नए विकल्प तलाश सकते है।
किलर फॉर्मूला: इजराइल ने बीते 40 दिनों में ईरान पर 18 हजार बम गिराए
12 Apr, 2026 10:34 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेलअवीव। इजरायल और ईरान के बीच पिछले 40 दिनों से चल रहे संघर्ष में इजरायली वायुसेना ने आक्रामक रणनीति अपनाते हुए 18,000 से ज्यादा बम गिराए हैं। आईडीएफ की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान में 4,000 से अधिक सैन्य ठिकानों, जिनमें एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल लॉन्चर्स और न्यूक्लियर प्लांट शामिल हैं, को निशाना बनाया गया है। इजरायल सवा चार बम प्रति लक्ष्य की रणनीति पर काम कर रहा है ताकि दुश्मन की सैन्य क्षमता को पूरी तरह नष्ट किया जा सके। इन हमलों से ईरान के पेट्रोकेमिकल और हथियार उत्पादन ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। ईरान के साथ-साथ लेबनान में भी इजरायली हमले जारी हैं।
अप्रैल को लेबनान पर महज 10 मिनट में 100 से ज्यादा हमले किए गए, जिसमें 350 से अधिक लोग मारे गए। इजरायल का दावा है कि ये हमले हिजबुल्लाह के कमांड सेंटरों और हथियार डिपो को नष्ट करने के लिए किए गए हैं। इस युद्ध के कारण लेबनान में लाखों लोग बेघर हो गए हैं और मानवीय संकट गहरा गया है। हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर की बात चल रही है, लेकिन इजरायल ने स्पष्ट किया है कि वह अपनी सुरक्षा के लिए हिजबुल्लाह के खिलाफ कार्रवाई जारी रखेगा। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय और सिविल डिफेंस के अनुसार उस एक दिन में 250 से 350 से ज्यादा लोग मारे गए और 1100 से अधिक घायल हुए। यह लेबनान में हाल के सालों का सबसे खूनी दिन था। पूरे अभियान में लेबनान में 1000 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं और हजारों लोग घायल हुए हैं। इजरायल ने हिजबुल्लाह के कमांड सेंटर, हथियार डिपो, ब्रिज और रसद मार्गों को नष्ट किया। कई पुल टूट गए जिससे दक्षिणी लेबनान में मदद पहुंचना मुश्किल हो गया है। इजरायल का दावा है कि इन हमलों में सैकड़ों हिजबुल्लाह लड़ाके मारे गए। लेबनान में लाखों लोग बेघर हो गए और देश में बड़ी तबाही मची है। इजरायल हर एक महत्वपूर्ण टारगेट को पूरी तरह खत्म करने के लिए बहुत ज्यादा बम गिरा रहा है. औसतन हर टारगेट पर 4.5 बम या उससे ज्यादा गोला-बारूद का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसका मकसद है कि कोई भी सैन्य सुविधा, मिसाइल या कमांड सेंटर बच न सके।
21 घंटे की चर्चा बेनतीजा, जेडी वेंस लौटे अमेरिका, ट्रंप की अगली रणनीति पर निगाहें
12 Apr, 2026 08:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Islamabad Talks: पाकिस्तान के इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर को लेकर वार्ता चल रही थी. लेकिन 21 घंटे चली लंबी बातचीत को कोई नतीजा नहीं निकला. ईरान ने अमेरिका की शर्तों को मानने से इनकार कर दिया. इसी बीच अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने कहा कि हम खुले दिल से यहां आए थे, लेकिन अब हम बिना डील के अमेरिका लौट रहे हैं. बड़ा सवाल यह है कि अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस मामले में अब क्या कदम उठाएंगे. इसको लेकर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं.
अमेरिकी राष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि ‘गुड न्यूज ये है कि हमारी ईरानियों के साथ कई मुद्दों पर सार्थक चर्चाएं हुई हैं. बुरी खबर यह है कि हम किसी समझौते तक नहीं पहुंच पाए हैं. मेरा मानना है कि यह अमेरिकी की तुलना में ईरान के लिए ज्यादा बुरी खबर है. हमने अपनी ओर से फाइनल और बेस्ट ऑफर पेश किया है, लेकिन ईरानियों ने अमेरिकी शर्तों को मानने से इनकार कर दिया है. हमने भी स्पष्ट कर दिया है कि किन चीजों पर समझौता नहीं किया जाएगा. अमेरिका ने अपनी रेड लाइन्स स्पष्ट कर दी है.
पाकिस्तान को लेकर क्या बोले वेंस?
ईरान ने अमेरिका की शर्तों को स्वीकार क्यों नहीं किया. जब इसको लेकर सवाल किया गया तो जेडी वेंस ने कहा कि मैं ज्यादा डिटेल्स में नहीं जाऊंगा और निजी बातचीत को सार्वजनिक भी नहीं करना चाहता. इस दौरान वेंस ने कहा कि बातचीत के दौरान जो भी कमियां थीं. वह पाकिस्तान की वजह से नहीं थी. पाकिस्तान ने शानदार काम किया और उसने वास्तव में ईरानियों और अमेरिका के बीच की खाई को पाटने का काम किया है.
फिलहाल, यह साफ हो गया है कि ईरान और अमेरिका के बीच चल रही वार्ता पर कोई हल नहीं निकला है. ईरान ने अमेरिका की कई शर्तों को मानने से इनकार कर दिया है. अमेरिका का कहना है कि हमें गारंटी चाहिए कि ईरान भविष्य में कभी भी परमाणु हथियार बनाने की कोशिश नहीं करेगा. अमेरिका का साफ कहना है कि वह परमाणु सुरक्षा को लेकर कोई समझौता नहीं करना चाहता है.
सुरक्षा संकट बढ़ा: 24 घंटों में इजरायल का हिज्बुल्लाह पर बड़ा हमला
11 Apr, 2026 10:26 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Israel Strikes Lebanon: पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध को लेकर वार्ता चल रही है। पिछले तीन घंटों से बातचीत चल रही है लेकिन अभी तक सहमति नहीं बन पाई है। इसी बीच खबर आ रही है कि इजरायल और लेबनान के बीच जारी जंग और तेज हो गई है। इजराइली सेना ने दावा किया है कि अपने नवीनतम ऑपरेशनल में पिछले 24 घंटों में लेबनान भर में 200 से अधिक हिज़्बुल्लाह ठिकानों को निशाना बनाया है।
इजरायली सेना ने जारी किया बयान
इजरायली सेना ने X पर एक पोस्ट में अपडेट साझा करते हुए कहा कि उसकी वायु सेना अपने चल रहे सैन्य अभियान के हिस्से के रूप में दक्षिणी लेबनान में स्थित हिज्बुल्लाह के बुनियादी ढांचे पर हमले करना जारी रखेगी।
ईरानी विदेश मंत्रालय ने किया दावा
इस निरंतर सैन्य गतिविधि के बीच ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने शनिवार को दावा किया कि लेबनान में युद्धविराम अमेरिका के साथ वार्ता में हुए एक समझौते का हिस्सा था। प्रेस टीवी ने बताया कि प्रवक्ता के बयान की पुष्टि पाकिस्तानी पक्ष ने की है। इसके अलावा, ईरानी प्रतिनिधिमंडल कथित तौर पर स्थिति के संबंध में आवश्यक निर्णय लेने के लिए हिजबुल्लाह के संपर्क में है।
पाकिस्तान में चल रही है अमेरिका और ईरान की बातचीत
ये घटनाक्रम इस्लामाबाद में संयुक्त राज्य अमेरिका, ईरान और पाकिस्तान के बीच त्रिपक्षीय युद्धविराम वार्ता के प्रारंभ के साथ हुआ है। अल जज़ीरा ने बताया कि ये वार्ता 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से वाशिंगटन और तेहरान के बीच उच्चतम स्तर की चर्चा का प्रतिनिधित्व करती है।
अमेरिका के साथ औपचारिक वार्ता से पहले ईरानी वार्ता दल ने पाकिस्तानी राजधानी में एक रणनीतिक बैठक की। महत्वपूर्ण चर्चाओं में भाग लेने के लिए इस्लामाबाद पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने अमेरिका के साथ शांति वार्ता की आधिकारिक शुरुआत से पहले अपने एजेंडे को अंतिम रूप दिया।
व्हाइट हाउस के एक बयान के अनुसार, इस मुलाकात से पहले अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगेर ग़ालिबफ़ और विदेश मंत्री अब्बास अरघची ने भी पाकिस्तानी प्रधानमंत्री से मुलाकात कर राजनयिक कार्ययोजना पर चर्चा की।
सुधार, निवेश और निर्यात आधारित रणनीति ने बदली चीन की तस्वीर
11 Apr, 2026 08:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग। आज की दुनिया एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहाँ आर्थिक अनिश्चितता, बदलते वैश्विक समीकरण और विकास की नई चुनौतियाँ देशों को अपने रास्ते पुनः परिभाषित करने के लिए प्रेरित कर रही हैं। इस परिदृश्य में चीन का विकास मॉडल केवल एक राष्ट्रीय सफलता की कहानी नहीं, बल्कि एक वैश्विक अध्ययन का विषय बन चुका है, विशेष रूप से उन देशों के लिए जो तेज़, समावेशी और टिकाऊ विकास की तलाश में हैं। पिछले चार दशकों में चीन ने जिस गति और पैमाने पर परिवर्तन किया है, वह अभूतपूर्व है। एक कृषि-प्रधान अर्थव्यवस्था से उभरकर वह दुनिया की अग्रणी औद्योगिक और तकनीकी शक्तियों में शामिल हुआ। इस परिवर्तन का सबसे उल्लेखनीय पहलू यह रहा कि यह केवल आर्थिक वृद्धि तक सीमित नहीं रहा, बल्कि करोड़ों लोगों को गरीबी से बाहर निकालने और जीवन स्तर में व्यापक सुधार लाने में भी सफल रहा। चीन के विकास की एक प्रमुख विशेषता है- व्यावहारिकता पर आधारित नीति निर्माण। यहाँ विचारधारा से अधिक महत्व परिणामों को दिया गया। चीन ने “एक ही समाधान सबके लिए”जैसी सोच से हटकर स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार नीतियाँ विकसित कीं। यही कारण है कि उसके विकास मॉडल की अपील वैचारिक सीमाओं से परे जाकर विभिन्न देशों में देखी जाती है।
इसके साथ ही, क्रमिक सुधार और प्रयोग की रणनीति चीन की नीति निर्माण प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। विशेष आर्थिक क्षेत्रों (SEZs) के माध्यम से चीन ने छोटे स्तर पर सुधारों को परखा और सफल होने पर उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर लागू किया। इस पद्धति ने जोखिम को कम किया और नीतियों को अधिक प्रभावी बनाया। बुनियादी ढांचे में भारी निवेश भी चीन के विकास की रीढ़ रहा है। हाई-स्पीड रेल, आधुनिक बंदरगाह, ऊर्जा नेटवर्क और डिजिटल कनेक्टिविटी ने न केवल घरेलू अर्थव्यवस्था को गति दी, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में चीन की भूमिका को भी मजबूत किया। इस प्रकार का विकास दृष्टिकोण उन देशों के लिए विशेष रूप से आकर्षक है, जो बुनियादी ढांचे की कमी से जूझ रहे हैं। चीन की दीर्घकालिक योजना प्रणाली, जैसे पंचवर्षीय योजनाएँ, विकास को एक स्पष्ट दिशा देती हैं। इससे नीतियों में निरंतरता बनी रहती है और आर्थिक, सामाजिक तथा तकनीकी क्षेत्रों में संतुलित प्रगति सुनिश्चित होती है। यह दृष्टिकोण उन देशों के लिए एक महत्वपूर्ण सीख है, जहाँ नीतिगत अस्थिरता विकास में बाधा बनती है। गरीबी उन्मूलन के क्षेत्र में चीन की उपलब्धियाँ भी उल्लेखनीय रही हैं। लक्षित योजनाओं, रोजगार सृजन और सामाजिक सुरक्षा उपायों के संयोजन ने व्यापक स्तर पर जीवन स्तर को ऊपर उठाया। इसने यह साबित किया कि यदि विकास रणनीति समावेशी हो, तो उसके परिणाम समाज के हर वर्ग तक पहुँच सकते हैं। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर, चीन का बढ़ता सहयोग- विशेषकर बुनियादी ढांचे, व्यापार और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में—कई विकासशील देशों के लिए नए अवसर लेकर आया है। यह सहयोग अक्सर व्यावहारिक परिणामों पर केंद्रित होता है, जैसे सड़कें, बंदरगाह, ऊर्जा परियोजनाएँ और डिजिटल नेटवर्क, जो सीधे आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देते हैं।
महत्वपूर्ण बात यह है कि चीन स्वयं अपने मॉडल को सार्वभौमिक समाधान के रूप में प्रस्तुत नहीं करता। वह इस बात पर जोर देता है कि हर देश को अपनी परिस्थितियों के अनुसार विकास का मार्ग चुनना चाहिए। यही लचीलापन और विविधता का सम्मान उसके मॉडल को और अधिक स्वीकार्य बनाता है। अंततः, चीन का विकास अनुभव यह दर्शाता है कि तेज़ और स्थायी विकास के लिए किसी एक विचारधारा से बंधे रहना आवश्यक नहीं है। व्यावहारिकता, नीति-प्रयोग, दीर्घकालिक दृष्टि और समावेशिता जैसे तत्व मिलकर एक ऐसा ढाँचा तैयार कर सकते हैं, जो विभिन्न देशों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सके। 21वीं सदी की जटिल चुनौतियों के बीच, चीन का यह मॉडल एक महत्वपूर्ण प्रश्न उठाता है- क्या विकास का भविष्य विचारधारा में है, या परिणामों में? शायद इसका उत्तर उसी संतुलन में छिपा है, जिसे चीन ने अपने अनुभव से प्रदर्शित किया है।
ईरानी उपराष्ट्रपति की चेतावनी से डिप्लोमैटिक हलचल तेज
11 Apr, 2026 04:58 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान/इस्लामाबाद|पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हाई-लेवल वार्ता शुरू हो गई है। यह बातचीत बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि यही तय करेगी कि क्षेत्र में शांति कायम होगी या फिर संघर्ष और बढ़ेगा। इस बीच ईरान के उपराष्ट्रपति का बयान सामने आने के बाद वार्ता पर नया सस्पेंस पैदा हो गया है।
ईरान के उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा आरिफ ने साफ चेतावनी दी है कि अगर बातचीत में इस्राइल फर्स्ट की सोच हावी रही तो कोई समझौता नहीं होगा। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका फर्स्ट के नजरिए से बातचीत होती है तो दोनों देशों और दुनिया के लिए अच्छा समझौता संभव है। यह बयान साफ तौर पर वार्ता की दिशा और शर्तों को लेकर ईरान का सख्त रुख दिखाता है।
शहबाज शरीफ ने बैठक पर क्या कहा?
शहबाज शरीफ ने इस बैठक को मेक या ब्रेक करार दिया है। यह वार्ता 8 अप्रैल को हुए संघर्षविराम के बाद हो रही है। पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि क्या यह बातचीत स्थायी शांति का रास्ता बनाएगी या फिर हालात और बिगड़ेंगे।
कौन-कौन शामिल है इस अहम बातचीत में?
ईरान की ओर से संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद पहुंचा है। वहीं अमेरिकी टीम में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जारेड कुशनर शामिल हैं। इससे साफ है कि दोनों देश इस बातचीत को बेहद गंभीरता से ले रहे हैं।
क्या सुरक्षा इंतजाम दिखा रहे हैं वार्ता की गंभीरता?
इस वार्ता के लिए अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था की गई है। ईरानी प्रतिनिधिमंडल के विमान को पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र में प्रवेश के दौरान लड़ाकू विमानों और विशेष निगरानी प्रणाली की सुरक्षा दी गई। इससे स्पष्ट है कि यह बैठक कितनी संवेदनशील और महत्वपूर्ण है। ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के मुताबिक, बातचीत के लिए समय सीमित है और अगले 48 घंटे बेहद अहम होंगे। इन्हीं घंटों में यह तय होगा कि संघर्षविराम आगे बढ़ेगा या फिर स्थिति फिर से तनावपूर्ण हो जाएगी। अगर समझौता नहीं हुआ तो क्षेत्र में टकराव और बढ़ सकता है।
‘ईरान सिर्फ बातचीत के लिए जिंदा है’, ट्रंप की धमकी से बढ़ा तनाव
11 Apr, 2026 02:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान में आज शांति वार्ता होने जा रही है, जिसमें दोनों पक्ष अपने-अपने मुद्दे उठाएंगे. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वार्ता से पहले ईरान को कड़ी चेतावनी दी है और कहा है कि ईरान के पास कोई विकल्प नहीं है. ट्रंप ने ये भी दावा किया कि ईरान को हर हाल में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलना होगा.
अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान में आज शांति वार्ता होने वाली है. दूसरी तरफ, वार्ता से कुछ घंटे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान को धमकी दी है. ट्रंप ने दावा किया है कि 'ईरान के पास कोई ऑप्शन नहीं है और वो सिर्फ बातचीत के लिए जिंदा है.' उन्होंने होर्मुज खोलने को लेकर भी बड़ा बयान दिया.
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट शेयर किया है. इसमें उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर कहा कि ईरान अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर कंट्रोल करके दुनिया को जबरन वसूली का शिकार बना रहा है.
अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने पोस्ट में लिखा, 'ईरानियों को शायद ये अहसास नहीं है कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों का इस्तेमाल करके दुनिया को डराने के अलावा उनके पास कोई कार्ड नहीं है. वो आज अगर जिंदा हैं, तो सिर्फ बातचीत करने के लिए.'
शांति वार्ता नाकाम होने पर फिर शुरू हो सकती है जंग
बता दें कि एक अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस शांति वार्ता के लिए अपनी टीम के साथ इस्लामाबाद पहुंचे हैं. ट्रंप ने 'न्यूयॉर्क पोस्ट' को दिए इंटरव्यू में ये इशारा किया है कि अगर ये शांति वार्ता नाकाम साबित होती है, तो ईरान पर फिर से हमले शुरू हो सकते हैं. उन्होंने बताया कि अमेरिकी युद्धपोतों को बेहतरीन गोला-बारूद से लैस कर दिया गया है और वो हमलों के लिए तैयार हैं.
अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि ईरान की सहमति हो या न हो, वाशिंगटन जल्द ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोल देगा. उन्होंने कहा, 'ये आसान नहीं होगा. मैं बस इतना कहूंगा कि हम इसे जल्द ही खोल देंगे.'ट्रंप ने इस दौरान ईरान को लेकर कहा, 'हम ऐसे लोगों से निपट रहे हैं जिनके बारे में हमें नहीं पता कि वे सच बोलते हैं या नहीं. हमारे सामने वो कहते हैं कि वो परमाणु हथियार खत्म कर रहे हैं और फिर प्रेस में जाकर कहते हैं कि वो यूरेनियम संवर्धन करना चाहते हैं.'ट्रंप के मुताबिक, ईरान के लोग लड़ने से बेहतर फेक न्यूज मीडिया और पब्लिक रिलेशंस संभालने में माहिर हैं. बता दें कि ईरान-अमेरिका के बीच होने वाली शांति वार्ता में पाकिस्तान मध्यस्थता कर रहा है. इस्लामाबाद में आज ईरानी-अमेरिकी अधिकारी आमने-सामने होंगे और अपना-अपना पक्ष रखेंगे.
पाकिस्तानी मंत्री ने इजरायल को कहा कैंसर, नेतन्याहू ने हड़काया तो डिलीट कर दी पोस्ट
11 Apr, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेलअवीव। अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली महत्वपूर्ण शांति वार्ता से ठीक पहले पाकिस्तान ने एक नया अंतरराष्ट्रीय विवाद मोल ले लिया है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के एक जहरीले बयान ने कूटनीतिक गलियारों में आग लगा दी है। आसिफ ने इजरायल को मानवता के लिए अभिशाप और कैंसर करार देते हुए लेबनान में जारी सैन्य कार्रवाई को नरसंहार बताया। उन्होंने सोशल मीडिया पर यह टिप्पणी तब की जब इस्लामाबाद शांति वार्ता की मेजबानी की तैयारी कर रहा था।
इजरायल ने इस पर बिजली की गति से तीखी प्रतिक्रिया दी है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने साफ तौर पर कहा कि एक शांति मध्यस्थ होने का दावा करने वाले देश के मंत्री का ऐसा बयान अत्यंत आपत्तिजनक और अस्वीकार्य है। इजरायल ने चेतावनी दी कि उसके विनाश की मांग करना किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इजरायली विदेश मंत्री गिदोन सार ने भी इसे खुला यहूदी विरोध बताते हुए कड़ी निंदा की। बढ़ते दबाव के बाद हालांकि ख्वाजा आसिफ ने अपना पोस्ट डिलीट कर दिया, लेकिन तीर कमान से निकल चुका था। इस विवाद का सीधा असर शांति वार्ता पर पड़ता दिख रहा है। एक तरफ इस्लामाबाद को छावनी में बदल दिया गया है, वहीं दूसरी तरफ खबरें आ रही हैं कि ईरान इस बैठक में शामिल होने के लिए नहीं पहुंचा है। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान का यह रवैया उसे इजरायल की हिट लिस्ट में ला सकता है। अगर पाकिस्तान से इजरायल के विनाश की आवाजें इसी तरह उठती रहीं, तो वह अगला निशाना बन सकता है। फिलहाल, शांति की मेज बिछने से पहले ही कड़वाहट के बीज बो दिए गए हैं।
म्यांमार के नए राष्ट्रपति ने गिनाईं चुनौतियां, दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के समूह से रिश्ते सुधारने पर जोर
11 Apr, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नेपीडॉ । म्यांमार के नव-शपथ ग्रहण किए राष्ट्रपति मिन आंग ह्लाइंग ने अपने पहले संबोधन में देश के सामने मौजूद चुनौतियों को स्वीकार करते हुए लोकतंत्र और शांति को सरकार की प्राथमिकता बताया। संसद में दिए गए लगभग 20 मिनट के भाषण में उन्होंने कहा कि म्यांमार लोकतंत्र की दिशा में आगे बढ़ रहा है, लेकिन अभी कई बाधाओं को पार करना बाकी है।
उन्होंने कहा कि नई सरकार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की स्थिति मजबूत करने के लिए काम करेगी और दक्षिण-पूर्व एशियाई संगठन (एसोसिएशन ऑफ साउथ ईस्ट एशियन नेशंस) के साथ संबंधों को सामान्य बनाने का प्रयास करेगी। गौरतलब है कि 2021 में सैन्य तख्तापलट और उसके बाद की कार्रवाई के चलते दक्षिण-पूर्व एशियाई संगठन ने म्यांमार के सैन्य नेतृत्व को अपने सम्मेलनों से दूर कर दिया था। मिन आंग ह्लाइंग ने कहा कि उनकी सरकार विदेशी निवेश को बढ़ावा देने, कृषि क्षेत्र के विकास और दीर्घकालिक रणनीतिक योजनाओं पर ध्यान देगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार लोकतंत्र और संघीय ढांचे पर आधारित रोडमैप को लागू करेगी। उनके इस संबोधन को देश में स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की दिशा में एक अहम संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
वारदात को अंजाम देकर पैदल फरार हुआ आरोपी
11 Apr, 2026 10:28 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रोहतक। सुखपुरा चौक के नजदीक शनिवार सुबह करीब साढ़े नौ बजे सीमेंट व सरिया व्यापारी प्रवीण सैनी को एक युवक गोली मारकर भाग गया। हमलावर ने तीन-चार फायर किए, हालांकि प्रवीण को एक गोली लगी है। उन्हें पीजीआई के ट्रामा सेंटर में दाखिल कराया गया है। पुलिस के मुताबिक प्रारंभिक जानकारी के अनुसार पता चला है प्रेम नगर चौक निवासी प्रवीण सैनी (32) ने गोहाना रोड पर सुखपुरा चौक से दलाल भवन के सामने राजलक्ष्मी सीमेंट एवं सरिय की दुकान कर रखी है। सुबह करीब साढ़े नौ बजे प्रवीण दुकान पर बैठा हुआ था। अज्ञात युवक पैदल आया और तीन-चार गोलियां फायर करके भाग गया। पता चला है कि प्रवीण को एक गोली लगी है। फायरिंग की आवाज सुनकर आसपास के लोग एकत्रित हो गए और घायल को तत्कालीन पीजीआई के ट्रामा सेंटर में दाखिल कराया। दिनदहाड़े हुई वारदात से शहर में कानून व्यवस्था पर फिर सवाल उठ गया है। पुरानी सब्जी मंडी थाना पुलिस वारदात की जांच कर रही है। हमलावर को पकड़ने के लिए सीआईए प्रथम, द्वितीय, स्पेशल डिटेक्टिव स्टाफ व पुरानी सब्जी मंडी थाना पुलिस दबिश दे रही हैं। परिजनों का कहना है कि उनको नहीं पता किसने और प्रवीण सैनी को गोली मारी है।
लगातार दूसरे दिन वारदात, एक माह बाद फिर सक्रिय हुए अपराधी
फरवरी माह में लगातार व्यापारियों रंगदारी मांगने से लेकर हत्या की लगातार वारदात हुई। पोलंगी गांव में दो भाईयों की हत्या कर दी गई। खेड़ी साध के पूर्व प्रॉपर्टी डीलर सत्यवान की हत्या की गई। इसके अलावा रोहित गोदारा गैंग के नाम से कई व्यापारियों से विदेश से कॉल करके धमकी देकर रंगदारी मांगी गई। मार्च माह में कोई बड़ी वारदात नहीं हुई। अब अप्रैल माह का पहला सप्ताह तो शांत रहा, लेकिन भालौठ गांव में रंजिश के चलते जमानत पर आए युवक विकास उर्फ नारद की वीरवार की गोली मारकर हत्या कर दी गई। अब शनिवार को दिनदहाड़े सीमेंट व्यापारी पर फायरिंग से साफ है कि अपराधियों में पुलिस का खौफ नहीं है।
नए पुलिस कप्तान गौरव राजपुरोहित के लिए चुनौती
प्रदेश सरकार ने एसपी सुरेंद्र सिंह भौरिया की जगह गुरुग्राम में डीसीपी रहे आईपीएस गौरव राजपुरोहित को रोहतक का नया एसपी लगाया है। उनके कार्यभार संभालने के एक सप्ताह के अंदर फायरिंग की यह दूसरी वारदात है।
सऊदी एयरलाइंस ने उड़ान सेवाएं फिर शुरू कीं
11 Apr, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जेद्दा । क्षेत्रीय तनाव के चलते छह सप्ताह से अधिक समय तक उड़ान सेवाएं बंद रखने के बाद सऊदी अरब की राष्ट्रीय एयरलाइन सऊदी एयरलाइंस ने आंशिक रूप से संचालन फिर शुरू करने का ऐलान किया है। एयरलाइन शनिवार, 11 अप्रैल से जेद्दा से दुबई, अबू धाबी और अम्मान के लिए सीमित “विशेष उड़ानें” संचालित करेगी।
सऊदी एयरलाइन के अनुसार, यह कदम मौजूदा संवेदनशील हालात के बीच धीरे-धीरे सामान्य संचालन की ओर बढ़ने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। नए शेड्यूल के तहत जेद्दा-दुबई के बीच उड़ान संचालित होंगी। वहीं, जेद्दा-अबू धाबी के लिए भी उड़ानें शरू की जाएंगी। इसके अलावा जेद्दा-अम्मान के बीच उड़ानें संचालित होंगी।
लांधड़ी-चिकनवास और भावदीन टोल पर धरना
11 Apr, 2026 09:19 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हरियाणा। संयुक्त किसान मोर्चा ने नेशनल हाइवे जाम कर दिया है। जाम के बाद किसान धरना देकर विरोध जता रहे हैं। फसल खरीद को लेकर किसान विरोधी फैसलों के विरोध में किसानों ने शनिवार को सुबह 11 से 3 बजे तक लांधड़ी चिकनवास टोल के पास रोड़ जाम का एलान किया है। जाम से निपटने के लिए पुलिस प्रशासन ने 250 कर्मचारियों को तैनात किया है। हिसार- सिरसा हाइवे पर वाहनों को बरवाला रुट पर डायवर्ट किया गया है। संयुक्त किसान मोर्चा संयोजक सरदानंद की अगुवाई में जाम का एलान किया गया है। उन्होंने कहा कि फसल खरीद को लेकर की थोंपी गई शर्तों को किसी सूरत में नहीं मानेंगे। गेट पास और बायोमेट्रिक की जबरदस्ती बंद की जाए। किसान सरकार के नए खरीद नियमों के खिलाफ हैं। गेट पास , बायोमेट्रिक, ट्रैक्टर नाम प्लेट को लेकर किसानों को बहुत दिक्कतें आएंगी। मंडियों के बाहर लंबी लाइनें लग जाएंगी।
जब सरकार के पास किसान का मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल के जरिए पूरा ब्योरा है तो अब जबरदस्ती की शर्त लगाकर क्यों परेशान किया जा रहा है। सरकार कागजी जाल में फंसा कर उसे कुचल रही है। किसान एक ट्राली के साथ बायोमीट्रिक लगाने मंडी में आए या अपनी बची हुई फसल को बचाने का काम करे। किसान अपनी जमीन किसी को बटाई पर देता है, वह किराए पर किसी तीसरे व्यक्ति का ट्रैक्टर लेकर आता है तो तीनों का मिलान कैसे होगा। किसान नेता शमशेर नंबरदार ने बताया कि संयुक्त मोर्चा के आदेश अनुसार अगला फैसला लिया जाएगा।
पुलिस अधीक्षक सिद्धांत जैन ने बताया कि पुलिस के करीब 200 कर्मचारी लांधड़ी व मय्यड़ टोल पर तैनात किए गए हैं। एनएच पर मय्यड़ से अग्रोहा के बीच सभी प्रमुख चौक पर पुलिस बल तैनात है। फायर ब्रिगेड , एंबलुेंस को भी अलर्ट पर रखा गया है। एक इंस्पेक्टर के साथ 71 पुलिस कर्मियों को रिजर्व में रखा गया है। किसी तरह की शिकायत मिलने पर यह रिजर्व टीम तुरंत मौके पर भेजी जाएगी। चिकनवास, अग्रोहा चौक पर भी पुलिस बल तैनात रहेगा। शहर में पुलिस के नाके लगाए गए हैं।
75 हजार रुपये प्रति एकड़ ठेके पर ली थी जमीन
वहीं, शुक्रवार को सिरसा के गांव मीरपुर में 26 एकड़ गेहूं की फसल आग लगने से पूरी तरह नष्ट हो गई। प्रभावित किसान वीरेंद्र कुमार, ललित मोहन और अमित चंद का आरोप है कि शुक्रवार दोपहर करीब 12 बजे रेलवे ट्रैक से गुजर रही ट्रेन से किसी व्यक्ति द्वारा बीड़ी या जलती वस्तु फेंकने के कारण आग लगी। तेज हवा के चलते आग तेजी से खेतों में फैल गई और देखते ही देखते पकी फसल को चपेट में ले लिया। सूचना के बाद दमकल की पांच गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और किसानों के सहयोग से कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया लेकिन तब तक 26 एकड़ फसल जलकर राख हो चुकी थी। महिलाओं ने बताया कि यह जमीन उन्होंने 75 हजार रुपये प्रति एकड़ ठेके पर ली थी। चार एकड़ फसल ही बच पाई है। उन्होंने सरकार से आर्थिक मदद की गुहार लगाई है।
ट्रंप ने ईरान को फिर दी धमकी, कहा- होर्मुज में टैक्स वसूली बंद करो वरना अंजाम भुगतो
11 Apr, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान की धमकी दी है। उन्होंने कहा कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य पर टैक्स लेना तत्काल बंद करे, नहीं तो अंजाम भुगतने को तैयार रहे। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर तेहरान को ललकारते हुए कहा कि ईरान तेल टैंकरों के आवागमन में बाधा डाल रहा है और अपमानजनक तरीके से शुल्क वसूल रहा है। ट्रंप के मुताबिक, यह व्यवहार युद्धविराम समझौते का हिस्सा नहीं है और इसे तुरंत बंद किया जाना चाहिए।
इस बयान ने इस्लामाबाद में होने वाली शांति वार्ता से पहले ही माहौल को गरमा दिया है। एक तरफ ट्रंप ईरान की घेराबंदी कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ तेहरान ने इजरायल पर लेबनान में हमले कर समझौते की धज्जियां उड़ाने का आरोप लगाया है। ईरान का कहना है कि लेबनान भी सीजफायर का हिस्सा है, जबकि अमेरिका और इजरायल ने साफ कर दिया है कि हिज्बुल्लाह के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दो टूक कहा है कि लेबनान में कोई युद्धविराम नहीं है और जब तक सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होती, वे रुकने वाले नहीं हैं। क्षेत्रीय समीकरण अब और उलझते जा रहे हैं। नेतन्याहू ने अपनी कैबिनेट को निर्देश दिया है कि वे लेबनान सरकार से सीधे बातचीत करें ताकि हिज्बुल्लाह को निशस्त्र किया जा सके और एक ऐतिहासिक शांति समझौता हो सके। हालांकि, ईरान के अड़ियल रुख और ट्रंप की टैक्स चेतावनी ने कूटनीतिक प्रयासों को जटिल बना दिया है। यदि होर्मुज में ईरान ने टैंकरों को रोकना जारी रखा और इजरायल ने लेबनान पर हमले बंद नहीं किए, तो यह नाजुक सीजफायर किसी भी वक्त एक बड़े युद्ध में तब्दील हो सकता है।
“इतिहास रचकर लौटा NASA Artemis I Mission, चंद्रमा की परिक्रमा के बाद सुरक्षित वापसी”
11 Apr, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नासा का आर्टेमिस चंद्रमा की परिक्रमा कर इतिहास रच वापस पृथ्वी पर लौट आया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस मिशन के चार अंतरिक्ष यात्री यों ने शुक्रवार शाम को प्रशांत महासागर में स्प्लेश डाउन किया और चंद्रमा के चारों ओर की गई परिक्रमा खत्म करते हुए पृथ्वी पर सुरक्षित वापस लौटे।
इस मिशन में कमांडर रीड वाइज मैन, पायलट विक्टर ग्लोवर, मिशन स्पेशलिस्ट क्रिस्टिना कोच और जेरेमी हैंसन ने अपनी 10 दिनों की ऐतिहासिक यात्रा को पूरा किया। इनका स्प्लैशडाउन सैन डिएगो 40 से 60 मील दूर प्रशांत महासागर में हुआ। यहां रिकवरी टीम पहले से मौजूद थी।
क्या रही उपलब्धि
आर्टेमिस ll की उपलब्धियों की बात करें तो पिछले 53 वर्षों में यह मनुष्यों की चंद्रमा पहली यात्रा थी। इससे पहले 1972 में अपोलो के साथ ये किया गया था। इस मिशन के शामिल क्रू ने चंद्रमा के दूसरे हिस्से को करीब से देखा और दूर की यात्रा में मानव इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड कायम किया। यह यात्रा लगभग 252756 मिल की थी। इस दौरान चंद्रमा की अलग-अलग तस्वीर ली सूर्य ग्रहण का नजारा भी देखा और कुछ वैज्ञानिक का अवलोकन किया।
कैसे हुई वापसी
नासा द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक स्पेसक्राफ्ट वापसी के समय जब वायुमंडल में प्रवेश कर रहा था। तब 32 गुना ध्वनि की गति से आगे बढ़ा और हजारों डिग्री तापमान झेलते हुए पैराशूट की मदद से लगभग 17 मील प्रति घंटे की रफ्तार से पानी में उतरा। इस मिशन को नासा के आर्टेमिस प्रोग्राम का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया जा रहा है। इसके जरिए चंद्रमा पर मानव बेस स्थापित करना और मंगल ग्रह पर मानव मिशन भेजना है। आर्टेमिस ll के जरिए चंद्रमा की परिक्रमा सफलतापूर्वक कर ली गई है अब आर्टेमिस lll के जरिए चंद्रमा की सतह कर उतरने की योजना है।
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