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नासा ने टाल दिया अपना मून मिशन, अब मार्च में नहीं होगी लॉन्चिंग, जानिए क्या है वजह ?
22 Feb, 2026 08:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (US space agency NASA) ने अपने मून मिशन आर्टेमिस-2 (Moon Mission Artemis-2) की लॉन्चिंग को फिलहाल टाल दिया है। मिशन मार्च में शुरू होने वाला था, लेकिन अब रॉकेट और यान दोनों को लॉन्च पैड से हटा लिया गया है। नासा ने बताया कि इस फैसले का कारण रॉकेट में आई तकनीकी खराबी (Technical Fault) है। विशेष रूप से, स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) में हीलियम लीक की समस्या आई थी, जिसके कारण मिशन को स्थगित किया गया है। नासा के चीफ जेरेड आइजैकमैन ने शनिवार को बताया कि उनकी टीम के लिए यह निर्णय निराशाजनक था, क्योंकि मिशन के लिए काफी मेहनत की गई थी। उन्होंने कहा, “हम महत्वपूर्ण मिशनों को बहुत सावधानी से संचालित करते हैं। 1960 के दशक में जब नासा ने इतिहास रचा था, तब भी कई बाधाएं आई थीं, और मिशन में देरी हुई थी।”
हीलियम का रॉकेट सिस्टम में महत्व
रॉकेट सिस्टम में हीलियम का अहम रोल होता है। यह प्रोपेलेंट टैंक में प्रेशर बनाए रखता है और इंजन को संचालित करने में मदद करता है। अब एलएलएस रॉकेट और ओरियन अंतरिक्ष यान को मरम्मत के लिए व्हीकल असेंबली बिल्डिंग में भेजा जाएगा।
नासा का मिशन प्लान
नासा का उद्देश्य आर्टेमिस-2 मिशन के दौरान अंतरिक्ष-यात्रियों को शून्य-गुरुत्वाकर्षण में एक छोटे से केबिन में काम करने का अनुभव कराना था। मिशन के दौरान, अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन की तुलना में पृथ्वी की निचली ऑर्बिट में रेडिएशन का स्तर अधिक होगा, लेकिन यह सुरक्षित रहेगा। पृथ्वी पर लौटने के बाद, अंतरिक्ष-यात्री एक ऊबड़-खाबड़ वायुमंडलीय वापसी का अनुभव करेंगे और अमेरिका के पश्चिमी तट के पास प्रशांत महासागर में लैंड करेंगे।
यह मिशन चांद पर लैंडिंग के लिए नहीं था। नासा का कहना है कि आर्टेमिस-2 का मुख्य उद्देश्य आर्टेमिस-3 मिशन के लिए अंतरिक्ष-यात्रियों की चांद पर लैंडिंग की तैयारी करना था। आर्टेमिस-3 मिशन में, नासा का प्लान है कि अंतरिक्ष-यात्री चांद के दक्षिणी ध्रुव पर जाएं, और इसके बाद चांद पर मानवों की निरंतर उपस्थिति स्थापित करने की योजना है।
आर्टेमिस-4 और आर्टेमिस-5 मिशन के तहत चांद के चारों ओर एक स्पेस स्टेशन “गेटवे” का निर्माण किया जाएगा। इसके बाद, चांद पर और लैंडिंग होगी, और गेटवे में अतिरिक्त हिस्से जोड़े जाएंगे। इस कार्यक्रम का उद्देश्य चांद पर स्थायी मानव उपस्थिति बनाना है, जैसा कि नासा ने 1960 और 1970 के दशक के अपोलो कार्यक्रम के दौरान किया था।
अफगानिस्तान पर पाकिस्तान का हवाई हमला: महिलाओं और बच्चों समेत 20 लोगों की जान गई
22 Feb, 2026 02:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
काबुल: पाकिस्तानी एयर फोर्स ने अफगानिस्तान के पक्तिका प्रांत के बरमल जिले में एक धार्मिक मदरसे को निशाना बनाकर हमला किया. टोलो न्यूज ने सूत्रों के हवाले से बताया. टोलो न्यूज के अनुसार पाकिस्तानी जेट विमानों ने नंगरहार प्रांत के खोगयानी जिले में भी कई हवाई हमले किए.
अफगान सरकार के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने रविवार को एक्स पर पोस्ट किया कि पाकिस्तान ने नंगरहार और पक्तिका प्रांतों में हमारे आम नागरिकों पर बमबारी की. इसमें महिलाओं और बच्चों समेत कम से कम 20 लोग हताहत हुए.
टोलो न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान ने शनिवार से पक्तिका के बरमल और अरगुन के साथ-साथ नंगरहार के खोगयानी, बहसोद और घनी खेल जिलों में कई हमले किए. पाकिस्तानी मीडिया सोर्स ने भी इस्लामाबाद के हवाई हमले की पुष्टि की. उन्होंने बताया कि ये हमले पाकिस्तान-अफगानिस्तान बॉर्डर पर कथित आतंकवादी शिविरों पर फोकस कर किए गए.
जियो न्यूज ने पाकिस्तान के सूचना मंत्रालय का हवाला देते हुए बताया कि हमलों में फितना अल ख्वारिज (FAK), उसके सहयोगी संगठनों और दाएश खोरासान प्रांत (DKP) के सात कैंप और ठिकानों को निशाना बनाया गया. साथ ही दावा किया गया कि यह कार्रवाई रमजान के दौरान इस्लामाबाद, बाजौर और बन्नू में हुए हाल के आत्मघाती हमलों के जवाब में सही और सटीक तरीके से की गई.
जियो न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, मिनिस्ट्री ने आरोप लगाया कि सुसाइड बॉम्बिंग अफगानिस्तान के लीडरशिप और हैंडलर्स के कहने पर किए गए थे और इसकी जिम्मेदारी तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और दाएश से जुड़े लोगों ने ली थी.
इस्लामाबाद के इस दावे के बावजूद कि उसने बार-बार अफगान तालिबान से आतंकवादी ग्रुप को अफगान इलाके का इस्तेमाल करने से रोकने की अपील की है, पाकिस्तान खुद लंबे समय से इस इलाके में काम कर रहे अलग-अलग आतंकवादी संगठनों को सुरक्षित पनाहगाह और लॉजिस्टिक सपोर्ट देने के लिए अंतरराष्ट्रीय जांच का सामना कर रहा है.
अपने बयान में पाकिस्तान ने कहा कि उसे उम्मीद है कि अंतरिम अफगान सरकार अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करेगी और पाकिस्तान के खिलाफ अपनी जमीन का इस्तेमाल होने से रोकेगी.
इसने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी कहा कि वे अफगान अधिकारियों पर दोहा समझौते के तहत किए गए वादों को पूरा करने के लिए दबाव डालें. डॉन के मुताबिक, पाकिस्तान के विदेश ऑफिस ने गुरुवार को कहा कि बाजौर में एक जानलेवा हमले के बाद बॉर्डर पार तनाव बढ़ने के बीच पाकिस्तान अपने नागरिकों की जान बचाने के लिए अफगानिस्तान को टारगेट करने का अधिकार रखता है.
डॉन के मुताबिक पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में कहा, 'पाकिस्तान पूरी तरह से मांग करता है कि अफगान क्षेत्र का इस्तेमाल पाकिस्तान के अंदर आतंकवाद के लिए नहीं किया जाना चाहिए. इसलिए जब तक यह मांग पूरी नहीं होती धैर्य रखते हुए सभी विकल्प खुले रहेंगे.
भारतीय मूल के धुरंधर ने निकाली ट्रंप की हेकड़ी, नील कत्याल के तर्कों से पलट गया फैसला
22 Feb, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन।अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक निर्णय सुनाते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए व्यापक व्यापारिक शुल्कों (टैरिफ) को असंवैधानिक करार देकर रद्द कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि राष्ट्रपति ने कांग्रेस की अनिवार्य मंजूरी के बिना इतने बड़े पैमाने पर कर लगाकर अपनी संवैधानिक और कानूनी सीमाओं का उल्लंघन किया है। इस कानूनी लड़ाई के केंद्र में भारतीय मूल के अमेरिकी वकील नील कत्याल रहे, जिन्होंने राष्ट्रपति की शक्तियों को सीधी चुनौती दी। पूर्व कार्यवाहक सॉलिसिटर जनरल नील कत्याल ने अदालत में तर्क दिया कि ट्रंप ने 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट का दुरुपयोग करते हुए लगभग हर व्यापारिक साझेदार देश से आने वाले सामान पर अनुचित और अवैध टैक्स थोप दिया था। फैसले के बाद कत्याल ने इसे संविधान की जीत बताते हुए कहा कि अमेरिका में राष्ट्रपति शक्तिशाली हो सकते हैं, लेकिन संविधान सर्वोपरि है और कर लगाने का अधिकार केवल जनता द्वारा चुनी गई कांग्रेस के पास है।
कत्याल के साथ इस महत्वपूर्ण मामले में एक और भारतीय-अमेरिकी कानूनी विशेषज्ञ प्रतीक शाह भी शामिल थे, जो एकिन गंप में सुप्रीम कोर्ट मामलों के प्रमुख हैं। शाह ने लर्निंग रिसोर्सेज और हैंड टु माइंड जैसी शैक्षणिक खिलौना कंपनियों का प्रतिनिधित्व करते हुए तर्क दिया कि राष्ट्रपति की कार्यकारी शक्तियां असीमित नहीं हो सकतीं। नील कत्याल अमेरिका के कानूनी जगत का एक ऐसा नाम हैं जिन्होंने अब तक सुप्रीम कोर्ट में 50 से अधिक मामलों में पैरवी की है। शिकागो में भारतीय प्रवासी माता-पिता के घर जन्मे कत्याल ने येल लॉ स्कूल से शिक्षा प्राप्त की और प्रसिद्ध विशेषज्ञ अखिल अमर के मार्गदर्शन में संवैधानिक बारीकियां सीखीं। उनकी पहचान एक ऐसे वकील के रूप में रही है जो राष्ट्रपति की विवादास्पद नीतियों, जैसे मुस्लिम देशों पर ट्रैवल बैन और तेजी से डिपोर्टेशन की कोशिशों के खिलाफ अदालत में डटकर खड़े हुए हैं। उनके परिवार का भी अकादमिक और कानूनी जगत में गहरा दखल है; उनकी बहन सोनिया कत्याल कानून की प्रोफेसर हैं, जबकि उनके गुरु अखिल अमर और उनके भाई विक्रम अमर कानून के क्षेत्र में प्रतिष्ठित नाम हैं।
अदालत के इस फैसले पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने इस निर्णय को बेतुका करार देते हुए उन न्यायाधीशों की आलोचना की जिन्होंने टैरिफ के खिलाफ मतदान किया। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि वे इस कानूनी बाधा से पीछे हटने वाले नहीं हैं और उन्होंने राजस्व जुटाने के लिए एक नई और आक्रामक रणनीति की घोषणा कर दी है। कोर्ट के फैसले के तुरंत बाद ट्रंप ने सभी देशों से आयात होने वाले सामान पर 10 फीसदी का नया वैश्विक टैरिफ लगाने वाले दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए। उन्होंने घोषणा की कि यह नया टैरिफ तत्काल प्रभाव से लागू होगा, जो उनके अमेरिका फर्स्ट व्यापार एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए अपरिहार्य है। ट्रंप के इस कदम ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय व्यापार बाजार और कानूनी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है, जिससे आने वाले समय में एक नए कानूनी और कूटनीतिक टकराव के संकेत मिल रहे हैं।
कतर और बहरीन के मिलिट्री बेस खाली कर रही अमेरिकी सेना? सैकड़ों सैनिकों को निकाला
22 Feb, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। ईरान और अमेरिका के बीच गहराते तनाव के बीच मध्य पूर्व के सामरिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा रिपोर्टों के अनुसार, खाड़ी क्षेत्र में संभावित सैन्य कार्रवाई की आहट अब जमीन पर भी दिखाई देने लगी है। कतर के अल उदैद एयर बेस और बहरीन में स्थित महत्वपूर्ण अमेरिकी सैन्य ठिकानों से सैकड़ों सैनिकों को बाहर निकाला गया है। बहरीन, जो अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े (फिफ्थ फ्लीट) का मुख्य केंद्र है, वहां से सैनिकों की यह आवाजाही पेंटागन द्वारा एहतियाती कदम बताई जा रही है। हाल ही में सीरिया से भी अमेरिकी सैन्य टुकड़ियों की वापसी की खबरें आई थीं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि अमेरिका ईरान के विरुद्ध किसी भी संभावित टकराव से पहले अपने संसाधनों को सुरक्षित और पुनर्गठित कर रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस स्थिति पर कड़ा रुख अपनाते हुए संकेत दिया है कि वे ईरान पर सीमित सैन्य हमले के विकल्प को पूरी तरह खारिज नहीं कर रहे हैं। एक हालिया बयान में उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि परमाणु कार्यक्रम पर निर्धारित समय सीमा के भीतर समझौता नहीं होता है, तो परिणाम गंभीर हो सकते हैं। कुछ रणनीतिक रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि यदि सैन्य कार्रवाई होती है, तो ईरान के शीर्ष नेतृत्व को सीधे तौर पर लक्षित किया जा सकता है। ट्रंप प्रशासन ने ईरान को अपनी नीतियों में सुधार के लिए 10 से 15 दिन का समय दिया है, जिसे एक अंतिम चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।
दूसरी ओर, ईरान ने इस दबाव के बीच कूटनीति का रास्ता भी खुला रखा है। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने घोषणा की है कि उनका देश अगले दो से तीन दिनों में परमाणु समझौते का एक नया मसौदा (ड्राफ्ट) तैयार कर लेगा। अराघची ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया को दिए साक्षात्कार में संतुलित रुख अपनाते हुए कहा कि ईरान शांति और युद्ध, दोनों ही स्थितियों के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने उम्मीद जताई कि एक सप्ताह के भीतर इस मसौदे पर गंभीर बातचीत शुरू हो सकती है, हालांकि उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि ईरान अपने राष्ट्रीय हितों और संप्रभुता से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेगा। वर्तमान में खाड़ी क्षेत्र एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहाँ एक तरफ भारी सैन्य लामबंदी हो रही है और दूसरी तरफ संकट टालने के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी हैं।
पाकिस्तान में 3.9 की तीव्रता का भूकंप, जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं
22 Feb, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। पाकिस्तान में शनिवार की सुबह रिक्टर पैमाने पर 3.9 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया है। यह जानकारी भारत के नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (एनसीएस) ने दी है। एनसीएस के मुताबिक भूकंप का केंद्र जमीन से करीब 10 किलोमीटर नीचे दर्ज की गई। 3.9 तीव्रता का भूकंप आमतौर पर हल्के झटकों की श्रेणी में आता है। ऐसी तीव्रता के भूकंप से सामान्यतः बड़े पैमाने पर नुकसान की संभावना कम रहती है, हालांकि स्थानीय स्तर पर लोगों को झटके महसूस होते हैं। फिलहाल किसी तरह के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है। स्थानीय प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान भूकंप के नजरिए से संवेदनशील क्षेत्र में स्थित है, जहां समय-समय पर हल्के और मध्यम तीव्रता के भूकंप आते रहते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि 10 किमी की गहराई पर आए भूकंप के झटके सतह पर ज्यादा स्पष्ट रूप से महसूस हो सकते हैं, लेकिन तीव्रता कम होने के कारण बड़े नुकसान की आशंका कम रहती है। पाकिस्तान को दुनिया के सबसे अधिक भूकंप प्रभावित देशों में गिना जाता है। इसकी मुख्य वजह इसका भौगोलिक क्षेत्र है। यह उस क्षेत्र में स्थित है जहां इंडियन टेक्टोनिक प्लेट और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेट आपस में टकराती हैं। इन प्लेटों की लगातार गति और दबाव के कारण इस इलाके में भूकंपीय गतिविधियां बार-बार होती रहती हैं।
बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा और गिलगित-बाल्टिस्तान जैसे क्षेत्र प्रमुख फॉल्ट लाइनों के पास स्थित हैं। इन इलाकों में जमीन के नीचे प्लेटों की हलचल ज्यादा सक्रिय रहती है, जिससे यहां बड़े और विनाशकारी भूकंप आने का खतरा ज्यादा रहता है। इतिहास में बलूचिस्तान और उत्तरी पाकिस्तान कई भीषण भूकंप झेल चुके हैं, जिनसे भारी जान-माल का नुकसान हुआ था।
अमेरिका के टॉयमेकर ने टैरिफ को लेकर सु्प्रीम कोर्ट में ट्रंप को दी मात!
22 Feb, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा लगाए गए व्यापक आपातकालीन टैरिफ को अवैध घोषित कर दिया है। इस फैसले के बाद सबसे ज्यादा जिस नाम की चर्चा है वह है, रिक वोल्डनबर्ग, जो ट्रंप की आक्रामक टैरिफ नीति के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में पहुंचे। बता दें टैरिफ की मार और सप्लाई चेन की अनिश्चितता के बीच, लर्निंग रिसोर्सेज के सीईओ रिक वोल्डनबर्ग ने इस कानूनी लड़ाई का नेतृत्व किया है। रिक वोल्डनबर्ग ने ट्रंप प्रशासन के आईईईपीए कानून के इस्तेमाल को चुनौती देते हुए, तर्क दिया कि ये नीतियां बड़ी कंपनियों के लिए नहीं बल्कि उन मध्यम वर्गीय उद्योगों के लिए काल हैं जो पीढ़ियों से चल रहे हैं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप की टैरिफ को चुनौती देने वाले रिक वोल्डनबर्ग शिकागो में एक पारिवारिक टॉय कंपनी चलाते हैं। ट्रंप प्रशासन के लिबरेशन डे टैरिफ की घोषणा के कुछ ही दिनों के अंदर उन्होंने वकीलों से संपर्क कर ट्रंप के खिलाफ मुकदमा दायर किया था। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से उनको जीत मिली है और ट्रंप को हार। उन्होंने कोर्ट में तर्क दिया था कि टैरिफ छोटे और मिड-साइज बिजनेस को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा रहे हैं, जबकि बड़ी कंपनियां लॉबिंग और संसाधनों के दम पर खुद को बचा लेती हैं।
वोल्डनबर्ग की कंपनी अपने ज्यादातर एजुकेशनल खिलौने एशिया में बनाती है। ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए आईईईपीए कानून के तहत टैरिफ के कारण लागत में अचानक बढ़ोत्तरी हो गई और कंपनी को नुकसान का सामना करना पड़ा, जिसके चलते वोल्डनबर्ग ने या वेयरहाउस प्रोजेक्ट नई भर्ती रोक दी। यही नहीं उनकी कंपनी को मार्केटिंग बजट में भी कटौती करनी पड़ी। ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ के बाद उन्हें इस बात का एहसास हुआ कि कंपनी छोटी हो जाएगी और कम कमाई करेगी, और वही हुआ भी।
वोल्डनबर्ग की कंपनी पर सबसे ज्यादा असर लोकप्रिय प्रोडक्ट पर पड़ा। टैरिफ शुल्क के उतार-चढ़ाव के बीच उनकी कंपनी को कभी भारत शरणार्थियों की तरह अलग-अलग देशों में उत्पादन शिफ्ट करने को मजबूर हो गई थी। यह समस्या सिर्फ उनकी ही कंपनी के लिए नहीं बल्कि अन्य अमेरिकी कंपनियों के लिए भी थी, लेकिन बड़े अमेरिकी कॉरपोरेट्स इस कानूनी लड़ाई से दूरी बनाए रहे। एक्सपर्ट के मुताबिक बड़ी कंपनियों के पास कैश रिजर्व और सप्लाई चेन मैनेजमेंट की क्षमता होती है, इसलिए वे सीधे कोर्ट जाने के बजाय लॉबिंग पर जोर देती हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक वोल्डनबर्ग के साथ दर्जनों छोटे व्यवसाय और कुछ गैर-लाभकारी संगठन खड़े हुए। कोर्ट में कंपनियों का तर्क था कि 1977 का आईईईपीए कानून राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने की अनुमति नहीं देता। अमेरिका की निचली अदालतों ने भी ट्रंप की टैरिफ को कानून का उल्लंघन बताया था।
SC के फैसले के खिलाफ ट्रंप के तीखे तेवर… रिफंड की बजाए नए टैरिफ को 10 से बढ़ाकर 15% किया
22 Feb, 2026 08:41 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली/वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के एक बड़े फैसले के बाद हार मानने के बजाय अपने तेवर और कड़े कर लिए हैं. कल सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप द्वारा लगाए गए इमरजेंसी टैरिफ (Emergency Tariff) को अवैध करार दे दिया था. कोर्ट का कहना था कि राष्ट्रपति ने अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल किया है. इस फैसले से उन कंपनियों को बड़ी राहत मिली थी जो अरबों डॉलर का टैक्स भर रही थीं. लेकिन ट्रंप ने तुरंत पलटवार करते हुए नए ग्लोबल टैरिफ को 10% से बढ़ाकर 15% करने का फैसला किया है.।
ट्रंप ने साफ कर दिया है कि वह अपनी ट्रेड पॉलिसी से पीछे नहीं हटेंगे. उन्होंने कहा कि वह ‘सेक्शन 122’ जैसी दूसरी कानूनी शक्तियों का इस्तेमाल करेंगे. राष्ट्रपति का यह अड़ियल रवैया बता रहा है कि आने वाले दिनों में अमेरिका और उसके व्यापारिक साझेदारों के बीच तनाव और बढ़ेगा. इस फैसले के बाद अब सबसे बड़ा सवाल रिफंड को लेकर खड़ा हो गया है. कंपनियां अपने अरबों डॉलर वापस मांग रही हैं, लेकिन ट्रंप प्रशासन लंबी कानूनी लड़ाई की तैयारी में है।
1. सेक्शन 122 क्या है और ट्रंप इसे हथियार क्यों बना रहे हैं?
सुप्रीम कोर्ट के झटके के बाद ट्रंप ने अब ‘ट्रेड एक्ट 1974’ के सेक्शन 122 का सहारा लिया है. यह कानून राष्ट्रपति को अधिकार देता है कि वह गंभीर व्यापार घाटे को रोकने के लिए 15% तक का अस्थाई टैरिफ लगा सकते हैं. हालांकि, इसकी एक बड़ी सीमा है कि यह सिर्फ 150 दिनों के लिए ही प्रभावी रह सकता है. इसके बाद राष्ट्रपति को संसद यानी कांग्रेस से मंजूरी लेनी होगी.
ट्रंप का मानना है कि इससे उन्हें वह ताकत वापस मिल जाएगी जो कोर्ट ने उनसे छीनी है. उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जजों पर भी निशाना साधा और इसे देश के लिए एक बुरा फैसला बताया. एक्सपर्ट्स का कहना है कि ट्रंप इस कानून का इस्तेमाल इसलिए कर रहे हैं क्योंकि इसमें जांच की लंबी प्रक्रिया की जरूरत नहीं होती. वह इसे तुरंत लागू करके अपनी ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति को बरकरार रखना चाहते हैं।
2. इलिनोय के गवर्नर ने ट्रंप को 8.7 अरब डॉलर का बिल क्यों थमाया?
इस पूरे विवाद में अब राजनीति भी गर्मा गई है. इलिनोय के गवर्नर जेबी प्रित्ज़कर ने ट्रंप को एक औपचारिक इनवॉइस यानी बिल भेजा है. इसमें उन्होंने ट्रंप से 8.68 अरब डॉलर के रिफंड की मांग की है. गवर्नर का तर्क है कि ट्रंप के अवैध टैरिफ की वजह से उनके राज्य के हर परिवार को करीब 1700 डॉलर का नुकसान हुआ है. उन्होंने इसे ‘पास्ट ड्यू’ यानी बकाया राशि बताते हुए सोशल मीडिया पर लिखा।
हालांकि, कानूनी तौर पर यह मामला इतना सीधा नहीं है. टैरिफ का भुगतान कंपनियां करती हैं, आम जनता नहीं. कंपनियां इस बोझ को ग्राहकों पर डालती हैं जिससे महंगाई बढ़ती है. ऐसे में अगर रिफंड मिलता भी है, तो वह कंपनियों को मिलेगा न कि सीधे आम लोगों को. अर्थशास्त्रियों का मानना है कि वॉलमार्ट या कॉस्टको जैसी कंपनियां ग्राहकों को पुराना पैसा वापस नहीं करेंगी।
3. क्या रिफंड की जंग अगले 5 सालों तक खिंच सकती है?
रिफंड के मुद्दे पर ट्रंप ने जो बयान दिया है, उसने बिजनेस जगत की नींद उड़ा दी है. ट्रंप ने कहा, ‘मुझे लगता है कि इस पर अगले दो साल या शायद पांच साल तक मुकदमा चलेगा’. इसका मतलब है कि जिन कंपनियों ने पिछले साल अरबों डॉलर का टैक्स दिया है, उन्हें अपना पैसा वापस पाने के लिए कोर्ट के चक्कर काटने होंगे. ट्रंप प्रशासन ने पहले वादा किया था कि अगर कोर्ट का फैसला खिलाफ आया तो पैसा वापस कर दिया जाएगा।
अब प्रशासन अपने ही वादे से मुकरता दिख रहा है. हजारों कंपनियों ने पहले ही सरकार पर केस कर रखा है. अब इन मामलों की सुनवाई ‘कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड’ में होगी. छोटे व्यापारियों के लिए यह स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, क्योंकि उनके पास लंबी कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए फंड नहीं है।
4. भारत और ग्लोबल मार्केट पर इस फैसले का क्या असर होगा?
भारत के लिए यह खबर मिली-जुली है. एक तरफ सुप्रीम कोर्ट के फैसले से भारत पर लगे कुछ पुराने टैरिफ अवैध हो गए हैं. लेकिन ट्रंप के नए 10-15% ग्लोबल टैरिफ ने फिर से अनिश्चितता पैदा कर दी है. भारत का वाणिज्य मंत्रालय इस पूरे घटनाक्रम पर बारीक नजर रख रहा है. मंत्रालय ने कहा है कि वह कोर्ट के फैसले और ट्रंप के बयानों का एनालिसिस कर रहा है।
5. क्या बर्बाद होगा ग्लोबल मार्केट?
ट्रंप ने हिंट दिया है कि ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच वह तेल और अन्य चीजों पर दबाव बनाने के लिए मिलिट्री एक्शन भी ले सकते हैं. अगर ऐसा होता है, तो ग्लोबल सप्लाई चेन पूरी तरह चरमरा जाएगी. भारतीय निर्यातकों के लिए आने वाले 150 दिन बहुत चुनौतीपूर्ण होने वाले हैं, क्योंकि ट्रंप की नई नीति किसी भी वक्त लागू हो सकती है।
बांग्लादेश सरकार के सामने भारत से रिश्ते सुधारने, अल्पसंख्यकों की हिफाजत जैसी चुनौतियां
22 Feb, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका। बांग्लादेश में अब बीएनपी की सरकार है। बहुमत से चुनी गई नई सरकार के सामने देश की इकोनॉमी को दोबारा पटरी पर लाने, भारत से रिश्ते सुधारने, अल्पसंख्यकों की हिफाजत करने के साथ ही कट्टरपंथ से निपटने की चुनौतियां हैं। बीएनपी के सेंट्रल कमेटी मेंबर और सांसद डॉ. अब्दुल मोईन खान जिनमा पार्टी और सरकार की पॉलिसी बनाने में अहम योगदान है। मोईन खान पीएम रहमान के करीबी सलाहकार माने जाते हैं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मोईन खान ने कहा सरकार के सामने पहली चुनौती इकोनॉमी को सुधारना है। बांग्लादेश से लाखों डॉलर बाहर ले जाए गए। इंडस्ट्री खत्म कर दी गई हैं। कारोबारी सरकार का हिस्सा बन गए। दूसरी चुनौती लोकतांत्रिक ढांचे को बेहतर बनाना है। तीसरी चुनौती संस्थाओं की बहाली करने की है। ब्यूरोक्रेसी से लेकर ज्यूडिशियरी और बैंकिंग सिस्टम तक, सब बहाल करना है। अवामी लीग की तानाशाही और गलत नीतियों की वजह से ये हालात बने।
उन्होंने कहा कि बांग्लादेश की विदेश नीति का मूलमंत्र है- दोस्ती सभी के साथ, दुश्मनी किसी से नहीं। बीएनपी इसी पर यकीन करती है। हम आगे भी इसी पॉलिसी को फॉलो करेंगे। विदेश नीति की ताली एक हाथ से नहीं बजती। इसमें दोनों तरफ से गर्मजोशी होनी चाहिए। पड़ोसी देशों से रिश्तों को लेकर उन्होंने कहा भारत जैसे पड़ोसी मुल्क के साथ रिश्ते इस बात पर निर्भर करते हैं कि भारत ने अपनी पॉलिसी में कैसे बदलाव किए हैं। भारत के नेताओं, फॉरेन और डिफेंस पॉलिसी बनाने वालों को साथ मिलकर बांग्लादेश के लिए पॉलिसी बनानी चाहिए। मुझे लगता है कि भारत को बांग्लादेश के लिए विदेश नीति में बदलाव करना होगा। उसे समझना होगा कि पिछले डेढ़ दशक में क्या गड़बड़ी हुई है।
मोईन खान ने कहा कि शेख हसीना मामला एक मुद्दा है। अगर आप किसी से पूछेंगे कि आपके देश को जिसने बर्बाद किया और वो दूसरे देश में पनाह लिए हुए है, तो ये भावना आनी स्वाभाविक है। बिल्कुल। भारत पर निर्भर करता है कि वो क्या करना चाहते हैं। अगर किसी ने 18 करोड़ लोगों के साथ नाइंसाफी की है, तो इंसाफ होना चाहिए। मुझे लगता है कि भारत बांग्लादेश के बारे में अपनी समझ बढ़ाएगा। अगर वे अपनी विदेश नीति की खामियों पर सोचेंगे, तो निश्चित रूप से कोशिश करेंगे। हमारे नेता तारिक रहमान ने कहा है कि हम नफरत की राजनीति नहीं करते हैं। हम ये तय करना चाहते हैं कि इंसाफ हो। बांग्लादेश के लोगों ने इस पर खुद राय बनाई है। इस मामले में कानूनी रास्ते और प्रक्रिया को देखा जाएगा। बांग्लादेश के लोग धार्मिक प्रवृत्ति के हैं। वे धार्मिक रूप से कट्टर हैं, ये कहना सही नहीं होगा। बांग्लादेश में इस्लाम को मानने वाले ज्यादा हैं, लेकिन उनकी सोच हिंदू, क्रिश्चियन, बौद्ध सभी को लेकर खुली हुई है। कुछ लोग धर्म को राजनीति का टूल बनाने की कोशिश करते हैं।
ट्रक से 550 बोरियां यूरिया बरामद, दस्तावेजों की जांच शुरू
21 Feb, 2026 01:37 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
यमुनानगर। जिले में कृषि-ग्रेड यूरिया की अवैध तस्करी के खिलाफ कृषि विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पांसरा के पास से 550 बोरियों से लदा एक ट्रक पकड़ा है। विभाग की टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर यह कार्रवाई की। पकड़ी गई यूरिया खाद किसानों के लिए निर्धारित थी, जिसे कथित रूप से अवैध रूप से ले जाया जा रहा था।
जानकारी के मुताबिक बरामद यूरिया कृभको (कृषक भारती को-ऑपरेटिव लिमिटेड) द्वारा निर्मित है। यह खेप कैथल जिले से लाई जा रही थी। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि खाद को नियमों के विपरीत तरीके से परिवहन किया जा रहा था।
उप निदेशक कृषि आदित्य प्रताप डबास ने बताया कि जिले में यूरिया की कालाबाज़ारी और अवैध भंडारण को लेकर विभाग पूरी तरह सतर्क है। किसानों के हितों के साथ किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मामले की सूचना तुरंत पुलिस को दी गई। इसके बाद थाना सदर में प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। ट्रक और यूरिया की बोरियों को कब्जे में लेकर जांच की जा रही है। परिवहन से जुड़े दस्तावेजों और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। उनका कहना है कि जिले में उर्वरकों की आपूर्ति व्यवस्था को पारदर्शी बनाए रखने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है। विभाग ने किसानों से भी अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की कालाबाज़ारी या संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत प्रशासन को दें।
हादसे में बस कंडक्टर की मौत, छह यात्री घायल
21 Feb, 2026 12:51 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सोनीपत। नेशनल हाईवे-44 पर सोनीपत में राई फ्लाईओवर के पास एक भीषण सड़क हादसा हुआ, जिसमें अमृतसर से दिल्ली जा रही एक वॉल्वो बस ने सड़क किनारे खराब खड़े ट्रक में जोरदार टक्कर मार दी। इस हादसे में बस के कंडक्टर की मौके पर मौत हो गई, जबकि ड्राइवर समेत 6 यात्री घायल हो गए।
बस सोनीपत के राई फ्लाईओवर के नजदीक पहुंची थी। अचानक सड़क किनारे खड़ा एक खराब ट्रक बस की चपेट में आ गया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बस का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। मृतक कंडक्टर की पहचान अमन के रूप में हुई है, जो अमृतसर का निवासी था।
गंभीर रूप से घायल ड्राइवर निकेश भी अमृतसर का रहने वाला है। घायलों में एक ही परिवार के तीन सदस्य शामिल हैं। जिनकी पहचान दीपक मल्होत्रा, दिवाकर मल्होत्रा और सुषमा मल्होत्रा के तौर पर हुई है। यह परिवार अमृतसर में किसी शादी समारोह से लौट रहा था और वॉल्वो बस से दिल्ली जा रहा था।
घायलों को तत्काल मौके पर पहुंची एम्बुलेंस की मदद से सोनीपत सिविल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। वहीं, कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है, और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें हाई सेंटर रेफर किया जा सकता है। पुलिस ने हादसे की जांच शुरू कर दी है।
बोर्ड ऑफ पीस की पहली बैठक में पाकिस्तान की जमकर हुई बेइज्जती, हाशिए पर पीएम शरीफ
21 Feb, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा गाजा के पुनर्निर्माण और शांति बहाली के लिए गठित बोर्ड ऑफ पीस की पहली औपचारिक बैठक ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के नए समीकरण स्पष्ट कर दिए हैं। वाशिंगटन में आयोजित इस हाई-प्रोफाइल बैठक में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की उपस्थिति ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पूरी बैठक के दौरान पाकिस्तान न केवल कूटनीतिक रूप से असहज दिखा, बल्कि सांकेतिक तौर पर भी उसे किनारे कर दिया गया। इस घटनाक्रम ने विशेषज्ञों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या अमेरिका की नई शांति योजना में पाकिस्तान अपनी प्रासंगिकता खोता जा रहा है।
बैठक के बाद जब आधिकारिक ग्रुप फोटो जारी की गई, तो उसने पाकिस्तान की वर्तमान कूटनीतिक स्थिति की एक धुंधली तस्वीर पेश की। सूत्रों के अनुसार, जहां राष्ट्रपति ट्रंप के साथ उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विदेश मंत्री मार्को रुबियो केंद्रीय भूमिका में थे, वहीं सऊदी अरब, कतर और इंडोनेशिया जैसे मुस्लिम जगत के प्रभावशाली देशों के नेताओं को उनके ठीक पीछे प्रमुखता दी गई। इसके विपरीत, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को फ्रेम के अंतिम किनारों पर जगह मिली। कूटनीतिक जानकारों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नेताओं का स्थान और उनकी स्थिति केवल एक संयोग नहीं होती, बल्कि यह उस देश के महत्व का संकेत देती है।
बैठक में मौजूद राजनयिक सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल पूरे समय असहज दिखा। इसका मुख्य कारण गाजा के मुद्दे पर पाकिस्तान का अस्पष्ट रुख माना जा रहा है। ट्रंप की इस योजना के तहत सदस्य देशों से गाजा में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए हजारों सैनिकों की टुकड़ी भेजने की उम्मीद की गई थी। हालांकि पाकिस्तान ने शुरुआती दौर में इसमें रुचि दिखाई थी, लेकिन अब इस्लामाबाद अपनी सेना भेजने के निर्णय पर हिचकिचा रहा है। इसका सीधा परिणाम तब दिखा जब राष्ट्रपति ट्रंप ने सैन्य मदद देने वाले देशों की सूची पढ़ी। उन्होंने इंडोनेशिया, मोरक्को, अल्बानिया, कोसोवो, कजाकिस्तान, मिस्र और जॉर्डन का नाम तो लिया, लेकिन इस सूची से पाकिस्तान का नाम पूरी तरह गायब था। वाशिंगटन के गलियारों में यह चर्चा आम रही कि पाकिस्तान अक्सर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बड़े दावे तो करता है, लेकिन जब वास्तविक प्रतिबद्धता और संसाधनों की बात आती है, तो वह पीछे हट जाता है। गाजा के पुनर्निर्माण के लिए लगभग 70 अरब डॉलर की आवश्यकता है, जिसके लिए अब तक 5 अरब डॉलर का फंड जुट पाया है। इस वित्तीय सहयोग में भी पाकिस्तान का कोई उल्लेखनीय योगदान नजर नहीं आया। हालांकि, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को उस समय थोड़ी व्यक्तिगत राहत मिली जब राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने भाषण में उनकी और पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर की तारीफ की। ट्रंप ने अपने चिर-परिचित मजाकिया लहजे में पुराने विवादों को याद करते हुए कहा, मुझे यह व्यक्ति (शहबाज शरीफ) पसंद है। उन्होंने जनरल मुनीर को एक मजबूत फाइटर करार दिया और उनके हवाले से फिर वही पुराना दावा दोहराया कि ट्रंप ने भारत-पाक युद्ध को रोककर 2.5 करोड़ लोगों की जान बचाई थी।
ट्रंप द्वारा गठित बोर्ड ऑफ पीस को वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र के एक संभावित विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। इसका प्राथमिक लक्ष्य युद्धग्रस्त क्षेत्रों में पुनर्निर्माण और शांति स्थापित करना है। 40 से अधिक देशों और भारत जैसे पर्यवेक्षकों की मौजूदगी में हुई इस बैठक ने पाकिस्तान को एक कड़वी सच्चाई का अहसास कराया है। यदि इस्लामाबाद ने अपनी प्राथमिकताओं और वैश्विक मुद्दों पर ठोस योगदान को लेकर स्पष्टता नहीं दिखाई, तो भविष्य में वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर केवल एक दर्शक बनकर रह जाएगा।
सात महीने से फरार चल रहे आरोपी को किया गया गिरफ्तार
21 Feb, 2026 11:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हिसार। हिसार पुलिस ने एक हत्या की गुत्थी को सुलझाकर आरोपी को गिरफ्तार किया है। साथी का मोबाइल फोन चोरी करने के संदेह में एक युवक को मौत के घाट उतारने व उसके हाथ बांधकर लाश को हिसार-सिरसा रेलवे ट्रैक पर फेंकने के सनसनीखेज मामले को हिसार जीआरपी पुलिस ने सात माह बाद ट्रेस आउट किया है।
जीआरपी थाना प्रभारी श्याम सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम ने शुक्रवार को यूपी के चाकूबाज शातिर बदमाश को पकड़ा है। आरोपी ने जीआरपी टीम की पूछताछ में सनसनीखेज खुलासा किया है। आरोपी ने अपना अपराध कबूल करते हुए पूछताछ में बताया कि वह नशे का आदी है।
वह पंजाब से अपने दोस्त के साथ हिसार आया तो रात के समय ट्रेन में उसके साथी का मोबाइल चोरी हो गया था। ट्रेन में उनके पास ही सीट पर सो रहे एक युवक पर संदेह हुआ तो उसे बुरी तरह पीटा। इसके बाद कपड़े से गला घोंटकर मार डाला। बाद में उसके हाथ बांधकर रेलवे ट्रैक पर शव फेंक कर फरार हो गया।
ट्रंप की ईरान को दी 10 दिन वाली चेतावनी, बोले– डील नहीं हुई तो ‘कुछ बड़ा’ होगा
21 Feb, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी तनाव के बीच कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि अगले 10 दिनों में कोई सार्थक समझौता नहीं हुआ तो हालात गंभीर हो सकते हैं। उन्होंने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि डील न होने की स्थिति में बुरी चीजें होंगी और अमेरिका कड़े कदम उठा सकता है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने यह बयान वॉशिंगटन में आयोजित बोर्ड ऑफ पीस कार्यक्रम के दौरान दिया। उन्होंने कहा कि ईरानी प्रतिनिधियों के साथ बातचीत जारी है और अब तक की वार्ता “रचनात्मक” रही है। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इतिहास बताता है कि ईरान के साथ एक ठोस और प्रभावी समझौता करना आसान नहीं है।
अमेरिकी वार्ताकारों का जिक्र
राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिकी वार्ताकार स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों ईरान के साथ अप्रत्यक्ष वार्ता का नेतृत्व कर रहे हैं। ट्रंप के मुताबिक, उनकी बैठकों का माहौल सकारात्मक रहा है, लेकिन अंतिम सहमति तक पहुंचना अभी बाकी है। उन्होंने कहा, शायद हम समझौता कर लें, शायद नहीं। आपको अगले लगभग 10 दिनों में पता चल जाएगा।
बढ़ता तनाव और सैन्य तैयारियां
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ने मध्य-पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है। विमानवाहक पोत, लड़ाकू जेट और अतिरिक्त रक्षा प्रणालियां क्षेत्र में तैनात की गई हैं। वहीं सैटेलाइट तस्वीरों में संकेत मिले हैं कि ईरान अपने परमाणु और मिसाइल ठिकानों को मजबूत कर रहा है। हालांकि तेहरान लगातार इनकार करता रहा है कि वह परमाणु हथियार विकसित कर रहा है।
2015 परमाणु समझौते की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में 2015 के ईरान परमाणु समझौते से अमेरिका को बाहर कर लिया था। यह समझौता औपचारिक रूप से जेसीपीओए के नाम से जाना जाता है। ट्रंप का कहना था कि यह समझौता कमजोर और अपर्याप्त है। बाद में पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन के कार्यकाल में इस समझौते को पुनर्जीवित करने की कोशिश हुई, लेकिन कोई अंतिम परिणाम नहीं निकला। हाल ही में जेनेवा में हुई वार्ता को दोनों पक्षों ने सकारात्मक बताया, हालांकि वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि कई बड़े मतभेद अब भी कायम हैं।
AI से नौकरियों का खतरा? ओपनएआई के CEO सैम ऑल्टमैन ने दिया बड़ा बयान, एलन मस्क पर भी कही ये बात
21 Feb, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। ओपनएआई (OpenAI) के सीईओ सैम ऑल्टमैन (CEO Sam Altman) ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर अहम बातें कही हैं। उन्होंने कहा कि AI अब हाई स्कूल (High School) स्तर की गणित से आगे बढ़कर मानव ज्ञान (Human knowledge) की सीमाओं को छू रहा है। एक साल पहले जहां AI केवल हाई स्कूल मैथ कर पाता था, अब यह नई रिसर्च और फिजिक्स में भी सक्षम हो गया है। ऑल्टमैन ने ओपनएआई को रिसर्च-फर्स्ट कंपनी बताया, जहां प्रोडक्ट भी रिसर्च का नतीजा होता है। ये बातें उन्होंने शुक्रवार को नई दिल्ली में मीडिया कार्यक्रम में कही।
भारत में AI को लेकर उत्साह
ऑल्टमैन ने भारत को लेकर अपनी उत्सुकता जताई। उन्होंने कहा कि भारत में बिल्डर एनर्जी जबरदस्त है और आईआईटी दिल्ली में सुबह का माहौल शानदार था। भारत चैटजीपीटी के टॉप यूजर्स में से एक है, जहां लोग कोडिंग, डेटा एनालिसिस और सीखने के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं। ओपनएआई ने मुंबई और बेंगलुरु में नए ऑफिस खोलने की घोषणा की और टीसीएस, मेकमाईट्रिप, जियोहॉटस्टार जैसी कंपनियों के साथ पार्टनरशिप की। ऑल्टमैन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा की तारीफ करते हुए कहा कि भारत को AI के सभी लेयर्स पर खेलना चाहिए।
सुपरइंटेलिजेंस और बैलेंस ऑफ पावर
एजीआई (Artificial General Intelligence) पर ऑल्टमैन ने कहा कि अब यह काफी करीब है, जबकि ASI (Artificial Super Intelligence) कुछ साल दूर है। उन्होंने जोर दिया कि किसी एक देश या कंपनी के पास सुपरइंटेलिजेंस का कंट्रोल नहीं होना चाहिए, क्योंकि इससे वैश्विक असंतुलन पैदा होगा। AI के डेमोक्रेटाइजेशन की आवश्यकता बताते हुए उन्होंने कहा कि गार्डरेल्स के साथ AI हर किसी के हाथ में होना चाहिए।
AI और नौकरियों पर असर
नौकरियों को लेकर ऑल्टमैन ने इतिहास का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि इंडस्ट्रियल रेवोल्यूशन में भी लोग डरते थे, लेकिन समाज ने एडजस्ट किया। AI से कई प्रोफेशन बदलेंगे या समाप्त होंगे, लेकिन नए अवसर भी उत्पन्न होंगे और लोग नई चीजें करेंगे। उन्होंने AI को मानव एजेंसी बढ़ाने वाला बताया।
एलन मस्क और ऊर्जा पर टिपण्णी
ऑल्टमैन ने एलन मस्क की तारीफ की, साथ ही प्रतिस्पर्धा को स्वीकार किया। ऊर्जा खपत पर उन्होंने कहा कि वाटर यूज के दावे फेक हैं, लेकिन सोलर और न्यूक्लियर एनर्जी की ओर तेजी से बढ़ना होगा। उन्होंने ग्लोबल कोऑपरेशन, डेमोक्रेसी और संतुलित विकास पर जोर दिया।
पुलिस ने ब्रिटेन के किंग चार्ल्स तृतीय के छोटे भाई एंड्रयू को किया गिरफ्तार
21 Feb, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लंदन। ब्रिटेन के किंग चार्ल्स तृतीय के छोटे भाई एंड्रयू माउंटबेटन-विंडसर को सार्वजनिक पद पर रहते हुए कदाचार के मामले में गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि उन्होंने गोपनीय सरकारी दस्तावेज यौन अपराधी जेफ्री एप्स्टीन को भेजे थे। हालांकि, पूरे दिन पूछताछ के बाद उन्हें गुरुवार देर शाम रिहा कर दिया गया। पुलिस ने बयान जारी कर कहा कि 60 साल के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया था, जिसे अब जांच के बाद रिहा कर दिया गया है। इसका मतलब है कि अभी न तो उन पर आरोप तय किए गए हैं और न ही उन्हें पूरी तरह क्लीन चिट मिली है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस ने पुष्टि की कि नॉरफॉक में तलाशी अभियान चलाया गया, जो अब समाप्त हो चुका है। ब्रिटेन के कानून के तहत गिरफ्तारी के लिए पुलिस के पास अपराध का उचित संदेह और आधार होना जरूरी होता है। पुलिस ने आरोपी का नाम सार्वजनिक नहीं किया, जो ब्रिटेन की सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स में स्पष्ट रूप से एंड्रयू का नाम सामने आया है।
बता दें जिस दिन यानी गुरुवार को यह कार्रवाई हुई, उसी दिन एंड्रयू 66 वर्ष के हुए। गिरफ्तारी के बाद पुलिस स्टेशन से बाहर निकलते समय उनकी तस्वीरें सामने आईं, जिनमें वे बेहद थके और सदमे में दिखे। वहीं इस मामले में प्रिंस चार्ल्स तृतीय ने कहा कि उनके भाई एंड्रयू माउंटबेटन विंडसर के मामले की जांच में कानून को अपना काम करना चाहिए। पूर्व शाही प्रेस सचिव ऐल्सा एंडरसन ने कहा कि वह हतप्रभ और टूटे हुए लग रहे थे। यह उनकी शाही छवि के पतन का एक और प्रतीक है।
बता दें एंड्रयू पिछले कई सालों से जेफ्री एप्स्टीन से संबंधों को लेकर विवादों में रहे हैं। हाल ही में अमेरिकी कांग्रेस की ओर से एप्स्टीन से जुड़ी फाइलों के सार्वजनिक होने के बाद मामला और गर्म हो गया। ब्रिटेन के पीएम कीयर स्टार्मर ने कहा कि कानून के सामने सभी समान हैं। कोई भी कानून से ऊपर नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि जिनके पास भी महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हिंसा से जुड़ी जानकारी है, उन्हें आगे आना चाहिए। पिछले साल किंग चार्ल्स ने एंड्रयू से ‘प्रिंस’ और ‘ड्यूक ऑफ यॉर्क’ की उपाधियां वापस ले ली थीं। एंड्रयू ने सभी आरोपों से इनकार किया है। फिलहाल मामले की जांच चल रही है।
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