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सुरक्षा में बड़ी चूक पर एक्शन: मार्च में 25 फीट ऊंची दीवार फांदकर भागे थे दो बंदी, अब सुपरिंटेंडेंट सस्पेंड
6 Jun, 2026 04:33 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रेवाड़ी | नवनिर्मित हाईटेक जिला कारागार में कर्तव्यों के प्रति घोर लापरवाही बरतने के एक मामले में शासन द्वारा बड़ी दंडात्मक कार्रवाई की गई है। मार्च के महीने में जेल परिसर से दो बंदियों के चकमा देकर भागने की गंभीर घटना के बाद तत्कालीन जेल अधीक्षक सुरेंद्र दलाल को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड (निलंबित) कर दिया गया है। कारागार प्रशासन द्वारा गठित उच्च स्तरीय जांच समिति की रिपोर्ट और वरिष्ठ अधिकारियों की विस्तृत समीक्षा के बाद यह कड़ा कदम उठाया गया है।
ऊंची दीवार लांघकर भागे थे बंदी और पूर्व में हुई कार्रवाई
यह पूरा मामला 28 मार्च का है, जब रेवाड़ी की इस अत्याधुनिक जेल से दो शातिर कैदी लगभग 25 फीट ऊंची सुरक्षा दीवार को लांघकर रफूचक्कर हो गए थे। वारदात के समय जेल अधीक्षक सुरेंद्र दलाल स्वयं अवकाश पर चल रहे थे, जिसे सुरक्षा मानकों की अनदेखी और प्रशासनिक शिथिलता की श्रेणी में गंभीर चूक माना गया। इस मामले में जेल विभाग पहले ही कड़ा रुख अपनाते हुए पांच मुख्य प्रहरियों (हेड वार्डर) और दो प्रहरियों (वार्डर) सहित कुल सात सुरक्षाकर्मियों को निलंबित कर चुका था। उस दौरान यह स्पष्ट किया गया था कि अधीक्षक के उत्तरदायित्वों की पृथक से जांच होगी, जिसके परिणाम स्वरूप अब यह निलंबन हुआ है।
हाईटेक सुरक्षा पर उठे सवाल और बंदियों की दोबारा गिरफ्तारी
यद्यपि कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए फरार हुए दोनों बंदियों को कुछ समय बाद पुनः अपनी कस्टडी में ले लिया था, परंतु इस दुस्साहसिक घटना ने कारागार की अभेद्य मानी जाने वाली सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी थी। इस नवनिर्मित जेल को बेहद आधुनिक साजो-सामान और अत्याधुनिक सुरक्षा प्रणालियों से लैस माना जाता है, इसके बावजूद बंदियों का इस प्रकार भाग निकलना प्रबंधन पर एक बड़ा सवालिया निशान लगा गया। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री नायब सैनी ने जून 2025 में ही इस आधुनिक जिला कारागार का भव्य उद्घाटन किया था।
नए जेल अधीक्षक की नियुक्ति और सुरक्षा की समीक्षा
इस बड़ी प्रशासनिक कोताही के सामने आने के बाद गृह और कारागार विभाग ने जेल परिसरों में सुरक्षा घेरे को और अधिक सुदृढ़ व त्रुटिहीन करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं। इसके साथ ही, कानून-व्यवस्था को पटरी पर लाने के उद्देश्य से रेवाड़ी जिला जेल में नए अधीक्षक के रूप में रेशम सिंह को जिम्मेदारी सौंपी गई है। नए अधिकारी ने विधिवत रूप से अपना कार्यभार ग्रहण कर लिया है और जेल के भीतर सुरक्षा खामियों को दूर करने के लिए आंतरिक व्यवस्थाओं की नए सिरे से समीक्षा शुरू कर दी है।
जासूसी मामले में नया मोड़, कोर्ट में दोष स्वीकार कर चौंकाया पत्रकार ने
6 Jun, 2026 01:26 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन / बीजिंग: चीन में लंबे समय से रह रहे एक वरिष्ठ अमेरिकी पत्रकार थॉमस पाउकेन द्वितीय ने अमेरिकी अदालत में एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा किया है। थॉमस ने स्वीकार किया है कि वह बिना किसी कानूनी अनुमति या पंजीकरण के बीजिंग (चीन) के लिए एक गुप्त एजेंट (जासूस) के रूप में काम कर रहा था। अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) द्वारा जारी आधिकारिक बयान के मुताबिक, थॉमस पाउकेन चीनी सरकार के इशारे पर अमेरिका की खुफिया जानकारियां जुटाने और वहां के प्रभावशाली लोगों के बीच पैठ बनाकर चीन के पक्ष में माहौल तैयार करने का काम कर रहा था।
सरकारी मीडिया की आड़ में रचा जासूसी का जाल
अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों की जांच में सामने आया है कि आरोपी पत्रकार थॉमस पाउकेन साल 2010 से ही चीन में डेरा डाले हुए था। उसने अपनी जासूसी और देश विरोधी गतिविधियों को छिपाने के लिए बीजिंग के कई बड़े सरकारी मीडिया संस्थानों को अपना ढाल बनाया और वहां एक पत्रकार के रूप में काम करता रहा। पत्रकारिता की आड़ में उसने कई संवेदनशील जानकारियां चीनी आकाओं तक पहुंचाईं।
1 सितंबर को होगा सजा का एलान, 10 साल के लिए जाएगा जेल
अदालत में अपना गुनाह कबूल करने के बाद अब थॉमस पर कानून का शिकंजा पूरी तरह कस गया है:
सजा की तारीख: अमेरिकी कोर्ट आगामी 1 सितंबर को थॉमस पाउकेन की सजा का एलान करेगी।
अधिकतम सजा: जासूसी का दोषी पाए जाने और बिना अनुमति विदेशी सरकार के एजेंट के रूप में काम करने के जुर्म में थॉमस को अधिकतम 10 साल की जेल की सजा हो सकती है।
हाई-प्रोफाइल राजनीतिक परिवार से है संबंध
थॉमस पाउकेन का यह मामला इसलिए भी अमेरिकी गलियारों में सुर्खियां बटोर रहा है क्योंकि उसका परिवार अमेरिका की राजनीति में एक बड़ा रसूख रखता है। थॉमस के पिता अमेरिका के टेक्सास राज्य में रिपब्लिकन पार्टी के अध्यक्ष जैसी बेहद प्रतिष्ठित और ताकतवर भूमिका निभा चुके हैं। ऐसे में एक हाई-प्रोफाइल राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले परिवार के सदस्य का चीन के लिए जासूसी करना अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के लिए भी एक बड़ा झटका माना जा रहा है। मामले की आगे की कड़ियों को जोड़ने के लिए अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियां अब भी जांच में जुटी हुई हैं।
CJP के प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे युवाओं को पुलिस ने घेरा: नेशनल हाईवे पर हाई-वोल्टेज ड्रामा, समर्थक हिरासत में
6 Jun, 2026 12:50 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रोहतक | दिल्ली में होने वाले एक बड़े विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेने जा रहे प्रदर्शनकारी युवाओं को पुलिस ने राष्ट्रीय राजमार्ग-9 पर स्थित झज्जर-रोहतक की सांपला सीमा पर रोककर हिरासत में ले लिया है। मिली जानकारी के मुताबिक, जिला पार्षद जयदेव डागर अपने बहुत से समर्थकों के साथ वाहनों के काफिले में दिल्ली की ओर बढ़ रहे थे, लेकिन रोहद टोल प्लाजा पर पहुंचने से पहले ही मुस्तैद पुलिस बल ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया।
काफिले को रोकने पर तीखी बहस
जब पुलिस ने गाड़ियों के काफिले को आगे बढ़ने से मना किया, तो जिला पार्षद जयदेव डागर और उनके समर्थकों ने इस कदम का कड़ा विरोध किया। पार्षद ने मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों से हिरासत में लिए जाने की वजह पूछी और प्रशासनिक कार्रवाई पर कई सवाल दागे, लेकिन पुलिस प्रशासन की ओर से उन्हें कोई साफ वजह नहीं बताई गई।
प्रदर्शनकारियों को ले जाया गया थाना
पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच काफी देर तक चली इस बहसबाजी के बाद, सुरक्षाकर्मियों ने सभी युवाओं को हिरासत में ले लिया। पुलिस बल सभी प्रदर्शनकारियों को गाड़ियों में बैठाकर सबसे पहले सांपला थाने लेकर गया, ताकि सीमा पर कानून-व्यवस्था की स्थिति को बिगड़ने से बचाया जा सके।
रोहतक शिफ्ट किए गए हिरासत में लिए लोग
सांपला थाने में कुछ समय रखने और शुरुआती कागजी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद, प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर आगे की कार्रवाई करने का फैसला किया। इसके बाद, हिरासत में लिए गए पार्षद और उनके सभी समर्थकों को सांपला से स्थानांतरित करके रोहतक ले जाया गया है, जहां उन्हें फिलहाल एहतियातन निगरानी में रखा गया है।
हंगामे के आसार: युवा कांग्रेस के बड़े प्रदर्शन से पहले पुलिस मुस्तैद, कुरुक्षेत्र में बढ़ाई गई सुरक्षा
6 Jun, 2026 12:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कुरुक्षेत्र | हरियाणा के कुरुक्षेत्र में आज राजनीतिक सरगर्मियां तेज हैं, क्योंकि युवा कांग्रेस ने मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने का बड़ा फैसला किया है। इस विरोध प्रदर्शन के मद्देनजर बड़ी तादाद में पार्टी कार्यकर्ता और पदाधिकारी सड़कों पर उतरने की तैयारी में हैं। आंदोलन को सफल बनाने के लिए राज्य के कोने-कोने से युवा कांग्रेस से जुड़े लोगों का कुरुक्षेत्र में जमावड़ा शुरू हो चुका है, जिससे शहर में हलचल काफी बढ़ गई है।
सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त और बैरिकेडिंग
कार्यकर्ताओं के इस बड़े मार्च को रोकने और शहर की कानून-व्यवस्था को नियंत्रण में रखने के लिए स्थानीय पुलिस और प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। प्रदर्शनकारियों को मुख्यमंत्री आवास तक पहुंचने से रोकने के लिए सुरक्षा के असाधारण इंतजाम किए गए हैं। संवेदनशील रास्तों पर भारी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।
चार स्तरीय सुरक्षा घेरा और विशेष प्रबंध
प्रशासन ने मुख्य मार्गों पर चार लेयर की अभेद्य बैरिकेडिंग तैयार की है, जिससे प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका जा सके। इसके अलावा, यदि भीड़ उग्र होती है या बैरिकेड तोड़ने का प्रयास करती है, तो उसे नियंत्रित करने के लिए वाटर कैनन (जल तोप) और आंसू गैस जैसी विशेष व्यवस्थाएं मौके पर तैनात की गई हैं।
टकराव की स्थिति पैदा होने की आशंका
मौजूदा हालात और दोनों पक्षों की तैयारियों को देखते हुए कुरुक्षेत्र में तनाव का माहौल बना हुआ है। एक तरफ जहां युवा कांग्रेस के कार्यकर्ता हर हाल में घेराव करने की रणनीति पर अड़े हैं, वहीं दूसरी तरफ पुलिस बल उन्हें रोकने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है। ऐसे में प्रदर्शन के दौरान पुलिस प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच सीधे और तीखे टकराव के आसार नजर आ रहे हैं।
ब्रिटेन के आंतरिक मामलों में दखल बर्दाश्त नहीं: वेंस की टिप्पणी पर प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर का कड़ा पलटवार
6 Jun, 2026 12:26 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लंदन | ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के आधिकारिक कार्यालय (डाउनिंग स्ट्रीट) ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के उस बयान की कड़े शब्दों में निंदा की है, जिसमें उन्होंने एक ब्रिटिश छात्र की हत्या के तार आव्रजन (इमिग्रेशन) से जोड़े थे। ब्रिटिश सरकार ने इसे देश के आंतरिक मामलों में दखल और समाज में वैमनस्य फैलाने की कोशिश करार दिया है।
छात्र की हत्या और अदालती फैसला
यह पूरा विवाद दिसंबर में इंग्लैंड के साउथेम्प्टन में हुई 18 वर्षीय श्वेत छात्र हेनरी नोवाक की बेरहमी से की गई हत्या से जुड़ा है। हेनरी पर विक्रम डिगवा नाम के एक युवक ने आठ इंच लंबे धार्मिक चाकू (कृपाण) से जानलेवा हमला किया था। वारदात के बाद आरोपी ने पुलिस को गुमराह करने के लिए खुद पर नस्लीय हमला होने की झूठी कहानी गढ़ी, जिसके चलते शुरुआत में पुलिस ने घायल हेनरी को ही संदिग्ध समझकर हथकड़ी लगा दी थी। बाद में घावों का पता चलने पर हेनरी को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। इस मामले में अदालत ने आरोपी डिगवा को दोषी करार देते हुए न्यूनतम 21 साल की कैद के साथ आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
जेडी वेंस की टिप्पणी और ब्रिटिश सरकार का पलटवार
इस अदालती फैसले के बाद अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए इस घटना पर आक्रोश जताया और इसके लिए उन प्रवासियों को जिम्मेदार ठहराया जो कथित तौर पर पश्चिमी मूल्यों से नफरत करते हैं। वेंस के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए डाउनिंग स्ट्रीट ने कहा कि कुछ बाहरी तत्व ब्रिटेन के लोकतंत्र में हस्तक्षेप करने और समाज को बांटने का प्रयास कर रहे हैं। सरकार ने स्पष्ट किया कि पीड़ित परिवार इस दुखद घड़ी में शोक मना रहा है और वे नहीं चाहते कि उनके बेटे की मौत का इस्तेमाल नफरत या राजनीतिक तनाव बढ़ाने के लिए किया जाए। विपक्षी लिबरल डेमोक्रेट्स के नेता एड डेवी ने भी वेंस की आलोचना करते हुए इस घटना के राजनीतिकरण को गलत बताया।
पुलिसिया कार्रवाई पर बहस और पीड़ित परिवार का रुख
घटना के समय पुलिस द्वारा अपनाए गए रवैये को लेकर ब्रिटेन और अमेरिका में 'टू-टियर पुलिसिंग' (दोहरे मानदंड वाली पुलिसिंग) के आरोप भी लग रहे हैं। दक्षिणपंथी नेताओं और अमेरिकी विदेश विभाग ने भी इस दावे का समर्थन किया कि ब्रिटिश न्याय व्यवस्था में पूर्वाग्रह दिखता है, हालांकि ब्रिटिश सरकार ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया है। इस बीच, पुलिस की शुरुआती कार्रवाई की जांच एक स्वतंत्र निगरानी संस्था को सौंप दी गई है। इन सबके इतर, मृतक छात्र के पिता मार्क नोवाक ने एक बेहद परिपक्व संदेश देते हुए कहा कि यह मामला न तो नस्लवाद का है और न ही मजहब का। उन्होंने अपील की कि उनके बेटे की मौत का इस्तेमाल नफरत फैलाने के बजाय सड़कों को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए किया जाना चाहिए।
भारतीय आमों का विदेशी जलवा, अमेरिका में रिकॉर्ड समय में बिका स्टॉक
6 Jun, 2026 12:18 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
न्यूयॉर्क: भारतीय आमों के लाजवाब स्वाद का जादू अब अमेरिकी नागरिकों के सिर चढ़कर बोल रहा है। अमेरिका के सिएटल शहर में भारतीय वाणिज्य दूतावास (Indian Consulate) द्वारा आयोजित 'मैंगो मैजिक' कार्यक्रम में भारतीय आमों ने ऐसी धूम मचाई कि अमेरिकी ग्राहक और वहाँ के बड़े रिटेल कारोबारी इसके दीवाने हो गए। इस खास इवेंट में भारत की 7 सबसे प्रीमियम और मशहूर आम की किस्मों को प्रदर्शित किया गया था। भारतीय आमों की दीवानगी का आलम यह रहा कि अमेरिकी रिटेल दिग्गज 'कॉस्टको' (Costco) के स्टोर्स पर आम पहुंचते ही महज 2 घंटे के भीतर पूरा का पूरा स्टॉक साफ हो गया।
'मैंगो मैजिक' में चखा भारत के सात सुल्तानों का स्वाद
सिएटल में 'मैंगो मैजिक: प्रमोशन एंड टेस्टिंग इवेंट ऑफ इंडियन मैंगोज' का यह दूसरा सफल संस्करण था। इस कार्यक्रम में अमेरिकी रिटेल कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों और बड़े फल आयातकों ने शिरकत की। कार्यक्रम में भारत के अलग-अलग राज्यों से पहुंचे इन चुनिंदा आमों का जायका परोसा गया:
भारतीय आम की प्रीमियम किस्म
उत्पादक राज्य
अल्फांसो और केसर
महाराष्ट्र
बंगनपल्ली और हिमायत
आंध्र प्रदेश
दशहरी और लंगड़ा
उत्तर प्रदेश
राजापुरी
गुजरात
इन अमेरिकी शहरों में मची भारी डिमांड
कॉस्टको कंपनी ने हाल ही में अमेरिकी बाजार में भारतीय 'केसर' आम की पहली खेप उतारी है। कंपनी ने अमेरिका के प्रमुख शहरों— सिएटल, लास वेगास, न्यू जर्सी और लॉस एंजेलिस के सुपरस्टोर्स में इसे बिक्री के लिए रखा। इन सभी स्टोर्स से महज दो घंटे के भीतर भारतीय आम आउट ऑफ स्टॉक हो गए, जो इसकी जबरदस्त वैश्विक मांग को दर्शाता है।
अमेरिकी दिग्गजों ने बांधे तारीफों के पुल
वॉशिंगटन राज्य के उप-राज्यपाल डेनी हेक ने भारतीय आमों की जमकर तारीफ करते हुए कहा कि वे अब कभी भी भारतीय आमों के सीजन का पहला दिन मिस नहीं करेंगे। वहीं, कॉस्टको के फ्रेश प्रोड्यूस विभाग के वाइस प्रेसिडेंट बॉब हस्की ने कहा कि भारतीय केसर आम को लेकर ग्राहकों की प्रतिक्रिया अद्भुत है और वे भारत के साथ इस व्यापार से बेहद खुश हैं।
एक्सपोर्ट में 130% की ऐतिहासिक ग्रोथ, किसानों को बड़ा मुनाफा
भारत दुनिया का सबसे बड़ा आम उत्पादक देश है, जहां सालाना 2.6 करोड़ मीट्रिक टन से अधिक आम पैदा होता है और यहाँ 1000 से ज्यादा किस्में पाई जाती हैं। अमेरिका में भारतीय आमों का एक्सपोर्ट साल 2007 में दोबारा शुरू हुआ था, जिसने अब रफ्तार पकड़ ली है।
आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2023-24 में अमेरिका को होने वाला भारतीय आमों का निर्यात बढ़कर 1 करोड़ डॉलर (लगभग 83 करोड़ रुपये) के पार पहुंच गया है, जो पिछले साल की तुलना में 130 प्रतिशत की रिकॉर्ड बढ़ोतरी है।
वैश्विक पटल पर भारत की बढ़ती कृषि शक्ति
अल्फांसो और केसर के बाद अब दशहरी, लंगड़ा और हिमायत जैसी देसी किस्में भी सात समंदर पार अपनी मजबूत पहचान बना रही हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कोल्ड चेन और सप्लाई चेन को थोड़ा और दुरुस्त कर लिया जाए, तो भारतीय आम दुनिया के फल बाजार पर पूरी तरह राज कर सकता है। अमेरिका जैसे बड़े बाजार में भारतीय आम की यह ऐतिहासिक सफलता न केवल देश की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगी, बल्कि भारत के आम उत्पादक किसानों की आय में भी रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज कराएगी।
सुलग उठा मिडिल ईस्ट: सीजफायर के बीच हिजबुल्ला के मिसाइल अटैक से सीमाई इलाकों में गूंजे सायरन
6 Jun, 2026 11:48 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेल अवीव | पश्चिम एशिया में अमन-चैन की हालिया कोशिशों को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। इस्राइली रक्षा बलों (आईडीएफ) ने दावा किया है कि लेबनान के सशस्त्र संगठन हिजबुल्ला ने उसके लड़ाकू विमानों को निशाना बनाते हुए सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें दागी हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि यह हमला दोनों पक्षों के बीच संघर्ष विराम समझौते पर सहमति बनने के महज कुछ दिनों बाद ही हुआ है। इस औचक हमले के बाद उत्तरी इस्राइल के सीमावर्ती इलाकों में हवाई हमले के सायरन गूंज उठे, जिससे दहशत में आए हजारों नागरिकों को बंकरों में शरण लेनी पड़ी। हालांकि, इस्राइली सेना ने स्पष्ट किया है कि इस घटना में उनके किसी भी विमान को कोई क्षति नहीं पहुंची है और न ही कोई हताहत हुआ है।
सीमावर्ती इलाकों में मची अफरा-तफरी
सैन्य अधिकारियों के मुताबिक, हिजबुल्ला की ओर से दागी गई मिसाइलों के तुरंत बाद किरीयत शमोना शहर समेत लेबनान सीमा से सटे आठ अन्य ग्रामीण इलाकों में रेड अलर्ट जारी कर दिया गया। सायरन बजते ही पूरे क्षेत्र में भय का माहौल पैदा हो गया और प्रशासन ने नागरिकों को फौरन सुरक्षित स्थानों पर जाने की हिदायत दी। राहत की बात यह रही कि इस्राइली वायुसेना के विमान इस हमले के दौरान पूरी तरह सुरक्षित रहे। यह हिंसक घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिकी मध्यस्थता के जरिए दोनों देश युद्ध रोकने पर सहमत हुए थे।
संघर्ष विराम समझौते के बीच ईरान की भूमिका
वाशिंगटन में हुई त्रिपक्षीय उच्च स्तरीय वार्ता के बाद दोनों पक्षों ने युद्धविराम पर रजामंदी जताई थी, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट नजर आ रही है। ईरान समर्थित हिजबुल्ला का आक्रामक रुख अब भी बरकरार है। उधर, ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने भी एक बयान जारी कर कहा है कि इस शांति समझौते में लेबनानी मोर्चे पर पूरी तरह से युद्ध रोकने की शर्तें शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बयान से यह साफ हो जाता है कि लेबनान का यह संकट अब केवल स्थानीय मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि इसमें ईरान और क्षेत्रीय राजनीति का बड़ा दखल है।
लेबनानी राष्ट्रपति ने जताई युद्ध से नाराजगी
इस पूरे घटनाक्रम पर लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन ने ईरान के रुख पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनके देश को अमेरिका और ईरान के बीच चलने वाली आपसी सौदेबाजी का जरिया नहीं बनाया जाना चाहिए। राष्ट्रपति आउन ने कहा कि लेबनान की आम जनता अब इस लंबे खिंचते युद्ध से पूरी तरह टूट चुकी है और सिर्फ शांति चाहती है। उन्होंने हिजबुल्ला नेतृत्व की बयानबाजी की निंदा करते हुए कहा कि किसी संगठन विशेष के एजेंडे से ऊपर देश के नागरिकों की इच्छा होनी चाहिए और इस समस्या का स्थाई समाधान केवल आपसी संवाद से ही मुमकिन है।
बीजिंग को सैन्य कौशल का संदेश: जिनपिंग के दौरे से ठीक पहले किम जोंग का शक्ति प्रदर्शन और बड़े रणनीतिक ऐलान
6 Jun, 2026 11:43 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
प्योंगयांग | उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन ने देश के नवनिर्मित 5,000 टन क्षमता वाले विनाशक युद्धपोत 'कांग कोन' के समुद्री परीक्षणों का जायजा लिया। इस मौके पर उन्होंने अपनी नौसेना को परमाणु हथियारों से लैस करने और इसके आधुनिकीकरण की मुहिम को और तेज करने की प्रतिबद्धता जताई। आधिकारिक मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, किम ने युद्धपोत का बारीकी से निरीक्षण करने के बाद कहा कि उत्तर कोरिया को एक ऐसी अजेय समुद्री ताकत के रूप में उभरना होगा, जो समंदर की सतह और गहराई दोनों जगहों से दुश्मनों के किसी भी दुस्साहस का मुंहतोड़ जवाब दे सके।
सैन्य आधुनिकीकरण और पांच वर्षीय रक्षा योजना
किम जोंग उन ने स्पष्ट किया कि सत्तारूढ़ वर्कर्स पार्टी की नई पांच वर्षीय सैन्य रणनीति में नौसैनिक बेड़े के कायाकल्प पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत आने वाले समय में 10,000 टन श्रेणी के विशालकाय युद्धपोतों का निर्माण किया जाएगा और पानी के भीतर मार करने वाले अत्याधुनिक हथियारों को विकसित किया जाएगा। उन्होंने जोर दिया कि देश की परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को और मजबूत बनाने में नौसेना बेहद अहम भूमिका निभाएगी। इस निरीक्षण के दौरान किम की बेटी किम जू ए भी उनके साथ नजर आईं, जिन्हें दक्षिण कोरियाई रणनीतिकार उनके भविष्य के उत्तराधिकारी के तौर पर देख रहे हैं।
चीनी राष्ट्रपति की आगामी यात्रा और परमाणु विस्तार
उत्तर कोरिया का यह कदम ऐसे समय में सामने आया है जब चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग सोमवार को प्योंगयांग के दौरे पर पहुंचने वाले हैं। इससे पहले उत्तर कोरिया ने अपने एक नए यूरेनियम संवर्धन संयंत्र को दुनिया के सामने पेश किया था, जहां किम जोंग उन ने देश के परमाणु जखीरे को अप्रत्याशित रूप से बढ़ाने की बात कही थी। विश्लेषकों का मानना है कि शी जिनपिंग की यात्रा से ठीक पहले अपनी सैन्य ताकत का यह प्रदर्शन बेहद महत्वपूर्ण है।
युद्धपोत का इतिहास और भविष्य की सैन्य रूपरेखा
'कांग कोन' उत्तर कोरियाई नौसेना के बेड़े में शामिल होने वाला दूसरा आधुनिक विध्वंसक पोत है। पिछले साल इसके जलावतरण के दौरान कुछ तकनीकी खामियां आ गई थीं, जिससे इसे क्षति पहुंची थी और उस वक्त किम ने इस लापरवाही को एक गंभीर अपराध माना था। अब पूरी तरह मरम्मत होने के बाद इसे दोबारा परीक्षण के लिए समंदर में उतारा गया है, हालांकि कुछ अंतरराष्ट्रीय रक्षा विशेषज्ञ अभी भी इसकी वास्तविक युद्ध क्षमताओं को लेकर संशय में हैं। इस बीच, उत्तर कोरिया ने एलान किया है कि वह भविष्य में इसी क्षमता वाले दो और नए युद्धपोत तैयार करने पर काम कर रहा है।
डोनाल्ड ट्रंप की मौजूदगी के बीच व्हाइट हाउस के पास गोलीबारी, सीक्रेट सर्विस ने हमलावर को मार गिराया
6 Jun, 2026 11:12 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन | अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी में स्थित व्हाइट हाउस के नजदीक शनिवार, 23 मई की शाम उस समय हड़कंप मच गया, जब एक अज्ञात हमलावर ने सुरक्षा चौकी के पास पहुंचकर सुरक्षाबलों पर अंधाधुंध गोलियां बरसानी शुरू कर दीं। वारदात के वक्त अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप व्हाइट हाउस परिसर के भीतर ही थे, लेकिन वे पूरी तरह सुरक्षित रहे। सुरक्षा में तैनात सीक्रेट सर्विस के जवानों ने त्वरित जवाबी कार्रवाई करते हुए शूटर को मौके पर ही ढेर कर दिया, जबकि इस क्रॉस-फायरिंग की चपेट में आने से एक आम राहगीर जख्मी हो गया।
सुरक्षा घेरे के पास अंधाधुंध गोलीबारी
सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, यह सनसनीखेज वारदात शाम करीब 6 बजे (पूर्वी समय) 17वीं स्ट्रीट और पेंसिल्वेनिया एवेन्यू के पास बने सुरक्षा चेकपॉइंट पर हुई। संदिग्ध व्यक्ति वहां पहुंचा और उसने अचानक अपने थैले से बंदूक निकालकर तैनात अधिकारियों पर फायरिंग शुरू कर दी। चश्मदीदों और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, हमलावर ने तकरीबन 30 चक्र गोलियां चलाईं, जिससे पूरे इलाके में दहशत फैल गई और लोग अपनी जान बचाने के लिए सुरक्षित ठिकानों की तरफ भागने लगे।
जवाबी कार्रवाई में हमलावर ढेर
सीक्रेट सर्विस के आधिकारिक बयान के अनुसार, सुरक्षाकर्मियों ने हमलावर की गोलीबारी का तत्काल और कड़ा जवाब दिया। जवानों की गोली लगने से घायल हुए संदिग्ध को तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस मुठभेड़ में एक राहगीर को भी गोली लगी है, हालांकि अभी यह साफ नहीं हो पाया है कि उसे हमलावर की गोली लगी या वह सुरक्षाकर्मियों की जवाबी फायरिंग का शिकार हुआ। राहत की बात यह रही कि सीक्रेट सर्विस का कोई भी जवान इस हमले में घायल नहीं हुआ।
व्हाइट हाउस की सुरक्षा पर खड़े हुए सवाल
इस बड़ी घटना के बाद एफबीआई निदेशक काश पटेल और स्थानीय पुलिस ने सोशल मीडिया के जरिए जनता को हालात की जानकारी दी और लोगों से प्रभावित क्षेत्र से दूर रहने की अपील की। यह कोई पहला मौका नहीं है जब व्हाइट हाउस के आसपास इस तरह की सुरक्षा चूक सामने आई हो। इससे पहले पिछले साल नवंबर में भी इसी स्थान पर एक सैनिक की हत्या कर दी गई थी, जबकि लगभग एक महीना पहले 25 अप्रैल को एक होटल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान भी राष्ट्रपति ट्रंप पर हमले की कोशिश का मामला सामने आ चुका है। इन लगातार होती घटनाओं के बाद अब व्हाइट हाउस के इर्द-गिर्द सुरक्षा घेरे को और ज्यादा कड़ा कर दिया गया है।
पहचान मिटाने की चीनी साज़िश: स्वायत्तता के नाम पर तिब्बत का जबरन सांस्कृतिक रूपान्तरण
6 Jun, 2026 10:50 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
धर्मशाला | तिब्बती मानवाधिकार और लोकतंत्र केंद्र (टीसीएचआरडी) द्वारा जारी दो नई रिपोर्टों के अनुसार, तिब्बत में मानवाधिकारों की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। चीनी प्रशासन ने इस क्षेत्र पर अपना राजनीतिक और वैचारिक शिकंजा और अधिक मजबूत कर दिया है। संगठन की वार्षिक रिपोर्ट 2025 और धार्मिक स्वतंत्रता रिपोर्ट (2012-2025) में यह स्पष्ट किया गया है कि चीन की मौजूदा नीतियां तिब्बत की सांस्कृतिक, धार्मिक और नागरिक स्वतंत्रता के लिए एक बड़ा खतरा बन चुकी हैं।
तिब्बती भाषा और संस्कृति पर बढ़ता संकट
रिपोर्ट के मुताबिक, चीनी अधिकारियों ने शिक्षण संस्थानों में मंदारिन भाषा (पुतोंगहुआ) को अनिवार्य कर दिया है, जिससे स्थानीय तिब्बती भाषा हाशिए पर आ गई है। टीसीएचआरडी की कार्यकारी निदेशक ने बताया कि नए शिक्षा कानूनों के जरिए प्रारंभिक शिक्षा में चीनी भाषा के प्रयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। जानकारों का मानना है कि यह कदम एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है, ताकि आने वाली पीढ़ियों को उनकी मूल तिब्बती संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत से दूर किया जा सके।
विरोध प्रदर्शनों पर सख्त पाबंदी और दमन
तिब्बत में शांतिपूर्ण ढंग से अपनी आवाज उठाने वाले नागरिकों पर पाबंदियां और कड़ी कर दी गई हैं। बुनियादी ढांचा विकास और खनन परियोजनाओं के कारण पर्यावरण को होने वाले नुकसान का विरोध करने वाले स्थानीय लोगों को चीनी प्रशासन के गुस्से का शिकार होना पड़ रहा है। प्रदर्शनकारियों को न केवल गिरफ्तारियां, धमकियां और कड़ी निगरानी झेलनी पड़ रही है, बल्कि कई मामलों में पूरे के पूरे समुदायों को सामूहिक रूप से दंडित किया जा रहा है।
धार्मिक स्वतंत्रता और बौद्ध भिक्षुओं पर शिकंजा
रिपोर्ट में यह भी खुलासा किया गया है कि विदेशों में सक्रिय तिब्बती कार्यकर्ताओं और धार्मिक गुरुओं को भी निशाना बनाया जा रहा है। इसी सिलसिले में धार्मिक नेता तुलकु हुंगकर दोरजे की वियतनाम में हिरासत के दौरान हुई संदिग्ध मौत का भी उल्लेख किया गया है। इसके अलावा, नए नियमों के तहत तिब्बती बौद्ध मठों पर सरकारी नियंत्रण को और बढ़ा दिया गया है, जिसके तहत सभी धार्मिक संस्थानों और भिक्षुओं के लिए चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के प्रति वफादारी दिखाना अनिवार्य कर दिया गया है।
"कश्मीर पर पाक के 'क्रॉनिक प्रोपेगैंडा' पर भारत का कड़ा प्रहार— UNGA को तमाशा बनाना बंद करे इस्लामाबाद"
6 Jun, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली | संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में भारत ने एक बार फिर पाकिस्तान को वैश्विक मंच पर करारा जवाब दिया है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वथनेनी हरीश ने सुरक्षा परिषद की वार्षिक रिपोर्ट पर चर्चा के दौरान दो टूक कहा कि पाकिस्तान द्वारा कश्मीर का मुद्दा उठाना पूरी तरह से निराधार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस विषय पर किसी भी तीसरे देश को हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं है, क्योंकि यह भारत का आंतरिक मामला है। इसके साथ ही, उन्होंने सुरक्षा परिषद के नवनिर्वाचित सदस्यों—पुर्तगाल, ऑस्ट्रिया, जिम्बाब्वे, किर्गिस्तान, और त्रिनिदाद व टोबैगो—को बधाई देते हुए याद दिलाया कि इस परिषद का मुख्य काम दुनिया में शांति और सुरक्षा बनाए रखना है।
विभाजनकारी राजनीति के लिए वैश्विक मंच का दुरुपयोग
भारतीय प्रतिनिधि ने अपने संबोधन में पाकिस्तान की हरकतों पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने हमेशा की तरह इस बार भी अपने संकीर्ण राजनीतिक फायदों के लिए संयुक्त राष्ट्र जैसे प्रतिष्ठित मंच का गलत इस्तेमाल किया है। सुरक्षा परिषद में अपनी अस्थाई सदस्यता का दुरुपयोग करते हुए पाकिस्तान ने केवल गुमराह करने वाली और झूठी बातें फैलाई हैं। पर्वथनेनी हरीश ने नसीहत देते हुए कहा कि परिषद का हिस्सा बनना एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी है, और इसे व्यक्तिगत एजेंडा चलाने या भ्रामक प्रचार करने का जरिया नहीं बनाया जाना चाहिए।
जम्मू-कश्मीर पर भारत का अटूट और स्पष्ट रुख
भारत ने साफ कर दिया कि पाकिस्तान की बयानबाजी से जमीनी हकीकत को बदला नहीं जा सकता। हरीश ने जोर देकर कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का एक अटूट और अभिन्न हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा। इसके खिलाफ किया जाने वाला कोई भी दावा न केवल बेबुनियाद है, बल्कि ऐतिहासिक तथ्यों से भी परे है। पाकिस्तान चाहे जितने भी झूठे तर्क दे ले, वह सच्चाई को झुठला नहीं सकता।
सुरक्षा परिषद के ढांचे में सुधार की वकालत
भाषण के दौरान भारतीय प्रतिनिधि ने सुरक्षा परिषद के कामकाज और उसकी प्रासंगिकता पर भी महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि परिषद की सालाना रिपोर्ट केवल तथ्यों का संकलन होने के बजाय विश्लेषणात्मक होनी चाहिए, जिसमें कमियों और सुधार के क्षेत्रों को प्रमुखता से दिखाया जाए। उन्होंने मौजूदा वैश्विक चुनौतियों का हवाला देते हुए कहा कि सुरक्षा परिषद का वर्तमान ढांचा साल 1945 की भू-राजनीतिक स्थिति पर आधारित है। अगर आज के समय के हिसाब से इसमें बदलाव नहीं किए गए, तो यह संस्था भविष्य की चुनौतियों से निपटने में बेअसर साबित होगी।
UN से सम्मानित मेजर अभिलाषा बोलीं- संवाद और कूटनीति से ही सुलझेंगे संघर्ष
6 Jun, 2026 09:36 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लेबनान: संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन (UN Peacekeeping) में तैनात भारतीय सेना की जांबाज अधिकारी मेजर अभिलाषा बराक ने युद्ध प्रभावित देशों में स्थायी शांति बहाली के लिए वैश्विक स्तर पर कूटनीतिक प्रयासों और बातचीत को सबसे अहम हथियार बताया है। मेजर बराक ने जोर देकर कहा कि किसी भी युद्धग्रस्त क्षेत्र में संघर्ष समाप्त होने के बाद केवल सड़कों, पुलों और इमारतों का ढांचा खड़ा करना ही पुनर्निर्माण नहीं है, बल्कि युद्ध की विभीषिका और मानसिक आघात झेल रहे स्थानीय लोगों के मनोवैज्ञानिक घावों को भरना और उन्हें सामान्य जीवन में लौटाना सबसे बड़ी चुनौती और जरूरत है।
बातचीत और कूटनीति से ही निकलेगा रास्ता
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मेजर बराक ने वैश्विक हालातों पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, "मुझे पूरी उम्मीद है कि कूटनीतिक स्तर पर बातचीत आगे बढ़ेगी और युद्धविराम पूरी तरह जारी रहेगा। जब जमीन पर शांति होगी, तभी हम पीड़ित समुदाय के पुनर्निर्माण पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे। हमें बुनियादी ढांचे के साथ-साथ वहां के लोगों के दिलों और दिमाग को भी ठीक करना होगा।"
संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने 'मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर' से नवाजा
भारतीय सेना की इस बेटी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का गौरव बढ़ाया है। मेजर अभिलाषा बराक को हाल ही में संयुक्त राष्ट्र (UN) के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस की ओर से वर्ष 2025 का प्रतिष्ठित 'मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर' पुरस्कार प्रदान किया गया है।संयुक्त राष्ट्र प्रमुख गुटेरेस ने मेजर अभिलाषा की सराहना करते हुए उन्हें दुनिया के लिए एक 'रोल मॉडल' बताया। उन्होंने कहा कि अग्रिम मोर्चे पर एक कमांडर के रूप में मेजर बराक ने संकटग्रस्त इलाकों में हजारों महिलाओं और लड़कियों तक सीधी पहुंच बनाई और शिक्षा, स्वास्थ्य व व्यावसायिक प्रशिक्षण के जरिए उनके जीवन में एक क्रांतिकारी और सकारात्मक बदलाव लाया है।
दुनिया के सबसे खतरनाक मिशन 'UNIFIL' में संभाल रही हैं कमान
मेजर बराक वर्तमान में दक्षिणी लेबनान में संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल (UNIFIL) के तहत भारतीय बटालियन के साथ 'एंगेजमेंट टीम कमांडर' और 'जेंडर फोकल प्वाइंट' के रूप में अपनी सेवाएं दे रही हैं। यह क्षेत्र वर्तमान में बेहद संवेदनशील है, क्योंकि यहाँ ईरान समर्थित हिजबुल्लाह और इस्राइल के बीच लगातार हिंसक संघर्ष जारी रहा है। इस मिशन को दुनिया के सबसे खतरनाक शांति अभियानों में से एक माना जाता है, जहां विपरीत परिस्थितियों में काम करते हुए मार्च महीने से अब तक 7 शांति सैनिकों की जान जा चुकी है।
हाल ही में अमेरिकी मध्यस्थता के बाद यहाँ युद्धविराम लागू हुआ था, लेकिन इसके बावजूद रुक-रुक कर संघर्ष और उल्लंघन की खबरें सामने आती रही हैं, जिससे बड़े पैमाने पर तबाही हुई है।
स्थानीय महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प
मेजर बराक ने अपने जमीनी अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि युद्धग्रस्त इलाकों में कई स्थानीय महिलाएं और किशोरियां पुरुष शांति सैनिकों के साथ खुलकर अपनी समस्याएं साझा करने में हिचकिचाती थीं। ऐसे में उनकी प्राथमिकता महिलाओं के साथ सीधा संवाद स्थापित करना था।
सशक्तिकरण: महिलाओं को पैरों पर खड़ा करने के लिए विशेष व्यावसायिक और हुनर विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए गए।
जागरूकता: इसके अलावा महिलाओं और बच्चियों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, शारीरिक फिटनेस, मनोरंजक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के कार्यक्रमों का आयोजन किया गया ताकि उनके भीतर सुरक्षा और विश्वास की भावना पैदा हो सके।
भारतीय सेना की पहली महिला कॉम्बैट एविएटर हैं मेजर अभिलाषा
मेजर अभिलाषा बराक के नाम सेना में एक और स्वर्णिम इतिहास दर्ज है—वह भारतीय सेना की पहली महिला कॉम्बैट हेलीकॉप्टर पायलट (युद्धक विमान पायलट) हैं। इससे पहले वे एयर ट्रैफिक कंट्रोलर (ATC) के रूप में भी देश की शानदार सेवा कर चुकी हैं। संयुक्त राष्ट्र मिशन में उनके इस अभूतपूर्व योगदान को वैश्विक स्तर पर महिला सशक्तिकरण और शांति स्थापना की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर माना जा रहा है।
हरियाणा चुनाव से पहले कांग्रेस को एक और झटका: निलंबित विधायक रेनू बाला के पति की बीजेपी में एंट्री आज
5 Jun, 2026 01:18 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
साढौरा | कांग्रेस से निलंबित और सांसद सैलजा की समर्थक साढौरा विधायक रेनू बाला के पति इंजीनियर ऋषिपाल शुक्रवार को औपचारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने जा रहे हैं। ऋषिपाल मुख्यमंत्री नायब सैनी के नेतृत्व में भाजपा की सदस्यता ग्रहण करेंगे। इस राजनीतिक बदलाव को लेकर ऋषिपाल की ओर से व्यासपुर स्थित ऐश्वर्य पैलेस में एक विशाल जनसभा का आयोजन किया गया है, जिसमें खुद मुख्यमंत्री शिरकत करने पहुंच रहे हैं।
विधायक पत्नी रहेंगी मौजूद, पर नहीं थामेंगी भाजपा का दामन
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे दिलचस्प बात यह है कि विधायक रेनू बाला खुद भाजपा में शामिल नहीं हो रही हैं, लेकिन वे इस कार्यक्रम में मौजूद जरूर रहेंगी। राजनैतिक जानकारों का मानना है कि यदि रेनू बाला अधिकारिक रूप से भाजपा में जाती हैं, तो दल-बदल कानून के तहत उनकी विधानसभा सदस्यता (कुर्सी) खतरे में पड़ सकती है। ऋषिपाल ने भी स्पष्ट किया है कि उनकी पत्नी को कांग्रेस से केवल निलंबित किया गया है, निष्कासित नहीं। इसलिए वे तकनीकी रूप से कांग्रेस की ही विधायक रहेंगी, हालांकि वे भविष्य में कांग्रेस के आधिकारिक कार्यक्रमों से दूरी बनाकर रखेंगी।
साढौरा विधानसभा में बढ़ी हलचल और टिकट के समीकरण
ऋषिपाल के इस कदम से साढौरा विधानसभा क्षेत्र के सियासी समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं। इस जनसभा के दौरान ऋषिपाल मंच पर साढौरा से तीन बार के पूर्व विधायक और भाजपा नेता बलवंत सिंह के साथ नजर आएंगे। गौरतलब है कि रेनू बाला ने बलवंत सिंह को लगातार दो विधानसभा चुनावों में शिकस्त दी है। अब धुर विरोधियों के एक ही पाले में आ जाने से अगले विधानसभा चुनावों में भाजपा की टिकट के दावेदारों को लेकर स्थानीय स्तर पर कयासबाजी और राजनीतिक सरगर्मी काफी तेज हो गई है।
निलंबन के बाद से ही सरकारी मंचों पर बढ़ गई थी नजदीकियां
राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग के आरोप में कांग्रेस द्वारा निलंबित किए जाने के बाद से ही रेनू बाला की भाजपा से नजदीकियां लगातार चर्चा में थीं। पिछले कुछ समय से वे तमाम सरकारी आयोजनों में बतौर अतिथि शामिल हो रही थीं। हाल ही में 29 मई को कैबिनेट मंत्री अनिल विज की अध्यक्षता में हुई कष्ट निवारण समिति की बैठक में भी वे अन्य भाजपा नेताओं से पहले पहुंच गई थीं। आपको बता दें कि रेनू बाला का राजनीतिक सफर काफी उतार-चढ़ाव वाला रहा है; उन्होंने जिला परिषद का चुनाव निर्दलीय जीता, फिर भाजपा में शामिल होकर जिला परिषद अध्यक्ष बनीं और बाद में कुमारी सैलजा के प्रभाव में आकर कांग्रेस में शामिल होकर विधायक बनी थीं। इस कार्यक्रम से ठीक पहले मुख्यमंत्री सरस्वतीनगर में एक नए पशु अस्पताल का उद्घाटन भी करेंगे।
जींद को मिला नया स्थायी कुलपति: डॉ. रामपाल सैनी के पदभार ग्रहण करने पर विश्वविद्यालय में जश्न, भव्य सम्मान समारोह आयोजित
5 Jun, 2026 01:12 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जींद | चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय (सीआरएसयू) में शुक्रवार को एक विशेष सम्मान समारोह का आयोजन किया गया, जो नवनियुक्त स्थायी कुलपति प्रोफेसर डॉ. रामपाल सैनी के स्वागत में समर्पित था। इस दौरान पूरे विश्वविद्यालय परिसर में जश्न और उत्साह का माहौल नजर आया। सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों, प्रबुद्ध नागरिकों, विश्वविद्यालय के आला अधिकारियों, प्राध्यापकों और कर्मचारियों ने डॉ. सैनी का गर्मजोशी से स्वागत किया और उन्हें इस शीर्ष पद की कमान संभालने पर बधाई दी।
काफिले के साथ पहुंचे नए कुलपति, रास्ते भर हुआ अभिनंदन
डॉ. रामपाल सैनी को स्थायी कुलपति बनाए जाने की आधिकारिक घोषणा के बाद से ही उनके प्रशंसकों और शुभचिंतकों में भारी खुशी देखी जा रही थी। स्वागत समारोह के तहत उन्हें एक बड़े काफिले के साथ विश्वविद्यालय के मुख्य प्रशासनिक भवन तक लाया गया। इस दौरान रास्ते में जगह-जगह लोगों ने फूल-मालाएं पहनाकर उनका भव्य स्वागत किया। जैसे ही उनका काफिला परिसर के भीतर पहुंचा, वहां मौजूद समस्त स्टाफ और शिक्षक वर्ग ने तालियों की गड़गड़ाहट और फूलों के साथ उनका अभिनंदन किया।
शिक्षा और प्रशासन के लंबे अनुभव से मिलेगी नई दिशा
समारोह को संबोधित करते हुए विभिन्न वक्ताओं ने कहा कि डॉ. सैनी के पास शिक्षा जगत और प्रशासनिक कार्यों का एक लंबा व समृद्ध अनुभव है, जिसका सीधा लाभ अब विश्वविद्यालय को मिलेगा। कार्यक्रम में मौजूद शिक्षाविदों ने उम्मीद जताई कि उनके कुशल मार्गदर्शन में यह संस्थान आने वाले समय में शैक्षणिक गुणवत्ता, नए शोध कार्यों और सुदृढ़ प्रशासनिक व्यवस्था के मामले में कामयाबी के नए आयाम स्थापित करेगा।
अतिरिक्त कुलपति से स्थायी कुलपति तक का सफर
आपको बता दें कि डॉ. रामपाल सैनी इस स्थाई नियुक्ति से पहले इसी विश्वविद्यालय में अतिरिक्त कुलपति (एडिशनल वीसी) के पद पर कार्यरत थे। अपने उस कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई जटिल प्रशासनिक चुनौतियों का कुशलतापूर्वक समाधान किया और संस्थान की विकास योजनाओं को रफ्तार दी। उनकी इसी उत्कृष्ट कार्यशैली, समर्पण और अनुभव को आधार बनाते हुए प्रशासन ने उन्हें अब स्थायी तौर पर कुलपति की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। कार्यक्रम के समापन पर छात्रों और कर्मचारियों ने उन्हें शुभकामनाएं देते हुए विश्वविद्यालय के उज्ज्वल भविष्य का संकल्प लिया।
पशु अधिकारों पर भिड़े मेक्सिको और ब्राजील, आवारा कुत्ते बने विवाद का कारण
5 Jun, 2026 12:50 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन: दुनिया भर में अक्सर देशों के बीच जमीनी सीमाओं, व्यापारिक प्रतिबंधों या ऐतिहासिक धरोहरों को लेकर विवाद देखने को मिलते हैं, लेकिन इन दिनों लैटिन अमेरिका के दो बड़े देशों के बीच एक आवारा कुत्ते की नस्ल को लेकर अनोखी कूटनीतिक तकरार छिड़ गई है। मेक्सिको और ब्राजील के बीच 'कारोमेलो' नाम की एक बेहद लोकप्रिय आवारा कुत्ते की नस्ल पर अपना हक जताने को लेकर मनमुटाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
क्यों शुरू हुआ दोनों देशों के बीच यह विवाद?
इस पूरे विवाद की मुख्य वजह मेक्सिको द्वारा इस नस्ल को आधिकारिक तौर पर अपने देश की राष्ट्रीय धरोहर घोषित करना है। मेक्सिको ने इस कुत्ते की नस्ल को विशुद्ध मेक्सिकन करार दे दिया, जिससे ब्राजील के नागरिक बेहद आहत और नाराज हैं। जैसे ही यह खबर ब्राजील पहुंची, वहां के लोगों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। ब्राजील के नागरिकों ने इस फैसले का सार्वजनिक रूप से कड़ा विरोध किया है और अपनी सरकार से मांग की है कि वे इस नस्ल को ब्राजील की पहचान के रूप में संरक्षित करने के लिए कूटनीतिक कदम उठाएं। हालांकि, एक कड़वी सच्चाई यह भी है कि दोनों ही देशों में इस नस्ल के लाखों कुत्ते आज भी सड़कों पर बेसहारा घूमने को मजबूर हैं।
ब्राजील में सांस्कृतिक प्रतीक है 'कारोमेलो'
कारोमेलो नस्ल के ये कुत्ते अपने खास भूरे रंग और फुर्तीले शरीर की वजह से दोनों ही देशों में भारी संख्या में पाए जाते हैं। ब्राजील में इस कुत्ते की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि साल 2019 में इसके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद यह वहां का एक सांस्कृतिक प्रतीक बन गया था। स्थिति यहां तक पहुंच गई थी कि ब्राजील की मुद्रा (दस रियाश के नोट) पर इस कुत्ते की तस्वीर छपवाने के लिए एक ऑनलाइन याचिका शुरू की गई, जिसे करीब 50 हजार लोगों का समर्थन मिला। इसके अलावा इस कुत्ते की लोकप्रियता पर एक प्रसिद्ध ओटीटी प्लेटफॉर्म पर फिल्म भी बनाई जा चुकी है। ब्राजील के लोग इसे अपने इतिहास के संघर्ष और बदलाव का सबसे बड़ा प्रतीक मानते हैं।
क्या कहते हैं मेक्सिको के विशेषज्ञ?
मेक्सिको द्वारा इस नस्ल को अपने राष्ट्रीय प्रतीकों में शामिल करने के बाद सोशल मीडिया पर ब्राजील के लोगों ने मेक्सिकन सरकार की तीखी आलोचना की। इस पर मेक्सिको के पशु विशेषज्ञों का कहना है कि भले ही ब्राजील वह पहला देश था जिसने इस कुत्ते को सार्वजनिक रूप से दुनिया के सामने पहचान दिलाई, लेकिन यह अनोखा कुत्ता केवल किसी एक देश की जागीर नहीं है, बल्कि यह पूरे लैटिन अमेरिका की साझी विरासत का हिस्सा है।
300 नस्लों का जटिल मिश्रण है यह कुत्ता
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो कारोमेलो कुत्ते की कहानी इस पूरे क्षेत्र के इतिहास से गहराई से जुड़ी हुई है। डीएनए जांच करने वाली एजेंसियों के मुताबिक, यह कुत्ता एशिया, अफ्रीका, अमेरिका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया की करीब 300 अलग-अलग नस्लों का एक जटिल मिश्रण है। इसकी शुरुआत औपनिवेशिक काल में हुई थी जब यूरोपीय आक्रमणकारी अपने साथ विभिन्न नस्लों के शिकारी और पालतू कुत्ते लेकर लैटिन अमेरिका आए थे। दशकों तक इन नस्लों के बीच हुए अनियंत्रित प्रजनन के कारण अंततः इस अनोखी कारोमेलो नस्ल का जन्म हुआ।
निवाड़ी में विकास का नया अध्याय आरंभ हो रहा है: मुख्यमंत्री डॉ. यादव
