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तेल की लाइफलाइन Strait of Hormuz पर ट्रंप की रणनीति — कितना कामयाब होगा यह दांव?
14 Apr, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत टूटने और होर्मुज की घेराबंदी की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकी के बाद मिडिल ईस्ट का टेंशन फिर होर्मुज की खाड़ी पर केंद्रीत हो गया है। ईरान ने यहां बारूद बिछाया हुआ है, यहां से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूलने की बात कर रहा है। ईरान के इस चक्रव्यू को तोड़ने के लिए अमेरिका नई घेराबंदी करने की तैयारी में है। इन स्थितियों ने वैश्विक ऊर्जा, सुरक्षा और अर्थव्यवस्था के लिए खतरे की घंटी बजा दी है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण चेंकपॉइंट है। दुनिया के कुल पेट्रोलियम उपभोग का लगभग 20 प्रतिशत इस संकरे रास्ते से होकर गुजरता है। ईरान की भौगोलिक स्थिति इस मार्ग पर प्राकृतिक बढ़त देती है। सालों से ईरान ने यहां अपनी सैन्य क्षमता को एसिमेट्रिक वॉरफेयर (असमान युद्ध) के लिए तैयार किया है। ईरान के पास अभी हज़ारों की संख्या में फास्ट अटैक क्राफ्ट्स, आधुनिक समुद्री सुरंगें और तट पर तैनात लंबी दूरी की मिसाइलें हैं। ये हथियार किसी भी बड़े नौसैनिक जहाज या तेल टैंकर को निशाना बनाने की ताकत रखते हैं। जानकारों का मानना है कि ईरान पूरे जलमार्ग को भौतिक रूप से बंद करने के बजाय, यातायात में व्यवधान पैदा कर तेल की कीमतों में भारी उछाल लाने की रणनीति अपना सकता है। ईरान का साफ कहना है व्यपारिक जहाज के गुजरने पर कोई रोक नहीं है। बस इस रास्ते से कोई भी युद्धपोत हालात समान्य होने के बाद ही गुजर सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका अब ईरान की आक्रामकता को रोकने के लिए एक जोखिम भरी नई रणनीति पर काम कर रहा है। अमेरिकी अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि यदि ईरान ने अंतरराष्ट्रीय शिपिंग को बाधित करना जारी रखा,तब अमेरिका होर्मुज की नाकाबंदी करेगा। हालांकि, यह कदम बेहद संवेदनशील है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत किसी देश की समुद्री नाकाबंदी करना युद्ध की घोषणा के बराबर होता है। अभी यह भी साफ नही है कि अमेरिका क्या उन विदेशी जहाजों के ख़िलाफ बल प्रयोग करेगा जो अमेरिकी ब्लॉकेड को नजरअंदाज करेंगे? अगर चीन जैसे देशों के जहाज आए, तब क्या अमेरिका उनके खिलाफ भी बलप्रयोग करेगा? इन सवालों के जवाब साफ नहीं हैं। इस नाकेबंदी में नाटो देशों ने शामिल होने से इंकार किया है। वैसे अमेरिकी नौसेना के 5वें बेड़े को हाई अलर्ट पर रखा गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि बातचीत की नाकामी के बाद फिर से सीधे टकराव से पश्चिम एशिया में एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध की शुरुआत हो सकती है, जिससे बचना अब तक दोनों देशों की प्राथमिकता रही है।
एक रिपोर्ट में कहा गया हैं कि यदि होर्मुज में तनाव के कारण तेल आपूर्ति बाधित होती है, तब कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती हैं। इसका सीधा असर भारत और चीन जैसे देशों पर पड़ेगा, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस मार्ग पर बहुत अधिक निर्भर हैं। इसके अलावा, बीमा कंपनियों ने इस क्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों के लिए वॉर रिस्क प्रीमियम बढ़ा दिया है, जिससे वैश्विक रसद की लागत बढ़ गई है। ब्रिटेन और अन्य पश्चिमी देश इस क्षेत्र में फ्रीडम ऑफ नेविगेशन बनाए रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
अमेरिका को क्यूबा की खुली धमकी, राष्ट्रपति बोले— ‘हमले का जवाब सख्ती से देंगे’
13 Apr, 2026 04:19 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज-कैनेल ने अमेरिका को साफ चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के पास क्यूबा पर सैन्य हमला करने या उनकी सरकार को सत्ता से हटाने का कोई सही कारण नहीं है। एनबीसी न्यूज के फेसम कार्यक्रम ‘मीट द प्रेस’ में दिए गए इंटरव्यू में डियाज-कैनेल ने यह बात कही है। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका ने क्यूबा पर हमला किया तो यह बहुत महंगा पड़ेगा। इससे पूरे इलाके की सुरक्षा भी खतरे में पड़ जाएगी।
राष्ट्रपति ने कहा कि अगर अमेरिका हमला करता है तो क्यूबा के लोग अपने देश की रक्षा जरूर करेंगे। उन्होंने कहा, “अगर ऐसा समय आया तो मुझे नहीं लगता कि अमेरिका के पास क्यूबा पर सैन्य हमला करने, सर्जिकल ऑपरेशन करने या राष्ट्रपति को अगवा करने का कोई औचित्य होगा।” उन्होंने कहा, “अगर हमला हुआ तो लड़ाई होगी, संघर्ष होगा। हम अपना बचाव करेंगे। जरूरत पड़ी तो हम अपनी जान भी दे देंगे। क्योंकि हमारे राष्ट्रगान में लिखा है कि वतन के लिए मरना ही जीना है।”
राष्ट्रपति मिगुएल डियाज-कैनेल का यह बयान ऐसे समय में आया है जब क्यूबा और अमेरिका के बीच बातचीत हो रही है। दोनों देशों ने बातचीत की पुष्टि की है, लेकिन बातचीत के बारे में कोई डिटेल अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। फिर भी दोनों देशों के बीच तनाव अभी भी बना हुआ है। डियाज-कैनेल ने अमेरिका पर क्यूबा के खिलाफ शत्रुतापूर्ण नीति अपनाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका को क्यूबा से कोई मांग करने का नैतिक अधिकार नहीं है, फिर भी क्यूबा बिना किसी शर्त के बातचीत के लिए तैयार है। किसी भी मुद्दे पर चर्चा की जा सकती है। उन्होंने साफ कहा कि क्यूबा अपने राजनीतिक सिस्टम में कोई बदलाव नहीं करेगा। उन्होंने कहा, “हम अमेरिका से अपने सिस्टम में बदलाव की मांग नहीं करते तो अमेरिका भी हमें ऐसा करने को नहीं कह सकता।”
क्यूबा इस समय गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है। राष्ट्रपति डियाज-कैनेल ने इसके लिए अमेरिका की लगाई गई ऊर्जा नाकेबंदी को जिम्मेदार ठहराया। इस नाकेबंदी की वजह से स्वास्थ्य सेवाएं, सार्वजनिक परिवहन और रोजमर्रा की चीजों का उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। क्यूबा अपनी जरूरत का सिर्फ 40 प्रतिशत ईंधन ही खुद पैदा कर पाता है। जनवरी में वेनेजुएला से तेल की आपूर्ति बंद हो जाने के बाद स्थिति और खराब हो गई है। मार्च महीने में रूस से एक टैंकर कच्चा तेल लेकर क्यूबा पहुंचा। यह तीन महीनों में पहली आपूर्ति थी। रूस ने एक और टैंकर भेजने का वादा भी किया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने क्यूबा की सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था। डियाज-कैनेल ने ट्रंप के इन बयानों को चेतावनी के तौर पर लिया। उन्होंने कहा कि क्यूबा को अपने लोगों और अपने देश की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार रहना होगा। कुल मिलाकर, क्यूबा साफ संदेश दे रहा है कि वह अमेरिकी दबाव के सामने नहीं झुकेगा। चाहे आर्थिक मुश्किलें कितनी भी हों, देश अपनी स्वतंत्रता और राजनीतिक व्यवस्था की रक्षा के लिए लड़ने को तैयार है।
ट्रंप बनाम पोप: ईरान परमाणु विवाद पर बयानबाजी तेज, राष्ट्रपति का तीखा जवाब
13 Apr, 2026 04:13 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पोप लियो ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की ईरान युद्ध नीति को लेकर कड़ी आलोचना की. उन्होंने इस युद्ध को अन्यायपूर्ण बताया. पोप के बयान के बाद ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट शेयर किया है. ट्रंप ने कहा कि पोप लियो अपराध के मामले में कमजोर हैं और विदेश नीति के लिए बहुत बुरे हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति ने जवाब देते हुए कहा कि वो ट्रंप प्रशासन के ‘डर’ की बात करते हैं, लेकिन उस डर का जिक्र नहीं करते जो कैथोलिक चर्च और बाकी सभी ईसाई संगठनों को COVID के दौरान था. उस समय जब पादरियों, मंत्रियों और बाकी सभी को चर्च की प्रार्थनाएं करने के लिए गिरफ्तार किया जा रहा था, तब भी जब वे बाहर निकल रहे थे और एक-दूसरे से दस या बीस फुट की दूरी पर थे.
ट्रंप ने कहा कि मुझे उनके भाई लुइस, उनसे कहीं ज्यादा पसंद हैं, क्योंकि लुइस पूरी तरह से MAGA समर्थक हैं. वह बात समझते हैं, लेकिन लियो नहीं. ट्रंप ने कहा कि मुझे ऐसा पोप नहीं चाहिए जो यह सोचे कि ईरान के पास परमाणु हथियार होना ठीक है. मुझे ऐसा पोप नहीं चाहिए जो यह सोचे कि अमेरिका का वेनेज़ुएला पर हमला करना गलत था. एक ऐसा देश जो अमेरिका में भारी मात्रा में नशीले पदार्थ भेज रहा था और इससे भी बुरा, अपनी जेलों को खाली करके हत्यारों, नशीले पदार्थों के तस्करों और अपराधियों को हमारे देश में भेज रहा था.
ट्रंप ने कहा कि मुझे ऐसा पोप नहीं चाहिए जो अमेरिका के राष्ट्रपति की आलोचना करे, क्योंकि मैं ठीक वही कर रहा हूं जिसके लिए मुझे भारी बहुमत से चुना गया था. उन्होंने कहा कि अपराध के मामलों को रिकॉर्ड स्तर तक कम करना और इतिहास का सबसे बेहतरीन शेयर बाजार बनाना. लियो को शुक्रगुजार होना चाहिए, क्योंकि जैसा कि सब जानते हैं, उनका पोप बनना एक चौंकाने वाला सरप्राइज था. पोप बनने की किसी भी लिस्ट में उनका नाम नहीं था और चर्च ने उन्हें सिर्फ इसलिए चुना क्योंकि वह एक अमेरिकी थे. उन्हें लगता है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से निपटने का यही सबसे अच्छा तरीका होगा. अगर मैं व्हाइट हाउस में न होता, तो लियो वेटिकन में न होते.
ट्रंप ने कहा कि बदकिस्मती से अपराध और परमाणु हथियारों के मामले में लियो की कमजोरी मुझे बिल्कुल भी रास नहीं आती और न ही यह बात कि वह डेविड एक्सलरोड जैसे ओबामा-समर्थकों से मिलते हैं. ये वामपंथी विचारधारा के एक ‘लूजर’ (नाकाम व्यक्ति) हैं और उन लोगों में से एक हैं जो चाहते थे कि चर्च जाने वालों और पादरियों को गिरफ्तार किया जाए. ट्रंप ने कहा कि लियो को एक पोप के तौर पर अपना रवैया सुधारना चाहिए, अपनी समझ का इस्तेमाल करना चाहिए, कट्टरपंथी वामपंथियों को खुश करना बंद करना चाहिए और एक महान पोप बनने पर ध्यान देना चाहिए. न कि एक राजनेता बनने पर. ट्रंप ने कहा कि इससे उन्हें बहुत ज्यादा नुकसान हो रहा है और, इससे भी ज्यादा जरूरी बात, इससे कैथोलिक चर्च को नुकसान पहुंच रहा है.
होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ी तनातनी, ईरान के तेवर के बाद अमेरिकी युद्धपोत ने बदला रुख
13 Apr, 2026 04:07 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। ईरान और अमेरिका (Iran and America) के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। इस्लामाबाद में हुई वार्ता (talks in islamabad) बेनतीजा रहने के बाद हालात और बिगड़ गए हैं। इसी बीच ईरान ने दावा किया है कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य में एक अमेरिकी जंगी जहाज को चेतावनी देकर पीछे हटने पर मजबूर कर दिया।
‘आखिरी चेतावनी’ के बाद पीछे हटा जहाज
ईरानी मीडिया के मुताबिक, उसकी सेना ने अमेरिकी युद्धपोत को स्पष्ट चेतावनी दी कि अगर वह आगे बढ़ा तो हमला किया जाएगा। दावा है कि इसके बाद अमेरिकी नौसेना का जहाज क्षेत्र छोड़कर पीछे हट गया।
बारूदी सुरंग हटाने पहुंचे थे अमेरिकी जहाज
बताया जा रहा है कि अमेरिकी नौसेना होर्मुज जलडमरूमध्य में बिछाई गई बारूदी सुरंगों को हटाने के लिए वहां पहुंची थी। इस पर ईरान ने कड़ा ऐतराज जताते हुए जहाजों को दूर रहने की चेतावनी दी थी।
ईरान के सरकारी मीडिया के अनुसार, उसकी क्रूज मिसाइलें अमेरिकी विध्वंसक जहाजों को निशाना बनाने की स्थिति में थीं और हमलावर ड्रोन भी तैनात कर दिए गए थे। बताया गया कि अमेरिकी जहाजों को 30 मिनट के भीतर क्षेत्र खाली करने का अल्टीमेटम दिया गया।
वार्ता विफल, युद्धविराम पर संकट
इस्लामाबाद में हुई लंबी वार्ता के बावजूद कोई समझौता नहीं हो सका। फिलहाल लागू दो हफ्तों का युद्धविराम अनिश्चितता में है और दोनों देश एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं।
ट्रंप का सख्त रुख
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य में सख्त कदम उठा सकता है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी नौसेना को निर्देश दिए गए हैं कि वह समुद्री मार्गों की निगरानी बढ़ाए और संदिग्ध गतिविधियों पर कार्रवाई करे।
परमाणु मुद्दा बना सबसे बड़ी अड़चन
वार्ता में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे जेडी वेंस ने कहा कि समझौता न होने की बड़ी वजह ईरान का अपने परमाणु कार्यक्रम पर अडिग रहना है। अमेरिका चाहता है कि ईरान इसे पूरी तरह खत्म करे, जबकि तेहरान इस पर सहमत नहीं हुआ।
बढ़ सकता है वैश्विक असर
विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ता तनाव वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में हालात और गंभीर होने की आशंका जताई जा रही है।
ट्रंप की चेतावनियों पर ईरान का पलटवार, संसद अध्यक्ष ने कहा— दबाव में नहीं झुकेंगे
13 Apr, 2026 03:59 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान। ईरान (Iran) के संसद अध्यक्ष (Parliament Speaker) मोहम्मद बाकेर गालिबाफ (Mohammad Baqer Ghalibaf) ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) की हाल की धमकियों का ईरानी जनता पर कोई असर नहीं पड़ता। उन्होंने कहा, ये धमकियां बेअसर हैं और ईरान अपने रुख पर मजबूत रहेगा। हालांकि, उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत में कुछ प्रगति हो रही है।
ईरानी सरकारी मीडिया और अल-जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, गालिबाफ ने कहा कि तेहरान ने बातचीत के दौरान ‘बहुत अच्छे प्रस्ताव’ दिए हैं, जिससे बातचीत आगे बढ़ी है। उन्होंने कहा, ट्रंप की हाल की धमकियों का ईरानी जनता पर कोई असर नहीं है।
हम किसी भी धमकी के आगे नहीं झुकेंगे: गालिबाफ
उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति को चेतावनी देते हुए कहा, अगर आप लड़ेंगे तो हम भी लड़ेंगे और अगर आप समझदारी से आएंगे तो हम भी समझदारी से बात करेंगे। उन्होंने आगे कहा, हम किसी भी धमकी के आगे नहीं झुकेंगे। उन्हें हमारी इच्छाशक्ति को फिर से परखने दीजिए, ताकि हम उन्हें बड़ा सबक सिखा सकें।
बातचीत की मैच पर वापस आएगा ईरान: ट्रंप
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को कहा कि उन्हें भरोसा है कि ईरान आखिरकार अमेरिका की शर्तें मान लेगा। ट्रंप ने कहा कि ईरान वापस बातचीत की मेज पर आएगा। उन्होंने कहा, मैं चाहता हूं कि वे हमें सब कुछ दें। ईरान के पास कोई ताकत नहीं बची है। उनके पास कोई बढ़त नहीं हैं।
उन्होंने अपनी हालिया सख्त बयानबाजी का बचाव भी किया और कहा कि यही बातचीत शुरू होने की वजह बनी। ट्रंप ने कहा कि ईरान के ‘अमेरिका मुर्दाबाद’ जैसे नारे भी लगते हैं, इसलिए कड़ा जवाब जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी एक टिप्पणी ने ही ईरान को बातचीत की मेज पर ला दिया और वह अभी भी वहीं मौजूद हैं।
पुलिस कार्रवाई में दो अपराधी घायल, मुठभेड़ में बढ़ा तनाव
13 Apr, 2026 03:16 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
करनाल। मुनक रोड पर बजीदा जाटान लिंक रोड पर रविवार देर रात पुलिस और दो बदमाशों के बीच मुठभेड़ हो गई। पुलिस की सीआईए- टू की टीम को देखते ही बदमाशों ने फायरिंग शुरू कर दी थी। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में दोनों बदमाशों की टांग में गोली लगी। वहीं, बदमाशों की ओर से चलाई गोली सहायक निरीक्षक मनोज की छाती में लगी। लेकिन बुलेटप्रूफ जैकेट पहने होने के कारण जान बच गई। दोनों बदमाशों को घायल अवस्था में काबू कर अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। पुलिस ने दोनों के पास से दो अवैध पिस्टल और 100 से ज्यादा गोलियां और एक बाइक बरामद की है। आरोपियों की पहचान सोनीपत जिला के गांव जाजल निवासी रौनक पुत्र सूरज और गांव गढ़ मलिकपुर निवासी इमरान पुत्र अली हसन के रूप में हुई है। रौनक की बाईं टांग और इमरान की दाईं टांग में गोली लगी है। दोनों को तुरंत करनाल के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती करवाया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। पुलिस ने मधुबन थाने में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अब दोनों को कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लिया जाएगा। दोनों ही आरोपी किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने के लिए पहुंचे थे।
गेट पास और बायोमेट्रिक सिस्टम ठप, मंडियों में कामकाज बाधित
13 Apr, 2026 01:12 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
यमुनानगर। जगाधरी अनाज मंडी में गेहूं लेकर पहुंचे किसानों को उस समय भारी परेशानी का सामना करना पड़ा जब सरकारी पोर्टल बार-बार ठप हो गया। बायोमेट्रिक प्रक्रिया बाधित होने से मंडियों में गेट पास नहीं कट पाए। देखते ही देखते मंडियों के बाहर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की लंबी लाइनें लगने लगी। गेट पास कटने में समय लगने से नाराज किसानों ने मंडी गेट पर विरोध जताया। ऐसे में मौके पर पुलिस भी बुलानी पड़ी। किसानों का आरोप है कि सरकार द्वारा शुरू किया गया ऑनलाइन पोर्टल बार-बार बंद हो रहा है, जिससे गेट पास जारी करने की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। किसान सुल्तान हरनौली, सोहिल हरनौल, विकास, यशपाल, कर्मबीर ने बताया कि साइट हर थोड़ी देर में क्रैश हो जाती है, जिसके चलते बायोमेट्रिक सत्यापन भी नहीं हो पा रहा। कई किसानों ने कहा कि उन्हें दो-दो घंटे तक लाइन में खड़ा रहना पड़ रहा है, जिससे समय और श्रम दोनों की बर्बादी हो रही है।
मंडी में बढ़ती भीड़ और तकनीकी खामियों के चलते हालात तनावपूर्ण हो गए। नाराज किसानों ने प्रशासन और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए नए नियमों पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि बिना पर्याप्त व्यवस्था के लागू की गई यह नई प्रणाली किसानों के लिए परेशानी का कारण बन गई है। किसानों ने मांग की है कि पोर्टल की खामियों को जल्द दूर किया जाए और गेट पास व बायोमेट्रिक प्रक्रिया को सरल बनाया जाए, ताकि उन्हें अनावश्यक परेशानियों से राहत मिल सके। प्रशासन की ओर से फिलहाल स्थिति को संभालने के प्रयास किए जा रहे हैं।
दो दिन से दिक्कत आ रही है: विशाल गर्ग
मार्केट कमेटी सचिव विशाल गर्ग ने बताया कि पिछले दो दिनों से साइट में दिक्कत आ रही है। रविवार को भी दिक्कत आई। इस समस्या के बारे में उच्च अधिकारियों को अवगत करवा दिया है। जल्द ही समाधान करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
10 मई को हरियाणा के तीन नगर निगमों में होगा मतदान
13 Apr, 2026 01:09 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़। हरियाणा में निकाय चुनाव का बिगुल बज गया है। पंचकूला, अंबाला और सोनीपत नगर निगम के चुनाव 10 मई को होंगे। हरियाणा राज्य निर्वाचन आयोग ने इसका एलान किया। निगम मेयर के लिए 30 लाख खर्च सीमा तय की गई है। सदस्य के लिए यह 7.50 लाख रुपये है। नामांकन 21 अप्रैल से 25 अप्रैल तक होंगे। स्क्रूटनी 27 अप्रैल को होगी। नामांकन वापिस की अंतिम तिथि 28 अप्रैल होगी। इसी दिन चुनाव चिन्ह बांटे जाएंगे। चुनाव 10 मई को होंगे। पुनः मतदान की जरूरत पड़ी तो वह 12 मई को होंगे। 13 मई को नतीजे आएंगे। चुनाव आयुक्त देवेंद्र कल्याण ने कहा कि नगर निगम चुनाव ईवीएम से ही होंगे। वीवीपैट का इस्तेमाल नहीं होगा।
कांग्रेस ने स्थानीय निकाय चुनाव के लिए घोषणा पत्र समिति बनाई
हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने राज्य में होने वाले आगामी स्थानीय निकाय चुनावों के लिए एक घोषणा पत्र समिति का गठन किया है। इस समिति की चेयरपर्सन विधायक गीता भुक्कल होंगी। समिति में चौ. आफताब अहमद, विधायक बीबी बतरा, विधायक जितेंद्र कुमार भारद्वाज, सदस्य एआईसीसी, जसबीर मल्लौर, पूर्व विधायक, संजीव भारद्वाज, मीडिया एवं कार्यालय प्रभारी, पीसीसी, तरुण चुघ, सतीश तेजली, जयवीर अंतिल शामिल हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने बताया कि इस समिति को स्थानीय निकाय चुनावों से संबंधित प्रमुख मुद्दों को ध्यान में रखते हुए शीघ्र ही चुनाव घोषणा पत्र तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है। साथ ही समिति को स्थानीय निवासियों से सक्रिय रूप से सुझाव और विचार प्राप्त करने के लिए भी कहा गया है, ताकि घोषणा पत्र जनता की समस्याओं और आकांक्षाओं को सही रूप में प्रतिबिंबित कर सके।
पर्यावरण संकट का दावा: न्यूक्लियर प्लांट से हडसन नदी में रेडियोधर्मी रिसाव, करोड़ों मछलियों की मौत का आरोप
13 Apr, 2026 12:17 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। परमाणु ऊर्जा संयंत्र आधुनिक (Nuclear Power Plants) समय में ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने का महत्वपूर्ण स्रोत माने जाते हैं, लेकिन अमेरिका (America) के न्यूयॉर्क स्थित इंडियन पॉइंट न्यूक्लियर पावर प्लांट (Indian Point Nuclear Power Plant) को लेकर एक गंभीर रिपोर्ट सामने आई है। इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस संयंत्र ने करीब 60 वर्षों तक हडसन नदी में लाखों गैलन रेडियोधर्मी अपशिष्ट जल छोड़ा, जिससे पर्यावरण और जलीय जीवन पर गंभीर असर पड़ा।
संयंत्र की शुरुआत 16 सितंबर 1962 में हुई थी और 2021 में इसे पूरी तरह बंद कर दिया गया। 1970 के दशक की एक रिपोर्ट में यह भी उल्लेख मिलता है कि यह संयंत्र हर साल 2 से 3 मिलियन गैलन तक उपचारित अपशिष्ट जल नदी में छोड़ता था। हालांकि, प्रबंधन का कहना था कि यह पानी उपचार प्रक्रिया से गुजरकर ही छोड़ा जाता था।
मछलियों की बड़े पैमाने पर मौत का दावा
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि संयंत्र की शीतलन प्रणाली के कारण बड़ी संख्या में मछलियों की मौत हुई। नदी से पानी खींचने के लिए लगाए गए इनटेक सिस्टम में मछलियाँ फंस जाती थीं, जिससे भारी नुकसान हुआ। अनुमानों के अनुसार, 1962 से 1970 के बीच लगभग 15 लाख से 50 लाख मछलियों की मौत हुई। समय के साथ यह समस्या और गंभीर होती गई, क्योंकि मछलियाँ संयंत्र के आसपास के हिस्सों में इकट्ठा होने लगी थीं, जिससे उनका जोखिम और बढ़ गया।
स्वामित्व और प्रबंधन पर उठे सवाल
संयंत्र के वर्तमान मालिक होल्टेक इंटरनेशनल ने स्वीकार किया है कि वर्षों तक अपशिष्ट जल का उत्सर्जन होता रहा, हालांकि कंपनी का कहना है कि उनके नियंत्रण में आने के बाद सभी गतिविधियां निर्धारित सुरक्षा मानकों के भीतर की गई हैं। होल्टेक ने यह भी स्पष्ट किया कि अब उसका मुख्य काम संयंत्र के डीकमीशनिंग (बंद करने की प्रक्रिया) और पुराने रेडियोधर्मी कचरे के सुरक्षित प्रबंधन का है, जिसमें प्रयुक्त ईंधन का निपटान भी शामिल है।
पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर चिंता बढ़ी
रिपोर्ट में यह संकेत दिया गया है कि दशकों तक चले इस उत्सर्जन का असर हडसन नदी के पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ा है। जलीय जीवन प्रभावित हुआ है और स्थानीय पर्यावरण पर भी दीर्घकालिक प्रभाव की आशंका जताई गई है।
चीन का बड़ा कदम: PoK के पास नई प्रशासनिक इकाई, भारत ने जताई आपत्ति
13 Apr, 2026 11:20 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। एक ओर दुनिया ईरान और अमेरिका (Iran and America) के बीच बढ़ते तनाव पर नजरें टिकाए हुए है, वहीं दूसरी ओर चीन ने सीमावर्ती क्षेत्र में बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है। चीन ने पाकिस्तान (China and Pakistan) अधिकृत कश्मीर (PoK) और अफगानिस्तान की सीमा से सटे अपने शिनजियांग क्षेत्र में एक नई प्रशासनिक इकाई (काउंटी) स्थापित कर दी है, जिससे क्षेत्रीय समीकरण फिर गरमा गए हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, “सेनलिंग” नाम की यह नई काउंटी काराकोरम पर्वतमाला के पास स्थित है और PoK के बेहद करीब मानी जा रही है। इस कदम को चीन की सुरक्षा रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है, खासकर वाखान कॉरिडोर की निगरानी और उइगर गतिविधियों पर नियंत्रण के संदर्भ में।
एक साल में तीसरी नई इकाई
चीन इससे पहले भी शिनजियांग में “हेआन” और “हेकांग” नाम की दो नई काउंटियों का गठन कर चुका है। विशेषज्ञों का कहना है कि सीमावर्ती इलाकों में लगातार प्रशासनिक ढांचा मजबूत करना चीन की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है।
भारत ने जताया कड़ा ऐतराज
भारत पहले ही इन कदमों का विरोध कर चुका है। भारत का साफ कहना है कि इन नई काउंटियों के कुछ हिस्से केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के अंतर्गत आते हैं। खास तौर पर अक्साई चिन को लेकर भारत ने अपनी संप्रभुता दोहराई है और ऐसे किसी भी बदलाव को अस्वीकार्य बताया है।
काशगर के अधीन रहेगा नया जिला
जानकारी के अनुसार, सेनलिंग काउंटी को काशगर प्रशासन के तहत रखा जाएगा। काशगर ऐतिहासिक रूप से पुराने सिल्क रूट का अहम केंद्र रहा है और यही क्षेत्र चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) की शुरुआत का भी प्रमुख बिंदु है, जो PoK से होकर गुजरता है।
क्या है चीन की रणनीति?
विशेषज्ञों के मुताबिक, यह कदम केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि सीमा क्षेत्रों पर पकड़ मजबूत करने की रणनीति है। वाखान कॉरिडोर-करीब 74 किमी लंबी यह संकरी पट्टी—चीन के लिए बेहद संवेदनशील मानी जाती है, क्योंकि यह ताजिकिस्तान और PoK के बीच स्थित है।
चीन को लंबे समय से आशंका रही है कि ईस्ट तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट से जुड़े उइगर लड़ाके इस रास्ते का इस्तेमाल कर सकते हैं। ऐसे में नई काउंटी बनाकर चीन स्थानीय प्रशासन, सुरक्षा और निगरानी तंत्र को और मजबूत करना चाहता है।
बढ़ेगा क्षेत्रीय तनाव?
विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत की चेतावनी के बावजूद उठाया गया यह कदम आने वाले समय में सीमा विवाद को और जटिल बना सकता है। फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम पर भारत की नजर बनी हुई है और कूटनीतिक स्तर पर भी प्रतिक्रिया जारी है।
भारत-ब्रिटेन FTA: मई से लागू हो सकता है समझौता, ऑटो और व्हिस्की पर टैक्स में बड़ी राहत
13 Apr, 2026 10:13 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। भारत (India) और ब्रिटेन (UK) के बीच हुआ मुक्त व्यापार समझौता (Free Trade Agreement) अगले महीने से लागू हो सकता है। सूत्रों के अनुसार, यह समझौता मई के दूसरे सप्ताह से प्रभाव में आने की संभावना है।
दोनों देशों ने 24 जुलाई 2025 को व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (सीईटीए) पर हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते के तहत भारत के 99 फीसदी निर्यात को ब्रिटेन के बाजार में बिना किसी शुल्क के (ड्यूटी फ्री) प्रवेश मिलेगा, जबकि भारत ब्रिटिश उत्पादों जैसे कार और व्हिस्की पर आयात शुल्क में चरणबद्ध तरीके से कमी करेगा। भारत और ब्रिटेन ने वर्ष 2030 तक आपसी व्यापार को मौजूदा 56 अरब डॉलर से बढ़ाकर दोगुना करने का लक्ष्य रखा है।
भारतीय उत्पादों के लिए बेहतर पहुंच: समझौते की शर्तों के मुताबिक, भारत ने चॉकलेट, बिस्कुट और कॉस्मेटिक्स जैसे कई उपभोक्ता उत्पादों के लिए अपना बाजार खोला है, जबकि भारतीय निर्यातकों को कपड़ा, जूते-चप्पल, रत्न एवं आभूषण, खेल सामान और खिलौनों के लिए बेहतर बाजार पहुंच मिलेगी।
इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहन निर्यात का मौका
ब्रिटिश स्कॉच व्हिस्की पर आयात शुल्क को तत्काल 150 फीसदी से घटाकर 75 फीसदी किया जाएगा। वर्ष 2035 तक धीरे-धीरे इसे 40 प्रतिशत तक लाया जाएगा।
ऑटोमोबाइल क्षेत्र में भारत आयात शुल्क को मौजूदा 110 फीसदी से घटाकर पांच वर्षों में 10 फीसदी करेगा।
इसके बदले भारतीय कंपनियों को ब्रिटिश बाजार में इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों के निर्यात के लिए कोटा के आधार पर प्रवेश मिलेगा।
भारत और ब्रिटेन ने दोहरा योगदान संधि करार पर भी हस्ताक्षर किए हैं।
इससे दोनों देशों के अस्थायी कर्मियों को सामाजिक शुल्क को दो बार नहीं देना पड़ेगा।
अमेरिका की कार्रवाई से होर्मुज बंद, वैश्विक तेल सप्लाई पर खतरा—ऊर्जा संकट बढ़ सकता है
13 Apr, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Strait of Hormuz: ईरान-अमेरिका के बीच शांति वार्ता सफल नहीं हो सकी है. पाकिस्तान में 21 घंटों से ज्यादा बातचीत के बाद दोनों ही देश अपनी-अपनी शर्तों पर अड़े रहे यही वजह है कि बातचीत किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी. बातचीत सफल न होने के बाद ट्रंप ने एक बार धमकी दी है. उन्होंने कहा कि जो भी जहाज होमुर्ज से गुजरने का ईरान को टोल देंगे, उनकी नाकेबंदी की जाएगी. तो वहीं ईरान ने भी साफ कर दिया कि टोल तो देना ही पड़ेगा. अब इस तरह की बयानबाजी के कारण एक बार फिर दुनिया को ये डर सता रहा है कि आने वाले दिनों में तेल और एलपीजी की संकट पैदा हो सकता है.
अमेरिकी राष्ट्रपति जंग शुरू होने के बाद से ही कई तरह के बयान दे रहे हैं. बातचीत फेल होने के बाद उन्होंने कहा कि अमेरिकी नौसेना होर्मुज स्ट्रेट में नाकाबंदी करेगी. ईरान को टोल देने वाले जहाजों को भी रास्ते में रोक लिया जाएगा. ईरान ने दावा किया कि होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह उसके कंट्रोल में है. यहां से गुजरने वाले जहाजों को रियाल में टोल देना जरूरी होगा.
भारत कर दूसरे विकल्पों पर काम
यूएस की नाकेबंदी का असर भारत पर भी देखने को मिल सकता है. हालांकि ऊर्जा सुरक्षा बनाए रखने के लिए भारत को वैकल्पिक रास्तों पर काम तेज करना होगा, जिसमें चाबहार बंदरगाह और INSTC विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं.
समुद्री खुफिया फर्म लॉयड्स लिस्ट के मुताबिक, नाकेबंदी के ऐलान के बाद ट्रैफिक रुक गया है. अमेरिका की धमकी के बाद कई जहाजों ने रास्ता बदल लिया या वापस लौट गए हैं.
दुनियाभर में हो सकती है तेल की किल्लत
युद्ध शुरू होने के बाद से ही दुनियाभर में तेल का संकट पहले से ही चल रहा है. कई देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छू रही हैं. सीजफायर होने के बाद हालात कुछ हद तक सुधरे हैं.
लेकिन बातचीत विफल होने के बाद एक बार फिर दुनिया को डर है कि अगर अमेरिका नाकाबंदी करता है. तो तेल और एलपीजी का संकट पैदा हो सकता है. हालांकि ईरान ने दावा किया है कि यह नाकेबंदी फेल होगी और अमेरिका को हार का सामना करना पड़ेगा.
ऐलान के साथ ही बढ़ गई तेल की कीमतें
अमेरिका ने ऐलान किया कि वह सोमवार को ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी की जाएगी. इसके बाद से ही कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी देखी जा रही है. इस समय अमेरिकी क्रूड ऑयल 8% बढ़कर 104.24 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया है. वहीं अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड 7% बढ़कर 102.29 डॉलर प्रति बैरल हो गया.
एक्सपर्ट का मानना है कि अगर अमेरिका की तरफ से नाकेबंदी की जाती है और ईरान इसका विरोध करता है तो सीजफायर खत्म होने के साथ साथ तेल की कीमतों में इजाफा देखने को मिल सकता है.
ईरान पर हमले की आशंका तेज: WSJ रिपोर्ट में बड़ा दावा, डोनाल्ड ट्रंप के फैसले पर नजर
13 Apr, 2026 09:11 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन. अमेरिका-ईरान (US-Iran) के बीच कूटनीतिक बातचीत (Diplomatic Talks) फेल होने के बाद अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) और उनके सलाहकार ईरान के खिलाफ सैन्य हमलों को फिर शुरू करने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) की नाकेबंदी के विकल्पों पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं. एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ये कदम पाकिस्तान के इस्लामाबाद में हुई शांति वार्ता के विफल हो जाने के कुछ घंटों बाद लिया जा रहा है, ताकि दोनों पक्षों के बीच अटके हुए समझौते को तोड़ा जा सके.
वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) की रिपोर्ट के अनुसार, रविवार को ट्रंप ने फ्लोरिडा के डोरल स्थित अपने रिसॉर्ट में सलाहकारों से बात की और फॉक्स न्यूज को इंटरव्यू दिया. वार्ता विफल होने के बाद वो ईरान पर दबाव बढ़ाने के कई विकल्प तलाश रहे हैं. अमेरिकी सेना को हाई अलर्ट पर रखा गया है ताकि किसी भी समय ईरान के रणनीतिक ठिकानों पर हवाई हमले किए जा सकें.
रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले कई दिनों से चल रही पर्दे के पीछे की बातचीत अब बेनतीजा साबित हुई है. ईरान की शर्तों और अमेरिकी मांगों के बीच का अंतर कम नहीं हो सका, जिससे कूटनीतिक रास्ते बंद हो गए. इसके परिणामस्वरूप, ट्रंप प्रशासन ने अब सैन्य दबाव बढ़ाने का रुख अपनाया है.
ट्रंप ने पहले ही दिए थे संकेत
उधर, राष्ट्रपति ट्रंप ने पहले भी संकेत दिया था कि यदि ‘असली समझौता’ नहीं होता है तो सैन्य कार्रवाई ही एकमात्र विकल्प बचेगी. अब जबकि बातचीत टूट चुकी है, अमेरिकी रक्षा मंत्रालय यानी पेंटागन संभावित टारगेट की लिस्ट तैयार कर रहा है. ट्रंप का मानना है कि सैन्य शक्ति के जरिए ही ईरान को झुकने पर मजबूर किया जा सकता है.
मिडिल ईस्ट में बढ़ा संकट
वहीं, इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद फिर से युद्ध के बादलों ने मिडिल ईस्ट को अपनी चपेट में ले लिया है. बमबारी की खबरों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार और भू-राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है. अगर ये अभियान शुरू होता है तो इसके परिणाम बेहद गंभीर हो सकते हैं. दुनिया भर की नजरें अब व्हाइट हाउस की अगली आधिकारिक घोषणा पर टिकी हैं.
तनाव बढ़ा: डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी बंदरगाहों पर कसा शिकंजा, महंगा हुआ कच्चा तेल
13 Apr, 2026 08:09 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली. ग्लोबल टेंशन एक बार फिर हाई पर पहुंच गई है. अमेरिका (US) और ईरान (Iran) में पाकिस्तान (Pakistan) के इस्लामाबाद में हुई शांति वार्ता 21 घंटे की चर्चा के बाद भी बेनतीजा निकली यानी फेल हो गई. इसके बाद ट्रंप एक बार फिर तिलमिलाए नजर आ रहे हैं और उन्होंने नेतृत्व वाले US सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ऐलान कर दिया है कि वो ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी शुरू कर रहा है. इन सबके बीच दो हफ्तों के सीजफायर के बाद धड़ाम हुए कच्चे तेल के दाम में एक बार फिर से आग लगी नजर आई है.
सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमत एक झटके में 8 फीसदी से ज्यादा उछलकर फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई और दोनों देशों के बीच युद्ध बढ़ने की स्थिति में ये और भी उछल सकती हैं, जो दुनिया में महंगाई का जोखिम बढ़ाने वाली साबित होंगी.
नाकेबंदी का ऐलान, क्रूड में आग
एपी की रिपोर्ट के मुताबिक, इस्लामाबाद में हुए US-Iran Talks किसी अंजाम पर नहीं पहुंची. अमेरिकी राष्ट्रपति जेडी वैंस ने इसे ईरान के लिए बेहद खराब बताया, तो ईरान की ओर से अमेरिका पर जमकर पलटवार किया गया. दोनों देशों के बीच अचानक फिर बढ़े तनाव का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर देखने को मिली. अमेरिकी की ओर से सोमवार से ईरानी बंदरगाहों (Iranian Ports) की नाकेबंदी शुरू करने के ऐलान के बाद तो इनमें तगड़ा उछाल आया.
WTI Crude Oil Price 8 फीसदी की तेजी के साथ बढ़कर 104.24 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है. तो वहीं खबर लिखे जाने तक ब्रेंट क्रूड प्राइस (Brent Crude Oil Price) 7 फीसदी से ज्यादा की उछाल के साथ 102.29 डॉलर हो गया था. नेचुरल गैस की कीमतों (Natural Gas Price) में भी तेजी दर्ज की गई है और ये करीब 2 फीसदी बढ़कर 2.684 डॉलर हो गई है.
ईरान युद्ध (Iran War) के दौरान होर्मुज स्ट्रेट बंद होने के चलते ब्रेंट क्रूड में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है. जो Brent Crude Price युद्ध से ऐन पहले फरवरी के अंत में करीब 70 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड करती दिखाई दी थी, वो युद्ध की शुरुआत के बाद बढ़कर 119 डॉलर तक पहुंची. हालांकि, अमेरिका-ईरान में दो हफ्ते के सीजफायर (US-Iran Ceasefire) का ऐलान होने के बाद बीते सप्ताह ये फिर से फिसलीं और जून डिलीवरी के लिए ब्रेंट क्रूड प्राइस 95 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया था.
Hormuz पर टेंशन चरम पर पहुंची
पाकिस्तान में हुई शांति वार्ता फेल होने के बाद से ही ईरानी प्रभाव वाले होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को लेकर ग्लोबल टेंशन चरम पर पहुंच गई है. ऐसा इसलिए क्योंकि ये समुद्री रूट दुनिया के तेल जरूरत के 20 फीसदी की आवाजाही को कंट्रोल करता है. बीते दिनों इसमें रुकावट का असर तमाम देशों में तेल-गैस संकट (Global Oil Gas Crisis) के रूप में देखने को मिला है.
साफतौर पर समझें, तो दुनिया में व्यापार किए जाने वाले कच्चे तेल का लगभग पांचवां हिस्सा हर दिन होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरता है. सऊदी अरब, इराक, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और ईरान, ये सभी तेल के प्रमुख निर्यातक हैं. सीजफायर के ऐलान के बाद अब तक इस तेल रूट में जहाजों की आवाजाही हालांकि सीमित ही रही है. मरीन ट्रैकर बताते हैं कि इस अवधि में अब तक 40 से ज्यादा कमर्शियल जहाज इस रूट से गुजरे हैं.
अब क्या करने वाले हैं ट्रंप?
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा है कि नाकेबंदी ईरानी पोर्ट्स और तटीय क्षेत्रों में प्रवेश करने या वहां से निकलने वाले सभी देशों के जहाजों पर निष्पक्ष रूप से लागू की जाएगी. हालांकि, वह अभी भी उन जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की परमिशन देगा, जो गैर-ईरानी बंदरगाहों के बीच यात्रा कर रहे हैं.
इस बीच अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता फेल होने के बाद वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत विफल होने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ईरान के खिलाफ फिर से भीषण बमबारी ऑपरेशन शुरू करने पर विचार कर रहे हैं.
एपस्टीन मामले पर अमेरिका की फर्स्ट लेडी मेलानिया.......मुझे बदनाम करना बंद करो
12 Apr, 2026 01:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। मिडिल ईस्ट में युद्ध और अमेरिका में करीब आते मध्यावधि चुनावों के बीच ऐसा लग रहा था कि वाइट हाउस जेफरी एपस्टीन के मामले से उबर चुका है। एपस्टीन मामले में ट्रंप को उनके दूसरे कार्यकाल के पहले साल से ही परेशान किया था। लेकिन अमेरिका की फर्स्ट लेडी मेलानिया ट्रंप के बयान ने वाइट हाउस के सहयोगियों को हैरान किया है। मेलानिया ने यौन अपराधी एपस्टीन से किसी भी तरह के जुड़ाव से इंकार किया, तब लोग सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर इस समय में यह घोषणा क्यों की, जब यह मामला सुर्खियों से हट चुका था।
फर्स्ट लेडी मेलानिया ने पहले से तैयार बयान पढ़ा जिसमें उन्होंने कहा कि वे और उनके वकील दिवंगत कारोबारी एपस्टीन के साथ संबंधों को लेकर फैलाई जा रही बेबुनियाद और आधारहीन झूठी बातों का मुकाबला कर रहे हैं। बदनाम एपस्टीन से मुझे जोड़ने वाले झूठ आज ही खत्म होने चाहिए। जो लोग मेरे बारे में झूठ फैला रहे हैं, उनमें नैतिक मूल्यों, विनम्रता और सम्मान की पूरी तरह कमी है। मुझे उनकी अज्ञानता पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन मैं मेरी प्रतिष्ठा को बदनाम करने की उनकी घटिया कोशिशों को सिरे से खारिज करती हूं। मेलानिया ने बयान में साल 2002 के छोटे से ईमेल का जिक्र किया, जो डीयर जी से शुरू होता है और इसके आखिर में लिखा है...........लव, मेलानिया। इसमें लिखा है, मुझे पता है कि आप पूरी दुनिया में घूमते हुए बहुत व्यस्त हैं। पाम बीस कैसा रहा? मैं वहां जाने का बेसब्री से इंतजार कर रही हूं। जब आप न्यूयार्क वापस आएं, तब मुझे फोन जरूर करें। मेलानिया ने कहा कि वे एपस्टीन या उनकी दोस्त और पूर्व में गर्लफ्रेंड रही घिसलेन मैक्सवेल की दोस्ती नहीं थीं। उन्होंने मैक्सवेल को भेजे ईमेल के जवाब को सामान्य बातचीत बताया। फर्स्ट लेडी ने कहा, उनके ईमेल का मेरा विनम्र जवाब एक छोटी सी चिठ्ठी से ज्यादा कुछ नहीं था।
मेलानिया ने अभी क्यों दिया बयान?
मामले की जानकारी रखने वाले जानकारों ने बताया कि फर्स्ट लेडी की टिप्पणियां प्रेस कवरेज और इंटरनेट पर चल रहीं अटकलों पर उनकी महीनों पुरानी चिंता का नतीजा थीं। इन ब्लॉग्स में एपस्टीन से संबंधों को लेकर उन पर निशाना साधा जा रहा था। मामले से परिचित शख्स ने कहा, उनके बारे में ऐसी कहानियां चल रही थीं, जिन्हें रैंडम ब्लॉग्स ज्यादा फैला रहे थे। वे अभी भी एपस्टीन के मामले को लेकर उन पर निशाना साध रहे थे। शख्स ने बताया कि फर्स्ड लेडी आधिकारिक तौर पर सामने आकर इन बातों से इंकार करना चाहती थीं। वॉइट हाउस को भी यह नहीं पता था कि वह क्या कहने वाली हें। उसी दिन बाद में उनके पति राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि उन्हें इस बारे में पहले से कोई जानकारी नहीं थी।
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