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शी जिनपिंग का एक्शन: एडमिरल मियाओ हुआ को 'कानूनी उल्लंघन' के आरोप में पद से हटाया
31 May, 2025 03:57 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग: चीन ने अपने एक और सैन्य अधिकारी पर कड़ा एक्शन लिया है. राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने एडमिरल मियाओ हुआ को तत्काल प्रभाव से नौकरी से हटा दिया है. चीन ने यह कार्रवाई सेना में भ्रष्टाचार विरोधी अभियान के तहत 'कानूनी उल्लंघन' के संदेह में की है. चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी ने खुलासा किया है कि विवादास्पद चीनी एडमिरल और शक्तिशाली सेंट्रल मिलिट्री कमीशन (CMC) के सदस्य मियाओ हुआ पर "कानूनी उल्लंघन" का संदेह है. जो कि यह संकेत देता है कि उनके खिलाफ लगे आरोप पहले की अपेक्षा अधिक गंभीर और आपराधिक प्रकृति के हो सकते हैं.
लंबे समय से मियाओ जांच के रडार पर थे मियाओ
एक रिपोर्ट के अनुसार लंबे समय से मियाओ जांच के रडार पर थे. इससे पहले भी वह अनुशासनात्मक जांच का सामना कर चुके हैं. मियाओ चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के राजनीतिक कार्य विभाग के प्रमुख रह चुके हैं. यह एक ऐसा पद है जो सेना में वैचारिक नियंत्रण और कार्मिक प्रबंधन के लिए अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है. 15 मई को जारी चीन के शीर्ष विधायिका के एक बयान में कहा गया कि मार्च में मियाओ को "अनुशासन और कानून के गंभीर उल्लंघन" के संदेह में संसद से निष्कासित करने का निर्णय लिया गया था. यह बयान हाल ही में सार्वजनिक हुआ और इस सप्ताह पहली बार मीडिया में सामने आया. हालांकि उनके निष्कासन की रिपोर्ट पहले ही मार्च में सामने आ चुकी थी, लेकिन यह पहली बार है जब अधिकारियों ने कानूनी कदाचार की संभावना को औपचारिक रूप से स्वीकार किया है.
मियाओ पर अभी हो सकती है और बड़ी कार्रवाई
चीन अपनी सेना में भ्रष्टाचार के खिलाफ काफी सख्त है. इससे पहले भी राष्ट्रपति शी जिनपिंग अपनी सेना के 2 अधिकारियों को निकाल चुके हैं. मियाओ को नवंबर 2024 के अंत में "अनुशासन के गंभीर उल्लंघन" के आरोपों में जांच के दायरे में रखा गया था. उन पर भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग से जुड़े मामले लंबित थे. अब "कानूनी उल्लंघन" का उल्लेख इस बात की ओर इशारा करता है कि उनके खिलाफ आपराधिक मामला भी दर्ज किया जा सकता है.
मियाओ क्यों बने जिनपिंग की आंख की किरकरी?
मियाओ का यह पतन राष्ट्रपति शी जिनपिंग के व्यापक भ्रष्टाचार विरोधी अभियान और सैन्य सुधार के प्रयासों के बीच हुआ है. हाल के वर्षों में कई उच्च-रैंकिंग PLA अधिकारी इन अभियानों के तहत निशाने पर आ चुके हैं. शी जिनपिंग ने PLA में वैचारिक नियंत्रण को मजबूत करने और सेना के भीतर कम्युनिस्ट पार्टी के प्रति वफादारी को प्राथमिकता देने की नीति अपनाई है. उनका लक्ष्य चीन को एक वैश्विक सैन्य महाशक्ति बनाना है. मगर मियाओ अपने आचरण के चलते इसमें फिट नहीं बैठ रहे थे. लिहाजा वह जिनपिंग की आंखों की किरकिरी बन गए. हालांकि मियाओ अभी भी CMC के सदस्य हैं, लेकिन उन्हें इस संस्था से भी हटाया जाना लगभग तय माना जा रहा है.
पूर्व रक्षामंत्री पर भी गिर चुकी है गाज
चीन में मियाओ से पहले पूर्व रक्षा मंत्री ली शांगफू पर भी जिनपिंग की कार्रवाई की गाज गिर चुकी है. 2023 में पूर्व रक्षामंत्री शांगफू केवल सात महीने ही अपने पद पर रह सके. इससे पहले और उनके पूर्ववर्ती वेई फेंगहे (2018–2023) को भी "अनुशासन और कानून के गंभीर उल्लंघन" के आरोप में पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था. बीजिंग ने दोनों के खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच की पुष्टि की थी और ली को अक्टूबर 2023 में CMC से हटा दिया गया था.
क्या मियाओ को जेल में डाल चुके हैं जिनपिंग
मियाओ हुआ की अंतिम सार्वजनिक उपस्थिति 7 अक्टूबर को झिंजियांग उत्पादन और निर्माण कोर की 70वीं वर्षगांठ के अवसर पर हुई थी. तब से उन्हें सार्वजनिक तौर पर नहीं देखा गया है. ऐसे में माना जा रहा है कि शी जिनपिंग मियाओ को जेल में डाल चुके हैं. हालांकि इस बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है. इसी तरह चीन में CMC के उपाध्यक्ष और पोलित ब्यूरो के सदस्य हे वेइदोंग भी पिछले दो महीनों से सार्वजनिक रूप से अनुपस्थित हैं. उन्हें आखिरी बार 11 मार्च को सार्वजनिक रूप से देखा गया था और तब से वे किसी भी प्रमुख बैठक में शामिल नहीं हुए हैं.
मियाओ का पीएलए से जुड़ने का इतिहास
मियाओ ने केवल 14 वर्ष की उम्र में PLA में भर्ती हुए थे. इसके अलावा उन्होंने दक्षिण-पूर्वी फ़ुज़ियान प्रांत में पार्टी कार्य में कई वर्षों तक सेवा दी. शी जिनपिंग के सत्ता में आने के बाद मियाओ तेजी से पदोन्नत हुए और PLA की नौसेना में राजनीतिक कमिसार के रूप में कार्य किया और अंततः सबसे कम उम्र के एडमिरल बन गए. वे 2017 से CMC के सदस्य हैं. मगर भ्रष्टाचार और कदाचार के आरोपों के चलते वह जिनपिंग की नजर पर चढ़ गए.
इजरायल-हमास जंग पर लग सकती है रोक, युद्धविराम को लेकर बनी सहमति
31 May, 2025 01:25 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इजरायल और हमास के बीच गाजा में जारी जंग को लेकर गुरुवार को उस समय एक बड़ी खबर आई जब दोनों के बीच युद्धविराम पर सहमति बनी. बताया जा रहा है कि इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने मिडिल ईस्ट में अमेरिकी राजदूत स्टीव विटकॉफ के शांति प्रस्ताव को स्वीकार करने के बेहद करीब है.
राष्ट्रपति ट्रंप देंगे जानकारी
एक न्यूज एजेंसी की तरफ से बताया गया है कि युद्धविराम अगर हुआ तो, अगले 60 दिनों का होगा. युद्धविराम पर मुहर लगने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जल्द ही इसके बारे में पूरी जानकारी दुनिया को देंगे. न्यूज एजेंसी की तरफ से बताया गया है कि पीएम नेतन्याहू ने गाजा में बंधक बनाए गए लोगों के परिवारों को बताया कि इजरायल ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से नियुक्त किए गए राजदूत स्टीव विटकॉफ की तरफ से पेश किए गए नए युद्धविराम प्रस्ताव पर विचार कर रहा है.
7 अक्टूबर 2023 से जारी है युद्ध
फिलिस्तीनी आतंकी समूह हमास ने पहले कहा था कि उसे मध्यस्थों से नया प्रस्ताव मिला है और वह इसका अध्ययन कर रहा है. इससे पहले स्टीव विटकॉफ ने कहा था कि हमास के साथ युद्ध को खत्म करने की उम्मीद में एक नए शांति प्रस्ताव की शर्तें बुधवार को ही इजरायल को भेज दी जाएंगी. विटकॉफ के अनुसार राष्ट्रपति ट्रंप प्रस्ताव भेजे जाने से पहले इसकी समीक्षा करेंगे. सात अक्टूबर 2023 को हमास ने इजरायल पर हमला कर दिया था. न्यूज एजेंसी के अनुसार इस हमले में 815 नागरिकों समेत 1,195 इजरायली और विदेशी नागरिक मारे गए थे. साथ ही हमास ने 251 लोगों को बंधक बना लिया गया जिसमें ज्यादातर विदेशी नागरिक थे.
22 नई बस्तियां बनाएगा इजरायल
एक तरफ तो इजरायल ने युद्धविराम के लिए आगे बढ़ रहा है वहीं दूसरी ओर उसने कब्जे वाले पश्चिमी तट पर यहूदी बस्तियों के बड़े पैमाने पर विस्तार को मंजूरी भी दी है. बस्तियों पर नजर रखने वाले इजरायली एनजीओ पीस नाउ की मानें तो यह तीन दशक पहले हुए ओस्लो अकॉर्ड पर साइन करने के बाद बस्तियों का सबसे बड़ा विस्तार होगा. रक्षा मंत्री इजरायल कैट्ज और वित्त मंत्री बेजेलेल स्मोट्रिच की तरफ से जारी एक बयान के अनुसार इजरायल नए सुरक्षा कैबिनेट के फैसले के हिस्से के रूप में 22 नई बस्तियां स्थापित करेगा. इनमें पश्चिमी तट के अंदर और उस क्षेत्र में भी बस्तियां शामिल होंगी जहां से देश पहले हट गया था.
पुतिन का तोहफा: यूक्रेन युद्ध के बीच वीरता को सलाम, 12 रूसी सैनिकों को मिला करोड़ों का इनाम
31 May, 2025 12:40 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रूस: यूक्रेन में जारी युद्ध के बीच रूस ने अपने सैनिकों को करोड़पति बना दिया है. रूस ने दावा किया है कि उसके सैनिकों ने अमेरिका का एफ-16 फाइटर जेट मार गिराया है. इस काम के बदले रूस के 12 सैनिकों को करोड़ों रुपये का इनाम दिया गया है. इनाम देने वाली कोई सरकारी एजेंसी नहीं बल्कि एक बड़ी तेल कंपनी है, जो रूस की जंग में खुलकर साथ दे रही है.
रूसी ऑयल कंपनी Fores ने उन 12 सैनिकों को कुल 1.5 करोड़ रूबल (करीब 1.6 लाख डॉलर यानी लगभग 13.5 करोड़ रुपये) का इनाम दिया है, जिन्होंने पहले अमेरिकी एफ-16 को मार गिराया. ये इनाम 29 मई को एक खास समारोह में बॉर्डर पर दिया गया, जिसमें सैन्य अफसर भी मौजूद थे. Fores ने कहा कि हमने पहले ही घोषणा की थी कि जो भी पहले एफ-16 को गिराएगा, उसे इनाम दिया जाएगा. अब हमने वादा पूरा कर दिया है.
स्टिंगर से नहीं, लंबी दूरी की मिसाइल से मार गिराया
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अप्रैल 2025 में एक एफ-16 जेट को रूस ने 40N6 लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल से गिराया था. ये हमला यूक्रेन के कब्जे वाले इलाके में हुआ था. हालांकि रूस की सरकार ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि इनाम उसी घटना के लिए दिया गया है या किसी और के लिए. अब तक तीन एफ-16 के क्रैश की खबर आ चुकी है, जिनमें से एक पर दुश्मन के हमले की पुष्टि हुई है, बाकी दो की जांच जारी है.
पश्चिमी हथियारों को निशाना बनाने की रणनीति
Fores कंपनी पहले भी NATO से मिले टैंकों को उड़ाने वाले सैनिकों को इनाम दे चुकी है. ये रूस की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत पश्चिमी हथियारों को निशाना बनाने पर सैनिकों को मोटी रकम दी जा रही है. Fores न सिर्फ इनाम देती है, बल्कि रूस की जंग को आर्थिक और लॉजिस्टिक मदद भी देती है. अब तक यह कंपनी 30 लाख डॉलर से ज्यादा का सामान जैसे ड्रोन जैमर, थर्मल साइट, दवाइयां और मेडिकल उपकरण भेज चुकी है.
अमेरिका से मांग, यूरोप से सप्लाई
यूक्रेन काफी समय से अमेरिका से F-15 और F-16 जैसे अत्याधुनिक फाइटर जेट मांग रहा था. 2024 की गर्मियों में डेनमार्क और नीदरलैंड्स ने 60 अमेरिकी एफ-16 देने का वादा किया और कुछ जेट यूक्रेन पहुंच भी गए. इसके अलावा नॉर्वे, बेल्जियम और ग्रीस ने भी ऐसे ही वादे किए हैं. पायलटों की ट्रेनिंग रोमानिया में बने यूरोपीय एफ-16 ट्रेनिंग सेंटर में हो रही है. हालांकि, यूक्रेन को इन जेट्स के मेंटेनेंस, स्पेयर पार्ट्स और ऑपरेशन को लेकर कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.
एलन मस्क की आंख पर चोट! व्हाइट हाउस से बाहर निकले, तो सबकी निगाहें वहीं टिकीं.....
31 May, 2025 12:08 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन: अमेरिका की राजनीति में इन दिनों एलन मस्क चर्चा का विषय बने हुए हैं. एक तरफ तो ट्रंप के 'जिगरी दोस्त' और सरकार में DOGE की जिम्मेदारी संभाल रहे मस्क ने ट्रंप प्रशासन को अलविदा कह दिया है. वहीं अब एक और बात है, जिसने सबका ध्यान अपनी तरफ खींचा. वह है एलन मस्क की आंख के नीचे काला निशान. उनको देखकर ऐसा लग रहा है कि जैसे किसी के साथ उनकी हाथापाई हुई हो और उनको जोर का मुक्का पड़ा हो.
मस्क को आंख के नीचे चोट कैसे लगी?
अरबपति एलन मस्क शुक्रवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ ओवल ऑफिस में विदाई समारोह में काली आंख के साथ पहुंचे, जिसने अटकलों को एक बार फिर हवा दे दी. हालांकि मस्क ने साफ कर दिया कि उनको चोट कैसे लगी. मस्क ने बताया कि उनके बेटे ने उनके चेहरे पर मुक्का मार दिया, जिसकी वजह से उनकी आंख के नीचे ये निशान हो गया. दरअसल टेक दिग्गज एलन मस्क से मीडया ने जब पूछा कि उन्हें चोट कैसे लगी, तो उन्होंने इसका जवाब दिया. मस्क ने कहा कि जब उनको मुक्का पड़ा तो उस समय उनको ज्यादा कुछ महसूस नहीं हुआ, लेकिन उनको समझ आ गया कि उनको चोट लग गई है. अब मस्क की आंख के नीचे काला निशान चर्चा का विषय बना हुआ है. हालांकि मस्क सबकुछ साफ कर चुके हैं. लेकिन इस काले निशान के बाद एक बार फिर से उनके ड्रग लेने वाले आरोपों को हवा मिल गई है.
मस्क की चोट पर ट्रंप ने क्या कहा?
ट्रंप ने कहा कि उन्होंने मस्क की आंख के नीचे के निशान को नहीं देखा. साथ ही उन्होंने कहा कि अगर आप मस्क के बेटे एक्स को जानते हैं, तो ये दावे से कह सकते हैं कि वह ऐसा कर सकता है. बता दें कि मस्क के बेटे एक्स का पूरा नाम X Æ A-Xii है. उसे कई बार व्हाइट हाउस में ट्रंप के साथ देखा जा चुका है. फरवरी में जब मस्क ओवल ऑफिस में पहली बार पहुंचे थे उस दौरान लिटिल एक्स उनके कंधों पर बैठा दिखा था.
ओवल ऑफिस से मस्क की विदाई, क्या बोले ट्रंप?
एक रिपोर्ट में मस्क को लेकर वे आरोप एक बार फिर से उठने लगे, जिनमें कहा गया था कि 2024 में ट्रंप के लिए अभियान के दौरान उन्होंने भारी मात्रा में नशीली दवाओं का सेवन किया था. बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप ने तथाकथित डिपार्टमेंट ऑफ़ गवर्नमेंट एफ़िशिएंसी (DOGE) से मस्क की विदाई वाले दिन उनके साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की. हालांकि मस्क ने कहा कि वह दोस्त और सलाहकार बने रहेंगे.
सिंधु जल संधि पर पाकिस्तान आर्मी चीफ आसिम मुनीर बोले, 'भारत के आगे नहीं झुकेगा पाकिस्तान'
31 May, 2025 10:49 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पाकिस्तान: भारत से मुंह की खाने के बाद पाकिस्तान बौखला गया है. पाकिस्तान आर्मी चीफ सैयद आसिम मुनीर ने एक बार फिर सिंधु जल संधि स्थगित होने के बाद भारत को आंख दिखाने की कोशिश की है. पाकिस्तान अखबार ने पाकिस्तानी सेना के मीडिया विंग इंटर सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस के हवाले से बताया है कि मुनीर ने कहा है कि पाकिस्तान कभी हिंदुस्तान के आगे नहीं झुकेगा. पाक आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर ने कहा, पानी पाकिस्तान की रेडलाइन है और हम 24 करोड़ पाकिस्तान अपनी बुनियादी हक से कोई समझौता नहीं करेंगे.
भारत के लिए प्रॉक्सी हैं बलूच विद्रोही
भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष के बीच पाकिस्तान में बलूच विद्रोही ने भी सरकार पर दबाव बनाना शुरू कर दिया था. इस दौरान पाकिस्तान को खुद के घर में विद्रोहियों से निपटना पड़ रहा था. बलूच विद्रोहियों को लेकर मुनीर ने कहा कि वे भारत की शह पर प्रॉक्सी की तरह काम करते हैं.
क्या है सिंधु जल संधि?
जब 1947 में ब्रिटिश भारत को भारत और पाकिस्तान में बंटवारा किया गया, तो सिंधु नदी प्रणाली संभावित संघर्ष का मुद्दा बन गई. सिंधु दोनों देशों से होकर बहती है (तिब्बत से निकलती है और अफगानिस्तान और चीन को भी छूती है). 1948 में भारत ने कुछ समय के लिए पाकिस्तान को पानी देना बंद कर दिया था. बाद में, पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र (UN) से शिकायत की कि भारत पर्याप्त पानी नहीं दे रहा है. UN ने मदद लेने का सुझाव दिया, जिसके कारण विश्व बैंक ने मध्यस्थता करने के लिए कदम बढ़ाया.
कई सालों की बातचीत के बाद, भारत के प्रधानमंत्री नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान ने आखिरकार 1960 में समझौते पर हस्ताक्षर किए. भारत-पाकिस्तान के बीच जल बंटवारे के समझौते के तहत भारत को तीन पूर्वी नदियों रवि, ब्यास और सतलुज पर प्राथमिक नियंत्रण मिला. भारत इन नदियों के पानी को स्वतंत्र तौर से इस्तेमाल कर सकते हैं. वहीं पाकिस्तान को भी तीन पश्चिमी नदियों सिंधु, चिनाब और झेलम पर प्राथमिक नियंत्रण मिला. भारत भी इन नदियों के पानी के इस्तेमाल कर सकती थी, लेकिन इसके अलावा ऐसे कुछ नहीं कर सकती थीं जो पानी को पाकिस्तान जाने से रोके.
ट्रंप का बड़ा ऐलान: विदेशी स्टील पर टैरिफ अब 50%, अमेरिकी उद्योग को मिलेगा बढ़ावा
31 May, 2025 08:55 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अमेरिका: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को विदेशी स्टील पर टैरिफ को दोगुना करने का ऐलान कर दिया है. उन्होंने कहा कि इसका मकसद अमेरिकी स्टील इंडस्ट्री को बढ़ावा देना है. पेंसिल्वेनिया में यूएस स्टील के मोन वैली वर्क्स-इरविन प्लांट में बोलते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि टैरिफ में इस बढ़ोतरी से अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग को मजबूती मिलेगी. ट्रंप ने अमेरिकी स्टीलकर्मियों से कहा कि वे विदेशी स्टील पर टैरिफ को 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने जा रहे हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा है कि वे स्टील पर टैरिफ दर को दोगुना करके 50 प्रतिशत करने जा रहे हैं, जो आवास, ऑटो और अन्य सामान बनाने के लिए उपयोग की जाने वाली धातु की कीमतों को और बढ़ा सकती है.
स्टील उत्पादों की कीमत में 16 प्रतिशत की वृद्धि
ट्रंप शुक्रवार को जापान की निप्पॉन स्टील द्वारा निवेश की घोषणा करने के लिए पेंसिल्वेनिया के वेस्ट मिफ्लिन में यूएस स्टील के मोन वैली वर्क्स-इरविन प्लांट में बोल रहे थे. सरकार के उत्पादक प्राइस इंडेक्स के अनुसार, ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद से स्टील उत्पादों की कीमत में लगभग 16 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.
अमेरिकी नियंत्रण में रहेगा स्टील निर्माता
ट्रंप जापान स्थित निप्पॉन स्टील द्वारा यूएस स्टील में निवेश करने के लिए एक सौदे का जश्न मनाने के लिए पेंसिल्वेनिया में एक रैली आयोजित कर रहे हैं, जिसके बारे में उनका कहना है कि इससे स्टील निर्माता अमेरिकी नियंत्रण में रहेगा. कर्मचारी, ट्रंप समर्थक, स्थानीय अधिकारी और अन्य लोग ट्रंप को सौदे के बारे में बोलते हुए सुनने के लिए इरविन फिनिशिंग प्लांट के मैदान में एक विशाल गोदाम में उमड़ पड़े.
अमेरिकी स्टील यूनियन ने डील पर उठाया सवाल
हालांकि ट्रंप ने शुरू में पिट्सबर्ग स्थित यूएस स्टील को खरीदने के लिए जापानी स्टीलमेकर की बोली को रोकने की कसम खाई थी. यूनाइटेड स्टीलवर्कर्स यूनियन ने एक बयान में कहा कि निप्पॉन ने लगातार कहा है कि वह यूएस स्टील के कारखानों में तभी निवेश करेगा, जब कंपनी का पूर्ण स्वामित्व उसके पास होगा. पिछले कुछ दिनों में हमें ऐसी कोई रिपोर्टिंग नहीं मिली है, जिससे यह संकेत मिले कि निप्पॉन स्टील ने इस स्थिति से पीछे हटने का फैसला किया है. ट्रंप के दावे के विपरीत अगर निप्पॉन स्टील को यूएस स्टील का मालिकाना हक मिलता है, तो यूएस स्टील अमेरिकी कंपनी नहीं रह जाएगी.
हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग की पहल, CET उम्मीदवारों के लिए हेल्पलाइन शुरू
30 May, 2025 07:49 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (एचएसएससी) ने तृतीय श्रेणी पदों की सामान्य पात्रता परीक्षा (सीईटी) के लिए रजिस्ट्रेशन कराने वाले अभ्यर्थियों की सहायता के लिए विशेष हेल्पलाइन सेवा शुरू की है।
यदि किसी अभ्यर्थी को सीईटी रजिस्ट्रेशन से संबंधित कोई जानकारी लेनी है या समस्या आती है तो मोबाइल नंबर 9063493990 पर कॉल कर सकते हैं।
एचएसएससी चेयरमैन हिम्मत सिंह ने बताया कि हेल्पलाइन सेवा केवल सीईटी अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित है। इसके माध्यम से रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में आ रही समस्याओं, शंकाओं या तकनीकी कठिनाइयों का समाधान किया जाएगा।
आयोग के संज्ञान में आया है कि कई उम्मीदवार सीईटी रजिस्ट्रेशन फार्म भरते समय बार-बार कुछ सामान्य, लेकिन गंभीर त्रुटियां कर रहे हैं। इस कारण उनका आवेदन निरस्त किया जा सकता है।
अभ्यर्थियों द्वारा फोटोग्राफ की जगह हस्ताक्षर की छवि तथा हस्ताक्षर की जगह फोटोग्राफ अपलोड करना, धुंधली या साइड एंगिल से ली गई तस्वीरें जमा करना, ए-4 शीट पर चिपकाई गई फोटो की पूरी शीट की स्कैन कापी अपलोड करना अथवा कैटेगरी सेक्शन में आधार कार्ड जैसे अप्रासंगिक दस्तावेज संलग्न करना ऐसी गलतियां हैं, जिनसे बचना अत्यंत आवश्यक है।
एचएसएससी के सदस्य भूपेंद्र चौहान ने कहा कि यदि उपरोक्त में से कोई भी गलती पाई जाती है तो संबंधित अभ्यर्थी का आवेदन स्वतः रद कर दिया जाएगा। इसलिए सभी अभ्यर्थी फार्म भरते समय अत्यंत सावधानी बरतें और दिए गए निर्देशों का पूर्ण रूप से पालन करें। उन्होंने अभ्यर्थियों से अनुरोध किया कि वे हेल्पलाइन सेवा का लाभ उठाएं तथा सेवा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए अपना फीडबैक भी साझा करें।
उल्लेखनीय है कि तृतीय श्रेणी पदों के सीईटी के रजिस्ट्रेशन के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 28 मई को प्रारंभ हो चुकी है। आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 12 जून रात 11:59 बजे तक निर्धारित की गई है, जबकि शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि 14 जून की शाम 6:00 बजे तक है।
नीमका जेल में चौंकाने वाली चूक, रेप आरोपी को गलती से दे दी गई जमानत
30 May, 2025 07:39 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हरियाणा में फरीदाबाद की नीमका जेल में दो कैदियों का नाम और उनके पिता के नाम एक जैसे होने की वजह से नौ साल के बच्चे से कई बार कुकर्म करने के आरोपी को जमानत पर रिहा कर दिया गया. दोनों का नाम एक होने की वजह से रिहाई मार-पीट के आरोपी की होनी थी, लेकिन रेप के आरोपी की कर दी गई. नितेश पांडेय को 9 साल के बच्चे से कई बार कुकर्म करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. ये घटना 2021 की है. पहले नितेश की उम्र 27 साल थी.
वहीं, दूसरे नितेश को बीते रविवार को घर में घुसकर मारपीट करने के आरोप में अरेस्ट किया गया था. अदालत ने दूसरे नितेश को जमानत दी थी, लेकिन मंगलवार को रिहाई उस नितेश पांडेय की हुई जो बच्चे से कुकर्म करने का आरोपी है. दोनों ही नितेश का एक ही जेल में बंद होना भी हो सकता है जेल प्रशासन को गफ़लत में डालने की वजह बना.
पहचान छिपाकर रिहा होने का आरोप
सदर पुलिस थाने के प्रभारी उमेश कुमार ने आश्वासन दिया कि कुकर्म के आरोपी नितेश की तलाश जारी है और उसे जल्द ही पकड़ लिया जाएगा. घर में घुस कर मार-पीट करने के आरोपी नितेश को फरीदाबाद अदालत के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने जमानत दी. दोनों ही आरोपियों का नाम नितेश है लेकिन उपनाम इनमे से केवल एक ही लिखता है. मार-पीट करने के आरोपी नितेश की जगह बच्चे से कुकर्म करने के आरोपी नितेश पांडेय को रिहा कर दिया गया.
जेल प्रशासन का यह भी दावा है कि नितेश पांडेय ने रिहाई के लिए अपनी पहचान छिपाई. जेल के उपाधीक्षक विक्रम सिंह ने कहा कि हमने सदर पुलिस थाने में नितेश पांडेय के खिलाफ पहचान छिपा कर रिहा होने के आरोप में एक शिकायत दर्ज की है. ऐसे में जिसे रिहा किया जाना था उसे नहीं किया गया बल्कि दूसरे आरोपी को रिहा कर दिया गया.
इस्लामाबाद की लाल मस्जिद के आतंकियों ने अफगान नेटवर्क के साथ मिलकर किया हमला, दो पुलिसकर्मी की मौत
30 May, 2025 05:52 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पाकिस्तान: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के पुंछ जिले के मुख्य शहर रावलकोट में हुसैन कोट के जंगलों में चले एक बड़े आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन में चार आतंकियों को मार गिराया गया. इस मुठभेड़ में दो पुलिसकर्मियों की मौत हो गई, जबकि डिप्टी एसपी अकमल शरीफ समेत आठ सुरक्षाकर्मी घायल हो गए. इस ऑपरेशन ने न सिर्फ पाकिस्तान के अंदर चल रहे आतंक नेटवर्क को उजागर किया है, बल्कि इस्लामाबाद की बदनाम लाल मस्जिद और अफगानिस्तान नेटवर्क से उनके रिश्तों की परतें भी खोल दी हैं. पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, खुफिया इनपुट मिलने के बाद पुलिस और स्पेशल सर्विसेज ग्रुप (SSG) ने हुसैन कोट के जंगलों में एक अभियान शुरू किया. यहां आतंकियों के एक गुफा में छिपे होने की सूचना थी. ऑपरेशन के दौरान आतंकियों ने ग्रेनेड फेंका और फिर दोनों तरफ से भारी गोलीबारी शुरू हो गई. इसी दौरान आतंकी जर्नूश नसीम ने खुद को विस्फोट से उड़ा लिया. इससे पूरा इलाका दहल उठा. बाकी तीन आतंकी जिब्रान और दो अन्य भी मुठभेड़ में मारे गए.
हमलें में 2 पुलिसवालों की मौत, कई घायल
इस कार्रवाई में कांस्टेबल तारिक और गुलफराज की मौत हो गई, जबकि डीएसपी अकमल शरीफ समेत आठ अन्य अधिकारी घायल हुए. घायलों को तुरंत रावलकोट के शेख जायेद अस्पताल में भर्ती कराया गया. यहां कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है. स्थानीय लोगों के अनुसार, विस्फोट के बाद भी इलाके में काफी देर तक गोलियों की आवाजें आती रहीं.
आतंकी नेटवर्क का अफगान कनेक्शन
एसएसपी पुंछ रियाज मुगल ने बताया कि मारे गए सभी आतंकी प्रतिबंधित संगठन तहरीक-ए-तालिबान कश्मीर (TTK) से जुड़े थे और उन्हें अफगानिस्तान स्थित डॉ. रऊफ एंड कंपनी से समर्थन मिल रहा था. इन आतंकियों पर सज्जाद रेशम की हत्या का आरोप था. जानकारी के मुताबिक, यह समूह आजाद कश्मीर में घुसपैठ कर पुलिस स्टेशन या सैन्य ठिकाने पर हमला करने की योजना बना रहा था.
लाल मस्जिद से कैसे जुड़े तार?
इस नेटवर्क से जुड़ा एक और बड़ा खुलासा मार्च में हुआ. जब आतंकवादी साकिब को आज़ाद पट्टन इलाके से गिरफ्तार किया गया. उसने वीडियो बयान में कबूल किया कि वह और उसके साथी सैन्य और नागरिक ठिकानों पर हमले की योजना बना रहे थे. उसे इस काम के लिए फंड और हथियार भी मिले थे. शाकिब ने यह भी बताया कि उनके संबंध इस्लामाबाद की कुख्यात लाल मस्जिद और मौलाना अब्दुल अजीज से थे. इसी नेटवर्क में शामिल ग़ाज़ी शहज़ाद पहले रावलकोट जेल से फरार हो चुका था. मुठभेड़ और सुरक्षाबलों के घायल होने की जानकारी मिलते ही आजाद कश्मीर के प्रधानमंत्री और IG पुलिस मौके पर पहुंचे और घायलों से मुलाकात की. पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, ऑपरेशन के बाद पूरा इलाका क्लियर कर लिया गया है और बाकी बचे आतंकियों या मददगारों की तलाश जारी है. यह कार्रवाई पाकिस्तान के भीतर छिपे आतंकी नेटवर्क और धार्मिक कट्टरता की जड़ों को एक बार फिर बेनकाब करती है.
पाकिस्तान में फिर महसूस किए गए भूकंप के तेज झटके, आया 4.2 तीव्रता का भूकंप
30 May, 2025 04:21 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पाकिस्तान: पाकिस्तान में एक के बाद भूकंप के झटके लगातार महसूस किए जा रहे हैं. बीते कई दिनों से पाकिस्तान में लगातार भूकंप के मामले देखने को मिल रहे हैं. वहीं शुक्रवार को पाकिस्तान में एक बार फिर से भूकंप के जोरदार झटके महसूस किए गए हैं. इस बार भी भूकंप का केंद्र पश्चिमी पाकिस्तान में ही था. वहीं रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 4.2 मापी गई. राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र ने इसके बारे में जानकारी दी. बता दें कि ये भूकंप के झटके दोपहर में करीब 1.37 बजे महसूस किए गए.
क्यों आते हैं भूकंप?
हाल के दिनों में देश-दुनिया के कई इलाकों में भूकंप की घटनाओं में बढ़ोतरी देखी जा रही है. हमारी धरती के भीतर 7 टेक्टोनिक प्लेट्स हैं. ये प्लेट्स लगातार अपने स्थान पर घूमते रहती हैं. हालांकि, कभी-कभी इनमें टकराव या घर्षण भी होता है. इसी कारण धरती पर भूकंप की घटनाएं देखने को मिलती हैं. इसका सबसे ज्यादा नुकसान आम जनजीवन को उठाना पड़ता है. भूकंप से मकानें गिर जाती हैं, जिसमें दबकर हजारों लोगों की मौत हो जाती है.
भारत में क्या हैं भूकंप के जोन
भूगर्भ विशेषज्ञों के अनुसार, भारत के कुल भूभाग के लगभग 59 फीसदी हिस्से को भूकंप के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है. वैज्ञानिकों ने भारत में भूकंप क्षेत्र को जोन-2, जोन-3, जोन-4 व जोन-5 यानी 4 भागों में विभाजित किया है. जोन-5 के इलाकों को सबसे ज्यादा संवेदनशील माना जाता है, जबकि जोन-2 कम संवेदनशील माना जाता है. हमारे देश की राजधानी दिल्ली भूकंप के जोन-4 में आती है. यहां 7 से अधिक तीव्रता के भी भूकंप आ सकते हैं जिससे बड़ी तबाही हो सकती है. भारत में हिमालय क्षेत्र और कुछ अन्य फॉल्ट लाइनों (जैसे कच्छ, पूर्वोत्तर भारत) के कारण भूकंप का खतरा अधिक है, क्योंकि भारतीय प्लेट यूरेशियन प्लेट से टकरा रही है.
रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता का अंदाजा
4 से 4.9 तीव्रता के भूकंप में घर में रखा सामान अपनी जगह से नीचे गिर सकता है. 5 से 5.9 तीव्रता के भूकंप में भारी सामान और फर्नीचर भी हिल सकता है. 6 से 6.9 में इमारत का बेस दरक सकता है. 7 से 7.9 में इमारतें गिर जाती हैं. 8 से 8.9 में सुनामी का खतरा होता है और ज्यादा तबाही मचती है. 9 या ज्यादा में सबसे भीषण तबाही होती है.
चीन ने मानी बात: पाकिस्तान को दी PL-15E मिसाइल, भारत के हाथ लगा बड़ा सुराग
30 May, 2025 01:10 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग: चीन ने पाकिस्तान को PL-15 मिसाइल सप्लाई करने की बात स्वीकारी है. हालांकि चीनी रक्षा मंत्रालय ने साफ किया है कि पाकिस्तान को PL-15E मिसाइल बेची गई है. ये इस मिसाइल का एक्सपोर्ट मॉडल है. चीनी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता झांग शियाओगांग ने भारत-पाकिस्तान के बीच हुई झड़पों के दौरान PL-15E मिसाइल के भारत में गिरने से जुड़े सवालों के जवाब में ये बात कही है. इससे मिसाइल की क्षमता, चीन के हथियारों निर्यात और क्षेत्रीय सुरक्षा पर प्रभावों पर नए सिरे से बहस छिड़ सकती है. दावा है कि पाक से संघर्ष के दौरान भारत ने चीनी PL-15 मिसाइल मार गिराते हुए इससे जुड़ी अहम चीजें कब्जे में ली हैं. इससे चीन के रक्षा उद्योग में खलबली मची हुई है.
रिपोर्ट के मुताबिक, झांग शियाओगांग ने बताया कि यह मिसाइल एक एक्सपोर्ट मॉडल है, जिसे चीन और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई रक्षा प्रदर्शनियों में दिखाया गया है. उन्होंने जोर देकर कहा कि यह घरेलू स्तर पर इस्तेमाल होने वाली PL-15 मिसाइल का डाउनग्रेड वर्जन है. PL-15E की रेंज करीब 145 किलोमीटर (90 मील) है और एक्टिव इलेक्ट्रोनिकली स्कैन्ड (AESA) रडार और ड्यूल मोटर से लैस है. यह पाकिस्तान के JF-17 Block III और J-10C लड़ाकू विमानों के साथ लगती है, जिससे पाक एयरफोर्स की क्षमता बढ़ती है.
चीन की चिंताओं को कम करने की कोशिश
चीनी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता झांग के बयानों का उद्देश्य मिसाइल की तकनीक के बारे में चिंताओं को कम करना है, ताकि संवेदनशील तकनीक के भारतीय हाथों में जाने के डर को कम किया जा सके. दरअसल पाक से संघर्ष में PL-15E मिसाइल के भारत के कब्जे में आने से जुड़ी रिपोर्ट सामने आई हैं. इस मिसाइल की जब्ती से चीनी तकनीक के भारत के हाथों में पड़ने से बीजिंग में चिंता है. ऐसे में चीन ने साफ किया है कि उसने पाकिस्तान को मिसाइल का निर्यात मॉडल ही दिया है.
चीनी मिसाइल के हाथ लगने से भारत को उन्नत चीनी सैन्य तकनीक का विश्लेषण करते हुए रिवर्स इंजीनियरिंग का मौका मिलता है. ऐसी अटकलें हैं कि भारत मिसाइल के घटकों को अमेरिका, फ्रांस और जापान के साथ साझा कर सकता है, क्योंकि PL-15 संभावित भविष्य के संघर्षों में चीनी हवाई शक्ति का मुकाबला करने के लिए प्रासंगिक है. ऐसे में चीन की चिंता अपनी इस मिसाइल को लेकर बढ़ी हुई है.
भारत की रिवर्स इंजीनियरिंग से डर
भारत में PL-15E की रिवर्स इंजीनियरिंग की संभावना ने चीनी सैन्य हलकों में चिंता बढ़ाई है. विश्लेषकों ने चीनी तकनीकी के भारत को पता चलने के संभावित नुकसान पर चिंता व्यक्त की है. हालांकि झांग शियाओगांग का बयान इस डर को खारिज करने की कोशिश करता है. झांग ने इस पर खास जोर दिया है कि PL-15E घरेलू PL-15 की तुलना में कम क्षमताओं वाला स्पेशल वर्जन है, जो बेचने के लिए है. इसी को पाकिस्तान को दिया गया है.
एक चीनी सैन्य ब्लॉगर ने कहा है कि एक्सपोर्ट मॉडल की तकनीक उतनी उन्नत नहीं है, जितनी घरेलू वर्जन की है. ऐसे में भारत की किसी भी रिवर्स-इंजीनियरिंग प्रयासों से सीमित रणनीतिक लाभ मिलेगा. हालांकि इसके बावजूद मिसाइल के रडार और दूसरे घटकों की रिकवरी चीन के मिसाइल डिजाइन और मार्गदर्शन प्रणाली में काम आ सकती है. ये संभावित रूप से भारत के अपने BVR मिसाइल विकास को फायदा देगी.
पाक पीएम का बड़ा खुलासा: "हम हमले के लिए तैयार थे, लेकिन ब्रह्मोस हमले ने सेना को बैकफुट पर ला दिया"
30 May, 2025 12:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारतीय सेना ने पाकिस्तान के कई सैन्य एयरबेस को तबाह कर दिया था. पहले तो पाकिस्तान इस चीज को नकारता रहा. लेकिन अब पाकिस्तान ने इस बात को स्वीकार कर लिया है. दरअसल एक रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एक बड़ी बात को स्वीकार करते हुए कहा है कि 9 से 10 मई की रात को भारत के हमले के दौरान पाकिस्तानी सेना अचानक फंस गई. भारत ने रावलपिंडी के हवाई अड्डे सहित प्रमुख सैन्य ठिकानों पर हमला करने के लिए ब्रह्मोस मिसाइल का इस्तेमाल किया.
शहबाज शरीफ ने क्या कहा?
अजरबैजान में एक कार्यक्रम में बोलते हुए शहबाज शरीफ ने कहा कि पाकिस्तान ने 10 मई को सुबह की नमाज के बाद भारत पर हमला करने की योजना बनाई थी. शरीफ ने कहा कि पाकिस्तान के कुछ करने से पहले ही भारत की लंबी दूरी की सुपरसोनिक ब्रह्मोस क्रूज मिसाइलों ने पाकिस्तान के कई प्रांतों में कई ठिकानों को निशाना बनाया. शरीफ ने कहा कि उन्हें सुबह-सुबह हुए हमले की जानकारी मुनीर ने दी, जिन्हें अब फील्ड मार्शल के पद पर पदोन्नत किया गया है. पाक पीएम के हवाले से कहा, "हमारे सशस्त्र बल फज्र की नमाज के बाद सुबह 4.30 बजे कार्रवाई करने के लिए तैयार थे. लेकिन उन्हें उस समय तक का वक्त ही नहीं मिल सका. उससे पहले ही भारत ने एक बार फिर ब्रह्मोस का इस्तेमाल करते हुए रावलपिंडी के हवाई अड्डे सहित पाकिस्तान के कई प्रांतों को निशाना बनाया."
भारत ने क्यों शुरू किया ऑपरेशन सिंदूर?
पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था. बता दें कि पहलगाम आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हो गई थी. इसके बाद ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारत ने 9 और 10 मई की रात को बड़ी कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान में 9 आतंकवादी ठिकानों पर हमला कर उन्हें तबाह कर दिया. इस हमले में 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए. इसके बाद पाकिस्तान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए भारत पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए, हालांकि भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम ने इन हमलों को नाकाम कर दिया. इसके बाद भारत ने फिर कार्रवाई की और ब्रह्मोस से हमले कर पाकिस्तान के कई एयरबेस को तबाह कर दिया, जिसके बाद पाकिस्तान घुटनों के बल आ गया.
पाकिस्तान ने क्यों दिया सीजफायर का प्रस्ताव?
ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय वायुसेना की भूमिक बेहद अहम रही है. दरअसल भारतीय वायुसेना के हमलों में पाकिस्तान के कई एयरबेस और रडार सिस्टम बर्बाद हो गए. इन हमलों ने पाकिस्तान की सेना और सरकार को घुटनों के बल ला दिया. यही कारण था कि पाकिस्तान की सेना पाकिस्तान से यात्री विमानों को उड़ने दे रही थी, ताकि भारतीय सेना के हमलों को रोका या टाला जा सके. वहीं भारतीय सेना नहीं चाहती थी कि गलती से भी किसी यात्री विमान को नुकसान पहुंचाया जाए. हालांकि भारतीय सेना के सटीक हमलों के बाद पाकिस्तान घुटनों के बल आ गया और उसने सीजफायर का प्रस्ताव दिया.
ईरान की अदालत का बड़ा फैसला, मोसाद के खतरनाक जासूस पेड्राम मदनी को दी फांसी
30 May, 2025 11:58 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ईरान: ईरान ने आखिरकार उस जासूस को मौत के घाट उतार दिया, जिसे मोसाद का सबसे चालाक और खतरनाक एजेंट बताया जा रहा था. उस शख्स को दिनदहाड़े फांसी दी गई. जो ईरान में ही बैठकर इजराइल की खुफिया एजेंसी के लिए काम कर रहा था. इस शख्स का नाम था पेड्राम मदनी. ईरान की न्यायपालिका ने पुष्टि की है कि पेड्राम मदनी को मोसाद के लिए जासूसी करने और भारी पैमाने पर वित्तीय भ्रष्टाचार के जुर्म में फांसी दी गई है. बताया गया कि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह सजा अमल में लाई गई. मदनी को 2020 में तेहरान से गिरफ्तार किया गया था. उस पर आरोप था कि वह इजराइली खुफिया एजेंसी मोसाद के लिए काम कर रहा था और अवैध तरीकों से संपत्ति अर्जित कर रहा था. वो यूरोप में बिटकॉइन और यूरो के जरिए पैसे लेता था.
जर्मनी में ली ट्रेनिंग, खड़ा कर रहा था जासूसी नेटवर्क
जांच में सामने आया कि पेड्राम मदनी अक्सर विदेश जाता था, खासकर जर्मनी. वहीं उसने मोसाद के ट्रेनिंग प्रोग्राम्स में हिस्सा लिया. ट्रेनिंग के बाद वह ईरान लौटकर एक सक्रिय जासूसी नेटवर्क खड़ा करने लगा. न्यायपालिका के अनुसार, मदनी लोगों की भर्ती करता, गोपनीय जानकारी जुटाता और इन्हें सुरक्षित चैनलों के जरिए मोसाद तक पहुंचाता था. सबसे चौंकाने वाली बात ये सामने आई कि मदनी ने ब्रसेल्स स्थित इजराइली दूतावास में सीधे मोसाद अधिकारी से मुलाकात की थी.
सेंवदेनशील ठिकानों की जानकारियाँ की लीक
डिजिटल फॉरेंसिक जांच में उसकी डिवाइसेज से कई गुप्त संदेश बरामद हुए हैं, जो उसने अपने हैंडलर को भेजे थे. अदालत में पेश सबूतों से साफ है कि मदनी ने ईरान के कई संवेदनशील और रणनीतिक ठिकानों की जानकारी उनके स्थान और विवरण मोसाद को भेजे थे. एक आदेश में तो उसके हैंडलर ने उसे साफ कहा था कि सूचनाओं को कैटेगराइज़ करके सर्विस की स्पेशल यूनिट तक पहुंचाया जाए.
कैसे पकड़ा गया मोसाद का ये एजेंट?
ईरानी सुरक्षा एजेंसियों ने सतर्क निगरानी से मदनी का नेटवर्क ध्वस्त कर दिया. उसके विदेशी संपर्कों को काटा गया और उसे गिरफ्तार किया गया. कोर्ट ने उसे ‘मोहरबेह’ (ईश्वर से युद्ध) और ‘इफसाद फिल-अर्ज़’ (ज़मीन पर भ्रष्टाचार फैलाना) का दोषी पाया. फैसले के अनुसार, मदनी को मौत की सजा सुनाई गई, जिसे अब अंजाम दे दिया गया है. इससे पहले भी कई हाई-प्रोफाइल मोसाद एजेंट, जैसे मोहसिन लैंगरानशीन, पकड़े जा चुके हैं, जो ईरान में आतंक फैलाने की साजिश में शामिल थे.
पाकिस्तान में तेज बारिश और हवाओं से तबाही, खैबर पख्तूनख्वा में 8 की मौतें, 21 लोग घायल
30 May, 2025 09:42 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पाकिस्तान: पाकिस्तान में इस समय आसमानी आफत का कहर दिखाई दे रहा है. जहां बारिश राहत बन कर सामने आती है, वहीं देश में मूसलाधार बारिश हो रही है जो मुसीबत बन गई है. पाकिस्तान की खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में मूसलाधार बारिश के साथ तेज हवा चल रही है, जिससे हालात इतने खराब हो गए हैं कि अब तक 8 लोगों की मौत दर्ज की गई है. वहीं, 21 घायल हो गए हैं. प्रांतीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (PDMA) के एक प्रवक्ता ने बताया कि भारी बारिश के चलते मारे गए लोगों में 5 पुरुष, दो महिलाएं और एक बच्चा भी शामिल है. वहीं, घायलों में 10 पुरुष, 5 महिलाएं और 6 बच्चे शामिल हैं.
बारिश से मची तबाही
बारिश ने पिछले कई दिनों से खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में तबाही मचाई हुई है. इससे पहले मंगलवार को भी आसमानी आफत के कारण 3 लोगों की मौत दर्ज की गई थी. जिसमें दो महिलाएं भी शामिल थी. वहीं, भारी बारिश, बिजली गिरने और ओलावृष्टि से 7 लोग घायल हो गए थे.
PDMA ने जारी की रिपोर्ट
गुरुवार को खैबर पख्तूनख्वा के कई हिस्सों में तेज हवाओं के साथ भारी बारिश ने कहर बरपाया है. तेज हवा के चलते पेड़ भी गिर गए, कई घरों को भारी नुकसान हुआ. PDMA ने एक रिपोर्ट जारी की है जिसमें 27 मई से पूरे खैबर पख्तूनख्वा में बारिश और तेज हवाओं की वजह से हुए जान और माल के नुकसान का विवरण दिया गया है.
कई घरों को पहुंचा नुकसान
रिपोर्ट के मुताबिक, कुदरती आफत के चलते 25 घर क्षतिग्रस्त हो गए हैं, जिनमें एक पूरी तरह से नष्ट हो गया और 24 आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गए हैं. ये घटनाएं मर्दन, स्वाबी, पेशावर, शांगला, स्वात, तोरघर, मोहमंद, मनसेहरा और हरिपुर सहित विभिन्न जिलों में हुईं.
राहत और बचाव का काम जारी
PDMA ने संबंधित जिला प्रशासन को प्रभावित परिवारों के लिए तत्काल राहत सुनिश्चित करने और घायलों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है. मौसम का यही मिजाज 31 मई तक जारी रहने की उम्मीद है. प्रवक्ता ने कहा कि PDMA सभी जिला प्रशासनों और संबंधित राहत एजेंसियों के साथ संपर्क में है. उन्होंने कहा, PDMA इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर पूरी तरह से चालू है और नागरिकों को 1700 पर कॉल करके किसी भी घटना की रिपोर्ट करने की सलाह दी गई है.
कांग्रेस पर अनिल विज का वार: खाते भारत का हैं, सोचते पाकिस्तान जैसा
29 May, 2025 05:29 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हरियाणा के कैबिनेट मंत्री अनिल विज अक्सर अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में बने रहते हैं. एक बार फिर से उन्होंने कांग्रेस नेताओं दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर तीखा प्रहार किया है. उनका कहना है कि कांग्रेस के नेता खाते पीते तो भारत का है लेकिन इनके दिमाग में चिप पाकिस्तान की है. उन्होंने का कि यह लोग हमेशा पाकिस्तान की बातें करते हैं, पाकिस्तान केअखबार और वहां के चैनलों पर जो कहते है वही बातें ये लोग बोलते हैं.
दरअसल जब पत्रकारों ने उनसे कांग्रेस नेता के उस बयान के बारे में पूछा जिसमें नेता ने कहा था कि पूंछ और पहलगाम आतंकवादी हमले को लेकर संघर्ष हुआ और विराम भी हुआ लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला, इसके जवाब में उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेता भारत का खाते हैं लेकिन इनके दिमाग में पाकिस्तान की चिप लगी है इसीलिए ये लोग इस तरह की बातें करते हैं.
‘जुमलेबाज हैं केजरीवाल’
वहीं आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधते हुए विज ने कहा कि केजरीवाल बिना सोचे समझे घोषणाएं कर देते है फिर उन्हें पूरा नहीं कर पाते. उन्होंने केजरीवाल को जुमलेबाज करार दिया. मंत्री ने केजरीवाल के बयान कि बनिया का बेटा हूं, पैसे कहीं से भी लाऊंगा, हमने पंजाब में बिजली फ्री की, स्कूल और अस्पताल सुधारे, इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कैबिनेट मंत्री ने कहा कि केजरीवाल जुमलेबाज हैं.
‘घोषणाएं कर देते हैं उन्हें पूरी नहीं कर पाते’
मंत्री ने कहा कि पिछले कई दिनों से केजरीवाल शांत थे. देश का इतना बड़ा युद्ध था, वो फिर भी शांत रहे. ऐसे में भी यह कह रहे हैं कि पैसे कहीं से भी ले आऊंगा. उन्होंने कहा कि पैसे तो सरकार देगी वह बिना सोचे समझे कोई भी घोषणाएं कर देते हैं और फिर उन्हें पूरी नहीं कर पाते.
‘पर्यटकों की सुरक्षा राज्य सरकार की जिम्मेदारी’
वहीं पहलगाम में सुरक्षा को लेकर जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के बयान कि टूरिज्म मेरी जिम्मेदारी है, लेकिन सुरक्षा मेरी जिम्मेदारी नहीं है, के बारे में विज ने कहा कि सुरक्षा भी उन्हीं (मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला) की जिम्मेवारी है. उनकी सरकार है और वो जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री है, वहां पर काम करने वालों की पहचान करना भी उनकी जिम्मेवारी है. कौन-कौन किस प्रकार की काम कर रहे हैं वह देखने की जिम्मेदारी भी सीएम की है. उन्होंने कहा कि हर सरकार का काम है कि वह अपने देश के नागरिकों की सुरक्षा करे.
‘जैसे आए हैं वैसे ही जाएंगे मोहम्मद यूनुस’
साथ ही बांग्लादेश में मचे बवाल को लेकर मंत्री अनिल विज ने कहा कि बांग्लादेश में जिस प्रकार से मोहम्मद यूनुस सरकार में आए थे जनता उन्हें उसी प्रकार वापस भेज देगी. ये बात विज ने यूनुस के उस बयान पर कही जिसमें उन्होंने कहा था कि “बांग्लादेश में जो स्थिति है, उसके लिए भारत जिम्मेदार है”, विज ने इसे पुरानी बात करार दिया. उन्होंने कहा कि कोई भी अपनी गलती नहीं मानता अपनी कमियों का आरोप वह दूसरे पड़ोसी देशों पर लगा देते हैं. विज ने कहा कि मोहम्मद यूनुस जिस तरह से आए थे, अब उसी प्रकार से जनता उन्हें वापस भेज देगी.
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