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इन जगहों पर अचानक 1 घंटा छोटा हो जाएगा दिन, घूम जाएगा लोगों का दिमाग
27 Oct, 2025 01:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन । इस साल अक्टूबर महीना जियो पॉलिटिक्स के लिए बेहद अहम रहा, महीना खत्म होते-होते दुनिया भर के टॉप लीडर्स के बीच अहम बैठक होने वाली हैं। कई लोगों को लग सकता है कि कोई कॉन्फ्रेंस कॉल मिस गई या अचानक टाइम कहीं फिसल गया। ऐसा इसलिए होने वाला है क्योंकि एक बार फिर से वहीं अजीब वक्त आ गया है जब यूरोप और संयुक्त राज्य अमेरिका आउट ऑफ सिंक हो जाएंगे क्योंकि डे-लाइट सेविंग टाइम से स्टैंडर्ड टाइम पर स्विच होगा।
सभी देश लाइट सेविंग टाइम के हिसाब से नहीं चलते लेकिन यूरोप और उत्तरी अमेरिका में इसका पालन किया जाता है। इन देशों के लिए घड़ी बदलने की तारीख अलग-अलग होती है, ऐसा इसलिए होता है क्योंकि टाइम से जुड़े नियम अलग-अलग जगहों पर दूसरी तरह से बनाए गए थे।
कैसा दिखेगा टाइम डिफरेंस?
जिन देशों में इसका पालन किया जाता है, वहां उत्तरी गोलार्ध में गर्मियों में दिन के उजाले के घंटों में वृद्धि का अधिकतम लाभ उठाने के लिए मार्च में घड़ियों को मानक समय से एक घंटा आगे किया है। सर्दियों का मौसम आते ही घड़ियां फिर से मानक समय पर आ जाती हैं। यूके और यूरोप में, यह अक्टूबर के आखिरी रविवार को सुबह 2 बजे होता है लेकिन अमेरिका और कनाडा में, नवंबर के पहले रविवार को सुबह 2 बजे घड़ियां एक घंटा पीछे हो जाती हैं।
इस बीच के सप्ताह का मतलब है कि अटलांटिक के दोनों किनारों के बीच उदाहरण के लिए लंदन और न्यूयॉर्क के बीच – समय का अंतर सामान्य से एक घंटा कम है, जिससे जूम कॉल या अन्य बैठकों को मैनेज करने में गड़बड़ी की स्थित हो सकती है।
ट्रंप का दौरा: चीन से संबंध सुधारने की कोशिश, शी जिनपिंग से मुलाकात की उम्मीद
27 Oct, 2025 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस के साथ संबंध सुधारने में असफलता के बाद चीन की ओर रुख किया है। पुतिन को अलग-थलग करने की कोशिश नाकाम रहने के बाद ट्रंप ने एशिया दौरे से पहले चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलने की इच्छा जताई है। हालांकि, यह मुलाकात अभी फाइनल नहीं हुई है, लेकिन मलेशिया में चल रही व्यापार वार्ताओं से सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं। ट्रंप का यह कदम अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध को समाप्त करने और क्षेत्रीय स्थिरता बहाल करने की दिशा में है, जहां रूस-चीन की नजदीकी अमेरिकी कूटनीति के लिए चुनौती बनी हुई है।
ट्रंप का छह दिवसीय एशिया दौरा शनिवार को मलेशिया से शुरू हुआ, जहां वे शिखर सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं। इसके बाद जापान और दक्षिण कोरिया का दौरा होगा, जहां एपीईसी शिखर सम्मेलन के दौरान 30 अक्टूबर को शी जिनपिंग से द्विपक्षीय बैठक की उम्मीद है। व्हाइट हाउस प्रेस सेक्रेटरी कैरोलाइन लेविट ने पुष्टि की कि यह बैठक दक्षिण कोरिया के ग्यॉंगजू या बुसान में हो सकती है। ट्रंप ने एयर फोर्स वन पर पत्रकारों से कहा, मुझे लगता है कि हम चीन के साथ एक शानदार सौदा करेंगे। यह दौरा ट्रंप के दूसरे कार्यकाल का पहला एशिया दौरा है, जो व्यापार, सुरक्षा और उत्तर कोरिया जैसे मुद्दों पर केंद्रित है।
ट्रंप-शी मुलाकात से पहले मलेशिया में अमेरिका-चीन के बीच शनिवार को बहुत रचनात्मक व्यापार वार्ता हुई। अमेरिकी वित्त मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि दोनों पक्षों ने मलेशिया के मर्डेका 118 (दुनिया की दूसरी सबसे ऊंची इमारत) में अच्छी चर्चा की, जो अगले दिन जारी रहेगी। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने चीनी उप-प्रधानमंत्री हे लिफेंग से मुलाकात की, जहां दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच तनाव पर बात हुई। मुख्य मुद्दे थे: दुर्लभ मिट्टी (रेर अर्थ्स) के निर्यात पर चीनी प्रतिबंध, कृषि खरीद, टिकटॉक, फेंटेनिल और द्विपक्षीय व्यापार।बेसेंट ने कहा, हमने नेताओं की बैठक के लिए एक सफल ढांचा तैयार किया है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने कुआलालंपुर में पत्रकारों से कहा कि वार्ता व्यापक थीं, जिसमें टैरिफ ट्रूस को 10 नवंबर तक बढ़ाने पर चर्चा हुई। चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने पुष्टि की कि हे लिफेंग 24-27 अक्टूबर तक मलेशिया में हैं। ये पांचवीं दौर की वार्ता हैं, जो सितंबर में अमेरिकी ब्लैकलिस्ट विस्तार और चीनी प्रतिबंधों से पैदा तनाव को कम करने का प्रयास हैं। यदि सफल रही, तो 100% टैरिफ से बचाव संभव है, जो अमेरिकी उद्योगों के लिए राहत होगा।
ट्रंप प्रशासन रूस को चीन से अलग करने की कोशिश में जुटा है, लेकिन पुतिन-शी की नजदीकी ने इसे मुश्किल बना दिया। फरवरी 2025 में ट्रंप-पुतिन की सऊदी अरब मुलाकात और अगस्त में अलास्का शिखर सम्मेलन के बावजूद, रूस ने यूक्रेन युद्ध में कोई बड़ा समझौता नहीं किया। चीन ने पुतिन को सच्चा मित्र कहा और युद्ध समाप्ति के लिए ट्रंप-पुतिन शिखर सम्मेलन का प्रस्ताव दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की रिवर्स निक्सन रणनीति (रूस को चीन से अलग करना) विफल हो रही है, क्योंकि बीजिंग-मॉस्को संबंध मजबूत हैं।ट्रंप ने कहा कि वे रूस के साथ संबंध सुधारना चाहते हैं, लेकिन यूक्रेन पर पुतिन की जिद ने बाधा डाली। अब चीन से मदद मांगकर ट्रंप आशा कर रहे हैं कि शी मध्यस्थता करेंगे। दक्षिण कोरिया में ट्रंप उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन से भी मिलने की इच्छा जता चुके हैं, जो क्षेत्रीय शांति के लिए महत्वपूर्ण होगा।ट्रंप ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि वे चीन के साथ व्यापार युद्ध खत्म करना चाहते हैं। उन्होंने कहा, हमारे कई संदेह और सवाल सुलझेंगे। यदि मुलाकात सफल रही, तो यह अमेरिका के लिए निवेश सौदों और शांति प्रयासों में प्रगति लाएगी। हालांकि, विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यदि टैरिफ तनाव बढ़ा, तो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होगी। मलेशिया, वियतनाम जैसे देशों को इससे लाभ हो सकता है, लेकिन विफलता पर जोखिम बढ़ेगा।
‘मैं उनसे भी गंदा गेम खेल सकता हूं’, ट्रेड टॉक कैंसिल होने के बाद कनाडाई PM कार्नी पर भड़के ट्रंप
26 Oct, 2025 11:18 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
डेस्क: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि वह कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी से एशिया दौरे के दौरान मुलाकात नहीं करेंगे. व्हाइट हाउस से रवाना होने से पहले पत्रकारों ने जब पूछा कि क्या वे कार्नी से बातचीत करेंगे, तो ट्रंप ने साफ जवाब दिया, “नहीं, मेरी कोई ऐसी योजना नहीं है.”
ट्रंप (Trump) ने कनाडा (Canada) के एक विवादित विज्ञापन (Advertisement) पर नाराजगी जताते हुए कहा, “उन्होंने जो किया, वह बेहद बेईमानी (Dishonesty) है. मुझे बताया गया कि वे विज्ञापन को हटाने वाले हैं, लेकिन वे अब भी इसे चला रहे हैं. ये बहुत गंदा खेल है, लेकिन मैं उनसे भी गंदा खेल सकता हूं.”
रूस-यूक्रेन के युद्ध में किम जोंग उन ने कुर्बान कर दिए हजारों सैनिक, याद में बन रहा स्मारक
26 Oct, 2025 10:17 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
प्योंगयांग। यूक्रेन के साथ युद्ध (Russia-Ukraine War) में रूस का खुलकर समर्थन करने वाला उत्तर कोरिया (North Korea) अब अपने सैनिकों के लिए स्मारक बनवा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक रूस-यूक्रेन के युद्ध में उत्तर कोरिया के हजारों सैनिक मारे गए हैं। उत्तर कोरिया की न्यूज एजेंसियों के मुताबिक राजधानी प्योंगयांग में इस स्मारक की नींव रखी गई है। शिलान्यास कार्यक्रम में उत्तर कोरिया में रूस के राजदूत और खुद किम जोंग उन शामिल हुए थे।
किम ने कहा कि यह म्यूजियम सच्चे देशभक्तों के लिए बनाया जा रहा है। बता दें कि उत्तर कोरिया जो कि दुनियाभर में सबसे अलग-थलग देश माना जाता है, उसकी रूस के साथ खूब बन रही है। पश्चिमी रूस से यूक्रेनी सेना को खदेड़ने के लिए किम जोंग उन ने हथियार और हजारों सैनिक रूस भेजे थे। दक्षिण कोरिया की मीडिया के मुताबिक इस युद्ध में उत्तर कोरिया के करीब 6 हजार सैनिक मारे गए हैं और हजारों सैनिक घायल हुए हैं।
किम जोंग उन ने रूस की मदद करने के लिए अपने सैनिकों की खूब तारीफ की। उन्होंने कहा कि यह संग्रहालय उन सैनिकों को समर्पित है जिन्होने राष्ट्रभक्ति की भावना का परिचय देते हुए रूस के लिए लड़ते हुए अपनी जान दे दी। इस मौके पर सेना के बड़े अधिकारियों के साथ उन सैनकों के परिवारवाले भी मौजूद थे जिनकी रूस में मौत हो गई है।
बता दें कि रूस और उत्तर कोरिया में बड़ा सैन्य समझौता हुआ है जिसके मुताबिक युद्ध की स्थिति में दोनों को एक दूसरे के साथ खड़े होना है। वहीं उत्तर कोरिया लगातार नए-नए हथियारों का परीक्षण करता रहता है। हाल के वर्षों में उत्तर कोरिया ने विभिन्न हाइपरसोनिक हथियार प्रणालियों का परीक्षण किया है। ये हथियार ध्वनि की गति से पांच गुना अधिक गति से उड़ान भरने में सक्षम बताए जाते हैं और अपने मार्ग से मिसाइल रक्षा प्रणालियों को भ्रमित करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। हालांकि विशेषज्ञों ने यह सवाल उठाया है कि क्या उत्तर कोरियाई मिसाइलें वास्तव में परीक्षणों के दौरान उतनी ही गति से उड़ान भर रही हैं जितनी गति का दावा किया जाता है।
भारत-चीन के बीच 5 साल बाद फिर सीधी विमान सेवा… 26 अक्टूबर से शुरुआत
26 Oct, 2025 09:16 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग। चीन (China) ने शुक्रवार को कहा कि वह भारत (India) के साथ अपने संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक नजरिये से देखने का इच्छुक है और आगामी रविवार से दोनों देशों के बीच उड़ानों (Flights) का फिर से शुरू होना 2.8 अरब लोगों के बीच मैत्रीपूर्ण आदान-प्रदान (Friendly exchange) को बढ़ावा देने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। भारत ने दो अक्टूबर को घोषणा की थी कि चीन के लिए सीधी उड़ानों का संचालन 26 अक्टूबर से फिर से शुरू होगा। इसके बाद, इंडिगो ने कहा कि वह 26 अक्टूबर से कोलकाता से गुआंगझोउ और 10 नवंबर से दिल्ली से गुआंगझोउ के लिए उड़ानों का संचालन फिर से शुरू करेगा।
चीनी एयरलाइन ‘चाइना ईस्टर्न’ (Chinese airline China Eastern) ने घोषणा की है कि वह नौ नवंबर से शंघाई से दिल्ली के लिए उड़ान परिचालन पुनः शुरू करेगी। पांच साल के अंतराल के बाद रविवार से दोनों देशों के बीच उड़ानों का संचालन फिर से शुरू होने के बारे में पूछे जाने पर, चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने यहां प्रेस वार्ता में कहा कि यह दोनों देशों के बीच बनी सहमति को लागू करने की दिशा में नवीनतम प्रगति है। उन्होंने कहा कि यह चीन और भारत के 2.8 अरब से अधिक लोगों के बीच मैत्रीपूर्ण आदान-प्रदान को सुविधाजनक बनाने के लिए एक सकारात्मक उपाय भी है।
चीन, भारत के साथ मिलकर काम करने को तैयार
उन्होंने कहा कि चीन, भारत के साथ मिलकर काम करने को तैयार है ताकि चीन-भारत संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक परिप्रेक्ष्य से देखा जा सके, द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ावा दिया जा सके, दोनों देशों और उनके लोगों को बेहतर लाभ पहुंचाया जा सके और एशिया तथा विश्व में शांति और समृद्धि बनाए रखने में उचित योगदान दिया जा सके।
कोविड-19 महामारी के बाद से उड़ानें बंद
वर्ष 2020 में कोविड-19 महामारी के बाद दोनों देशों के बीच उड़ान सेवाओं को स्थगित कर दिया गया था। इसके बाद पूर्वी लद्दाख में चार साल से अधिक समय तक चले सीमा गतिरोध के मद्देनजर इन्हें बहाल नहीं किया गया था। गत 31 अगस्त को राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ तियानजिन बैठक के दौरान अपने वक्तव्य में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा था कि सीधी उड़ानों का संचालन पुनः शुरू करने पर विचार किया जा रहा है।
जून 2020 में रिश्ते खतरनाक गिरावट स्तर पर
जून 2020 में गलवान घाटी में हुई झड़पों के बाद भारत-चीन संबंध 1962 के युद्ध के बाद से अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गये थे। कई कूटनीतिक और सैन्य वार्ताओं के बाद, दोनों पक्षों ने पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर कई टकराव वाले स्थानों से अपने सैनिकों को वापस बुला लिया था।
पिछले वर्ष अक्टूबर में दोनों पक्षों ने अंतिम दो टकराव बिंदुओं, देपसांग और डेमचोक से सैनिकों को पीछे हटाने को लेकर समझौता किया था। समझौते को अंतिम रूप दिए जाने के कुछ दिन बाद मोदी और शी ने कजान में वार्ता की और संबंधों को बेहतर बनाने के वास्ते कई निर्णय लिए।पिछले कुछ महीनों में, दोनों पक्षों ने संबंधों को सुधारने के लिए कई कदम उठाए हैं, जिनमें कैलाश मानसरोवर यात्रा को फिर से शुरू करना भी शामिल है।
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के पास गोलीबारी… साइकिल सवार ने दूसरे शख्स को मारी गोली
26 Oct, 2025 08:12 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिका (America) की प्रतिष्ठित हार्वर्ड यूनिवर्सिटी (Harvard University) के पास शुक्रवार को गोलीबारी (Firing) की घटना हुई है। एक साइकिल सवार (Cyclist) शख्स ने दूसरे व्यक्ति पर गोली चला दी। पुलिस द्वारा संदिग्ध की तलाश की जा रही है।
गोलीबारी की घटना के बाद यूनिवर्सिटी ने बयान जारी किया है। उसने वेबसाइट पर लिखा, ”कैम्ब्रिज पुलिस (Cambridge Police) रिपोर्ट कर रही है कि साइकिल पर सवार एक अनजान आदमी ने अभी-अभी शर्मन स्ट्रीट पर एक दूसरे आदमी को गोली मारी है। संदिग्ध साइकिल पर गार्डन स्ट्रीट की तरफ जा रहा है। कृपया उस इलाके से बचें और सुरक्षित जगह पर रहें।” यूनिवर्सिटी ने कुछ समय के लिए सुरक्षित जगह पर रहने का ऑर्डर जारी किया था, जिसे बाद में हटा लिया गया।
पुलिस ने कहा कि अभी तक किसी की पहचान नहीं हुई है, और लोगों की सुरक्षा को कोई खतरा नहीं है। जैसे ही और जानकारी मिलेगी, दी जाएगी। यूनिवर्सिटी ने अपनी इमरजेंसी अलर्ट वेबसाइट पर कहा, “कृपया सावधान रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की रिपोर्ट HUPD को 617-495-1212 पर करें।”
यह गोलीबारी की घटना शर्मन स्ट्रीट पर हुई, जहां साइकिल पर सवार एक अनजान आदमी ने दूसरे आदमी पर गोली चलाई। घटना के बाद, संदिग्ध गार्डन स्ट्रीट की तरफ भाग गया। इसके बाद, जांच एजेंसियां तुरंत मौके पर पहुंचीं। शुरुआती अलर्ट के मुताबिक, संदिग्ध शूटर को गार्डन स्ट्रीट की तरफ साइकिल चलाते देखा गया था, जो नॉर्थ कैम्ब्रिज से रेडक्लिफ क्वाड और हार्वर्ड स्क्वायर तक जाती है। पहले अलर्ट के करीब 20 मिनट बाद भी, कुछ स्टूडेंट और आस-पास के लोग क्वाड के बाहर थे, हालांकि सुबह 11:40 बजे तक इलाका खाली करा लिया गया था। एक रिहायशी घर के स्टाफ ने स्टूडेंट को अंदर रहने को कहा।
बॉडीबिल्डिंग की दीवानी जैकी के बाइसेप्स का साइज सुपरस्टार्स से भी बडा
25 Oct, 2025 04:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
एम्सटर्डम । फिटनेस और बॉडीबिल्डिंग की दीवानी नीदरलैंड्स की रहने वाली जैकी कॉर्न के बाइसेप्स का साइज हॉलीवुड सुपरस्टार और मशहूर बॉडीबिल्डर अर्नोल्ड श्वार्ज़नेगर से भी बड़ा है। जैकी कॉर्न आज पूरी दुनिया में अपनी हैरान कर देने वाली बॉडी और विशाल बाइसेप्स के कारण चर्चा में हैं। लोग उन्हें मज़ाक में ‘शी-हल्क’ कहकर बुलाते हैं, लेकिन जैकी इस उपनाम को गर्व का प्रतीक मानती हैं।
शागेन शहर की इस डच बॉडीबिल्डर ने अपने जीवन को पूरी तरह फिटनेस और ट्रेनिंग के लिए समर्पित कर दिया है। जैकी का सपना है कि एक दिन वेवर्ल्ड रेसलिंग एंटरटेनमेंट के रिंग में उतरें और अपनी ताकत का प्रदर्शन करें। अपने मसल्स को बनाए रखने के लिए वे रोज़ाना दो से तीन घंटे तक जिम में पसीना बहाती हैं और डाइट पर हर महीने करीब 45 हजार रुपये खर्च करती हैं। हाल ही में जैकी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर 25 इंच के “कर्वी गर्ल मसल्स” की तस्वीरें साझा कीं, जो देखते ही वायरल हो गईं। इन तस्वीरों के बाद उन्हें कई रेसलिंग और फिटनेस इवेंट्स से ऑफर मिलने लगे।
एक शो में बातचीत के दौरान जैकी ने बताया कि जब अर्नोल्ड श्वार्ज़नेगर के बाइसेप्स का साइज अपने चरम पर 56 सेंटीमीटर था, तब उनके बाइसेप्स 64 सेंटीमीटर यानी लगभग 25 इंच के हैं। उनके रेसलिंग कोच अमर के मुताबिक, “जैकी नीदरलैंड्स की सबसे बड़ी बाजुओं वाली महिला हैं, और संभव है कि वह दुनिया में भी सबसे आगे हों।” जैकी कहती हैं कि उनका मकसद सिर्फ मसल्स बनाना नहीं बल्कि दूसरों को यह दिखाना है कि महिलाएं भी अपनी मेहनत और अनुशासन से हर क्षेत्र में पुरुषों के बराबर खड़ी हो सकती हैं। वे मानती हैं कि ताकत सिर्फ शरीर की नहीं, बल्कि आत्मविश्वास की भी होती है। आज जैकी कॉर्न फिटनेस वर्ल्ड की प्रेरणा बन चुकी हैं।
पाकिस्तान में सेना से लेकर राजनीति तक में पंजाब का दबदबा, अब नहीं दे रहा गेहूं
25 Oct, 2025 03:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। पाकिस्तान में हमेशा सेना, ब्यूरोक्रेसी से लेकर राजनीति तक में पंजाब सूबे का ही प्रभुत्व रहा है। इसे लेकर बलूचिस्तान में तो भारी विद्रोह रहा है और अकसर ऐसी घटनाएं सामने आती हैं, जिनमें पंजाबी मूल के लोगों को टारगेट कर मारा जाता है। इस बीच एक और विवाद पाकिस्तान में खड़ा हो गया है। खैबर पख्तूनख्वा से लेकर सिंध प्रांत तक आटे की किल्लत हो गई है और दोनों राज्यों की सरकारें पंजाब पर आरोप लगा रही हैं कि उसने गेहूं का स्टॉक रोक रखा है। सप्लाई ना होने के चलते उनके राज्यों में आटे की किल्लत पैदा हो गई है।
इससे महंगाई बढ़ गई है और गरीब तबके के लोगों को दो वक्त की रोटी के लिए भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। खैबर पख्तूनख्वा सरकार ने गेहूं के अंतर-राज्यीय मूवमेंट के बाधित होने पर सवाल उठाया। सरकार ने कहा कि पंजाब की ओर से सप्लाई चेन पर ब्रेक लगाया गया है। इससे उनके राज्य में आटे के दाम बढ़ रहे हैं और खाद्य सुरक्षा संकट में है। इसके अलावा सिंध प्रांत की पीपीपी सरकार ने भी पंजाब पर हमला बोला है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सिंध प्रांत की सरकार का कहना है कि पंजाब प्रशासन ने गेहूं के बीज की सप्लाई ही रोक रखी है। इससे आने वाले फसल चक्र में गेहूं का उत्पादन सिंध में प्रभावित हो सकता है। खैबर पख्तूनख्वा सरकार ने तो पंजाब को एक पत्र लिखा है, जिसमें कहा गया है कि गेहूं की सप्लाई पर लगा ब्रेक हटाया जाए। यदि ऐसा नहीं हुआ तो हमारी खाद्य सुरक्षा खतरे में होगी। लेटर में कहा गया कि हमारे राज्य में गेहूं की कमी है। हम पंजाब पर निर्भर हैं और हमें प्रति दिन 14,500 टन गेहूं की जरूरत है। वहीं पख्तूनख्वा सरकार ने कहा कि ऐसी स्थिति में यदि पंजाब की ओर से सप्लाई चेन बाधित होगी तो हमारे यहां खाने की किल्लत हो जाएगी और बाजार में हाहाकार मच जाएगा। यही नहीं खैबर पख्तूख्वा की ओऱ से पाकिस्तान के संविधान का भी हवाला दिया गया है।
पख्तूनख्वा सरकार ने कहा कि संविधान इस बात की गारंटी देता है कि किसी भी वस्तु या उत्पादन का इंटर-स्टेट मूवमेंट होगा और उसे बाधित नहीं किया जा सकता। राज्य सरकार ने कहा कि फिलहाल पंजाब की ओर से 2000 टन गेहूं की सप्लाई का कोटा हमारे लिए तय किया गया है, बेहद कम है। हमारी जरूरत तो इससे 7 गुना तक ज्यादा है। खैबर पख्तूनख्वा प्रांत की ओर से कहा गया है कि हमने कई बार संदेश भेजा, लेकिन सप्लाई पर लगा बैन जस का तस है। ऐसा करना संविधान का उल्लंघन है। इस तरह के हालात में पंजाब में क्षेत्रीय सद्भाव भी खतरे में पड़ सकती है, जहां पहले ही पंजाब के प्रभुत्व को लेकर अन्य राज्यों में असंतोष रहा है।
पश्चिमी देश रूस से तेल ले रहे हैं फिर भारत को टारगेट क्यों किया जा रहा: मंत्री गोयल
25 Oct, 2025 02:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बर्लिन । बर्लिन ग्लोबल डॉयलॉग में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने पश्चिमी देशों पर तीखा प्रहार करते हुए दोहरा मापदंड उजागर किया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब जर्मनी और ब्रिटेन रूस से तेल खरीदने के लिए अमेरिकी प्रतिबंधों से छूट मांग रहे हैं या प्राप्त कर चुके हैं, तो भारत को रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदने पर क्यों निशाना बनाया जा रहा है? यूके की ट्रेड मंत्री क्रिस ब्रायंट के साथ पैनल चर्चा में गोयल ने कहा, मैंने आज के अखबार में पढ़ा कि जर्मनी अमेरिकी प्रतिबंधों से तेल आयात के लिए छूट मांग रहा है। ब्रिटेन को तो पहले ही छूट मिल चुकी है। फिर भारत को क्यों टारगेट किया जा रहा है? ब्रायंट ने सफाई दी कि ब्रिटेन की छूट केवल रूसी कंपनी रॉसनेफ्ट की एक विशिष्ट सहायक कंपनी के लिए है। गोयल ने तुरंत पलटवार किया, हमारे पास भी रॉसनेफ्ट की एक सहायक कंपनी है, फिर भारत को क्यों परेशान किया जा रहा है?” इस जवाब से सभागार में सन्नाटा छा गया।
यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब अमेरिका और उसके सहयोगी भारत पर रूस से तेल खरीदारी को लेकर भारी दबाव डाल रहे हैं। पिछले महीने ट्रंप प्रशासन ने भारतीय उत्पादों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाते हुए कुल शुल्क को लगभग 50 प्रतिशत तक पहुंचा दिया। भारत ने इसे अनुचित, अन्यायपूर्ण और अव्यवहारिक करार दिया है। अमेरिकी तर्क है कि भारत जैसे देशों पर दबाव से रूस आर्थिक रूप से कमजोर होगा और यूक्रेन युद्ध समाप्त करने को मजबूर होगा। इसी बीच, यूरोपीय संघ ने रूस की सेना से कथित संबंधों के कारण तीन भारतीय कंपनियों पर प्रतिबंध लगा दिए। अमेरिका ने रॉसनेफ्ट और लुकोइल जैसी रूसी तेल कंपनियों पर भी नए प्रतिबंध थोपे हैं।
गोयल ने भारत की स्वतंत्र व्यापार नीति पर जोर देते हुए कहा कि देश किसी दबाव, डेडलाइन या सिर पर तनी बंदूक के साथ समझौता नहीं करता। अगर कोई टैरिफ लगाता है, तो भारत नए बाजार तलाशेगा, घरेलू मांग मजबूत करेगा और दीर्घकालिक लचीलापन विकसित करेगा। उन्होंने भारत की आर्थिक रणनीति का खुलासा करते हुए कहा कि अगले 20-25 वर्षों में 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनना लक्ष्य है। व्यापारिक संबंध राष्ट्रीय हित पर आधारित हैं, न कि बाहरी दबाव पर। भारत कभी किसी के कहने पर मित्र देशों से रिश्ते नहीं तोड़ेगा। व्यापार समझौते सिर्फ टैरिफ तक सीमित नहीं, बल्कि विश्वास और रिश्तों पर टिके हैं। भारत-अमेरिका व्यापार 2030 तक 500 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य है। गोयल ने भरोसा जताया कि 1.4 अरब युवा और महत्वाकांक्षी भारतीय देश को आगे ले जा रहे हैं।
जापान में कांपी धरती, भूकंप के जोरदार झटके लगे, दहशत में लोग
25 Oct, 2025 01:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
टोक्यो। जापान के होक्काइडो द्वीप में जोरदार भूकंप आया। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 6 रही। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी के मुताबिक, यह झटका 10 किलोमीटर की गहराई में दर्ज किया गया। राहत की बात यह रही कि अब तक किसी के घायल या हताहत होने की खबर नहीं है। जापान में भूकंप आना कोई नई बात नहीं है। यह देश प्रशांत महासागर के ‘रिंग ऑफ फायर’ क्षेत्र में आता है, जहां चार प्रमुख टेक्टोनिक प्लेट्स- पैसिफिक, फिलीपीन सागर, यूरेशियन और नॉर्थ अमेरिकन प्लेट्स मिलती हैं। इन्हीं प्लेटों की लगातार हलचल से यहां बार-बार भूकंप आते रहते हैं।
बता दें कि पूरा देश एक बेहद सक्रिय भूकंपीय क्षेत्र में है, और उनके पास दुनिया का सबसे घना भूकंपीय नेटवर्क है, यही कारण है कि यहां पर कई भूकंप रिकॉर्ड दर्ज होते हैं। बार-बार भूकंप की घटनाओं के देखते हुए जापान में हाईटेक व्यवस्थओं के साथ- साथ कठोर बिल्डिंग कोड भी लागू किए गए गंकिए हैं। जिसमें भूकंप के असर को कम करने वाली भूकंप-रोधी इमारतें और वॉर्निंग अलॉर्म्स शामिल है। जापान की भूगोलीय अवस्था की वजह से यहां पर भूकंप की फ्रीक्वेंसी बहुत ज्यादा है। ये देश रिंग ऑफ फायर पर स्थित है, जो टेक्टोनिक प्लेट्स का जंक्शन है, यहां पर 4 टेक्टोनिक प्लेट्स जब आपस में टकराती हैं तब धरती में कंपन की स्थित पैदा होती है। यही भूकंप आने का कारण बनता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जापान में एक साल में लगभग 1,500 बार भूकंप आते हैं, यानी हर दिन 2-3 भूकंप की स्थित पैदा होती है। भूकंप के अलावा जापान ज्वालामुखी सक्रिय क्षेत्र भी है।
दावा जल्द आएगी खुशखबरी- रूस-यूक्रेन समझौते की ओर बढ़ते कदम, जल्द मिलेगी राहत
25 Oct, 2025 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के विशेष दूत और शीर्ष आर्थिक वार्ताकार किरिल दिमित्रिएव ने दावा किया है कि रूस, अमेरिका और यूक्रेन एक कूटनीतिक समझौते के बेहद करीब हैं। शुक्रवार को अमेरिका पहुंचे दिमित्रिएव ने यह बात ऐसे समय में कही, जब दो दिन पहले ही ट्रंप प्रशासन ने रूस की दो प्रमुख तेल कंपनियों, रोजनेफ्ट और लुकोइल, पर नए प्रतिबंध लगाए थे। दिमित्रिएव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, मैं अमेरिका-रूस के बीच संवाद को आगे बढ़ाने के लिए वॉशिंगटन पहुंचा हूं। यह यात्रा पहले से तय थी और अमेरिकी पक्ष के निमंत्रण पर हो रही है। एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा, रूस, अमेरिका और यूक्रेन अब एक ठोस कूटनीतिक समाधान के करीब हैं। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की का यह स्वीकार करना कि अब युद्ध बैटल लाइनों तक सीमित हो गया है, एक महत्वपूर्ण बदलाव है। पहले यूक्रेन रूस की पूर्ण वापसी की मांग करता था, लेकिन अब स्थिति बदल रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर सभी पक्ष व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाएं, तो युद्ध को बातचीत के जरिए खत्म किया जा सकता है।
दिमित्रिएव ने यह भी स्पष्ट किया कि रूसी राष्ट्रपति पुतिन और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच प्रस्तावित मुलाकात रद्द नहीं हुई है, बल्कि इसे भविष्य की तारीख के लिए टाला गया है। हाल ही में ट्रंप ने कहा था कि वह बुडापेस्ट में होने वाली इस मुलाकात को स्थगित कर रहे हैं, क्योंकि वह बिना किसी ठोस परिणाम वाली बैठक नहीं चाहते। रूसी मीडिया से बातचीत में दिमित्रिएव ने कहा, दुर्भाग्यवश, यूक्रेन इस संवाद में बाधा डाल रहा है, और इसमें ब्रिटेन व कुछ यूरोपीय देशों का भी दबाव है, जो चाहते हैं कि यह संघर्ष जारी रहे। उन्होंने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि हाल के प्रतिबंधों से अमेरिकी नागरिकों के लिए पेट्रोल की कीमतें और बढ़ सकती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि रूस के साथ आर्थिक सहयोग की संभावनाएं अभी बाकी हैं, बशर्ते रूस के हितों का सम्मान हो। रोजनेफ्ट और लुकोइल, जो रूस के कुल तेल उत्पादन का आधा हिस्सा संभालती हैं, अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में हैं। दिमित्रिएव का यह बयान कूटनीतिक समाधान की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन चुनौतियां अभी भी बरकरार हैं।
अमेरिका में भारतीय ट्रक ड्राइवर ने कई कारों को रौंदा, हादसे में 3 की मौत
24 Oct, 2025 12:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
डेस्क: अमेरिका (America) के दक्षिणी कैलिफोर्निया (Southern California) में एक भीषण सड़क हादसे (Horrific Road Accidents) में तीन लोगों की मौत हो गई. इस हादसे के लिए 21 वर्षीय भारतीय युवक जसनप्रीत सिंह (Jasanpreet Singh) को जिम्मेदार ठहराया गया है, जो अवैध रूप से अमेरिका में रह रहा था. पुलिस के अनुसार, वह नशे की हालत में ट्रक चला रहा था, जिससे यह दुर्घटना हुई. आरोपी ट्रक ड्राइवर को गिरफ्तार कर लिया गया है.
यह हादसा सैन बर्नार्डिनो काउंटी फ्रीवे पर हुआ, जब जसनप्रीत सिंह का सेमी-ट्रक धीमी गति से चल रही गाड़ियों से जा टकराया. ट्रक के डैशकैम में हादसे का वीडियो कैद हुआ, जिसमें ट्रक एक SUV से टकराता दिखा. इस हादसे में तीन लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हुए.
पुलिस जांच में पाया गया कि जसनप्रीत ने ब्रेक तक नहीं लगाए और वह ड्रग्स के असर में गाड़ी चला रहा था. कैलिफोर्निया हाईवे पेट्रोल अधिकारी रोड्रिगो जिमेनेज ने बताया, उसे अस्पताल ले जाया गया और मेडिकल जांच में साबित हुआ कि वह नशे में था.’
अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (DHS) ने पुष्टि की है कि जसनप्रीत सिंह के पास अमेरिका में वैध इमिग्रेशन स्टेटस नहीं है. वह कथित तौर पर 2022 में दक्षिणी सीमा पार कर अमेरिका में दाखिल हुआ था और ‘नजरबंदी के विकल्प’ नीति के तहत देश के अंदर छोड़ दिया गया था. अब उसकी गिरफ्तारी के बाद यूएस इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एन्फोर्समेंट (ICE) ने उसके खिलाफ इमिग्रेशन डिटेनर जारी किया है.
एशियाई देशों में दिलचस्पी दिखा रहे हैं ट्रंप? जानें जापान-मलेशिया और साउथ कोरिया के दौरे के पीछे का प्लान
24 Oct, 2025 11:44 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
डेस्क: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) इस समय अपने दूसरे कार्यकाल की पहली बड़ी विदेश यात्रा (Foreign Travel) करने वाले हैं. इस दौरान वे एशिया के कई देशों की यात्रा करने वाले हैं. यह यात्रा केवल औपचारिक नहीं, बल्कि एशिया में अमेरिका की नई रणनीतिक मौजूदगी का संकेत मानी जा रही है. ट्रंप इस दौरे में मलेशिया, जापान और दक्षिण कोरिया का दौरा करेंगे. सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस यात्रा के दौरान उनकी चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की संभावना जताई जा रही है,जिस पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हैं.
यात्रा की शुरुआत ट्रंप मलेशिया से करने वाले हैं, जहां वे 26 से 28 अक्टूबर तक आसियान (ASEAN) शिखर सम्मेलन में शामिल होने वाले हैं. यह वही मंच है, जिससे ट्रंप अपने पिछले कार्यकाल में दूरी बनाए रखते थे, लेकिन इस बार उन्होंने इसे अपनी विदेश नीति की प्राथमिकता में रखा है. मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने घोषणा की है कि दोनों देशों के बीच एक नया व्यापार समझौता किया जाएगा. इसके साथ ही ट्रंप थाईलैंड और कंबोडिया के बीच शांति पहल में भी भूमिका निभाने वाले हैं. मलेशियाई मीडिया का कहना है कि यह ट्रंप की शांति निर्माता छवि को फिर से जिंदा करने का कोशिश है, जो उन्हें भविष्य में नोबेल शांति पुरस्कार की दौड़ में शामिल कर सकता है.
हमास को चेतावनी के बाद गाजा सीजफायर पर अमेरिकी उपराष्ट्रपति वेस ने फिर दिया बयान
24 Oct, 2025 10:43 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
डेस्क। इजरायल (Israel ) और हमास (Hamas) के बीच हुए सीजफायर (Ceasefire) के बाद हालात का जायजा लेने के लिए अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (Vice President J.D. Vance) और ट्रंप के प्रशासन के पश्चिम एशिया के दूत स्टीव विटकॉफ (Steve Witkoff) तेल अवीव में हैं। हाल ही में जेडी वेंस ने हमास को चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर हमास सहयोग नहीं करता है तो उसे मिटा दिया जाएगा। इतना ही नहीं वेंस ने युद्ध विराम समझौते को लेकर भी इजरायल से थोड़ा धैर्य रखने को कहा था।
अब अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस गाजा सीजफायर को लेकर आशावादी रुख व्यक्त करते हुए कहा कि स्थिति उम्मीद से बेहतर है। वेंस ने इजरायल में नागरिक और सैन्य सहयोग के लिए बने नए केंद्र का दौरा करने के बाद यह बात कही है। उन्होंने स्वीकार किया कि हाल में हिंसा की कुछ घटनाएं हुई हैं लेकिन 2 साल तक चले इजरायल-हमास युद्ध के बाद लागू युद्धविराम को लेकर उम्मीद से बेहतर प्रगति है। वेंस ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि यह शांति लंबे समय तक कायम रहेगी।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के पश्चिम एशिया के दूत स्टीव विटकॉफ ने कहा, ‘‘हम वहां तक पहुंच चुके हैं, जहां तक अब तक पहुंचने की हमने कल्पना नहीं की थी।’’ वेंस, विटकॉफ और राष्ट्रपति ट्रंप के दामाद जेरेड कुश्नर सीजफायर पर मंडरा रहे खतरे के बीच इजरयइल पहुंचे थे। युद्ध विराम समझौते के बीच अब भी सवाल बने हुए हैं कि क्या हमास हथियार छोड़ेगा, गाजा में अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बल कब और कैसे तैनात किया जाएगा, युद्ध के बाद इस क्षेत्र पर कौन शासन करेगा।
‘जब तक इस्लाम है, जिहाद रहेगा’, कहने वाले शेख सालेह बिन फौजान बने सऊदी अरब के नए ग्रैंड मुफ्ती
24 Oct, 2025 09:42 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रियाद। सऊदी अरब सरकार (Saudi Arabia Goverment) ने बुधवार देर रात अति-रूढ़िवादी इस्लामिक विद्वान ‘शेख सालेह बिन फौजान अल फौजान’ को देश का नया ग्रैंड मुफ्ती (Grand Mufti) नियुक्ति करने का एलान किया। 90 वर्षीय शेख सालेह बिन फौजान (Sheikh Saleh Bin Fauzan) की नियुक्ति सऊदी के शाह सलमान के बेटे और युवराज मोहम्मद बिन सलमान की सिफारिश पर की गई है।
शेख सालेह का जन्म कथित तौर पर 28 सितंबर, 1935 को सऊदी अरब के अल-कासिम प्रांत में हुआ था। अपने पिता की मृत्यु के बाद उन्होंने एक स्थानीय इमाम से कुरान की शिक्षा ली। उन्होंने नूर अला अल-दरब या ‘रास्ता रोशन करो’ रेडियो शो को लंबे समय तक संबोधित किया। साथ ही कई किताबें भी लिखीं। उनके फतवे या धार्मिक आदेश सोशल मीडिया पर भी साझा किए गए हैं। शेख सालेह को अपने कुछ बयानों के लिए पश्चिमी मीडिया में आलोचना का सामना भी करना पड़ा है।
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