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X पर एलन मस्क की सफाई, ट्रंप से जुड़ी टिप्पणी पर जताया खेद
11 Jun, 2025 05:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
स्पेसएक्स और टेस्ला के CEO एलन मस्क और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच चल रहे विवाद में नया मोड़ आ गया है। एलन मस्क ने पिछले हफ्ते X पर लिखी अपनी पोस्ट पर खेद जताया है। यह पोस्ट डोनाल्ड ट्रंप पर लिखी गई थी। एलन मस्क ने अपने X हैंडल पर एक नई पोस्ट लिखी है, जिसमें मस्क ने लिखा कि मैं पिछले सप्ताह लिखी गई अपनी कुछ पोस्ट को लेकर खेद प्रकट करता हूं। विवाद कुछ ज्यादा ही दूर चला गया था।
क्यों हुआ दोनों के बीच विवाद?
बता दें कि एलन मस्क ने डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी (DOGE) के चीफ के पद से इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफे के बाद ही दोनों के बीच जुबानी जंग छिड़ी। एलन मस्क ने डोनाल्ड ट्रंप के खर्च और टैक्स कटौती वाले विधेयक पर सवाल उठाया। विधेयक को ट्रंप ‘One Big Beautiful Bill’ कह रहे हैं, लेकिन इस विधेयक की मस्क ने कड़ी आलोचना की। ट्रंप ने भी मस्क की आलोचना का कड़ा जवाब दिया। ट्रंप ने एक पोस्ट लिखकर आलोचना का जवाब देते हुए मस्क को बिल के बारे में बताया।
उन्होंने एलन को बताया कि बिल में इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) की सब्सिडी में कटौती का प्रावधान है, लेकिन मस्क ने X पर पोस्ट लिखकर पलटवार किया। मस्क ने ट्रंप से कहा कि बिल का ड्राफ्ट उन्हें कभी दिखाया नहीं गया। मस्क ने X पर पोस्ट लिखकर ट्रंप के इंपीचमेंट (महाभियोग) का समर्थन भी किया। हालांकि इस पोस्ट को बाद में उन्होंने डिलीट कर दिया था, लेकिन विवाद इतना बढ़ गया था कि मस्क ने ट्रंप के जेफरी एपस्टीन से संबंधों का जिक्र कर डाला, जिसे ट्रंप ने पुराना और झूठा मुद्दा बताया।
ट्रंप की मस्क को खुली धमकी
विवाद बढ़ा तो डोनाल्ड ट्रंप ने एलन मस्क को खुली धमकी दे दी। उन्होंने कहा कि वे एलन मस्क की कंपनियों खासकर SpaceX के साथ सरकारी ठेकों और सब्सिडी खत्म करने का फैसला ले सकते हैं। NBC न्यूज को दिए एक टेलीफोनिक इंटरव्यू डोनाल्ड ट्रंप ने दिया था, जिसमें उन्होंने का दिया था कि मस्क के साथ उनका रिश्ता खत्म हो चुका है। अगर मस्क ने डेमोक्रेटिक के उम्मीदवारों को फंडिंग की तो रिपब्लिकन पार्टी के टैक्स बिल का विरोध करने वालों को गंभीर परिणाम झेलने होंगे।
ISI समर्थित खालिस्तानी संगठनों की कनाडा में मौजूदगी से भारत-कनाडा रिश्तों में दरार
11 Jun, 2025 03:34 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कनाडा में कई खालिस्तानी संगठन सक्रिय हैं, जो भारत के खिलाफ अलगाववादी और आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देते हैं. सिख फॉर जस्टिस (SFJ), खालिस्तान लिबरेशन फोर्स (KLF), खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स (KZF), खालिस्तान टाइगर फोर्स (KTF) और खालिस्तान कमांडो फोर्स (KCF) जैसे संगठन विदेशों से भारत में अशांति फैलाने का प्रयास करते हैं. ये ग्रुप पाकिस्तान की ISI से समर्थन प्राप्त करते हैं और कनाडा, यूके, जर्मनी जैसे देशों में अपना नेटवर्क फैलाए हुए हैं.
भारत सरकार ने इन सभी को UAPA के तहत प्रतिबंधित किया है, लेकिन ये संगठन विदेशी धरती से भारत-विरोधी प्रचार और हिंसक गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं. हाल ही में हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद भारत-कनाडा संबंधों में तनाव भी बढ़ा है.
सिख फॉर जस्टिस
सिख फॉर जस्टिस (SFJ) एक अमेरिकी आधारित अलगाववादी संगठन है जिसकी स्थापना 2007 में वकील गुरपतवंत सिंह पन्नू ने की थी. यह समूह भारत के पंजाब क्षेत्र से अलग होकर एक स्वतंत्र सिख राष्ट्र खालिस्तान के निर्माण की वकालत करता है. SFJ ने खालिस्तान आंदोलन के लिए सिख प्रवासियों के बीच समर्थन जुटाने के उद्देश्य से “रेफ़रेंडम 2020” नाम अपने नापाक कृत्यों के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय ध्यान आकर्षित करता रहा है.
भारत सरकार ने जुलाई 2019 में गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत SFJ पर प्रतिबंध लगा दिया. सरकार ने इसमें राष्ट्र-विरोधी और अलगाववादी गतिविधियों में इसकी संलिप्तता का हवाला दिया गया. साल 2020 में, एक न्यायाधिकरण ने प्रतिबंध को बरकरार रखा और 2024 में भारत सरकार ने इसे और 5 साल के लिए बढ़ा दिया है. इस ग्रुप के सरपस्त गुरपतवंत सिंह पन्नून को भी भारत ने आतंकवादी घोषित किया है.
SFJ को फर्ज़ी जनमत संग्रह करवाना, भारतीय दूतावासों पर विरोध प्रदर्शन करने और डिजिटल प्रचार में करके भारत और पूरी दुनिया में रह रहे सिक्खों को भड़कान के लिए जाना जाता है. हालांकि इस संगठन पर कनाडा, अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों में प्रतिबंध नहीं है. भारत समय-समय पर कूटनीतिक दबाव बनाता रहता है. हालांकि SFJ कानूनी और राजनीतिक सक्रियता के माध्यम से अहिंसक मार्ग पर चलने का दावा करता है, लेकिन भारत में कई अपराधों में उसका नाम आता रहता है. भारत में कई कानूनी कार्रवाइयों और सोशल मीडिया पर प्रतिबंधित है, लेकिन SFJ विदेशों में सिख समुदायों के लोगों में भारत विरोध प्रचार करता रहता, खासकर उत्तरी अमेरिका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया में.
खालिस्तान लिबरेशन फोर्स
SFJ की तरह खालिस्तान लिबरेशन फोर्स (KLF) भी प्रतिबंधित सिख उग्रवादी संगठन है, जो भारत से अलग होकर सिखों के लिए एक अलग देश की मांग करता है. 1980 के दशक में केएलएफ पंजाब में उग्रवाद काल के दौरान सबसे सक्रिय विद्रोही समूहों में से एक के रूप में उभरा था.
केएलएफ को भारत में राजनीतिक और धार्मिक नेताओं के खिलाफ हत्या, बम विस्फोट और हमलों सहित कई आतंकवादी कृत्यों संलिप्त पाया गया है. इनके गुर्गों के कई हाई-प्रोफाइल हत्याओं में भी हाथ थे. इसे पंजाब में अलगाववादी हिंसा को बढ़ावा देने के लिए जिम्मेदारों में से माना जाता था.
पिछले कुछ वर्षों में इस संगठन को अलग-अलग लोगों ने चलाया है, इनमें हरमिंदर सिंह मिंटू भी शामिल है, मिंटू को 2014 में गिरफ्तार किया गया था और बाद में जेल में उसकी मृत्यु हो गई थी. एक अन्य केएलएफ का सरगना हरमीत सिंह उर्फ पीएचडी है, जिसकी साल 2020 में रहस्यमय परिस्थितियों में पाकिस्तान में मारा गया था.
भारत सरकार ने केएलएफ को गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत प्रतिबंधित कर दिया है. भारत सरकार ने इस समूह को आतंकवादी गतिविधियों में इसकी शामिल और विदेश में भारत विरोधी नेटवर्क के साथ संबंधों में संलिप्त पाया गया है. सुरक्षा एजेंसियों ने इसे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी (ISI) से समर्थन प्राप्त करने के आरोप लगे हैं. इसपर सोशल मीडिया प्रचार और भर्ती अभियानों से पंजाब में उग्रवाद को पुनर्जीवित करने का प्रयास करने के का काम करने की कोशिशें की हैं.
आधिकारिक प्रतिबंध के बावजूद केएलएफ गुप्त रूप से अपने देश विरोधी गतिविधियों को जारी रखता है. इसके प्रवासी-आधारित समर्थक और वित्तीय नेटवर्क कथित तौर पर कनाडा, यूके और जर्मनी जैसे देशों में सक्रिय हैं.
खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स
खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स भारत में प्रतिबंधित सिख उग्रवादी संगठन है जो खालिस्तान की स्थापना के मनसूबे पाले रखता है. 1980 के दशक में अस्तित्व में आए इस संगठन के चलते पंजाब में अलगाववादी को बढ़ावा मिला था. यह संगठन भारत और विदेशों में हिंसक गतिविधियों में शामिल रहा है.
KZF की स्थापना जम्मू के एक उग्रवादी रंजीत सिंह नीटा ने की थी, जो बाद में पाकिस्तान भाग गया. आरोप यह भी है कि पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) से समर्थन मिला. वह भारत के वांडेट आतंकवादियों में से एक है. यह संगठन बम विस्फोट, लक्षित हत्याएँ, सीमा पार से हथियारों की तस्करी, स्लीपर सेल और विदेशी फंडिंग का उपयोग करके पंजाब में उग्रवाद को फिर से पुनर्जीवित करने के प्रयास करता रहता है.
पिछले कुछ वर्षों में, KZF ने भारत के बाहर अपने अपने पांव पसारे हैं. इस संगठन का नेटवर्क जर्मनी, कनाडा, यूके और मलेशिया में सक्रिय हैं. हाल के कुछ वर्षों में समूह ने पाकिस्तान से भारतीय क्षेत्र में हथियारों और विस्फोटकों की तस्करी के लिए ड्रोन का इस्तेमाल करता रहता है. साल 2019 में, पंजाब में KZF के जुड़े बड़े आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया गया था और हथियारों और विस्फोटकों के जखीरे के साथ कई गुर्गों को गिरफ्तार किया गया था. जांच से पता चला कि मॉड्यूल को जर्मनी और पाकिस्तान से समर्थन मिल रहा था. भारत सरकार ने गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत KZF पर प्रतिबंध लगा दिया है. राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय खुफिया सहयोग के माध्यम से इसकी गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रख रही है.
खालिस्तान टाइगर फोर्स
खालिस्तान टाइगर फोर्स (KTF) हिंसक और चरमपंथी तरीकों से खालिस्तान के निर्माण की वकालत करता है. इसलिए भारत में प्रतिबंधित किया गया है. पंजाब में अलगाववाद के दौरान हत्याओं, युवाओं की भर्ती और हथियारों और विस्फोटकों की सीमा पार तस्करी समेत कई आतंकवादी गतिविधियों में शामिल रहा है. इस संगठन को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी (ISI) का करीबी समर्थन प्राप्त है.
KTF के सबसे प्रसिद्ध नेताओं में से एक भारतीय मूल के कनाडाई नागरिक हरदीप सिंह निज्जर था. निज्जर पर भारतीय अधिकारियों ने कई हिंसक वारदातों में शामिल होने और सिख युवाओं को कट्टरपंथी बनाने का आरोप लगाया था. निज्जर को जून 2023 में कनाडा में गोली मार दी गई थी जिसके बाद भारत और कनाडा के बीच एक बड़ी कूटनीतिक दरार पैदा हो गई थी.
KTF कनाडा, यूके, जर्मनी और मलेशिया में सक्रिय है और विदेशों में स्थित खालिस्तानी संगठनों के एक नेटवर्क का बड़ा हिस्सा है. ये संगठन डिजिटल प्रचार, सोशल मीडिया अभियान और प्रवासी समुदायों के बीच धन उगाही का उपयोग करके अलगाववादी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम करते हैं. भारत सरकार ने केटीएफ को गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत एक आतंकवादी संगठन के रूप में चिन्हित किया है. और वैश्विक स्तर पर इसकी गतिविधियों की निगरानी जारी रखी है.
खालिस्तान कमांडो फोर्स
खालिस्तान कमांडो फोर्स भी उन संगठनों में है जिसका उदय और विस्तार 1980 के दशक के हुआ था. पंजाब में अलगाववादी आंदोलन फायदा उठाते हुए ये सिख समुदाय में जड़े जमाने में कामयाब रहा था. यह संगठन पिछले 45 सालों से खालिस्तान का राग अलाप रहा है. इसकी स्थापना मनबीर सिंह चहेरू ने की थी और बाद में इसकी कमान परमजीत सिंह पंजवार ने पास आ गई. मई 2023 में पाकिस्तान के लाहौर में मारे जाने वही उसे चला रहा था. इस समूह ने कई हाई-प्रोफाइल हत्याओं, बम विस्फोटों, जबरन वसूली और सुरक्षा बलों पर हमलों जैसी कुख्याति वारदातों को अजाम दिया है.
यह संगठन पंजाब में अलगाववाद के दौरान सबसे घातक संगठनों में से एक था. इसने 1980 और 1990 के दशक में राज्य में फैली हिंसा में सक्रिता दिखाई थी. KCF सरकारी अधिकारियों और नागरिकों, विशेष रूप से खालिस्तान आंदोलन का विरोध करने वालों को निशाना बनाने के लिए जिम्मेदार था.
1990 के दशक के बाद से देश में इसकी कार्रवाई पर नकेल कसी गई है, लेकिन यह संगठन विदेशों में सक्रिय है. इसका नेटवर्क पाकिस्तान, कनाडा, जर्मनी और यूके में सक्रिय है. भारतीय सुरक्षा एजेंसियों का दावा है कि इस संगठन को पाकिस्तान की आईएसआई से समर्थन प्राप्त है. भारत सरकार ने केसीएफ को गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत प्रतिबंधित किया गया है. इसके कई नेताओं को आतंकवादी तक घोषित किया गया है
स्पेन का पुरातात्विक चमत्कार: 3,000 साल पुरानी जूलरी ने बदला इतिहास का नजरिया
11 Jun, 2025 12:39 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
Spain Villena Treasure: स्पेन के एलिकांटे में स्थित विलेना के खजाने में अब तक की सबसे रहस्यमयी खोजों में से एक सामने आई है. इस खजाने से दो लोहे जैसी वस्तुएं एक कंगन और एक छोटी गोल आकार की ज्वेलरी मिली है. ये लोहा नहीं बल्कि उल्कापिंड से मिली धातु से बनी है. यह खोज न केवल तकनीकी दृष्टिकोण से बल्कि सांस्कृतिक और प्रतीकात्मक महत्व की दृष्टि से भी बेहद जरूरी माना गया है.
यह धातु धरती पर मौजूद सामान्य खनिजों से अलग है. इसमें निकेल की मात्रा ज्यादा पाई गई, जो अंतरिक्ष से गिरे उल्कापिंडों की विशेषता होती है. इससे यह प्रमाणित होता है कि यह धातु स्वाभाविक रूप से पृथ्वी पर नहीं पाई जाती. विलेना के खजाने की ये कलाकृतियां लगभग 1400 से 1200 ईसा पूर्व के बीच की मानी जाती हैं. यह उस समय की हैं, जब इबेरियन लौह युग की शुरुआत हुई थी, जो कि 850 ईसा पूर्व के आसपास करीब 500 वर्ष पहले का है.
प्राचीन आइबेरियन लोगों की खासियत
इस खोज से यह संकेत मिलता है कि प्राचीन आइबेरियन लोग उल्कापिंड से परिचित हो चुके थे. उन्होंने उस धातु को पहचाना और उसे धार्मिक या प्रतीकात्मक महत्व प्रदान किया. उन्होंने इतनी शुरुआती अवस्था में धातु को आकार देने की तकनीक विकसित कर ली थी. यह प्राचीन Metallurgy के इतिहास को दोबारा परिभाषित करता है और दर्शाता है कि वे लोग केवल धरती पर मौजूद संसाधनों तक सीमित नहीं थे.
उल्कापिंड लोहे का प्रयोग
इतिहास में अन्य स्थानों पर भी उल्कापिंड से बनी वस्तुएं मिली हैं, जैसे कि मिस्र के तूतनखामेन का खंजर प्राचीन चीन और मेसोपोटामिया में उल्का पिंड लोहे से बने शस्त्र. इस तरह से देखा जाए तो विलेना की यह खोज दर्शाती है कि स्पेन के प्राचीन समाजों में भी उल्कापिंड की धातु को धार्मिक, अनुष्ठानिक और सामाजिक दृष्टिकोण से विशेष माना गया होगा. यह संभव है कि इन वस्तुओं का इस्तेमाल समाज के कुलीन वर्ग की तरफ से किया जाता रहा हो.
वैज्ञानिक विश्लेषण की पुष्टि
इस खोज को सही तरीके से जांच करने के लिए मास स्पेक्ट्रोमेट्री (Mass Spectrometry) जैसे मॉर्डन वैज्ञानिक टेस्ट का इस्तेमाल किया गया. स्पेन के राष्ट्रीय पुरातत्व संग्रहालय के विशेषज्ञ साल्वाडोर रोविरा-लोरेंस के नेतृत्व में किए गए विश्लेषणों ने इन वस्तुओं की उत्पत्ति को स्पष्ट किया कि जिसमें निकेल की अत्यधिक मात्रा थी साथ में कोबाल्ट भी पाया है. यह खोज Trabajos de Prehistoria में प्रकाशित की गई है और इसे भविष्य के लिए एक मार्गदर्शक माना जा रहा है, जिससे अन्य धात्विक वस्तुओं पर भी बिना हानि पहुंचाए परीक्षण किए जा सकें.
बांग्लादेश में ईद-उल-अजहा पर रिकॉर्ड तोड़ कुर्बानी, बकरों से आगे निकलीं गायें
11 Jun, 2025 10:28 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पूरी दुनिया में 6 से 7 जून को ईद-उल-अजहा के मौके पर करोड़ों पशुओं की कुर्बानी की गई. बांग्लादेश के मत्स्य पालन और पशुधन मंत्रालय के डेटा के मुताबिक देश में इस ईद पर 91 लाख से ज्यादा पशुओं की कुर्बानी की गई है. इसमें हैरान करने वाली बात ये है कि बांग्लादेश में बकरों या किसी ओर जानवर से ज्यादा गायों की कुर्बानी की गई है.
पूरी दुनिया में 6 से 7 जून को ईद-उल-अजहा के मौके पर करोड़ों पशुओं की कुर्बानी की गई. बांग्लादेश के मत्स्य पालन और पशुधन मंत्रालय के डेटा के मुताबिक देश में इस ईद पर 91 लाख से ज्यादा पशुओं की कुर्बानी की गई है. इसमें हैरान करने वाली बात ये है कि बांग्लादेश में बकरों या किसी ओर जानवर से ज्यादा गायों की कुर्बानी की गई है.
कहां कितनी हुई कुर्बानी?
बांग्लादेश में सबसे ज्यादा कुर्बानी राजशाही डिवीजन में हुई, जहां 23.24 लाख पशुओं की बलि दी गई, जबकि दूसरे स्थान पर ढाका में 21.85 लाख पशुओं की बलि दी गई. इसके अलावा चटगांव में 17.53 लाख, रंगपुर डिवीजन में 9.64 लाख और खुलना में 8.04 लाख पशुओं को कुर्बान किया गया. देश के कम कुर्बानी वाले इलाकों में बारिसाल डिवीजन 4.7 लाख, वहीं सबसे कम संख्या मयमनसिंह डिवीजन में 3.83 लाख और सिलहट डिवीजन में 3.19 लाख के साथ शामिल हैं.
ईद उल अजहा पर कुर्बानी
ईद उल अजहा के मौके पर 3 दिन तक ‘संपन्न’ मुसलमानों द्वारा पशुओं की बलि दी जाती है. इस दिन मुसलमान अल्लाह के लिए पैगम्बर इब्राहिम की कुर्बानी को याद करते हुए जानवरों की कुर्बानी करते हैं. कुर्बान किए जाने वाले जानवरों में भेड़, बकरी, भैंस, गाय, ऊट आदि जानवर आते हैं. ईद के पहले दिन की शुरुआत सुबह में ईद की नमाज से होती है, फिर अगले तीन तक जानवरों की कुर्बानी की जाती है और उसका गोश्त गरीबों रिश्तेदारों में बांटा जाता है.
लॉस एंजिल्स में उग्र विरोध, एक्टिव ड्यूटी मरीन की तैनाती, कर्फ्यू घोषित
11 Jun, 2025 10:23 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अमेरिका के लॉस एंजिल्स में हालात बिगड़ते ही जा रहे हैं. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आव्रजन आदेशों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी है, जिनकों काबू करने के लिए एक्टिव ड्यूटी मरीन को तैनात किया गया है. इस समय लॉस एंजिल्स का सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है. जिसमें कुछ लोग एक एप्पल के स्टोर को लूटते हुए दिखाई दे रहे हैं.
खबरों के मुताबिक सोमवार रात को कई नकाबपोश लोगों ने शहर में एक एप्पल स्टोर को लूट लिया. सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ है जिसमें कई नकाबपोश लोगों को एप्पल स्टोर में घुसते और गैजेट लूटते हुए देखा जा सकता है. पुलिस के आते ही कई लोग स्टोर से भागते हुए दिखाई दिए.
तस्वीरों में हुडी और नकाब पहने दंगाइयों को स्टोर में तोड़फोड़ करते हुए देखा जा सकता है. इमारत में दर्जनों लोगों को देखा जा सकता है, इससे पहले कि कम से कम एक आदमी इमारत की तरफ से भागने के लिए खिड़की तोड़ता दिख रहा है.
क्यों हो रहे प्रदर्शन?
लॉस एंजिल्स में पिछले एक हफ्ते से विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, प्रदर्शनकारी राज्य में निर्वासन अभियान चलाने से ICE अधिकारियों को रोकने की कोशिश कर रहे हैं. ट्रंप प्रशासन इन प्रदर्शनों को दबाने के लिए शहर में कर्फ्यू लगाया है और नेशनल गार्ड मरीन तैनात किए हैं, जिसका राज्य के गवर्नर ने विरोध किया है.
युद्ध लड़ने वाले सैनिकों की प्रदर्शनकारियों के सामने तैनाती
तैनात किए गए मरीन वो सैनिक हैं जिन्हें गोरिल्ला हमलों, बम धमाकों और सीधी गोलीबारी का मुकाबला करने की ट्रेनिंग दी जाती है. इन्हें भीड़ से बात करने, समझाने या रोकने की ट्रेनिंग नहीं दी जाती. अब ऐसे लड़ाकों को घरेलू सड़कों पर उतारना, सैनिकों और जनता दोनों की जिंदगी खतरे में डालना बाला बताया जा रहा है.
कंटेनर जहाज में लगी नहीं हो रही शांत...कोच्चि या मुंबई के पास होता तब क्या होता
10 Jun, 2025 10:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोच्चि । अरब सागर में सिंगापुर का कंटेनर जहाज अचानक आग की लपटों में घिर गया। कोलंबो से मुंबई जा रहे जहाज में जबरदस्त विस्फोट हुआ और देखते ही देखते आग फैल गई। जहाज पर सवार 18 में से 14 क्रू मेंबर्स को बचा लिया गया, लेकिन 4 अब भी लापता हैं। इंडियन कोस्ट गार्ड और एयरफोर्स ने तुरंत एक्शन लेकर बड़ा हादसा होने से बचा लिया। लेकिन सवाल यही है कि आखिर इस जहाज में ऐसा क्या था जो आग शांत नहीं हो रही? अगर यह ब्लास्ट कोच्चि या मुंबई शहर के पास होता तब क्या होता?
शुरुआती जानकारी के मुताबिक, कार्गों शिप 503 पर करीब 650 कंटेनर थे, जिसमें से 20-50 कंटेनर समुद्र में गिर चुके हैं। जहाज के मालिकों से कंटेनरों की विस्तृत जानकारी मांगी गई है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि इसमें ज्वलनशील और जहरीले रसायन हो सकते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस जहाज में भी इसतरह तेजी से जलने वाले पदार्थ मौजूद हो सकते हैं, जो थर्मल रनअवे (तेज गर्मी से खुद ब खुद विस्फोट) का कारण बन रहे हैं।
अगर यह विस्फोट कोच्चि या बेपोर जैसे शहर के पास होता तब परिणाम विनाशकारी हो सकते थे। समुद्री विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्तर की आग और विस्फोट अगर जमीन के पास होता तक एक किलोमीटर तक झटके महसूस हो सकते थे। सैकड़ों लोगों की जान जा सकती थी। पोर्ट तहस-नहस हो सकते थे।
विशेषज्ञों की चेतावनी
जानकार का मानना है कि अगर जहाज में जेट फ्यूल या बंकर ऑयल है, तब यह समुद्र में फैल सकता है और केरल तट की मछली पालन व्यवस्था को नुकसान पहुंचा सकता है। अगर जहाज में लिथियम बैटरियां हैं, तब यह आग हफ्तों तक सुलग सकती है और कोई सामान्य पानी या फोम बुझा नहीं सकता। जहाज से समुद्र में गिरे कंटेनर सिर्फ एक जली हुई लाश नहीं, बल्कि बहता हुआ जहर हैं। इसमें से कुछ कंटेनर अगर फूट गए तब प्लास्टिक, रसायन, और भारी धातुएं समुद्री जीवों को नष्ट कर सकती हैं। केरल जैसे राज्य, जहां हजारों मछुआरे और तटीय परिवार समुद्र पर निर्भर हैं, उनके लिए यह हादसा रोजी-रोटी का संकट बन सकता है।
MV Wan Hai 503 पर लगी आग: भारतीय नौसेना-कोस्ट गार्ड का जांबाज रेस्क्यू, चीन ने जताया आभार
10 Jun, 2025 07:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
केरल के अजीक्कल तट से लगभग 44 नॉटिकल मील दूर समुद्र में सिंगापुर-ध्वज वाले कंटेनर जहाज MV Wan Hai 503 में एक बड़ा धमाका हुआ. धमाके और आग की घटना के बाद भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल की तत्परता ने कई जानें बचा लीं. चीन ने इस रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए भारत का आभार जताया है.
9 जून को MV Wan Hai 503, जो कोलंबो से न्हावा शेवा (मुंबई पोर्ट) जा रहा था, में अचानक डेक के नीचे विस्फोट हुआ. इसके बाद जहाज में आग लग गई. जहाज पर कुल 22 क्रू सदस्य सवार थे, जिनमें 14 चीनी नागरिक थे, इनमें 6 ताइवानी भी शामिल हैं. इस हादसे में 4 लोग लापता हैं और 5 घायल बताए जा रहे हैं.
कैसे दी गई मदद?
भारतीय तटरक्षक बल ने घटना के तुरंत बाद ICGS राजदूत (न्यू मैंगलोर से), ICGS अर्नवेश (कोच्चि से), और ICGS सचेत (अगत्ती से) को मौके पर रवाना किया. इसके अलावा ICGS समुद्र प्रहरि और ICGS समरथ को भी अग्निशमन और बॉउंड्री कूलिंग के लिए भेजा गया. तटरक्षक बल ने बताया कि एक ICG विमान ने घटनास्थल का हवाई सर्वे किया और हवा से गिराई जाने वाली आपात सामग्री भी भेजी गई.
जहाज़ की स्थिति कैसी है?
जहाज के मध्य भाग और एकोमोडेशन ब्लॉक के पास आग और छोटे धमाके हुए. सामने वाला कंटेनर बे क्षेत्र अब काबू में है, लेकिन जहाज से अभी भी काले धुएं के गुबार उठ रहे हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक जहाज करीब 10 से 15 डिग्री तक बाईं ओर झुक गया है और कुछ कंटेनर समुद्र में गिर चुके हैं.
भारतीय तटरक्षक बल और नौसेना की टीमें लापता लोगों की तलाश में जुटी हुई हैं. इस हादसे के कारण समुद्र में प्रदूषण फैलने का भी खतरा बना हुआ है, जिसकी निगरानी की जा रही है.
चीन ने भारत को कहा शुक्रिया
भारत की मदद के बाद चीन ने आधिकारिक रूप से आभार व्यक्त किया. भारत में चीनी दूतावास की प्रवक्ता यू जिंग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि हम भारतीय नौसेना और मुंबई कोस्ट गार्ड के तत्पर और पेशेवर रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए आभारी हैं। हम उम्मीद करते हैं कि सर्च ऑपरेशन सफल हो और घायल क्रू मेंबर जल्द ठीक हों.
कपड़े उतारे- बेरहमी से पीटा डिलीवरी बॉय के साथ बदमाशों ने की हैवानियत
10 Jun, 2025 06:09 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हरियाणा के फरीदाबाद के सेहतपुर में कुछ बदमाशों ने फूड कंपनी के एक डिलीवरी बॉय के साथ बुरी तरह से मारपीट की. बदमाशों ने पहले डिलीवरी बॉय की 2 घंटे तक खूब पिटाई की. इससे डिलीवरी बॉय बुरी तरह से घायल हो गया. उसे खूब चोटें आईं. इसके बाद बदमाशों ने लड़के के मुंह और पूरे शरीर पर पेशाब कर दिया. उन्होंने डिलीवरी बॉय को पूरी तरह से नग्न कर उसकी पिटाई की.
दरअसल ये घटना रविवार रात का घटी, जब सेक्टर-37 स्थित फूड कंपनी में डिलीवरी बॉय का काम करने वाले सत्यम दुबे के साथ बदमाशों ने मारपीट की. सत्यम सूर्या विहार पार्ट 2 का रहने वाला है. रविवार रात को कंपनी के पास सेहतपुर नया पुल के पास स्थित मानवी प्लेस से एक ऑर्डर आया. इस ऑर्डर को सत्यम डिलीवर करने पहुंचा. वहां सत्यम का दोस्त विक्रांत भी ऑर्डर देने गया था. फिर दोनों वापस लौट रहे थे. तभी सेहतपुर नया पुल पर दोनों को बदमाशों ने घेर लिया.
चेहरे और पूरे शरीर पर पेशाब किया
पुल पर ही बदमाशों ने सत्यम के साथ मारपीट शुरू कर दी. जब विक्रांत ने सत्यम को बचाने की कोशिश की तो 15-20 लोग और आ गए. उन्होंने विक्रांत के साथ भी मारपीट की. हालांकि विक्रांत अपनी जान बचाकर उनके चंगुल से भाग निकला. इसके बाद आरोपी सत्यम को एक स्कूल के पास खाली पड़े प्लॉट में गए और वहां भी उसकी पिटाई की. जब सत्यम बेहोश हो गया तो बदमाशों ने उसे होश में लाने के लिए उसके चेहरे और पूरे शरीर पर पेशाब किया.
पैसे छिनकर भाग गए बदमाश
पीड़ित ने बताया कि जब वह होश में आ गया तो फिर से आरोपियों ने उसके साथ मारपीट की. विक्रांत ने सत्यम के साथ हो रही मारपीट की जानकारी फोन कर उसके पिता को दे दी थी. पिता ने पुलिस में केस दर्ज कराया. इसके बाद जब विक्रांत ने शोर मचाया कि पुलिस आ रही है. मैंने पुलिस को फोन कर दिया तो सभी आरोपी भाग निकले.लेकिन पैसे छिनकर भाग गए. पीड़ित सत्यम ने बताया कि आरोपी आपस में अपने नाम लक्की, सुक्खी, हिमांशु, सन्नी, बॉबी, रोहन, दीपक, ऋषि और सल्लू कहकर पुकार कर रहे थे.
तीन आरोपियों को पुलिस ने पकड़ा
पुलिस ने मामले में तुरंत कार्रवाई की और तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया. पीड़ित का कहना है कि वह आरोपियों को नहीं जानता. पकड़े गए आरोपियों में दीपक, बॉबी और धीरज शामिल हैं. बाकी आरोपियों की तलाश की जा रही है. उन्हें भी जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा. सत्यम को घटनास्थल से अस्पताल ले जाया गया, जहां उसका इलाज चल रहा है.
बांग्लादेश में आर्थिक बदहाली: भीख मांगने को मजबूर लाखों लोग, सरकार पर सवाल!
10 Jun, 2025 06:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बांग्लादेश में यूनुस सरकार के शासन में भिखारियों की बाढ़ आ गई है. इन दिनों राजधानी ढाका में सबसे ज्यादा भिखारी देखने को मिल रहे हैं. ढाका के सभी सार्वजनिक स्थलों पर गैंग बनाकर लोग भीख मांग रहे हैं. बांग्लादेश में भिखारियों की बढ़ती संख्या ने वहां के प्रशासन और आम लोगों की टेंशन बढ़ा दी है.
बांग्लादेश में यूनुस सरकार के शासन में भिखारियों की बाढ़ आ गई है. इन दिनों राजधानी ढाका में सबसे ज्यादा भिखारी देखने को मिल रहे हैं. ढाका के सभी सार्वजनिक स्थलों पर गैंग बनाकर लोग भीख मांग रहे हैं. बांग्लादेश में भिखारियों की बढ़ती संख्या ने वहां के प्रशासन और आम लोगों की टेंशन बढ़ा दी है.
पाकिस्तान से दोस्ती का असर?
बांग्लादेश में भिखारियों के बढ़ने की संख्या ऐसे वक्त में सामने आई है, जब यूनुस की सरकार पाकिस्तान से दोस्ती बढ़ा रही है. पूरी दुनिया में भीख मांगने के मामले में पाकिस्तानियों का अपना ट्रैक रिकॉर्ड है.
पाकिस्तान में कम से कम 2 करोड़ भिखारी हैं, जो दुनिया कई देशों में जाकर भीख मांगते हैं. पाकिस्तान के भिखारी यूएई, कतर और सऊदी जैसे देशों में जाकर भीख मांगते हैं.
बांग्लादेश में कितने भिखारी?
2023 में बांग्लादेश में भिखारियों को लेकर एक आंकड़ा जारी किया गया था. इसमें कहा गया था कि पूरे देश में करीब 7 लाख भिखारी हैं. अकेले ढाका में 40 हजार भिखारियों के होने की बात कही गई थी. उस वक्त शेख हसीना की सरकार ने भिखारियों को मुख्यधारा में लाने का वादा किया था.
हालांकि, शेख हसीना की सरकार के जाने के बाद यूनुस इस पर साइलेंट हो गए. कहा जा रहा है कि ढाका में अब भिखारियों की संख्या पहले की तुलना में काफी ज्यादा बढ़ गई है.
भिखारियों का क्या कहना है?
2 महिला भिखारियों से बात की है. एक रशेदा (बदला नाम) ने कहा कि मैं बीमार हूं और काम नहीं कर सकती, इसलिए मैं भीख मांगने के लिए ढाका आ गई हूं. रशेदा के मुताबिक बच्चों को पालने के लिए भीख मांगना जरूरी है. बांग्लादेश में महिलाओं के लिए कोई सुविधाजनक काम नहीं है.
वहीं 16 साल की तंजेला ने अखबार से बात करते हुए कहा कि मेरी मां गृहिणी हैं. मेरा भाई बीमार है. रोजी-रोजगार न होने की वजह से मैं उसके इलाज के लिए पैसा नहीं जुटा पा रहा था. मैं भीख मांगकर उसका अब इलाज करा रहा हूं.
हालिया आंकड़ों की मानें तो बांग्लादेश में बेरोजगारी दर में बढ़ोतरी हुई है. वहीं यूनुस की सरकार महंगाई पर भी अब तक कंट्रोल नहीं कर पाई है.
कर्ज के बोझ तले डूबता पाकिस्तान, आर्थिक संकट ने तोड़ी कमर
10 Jun, 2025 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। कर्ज के बोझ तले दबे पाकिस्तान की हालत दिन-प्रतिदिन बदतर होती जा रही है। पाकिस्तान दुनियाभर से कर्ज लेकर अपने लोगों और देश का विकास करने के बजाय आतंकवाद पर खर्च करता है, जिसे पूरी दुनिया ने देखा है। पाकिस्तान की ओर से जारी आर्थिक सर्वे से पता चला है कि कर्ज अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। इससे पाकिस्तान की वित्तीय स्थिति पर संकट गहरा गया है।
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था जून 2025 को समाप्त होने वाले वित्तीय वर्ष में 2.7 प्रतिशत बढ़ने की संभावना है, जबकि पिछले वर्ष के दौरान इसमें 2.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। सरकार ने शुरू में 3.6 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि का लक्ष्य रखा था, लेकिन पिछले महीने इसे घटाकर 2.7 प्रतिशत कर दिया।
2025 में 4.2 प्रतिशत जीडीपी हासिल करना पाक सरकार का लक्ष्य
आइएमएफ को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2025 में वास्तविक जीडीपी 2.6 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2026 में अर्थव्यवस्था 3.6 प्रतिशत बढ़ेगी। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार का लक्ष्य 4.2 प्रतिशत जीडीपी है। पाकिस्तान के वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने सोमवार को अपने देश का आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 जारी किया है।
पाकिस्तान की ओर कहा गया है कि 31 मार्च 2025 तक उसका कुल कर्ज 76,00700 करोड़ पाकिस्तानी रुपये तक पहुंच गया है, जो उसके इतिहास में अब तक का सबसे अधिक कर्ज है। पाकिस्तान का यह कर्ज पिछले चार सालों में लगभग दोगुना हो गया है, क्योंकि 2020-21 में यह कर्ज 39,86000 करोड़ पाकिस्तानी रुपये था, जबकि पिछले 10 साल में यह कर्ज करीब पांच गुना बढ़ चुका है।
जीडीपी ग्रोथ में फिसड्डी साबित हो रहा पाकिस्तान
पाकिस्तान सरकार की ओर से जारी आर्थिक सर्वे में बताया गया है कि वित्त वर्ष 2025 की पहली तिमाही के लिए पाकिस्तान की जीडीपी ग्रोथ 1.37 प्रतिशत, दूसरी तिमाही 1.53 प्रतिशत और तीसरी तिमाही में 2.4 प्रतिशत रहेगी। लगातार तीसरे साल ऐसा हो रहा है जब पाकिस्तान की जीडीपी ग्रोथ बहुत कम होगी। पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ-साथ मित्र देशों के सामने भी राहत पैकेज मांगने के लिए हाथ फैला देता है।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने तो यहां तक कह दिया कि जब हम किसी मित्र देश के पास जाते हैं या फोन करते हैं तो उन्हें लगता है कि हम उनके पास पैसे मांगने आए हैं। भारत आइएमएफ और विश्व बैंक के सामने यह मुद्दा उठाता रहा है कि पाकिस्तान भारत के खिलाफ आतंकवाद के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए दुनिया भर मिलने वाली सहायता का दुरुपयोग कर रहा है।
विश्व बैंक के अनुसार भारत ने रिकार्ड संख्या में अपने लोगों को गरीबी से बाहर निकाला है। वहीं पाकिस्तान की करीब 45 प्रतिशत आबादी गरीबी में अपनी जीवन गुजार रही है, जबकि 16.5 प्रतिशत लोग अत्यधिक गरीबी में रहते हैं।
'स्पाइडरवेब' का बदला: रूस ने यूक्रेन पर बरसाए ड्रोन, रातभर गूंजते रहे धमाके
10 Jun, 2025 10:50 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
यूक्रेन के 1 जून को किए गए हमले के बाद रूस अब बदला लेने के लिए उतारू हो गया है. रात के अंधेरे में रूस ने यूक्रेन पर ड्रोन बरसाए. यूक्रेनी सेना ने दावा किया है कि रूस ने उस पर सोमवार की रात को 500 से ज्यादा ड्रोन लॉन्च किए हैं. यूक्रेनी वायु सेना ने सोमवार को कहा कि रूस ने तीन साल के युद्ध की सबसे बड़ी रातोंरात ड्रोन बमबारी की है. जिसमें उसने यूक्रेन पर लगभग ड्रोन बरसाए और मिसाइल भी दागीं. रूस ने यह पलटवार ऑपरेशन स्पाइडरवेब का बदला लेने के लिए किया है.
दोनों देशों के बीच युद्धविराम का रास्ता नहीं निकल रहा है. युद्धविराम करने की मुश्किलों के बीच भी सोमवार को दोनों ने एक दूसरे के युद्धबंदियों के एक और बैच की अदला-बदली की, लेकिन इसी के बाद रूस ने एक बार फिर यूक्रेन पर हमला कर दिया और ड्रोन बरसा दिए.
ऑपरेशन स्पाइडरवेब का बदला?
रूस इस समय यू्क्रेन से बदला लेने पर उतारू है. दरअसल, यूक्रेन ने हाल ही में रूस पर एक ऐसा अटैक किया है जिसमें उसने रूस की शक्ति को भारी नुकसान पहुंचाया है. यूक्रेन ने 1 जून को 100 से ज्यादा यूक्रेनी ड्रोन रूस पर दागे. इस हमले में यूक्रेन ने रूस के परमाणु-सक्षम लंबी दूरी के बमवर्षकों को निशाना बनाया. इस अटैक को यूक्रेन ने स्पाइडरवेब नाम दिया था.
रूसी रक्षा मंत्रालय ने कहा था कि हमले रूस के पांच क्षेत्रों – मरमंस्क, इरकुत्स्क, इवानोवो, रियाज़ान और अमूर पर किए गए थे – लेकिन कहा गया कि विमान केवल मरमंस्क और इरकुत्स्क में क्षतिग्रस्त हुए थे, जबकि अन्य स्थानों पर हमलों को विफल कर दिया गया था. अब रूस इस हमले का ही बदला ले रहा है.
रूस ने बरसाए ड्रोन
वायु सेना के अनुसार, 479 ड्रोन के अलावा, रविवार से सोमवार तक यूक्रेन के कई हिस्सों में रूस ने 20 मिसाइलें दागी, जिसमें कहा गया कि बैराज ने मुख्य रूप से सेंट्रल और पश्चिमी क्षेत्रों को निशाना बनाया. रात में हुए सबसे बड़े अटैक के बाद यूक्रेन ने कहा कि उसने रूस के इस हमले का बराबरी से सामना किया और कई ड्रोन को रोका. यूक्रेन की वायु सेना ने कहा कि उसकी एयर फोर्स ने 277 ड्रोन और 19 मिसाइलों को रोका और नष्ट कर दिया. यूक्रेन ने दावा किया कि सिर्फ 10 ड्रोन या मिसाइलों ने उनके टारगेट को मारा. अधिकारियों ने बताया कि रूस के इस हमले में यूक्रेन का एक व्यक्ति घायल हो गया.
यूक्रेन भी कर रहा पलटवार
यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की ने रविवार देर रात को कहा कि कुछ क्षेत्रों में, “हालात बहुत मुश्किल बने हुए हैं”. रूस के हमले से पहले यूक्रेन ने रूस के सैन्य ठिकानों पर 6 जून को हमला किया था. रात को यूक्रेन की सेना ने रूस के एंगेल्स और ड्यागिलेवो हवाई अड्डों को निशाना बनाया था, जहां रूस के बमवर्षक विमान तैनात हैं. यूक्रेन ने इसे पहले से रक्षा वाला हमला बताया था. इस हमले में रूस का एक MI-8 हेलिकॉप्टर पूरी तरह नष्ट हो गया और एक MI-35 हेलिकॉप्टर को नुकसान पहुंचा था. इसके अलावा, यूक्रेन ने रूस के सरातोव और रियाजान इलाकों में ईंधन डिपो और सैन्य ठिकानों पर भी अटैक किए थे.
इस अटैक को लेकर यूक्रेन का दावा है कि उसने रूस के सैन्य संसाधनों को कमजोर करने के लिए ये हमले किए ताकि रूस के हवाई हमले रोके जा सकें.
रूसी अधिकारियों ने कहा है कि हालिया हमले उन हवाई अड्डों पर यूक्रेन के ड्रोन हमले के जवाबी हमलों पर पलटवार है.
लगातार हो रही दोनों देशों के बीच शांति वार्ता
पिछले तीन साल से दोनों देशों के बीच चल रहे युद्ध को शांत कराने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं. इस्तांबुल में रूसी और यूक्रेनी प्रतिनिधिमंडलों के बीच हाल के दो दौर की सीधी शांति वार्ता हुई. इस वार्ता के बाद दोनों देशों ने कैदियों के साथ-साथ उनके हजारों मृत और गंभीर रूप से घायल सैनिकों की अदला-बदली पर राजी हुए. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने संकेत दिया है कि वह तब तक लड़ते रहेंगे जब तक उनकी शर्तें पूरी नहीं हो जातीं.
दिन में कैदियों की अदला-बदला, रात को अटैक
जेलेंस्की और रूसी रक्षा मंत्रालय ने कहा कि सोमवार को दोनों देशों के बीच अधिक कैदियों की अदला-बदली की गई, हालांकि, किसी भी पक्ष ने यह नहीं बताया कि कितने कैदी हैं. कितने कैदियों की अदला-बदली हुई. जेलेंस्की ने कहा कि जिन लोगों की अदला-बदली की गई उनमें घायल सैनिकों के साथ-साथ 25 साल से कम उम्र के लोग भी शामिल थे. लेकिन जहां दिन में दोनों देशों के बीच कैदियों की अदला-बदली हो रही है. वहीं, रात के समय में रूस ने फिर हमला कर दिया.
प्रदर्शनकारियों पर सख्त ट्रंप प्रशासन, LA में पहुंचे नेशनल गार्ड और मरीन
10 Jun, 2025 10:32 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कैलिफोर्निया में इमिग्रेशन और सीमा शुल्क प्रवर्तन के कदमों के खिलाफ लोग प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों से निपटने के लिए ट्रंप प्रशासन ने लॉस एंजिल्स में नेशनल गार्ड को तैनात किया। हालांकि, ट्रंप के इस फैसले की काफी आलोचना हो रही है।
वहीं, ट्रंप ने सोमवार को कहा कि उन्होंने कैलिफोर्निया में नेशनल गार्ड की तैनाती करके 'बहुत बढ़िया फैसला' लिया है। उन्होंने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट में कहा, अगर हमने ऐसा नहीं किया होता, तो लॉस एंजिल्स पूरी तरह से नष्ट हो गया होता। ट्रंप ने यह संकेत भी दिया कि वह कैलिफोर्निया के गवर्नर की गिरफ्तारी का समर्थन करेंगे।
बीच ट्रंप प्रशासन ने एलान किया है कि अमेरिकी सेना अस्थायी रूप से लॉस एंजिल्स में लगभग 700 मरीन तैनात करेगी, जब तक कि अधिक संख्या में नेशनल गार्ड सैनिक वहां नहीं पहुंच जाते। नाम न बताने की शर्त पर एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि जब तक नेशनल गार्ड के और सैनिक घटनास्थल पर नहीं पहुंच जाते, तब तक एक बटालियन को अस्थायी ड्यूटी पर भेजा जाएगा।
पिछले चार दिनों से प्रदर्शनकारी विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। देश में अवैध रूप से रह रहे प्रवासियों को निर्वासित करने की नीतियों के खिलाफ इस प्रदर्शन को डेमोक्रेट्स पार्टी का भी साथ मिल रहा है।
ट्रंप पर दर्ज होगा मुकदमा: गैविन न्यूसम
इसी बीच राज्य के नेशनल गार्ड का नियंत्रण अपने हाथ में लेने और उसे लॉस एंजिल्स की सड़कों पर तैनात करने के ट्रंप के फैसले को कैलिफोर्निया के अधिकारी अदालत में चुनौती देंगे।
कैलिफोर्निया के गवर्नर गैविन न्यूसम ने सोमवार को एक्स पर पोस्ट किया,"यह बिल्कुल वही है जो ट्रंप चाहते थे। उन्होंने आग भड़काई और अवैध रूप से नेशनल गार्ड को संघीय बनाने का काम किया। हम उन पर मुकदमा करने जा रहे हैं।"
ईरान का चौंकाने वाला कदम: रातों-रात किया परमाणु परीक्षण, मचा अंतरराष्ट्रीय हलचल
10 Jun, 2025 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मिडिल ईस्ट (Middle East) बारूद की ढेर पर खड़ा है। हल्की सी चिंगारी से मिडिल ईस्ट को जला सकती है। इंटरनेशलन एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) की रिपोर्ट के मुताबिक ईरान (IRAN) ने गुपचुप तरीके से परमाणु बम (Nuclear Bomb) बनाने के दिशा में कई परीक्षण (Nuclear Test) किए हैं। IAEA ने कहा है कि ईरान ने हथियार ग्रेड के यूरेनियम के अपने भंडार को 60 प्रतिशत बढ़ाया है। फरवरी में यूरेनियम का भंडार 133.8 किलोग्राम था, जो कि मई में 408.6 किलोग्राम कर पहुंच गया है।
IAEA की टीम नहीं लगा पायी थी पता
इजरायली अखबार जेरूसलम पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक IAEA की टीम ने अगस्त 2020 में परमाणु परीक्षण स्थलों का दौरा किया था, लेकिन अंतरराष्ट्रीय टीम उस बंकर तक नहीं पहुंच पायी थी, जहां से सबकुछ कंट्रोल हो रहा था। बाद में ईरान ने उन बंकरों को ध्वस्त कर दिया। रिपोर्ट में कहा गया है कि तेहरान के पास 10 परमाणु बम बनाने जितनी सामग्री उपलब्ध हो गई है।
2003 में दो बार इम्प्लोजन टेस्ट किए थे
ईरान ने 15 फरवरी-3 जुलाई 2003 के बीच दो बार इम्प्लोजन टेस्ट किए थे। ये वही तकनीक है जो परमाणु बम के कोर को ब्लास्ट करने में इस्तेमाल होती है। अमेरिकी दवाब के बाद ईरान ने परमाणु परीक्षण कार्यक्रम को शिथिल कर दिया था। अमेरिका सहित पश्चिम के देशों के साथ साल 2015 के समझौते के तहत ईरान परमाणु गतिविधि पर प्रतिबंध लगाने पर सहमत हो गया था, लेकिन साल 2018 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस समझौते से अमेरिका को अलग कर लिया। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अमेरिका के इस कदम के बाद ईरान ने परमाणु परीक्षण कार्यक्रम पर तेजी से काम शुरू किया।
न्यूक्लियर डील पर चल रही है बातचीत
ईरान और अमेरिका के बीच जारी न्यूक्लियर बातचीत पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। माना जा रहा था कि ईरान और अमेरिका एक बार फिर न्यूक्लियर डील के बेहद करीब पहुंच गए हैं। ईरान के इस कदम से दोनों देशों के बीच माहौल बिगड़ सकता है। IAEA ने कहा कि ईरान ने एक ऐसा कोल्ड टेस्ट करने की प्लानिंग की थी जिसमें कोर में परमाणु सामग्री, प्राकृतिक या क्षीण यूरेनियम होगा।
ट्रंप ने दी थी ईरान को धमकी
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि अगर ईरान के साथ न्यूक्लियर डील पर बातचीत नाकाम रही तो वह ईरान की परमाणु सुविधाओं को तबाह कर सकते हैं। ईरान ने एक ऐसे समय पर परमाणु परीक्षण किया है, जब अमेरिका ने हिंद महासागर में डिएगो गार्सिया द्वीप पर अपनी सैन्य तैनाती बढ़ा दी है।
डिएगो गार्सिया द्वीप अमेरिका का एक सैन्य रणनीतिक अड्डा है। जहां से अमेरिका मिडिल ईस्ट पर नजर रखता है। यहां पर अमेरिका ने बॉम्बर और F-15 फाइटर जेट्स तैनात किए हैं। इस तैनाती को ईरान पर दबाव बनाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
हाल में साऊदी रक्षा मंत्री ने किया था ईरान का दौरा
साऊदी रक्षा मंत्री मोहम्मद खालिद बिन सलमान ने हाल ही में तेहरान का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने ईरान के शीर्ष नेताओं से मुलाकात की थी। सलमान ने कूटनीतिक लहजे में ईरान को चेतावनी भी दी थी कि ईरान अमेरिका के साथ चल रही न्यूक्लियर डील पर बातचीत को गंभीरता से ले, वरना इजरायल के साथ ईरान का युद्ध का खतरा बढ़ सकता है।
बाहर जन्मे बच्चों को नहीं मिलेगी आसानी से कनाडाई नागरिकता? जानें नया नियम
9 Jun, 2025 04:18 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कनाडा की सरकार नागरिकता कानून में नया और एक बड़ा बदलाव करने वाली है। इसके लिए वहां की सरकार ने C-3 नाम का एक नया विधेयक संसद में पेश किया है। इस बिल के मुताबिक, अब कनाडा में जनमें बच्चों को वहां की नागरिकता नहीं मिल सकेगी। यह नया विधेयक कनाडा के नागरिकता कानून को और सख्त बना सकता है। यह विधेयक मौजूदा वंशानुक्रम आधारित नागरिकता प्रणाली में बड़ा बदलाव करता है। अब अगर कोई कनाडाई नागरिक विदेश में अपने बच्चे को जन्म देता है या गोद लेता है, तो वह उसे सीधे तौर पर नागरिकता नहीं दे सकेगा जब तक कि उसने खुद कनाडा में कम से कम तीन साल (1,095 दिन) की शारीरिक उपस्थिति न दिखाई हो।
नया नागरिकता विधेयक Bill C-3
वर्तमान में,2009 से लागू नियमों के तहत केवल पहली पीढ़ी तक वंश आधारित नागरिकता सीमित है। लेकिन नए बिल में उस सीमा को फिर से परिभाषित करते हुए यह सुनिश्चित किया गया है कि सिर्फ कनाडाई होना अब विदेश में जन्मे बच्चे के लिए नागरिकता पाने की गारंटी नहीं होगा। अब देश से मजबूत संबंध साबित करना आवश्यक होगा।
प्रवासियों और NRI पर पड़ेगा असर
इस नए कानून का असर विशेषकर उन प्रवासियों और एनआरआई समुदाय पर पड़ेगा, जो कनाडा के नागरिक तो हैं लेकिन विदेशों में रहते हैं या उनके बच्चे विदेशों में जन्म ले रहे हैं।
भारत जैसे देशों के प्रवासियों को अब अपने बच्चों को कनाडाई नागरिकता दिलाने के लिए पहले खुद को कनाडा में कम से कम तीन साल तक रहना होगा।
कनाडा के इमिग्रेशन, रिफ्यूजीज एंड सिटिजनशिप विभाग (IRCC) के मुताबिक, वंश द्वारा नागरिकता की पहली पीढ़ी की सीमा अब कनाडाई परिवारों के वैश्विक जीवनशैली को नहीं दर्शाती। यह विधेयक इस “अन्याय” को दूर करने के लिए लाया गया है, ताकि नागरिकता प्रणाली और अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष हो सके।
IRCC क्या कहता है?
बिल C-3 अभी विधायी समीक्षा प्रक्रिया से गुजर रहा है। इसे कानून बनने के लिए संसद के दोनों सदनों से पारित होना होगा और शाही स्वीकृति प्राप्त करनी होगी। IRCC का कहना है कि यदि यह विधेयक पारित होता है, तो इसके प्रावधानों को जल्द से जल्द लागू किया जाएगा।
अमेरिका के बाद कनाडा भी बढ़ा रहा भारतीयों की मुश्किलें
जहां अमेरिका में ट्रंप प्रशासन ने आव्रजन कानूनों को सख्त किया है, वहीं कनाडा में यह बदलाव ज्यादा संरचित और पारिवारिक संबंधों को महत्व देने वाला माना जा रहा है। इससे अमेरिका की तुलना में कनाडा अप्रवासियों के लिए अधिक अनुकूल विकल्प बन सकता है। कनाडा का नया नागरिकता कानून देश और प्रवासियों के बीच रिश्ते को पुनर्परिभाषित करने की ओर एक बड़ा कदम है। अब नागरिकता केवल जन्म पर नहीं, बल्कि कनाडा से वास्तविक संबंधों पर आधारित होगी। भारतीय मूल के लोगों समेत सभी प्रवासियों को इसके प्रभाव को समझकर आगे की योजना बनानी होगी।
अमेरिकी विमान हादसा: टुल्लाहोमा में हुआ बड़ा हादसा, जानमाल का नुकसान नहीं
9 Jun, 2025 04:09 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अमेरिका के टेनेसी प्रांत में रविवार की सुबह एक और विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। घटना टुल्लाहोमा में बीचक्राफ्ट संग्रहालय के पास हुई है। विमान में 16-20 यात्री सवार थे। हादसे के बाद मौके पर हाईवे पट्रोल पुलिस टीम पहुंची और घायलों को हॉस्पिटल पहुंचाया। कुछ गंभीर घायलों को नजदीकी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है।
जानें किस समय हुआ हादसा?
अधिकारियों के अनुसार हादसा टुल्लाहोमा में बीचक्राफ्ट म्यूजियम के पास ओल्ड शेल्बीविले रोड के पास रविवार दोपहर को 12 बजकर 45 मिनट पर हुआ। टेनेसी हाईवे पेट्रोल टीम ने जानकारी देते हुए बताया कि विमान में 16-20 लोग सवार थे। कुछ लोगों को हॉस्पिटल ले जाया गया है। एफएए ने हादसे की पुष्टि करते हुए कहा कि विमान में 20 लोग सवार थे। विमान की पहचान डे हैविलैंड कनाडा डीएचसी-6 के रूप में हुई है।
स्थानीय महिला ने बताया कैसे हुआ हादसा?
रिपोर्ट के अनुसार स्थानीय लोगों ने बताया कि दुर्घटना म्यूजियम के पास और रनवे से कुछ ही दुरी पर हुई। हादसे में हवाई जहाज के कॉकपिट को काफी नुकसान पहुंचा। वहीं एक अन्य स्थानीय महिला ने बताया कि वह अपने पालतू कुत्तों के साथ घर के पीछे स्थित कोर्टयार्ड में बैठी थीं। जब विमान क्रैश होने से पहले नियंत्रण में नहीं था और उनके घर के ऊपर से होकर गुजरा था। महिला ने आगे बताया कि विमान एयरपोर्ट के रनवे की ओर बढ़ रहा था तभी एक पेड़ से टकराकर चकनाचूर हो गया।
जापान में आया 7.4 तीव्रता का भीषण भूकंप..............पूरे देश को हिला दिया
नक्सल मुक्त क्षेत्र में विकास की सौगात : साहेबिन कछार में गिरधर सोरी और जुगसाय गोड को मिला जीवन का नया सहारा
‘बिहान’ योजना से बदल रही ग्रामीण महिलाओं की तस्वीर, बिलासो बाई बनीं ‘लखपति दीदी’
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्रद्धेय बृजमोहन मिश्रा की जयंती पर पुष्पांजलि अर्पित की
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कृषि मंत्री के निवास पर पहुंचकर वर-वधू को दिया आशीर्वाद
