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पाकिस्तान में 6 लाख फर्जी डॉक्टर कर रहे मरीजों का इलाज; रिपोर्ट
24 Jan, 2026 08:07 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लाहोर। आर्थिक तंगी की मार झेल रहे पाकिस्तान (Pakistan) की हालत इन दिनों बेहद खराब हो गई है। शहबाज शरीफ की सरकार बढ़ती महंगाई को कंट्रोल करने में तो नाकाम है ही, लोग यहां बुनियादी सुविधाओं के लिए भी तरस रहे हैं। हाल ही में यहां की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। एएफपी की एक रिपोर्ट के मुताबिक देशभर में फर्जी और झोला छाप डॉक्टरों की भरमार हो गई है। रिपोर्ट के मुताबिक हालात ऐसे हैं कि देश भर में लाखों लोग बिना किसी कानूनी इजाजत के मरीजों का इलाज कर रहे हैं।
रिपोर्ट में पाकिस्तानी मेडिकल एसोसिएशन और सिंध हेल्थकेयर कमीशन के आंकड़ों का हवाला दिया गया है। मेडिकल एसोसिएशन के महासचिव अब्दुल गफ्फार शोरो ने बताया है कि पूरे पाकिस्तान में 6 लाख से ज्यादा फर्जी डॉक्टर काम कर रहे हैं। उनके मुताबिक ऐसे लोग पहले किसी डॉक्टर के साथ काम करते हैं, थोड़ा बहुत सीखते भी नहीं हैं और अपनी क्लिनिक खोल लेते हैं।
महामारी करार
शोरो के मुताबिक फर्जी डॉक्टरों को दवाओं की सही खुराक और साइड इफेक्ट्स की जानकारी नहीं होती। गलत इलाज से मरीजों की हालत और बिगड़ जाती है। उन्होंने कहा कि ये लोग उपकरणों को ठीक से स्टरलाइज नहीं करते, सिर्फ पानी से धोकर दोबारा इस्तेमाल करते हैं। कई जगह सिरिंज भी दोबारा इस्तेमाल की जाती हैं, जिससे हेपेटाइटिस और एड्स जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। उन्होंने इसे पब्लिक हेल्थ के क्षेत्र में महामारी करार दिया है।
मरीजों की और बिगड़ जाती है हालत
गांव के एक निवासी अली अहमद ने बताया कि इलाके में कई ऐसी क्लिनिक हैं, जहां कोई भी योग्य डॉक्टर नहीं है। वहीं लोगों में शिक्षा की कमी है इसलिए वे असली और नकली डॉक्टर में फर्क नहीं कर पाते। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि इस समस्या का सीधा असर पाकिस्तान की पहले से कमजोर स्वास्थ्य व्यवस्था पर पड़ रहा है। कराची के सिविल अस्पताल के प्रमुख खालिद बुखारी ने बताया कि उनके अस्पताल में देश भर से ऐसे मरीज पहुंचते हैं, जिनकी हालत फर्जी डॉक्टरों के गलत इलाज से खराब हो चुकी होती है। उन्होंने कहा कि अस्पताल पहले से ही मरीजों से भरा हुआ है और ज्यादातर गंभीर मामले इन्हीं गलत इलाज का नतीजा होते हैं।
समाधान भी मुश्किल
सिंध हेल्थकेयर कमीशन के प्रमुख अहसन कवी सिद्दीकी ने माना कि इस समस्या को काबू में करना आसान नहीं है। उन्होंने कहा कि संसाधन सीमित हैं। अगर 25 क्लिनिक बंद की जाती हैं तो अगले ही दिन 25 नई खुल जाती हैं। हाल ही में कराची में एक ऐसा बंगला सील किया गया, जो बिना रजिस्ट्रेशन के पूरे अस्पताल की तरह चल रहा था, जिसमें बच्चों और बड़ों के लिए आईसीयू तक थे। सिद्दीकी ने बताया कि देश का कानून कमजोर है। केस दर्ज होते हैं, लेकिन आरोपी अगले दिन जमानत पर छूट जाते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि जांच टीमों को कई बार गंभीर सुरक्षा खतरे झेलने पड़ते हैं। कई इलाकों में टीमों को बंधक बना लिया जाता है और फायरिंग तक होती है।
वेनेजुएला ऑपरेशन में सीक्रेट सोनिक वेपन के उपयोग से रूस और चीन का बढ़ा टेंशन
24 Jan, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक सनसनीखेज खुलासा करते हुए पहली बार सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार किया है कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने के लिए किए गए सैन्य ऑपरेशन में अमेरिकी सेना ने एक अत्यंत गुप्त सोनिक हथियार (ध्वनि हथियार) का इस्तेमाल किया था। एक टेलीविजन कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने इस हथियार के विवरण को गोपनीय रखते हुए इसके प्रभाव को ‘अद्भुत’ और ‘अकल्पनीय’ बताया। ट्रंप के इस बयान ने न केवल वैश्विक रक्षा विशेषज्ञों को चौंका दिया है, बल्कि रूस और चीन जैसे देशों को भी गहरे तनाव और अलर्ट मोड पर ला खड़ा किया है। राष्ट्रपति ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अमेरिका के पास आज ऐसी सैन्य तकनीक और हथियार मौजूद हैं, जिनके बारे में बाकी दुनिया कल्पना तक नहीं कर सकती।
इस रहस्यमय हथियार को लेकर अटकलें उसी समय से लगाई जा रही थीं, जब व्हाइट हाउस की ओर से मादुरो के ठिकाने पर हुए हमले के विवरण साझा किए गए थे। बताया गया था कि ऑपरेशन के दौरान वेनेजुएलाई सैनिकों को अचानक ऐसी शारीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ा जो सामान्य युद्ध में नहीं देखी जातीं। चश्मदीदों के अनुसार, जैसे ही वह गुप्त डिवाइस सक्रिय की गई, हवा में एक तेज लहर जैसी आवाज गूंजी, जिसने सैनिकों के मानसिक और शारीरिक संतुलन को पूरी तरह बिगाड़ दिया। हमले की चपेट में आए कई सैनिकों की नाक और मुंह से खून बहने लगा, उन्हें भीषण उल्टियां होने लगीं और ऐसा महसूस हुआ मानो उनका सिर अंदर से फट रहा हो। गवाहों के मुताबिक, सैनिक खड़े रहने की स्थिति में भी नहीं थे और बेसुध होकर जमीन पर गिर पड़े।
विशेषज्ञों का मानना है कि सोनिक वेपन बेहद उच्च तीव्रता वाली ध्वनि तरंगों का उपयोग करते हैं। ये तरंगें मानव शरीर के आंतरिक अंगों, विशेषकर कानों और मस्तिष्क के संतुलन केंद्र पर सीधा प्रहार करती हैं। इससे व्यक्ति को भारी भ्रम, संतुलन बिगड़ना, असहनीय सिरदर्द और कभी-कभी अंगों के फटने जैसी गंभीर स्थिति का सामना करना पड़ता है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय कानूनों में इन हथियारों पर कोई सीधा प्रतिबंध नहीं है, लेकिन इनके दीर्घकालिक स्वास्थ्य प्रभावों को लेकर मानवाधिकार संगठनों ने चिंता जताई है। वेनेजुएला के आंतरिक मंत्री के दावों के अनुसार, इस ऑपरेशन में लगभग सौ लोगों की मौत हुई है, और अब जांच इस बात पर केंद्रित है कि इनमें से कितनी मौतें सीधे तौर पर इस ध्वनि हथियार के कारण हुईं।
ट्रंप के इस कबूलनामे के बाद क्रेमलिन (रूस) ने अपनी विशेष एजेंसियों को सक्रिय कर दिया है। रूस अब इस नई तकनीक की वास्तविकता और इसकी काट खोजने की कोशिश में जुटा है। दूसरी ओर, ट्रंप ने इस पूरे सैन्य ऑपरेशन को जायज ठहराते हुए कहा कि निकोलस मादुरो अमेरिका की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा थे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस सैन्य कार्रवाई के बाद अब अमेरिका वेनेजुएला के विशाल तेल क्षेत्रों के पुनर्निर्माण और विकास में सक्रिय भूमिका निभाएगा। ट्रंप ने नए वेनेजुएला का विजन पेश करते हुए कहा कि इस बदलाव से न केवल दक्षिण अमेरिका में स्थिरता आएगी, बल्कि अमेरिका को भी इसका बड़ा आर्थिक लाभ मिलेगा। फिलहाल, दुनिया भर की सैन्य एजेंसियां अब उस गुप्त गूंज के पीछे के विज्ञान को समझने की कोशिश कर रही हैं जिसने एक सत्ता का तख्तापलट कर दिया।
क्रोएशिया में भारतीय दूतावास पर खालिस्तानी समर्थकों का हमला: भारत ने दर्ज कराया कड़ा विरोध
23 Jan, 2026 07:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जाग्रेब। कनाडा, अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के बाद अब खालिस्तानी कट्टरपंथियों ने पूर्वी यूरोप में अपनी हिंसक गतिविधियों का विस्तार करना शुरू कर दिया है। एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाली घटना में, क्रोएशिया की राजधानी जाग्रेब स्थित भारतीय दूतावास को खालिस्तानी समर्थकों ने अपना निशाना बनाया है। गणतंत्र दिवस से ठीक पहले हुई इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है। भारत सरकार ने इस मामले को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए क्रोएशियाई प्रशासन के समक्ष अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।
जानकारी के अनुसार, प्रतिबंधित आतंकी संगठन सिख्स फॉर जस्टिस (एसएफजे) से जुड़े कुछ असामाजिक तत्वों ने जाग्रेब में भारतीय दूतावास की सुरक्षा का उल्लंघन किया। इन उपद्रवियों ने न केवल दूतावास परिसर में जबरन घुसने का प्रयास किया, बल्कि वहां जमकर तोड़फोड़ भी की। प्रत्यक्षदर्शियों और अधिकारियों के मुताबिक, इन खालिस्तानी समर्थकों ने दूतावास की दीवारों पर भारत विरोधी नारे लिखे और वहां गर्व से लहरा रहे भारतीय तिरंगे को उतारकर उसकी जगह खालिस्तानी झंडा लगाने की कोशिश की। यह घटना उस समय हुई है जब भारत अपने गणतंत्र दिवस समारोह की तैयारियों में जुटा है और यूरोपीय संघ के कई प्रमुख नेता भारत के दौरे पर आने वाले हैं।
भारत ने इस अनधिकृत प्रवेश और तोड़फोड़ की घटना की बृहस्पतिवार को तीखी निंदा की। विदेश मंत्रालय द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि नई दिल्ली और जाग्रेब दोनों ही स्तरों पर क्रोएशियाई अधिकारियों के समक्ष यह मामला मजबूती से उठाया गया है। भारत ने स्पष्ट शब्दों में मांग की है कि इस निंदनीय और अवैध कृत्य के लिए जिम्मेदार दोषियों को तुरंत पहचान कर उन्हें कानून के कटघरे में खड़ा किया जाए। मंत्रालय ने विएना संधि का हवाला देते हुए याद दिलाया कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत किसी भी राजनयिक परिसर की सुरक्षा सुनिश्चित करना मेजबान देश की प्राथमिक जिम्मेदारी है और बिना अनुमति के वहां प्रवेश वर्जित है।
विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में आगे कहा कि इस तरह की घटनाएं उन लोगों के हिंसक चरित्र और नापाक इरादों को उजागर करती हैं जो भारत की संप्रभुता के खिलाफ साजिश रच रहे हैं। भारत ने वैश्विक स्तर पर कानून प्रवर्तन अधिकारियों से ऐसी घटनाओं का संज्ञान लेने की अपील की है। यह हमला इसलिए भी अधिक चिंताजनक माना जा रहा है क्योंकि अब तक ऐसी गतिविधियां मुख्य रूप से फाइव आईज समूह के देशों तक ही सीमित थीं। क्रोएशिया जैसे यूरोपीय संघ के सदस्य देश में इस तरह का हमला यह संकेत देता है कि ये आतंकी समूह अब नए ठिकानों पर अपना नेटवर्क फैला रहे हैं। खुफिया एजेंसियों के अनुसार, आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू ने गणतंत्र दिवस के अवसर पर अशांति फैलाने के लिए अपने गुर्गों को उकसाया है, जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं।
ट्रंप बोले- ईरान की तरफ सेना भेजी है, उधर से जवाब आया होश में रहें श्रीमान… उंगलियां ट्रिगर पर हैं
23 Jan, 2026 06:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आए दिन किसी न किसी देश को धमका रहे हैं। उनकी नीतियों ने पूरी दुनिया में उथल-पुथल मचा दी। ईरान को धमकाते हुए कह दिया कि बड़ी सेना ईरान की तरफ भेजी। ट्रंप का इतना कहना ही था कि उधर से जवाब आया कि होश में रहे श्रीमान… इधर उंगलियां ट्रिगर पर हैं। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के कमांडर ने अमेरिका को चेतावनी दी कि उनकी उंगलियां ट्रिगर पर ही हैं। ईरानी गार्ड्स कमांडर जनरल मोहम्मद पाकपुर ने इजरायल और अमेरिका को चेतावनी दी कि ऐतिहासिक अनुभवों और पिछले साल हुए युद्ध से उन्हें सीख लेनी चाहिए ताकि उन्हें कोई भी गलतफहमी ना हो और उससे भी अधिक दर्दनाक और हश्र का सामना न करना पड़े। उन्होंने लिखित बयान में कहा, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स और डियर ईरान की उंगली ट्रिगर पर ही है। वे पहले से कहीं अधिक तैयार है।
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह कहकर हलचल मचा दी है कि एक बहुत बड़ी सेना ईरान की ओर बढ़ रही है। दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम से लौटते समय, ट्रंप ने एयर फॉर्स वन पर पत्रकारों से कहा कि अमेरिका सिर्फ एहतियात के तौर पर ईरान की ओर एक विशाल बेड़ा भेज रहा है। उन्होंने कहा, मैं नहीं चाहता कि कुछ भी हो लेकिन हम उन पर बहुत करीब से नजर रख रहे हैं। इससे पहले दोनों देशों के बीच धमकियों का दौर जारी है। डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की धमकी के बाद बीते मंगलवार को कहा है कि अगर ईरान ने उनकी हत्या कराई तो अमेरिका ईरान का नामोनिशान मिटा देगा। ट्रंप ने एक इंटरव्यू में कहा, मेरे बहुत सख्त निर्देश हैं कि अगर कुछ होता है तो वे उन्हें नक्शे से मिटा देंगे। इससे पहले ईरान ने ट्रंप को देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ किसी प्रकार की कार्रवाई करने पर चेतावनी दी थी। ईरान के सशस्त्र बलों के प्रवक्ता जनरल अबुलफजल शेकारची ने कहा, ट्रंप जानते हैं कि अगर हमारे नेता की ओर हाथ भी बढ़ाया गया तो हम न केवल उस हाथ को काट देंगे बल्कि उनकी दुनिया में आग लगा देंगे। बता दें कि ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स को ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और अमेरिका सहित कई देशों ने एक आतंकवादी संगठन के रूप में चिन्हित किया है और इस पर प्रतिबंधित भी लगाए गए हैं। ईरान में जारी हालिया विरोध प्रदर्शनों के दौरान भी रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स द्वारा क्रूरता की खबरें सामने आई हैं। इस बीच एक अन्य वरिष्ठ सैन्य अधिकारी, जनरल अली अब्दुल्लाही अलीबादी, जो ईरानी संयुक्त कमान मुख्यालय का नेतृत्व करते हैं, ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने हमला किया, तो अमेरिका के सभी ठिकाने ईरान के सशस्त्र बलों के लिए वैध लक्ष्य होंगे।
स्कूल से लौट रहे 5 साल के बच्चे को, अमेरिकी इमिग्रेशन एजेंटों ने हिरासत में लिया, बवाल
23 Jan, 2026 05:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मिनेसोटा। अमेरिका के मिनेसोटा राज्य में 5 वर्षीय बच्चे को अमेरिकी इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एन्फोर्समेंट (आईसीई) एजेंट्स ने उसके पिता के साथ हिरासत में ले लिया। यह घटना मंगलवार दोपहर को हुई, जब बच्चा प्रीस्कूल से घर लौट रहा था। चलती कार से एजेंट्स ने दोनों को पकड़ा। एजेंट्स ने बच्चे को घर का दरवाजा खटखटाने के लिए कहा ताकि यह पता लगाया जा सके कि घर में कोई और है या नहीं। स्कूल ने इसे बच्चे को चारा के रूप में इस्तेमाल करना बताया है। यह परिवार 2024 में अमेरिका आया था और उन पर एसाइलम का केस चल रहा है, कोई निर्वासन आदेश नहीं था। पिता एड्रियन अलेक्जेंडर कोनेजो आरियास इक्वाडोर से हैं। बच्चे का नाम लियाम कोनेजो रामोस है जो कोलंबिया हाइट्स पब्लिक स्कूल्स का छात्र है।
स्कूल अधिकारियों ने इस कृत्य की कड़ी निंदा करते हुए इसे अनैतिक बताया है। वर्तमान में लियाम और उसके पिता को टेक्सास के डिली स्थित एक इमिग्रेशन लॉकअप में रखा गया है। यह परिवार वर्ष 2024 में अमेरिका आया था और वर्तमान में उनका एसाइलम (शरण) का मामला अदालत में लंबित है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि उनके खिलाफ निर्वासन का कोई आदेश नहीं था, फिर भी यह कार्रवाई की गई। हालांकि पड़ोसियों और स्कूल स्टाफ ने बच्चे को अपनी देखरेख में रखने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन अधिकारियों ने उसे भी ठुकरा दिया।इस घटना के बाद से पूरे इलाके में भय का माहौल है। कोलंबिया हाइट्स जिले में पिछले कुछ हफ्तों में यह किसी छात्र की हिरासत का चौथा मामला है। इससे पहले दो 17 वर्षीय और एक 10 वर्षीय छात्र को भी पकड़ा जा चुका है। मिनेसोटा में बढ़ती सख्ती का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले छह हफ्तों में यहाँ करीब 3,000 गिरफ्तारियां की गई हैं।
दहशत का आलम यह है कि स्कूलों में छात्रों की उपस्थिति एक-तिहाई तक गिर गई है। स्कूल प्रबंधन के अनुसार, बसों के पीछे और रिहायशी इलाकों में घूमते एजेंट्स की वजह से बच्चों में मानसिक आघात देखा जा रहा है। लियाम की शिक्षिका ने उसे एक अत्यंत मिलनसार और प्यारा बच्चा बताते हुए घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है।दूसरी ओर, डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी ने सफाई देते हुए कहा कि उनका मुख्य लक्ष्य पिता की गिरफ्तारी था और बच्चे की सुरक्षा के लिए एक अधिकारी तैनात किया गया था। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी इस पर टिप्पणी की है, लेकिन स्कूल द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। परिवार के वकील मार्क प्रोकोश अब इस मामले में कानूनी लड़ाई की तैयारी कर रहे हैं।
कहीं यह जंग का काउंटडाउन तो नहीं, ट्रंप ने कहा- ईरान को दुनिया के नक्शे से मिटा देंगे
23 Jan, 2026 04:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। ईरान में जारी हिंसक प्रदर्शनों और राजनीतिक अस्थिरता के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर बेहद सख्त और आक्रामक बयान देकर अंतरराष्ट्रीय तनाव बढ़ा दिया है। एक इंटरव्यू के दौरान ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि हालात इसी तरह बने रहे या किसी भी तरह की उकसावे वाली कार्रवाई हुई, तो ईरान को इसके गंभीर नतीजे भुगतने होंगे। ट्रंप के इस बयान को दोनों देशों के बीच संभावित टकराव के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
ट्रंप ने इंटरव्यू में कहा, मैं पहले ही चेतावनी दे चुका हूं। अगर कुछ भी हुआ, तो पूरा देश तबाह हो सकता है। उन्होंने सीधे तौर पर यह संकेत दिया कि अमेरिका किसी भी स्थिति में कड़ा जवाब देने से पीछे नहीं हटेगा। राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय आया है, जब ईरान में आर्थिक संकट, महंगाई और राजनीतिक असंतोष के चलते देशभर में प्रदर्शन जारी हैं।
ईरान की ओर से हाल ही में अमेरिका को ‘ऑल-आउट वॉर’ यानी पूरी जंग की चेतावनी दिए जाने के सवाल पर ट्रंप और ज्यादा तीखे नजर आए। उन्होंने कहा, अगर कुछ भी हुआ, तो हम उन्हें दुनिया के नक्शे से मिटा देंगे। ट्रंप के इस बयान ने कूटनीतिक भाषा की सभी सीमाओं को पार कर दिया है और इसे युद्ध की खुली धमकी के रूप में देखा जा रहा है। गौरतलब है कि इससे पहले भी ट्रंप ईरान में सत्ता परिवर्तन की बात कर चुके हैं। उनके बयानों से यह साफ झलकता है कि अमेरिका ईरान के मौजूदा हालात पर करीबी नजर बनाए हुए है और किसी भी अप्रत्याशित घटना को अपने राष्ट्रीय हितों से जोड़कर देख रहा है।
ट्रंप के ताजा बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की बयानबाजी से मध्य पूर्व में हालात और बिगड़ सकते हैं। पहले से ही इजरायल-हमास संघर्ष, लाल सागर में तनाव और रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते वैश्विक स्थिति नाजुक बनी हुई है। ईरान की ओर से अभी ट्रंप के इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन माना जा रहा है कि तेहरान इसे अमेरिकी दबाव और धमकी की राजनीति के तौर पर पेश कर सकता है। कुल मिलाकर, ट्रंप के बयान ने अमेरिका-ईरान संबंधों में तनाव को एक बार फिर चरम पर पहुंचा दिया है और दुनिया की निगाहें अब आने वाले दिनों पर टिकी हैं।
IMD का अलर्ट: ठंड बढ़ेगी, तेज हवाओं के साथ बारिश के आसार
23 Jan, 2026 02:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
हरियाणा|कड़ाके की ठंड के बीच उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों समेत भारत के कई राज्य बारिश का भी सामना करेंगे। IMD यानी भारत मौसम विज्ञान विभाग ने शुक्रवार को अलर्ट जारी किया है। वहीं, इस सप्ताह उत्तर पश्चिम के राज्य न्यूनतम तापमान में गिरावट का सामना कर सकते हैं, जिसके चलते ठंड बढ़ने के आसार हैं। वहीं, राजधानी दिल्ली में भी ठंड की संभावनाएं हैं। इधर, जम्मू और कश्मीर में बर्फबारी फिर से शुरू हो गई है। जानें आज का मौसम कैसा है।
इस हफ्ते कैसा रहेगा मौसम
IMD ने बताया है कि उत्तर पश्चिम भारत में न्यूनतम तापमान दो दिनों के दौरान 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक गिर सकता है। वहीं, इसके बाद चार दिनों में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस बढ़ने के आसार हैं।उत्तर-पश्चिम में मुख्य रूप से राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख गिने जाते हैं।
बारिश की मार
मौसम विभाग ने बताया है कि 23 जनवरी को हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़, दिल्ली, पश्चिम उत्तर प्रदेश और राजस्थान में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। ऐसा ही मौसम जम्मू और कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में देखा जा सकता है। वहीं, 23 और 24 जनवरी को पूर्वी उत्तर प्रदेश में बारिश की संभावनाएं हैं।23 जनवरी को हरियाणा, उत्तराखंड, चंडीगढ़, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में तेज हवाएं और गरज चल सकती हैं। साथ ही इस दौरान ओलावृष्टि भी दर्ज की जा सकती है। दक्षिण भारतीय राज्य तमिलनाडु, पुडुचेरी, करईकल में 25 और 26 जनवरी, केरल और माहे में 26 जनवरी को बारिश के आसार हैं।
कोहरे की चादर
25 और 26 जनवरी को पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में सुबह और रात के समय घने से बहुत घना कोहरा छा सकता है। राजस्थान में 24 से 26 जनवरी तक, उप हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम में 24 जनवरी तक घना कोहरा बने रहने के आसार हैं। 23 जनवरी को हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में शीत दिवस हो सकता है।
माता वैष्णो देवी मंदिर में बर्फबारी
गुरुवार को वैष्णो देवी मंदिर क्षेत्र में मौसम की पहली बर्फबारी दर्ज की गई। इसके चलते त्रिकुटा पहाड़ी बर्फ की सफेद चादर से सजी थी।कश्मीर घाटी के प्रसिद्ध स्की रिसॉर्ट गुलमर्ग और कुछ अन्य क्षेत्रों में गुरुवार को बर्फबारी हुई, वहीं श्रीनगर और अन्य मैदानी इलाकों में तेज हवाएं चलीं। अधिकारियों के मुताबिक, उत्तरी कश्मीर के बारामूला जिले के गुलमर्ग में गुरुवार देर शाम से बर्फबारी शुरू हो गई। जम्मू-कश्मीर में एक शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव के परिणामस्वरूप यह बर्फबारी हुई।गुलमर्ग में कुछ इंच ताजा बर्फ जमा हो गई है, लेकिन आखिरी रिपोर्ट आने तक मध्यम बर्फबारी जारी थी। मौसम विभाग ने कहा था कि घाटी के मैदानी इलाकों समेत व्यापक रूप से हल्की से मध्यम बारिश/बर्फबारी होने की संभावना है, जबकि कुछ स्थानों पर भारी बारिश भी हो सकती है।
शिमला में बर्फबारी
शिमला में करीब तीन महीने बाद शुक्रवार को मौसम की पहली बर्फबारी हुई। हिमाचल प्रदेश के ऊपरी इलाकों में भी बर्फबारी हो रही है, जिनमें राज्य का एक अन्य लोकप्रिय पर्यटन स्थल मनाली भी शामिल है। स्थानीय मौसम केंद्र ने भारी बर्फबारी और बारिश का पूर्वानुमान जताया है। शिमला प्रशासन ने एक परामर्श जारी कर लोगों से मौसम साफ होने तक वाहन नहीं चलाने को कहा है। प्रशासन ने कहा कि चौपाल समेत जिले के ऊपरी इलाकों में भी बर्फबारी हो रही है, जिसके कारण चौपाल-देहा सड़क अवरुद्ध हो गई है।
रूस को कोई लेना देना नहीं, अमेरिका-नाटो ग्रीनलैंड मामले को आपस में सुलझा लेंगे
23 Jan, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मास्को। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड को अमेरिका का हिस्सा बनाने के लिए बेताब हैं। ट्रंप बार बार कहा रहे हैं कि वह ग्रीनलैंड को हासिल करने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। हालांकि ट्रंप की इस योजना से अमेरिका के साथी भी नाराज हो गए हैं। नाटो के कई देशों ने ग्रीनलैंड पर कब्जे के खिलाफ चेतावनी दी है। नाटो देशों ने यह तक कहा है कि हमले की स्थिति में वे ग्रीनलैंड की रक्षा करेंगे और अगर अमेरिका हमला करता है तो यह नाटो के अंत जैसा होगा।
अब इन सब के बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का एक दिलचस्प बयान सामने आया है। इस बयान से झलक रही है कि पुतिन को अमेरिका बनाम यूरोप की यह जुबानी जंग रास आ रही है। पुतिन ने हाल ही में रूस को ट्रंप की ग्रीनलैंड को लेकर महत्वाकांक्षाओं से दूर कर लिया है। पुतिन ने कहा है कि रूस को इस सबसे कोई लेना देना नहीं है और अमेरिका और उसके नाटो सहयोगी इस मामले को आपस में सुलझा लेंगे। एक तरफ पुतिन ने ग्रीनलैंड के लोगों के प्रति सहानुभूति जताने का दिखावा भी किया लेकिन दूसरी तरफ उनके शब्दों में आलोचना दूर दूर तक नजर नहीं आई।
यह इसीलिए भी आश्चर्यजनक है क्योंकि ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर कब्जा करने को सही ठहराने के लिए कई बार रूसी आक्रमण की आशंका को जिम्मेदार ठहराया है। ट्रंप का कहना है कि रूस या चीन कभी भी ग्रीनलैंड पर हमला कर देंगे। इसीलिए वे पहले ही इसे अमेरिकी संरक्षण में लाना चाहते हैं। पुतिन ने राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की बैठक में दिए गए बयान में कहा कि ग्रीनलैंड का क्या होगा इससे हमारा कोई लेना-देना नहीं है। वैसे डेनमार्क ने हमेशा ग्रीनलैंड को एक उपनिवेश के रूप में माना है और उसके प्रति काफी कठोर रहा है, लेकिन यह पूरी तरह से एक अलग मामला है और मुझे शक है कि अभी इसमें किसी की दिलचस्पी है। निश्चित रूप से यह हमसे संबंधित नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि मुझे लगता है कि वे इसे आपस में सुलझा लेंगे।
रिपोर्ट के मुताबिक क्रेमलिन ने ग्रीनलैंड मुद्दे पर ना तो ट्रंप की आलोचना की है और ना ही उनका समर्थन किया। ट्रंप की योजनाओं के प्रति रूस की अप्रत्यक्ष सहमति एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। रिपोर्ट्स की मानें तो ऐसे समय में जब अमेरिका का ध्यान कहीं और लगा हो, रूस के पास पश्चिमी देशों की एकता को कमजोर करने का अच्छा मौका है। यह रणनीति कुछ हद तक काम करती हुई भी दिख रही है। वहीं अमेरिका और पश्चिमी देशों का पूरा ध्यान ग्रीनलैंड पर होने से यूक्रेन युद्ध में अपने लक्ष्यों को हासिल करने का रूस को अहम समय मिल गया है।
अपने मृत पति की अस्थियां चाटती थी सनकी महिला
23 Jan, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। अमेरिका के टेनेसी में रहने वाली एक महिला की कहानी भी कुछ ऐसी ही है, जिसने अपने पति की मौत के बाद ऐसा कदम उठाया कि उसकी चर्चा आज भी लोगों को सिहरन में डाल देती है। यह मामला कैसि नाम की महिला से जुड़ा है, जो उस वक्त सुर्खियों में आई जब उसने खुलासा किया कि वह अपने मृत पति की अस्थियां चाटती थी। कैसि ने बताया कि यह सब गलती से शुरू हुआ। एक दिन उसके हाथ पर पति की अस्थियां गिर गईं। आमतौर पर कोई भी व्यक्ति ऐसी स्थिति में हाथ धो लेता, लेकिन कैसि ने उन्हें साफ करने के बजाय चाट लिया। उस पल के बाद उसकी जिंदगी ने एक अजीब मोड़ ले लिया। उसे ऐसा लगा कि इस तरह वह अपने पति के और करीब है। धीरे-धीरे यह हरकत उसकी आदत बन गई और उसने पूरे कलश की अस्थियां चाट-चाटकर खत्म कर दीं। उसके लिए यह अपने पति के प्रति प्यार जताने का तरीका था, भले ही दुनिया को यह बेहद अजीब और डरावना लगे। कैसि ने अपनी यह कहानी एक अमेरिकी टीवी चैनल के शो में साझा की थी। उसने बताया कि उसके पति की मौत अचानक अस्थमा अटैक के कारण हो गई थी। इस अप्रत्याशित घटना ने उसे पूरी तरह तोड़ दिया। पति के जाने के बाद वह खुद को बेहद अकेला महसूस करने लगी और चुपचाप रहने लगी। उसी दौरान अस्थियों वाला हादसा हुआ, जिसने उसे इस अजीब लत की ओर धकेल दिया। इसके बाद कैसि हर जगह अपने पति की अस्थियां साथ रखने लगी।
चाहे शॉपिंग पर जाना हो या कहीं घूमने, वह कलश अपने साथ ले जाती थी। यहां तक कि वह अपने खाने में भी पति की अस्थियां छिड़कने लगी थी। इस मामले ने जब लोगों का ध्यान खींचा तो कैसि ने खुलकर बताया कि वह वास्तव में इन अस्थियों को खाती थी। उसने यह भी कहा कि इसका स्वाद उसे सड़े हुए अंडे जैसा लगता था, लेकिन फिर भी वह खुद को रोक नहीं पाती थी। वहीं, हेल्थ एक्सपर्ट्स ने इसे बेहद खतरनाक बताया। उनके अनुसार, इंसानी राख में कई तरह के टॉक्सिन्स और हानिकारक तत्व मौजूद हो सकते हैं, जिनका सेवन गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकता है।
60 हजार साल पुरानी खोज ने बदला मानव इतिहास देखने का नजरिया
23 Jan, 2026 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लंदन । वैज्ञानिकों को दक्षिण अफ्रीका में ऐसे प्रमाण मिले हैं, जो बताते हैं कि शुरुआती इंसान न सिर्फ शिकार करता था, बल्कि उसे पूरी योजना, धैर्य और वैज्ञानिक समझ के साथ अंजाम देता था। यह अहम खोज दक्षिण अफ्रीका के क्वाज़ुलू-नटाल प्रांत में स्थित उम्लत्तुजाना रॉक शेल्टर में हुई है। यहां खुदाई के दौरान वैज्ञानिकों को क्वार्ट्ज पत्थर से बने तीरों के सिरे मिले, जिन पर जहर के स्पष्ट निशान पाए गए। इस रिसर्च को स्वीडन और दक्षिण अफ्रीका के वैज्ञानिकों ने मिलकर अंजाम दिया।
वैज्ञानिकों के मुताबिक, इन तीरों पर लगाया गया जहर शिकार को तुरंत नहीं मारता था, बल्कि उसे धीरे-धीरे कमजोर करता था। इससे जानवर ज्यादा दूर तक भाग नहीं पाता था और शिकारी उसे आसानी से पकड़ लेते थे। यह दर्शाता है कि उस दौर के इंसान केवल शारीरिक ताकत पर निर्भर नहीं थे, बल्कि वे रणनीति, धैर्य और व्यवहारिक ज्ञान का भी इस्तेमाल करते थे। यह शिकार करने का एक बेहद उन्नत तरीका माना जा रहा है। शोध में यह भी सामने आया कि तीरों पर इस्तेमाल किया गया जहर बूफोन डिस्टिचा नामक एक स्थानीय पौधे से तैयार किया जाता था। यह पौधा आज भी दक्षिण अफ्रीका में पाया जाता है और इसे अत्यंत विषैला माना जाता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह जहर चूहों को 20 से 30 मिनट में मार सकता है, जबकि इंसानों में इससे मतली, आंखों की रोशनी में परेशानी और मांसपेशियों में कमजोरी जैसे लक्षण हो सकते हैं।
हैरानी की बात यह है कि यही जहर बाद के ऐतिहासिक काल में इस्तेमाल किए गए तीरों पर भी पाया गया है। इस खोज से पहले वैज्ञानिकों का मानना था कि जहर लगे तीरों का इस्तेमाल करीब 4,000 से 8,000 साल पहले शुरू हुआ था, जिसके प्रमाण मिस्र और दक्षिण अफ्रीका में मिले थे। लेकिन 60,000 साल पुराने ये तीर इस धारणा को पूरी तरह बदल देते हैं और साबित करते हैं कि इंसान बहुत पहले ही उन्नत तकनीक और वैज्ञानिक सोच विकसित कर चुका था। सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि हजारों साल बाद भी तीरों पर जहर के अवशेष सुरक्षित मिले। रासायनिक जांच से पता चला कि ये पदार्थ मिट्टी में लंबे समय तक स्थिर रह सकते हैं।
दूसरी महिलाओं की तस्वीरें लाइक करना बना तलाक की वजह
23 Jan, 2026 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कायसेरी । तुर्की के कायसेरी शहर से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां पर एक महिला ने अपने पति के खिलाफ सिर्फ इस वजह से तलाक की अर्जी दाखिल कर दी क्योंकि वह सोशल मीडिया पर दूसरी महिलाओं की तस्वीरें लाइक करता था। महिला का आरोप था कि उसका पति न केवल उसे शब्दों से अपमानित करता और नीचा दिखाता था, बल्कि अपना अधिकतर समय सोशल मीडिया पर बिताता था। उसने अदालत को बताया कि पति की यह आदत उसे मानसिक रूप से आहत करती थी और इससे शादी में भरोसा कमजोर हुआ।
महिला के वकीलों ने दलील दी कि पति ने वैवाहिक निष्ठा का उल्लंघन किया है, इसलिए उसे आर्थिक मुआवजा दिया जाना चाहिए। वहीं पति ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए खुद को निर्दोष बताया और पलटकर तलाक की अर्जी दाखिल कर दी। उसने कहा कि उसकी पत्नी जरूरत से ज्यादा जलन करती थी, उसके पिता का अपमान करती थी और उसकी सामाजिक छवि को नुकसान पहुंचा रही थी। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और सबूतों की जांच के बाद अदालत ने अहम फैसला सुनाया।
तुर्की की अदालत ने माना कि सोशल मीडिया पर दूसरी महिलाओं की भड़काऊ या आपत्तिजनक तस्वीरों को लाइक करना मामूली बात नहीं है। अदालत के अनुसार, इस तरह का व्यवहार शादीशुदा रिश्ते में भावनात्मक असुरक्षा पैदा करता है और निष्ठा के सिद्धांत को तोड़ता है। कोर्ट ने पति को ज्यादा दोषी ठहराते हुए उसे पत्नी को हर महीने 750 तुर्की लीरा गुजारा भत्ता देने और 80 हजार लीरा का मुआवजा चुकाने का आदेश दिया। फैसले से हैरान पति ने मुआवजा ज्यादा बताते हुए अपील की, लेकिन अदालत ने उसे खारिज कर दिया। जज ने साफ कहा कि सोशल मीडिया पर की गई गतिविधियां भी आज रिश्तों में भरोसे को प्रभावित करती हैं।
Board of Peace विवाद: ट्रंप ने कनाडा का निमंत्रण वापस लिया, नई बहस शुरू
23 Jan, 2026 08:56 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अमेरिकी : राष्ट्रपति Donald Trump ने गाजा के पुनर्निर्माण और वैश्विक शांति प्रयासों को लेकर एक नई पहल ‘Board of Peace’ की शुरुआत करने का दावा किया है। इस पहल के तहत उन्होंने दुनिया के कई देशों को इसमें शामिल होने के लिए निमंत्रण भेजा था। हालांकि, अब यह पहल विवादों में घिरती नजर आ रही है, क्योंकि ट्रंप ने कनाडा को भेजा गया निमंत्रण वापस ले लिया है।
गुरुवार को ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रूथ’ पर पोस्ट कर इस फैसले की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कुछ देशों के रुख और बयानों से असंतुष्ट होकर उन्होंने कनाडा को दिया गया आमंत्रण वापस लेने का निर्णय लिया है। यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है, जब ट्रंप पहले ही कई देशों को व्यापार और टैरिफ को लेकर धमकी भरे बयान दे चुके हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि Board of Peace जैसी पहल वैश्विक मंच पर सहयोग और कूटनीति को मजबूत करने का अवसर हो सकती थी, लेकिन इस तरह के अचानक फैसले इसे राजनीतिक विवाद का विषय बना सकते हैं। कनाडा के निमंत्रण को वापस लेना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका-कनाडा संबंधों पर भी असर डाल सकता है।
ट्रंप के इस कदम से यह भी संकेत मिलता है कि Board of Peace केवल एक कूटनीतिक मंच नहीं, बल्कि राजनीतिक रणनीति का हिस्सा हो सकता है। कई देशों ने अभी तक इस पहल पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन वैश्विक राजनीति में इस फैसले को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
रोबोटिक्स बनाम मानवीय संवेदना: लग्जरी होटल के अनुभव ने सिखाया ऑटोमेशन का नया सबक
23 Jan, 2026 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
टोक्यो। वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में लगभग 4 करोड़ सर्विस रोबोट्स विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। फैक्ट्रियों से लेकर अस्पतालों, मॉल्स और रेस्टोरेंट्स तक, रोबोट्स इंसानों के कठिन कार्यों को सुगम बना रहे हैं। हालाँकि, जापान के एक लग्जरी होटल में रोबोट्स के उपयोग को लेकर हुए हालिया प्रयोग ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ऑटोमेशन की अपनी सीमाएं हैं और यह मानवीय भावनाओं व रचनात्मकता का स्थान नहीं ले सकता।
जापान के इस अनूठे होटल ने शुरुआत में रिसेप्शन पर डायनासोर जैसे रोबोट्स तैनात किए थे, जो मेहमानों का स्वागत करते थे। चेक-इन से लेकर सामान को कमरे तक पहुँचाने तक की पूरी प्रक्रिया रोबोटिक पोर्टर और सिस्टम के हवाले थी। शुरुआत में यह तकनीक पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी और होटल की बुकिंग में उछाल देखा गया। लेकिन कुछ ही समय बाद तकनीकी खामियां उभरने लगीं। रोबोट्स ग्राहकों की अलग-अलग भाषाओं और विशिष्ट मांगों को समझने में विफल रहे। सामान पहुँचाने के दौरान बाधाएं आईं और सामान्य कस्टमर सर्विस में रोबोट्स पूरी तरह असमर्थ साबित हुए। नतीजतन, नियमित रखरखाव की भारी लागत और तकनीकी विफलताओं के कारण होटल प्रबंधन को चार साल के भीतर लगभग 243 रोबोट्स को काम से हटाना पड़ा।
इस विफलता ने वैश्विक स्तर पर ऑटोमेशन को लेकर छह महत्वपूर्ण सबक दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पूरी तरह ऑटोमेशन पर निर्भर रहने के बजाय रोबोट्स का सीमित और चुनिंदा उपयोग ही बुद्धिमानी है। सर्विस रोबोट्स मनोरंजन और आकर्षण के लिए तो अच्छे हैं, लेकिन जटिल समस्याओं के समाधान में वे इंसानों के मुकाबले कमजोर हैं। दूसरा बड़ा सबक यह है कि कस्टमर सर्विस जैसे क्षेत्रों में सहानुभूति, रचनात्मकता और व्यक्तिगत संपर्क अनिवार्य है, जिसे एक मशीन कभी पूरा नहीं कर सकती। इसके अतिरिक्त, रोबोट्स का रखरखाव महंगा है और सुरक्षा के लिहाज से उन पर पूर्ण भरोसा करना जोखिम भरा हो सकता है।
आंकड़ों के अनुसार, दुनिया में इस समय 40 लाख फैक्ट्री रोबोट्स और 3.6 करोड़ सर्विस रोबोट्स कार्यरत हैं। चीन, जापान, अमेरिका, कोरिया और जर्मनी इस बाजार के सबसे बड़े केंद्र बनकर उभरे हैं। जहाँ फैक्ट्री रोबोट्स खतरनाक और भारी कार्यों में सफल रहे हैं, वहीं सर्विस रोबोट्स का उपयोग कोविड संकट के बाद सफाई और सैनिटाइजेशन में बढ़ा है। चीन में रोबोट शेफ और डिलीवरी रोबोट्स का चलन है, तो जर्मनी में ये भारी प्लेटें उठाने का काम करते हैं ताकि मानव कर्मचारी ग्राहक सेवा पर ध्यान दे सकें। कुल मिलाकर, जापान के इस अनुभव ने दुनिया को यह समझा दिया है कि रोबोट्स इंसानों के सहायक तो बन सकते हैं, लेकिन वे इंसानों का विकल्प नहीं हैं। ऑटोमेशन का संतुलित और समझदारी भरा इस्तेमाल ही भविष्य की सबसे प्रभावी रणनीति होगी।
रूसी हमले के बाद दुनिया की सबसे खतरनाक न्यूक्लियर साइट की बिजली गुल होना चिंताजनक
22 Jan, 2026 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कीव। दुनिया की सबसे भीषण परमाणु त्रासदी का गवाह रहे यूक्रेन के चेरनोबिल न्यूक्लियर पावर प्लांट में मंगलवार को एक बार फिर गंभीर संकट की स्थिति पैदा हो गई। रूसी सेना द्वारा किए गए भीषण ड्रोन और मिसाइल हमलों के कारण यह प्लांट अचानक अपनी बाहरी बिजली आपूर्ति से पूरी तरह कट गया। संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था, अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने इस घटना की पुष्टि करते हुए परमाणु सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है।
मंगलवार सुबह रूस ने यूक्रेन के ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बनाते हुए बड़े पैमाने पर हमले किए। इन हमलों में कई महत्वपूर्ण बिजली सबस्टेशन्स क्षतिग्रस्त हो गए, जो परमाणु संयंत्रों के सुरक्षित संचालन के लिए अनिवार्य माने जाते हैं। हमलों के कारण न केवल चेरनोबिल की बिजली आपूर्ति बाधित हुई, बल्कि यूक्रेन के अन्य परमाणु ऊर्जा संयंत्रों से जुड़ी पावर लाइन्स पर भी बुरा असर पड़ा। इस सैन्य कार्रवाई ने राजधानी कीव सहित कई इलाकों को कड़ाके की ठंड के बीच अंधेरे में झोंक दिया, जिससे हजारों घरों में हीटिंग और पानी की सप्लाई ठप हो गई।
चेरनोबिल प्लांट हालांकि 1986 की दुर्घटना के बाद से डीकमीशन किया जा चुका है और वर्तमान में बंद है, लेकिन इसके बावजूद यहां बिजली की निरंतर आपूर्ति अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्लांट में मौजूद खर्च हो चुके परमाणु ईंधन को ठंडा रखने और सुरक्षा प्रणालियों को चालू रखने के लिए बिजली की आवश्यकता होती है। बाहरी ग्रिड से संपर्क टूटने के तुरंत बाद प्लांट के आपातकालीन बैकअप जनरेटर और आंतरिक सुरक्षा प्रणालियां सक्रिय हो गईं, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कहा कि वे परमाणु सुरक्षा पर पड़ने वाले प्रभावों का लगातार आकलन कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि सक्रिय युद्ध क्षेत्र में परमाणु केंद्रों के करीब इस तरह के हमले अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के लिए बड़ा जोखिम पैदा करते हैं। हालांकि, यूक्रेन के ऊर्जा मंत्रालय ने बाद में राहत की खबर देते हुए बताया कि चेरनोबिल की बिजली आपूर्ति बहाल कर दी गई है और संयंत्र को पुनः यूनाइटेड एनर्जी सिस्टम से जोड़ दिया गया है। राहत की बात यह है कि इस घटना से फिलहाल पर्यावरण या जनहानि का कोई सीधा खतरा पैदा नहीं हुआ है। लेकिन बार-बार हो रहे इन हमलों ने यूक्रेन को अंतरराष्ट्रीय मंच पर आवाज उठाने के लिए मजबूर कर दिया है। यूक्रेन ने इस मुद्दे पर चर्चा करने और रूसी हमलों के परमाणु सुरक्षा पर पड़ने वाले दीर्घकालिक प्रभावों का जायजा लेने के लिए बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की आपात बैठक बुलाने की मांग की है।
पाकिस्तानी रक्षा मंत्री की किरकिरी: नकली पिज्जा आउटलेट का उद्घाटन कर घिरे ख्वाजा आसिफ
22 Jan, 2026 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। पाकिस्तान में अक्सर ऐसी अतरंगी और हैरान करने वाली घटनाएं सामने आती रहती हैं, जो देखते ही देखते चर्चा का विषय बन जाती हैं। ताज़ा मामला पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ से जुड़ा है, जिन्होंने हाल ही में एक मशहूर अंतरराष्ट्रीय फास्ट फूड चेन पिज्जा हट के नए आउटलेट का बड़े धूमधाम से उद्घाटन किया। फीता काटा गया, तालियां बजीं और तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा की गईं, लेकिन कुछ ही घंटों में यह जश्न रक्षा मंत्री के लिए भारी बेइज्जती का सबब बन गया।
दरअसल, जिस आउटलेट का उद्घाटन रक्षा मंत्री ने किया था, वह पूरी तरह से फर्जी निकला। जैसे ही उद्घाटन की तस्वीरें वायरल हुईं, असली पिज्जा हट कंपनी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से एक स्पष्टीकरण जारी कर दिया। कंपनी ने साफ तौर पर कहा कि सियालकोट में उनका कोई नया आउटलेट नहीं खुला है और जिस दुकान का उद्घाटन रक्षा मंत्री ने किया है, वह उनके ब्रांड नाम और लोगो का अवैध रूप से इस्तेमाल कर रही है। कंपनी ने यहाँ तक स्पष्ट किया कि इस फर्जी आउटलेट का उनकी अंतरराष्ट्रीय रेसिपी, गुणवत्ता मानकों और खाद्य सुरक्षा नियमों से कोई लेना-देना नहीं है। इस खुलासे के बाद पाकिस्तान के सोशल मीडिया पर ख्वाजा आसिफ और सरकार का जमकर मजाक उड़ाया जा रहा है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि एक देश का रक्षा मंत्री, जिस पर राष्ट्रीय सुरक्षा की जिम्मेदारी होती है, क्या इतना भी जागरूक नहीं है कि वह एक अंतरराष्ट्रीय ब्रांड और उसके फर्जी कॉपी के बीच अंतर कर सके? पाकिस्तानी नागरिकों ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जब देश की अर्थव्यवस्था, कूटनीति और रक्षा व्यवस्था जैसे गंभीर मुद्दे संकट में हैं, तब मंत्री महोदय नकली पिज्जा दुकानों का फीता काटने में व्यस्त हैं।
सोशल मीडिया यूजर्स ने इस घटना को पाकिस्तान के वर्तमान हालातों का प्रतीक बताया है। एक यूजर ने तंज कसते हुए लिखा कि जब देश में कुछ भी असली नहीं बचा, तो मंत्री भी नकली दुकानों का ही उद्घाटन करेंगे। कुछ लोगों ने तो यहाँ तक कह दिया कि चूंकि देश की स्थिति नकली विकास पर टिकी है, इसलिए मंत्री को भी नकली ब्रांडिंग का शिकार होना पड़ा। इस घटना ने न केवल ख्वाजा आसिफ की व्यक्तिगत छवि को नुकसान पहुंचाया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तानी प्रशासन की कार्यप्रणाली और उसकी गंभीरता पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल, यह मामला पूरे देश में हंसी और आक्रोश का मिला-जुला केंद्र बना हुआ है।
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