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पुतिन, पेजेशकियन और किम की मौजूदगी में चीन ट्रंप को दिखाएगा अपनी सैन्य ताकत
3 Sep, 2025 11:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग। चीन की राजधानी बीजिंग में चल रही राजनीतिक हलचल दुनिया की राजनीति का नक्शा बदल सकती है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने रूस, ईरान और उत्तर कोरिया जैसे देशों के नेताओं की मेजबानी की है, जो यह दर्शाता है कि चीन अब केवल आर्थिक नहीं, बल्कि एक सैन्य शक्ति के रूप में भी खुद को स्थापित कर रहा है। 3 सितंबर को बीजिंग में एक बड़ी सैन्य परेड होने वाली है, जिसमें हाइपरसोनिक हथियार, परमाणु-सक्षम मिसाइलें और समुद्री ड्रोन सहित हजारों सैनिकों का प्रदर्शन किया जाएगा। इस सैन्य परेड को चीन का अब तक का सबसे बड़ा शक्ति-प्रदर्शन माना जा रहा है। इस परेड में भाग लेने के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और उत्तर कोरिया के किम जोंग उन बीजिंग पहुँच चुके हैं। अमेरिकी मीडिया ने इस गठजोड़ को बेहद गंभीर माना है, जिसमें अमेरिकी मीडिया ने कहा है कि चीन एक नया वैश्विक व्यवस्था (ग्लोबल ऑर्डर) बनाने की कोशिश कर रहा है। अमेरिकी थिंक टैंक का मानना है कि ट्रंप प्रशासन की नीतियों ने पारंपरिक अमेरिकी सहयोगियों जैसे ऑस्ट्रेलिया, जापान और यूरोपीय देशों को असमंजस में डाल दिया है। ऑस्ट्रेलिया ने चीन के साथ अपने संबंधों में नरमी दिखाई है। बताया गया है कि भारत, हालांकि एक लोकतांत्रिक देश है, लेकिन एससीओ (एससीओ) शिखर सम्मेलन में उसकी भागीदारी से वैश्विक समीकरणों की जटिलता साफ झलकती है। ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूशन के जोनाथन ज़िन ने कहा है कि शी जिनपिंग का संदेश साफ है कि चीन एक महान शक्ति बन चुका है और अमेरिकी सहयोगियों को यह महसूस हो रहा है कि वे अमेरिका पर पूरी तरह भरोसा नहीं कर सकते हैं।
बाढ़ से मर रही पाकिस्तान की जनता, ख्वाजा आसिफ का बेतुकान बयान....बाल्टी में पानी स्टोर कर लें लोग
3 Sep, 2025 10:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। पाकिस्तान के पंजाब, पीओके, केपीके सहित देश के बड़े हिस्से में बाढ़ तबाही मचा रही है। बाढ़ से लाखों लोग और पशु सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं, साथ ही बड़े पैमाने पर फसलें तबाह हुई हैं। एक ओर बाढ़ का कहर जारी है, दूसरी ओर पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ की ओर से अजीबोगरीब बयान देने का सिलसिला बदस्तूर जारी है। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में रक्षा मंत्री आसिफ कहते सुने जा रहे हैं कि पाकिस्तानियों को बाढ़ का पानी स्टोर कर लेना चाहिए।
सोशल मीडिया पर एक पाकिस्तानी टीवी चैनल की क्लिप सामने आई है। इसमें न्यूज एंकर फोन पर ख्वाजा आसिफ से बात करने का दावा कर रहा है। एंकर जब बाढ़ पर सवाल करता है, तब रक्षा मंत्री आसिफ कहते हैं कि पानी को बाल्टियों और डब्बों में स्टोर कर लें और बाद में काम में ले लें। बाढ़ को लोग खराबी की तरह ना देखकर, बल्कि अल्ला की रहमत की तरह से लें। आसिफ का ये वीडियो सोशल यूजर्स के बीच चर्चा बटोर रहा है।
बात दें कि पाकिस्तानी रक्षा मंत्री आसिफ ने इससे पहले बाढ़ के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराया था। आसिफ का कहना है कि भारत के पानी छोड़ने की वजह से पाकिस्तान में बाढ़ आ रही है। उन्होंने कहा कि भारत से आ रहा बाढ़ का पानी अपने साथ लाशें भी पाकिस्तान में ला रहा है। पाकिस्तान में बह रही लाशें भारतीयों की हैं।
ख्वाजा आसिफ ने सियालकोट के बाढ़ प्रभावित इलाकों के दौरे के दौरान कहा कि भारत से बह रहा बाढ़ का पानी अपने साथ लाशें, मवेशी और मलबे के ढेर लेकर आया है। आसिफ ने दावा किया कि स्थानीय लोगों ने सीमा पार लाशें बहते हुए देखी हैं। इससे क्षेत्र से पानी निकालने की कोशिश कर रही नगरपालिका टीमों के काम में बाधा आ रही है।
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की सरकार ने कहा है कि पूर्वी पंजाब प्रांत इतिहास की सबसे भीषण बाढ़ से जूझ रहा है। उन्होंने कहा कि नदियों का जलस्तर अब तक के उच्चतम स्तर पर है। इससे 20 लाख से ज्यादा की आबादी सीधेतौर पर प्रभावित है। पाकिस्तान में 26 जून से अब तक बारिश और बाढ़ से 849 लोग मारे गए हैं और 1,130 घायल हुए हैं।
विवादित कच्चाथीवू द्वीप पहुंचे राष्ट्रपति दिसानायके....तमिलनाडू में तनाव चरम पर
3 Sep, 2025 09:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
कोलंबो । कच्चाथीवू द्वीप को लेकर भारत और श्रीलंका के बीच तनाव फिर बढ़ गया है। श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके ने अचानक विवादित द्वीप का दौरा कर कच्चाथीवू को श्रीलंका का अभिन्न अंग बताया है। उनकी इस यात्रा से भारत और श्रीलंका के संबंधों में नया तनाव पैदा हुआ है। राष्ट्रपति दिसानायके ने कच्चाथीवू को श्रीलंका का अभिन्न अंग बताकर कहा कि उनकी सरकार किसी भी बाहरी दबाव में अपनी संप्रभुता से समझौता नहीं करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि कच्चाथीवू की रक्षा करना श्रीलंका का दायित्व है।
वहीं अभिनेता से राजनेता बने विजय ने भारत सरकार पर तीखा हमला कर आरोप लगाया है कि केंद्र तमिल मछुआरों की रक्षा करने में नाकाम रहा है। विजय ने इस मुद्दे पर तमिलनाडु में एक आंदोलन का नेतृत्व भी किया था। उनका कहना है कि अब तक 800 से अधिक भारतीय मछुआरों को श्रीलंकाई नौसेना ने हिरासत में लिया है और कई मछुआरों की मौत भी हो चुकी है।
कच्चाथीवू विवाद का इतिहास
कच्चाथीवू द्वीप ऐतिहासिक रूप से रामनाथपुरम राजाओं का हिस्सा था और ब्रिटिश शासनकाल में मद्रास प्रेसिडेंसी के अधीन था। 1974 में हुए एक समझौते के तहत इस द्वीप को श्रीलंका को सौंप दिया गया था। इस समझौते में भारतीय मछुआरों और तीर्थयात्रियों को बिना वीज़ा के आवाजाही और मछली पकड़ने की छूट दी गई थी। 1976 में समुद्री सीमा के पुनर्निर्धारण के बाद भारतीय मछुआरों को श्रीलंकाई जलक्षेत्र में मछली पकड़ने से रोक दिया गया। तब से यह द्वीप भारत और श्रीलंका के बीच विवाद का कारण बना हुआ है। अब देखना यह है कि श्रीलंका के राष्ट्रपति की इस यात्रा के बाद भारत सरकार की क्या प्रतिक्रिया होती है।
भारत की अगली चाल पर नजर
श्रीलंकाई राष्ट्रपति की यह यात्रा तब हुई है, जब तमिलनाडु में कच्चाथीवू को लेकर आक्रोश बढ़ रहा है। अब देखना होगा कि भारत सरकार श्रीलंका के इस कदम पर किस तरह की प्रतिक्रिया देती है।
तीनों महाशक्तियों को करीब आने के लिए अमेरिका ने ही किया मजबूर
2 Sep, 2025 04:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग। भारत-चीन और रूस, वो देश हैं, जो इस वक्त डोनाल्ड ट्रंप के निशाने पर हैं। रूस पर उसने पहले ही प्रतिबंध लगा रखे हैं, भारत को वो अपनी शर्तों पर झुकाने के लिए लगातार लगा हुआ है और चीन को भी रूस से तेल व्यापार के चलते टैरिफ और सैंक्शंस की धमकियां मिल रही हैं। ऐसे में इन तीनों महाशक्तियों को कहीं न कहीं एक साथ आने के लिए अमेरिका ने ही मजबूर किया है। अमेरिका के टैरिफ वॉर के बाद तीनों देशों के बीच एक स्वाभाविक गठबंधन बना है, जो अमेरिका को ये आईना दिखाने के लिए काफी है कि वो दुनिया का बादशाह नहीं है। खासतौर पर ब्रिक्स देशों ने डोनाल्ड ट्रंप के आगे झुकने से बिल्कुल मना कर दिया है, जिसके बाद इन तीनों देशों की भूमिका काफी बढ़ जाती है।
शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन की मीटिंग से एक ऐसी तस्वीर आई है, जो न सिर्फ डोनाल्ड ट्रंप को बेचैन करने वाली है बल्कि पश्चिमी देशों के भी होश उड़ा देगी। जिस सहयोग को तोड़ने के लिए उन्होंने जमीन आसमान एक कर दिया, वो अब बढ़ता हुआ नजर आ रहा है।ये वो तस्वीर है, जिसे देखने के लिए एशिया की राजनीति कई सालों से इंतजार कर रही थी। ये वो तिकड़ी है, जो दादागिरी पर उतरे अमेरिकी राष्ट्रपति को शक्ति संतुलन का मतलब समझा देगी। ये वो तस्वीर है, जो बताती है कि इस दुनिया में विकास और दोस्ती ही एक साथ चल सकते हैं। चीन के तियानजिंग में जब एशिया के दो सबसे बड़े खिलाड़ी मिले, तो पूरी दुनिया देखती रह गई। फिर उन्हें जब रूस का साथ मिला, तो ये शक्तिशाली तस्वीर सामने आई। दुनिया के तीन ऐसे देश, जो अमेरिका को चैलेंज देने की क्षमता रखते हैं। ये तीन राष्ट्राध्यक्ष जिस तरह से हंसते हुए दिख रहे हैं, उसे देखकर अमेरिका की छाती पर सांप लोट रहे होंगे। चीन और भारत के बीच सीमा विवाद को लेकर उनके रिश्ते कभी इतने अच्छे नहीं रहे, हालांकि रूस से भारत की दोस्ती कोई नई नहीं है। गलवान सीमा विवाद के बाद भारत-चीन के बीच रिश्ते काफी तल्ख हो गए थे, जिसे सामान्य करने में रूस ने बड़ी भूमिका निभाई।
पंचशील सिद्धांतों को बेहिचक तोड़ता रहा है चीन, फिर कैसे भरोसा करे भारत?
2 Sep, 2025 03:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग। भारत, रुस और चीन तीन महाशक्तियां एक साथ आ जाएं तो दुनिया की तकदीर और तश्वीर बदलते देर नहीं लगेगी। और तो और किसी एक देश की दादागीरी भी नहीं चलेगी। भारत अपने सिद्धांतों पर हमेशा ही अमल करता रहा है। न कभी किसी को धोखा दिया है और न ही किसी पर हमला किया है। लेकिन, चीन ने पंचशील सिद्धांतों को तोड़ने में कभी हिचकिचाहट महसूस नहीं की है।
चीन के तियानजिन शहर में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन पर दुनिया भर की निगाहें टिकी हैं। इस दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुलाकात में पंचशील सिद्धांतों का ज़िक्र किया। यह वही पंचशील है, जिसे भारत और चीन ने 1954 में शांति और सहयोग की नींव के तौर पर दुनिया के सामने रखा था। उस समय पंडित नेहरू और चाउ एन लाई ने मिलकर पांच मूलभूत सिद्धांतों परस्पर सम्मान, आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करना, समानता और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व पर सहमति जताई थी। लेकिन इतिहास गवाह है कि चीन ने इन सिद्धांतों का पालन करने के बजाय भारत की पीठ में छुरा घोंपा।
अब जबकि एससीओ समिट के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग फिर से बातचीत कर रहे हैं और साझेदारी की बात कर रहे हैं, तो यह सवाल उठना लाज़मी है कि भारत चीन पर कितना भरोसा कर सकता है? विशेषज्ञ मानते हैं कि पंचशील सिद्धांतों का हवाला देना अच्छा लगता है, लेकिन चीन की नीतियां अक्सर विस्तारवादी रही हैं। उसकी आक्रामक सैन्य गतिविधियां, आर्थिक दबदबे की कोशिशें और इंडो-पैसिफिक में शक्ति प्रदर्शन इस बात का प्रमाण हैं कि वह भरोसे से ज़्यादा दबाव की राजनीति को महत्व देता है। 1962 के युद्ध ने साफ कर दिया कि पंचशील चीन के लिए केवल कूटनीतिक औजार था, भरोसे की गारंटी नहीं। युद्ध के बाद से अब तक, चाहे अरुणाचल प्रदेश पर दावा हो या डोकलाम और गलवान जैसी झड़पें, चीन का ट्रैक रिकॉर्ड यह दिखाता है कि उसकी बात और ज़मीन पर की जाने वाली कार्रवाई में भारी फर्क है। गलवान घाटी में 2020 की हिंसक झड़प में 20 भारतीय जवानों की शहादत ने इस अविश्वास को और गहरा कर दिया।
मिली और चेल्सी के रिश्ते को लेकर लोग अक्सर पाल लेते हैं गलतफहमी
2 Sep, 2025 02:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन । दुनिया में रिश्ते और परिवार की परिभाषा में आ रहे बदलाव की ताजा मिसाल हैं ब्रिटेन में रहने वाली 21 साल की मिली और 23 साल की चेल्सी। ये दोनों ही पिछले 9 सालों से एक-दूसरे के साथ हैं। ये युवतियां सपोर्ट वर्कर के तौर पर काम करती हैं और जल्द ही माता-पिता बनने की तैयारी में भी जुटी हैं। लेकिन उनके रिश्ते को लेकर लोग अक्सर गलतफहमी पाल लेते हैं, जिससे उन्हें कई बार तकलीफ झेलनी पड़ती है।
दरअसल, मिली की लंबाई 5 फुट 6 इंच है जबकि उनकी मंगेतर चेल्सी उनसे पांच इंच छोटी यानी 5 फुट 1 इंच हैं। उम्र में बड़ी होने के बावजूद चेल्सी का चेहरा अधिक युवा लगता है और उनका पहनावा भी लड़कों जैसा है। इसी वजह से लोग उन्हें कपल की बजाय मां-बेटे का रिश्ता मान बैठते हैं। यही गलतफहमी सोशल मीडिया पर भी देखने को मिलती है, जहां उनकी तस्वीरों और वीडियोज पर कई बार अपमानजनक और भद्दे कमेंट्स किए जाते हैं। मिली का कहना है कि अक्सर लोग उन्हें ‘मां और बेटा’ कहकर बुलाते हैं और उन पर बच्चों की तरफ आकर्षित होने का आरोप लगाते हैं, जो बेहद शर्मनाक और अपमानजनक है। इसका असर उनके निजी जीवन पर भी पड़ा है। दोनों ने बताया कि लोग उन्हें सड़क पर एक साथ देखकर अजीब नजरों से देखते हैं। वे पब्लिक में हाथ पकड़ने या एक कपल की तरह पेश आने से झिझकने लगी हैं।
यह स्थिति बताती है कि समाज में समलैंगिक रिश्तों को अभी भी पूरी तरह स्वीकार नहीं किया गया है और लोग बिना समझे अपनी राय थोपने लगते हैं। फिर भी मिली और चेल्सी ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपने रिश्ते को और मजबूत बनाने का फैसला किया है और आईयूआई फर्टिलिटी ट्रीटमेंट के जरिए जल्द ही पेरेंट्स बनने की योजना बनाई है। उनका मानना है कि वे लोगों की नफरत और ट्रोलिंग के कारण अपनी खुशियों को रोकने वाली नहीं हैं।
पैरासिटामोल और आइबूप्रोफेन जैसी दवाओं को लेकर चौंकाने वाला खुलासा
2 Sep, 2025 01:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सिडनी। ऑस्ट्रेलिया की एक नई रिसर्च ने पैरासिटामोल और आइबूप्रोफेन जैसी दवाओं को लेकर चौंकाने वाला खुलासा किया है। यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ ऑस्ट्रेलिया की इस स्टडी में पाया गया कि पैरासिटामोल और आइबूप्रोफेन जैसी आम दवाएं एंटीबायोटिक दवाओं के असर को कम कर सकती हैं। ये दोनों ही टेबलेट बैक्टीरिया को ज्यादा मजबूत बना सकती हैं। इसका सीधा मतलब है कि ये दवाएं एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस को बढ़ावा देती हैं, जो इस वक्त पूरी दुनिया के लिए सबसे बड़ा स्वास्थ्य संकट बन चुका है। रिपोर्ट के अनुसार, जब इन दवाओं का सेवन एंटीबायोटिक दवाओं के साथ किया जाता है, तो बैक्टीरिया में म्यूटेशन होने लगता है। यह बदलाव उन्हें न केवल सिप्रोफ्लोक्सासिन बल्कि कई अन्य एंटीबायोटिक्स के खिलाफ भी ज्यादा रजिस्टेंट बना देता है। इसके कारण इलाज असरदार नहीं हो पाता और संक्रमण बढ़ता जाता है। यह खतरा खासतौर पर बुजुर्गों में ज्यादा पाया गया है, क्योंकि वे अक्सर दर्द की दवाएं, ब्लड प्रेशर की दवाएं, नींद की गोलियां और एंटीबायोटिक्स एक साथ लेते हैं। इससे बैक्टीरिया तेजी से रजिस्टेंस विकसित कर लेते हैं और इलाज बेअसर हो जाता है। इस स्टडी में कुल नौ आम दवाओं का असर परखा गया, जिनमें पैरासिटामोल, आइबूप्रोफेन, गठिया और डायबिटीज की दवाएं, ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने वाली गोलियां और नींद की दवाएं शामिल थीं।
नतीजे चौंकाने वाले रहे, क्योंकि इनमें से कई दवाओं ने बैक्टीरिया को एंटीबायोटिक दवाओं से बचने में मदद की। इसका मतलब यह है कि एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस की समस्या सिर्फ एंटीबायोटिक्स के गलत और जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल की वजह से नहीं है, बल्कि आम दर्दनिवारक और दूसरी दवाएं भी इस समस्या को गंभीर बना रही हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पहले ही चेतावनी दी है कि एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस दुनिया के लिए एक बड़ा खतरा है। 2019 में ही करीब 12.70 लाख लोगों की मौत इसी वजह से हुई थी। वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर यही स्थिति बनी रही तो आने वाले दशकों में कई खतरनाक बीमारियों का इलाज नामुमकिन हो सकता है।
यही वजह है कि इस रिसर्च को बेहद अहम माना जा रहा है और विशेषज्ञ लोगों को चेतावनी दे रहे हैं कि दवाओं का इस्तेमाल सोच-समझकर और डॉक्टर की सलाह पर ही किया जाए। बुजुर्गों के मामले में तो यह सतर्कता और भी जरूरी है, क्योंकि एक साथ कई दवाओं का सेवन उन्हें ज्यादा जोखिम में डाल सकता है। बता दें कि पैरासिटामोल और आइबूप्रोफेन जैसी दवाएं दुनियाभर में सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाती हैं। बुखार या हल्के दर्द में लोग अक्सर इन्हें बिना डॉक्टर की सलाह के ओवर द काउंटर खरीदकर खा लेते हैं।
पाकिस्तान में ईशनिंदा कानूनों के चलते सताए जा रहे ईसाई, झेल रहे प्रताड़ना
2 Sep, 2025 12:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इस्लामाबाद। पाकिस्तान के ईशनिंदा कानूनों के तहत वहां रह रहे क्रिश्चियन को निशाना बनाया जा रहा है। पाकिस्तान में कुल आबादी का केवल 1.8 फीसदी ही क्रिश्चियन हैं। फिर भी ईशनिंदा के करीब एक-चौथाई आरोप उन पर लगे हैं। ईशनिंदा कानूनों में मौत की सजा का प्रावधान है। जून 2024 में 73 साल के पाकिस्तानी ईसाई लज़ार को कुरआन जलाने के आरोपों में बेरहमी से पीट-पीटकर मार डाला गया था। वर्ल्ड वॉच सूची के मुताबिक पाकिस्तान में लड़कियां और महिलाएं अपहरण, जबरन विवाह, यौन हिंसा और धर्मांतरण का शिकार हो रही हैं। 2023 में जरानवाला में ईसाई घरों और इमारतों पर हुए हमलों से डर का माहौल बढ़ा है।
रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान की संस्कृति में परिवार के किसी सदस्य का इस्लाम छोड़ना शर्मनाक माना जाता है और इसलिए धर्म परिवर्तन करने वालों को अपने ही परिवार और समुदाय से तीखे विरोध का सामना करना पड़ता है, जिसमें तथाकथित ऑनर किलिंग भी शामिल है। रिपोर्ट में बताया गया है कि पाकिस्तान में ईसाई संस्थागत भेदभाव से पीड़ित हैं। उनसे गंदे काम कराए जाते हैं। मुसलमानों को कार्यस्थल पर ईसाई पुरुषों को वरिष्ठ पदों पर स्वीकार न करने के लिए उकसाया जाता है।
रिपोर्ट के मुताबिक मुस्लिम पृष्ठभूमि के ईसाइयों को उत्पीड़न का दंश झेलना पड़ता है, एक तो कट्टरपंथी इस्लामी समूहों से जो उन्हें धर्मत्यागी मानते हैं और दूसरा उन परिवारों, दोस्तों और पड़ोसियों से जो धर्मांतरण को परिवार और समुदाय के साथ विश्वासघात का शर्मनाक कृत्य मानते हैं। ज्यादातर ईसाई पंजाब में रहते हैं और ये पाकिस्तान का वह क्षेत्र है, जहां उत्पीड़न और भेदभाव की घटनाएं सबसे ज्यादा सामने आती हैं।
अमेरिका-इजराइल ने किया गाजा के लिए प्लान तैयार, 20 लाख लोग होंगे बाहर
2 Sep, 2025 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गाजा। अमेरिकी प्रशासन और इजरायल ने मिलकर गाजा को लेकर प्लान तैयार किया है। ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों के पास मौजूद दस्तावेजों के हवाले से एक रिपोर्ट छापी है। इसके मुताबिक फिलिस्तीन के बड़े हिस्से गाजा से 20 लाख लोगों को अस्थायी तौर पर हटाया जाएगा। इन लोगों को मिस्र, कतर जैसे देशों में शिफ्ट किया जाएगा या फिर फिलिस्तीन के ही किसी एक क्षेत्र में रखा जाएगा। इन लोगों को तब तक गाजा से बाहर रहना होगा, जब तक इलाके का पुनर्विकास नहीं हो जाता। इस दौरान गाजा छोड़ने वाले फिलिस्तीनियों को डिजिटल टोकन दिए जाएंगे। इसके अलावा कैश पेमेंट किया जाएगा।
गाजा से अस्थायी तौर पर हटाए लोग जहां रहेंगे, वहां खानपान की व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा रेंट सब्सिडी भी दी जाएगी। गाजा के लोगों को हटाने के प्लान को वॉलेंट्री डिपार्टर कहा जा रहा है, जिसके तहत वे दूसरे देश में जाएंगे या फिर तय स्थान पर रहेंगे। गाजा के लोगों को कुल 4 साल तक बाहर रखने के प्लान पर काम चल रहा है। इसके तहत उन्हें चार साल की रेंट सब्सिडी मिलेगी और एक साल तक खाने की व्यवस्था की जाएगी।
अमेरिकी प्लान के मुताबिक गाजा को टूरिस्ट डेस्टिनेशन में तब्दील करने का प्लान है। यहां गाजा ट्रंप रेवरा बनाया जाएगा। इसके अलावा एआई से लैस स्मार्ट सिटी बनाए जाएंगे। स्कूल, अस्पताल, इंडस्ट्री, ग्रीन स्पेस जैसी व्यवस्था रहेगी। यहां बड़े पैमाने पर अपार्टमेंट्स बनाने की तैयारी है, जिनके फ्लैट गाजा के उन लोगों को दिए जाएंगे, जिन्हें बाहर भेजा जाएगा। वे अपनी जमीन के बदले मिले डिजिटल टोकन का इस्तेमाल करते हुए फ्लैट हासिल कर सकेंगे। अब तक इस मामले पर अमेरिकी विदेश मंत्रालय की ओर से कोई अधिकारी पुष्टि नहीं कही गई है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक गाजा को लेकर बने इस प्लान में अमेरिकी फंड की जरूरत नहीं होगी बल्कि इससे लाभ ही होगा। इस प्रोजेक्ट के तहत दुनिया भर से निवेश को आमंत्रित किया जाएगा। यहां इलेक्ट्रिक वीकल प्लांट्स से लेकर डेटा सेंटर्स तक तैयार किए जाएंगे। इसके अलावा हाईराइज इमारतें होंगी। इस प्रोजेक्ट में कुल 100 अरब डॉलर के शुरुआती निवेश की तैयारी है। इसके बाद यह प्रोजेक्ट खुद ही फंड जनरेट करेगा।
एक साथ तीन महाशक्तियों को देख बौखलाए ट्रंप के सलाहकार बोले- ये ठीक बात नहीं…
2 Sep, 2025 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। भारत पर टैरिफ लगाकर अमेरिका ने अब तक की सबसे बड़ी गलती की है। इससे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की छवि वैश्विक स्तर पर खराब हुई है। भारत चीन और रुस के एक साथ आने से ट्रंप की नींद उड़ गई है। उनके व्यापार सलाहकार पीटर नवारो ने एक बार फिर अपनी खीझ निकाली है। नवारो ने भारत-रूस व्यापारिक संबंधों की आलोचना की है और शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ मुलाकात को शर्मनाक बताया है।
उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री मोदी को शी जिनपिंग और पुतिन के साथ घुलते-मिलते देखना शर्मनाक है। मुझे समझ नहीं आ रहा कि वह क्या सोच रहे हैं। हमें उम्मीद है कि उन्हें यह समझ आ जाएगा कि उन्हें रूस के साथ नहीं, बल्कि हमारे साथ रहना चाहिए। इससे पहले नवारो ने भारत को शुल्कों का महाराजा कहा था और दावा किया था कि नई दिल्ली अमेरिका पर सबसे ज्यादा टैरिफ लगाता रहा है। उन्होंने कहा था, भारत के साथ दोतरफ़ा समस्या है...25 फीसदी समस्या अनुचित व्यापार के कारण पारस्परिक है और बाकी पच्चीस फीसदी समस्या इसलिए है क्योंकि भारत रूस से तेल खरीद रहा है।
यूक्रेन-रूस युद्ध को ‘मोदी का युद्ध’बताने वाले पीटर नवारो ने एक दिन पहले भारत के खिलाफ जहर उगलते हुए भारतीय ब्राह्मणों पर रूस से तेल खरीद में मुनाफाखोरी करने का आरोप लगाया था। एक इंटरव्यू में नवारो ने ट्रम्प प्रशासन द्वारा भारतीय सामानों पर लगाए गए 50 फीसदी टैरिफ को सही ठहराते हुए चेतावनी दी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की व्लादिमीर पुतिन और शी जिनपिंग से निकटता वैश्विक व्यवस्था को अस्थिर कर रही है। बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने जब से भारत पर अतिरिक्त 25 फीसदी का टैरिफ लगाया है, तभी से ही वाइट हाउस के व्यापार सलाहकार नवारो भारत पर हमला करते रहे हैं। वह मॉस्को के साथ नई दिल्ली के कच्चे तेल के व्यापार की लगातार आलोचना करते रहे हैं। उनका आरोप है कि भारत रूसी तेल खरीदकर यूक्रेन के खिलाफ जंग में मॉस्को को फंडिंग कर रहा है। नवारो ने कई मौकों पर कहा है कि तेल खरीद से होने वाली आय रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के यूक्रेन के खिलाफ युद्ध को वित्त पोषित कर रही है।
भारत पर गुस्साए ट्रंप अब दवाओं पर 200 प्रतिशत टैरिफ लगाने की बना रहे योजना
2 Sep, 2025 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। भारत पर दबाव नहीं बना अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बुरी तरह खिसिया गए हैं। उन्होंने आयातित दवाओं पर 200 प्रतिशत या उससे भी अधिक का टैरिफ लगाने की योजना बनाई है। उनका उद्देश्य दवा निर्माण को विदेशों से वापस अमेरिका लाना है। हालांकि, उन्होंने कंपनियों को तैयारी का समय देने के लिए इन टैरिफों को लागू करने में लगभग एक से डेढ़ साल की देरी की बात भी कही है। ट्रंप का मुख्य टार्गेट फार्मा कंपनियों को दबाव डालकर अपना प्रोडक्शनअमेरिका में स्थानांतरित करने के लिए मजबूर करना है। उनका तर्क है कि अमेरिका में बनी दवाओं पर कोई टैरिफ नहीं लगेगा। पहले से ही, कुछ बड़ी कंपनियों जैसे जॉनसन एंड जॉनसन और रोश ने अमेरिका में निवेश बढ़ाने की घोषणा की है।
खबरों के मुताबिक भारत, जो दुनिया में जेनेरिक दवाओं का एक प्रमुख निर्यातक है, विशेष रूप से असुरक्षित है। अगर अमेरिका में टैरिफ लगता है, तो भारतीय दवा निर्माताओं को नुकसान हो सकता है और उनके निर्यात पर असर पड़ सकता है। हालांकि, कुछ रिपोर्ट्स से पता चलता है कि ट्रंप प्रशासन चीन से आयातित दवाओं और उनके कच्चे माल पर बहुत फोकस कर रहा है। विशेषज्ञों और उद्योग समूहों का मानना है कि इतने ऊंचे टैरिफ का उल्टा असर हो सकता है। इससे दवाओं की कीमतों में वृद्धि होने और दवाओं की कमी पैदा होने का खतरा है। खासकर जेनेरिक (सामान्य) दवाएं, जो पहले से ही कम मुनाफे पर बिकती हैं, सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकती हैं। कुछ विश्लेषकों का अनुमान है कि 25 प्रतिशत टैरिफ भी अमेरिकी दवा की लागत को लगभग 51 अरब डॉलर बढ़ा सकता है। कई दवा कंपनियों और उद्योग समूहों ने इस कदम की आलोचना की है। उनका कहना है कि टैरिफ से आर एंड डी और इनोवेशन पर बुरा असर पड़ेगा। दिलचस्प बात यह है कि कुछ निवेशकों और विश्लेषकों को संदेह है कि ट्रंप वास्तव में 200 प्रतिशत जैसी ऊंची दर लागू करेंगे। उनका मानना है कि यह केवल निगोशिएशन की एक रणनीति हो सकती है।
अतिक्रमण हटाने के लिए अधिकारियों को 3 दिन की डेडलाइन
1 Sep, 2025 12:47 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पंचकूला। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के हरियाणा शहर स्वच्छता अभियान के तहत पंचकूला मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (PMDA) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के. मकरंद पांडुरंग ने शहर का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने ढांचागत व्यवस्थाओं का जायजा लिया और अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए।
सीईओ ने सेक्टर 11 और 14 की पार्किंग में गंदगी मिलने पर नगर निगम को तुरंत सफाई करने के आदेश दिए। उन्होंने कहा कि सभी सेक्टरों की पार्किंग की नियमित सफाई सुनिश्चित की जाए ताकि शहर की छवि खराब न हो। साथ ही, पॉलीथिन पर सख्ती से प्रतिबंध लागू करने और नागरिकों को कपड़े के थैले इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित करने के निर्देश दिए।
निरीक्षण के प्रमुख बिंदु
अतिक्रमण हटाना: सड़क किनारे सभी अतिक्रमण 3 दिन में हटाने के आदेश। , ट्रैफिक सुधार: माजरी चौक पर रेड लाइट लगाने और स्लिप रोड चौड़ा करने पर जोर।
बागवानी: शहीद संदीप सांकला चौक पर पेड़ों की छंटाई के निर्देश। औद्योगिक क्षेत्र: वर्षा जल निकासी लाइनें, रोड-गलियों की सफाई और टूटी सड़कों की तुरंत मरम्मत के आदेश। चंडीगढ़ सीमा तक सड़क: गड्ढे भरने, सड़क चौड़ीकरण और ट्रैफिक जाम का समाधान निकालने पर बल।
एचएसवीपी प्लॉट: सेक्टर-16 और 17 के खाली प्लॉटों से झाड़ियां तीन दिन में हटाने के निर्देश। लेबर चौक: तुरंत मरम्मत और डिवाइडिंग ग्रिल की खाली जगह भरने के आदेश। पार्क: निरझर वाटिका और आम बाग (मैंगो गार्डन) पार्क में सफाई, लाइटिंग और घास कटाई सुनिश्चित करने को कहा।
सीईओ ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री के स्वच्छता अभियान को सफल बनाने के लिए सभी अधिकारी निष्ठा से काम करें। उन्होंने कहा कि निरीक्षण के दौरान दिए गए सभी निर्देशों की प्रगति की समीक्षा अगले सप्ताह की जाएगी। निरीक्षण के दौरान अतिरिक्त उपायुक्त निशा यादव, डीसीपी सृष्टि गुप्ता, पीएमडीए व नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
पुतिन ने चीन से अमेरिका को चेताया, बोले- भेदभावपूर्ण प्रतिबंध नहीं सहेंगे
1 Sep, 2025 12:38 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग। रसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन रविवार को शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए चीन के तियानजिन पहुंचे। उन्होंने कहा कि रूस और चीन ने ब्रिक्स देशों के सामाजिक-आर्थिक विकास में बाधा डालने वाले भेदभावपूर्ण प्रतिबंधों के खिलाफ एकजुट है। माना जा रहा है कि पुतिन ने चीन से अमेरिका को सीधा संदेश दिया है कि भेदभावपूर्ण प्रतिबंधों के खिलाफ वे एकजुट हैं। पुतिन ने यह बातें चीनी मीडिया से बातचीत में कही।
उन्होंने कहा कि रूस और चीन महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाने पर ध्यान दे रहे हैं और वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए ब्रिक्स की क्षमता को मजबूत करने में जुटे हैं। पुतिन ने कहा कि मॉस्को और बीजिंग ब्रिक्स सदस्यों और वैश्विक स्तर पर सामाजिक-आर्थिक विकास में बाधा डालने वाले भेदभावपूर्ण प्रतिबंधों के खिलाफ साझा रुख अपनाते हैं। पुतिन ने कहा कि रूस और चीन अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक में सुधार का समर्थन करते हैं।
पुतिन ने यह टिप्पणी तब की, जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ब्रिक्स देशों पर 10 प्रतिशत शुल्क लगाने की धमकी दे रहे हैं। ब्रिक्स एक अंतर-सरकारी संगठन है, जिसमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं। सऊदी अरब, ईरान, इथियोपिया, मिस्र, अर्जेंटीना और संयुक्त अरब अमीरात इसके नए सदस्य हैं। पुतिन ने उम्मीद जाहिर की कि तियानजिन में होने वाला एससीओ शिखर सम्मेलन 10-सदस्यीय संगठन को नई गति देगा, समकालीन चुनौतियों और खतरों का सामना करने की इसकी क्षमता को मजबूत करेगा, तथा यूरेशियाई क्षेत्र में एकजुटता को बढ़ाएगा। उन्होंने कहा कि इससे अधिक न्यायसंगत बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था को आकार देने में मदद मिलेगी।
अफगानिस्तान में जोरदार भूकंप का कहर, मृतकों की संख्या 250 पार, सैकड़ों घायल
1 Sep, 2025 11:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
काबुल। बीती रात अफगानिस्तान के कई इलाकों में भीषण भूकंप आया है। इससे कई घरों और भवनों को नुकसान हुआ है। इस मलबे में दबकर 250 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई जबकि 500 से ज्यादा घायल हुए है। ये शुरुआती आंकड़ा है, मृतकों की संख्या बढ़ सकती है। रिपोर्ट्स के अनुसार इस प्राकृतिक आपदा में कम से कम 250 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 500 से अधिक लोग घायल हुए हैं।
रिक्टर स्कैल पर भूकंप की तीव्रता 6.0 मापी गई और इसका केंद्र जमीन से केवल 8 किलोमीटर की गहराई पर था। इसके कारण भारी तबाही की आशंका जताई जा रही है. सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों में मलबे में दबे घरों और घायलों को बाहर निकालने की कोशिश करते लोगों की तस्वीरें देखी जा सकती हैं। एक तस्वीर में एक व्यक्ति मलबे के बीच रोते हुए नजर आ रहा है, जो इस दुखद घटना की गंभीरता को दर्शाता है। आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से जारी बयान में बताया गया कि भूकंप का केंद्र कुनर प्रांत के हिंदू कुश क्षेत्र में था, जिसने नूरगल, सूकी, वतपुर, मानोगी और चपे-दरे जैसे दूरदराज के इलाकों को बुरी तरह प्रभावित किया है। स्थानीय अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है, क्योंकि कई गांवों तक राहत और बचाव कार्यों की पहुंच अभी तक नहीं हो पाई है। विशेषज्ञों का मानना है कि हिंदू कुश क्षेत्र का भूकृतिकीय रूप से सक्रिय होना इस तरह की आपदाओं का कारण है जहां यूरेशियन और भारतीय टेक्टोनिक प्लेट्स आपस में टकराती हैं। मौजूदा स्थिति में चिकित्सा शिविरों की स्थापना और भोजन-पानी की आपूर्ति की मांग बढ़ गई है, क्योंकि कई परिवार बेघर हो गए हैं। अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने इस संकट पर चिंता जताई है और राहत सामग्री भेजने की तैयारी शुरू कर दी है। संयुक्त राष्ट्र के आपदा प्रबंधन विभाग ने कहा कि वे प्रभावित क्षेत्रों का आकलन करने के लिए जल्द ही अपनी टीम भेजेंगे। तालिबान सरकार के पास सीमित संसाधन हैं और वे संयुक्त राष्ट्र और अन्य मानवीय संगठनों से तत्काल मदद की उम्मीद कर रहे हैं। इस भूकंप ने अफगानिस्तान की पहले से ही कमजोर अर्थव्यवस्था और स्वास्थ्य ढांचे को और चुनौती दी है। पिछले कुछ वर्षों में आए भूकंपों ने पहले भी इस देश को नुकसान पहुंचाया है, लेकिन 2023 का 6.3 मैग्निट्यूड का भूकंप सबसे घातक माना जाता है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सहायता की मांग
स्थानीय निवासियों का कहना है कि भूकंप के बाद कई झोपड़ियों और पक्के मकानों में दरारें आ गईं, जबकि कुछ पूरी तरह ढह गए। तालिबान प्रशासन के प्रवक्ता ने बताया कि राहत और बचाव कार्य जारी हैं, लेकिन पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और टूटी सड़कों के कारण टीमों को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हेलिकॉप्टर और चिकित्सा सहायता मुहैया कराने की अपील की है, क्योंकि कई प्रभावित क्षेत्रों तक सड़क मार्ग से पहुंचना असंभव हो गया है।
गृह युद्ध जैसे हालात से जूझ रहा ईरान, सरकार ने हिजाब कानून किया स्थगित
1 Sep, 2025 11:16 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेहरान। ईरान में हिजाब को लेकर बनाए गए कानून को फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। इसकी वजह ये है कि सरकार को लगा कि कहीं कोई हालात बिगड़ न जाएं इसलिए सावधानी बरती जा रही है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने कहा कि उन्होंने देश में सख्त हिजाब कानून लागू किया होता, तो समाज के भीतर एक युद्ध जैसी स्थिति पैदा हो सकती थी। उन्होंने माना कि यह कानून लागू करना समाज को टकराव की ओर धकेल देता और हालात राष्ट्रीय विवाद में बदल जाते। राष्ट्रपति ने साफ कहा कि हिजाब पर उनका निजी विश्वास है। उन्होंने कहा कि “मेरे परिवार की महिलाएं हिजाब पहनती हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि जो महिला हिजाब नहीं पहनती, वह बुरी इंसान है।
2022 में महसा अमीनी की पुलिस हिरासत में मौत के बाद ईरान भर में भड़के प्रदर्शनों ने हिजाब कानून को लेकर गहरी बहस छेड़ दी थी। लाखों महिलाएं और युवा सड़कों पर उतरे थे। इसी माहौल को देखते हुए 2023 में संसद द्वारा पास किए गए कठोर हिजाब कानून को राष्ट्रपति ने लागू करने से रोक दिया। नए कानून के तहत बिना हिजाब दिखने वाली महिलाओं पर भारी जुर्माना और जेल की सजा का प्रावधान था। इतना ही नहीं, उन दुकानदारों या संस्थानों पर भी कार्रवाई होनी थी जो बिना हिजाब महिलाओं को सेवा देते। लेकिन राष्ट्रपति पेजेश्कियान का मानना है कि इस कानून को लागू करने से समाज में फूट और अशांति और बढ़ जाती।
अपने इंटरव्यू में राष्ट्रपति ने यह भी दावा किया कि विरोधी ताकतें, खासकर इजरायल, उम्मीद कर रहे थे कि हिजाब कानून लागू होते ही लोग तीसरे दिन सड़कों पर आ जाएंगे और शासन को गिरा देंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ और हालात नियंत्रण में रहे। राष्ट्रपति के बयान के बाद ईरान में एक बार फिर महिलाओं की स्वतंत्रता और परंपरा को लेकर बहस तेज हो गई है। अंतरराष्ट्रीय जगत भी इस पर नजर गड़ाए हुए है कि क्या ईरान भविष्य में कानून को फिर से लागू करेगा या महिला अधिकारों को प्राथमिकता देगा।
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