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ट्रम्प अगले महीने जा सकते हैं साउथ कोरिया
8 Sep, 2025 10:49 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अगले महीने (31अक्टूबर-1 नवंबर) साउथ कोरिया में होने वाले एशिया पेसिफिक इकोनॉमिक कोऑपरेशन शिखर सम्मेलन में जा सकते हैं। यहां उनके चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग-उन से मुलाकात करने की अटकलें लगाई जा रही है। ट्रम्प और उनके सलाहकार पीटर नवारो इस सम्मेलन के लिए साउथ कोरिया जाने की तैयारी कर रहे हैं।
यह खबर ऐसे समय में आई जब ट्रम्प ने हाल ही में शंघाई सहयोग संगठन समिट में शी जिनपिंग के भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मेजबानी पर नाराजगी जताई थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रम्प और शी के बीच एपेक के दौरान द्विपक्षीय बैठक भी हो सकती है, लेकिन अभी कोई पक्का प्लान नहीं बना है। पिछले महीने एक फोन कॉल में शी ने ट्रम्प और उनकी पत्नी को चीन आने का न्योता दिया गया था, जिसका जवाब ट्रम्प ने भी अमेरिका आने के न्योते के साथ दिया, हालांकि कोई तारीख तय नहीं हुई। व्हाइट हाउस अधिकारी ने बताया कि दक्षिण कोरिया की यात्रा पर चर्चा हो रही है, जिसमें आर्थिक सहयोग पर ध्यान होगा। साथ ही व्यापार, रक्षा और नागरिक परमाणु सहयोग पर भी बातचीत होगी।’ दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने पिछले हफ्ते ट्रम्प से मुलाकात के दौरान उन्हें एपेक समिट में आमंत्रित किया था।
रूस ने बनाई कैंसर की वैक्सीन
8 Sep, 2025 08:47 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
मास्को। रूस ने कैंसर के खिलाफ लड़ाई में एक नई सफलता हासिल की है। वहां की फेडरल मेडिकल एंड बायोलॉजिकल एजेंसी (एफएमबीए) ने कैंसर की वैक्सीन तैयार की है। एफएमबीडी प्रमुख वेरोनिका स्क्वोत्र्सोवा ने कहा कि रूसी एंटरोमिक्स कैंसर वैक्सीन अब इस्तेमाल के लिए तैयार है। एमआरएनए-बेस्ड इस वैक्सीन ने सभी प्रीक्लिनिकल टेस्ट को सफलतापूर्वक पार कर लिया है जिससे इसकी सुरक्षा और प्रभावशीलता साबित हो गई है। इस टीके का प्रारंभिक लक्ष्य कोलोरेक्टल कैंसर (कोलन कैंसर) होगा।
रिपोर्ट के अनुसार, रूस के कैंसर वैक्सीन ने शानदार प्रदर्शन किया है और एफएमबीएकी प्रमुख वेरोनिका स्क्वोत्र्सोवा ने ईस्टर्न इकोनॉमिक फोरम में इसकी घोषणा की है। स्कवोत्र्सोवा ने कहा कि यह शोध कई वर्षों तक चला जिसमें से पिछले तीन साल सिर्फ मैंडेटरी प्रीक्लिनिकल स्टडीज को ही समर्पित थे। वैक्सीन अब इस्तेमाल के लिए तैयार है। हम आधिकारिक स्वीकृति की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रीक्लिनिकल ट्रायल्स टीके की सुरक्षा, बार-बार इस्तेमाल के बावजूद इसकी प्रभावशीलता की पुष्टि करते हैं। शोधकर्ताओं ने इस दौरान ट्यूमर के आकार में कमी और ट्यूमर के विकास में कमी देखी। इसके अलावा अध्ययनों ने टीके के कारण मरीज की जीवित रहने की दर में वृद्धि का भी संकेत दिया।
कई और प्रकार के कैंसर के टीकों पर भी काम जारी
इस टीके का शुरुआती टार्गेट कोलोरेक्टल कैंसर होगा। इसके अलावा ग्लियोब्लास्टोमा (ब्रेन कैंसर) और विशिष्ट प्रकार के मेलेनोमा जिनमें ऑक्यूलर मेलेनोमा (एक प्रकार का आंख का कैंसर) के लिए टीके विकसित करने में उम्मीद बांधने वाली प्रगति हुई है जो वर्तमान में अपनी एंडवांस स्टेज पर हैं।
एलन मस्क बन सकते हैं दुनिया के पहले खरबपति
7 Sep, 2025 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। टेस्ला के सीईओ एलन मस्क जल्द ही दुनिया के पहले ट्रिलियनेयर (खरबपति) बन सकते हैं। दरअसल, कंपनी के बोर्ड ने एक नया पे पैकेज पेश किया है, जिसके तहत मस्क को करीब 1 ट्रिलियन डॉलर का मुआवजा मिल सकता है। नए वेतन पैकेज में प्रस्ताव दिया गया है कि अगर कंपनी के सभी लक्ष्य पूरे हो जाते हैं, तो मस्क को कंपनी के कुल 12 प्रतिशत शेयर मिलेंगे।
इस पैकेज के तहत मस्क को 423.7 मिलियन टेस्ला शेयर मिल सकते हैं, जिनकी मौजूदा कीमत करीब 143.5 अरब डॉलर है। लेकिन ये तभी मिलेगा जब टेस्ला की मार्केट वैल्यू बढक़र 8.5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगी। अभी कंपनी की वैल्यू को इस स्तर तक ले जाने के लिए बड़े उछाल की जरूरत है। फिलहाल, मस्क के पास 410 मिलियन टेस्ला शेयर हैं, जिनकी कीमत करीब 139 अरब डॉलर है।
अमेरिका का डैमेज कंट्रोल: ट्रंप ने कहा- हमेशा मोदी का दोस्त रहूंगा; पीएम मोदी का दोस्ताना अंदाज, कहा- उनके विचारों की सराहना करता हूं
7 Sep, 2025 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
भारत के साथ रिश्ते रीसेट करने को तैयार अमेरिका
वाशिंगटन/नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए उन्हें अपना दोस्त और एक महान प्रधानमंत्री कहा. ट्रंप के इस बयान पर पीएम मोदी ने पहली बार प्रतिक्रिया दी है. प्रधानमंत्री ने एक्स पर एक पोस्ट करते हुए कहा कि वे राष्ट्रपति ट्रंप की भावनाओं और संबंधों के सकारात्मक आकलन की गहराई से सराहना करते हैं और पूरी तरह उसका प्रत्युत्तर देते हैंय उन्होंने लिखा कि भारत और अमेरिका के बीच एक सकारात्मक और भविष्य उन्मुख व्यापक और वैश्विक रणनीतिक साझेदारी है.
भारत ने अमेरिका के साथ जारी विवाद के दौरान बेहद संतुलित और परिपक्व रुख अपनाया. ट्रंप के विवादित और कभी-कभी कठोर बयानों पर भारत ने तीखी प्रतिक्रिया नहीं दी, बल्कि मौन और तर्क के आधार पर अपनी स्थिति स्पष्ट की. प्रधानमंत्री मोदी ने भी संवेदनशीलता और संयम दिखाते हुए बयान दिए, जो तथ्यात्मक और शांतिपूर्ण रहे. भारत का रुख यह रहा कि अमेरिका के साथ उसकी रणनीतिक साझेदारी अहम है, लेकिन अपनी स्वतंत्र विदेश नीति और रणनीतिक स्वायत्तता को बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है. मर्यादा की लकीर बनाए रखना भारत की नीति रही है, यानी रिश्ते गहरे हों लेकिन सीमाओं और आपसी सम्मान का ध्यान भी रखा जाए.
चीन-अमेरिका संतुलन और भारत की स्थिति
वैश्विक परिदृश्य में भारत चीन और अमेरिका दोनों के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहा है. चीन चाहता है कि भारत उसके साथ जुडक़र क्षेत्रीय प्रभाव बढ़ाए, जबकि अमेरिका भारत को मजबूत साझेदार के रूप में देखता है. भारत ने अमेरिका के दबावों को मानने के बावजूद अपने कृषि, डेयरी और मत्स्य पालन क्षेत्रों में कोई समझौता नहीं किया, ताकि किसानों के हितों की रक्षा हो सके.
रिश्तों को मजबूत बनाने की पहल
हाल ही में अमेरिकी विदेश मंत्री और अमेरिकी दूतावास ने सितंबर महीने को भारत-अमेरिका संबंधों को प्रगाढ़ बनाने का माह घोषित किया और लोगों से इस पहल में समर्थन का आह्वान किया. यह कदम दोनों देशों के बीच संपर्क बढ़ाने और सकारात्मक माहौल बनाने की कोशिश के रूप में देखा गया. ट्रंप के बयानों में अक्सर उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं. कभी उन्होंने भारत की तारीफ की, तो कभी आलोचना की, जिससे रिश्तों में तनाव पैदा हुआ, लेकिन भारत ने इन उतार-चढ़ावों से प्रभावित होने के बजाय अपनी रणनीति में स्थिरता बनाए रखी.
बैकफुट पर ट्रंप
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प शुक्रवार को भारत के खिलाफ दिए गए अपने बयान पर करीब 12 घंटों के अंदर ही बैकफुट पर चले गए। उन्होंने शाम 6-7 बजे के बीच व्हाइट हाउस में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक सवाल पर कहा कि मैं हमेशा मोदी का दोस्त रहूंगा। भारत के साथ संबंधों को रीसेट करने के लिए हमेशा तैयार हूं। इससे पहले शुक्रवार सुबह करीब 6 बजे उन्होंने सोशल मीडिया ट्रुथ पर लिखा था, ऐसा लगता है कि हमने भारत और रूस को चीन के हाथों खो दिया है। उम्मीद है उनका भविष्य अच्छा होगा। वहीं, शनिवार को पीएम मोदी ने ट्रम्प के बयान को शेयर करते हुए एक्स पर लिखा- राष्ट्रपति ट्रम्प की भावनाओं और हमारे संबंधों को लेकर उनके विचारों की तहे दिल से सराहना करता हूं और उनका पूर्ण समर्थन करता हूं। उन्होंने कहा- भारत-अमेरिका के बीच एक पॉजिटिव और दूरदर्शी रणनीतिक साझेदारी है। प्रेस ब्रीफिंग में ट्रम्प ने भारत और दूसरे देशों के साथ चल रही व्यापार बातचीत को अच्छा बताया, लेकिन यूरोपीय संघ के गूगल पर 3.5 अरब डॉलर का जुर्माना लगाने पर नाराजगी जताई। इसके अलावा उन्होंने साफ किया कि वे भारत के रूसी तेल खरीदने के कारण निराश हैं। उन्होंने कहा कि हमने भारत पर इसके लिए 50 प्रतिशत का भारी टैरिफ लगाया है।
मोदी अमेरिका के साथ साझेदारी को खास महत्व देते हैं
पीएम मोदी की ट्रम्प को लेकर दिए प्रतिक्रिया पर विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने कहा कि पीएम मोदी अमेरिका के साथ हमारी साझेदारी को बहुत महत्व देते हैं। जहां तक राष्ट्रपति ट्रम्प का सवाल है, उनके (पीएम मोदी) ट्रम्प के साथ हमेशा से बहुत अच्छे व्यक्तिगत रिश्ते रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि फिलहाल मुद्दा यह है कि हम अमेरिका के साथ जुड़े हुए हैं। जयशंकर ने इससे ज्यादा कुछ भी कहने से इनकार किया।
भारत-नेपाल के बीच लिपुलेख विवाद में नहीं पड़ेगा चीन
7 Sep, 2025 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग/काठमांडू। चीन ने भारत और नेपाल के बीच लिपुलेख विवाद में पडऩे से इनकार कर दिया है। हाल ही में ने नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने चीन दौरे के दौरान राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सामने लिपुलेख मुद्दा उठाया था। ओली ने कहा कि यह इलाका नेपाल का हिस्सा है और भारत-चीन के बीच हुए हालिया सहमति पर नेपाल ने आपत्ति दर्ज कराई है। ओली 31 अगस्त से 1 सितंबर तक स्ष्टह्र समिट में शामिल होने चीन पहुंचे थे।
नेपाल के विदेश सचिव अमृत बहादुर राय के मुताबिक जिनपिंग ने कहा कि लिपुलेख एक पारंपरिक दर्रा है। चीन नेपाल के दावे का सम्मान करता है, लेकिन यह विवाद भारत और नेपाल का द्विपक्षीय मसला है। इसे दोनों देशों को आपसी बातचीत से सुलझाना चाहिए। दरअसल, 19 अगस्त को भारत और चीन ने लिपुलेख पास को ट्रेड रूट के तौर पर फिर से खोलने का फैसला किया था। इस पर नेपाल ने विरोध जताया। नेपाल 2020 में नया नक्शा जारी कर लिपुलेख, लिंपियाधुरा और कालापानी को अपना बता चुका है, जबकि भारत इन्हें लंबे समय से अपने हिस्से में मानता है।
इस महीने भारत दौरे पर आएंगे नेपाल पीएम
नेपाल के पीएम ओली 16 सितंबर को भारत दौरे पर आएंगे। इससे पहले भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री रविवार, 17 अगस्त को काठमांडू पहुंचे थे। मिस्री ने प्रधानमंत्री ओली, विदेश मंत्री अर्जु राणा देउबा और विदेश सचिव अमृत बहादुर राय से मुलाकात की थी। बैठक में भारत-नेपाल संबंधों को मजबूत करने, कनेक्टिविटी, व्यापार और विकास सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। ओली के भारत दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच कुछ अहम समझौते होने की संभावना है। पिछले साल जुलाई में ओली के प्रधानमंत्री बनने के बाद से उनका भारत दौरा लगातार टलता रहा है।
मशहूर फैशन डिजाइनर अरमानी का निधन
7 Sep, 2025 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
इटली। इटली के मशहूर फैशन डिजाइनर और अरमानी ग्रुप के फाउंडर जियोर्जियो अरमानी का निधन हो गया। वो 91 साल के थे। अरमानी इटली को ग्लोबल फैशन में अग्रणी बनाने और हॉलीवुड सितारों के लिए कपड़े डिजाइन करने के लिए मशहूर थे। उन्होंने करीब 50 साल तक फैशन की दुनिया में अपना दबदबा बनाए रखा और अरमानी को दुनिया के सबसे मशहूर लग्जरी ब्रांड्स में से एक बनाया। जियोर्जियो अरमानी अपने पिता यूगो अरमानी और मां मारिया रेमॉन्डी की दूसरी संतान थे। वो अपने बड़े भाई सर्जिओ और छोटी बहन रोसेना के साथ पियासेंजा में पले बढ़े। अरमानी के पिता यूगो एक शिपिंग कंपनी में अकाउंटेंट थे।
ट्रंप का बयान: युद्ध रोकने का वादा पूरा नहीं कर सका
6 Sep, 2025 04:52 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। रूस और यूक्रेन के बीच तीन साल से ज्यादा समय से संघर्ष चल रहा है और अभी भी इसके थमने के फिलहाल कोई आसार नहीं है। कारण है कि पिछले दिनों इस संघर्ष को खत्म करने के सभी प्रयास विफल होते दिख रहे है। ऐसे में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को पहली बार सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि वह अपने एक बड़े चुनावी वादे को पूरा नहीं कर सके। ट्रंप ने माना कि वह रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध को रोकने में नाकाम रहे हैं, जिसे उन्होंने अपने कार्यकाल का सबसे कठिन संघर्ष बताया। ट्रंप ने ये बात व्हाइट हाउस के नए नवीनीकरण के बाद आयोजित पहले आधिकारिक डिनर पर कही। इस दौरान ट्रंप ने ये भी दावा किया कि उन्होंने दुनिया के कई पुराने युद्धों को खत्म किया है, लेकिन रूस-यूक्रेन युद्ध को रोकना सबसे बड़ी चुनौती बन गया। इस डिनर में अमेरिकी कांग्रेस के सदस्य और अन्य वरिष्ठ मेहमान मौजूद थे।
पुतिन के साथ अच्छी बातचीत, लेकिन
ट्रंप ने आगे कहा कि मैंने सोचा था रूस-यूक्रेन युद्ध को रोकना सबसे आसान होगा, क्योंकि मेरी रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से अच्छे संबध है। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। यह सबसे मुश्किल निकला। उन्होंने यह भी कहा कि उनके कार्यकाल में कि एक युद्ध जो 31 साल से चल रहा था, 2 घंटे में खत्म हुआ, दूसरा 35 साल, और तीसरा 37 साल पुराना संघर्ष भी उन्होंने सुलझा लिया।
चुनावी वादा 24 घंटे में युद्ध खत्म करने का दावा
बता दें कि ट्रंप ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान दावा किया था कि वे सत्ता में आते ही 24 घंटे में रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म कर देंगे, लेकिन अब तक कोई बड़ी सफलता नहीं मिली है। अगस्त में हुई अलास्का शिखर बैठक को उन्होंने उत्पादक बताया, लेकिन कोई औपचारिक समझौता नहीं हुआ।
ट्रंप का भरोसा बरकरार
इस दौरान ट्रंप ने ये भी कहा कि लोगों ने कहा था कि ये युद्ध खत्म नहीं हो सकते, लेकिन मैंने उन्हें खत्म किया। रूस और यूक्रेन वाला कठिन है, पर हम इसे भी हल करेंगे। गौरतलब है कि इससे पहले गुरुवार को ट्रंप ने अपने युद्ध रोकने के पहले के दावे में बदलाव करते हुए कहा कि उन्होंने सात नहीं, तीन युद्ध रोके हैं। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि ये कौन-कौन से युद्ध थे।
इमरान की बहन अलीमा खान जेल के बाहर हुईं हमले का शिकार, PTI ने जताया विरोध
6 Sep, 2025 01:20 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रावलपिंडी। पाकिस्तान की सियासत में एक बार फिर गर्माहट का माहौल है। कारण है कि शुक्रवार को पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंंत्री इमरान खान की बहन अलीमा खान पर अंडा फेंकने की घटना सामने आई। ये घटना तब हुई जब अलीमा रावलपिंडी की अदियाला जेल के बाहर पत्रकारों से बातचीत कर रही थीं। अडियाल जेल में पिछले दो साल से इमरान खान कैद हैं। अलीमा पर अंडे फेंकने की घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर लगातार वायरल हो रहा है। वीडियो में देखा जा सकता है कि अलीमा को अंडा मारा गया। इसके बाद इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के समर्थकों में भारी नाराजगी देखने को मिल रहा है। फलस्वरूप पीटीआई के कार्यकर्ताओं ने अंडा फेंकने के आरोप में दो महिलाओं को पकड़ लिया और उन्हें पुलिस के हवाले कर दिया।
मामले में क्या कहना है पुलिस का?
वहीं इस पूरे घटनाक्रम पर पुलिस की प्रतिक्रिया की बात करें तो रावलपिंडी पुलिस के बयान के अनुसार, गिरफ्तार की गई दोनों महिलाएं भी पीटीआई समर्थक हैं। वे ऑल-गवर्नमेंट एम्प्लॉइज ग्रैंड एलायंस के अन्य सदस्यों के साथ अपने मांगों को लेकर प्रदर्शन करने आई थीं। पुलिस का कहना है कि अलीमा से पूछे गए सवालों का जवाब न मिलने पर उन्होंने अंडा फेंका। दूसरी ओर पीटीआई ने इस घटना को शर्मनाक बताते हुए आरोप लगाया कि यह एक राजनीतिक साजिश थी। पार्टी का दावा है कि इन महिलाओं को जानबूझकर वहां भेजा गया और पुलिस ने उन्हें बच निकलने में मदद की।
इस घटनाक्रम से राजनीति में बयानबाजी तेज
इस घटना के बाद पाकिस्तान भर में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। ऐसे में बीएनपी मेंगल प्रमुख अख्तर मेंगल ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि दुश्मनी में भी महिलाओं की इज्जत होनी चाहिए। यह राजनीति का सबसे घटिया रूप है। फेडरल डेवेलपमेंट मिनिस्टर अहसन इकबाल ने कहा कि राजनीति विचारों की होनी चाहिए, न कि नफरत और हिंसा की। इसके साथ ही पीएमएल एन के नेता साद रफीक ने घटना को घिनौना और निंदनीय बताया।
कनाडा से खालिस्तानी समूहों को फंडिंग, भारत में राजनीतिक बदलाव की कोशिश
6 Sep, 2025 11:46 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ओटावा। कनाडा के वित्त विभाग ने एक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें खुलासा किया गया है कि खालिस्तानी चरमपंथी समूहों सहित कई आतंकवादी संगठनों को राजनीतिक रूप से प्रेरित हिंसा को बढ़ावा देने के लिए देश में वित्तीय मदद मिल रही है। कनाडा सरकार की '2025 के धन शोधन और आतंकवादी वित्तपोषण जोखिमों के आकलन' रिपोर्ट में बब्बर खालसा इंटरनेशनल और इंटरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन सहित कुछ खालिस्तानी समूहों को राजनीति से प्रेरित हिंसक उग्रवाद (पीएमवीई) की श्रेणी में रखा गया है। रिपोर्ट में खालिस्तानी समूहों और अन्य आतंकी संगठनों पर अपने उद्देश्यों की पूर्ति के लिए गैर-लाभकारी और धर्मार्थ क्षेत्रों सहित विभिन्न वित्तपोषण नेटवर्क का गलत फायदा उठाने का संदेह जताया गया है।
हमास और हिजबुल्ला को भी कनाडा में हो रही फंडिंग
रिपोर्ट में 'राजनीति से प्रेरित हिंसक उग्रवाद' को 'नई राजनीतिक व्यवस्था या मौजूदा व्यवस्था के भीतर नए ढांचे और मानदंड स्थापित करने के लिए हिंसा के उपयोग' के रूप में परिभाषित किया गया है। इन चरमपंथी समूहों को कनाडाई कानून के तहत आतंकवादी संगठन घोषित किया गया है, जिसमें हमास और हिजबुल्ला भी शामिल हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस तरह के उग्रवाद में धार्मिक तत्व शामिल हो सकते हैं, लेकिन यह मुख्य रूप से राजनीतिक आत्मनिर्णय या प्रतिनिधित्व से जुड़ा मामला है।
बैंकिंग, क्रिप्टोकरेंसी का गलत फायदा उठाते हैं आतंकी संगठन
रिपोर्ट में कहा गया है, 'खुफिया जांच एजेंसियों को पता चला है कि कनाडा में हमास, हिजबुल्ला और खालिस्तानी हिंसक चरमपंथी समूह बब्बर खालसा इंटरनेशनल और इंटरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन आदि संगठनों को वित्तीय मिल रही है।' पंजाब में एक स्वतंत्र राज्य स्थापित करने के लिए हिंसक तरीकों की वकालत करने वाले खालिस्तानी चरमपंथी तत्वों द्वारा खास तौर पर इसी तरह के माध्यमों से धन जुटाने का संदेह है। ये संगठन धन सेवा व्यवसाय (MSB), बैंकिंग क्षेत्र, क्रिप्टोकरेंसी, सरकारी प्रायोजन, और धर्मार्थ एवं गैर-लाभकारी संगठनों (NPO) का गलत फायदा उठाते हैं।
ट्रंप बोले मोदी संग दोस्ती अटूट, इंडो-यूएस रिलेशन बेहद मजबूत
6 Sep, 2025 10:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में अपने एक बयान में भारत और रूस को ‘चीन के हाथों खो देने’ की बात कही थी। जिसने वैश्विक कूटनीति में हलचल मचा दी थी, लेकिन अब उन्होंने अपने तेवर नरम करते हुए भारत के साथ रिश्तों को ‘खास’ बताया और कहा कि वह हमेशा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दोस्त रहेंगे। भारत द्वारा रूस से तेल खरीद और टैरिफ विवाद के बीच ट्रंप का यह बयान दोनों देशों के बीच तनाव को कम करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।
ट्रंप का बदला रुख
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत में भारत-अमेरिका संबंधों को ‘विशेष’ बताया। उन्होंने कहा- ‘मैं हमेशा नरेंद्र मोदी का दोस्त रहूंगा. वह एक शानदार प्रधानमंत्री हैं, भारत और अमेरिका के बीच एक खास रिश्ता है। चिंता की कोई बात नहीं है। यह बयान तब आया है जब हाल ही में ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा था कि ‘लगता है हमने भारत और रूस को चीन के हाथों खो दिया है।
टैरिफ विवाद पर तनाव
भारत और अमेरिका के बीच हाल के महीनों में रिश्ते तनावपूर्ण रहे हैं, खासकर तब से जब से अमेरिका ने भारत के रूस से तेल खरीदने के जवाब में 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाया, जिससे कुल टैरिफ 50% हो गया। ट्रंप ने इस मुद्दे पर अपनी निराशा जाहिर करते हुए कहा- ‘मुझे निराशा है कि भारत रूसी तेल खरीद रहा है। यह वैश्विक कूटनीति में गलत संकेत देता है। भारत ने इस टैरिफ को ‘अनुचित और अविवेकपूर्ण’ करार दिया और अपनी ऊर्जा जरूरतों और रणनीतिक स्वतंत्रता का बचाव किया है।
SCO समिट और ट्रंप की चिंता
ट्रंप का यह बयान चीन के तियानजिन में हाल ही में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) समिट के बाद आया, जहां पीएम मोदी, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच गर्मजोशी भरी मुलाकात हुई। ट्रंप ने इस मुलाकात की एक तस्वीर अपने ‘ट्रुथ सोशल’ पोस्ट में साझा करते हुए लिखा- ‘लगता है हमने भारत और रूस को सबसे गहरे, अंधकारमय चीन के हाथों खो दिया है। इस पोस्ट ने अमेरिका की उस चिंता को उजागर किया कि भारत और रूस के बढ़ते रणनीतिक संबंध चीन के साथ करीबी की ओर इशारा कर सकते हैं।
भारत की कूटनीतिक रणनीति
भारत ने हमेशा अपनी रणनीतिक स्वतंत्रता को प्राथमिकता दी है। रूस से तेल खरीद और SCO जैसे मंचों पर चीन के साथ बातचीत भारत की उस नीति का हिस्सा है, जिसमें वह किसी एक देश के प्रति पूरी तरह झुकने से बचता है। भारत का यह ‘संतुलन का खेल’ ट्रंप प्रशासन को खटक रहा है, क्योंकि अमेरिका चाहता है कि भारत पूरी तरह उसके खेमे में रहे. फिर भी, भारत ने साफ कर दिया है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखेगा।
क्या रिश्ते फिर से पटरी पर आएंगे?
ट्रंप के ताजा बयान को भारत-अमेरिका संबंधों को सुधारने की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा हैं। हालांकि, टैरिफ विवाद और रूस के साथ भारत के संबंधों पर अमेरिका की आपत्तियां अभी भी बरकरार हैं। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत चल रही है, लेकिन कृषि और डेरी जैसे क्षेत्रों में मतभेदों के कारण इसे अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है।
अमेरिका में ट्रंप की आलोचना
ट्रंप के बयानों ने अमेरिका में भी बहस छेड़ दी है. रिपब्लिकन नेता निकी हेली और पूर्व NSA जेक सुलिवन जैसे लोगों ने ट्रंप प्रशासन को भारत जैसे मजबूत सहयोगी के साथ रिश्ते खराब करने के लिए आलोचना की है। भारत, रूस और चीन के बीच बढ़ती निकटता अमेरिका के लिए रणनीतिक चुनौती पेश कर सकती है।
मुश्किलों के बीच अफगानियों पर टूटा पहाड़, फिर आया 5.6 तीव्रता का भूकंप
5 Sep, 2025 11:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
काबुल। अफगानिस्तान में एक बार फिर 5.6 तीव्रता का भूकंप आया। इसका केंद्र जलालाबाद से 14 किलोमीटर पूर्व में था। यह जानकारी अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने दी। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक गुरुवार को आए भूकंप का केंद्र 34.72 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 70.79 डिग्री पूर्वी देशांतर पर 10 किलोमीटर की गहराई में था। जीएफजेड जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंसेज ने भूकंप की तीव्रता 6.2 मापी। यह ताजा भूकंप हाल के दिनों में नांगरहार और पड़ोसी कुनार, लघमन और नूरिस्तान प्रांतों में आए भूकंपों की एक सीरीज के बाद आया है। सबसे विनाशकारी, 6.0 तीव्रता का भूकंप रविवार देर रात आया था, जिससे व्यापक विनाश और जान-माल का भारी नुकसान हुआ।
आधिकारिक रिपोर्टों में 2,200 से ज्यादा लोगों की मौत और 3,600 से ज्यादा लोगों के घायल होने की पुष्टि हुई है। अभी भी बचाव अभियान जारी है। ताजा भूकंप के बाद इलाके को हाई अलर्ट पर रखा गया है। तालिबान सरकार के मुख्य प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा था कि मरने वालों की संख्या कम से कम 800 हो गई है और 2,500 से ज्यादा घायल हुए हैं। ज्यादातर मौतें कुनार में हुई हैं। अफगानिस्तान में इमारतें आमतौर पर कम ऊंचाई वाली होती हैं। इनमें से ज्यादातर कंक्रीट और ईंटों से बनी होती हैं, ग्रामीण और बाहरी इलाकों में घर मिट्टी की ईंटों और लकड़ी से बने होते हैं।
संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त फिलिपो ग्रांडी ने कहा कि भूकंप ने अफगानिस्तान में मौजूदा मानवीय चुनौतियों को और बढ़ा दिया है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय दानदाताओं से राहत कार्यों में सहयोग करने का आग्रह किया। उन्होंने एक्स पर लिखा- इससे सूखे और पड़ोसी देशों से लाखों अफगानों की जबरन वापसी जैसी अन्य चुनौतियों में मौत और विनाश भी शामिल है। उम्मीद है कि दान करने वाले राहत कार्यों में सहयोग करने में संकोच नहीं करेंगे।
बता दें इसके पहले 31 अगस्त को आए भूकंप से अफगानिस्तान में भी काफी तबाही मची थी। अमेरिकी भूगर्भीय सर्वेक्षण के मुताबिक यह 6.0 तीव्रता का भूकंप 31 अगस्त की रात को आठ किलोमीटर की गहराई में आया था। प्रभावित क्षेत्र भूकंपीय दृष्टि से बेहद संवेदनशील है। यहां भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेट्स मिलती हैं। पहाड़ी भूभाग भूस्खलन की आशंका को और बढ़ा देता है, जिससे बचाव कार्य मुश्किल हो जाता है।शिरडी)। श्रद्धा और धैर्य का महामंत्र देने वाले शिरडी के साईं बाबा के दर्शन के लिए हर साल देश-विदेश से करोड़ों भक्त शिरडी आते हैं। इस अवसर पर भक्त साईं बाबा को उदारतापूर्वक दान देते हैं। शिरडी के साईं बाबा को 2008 में हैदराबाद के आदिनारायण रेड्डी ने एक स्वर्ण सिंहासन भेंट किया था। तब से, इसे साईं बाबा को मिला सबसे बड़ा दान माना जाता था। लेकिन 17 साल बाद, आज एक बार फिर, दुबई के एक साईं भक्त ने 1 किलो 623 ग्राम 600 मिली ग्राम वजन के दो सुनहरे ओम साईं राम पत्र भेंट किए हैं। इसका मूल्य 1 करोड़ 58 लाख रुपये है और इस भक्त ने गुप्त दान किया है और साईं बाबा संस्थान से अपना नाम उजागर न करने का अनुरोध किया है। संस्थान से जुड़े सूत्र बताते हैं कि दुबई का ये भक्त, जिन्होंने साईं बाबा को सोना चढ़ाया है, साईं बाबा की समाधि के दर्शन के लिए हर महीने शिरडी आते हैं। वे आरती में भी शामिल होते हैं। साईं दर्शन के बाद, वे हमेशा संस्थान को लगभग 1 लाख रुपये का दान देते हैं। वे कई वर्षों से साईं बाबा को सोने की कोई वस्तु दान करना चाहते थे। आखिरकार, गुरुवार के पावन दिन, उन्होंने दो सुनहरे ओम साईं राम पत्र अर्पित करके अपनी इच्छा पूरी की। दुबई के इस भक्त द्वारा दिए गए स्वर्ण दान को साईं बाबा संस्थान ने समाधि मंदिर के दोनों द्वारों पर स्थापित किया है जहाँ से भक्त दर्शन के बाद बाहर निकलते हैं। इससे भक्त मंदिर से बाहर निकलते समय ॐ साईं राम का जाप करते हैं। इस दान की जानकारी देते हुए मुख्य कार्यकारी अधिकारी गोरक्ष गाडिलकर ने कहा, यह भक्त चाहता था कि उसका दान गुप्त रहे। इसलिए, उसके नाम की घोषणा नहीं की गई है। इस अवसर पर संस्थान द्वारा भक्त को शॉल, साईं मूर्ति और उदी भेंटकर सम्मानित किया गया।
जब अमेरिकी राष्ट्रपति ने पूछा-बताओ जुकरबर्ग-कूक कितना निवेश कर रहे हो
5 Sep, 2025 09:08 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी पत्नी मेलेनिया ने व्हाइट हाउस में टेक इंडस्ट्री के दिग्गजों को डिनर पर बुलाया। ट्रंप ने इस दावत को हाई आईक्यू लोगों का जमावड़ा बताया। इस दावत में खाने के साथ-साथ पॉलिटिक्स, इकोनॉमी, निवेश और नौकरियों पर की गई। डिनर के दौरान ट्रंप ने टेक कंपनियों के मालिकों और सीईओ से पूछा कि वे अमेरिका में कितना निवेश कर रहे हैं। इस पर मेटा के मार्क जुकरबर्ग ने कहा कि वे अमेरिका में 600 बिलियन डॉलर निवेश करने जा रहे हैं।
इसके बाद ट्रंप एप्पल के सीईओ टिम कूक की ओर मुखातिब हुए। उन्होंने टिम कूक से पूछा और टिम...एप्पल अमेरिका में कितना पैसा लगाएगा? क्योंकि मुझे पता है कि यह बहुत ज़्यादा होने वाला है और आप जानते ही हैं, आप कहीं और थे, और अब आप सचमुच बड़े पैमाने पर वापस लौट रहे हैं। आप कितना पैसा लगाएंगे? इस पर कूक ने कहा कि वे अमेरिका में 600 बिलियन डॉलर निवेश करने जा रहे हैं।
ट्रंप ने आगे कहा कि 600 अरब डॉलर, बढ़िया है, बहुत सारी नौकरियां आएंगी। हमें ऐसा करके बहुत गर्व हो रहा है। आपका धन्यवाद, मैं इसकी सराहना करता हूं। ट्रंप की डिनर पार्टी में एलॉन मस्क को नहीं बुलाया था इसके बाद ट्रंप गूगल के सुंदर पिचाई से बात की और उनसे पूछा कि वे कितना पैसा लगा रहे हैं। पिचाई ने कहा कि हम 100 बिलियन डॉलर से काफी ऊपर है। अगले दो सालों में अमेरिका में यह 250 बिलियन डॉलर हो जाएगा। इस पर ट्रंप ने कहा कि बहुत बढ़िया। हमें आप पर गर्व है। शुक्रिया, ढेर सारी नौकरियां पैदा होंगी।
फिर अमेरिकी राष्ट्रपति ने माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्या नडेला से पूछा कि उनकी कंपनी कितना पैसा अमेरिका में लगा रही है। ट्रंप की पार्टी में सोशल कैपिटल के फाउंडर चमठ पालीहपतिया अपनी पत्नी के साथ अमेरिका के लिए अपना निवेश प्लान बताते हुए सत्या ने कहा कि इस साल हम संयुक्त राज्य अमेरिका में करीब 75 से 80 अरब डॉलर के करीब निवेश करेंगे। ट्रंप ने माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ को भी थैंक्यू कहा।
व्हाइट हाइस के स्टेट डाइनिंग रूम में जमी टेक दिग्गजों की इस बैठक का सबसे हैरान करने वाला पहलू था कि इस डिनर पार्टी से दुनिया के सबसे अमीर और टेक दुनिया के टायकून एलन मस्क का गायब रहना। कभी ट्रंप के खास मित्रों में शामिल रहने वाले मस्क और डोनाल्ड के संबंध अब बिगड़ गए हैं और दोनों एक दूसरे को फूटी आंख नहीं सुहा रहे हैं।
इस डिनर में ट्रंप ने मस्क के विरोधी और टेक दुनिया के दूसरे बड़े बिजनेसमैन ओपन एआई के सीईओ सैम अल्टमैन को बुलाया और उन्हें काफी तरजीह दी। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने व्हाइट हाउस में आयोजित टेक डिनर में भारतीय मूल के सीईओ का जलवा रहा। इनमें माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ के सत्या नडेला, गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई, माइक्रोन टेक्नोलॉजीज के सीईओ संजय मेहरोत्रा, टिबैको के चेयरमैन और पैलंटिर के सीटीओ श्याम शंकर शामिल थे।
वैश्विक दक्षिण के देशों को उनके हाल पर छोड़ देना ठीक नहीं: हरीश
5 Sep, 2025 07:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
जेनेवा। भारत ने यूक्रेन संघर्ष के परिणामों, जिनमें ईंधन की कीमतें भी शामिल हैं, पर खेद जताते हुए कहा कि वैश्विक दक्षिण के देशों को उनके हाल पर ही छोड़ दिया गया है। साथ ही भारत ने इस बात पर जोर दिया कि कूटनीतिक प्रयासों से युद्ध खत्म होने और स्थायी शांति स्थापित होने की संभावना है। भारत यूक्रेन की स्थिति को लेकर चिंतित है। पर्वतनेनी हरीश ने गुरुवार को कहा था कि हमारा मानना है कि निर्दोष लोगों की जान जाना अस्वीकार्य है और युद्ध के मैदान में कोई समाधान नहीं निकाला जा सकता। भारत ने यूक्रेन संघर्ष के ‘परोक्ष प्रभावों’ खासतौर पर ईंधन की कीमतों पर चिंता व्यक्त की और कहा है कि ‘ग्लोबल साउथ’ के देशों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि, राजदूत पर्वतनेनी हरीश ने कहा कि भारत यूक्रेन की स्थिति को लेकर चिंतित है।
संयुक्त राष्ट्र महासभा में यूक्रेन के कब्जे वाले क्षेत्रों की स्थिति विषय पर आयोजित चर्चा में हरीश ने कहा कि भारत को इस बात की चिंता है कि संघर्ष के परिणामस्वरूप ईंधन की कीमतें और अन्य चीजें पूरे विश्व को प्रभावित कर रहे हैं, विशेष रूप से ग्लोबल साउथ के देशों को, जिन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया गया है। हमारा मानना है कि उनकी आवाज सुनी जाए और उनकी वैध चिंताओं का समुचित समाधान किया जाए।
‘ग्लोबल साउथ’ से तात्पर्य उन देशों से है जिन्हें अक्सर विकासशील, कम विकसित अथवा अविकसित के रूप में जाना जाता है और ये मुख्य रूप से अफ्रीका, एशिया और लातिन अमेरिका में स्थित है। भारत ने इस बात पर जोर दिया कि स्थायी शांति के लिए सभी हितधारकों की पूर्ण भागीदारी और प्रतिबद्धता अहम है।
उन्होंने आगे कहा कि भारत ने पिछले महीने अलास्का में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच हुई शिखर बैठक का समर्थन किया और उसमें हुई प्रगति की सराहना की। हरीश ने कहा कि हम यूक्रेन के राष्ट्रपति और यूरोपीय नेताओं के साथ बातचीत करने के अमेरिकी राष्ट्रपति के कूटनीतिक प्रयासों पर भी ध्यान देते हैं। उन्होंने कहा कि हमारा मानना है कि ये सभी कूटनीतिक प्रयास यूक्रेन में जारी संघर्ष को खत्म कराने और स्थायी शांति की संभावनाओं के लिए अहम हैं। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी मौजूदा स्थिति पर पुतिन, जेलेंस्की और यूरोपीय नेतृत्व के संपर्क में हैं। उन्होंने कहा कि यूक्रेन संघर्ष का शीघ्र अंत सभी के हित में है, साथ ही उन्होंने मोदी के इस संदेश का जिक्र किया कि ‘‘यह युद्ध का युग नहीं है।’’
संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत के बयान से कुछ घंटे पहले पीएम मोदी ने यूरोपीय संघ के शीर्ष नेताओं एंटोनियो कोस्टा और उर्सुला वॉन डेर लेयेन से बातचीत की। पीएम मोदी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि आपसी हितों के मुद्दों और यूक्रेन में संघर्ष को जल्द खत्म कराने के प्रयासों पर विचार विमर्श किया। इससे पहले गुरुवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी यूक्रेन के विदेश मंत्री से बात की और द्विपक्षीय सहयोग के साथ-साथ यूक्रेन संघर्ष पर चर्चा की। जयशंकर ने कहा कि भारत इस संघर्ष के शीघ्र अंत और स्थायी शांति का समर्थन करता है।
चीन से भिड़ने के लिए अमेरिका ने भारतवंशी ही चुना, अमित क्षत्रिय बने नासा प्रमुख?
5 Sep, 2025 05:11 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन।अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने भारतीय मूल के वैज्ञानिक अमित क्षत्रिय को नया एसोसिएट एडमिनिस्ट्रेटर बनाया है। यह नासा की सिविल सर्विस की सबसे बड़ी और अहम पोस्ट मानी जाती है। इस पद पर रहते हुए अमित सीधे एजेंसी के कामकाज की जिम्मेदारी संभालेंगे और नासा के चीफ एडमिनिस्ट्रेटर को सलाह देंगे। अमित करीब दो दशक से नासा में काम कर रहे हैं। अभी तक वो ‘मून टू मार्स प्रोग्राम‘ के डिप्टी इनचार्ज थे। अब नई जिम्मेदारी में वे नासा के 10 सेंटर्स और मिशन डायरेक्टर्स की टीम को लीड करेंगे। साथ ही एजेंसी के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर की भूमिका भी निभाएंगे। अमित का जन्म अमेरिका के विस्कॉन्सिन में भारतीय प्रवासी परिवार में हुआ। उनके पिता इंजीनियर और मां केमिस्ट थीं।
नासा के मिशन कंट्रोल फ्लाइट डायरेक्टर बनने का मौका अब तक सिर्फ 100 लोगों को मिला है और अमित उनमें से एक हैं। उन्होंने इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन की 50वीं एक्सपेडिशन के दौरान लीड फ्लाइट डायरेक्टर के तौर पर बेहतरीन काम किया। इसके लिए उन्हें ‘आउटस्टैंडिंग लीडरशिप मेडल‘ से सम्मानित किया गया था।नासा का कहना है कि अमित की अगुवाई में मिशन को और मजबूती मिलेगी। इस मिशन के जरिए इंसान को दोबारा चांद पर भेजने और फिर मंगल पर पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। नासा के एडमिनिस्ट्रेटर सीन पी। डफी ने कहा, अमित के पास अनुभव, ईमानदारी और दूरदर्शिता है। उनके नेतृत्व में नासा नए कीर्तिमान बनाएगा।
रूसी पनडुब्बी अमेरिका पर परमाणु मिसाइल दागने ही वाली थी, अधिकारी ने रोका विनाश
5 Sep, 2025 12:02 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वॉशिंगटन। आज से तकरीबन 63 साल पहले ऐसा मौका आया था, जब दुनिया तीसरे विश्व युद्ध के मुहाने पर खड़ी हो गई थी। उस वक्त पूर्व सोवियत संघ के एक दूरदर्शी नेवी ऑफिसर ने संभावित थर्ड वर्ल्ड वॉर को अपनी समझदारी से किसी तरह टाल दिया था। उस सोवियत ऑफिसर का नाम वासिली अर्खिपोव था। यह घटना साल 1962 के क्यूबा मिसाइल संकट से जुड़ी है।
दरअसल, साल 1962 के क्यूबा मिसाइल संकट के दौरान एक सोवियत नौसेना अधिकारी वासिली अर्खिपोव (1926–1998) ने ऐसा फैसला लिया, जिसने दुनिया को संभावित तीसरे विश्व युद्ध से बचा लिया था। अमेरिका के सुरक्षा बल उस समय सोवियत पनडुब्बी बी-59 को सतह पर लाने के लिए लगातार अटैक कर रहे थे। सोवियत पनडुब्बी अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में थी और कई दिनों से मॉस्को से संपर्क टूट चुका था। इस कारण पनडुब्बी के क्रू मेंबर्स (चालक दल) को यह संदेह हो गया था कि शायद विश्व युद्ध पहले ही शुरू हो चुका है।
तनाव लगातार बढ़ रहा था। पनडुब्बी की बैटरियां लगभग खत्म हो चुकी थीं, एयर कंडीशनिंग बंद थी और अंदर का तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला गया था। जहाज में ऑक्सीजन की भारी कमी थी। कई नाविक कार्बन डाइऑक्साइड की वजह से हुई घुटन के चलते बेहोश हो गए थे। इस माहौल में पनडुब्बी के कप्तान ने परमाणु टॉरपीडो दागने का निर्णय ले लिया। सामान्य परिस्थितियों में हमले की अनुमति केवल कप्तान और राजनीतिक अधिकारी की मंजूरी से मिल जाती थी, लेकिन संयोग से उस यात्रा पर फ्लोटिला कमांडर वासिली अर्खिपोव भी मौजूद थे। उनके उच्च पद के कारण इस बार तीन अधिकारियों की सहमति जरूरी थी।
निर्णायक क्षण पर अर्खिपोव ने हमले का विरोध किया। कप्तान और राजनीतिक अधिकारी के साथ लंबी बहस के बाद उन्होंने उन्हें मनाया कि पनडुब्बी को सतह पर लाया जाए और मॉस्को से संपर्क स्थापित किया जाए। इस दृढ़ रुख ने परमाणु हमले को रोका और पूरी दुनिया को एक विनाशकारी परमाणु युद्ध से बचा लिया। इतिहासकार और विशेषज्ञ आज भी इस घटना को उस क्षण के रूप में याद करते हैं, जब एक अकेले अधिकारी का विवेक और साहस मानव सभ्यता को महाविनाश से बचा गया। यदि यह अटैक हुआ होता तो तीसरे विश्व युद्ध का खतरा गहरा जाता।
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