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किसी परीकथा जैसा लगता है इंग्लैंड का शहर डार्टमाउथ
29 Aug, 2025 11:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
डार्टमाउथ । अगर आप किसी जादुई और अनोखी जगह का अनुभव लेना चाहते हैं, तो इंग्लैंड के डेवोन में बसा डार्टमाउथ आपके लिए बेहतरीन विकल्प है। यह शहर किसी परीकथा जैसा लगता है, जहां हर गली, हर घर और हर नजारा किसी सपनों की दुनिया का हिस्सा प्रतीत होता है। डार्टमाउथ की सबसे बड़ी खूबसूरती इसकी गलियों और घरों में छिपी है। यहां की पत्थरों से बनी घुमावदार गलियां रंग-बिरंगे कॉटेज से सजी हुई हैं। हर कदम पर ऐसा लगता है मानो आप किसी पुराने अंग्रेजी किस्से का हिस्सा बन गए हों। यहां का डार्टमाउथ ओल्ड मार्केट, जो 1828 से चलता आ रहा है, आज भी लोगों को आकर्षित करता है। हर शुक्रवार यहां स्थानीय कारीगर और किसान अपने उत्पाद बेचते हैं। वहीं, हर महीने के दूसरे शनिवार को लगने वाले गुड फूड और आर्टिसन मार्केट में डार्टमूर शहद और ताजी ब्रेड जैसे व्यंजन मिलते हैं। खाने के शौकीनों के लिए यहां एंबैंकमेंट बिस्ट्रो और रॉकफिश जैसे रेस्टोरेंट भी हैं, जो अपने स्वादिष्ट फिश एंड चिप्स के लिए मशहूर हैं। इतिहास प्रेमियों के लिए भी यह शहर किसी खजाने से कम नहीं है। यहां 600 साल पुराना डार्टमाउथ कैसल स्थित है, जिसके गन टॉवर और घुमावदार रास्ते 100 साल के युद्ध की कहानियां सुनाते हैं।
शहर का गौरव बढ़ाने वाला ब्रिटानिया रॉयल नेवल कॉलेज भी यहां है, जहां अब भी रॉयल नेवी के अधिकारियों को प्रशिक्षित किया जाता है। पर्यटक यहां का दो घंटे का गाइडेड टूर लेकर इसके 150 साल पुराने इतिहास को करीब से जान सकते हैं। वहीं, बेयार्ड्स कोव फ़ोर्ट नामक किला, जो 1522 में बना था, मुफ्त में घूमने के लिए खुला रहता है। हालांकि डार्टमाउथ समुद्र किनारे नहीं बसा, लेकिन यहां के बीच किसी भी तटीय इलाके से कम खूबसूरत नहीं हैं। कैसल कोव और सुगरी कोव परिवार के साथ समय बिताने के लिए आदर्श स्थान हैं। खासकर सुगरी कोव स्थानीय लोगों की पहली पसंद है, क्योंकि यह शांत और कम भीड़भाड़ वाला है। नदी पर बोट ट्रिप्स का आनंद यहां की यात्रा का सबसे यादगार हिस्सा होता है।
साफ पानी में तैरती मछलियों को देखते हुए ‘द फिज बोट’ पर सफर करना हर पर्यटक को मंत्रमुग्ध कर देता है। अगस्त के आखिर में यहां का नजारा और भी खास हो जाता है। डार्टमाउथ रॉयल रेगाटा के दौरान नौकायन, लाइव संगीत और आतिशबाजी से शहर का हर कोना जगमगा उठता है। इसी दौरान दुनिया के आखिरी समुद्री पैडल स्टीमर ‘वेवरली’ को भी देखने का मौका मिलता है। यहां तक पहुंचना बेहद आसान है। किंग्सवेयर तक ट्रेन से आकर छोटी पैसेंजर फेरी द्वारा डार्टमाउथ पहुंचा जा सकता है। गाड़ी से आने वाले यात्री किंग्सवेयर से कार फेरी ले सकते हैं।
रहस्यमयी कबीले का हिस्सा बनी अमेरिका से गुम हुई एक महिला
29 Aug, 2025 10:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन । अमेरिका के टेक्सास की रहने वाली गुम हुई एक महिला अजीबोगरीब कहानी में बदल गई। ये महिला लगभग पांच हजार किलोमीटर दूर स्कॉटलैंड के जंगलों में मिली और वहां वह खुद को एक रहस्यमय कबीले का हिस्सा बता रही थी। इस महिला का नाम कौरा टेलर है, जिसे अब लोग लेडी साफी के नाम से जानते हैं। वह “किंगडम ऑफ कुबाला” नामक एक छोटे से समूह के साथ रह रही है। इस समूह का नेतृत्व किंग अतेहेने नाम का व्यक्ति करता है, जो पहले कोफी ऑफेह नामक ओपेरा सिंगर था। उसके साथ उसकी पत्नी क्वीन नांदी और अब कौरा टेलर भी शामिल हैं। यह समूह खुद को “खोया हुआ हिब्रू कबीला” बताता है और दावा करता है कि वे स्कॉटलैंड और इंग्लैंड के मूल निवासी “ब्लैक जैकोबाइट्स” के वंशज हैं, जिन्हें 400 साल पहले इंग्लैंड की महारानी एलिज़ाबेथ प्रथम ने निष्कासित किया था। समूह का कहना है कि असली यरुशलम स्कॉटलैंड में है और किंग अतेहेने खुद को राजा दाऊद का वंशज मानते हैं।
महिला की गुमशुदगी पर परिवार परेशान था, लेकिन खुद कौरा टेलर ने सोशल मीडिया पर लिखा कि वह कभी लापता नहीं थीं, बल्कि अपने शोषणकारी परिवार से बचकर भागी थीं। उनका आरोप है कि बचपन से उनका यौन शोषण होता रहा और यही वजह है कि उन्होंने सबकुछ छोड़ने का फैसला किया। उन्होंने साफ लिखा कि “आप अपने शोषकों के लिए कभी गायब नहीं होते।” इस बयान के बाद मामला और रहस्यमय हो गया। यह समूह आधुनिक कानून और नियमों को मानने से इनकार करता है। उनका कहना है कि जमीन किसी सरकार की नहीं, बल्कि केवल सृष्टिकर्ता यहोवाह की है। वे खुले तंबुओं में रहते हैं, झरनों के पानी से स्नान करते हैं और ध्यान के जरिए धरती से जुड़ने की बात कहते हैं। उनका मानना है कि पुरानी दुनिया खत्म हो रही है और अब दूसरा निर्वासन शुरू हो चुका है।
इसी सोच के कारण वे खुद को बाकी समाज से अलग मानते हैं। लेकिन स्कॉटिश अधिकारियों के लिए यह समस्या बन गया। उन्हें सरकारी जमीन पर अवैध रूप से डेरा डालने के कारण हटाया गया, मगर उन्होंने निजी जमीन पर फिर से डेरा डाल लिया। काउंसिल का कहना है कि अब यह मामला भूमि मालिक के अधिकार क्षेत्र में है। इस बीच समूह ने आरोप लगाया कि उनके तंबू जलाए गए और उन्हें बार-बार प्रताड़ित किया जा रहा है। इस घटना ने स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है।
खगोलविदों ने ब्रह्मांड में खोजा दुर्लभ स्टार सिस्टम
29 Aug, 2025 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन । ब्रह्मांड में एक ऐसा अद्भुत और दुर्लभ स्टार सिस्टम खोजने का दावा खगोलविदों ने किया है जिसने सभी को हैरान कर दिया है। यह अनोखा सिस्टम पृथ्वी से करीब 82 प्रकाश-वर्ष दूर स्थित है। खगोलविदों ने इसे यूपीएम जे1040−3551 आबबाब नाम दिया गया है। यह पहला ऐसा ज्ञात क्वाड्रपल सिस्टम है जिसमें दो युवा रेड ड्वार्फ स्टार्स और उनके चारों ओर घूमते दो ब्राउन ड्वार्फ्स शामिल हैं। यह खोज न केवल खगोलशास्त्र की दिशा बदल सकती है, बल्कि ब्राउन ड्वार्फ्स यानी तथाकथित ‘फेल्ड स्टार्स’ के रहस्यों को सुलझाने में भी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। ब्राउन ड्वार्फ्स खगोल विज्ञान की दुनिया में सबसे रहस्यमयी पिंड माने जाते हैं। इन्हें असली तारा नहीं माना जाता क्योंकि इनमें इतना द्रव्यमान नहीं होता कि वे हाइड्रोजन को हीलियम में बदलने वाली न्यूक्लियर फ्यूज़न प्रक्रिया शुरू कर सकें। यही कारण है कि इन्हें अक्सर ‘नकली तारे’ या ‘अधूरे तारे’ कहा जाता है। वे उम्र के साथ धीरे-धीरे ठंडे होते जाते हैं, और वैज्ञानिक अब तक इनके सही विकासक्रम को समझने की कोशिश कर रहे हैं। इस सिस्टम में दो रेड ड्वार्फ्स और दो ब्राउन ड्वार्फ्स अलग-अलग जोड़ियों में हैं।
दोनों जोड़ियां अपने-अपने परिक्रमण चक्र में तो कुछ दशकों में घूम जाती हैं, लेकिन दोनों मिलकर एक बड़े कॉमन सेंटर ऑफ मास की परिक्रमा करने में एक लाख साल से भी अधिक समय लेती हैं। इसे एक ब्रह्मांडीय नृत्य की तरह समझा जा सकता है, जहां चार पिंड अद्भुत तालमेल में घूम रहे हों। ये तारे इतने धुंधले हैं कि नंगी आंखों से दिखाई नहीं देते। रेड ड्वार्फ्स को करीब 1.5 प्रकाश-वर्ष दूरी तक लाकर देखा जा सकता है, जबकि ब्राउन ड्वार्फ्स तो 1,000 गुना ज्यादा धुंधले होते हैं और केवल इन्फ्रारेड तकनीक में ही दिखाई देते हैं। इस खोज के पीछे ईएसए के गाइया स्पेसक्राफ्ट और नासा के वाइज मिशन की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिनकी मदद से वैज्ञानिकों ने इन सितारों की गति और स्थिति का पता लगाया।
इस खोज की सबसे खास बात यह है कि यह सिस्टम वैज्ञानिकों को ब्राउन ड्वार्फ्स की उम्र, द्रव्यमान, तापमान और संरचना का सटीक अध्ययन करने का मौका देगा। जहां रेड ड्वार्फ्स का तापमान लगभग 2,900 डिग्री सेल्सियस है, वहीं ब्राउन ड्वार्फ्स का तापमान 420 से 550 डिग्री सेल्सियस तक पाया गया है। पहली बार ऐसा सिस्टम मिला है जिसमें दो T-टाइप ब्राउन ड्वार्फ्स, दो रेड ड्वार्फ्स की परिक्रमा कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में हाई-रेजोल्यूशन इमेजिंग तकनीक से इन ब्राउन ड्वार्फ्स का द्रव्यमान और गति और भी सटीक रूप से मापी जा सकेगी।
लेक मिशिगन की गहराइयों में मिला 138 साल पुराना जहाज
29 Aug, 2025 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लंदन। हाल ही में, विस्कॉन्सिन के डोर काउंटी में लेक मिशिगन की गहराइयों में एक 138 साल पुराने जहाज का मलबा मिला है। इस खोज ने समुद्री इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। डोर काउंटी एडवेंचर राफ्टिंग के मालिक और टूर गाइड मैट ओल्सन को एक रहस्यमयी सैटेलाइट तस्वीर में पानी के भीतर एक अजीब धब्बा दिखाई दिया। उत्सुकता के कारण, उन्होंने अपनी नाव, सोनार और डाइविंग गियर के साथ रोउलीज बे के पास जांच शुरू की। जैसे ही उन्होंने गोता लगाया, उन्हें एक विशाल जहाज के अवशेष मिले।
यह जहाज करीब 130 फुट लंबा और दो मस्तूलों वाला था, जिसे मजबूत ओक की लकड़ी से बनाया गया था। यह जहाज 1887 में मिशिगन की ओर आयरन ओर लोड करने जा रहा था। यात्रा के दौरान, एक भीषण तूफान और घने कोहरे के कारण यह जहाज रास्ते से भटक गया और बार्कर शोल नामक चट्टान से टकराकर डूब गया।
अच्छी बात यह थी कि जहाज पर सवार सभी लोग सुरक्षित बचकर पास के स्पाइडर आइलैंड पर पहुंच गए थे। हालांकि, उस समय जहाज को खोजने के कई प्रयास किए गए, लेकिन वे सभी असफल रहे। उस समय इसकी कीमत लगभग 25 लाख अमेरिकी डॉलर थी।
मैट ओल्सन ने जब यह खोज विस्कॉन्सिन हिस्टोरिकल सोसायटी के समुद्री पुरातत्वविदों के साथ साझा की, तो इसकी पुष्टि हुई कि यह एक ऐतिहासिक जहाज है। समुद्री पुरातत्वविद् तमारा थॉमसेन ने भी इस खोज को बहुत महत्वपूर्ण बताया। यह मैट ओल्सन की तीसरी बड़ी खोज है। इससे पहले उन्होंने 2023 में सनसाइन और 2024 में ग्रे ईगल नामक जहाजों का मलबा भी खोजा था। यह खोज सिर्फ एक जहाज का पता लगाना नहीं है, बल्कि यह लेक मिशिगन की गहराइयों में दबे हुए इतिहास को फिर से दुनिया के सामने लाती है।
फ्लाइट में मारपीट का खामियाजा: यात्री ने ठोका 166 करोड़ का मुआवजा दावा
28 Aug, 2025 01:42 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। अमेरिका में डेल्टा एयरलाइंस की फ्लाइट पर एक यात्री के साथ कथित मारपीट के मामले में पीड़ित शख्स ने 166 करोड़ का मुआवजा मांगा है।यात्री मोहम्मद शिबली ने एयरलाइन पर 20 मिलियन डॉलर यानी करीब 166 करोड़ रुपये का मुआवजा मांगा है। उनका आरोप है कि फ्लाइट अटेंडेंट ने बीच सफर में उन्हें थप्पड़ जड़ दिया। 29 जुलाई को शिबली अपनी पत्नी और दो छोटे बच्चों (4 और 2 साल) के साथ अटलांटा से फ्रेज़्नो जा रहे थे। फ्लाइट में छोटा बेटा पानी के लिए रोने लगा। शिबली की पत्नी ने पानी मांगा तो अटेंडेंट ने देने से मना कर दिया।
शिबली खुद पीछे जाकर अटेंडेंट से पानी मांगने पहुंचे। वहां भी उन्हें सख्त लहजे में मना कर दिया गया। हालांकि बाद में दूसरे अटेंडेंट्स ने पानी दिया और माफी भी मांगी। लेकिन मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। कुछ देर बाद वही अटेंडेंट फिर से उनके पास पानी लेकर आई। शिबली ने मना कर दिया और कहा कि अब उन्हें अकेला छोड़ दिया जाए। इसी दौरान अटेंडेंट पास से गुजरी और कान में गाली बक दी। शिबली ने भी पलटकर शब्द कहे। तभी अचानक अटेंडेंट ने उनके चेहरे पर जोरदार थप्पड़ जड़ दिया और फिर बाकी यात्रियों को सर्व करना जारी रखा। शिबली का कहना है कि उन्होंने पूरी फ्लाइट में संयम रखा लेकिन खुद को अपमानित और असुरक्षित महसूस किया। उन्होंने कहा मैं लगभग चार घंटे उस फ्लाइट में फंसा रहा। बेटे के सामने मैं असहाय दिखा, पत्नी के सामने बेइज्जत हुआ। किसी को भी हवा में उड़ते विमान में शारीरिक हमला नहीं झेलना चाहिए।
वकील का कहना है, डेल्टा को अपने हर कर्मचारी को फिलिस्तीन पर शिक्षा और संवेदनशीलता ट्रेनिंग देनी चाहिए। मेरे क्लाइंट का दिन खराब किया गया है और अब इसकी कीमत डेल्टा को चुकानी होगी।” उधर, एयरलाइन ने बयान जारी कर कहा है कि आरोपी अटेंडेंट को सस्पेंड कर दिया गया है और मामले की जांच चल रही है। शिबली के वकील अली अवाद ने दावा किया कि मामला सिर्फ पानी का नहीं बल्कि नस्लीय भेदभाव का है। दरअसल, शिबली की पत्नी की टी-शर्ट पर फलस्तीन लिखा था। वकील ने इसे डेल्टा एयरलाइंस की पुरानी घटना से जोड़ा, जब अटेंडेंट्स ने फिलिस्तीनी झंडे वाले बैज लगाए थे और सोशल मीडिया पर उन्हें “हामास बैज” कहा गया था।
हरियाणा के नूंह में सामने आई धर्म परिवर्तन की घटना, 5 लोगों ने कबूला इस्लाम, जांच में जुटा प्रशासन
28 Aug, 2025 11:47 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नूंह: हरियाणा के नूंह जिले के नगीना में धर्मांतरण का सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां हिंदू समुदाय से जुड़े एक ही परिवार के पांच सदस्यों के इस्लाम धर्म कबूल करने का आरोप लगाया गया है। आरोप है कि उन्हें बहला-फुसलाकर और लालच देकर धर्मांतरण कराया गया, जबकि सोशल मीडिया पर वायरल हुए एफिडेविट के मुताबिक अपनी स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन किया है। परिजनों का आरोप है कि इसमें नगीना ब्लॉक के रहने वाले शहीद अटेरणा की मुख्य भूमिका है। आरोप है कि परिवार के पांचों लोग 25 अगस्त की शाम को ही घर छोड़कर निकले थे। उन्हें इस्लाम धर्म कबूल करने के बाद शहीद अटेरणा निवासी अटेरना के मकान में छिपा कर रखा हैं।
नगीना थाना पुलिस को दी शिकायत में मरोड़ा गांव के रहने वाले सतबीर ने कहा कि सोमवार से उनका भाई चेतराम (45), भाभी रेखा (39), बड़ा भतीजा शिवम (21), भतीजी सोनम और छोटा भतीजा अरुण (8) सोमवार से गायब है। उन्होंने कहा कि परिवार के पांचों सदस्यों को शहीद निवासी अटेरना, जिनका मकान बडकली चौक पर बना हुआ है, वहां पर छिपा कर रखा गया है और उन्हें तरह-तरह का लालच देकर उनके भाई और भतीजे का धर्मांतरण कराया है। इसके साथ ही सिराजुद्दीन निवासी राजाका सहित अन्य लोगों पर भी धर्मांतरण का आरोप लगाया है। सतबीर ने कहा कि चेतराम के साथ-साथ उनकी भाभी रेखा और भतीजे अरुण और भतीजी सोनम को भी कहीं गायब कर दिया है।
पुलिस ने थाने बुलाकर की पूछताछ
सतबीर ने बताया कि उनकी शिकायत पर पुलिस ने पांचों सदस्यों को पूछताछ के लिए थाना नगीना में बुला लिया। देर रात तक उनसे पूछताछ होती रही। उन्होंने कहा कि उनके पास कुछ एफिडेविट भी सोशल मीडिया के माध्यम से प्राप्त हुए हैं। जिसमें लिखा गया है कि उन्होंने अपनी स्वेच्छा से इस्लाम धर्म कबूल किया है। सूत्रों की माने तो थाने में भी परिवार के लोगों के सामने चेतराम और उसके परिवार के लोगों ने साफ तौर पर कहा था कि यह किसी की नहीं मानेंगे, उन्होंने अपनी मर्जी से इस्लाम धर्म कबूल किया है।
2 लोगों के खिलाफ केस दर्ज
नगीना थाना प्रभारी प्रवीण कुमार ने बताया कि पुलिस ने शिकायत के आधार पर शहीद अटेरना और सिराजुद्दीन राजाका के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। धर्मांतरण करने वाले सभी लोगों के कोर्ट में बयान करवाए हैं। बयानों में उन्होंने बताया है कि अपनी मर्जी से बिना किसी दबाव में इस्लाम धर्म कबूल किया है। परिवार के बयान करने के बाद उन्हें छोड़ दिया गया है।
मामले पर हुई पंचायत
इस मामले के विरोध बुधवार को नूंह के कबीर नाथ मंदिर में हिंदू समाज के लोगों की एक पंचायत का आयोजन किया गया। जिसमें जिला के गणमान्य लोगों ने बढ़ चढ़कर भाग लिया। इस दौरान सभी ने जिला में समय समय पर कराए जाने वाले धर्म परिवर्तन का विरोध किया। वक्ताओं ने बताया कि यह कोई पहला अवसर नहीं है बल्कि इससे पूर्व भी जिला के अल्पसंख्यक हिंदू समाज के लोगों को मुसलमान बनाया जा रहा है। यहां का बहुसंख्यक मुसलमान समाज उसका तमाशा देख रहा है। इस दौरान उन्होंने लव जिहाद, जबरन धर्मांतरण सहित हिंदूओं को प्रताडि़त करने के कई पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की।
गाजा में भूख से तड़पकर 10 की जान गई, पोप फ्रांसिस नाराज़, ट्रंप ने बुलाई मीटिंग
28 Aug, 2025 10:37 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
गाजा। इजरायल और हमास का संघर्ष लंबे समय से चल रहा है। फिलहाल शांति की कोई संभावना भी नहीं दिख रही है। इजरायल की ओर से गाजा पर लगातार हमले हो रहे हैं। पिछले 24 घंटे में भूख से 10 फिलिस्तीनियों की मौत हो गई है, जिनमें दो छोटे बच्चे भी शामिल हैं। इसके बाद पोप भी नाराज दिख रहे हैं।
गाजा से दिल दहला देने वाली तस्वीरें सामने आ रही हैं। हमास-नियंत्रित स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि बीते 24 घंटे में भूख से 10 फिलिस्तीनियों की मौत हो गई है, जिनमें दो छोटे बच्चे भी शामिल हैं। इस बीच पोप लियो चौदहवें ने युद्ध रोकने की अपील करते हुए कहा है कि इजरायल को क्षेत्र की आबादी पर ‘सामूहिक सजा’ देना बंद करना चाहिए। वेटिकन से जारी बयान में पोप ने कहा, ‘मैं स्थायी संघर्षविराम की अपील करता हूं। मानवीय सहायता को सुरक्षित रास्ता दिया जाए और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का पूरा सम्मान किया जाए।’ उन्होंने यह भी याद दिलाया कि अंतरराष्ट्रीय कानून सामूहिक सज़ा, अंधाधुंध बल प्रयोग और जबरन विस्थापन पर रोक लगाता है।
वहीं अब इस युद्ध को लेकर बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक अहम मीटिंग की है। पॉलिसी को लेकर हुई इस मीटिंग में पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर और पूर्व ट्रंप प्रशासन के मिडिल ईस्ट दूत जेरेड कुशनर भी शामिल हुए। व्हाइट हाउस के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक इसमें खाने-पीने के सामान की सप्लाई बढ़ाने, बंधक संकट, युद्ध के बाद की योजनाओं जैसेकई पहलुओं पर चर्चा हुई। हालांकि ट्रंप प्रशासन के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने एक दिन पहले कहा था कि यह बैठक गाजा के ‘युद्ध के बाद मैनेजमेंट की व्यापक योजना’ पर होगी, लेकिन व्हाइट हाउस ने इसे एक सामान्य नीति बैठक बताया, जैसी बैठकें ट्रंप और उनकी टीम अक्सर करती रहती हैं। कुशनर, जो ट्रंप की बेटी इवांका के पति भी हैं, पहले कार्यकाल में वेस्ट एशिया नीति के प्रमुख सलाहकार रहे थे। वहीं टोनी ब्लेयर लंबे समय से मध्य-पूर्व शांति प्रक्रिया से जुड़े हैं और हाल के महीनों से गाजा के लिए युद्ध के बाद का खाका तैयार करने में जुटे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ब्लेयर ने इस मुद्दे पर क्षेत्रीय नेताओं से भी बातचीत की है और वे पहले व्हाइट हाउस में स्टीव विटकॉफ से मिल चुके हैं। इस बीच, इजराइल के रणनीतिक मामलों के मंत्री रॉन डेरमर भी बुधवार को वॉशिंगटन पहुंचे और बैठक से ठीक पहले अमेरिकी अधिकारियों से मुलाकात की।
चीन का सख्त संदेश अमेरिका को: "परमाणु बातचीत में शामिल नहीं होंगे, दूर रखो हमें"
28 Aug, 2025 09:40 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग। अमेरिका और रूस के साथ परमाणु निरस्त्रीकरण की बातचीत में चीन शामिल नहीं होगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अपील को बीजिंग ने खारिज करते हुए कहा कि ये न तो सही है और न ही संभव। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा कि चीन और अमेरिका की परमाणु ताकत की तुलना ही नहीं हो सकती। उनके मुताबिक, जिन देशों के पास सबसे ज्यादा हथियार हैं, वही सबसे पहले जिम्मेदारी निभाएं। साफ है कि बीजिंग खुद को इस खेल से बाहर रखना चाहता है।
बीजिंग का कहना है कि उसकी पॉलिसी साफ है। वो बातचीत का विरोधी नहीं है, लेकिन अमेरिका और रूस की बराबरी में मेज पर बैठने को तैयार नहीं। चीन मानता है कि ये उस पर अनावश्यक दबाव डालने की कोशिश है। विशेषज्ञों के मुताबिक, चीन का ये रुख दुनिया के लिए दोहरी चुनौती है। एक तरफ अमेरिका और रूस को खुला मैदान मिल जाता है, दूसरी तरफ एशिया में भारत जैसे देशों पर सीधा दबाव बढ़ता है। चीन की परमाणु और मिसाइल ताकत भारत के लिए चिंता का सबब है।
ट्रंप ने कुछ दिन पहले कहा था कि रूस तैयार है और चीन भी राजी होगा। उन्होंने ये भी कहा कि परमाणु हथियारों का फैलाव रोकना जरूरी है, वरना दुनिया खतरे में पड़ जाएगी। लेकिन चीन ने उनकी उम्मीदों को झटका दे दिया। हकीकत ये है कि दुनिया के लगभग 80प्रतिशत परमाणु हथियार सिर्फ अमेरिका और रूस के पास हैं। 2023 में रूस ने अमेरिका के साथ आखिरी हथियार नियंत्रण समझौता भी तोड़ दिया था। इसके बाद निरस्त्रीकरण की कोशिशें और मुश्किल हो गईं। चीन का कहना है कि उसके पास सिर्फ उतने हथियार हैं, जितने देश की सुरक्षा के लिए जरूरी हैं। वो किसी हथियारों की दौड़ में शामिल नहीं होना चाहता। लेकिन आंकड़े बताते हैं कि उसका जखीरा लगातार बढ़ रहा है। साल 2025 की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के पास 5,277 से ज्यादा और रूस के पास 5,459 से ज्यादा वारहेड हैं। चीन के पास करीब 600 वारहेड हैं, जो पिछले साल से 100 ज्यादा हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति का बयान – पीड़ित परिवारों के साथ हैं पूरे देश की संवेदनाएँ
28 Aug, 2025 09:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अमेरिका के मिनेसोटा के मिनियापोलिस शहर के एक कैथोलिक स्कूल में अंधाधुंध फायरिंग हुई. जिस समय बच्चे प्रार्थना कर रहे थे तभी आरोपी ने उन पर गोलियां बरसाई. इस गोलीबारी में 2 बच्चों की मौत हो गई है, साथ ही 17 लोग घायल हो गए हैं. इसी के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आदेश दिया है कि मिनियापोलिस शहर के कैथोलिक स्कूल में हुई गोलीबारी के पीड़ितों को श्रद्धांजलि देने के लिए रविवार, 31 अगस्त को सूर्यास्त तक व्हाइट हाउस और देश भर की सभी बाकी सार्वजनिक इमारतों पर सभी अमेरिकी झंडे आधे झुके रहेंगे.
अमेरिका के मिनेसोटा के मिनियापोलिस शहर के एक कैथोलिक स्कूल में अंधाधुंध फायरिंग हुई. जिस समय बच्चे प्रार्थना कर रहे थे तभी आरोपी ने उन पर गोलियां बरसाई. इस गोलीबारी में 2 बच्चों की मौत हो गई है, साथ ही 17 लोग घायल हो गए हैं. इसी के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आदेश दिया है कि मिनियापोलिस शहर के कैथोलिक स्कूल में हुई गोलीबारी के पीड़ितों को श्रद्धांजलि देने के लिए रविवार, 31 अगस्त को सूर्यास्त तक व्हाइट हाउस और देश भर की सभी बाकी सार्वजनिक इमारतों पर सभी अमेरिकी झंडे आधे झुके रहेंगे.
ट्रंप ने पीड़ितों को दी श्रद्धांजलि
ट्रंप ने दुनिया भर के सभी अमेरिकी दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों में अमेरिकी झंडे को आधा झुकाए रखने का भी निर्देश दिया है. घोषणा में आगे लिखा है, मैं यह भी निर्देश देता हूं कि सभी अमेरिकी दूतावासों, वाणिज्य दूतावासों और विदेशों में स्थित अन्य सुविधाओं, जिनमें सभी सैन्य सुविधाएं, नौसैनिक जहाज और स्टेशन शामिल हैं, उन पर झंडे को 31 अगस्त तक आधा झुकाए रखा जाएगा.
2 बच्चों की फायरिंग में मौत
मिनियापोलिस के एक कैथोलिक स्कूल में बुधवार सुबह को प्रार्थना सभा में शामिल बच्चों पर एक हमलावर ने गोलीबारी की, जिसमें 8 और 10 साल के कम से कम दो बच्चों की मौत हो गई और 17 लोग घायल हो गए हैं. पुलिस के अनुसार, हमलावर ने बाद में खुद को लगी चोटों के कारण दम तोड़ दिया.
मिनियापोलिस के पुलिस प्रमुख ब्रायन ओ’हारा के अनुसार, हमलावर की उम्र लगभग 20 साल थी और उसके पास एक राइफल, शॉटगन और पिस्तौल थी. उन्होंने कहा कि गोलीबारी के समय बच्चे स्कूल में वापसी के अपने पहले हफ्ते के मौके पर प्रार्थना सभा में मौजूद थे.
ट्रंप ने जताया दुख
इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए, ट्रंप ने पहले कहा था कि उन्हें इस दुखद गोलीबारी के बारे में पूरी जानकारी दे दी गई है और एफबीआई ने तुरंत प्रतिक्रिया दी और घटनास्थल पर पहुंच गई. उन्होंने ट्रुथ सोशल पर लिखा, मिनियापोलिस, मिनेसोटा में हुई इस दुखद गोलीबारी के बारे में मुझे पूरी जानकारी दे दी गई है. एफबीआई तुरंत घटनास्थल पर पहुंच गई है. व्हाइट हाउस इस भयावह हालात पर नजर बनाए रखेगा. साथ ही ट्रंप ने कहा, मेरे साथ मिलकर इसमें शामिल सभी लोगों के लिए प्रार्थना करें!मिनियापोलिस के मेयर जैकब फ्रे ने भी गोलीबारी पर शोक व्यक्त किया.
ट्रंप की भी नहीं सुन रहे नेतन्याहू: सीरिया के कई इलाकों पर इजरायल ने किया कब्जा
26 Aug, 2025 06:45 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तेलअवीव। हमास से भिड़ने के साथ साथ इजरायल सीरिया से भी भिड़ गया है। इजरायल ने 60 सैनिक भेजकर सीरिया के कई इलाकों कब्जा कर लिया है। सीरिया के विदेश मंत्रालय ने आरोप लगाया कि इजरायल ने माउंट हर्मोन के आसपास सीरियाई सीमा में घुसकर करीब 60 सैनिक भेजे और कई इलाकों पर कब्जा कर लिया। यही नहीं, इजरायली सैनिकों ने 6 सीरियाई नागरिकों को भी गिरफ्तार किया। इस बीच सीरिया के राष्ट्रपति ने अमेरिका से गुहार लगाई है। बताया ये भी जा रहा है कि इजरायल के पीएम नेतन्याहू इस वक्त यूएस राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भी नहीं सुन रहे हैं।
सीरिया ने इस कार्रवाई को अपनी संप्रभुता का खुला उल्लंघन और क्षेत्रीय शांति के लिए सीधा खतरा बताया है। विदेश मंत्रालय ने कड़े लहजे में कहा कि इजरायल का यह कदम खतरनाक बढ़ोतरी है। वहीं, इजरायल की ओर से इस पूरे घटनाक्रम पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। घटना उस जगह हुई है जो लेबनान बॉर्डर के नजदीक है और हथियारों की तस्करी के लिए कुख्यात रही है। यहां से ईरान समर्थित हिज़्बुल्लाह और फिलीस्तीनी उग्रवादी धड़ों के लिए हथियारों का नेटवर्क चलता रहा है। यही वजह है कि इजरायल इस इलाके को अपनी सुरक्षा के लिए सीधा खतरा मानता है। इजरायली सेना ने पिछले हफ्ते ही फुटेज जारी किया था, जिसमें दक्षिण सीरिया में हथियार भंडारण केंद्रों को खोजने का दावा किया गया था। इसके बाद सीरियाई राष्ट्रपति अहमद अल-शर्रा ने दमिश्क में अमेरिकी विशेष दूत थॉमस बैरक से मुलाकात की। राष्ट्रपति कार्यालय के बयान के अनुसार, बातचीत में सीरिया और क्षेत्रीय हालात पर चर्चा हुई। इससे एक दिन पहले बैरक ने यरुशलम में इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात कर सीरिया और लेबनान पर विचार-विमर्श किया था। अमेरिकी मध्यस्थता में सीरियाई और इजरायली अधिकारियों के बीच दक्षिण सीरिया में संघर्ष कम करने पर बातचीत चल रही है। यह कूटनीतिक गतिविधियां क्षेत्रीय स्थिरता और तनाव घटाने की दिशा में अहम मानी जा रही हैं।
महत्त्वपूर्ण बात यह है कि सीरिया और इजरायल के बीच अमेरिका की मध्यस्थता में दक्षिण सीरिया में संघर्ष कम करने की बातचीत चल रही थी। दमिश्क को उम्मीद थी कि सुरक्षा समझौते के जरिये भविष्य में राजनीतिक बातचीत का रास्ता खुलेगा। लेकिन अब इजरायल की इस कार्रवाई से बातचीत पर बड़ा साया पड़ गया है। सीरिया का कहना है कि इजरायल ट्रंप प्रशासन से करीबी रिश्ते का फायदा उठाकर लगातार दखलअंदाजी कर रहा है। मगर यह दोस्ती भी सीरिया को कब्जे से नहीं बचा सकी।
इससे सीरिया की संप्रभुता को चुनौती मिली है। लेबनान और फिलीस्तीनी धड़ों के साथ तनाव और बढ़ सकता है। अमेरिका की मध्यस्थता से चल रही बातचीत पटरी से उतर सकती है। पहले से अस्थिर सीरिया में नया मोर्चा खुल सकता है। सीरिया और इजरायल के बीच यह टकराव केवल सीमा विवाद नहीं, बल्कि पूरे मध्यपूर्व की सुरक्षा और संतुलन से जुड़ा हुआ है। इजरायल का दावा है कि वह अपने लोगों और ड्रूज़ समुदाय को बचाने के लिए कार्रवाई कर रहा है, जबकि सीरिया इसे अपनी संप्रभुता पर हमला बता रहा है।
शरणार्थियों के मामले पर बोले यूनुस......रोहिंग्याओं को संभालना अब हो रहा मुश्किल
26 Aug, 2025 06:15 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने शरणार्थियों को लेकर कहा है कि इन्हें संभाल पाना अब मुश्किल हो रहा है। बांग्लादेश में रह रहे 13 लाख से अधिक रोहिंग्या शरणार्थियों को लेकर उन्होंने कहा कि यह समस्या सिर्फ बांग्लादेश की नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए चुनौती बन गई है।
इसी के साथ मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि सभी देश एकजुट होकर रोहिंग्या मुस्लिमों को सुरक्षित तरीके से म्यांमार वापस भेजने में मदद करें। उन्होंने इस दिशा में सोमवार को 7 प्वाइंट का रोडमैप भी जारी किया है। वहीं
यूनुस ने अपने बयान में रेखांकित किया कि बांग्लादेश में 13 लाख से ज्यादा रोहिंग्या रह रहे हैं। इन शरणार्थियों की वजह से देश की अर्थव्यवस्था और पर्यावरण पर भारी दबाव पड़ा है। उन्होंने कहा है कि 2017 में म्यांमार से हिंसा और दमन के बाद सबसे ज्यादा रोहिंग्या बांग्लादेश चले आए थे। कॉक्स बाजार में दुनिया का सबसे बड़ा शरणार्थी शिविर मौजूद है।
रोहिंग्या नरसंहार स्मृति दिवस
इसी बीच कॉक्स बाजार में रह रहे रोहिंग्या मुसलमानों ने ‘रोहिंग्या नरसंहार स्मृति दिवस’ भी मनाया। शरणार्थियों ने हाथों में तख्तियां लेकर प्रदर्शन किया, जिन पर लिखा था- “नो मोर रिफ्यूजी लाइफ” यानी शरणार्थी का कोई जीवन नहीं। इस कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय संगठनों और कई देशों के डिप्लोमैट्स ने भी हिस्सा लिया।
कब शुरू हुआ पलायन?
25 अगस्त 2017 को म्यांमार के रखाइन प्रांत में अराकान सेना और सुरक्षा बलों के दमन से बचकर लाखों रोहिंग्या बांग्लादेश पहुंचे थे। उस समय करीब 70 हजार लोग भागकर आए, जबकि पहले से ही 3 लाख से ज्यादा शरणार्थी बांग्लादेश में रह रहे थे।
आज उनकी संख्या बढ़कर 13 लाख हो चुकी है।
चीन में महिलाओं की प्राइवेसी से जुड़ा बड़ा स्कैंडल आया सामने
26 Aug, 2025 11:48 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग। चीन में महिलाओं की प्राइवेसी से जुड़ा बड़ा स्कैंडल सामने आया है। टेलीग्राम पर चल रहे एक सीक्रेट चैनल मास्क पार्क ट्रीहोल फोरम में हजारों महिलाओं की इंटिमेट फोटो और वीडियो शेयर हो रहे थे।
खबर के मुताबिक, चैनल के 1 लाख से ज्यादा सब्सक्राइबर थे। चीन में सिर्फ वीपीएन के जरिए चैनल को एक्सेस किया जा सकता था। पीड़ितों में शामिल महिला ने बताया कि उनके एक्स-बॉयफ्रेंड ने उनकी निजी तस्वीरें लीक कर दीं।
मुझे इसकी जानकारी तब मिली जब एक अनजान शख्स ने सबूत भेजकर बताया कि उसकी सोशल मीडिया डिटेल्स और वीडियो इस चैनल पर घूम रहे हैं। जब उसने एक्स-बॉयफ्रेंड से बात कि तब उसने 3 लोगों को तस्वीरें भेजने की बात मानी, लेकिन असल में लीक कहीं ज्यादा बड़ा था।
पीड़ित ने कहा, यह घिनौना है...जैसे हमें बार-बार वर्बल रेप किया जा रहा हो, हैरानी की बात है कि ये लोग अपनी ही फैमिली के बारे में भी फैंटेसी कर रहे हैं। इस चैनल पर महिलाओं की तस्वीरों के साथ-साथ नाबालिगों, अपराधियों की रिश्तेदार महिलाओं की भी तस्वीरें डाली गई थीं।
पिछले महीने सोशल मीडिया पर इस बात खुलासा किया था। तब मामले ने तूल पकड़ा। बड़ी संख्या में चीनी महिलाओं ने ऑनलाइन कैंपेन शुरू किया, चैनल की जांच की और रिपोर्ट करने के तरीके शेयर किए। नाराज महिलाओं ने स्लोगन दिया अगर सरकार जांच नहीं करेगी तब हम बच्चे पैदा नहीं करने वाले। वहीं मामले पर चीन सरकार का कहना है कि चैनल अब बंद हो चुका है, लेकिन छोटे-छोटे चैनल अब भी मौजूद हैं। सरकार ने कैंपेन पोस्ट्स को डिलीट और म्यूट करना शुरू कर दिया है।
परमाणु जंग के मुहाने पर थे भारत-पाक! ट्रंप बोले– मेरी वजह से बचा युद्ध, 7 लड़ाकू विमान भी गिरे
26 Aug, 2025 11:08 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर भारत-पाकिस्तान संघर्ष को लेकर सोमवार को बड़ा दावा किया. वॉशिंगटन में पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रंप ने कहा कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान कई बड़े युद्धों को रोकने में भूमिका निभाई. ट्रंप के मुताबिक, इनमें से एक बड़ा संघर्ष भारत और पाकिस्तान के बीच था, जो 'परमाणु युद्ध' में तब्दील हो सकता था.
इतना ही नहीं अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, "मैंने इन सब युद्धों को रोक दिया. इनमें से एक बड़ा युद्ध भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाला था." "यह युद्ध अगले स्तर तक पहुंच चुका था और परमाणु युद्ध में तब्दील हो सकता था. उन्होंने पहले ही 7 लड़ाकू विमानों गिरा दिए थे, इससे हालात बेकाबू हो रहे थे.'
भारत और पाकिस्तान पर व्यापारिक दबाव बनाया
ट्रंप ने खुलासा करते हुए एक बार फिर कहा कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान पर व्यापारिक दबाव बनाया. मैंने कहा, क्या तुम लोग व्यापार करना चाहते हो? अगर लड़ाई जारी रखी तो हम कोई व्यापार या समझौता नहीं करेंगे. इतना ही नहीं मैंने साफ कहा, तुम्हारे पास मामले को सुलझाने के लिए 24 घंटे का समय है. इस पर उन्होंने जवाब दिया- अब कोई युद्ध नहीं होगा. ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने इस तरह का तरीका कई मौकों पर अपनाया है और व्यापार को हथियार बनाकर देशों को लड़ाई रोकने के लिए विवश किया.
मैंने सात युद्धों को रोका
अमेरिकी राष्ट्रपति कहा, "मैंने जिन सात युद्धों को रोका, उनमें से चार इसलिए थे क्योंकि मेरे पास टैरिफ और व्यापार था और मैं यह कहने में सक्षम था, 'यदि आप लड़ने जाते हैं और सभी को मारना चाहते हैं, तो यह ठीक है, लेकिन जब आप हमारे साथ व्यापार करेंगे तो मैं आप सभी पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाऊंगा. उन्होंने सभी को छोड़ दिया... हम टैरिफ के रूप में खरबों डॉलर ले रहे हैं और टैरिफ के कारण युद्ध रोक रहे हैं... अन्य देशों ने हमारे साथ ऐसा किया और अब हम अन्य देशों के साथ ऐसा कर रहे हैं."
जेलेंस्की व पुतिन की मुलाकात नहीं होन पर गंभीर परिणाम होंगे
यह पूछे जाने पर कि रूसी और यूक्रेनी राष्ट्रपतियों की मुलाकात नहीं होने पर इसके क्या परिणाम होंगे, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, "... इसके गंभीर परिणाम होंगे... यदि मैं राष्ट्रपति होता तो यह युद्ध कभी नहीं होता... हम देखेंगे कि अगले एक या दो सप्ताह में क्या होता है और उस समय मैं बहुत मजबूती से कदम उठाऊंगा..."
यूक्रेन पर अमेरिका कोई पैसा नहीं खर्च करता
रूस-यूक्रेन जंग पर डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, "अमेरिका अब यूक्रेन पर कोई पैसा खर्च नहीं करता है. हम नाटो से निपटते हैं, यूक्रेन से नहीं. हम युद्ध को समाप्त करना चाहते हैं और इस संबंध में व्लादिमीर पुतिन से बात भी की है. रूस-यूक्रेन युद्ध को रोकना मेरे लिए सबसे आसान था, लेकिन यह अब जटिल होता जा रहा है."
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि वह परमाणु निरस्त्रीकरण चाहते हैं और उन्होंने पुतिन से परमाणु मिसाइलों को लेकर भी बात की है. यूक्रेन की सुरक्षा गारंटी पर उन्होंने कहा कि मैंने इसकी प्रक्रियाओं पर अभी चर्चा नहीं की है, लेकिन मुझको लगता है कि वे इसका हल निकाल लेंगे. उन्होंने कहा कि हम नाटो को मिसाइलें देते हैं और वे यूक्रेन को देते हैं. हम अब यूक्रेन पर पैसा नहीं खो रहे, बल्कि कमा रहे हैं.
पाकिस्तान और बांग्लादेश ने 6 समझौतों पर हस्ताक्षर किए
26 Aug, 2025 10:15 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
ढाका । पाकिस्तान और बांग्लादेश ने रविवार को 6 समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। इसमें ट्रेड, इकोनॉमी, डिप्लोमेटिक ट्रेनिंग, शिक्षा, मीडिया और संस्कृति के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करना शामिल है।
ये समझौते पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री मुहम्मद इशाक डार और बांग्लादेश के विदेश सलाहकार मोहम्मद तौहीद हुसैन के बीच हुए। दरअसल, डार रविवार को दिवसीय दौरे पर बांग्लादेश पहुंचे थे। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने यात्रा को दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया। ये यात्रा 13 साल बाद पहली बार किसी पाकिस्तानी विदेश मंत्री का बांग्लादेश दौरा था। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों देश सितंबर या अक्टूबर में संयुक्त आर्थिक आयोग की बैठक आयोजित करने की योजना बना रहे हैं, जो दो दशक बाद होगी। इसके लिए पाकिस्तान के वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ढाका आ सकते हैं।
पाकिस्तान और बांग्लादेश ने 6 समझौतों पर हस्ताक्षर किए
वीजा मुक्त समझौता: दोनों देशों के सरकारी और राजनयिक पासपोर्ट वाले लोग बिना वीजा के एक-दूसरे के देश जा सकते है।
व्यापार कार्य समूह: दोनों देश मिलकर व्यापार बढ़ाने के लिए एक समूह बनाएंगे, जो व्यापार से जुड़े मुद्दों पर काम करेगा।
विदेश सेवा अकादमी सहयोग: दोनों देशों के कूटनीतिक प्रशिक्षण संस्थान एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करेंगे और अनुभव साझा करेंगे।
मीडिया एजेंसी सहयोग: एसोसिएटेड प्रेस ऑफ पाकिस्तान कॉर्पोरेशन और बांग्लादेश समाचार एजेंसी संगबाद के बीच एक समझौता हुआ है। ये संस्था मिलकर काम करेंगी।
रणनीतिक अध्ययन सहयोग: दोनों देशों के रणनीतिक और अंतरराष्ट्रीय मामलों के शोध संस्थान मिलकर काम करने वाले है।
सांस्कृतिक आदान-प्रदान: दोनों देश अपनी संस्कृति, कला और परंपराओं को साझा करने के लिए कार्यक्रम आयोजित करेगा।
अमेरिका से दूरी बना रहे कई देश, दक्षिण कोरिया भी करेगा बाय-बाय
26 Aug, 2025 09:45 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन । कभी दुनिया भर में सहयोगियों को साथ लेकर चलने वाला वॉशिंगटन अब एक-एक कर अपने दोस्तों से हाथ धोता दिख रहा है। भारत से लेकर यूरोप और एशिया तक, अब वो देश भी अमेरिका से दूरी बनाने लगे हैं जो कभी उसके पक्के साझेदार माने जाते थे। इसी कड़ी में अब दक्षिण कोरिया ने भी संकेत दे दिए हैं कि उसका झुकाव धीरे-धीरे चीन की ओर बढ़ रहा है।
भारत पर दबाव बनाने की कोशिश में लगे अमेरिका को यह झटका और भी बड़ा लग सकता है। क्योंकि वॉशिंगटन चाहता है कि भारत चीन से दूरी बनाए, रूस से नजदीकी घटाए और पूरी तरह अमेरिकी पाले में आ जाए। लेकिन भारत साफ कर चुका है… उसके लिए पहला और आखिरी पैमाना राष्ट्रीय हित है। और अब जब दक्षिण कोरिया जैसा अहम एशियाई देश भी बीजिंग की तरफ बढ़ रहा है, तो अमेरिकी रणनीति की जड़ें हिलनी तय हैं।
अमेरिका चाहता है कि साउथ कोरिया, जापान और ऑस्ट्रेलिया उसके साथ मिलकर चीन को घेरें। लेकिन अगर सियोल बीजिंग के साथ रिश्ते सुधारता है, तो यह “कोरिया को अपने पाले में रखने” की अमेरिकी रणनीति को कमजोर कर देगा। चीन-रूस नज़दीकी पर संतुलन: यूक्रेन युद्ध और ताइवान विवाद पहले से ही अमेरिका के सिरदर्द बने हुए हैं। ऐसे वक्त साउथ कोरिया का चीन की तरफ झुकाव वॉशिंगटन के लिए और असहज स्थिति पैदा करेगा। अमेरिका दुनिया की चिप्स और टेक्नोलॉजी सप्लाई चेन को चीन से हटाकर फ्रेंड-शोरिंग करना चाहता है। लेकिन अगर साउथ कोरिया बैलेंस बनाने लगे, तो यह अमेरिकी प्रयासों को कमजोर कर देगा। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्यंग ने चीन के लिए एक विशेष दूतमंडल भेजा। यह दौरा संयोग से दोनों देशों के बीच कूटनीतिक रिश्तों की 33वीं सालगिरह पर हुआ। चार दिन की इस यात्रा का नेतृत्व पूर्व नेशनल असेंबली स्पीकर पार्क ब्युंग-सुग कर रहे हैं, जो राष्ट्रपति का व्यक्तिगत पत्र लेकर बीजिंग पहुंचे। रिपोर्ट के मुताबिक इस प्रतिनिधिमंडल में सत्तारूढ़ डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद किम ताए-न्योन और पार्क जंग के अलावा पूर्व राष्ट्रपति रो ताए-वू के बेटे रो जे-हुन भी शामिल हैं। साफ है कि यह दौरा केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि चीन और दक्षिण कोरिया के बीच नए समीकरण गढ़ने की शुरुआत है।
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