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चीन के तियानजिन से आई तस्वीरों ने बढ़ाई अमेरिका की धड़कन, महाशक्तियों की नज़दीकी पर नजर
1 Sep, 2025 09:27 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तियानजिन। चीन से कुछ ऐसी तस्वीरें आई हैं तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नींद उड़ा सकती हैं। ट्रंप का टैरिफ कार्ड फेल होने के बाद परेशान हैं और ये तीन महाशक्तियों को देखकर और ज्यादा परेशान होंगे। चीन के तियानजिन शहर में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) समिट चल रहा है। इस बीच सोमवार को एक बड़ी तस्वीर देखने को मिली, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की तिकड़ी ने एससीओ मंच पर आगे बढ़कर, मुस्कुराते हुए एक दूसरे से हाथ मिलाए। थोड़ी देर तक तीनों नेता मुस्कुराते रहे और तीनों एक-दूसरे की बात सुनते रहे। चीन के तियानजिन से आई यह तस्वीर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को परेशान कर सकती है, जिन्होंने भारत पर 50 फीसदी का टैरिफ बम फोड़ा है।
25वें शिखर सम्मेलन की औपचारिक शुरुआत रविवार रात शी जिनपिंग द्वारा आयोजित एक भव्य भोज के साथ हुई। इसमें प्रधानमंत्री मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत अन्य नेता भी शामिल हुए। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संगठन के अन्य नेताओं के साथ मिलकर इस समूह की भावी दिशा तय करने के लिए एक दिवसीय शिखर सम्मेलन में विचार-विमर्श शुरू किया है। भारत समेत दुनियाभर के देशों पर ट्रंप के भारी-भरकम टैरिफ टेंशन के बीच अब सबकी निगाहें एससीओ शिखर सम्मेलन और इसके बड़े नेताओं की मीटिंग पर है। लोग इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि एससीओ के देश क्या तय करते हैं।
इस वर्ष का शिखर सम्मेलन एससीओ समूह का सबसे बड़ा शिखर सम्मेलन बताया गया है, क्योंकि इस वर्ष एससीओ के अध्यक्ष चीन ने एससीओ प्लस शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस सहित 20 विदेशी नेताओं और 10 अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुखों को आमंत्रित किया है। सोमवार को विभिन्न नेता बैठक को संबोधित करेंगे तथा संगठन के लिए अपने भविष्य के दृष्टिकोण को प्रस्तुत करेंगे। स्वागत भोज पर अपने संबोधन में शी ने कहा कि एससीओ पर क्षेत्रीय शांति और स्थिरता की रक्षा करने तथा बढ़ती अनिश्चितताओं और तेज परिवर्तन की दुनिया में विभिन्न देशों के विकास को बढ़ावा देने की बड़ी जिम्मेदारी है। शी ने विश्वास व्यक्त किया कि सभी पक्षों के सम्मिलित प्रयासों से शिखर सम्मेलन पूर्णतः सफल होगा तथा एससीओ निश्चित रूप से और भी बड़ी भूमिका निभाएगा, सदस्य देशों के बीच एकता और सहयोग को बढ़ावा देने में अधिक योगदान देगा, ‘ग्लोबल साउथ’ की ताकत को एकजुट करेगा तथा मानव सभ्यता की और अधिक प्रगति को बढ़ावा देगा। ‘ग्लोबल साउथ’ का संदर्भ आर्थिक रूप से कमजोर देशों के समूह के लिए दिया जाता है।
PM मोदी का विज़न: SCO शिखर सम्मेलन में भारत की प्रगति का रोडमैप पेश किया
1 Sep, 2025 08:00 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
तियानजिन: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज तियानजिन में 25वें शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के राष्ट्राध्यक्ष परिषद शिखर सम्मेलन सत्र को संबोधित कर रहे हैं. इस बीच वह रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे. इसके बाद उनका भारत के लिए रवाना होने का कार्यक्रम है. इससे पहले रविवार को पीएम मोदी ने एससीओ नेताओं के शिखर सम्मेलन के मौके पर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय वार्ता की. इस दौरान दोनों नेताओं ने अक्टूबर 2024 में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के मौके पर कजान में अपनी पिछली बैठक के बाद से द्विपक्षीय संबंधों में सकारात्मक प्रगति का स्वागत किया. दोनों ने पुष्टि की कि दोनों देश विकास भागीदार हैं न कि प्रतिद्वंद्वी और उनके मतभेद विवादों में नहीं बदलने चाहिए. पीएम मोदी ने आपसी सम्मान, आपसी हित और आपसी संवेदनशीलता के आधार पर भारत और चीन के बीच एक स्थिर संबंध और सहयोग का आह्वान किया. प्रधानमंत्री मोदी ने द्विपक्षीय संबंधों के निरंतर विकास के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता के महत्व पर भी जोर दिया. दोनों नेताओं ने कैलाश मानसरोवर यात्रा को फिर से शुरू करने और पर्यटक वीजा की शुरुआत के आधार पर सीधी उड़ानों और वीजा सुविधा के माध्यम से लोगों से लोगों के संबंधों को मजबूत करने के महत्व पर जोर दिया.
एससीओ समय की बदलती जरूरतों के साथ विकसित हो रहा है:पीएम मोदी
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'यह प्रसन्नता की बात है कि एससीओ समय की बदलती जरूरतों के साथ विकसित हो रहा है. संगठित अपराध, मादक पदार्थों की तस्करी, साइबर सुरक्षा जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए चार नए केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं. हम इस सुधारोन्मुखी सोच का स्वागत करते हैं.'
आज भारत रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म के मंत्र पर आगे बढ़ रहा है: पीएम मोदी
चीन के तियानजिन में एससीओ शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी कहा, 'आज भारत रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म के मंत्र पर आगे बढ़ रहा है. हमने हर चुनौती को अवसर में बदलने की कोशिश की है. मैं आप सभी को भारत की विकास यात्रा का हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित करता हूं.'
आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद पूरी मानवता के लिए साझा चुनौती है: पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, 'सुरक्षा, शांति और स्थिरता किसी भी देश के विकास का आधार है. लेकिन आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद इस राह में बड़ी चुनौतियाँ हैं. आतंकवाद सिर्फ किसी देश की सुरक्षा के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए एक साझा चुनौती है. कोई भी देश, कोई भी समाज, कोई भी नागरिक इससे खुद को सुरक्षित नहीं मान सकता. इसलिए, भारत ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में एकता पर जोर दिया है. भारत ने संयुक्त सूचना अभियान का नेतृत्व करके अल-कायदा और उससे जुड़े आतंकवादी संगठनों से लड़ने की पहल की. हमने आतंकवाद के फंडिंग के खिलाफ आवाज उठाई.'
आतंकवाद का सर्वसम्मति से विरोध करना होगा: PM मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा,'हमें स्पष्ट और सर्वसम्मति से कहना होगा कि आतंकवाद पर कोई भी दोहरा मापदंड स्वीकार्य नहीं है. यह हमला मानवता में विश्वास रखने वाले हर देश और व्यक्ति के लिए एक खुली चुनौती थी. ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या कुछ देशों द्वारा आतंकवाद का खुला समर्थन हमें स्वीकार्य हो सकता है. हमें हर रूप और रंग के आतंकवाद का सर्वसम्मति से विरोध करना होगा. मानवता के प्रति यह हमारा कर्तव्य है.'
बलूचिस्तान में 15 दिनों के लिए धारा 144 बढ़ाई, बाइक पर 2 लोग नहीं बैठ सकेंगे
31 Aug, 2025 08:34 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
क्वेटा बलूचिस्तान की प्रांतीय सरकार ने कानून-व्यवस्था की मौजूदा स्थिति का हवाला देते हुए पूरे प्रांत में धारा 144 की अवधि 15 दिनों के लिए और बढ़ा दी है। इस अवधि में हथियारों का प्रदर्शन और उपयोग, मोटरसाइकिल पर डबल सवारी, काली शीशे वाली गाड़ियां, बिना पंजीकरण वाली मोटरसाइकिलें, तथा पांच या अधिक लोगों के जमावड़े, धरना, जुलूस और रैली पर प्रतिबंध रहेगा। निर्देश में यह भी कहा गया है कि सार्वजनिक स्थानों पर चेहरा ढकना, खासकर मफलर, मास्क या किसी भी अन्य तरीके से पहचान छिपाना भी पूरी तरह वर्जित होगा।
नेशनल डेमोक्रेटिक पार्टी (एनडीपी) के केंद्रीय प्रवक्ता शाहजेब बलोच ने इन प्रतिबंधों को असंवैधानिक करार दिया और पत्रकार वार्ता में कहा कि यह लोकतांत्रिक अधिकारों का गला घोंटने जैसा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बलूचिस्तान और देशभर के अन्य वंचित समूहों के कार्यकर्ताओं को न केवल परेशान किया जा रहा है बल्कि उन्हें जबरन गायब करने जैसी गंभीर रणनीतियों का भी सामना करना पड़ रहा है।शाहजेब ने कहा कि सरकार को चाहिए कि सभी लापता बलोच और अन्य पीड़ितों को वापस लाने की व्यवस्था करे। उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक कार्यकर्ता पर आरोप है तो उसे अदालत में पेश किया जाना चाहिए, लेकिन पूरे समुदाय को सामूहिक सजा देना जातीय और राष्ट्रीय शुद्धिकरण की तरह है और औपनिवेशिक मानसिकता को दर्शाता है।
इस बीच खुजदार जिले के जवाह और जहरी इलाकों में तनाव बढ़ गया, जहां क्वेटा-कराची राजमार्ग को प्रदर्शनकारियों ने दूसरे दिन भी जाम रखा। यह विरोध तब शुरू हुआ जब हब चौकी से खुजदार जा रही एक वैन से यात्रियों को अगवा कर लिया गया। स्थानीय नेताओं का आरोप है कि हाल ही में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने एक वैन को रोका, जिसमें से महिलाओं और बच्चों को उतारने के बाद पुरुष यात्रियों और वाहन को अज्ञात स्थान पर ले जाया गया। स्थानीय नेता बाबा फतेह जहरी ने फोन पर पत्रकारों को बताया कि खुजदार प्रशासन ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन को खत्म करने के लिए बल प्रयोग किया। लवीज बलों ने गोलीबारी और आंसू गैस का इस्तेमाल किया, जिससे दो यात्री घायल हो गए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बलों ने महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार किया और युवाओं को पीटा। फतेह ने जहरी क्षेत्र के लोगों से बड़ी संख्या में धरने में शामिल होने की अपील की ताकि खुजदार प्रशासन की ज्यादतियों को रोका जा सके।
अमेरिका के पेंटागन में अचानक बढ़े पिज्जा ऑर्डर, मतलब अमेरिका में बड़ा संकट आने वाला है
31 Aug, 2025 07:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
वाशिंगटन। दुनिया के तमाम संकेतों में से एक है अमेरिका का मशहूर पेंटागन पिज्जा इंडेक्स। कहा जाता है कि जब पेंटागन में देर रात तक पिज्जा के ऑर्डर अचानक बढ़ने लगते हैं तो यह किसी बड़े सुरक्षा संकट या सैन्य गतिविधि का इशारा होता है। पिछले शुक्रवार पेंटागन के पास फिर कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। दोपहर करीब 1 बजे (ईटी) अचानक पिज्जा ऑर्डर बढ़ गए। रिपोर्ट नाम के एक्स अकाउंट ने यह डेटा शेयर किया और देखते ही देखते यह खबर वायरल हो गई।
इस थ्योरी के समर्थकों का कहना है कि इसके पीछे पुराने उदाहरण भी हैं। 1990 में जब सद्दाम हुसैन ने कुवैत पर हमला किया था, उससे ठीक एक रात पहले वॉशिंगटन डीसी में पिज्जा ऑर्डर अचानक बढ़ गए थे। डोमिनोस के मालिक फ्रैंक मीक्स ने दावा किया था कि 1991 में ऑपरेशन डेजर्ट स्टॉर्म से पहले भी ऐसा ही पैटर्न सामने आया था। यहां तक कि ईरान पर हमले से पहले भी पिज्जा ऑर्डर बढ़ने की घटनाएं दर्ज की गईं, जिसे अमेरिका की पूर्व जानकारी से जोड़ा गया।
रिपोर्ट में बताया गया कि फ्रेडीज बीच बार पर सामान्य से ज्यादा भीड़ रही। वहीं दूसरी दुकानों पर हाल अलग-अलग दिखा।कुछ जगह खाली रहीं, तो कुछ पर वेटिंग टाइम 15 मिनट तक पहुंच गया। पोस्ट में लिखा गया कि पेंटागन के पास पिज्जा दुकानों का हाल फिलहाल मिक्स है, कहीं भीड़ ज्यादा तो कहीं कम। शाम 7:36 बजे तक यह पैटर्न बना रहा। शुक्रवार की शाम वैसे भी खाने-पीने की जगहों पर भीड़ रहती है, लेकिन पेंटागन के पास अचानक ऐसा ट्रेंड देखने को मिला तो सोशल मीडिया पर सवाल उठने लगे। द पेंटागन रिपोर्ट का कहना है कि 27 और 28 अगस्त को भी इसी तरह का पैटर्न सामने आया था। डेटा सामने आते ही लोग एक्स पर कमेंट्स की झड़ी लग गई। एक यूजर ने लिखा-पिजाटो पिज्जा, जो पेंटागन के पास आधी रात बाद भी खुला रहता है, वहां आज ऑर्डर 303 प्रतिशत बढ़ गए हैं। किसी और ने कहा, कि हमें तुरंत अपडेट चाहिए। वहीं एक यूज़र ने सीधा सवाल दागा-आखिर चल क्या रहा है? इस अचानक उछाल ने एक बार फिर पेंटागन पिज्जा इंडेक्स थ्योरी की चर्चा तेज कर दी। माना जाता है कि जब भी पेंटागन में इमरजेंसी आती है, वहां काम करने वाले अफसरों और कर्मचारियों को लंबे समय तक ड्यूटी करनी पड़ती है। ऐसे में खाने-पीने, खासकर पिज्जा की मांग अचानक बढ़ जाती है।
चीन में पुतिन-जिनपिंग के साथ मंच पर नजर आएंगे किम जोंग-उन
31 Aug, 2025 06:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
सियोल। उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन वैश्विक राजनीति में दखल देने की तैयारी कर रहे हैं। किम इस सप्ताह चीन में बहुपक्षीय कूटनीतिक मंच पर कदम रखने वाले हैं। बीजिंग में सैन्य परेड में भाग लेने के लिए उनकी यात्रा रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ संभावित त्रिपक्षीय शिखर सम्मेलन का मंच तैयार कर रही है। 2011 के आखिर में सत्ता संभालने वाले किम के लिए यह पहली बार होगा जब वे किसी बहुपक्षीय राजनयिक कार्यक्रम में शामिल होंगे। उनके दादा और उत्तर कोरिया के संस्थापक किम इल-सुंग 1959 में चीन में एक सैन्य परेड में शामिल हुए थे।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक किम का चीन में द्वितीय विश्व युद्ध के अंत की 80वीं वर्षगांठ के सैन्य परेड में पुतिन और शी के साथ भाग लेंगे। दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे म्युंग और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वाशिंगटन में अपनी उच्च-स्तरीय शिखर वार्ता में उत्तर कोरिया के साथ कूटनीति फिर से शुरू करने की उत्सुकता व्यक्त करने के कुछ दिनों बाद घोषित किया गया। किम का इस सप्ताह बीजिंग में पुतिन और शी जिनपिंग के साथ सैन्य परेड में शामिल होना इस बात का संकेत है कि किम जोंग उन की दक्षिण कोरिया या अमेरिका के साथ कूटनीति में कोई रुचि नहीं है।
रिपोर्ट के मुताबिक, किम और पुतिन ने सैन्य संबंधों को गहरा किया है। प्योंगयांग ने यूक्रेन के खिलाफ मास्को युद्ध में मदद के लिए अपने सैनिक और हथियार भेजे हैं। उत्तर कोरिया के सरकारी मीडिया के मुताबिक किम ने पिछले साल 28 अगस्त को अपने सैन्य तैनाती के फैसले को अंतिम रूप दिया था। वहीं रूसी मीडिया के मुताबिक किम, पुतिन और शी 3 सितंबर को बीजिंग में होने वाली सैन्य परेड में शामिल होंगे। क्रेमलिन के एक अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि किम शी के बाईं ओर बैठेंगे, जबकि पुतिन शी के दाईं ओर। अगर किम चीन विशेष ट्रेन से जाते हैं, तो करीब 20 घंटे लगेंगे।
दक्षिण कोरिया के कुछ विश्लेषकों का मानना है कि किम शम्मा-1 की बजाय अपनी फॉरेस्ट ग्रीन ट्रेन का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह वह निजी विमान है जिसका इस्तेमाल किम ने अपने कार्यकाल के शुरुआती सालों में लंबी दूरी की घरेलू यात्राओं के लिए किया था। विशेषज्ञों का आकलन है कि उत्तर कोरिया ने रूस-यूक्रेन युद्ध के समापन की आशंका में बीजिंग के साथ बिगड़े संबंधों को सुधारने के प्रयासों के तहत किम की चीन यात्रा को चुना है, जिससे मास्को का ध्यान पश्चिम की ओर जा सकता है।
पिछले साल से प्योंगयांग ने मास्को के साथ रिश्ते सुधारे हैं। यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में रूस का समर्थन करने के लिए सेना भेजी है और दुर्लभ संसाधनों और सहायता के अपने मुख्य आपूर्तिकर्ता के रूप में रूस की ओर रुख किया है। इसके साथ ही उत्तर कोरिया और चीन ने हाल ही में संबंधों में सुधार के संकेत दिए हैं। उत्तर कोरिया की संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष ने हाल ही में प्योंगयांग में चीनी दूतावास द्वारा वर्षगांठ मनाने के लिए आयोजित एक स्वागत समारोह में भाग लिया। विश्लेषकों का सुझाव है कि किम ने अमेरिका के साथ संभावित वार्ता फिर से शुरू होने से पहले अपनी सौदेबाजी की स्थिति को मजबूत करने के लिए चीन के साथ उत्तर कोरिया के घनिष्ठ संबंधों का लाभ उठाने के लिए सैन्य परेड में भाग लेने का विकल्प चुना है।
इंग्लैंड में अवैध प्रवासियों को हिरासत में लेने और वापस भेजा जाएगा उनके देश
31 Aug, 2025 04:13 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
लंदन। ब्रिटिश पीएम कीर स्टारमर ने अवैध प्रवासियों को हिरासत में लेने और वापस उनके देश भेजने का ऐलान किया है। हाल में सरकार पर चैनल क्रॉसिंग और शरण होटलों के मुद्दे से निपटने के लिए बढ़ते दबाव का सामना कर रहा है। स्टारमर ने एक्स पर कहा कि हम अवैध प्रवेश को बढ़ावा नहीं देंगे। अगर आप अवैध रूप से चैनल पार करते हैं, तो आपको हिरासत में लिया जाएगा और वापस भेजा जाएगा। उनकी यह टिप्पणी शनिवार को पूरे इंग्लैंड में कई प्रदर्शनों के दौरान आई, जहां शरणार्थियों को होटलों में ठहराया जा रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिमी लंदन में पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक गर्मियों में हजारों लोग विरोध प्रदर्शनों में शामिल हुए थे, जो एक होटल में ठहरे एक शरणार्थी की गिरफ्तारी और उसके बाद उस पर 14 साल की लड़की के कथित यौन उत्पीड़न समेत कई अपराधों के आरोप लगने के बाद शुरू हुए थे। गृह मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक जून तक होटलों में ठहरे शरणार्थियों की संख्या बढ़कर 32 हजार से ज्यादा हो गई। सरकार ने अगले आम चुनाव तक शरणार्थी होटलों को बंद करने का वादा किया था।
बता दें ब्रिटेन और फ्रांस एक ऐसी योजना पर काम कर रहे हैं जिसके तहत इंग्लिश चैनल पार करके छोटी नावों से आने वाले प्रवासियों को वापस फ्रांस भेजा जाएगा। वहीं, इसके बदले में उतनी ही संख्या में शरणार्थियों को कानूनी रास्ते से ब्रिटेन लाया जाएगा,
लेकिन इस योजना में शामिल लोगों की संख्या आने वाले लोगों का एक छोटा सा हिस्सा ही होने की संभावना है। गृह मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 31 जुलाई 2025 में 25,000 से ज्यादा लोग छोटी नावों से इंग्लैंड चैनल पार कर चुके थे, जो 2024 में इसी समय की तुलना में करीब 49 फीसदी ज्यादा है।
पीएम मोदी ने शी जिनपिंग से की मुलाकात, संबंधों को आगे बढ़ाने पर दिया जोर
31 Aug, 2025 03:08 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
बीजिंग। भारत और चीन के बीच संबंधों में सुधार की उम्मीद के साथ, शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन के लिए दो दिवसीय यात्रा पर चीन गए पीएम मोदी ने रविवार को राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की। शी जिनपिंग के साथ अपनी द्विपक्षीय बैठक में पीएम मोदी ने कहा कि पिछले साल कज़ान में उनकी बहुत ही उपयोगी चर्चा हुई थी जिसने भारत-चीन संबंधों को सकारात्मक दिशा दी।
उन्होंने कहा कि सीमा पर सैनिकों की वापसी के बाद, शांति और स्थिरता का माहौल बना है। सीमा प्रबंधन को लेकर भारत और चीन के विशेष प्रतिनिधियों के बीच एक समझौता हुआ है। उन्होंने कहा कि कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू कर दी गई है और दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानें भी बहाल की जा रही हैं। पीएम मोदी ने कहा कि दोनों देशों के 2.8 अरब लोगों के हित उनके सहयोग से जुड़े हैं और यह पूरी मानवता के कल्याण में योगदान देगा। उन्होंने आपसी विश्वास, सम्मान और संवेदनशीलता के आधार पर संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए भारत की प्रतिबद्धता पर जोर दिया।
बता दें व्यापार और शुल्क संबंधी अमेरिकी नीतियों के कारण भारत एवं अमेरिका के संबंधों में अचानक गिरावट आई है। ऐसे में भारत एवं चीन के नेताओं के बीच यह मुलाकात महत्व रखती है। मोदी और शी रविवार से शुरू हो रहे दो दिवसीय एससीओ शिखर सम्मेलन से इतर मिलेंगे। सूत्रों ने संकेत दिया है कि चर्चा के लिए मुद्दों की व्यापकता को देखते हुए वे दिन में बाद में दोबारा भी मुलाकात कर सकते हैं। दोनों नेताओं की पिछली मुलाकात अक्टूबर में रूस के कजान में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी। सोमवार को भारत रवाना होने से पहले पीएम मोदी के रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी मिलने की संभावना है।
चीन द्वारा आयोजित ‘एससीओ प्लस’ शिखर सम्मेलन में विभिन्न देशों के 20 नेता भाग ले रहे हैं। चीन इस साल रूस, भारत, ईरान, कजाखस्तान, किर्गिस्तान, पाकिस्तान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान, बेलारूस और चीन के 10 सदस्यीय समूह का अध्यक्ष है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी शिखर सम्मेलन में भाग ले रहे हैं। यहां पहुंचे नेताओं में पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ, नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू शामिल हैं। नेताओं का शिखर सम्मेलन सोमवार को होगा।
चीन के सहायक विदेश मंत्री लियू बिन ने कहा था कि एससीओ का अब तक का सबसे बड़ा शिखर सम्मेलन इस वर्ष चीन में राष्ट्राध्यक्षों और घरेलू कूटनीति के सबसे अहम आयोजनों में से एक होगा। उन्होंने कहा था कि शिखर सम्मेलन में अपने मुख्य भाषण में शी चिनफिंग ‘‘शंघाई भावना’’ को आगे बढ़ाने और लोगों की अपेक्षाओं पर खरा उतरने के लिए एससीओ के लिए चीन के नए दृष्टिकोण एवं प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
Trump Tariffs: कोर्ट ने कहा—दुनिया के हर देश पर टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं
30 Aug, 2025 11:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अमेरिका की एक संघीय अपील अदालत ने शुक्रवार (29 अगस्त, 2025) को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से दुनिया के कई देशों पर लगाए गए टैरिफ पर अपना फैसला सुनाया. कोर्ट के इस फैसले से अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के टैरिफ के फैसले को बड़ा झटका लगा है. अमेरिकी अपील कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए ट्रंप के वैश्विक टैरिफ को अवैध करार दिया. कोर्ट ने कहा कि ट्रंप को हर देश पर व्यापक रूप से टैरिफ लगाने का कोई कानूनी अधिकार हासिल नहीं था. हालांकि, कोर्ट ने इन टैरिफ को फिलहाल लागू रहने दिया है, ताकि ट्रंप को सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का समय मिल सके.
अमेरिका के संघीय सर्किट के अपील कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि डोनाल्ड ट्रंप ने आपातकालीन शक्तियों के कानून के तहत अपने अधिकारों को दायरे का पार कर दिया था. यह फैसला ट्रंप के लिए एक बड़ी कानूनी हार है, जो न्यूयॉर्क के एक स्पेशल फेडरल ट्रेड कोर्ट के मई महीने में दिए फैसले को पुष्टि करता है.
कोर्ट ने किन देशों पर लगाए टैरिफ पर सुनाया फैसला?
अमेरिकी अदालत ने उन टैरिफ को फैसला सुनाया है, जो डोनाल्ड ट्रंप ने अप्रैल महीने में सभी साझेदार देशों पर लगाए थे. इसमें उन टैरिफ को शामिल किया गया जो अमेरिकी राष्ट्रपति ने पहले चीन, मैक्सिको और कनाडा पर लागू किए थे. ट्रंप ने 2 अप्रैल को आजादी के दिन घोषित करते हुए दुनिया के कई देशों पर रेसीप्रोकल टैरिफ लागू किया था. ट्रंप ने तर्क दिया था कि कई साझेदार देशों से अमेरिका को व्यापारिक घाटा हो रहा है. ट्रंप ने 1977 के इंटरनेशनल इमरमेंसी इकोनॉमिक पॉवर्स एक्ट का हवाला देते हुए लागू किए गए इन टैरिफों को सही ठहराया.
कोर्ट ने 7-4 के बहुमत से सुनाया फैसला
संघीय अपील कोर्ट ने शुक्रवार (29 अगस्त) को 7-4 के बहुमत से फैसला सुनाया है. कोर्ट ने फैसले में लिखा कि यह कहीं से संभव नहीं लगता कि कांग्रेस की मनसा राष्ट्रपति को असीमित अधिकार देने का था, जिससे वह दुनिया के किसी भी देश पर मनमाने ढ़ंग से टैरिफ लगा सकें.
ट्रंप प्रशासन कोर्ट में क्या दी दलीलें?
सरकार ने कोर्ट में दलील दी कि अगर ट्रंप के टैरिफ को रद्द किया जाता है, तो उसे इंपोर्ट टैक्स से वसूल किए गए कुछ पैसों को वापस करना पड़ सकता है, इससे अमेरिका के खजाने को एक बड़ा आर्थिक झटका लग सकता है और अगर ऐसा होता है तो आगे चलकर यह ट्रंप की टैरिफ लगाने की कोशिशों को भी कमजोर कर सकता है.
हरियाणा सरकार ने केंद्र को लिखा पत्र, कहा- “BBMB बांध से छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा घटाई जाए”
30 Aug, 2025 06:55 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
चंडीगढ़ (हरियाणा)। बाढ़ जैसे हालात के बीच पंजाब और हरियाणा में पानी को लेकर फिर से विवाद शुरू हो गया है। हरियाणा ने बीबीएमबी को पत्र लिखकर कहा है कि हरियाणा की मांग के अनुरूप बोर्ड की तरफ से कम पानी छोड़ा जाना चाहिए। वहीं आम आदमी पार्टी पंजाब का आरोप है कि अब संकट की स्थिति में पंजाब को अकेला छोड़ा जा रहा है, जबकि पहले अधिक पानी के लिए दबाव बनाया जा रहा था।
हरियाणा सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग ने पत्र में कहा कि हरियाणा के लिए पानी का डिस्चार्ज 8,894 क्यूसेक दर्ज किया गया, जबकि उन्होंने 7,900 क्यूसेक पानी देने की ही मांग की थी। विभाग ने बताया कि 26 अगस्त को 7,900 क्यूसेक तक पानी की मांग घटा दी गई थी, लेकिन पानी का डिस्चार्ज कम नहीं हुआ। लगातार हो रही भारी बारिश के कारण पानी की मांग काफी घट गई है। इसी को ध्यान में रखते हुए अब 6,250 क्यूसेक पानी लेने की ही उन्होंने सहमति दी है।
विभाग ने चेतावनी दी है कि बाढ़ जैसी स्थिति को देखते हुए नहर प्रणाली और आसपास की आबादी की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है। इसलिए संबंधित अधिकारियों को तुरंत प्रभाव से कम पानी छोड़ना चाहिए। आम आदमी पार्टी पंजाब के प्रवक्ता नील गर्ग ने कहा कि जब पंजाब की धरती प्यासी होती है तो उसका हक छीना जाता है। अब जब चारों तरफ पानी ही पानी है तो पंजाब को अकेला छोड़ दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि पंजाब ने हरियाणा से गुहार लगाई कि भाखड़ा का पानी ज्यादा ले लो, ताकि पंजाब को बाढ़ से बचाया जा सके, लेकिन हरियाणा पानी का कोटा कम करने की मांग कर रहा है। उन्होंने सवाल किया कि क्या पंजाब सिर्फ नुकसान झेलने के लिए है। हरियाणा को जवाब देना चाहिए कि क्या मदद की पेशकश सिर्फ सियासी जुमला था।
यूक्रेन में हाहाकार, ड्रोन और मिसाइल हमले में 1 की मौत, 24 घायल
30 Aug, 2025 04:30 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। रुस ने शुक्रवार रात से लेकर शनिवार सुबह तक यूक्रेन पर बड़े पैमाने पर हमला किया है। इस हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई और 24 लोग घायल हो गए। घायलों में तीन बच्चे भी शामिल हैं।
अधिकारियों के अनुसार, मिसाइल और ड्रोन हमलों से कई शहरों की इमारतें और जरूरी ढांचे बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने बताया कि यह हमला 14 अलग-अलग जगहों पर हुआ।
कितने ड्रोन और मिसाइलों से हुआ हमला?
उन्होंने बताया कि हमले के दौरान करीब 540 ड्रोन और 45 मिसाइलें दागी गई। जापोरिज्झिया शहर में पांच मंजिला इमारत पर सीधा हमला हुआ, जिससे बिजली कट गई और 25 हजार लोग अंधेरे में रहने को मजबूर हो गए।
स्थानीय गवर्नर इवान फेदोरोव ने बताया कि धमाकों से इलाके में कई जगह आग लग गई और बच्चे समेत दर्जनों लोग घायल हो गए। जेलेंस्की ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा, एक बार फिर आम लोगों के घरों को निशाना बनाया गया है। बच्चे समेत कई लोग घायल हो गए। कई जगहों पर आपात सेवाएं राहत और बचाव कार्य में जुटी है।
किन-किन चीजों को हुआ ज्यादा नुकसान?
रूसी हमले में सबसे ज्यादा नुकसान घरों, दुकानों और नागरिक ढांचों को हुआ है। वोलिन, डोनबास, खार्किव, कीव समेत 14 क्षेत्रों में हमले की खबरें आई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि रूस ने कूटनीतिक बातचीत के लिए तय समय का इस्तेमाल हमले की तैयारी में किया।
जेलेंस्की ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि रूस के खिलाफ केवल बयानों से काम नहीं चलेगा, "बल्कि बैंकिंग और ऊर्जा क्षेत्र पर कड़े प्रतिबंध लगाने होंगे। उन्होंने कहा, अगर रूस को रोका नहीं गया तो वह लगातार ऐसे ही हमले करता रहेगा।"
शांति वार्ता ठप
यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब शांति वार्ता की कोशिशें ठप पड़ी हुई हैं। इसी महीने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और यूक्रेन के नेताओं से अलग-अलग मुलाकात की थी, लेकिन मॉस्को ने पुतिन और जेलेंस्की की सीधी बैठक की संभावना को नकार दिया है।
यूक्रेन ने रूस के तेल रिफाइनरी को बनाया निशाना
इस बीच यूक्रेन ने रूस के दो तेल रिफाइनरी पर ड्रोन हमले किए। साउथ रूस के क्रास्नोदार और सामारा से सिजरान इलाके में धमाकों और आग की खबर आई। रूसी अधिकारियों के मुताबिक, क्रास्नोदार रिफाइनरी पर गिरे ड्रोन के मलबे से आग लगी।
इसके साथ ही, यूक्रेन की तरफ से सामारा क्षेत्र में सिजरान रिफाइनरी के पास भी हमले की कोशिश हुई, लेकिन वहां बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं हुई। रूस के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि उसने 11 यूक्रेनी ड्रोन मार गिराए।
स्काईवेस्ट एयरलाइन ने उड़ानों पर लगाया रोक, यात्रियों में पैदा हुई दिक्कत
30 Aug, 2025 03:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
नई दिल्ली। अमेरिकी एअरलाइन स्काई वेस्ट की सभी उड़ानों को कुछ समय के लिए रोक दिया गया है। खबर है कि तकनीकी खराबी के कारण ये फैसला लिया गया है। अमेरिका की सबसे बड़ी क्षेत्रीय एयरलाइन ने बताया कि शुक्रवार रात एक तकनीकी समस्या सामने आई थी।
एहतियात के तौर पर इस एअरलाइन की सभी उड़ानों को फिलहाल रोक दिया गया है। अमेरिकी संघीय विमानन प्रशासन के अनुसार, स्काईवेस्ट के अनुरोध पर 0149 GMT पर उड़ान रोकने की सलाह जारी की गई और 0210 GMT पर रद कर दी गई।
सामने आया एअरलाइन का बयान
बता दें कि इस संबंध में एअरलाइन की ओर से बयान भी जारी किया गया है। बयान में बताया गया कि स्काईवेस्ट में आज शाम एक संक्षिप्त तकनीकी समस्या आई, जिसे अब ठीक कर लिया गया है।
बयान में आगे कहा गया कि सभी प्रणालियों को बहाल कर दिया गया है और हम सामान्य परिचालन फिर से शुरू करने के लिए किसी भी देरी को कम करने के लिए काम कर रहे हैं।
बड़ी एअरलाइन कंपनी है स्काई वेस्ट
गौरतलब है कि सेंट जॉर्ज, यूटा स्थित स्काईवेस्ट यूनाइटेड एअरलाइंस, डेल्टा एअरलाइंस, अमेरिकन एअरलाइंस और अलास्का एअरलाइंस के लिए उड़ानें संचालित करती है।
भारत की विदेश नीति पर AJC का भरोसा, बोली- अमेरिका को समझदारी दिखानी चाहिए
30 Aug, 2025 02:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रूस -यूक्रेन युद्ध को मोदी का युद्ध बताने पर अमेरिकी-यहूदी समुदाय की प्रतिक्रिया सामने आई है। अमेरिकी-यहूदी कमेटी (AJC) ने कहा कि हम अमेरिकी अधिकारियों द्वारा भारत पर किए जा रहे हमलों से हैरान और बेहद परेशान है. ट्रंप के ट्रेड एडवाइजर पीटर नवारो ने रूस-यूक्रेन जंग को मोदी का युद्ध कहा था. AJC ने इसे घिनौना आरोप बताया है.
कमेटी ने कहा कि भारत कच्चे तेल के लिए रूसी तेल पर निर्भर है, लेकिन भारत पुतिन के युद्ध अपराधों के लिए जिम्मेदार नहीं है. भारत एक सहयोगी लोकतंत्र है और अमेरिका का महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार है. भारत महाशक्तियों की प्रतिस्पर्धा में अहम भूमिका निभाता है. इस अहम रिश्ते को फिर से मजबूत करने का समय आ गया है.
अमेरिकी -कमेटी एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है, जिसका उद्देश्य यहूदियों और अन्य लोगों के धार्मिक और नागरिक अधिकारों को बढ़ावा देना है. कमेटी के अमेरिका में 25 क्षेत्रीय कार्यालय, 13 विदेशी कार्यालय हैं.
भारत पर मुनाफा कमाने का आरोप
ट्रंप के एडवाजर नवारो ने आरोप लगाया कि यूक्रेन जंग से पहले भारत 1% से भी कम रूसी तेल इंपोर्ट करता था, जो कि अब 30% से भी ज्यादा यानी 15 लाख बैरल प्रतिदिन है. इस इजाफे की वजह घरेलू मांग नहीं है. इससे भारी मुनाफा कमाया जा रहा है.
हालांकि भारत का कहना है कि रूस से तेल खरीदने का उद्देश्य बाजारों को शांत करना है. हम कीमतों को स्थिर रखने के लिए रूस से तेल खरीद रहे हैं. यह राष्ट्रीय और वैश्विक दोनों के हित में है. इसी तेल खरीद को लेकर भारत पर अमेरिका ने 25% पेनाल्टी टैरिफ लगाई है.
कैसे हो सकता है भारत का टैरिफ कम?
भारत पर जुलाई महीने में अमेरिका ने 25% टैरिफ लगाया गया था. इस दौरान 80 से ज्यादा देशों पर टैरिफ लगाए गए. बाद में ट्रंप ने इसमें 25% पेनाल्टी टैरिफ लगाने का भी ऐलान कर दिया.
भारत पर लगे टैरिफ को कम करने के बारे में जब व्हाइट हाउस सलाहकार से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि इसको कम करना बेहद आसान है. अगर भारत रूसी तेल खरीदना बंद कर दे तो उसे कल ही 25% की छूट मिल सकती है.
टैरिफ विवाद में ट्रंप को झटका, कोर्ट ने फैसले की आलोचना की
30 Aug, 2025 01:00 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से लगाए गए टैरिफ ने ट्रंप की ही मुसीबतें बढ़ा दी हैं. दूसरे देशों पर टैरिफ लगाते हुए ट्रंप ने दावा किया था कि उनके पास कांग्रेस को दरकिनार करके विदेश से आने वाले सामानों पर भारी टैरिफ लगाने का अधिकार है. ट्रंप के इस दावे के बीच एक फेडरल अपील कोर्ट ने रोड़ा अटका दिया है. अदालत का कहना है कि संविधान ने टैरिफ लगाने का अधिकार कांग्रेस को दिया है, लेकिन नेताओं ने धीरे-धीरे राष्ट्रपति को टैरिफ को लेकर ज्यादा अधिकार दे दिए हैं. कोर्ट ने कहा और ट्रंप ने इसका भरपूर फायदा उठाया है.
अमेरिका की संघीय सर्किट अपील कोर्ट ने शुक्रवार को फैसला सुनाते हुए कहा कि ट्रंप ने राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा करके दुनिया के लगभग हर देश पर अधिक टैरिफ लगाने को सही ठहराने की सारी हदें पार कर दी हैं. कोर्ट का यह फैसला न्यूयॉर्क की विशेष फेडरल ट्रेड कोर्ट के मई के फैसले को काफी हद तक सही ठहराता है.
कोर्ट का फैसला ट्रंप के लिए एक बड़ा झटका
कोर्ट का यह फैसला ट्रंप के लिए एक बड़ा झटका था. इस फैसले से ट्रंप की अनिश्चित व्यापार नीतियों ने वित्तीय बाजारों को हिलाकर रख दिया है, अनिश्चितता के कारण कारोबार ठप्प हो गया है, कीमतें बढ़ने लगीं और आर्थिक वृद्धि धीमी होने की चिंताएं पैदा हो गई हैं. बता दें कि कोर्ट का यह निर्णय ट्रंप की तरफ से अप्रैल में लगभग सभी अमेरिकी व्यापारिक साझेदारों पर लगाए गए टैरिफ को लेकर था.
ट्रंप प्रशासन का तर्क
ट्रंप सरकार ने तर्क देते हुए कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति रह चुके रिचर्ड निक्सन को भी आर्थिक संकट के दौरान आपातकाल के आधार पर टैरिफ लगाने की अनुमति मिली थी. इस बात का जवाब देते हुए कोर्ट ने कहा कि निक्सन ने यह कदम उस समय उठाया था जब उन्होंने डॉलर को सोने से जोड़ने वाली नीति को समाप्त किया था. न्यूयॉर्क स्थित अमेरिकी अंतर्राष्ट्रीय व्यापार न्यायालय ने अपने फैसले में सुनाया था कि ट्रंप के लिबरेशन डे टैरिफ राष्ट्रपति को आपातकालीन शक्ति के तहत दिए गए अधिकारों से बाहर हैं.
अमेरिका पर आ सकता है वित्तीय संकट
कोर्ट के शुक्रवार के फैसले में कुछ जजों के बीच असहमति भी दिखी. कोर्ट ने कहा कि 1977 का कानून आपातकालीन कदम उठाने की अनुमति नहीं देता है. सरकार की तरफ से दिए गए तर्क में कहा गया कि अगर ट्रंप की तरफ से लगाए गए टैरिफ हटा दिए जाते हैं, तो उसे उन सभी टैरिफ को वापस करना होगा जो वह अब तक कई देशों से ले चुके हैं. सरकार ने बताया कि जुलाई का कुल राजस्व 159 अरब डॉलर था, जो पिछले साल के मुकाबले दो गुना अधिक था. साथ ही न्याय विभाग ने कानूनी दलील में चेतावनी देते हुए कहा कि टैरिफ हटाने से अमेरिका में वित्तीय संकट आ सकता है और इससे ट्रंप को आगे चलकर टैरिफ लगाने में भी कठिनाई हो सकती है.
ट्रंप ने सभी टैरिफ को सही बताया
ट्रंप ने लंबे समय से चल रहे अमेरिका के व्यापार घाटे को राष्ट्रीय आपातकाल बताया. ट्रंप ने कांग्रेस की सहमति लिए बिना दावा किया कि उन्होंने यह टैरिफ 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट का इस्तेमाल करके लगाया है, जो जोकि देश के हित में है. कोर्ट ने कहा कि अमेरिकी संविधान कांग्रेस को टैरिफ सहित कर निर्धारित करने का अधिकार देता है, लेकिन सांसदों ने धीरे-धीरे राष्ट्रपतियों को टैरिफ को लेकर ज्यादा अधिकार दे दिए हैं. कोर्ट ने कहा, और ट्रंप ने इसका भरपूर फायदा उठाया है.
कई देशों पर लगाए भारी कर
ट्रंप ने टैरिफ की घोषणा करने के बाद इसे 90 दिनों के लिए स्थगित कर दिया ताकि देशों को अमेरिका के साथ व्यापार समझौते पर बातचीत करने का समय मिल सके. कुछ देशों ने ट्रंप का यह फैसला मान लिया, जिनमें यूके, जापान और यूरोपीय संघ शामिल हैं. लेकिन कई देश ऐसे भी थे जिन्होंने जिसने ट्रंप के आगे अपने घुटने नहीं टेके. उन देशों को इस महीने की शुरुआत में ट्रंप ने अतिरिक्त टैरिफ लगाकर एक बड़ा झटका दिया, जिसमें लाओस (40%), भारत (50%), और अल्जीरिया (30%) हैं.
रूस में 7 साल के बच्चों को सिखाई जा रही ड्रोन वॉरफेयर की ट्रेनिंग
30 Aug, 2025 11:30 AM IST | GRAMINBHARATTV.IN
रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध लंबे समय से चल रहा है. इसी बीच रिपोर्ट्स के अनुसार, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अब सात साल के बच्चों को ड्रोन युद्ध में घसीटने की कोशिश कर रहे हैं. यूक्रेन की राजधानी कीव में गुरुवार को एक बार फिर से ड्रोन हमला हुआ. जिसमें 4 बच्चों समेत 23 लोगों की मौत हो गई. हालांकि फिलहाल यूक्रेन में बच्चे ड्रोन उड़ाना शुरू नहीं कर रहे हैं, लेकिन अगले साल से रूस के स्कूलों में ड्रोन उड़ाने की शिक्षा रेगुलर सिलेबस का हिस्सा बनने जा रही है. नौवीं क्लास तक छात्रों को यूक्रेनी शहरों पर हमलों में इस्तेमाल किए जाने वाले लड़ाकू ड्रोन असेंबल करना भी सिखाया जाएगा.
रिपोर्ट के अनुसार, सात साल के बच्चे सीधे तौर पर रूस-यूक्रेन युद्ध में हिस्सा नहीं ले रहे हैं, लेकिन फिर भी उन्हें भविष्य में ड्रोन पायलट बनने के लिए स्कूलों में ट्रेनिंग दी जाएगी. नौवीं क्लास से इन्हें अलाबुगा पॉलिटेक्निक कॉलेज जैसे संस्थानों में सक्रिय रूप से भर्ती किया जा रहा है, यहां पर उन्हें मानव रहित हवाई वाहन (यूएवी) की ट्रेनिंग दी जा रही है. यूएवी का इस्तेमाल यूक्रेनी इलाकों पर हमले के लिए किया जाता है.
रूस में बच्चों को ड्रोन ट्रेनिंग
अलाबुगा कॉलेज की स्थित बहुत खराब है. यह रूस की राजधानी मॉस्को से 600 मील (965.61 किमी) पश्चिम में स्थित है. इस जगह को बच्चों के माता पिता नरक बतातें हैं. यहां बच्चों से मशीन के पुर्जों जैसा व्यवहार किया जाता है. बच्चों के उत्पीड़न की शिकायते भी सामने आईं हैं. इस कॉलेज से जुड़ने के बाद स्वेर्दलोव्स्क क्षेत्र के 17 साल के डेनिस नाम के एक किशोर ने आत्महत्या तक कर ली. ऐसी भयानक स्थिति के बाद भी कई किशोर इस कॉलेज में आते रहते हैं. प्रचार के जरिए इन सभी पर देशभक्ति का रंग चढ़ जाता है. यहां वेतन काफी ज्यादा है. रूसी मानको के हिसाब से वेतन 700 डॉलर हर महीने से भी ज्यादा है.
ड्रोन युद्ध में बच्चों की भागीदारी
एक हैरान करने वाली बात तो तब सामने आई जब एक 13 साल के बच्चे ने ये कहा कि ड्रोन बनाने पर बहुत खुशी होगी. साथ ही उसने यह भी कहा कि इससे लोग मरे लेकिन ड्रोन न मरे. पुतिन ने इसके लिए प्रवेश की अवधि को 10 साल से कम करके 7 साल कर दिया है. उन्होंने कहा है कि बच्चों को ड्रोन उड़ाना, असेंबल करना और डिजाइन करना सीखना चाहिए. यह उनके लिए जरूरी भी है और बिजी रहने का एक प्रभावी तरीका भी है.
हरियाणा में अनोखा वाकया: दुकानदार को काटने के बाद अचानक मौत का शिकार हुआ कुत्ता, ग्रामीणों में तरह-तरह की चर्चाएं
29 Aug, 2025 05:37 PM IST | GRAMINBHARATTV.IN
पानीपत: हरियाणा के पानीपत जिले में ऐसा मामला सामने आया है, जिसे सुनकर हर कोई हैरान है। दरअसल शहर के बाजार में एक दुकानदार पर कुत्ते ने हमला कर दिया। कुत्ते ने दुकानदार के पैर में दांत लगा दिए। दुकानदर को काटने के बाद अचानक कुत्ते की मौत हो गई। कुत्ते की मौत होगई से सभी लोग हैरानी में पड़ गए। सभी के मन में एक ही सवाल था कि कुत्ते की मौत कैसे हो गई। इस बीच दुकानदार अपना इलाज और जांच करवाने के लिए शहर के सिविल अस्पताल में पहुंचा।
कैसे हुई कुत्ते की मौत
दुकानदार ललित बजाज ने बताया कि वो होलसेल का काम करता है। उसकी महावीर बाजार में प्रेम मंदिर के पास किराना होलसेल की दुकान है। उन्होंने बताया कि जैसे ही मैं अपनी दुकान के बाहर से बाइक पर जा रहा था कि दो कुत्ते आपस में लड़ रहे थे। मैने उन्हें हटाने का प्रयास किया, क्योंकि ये कुत्ते दुकान पर आने वाले ग्राहकों को काटने का प्रयास करते है। इस दौरान एक कुत्ते ने मुझे काट लिया। मुझ काटने के कुछ समय के बाद ही उस कुत्ते की मौत हो गई। उन्होंने बताया कि कुत्ते की मौत कैसे हुई, इसके बारे में मुझे जानकारी नहीं है। मुझे भी आसपास के दुकानदारों ने जानकारी दी कि तुझे काटने के बाद कुत्ते की हालत खराब हो गई और उसी मौत हो गई है।
दुकानदार इलाज करवाने पहुंचा अस्पताल
दुकानदार ने बताया कि इस बात से मुझे टेंशन हो गई। मैं हैरान था कि मुझे काटने के बाद अचानक कुत्ता कैसे मर गया। इसिलए मैं अपना इलाज करवाने के लिए सिविल अस्पताल पहुंचा, जहां डॉक्टरों ने मुझे इंजेक्शन लगा दिया है। वहीं जन सेवा दल के पदाधिकारी चमन गुलाटी ने बताया कि आज प्रदेश के हर शहर में आवारा कुत्तों की संख्या बेहद अधिक हो गई है और सरकारी अस्पतालों में रोजाना कुत्तों द्वारा लोगों को काटने के ऐसे बहुत से केस आ रहे है। परंतु ये केस हमने भी पहली बार सुना है कि युवक को काटने पर कुत्ते की मौत हो गई। युवक को डॉक्टरों द्वारा हिमोग्लोबिन का इंजेक्शन लगा दिया गया है।
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